Articles by "Antarvasna Story"

adult stories in hindi Antarvasna Story baap beti ki chudai ki kahani bahan ki chudayi balatkar ki kahani behen ki chudayi beti ki chidai bhabhi ki chudai bhai bahan ki chudai bhai bahan sex story in hindi bhatiji ki chudai ki kahani bollywood actress ki chudai ki kahani bollywoos sex stories in hindi chacha bhatiji ki chudai ki kahani Chachi ki Chudai chachi ki chudai ki kahani chhoti bahan ki chudai chhoti ladkai ki chudai chudai ki kahaniya dehati chudai ki kahani Desi Sex Stories devar bhabhi ki chudai ki kahani Didi ki Chudai Free Sex Kahani fufa ne choda gand chudai gand chudai ki kahani gangbang ki kahani Ghode ke sath desi aurat ki sex story girlfriend ki chudai gujarati bhabhi habshi lund se chudai hindi sex stories Hindi Sex Stories Nonveg hindi urdu sex story jija saali sex jija sali ki chudai ki kahani Kahani kunwari choot chudai ki kahani Kunwari Chut ki Chudai Losing virginity sex story mama bhanji ki chudai ki kahani mama ki ladaki ki chudai marathi sex story mote lund se chudai ki kahani muslim ladaki ki chudai muslim ladki ki chuadi nana ne choda naukarani ki chudai Naukrani sex story New Hindi Sex Story | Free Sex Kahani Nonveg Kahani Nonveg Sex Story Padosi Ki Beti pahali chudai pakistani ladaki ki chudai Pakistani Sex Stories panjaban ladki ki chudai sali ki chudai samuhik chudai sasur bahu ki chudai sasur bahu ki sex story sasural sex story school girl ki chudai ki kahani seal tod chudai sex story in marathi student ki chudai suhagraat ki chudai urdu chudai ki kahani in urdu Virgin Chut wife ki chudai zabardasti chudai ki kahaniya एडल्ट स्टोरी कुंवारी चूत की chudai गर्लफ्रेंड की चुदाई गांड चुदाई की कहानियाँ जीजा साली सेक्स पहलवान से चुदाई पहली बार चुदाई बलात्कार की कहानी बाप बेटी की chudai की सेक्सी कहानी मामा भांजी चुदाई की कहानी ससुर बहु चुदाई सेक्स स्टोरी
Showing posts with label Antarvasna Story. Show all posts

स्कूल में कुंवारी चूत चोदी

स्कूल में कुंवारी चूत चोदी


बात स्कूल के दिनों की है जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था, तब हमारी क्लास में एक बहुत ही खूबसूरत लड़की पढ़ती थी, जिस पर हर कोई लाइन मारता था लेकिन वो मुझ पर मरती थी और मेरा भी दिल उसे चोदने को बहुत करता था। लड़की इतनी खूबसूरत थी कि हर एक का लन उसे देख कर खड़ा हो जाता था।


एक दिन मैंने उस लड़की से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया और वो भी झट से मान गई जैसे वो पहले ही तैयार बैठी थी। उस दिन हम दोनों इकट्ठे पैदल स्कूल से आये तो रास्ते में प्यार भरी बातें ही की। धीरे धीरे हमारा प्यार आगे बढ़ा तो मैंने उसे हाथ भी लगाना शुरू किया। आखिर वो घड़ी आ गई जिसका मुझे बेसब्री से इंतजार था, मैं उसके नाम की कई बार मुठ भी मार चुका था।


एक दिन जब हम घर को वापिस आ रहे थे, रास्ते में मैंने उसको पकड़ कर किस की। पहले तो उसने ना की लेकिन जब मैंने उसके होंटों को अच्छे से चूमा तो वो भी मेरा साथ देने लगी। उसने स्कर्ट और कमीज पहनी हुई थी, मेरा हाथ धीरे धीरे उसके मम्मों पर गया और मैंने उन्हें मसलना शुरू कर दिया।


वो भी गर्म हो गई, मैंने उसकी कमीज के ऊपर वाले दो बटन खोल कर अन्दर हाथ डाल दिया और उसके मम्मों को जोर से मसलने लगा। पहले तो उसने मुझसे छुटने की कोशिश की लेकिन मैंने सोचा कि अगर मैं अब कुछ न कर पाया तो कभी भी कुछ नहीं कर पाऊँगा।


फिर मैंने होंसला सा करके उसकी स्कर्ट के अन्दर भी हाथ डाल दिया। वो और गर्म हो गई। फिर मैंने अपना लन अपनी पैंट में से बाहर निकाल दिया। तब तक उसे भी मजा आने लग गया था। जब मैंने अपना लन उसे पकड़ा दिया तो वि शरमा गईई और मेरी ओर देखने लगी। मैंने उसकी शर्म दूर करने के लिए उसका हाथ पकड़ कर आगे पीछे करना शुरू कर दिया और उसकी स्कर्ट को ऊपर उठा दिया और उसकी फुद्दी के साथ अपना लन रगड़ दिया। वो भी अब पूरी तैयार हो गई थी। मैंने उसकी गीली हुई फुद्दी में अपना लन घुसाने की कोशिश की लेकिन उसकी फुद्दी बड़ी कसी थी क्योंकि अभी तक उसका मुहूर्त नहीं हुआ था, फिर मैंने जोर लगा कर अपना सुपारा उसके अन्दर थोड़ा घुसो दिया तो वो दर्द से बिलबिला उठी। मैंने उसे दर्द से निजात दिलाने के लिए उसकी चूची अपने मुँह में ले ली और उसे मजा आने लगा।


फिर मैंने अहिस्ता अहिस्ता अपना लन उसकी फुद्दी में घुसेड़ना शुरू किया और वो भी मेरा साथ देने लगी। अभी मैंने अपना आधा लन ही उसके अन्दर डाला था, वो मजा लेने लगी, फिर मैंने आहिस्ता से अपना पूरा लन उसकी फुद्दी में डाल दिया और अन्दर-बाहर करने लगा।

School Me Kuwari Choot Chodi


इस चुदाई का मजा मैंने उसे घोड़ी बना कर लिया तो वो थोड़े ही समय के बाद झड़ गई और उसे बहुत मजा आया लेकिन झड़ने के बाद जैसे ही वो मेरा लन बाहर निकलने लगी तो मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया।


उसने मुझे छोड़ने को कहा तो मैंने कहा- रानी, अभी तो तेरा काम हुआ है, मेरा अभी बाकी है।


उसने कहा- तेरा काम कैसे होगा?


तो मैंने उसे कहा- जब तू मेरा लन अपने मुँह में डाले तब !


उसने कहा- फिर क्या होगा?


मैंने कहा- जैसे तेरे को मजा आया है, वैसे जब मेरे को मजा आएगा, तब मेरा काम होगा।


फिर उसने मेरे गीले लन को, जिस पर थोड़ा सा खून भी लगा हुआ था, को अच्छी तरह साफ़ किया और कहा- यह खून कहाँ से लगा? तो मैंने कहा- तेरी फुद्दी फटी है, उसमें से खून निकला है।


और जब उसने अपनी फुद्दी को हाथ लगाया तो उसमें से थोड़ा खून निकला, जिसे देख कर वो रोने लगी।


मैंने सोचा कि यह तो पंगा खड़ा कर लिया है, इसे बताने की जरूरत ही नहीं थी।


उसने कहा- अब यह खून निकलता रहेगा और मेरे घर वालों को पता चल जायेगा।


मैंने उसे समझाया- ऐसा सब लड़कियों के साथ होता है लेकिन किसी को कोई पता नहीं चलता।


फिर वो थोड़ा सा चुप हो गई और सिसकारियाँ लेती हुई मेरे लन को अपने मुँह में डालने लगी।


फिर क्या था, वो बड़ी मस्ती से अपने मुँह में लोलीपोप की तरह मजा लेने लगी और करीब पाँच मिनट के बाद मेरा भी काम जब होने लगा तो मैंने जोर जोर से उसके मुँह में धक्के मारने शुरू किये।


और जैसे ही मेरा काम हुआ तो मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में ही उड़ेल दिया, जिसके बाद उसने भी उसे बड़े मजे से पी लिया और कहने लगी- बड़ा मजा आया ! हम रोज ऐसा करेंगे !


उसके बाद हम लोग अपने अपने घर को चले गए।


हमारा चोदा-चोदाई का सिलसला इस तरह ही स्कूल से आते-जाते हुए चलता रहा और अब वो भी पूरी तरह तजुर्बेकार हो चुकी थी।


यह कहानी मैं आप सब के साथ इस लिए बाँट रहा हूँ कि कभी भी खुले में सेक्स नहीं करना चाहिए नहीं तो कभी न कभी आप फंस सकते हैं। ऐसा ही कुछ हमारे साथ भी हुआ।


उस दिन हम दोनों रोज की तरह घर वापिस आ रहे थे, हमारे दोनों की कहानी अब तक स्कूल में सभी को पता चल गई थी और हम जब घर वापिस आ रहे थे तभी हमारा मूड बन गया और हम दोनों अपनी उसी जगह पर चले गए जहाँ पर हम चोदा-चोदाई करते थे। फिर हम बिना दर के वहाँ पर एक दूसरे के साथ लिपट कर वही सब कुछ करने लगे जो एक लड़का लड़की करते हैं लेकिन हमें नहीं पता था कि हमें कोई देख भी रहा है।


अभी हमें लगे हुए करीब दस मिनट ही हुए थे कि हमारी क्लास के दो और लड़के जो कई दिनों से हम पर नजर रखे हुए थे, आ गए और उन्होंने हमें सेक्स करते हुए ऊपर से ही पकड़ लिया जिन्हें देख कर हम पहले थोड़ा से डर गए लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि यार किसी से मत कहना क्योंकि वो रोने लग पड़ी थी।


उन लड़कों ने कहा- हम किसी से कुछ नहीं कहेंगे अगर यह हमें भी फुद्दी दे !


पहले तो वो नहीं मानी लेकिन मैंने उसे मना ही लिया।


फिर क्या था, उसके हाँ करते ही उन दोनों ने अपनी पैंट में से फटाफट अपने लन निकाले जो पहले से ही फर्राटे मार रहे थे।


इतना देख कर वो बोली- मैं दोनों के साथ कैसे कर सकती हूँ एक साथ?


तभी उन में से एक बोला- अब दो नहीं, हम तीनों मिल कर तुम्हें चोदेंगे रानी !


फिर क्या था, मैं तो पहले से ही लगा हुआ था, मैंने अपना लन उसके मुँह में डाल दिया, एक ने उसके हाथ में पकड़ा दिया और एक ने उसकी फुद्दी में घुसा दिया जिसे देख कर अब तो वो बिल्कुल रंडी ही बन गई थी।


अब हम तीनों मिल कर उसे चोद रहे थे और वो भी पूरा साथ दे रही थी। तभी हम बारी बारी झड़ गए और जाने लगे। तभी मेरे दोनों सहपाठियों ने उससे कहा- रानी, अब हम तीनों ही तुझे चोदा करेंगे !


तब उसने भी हाँ में सर हिला दिया, फिर उसके बाद हम जब तीनों इकट्ठे होते तो उसे चोदते थे और वो भी बड़े मजे से फुद्दी देती थी।


यह सिलसला काफी लम्बे समय तक चलता रहा। आखिर जब हमारी बारहवीं की क्लास खत्म हो गई तब वो गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने के लिए चली गई तो हम बॉयस कोलेज में !


उसके बाद करीब एक महीने के बाद उसकी शादी हो गई और आजकल वो दिल्ली में है लेकिन हम अभी तक कुंवारे ही हैं। उसकी पढ़ाई भी बीच में ही रह गई। यह थी मेरी सच्ची कहानी जो मेरे साथ बीत चुकी है। मुझे कमेंट करके जरूर, बताएँ कि कहानी कैसी है।

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा


मैं आप लोगों को आज अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन! बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।

घर की बात बहन के साथ

मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !

लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !

तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !

मैंने उससे कहा- ठीक है !

फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।

दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।

तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?

तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !

तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।

इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।

तो वो बोली- ठीक है !

फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।

थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।

वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।

मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !

मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।

क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !

मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।

इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !

रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !

उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।

वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !

और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !

तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !

मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !

मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !

वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !

और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।

फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !

मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।

वो बोली- भईया, अब क्या?

मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !

तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !

तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !

वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।

मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।

मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।

मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके

कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके, Kaamwali Bai Ki Chudai, naukarani ki chudai


मेरा नाम बबलू गुप्ता है, मैं शादीशुदा हूँ किंतु जॉब के कारण कोलकाता में अकेले रहता हूँ. आज मैं आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. बात तब की है, जब मुझे कोलकाता में आए हुए एक साल हो गया था और मैं अपनी बीवी को मिस कर रहा था. मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि काम वाली बाई भी दे देती है, यदि उसको सही से पटा लिया जाए. मेरे यहाँ भी एक बाई काम करती थी, जिसका नाम ममता था.. वो दिखने में बहुत सुन्दर थी और दो बच्चों की माँ थी, फिर भी अपने आपको बड़ा मेन्टेन करके रखा हुआ था.

अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. आखिर एक जिस्म की प्यास तो जिस्म से ही मिटती है. बाकी सब तो सिर्फ मन बहलाने के उपाय हैं.

अब तक ममता से मेरी ज्यादा बात नहीं होती थी, हम दोनों बस अपने काम से काम ही रखते थे. वो मेरे फ़्लैट पर सुबह और शाम दोनों समय आती थी. आज तक कभी किसी औरत को पटाने के बारे में नहीं सोचा था, वो भी सिर्फ सेक्स के लिए, तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे बात कैसे की जाए और अपना काम निकलवाया जाए. डर भी लग रहा था कि कहीं बुरा मान गई तो क्या होगा.. कहीं लेने के देने न पर जाएं.

पर कहते हैं न कि जब लंड खड़ा हो तो उस समय सिर्फ चूत ही दिखाई देती है और जब तक की वो शांत न हो जाए, कुछ समझ में नहीं आता. मेरी भी हालत कुछ इसी तरह की थी कि जब ममता काम करके चली जाती तब सोचता चलो कल उससे बात करूँगा, पर जब आती तब हिम्मत ही नहीं होती.

इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था और मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी. अब तो मुठ मारने से भी चैन नहीं मिल रहा था. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा. पर चैन मिलने की जगह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर एक दिन सोच ही लिया, जो भी होगा देखा जाएगा, अब तो ममता से बात करके ही रहूँगा.

ममता जो कि दिखने में बिल्कुल सेक्सी माल थी, उसका फिगर भी मस्त था. उसका 32-28-36 का फिगर लंड खड़ा कर देता था. उस पर उसका गोऱा रंग, बड़ी बड़ी आँखें.. आह.. वो अक्सर साड़ी नाभि से नीचे बाँध कर पहना करती थी.

Kaamwali Bai Ki Chudai


जिस दिन मैंने पक्का कर लिया था कि अब उससे बात करना ही है, उसके अगले दिन में व्हिस्की की एक बोतल लेकर घर आया और शाम से ही पीने बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा.

लगभग एक घंटे बाद वो आई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

काम खत्म करके जब वो जाने लगी तब मैंने उसे बुलाया और कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

वो मेरे रूम में आई और मुझसे पूछने लगी- क्या बात है?

मैंने उससे कहा कि भाभी आप बुरा मत मानना..

वो बोली कि क्या बात है.. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

तब मैंने उसको बोला- मेरा एक दोस्त है और उसको एक लड़की चाहिए, उस काम के लिए.. क्या आप किसी ऐसी लड़की को जानती हैं.

अब वो गुस्से में आकर मुझसे बोली- आप मुझे क्या समझते हैं. आइन्दा इस तरह की बात मुझसे मत कीजिएगा.

और वो गुस्से में मेरे फ्लैट से बड़बड़ाते हुए चली गई.

मेरी तो गांड फट गई थी, पिटे हुए मुँह जैसी हालत देखने लायक थी. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये किसी से कुछ बोल न दे. मेरा नशा और लंड की गर्मी दोनों ही शांत हो गए.

अब समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ. फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ.

मुझे उस समय यही ठीक लगा, मैंने मुठ मारी और सो गया. सुबह ममता के आने से पहले ही मैं अपने ऑफिस चला गया.

