August 2022

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नींद में ससुर ने मेरी चूत का काम तमाम किया

नींद में ससुर ने मेरी चूत का काम तमाम किया


हैल्लो दोस्तों, मैं नीलम आज अपनी जिंदगी की एक मस्त चुदाई की कहानी आप सबके लिए लेकर आई हूँ ये कहानी मेरे और मेरे ससुर जी के बीच हुई चुदाई की दास्तान है तो चलिए दोस्तों मैं अपनी कहानी को शुरू करती हूँ।


मैं नीलम जयपुर की रहने वाली हूँ मेरी शादी राहुल से 7 महीने पहले हुई थी हमारे साथ उनके पापा यानी मेरे ससुर जी रहते है मेरी सासू माँ की डेट मेरी शादी से पहले ही हो गई थी मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हूँ और वो भी मुझे बहुत प्यार करते है वो मुझे खूब चोदते है और मुझे उनसे चुदाई करने में बड़ा मस्त मज़ा आता है

वो मुझे सुबह शाम दिन रात जब मर्ज़ी चाहे चोद देते है मैं भी उनसे काफ़ी मज़े में चुदती हूँ। दोस्तों अब मैं आपको अपने बारे में बता देती हूँ मेरी उम्र 26 साल है और मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 34-28-36 है। और मेरी चूचियाँ मस्त गोल, सुडौल और सख्त है, गोरे रंग की चूचियों पर गहरे भूरे रंग की डोडियाँ बहुत सुंदर लगती है।


मेरा जिस्म बिल्कुल किसी कारीगर की तराशी हुई संगमरमर की मूर्ति की तरह है, लोग मुझे इस डर से नहीं छूते कि मेरे शरीर पर कोई दाग ना लग जाए। मेरे पड़ोसी मुझे देखकर अपने लंड को मसलने लग जाते है जब वो मेरे सामने ऐसा करते है तब मुझे बहुत मज़ा आता है। जबसे मेरी शादी हुई है तबसे मेरे पति मुझे रोज जमकर चोदते है मुझे अब बिना चुदाई के नींद नहीं आती है।


तभी मेरे पति को पूरे एक महीने के लिए कही बाहर ऑफीस के काम से जाना पड़ गया मैं चुदाई के लिए पीछे से ना तड़पू इसलिए मेरे पति ने मुझे ब्लू मूवी पेन ड्राइव में डालकर दे दी। उसके बाद वो चले गये उनके जाते ही मेरी चूत में आग लगनी शुरू हो गई मैं रात को ब्लू मूवी टीवी पर लगाकर देखती और अपनी चूत में उंगलियाँ करके अपनी चूत का पानी निकालती अब मेरा ये रोज़ का काम हो गया था एक रात मैं बेड पर पूरी नंगी होकर कमरे में पूरा अंधेरा करके सामने टीवी पर ब्लू मूवी लगाकर अपनी चूत में उंगलियाँ कर रही थी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था की तभी मुझे लगा की विंडो में से कोई मुझे देख रहा है मैं पूरी तरह से डर गई और मैंने अपना टीवी बंद किया और आराम से मैं बेड पर लेट गई मैं बहुत डर रही थी की मुझे आज मेरे ससुर जी ने ये सब करते हुए देख लिया है मैं पूरी रात डर के मारे सो नहीं पाई


मैं बस ये ही सोच रही थी की ये मेरे साथ क्या हो गया है पापा जी मेरे बारे में क्या क्या सोचते होंगे। आख़िर सुबह हुई और मैं उठी और तभी पापा जी ने मुझे चाय के लिए कहा, मैं जल्दी से किचन में गई और चाय बनाने लग गई मुझे उनके सामने जाने में भी काफ़ी डर लग रहा था मैं बहुत हिम्मत करके उनके पास गई और जैसे ही मैं उन्हें चाय देने के लिए नीचे झुकी तो मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया और मेरे 34 के बूब्स पापा जी के सामने आ गये।


पापा जी की नज़रें मेरे ब्लाउज पर थी और मेरी नज़र उनके लंड पर थी उनका लंड खड़ा हो चुका था और तभी वो बोले बहू ज़रा ध्यान से काम किया करो जब वो मुझे ये बात कह रहे थे तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी मैं समझ गई की वो मुझे चोदना चाहते है मैं जल्दी से किचन में आ गई सच कहूँ तो पापा जी का खड़ा लंड देखकर अब मेरी चूत में कुछ कुछ होने लग गया मेरा मन अब चुदाई करवाने का हो रहा था।


मेरी चूत में लंड लेने की आग सी लग रही थी तभी मैंने सोचा जो होगा देखा जाएगा आज तो मैं अपने ससुर जी से चुदकर ही मानूँगी फिर क्या था मेरा शेतानी दिमाग़ चलने लग गया, तभी मेरे दिमाग़ में एक आइडिया आया मैंने झट से एक स्टूल उठाया और उसके ऊपर चढ़कर पापा को स्टूल पकड़ने के लिए बुला लिया और मैं ऊपर से कुछ सामान उतारने लगी जैसे वो नीचे खड़े होकर स्टूल पकड़ रहे थे उस समय उनकी आँखो के सामने मेरी चिकनी 28 की कमर थी तभी मैं जानबुझकर उनके ऊपर गिर गई और पैर और कमर में चोट लगने का बहाना करने लग गई।


पापा जी मुझे उठाकर बेड रूम में ले गये और फिर मेरे कहने पर वो मेरी कमर पर मूव लगाने लग गये। पापा जी भी कम नहीं थे वो मेरे जिस्म के पूरे मज़े ले रहे थे और फिर मुझे धीरे धीरे गरम भी कर रहे थे मेरे मुहँ से आहह. ओईई.. की गरम गरम सिसकारियाँ निकलने लग गई तभी पापा जी बोले बहुत मज़ा आ रहा है ना? मैं बोली पापा जी मज़ा तो आ रहा है पर यह सब ठीक नहीं है ये सुनते ही वो मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों से मसलने लग गये अब मैं और भी गरम हो रही थी।


मैं अपने होंठो को अपने दांतों से चबा रही थी और अपनी दोनों आँखें बंद करके मज़े ले रही थी तभी पापा जी ने मेरे होंठो को बड़े प्यार से अपने होंठो में ले लिया और मेरे होंठो को अपने होंठो में लेकर धीरे धीरे चूसने लग गये मैं भी अब उनके होंठो को चूसने लग गई और उनके मुहँ में जीभ डालने लग गई करीब 10 मिनट तक हम दोनों ने जमकर किस किया फिर उन्होंने मेरे होंठो को छोड़ दिया और मेरा ब्लाउज और मेरी साड़ी को उतार दिया।


अब मैं उनके सामने सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में थी मेरे बूब्स देखकर वो पागल हो गये और एक कुत्ते की तरह मेरे दोनों बूब्स को चूसने और काटने लग गये उन्होंने मेरी ब्रा फाड़ दी और मेरे निप्पल को ज़ोर ज़ोर से चूसने लग गये। मैं बोली बस करो पापा जी कितना चूसोगे मेरे बूब्स को, तो पापा जी बोले बहन की लौड़ी साली जिस रात से तुझे नंगा देखा है उस रात से ही मैं तुझे सोचकर मूठ मार रहा हूँ। आज तो तुझे अपनी रंडी बनाकर ही दम लूँगा मैं, ये कहते ही पापा जी ने मेरी पेंटी में अपना हाथ डाल दिया और मेरी चूत को ज़ोर ज़ोर से मसलने लग गये मैं अब पूरी तरह से पागल हो रही थी।


मेरी चूत पानी पानी हो रही थी फिर पापा जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे बूब्स के ऊपर बैठकर उन्होंने अपना लंड मेरे मुहँ में डाल दिया। मेरे पति का लंड पापा जी के लंड से तोड़ा छोटा था पर पापा जी का लंड मोटा था मैं बड़े मज़े से अपनी जीभ से पापा जी का लंड चाट रही थी फिर पापा जी ने मेरा सिर पकड़कर अपना लंड सीधा मेरे मुहँ में घुसा दिया और वो मेरे मुहँ को पकड़कर अपने लंड से चोदने लग गये मैं उनका लंड अपने गले के अंदर तक महसूस कर रही थी वो मेरा मुहँ चोदने में लगे हुए थे। कुछ देर बाद मुझे सांस लेना मुश्किल हो रहा था इसलिए उन्होंने मुझ पर दया दिखाई और मेरे मुहँ में से अपना लंड बाहर निकालकर मुझे सांस लेने का मौका दिया।


मैंने आज पहली बार अपने गले की थूक देखी थी जो पापा जी के लंड पर लगी हुई थी पापा जी बोले वाह बहू मैं ये चाहता था की मेरा लंड पूरी तरह से तेरी थूक से भीगा हो आज तूने वो ही कर दिया है अब देख ये थूक से भीगा हुआ लंड कैसे एक ही झटके में तेरी चूत में जाता है। फिर पापा नीचे आए और मेरी चूत पर अपना लंड सेट करके एक ही धक्के में आधा डाल दिया मुझे दर्द हुआ जिस वजह से मैं ज़ोर से चिल्लाई और उसके बाद उन्होंने एक और धक्का दिया अब उनका पूरा लंड मेरी चूत के अंदर था मैं दर्द से चिल्लाती हुई बोली बस करो पापा जी इतना दर्द तो मुझे आपका बेटा भी नहीं देता, प्लीज़ आराम से मारो मेरी चूत प्लीज़।


पापा जी बोले तेरी माँ की चूत भी मैंने ऐसे ही फाड़ी थी आज तेरी भी फाड़ दी मैंने, अब देख मेरा लंड कैसे तुझे तेरी माँ क्या तेरी नानी भी तुझे याद दिलाता है। उसके बाद तो पापा जी एक ट्रेन की तरह तक धक्के मारने लग गये मेरी चूत बुरी तरह से दर्द हो रही थी मेरी चूत ने अपना सारा पानी निकाल दिया था करीब पापा जी ने मुझे 20 मिनट तक रंडी समझकर चोदा और उसके बाद पापा जी ने अपने लंड का सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया। और उनके निकले हुए गरम गरम पानी को मैं अपनी चूत के अंदर महसूस कर रही थी।


उस दिन पापा जी ने मुझे 3 बार चोदा था और जब तक मेरे पति घर नहीं आये तब तक उन्होंने मुझे पूरा नंगा ही रखा और मेरी गांड और चूत चोद चोदकर उन्होंने पूरी सूजा दी। अब जब कभी भी मेरे पति कही बाहर चले जाते है मैं फिर से अपने पापा जी की नंगी रंडी बन जाती हूँ।

सुहागरात वाले दिन मुझे जबरदस्ती चोदा

सुहागरात वाले दिन मुझे जबरदस्ती चोदा


नमस्कार दोंस्तों, मैं प्रतिभा आपको अपनी दर्दभरी कहानी सुना रही हूँ। मैं फरुखाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी शादी कुछ साल पहले उन्नाव निवासी भूपेंद्र से कर दी गयी। मेरे पापा ने मेरी शादी में 20 लाख नकद दिया। जो जो मेरे पति, सास ससुर ने डिमांड की उनको दिया। मैं केवल 21 साल की थी जब मेरी शादी हुई। असल में मैं चार बहने हूँ। मेरी 3 बहने और थी। इसलिये पापा ने सोचा की एक एक लड़की को निपटाते चले। इसलिये फ्रेंड्स पापा ने 30 लाख का भारी भरकम कर्ज लेकर मेरी शादी भूपेंद्र से कर दी।



जिस तरह हर लड़की अपनी शादी के हजारों सपने देखती है, वैसे ही सुनहरे सपने मैंने बुने थे। क्या क्या सपने मैंने देखे थे। पति ऐसे प्यार करेगा, वैसे करेगा। खैर मेरी शादी हो गयी। सुहागरात में मैंने बड़ा खूबसूरत सा लाल रंग का लहंगा पहना था। मैं घूंघट करके बैठी थी। मन में हजारों सपने थे। मेरी सहेलिया मुझको बताती थी की उनके पति ने उनको ये सुहागरात के दिन ये दिया वो दिया। कोई कहती थी मुझको सोने का हार गिफ्ट किया कोई सखी कहती थी मुझको हीरे की अंगूठी थी। तो दोंस्तों, मैं भी अपने होने वाले पति से हजारों उम्मीद की थी।

मेरा चेहरा शर्म से लाल था। आज पति देव मेरे साथ क्या क्या करेंगे, मुझको कैसे कैसे लेंगे, ये सब सोचकर मैं लजा जाती थी। मैं अपनी सपनों की दुनिया में हसींन सपने बन रही थी की रात ने 12 बजा दिए। मेरे पति भूपेन्द्र की भाभीयों ने उनको मेरे कमरे में धक्का दे दिया। वो अंदर आ गए। मेरा दिल तो धक्क से हो गया। मारे लाज शर्म से मैं मरी जा रही थी। पति मेरे पास आकर बैठे। उनके मुँह से शराब का एक बहुत ही तेज भभका आया। मेरा मूड आफ हो गया।

आपने पी है?? मैंने एकाएक पूछ लिया। अब मैंने शर्माना छोड़ दिया। क्योंकि मेरा दिमाग खराब हो गया था। उन्होंने अपनी शेरवानी से रम की एक छोटी बोतल निकली और मेरे सामने एक घुट और लगाया।

ये क्या बदतमीजी है!! आपको हमारी सुहागरात में ऐसा नही करना चाहिए! मैंने कहा

अगले ही छड़ मेरे गाल पर भन्नाता एक झापड़ बड़ा। मेरा जबड़ा हिल गया।

मैंने पी है और उसके लिए तू…और सिर्फ तू जिम्मेदार है! वो बोले। मैं कुछ समझ् नही पायी। मैं थोड़ा डर भी गयी थी। आज की रात का तो कबाड़ा हो गया। आज ही सुहागरात को मैं पिट गयी।

मैं?? मैंने डरते हुए पूछा। वो शराब के नशे में टल्ली थे। झूम रहे थे।

हाँ है तेरी वजह से। तेरी वजह से मैं अपनी गर्लफ्रेंड से शादी नही कर पाया। चुड़ैल तेरी वजह से!! जानती है मैं उससे कितना प्यार करता था। 10 साल से मेरा उससे ऑफर चल रहा था। पर तेरे बपने आकर सारि कहानी बिगाड़ दी। मेरे घर वालों को 20 लाख नकद दे दिया और मेरे बॉप ने जबर्दस्ती मुझे तेरे साथ शादी के खूटे में बाँध दिया। कामिनी! छिनाल! चुड़ैल! मैंने तुझको जितनी गालियाँ दू कम है! पति बोले।

बॉप रे!! ये सुनकर तो मेरी माँ चुद गयी। मेरी गाण्ड फट गई। मैं यहाँ कितने सपने देख रही थी पति ऐसा होगा। वैसा होगा। ये भोसड़ी का तो सबसे हटके निकल गया। 10 साल से हरामी अपनी माल से फसा है। पता नही कितने हजार बाद उसको चोद चूका होगा। इसका मतलब तो ये हुआ की मैं इसकी दोस्त नही दुश्मन हूँ। मेरी वजह से ये अपनी सामान से शादी नही कर पाया। तबतो ये मुझको बिलकुल भी प्यार नही करेगा। ऊपर से मेरी गांड़ मार देगा।

मैं सोच विचार कर रही थी की इतने में 2 3 झापड़ मुझको और पड़ गये। मैंने रोने लगी।

चुप!! चुप कुतिया!! खबर दार आवाज बाहर निकाली पति ने मेरा गला दोनों हाथों से दबा दिया

जैसा जैसा मैं कहता हूँ, करती जा। वरना तुझको मैं जान से मार दूँगा! वो बोला। मैं डर से थर थर काँपने लगी। अब मैं केवल आवाज दबा के सिसकियाँ ले सकती थी। पति का आदेश था कि रोने की आवाज बाहर ना जाए। दुनिया की नजर में वो भला आदमी बनना चाहता था। हाय री, मेरी तो किस्मत फुट गयी। मैंने कहा। क्या सपने देख रही थी और क्या निकला। दोंस्तों जी कर रहा था कि जहर खाके मर जाऊ।

चल कामिनी पैर दबा! मेरा पति बोला।

मैं तो उसके खूंखार रूप से अवगत हो ही चुकी थी। मेरे घर में माँ मम्मी ने यही सिखाया था कि भगवान के बाद पति ही देवता होता है। इसलिये मैं उसी शिक्षा पर चल रही थी। मैं अब उससे डरने भी लग गयी थी। इसलिए मैं चुप चाप उनके पैर दबाने लगी।

2 घण्टे हो गए। परिवार के सब लोग अब सो चुके थे। क्योंकि 2 रात से सब मेरी शादी में फंसे थे। अब 2 बज गए थे। 2 घण्टे तक पैर दबाते दबाते मैं जरा थक गयी थी। मैं झपकी लेने लगी। मुझको नींद आने लगी थी। तभी मुझको मुँह पर एक जोर की लात पड़ी। मेरे मुँह और कंधे पर लगी।

छिनाल! ये तेरा घर नही है। मायके में नही है तू! ससुराल में है! इसलिये जैसा मैं कहूंगा वैसा ही तू करेगी! पति बोला। मैंने रोने लगी।

चुप चुप! वरना अभी तेरा इससे गला दबा दूँगा! तेरी कहानी खत्म हो जाएगी और मैं अपनी माल से शादी कर लूंगा। पति बोला। मैं एक बार फिर से सिसकी लेने लगी। अब तो मैं ऐसे नर्क में फस गयी थी की खुलकर रोकर अपना दुख भी नहीं कम कर सकती थी। हाय राम फुट गयी मेरी किस्मत। मैंने खुद से कहा।

दोंस्तों, अब मैं फिरसे पति देव के पैर दबाने लगी। मेरे हाथों में दर्द हो रहा था। आधे घण्टे गुजर गए।

चल नँगी हो जा!! चोदूंगा! पति बोला। उसने 2 मोबाइल फोन के वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और 2 जगह दीवाल में लगा दिए।

ये क्या?? ये क्या कर रहे है आप?? मैंने सिसकी लेते हुए पूछा।

कुछ नही! बाद में देखूंगा! वो धीरे से बोला। बॉप रे! ये तो भारी कमीना निकल गया। कहीं मेरा वीडियो इंटरनेट पर ना डाल दे। मेरे दिल में बड़ा डर पैदा हो गया।

नही नही!! मैं वीडियो नही बनवा सकती मैंने कहा

बस फिर क्या था दोंस्तों। पति ने मेरे बाल कसके पकड़ लिए। मेरे सारे बाल खुल गए। मुझ पर लात जूतों की बौछार हो गयी। कितने मुक्के छप्पड़ पड़े की मैं नही जानती हूँ।

पति ने चमड़े की बेल्ट उठायी और मुझपर बेल्ट ही बेल्ट पढ़ने लगी। मेरी तो खाल उधड़ गयी दोंस्तों। है भगवान! ये दिन देखने से पहले मैं मर क्यों नही गयी। मौत इससे अच्छी होती।

सुन रंडी! तेरे बापने तेरी शादी मुझसे की है। तेरा हाथ मेरे हाथ में दिया है। इसलिए मेरा तुझपर पूरा हक है। तेरे बापको भी पता है कि तू यहाँ हर रात चुदेगी। तो अब ये बात साफ हो गयी की उसने तुझको मुझे चोदने के लिए ही दिया है। तो अब छिनाल अगर मैं तुझसे चूत मांग रहा हूँ तो तू नाटक मत करना! पति बोला।

मैं रोने लगी। मैं दबकर रो रही थी। पति मेरे एक एक कपड़े नोचने लगी। मैं नही नही कर रही थी। मेरे चीर हरण का वीडियो बनना सुरु हो गया। पहले मेरा लहंगा उतारा। फिर मेरा ब्लॉउज़ तो लगभग लगभग फाड़ दी दिया। पेटीकोट भी खीच दिया। मैं नँगी हो गयी। उधर मेरा सुहागरात का चुदाई का वीडियो 2 2 मोबाइल फोन्स पर बनने लगा। मैं रोने लगी।

तेरे बॉप ने तुझको मुझे चोदने को ही दिया है, फिर क्यों रोती है! पति फिरसे चीखकर बोला।

दोंस्तों, सायद वो दिन मेरी जीवन का सबसे काला दिन था। आज मैं कसके चुदूंगी और मेरा वीडियो भी बन जाएगा। पता नही ये शराबी कही वाइरल ना कर दे।

ये सोच सोचकर मेरा धुंआ निकला जा रहा था। अब मैं लाल ब्रा और पैंटी में थी। मैं चुदना जरूर चाहती थी पर इस तरह नही। मैं काम जरूर लगवाना चाहती थी पर प्यार से। इस तरह मार मारके नही। मैं कैमरे के सामने थी। खड़ी थी। कहीं भाग भी ना सकती थी। भागती तो फिर से पिट जाती। इतने में पति पीछे से आ गए और मुझको पकड़ लिया। मेरे बदन को खिलौना समझ खेलने लगे। वो मेरे बदन से जोक की तरह चिपट गया। मेरे गाल, गले पीठ पर हाथ फिराने लगा। मेरे मम्मो को हाथ में लेने लगा। शराब की बू से मेरा दम घुट रहा था।

पति मेरे जिस्म से खेल रहा था। वो मुझ जीती जागती लड़की को खिलौना समझ् के मेरे मम्मे मसल रहा था। मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी, क्योंकि वो मेरा पति था। मेरे बॉप ने मुझको चूदने ही तो यहाँ भेजा था। मेरा वीडियो लगातार बन रहा था। मैं सोच रही थी की अगर ये वाइरल हुआ तो सब चड्ढी बॉडी में देख लेंगे। अब पति ने मेरी लाल ब्रा के हक पीछे से खोल दिये। ब्रा खींच कर निकाल दी। हाय मैं नँगी हो गयी कमरे के सामने। मैंने अपने दोनों हाथ अपने वक्षों पर रख दिए, अपनी इज्जत बचाने लगी। पर शराबी पति ने वो भी हटा दिए। हाय, मैं कैमरे के सामने नँगी हो गयी। लगा 1000 लोग की आँखे मेरी इज्जत यानि मेरे वक्षों को घूर रही हो। मेरे दोनों मस्त दुधिया कबूतर अब कमरे में रिकॉर्ड हो गए।

मैं खड़ी थी। अब मेरा पति मेरे सामने आ गया। झुक्क्कर मेरे दूध पीने लगा। मैं कुछ नही कर पाई, मैं मना भी नहीं कर पाई। क्योंकि वो मेरा पति था। और भारतीय समाज में पति ही परमेश्वर होता है। पति मेरे खूबसूरत गर्वीले वक्षों को पीने लगा। सब उसकी हरकते कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी। उसने मेरे दूध जी भरकर पिया। अब मेरी चूत में वो ऊँगली करने लगा। कैमरे के सामने ही उसने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और चुत में ऊँगली करने लगा। मुझे तो यही महसूस हुआ की मेरा बलात्कार हो गया आज दिन दहाड़े। सबके सामने। दोंस्तों, पति बड़ी देर तक खड़े खड़े मेरी बुर में ऊँगली करते रहे। मेरी पैंटी भी नहीं निकाली।

एक बार तो मैं पैंटी में ही झड़ गयी। हाय दैया, आज कैमरे के सामने मैं झड़ भी गयी। कहीं ये कुत्तापना ना दिखा दे, कहीं दोंस्तों को ये वीडियो ना दिखा दे। मैं मन ही मन डर गई थी।

मैं आपके पाँव पड़ती हूँ। ये।वीडियो इंटरनेट पर मत लगाना! मैंने बड़ी धीमे से कहा।

तेरी कसम प्रतिभा। मैं हरामी हूँ। पर दर हरामी नहीं। पति बोला। मुझको थोडा अच्छा महसूस हुआ। एक बार झड़ने ने पैंटी मेरे माल से भीग गयी थी। सारा माल पैंटी में निकल गया था। पति मुझको बिस्तर पर ले गए। पैंटी उतार दी। पहले सुंघा। फिर चाटने लगे। मेरा सारा मॉल पी गये।

उन्होंने मेरे दोनों पैर खोल दिये। मेरी बुर बड़ी मस्त गदरायी गोरी गोरी थी। पति ने मेरी बुर के दर्शन किये।

तेरी चूत भी मस्त है! पर मेरी समान से अच्छी नही! वो बोले।

आज मेरी सुहागरात पर एक परायी औरत का नाम सुनकर मैं जान गई की मेरा पति कभी सिर्फ मेरा नही हो पाएगा। क्या फूटी किस्मत है मेरी। पति ने मेरी बुर ऊँगली से फैलाई और कमरे की ओर की। बॉप रे! अब मेरी चूत कैसी है सब जान जाएंगे। मेरे दिल में धक्क से हुआ। पति नशे में झूम रहे थे। मेरी बुर चाटने लगा। खूब चाटते चले गए। मैं चुदना जरूर चाहती थी। पर प्यार से। पर इधर पति तो मार मारके मुझको ले रहे थे।

दोंस्तों अब मैं पूरी तरह नँगी बिस्तर पर थी। मेरे बालों को मोगरे के फूल फँस गये थे। क्योंकि अभी पति ने कुछ देर पहले ही मुझको लात घूसों से मारा था। तभी मेरे बालों का गजरा टूट गया था और फूल इधर उधर बाल में फस गये थे। मेरे होंठों पर लाली लगी थी। नाक में बड़ी नथ थी। गले में सोने का मंगलसूत्र था। कलाइयों में हाथ भर भरके सुहाग की चूड़िया थी। कंगन थे। हाथों में शादी की मेहंदी थी। कमर पर करधन थी। पैरों में पायल और बिछुए थे। वही मेरा कुत्ता पति मुझको चोद चोदकर वीडियो बना रहा था। भगवान जाने कल ये क्या करे।

मुझको तो टेंशन हो रही थी इस बात की। पति उधर कैमरे की तरफ मेरी बुर दिखा दिखाके पी रहा था। खूब बुर पी उसने।

चल मेरा लौड़ा चूस!! वो बोला। पर आवाज में कहीं भी प्यार ना था। बस तानाशाही थी। मैं मजबूर थी। कुत्ते का ये सांड जैसा लण्ड था। सुपाड़ा निकला था। मैं जान गई की ये साला कुंवारा नही है। अपनी माल को इसी लण्ड से 10 साल से चोद रहा होगा। तब ही लण्ड ऐसा उघड़ गया है। मैं चूसने लगी। पति मेरे मुँह को चोदने

अंदर ले और अंदर!! वो बोले। लगा मैं उनकी बीवी नही कोई रंडी हूँ। मैं चूसने लगी। कहीं हल्का सा मेरे दाँत से उनका लण्ड कट गया।

छिनार!! देखके, वरना अभी तू चप्पल ही चप्पल पाएगी! वो बोले। मैं डर गई। अब सम्भल के चूसने लगी।

दोंस्तों, कुछ देर बाद उन्होंने मेरी दोनों टांगे उठाकर अपने कंधों पर रख ली। और मुझे चोदने लगे। कहीं कोई प्यार नही, कोई मेरे लिए कोई इज्जत सम्मान नही। सिर्फ वासना और चुदास हर जगह। मुझको रंडियों की तरह वो हरामी चोदने लगा। पौन घण्टे बाद मेरी चूत में हल्की जलन होने लगी। मैं आ आआहा करने लगी। लण्ड से बचने के लिए मैं चुत्तड़ इधर उधर करने लगी की पति देव जान जाये की मुझको कुछ आराम।चाहिए। कुछ मिनट के लिए लण्ड बहार निकाल ले। पर दोंस्तों 10 साल तक अपनी सामान को पेल पेलके वो बहुत बड़ा चोदूँ बन गया था। जब मैं लण्ड से बचने के लिए चुत्तड़ बायीं तरह करती तो पति भी बाए तरफ एडजस्ट हो जाता। दाँये करती तो दायीं तरह एडजस्ट हो जाता। पर हरामी ने एक सेकंड को भी लण्ड बाहर ना निकाला। बस घप्प घप्प मुझको पेलता खाता चला गया। मैं बिना रुके चुदती चली गयी। सबसे बुरी बात थी ये सुहागरात का चुदाई कांड कैमरे में रिकॉर्ड हो रहा था।

2 घण्टे पति ने मुझको चोदा।

चल कुतिया बन! गाण्ड मारूँगा! वो बोला।

सुनिये जी! थोड़ा आराम कर लूँ। बुर दुःख रही है? ? मैंने बकरी की तरह मिमियाते हुए पूछा।

पति ने फिर आँख दिखाई। मैं जान गई हरामी टाइप का आदमी है। मानेगा नहीं। मैंने हथियार डाल दिए। कुतिया बन गए। पति 2 2 कैमरे के सामने मेरी गाण्ड मारने लगा।

1 साल बाद मैं मायके गयी। मेरी सेहेलियां मेरे पास आई।

क्यों प्रतिभा!! तूने तो बड़ी ऐश की है! हम सब जान गई सहेलियों ने कहा।

तुम लोग किसके बारे में बात कर रही हो?? मैं कुछ समझी नही! मैंने कहा। मेरी सखियों ने एक पोर्न वेबसाइट खोली। मैं उसका नाम नही बताउंगी। गुप्त है। हनीमून नाइट्स वाली कैटगोरी खोली। और एक विडियो ऑन किया। माँ कसम! मेरी गाड़ फट गई। ये मेरा ही सुहागरात वाला वीडियो था। 2 घण्टे का वीडियो था। मैंने पूरा देखा। मेरे पैर तले जमीन खिसक गयी। जिसका डऱ था वही हुआ। दोंस्तों अब तक 10 लाख लोग वो मेरा चुदाई वीडियो देख चुके थे। हाय राम 10 लाख लोग अब मुझको चुदते देख चुके थे।

दोंस्तों बस रही सुक्र मानिए की मेरे घर पर कोई इस कांड के बारे में नही जान पाया। आज भी मेरा पति हर रात शराब पीकर आता है और मुझको रण्डियों की तरह पेलता ठोकता है। मेरे पापा ने मेरी शादी के लिए 30 लाख लोन लिया था। इस कारण दोंस्तों मैं इस सूअर को नहीं छोड़ पायी। पापा को कितना नुकसान होता।

दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा

दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा


सभी फ्रेंड्स का मैं शेखर स्वागत करता हूँ. मेरी उम्र 26 साल है. मेरी शादी नही हुई है और कई गर्ल्स को मैंने पटा रखा है. आपको अपनी रोचक स्टोरी सुना रहा हूँ. कैसे मैंने अपने दोस्त की बहन सौम्या को पटा लिया और कैसे अपने प्यार में फंसा लिया. फ्रेंड्स सारी लड़कियाँ बस एक चीज की प्यासी होती है और वो है अपनी खूबसूरती की तारीफ की. बस मैंने ऐसा ही किया और सौम्या को पटा लिया. मेरा दोस्त हरी मेरे घर के पास ही रहता था. मेरी उससे जान पहचान कॉलेज में हुई थी. फिर हमारी दोस्ती बढ़ गयी और मैं अक्सर उसके घर आने जाने लगा. हरी की मम्मी का सुभाव काफी अच्चा था.