अगले दिन भी मैं उसके आने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गया. शाम को मेरे लौटने के करीब एक घंटे बाद ममता काम करने आई. आज मैं किचन में देखने भी नहीं गया कि वो क्या कर रही है, वो भी कुछ पूछने नहीं आई कि क्या बनाना है.. वो अपना काम खत्म करके चली गई.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. फ़िर शनिवार को शाम में वो अपने समय से जल्दी ही आ गई और अपना काम करने लगी.

naukarani ki chudai

फिर जब वो काम करके वापस जाने लगी तो मेरे पास मेरे कमरे में आई और बोलने लगी कि क्या हुआ है, अब तो आप बात भी नहीं करते?

मैं चुप ही रहा तो वो फिर से बोली- देखिए मैं ऐसी औरत नहीं हूँ.

जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. इस वजह से उसकी चूची के उभार साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.. और इसी वजह से मेरे पेंट के अन्दर मेरे लंड खड़ा हो रहा था, जिसे छिपा पाना भी मुश्किल हो रहा था.

ममता मुझसे बात कर रही थी और मेरी नज़रें उसके चूची के पहाड़ों पर टिकी थीं जिसे उसने भी पकड़ लिया और अपनी साड़ी ठीक करने लगी.

फिर एकाएक मुझसे बोली- मैं आपसे बात कर रही हूँ और आप कहाँ देख रहे हैं?

मैंने उससे बोला कि मैंने तो आपको नहीं बोला था देने के लिए, मैंने तो आपसे पूछा था कि आप किसी को जानती हैं, जो देगी और बदले में पैसे लेगी. पर आप ही बुरा मान गईं. यदि मुझे आपको बोलना होता कि आप दे दो, तो मैं अपने दोस्त के लिए थोड़ी बात करता.. अपने लिए कोशिश नहीं करता?

तब ममता ने चौंक कर मुझे देखा और बोली- क्या बोला आपने..?

मैं बोला- जो आपने सुना!

तब वो बोली- नहीं एक बार और बोलिए.. जो अभी अभी आपने बोला.

तब मैं बोला कि यदि आपको बोलना होता कि आप अपनी दे दो, तो मैं अपने लिए बोलता.. न कि दोस्त के लिए.

वो बोलने लगी- छी छी.. मुझे नहीं मालूम था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हो.

मैंने उससे बोला- इसमें खराबी क्या है? आप सुन्दर हैं, जवान हैं तो क्यों नहीं..!

इस बार मैंने भी नोटिस किया कि वो भी चेहरे पर आश्चर्य का भाव लिए हुए वहीं पर खड़ी रही. मुझे भी लगा कि इसे भी अच्छा लग रहा है.

मैं अपने बिस्तर से उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया.. मुझे अपने सामने एकाएक पाकर वो थोड़ा घबरा गई. वो पीछे को होने लगी और दीवार से सट कर खड़ी हो गई, क्योंकि अब पीछे हटने के लिए जगह नहीं थी.

वो बेचैनी में मेरी तरफ देखकर बोलने लगी- ये आप क्या कर रहे हैं.. आप पीछे हटिए.

लेकिन मैंने आगे बढ़ कर उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला कि भाभी आप मुझे अच्छी लगती हो, क्या आप मुझे दोगी?

ममता ने हकलाते पूछा- क्या?

अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने भी बोल दिया कि आपकी चूत.. भाभी बस एक बार आप मुझसे चुदवा लो प्लीज सिर्फ एक बार..

वो दबे स्वर में बोली- आप पागल हो गए हैं.

वो मुझे धक्का देकर भाग गई. मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी तो मैं लड़खड़ाते हुए अपने बिस्तर पर गिर गया और वो दरवाज़ा खोल कर चलती बनी.

मैं थोड़ा उदास हो गया कि आज चौका मारने का अच्छा मौका था लेकिन हाथ से निकल गई, फिर सोचा कि चलो अब तो ये अपनी चूत दे ही देगी.. और एक बार दे दी तो फिर तो जब चाहो तब उसकी चूत और मेरा लंड खेल सकेंगे.

यही सोचता हुआ कि चलो अब तो एक दो दिन का कष्ट और है.. उसके बाद तो मौज ही मौज होगी.

मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने बेड पर चला गया. सोने के पहले ममता का नाम लेकर मुठ मारी और सो गया. यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

लेकिन अगले दो दिन मैं उसका इंतज़ार करता रहा और अपने लंड को समझाता रहा कि चिंता मत कर, चूत का इंतज़ाम हो गया है और मुठ मारकर सो जाता.

दो दिन से चार दिन, फिर पांच दिन इसी तरह वह पूरे सात दिन के बाद आई.. लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सजधज कर आई थी. उसे देखते ही लंड तन कर खड़ा हो गया और ममता भी तिरछी नज़र से मेरे लंड के तरफ देख रही थी.

जब वो किचन में जाने लगी, तब मैंने उसे अपने कमरे में आने के लिए बोला लेकिन वो बोली- नहीं, जो बोलना है यहीं बोलिए.. मुझे आपके बैडरूम में नहीं जाना है.. आपकी नीयत ठीक नहीं है.

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी तो मैं भी उससे बोला- तुम इतना सजधज कर आओगी भाभी.. तो क्या होगा और मेरी नियत नहीं ख़राब हुई है बल्कि आपको देखकर मेरा लंड बिगड़ गया है.

इस पर उसने इतरा कर बोला कि आपका वो बिगड़ गया है, तो आप उसको सीधा करो.. इसमें मैं क्या करूँ.

इसी तरह की बात करते हुए वो जब रोटी बनाने लगी, तब मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा, मैं कभी इधर कभी उधर.. उसके जिस्म पर अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो बोली- मुझे खाना बनाने दीजिये नहीं तो मैं लेट हो जाऊँगी.

मैंने उससे बोला- मुझे इसकी नहीं, किसी और चीज की भूख लगी है.

वो बोली- उसके लिए मैं कुछ नहीं कर कर सकती, आप जाओ यहाँ से.

अब मैं भी गुस्से से किचन से निकल कर अपने बेडरूम में चला आया और लेट गया. आज मैं उसके रहते ही अपने बेडरूम में लंड निकाल कर उसका नाम लेकर धीरे धीरे से हिलाने लगा और उसका इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे पता था कि जाने के पहले वो मेरे कमरे में जरूर आएगी.

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.. वो अपना काम खत्म कर जब जाने को हुई तब उसने मुझे आवाज़ लगाई, लेकिन मैं चुप रहा. तब उसने दो तीन बार और आवाज़ दी. जब मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरे बेडरूम में आई और मेरे हाथ में लंड को देखकर.. उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा.

कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.

अब मैंने उसके सामने खड़े होकर एक हाथ उसके कंधे पे रखा और दूसरे से उसका नाम लेते हुए लंड को सहलाता रहा.

वो बोलने लगी- आप बहुत गंदे हो, आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो? मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले.

मैं बोल पड़ा- भाभी जब लंड खड़ा होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. आप मान जाओ.. बस एक बार मेरे लंड को अपने चूत में डालने दो.

वो बोली- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है.

फिर मेरे बार बार कहने पर वो बोली कि पहले आप सच बोलो, उस दिन आप जो लड़की खोज रहे थे वो अपने दोस्त के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोज रहे थे.

मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. लेकिन अब तो मैंने आपको सच बोल दिया, अब तो आप मुझे चोदने दो प्लीज..

वो बोली- नहीं.. मुझे सोचने का कुछ समय चाहिए.

मैं बोल पड़ा कि आप मुझे चोदने दो बदले में मैं आपको पैसे भी दे दूंगा.

वो बोली कि यदि पैसे के लिए मुझे यह काम होता तो मैं आपके यहाँ नौकरानी का काम क्यों करती.. यही काम न करने लगती.

उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया. इसी तरह उसके मन में जो भी आता गया, वो बोलती रही और मैं चुपचाप सुनता रहा.

फिर वो बोली कि मुझे देर हो रही है, अब चलना चाहिए.

तब मैं बोल पड़ा- भाभी पैसे नहीं चाहिए तो मत लो, पर एक बार तो दे दो.

वो बोली कि मैंने बोला न कि मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए कि अपना जिस्म आपको दूँ कि नहीं.

तब मैं भी बोल पड़ा- ठीक है पर आज तो अपने हाथ से ही मेरी मुठ मार दो.. कम से कम आज तो ठंडक कर दो.

वो आनाकानी करने लगी- नहीं.. जब मैं बोल रही हूँ कि मुझे समय चाहिए आप तब भी नहीं मान रहे हैं.

फिर मेरे बहुत मनाने पर बोली- ठीक है लेकिन फिर कभी नहीं और यदि आपने जोर जबरदस्ती की तो मैं काम छोड़कर चली जाऊँगी.

मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैंने भी मौका पाकर ममता की चूचियों पर हाथ रखकर सहलाने लगा, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहा- नहीं ये मत कीजिये.. नहीं तो मैं चली जाउंगी.

फिर मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लंड का मजा लेता रहा. उसने मेरे लंड की मुठ मारकर मेरे माल को गिरा दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक करके चली गई.

उसके अगले दिन से वो आती और अपना काम करके चली जाती. मैंने उससे नहीं पूछा कि उसने क्या सोचा, बस उससे इधर उधर की बातें करता रहता, जब तक वो रहती.

ऐसे ही 20-25 दिन बीत गए. फिर एक दिन मैं व्हिस्की की बोतल लेकर घर गया और टीवी पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए व्हिस्की पीने लगा.

तभी दरवाजे की घन्टी बजी तो मैंने टाइम देखा, अभी सात बज रहे थे. मैंने मन ही मन सोचा कि इस समय कौन आ गया क्योंकि ममता आठ बजे आती है. इसी उधेड़बुन में मैंने दरवाज़ा खोल तो ममता गेट पर खड़ी थी.

वो मुझसे हँसते हुए बोली- हटिये, अन्दर आने दीजिये.

मैं गेट से हटा और उसे अन्दर आने दिया. अन्दर आते समय ममता के होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी. अन्दर आने के बाद मैंने उसके हँसने का कारण पूछा तो कहने लगी कि वो तो ऐसे ही हँस रही थी.

अन्दर आकर जब उसने व्हिस्की की बोतल और गिलास देखा और टीवी को बंद देखा तो बोल पड़ी- लगता है कि आज फिर मूड बनाया जा रहा है.

मैंने कहा- क्या करूँ तुम देने के लिए मानती ही नहीं हो तो टीवी देख कर ही काम चला रहा हूँ. आज एक महीना हो गया लेकिन तुम अभी तक सोच ही रही हो.

इस पर उसने जो कहा, उसे सुनकर मैं तो चौंक ही गया. ममता बोली- आपने ही तो नहीं पूछा कि मैंने क्या सोचा.

मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं.

ममता बोली- आग मुझे नहीं बल्कि आपके वहां पर लगी है, तब मैं क्यों आपको बिना पूछे बोलती कि मैंने क्या सोचा.

अब उसकी इतनी पॉजिटिव रिस्पांस पाकर मैंने टीवी को चालू किया और उसे पकड़ कर अपने गोद में बैठा लिया और बोला कि अब बोल भी दो ममता भाभी.. क्या मेरा लंड तुम्हारी चूत की गहराई में छिपी ज़न्नत का मजा पा पाएगा या नहीं.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

ममता बोली- अपने उसको संभालिये.

मैं बोला- अब बोल भी दो.

वो बोली- देखिये उस दिन जैसे किया था वो करने को राज़ी हूँ और आप ऊपर से सब कुछ कर सकते हैं.. लेकिन मैं आपका अपने अन्दर नहीं लूँगी.

मैं बोला- ये क्या बात हुई.. हाथ से तो मैं भी अपने आप कर सकता हूँ.. फिर क्या फायदा..?

वो बोली- ज्यादा से ज्यादा आप मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल कर चूस सकते हैं या सहला सकते हैं और पेटीकोट भी खोल दीजिये.. लेकिन पैंटी नहीं खोलूंगी और आप मेरे अन्दर अपने उसे नहीं डालेंगे.

एक तो शराब का नशा और दूसरी ब्लू फ़िल्म की खुमार.. और अब उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया. मैंने उससे बोला कि क्या फायदा.. जात भी गवाऊं और भात भी नहीं खाऊं. तुम जाओ बाहर.. मैं किसी और को खोज लूंगा.

वो भी बड़बड़ाते हुए चली गई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

अब मैं भी डीवीडी बंद करके टीवी पर कुछ कॉमेडी सीरियल देखने लगा. शराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

जब कुछ देर बाद दिमाग हल्का हुआ तो मैंने सोचा कि ममता भाभी तो अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार ही है, अब खुल कर नहीं बोल पा रही है या सिर्फ मुझे तरसा रही है. क्योंकि जब वो सब कुछ खोलने के लिए मान ही गई है तो उसे भी पता है कि इतना करने के बाद तो उसे भी चुदना ही है.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने जल्दी से शराब का गिलास नीचे रखा और लपक कर किचन में गया और ममता से बोला- भाभी.

वो गुस्से में बोली- क्या है?

तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा.

ममता बोली- अब क्या हुआ उस समय तो बड़े गुस्से में बोले थे कि दूसरी खोज लेंगे तो अब जाइए, मुझे अब आपके साथ उतना भी नहीं करना.

मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.

वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर, मेरे सीने में ममता की तनी हुई चूचियों के दबे होने का कोमल सा एहसास हो रहा था और वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उसकी आँखों में देख रहा था. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गुलाब की तरह लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब ममता भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी.

अब उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसके गालों.. कंधों और कानों को चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. अब हमारी साँसों की गर्मी एक दूसरे के जिस्म को छूने लगीं. अब जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लग रहे थे. मैंने ममता की साड़ी को उसके जिस्म से अलग किया और उसकी नग्न नाभि को अपनी जीभ से सहलाने लगा. ममता मेरे बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी. मैं उसकी नाभि को चूमते हुए धीरे से अपने हाथ को उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा.

क्या मुलायम और कड़क चूचियां थीं उसकी, दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने अपना सर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा- तो भाभी चूत चुदवाओगी अब?

वो बोली कि नहीं.. मुझे मालूम है मुझे क्या करना है.

फिर मैंने एक एक कर उसके ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ और ब्रा दोनों को एक साथ ही उसके जिस्म से अलग कर दिया. उसकी नंगी चूचियों पर से नज़र ही नहीं हट रही थी, क्या सुन्दर नज़ारा था, गोरी गोरी.. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

अब बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मैं भाभी की चूचियों को मुँह में भर कर चुभलाने लगा और ममता भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी पेंट के अन्दर घुसा दिया. भाभी मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था.. दूसरी चूची को अपने एक हाथ से सहला और दबा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं ममता भाभी की चूची चूसते हुए, एक हाथ से उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया और उसे उसके मखमली जिस्म से उतार फेंका.

इसके साथ ही अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत की फाँकों के बीच से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे ऐसा करते ही ममता जोरों से चिहुंक उठी और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी उंगलियों का दबाव भी मेरे लंड पर बढ़ गया.

अब अपने को रोक पाना मुश्किल था तो मैं जल्दी से उससे अलग हुआ. मैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

मैंने कामवाली ममता भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी मस्त चूचियों के बीच में अपना लंड घुसा कर आगे पीछे करने लगा. मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था, कुछ देर तक इसी तरह उसकी चूचियों को लंड से चोदता रहा. फिर नीचे उतर कर ममता के बगल में लेट गया. इसके बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अपने दोनों हाथों को उसकी पैंटी के अन्दर पीछे से डालकर उसके चूतड़ों को सहलाना चालू कर दिया. ममता भी पूरे जोश में आकर मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैंने ममता को अपने नीचे लिटाया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो ममता ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया. उसके मुँह की गर्मी जब लंड पर पड़ी तो एक अजब तरह का सुकून मिला और करीब 5 मिनट के बाद मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसे चित करके मैं उसकी जांघों के बीच में अपना मुँह ले जाकर उसकी जांघों को चूमने लगा. भाभी की पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत की फाँकों को सहलाते हुए अपने दो उंगलियों को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया. मैं उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा.

फिर अपना सर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आँखें बंद किए हुए चूत की चुदाई का मजा ले रही और हल्की हल्की आहें भर रही थी.

मैं इस मौके का फायदा उठाकर उसकी पैंटी को निकालने लगा, पहले तो उसने भी कमर उठाकर मदद की, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि मैं क्या कर रहा हूँ तो तुरंत ही उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोलने लगी- ये नहीं, ये नहीं.

मैं उसको बोला- ममता भाभी मैं सिर्फ आपकी चूत को देखूंगा और हाथों से ही सहलाऊँगा, लंड अन्दर नहीं डालूँगा.