वहां पर पहली बार मैंने उसकी बहन सौम्या को देखा. वो मेरे सामने लॉन्ग फ्रोक यानी गाउन में आई थी. वो बहोत गोरी थी बिलकुल दूध की तरह. उसी समय वो मेरे को पसंद आ गयी थी.

हरी- सौम्या!! ये है मेरा दोस्त शेखर!

सौम्या ने मेरी ओर मुस्कुराकर देखा

मैं- हलो!

मैंने उससे हाथ मिलाया और सौम्या मुस्कुरा दी.

हरी- जाओ शेखर के लिए चाय बना लाओ

उसके बाद मैं और शेखर बैठकर बात करने लगे. कुछ देर में सौम्या मेरे वास्ते चाय ले आई. उसी समय से वो मेरे को बहोत पसंद आ गयी थी. मैंने चाय पी और कुछ देर बाद अँधेरा हो गया तो मैं घर चला आया. पर बार बार सौम्या की याद मेरे को सता रही थी. मैंने अपने लोअर में हाथ डाल दिया और लंड पकड़कर हिलाने लगा. सिर्फ हरी की बहन सौम्या की याद मैं कर रहा था. कुछ देर बाद मामला गम्भीर हो गया और मेरा 7 इंच लम्बा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया. मैं खुद को रोक न पाया और मुठ मारने लगा. आखिर अपने लोअर को मैंने निचे सरका दिया और लंड को कच्छे से बाहर निकाल दिया. मैंने अपनी आँखे बंद कर दी और सिर्फ सौम्या को याद कर करके मुठ मारने लगा. 5 मिनट बाद मैंने अपना पानी छोड़ दिया.

धिरे धिरे हमारी मुलाकाते बढ़ने लगी. कुछ दिनों बाद हरी ने मुझे अपने घर पर क्रिकेट खेलने के लिए बुला लिया. हम सब खेलने लगे. हरी की बहन भी हमारे साथ खेलने लगी. उसने मेरे को कई बार बोलिंग की. आज उसने व्हाईट शर्ट और नीली जींस पहनी थी. जब वो बोलिंग करने के लिए जोर से दौड़ती थी तो उसके दूध बार बार किसी गेंद की तरह उछलते थे जिसे देखकर बड़ा मजा आता था. मेरे को तो सौम्या शुरू से अच्ची लगती थी. नीली चुस्त जींस में उसकी कमर, नितम्ब और गांड का नजारा तो देखने लायक था. आज अच्छी तरह से मैं उसके पिछवाड़े को ताड रहा था. मैंने सौम्या की बाल पर कई बार चौके जड़ दिए. क्रिकेट का खेल मेरे को भी बहोत पसंद था. कुछ देर बाद मेरे सारे ओवर खत्म हो गये और हरी की बैटिंग आ गयी. अब मैं बोलिंग कर रहा था. जैसे ही पहली बाल डाली हरी से उसे बहोत जोर से मारा की बोल बहोत दूर पेड़ों के पीछे चली गयी.

हरी- जाओ शेखर!! बाल लेकर आओ

मैं- न बाबा न!! वहां पर इतनी झाड़ी है. पता नही कहा मार दी तुमने. वहां तो सांप, बिच्छु भी होगा. मैं तो उस झाडी में नही जाउंगा

हरी- कोई बात नही!! मैंने बाल लेकर आता हूँ

वो बोला और चला गया. अब मैं और सौम्या अकेले रह गये. मौका देखकर सौम्या को मै एक बड़े पेड़ के पीछे ले गया और किस करने लगा

सौम्या- अभी मुझे किस मत करो. कही हरी से देख लिया तो गुस्सा करेगा

मैं- उसे बोल ढूंढने में करीब 10 मिनट लग जाएगा

मैंने बोला और फिर सौम्या को पकड़ लिया. उसे पेड़ से सटाकर खड़ा कर दिया और किस करने लगा. फ्रेंड्स, सौम्या बहोत गजब की माल थी. मेरे को पता था की वो अभी कुवारी है और एक वार भी चुदी नही है. जब उसे किस कर रहा था तो वो भी गर्म हो गयी और मेरे को किस करने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों ही गर्म हो गये. उसकी सफ़ेद शर्ट पर उसके दूध बड़े बड़े बाहर की तरफ निकले थे. ऐसा लगता था की अभी शर्ट को फाड़कर बाहर निकल आएँगे. जैसे ही मैंने उसके गेंद जैसे दूध पर हाथ रखा वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” करने लगी. उसके बाद तो मैं रुक न सका. और हरी की खूबसूरत जवान बहन की चूचियां मसलने लगा. वो बार बार सिसकारी लेने लगी. मैंने दूसरी तरफ झांककर देखा की हरी कहाँ है. पर वो पेड़ो के पीछे गेंद ढूढ़ रहा था. मेरे पास कुछ समय था.

मैं फिर से सौम्या पर झुक गया और किस करने लगा. कुछ देर बाद वो फ्रेंक हो गयी और अच्छी तरह से मेरे को किस करने लगी. अब उसको भी मजा आ रहा था. मैंने उसे पेड़ से सटाकर खड़ा रखा और तबियत भरके उसके दूध दबा लिए. मुझे इसमें बहोत आनन्द आया. जब जब दूध मसलता था सौम्या …ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” चिल्लाती थी. मेरे को और मस्ती चढ़ गयी. मैंने उसकी नीली जींस पर चूत के उपर हाथ लगाना शुरू कर दिया. अब तो सौम्या सी सी करने लगी. उसकी जींस की जिप मैंने नीचे सरका दी और हाथ अंदर घुसा दिया. सौम्या की चूत मेरे को मिल गयी. मैं चूत को ऊँगली से हिलाने लगा तो सौम्या अजीब अजीब कामुक आवाजे निकलने लगी. लगा की अभी अपनी चूत का पानी छोड़ देगी. काफी देर तक मैं उसके साथ इंटरटेनमेंट करता रहा. चूत में ऊँगली कर करके मैंने उसकी चूत को गीला कर दिया. फिर हरी आ गया. हम दोनों जल्दी से पेड़ के पीछे से आ गये. उस रात मैंने सौम्या को काल किया.

मैं- कैसी हो जाने बहार?? सच सच वोलना की आज तेरे को मैच में मजा आया की नही??

सौम्या- आज मेरे को बहोत आनन्द आया

मैं- गुलबदन! मैं तेरे को इससे वी जादा आनन्द दे सकता हूँ. पर किसी काम से तुम हरी को वाहर भेज दो बस!

सौम्या- कल मैं हरी को किसी काम से वाहर भेज दूंगी. तब तुम मेरे घर आ जाना

अगले दिन सुबह के 11 बजे हरी को गैस सिलिंडर भरवाने भेज दिया और मेरे को काल कर दिया. मैं तुरंत ही उसके घर आ गया क्यूंकि हम दोनों का घर मुस्किल से 300 मीटर दूर था. सौम्या की माँ कहीं गयी हुई थी. आज तो हम दोनों की सुहागरात होने वाली थी. मैं गया तो सौम्या बाहर सीढियों पर ही खड़ी हुई थी. उसके बाद हम दोनों अंदर चले गये. हम दोनों की किसिंग शुरू हो गयी. दोनों कमरे में चले गये. अब हम दोनों के पास काफी समय था जिसमे हम चुदाई कर सकते थे.

आज तो सौम्या भी पुरे मूड में दिख रही थी. वो मेरे को बड़े जोश से किस कर रही थी. दोनों के लिप्स से लिप्स आपस में टकराकर चिंगारी निकाल रही थी. जितने जोश से मैं उसे चुस रहा था उतने ही जोश से वो मेरे को चुस रही थी. आज उसने फिर से लोग गाउन पहना था. उसे मैंने एक दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और गोल गोल 36 इंच के दूध को मसलने लगा. वो “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” कर रही थी. फिर हम दोनों ही बेडरूम में चले गये.

मैं- सौम्या!! आज मेरे को तेरे मस्त मस्त दूध देखने है

सौम्या- शेखर! मैं भी चाहती हूँ की तुम मेरे मस्त मस्त दूध मुंह में लेकर चूसो. मेरा वी कबसे चुसाने का दिल कर रहा है

उसने कहा और फिर अपना गुलाबी रंग का गाउन उतार दिया. उसे जव मेने ब्रा और पेंटी में देखा तो सोये अरमान जाग गये. आज कितने दिनों बाद कोई गर्ल को फक करने का मौका मिल रहा था. मैं खुद को किस्मत वाला समझ रहा था. उसने रंग बिरंगी ब्रा और पेंटी पहनी थी जिसमे वो बहोत सेक्सी दिख रही थी. जिस तरह से समुद्र के बीच पर लडकियां स्विम सूट में दिखती है, उसी तरह सौम्या मेरे को दिख रही थी. मैं भी पूरे जोश में आ गया. मैंने खड़े खड़े ही उसे बाँहों में लपेट लिया. उसके बाद तो हम दोनों की खुब किसिंग हुई.

सौम्या- शेखर! क्या तुम कपड़े नही उतारोगे??

मैं- लगता है रानी बड़ी जल्दी में हो. लो उतार देता हूँ

उसके बाद मैंने अपनी टी शर्ट और जींस उतार दी. मेरा लंड 7” का था जो कबसे मेरे अंडरवियर में था और बूंद बूंद करके रस छोड़ रहा था. मैंने वो भी उतार दिया. अब मैं फुल न्यूड हो गया था. धिरे धिरे अपन ने सौम्या की ब्रा और पेंटी भी उतार दी. वो बेड पर सीधी लेट गयी. मैं उसके करीब आ गया और फिर से किसिंग शुरू हो गयी. अब मेरे को उसके रसीले दूध सक करने थे. मैंने उसके चूचियां पर हाथ लगाना स्टार्ट कर दिया. सौम्या के दूध काफी कसे थे और बिलकुल देसी थे. फ्रेंड्स, जिस तरह से तन्दुरुस्त इंडियन गर्ल्स के दूध काफी बड़े बड़े और रसीले होते है, उसी तरह से हरी की बहन सौम्या के दूध थे. मैं हाथ में लेकर दबाने लगा तो वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी. मेरे को पता चल गया था उसको भी बड़ा एन्जॉय मिल रहा है. उसके बूब्स काफी चिकने और सॉफ्ट थे.

मेरे को बहोत मजा आ रहा था. उसके बाद मैंने उसके दूध को मुंह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगा. अब तो वो और कराहने लगी. मुझे बार बार प्यार कर रही थी. हम दोनों ही अब नंगे थे. मैं तो उसके दूध ऐसे चुस रहा था जैसे वो मेरी वाइफ हो. मैं अच्छी तरह से मुंह चलाकर सक कर रहा था. मेरे को पता था की अगर उसे एक बार में मैंने मजा दे दिया तो वो मेरे से बार बार अपने बूब्स सक करवाएगी. इस तरह मैं अच्छी तरह से सक कर रहा था. सब रस पी रहा था. उसके बाद मैंने दूसरी निपल को मुंह में लगा लिया और फिर से चूसने लगा. मैंने सौम्या की तरफ देखा तो वो आँख बंद की हुई थी. उसके बाद मैं 69 में आ गया.

मैं- बेबी!! तेरे को मेरा लंड आज सक करना है. देखो अच्छे से करना वरना ये ठीक से खड़ा नही हुआ तो तेरे को चुदाई में मजा नही आएगा

सौम्या- शेखर!! मैं सक करती हूँ. पर तेरे को भी मेरी चुत अच्छे से चाटनी है

उसके बाद हम दोनों 69 में आ गये और काम पर लग गये. मेरे मुंह के ठीक उपर सौम्या की चुत थी. मैं जीभ लगाकर अविलम्ब चाटने लगा. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मेरे को तो देख देख कर ही बड़ा आनन्द आ रहा था. मैं जल्दी जल्दी चाट रहा था. उधर हरी की बहन सौम्या वी अपने काम पर लगी हुई थी. मेरे लंड को जल्दी जल्दी हिलाकर मुंह में लेकर चुस रही थी. काफी देर तक दोनों 69 में मजे लेते रहे. उसके बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया. सौम्या ने अपना कंधा बेड पर रखा और अपनी गांड उपर उठा दी. आज पहली बार उसके न्यूड नितम्ब और पिछवाडा देखने का अवसर मिला. फ्रेंड्स, सच में वो कच्ची कली थी.

मेरे को बहोत स्वीट लग रही थी. उसके न्यूड नितम्ब पर मैंने कई बार हाथ फिराया और किस किया. फिर मैंने उसकी चूत सक करना शुरू कर दिया. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मैं जल्दी जल्दी सक (चाटने) करने लगा. धिरे धिरे सौम्या की चुत अपना रस छोड़ने लगी. मैंने कई बार उसकी चुत का पानी पिया.

मेरे को बड़ा आनंद आया. उसके बाद मैंने उसकी चुत फकिंग (चुदाई) शुरू कर दी.

मैंने हल्का सा झुककर उसकी चूत में अपना लंड घुसाकर उसे चोदने लगा. सौम्या “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” कर रही थी. अपना अंगूठा उसने अपने मुंह में डाल दिया था और आँखे बंद करके चूस रही थी जैसे बचपन में छोटे बच्चे चुसते है. ऐसे में वो मेरे को बड़ी प्यारी लग रही थी. मैंने जल्दी जल्दी उसे चोदने लगा जिससे वो जादा से जादा आवाज निकाले और मेरे को और मजा आये. वो अपने सीधे हाथ का अंगूठा चुस्ती रही और एक अच्छी बच्ची की तरह घोड़ी बनकर चुदवाती रही. उसके सेक्सी नितम्ब को मैंने कई बार हाथ से छुकर आनंद लिया. फिर जल्दी जल्दी किसी जोश में आकर पेलने लगा. सौम्या फिर से “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” चिल्लाने लगी. मैं रुका नही और जल्दी जल्दी उसे फक करता रहा. एंड में 15 मिनट वाद मैंने खल्लास हो गया.

मैंने चाची को चोदा बड़े प्यार से

मैंने चाची को चोदा बड़े प्यार से


मेरे परिवार में हम चार लोग हैं. मैं, मेरे पिता जी, मेरी मम्मी और मेरा एक छोटा भाई. इस वक़्त मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ. आपको पता ही है कि कॉलेज वाली उम्र में चाची भाभियों पर सबसे ज्यादा क्रश आता है और लौड़ा उनको देखते ही सलाम मारने लगता है.


आज उसी समय की काम वासना की कहानी पेश कर कर रहा हूँ, मजा लीजिएगा. यह बात आज से 8 महीने पुरानी है. मेरा क्रश मेरी चाची पर था, जो मेरी ही गली में रहती थीं. चाची का नाम ज्योति है. उनकी उम्र 31 साल है. उनका फिगर एकदम मस्त है.


चाची वैसे तो थोड़ी मोटी थीं, मगर उनके बड़े बड़े चूचे और गांड देख कर लंड खड़ा हो जाता. तब मुझसे रहा नहीं जाता और कई बार तो मुठ मारके अपने लौड़े को शांत करना पड़ता था. जब भी मुठ मारने के लिए लंड हाथ से हिलाता था, तब आंखें बंद करके अपने सपनों की रानी ज्योति चाची की चूचियां, मेरे भेजे को गर्म करती रहती थीं. लंड का रस निकालने के बाद यही सोचता था कि ज्योति चाची की चूत लेने का मजा ही कुछ और होगा.


उनकी चूत की चाहत से ही ये बात शुरू होती है. जैसे कि मैंने बताया कि मेरी गली में ज्योति चाची रहती थीं. उनकी अपने पति यानि चाचा के साथ कम बनती थी. उन दोनों की लड़ाई होती रहती थी. चाचा ने टूरिंग का काम पकड़ा हुआ था, तो वो अधिकतर बाहर ही रहते थे.


चाचा अक्सर मेरे घर पर पापा या मम्मी से मुझे उनके घर रुकने के लिए बोल जाते थे क्योंकि हमारे घर वालों की आपस में खासी बनती थी तो वो भी मना नहीं करते थे. उनके घर रुकने जाने के लिए सुनते ही मुझे बड़ा अच्छा लगता था. मेरी नजर चाची पर पहले से थी. चाची को देख लंड खड़ा हो जाता था.


इस बार चाचा पन्द्रह दिनों के लिए बाहर गए थे. तो मुझे इस बार जरा अच्छा मौका लगा.


जब मैं चाचा के घर रुकता था, तो हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे. चाची और उनकी बेटी डबल बेड पर लेटती, मैं बगल की एक चारपाई पर सो जाता था.


शुरुआत में तो मैं रोज के जैसे चारपाई पर सो गया, पर मुझे चाची की लेनी थी तो मैंने सोचा कि अब चारपाई पर नहीं सोना है. अगर चाची के बड़े बड़े मम्मों और गांड का मजा लेना है, तो हिम्मत करनी पड़ेगी.


एक दिन ऐसे ही मौके पर मैंने कह दिया- चाची मुझे चारपाई पर नींद नहीं आती, मुझे भी बिस्तर पर सोना है.


चाची ने कहा- कोई बात नहीं, तू हमारे साथ ही सो जाना डबलबेड तो है, इतनी तो जगह रहती है.


मैं खुश हो गया. मैंने लेटने लगा. तो चाची ने अपनी बेटी को दूसरी तरफ लिटा दिया और मैं चाची के साथ सो गया. पहला दिन तो ऐसे ही निकल गया.


जब मैं तीन दिन बिस्तर पर चाची के बगल में सोया, तो मैंने कथा बांचना शुरू की. मतलब मैंने अपनी हरकत शुरू कर दी. चौथे दिन मैंने अपनी एक टांग चाची के ऊपर रखी और एक पल सांस रोके पड़ा रहा. जब चाची ने कोई हरकत नहीं की, तो मैंने अपना एक हाथ चाची के मोटे चूचे पर धर दिया और चुपचाप लेटा रहा.


कुछ समय रुकने के बाद मैंने हौले हौले चाची का चूचा दबाना शुरू किया. उनको कुछ भी अहसास नहीं हो रहा था. वो मजे से सो रही थीं और मैं स्वर्ग के मजे ले रहा था. लेकिन चूत लेने की चुल्ल थी तो मैंने टांग से चाची की टांग को हौले हौले सहलाना शुरू किया.


चाची जागने लगीं, तो मैं आंख बंद करके सोने लगा ताकि उनको पता लगे कि मैं सोते में ऐसा कर रहा हूँ. यह मेरा पहली बार था, मुझे मजा आ रहा था.


उन्होंने जाग कर मेरी स्थिति देखी और मुझे ठीक करके सो गईं. ऐसा दो तीन बार हुआ. मगर चाची ने कुछ नहीं कहा. इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई. मैं अब लगभग रोज ही चाची के दूध दबा कर मजा लेने लगा.


एक बार ऐसे ही मजे ले रहा था और मेरा हाथ उनके मम्मों पर टिका था और अपना काम कर रहा था. इस समय चाची सो रही थीं, मुझे लगा कि रोज के जैसे ही सब हो रहा है. मैं मस्ती से दूध को हॉर्न के जैसे दबा कर लंड खड़ा कर रहा था. तभी अचानक से उन्होंने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया. मैं एकदम से डर गया और हाथ हटा लिया.


चाची मेरी तरफ मुड़ते हुए बोलीं- मजे लेने है तो खुल के ले. क्या ऊपर से दबा कर छोड़ देता है. चल आ जा.


खुले निमन्त्रण ने मैं खुश हो गया और मैंने कहा- चाची मैं आपको कब से चोदना चाहता था, मेरी ये इच्छा आज आपने समझ ली है. अब मेरी इच्छा जरूर पूरी होगी.


फिर मैंने चाची को अपनी बांहों में खींच लिया. चाची और मैं चूमने में लग गए.


चाची ने मुझे रोकते हुए गुड़िया को चारपाई बिछा कर उस पर सुलाने का कहा और गुड़िया को उधर लिटा दिया.


अब चाची और मैं लिपट गए. मैंने चाची के होंठ पर होंठ रख दिए और चूसने लगा. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.


कुछ ही देर में हम दोनों की उत्तेजना बढ़ने लगी और मैं चाची के पूरे बदन को चूमने लगा. मैंने चाची को चूमने के साथ ही हौले हौले उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. चाची के इतने बड़े बड़े मम्मों को पकड़ने से मुझे महसूस हो गया कि चाची के पूरे मम्मे मेरे हाथ में नहीं आ सकते थे.


मैं चाची को जोर से जकड़े हुए चूमने में लगा था. इस समय हम दोनों के बीच में से हवा भी नहीं निकल सकती थी. चाची की कामुकता देखते ही बन रही थी.

 

हम दोनों दस मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे. शायद इसका कारण था कि हम दोनों ही जिस्म की जरूरत से बहुत भूखे थे.


कुछ देर बाद मैंने चाची को नंगी करना शुरू किया. मैंने उनकी नाईट शर्ट को उतार दिया. चाची ने ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे उनके बड़े बड़े दूध एकदम से उछाल मार कर बाहर आ गए.


चाची सीत्कार करते हुए बोलीं- आह … आराम से दबा … उखाड़ेगा क्या. ये दूध अब तेरे ही हैं.


मैं उनके मम्मों को बारी बारी से चूसने लगा. चाची ने मेरे सर को अपने मम्मों पर दबाते हुए दूध चुसवाने का मजा लेना शुरू कर दिया.


मैं दूध से तृप्त होने के बाद धीरे से नीचे आ गया. मैंने हाथ से उनका लोअर उतारा. अन्दर चाची ने ब्लैक पैंटी पहनी थी, जिसमें उनकी गोरी जांघें बहुत खूबसूरत लग रही थीं. उनकी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी.


मैंने अब तक की शिक्षा में ये समझा था कि चूत चाटना बहुत मजेदार होता है. हालांकि मैंने आज तक किसी की चूत चाटी नहीं थी … मगर पोर्न देख कर मेरी ये एक फैंटसी बन गई थी कि चूत चाटने का मजा लेना है.


फिर मैं उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चाटने लगा. चाची कसमसाने लगीं और उनकी टांगें एक बार तो अपनी चूत को दबाने लगीं. लेकिन मैंने उनकी टांगों को खोल दिया और पैंटी के ऊपर से ही चूत पर अपने होंठ फेरने लगा. चाची की चड्डी के ऊपर लगे चुतरस का स्वाद मेरे मुँह में आने लगा. चाची ने भी जल्द ही अपनी टांगें खुद ब खुद फैला दीं और अब उनकी गांड उठने लगी थी.


चाची ने बाल खिंचने से दर्द से आउच किया और वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगीं.


मैंने हंस कर आंख दबाई और उनसे सॉरी बोल कर माफी मांग ली. चाची मुस्कुरा दीं और उन्होंने मेरे सर को फिर से अपनी चूत पर दबा दिया.


मैं फिर से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ चला. अबकी बार मैंने एक पल चूत की फांकों को चाटा और उनकी चूत में अपनी एक उंगली घुसा दी. उंगली के अन्दर जाते ही चाची के मुँह से हल्की सी सीत्कार निकली और उन्होंने अपनी टांगें भींचते हुए मेरी उंगली को दबा लिया.


मैं चाची की टांगों को फैला कर हौले हौले से उनकी चूत को चाटने लगा. चाची चुदास से पागल होने लगीं. उनकी गांड फिर से मेरे मुँह पर उठते हुए चूत को दबाने लगी. मुझे चाची की चूत चाटने में बड़ा मजा आ रहा था.


आप मेरे इस अनुभव को बड़े ध्यान से पढ़ने की कोशिश कीजिएगा, आपके लंड और चूत से रस टपकना चालू न हो जाए, तो मुझे जरूर लिखना.


फिर दो मिनट बाद चाची मेरे ऊपर आ गईं और उन्होंने मेरा लोअर उतार दिया. मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरा खड़ा लौड़ा देखा और जोर से दबा दिया. लंड मसले जाने से मुझे बहुत जोर से दर्द हुआ.


मैंने चाची के लिए हल्के स्वर में चिल्लाते हुए गाली निकाल दी- बहन की लौड़ी, तू क्या पागल है?


चाची ने हंस कर कहा- मादरचोद साले भोसड़ी के … अब तुझे पता लगा कि झांटें खींचने से मुझे कितना दर्द हुआ होगा. चल कोई बात नहीं … अभी तेरा दर्द ठीक करती हूं.


मैं लंड पकड़े हुए सहला रहा था. चाची ने मेरा हाथ हटाया और अंडरवियर उतार कर मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. चाची लंड को जोर जोर से चूसने लगीं.


मैं इतना अधिक गरमा गया था कि बस दो मिनट बाद चाची कम मुँह में ही झड़ गया. चाची मेरा सारा माल निगल गईं और उन्होंने डकार भी नहीं मारी.


थोड़ी देर बाद चाची फिर से मेरा लंड चूसने लगीं. मेरा लौड़ा फिर से सलाम करने लगा. अब हम दोनों गर्म हो चुके थे.


चाची ने कहा- राहुल अब तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो … मुझसे अब नहीं रहा जाता.


मैंने कहा- चाची … शुभ काम में देरी कैसी … अभी लो.


मैंने चाची की चूत पर लंड रखा और रगड़ने लगा.


चाची कहने लगीं- भैन के लंड … अब डाल भी दे.


यह सुनते ही मैंने एक जोर का धक्का लगाया और लंड एक ही बार में अन्दर पेल दिया.


लंड अन्दर लेते ही चाची के मुँह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकली. चाची की चूत थोड़ी सी टाइट थी. इधर मेरा भी पहली बार था, इसलिए मुझे भी दर्द हुआ. पर उस वक़्त तो चूत का नशा सवार था, तो पता नहीं लगा.


मैं हौले हौले चाची को चोदने लगा और उनको भी मजा आने लगा. चाची मुझे दबोचे हुए अपनी गांड उठा उठाकर लंड के झटके ले रही थीं.


मैंने चाची को बिना रुके दस मिनट तक लगातार चोदा. इसके बाद चाची ने मुझे रोका और वो बिना लंड निकाले मेरे ऊपर सवार हो गईं. मेरा लंड अब भी चाची की चूत की फंकों में फंसा था. चाची अपनी गांड उठाते हुए लंड पर उछलने लगीं. मैं उनकी हिलती हुई चूचियों के मजे लेने लगा.


कोई मिनट बाद चाची थक गईं. मैंने उनसे कहा कि अब पोजीशन बदल लेते हैं. आप घोड़ी बन जाओ.


मैंने चाची को बिस्तर के किनारे घोड़ी बनाया और नीचे खड़ा होकर चूत में लंड पेलने लगा. कुछ मिनट बाद चाची कराहने लगीं. शायद उनका रस निकलने को था.


मेरा भी छूटने वाला था तो मैंने चाची को बताया- चाची, मैं झड़ने वाला हूँ.


तभी चाची ने कहा- मैं झड़ गई हूँ … तू जब झड़े, तो मेरे अन्दर ही रस छोड़ देना. मैं गोली खा लूंगी.


मैंने तेज तेज धक्के लगाए और चाची के अन्दर ही लंड का रस छोड़ दिया. एक मिनट तक लंड की पिचकारी खाली करने के बाद हम दोनों थक कर लेट गए.


इस तरह मैंने पहली बार चाची को चोदा.


थोड़ी देर बाद हमने एक राउंड और खेला और कपड़े ठीक करके सो गए.


उसके बाद मैंने कई बार चाची को चोदा.


मगर न जाने क्यों अब वो मुझे मना कर देती हैं. वो कहती हैं कि ये सब गलत है, जो पहले हो गया, सो हो गया. मगर अब नहीं करूंगी.