तब जाकर उसने अपनी पैंटी उतारने दी.

अब अपनी आँखों के सामने ममता की कसी हुई और फूली हुई चूत को देखकर तो मेरे होश ही उड़ गए. क्या मस्त चूत थी, गोरी गोरी.. दोनों फाँकें आपस में चिपकी हुईं. ममता के कामरस से भीगी हुई चूत देखकर तो मेरा लंड और भी कड़ा हो गया.

तभी मैंने उसकी चूत के फाँकों को अलग किया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया. ममता बेचैन होकर मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से सहलाने लगी.

इसके बाद तो उसकी चूत में लंड घुसाए बिना चैन नहीं आने वाला था. अब काफी फोरप्ले हो चुका था. सिर्फ ममता की चूत में लंड डाल कर उसे चोदना बाक़ी रह गया था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.. उसकी चूची को अपने हाथों से दबाता हुआ.. ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

फिर उसकी बाईं चूची की घुंडी को अपने मुँह में लेकर उसकी लाल लाल मख़मली चूची का दूध पीने लगा और अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद उसकी चूची को छोड़ कर ऊपर हुआ और ममता के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुभलाने लगा और अपने लंड को उसकी चूत पर सहलाने लगा.

तभी ममता ने अपने होंठों को मेरे होंठों से अलग करते हुए कहा- लंड अन्दर नहीं डालना है.

मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

ये कह कर मैं फिर से उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूची को भी साथ साथ दबाने लगा और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड को सहलाने भी लगा.

कुछ पलों बाद मैंने देखा कि ममता आँख बंद करके पूरे मज़े में है और उसने अपनी जांघों को भी थोड़ा ढीला छोड़ दिया है. उसके ऐसा करते ही मैंने अपने लंड को एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड ममता की चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया.

मेरे ऐसा करते ही ममता अपनी आँखें खोलकर मुझे धक्का देने लगी, किन्तु मैंने उसे जोर से अपने से चिपका लिया और लंड को भाभी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ देर बाद ममता भी साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर चुदवाने लगी.

अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

इतना मजा आ रहा था कि ममता ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया था. करीब 15 मिनट तक लगातार उसकी चूत को चोदने के बाद अब लंड में भी प्रेशर बनने लगा था. मैंने ममता की चूत को अपने माल से भर दिया. तभी ममता ने भी अपना माल छोड़ दिया और मेरे साथ चिपक गई.. और मैं भी उसके ऊपर लेट गया.

कुछ देर बाद जब अलग हुए तो देखा कि चादर हमारे कामरस से पूरी तरह भीग चुका था और हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था.

यह थी ममता के साथ मेरी चुत चुदाई की शुरुआत. मैं उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को मेरी इंडियन सेक्स स्टोरीज पसंद आई होगी. प्लीज अपने विचार पर जरूर भेजें.

लण्ड गुलाबो के चूतड़ों के बीच में जोर-जोर से घिसने लगा

 

गुलाबी गांड और चूत की जोरदार चुदाई, लण्ड गुलाबो के चूतड़ों के बीच में जोर-जोर से घिसने लगा - Gulabo ki chut gand chudai,

लण्ड गुलाबो के चूतड़ों के बीच में जोर-जोर से घिसने लगा - Gulabo ki chut gand chudai, चूतड़ के दोनो हिस्सों के बीच का बना हुआ दरार काफ़ी गहरा, चुदाई का रस लगने लगा.

दो महिलाएँ आपस में कुछ अंतरंग बातें कर रही थीं, पीछे बैठा मैं उनकी उनकी बातों को सुनकर बड़ा आनंदित हो रहा था।
दोनों बड़ी अच्छी सहेलियाँ थीं, एक की शादी को करीब चार साल हुए थे, दूसरी की अभी-अभी शादी हुई थी। उनकी बातों में उनके सम्भोग की कहानियों के रस की चर्चा हो रही थी, दोनों एक-दूसरे को अपनी-अपनी चूत चुदाई की दास्तान सुना रही थीं।

एक दूसरे से कहती है- शालू.. तेरी पहली रात को क्या-क्या कैसे कैसे हुआ.. जरा खुल कर बता ना?
‘चल हट बेशरम.. जो तेरे साथ हुआ.. वही मेरे साथ हुआ..’
‘यानि पहली रात पूरी खाली गई क्या तेरी..?’
‘अरे नहीं रे.. बार-बार.. लगातार.. हुआ करीब साढ़े तीन घंटे.. ऊपर-नीचे होते रहे.. पीछे से.. आगे से.. सब हुआ..’
‘क्या बात कर रही हो.. लगातार साढ़े तीन घंटे..?’
‘नहीं रे.. बीच-बीच में हम लोग फोरप्ले भी करते रहे न.. यानि मैं और वो..’

‘कैसे और क्या-क्या हुआ.. जरा ठीक से बता ना?’
‘हाँ बाबा.. सब बता दूँगी.. तू एक काम करना.. मेरे घर आ जाना.. फिर हम दोनों बैठकर अपने अनुभव शेयर करेंगे..’
‘ठीक है..’
उसके ऐसा कहने के बाद वह दोनों अपने घरों के लिए रवाना हुईं।

Gulabo ki chut gand chudai


मैं अपने मन में कल्पना करने लगा.. कि किस तरह की बातें होंगी.. जब ये दोनों मिलेंगी? क्या अपने अनुभव ये दोनों शेयर कर पाएगीं? इसी सोच में मैं अपने रास्ते पर अभी चला ही था कि अचानक सामने उन्हीं दो औरतों में से एक मेरे ही घर के सामने से जाती दिखी।
तब तक मेरा इस महिला पर कोई ध्यान नहीं गया था।

वो देखने में बड़ी खूबसूरत लग रही थी, पिछवाड़े के दोनों पुठ्ठे मस्ती में हिचकोले खा रहे थे.. सामने के दोनों कबूतर जैसे आने जाने वालों को ललचा रहे थे, आँखों में नशीला आमंत्रण था।
मैं उसकी इस चाल को देखते हुए मंत्रमुग्ध सा उसके पीछे-पीछे चला जा रहा था।
दोनों औरतें थीं भी बड़ी मस्त चुदक्कड़ और सेक्सी लण्ड की मारी.. शायद सामने वाली का मर्द सिर्फ गाण्ड ही मारता था.. क्योंकि चूतड़ों के दोनों भाग इस तरह हिल रहे थे.. जिससे मालूम हो रहा था कि उसको गाण्ड मरवाने की आदत पड़ चुकी होगी।
हालांकि यह मेरा कयास ही था.. इसलिए चूत का मजा क्या होता है.. यह सुनने की तमन्ना उसके दिल में आई होगी, उसकी चूत से पानी रिस रहा होगा।

अब मेरे दिल में उसको चोदने की तमन्ना बढ़ने लगी थी। लण्ड की मारी.. वो औरत कौन थी.. मुझे यह देखना भी बाकी था।
पर थी बड़ी खूबसूरत..!

अचानक एक मकान के तरफ वो मुड़ी उसने कनखियों से मुझे देखा और वह घर के दरवाजे पर गई।
उसने ताला खोला और वह अन्दर चली गई, वो सलीम हुसैन का घर था.. यानि यह बड़ी काम की चीज थी।

उस दिन तो मैं ये सोच कर वापस आ गया कि यह अनार कल खाऊँगा।

मैं उस रात को कमली के साथ सोया, कमली मेरी काम वाली थी। यह भी साली बड़ी चुदक्कड़ थी.. लण्ड लेने में अव्वल और माहिर.. उसकी चूत जैसे मक्खन की टिकिया थी, बड़ी कोमल हसीन चोदने लायक चूत वाली थी।

जब भी कभी मेरी घर वाली घर पर नहीं हो.. तो कमली मेरे घर पर ही नंगी पड़ी रहती थी, साली को चुदवाने का बड़ा शौक था।
ऐसी ही रसीली सी चूत थी.. जब मेरे दिल में आता तब उसको खूब चोदता।
जब मेरे दिल में आता.. तब अपना लण्ड उसे चुसाता रहता.. उसकी गाण्ड मारता.. उसकी चूत को आधे-आधे घंटे तक चूसता.. उसके मम्मों को कुछ इस तरह दबाता कि वो साली मेरे लण्ड की प्यासी हो जाती।

गुलाबी गांड और चूत की जोरदार चुदाई

फिर उसकी चूत में लण्ड डाल कर उसको पीछे से.. आगे से.. नीचे से.. ऊपर से.. खूब मस्त कर कर के चोदता।
कभी-कभी जब मुझे उसकी गाण्ड मारने की इच्छा होती.. तो मैं उसे पलटा देता और फिर मलाई लगा कर लण्ड को उसको पहले चुसाता.. फिर उसकी गाण्ड में मलाई लगाकर अपना लण्ड उसकी रसीली गाण्ड में घुसा देता।
गुलाबी गांड और चूत की जोरदार
हाय कितना मस्त लगता था.. उसकी गाण्ड मारना।
चुस्त दुरुस्त गाण्ड की चुदाई का मजा ही कुछ और होता है। चुदने वाली अगर गरम हो.. तो चोदने में कुछ ज्यादा ही मजा आता है।
उसकी चूत में उसकी गाण्ड में.. उसके मुँह में लण्ड देते हुए जन्नत के सुख का अनुभव होता है।

कई बार मैंने देखा है कि खुद की औरत जितना मजा नहीं दे पाती.. उतना मजा ये बाहर वाली औरत देती है।
एक दिन उसने बड़ी शिद्दत से मुझसे चुदवाया। फिर मुझसे आराम से पूछा- साहब क्या एक और चलेगी?
मैं हल्का सा चौंका।

‘क्या कह रही हो.. क्या मरवाना है.. अगर तुम्हारी मालकिन आ गई तो तूफान खड़ा हो जाएगा?’

उसने कहा- नहीं होगा.. क्योंकि मैं जिसको लेकर आ रही हूँ. वो मेरी देवरानी है.. उसके पति का लण्ड छोटा सा है.. सो उसको भी लण्ड चाहिए।
मैं सोच में पड़ गया। कमली तो ठीक थी अगर घर में किसी और को बुलाता और घर वाली आ जाती.. तो लेने के देने पड़ जाते.. क्या करें?
मैंने कमली से पूछा- क्या तेरे घर में जम सकता है? फिर मैं तुम दोनों को भी चोदूँगा।

‘साहब आप कहाँ आएंगे.. हमारी उन झुग्गी झोपड़ी में.. दो कमरे हैं.. एक मेरी देवरानी का और दूसरा मेरा.. घर में भी बच्चे आते-जाते रहते हैं। फिर कोई भी आता है।’

‘अच्छा.. यानि तुझे उसे यहीं लेकर आना है चुदने के लिए..’
‘साहब जी.. आपके लण्ड के लिए तो मैं कुछ भी करूँगी।’

उसने इस तरह की बात की.. तो मैं थोड़ा तैयार हो गया.. लेकिन चोदने के मामले में मैं कोई रिस्क में लेना नहीं चाहता था। उधर मन कहता था कि ये मस्त चुदक्कड़ कमली और साथ में उसकी देवरानी भी अगर मिल जाए.. तो क्या बात थी..
उसकी देवरानी इस खेल में नई थी.. ऐसा कमली ने कहा था।

दूसरे दिन कमली के साथ एक बाइस-तेईस साल की लड़की.. थोड़ी शरमाते हुए दरवाजे पर खड़ी थी। मैं समझ गया यही कमली की देवरानी हैि जो आज अपना भोसड़ा खुलवाने आई है।
मुझे मेरी किस्मत पर यकीन नहीं हुआ.. क्या बात है मेरे ठरकी लौड़े आज तो तेरी किस्मत में दो-दो चूतें हैं।

‘क्या नाम है तेरा? मैंने कमली की देवरानी से पूछा.. तो उसने धीरे से कहा- गुलाब..
हाय.. एक कमल का फूल.. तो दूसरी गुलाब की कली.. क्या बात है.. मेरे विचार अब बहकने लगे थे.. अरमानों में दोनों चूतें आँखों के सामने नंगी नाचने लगी थीं।

कमली की देवरानी थी तो जरा सांवली.. पर उसके भरे हुए दूध और मचलती जवानी देख कर मेरे लौड़े में नीचे एक खलबली सी मच रही थी।
मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें कमली ने बताया है कि तुम किस लिए आई हो?
गुलाब ने शरमा कर आँखें नीची करते हुए मुझसे ‘हाँ’ कहा।

कमली बोली- अरे गुलाबो.. अब शर्माती क्यों हो? सारा ही दिखाना है.. तो शर्माना क्यों..? चल पहले खाना बना ले.. फिर दोनों मिल कर साहब की खिदमत करेंगे।
यह कहकर कमली मेरी तरफ कनखियों से देखते हुए कंटीली मुस्कराहट के साथ रसोई में जाने लगी।
उसने गुलाबो के दोनों पुठ्ठों पर हाथ फिराया.. मैं समझ गया कि वो क्या कहना चाहती है।

रसोई में खाना बनाते हुए आज उसका चुदने का मन कर रहा था। कमली ने साड़ी जांघों पर ऊँची कर ली और अपनी कोमल जांघें मुझे दिखाने लगी।
मैं उत्तेजित हो रहा था।
थोड़े देर में मैंने अपना पायजामा उतारकर मेरी निक्कर उतार दी। फिर पायजामा पहन कर मैं देखने के लिए गया कि ये दोनों रसोई में क्या कर रही हैं।

मैंने देखा गुलाबो कुकर लगा रही थी और कमली रोटियाँ बेल रही थी।
कमली के दोनों मम्मे इस तरह से हिल रहे थे कि मेरे लण्ड में हलचल होने लगी थी।

धीरे-धीरे मैं कमली के पास पहुँचा.. मैंने कमली की कमर पर हाथ रखा.. धीरे-धीरे उसकी कमर को सहलाते हुए मैंने हाथ कमली के मम्मों पर रख दिया।

इधर गुलाबो मेरी इस हरकत को गौर से देख रही थी.. वो कनखियों से ताड़ रही थी।
मैंने अपने हाथों से कमली के दूध दबाते हुए उसे गालियाँ देना शुरू किया- साली.. चुदक्कड़.. रोज मेरे सामने सोकर चुदती है.. आज तो तेरी चूत में मेरा लण्ड फिर से खलबली मचा देगा..

अब मैंने उसकी साड़ी को कमर तक उठा कर उसके चूतड़ों को फैला दिया। फिर अपने पायजामे को खोलकर.. उसकी दरार में अपना हथियार डाल दिया।
अब मैं लौड़े को ऊपर से ही आगे-पीछे करते-करते गुलाबो के होंठों को चूमने लगा।
गुलाबो के नरम होंठों को चूमते-चूमते मैंने उसके ब्लाउज में हाथ डालकर उसके मम्मों के आकार का अंदाज लिया, उसके दोनों मम्मे बड़े ही गुंदाज थे। मैंने उसके ब्लाउज के बटन खोले और उसके मम्मों को चूमने लगा।

अय हाय.. क्या मस्त मम्मे थे.. एकदम मस्त और चुस्त..

मैंने जैसे ही उसके मम्मों को चूसना शुरू किया.. उसने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया।
क्या बात है.. यह तो कमली से ज्यादा गरम माल थी। मेरे जेहन में एक ख़याल आया.. साला इसका आदमी इसे गरम तो करता होगा.. पर ठंडा करने की बात आती होगी.. तो टाएँ-टाएँ फिस्स.. हो जाता होगा।

बड़े दिनों के बाद एक अरमानों की डोली उठने वाली थी.. मैं बड़ा खुश था, मुझे उसकी चूत देखने की तमन्ना हुई।
मैंने कमली को छोड़ा और गुलाबो की गाण्ड के पास अपना लण्ड अड़ा दिया।

साली एकदम से अपनी गाण्ड को आगे-पीछे करने लगी। उसके बड़े-बड़े चूतड़ों में मेरा लण्ड मस्त घिसता जा रहा था। उधर कमली रोटियाँ बनाने में लगी रही। इधर गुलाबो अपने मस्त चूतड़ों से मेरे लण्ड की मालिश कर रही थी।

मैंने उसका ब्लाउज ऊपर किया.. छोटे-छोटे गुन्दाज़ मम्मों पर गुलाबो के दोनों अंगूरी निप्पल.. इतने मस्त दिख रहे थे.. कि मेरे लण्ड की गोटियों में खून जोर से बहने लगा।

मैं भी अपना मूसल लण्ड गुलाबो के चूतड़ों के बीच में जोर-जोर से घिसने लगा।
साली थी तो बड़ी मस्त माल.. साली के चूतड़.. मेरे लण्ड को अन्दर तक ले रहे थे। ऊपर कमली मेरे होंठों को चूस रही थी। दो फूल मेरे पास थे और उनका एक माली उन दोनों पौधों को सींच रहा था।

दीदी को चुदाई करते पकड़ लिया

 

Didi Ko Chudai Karte Pakad Liya, दीदी को चुदाई करते पकड़ लिया, दीदी की चुदाई की सेक्सी कहानियाँ , दीदी की चुदाई की सेक्सी स्टोरी , बहन को चुदते हुए देख

दीदी की चुदाई की सेक्सी कहानियाँ , दीदी की चुदाई की सेक्सी स्टोरी , बहन को चुदते हुए देखा. मेरे सामने चुदी मेरी बहन. बहन को चुदवाते हुए पकड़ लिया.