चाची ने किया चुदाई से इलाज

चाची ने किया चुदाई से इलाज


नमस्ते.. मैं अंगरेज एक बार फिर आप की सेवा में हाजिर हूँ। जैसा कि आप जानते हैं.. मैं पंजाब का एक जाट हूँ। मुझे हिंदी कम आती है।
मैं 6 फुट 1 इंच लम्बाई का अच्छा ख़ासा गबरू जवान हूँ। मेरा 6 इंच का जवान मोटा लण्ड है। मैं थोड़ा पतला हूँ.. पर मेरा लंड काफी मोटा है। मेरे लौड़े का टोपा तो इतना मोटा है.. कि हर औरत के आँसू निकले हैं। लंड इतना सख्त है कि जैसे लोहे की रॉड हो। मेरे लंड ने हर चुदाई की कहानी ऐसी लिखी है कि चुदने वाली की चूत काँप जाए।

बात तीन महीने पहले की है। मेरे घर वाले सब लोग कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे। खाना-पीना चाची के जिम्मे बोल दिया गया था।
मेरी चाची एक मस्त माल हैं। उनके मम्मे बहुत बड़े हैं। वो उस समय तीस साल की थीं। चाचा ट्रक चलाते थे.. सो वो घर में अपने नौ साल के बेटे के साथ रहती थीं।

रोज की तरह आज भी मैं खाना खाने उनके घर गया। हम लोग खाना खा कर उठे तो लड़का नदी में नहाने की जिद करने लगा। आज गरमी भी बहुत थी। चाची मना कर रही थीं.. वो रोने लगा।
चाची ने मुझसे कहा- जा इसे नहला लाओ.. पर ध्यान रखना।

मैं उसके साथ चला गया, वो एक तरफ बच्चों के साथ नहाने लगा। अचानक उसका पैर फिसल गया.. और वो गहरे पानी में बहने लगा। मैं उसको बचाने के चक्कर में पानी में कूद गया। पानी कम होने की वजह से मैं पत्थर से टकरा गया। मुझे चोट लग गई.. पर उसे बचा लिया।

मेरे कपड़े फट गए थे। मेरे कंधे से लेकर जांघ तक लंबी खरोंच भी आ गई थी। वो खरोंच मेरे लण्ड के पास से गुजर रही थी।
हम घर गए। मेरी ऐसी हालत देख कर चाची चौंक गईं, जब उन्हें पता चला तो वो बच्चे को डांटने लगीं।
मैंने कहा- छोड़ो भी चाची..
चाची बोलीं- तुम गीले कपड़े उतारो.. मैं तब तक दवा लाती हूँ।

मैंने कपड़े उतार दिए.. सिर्फ अंडरवियर में रह गया था।
वो दवा लेकर आईं और मजाक करते हुए बोलीं- इसे भी उतार देते।
हम दोनों हँसने लगे।

वो बोलीं- चल बिस्तर पर लेट जा।
मेरा अंडरवियर गीला होने के कारण मेरा लौड़ा साफ दिख रहा था, उनकी नजर मेरे मोटे लण्ड से हट नहीं रही थी।

दवा लगा कर बोलीं- तुम्हारे अन्दर भी चोट आई है ना..
मैंने कहा- हाँ..
वो बोलीं- तो दिखाओ न..
इतना कह कर वो अश्लील भाव से हँसने लगीं।
फिर बोली- तुम्हारी अंडरवियर भी गीली हो गई है..
मैंने कुछ नहीं कहा। वो अन्दर गईं और अपनी कच्छी ले आईं.. बोलीं- लो ये पहन लो।


वो बाहर चली गईं तो मैं चड्डी बदलने लगा था.. उसी वक्त वो एकदम से फिर से अन्दर आ गईं।
अब मैं उनके सामने नंगा खड़ा था, मेरा लण्ड देख कर वो कामुकता से हँसने लगीं।

फिर मेरे नजदीक आकर खरोंच देख कर हँस कर बोलीं- तुम तो बहुत बाल-बाल बचे..
मैंने जल्दी से कच्छी पहनी और झट से बोला- देख कर तो आतीं चाची..।
उनकी कच्छी बहुत छोटी थी। मेरा लवड़ा उसमें फूला हुआ दिख रहा था.. बगल से झांटें निकल रही थीं।

अब चाची दवा लगाने लगीं, उनका हाथ मेरे लण्ड से छू रहा था, मेरा लंड उनके स्पर्श से खड़ा हो गया।
कुछ इस तरह से उन्होंने दवा लगाईं कि लौड़ा कच्छी से बाहर आ गया।
चाची बोली- इतना बड़ा कर लिया है.. इसे अन्दर करो..
फिर खुद ही मेरे लण्ड को पकड़ कर चड्डी के अन्दर कर दिया।

उनका हाथ लगने से ही लंड और आतंक फैलाने लगा और फिर से बाहर आ गया अब लौड़ा बेकाबू हो गया था।
लंड की सख्ती देख कर चाची बोलीं- ये जिसके भी अन्दर जाएगा.. उसे मार ही देगा। तुम पूरे जवान हो गए हो.. शादी कर लो।

जब इतनी खुली बात चाची ने बोली तो मैं भी बेशर्म हो गया।
मेरा लण्ड कच्छी में टिक ही नहीं रहा था.. तो मैं बोला- चाची इसका एक ही इलाज है।
मैं उनके सामने ही मुठ्ठ मारने लगा।

चाची ने मुठ्ठ मारते हुए देखा तो उन्होंने भी बोल दिया- मैं मदद करूँ।
मैंने ‘हाँ’ कहा.. तो वो खुल कर बोलीं- एक शर्त पर मुठ्ठ मारूँगी.. तुम्हें मेरी चूत चूसनी होगी.. ये मेरा एक सपना था.. पर तेरे चाचा को ये पसंद नहीं है।
मैंने कहा- ठीक है।
चाची ने मेरा लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया।
चाची बड़ी मस्त होकर लण्ड चूस रही थीं.. दस मिनट बाद मेरा माल निकला जिससे चाची का सारा मुँह भर गया।
माल इतना सारा निकला था कि चाची हैरान रह गईं।

फिर चाची मेरे टट्टे पकड़ कर बोलीं- यहाँ कोई माल बनाने की फैक्ट्री लगी है क्या?
मैं मस्ती से मुस्कुराने लगा।
फिर वो मेरा लंड पकड़ कर बाथरूम ले गईं। बाथरूम में चाची ने अपने भी कपड़े उतार दिए। अब मेरे सामने उनकी नंगी साफ चूत थी.. मैं बैठ गया और उनकी फूली हुई चूत को चूसने लगा।

चाची ने शावर चालू कर दिया, मैंने चूत का दाना चूस-चूस कर सारा रस निकाल दिया।
चाची बोलीं- आह.. अब डाल दो जा लौड़ा.. उह..फाड़ दो चूत..
मैंने चाची को घोड़ी बनाया, लंड पर साबुन लगाया, फिर चूत के ऊपर रगड़ने लगा।

चाची बोली- ज्यादा मत तड़फाओ मेरी जान.. डाल दो ना अन्दर.. बना दो मेरी चूत को भोसड़ा।
मैंने ‘फचाक’ से धक्का मारा.. पूरा लंड चिकनाहट के कारण सटाक से चूत के अन्दर घुसता चला गया।
चाची तड़फने लगी- ओह्ह.. बाबाजी.. मार डाला रे.. लंड है कि लोहे की रॉड.. तेरा टोपा मेरी बच्चेदानी को फाड़ रहा है रे..
वास्तव में चाची की चूत बहुत कसी हुई थी.. लौड़ा चूत पर कहर बरपा रहा था।

मेरा सुपारा आंवले जितना बड़ा होने के कारण चूत में फंस सा रहा था.. जिससे मुझे भी दर्द हो रहा था.. पर चुदाई में मजा आ रहा था।
दस मिनट बाद चाची की चूत ने लंड को और अधिक कस लिया, चाची सिसकारने लगीं, मेरा टोपा भी फूलने लगा, हम झड़ने वाले थे।
मैंने उनकी चूची मसकी और इशारा किया तो चाची ने कहा- अन्दर ही आने दो।

अब हमारी आँखें बंद हो गई थीं, एक आनन्द की लहर दौड़ उठी, हम दोनों एक साथ ही झड़ उठे। चाची की बच्चेदानी मेरे माल से भर गई थी। फिर चूत ने लंड को आजाद किया, लंड बाहर आया.. तो चाची ने उसे चूमा और कहा- वाह मेरे शेर.. तुम असली मर्द हो। फिर हम दोनों नहा कर सो गए, रात को दो बार फिर चुदाई की। चाची की चूत सूज गई थी.. पर वे मेरे लंड की दीवानी हो गई थीं।

स्कूल में कुंवारी चूत चोदी

स्कूल में कुंवारी चूत चोदी


बात स्कूल के दिनों की है जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, तब हमारी क्लास में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की पढ़ती थी, जिस पर हर कोई लाइन मारता था लेकिन वो मुझ पर मरती थी और मेरा भी दिल उसे चोदने को बहुत करता था। लड़की इतनी खूबसूरत थी कि हर एक का लन उसे देख कर खड़ा हो जाता था।


एक दिन मैंने उस लड़की से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया और वो भी झट से मान गई जैसे वो पहले ही तैयार बैठी थी। उस दिन हम दोनों इकट्ठे पैदल स्कूल से आये तो रास्ते में प्यार भरी बातें ही की। धीरे धीरे हमारा प्यार आगे बढ़ा तो मैंने उसे हाथ भी लगाना शुरू किया। आखिर वो घड़ी आ गई जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था, मैं उसके नाम की कई बार मुठ भी मार चुका था।


एक दिन जब हम घर को वापिस आ रहे थे, रास्ते में मैंने उसको पकड़ कर किस की। पहले तो उसने ना की लेकिन जब मैंने उसके होंटों को अच्छे से चूमा तो वो भी मेरा साथ देने लगी। उसने स्कर्ट और कमीज पहनी हुई थी, मेरा हाथ धीरे धीरे उसके मम्मों पर गया और मैंने उन्हें मसलना शुरू कर दिया।


वो भी गर्म हो गई, मैंने उसकी कमीज के ऊपर वाले दो बटन खोल कर अन्दर हाथ डाल दिया और उसके मम्मों को जोर से मसलने लगा। पहले तो उसने मुझसे छुटने की कोशिश की लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैं अब कुछ न कर पाया तो कभी भी कुछ नहीं कर पाऊँगा।


फिर मैंने होंसला सा करके उसकी स्कर्ट के अन्दर भी हाथ डाल दिया। वो और गर्म हो गई। फिर मैंने अपना लन अपनी पैंट में से बाहर निकाल दिया। तब तक उसे भी मजा आने लग गया था। जब मैंने अपना लन उसे पकड़ा दिया तो वि शरमा गईई और मेरी ओर देखने लगी। मैंने उसकी शर्म दूर करने के लिए उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करना शुरू कर दिया और उसकी स्कर्ट को ऊपर उठा दिया और उसकी फुद्दी के साथ अपना लन रगड़ दिया। वो भी अब पूरी तैयार हो गई थी। मैंने उसकी गीली हुई फुद्दी में अपना लन घुसाने की कोशिश की लेकिन उसकी फुद्दी बड़ी कसी थी क्योंकि अभी तक उसका मुहूर्त नहीं हुआ था, फिर मैंने जोर लगा कर अपना सुपारा उसके अन्दर थोड़ा घुसो दिया तो वो दर्द से बिलबिला उठी। मैंने उसे दर्द से निजात दिलाने के लिए उसकी चूची अपने मुँह में ले ली और उसे मजा आने लगा।


फिर मैंने अहिस्ता अहिस्ता अपना लन उसकी फुद्दी में घुसेड़ना शुरू किया और वो भी मेरा साथ देने लगी। अभी मैंने अपना आधा लन ही उसके अन्दर डाला था, वो मजा लेने लगी, फिर मैंने आहिस्ता से अपना पूरा लन उसकी फुद्दी में डाल दिया और अन्दर-बाहर करने लगा।

School Me Kuwari Choot Chodi


इस चुदाई का मजा मैंने उसे घोड़ी बना कर लिया तो वो थोड़े ही समय के बाद झड़ गई और उसे बहुत मजा आया लेकिन झड़ने के बाद जैसे ही वो मेरा लन बाहर निकलने लगी तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया।


उसने मुझे छोड़ने को कहा तो मैंने कहा- रानी, अभी तो तेरा काम हुआ है, मेरा अभी बाकी है।


उसने कहा- तेरा काम कैसे होगा?


तो मैंने उसे कहा- जब तू मेरा लन अपने मुँह में डाले तब !


उसने कहा- फिर क्या होगा?


मैंने कहा- जैसे तेरे को मजा आया है, वैसे जब मेरे को मजा आएगा, तब मेरा काम होगा।


फिर उसने मेरे गीले लन को, जिस पर थोड़ा सा खून भी लगा हुआ था, को अच्छी तरह साफ़ किया और कहा- यह खून कहाँ से लगा? तो मैंने कहा- तेरी फुद्दी फटी है, उसमें से खून निकला है।


और जब उसने अपनी फुद्दी को हाथ लगाया तो उसमें से थोड़ा खून निकला, जिसे देख कर वो रोने लगी।


मैंने सोचा कि यह तो पंगा खड़ा कर लिया है, इसे बताने की जरूरत ही नहीं थी।


उसने कहा- अब यह खून निकलता रहेगा और मेरे घर वालों को पता चल जायेगा।


मैंने उसे समझाया- ऐसा सब लड़कियों के साथ होता है लेकिन किसी को कोई पता नहीं चलता।


फिर वो थोड़ा सा चुप हो गई और सिसकारियाँ लेती हुई मेरे लन को अपने मुँह में डालने लगी।


फिर क्या था, वो बड़ी मस्ती से अपने मुँह में लोलीपोप की तरह मजा लेने लगी और करीब पाँच मिनट के बाद मेरा भी काम जब होने लगा तो मैंने जोर जोर से उसके मुँह में धक्के मारने शुरू किये।


और जैसे ही मेरा काम हुआ तो मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में ही उड़ेल दिया, जिसके बाद उसने भी उसे बड़े मजे से पी लिया और कहने लगी- बड़ा मजा आया ! हम रोज ऐसा करेंगे !


उसके बाद हम लोग अपने अपने घर को चले गए।


हमारा चोदा-चोदाई का सिलसला इस तरह ही स्कूल से आते-जाते हुए चलता रहा और अब वो भी पूरी तरह तजुर्बेकार हो चुकी थी।


यह कहानी मैं आप सब के साथ इस लिए बाँट रहा हूँ कि कभी भी खुले में सेक्स नहीं करना चाहिए नहीं तो कभी न कभी आप फंस सकते हैं। ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी हुआ।


उस दिन हम दोनों रोज की तरह घर वापिस आ रहे थे, हमारे दोनों की कहानी अब तक स्कूल में सभी को पता चल गई थी और हम जब घर वापिस आ रहे थे तभी हमारा मूड बन गया और हम दोनों अपनी उसी जगह पर चले गए जहाँ पर हम चोदा-चोदाई करते थे। फिर हम बिना दर के वहाँ पर एक दूसरे के साथ लिपट कर वही सब कुछ करने लगे जो एक लड़का लड़की करते हैं लेकिन हमें नहीं पता था कि हमें कोई देख भी रहा है।


अभी हमें लगे हुए करीब दस मिनट ही हुए थे कि हमारी क्लास के दो और लड़के जो कई दिनों से हम पर नजर रखे हुए थे, आ गए और उन्होंने हमें सेक्स करते हुए ऊपर से ही पकड़ लिया जिन्हें देख कर हम पहले थोड़ा से डर गए लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि यार किसी से मत कहना क्योंकि वो रोने लग पड़ी थी।


उन लड़कों ने कहा- हम किसी से कुछ नहीं कहेंगे अगर यह हमें भी फुद्दी दे !


पहले तो वो नहीं मानी लेकिन मैंने उसे मना ही लिया।


फिर क्या था, उसके हाँ करते ही उन दोनों ने अपनी पैंट में से फटाफट अपने लन निकाले जो पहले से ही फर्राटे मार रहे थे।


इतना देख कर वो बोली- मैं दोनों के साथ कैसे कर सकती हूँ एक साथ?


तभी उन में से एक बोला- अब दो नहीं, हम तीनों मिल कर तुम्हें चोदेंगे रानी !


फिर क्या था, मैं तो पहले से ही लगा हुआ था, मैंने अपना लन उसके मुँह में डाल दिया, एक ने उसके हाथ में पकड़ा दिया और एक ने उसकी फुद्दी में घुसा दिया जिसे देख कर अब तो वो बिल्कुल रंडी ही बन गई थी।


अब हम तीनों मिल कर उसे चोद रहे थे और वो भी पूरा साथ दे रही थी। तभी हम बारी बारी झड़ गए और जाने लगे। तभी मेरे दोनों सहपाठियों ने उससे कहा- रानी, अब हम तीनों ही तुझे चोदा करेंगे !


तब उसने भी हाँ में सर हिला दिया, फिर उसके बाद हम जब तीनों इकट्ठे होते तो उसे चोदते थे और वो भी बड़े मजे से फुद्दी देती थी।


यह सिलसला काफी लम्बे समय तक चलता रहा। आखिर जब हमारी बारहवीं की क्लास खत्म हो गई तब वो गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने के लिए चली गई तो हम बॉयस कोलेज में !


उसके बाद करीब एक महीने के बाद उसकी शादी हो गई और आजकल वो दिल्ली में है लेकिन हम अभी तक कुंवारे ही हैं। उसकी पढ़ाई भी बीच में ही रह गई। यह थी मेरी सच्ची कहानी जो मेरे साथ बीत चुकी है। मुझे कमेंट करके जरूर, बताएँ कि कहानी कैसी है।

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा


मैं आप लोगों को आज अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन! बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।

घर की बात बहन के साथ

मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !

लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !

तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !

मैंने उससे कहा- ठीक है !

फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।

दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।

तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?

तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !

तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।

इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।

तो वो बोली- ठीक है !

फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।

थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।

वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।

मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !

मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।

क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !

मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।

इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !

रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !

उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।

वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !

और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !

तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !

मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !

मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !

वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !

और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।

फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !

मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।

वो बोली- भईया, अब क्या?

मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !

तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !

तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !

वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।

मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।

मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।

मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा

मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा


सबसे पहले मैं आपको अपने और अपनी फैमिली के बारे में बता देती हूँ. मेरी उम्र 20 साल है, मेरी अम्मी सईदा की उम्र 42 साल है. मेरी अम्मी घरेलू औरत हैं. अब्बू का नाम हमजा है, उनकी उम्र 45 साल है. वो एक बढ़िया बिजनेसमैन हैं. अब्बू का बिजनेस भी काफी बढ़िया चल रहा है.

मुझे घर में पैसे की जरा सी भी कमी महूसस नहीं होती है. अम्मी अब्बू मेरी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं.


मेरा बड़ा भाई कासिब है, उसकी उम्र 23 साल है. मेरी छोटी बहन अस्मा की उम्र 18 साल है. खूबसूरती में मैं किसी से कम नहीं हूँ. मेरी अम्मी देखने में हमारी मां कम, बड़ी बहन ज्यादा लगती हैं और वे अपनी उम्र से 8-10 साल कम की लगती हैं. मोहल्ले के बहुत लड़के मुझे चोदने की फिराक में रहते हैं.


ये माँ बाप सेक्स कहानी अगस्त की है. उस समय मैंने कालेज में दाखिला लिया ही था और मेरी छोटी बहन अस्मा 12वीं में थी. कासिब कालेज के आखिरी साल में था.


एक दिन रात को जब मैं पेशाब करके अपने कमरे में आ रही थी, तब अम्मी अब्बू के कमरे की लाइट चल रही थी.

मैंने सोचा कि रात को सोते समय अम्मी लाइट बंद करना भूल गई होंगी.


पर तभी मेरे कान में अम्मी की मादक सिसकारियां सुनाई दीं. मैं घबरा गई और सोचने लगी कि अम्मी ऐसे आवाजें क्यों कर रही हैं.


कौतूहलवश ये सब देखने के लिए अम्मी अब्बू के कमरे की तरफ को चली गई और कमरे के अन्दर का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए.


अन्दर कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे थे. अम्मी अब्बू के आगे घोड़ी बनी हुई थीं और अब्बू ने पीछे से अम्मी की चूत में अपना लंड डाल रखा था. वो जोर जोर से अम्मी की चुत में लंड के धक्के लगा रहे थे.


अम्मी भी अपने चूतड़ों को पीछे करके मजे से चुद रही थीं … और ‘अआआह उउउह ओओह ..’ कर रही थीं.


ये सब देख कर मेरे जिस्म में अजीब सी सनसनी फैल गई और मेरी चूत में चीटियां रेंगने लगीं.


मैंने अपना हाथ अपनी कैपरी में डाल लिया. मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई और मैं अपने हाथ से अपनी चूत मसलने लगी.


एक मिनट बाद ही मैंने अपनी कैपरी और कच्छी नीचे सरका दी और पूरी मस्ती में अम्मी अब्बू की चुदाई देखने लगी.


कुछ देर कुतिया बना कर चोदने के बाद अब्बू ने अम्मी की चूत से लंड निकाल लिया.


मैं अब्बू का लम्बा मोटा लंड देख कर डर गई. मैंने सोचा कि क्या लंड इतना बड़ा भी होता है. दूसरी ओर अम्मी की चूत एकदम चिकनी झांट रहित पड़ी थी.


ये सब देख कर मैं बेहद गर्म हो गई थी. मेरे हाथ की उंगलियां लगातार मेरी चूत में चल रही थीं. मेरी चूत पर बहुत घने बाल थे, जिससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था.


अब्बू ने अम्मी की गांड पर हाथ फेर कर कुछ इशारा किया, तो उसके बाद अम्मी चित लेट गईं.


इस पोजीशन में मुझे अम्मी की चूत साफ़ दिख रही थी. उनकी चुत का सुराख खुल बंद हो रहा था. तभी अम्मी के ऊपर चढ़ गए. उन्होंने एक ही झटके में अपना लंड अम्मी की चूत में डाल दिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगे.


तभी मेरे चूतड़ों पर कुछ गर्म गर्म सा चुभने लगा … मैं डर गई.


जब मैंने घूम कर देखा, तो मेरे पीछे मेरा भाई कासिब नंगा खड़ा था और उसका गर्म लंड मेरे नंगे चूतड़ों पर चुभ रहा था. मैं कुछ करती, इससे पहले ही कासिब ने मेरे मुँह पर अपना हाथ रखा और मुझे उठाकर मेरे कमरे में ले जाने लगा.


मैंने कहा- भाईजान, यहां तो अस्मा सो रही है.


ये सुनकर कासिब मुझे अपने कमरे में ले गया और मुझे बिस्तर पर पटक दिया.


अगले ही पल उनसे मेरी टांगों में फंसी मेरी कैपरी और कच्छी टांगों से निकाल दी और मेरा टॉप भी उतार कर मुझे बिल्कुल नंगी कर लिया.


इसके बाद अपने कपड़े उतार कर मेरा भाई खुद भी नंगा हो गया. वो मेरे जिस्म पर अपना हाथ फेरते हुए मेरे होंठ चूसने लगा.


मैं मस्ती में उसके नंगे जिस्म को देखने लगी,


तभी कासिब ने अपने एक हाथ से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- उउउ मेरी हॉट दिलकश … मेरी प्यारी बहना, तू कितनी खूबसूरत है. मैं ऐसे ही बाहर लड़कियों के पीछे पड़ा था और घर में इतना बढ़िया माल है.


ये कहते हुए उसने मेरा एक चूचा मुँह में भर लिया और अपना हाथ नीचे मेरी चूत से लगा कर बोला- उउउह दिलकश तेरी चूत पर तो जंगल उगा है … बहुत बड़ी बड़ी झांटें हैं. तूने कभी अपनी रसीली चूत की सफाई नहीं की क्या?


मैं भाई के मुँह से चूत सुन कर शर्मा गई और चुप रही.


तभी कासिब ने मुझे चूम कर कहा- मेरी प्यारी बहन को शर्म आ रही है. दिलकश अगर तू ऐसे शर्माएगी, तो मजा कैसे ले पाएगी.

वो मेरी चूत में अपनी उंगली डालने लगा.


मैंने कासिब का हाथ पकड़ लिया और धीरे से कहा- भाई, मेरे यहां बहुत खुजली हो रही है.

कासिब मेरा हाथ अपने लंड पर रख कर बोला- आह दिलकश … देख तेरी चूत की खुजली मिटाने के लिए तेरे भाई का लंड कैसे उतावला हो रहा है.


मैं भी शर्म छोड़ कर बोली- भाई, तो फिर जल्दी से ठोक दो अपना लंड अपनी प्यारी और खूबसूरत छोटी बहन की चूत में … और मेरी चुत की आग बुझा दो.

ये कह कर मैंने जोर से कासिब का लंड दबा दिया.


फिर कासिब ने कहा- दिलकश, तूने अम्मी की चूत देखी है … अम्मी की चूत एकदम चिकनी थी. तेरी चूत पर इतने ज्यादा बाल हैं.

मैंने कहा- भाई, कल सुबह सबसे पहले मैं अपनी चूत के बाल साफ कर लूंगी.

कासिब बोला- मेरी प्यारी बहना, तो क्या अभी मजा नहीं करना है.


मैं चुप रही.


कासिब मुझे उठाकर बाथरूम में ले गया और मुझे फर्श पर लिटा दिया. फिर उसने बाथरूम में रखी अपनी शेव करने वाले रेजर से मेरी चूत साफ की और मुझे लेकर फिर से बिस्तर पर आ गया.


बिस्तर पर आकर कासिब ने मेरी दोनों टांगें खोल दीं और मेरी चूत पर एक लम्बा चुम्मा लिया. कासिब के होंठों की गर्मी से मेरी चूत पिघल गई … और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.


मैं मदहोश होकर कासिब का मुँह अपनी टांगों में भींचने लगी और ‘अआह भाई उउह ओहह भाई ..’ करने लगी.

तभी मेरी चूत से रज निकल गया और मेरी मस्ती कुछ शिथिल हो गयी.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मुझे लंड चूसने को बोला. मैंने कासिब का लंड अपने होंठों से हटा कर लंड चूसने से मना कर दिया.


कासिब ने जोर से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- साली छिनाल रंडी कुतिया … मेरा लंड चूसने से मना करती है. चल भाग यहां से … और साली रंडी जाकर किसी रंडीखाने में बैठ कर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा कर अपनी और अपने परिवार की इज्जत बढ़ा.


मैंने भी गुस्से से कहा- साले बहनचोद … अभी तू अपनी बहन को चोद कर परिवार का बहुत बड़ा नाम कर रहा है. मैं अभी ऐसे नंगी ही अम्मी के पास जाकर तेरी करतूत बताती हूँ.

कासिब मुस्करा कर बोला- जा साली रांड … वहां तेरा बाप तेरी चूत का भोसड़ा बनाने के लिए अपना लंड हिला रहा है.

 

मैं कासिब की बात सुनकर दंग रह गई और बोली- भाई ये तू क्या बोल रहा है … तुझे पता भी है, वो मेरे अब्बू हैं?


कासिब मेरा चूचा मसल कर बोला- दिलकश, जब तू मूतने के लिए बाथरूम गई थी, तब मैं अम्मी की चुदाई कर रहा था और मैं और अब्बू दोनों बहुत दिन से तेरी और अस्मा की चुदाई करने की सोच रहे हैं. पर आज मौका मिला है. और अम्मी अब्बू दोनों अपना इंतजार कर रहे हैं. अम्मी अब्बू के सामने पहले मैं तेरी चूत की सील तोडूंगा, फिर अब्बू तेरी … और मैं अम्मी की चुदाई करूंगा.

मैं अभी कुछ बोल पाती कि कासिब मुझे हाथ पकड़ कर अम्मी अब्बू के कमरे में ले गया.


कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे बैठे मेरा इंतजार कर रहे थे. मेरा नंगा जिस्म देख कर अब्बू के मुँह में पानी आ गया और अब्बू मेरे करीब आ गए.


वो मेरा चूचा मसल कर बोले- उन्ह … मेरी प्यारी बिटिया, तुझे चोदने को मेरा लंड बहुत बेचैन है.

ये कहते हुए अब्बू ने नीचे हाथ ले जाकर मेरी चूत को मसल दिया.


मैं ‘आआहहह …’ करके रह गई.

कासिब अम्मी से बोला- साली रंडी, तेरी बेटी अपने भाई का लंड चूसने से मना कर रही है … बोल इससे कि पहले ये मेरा और अब्बू का लंड चूसे, वरना हम दोनों बाप बेटा एक साथ इसकी चूत में लंड डाल कर साली रंडी की चूत का भोसड़ा बना देंगे.

 

अम्मी ये सुनकर भाई और अब्बू के बीच में बैठ गईं और कासिब और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगीं.


भाई और अब्बू दोनों मेरे चूचे मसलने और चूसने लगे. मैं ये सब देख कर मस्त हो गई थी और मदहोशी में ‘अअअआआ अब्बू … उन्ह भाई … आहहह ..’ करने लगी.


अम्मी कासिब और अब्बू का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश मेरी प्यारी बिटिया, अब तू भी अपने भाई और अब्बू का लंड चूस, वरना ये दोनों तेरी चूत को ऐसे फाड़ेंगे कि फिर तू कभी चुदने की बात भी नहीं सोचेगी.


उसी समय भाई ने झट से अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मैंने जब कासिब का लंड अपने मुँह में लिया, तो कासिब के लंड की मादक महक मुझे गर्म कर गई.


जब भाई के लंड की खुशबू मेरी सांसों में मिली, तो मैं मदहोश होकर अपने भाई कासिब के लंड को चूसने लगी. तभी अब्बू ने भी अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया. मैं अपने भाई और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगी.


कासिब का लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था. कासिब का लंड चूसने में मुझे मजा भी ज्यादा आ रहा था.


कुछ देर बाद अब्बू मेरे मुँह में झड़ गए और मैं अब्बू का वीर्य पी गई.


फिर कासिब और अब्बू का लंड छोड़ कर मैं बोली- भाई, आपका लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा है.