मेरी बहन मुझसे लगभग तीन साल बड़ी है। वो एम ए में पढ़ती थी और मैंने कॉलेज में दाखिला लिया ही था। मैं भी जवान हो चला था। मुझे भी जवान लड़कियाँ अच्छी लगती थी। सुन्दर लड़कियाँ देख कर मेरा भी लण्ड खड़ा होता था।

मेरी दीदी भी चालू किस्म की थी। लड़कों का साथ उसे बहुत अच्छा लगता था। वो अधिकतर टाईट जीन्स और टीशर्ट पहनती थी। उसके उरोज 23 साल की उम्र में ही भारी से थे, कूल्हे और चूतड़ पूरे शेप में थे।

रात को तो वो ऐसे सोती थी कि जैसे वो कमरे में अकेली सोती हो। एक छोटी सी सफ़ेद शमीज और एक वी शेप की चड्डी पहने हुये होती थी। फिर एक करवट पर वो पांव यूँ पसार कर सोती थी कि उसके प्यारे-प्यारे से गोल चूतड़ उभर कर मेरा लण्ड खड़ा कर देते थे। उसके भारी भारी स्तन शमीज में से चमकते हुये मन को मोह लेते थे। उसकी बला से भैया का लण्ड खड़ा होवे तो होवे, उसे क्या मतलब ?

कितनी ही बार जब मैं रात को पेशाब करने उठता था तो दीदी की जवानी की बहार को जरूर जी भर कर देखता था। कूल्हे से ऊपर उठी हुई शमीज उसकी चड्डी को साफ़ दर्शाती थी जो चूत के मध्य में से हो कर उसे छिपा देती थी। उसकी काली झांटे चड्डी की बगल से झांकती रहती थी। उसे देख कर मेरा लण्ड तन्ना जाता था। बड़ी मुश्किल से अपने लण्ड को सम्भाल पाता था।

Didi ki Chudai

एक बार तो मैंने दीदी को रंगे हाथों पकड़ ही लिया था। क्रिकेट के मैदान से मैं बीच में ही पानी पीने राजीव के यहाँ चला गया। घर बन्द था, पर मैं कूद कर अन्दर चला आया। तभी मुझे कमरे में से दीदी की आवाज सुनाई दी। मैं धीरे से दबे पांव यहाँ-वहाँ से झांकने लगा। अन्त में मुझे सफ़लता मिल ही गई। दीदी राजीव का लण्ड दबा रही थी। राजीव भी बड़ी तन्मयता के साथ दीदी की कभी चूचियाँ दबाता तो कभी चूतड़ दबाता। कुछ ही देर में दीदी नीचे बैठ गई और राजीव का लण्ड निकाल कर चूसने लगी। मेरे शरीर में सनसनाहट सी दौड़ पड़ी। मेरा मन उनकी यह रास-लीला देखने को मचल उठा। उनकी पूरी चुदाई देख कर ही मुझे चैन आया।

तो यह बात है … दीदी तो एक नम्बर की चालू निकली। एक नम्बर की चुदक्कड़ निकली दीदी तो।

मैं भारी मन से बाहर निकल आया। आंखों के आगे मुझे अब सिर्फ़ दीदी की भोंसड़ी और राजीव का लण्ड दिख रहा था। मेरा मन ना तो क्रिकेट खेलने में लगा और ना ही किसी हंसी मजाक में। शाम हो चली थी … सभी रात का भोजन कर के सोने की तैयारी करने लगे थे। दीदी भी अपनी परम्परागत ड्रेस में आ गई थी।

मैं भी अपने कपड़े उतार कर चड्डी में बिस्तर पर लेट गया था। पर नींद तो कोसों दूर थी … रह रह कर अभी भी दीदी के मुख में राजीव का लण्ड दिख रहा था। मेरा लण्ड भी फ़ूल कर खड़ा हो गया था।

अह्ह्ह… मुझे दीदी को चोदना है … बस चोदना ही है।

मेरी चड्डी की ऊपर की बेल्ट में से बाहर निकला हुआ अध खुला सुपारा नजर आ रहा था। इसी हालत में मेरी आंख जाने कब लग गई।

यकायक एक खटका सा हुआ। मेरी नींद खुल गई। कमरे की लाईट जली हुई थी। मुझे लगा कि मेरे पास कोई खड़ा हुआ है। समझते देर नहीं लगी कि दीदी ही है। वो बड़े ध्यान से मेरे लण्ड का उठान देख रही थी। दीदी को शायद अहसास भी नहीं हुआ होगा कि मेरी नींद खुल चुकी है और मैं उसका यह तमाशा देख रहा हूँ।

उसने झुक कर अपनी एक अंगुली से मेरे अध खुले सुपारे को छू लिया। फिर मेरी वीआईपी डिज़ाइनर चड्डी की बेल्ट को अंगुली से धीरे नीचे सरका दिया। उसकी इस हरकत से मेरा लण्ड और भी फ़ूल कर कड़क हो गया। मुझे लगने लगा था- काश ! दीदी मेरा लण्ड पकड़ कर मसल दे। अपनी भोंसड़ी में उसे घुसा ले।

दीदी की चुदाई की हिंदी कहानी

उसकी नजरें मेरे लण्ड को बहुत ही गौर से देख रही थी, जाहिर है कि मेरी काली झांटे भी लण्ड के आसपास उसने देखी होगी। उसने अपने स्तनों को जोर से मल दिया और उसके मुँह से एक वासना भरी सिसकी निकल पड़ी। फिर उसका हाथ उसकी चूत पर आ गया। शायद वो मेरा लण्ड अपनी चूत में महसूस कर रही थी। उसका चूत को बार बार मसलना मेरे दिल पर घाव पैदा कर रहे थे। फिर वो अपने बिस्तर पर चली गई।

दीदी अपने अपने बिस्तर पर बेचैनी से करवटें बदल रही थी। अपने उभारों को मसल रही थी। फिर वो उठी और नीचे जमीन पर बैठ गई। अब शायद वो हस्त मैथुन करने लगी थी। तभी मेरे लण्ड से भी वीर्य निकल पड़ा। मेरी चड्डी पूरी गीली हो गई थी। अभी भी मेरी आगे होकर कुछ करने की हिम्मत नहीं हो रही थी।

दूसरे दिन मेरा मन बहुत विचलित हो रहा था। ना तो भूख रही थी… ना ही कुछ काम करने को मन कर रहा था। बस दीदी की रात की हरकतें दिल में अंगड़ाईयाँ ले रही थी। दिमाग में दीदी का हस्त मैथुन बार बार आ रहा था। मैं अपने दिल को मजबूत करने में लगा था कि दीदी को एक बार तो पकड़ ही लूँ, उसके मस्त बोबे दबा दूँ। बार बार यही सोच रहा था कि ज्यादा से ज्यादा होगा तो वो एक तमाचा मार देगी, बस !

फिर मैं ट्राई नहीं करूंगा।

जैसे तैसे दिन कट गया तो रात आने का नाम नहीं ले रही थी।

रात के ग्यारह बज गये थे। दीदी अपनी रोज की ड्रेस में कमरे में आई। कुछ ही देर में वो बिस्तर पर जा पड़ी। उसने करवट ले कर अपना एक पांव समेट लिया। उसके सुडौल चूतड़ के गोले बाहर उभर आये। उसकी चड्डी उसकी गाण्ड की दरार में घुस गई और उसके गोल गोल चमकदार चूतड़ उभर कर मेरा मन मोहने लगे।

मैंने हिम्मत की और उसकी गाण्ड पर हाथ फ़ेर कर सहला दिया। दीदी ने कुछ नहीं कहा, वो बस वैसे ही लेटी रही।

मैंने और हिम्मत की, अपना हाथ उसके चूतड़ों की दरार में सरकाते हुये चूत तक पहुँचा दिया। मैंने ज्योंही चूत पर अपनी अंगुली का दबाव बनाया, दीदी ने सिसक कर कहा,”अरे क्या कर रहा है ?”

“दीदी, एक बात कहनी थी !”

उसने मुझे देखा और मेरी हालत का जायजा लिया। मेरी चड्डी में से लण्ड का उभार उसकी नजर से छुप नहीं सका था। उसके चेहरे पर जैसे शैतानियत की मुस्कान थिरक उठी।

“हूम्म … कहो तो … ”

मैं दीदी के बिस्तर पर पीछे आ गया और बैठ कर उसकी कमर को मैंने पकड़ लिया।

“दीदी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हैं !”

“ऊ हूं … तो… ”

“मैं आपको देख कर पागल हो जाता हूँ … ” मेरे हाथ उसकी कमर से होते हुये उसकी छातियों की ओर बढ़ने लगे।

“वो तो लग रहा है … !” दीदी ने घूम कर मुझे देखा और एक कंटीली हंसी हंस दी।

मैंने दीदी की छातियों पर अपने हाथ रख दिये,”दीदी, प्लीज बुरा मत मानना, मैं आपको चोदना चाहता हूँ !”

मेरी बात सुन कर दीदी ने अपनी आंखें मटकाई,”पहले मेरे बोबे तो छोड़ दे… ” वो मेरे हाथ को हटाते हुये बोली।

“नहीं दीदी, आपके चूतड़ बहुत मस्त हैं … उसमें मुझे लण्ड घुसेड़ने दो !” मैं लगभग पागल सा होकर बोल उठा।

“तो घुसेड़ ले ना … पर तू ऐसे तो मत मचल !” दीदी की शैतानियत भरी हरकतें शुरू हो गई थी।

मैं बगल में लेट कर अनजाने में ही कुत्ते की तरह उसकी गाण्ड में लण्ड चलाने लगा। मुझे बहुत ताज्जुब हुआ कि मेरी किसी भी बात का दीदी ने कोई विरोध नहीं किया, बल्कि मुझे उसके गाण्ड मारने की स्वीकृति भी दे दी। मुझे लगा दीदी को तो पटाने की आवश्यकता ही नहीं थी। बस पकड़ कर चोद ही देना था।

“बस बस … बहुत हो गया … दिल बहुत मैला हो रहा है ना ?” दीदी की आवाज में कसक थी।

मैं उसकी कमर छोड़ कर एक तरफ़ हट गया।

Didi Ko Chudai Karte Pakad Liya

“दीदी, इस लण्ड को देखो ना … इसने मुझे कैसा बावला बना दिया है।” मैंने दीदी को अपना लण्ड दिखाया।

“नहीं बावला नहीं बनाया … तुझ पर जवानी चढ़ी है तो ऐसा हो ही जाता है… आ यहाँ मेरे पास बैठ जा, सब कुछ करेंगे, पर आराम से … मैं कहीं कोई भागी तो नहीं जा रही हूँ ना … इस उम्र में तो लड़कियों को चोदना ही चहिये… वर्ना इस कड़क लण्ड का क्या फ़ायदा ?” दीदी ने मुझे कमर से पकड़ कर कहा।

मेरे दिल की धड़कन सामान्य होने लगी थी। पसीना चूना बंद हो गया था। दीदी की स्वीकारोक्ति मुझे बढ़ावा दे रही थी। वो अब बिस्तर पर बैठ गई और मुझे गोदी में बैठा लिया। दीदी ने मेरी चड्डी नीचे खींच कर मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया।

“ये … ये हुई ना बात … साला खूब मोटा है … मस्त है… मजा आयेगा !” मेरे लण्ड के आकार की तारीफ़ करते हुये वो बोल उठी। उसने मेरा लण्ड पकड़ कर सहलाया। फिर धीरे से चमड़ी खींच कर मेरा लाल सुपारा बाहर निकाल लिया।

अचानक उसकी नजरें चमक उठी,”भैया, तू तो प्योर माल है रे… ” वो मेरे लौड़े को घूरते हुये बोली।

“प्योर क्या … क्या मतलब?” मुझे कुछ समझ में नहीं आया।

“कुछ नहीं, तेरे लण्ड पर लिखा है कि तू प्योर माल है।” मेरे लण्ड की स्किन खींच कर उसने देखा।

“दीदी, आप तो जाने कैसी बातें करती हैं… ” मुझे उसकी भाषा समझने में कठिनाई हो रही थी।

“चल अपनी आंखें बन्द कर … मुझे तेरा लण्ड घिसना है !” दीदी की शैतान आंखें चमक उठी थी।

मुझे पता चल गया था कि अब वो मुठ मारेगी, सो मैंने अपनी आंखें बंद कर ली।

दीदी ने मेरे लण्ड को अपनी मुठ्ठी में भर कर आगे पीछे करना चालू कर दिया। कुछ ही देर में मैं मस्त हो गया। मुख से सुख भरी सिसकियाँ निकलने लगी। जब मैं पूरा मदहोश हो गया था, चरम सीमा पर पहुंचने लगा था, दीदी ने जाने मेरे लण्ड के साथ क्या किया कि मेरे मुख से एक चीख सी निकल गई। सारा नशा काफ़ूर हो गया। दीदी ने जाने कैसे मेरे लण्ड की स्किन सुपारे के पास से

अंगुली के जोर से फ़ाड़ दी थी। मेरी स्किन फ़ट गई थी और अब लण्ड की चमड़ी पूरी उलट कर ऊपर आ गई थी। खून से सन कर गुलाबी सुपाड़ा पूरा खिल चुका था।

“दीदी, ये कैसी जलन हो रही है … ये खून कैसा है?” मुझे वासना के नशे में लगा कि जैसे किसी चींटी ने मुझे जोर से काट लिया है।

“अरे कुछ नहीं रे … ये लण्ड हिलाने से स्किन थोड़ी सी अलग हो गई है, पर अब देख … क्या मस्त खुलता है लण्ड !” मेरे लण्ड की चमड़ी दीदी ने पूरी खींच कर पीछे कर दी। सच में लण्ड का अब भरपूर उठाव नजर आ रहा था।

उसने हौले हौले से मेरा लण्ड हिलाना जारी रखा और सुपाड़े के ऊपर कोमल अंगुलियों से हल्के हल्के घिसती रही। मेरा लण्ड एक बार फिर मीठी मीठी सी गुदगुदी के कारण तन्ना उठा। कुछ ही देर में मुठ मारते मारते मेरा वीर्य निकल पड़ा। उसने मेरे ही वीर्य से मेरा लण्ड मल दिया। मेरा दिल शान्त होने लगा।

मैंने दीदी को पटा लिया था बल्कि यू कहें कि दीदी ने मुझे फ़ंसा लिया था। मेरा लण्ड मुरझा गया था। दीदी ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया। मेरे होंठों पर अपने होंठ उसने दबा दिये और अधरों का रसपान करने लगी।

“भैया, विनय से मेरी दोस्ती करा दे ना, वो मुझे लिफ़्ट ही नहीं देता है !”

“पर तू तो राजीव से चुदवाती है ना … ?”

उसे झटका सा लगा।

“तुझे कैसे पता?” उसने तीखी नजरों से मुझे देखा।

“मैंने देखा है आपको और राजीव को चुदाई करते हुये … क्या मस्त चुदवाती हो दीदी!”

“मैं तो विनय की बात कर रही हूँ … समझता ही नहीं है ?” उसने मुझे आंखें दिखाई।

“लिफ़्ट की बात ही नहीं है … सच तो यह है कि उसे पता ही नहीं है कि आप उस पर मरती हैं।”

“फिर भी … उसे घर पर लाना तो सही… और हाँ मरी मेरी जूती … !”

“अरे छोड़ ना दीदी, मेरे अच्छे दोस्तों से तुझे चुदवा दूँगा … बस, सालों के ये मोटे मोटे लण्ड हैं !”