अम्मी ने कहा- दिलकश, तेरे अब्बू अब ज्यादा उम्र के हो गए हैं. अब तो तेरे अब्बू मेरी चुदाई भी ढंग से नहीं कर पाते हैं. तू तो अभी जवान है … इसलिए तेरी चूत की खुजली तो सिर्फ कासिब का लंड ही शांत कर सकता है.


मैंने कहा- अम्मी, भाई का लंड तो बहुत बड़ा है … और मुझे इससे चुदवाने में बहुत डर भी लग रहा है.


अम्मी ने मुझे ढांढस बंधाते हुए कहा- दिलकश तू डर मत, जब कासिब का लंड तेरी चूत में घुसेगा, तब तुझे थोड़ी देर ही दर्द होगा. फिर तो तेरे भाई का लंड, तेरी चूत में खुद ही अपना रास्ता बना लेगा और तुझे बहुत मस्त मजा आएगा.


ये बोल कर अम्मी ने कासिब को कहा- साले मादरचोद … अब जल्दी से अपनी बहन को चोद कर मादरचोद के साथ साथ बहनचोद भी बन जा.


अम्मी ने मेरी दोनों टांगें खोल कर कासिब का लंड मेरी चूत के सुराख पर रख दिया.


अब्बू ने कहा- कासिब … अब जल्दी से तू दिलकश की चुदाई कर … तेरे बाद मैं भी अब अपनी बेटी को अपनी बेगम बनाने को उत्सुक हूँ. फिर हम सब घर में शौहर बीवी की तरह रहेंगे और तेरी मां और दोनों बहनें तेरी और मेरी बीवी होंगी. तू अपनी मां और बहन का शौहर बन जाएगा.


ये सुनकर कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रख कर अभी धक्का लगाने ही वाला था कि तभी अस्मा कमरे में आ गई और बोली- अब्बू, आपने और भाई ने दीदी और अम्मी को तो अपनी जोरू बना लिया … पर मेरा क्या होगा?


अस्मा को देख कर हम सब चौंक गए. अस्मा कासिब का लंड पकड़ कर बोली- भाई, मुझे भी आपकी और अब्बू दोनों की बीवी बनना है.


वो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई. अस्मा का मस्त चिकना जिस्म देख कर कासिब और अब्बू, अस्मा पर टूट पड़े.


अम्मी ने कहा- सालों, ये रंडी कहीं भागी नहीं जा रही. जरा सब्र से काम लो, इसकी चूत का भोसड़ा भी तुम दोनों के लंड ही बनाएंगे.


ये बोल कर अम्मी, फिर से अब्बू और कासिब का लंड चूसने लगीं. अब्बू और कासिब मेरे और अस्मा के चूचे मसलने लगे.


कमरे में मादक आवाजों का संगीत गूंजने लगा … अअअआआ उन्ह ओओओहह की सिसकारियां गूंजने लगीं.


अम्मी, अब्बू और कासिब का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश, चल अब तू अपनी टांगें खोल कर लेट … और अस्मा तू घोड़ी बन जा.


जब मैं टांगें खोल कर लेट गई और अस्मा घोड़ी बन गई.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रखा और दूसरी तरफ अब्बू ने अपना लंड अस्मा की गांड से लगा दिया.


कासिब ने एक धक्का लगाया और उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में फंस गया और मैं ‘आआहहह मर गई ..’ चिल्ला उठी.


तभी कासिब ने फिर से एक धक्का लगा दिया और उसका लंड मेरी चूत में घुसता चला गया.

मैं दर्द से तड़पने लगी.


कासिब ने मेरे दोनों चूचे अपने हाथ में ले लिए और जोरों से मसलने लगा. चूचे मसलने के साथ ही वो धीरे धीरे लंड के धक्के भी लगाने लगा.

कुछ ही धक्कों में कासिब का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और मुझे भी दर्द के साथ साथ मजा आने लगा.


मैं ‘अआआ उन्ह …’ करके अपने चूतड़ों उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत में लेने लगी.


दूसरी तरफ अब्बू ने अस्मा की गांड में अपना लंड डाल दिया और अस्मा भी दर्द से चिल्लाने लगी.


मगर मुझे मजा लेते देख कर वो बोली- आपा, तुझे तो बहुत मजा आ रहा है … और यहां मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा है. मुझे जरा सा भी मजा नहीं आ रहा.


अम्मी ने कहा- अस्मा, गांड मारने और मरवाने में मजा नहीं आता. असली मजा तो चूत चुदवाने में आता है.


उन्होंने आगे कहा- अभी कासिब के लंड से दिलकश की चूत की सील टूटी है. कुछ देर में दिलकश की चूत अपना रज छोड़ देगी तो कासिब का लंड दिलकश की चूत में अपना रास्ता अपने आप बना लेगा. उसके बाद जब कासिब तेरी चूत की सील तोड़ कर तेरी चुदाई करेगा, तब तुझे भी दिलकश जैसे मजा आएगा.


अस्मा ‘उन्ह आंह ..’ करते हुए अपनी गांड में अब्बू के लंड को झेलने लगी.


अम्मी ने अब कासिब से कहा- साले मादरचोद … पहले मेरा बेटा बना, फिर शौहर बना और अब साले मेरी सौतन बनी बेटी को चोद कर मेरा जमाई भी बन गया. साले अच्छे से चोद अपनी बहन को वरना तेरी गांड पर लात मारूंगी.


ये सुनकर कासिब जोर जोर से मुझे चोदने लगा.


यही कहानी सेक्सी लड़की की आवाज में सुन कर लुत्फ़ उठायें.


मैं अपने चूतड़ों को उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत की जड़ तक लेते हुए मजा लेने लगी- अअअआ … उन्ह … ओओओहह भाई … आह और जोर से …


“चोद दे अपनी बहन को … आंह साले भैन के लौड़े और जोर से चोद … तेरा लंड तेरी बहन की चूत में आखिरी छोर तक जा रहा है. आह मुझे बहुत मजा आ रहा है साले जोर से चोद मुझे … अअअआआ साले बहनचोद च..चोओओद.” यही सब कहते हुए मैं एकदम से अकड़ उठी और मेरी चूत से रज निकल गया.


मैं कासिब को लंड निकालने को बोलने लगी.

मगर कासिब पर तो जैसे मुझे चोदने का भूत सवार था. वो मुझे दनादन चोदने लगा और मेरे दोनों चूचे मसलने लगा.

कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके

कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके, Kaamwali Bai Ki Chudai, naukarani ki chudai


मेरा नाम बबलू गुप्ता है, मैं शादीशुदा हूँ किंतु जॉब के कारण कोलकाता में अकेले रहता हूँ. आज मैं आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. बात तब की है, जब मुझे कोलकाता में आए हुए एक साल हो गया था और मैं अपनी बीवी को मिस कर रहा था. मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि काम वाली बाई भी दे देती है, यदि उसको सही से पटा लिया जाए. मेरे यहाँ भी एक बाई काम करती थी, जिसका नाम ममता था.. वो दिखने में बहुत सुन्दर थी और दो बच्चों की माँ थी, फिर भी अपने आपको बड़ा मेन्टेन करके रखा हुआ था.

अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. आखिर एक जिस्म की प्यास तो जिस्म से ही मिटती है. बाकी सब तो सिर्फ मन बहलाने के उपाय हैं.

अब तक ममता से मेरी ज्यादा बात नहीं होती थी, हम दोनों बस अपने काम से काम ही रखते थे. वो मेरे फ़्लैट पर सुबह और शाम दोनों समय आती थी. आज तक कभी किसी औरत को पटाने के बारे में नहीं सोचा था, वो भी सिर्फ सेक्स के लिए, तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे बात कैसे की जाए और अपना काम निकलवाया जाए. डर भी लग रहा था कि कहीं बुरा मान गई तो क्या होगा.. कहीं लेने के देने न पर जाएं.

पर कहते हैं न कि जब लंड खड़ा हो तो उस समय सिर्फ चूत ही दिखाई देती है और जब तक की वो शांत न हो जाए, कुछ समझ में नहीं आता. मेरी भी हालत कुछ इसी तरह की थी कि जब ममता काम करके चली जाती तब सोचता चलो कल उससे बात करूँगा, पर जब आती तब हिम्मत ही नहीं होती.

इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था और मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी. अब तो मुठ मारने से भी चैन नहीं मिल रहा था. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा. पर चैन मिलने की जगह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर एक दिन सोच ही लिया, जो भी होगा देखा जाएगा, अब तो ममता से बात करके ही रहूँगा.

ममता जो कि दिखने में बिल्कुल सेक्सी माल थी, उसका फिगर भी मस्त था. उसका 32-28-36 का फिगर लंड खड़ा कर देता था. उस पर उसका गोऱा रंग, बड़ी बड़ी आँखें.. आह.. वो अक्सर साड़ी नाभि से नीचे बाँध कर पहना करती थी.

Kaamwali Bai Ki Chudai


जिस दिन मैंने पक्का कर लिया था कि अब उससे बात करना ही है, उसके अगले दिन में व्हिस्की की एक बोतल लेकर घर आया और शाम से ही पीने बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा.

लगभग एक घंटे बाद वो आई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

काम खत्म करके जब वो जाने लगी तब मैंने उसे बुलाया और कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

वो मेरे रूम में आई और मुझसे पूछने लगी- क्या बात है?

मैंने उससे कहा कि भाभी आप बुरा मत मानना..

वो बोली कि क्या बात है.. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

तब मैंने उसको बोला- मेरा एक दोस्त है और उसको एक लड़की चाहिए, उस काम के लिए.. क्या आप किसी ऐसी लड़की को जानती हैं.

अब वो गुस्से में आकर मुझसे बोली- आप मुझे क्या समझते हैं. आइन्दा इस तरह की बात मुझसे मत कीजिएगा.

और वो गुस्से में मेरे फ्लैट से बड़बड़ाते हुए चली गई.

मेरी तो गांड फट गई थी, पिटे हुए मुँह जैसी हालत देखने लायक थी. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये किसी से कुछ बोल न दे. मेरा नशा और लंड की गर्मी दोनों ही शांत हो गए.

अब समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ. फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ.

मुझे उस समय यही ठीक लगा, मैंने मुठ मारी और सो गया. सुबह ममता के आने से पहले ही मैं अपने ऑफिस चला गया.

अगले दिन भी मैं उसके आने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गया. शाम को मेरे लौटने के करीब एक घंटे बाद ममता काम करने आई. आज मैं किचन में देखने भी नहीं गया कि वो क्या कर रही है, वो भी कुछ पूछने नहीं आई कि क्या बनाना है.. वो अपना काम खत्म करके चली गई.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. फ़िर शनिवार को शाम में वो अपने समय से जल्दी ही आ गई और अपना काम करने लगी.

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फिर जब वो काम करके वापस जाने लगी तो मेरे पास मेरे कमरे में आई और बोलने लगी कि क्या हुआ है, अब तो आप बात भी नहीं करते?

मैं चुप ही रहा तो वो फिर से बोली- देखिए मैं ऐसी औरत नहीं हूँ.

जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. इस वजह से उसकी चूची के उभार साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.. और इसी वजह से मेरे पेंट के अन्दर मेरे लंड खड़ा हो रहा था, जिसे छिपा पाना भी मुश्किल हो रहा था.

ममता मुझसे बात कर रही थी और मेरी नज़रें उसके चूची के पहाड़ों पर टिकी थीं जिसे उसने भी पकड़ लिया और अपनी साड़ी ठीक करने लगी.

फिर एकाएक मुझसे बोली- मैं आपसे बात कर रही हूँ और आप कहाँ देख रहे हैं?

मैंने उससे बोला कि मैंने तो आपको नहीं बोला था देने के लिए, मैंने तो आपसे पूछा था कि आप किसी को जानती हैं, जो देगी और बदले में पैसे लेगी. पर आप ही बुरा मान गईं. यदि मुझे आपको बोलना होता कि आप दे दो, तो मैं अपने दोस्त के लिए थोड़ी बात करता.. अपने लिए कोशिश नहीं करता?

तब ममता ने चौंक कर मुझे देखा और बोली- क्या बोला आपने..?

मैं बोला- जो आपने सुना!

तब वो बोली- नहीं एक बार और बोलिए.. जो अभी अभी आपने बोला.

तब मैं बोला कि यदि आपको बोलना होता कि आप अपनी दे दो, तो मैं अपने लिए बोलता.. न कि दोस्त के लिए.

वो बोलने लगी- छी छी.. मुझे नहीं मालूम था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हो.

मैंने उससे बोला- इसमें खराबी क्या है? आप सुन्दर हैं, जवान हैं तो क्यों नहीं..!

इस बार मैंने भी नोटिस किया कि वो भी चेहरे पर आश्चर्य का भाव लिए हुए वहीं पर खड़ी रही. मुझे भी लगा कि इसे भी अच्छा लग रहा है.

मैं अपने बिस्तर से उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया.. मुझे अपने सामने एकाएक पाकर वो थोड़ा घबरा गई. वो पीछे को होने लगी और दीवार से सट कर खड़ी हो गई, क्योंकि अब पीछे हटने के लिए जगह नहीं थी.

वो बेचैनी में मेरी तरफ देखकर बोलने लगी- ये आप क्या कर रहे हैं.. आप पीछे हटिए.

लेकिन मैंने आगे बढ़ कर उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला कि भाभी आप मुझे अच्छी लगती हो, क्या आप मुझे दोगी?

ममता ने हकलाते पूछा- क्या?

अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने भी बोल दिया कि आपकी चूत.. भाभी बस एक बार आप मुझसे चुदवा लो प्लीज सिर्फ एक बार..

वो दबे स्वर में बोली- आप पागल हो गए हैं.

वो मुझे धक्का देकर भाग गई. मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी तो मैं लड़खड़ाते हुए अपने बिस्तर पर गिर गया और वो दरवाज़ा खोल कर चलती बनी.

मैं थोड़ा उदास हो गया कि आज चौका मारने का अच्छा मौका था लेकिन हाथ से निकल गई, फिर सोचा कि चलो अब तो ये अपनी चूत दे ही देगी.. और एक बार दे दी तो फिर तो जब चाहो तब उसकी चूत और मेरा लंड खेल सकेंगे.

यही सोचता हुआ कि चलो अब तो एक दो दिन का कष्ट और है.. उसके बाद तो मौज ही मौज होगी.

मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने बेड पर चला गया. सोने के पहले ममता का नाम लेकर मुठ मारी और सो गया. यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

लेकिन अगले दो दिन मैं उसका इंतज़ार करता रहा और अपने लंड को समझाता रहा कि चिंता मत कर, चूत का इंतज़ाम हो गया है और मुठ मारकर सो जाता.

दो दिन से चार दिन, फिर पांच दिन इसी तरह वह पूरे सात दिन के बाद आई.. लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सजधज कर आई थी. उसे देखते ही लंड तन कर खड़ा हो गया और ममता भी तिरछी नज़र से मेरे लंड के तरफ देख रही थी.