“सच भैया?” उसकी आंखें एक बार फिर से चमक उठी।

दीदी के बिस्तर में हम दोनों लेट गये। कुछ ही देर मेरा मन फिर से मचल उठा।

“दीदी, एक बार अपनी चूत का रस मुझे लेने दे।”

“चल फिर उठ और नीचे आ जा !”

दीदी ने अपनी टांगें फ़ैला दी। उसकी भोंसड़ी खुली हुई सामने थी पाव रोटी के समान फ़ूली हुई। उसकी आकर्षक पलकें, काली झांटों से भरा हुआ जंगल … उसके बीचों बीच एक गुलाबी गुफ़ा … मस्तानी सी … रस की खान थी वो …

उसने अपनी दोनों टांगें ऊपर उठा ली… नजरें जरा और नीचे गई। भूरा सा अन्दर बाहर होता हुआ गाण्ड का कोमल फ़ूल …

एक बार फिर लण्ड की हालत खराब होने लगी। मैंने झुक कर उसकी चूत का अभिवादन किया और धीरे से अपनी जीभ निकाल कर उसमें भरे रस का स्वाद लिया। जीभ लगते ही चूत जैसे सिकुड़ गई। उसका दाना फ़ड़क उठा … जीभ से रगड़ खा कर वो भी मचल उठा। दीदी की हालत वासना से बुरी हो रही थी। चूत देख कर ही लग रहा था कि बस इसे एक मोटे लण्ड की आवश्यकता है। दीदी ने

मेरी बांह पकड़ कर मुझे खींच कर नीचे लेटा लिया और धीरे से मेरे ऊपर चढ़ गई और अपनी चूत खोल कर मेरे मुख से लगा दी। उसकी प्यारी सी झांटों भरी गुलाबी सी चूत देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने उसकी चूत को चाटते हुये उसे खूब प्यार किया। दीदी ने अपनी आंखें मस्ती में बन्द कर ली। तभी वो और मेरे ऊपर आ गई। उसकी गाण्ड का कोमल नरम सा छेद मेरे होंठों के सामने था। मैंने अपनी लपलपाती हुई जीभ से उसकी गाण्ड चाट ली और जीभ को तिकोनी बना कर उसकी गाण्ड में घुसेड़ने लगा।

“तूने तो मुझे मस्त कर दिया भैया … देख तेरा लण्ड कैसा तन्ना रहा है… !”

उसने अपनी गाण्ड हटाते हुये कहा,” भैया मेरी गाण्ड मारेगा ?”

वो धीरे से नीचे मेरी टांगों पर आ गई और पास पड़ी तेल की शीशी में से तेल अपनी गाण्ड में लगा लिया।

“आह … देख कैसा कड़क हो रहा है … जरा ठीक से लण्ड घुसेड़ना… ”

वो अपनी गाण्ड का निशाना बना कर मेरे लण्ड पर धीरे से बैठ गई। सच में वो गजब की चुदाई की एक्सपर्ट थी। उसके शरीर के भार से ही लण्ड उसकी गाण्ड में घुस गया। लण्ड घुसता ही चला गया, रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था।

लगता था उसकी गाण्ड लड़कों ने खूब बजाई थी … उसकी मुख से मस्ती भरी आवाजें निकलने लगी।

“कितना मजा आ रहा है … ” वो ऊपर से लण्ड पर उछलने लगी …

लण्ड पूरी गहराई तक जा रहा था। उसकी टाईट गाण्ड का लुत्फ़ मुझे बहुत जोर से आ रहा था। मेरे मुख से सिसकियाँ निकल रही थी। वो अभी भी सीधी बैठी हुई गाण्ड मरवा रही थी। अपने चूचों को अपने ही हाथ से दबा दबा कर मस्त हो रही थी। उसने अपनी गाण्ड उठाई और मेरा लण्ड बाहर निकाल लिया और थोड़ा सा पीछे हटते हुये अपनी चूत में लण्ड घुसा लिया। वो अब मेरे पर झुकी हुई थी … उसके बोबे मेरी आंखों के सामने झूलने लगे थे।

मैंने उसके दोनों उरोज अपने हाथों में भर लिये और मसलने लगा। वो अब चुदते हुये मेरे ऊपर लेट सी गई और मेरी बाहों को पकड़ते हुये ऊपर उठ गई। अब वो अपनी चूत को मेरे लण्ड पर पटक रही थी। मेरी हालत बहुत ही नाजुक हो रही थी। मैं कभी भी झड़ सकता था। वो बेतहाशा तेजी के साथ मेरे लण्ड को पीट रही थी, बेचारा लण्ड अन्त में चूं बोल ही गया। तभी दीदी भी निस्तेज सी हो गई। उसका रस भी निकल रहा था। दोनों के गुप्तांग जोर लगा लगा कर रस निकालने में लगे थे। दीदी ने मेरे ऊपर ही अपने शरीर को पसार दिया था। उसकी जुल्फ़ें मेरे चेहरे को छुपा चुकी थी। हम दोनों गहरी-गहरी सांसें ले रहे थे।

“मजा आया भैया… ?”

“हां रे ! बहुत मजा आया !”

“तेरा लण्ड वास्तव में मोटा है रे … रात को और मजे करेंगे !”

“दीदी तेरी भोंसड़ी है भी चिकनी और रसदार !” मैं वास्तव में दीदी की सुन्दर चूत का दीवाना हो गया था, शायद इसलिये भी कि चूत मैंने जिन्दगी में पहली बार देखी थी।

पर मेरे दिल में अभी भी कुछ ग्लानि सी थी, शायद अनैतिक कार्य की ग्लानि थी।

“दीदी, देखो ना हमसे कितनी बड़ी भूल हो गई, अपनी ही सगी दीदी को चोद दिया मैंने!”

“अहह्ह्ह्ह … तू तो सच में बावला ही है … भाई बहन का रिश्ता अपनी जगह है और जवानी का रिश्ता अपनी जगह है … जब लण्ड और चूत एक ही कमरे में मौजूद हैं तो संगम होगा कि नहीं, तू ही बता!” उसका शैतानियत से भरा दिमाग जाने मुझे क्या-क्या समझाने में लगा था। मुझे अधिक तो कुछ समझ में आया … आता भी कैसे भला। क्यूंकि अगले ही पल वो मेरा लौड़ा हाथ में लेकर मलने लगी थी … और मैं बेसुध होता जा रहा था।

सगे भाई बहन ग्रुप सेक्स के खेल में

Bhai ne sagi bahan ko choda

भाई बहन की चुदाई, बहन की चुदाई, ग्रुप चुदाई बहन के साथ, बहन की चूत, दीदी की चूत, दीदी की ग्रुप में चुदाई, दीदी की बुर, भाई बहन की बुर चुदाई की कहानी.

मैं राज गर्ग दिल्ली रहता हूँ और अपने बिज़नस के अलावा मेरा एक छोटा सा स्विंगर्स क्लब यानि वाइफ़ स्वैपिंग क्लब भी है। हम अपने क्लब में जब मीटिंग करते हैं तो, सभी क्लब मेम्बर्स आपस में अपने अपने पति और पत्नी बदल कर सेक्स करते हैं।
मेरे अलावा 4-5 कपल्स और हैं, हम सब एक साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, खाते पीते हैं, फिर बाद में जिसको जो भी अच्छा लगे या अच्छी लगे, उसके साथ सबके सामने, सबके साथ सेक्स करते हैं।
मेरी बीवी मेरे सामने क्लब के हर एक मेम्बर से सेक्स कर चुकी है और मैं अपनी बीवी के सामने अपने क्लब की हर एक औरत को चोद चुका हूँ। आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

हमारे एक बड़े सम्माननीय क्लब मेम्बर हैं, अग्रवाल साहब… वो मेरी बीवी के बड़े दीवाने हैं, जब भी मौका मिलता है, वो शशि से अगर सेक्स नहीं करते तो अश्लील छेड़छाड़ ज़रूर करते हैं।
और क्लब में इस बात का कोई ऐतराज भी नहीं करता कि बात करते करते अगर आप किसी और की बीवी के कूल्हों पे या चुची पर हाथ फेर रहे हैं, या फिर फिर आपकी बीवी को कोई और मर्द बाहों में लेकर खड़ा है।

औरतें खुल कर अपनी सेक्स फ़ंतासियाँ सबसे डिस्कस कर रही हैं। एक दूसरे से गंदी बातें, गंदे इशारे क्लब में सब जायज़ है।

ऐसे ही एक दिन मुझे एक ईमेल आई, उसमें एक मियां बीवी हमारा क्लब जॉइन करना चाहते थे।
मैंने क्लब का प्रेसिडेंट होने के नाते उनको क्लब के सारे नियम कायदे समझाये, क्लब की फीस बताई, करने और न करने वाली सब बातें समझाई।

अगले दिन दोनों मियां बीवी मुझे मेरे घर पर मिलने आए, हम दोनों पति पत्नी ने उनका स्वागत किया।

थोड़ी औपचारिक बातचीत के बाद मैंने मुद्दे पर आना ठीक समझा और उन दोनों से पूछा- तो जैसा आप जानते हैं कि हमारे क्लब में अपनी अपनी बीवियाँ बदल कर या यूं कहें कि अपने अपने पति बदल कर एक दूसरे के साथ सेक्स किया जाता है, इसमें कोई शर्म लिहाज नहीं किया जाता। आपसे भी कोई आकर पूछ सकता है, क्या मैं आपकी पत्नी या पति से सेक्स कर सकता हूँ/ सकती हूँ। इसमें आप बुरा नहीं मान सकते।
मगर किसी भी क्लब मेम्बर को आप जलील नहीं कर सकते, चाहे उसकी परफॉर्मेंस कैसी भी हो, आप किसी के साथ गाली गलौच या मार पीट भी नहीं कर सकते। सभी मामले सभी ग्रुप मेम्बर्स आपस में बैठ कर सुलझाते हैं।
आपको इस क्लब को जॉइन करने के लिए अपने पूरे होशो हवास में बिना किसी भी दबाव के अपनी रजामंदी देनी होगी, आप क्लब को कभी भी छोड़ सकते हैं, बस एक बार जमा करवाई गई फीस वापिस नहीं मिलेगी।
क्लब छोड़ कर बाहर आप किसी से भी कभी भी इस क्लब के बारे में कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं कह सकते, मतलब क्लब का किसी भी बात में ज़िक्र तक नहीं करेंगे।
तो क्या मैडम आप इस के लिए राज़ी हैं?


Bhai ne sagi bahan ko choda



वो बोली- जी, मैं पूरी तरह से राज़ी हूँ।
मैंने फिर पूछा- तो क्या सर आप इसके लिए राज़ी हैं?
मिस्टर गोयल भी बोले- 100 प्रतिशत राज़ी, बस आप यह बताओ कि आप हमें क्लब में कब लेकर जा रहे हो?
मैंने कहा- ले जाएंगे, ले जाएंगे, पहले एक टेस्ट और कर लें!
वो बोले- कर लो!

मैंने पूछा- आप दोनों में से ज़्यादा जेलस कौन है, कौन अपने पार्टनर को किसी दूसरे के साथ देख कर ज़्यादा जलता है?

मिस्टर गोयल- देखिये, मैं तो नहीं जलता मगर मैं किसी और सुंदर सी औरत से बात करूँ तो ये अक्सर इसका बुरा मनाती है।
मैंने कहा- तो मिसेज गोयल यह टेस्ट आपका है।
मेरे इतना कहते ही शशि उठ खड़ी हुई और गोयल साहब के पास जाकर बैठ गई।
उसने गोयल साहब के चेहरे से एक उंगली फिरानी शुरू की और गर्दन से होते, कंधे से नीचे, सीने पे, और फिर पेट से होते उनकी जांघ तक आ गई। आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

गोयल साहब अपनी आँख बंद करके इसका मजा ले रहे थे- ओह शशि, मजा आ गया, जान, और कर!
वो बोले तो शशि उनके बिल्कुल साथ चिपक कर बैठ गई।
मैं बड़ी बारीकी से मिसेज गोयल के रिएक्शन देख रहा था। अंदर ही अंदर वो जैसे जल रही थी।

फिर शशि ने गोयल साहब का हाथ पकड़ कर अपने चेहरे पे रखा और उनसे वैसे ही करने को कहा।
गोयल साहब ने पहले शशि के चेहरे पे हाथ फेरा, फिर गर्दन और कंधे से होते हुये उसके सीने पर आए, पहले गोयल साहब ने शशि की आँखों में देखा फिर मेरी तरफ और फिर अपनी बीवी की तरफ और फिर हल्के से शशि के स्तन के ऊपर से छूते हुये वो नीचे उसके गोरे पेट पर आ गए।

तब मेरी बीवी ने अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया, अब गहरे गले के उसके ब्लाउज़ से उसका क्लीवेज और ब्लाउज़ के पतले रूबिया कपड़े से उसके ब्रा का सारा डिजाइन भी दिख रहा था।
गोयल साहब ने शशि को देखा, तो उसने इशारे से उन्हें अपने स्तन छूने को कहा।

गोयल साहब ने शशि के एक स्तन पे थोड़ा हिचकिचाते हुए हाथ रखा तो शशि ने उनका हाथ अपने हाथ में पकड़ कर पूरे ज़ोर से अपना स्तन दबवाया, तो मिसेज गोयल ने अपना मुँह फिरा लिया।

मैं उठ कर मिसेज गोयल के पास गया और उनके बिल्कुल पास बैठ कर बोला- देखिये मिसेज गोयल, यह तो अब रूटीन का मैटर होने वाला है, आप सिर्फ देखिये, आपको भी यही सब करना और देखना होगा।

मिसेज गोयल मुझसे बोली- क्या ये सब मैं आपके साथ भी करूंगी?
मैंने कहा- जी, मेरे साथ भी और क्लब के बाकी मेम्बर्स के साथ भी। हम टोटल 10 लोग हैं, आपको मिला कर 12 हो गए। अब जिस दिन आप कपड़े उतारेंगी तो 11 लोग आस पास खड़े आपको देख रहे होंगे, 6 मर्द और 5 औरतें, इसके लिए भी आपको अपना मन पक्का करना पड़ेगा।

कह कर मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
वो चौंक कर बोली- यह क्या कर रहे हैं आप?
मगर मैं अपने कपड़े उतारता गया और बिल्कुल नंगा हो गया, अपना लंड हवा में हिलाता हुआ बोला- तो मिसेज गोयल, क्या आप मेरा लंड अपनी चूत में लेना पसंद करेंगी?

वो तो एकदम से खड़ी हो गई- यह क्या बकवास है?
वो गुस्से से बोली।
मैंने कहा- आप शांत हो जाइए, इसी बात के लिए तो हम आपको तैयार कर रहे हैं, वहाँ आपसे कोई भी ये सब पूछ सकता है और ये भी हो सकता है कि कोई पूछे भी नहीं और जब आप बिल्कुल नंगी हो तो कोई आए और अपना लंड आपके मुँह या चूत में घुसा दे।

मेरी बात सुनते ही वो बैठ गई- तो क्या मुझे रंडी बनना होगा?
वो थोड़ा तल्खी से बोली।
मैंने कहा- जी नहीं, रंडी नहीं बनना, बस अगर आपके मन में सेक्स के प्रति कोई भी बात है, कोई भी अधूरी इच्छा है, उसे बाहर निकालना है, रंडी नहीं, बस बेशर्म बनना है।
मैंने उसे समझाया।

कुछ देर वो बैठी सोचती रही, दूसरी तरफ शशि और गोयल साहब आपस में बिज़ी थे, गोयल साहब शशि की साड़ी उठा कर अपना हाथ उसकी साड़ी में डाल कर शायद उसकी चूत सहला रहे थे और शशि उनका तना हुआ लंड हाथ में पकड़ कर उम्म्ह… अहह… हय… याह… उनकी मुट्ठ मार रही थी।
कुछ देर मिसेज गोयल ये सब देखती रही, फिर बोली- ओ के, मैं तैयार हूँ, मिस्टर राज, अब आपके किसी भी सवाल, किसी भी बात का मैं जवाब दूँगी।
मैंने कहा- तो नंगी होकर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसो।
मेरे इतना कहते ही उस औरत ने गजब की फुर्ती दिखाई, 10 सेकंड में अपनी साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज़, ब्रा पेंटी सब उतार फेंके और बिल्कुल नंगी हो कर मेरे पांव के पास बैठ गई, मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और लगी चूसने।

मैंने कहा- मिसेज गोयल, आप तो बड़ी तेज़ निकली?
वो बोली- मेरा नाम पूजा है, और जब मैं एक बार ठान लेती हूँ, तो फिर पीछे नहीं हटती।

उसके बाद हम चारों ने आपस में अपने अपने पार्टनर बदल कर सेक्स किया जिसे गोयल दंपति ने बहुत एंजॉय किया।

अगली मीटिंग में हमने उन्हें आने की दावत दी। मीटिंग हुई शुक्रवार रात की थी। शनिवार को दो कप्ल्ज़ ने कहीं बाहर जाना था, इसलिए शनिवार की जगह शुक्रवार रात की मीटिंग रखी गई।

करीब 7 बजे सब मेम्बर्स इकट्ठे हो गए, बस गोयल साहब और उनकी पत्नी ही नहीं आए थे। वो रास्ते में कहीं जाम में फंस गए थे। हमने अपनी पार्टी शुरू कर दी।

ड्रिंक्स थी, वेज नॉन वेज भी था, हर कोई अपनी पसंद के पार्टनर के साथ बातचीत में मशगूल था। अभी सिर्फ एक दो पेग हुये थे, इस लिए सुरूर कोई ज़्यादा नहीं था मगर मस्ती माहौल में छा चुकी थी।

हमारे अग्रवाल साहब तो सिर्फ चड्डी पहने घूम रहे थे, मुझसे कई बार पूछ चुके थे- अरे नई चिड़िया आई या नहीं?
मैं उन्हें आश्वासन दे देता- आ रही है।

कोई एक घंटे बाद मिस्टर और मिसेज गोयल पहुंचे। जब वो रूम में दाखिल हुये तो सबने उनका स्वागत किया मगर अग्रवाल साहब तो सन्न रह गए, मुझे एक तरफ ले जा कर बोले- अरे यार, ये तुमने किसको मेम्बर बना दिया?
मैंने पूछा- क्यों क्या हुआ, वो खुद आए थे मेरे पास, मैंने तो सब कुछ चेक करके ही उनको मेम्बर बनाया है।

वो बोले- अरे यार ये दोनों तो मेरे बहन और बहनोई हैं, मैं इनके साथ कैसे?
उधर गोयल साहब ने भी उनको चड्डी में लंड अकड़ाये घूमते देख लिया था, पूजा गोयल तो मुँह छुपाती फिर रही थी।
यह हिंदी सेक्स स्टोरी आप ये कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है |
मैंने स्थिति को संभालने के लिए ज़ोर से सब मेम्बर्स को आवाज़ लगाई- मेरे प्यारे ग्रुप मेम्बर्स, आज एक बड़ी विकत स्थिति आ गई है, हमारे नए बने मेम्बर्स मिसेज एंड मिस्टर गोयल हमारे अग्रवाल साहब के रिश्ते में बहन और बहनोई हैं। अब हालात ये हैं कि इन दोनों को आपस में एक दूसरे के सामने आने में दिक्कत हो रही है। अब आप सबसे निवेदन है कि मिल कर फैसला करें कि इस बात का क्या हल निकाला जाए।

सब मेम्बर्स आपस में बातचीत करने लगे। कुछ मेम्बर्स ने सुझाव दिये- या तो मिस्टर अग्रवाल या मिस्टर गोयल ये क्लब छोड़ दें।
मैंने कहा- पर अब तो इनको पता चल गया कि ये लोग इस क्लब के मेम्बर हैं।

दूसरा सुझाव- यहाँ किसी का किसी से कोई रिश्ता नहीं है, सिर्फ मर्द और औरत का रिश्ता है, इसलिए सब एंजॉय करो।
इसका प्रति उत्तर आया- तो जिस दिन राखी आएगी, उस दिन अग्रवाल साहब अपनी बहन से राखी कैसे बंधवायेंगे? आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

फिर एक तीसरा हल पेश किया गया- अग्रवाल साहब और मिसेज गोयल आपस में सेक्स न करें, अपने भाई और बहन के रिश्ते को कायम रखें, मगर चूंकि इस क्लब में आने मात्र से ही ये दोनों भाई बहन एक दूसरे के सामने नंगे हो चुके हैं, इसलिए इन्हें क्लब की हर क्रिया में भाग लेने की इजाज़त है, बस आपस में ये न करें, और किसी के साथ, कुछ भी करें!

सबने अग्रवाल साहब और पूजा गोयल की तरफ देखा, दोनों के चेहरे भावशून्य थे, वो दोनों यह फैसला नहीं कर पा रहे थे, अगर आपके पास इस बात का कोई हल है तो प्लीज़ बताएं।

Naukrani ki chudai Chudai Kahani

 
Naukrani ki chudai Chudai Kahani naukrani ki thukai, saas ki phudi ki kahani, devar bhabhi ki chudai, urdu ki kahani, sandy k tail ki kahani , pyaar ki kahani, kahani mery lun ki, manorama ki kahaniya, malik ka naukrani ke sath chakkar, malik naukrani, naukrani, ghar malik ka naukrani ke sath chakkar, malik ne naukrani, nokrani ko choda, malik aur naukrani, naukrani sex, naukrani ka ghar malik ke sath chakkar, suvichar kahani, pyassi naukrani, naukrani se pyar, ghar malik ne nokrani ko choda,

naukrani ki thukai, saas ki phudi ki kahani, devar bhabhi ki chudai, urdu ki kahani, sandy k tail ki kahani , pyaar ki kahani, kahani mery lun ki, manorama ki kahaniya, malik ka naukrani ke sath chakkar, malik naukrani, naukrani, ghar malik ka naukrani ke sath chakkar, malik ne naukrani, nokrani ko choda, malik aur naukrani, naukrani sex, naukrani ka ghar malik ke sath chakkar, suvichar kahani, pyassi naukrani, naukrani se pyar, ghar malik ne nokrani ko choda,


दोस्तों, आज जो नौकरानी की चुदाई की कहानी बताने जा रहा हू वो मेरी नौकरानी और उसकी बेटी की चुदाई की हैं दोनों गजब की माल थी, मजा आ गया माँ और बेटी को चोदने के बाद,मेरे फ्लैट में काम करने के लिए एक औरत आती है कुसुम जो की 39 साल की है, पर वो एकदम मस्त माल और जवान लगती है, उसका बदन काफी भरा पूरा है, गजब की सुन्दर है। पर झाड़ू पोछा का काम करना इसलिए पड़ रहा है क्यों की उसका हस्बैंड अब चल फिर नहीं सकता उसका एक्सीडेंट हो गया है, बहुत ही अच्छी औरत है ।


कुसुम कल सुबह जैसे ही काम करने आई, वो बड़ी ही सुन्दर लग रही थी, मैंने पूछा क्या बात है कुसुम आज तुम बड़ी अच्छी लग रही हो तो बोली, हां हो सकता है कल कवाचौथ था इस वजह से मैंने फैसला ब्लीच मेहंदी लगबै थी, बाल भी ठीक कराया था, क्या करे साल भर का पर्व है इसलिए अपने आप को एक दिन तो ठीक कर लेती हु, हम लोग रोज रोज कैसे कर सकते है अपने आप को ठीक ब्यूटी पारलर में, बहुत पैसा लगता है भैया, गरीब आदमी तो सुन्दर होते हुए भी सुन्दर नहीं लग पता है सिर्फ अपने गरीबी की वजह से वाकई में कुसुम बहुत ही सुन्दर लग रही थी, साड़ी भी लाल लाल और हाफ स्लेव का ब्लाउज उसकी चूचियाँ बहुत टाइट और उभर गजब का लग रहा था, साड़ी उसकी पारदर्शी थी इसवजह से उसका नाभि और पेट साफ़ साफ़ दिख रहा था, मैं तो बस उसके पेट को ही निहार रहा था, फिर वो झाड़ू लगाने लगी, वो ब्लाउज भी ऊपर से ज्यादा कटा हुआ पहनी थी इस वजह से नौकरानी की  चूचियाँ भी साफ़ साफ़ दिखने लगी, जब वो झुक रही थी क़यामत ढा रही थी, मैं तो उसकी इस रूप को देखकर हैरान परेशान था, मैं ही नहीं बल्कि मेरे लण्ड भी नमस्कार करने लगा था।


तभी कुसुम भोली भैया जी मेरा पति अब कमाता नहीं है, मेरे काम करने से ही घर चलता है, आज मुझे ४ हज़ार रूपये की जरूरत पड़ गयी है, क्या आप मेरी मदद करोगे, मैंने कहा मदद तो कर देता पर मुझे अपनी गर्ल फ्रेंड को देना है, तो कुसुम ने कहा आप मुझे ही दे दो, तो मैंने कहा उसको देता हु तो मजे देती है, तो कुसुम बोली मैं भी मजा दे दूंगी, और अपने साडी के कोने से मुह को दबाते हुए मुस्कुराने लगी, मेरा दिमाग ठनक गया और धड़कन तेज हो गयी, क्यों की मैं झूठ बोला था आज तक मैंने किसी भी लड़की को छुआ तक नहीं हु इस नजर से, अब तो शेर के सामने बकरी थी, मैंने कहा ठीक है मैंने अपना अलमीरा खोला और चार हज़ार रूपये दे दिए, वो बीएड पे बैठ गयी, बोली कैसा मजा चाहिए।


मैंने कहा तुम बड़ी ही खूबसूरत हो, आज तो और भी खूबसूरत लग रही हो, तो बोली मेरा पति तो आज कल मेरे तरफ देखता भी नहीं है वो काफी कमजोर सा हो गया है, आप मेरी मदद थोड़े दिन तक कर दो मैं भी आपको किसी चीज की कमी नहीं रखूगी, फिर वो मेरे तरफ झुकी और मैंने उसके तरफ, दोनों के होठ आपस में मिल गए, और फिर कब मेरा हाथ नौकरानी की चूच को दबाने लगा पता ही नहीं चला मैं ब्लाउज के ऊपर से उसके चूच को दबा रहा था वो अपना ब्लाउज का हुक खोल के अपना चूच बाहर निकाल दी, गजब का बड़ा बड़ा टाइट टाइट चूच था, मैं पहली बार किसी को चूच को दबाया था, फिर उसने अपने चूच को मेरे मुह में डालने लगी, मैंने भी आराम से उसके चूच को अपने मुह में ले के निप्पल को पीने लगा।


फिर नौकरानीने बेड पे लेट गयी, और मैंने उसके पेटीकोट को ऊपर कर दिया, गोल गोल जांघे, मैंने ऊपर से निचे तक सहलाया फिर नौकरानी की पेंटी को खोल दिया, काले काले बाल बूर के आस पास था, मैंने टांगो की अलग अलग कर के नौकरानी की बूर का मुआयना किया बीच में एक दरार सी थी मैंने अपने हाथ से अलग किया लाल लाल चूत पहली बार देखा मेरी धड़कन तेज हो गयी, मैं अपने आप को संभल नहीं पाया और नौकरानी की चूत को अपने जीभ से चाटने लगा, पर कुसुम बहुत सेक्सी थी, बोली लण्ड को क्या हुआ डालो ना, पागल कर दोगे क्या, फिर मैं अपने लण्ड को उसके बूर के ऊपर रख के धक्का मार तो छटक गया, फिर वो खुद ही मेरे लण्ड को पकड़ के अपने चूत के ऊपर लगाई।


मैंने धक्का दिया मेरा लण्ड स्लो मोशन में उसके बूर में दाखिल हो गया, उसके मुह से आवाज आई हाईई हाय मैं मर गई, हाय हाय, फिर क्या था मैं धका धक करके लण्ड को उसके चूत में पेलने लगा, वो बस मोअन कर रही थी और अपने हाथ से वो खुद ही अपनी चूचियों को दबा रही थी, मैं झटके पे झटके दे रहा था, वो भी गांड उठा उठा के चढ़वा रही थी, मैंने उसको चोदते रहा और वो भी चुद्वाते रही, फिर वो झड़ गयी और मैं भी एक गहरी सांस लेते हुए सारा माल नौकरानी की चूत में डाल दिया, फिर वो मुझे प्यार से चुमी और बोली कैसा लगा, मैंने कहा बहुत अच्छा लगा, फिर वो सारा काम करके चली गयी।

School Ke Harami Laundo Ne Balatkar Kiya Mera


 

School Ke Harami Laundo Ne Balatkar Kiya Mera

हाय फ्रेंड्स, मेरा नाम प्राची है, और मैं कटनी के केन्द्रीय विद्यालय के अध्यापिका हूँ | ये मेरी रियल कहानी है जो मेरे साथ पिछले साल अगस्त में हुई थी, इस कहानी में मैं आपको बताउंगी कि कैसे मेरी एक स्टूडेंट की वजह से मेरे बदनामी के साथ साथ मुझे सजा भी भुगतनी पड़ी | अब मैं कहानी चालू करती हूँ|

हर साल आल इंडिया में केन्द्रीय विद्यालय में रीजनल स्पोर्ट्स मीट होता है |और कुछ टीचर्स को स्कूल के बच्चो को लेकर दूसरे स्कूलों में जाना पड़ता है | तो मैं चेस कि टीम ले कर सागर गई थी केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-3 में सबके रुकने कि व्यवस्था थी | और मैं सिर्फ लड़किओं को लेकर गई हुई थी तो मेरे ऊपर जिम्मेदारी बहुत ज्यादा थी जबकि सभी ये बात जानते हैं कि सागर एरिया बहुत ख़राब है | रात के 8 बजे हम सब वहां पहुंचे थे और अपना अपना रूम देख रहे थे कि हमे कौन-सा रूम मिला है |

तभी मेरी नजर एक सर पर पड़ी वो बहुत बदमाश टाइप के सर हैं और वो वहीँ लोकल सागर के ही हैं उनके बारे में सभी को पता है | रूम का पता चलने के बाद हम सब रूम में गए और वहां अपना अपना सामान जमाने लगे | तभी मेरी एक स्टूडेंट जिसका नाम दिव्या है उसने मुझसे कहा कि मैडम मुझे टॉयलेट आई है | तो मैंने कहा कि ठीक है तुम चले जाओ और फिर वहां से आ कर अपना सामान जमा लेना फिर वो वहां से चली गई और हम सब अपना अपना सामान ज़माने में लग गए |


तभी दिव्या वापस रोते रोते आई और तो मैंने उससे पूछा कि क्या हुआ तुम्हे ? तुम रो क्यों रही हो ? वो रोये जा रही थी और मैं उससे बार बार पूछे जा रही थी क्या हुआ है मुझे बताओ | बहुत बोलने के बाद उसने मुझसे कहा कि मैडम जब मैं टॉयलेट जा रही थी तो वहां दो लड़के घुस आये और मेरा वीडियो बना लिए और बोल रहे हैं कि रात में 11 बजे हमे स्कूल के पीछे वाली पहाड़ी में आ कर मिलना नहीं तो तुम्हारा वीडियो सबको दिखा के तुम्हे बदनाम कर देंगे | ये बात सुनते ही साथ मेरी तो आँखे फटी की फटी रह गई मेरे कान के परदे फट गए |

मैंने उससे कहा कि देखो तुम रोना बंद करो तुम्हे परेशान होने की जरुरत नहीं है कौन है वो लड़के मैं देख लूंगी | फिर मैंने उसे चुप करा के रूम में भेज दिया और सोचने लगी कि वो लड़के कौन हो सकते हैं जो इतनी खराब हरकत कर सकते हैं ? फिर मैं भी रूम में आ गई और बच्चो से कहा कि मैं जा रही हूँ खाने का टोकन लेने | खाना भी बन ही रहा था तब फिर मैं टोकन ले के वापस आई और बच्चो को एक एक टोकन दे कर कहा कि 15 मिनट से सब खाना खाने चलेंगे | दिव्या से कहा कि तुम मेरे साथ रहना और मुझसे दूर मत जाना और उसने हाँ में सिर हिला दिया |

फिर हम सब खाना खाने लगे और खाने के बाद सब रूम की तरफ चल दिए | मैंने दिव्या से कहा कि तुम रात में सोना नहीं और मेरे साथ चलना जब सब सो जायेंगे | करीब 10:30 बजे तक मेरे रूम की सारी लड़कियां सो चुकी थी और मैंने चुपके से दिव्या को उठाया और कहा कि चलो मेरे साथ

(मैंने उसे ले जाना इसलिए जरुरी समझा | क्यूंकि मैं उन कमीने बच्चो को नहीं जानती थी और मैं जानना चाहती थी कि कौन हैं ये बच्चे और किस स्कूल के हैं ताकि मैं उनकी शिकायत कर सकूं | फिर हम दोनों स्कूल के बाहर निकले तो पूरा सुनसान इलाका था | फिर मैंने सोचा कि मैं छुप जाती हूँ और इंतज़ार करती हूँ और देखती हूँ कि कौन बच्चे हैं ?