जब वो किचन में जाने लगी, तब मैंने उसे अपने कमरे में आने के लिए बोला लेकिन वो बोली- नहीं, जो बोलना है यहीं बोलिए.. मुझे आपके बैडरूम में नहीं जाना है.. आपकी नीयत ठीक नहीं है.

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी तो मैं भी उससे बोला- तुम इतना सजधज कर आओगी भाभी.. तो क्या होगा और मेरी नियत नहीं ख़राब हुई है बल्कि आपको देखकर मेरा लंड बिगड़ गया है.

इस पर उसने इतरा कर बोला कि आपका वो बिगड़ गया है, तो आप उसको सीधा करो.. इसमें मैं क्या करूँ.

इसी तरह की बात करते हुए वो जब रोटी बनाने लगी, तब मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा, मैं कभी इधर कभी उधर.. उसके जिस्म पर अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो बोली- मुझे खाना बनाने दीजिये नहीं तो मैं लेट हो जाऊँगी.

मैंने उससे बोला- मुझे इसकी नहीं, किसी और चीज की भूख लगी है.

वो बोली- उसके लिए मैं कुछ नहीं कर कर सकती, आप जाओ यहाँ से.

अब मैं भी गुस्से से किचन से निकल कर अपने बेडरूम में चला आया और लेट गया. आज मैं उसके रहते ही अपने बेडरूम में लंड निकाल कर उसका नाम लेकर धीरे धीरे से हिलाने लगा और उसका इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे पता था कि जाने के पहले वो मेरे कमरे में जरूर आएगी.

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.. वो अपना काम खत्म कर जब जाने को हुई तब उसने मुझे आवाज़ लगाई, लेकिन मैं चुप रहा. तब उसने दो तीन बार और आवाज़ दी. जब मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरे बेडरूम में आई और मेरे हाथ में लंड को देखकर.. उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा.

कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.

अब मैंने उसके सामने खड़े होकर एक हाथ उसके कंधे पे रखा और दूसरे से उसका नाम लेते हुए लंड को सहलाता रहा.

वो बोलने लगी- आप बहुत गंदे हो, आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो? मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले.

मैं बोल पड़ा- भाभी जब लंड खड़ा होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. आप मान जाओ.. बस एक बार मेरे लंड को अपने चूत में डालने दो.

वो बोली- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है.

फिर मेरे बार बार कहने पर वो बोली कि पहले आप सच बोलो, उस दिन आप जो लड़की खोज रहे थे वो अपने दोस्त के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोज रहे थे.

मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. लेकिन अब तो मैंने आपको सच बोल दिया, अब तो आप मुझे चोदने दो प्लीज..

वो बोली- नहीं.. मुझे सोचने का कुछ समय चाहिए.

मैं बोल पड़ा कि आप मुझे चोदने दो बदले में मैं आपको पैसे भी दे दूंगा.

वो बोली कि यदि पैसे के लिए मुझे यह काम होता तो मैं आपके यहाँ नौकरानी का काम क्यों करती.. यही काम न करने लगती.

उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया. इसी तरह उसके मन में जो भी आता गया, वो बोलती रही और मैं चुपचाप सुनता रहा.

फिर वो बोली कि मुझे देर हो रही है, अब चलना चाहिए.

तब मैं बोल पड़ा- भाभी पैसे नहीं चाहिए तो मत लो, पर एक बार तो दे दो.

वो बोली कि मैंने बोला न कि मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए कि अपना जिस्म आपको दूँ कि नहीं.

तब मैं भी बोल पड़ा- ठीक है पर आज तो अपने हाथ से ही मेरी मुठ मार दो.. कम से कम आज तो ठंडक कर दो.

वो आनाकानी करने लगी- नहीं.. जब मैं बोल रही हूँ कि मुझे समय चाहिए आप तब भी नहीं मान रहे हैं.

फिर मेरे बहुत मनाने पर बोली- ठीक है लेकिन फिर कभी नहीं और यदि आपने जोर जबरदस्ती की तो मैं काम छोड़कर चली जाऊँगी.

मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैंने भी मौका पाकर ममता की चूचियों पर हाथ रखकर सहलाने लगा, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहा- नहीं ये मत कीजिये.. नहीं तो मैं चली जाउंगी.

फिर मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लंड का मजा लेता रहा. उसने मेरे लंड की मुठ मारकर मेरे माल को गिरा दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक करके चली गई.

उसके अगले दिन से वो आती और अपना काम करके चली जाती. मैंने उससे नहीं पूछा कि उसने क्या सोचा, बस उससे इधर उधर की बातें करता रहता, जब तक वो रहती.

ऐसे ही 20-25 दिन बीत गए. फिर एक दिन मैं व्हिस्की की बोतल लेकर घर गया और टीवी पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए व्हिस्की पीने लगा.

तभी दरवाजे की घन्टी बजी तो मैंने टाइम देखा, अभी सात बज रहे थे. मैंने मन ही मन सोचा कि इस समय कौन आ गया क्योंकि ममता आठ बजे आती है. इसी उधेड़बुन में मैंने दरवाज़ा खोल तो ममता गेट पर खड़ी थी.

वो मुझसे हँसते हुए बोली- हटिये, अन्दर आने दीजिये.

मैं गेट से हटा और उसे अन्दर आने दिया. अन्दर आते समय ममता के होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी. अन्दर आने के बाद मैंने उसके हँसने का कारण पूछा तो कहने लगी कि वो तो ऐसे ही हँस रही थी.

अन्दर आकर जब उसने व्हिस्की की बोतल और गिलास देखा और टीवी को बंद देखा तो बोल पड़ी- लगता है कि आज फिर मूड बनाया जा रहा है.

मैंने कहा- क्या करूँ तुम देने के लिए मानती ही नहीं हो तो टीवी देख कर ही काम चला रहा हूँ. आज एक महीना हो गया लेकिन तुम अभी तक सोच ही रही हो.

इस पर उसने जो कहा, उसे सुनकर मैं तो चौंक ही गया. ममता बोली- आपने ही तो नहीं पूछा कि मैंने क्या सोचा.

मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं.

ममता बोली- आग मुझे नहीं बल्कि आपके वहां पर लगी है, तब मैं क्यों आपको बिना पूछे बोलती कि मैंने क्या सोचा.

अब उसकी इतनी पॉजिटिव रिस्पांस पाकर मैंने टीवी को चालू किया और उसे पकड़ कर अपने गोद में बैठा लिया और बोला कि अब बोल भी दो ममता भाभी.. क्या मेरा लंड तुम्हारी चूत की गहराई में छिपी ज़न्नत का मजा पा पाएगा या नहीं.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

ममता बोली- अपने उसको संभालिये.

मैं बोला- अब बोल भी दो.

वो बोली- देखिये उस दिन जैसे किया था वो करने को राज़ी हूँ और आप ऊपर से सब कुछ कर सकते हैं.. लेकिन मैं आपका अपने अन्दर नहीं लूँगी.

मैं बोला- ये क्या बात हुई.. हाथ से तो मैं भी अपने आप कर सकता हूँ.. फिर क्या फायदा..?

वो बोली- ज्यादा से ज्यादा आप मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल कर चूस सकते हैं या सहला सकते हैं और पेटीकोट भी खोल दीजिये.. लेकिन पैंटी नहीं खोलूंगी और आप मेरे अन्दर अपने उसे नहीं डालेंगे.

एक तो शराब का नशा और दूसरी ब्लू फ़िल्म की खुमार.. और अब उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया. मैंने उससे बोला कि क्या फायदा.. जात भी गवाऊं और भात भी नहीं खाऊं. तुम जाओ बाहर.. मैं किसी और को खोज लूंगा.

वो भी बड़बड़ाते हुए चली गई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

अब मैं भी डीवीडी बंद करके टीवी पर कुछ कॉमेडी सीरियल देखने लगा. शराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

जब कुछ देर बाद दिमाग हल्का हुआ तो मैंने सोचा कि ममता भाभी तो अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार ही है, अब खुल कर नहीं बोल पा रही है या सिर्फ मुझे तरसा रही है. क्योंकि जब वो सब कुछ खोलने के लिए मान ही गई है तो उसे भी पता है कि इतना करने के बाद तो उसे भी चुदना ही है.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने जल्दी से शराब का गिलास नीचे रखा और लपक कर किचन में गया और ममता से बोला- भाभी.

वो गुस्से में बोली- क्या है?

तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा.

ममता बोली- अब क्या हुआ उस समय तो बड़े गुस्से में बोले थे कि दूसरी खोज लेंगे तो अब जाइए, मुझे अब आपके साथ उतना भी नहीं करना.

मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.

वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर, मेरे सीने में ममता की तनी हुई चूचियों के दबे होने का कोमल सा एहसास हो रहा था और वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उसकी आँखों में देख रहा था. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गुलाब की तरह लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब ममता भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी.

अब उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसके गालों.. कंधों और कानों को चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. अब हमारी साँसों की गर्मी एक दूसरे के जिस्म को छूने लगीं. अब जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लग रहे थे. मैंने ममता की साड़ी को उसके जिस्म से अलग किया और उसकी नग्न नाभि को अपनी जीभ से सहलाने लगा. ममता मेरे बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी. मैं उसकी नाभि को चूमते हुए धीरे से अपने हाथ को उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा.

क्या मुलायम और कड़क चूचियां थीं उसकी, दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने अपना सर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा- तो भाभी चूत चुदवाओगी अब?

वो बोली कि नहीं.. मुझे मालूम है मुझे क्या करना है.

फिर मैंने एक एक कर उसके ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ और ब्रा दोनों को एक साथ ही उसके जिस्म से अलग कर दिया. उसकी नंगी चूचियों पर से नज़र ही नहीं हट रही थी, क्या सुन्दर नज़ारा था, गोरी गोरी.. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

अब बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मैं भाभी की चूचियों को मुँह में भर कर चुभलाने लगा और ममता भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी पेंट के अन्दर घुसा दिया. भाभी मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था.. दूसरी चूची को अपने एक हाथ से सहला और दबा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं ममता भाभी की चूची चूसते हुए, एक हाथ से उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया और उसे उसके मखमली जिस्म से उतार फेंका.

इसके साथ ही अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत की फाँकों के बीच से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे ऐसा करते ही ममता जोरों से चिहुंक उठी और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी उंगलियों का दबाव भी मेरे लंड पर बढ़ गया.

अब अपने को रोक पाना मुश्किल था तो मैं जल्दी से उससे अलग हुआ. मैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

मैंने कामवाली ममता भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी मस्त चूचियों के बीच में अपना लंड घुसा कर आगे पीछे करने लगा. मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था, कुछ देर तक इसी तरह उसकी चूचियों को लंड से चोदता रहा. फिर नीचे उतर कर ममता के बगल में लेट गया. इसके बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अपने दोनों हाथों को उसकी पैंटी के अन्दर पीछे से डालकर उसके चूतड़ों को सहलाना चालू कर दिया. ममता भी पूरे जोश में आकर मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैंने ममता को अपने नीचे लिटाया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो ममता ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया. उसके मुँह की गर्मी जब लंड पर पड़ी तो एक अजब तरह का सुकून मिला और करीब 5 मिनट के बाद मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसे चित करके मैं उसकी जांघों के बीच में अपना मुँह ले जाकर उसकी जांघों को चूमने लगा. भाभी की पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत की फाँकों को सहलाते हुए अपने दो उंगलियों को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया. मैं उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा.

फिर अपना सर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आँखें बंद किए हुए चूत की चुदाई का मजा ले रही और हल्की हल्की आहें भर रही थी.

मैं इस मौके का फायदा उठाकर उसकी पैंटी को निकालने लगा, पहले तो उसने भी कमर उठाकर मदद की, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि मैं क्या कर रहा हूँ तो तुरंत ही उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोलने लगी- ये नहीं, ये नहीं.

मैं उसको बोला- ममता भाभी मैं सिर्फ आपकी चूत को देखूंगा और हाथों से ही सहलाऊँगा, लंड अन्दर नहीं डालूँगा.

तब जाकर उसने अपनी पैंटी उतारने दी.

अब अपनी आँखों के सामने ममता की कसी हुई और फूली हुई चूत को देखकर तो मेरे होश ही उड़ गए. क्या मस्त चूत थी, गोरी गोरी.. दोनों फाँकें आपस में चिपकी हुईं. ममता के कामरस से भीगी हुई चूत देखकर तो मेरा लंड और भी कड़ा हो गया.

तभी मैंने उसकी चूत के फाँकों को अलग किया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया. ममता बेचैन होकर मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से सहलाने लगी.

इसके बाद तो उसकी चूत में लंड घुसाए बिना चैन नहीं आने वाला था. अब काफी फोरप्ले हो चुका था. सिर्फ ममता की चूत में लंड डाल कर उसे चोदना बाक़ी रह गया था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.. उसकी चूची को अपने हाथों से दबाता हुआ.. ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

फिर उसकी बाईं चूची की घुंडी को अपने मुँह में लेकर उसकी लाल लाल मख़मली चूची का दूध पीने लगा और अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद उसकी चूची को छोड़ कर ऊपर हुआ और ममता के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुभलाने लगा और अपने लंड को उसकी चूत पर सहलाने लगा.

तभी ममता ने अपने होंठों को मेरे होंठों से अलग करते हुए कहा- लंड अन्दर नहीं डालना है.

मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

ये कह कर मैं फिर से उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूची को भी साथ साथ दबाने लगा और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड को सहलाने भी लगा.

कुछ पलों बाद मैंने देखा कि ममता आँख बंद करके पूरे मज़े में है और उसने अपनी जांघों को भी थोड़ा ढीला छोड़ दिया है. उसके ऐसा करते ही मैंने अपने लंड को एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड ममता की चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया.

मेरे ऐसा करते ही ममता अपनी आँखें खोलकर मुझे धक्का देने लगी, किन्तु मैंने उसे जोर से अपने से चिपका लिया और लंड को भाभी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ देर बाद ममता भी साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर चुदवाने लगी.

अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

इतना मजा आ रहा था कि ममता ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया था. करीब 15 मिनट तक लगातार उसकी चूत को चोदने के बाद अब लंड में भी प्रेशर बनने लगा था. मैंने ममता की चूत को अपने माल से भर दिया. तभी ममता ने भी अपना माल छोड़ दिया और मेरे साथ चिपक गई.. और मैं भी उसके ऊपर लेट गया.

कुछ देर बाद जब अलग हुए तो देखा कि चादर हमारे कामरस से पूरी तरह भीग चुका था और हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था.

यह थी ममता के साथ मेरी चुत चुदाई की शुरुआत. मैं उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को मेरी इंडियन सेक्स स्टोरीज पसंद आई होगी. प्लीज अपने विचार पर जरूर भेजें.

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