11 बजे तक वहां कोई नहीं आया था और हलकी बारिश हो रही थी और मुझे भी डर लग रहा था कि इतनी रात का वक़्त हैं कहीं मुझे ही लेने के देने न पड़ जाए | जैसे ही मैं निकलने को हुई तभी मेरे पीछे से किसी ने मुझे दबोच लिया और गले में चाकू अड़ा दिया (चाकू अड़ा कर उसने कहा कि ज्यादा होशियारी मत करना मैडम वरना तुम्हे यहीं कहीं ठिकाने लगा देंगे ) | मैं डर के मारे कुछ बोल भी न पाई और मैंने जब सामने देखा तो दो और लडकें थे जो दिव्या के गले में चाकू अड़ा कर उसे मेरे पास ला रहे थे |

हलकी सी रौशनी में मैं एक लड़के को पहचान गई थी | और मुझे समझते जरा भी देर न लगी कि ये सब वही सर के स्टूडेंट्स हैं जिनकी इमेज हर स्कूल में खराब है | उन लोगों ने शांति से उनके पीछे आने का इशारा किया | एक लड़का हमारे आगे था और दो लड़के हमारे पीछे थे वो हम दोनों को स्कूल के पीछे वाली पहाड़ी पर ले जा रहे थे | 10 मिनट के बाद हम सब वहां पंहुचे तब तक वो बहुत खुश होने लगे कि चारा डाला एक बकरी को फ़साने के लिए और यहा देखो फस गई दो और वो जोर जोर से हसने लगे |

और मैं मन ही मन बहुत रो रही थी कि कहाँ से मैं इनके चंगुल में फंस गई जैसा मैं सोच रही थी आखिर वही हुआ मेरे साथ | उनलोग ने हम दोनों से कहा कि अगर जिन्दा रहना चाहते हो तो शोर मत मचाना और जो हम करना चाहते हैं वो करने देना वरना तुम दोनों को यहाँ ही मार देंगे |
उसमे से एक लड़के ने मुझे पेड़ से बाँध दिया और बाकि दो लडको ने दिव्या को पकड़ के उसके कपडे उतारने लगे वो चिल्ला रही थी और गिडगिडा रही थी कि उसे छोड़ दे पर वो कहाँ किसी कि सुनने वाले थे | वो तो बस अपनी ही धुन में सवार थे फिर उन दोनों ने दिव्या को नंगी कर दिया और उसे उसी के कपड़े में बिछा कर लेटा दिया | मैं ये सब नहीं देखना चाहती थी पर मैं क्या करती ये सब मेरी आँखों के सामने ही हो रहा था | फिर उनमे से एक लड़के ने उसके मुंह में लंड डाल दिया और दूसरा उसके दूध चूस रहा था |

बेचारी बहुत घबरा रही थी और इन हैवानो को जरा भी रहम नहीं आ रहा था | 10 मिनट तक ऐसा करने के बाद जिसका नाम कार्तिक था उसने अपना लंड चुसाना चालु कर दिया और हेमंत ने उसकी चूत में जोरदार धक्का लगा के पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया | उसकी चीख निकल गई और वो जोर जोर से आअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह  करने लगी और हेमंत उसकी चूत जोर जोर से चोदे जा रहा था | 15 मिनट तक चोदने के बाद वो उसकी चूत में ही झड गया और मेरे पास आ कर बैठ गया |

ऐसे ही हेमंत के बाद कार्तिक ने उसे चोदना चालू किय और अंकित उसकी गांड में अपना लंड डाल रहा था | उसकी चूत और गांड फट चुकी थी और वो आह्हह्हह्हह्हह ऊओह्हह्ह रुक जाओ कमीनो सांस तो लेने दो कह रही थी | करीब आधे गनते टक चोदा था हरामखोरों ने उसे और सब उसकी चूत में ही झड़ गए थे |

उसकी चूत से मुठ निकलता जा रहा था बिलकुल अन्दर तक भर दिया था उसकी चूत को | मुझे लग रहा था जैसे साले प्यासे है चूत के लिए | फिर सब मेरे पास आकर बैठ गए और जिस लड़के का नाम हेमंत था उसने दिव्या से कहा चल कपडे पहन ले | तभी कार्तिक ने कहा अरे देखो उसकी चूत तो मारली अब मैडम को भी तो चखलो |

फिर सब भूके भेदिये कि तरह मुझे देखने लगे और धीरे धीरे मेरे पास आये | मेरे कपडे फटना शुरू हो गए और मेरे ब्रा और पेंटी को देखकर तो सारे लड़के पगा हो गए | उन सब ने मेरी चूत को मेरी पेंटी के ऊपर से ही चाटना शुरू कर दिया और कार्तिक मेरे दूध को ब्रा के ऊपर से पीने लगा |


उन सब ने पेंटी के ऊपर से ही मेरी चूत में ऊँगली करना चालू कर दी थी | मैं उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म अह्हह्हह्हह्हह क्या कर रहे हो कहने लगी | १० मिनट बाद मेरी पूरी पेंटी गीली हो गयी | और सबने अपने लंड उठाये एक ने मेरी गांड में पेल दिया और दोस्सरे ने मेरी चूत में | मुझे चोद चोद के पागल कर दिया था और में बस उम्म्म्मम्म्म्मम्म्म्म आअह्ह्ह्ह  आअह्ह्ह्ह कर रही थी |

फिर एक और लड़का आया जो हमारी विडियो बन रहा था | उसने कहा मैडम का गजब फिगर है मैं भी चोदुंगा | और अब मेरी चूत में दो लंड और गांड में एक और मुह में एक | सब ने मुझे ४० मिनट चोदा और मुठ मेरी चूत, गांड और मुह में भर दिया | अब हम दोनों लस्त पड़े हुए थे वो लोग चले गए और विडियो भी मिटा दिया | हमने इसके बारे में किसी को नहीं बताया और ना ही कभी कही गए |

जवान मुस्लिम लड़की की मस्त चुदाई की

जवान मुस्लिम लड़की की मस्त चुदाई की

नमस्कार मेरे प्यार पाठको, आप सभी को मेरा सलाम मेरा नाम संदीप है और मैं इंदौर का रहने वाला हूँ मेरी उम्र 27 साल है और मैं दिखने में बहुत स्मार्ट हूँ ऐसा मेरे साथ के सारे फ्रेंड्स बोलते हैं मैं इंदौर में ही जॉब करता हूँ दोस्तों, ये मेरी पहली सेक्स स्टोरी है जो मैं आप सभी के सामने आज पस्तुत कर रहा हूँ तो अब मैं ज्यादा वक़्त बरबाद ना करते हुए सीधा कहानी शुरू करता हूँ

ये घटना तीन साल पहले की है जब मैं बेरोजगार था मैं एक बहुत खुश मिजाज़ लड़का हूँ, और बिंदास भी स्कूल टाइम से ही मैंने कई लडकियो को पटाया था और कई वारी चोद भी चुका हूँ एक दिन मैं पार्क गया हुआ था अपने दोस्तों के साथ उस समय वहां पर मेला लगा हुआ था तो मैं मेरे कुछ फ्रेंड्स साथ में गये थे वहां पर मुझे एक लड़की लाइन मार रही थी, ये मैंने नोटिस कर लिया था मैं भी उसे लाइन मारने में लग गया मेरे दोस्त मुझे अकेला नहीं छोड़ रहे थे कहीं भी जा रहे थे तो मुझे भी साथ ले जाते फिर मैंने उनसे कहा कि यारो ! थोडा रुकना मैं हलके हो कर आता हूँ


फिर मैंने टॉयलेट करने के बहाने मैं उस लड़की के बाजू में जा कर खड़ा हो गया जब उसने मेरी तरफ देखा तो वो शरमा गयी थी मैं बात करने में थोडा हिचकिचा रहा था, तो उसने मुझे धीरे से हाय कहा मैंने भी उसे जवाब में हाँ कहा और बोला कि चलो ना यहाँ हम ठीक से बात नहीं कर पाएंगे हम बाहर चलते हैं, और वो तैयार हो गयी उसके बाद मैंने अपना मोबाइल वाइब्रेशन में कर दिया ताकि अगर मेरे फ्रेंड्स मुझे कॉल करे तो हम डिस्टर्ब ना हो उसके बाद हम बाहर आ गये और मैं उसे के होटल में ले गया वो होटल पोहा के लिए बहुत फेमस है तो हम दोनों वहां बैठ कर बात करने लगे उस लड़की का नाम आशिमा था और वो एक मुसलमान लड़की थी आशिमा 22 साल की थी और दूध जैसी गोरी थी


उसका फिगर हाय, उसके फिगर इतना कातिलाना था कि क्या बताऊ एक दम नूर से टपकती जाम की तरह थी वोहम दोनों ने आपस में नंबर बदले और फिर अपने अपने फ्रेंड्स के पास चले गये जब मैं अपने दोस्तों के पास गया तो वो मुझे गाली दे रहे थे कि इतनी देर तक कहाँ था ? इतनी सुंदर सुंदर लड़कियां आई है उनको लाइन मारते तो मैं मन ही मन बोल पड़ा कि अबे सालो तुमसे कुछ नहीं हो पायगा तुम लोग बस यही कर सकते हो

फिर वो हम लोग मस्ती करने लगे थे कि  तभी मेरा मोबाइल बजा तो मैंने अपना मोबाइल निकाला और देखा कि ये तो आशिमा का मेसेज है मैंने मेसेज देखा तो उसमे लिखा था कि मुझे तुमसे मिल कर बहुत अच्छा लगा उसके बाद मैंने भी उसे मेसेज किया कि मुझे भी तुमसे मिल के बहुत अच्छा लगा


उसके बाद मैं और मेरे दोस्त एन्जॉय करके घर आ गये फिर मैंने रात का डिनर किया और सोने चला गया फिर थोड़ी देर के बाद मैंने आशिमा को कॉल लगाया उसने दो रिंग जाने के बाद फ़ोन उठाई फिर हमारी बात होने लगी थी हम दोनों अब रोज फ़ोन पे बात किया करने लगे और हमारी बाते रात के दो-दो तीन-तीन बजे तक चलती रहती थी ऐसी ही बातो बातो में हम दोनों आपस में अश्लील बाते भी करने लगे थे एक दिन आशिमा का घर खाली था, तो उसने मुझसे कहा कि संदीप क्या तुम आ सकते हो मेरे घर आज मैंने पूछा कि क्यूँ कुछ काम है क्या? तो उनसे कहा आज मेरे घर में कोई नहीं है और सब कल आएंगे तो मैंने भी कहा ठीक है मैं आधे घंटे से आता हूँ


अभी थोडा मम्मी के साथ मार्किट जाना है पर सच तो ये है दोस्तों, मुझे अपनी झांटे काटनी थी और बगल के बाल भी बनाना था मैं तैयार हो के उसके घर पंहुचा मस्त डीओ लगा के जब मैंने दरवाजा नॉक किया तो उसने दरवाजा खोला तो मैं बस उसे देखता ही रहा इतनी मस्त माल लग रही थी कि क्या बताऊ उसने शॉर्ट्स पहने हुई थी और साथ में स्लीवलेस टॉप थी मेरा तो लंड ही खड़ा हो गया था उसको देख कर


फिर उसने मुझे अन्दर बुलाया और बैठा दिया सोफे में फिर वो दरवाजा बंद करके मेरे पास आ गयी और बाजू में ही बैठ गयी थोड़ी देर के बाद उनसे मुझे किस करने के लिया कहा तो मैं क्या पागल था जो उसे मना करता मेंने सीधा उसका मुंह पकड़ा और उसके होंठ में होंठ को रख कर किस करने लगा उसके गुलाबी गुलाबी होंठ को रस को पीने में बहुत मजा आ रहा था वो भी मेरे होंठ को चूस रही थी 15 मिनट तक हमने एक दूसरे को जी  भर के किस किया फिर मैंने उसका टॉप निकला तो उसने अन्दर पिंक कलर कि ब्रा पहने हुई थी मैंने उसकी ब्रा भी उतार दिया और उसके बड़े बड़े और गोर गोर दूध को पकड़ के पीने लगा उसके गुलाबी निप्पल्स को जोर जोर से चूसने लगा और वो भी मदमस्त हो कर अहहहः आआऊँ ऊनंह ऊनंह ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह ऊम्म्ह ऊउम्म्म्ह आहाआ हहाआअ कर रही थी


जब मैं उसके दूध को मसल मसल के जोर जोर से चूस रहा था तब वो जोर जोर से अहहहः आआऊँ ऊनंह ऊनंह ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहहाआअ अहाआअ हहहाआअ अहहहा ऊउंह ऊम्म्म्ह ऊउम्म्म उऊंन्न अहहहाआअ आआहाआअ उऊंन्ह्ह ऊउम्म्म्ह आहाआ हहाआअ करने लगी थी उसको मेरे दूध पीने का तरीका बहुत पसंद आया था वो मदहोश हो गयी थी फिर मैंने उसकी स्कर्ट उतारा और तो देखा कि उसकी पेंटी भी पिंक है (मैं ये सोचने लगा कि क्या बात है यार आज सब गुलाबी गुलाबी हो रहा है मेरे साथ ) फिर मैं उसकी पेंटी उतार और उसे बेड पर लेटा दिया जब मैंने उसकी चूत देखा तो वो भी गुलाबी थी


फिर मैंने उसकी चूत में अपने जीभ डाल दिया और हाँथ से उसकी चूत को रगड़ते हुए चूत को जीभ से चाट रहा था वो अहहहः आआऊँ ऊनंह ऊनंह ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह ऊम्म्ह आहहाआअ अहाआअ हहहाआअ अहहहा ऊउंह ऊम्म्म्ह ऊउम्म्म उऊंन्न अहहहाआअ आआहाआअ उऊंन्ह्ह ऊउम्म्म्ह आहाआ हहाआअ करते हुए सिस्कारिया भर रही थी मैं उसकी चूत को चाटे जा रहा था और वो अपनी गांड उठा उठा के अपनी चूत चटवा रही थी साथ में जोर जोर से अहहहः आआऊँ हहाआअ करते जा रही थी मैंने उसकी चूत 10 मिनट तक खूब चाटा था और फिर बाद में मैं भी अपने सारे कपडे उतारा वो झट से मेरा लंड पकड़ी और अपनी जीभ से चाटने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था उसका ऐसा करना कुछ देर मेरा लंड चाटने के बाद उसने अपने मुंह में लंड भर के जोर जोर से चूसने लगी थी और मैं भी मस्त हो कर अहहहः ऊउम्म्म्ह आहाआ हहाआअ कर रहा था उसने मेरा लंड करीब 15 मिनट तक चूसी और चाटी थी


फिर मैंने उसकी टाँगे चौड़ी करके अपना लंड एक ही झटके में पूरा घुसेड दिया था उसकी चूत में अब मैं जोर जोर से उसकी चूत को चोद रहा था और वो जोर जोर से अहहहः आआऊँ ऊनंह ऊनंह ऊउम्म्ह ऊउन्न्ह अहहहा आहाआ हहाआअ करते हुए मुझसे चुदवा रही थी फिर मैंने उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से जा कर उसकी पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला और चोदने लगा वो जोर जोर से अहहहः आआऊँ ऊनंह करते हुए चुदाई का मजा ले रही थी मैंने उसे हर एंगल में चोदा था

फिर आधे घंटे के बाद मैंने अपना लंड उसके पेट में गिरा दिया था और हम दोनों अजू बाजू में लेटे हुए थे २० मिनट के बाद मेरा लंड फिर से तन गया था और फिर हमने चुदाई किये मैंने उसे दो दिन तक खूब चोदा था फिर हमे मौका नही मिल पा रहा था चुदाई करने का एक दिन की बात है हम दोनों वीडियो चैटिंग कर रहे थे तो उसके बाप ने पकड लिया और वो नंगी थी

नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

अगस्त का महीना था। तेलुगु कैलेंडर के मुताबिक श्रावण चल रहा था श्रावण का महीना हमारे यहाँ के औरतों के लिए बहुत ही महत्त्व पूर्ण है। श्रावण के महीने के दुसरे शुक्रवार को महिलाएं अपने पति की आयु, स्वास्थ्य और सम्पदा के वृद्धि लिए 'मंगल गौरी व्रत' मनाते है। हमारे घर में भी यह व्रत माँ मानती है। लेकिन माँ इस व्रत कोअपनी दो और बहनों के साथ मिलकर हमारे बड़ी माँ के यहाँ मानती है। बड़ी माँ विजयवाड़ा में राहटी है।

इस वर्ष भी मनके लिए हम सब विजय वाडा जाने कि तैयारियां कर रहे थे। हुकमे यहाँ से ४ घंटे का रेल की सफर है। गुरवार के दिन था। दुसरे दिन व्रत है। शाम चार बजे की गाड़ी से हम सब यानि की माँ और हम तीनों बहने जाने कि तैयारी कर रहे थे।


दोपहर बारह, एक बजे के समय में हमारे यहाँ एक नानाजी अये थे। उनका तक़रीबन कोई 53 - 54 साल की उम्र होगी। रेवेन्यू ऑफिस कोई काम था! हमारे यहाँ कोई एक सप्ताह रहने अये है। आते ही उन्होंने हम सब को गले लगाए और हमारे माथे चूमे। मुझे ऐसा लगा की उन्होंने कुछ ज्यादा ही देर मुझे गले लगये थे और और मेरे नितम्बो और चूची को धीरेसे सहलाये।


वह माँ के दूर के रिश्ते से चाचाजी लगते है। माँ उन्हें चाचाजी कहती थी तो हम उन्हें नानाजी कहकर बुलाते थे। पहलीमंज़िल के गेस्ट रूम उन्हें दिया गया। हमेशा की तरह डैडी घर में नहीं थे। डैडी सिविल कांट्रेक्टर है कंस्ट्रक्शन साइट पर थे।


नानाजी के आने से हम सब उदेढ़ बुन में थे की बड़ी माँ की यहाँ कैसे जाए। व्रत का मामला था रुक भी नहीं सकते। हमारे समस्या सुनकर नानाजी ,माँ से बोले कहे "प्रभा आज के लिए मैं किसी होटल में रहजाता हूँ, तुम अपना प्रोग्राम मत बदलो। लेकिनमा की यह पसंद नहीं था, अतिथि घर ए और हम कही और चले उन्हें अच्छा नहीं लगा।


"माँ..." मैं बोली "मैं रुक जाति हुँ, नानाजी को यही रहने के कहिये मैं उन्हें देख लूंगी " कुछ देर की वार्तालाप के बाद यह तय हुआ की मैं रुक जावूं और वह लोग विजयवाडा के लिए चले। मैं रुक गयी और मम्मी और मेरे दोनों बहने प्रेमा, रीमा चले गए।


नानाजी के साथ मैं अकेली थी। माँ और बहने रविवार शाम को आयँगे। उस रात 8.30 बजे हम ने खाना खाया और नानाजी ऊपर अपने कमरेमे चले गए।


मैं अपने कमरे में जाकर कॉलेज के कुछ assignments करने बैठी। रत के 11.30 बजे मैंने अपने assignments खतम किये और हॉल में सोफे पर बैठकर TV ऑन किया और late night अंग्रेजी मूवी देखने लगी। उस समय मैंने खुले गले वाले V शेप की सिल्क की स्लिप पहने थी और अंदर ब्रा नहीं पहनी। वह स्लिप सिर्फ चूचियों को छुपा रही थी। मेरे सफाचट पेट और नाभि खुले थे। ऊपर भुजाये का पास भी स्लिप सिर्फ स्ट्रैप्स ही थे। सिल्क का ही ढीला शॉर्ट्स पहनी थी, जिसकी वजह से मेरे गोरे, मुलायम जाँघे और नीचे पिंडलियाँ नंगे थे। मैंने सिर को हैंड रेस्ट पर रखी और आराम से लेटी थी। मेरा एक पैर नीचे कारपेट पर थी तो दूसरा सोफे दुसरे हैंड रेस्ट पर रख कर मैं मूवी देख रहीथी। चैनल पर adult मूवी आ रही थी और मैं उस नंगे सीन एन्जॉय कर रही थी।


रात के 11.30 बजे थे। पहली मन्ज़िल पर नानाजी गहरे नींद में होंगे। वह नीचे नहि आयंगे I यह सोचकर में आराम से मूवी देख रहीथी। पिक्चर में एक जवान लड़का, एक खूबसूरत जवान लड़की को जो की मेरे उम्र की थी से सेक्स कर रहा है। वह सन देखते ही मेंरी बुर में मदन रास रिसने लगा और जाँघों के अंदर कहीं खुजली शुरू होगई। मेंरा बुर पूरा गीला होगया। मैंने कंधे पर से स्लिप का स्ट्राप निकाली और उसे नीचे खींची। मेरे निपल बहार आगये। मेरे बहिना हाथ से बाहिना निप्पल को मसलते, मैंने मेरे शॉर्ट्स के नडा खींची और दाहिना हाथ अंदर घुसेड़ कर मेरे बुर के साथ खिलवाड करने लगी।


कुछ ही मिनिटो में मेरे उँगलियाँ मेरे प्रि कम से चिके और गीले होगए। मैंने ऊँगली मेरो चूत से निकाली और उन उँगलियों को नाक के पास लेगयी और सूँघि। एक अजीब सी स्मेल आ रही थी। "वाह मेरि चूत की स्मेल भी क्या मस्ती से भरा है" मैं सोची और उन उँगलियों को मुहं में रख कर सरे रस को चाट गयी। मेरे उस नमकीन स्वाद से में बहुत उत्तेजित ही गयी।


खूब चाट ने की वजह से मेरि उँगलियाँ थूक से चिपद गए है, उसे मैंने अपने चूत के होटोंसे खिलवाड़ करते और मेरे लोए बटन से कहते मूवी का स्वाद ले रहीथी। "आअह्ह्ह...उफ्फ्फ...ओहोह...उफ़..ससस..." मेरे मुहं से एक मीठी कराहे निकलने लगी। "आअह्ह्ह... ममम... मैं खलास होने वाली थी की मैंने सीढ़ियों पर पदचाप सूनी। शायद नानाजी नीचे आ रहे थे। "मै गॉड यह बूढ़ा इस समय नीचे क्यों आ रहा है?" मैं सोची।


TV को स्विच ऑफ करने का समय नहीं था। जल्दीसे मैने अपनी उँगलियाँ अपने लव चैनल (चूत) से निकली और मेरे शॉर्ट्स को कमर के ऊपर खींचली। मेरे कोहनिको मैंने अपने आंखोंपर लगाई और TV देखते, देखते सोने का नाटक करने लगी। नियंत्रित रूप से स्वास भी ले रहती ताकि देखने वाले यह सोचे की TV देखते सो गयी है। टीवी में क्या चल रहा है यह भी नहीं पता ऐसे बहना कर रहीथी। नानाजी नीचे TV रूम अये और वह TV देख ने लगे, मुझे मालूम पड़गया। उन्हें मालूम हो गया की मैं क्या देख रहीथी। मेरे दिल ढब ढब धड़कने लगा। नियंत्रित स्वास और दोल की धड़कन से मेरे उन्नत उरोज ऊपर नीचे हो रहे थे। TV स्क्रीन से आने वाली रोशिनी मेरे ऊपर गिर रहीथी। उसके सिवाय हॉल में दूसरा रोशिनी नहीं थी।


कोहिनी के नीचे की छोटीसी झिरी से मैंने देखा की नानाजी का नज़र एक बार TV पर आने वाली सिनेमा पर तो एक बार मेरे पर फिसल रहे थे। तभी मेरे नज़र नानाजी के धोती पर पड़ी। उनके जाँघों के बीचमे उभार आगया है। वह उभार किसका है मुझे मालूम है। धोती के अंदर उनका मर्दानगी खूब अकड़ कर लम्बा होगा और उछल खूद कर रहीहै। नानाजी अपने लंड को उँगलियों से मसल रहे थे। अनजाने में ही मैं उत्तेजित होने लगी और नानाजी के हरकत को मज़े लेते चाव से देख रहीथी।


जैसा की मैने कहा, मैं अपने आँखों पर मेरी कोहनी रख कर सोने का बहाना कर रही थी। नानाजी मेरे बिलकुल पास आगये यह बात मालूम पड गयी। उन्होंने सोफे के पास आए झुककर मेरे नीचे लटकते टांग को थोड़ा और चौड़ा किये और मेरे टांगों के बीच बैठ गए। कुछ देर मुझे देखते रहने का बाद उन्हीने धीरेसे मेरे पैर के नंगे भाग को धीरेसे सहलाने लगे। मेरे सारे शरीर में झुर झुरिसि हुयी। मेरे घुटनों और जाँघों पर नानाजी के हाथ की गर्मी मुझमे मस्ती पैदा कर रहीथी।


मैं खामोशी से सोने का बहाना कर रही थी। कुछ देर ऐसा करनेके बाद अब नानाजी के हाथ मेरे जाँघों के अंदर के तरफ फेर रहे है। मुझे गुद गुदी सी होने लगी, फिर भी मैं हिली ढूली नहीं और न ही मैंने अपने हाथ को मेरे आँखों पर से निकाली। मैं हिली ढुली नहीं तो उन्हें और हिम्मत आगयी और धीरे से अपना हाथ मेरी तिकोन के उभार पर रख धीरेसे दबाये। फिर भी मेरे में कुछ हरकत न पाकर अब अपनी तर्जनी ऊँगली को मेरे चूत की फुली होंठों पर ऊपर से नीचे तक चलाने लगे।

शशांक भैय्या से करवाने के बाद मेरे में सेक्स की चाहत बढ़ गयी। नानाजी अब क्या करेंगे यही सोचते मैं खामोश पड़ी थी। एक बार गुद गुदी की वजह से मैं थोड़ी सी हिली और नानाजी झट अपने हाथ निकले। शायद वह समझ गए की मैं जगी हुई हूँ। मैं फिर से बिना हिले ढूले पड़ी थी और फिर से अपना हरकत शुरू कर दिए। नानाजी मेरे कमर के पास अपने घुटनों पर बैठे और धीरेसे मेरी स्लिप को ऊपर उठाये। उनकी हरतों से मरे में फिर से झुर झूरी सी होने लगी। और मेरे रेंगते खड़े होगाये। वह आगे झुके तो उनका गर्म सांस मेरे नहीं और पथ पर पड़ने लगी।  कराह को मैं बड़ी मुश्किल से रोक पायी। फिर उन्होंने अपना जीभ को मेरे नाभि में घुमाने लगे। " मैं अंदर ही अंदर कराही।


नानाजी धीरे से मेरे सर के पास आये और मी ऊपर झुके। अब का गर्म सांस मेरे बहिना (left) चूची पर फील करने लगी। अपने जीभ से मेरे चूची के घुंडी के इर्द गिर्द फिराने लगे। नेर चूचियों में एक अजीब सी मस्ती भरी थी। फिर उनका नजर मेरे खांक पर गिरी। एक दिन पहले ही मैंने कांक और मेरी बुर पर बाल साफ़ किये थे। इसी वजह से मेरी खाँख बिना बालों के चमक रही थी।


मैं अभी भी में राइट हैंड को मेरे आँखों पर रखी थी। और कोहिनी के पास छोटी सी झिरी बनाकर मैं सब देख रहीथी। वाह धीरे से मेरी खांख पर झुके और अबमैं उनका गर्म सांस वहां महसूस करने लगी। एक बार मेरे खाँख को सूंघ कर फिर अपना जीभ निकल कर मेरे पूरी खाँख को नीचे से ऊपर तक चाटने अलगे। इनके इन हरकतों से नीचे मेरी जाँघों के बीच की मेरी मुनिया खूब रिस ने से मेरी शॉर्ट्स जिगट हो गए।


"क्या मेरी नाती सच में ही नींद में है?" कह कर जब मेरी खाँख को चाटी अपने जीभ मेंरे होंठों पर रखकर मेरे मुहं के अंदर दाल ने की कोशिश की। अब मुझे अपने आप को संभल न बहुत मुश्किल होगया है। फिर भी तक संभाली और नींद का बहाना कर रहीथी। अपने जीभ को मेरे होंठों पर फिराने के बाद अब उनकी दृष्टी मेरे बुर पर पडी।


धीरेसे अपना उँगलियाँ मेरी बुर पर लाकर मेरी बुर को शॉर्ट्स के ऊपर से ही हलका सा रगड़ न शुरू करे। मामाजी के उँगलियाँ और मेरी बुर में बेच एक सिल्क की शॉर्ट्स के अलावा लुक नहीं था। एक हाथ की उँगलियाँ मेरी बुर को रगड़ रही है तो दुसरे हाथ के उँगलियाँ मेरे तिकोन के उभर को दबाने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे खूब पहली चुत में हजारों चींटियां रेंग रहे हो। जैसे नानाजी ने मेरे चूत को होंठों को दबा रहे थे मेरे सारे शरीर में गुद गुदी सी होने लगी। फिर भी मेरे यहाँ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर उन्हने अपना बुर रगड़ने का काम चालू रखे
 

फिर मेरे शॉर्ट्स की इलास्टिक खींचकर कमर के यहाँ अपना हाथ अंदर घुसेड़दिए। अब नानजी के उंगलयां मेरे नंगे बुर की होंठों के साथ खेलने लगे। मेरे साए सरेर में झुर झुरिसि होने लगी। फॉर भी अपने आप को सम्भलते सोने बहाना जारी रखी। कुछ देर ऐसे ही खेलने के बाद अपनी उँगलियाँ निकल कर अपने मुहं में रखे और सरे लॉस लेस को चाट गए। एपीआई उँगलियों को अपने थूक से फिर से चिकना बनाकर फिर से हाथ अंदर डालकर छूट ले पुत्तियों को चौड़ा कर अपनी बीचकी ऊँगली को मेरो गीली छूट के अंदर डालने लगे। अनजाने में ही मेरे पुत्तियाँ उनकी ऊँगली को जकड कर अंदर को खींचने लगे।


नानाजी वैसे ही थोड़ी देर तक मेरे छूट के होंठों से खिलवाड़ काने का बाद मेरे शॉर्ट्स को नीचे खींचने लग्गे। शॉर्ट्स धीरे धीरे मेरे बादबान से नीचे सरकने लगी। मरे कमर के नीचे और फिर मेरे जाँघोंसे भी नीचे लेकिन वह मेरो नितम्बो के नीचे फँसी हुई थी, मैंने नींद में कुन मनाने का बहन कर मेरे कमर को थोड़ा ऊपर उठाई।

मेरे शॉर्ट्स मेरे नितम्बोंके नीचे और नीचे मेरे घटंन तक आगयी। फिर मुझे मेरी उभर दार बुर पर मामाजी के गर्म सांस की आभास हुआ। मेरी अब संभालना कठिन हो रहा था। इतने में उन्होंने मेरे बुर के पत्तों को चौड़ा कर अपना नाक उन पुत्तो के बीच रख कर सूंघे और उससे वहां दबाने लगे। फिर अपने जीभ को उस छीर में घुसेड़ कर घूमाने। मुझे इतना मज़ा आने लगा की मैंने तो नानाजी को वैसे ही अपने जीभसे मेरी बुर को चोदने की तमन्ना करने लगे।


तब तक मेरी बुर पानी रिसने लगी। दही, धीरे मेरी रिसती बुर को नीचे से ऊपर तक चाटये हुए हलके से मेरी घुंडी को दोनों लियों बीच लेकर मसलने लगे। मैंने वैसे ही सोने का बहन कर उनके हरकतें का आनन्द ले राही थी। फिर सेअपनी उँगलियों पर थूक कर उस से अपनी उँगलियों को चिकना कर मरो बुर को रगड़ने लगे। दर से रिसने वाली मदन रास से मेरी बुर पहले से ही चिकनी हो चुकी है।


उन्होंने फिर से मेरी गीली चूत को चाटने लगे और मेरी घुंडी को tease करने लगे। ऐसे कुछ देर खेलने का बाद अब उन्हीने मेरी स्लिप को ऊपर उठाने लगे।


मैंने मेरी नींद को कंटिन्यू करने का बहाना कर मेरी पीठ को ऊपर उठायी। नानाजी ने मेरी स्लिप को पूरा ही उअप्र उठाकर मेरे गले के पास डाल दिए। और अब मेरी उभारदार चूचियां और उनके गुलाबी निप्पल्स उनके आँखों के सामने नंगे थे। अपनी उँगलियों से मेरी होंठों को सितार बजाकर, दुसरे हाथ में मेरी चूचियों को लेकर दबाने लगे। फिर अपने दौड़ने हाथों से दोनों उरोजों को दबाते अपने जीभ को मेरी चूची की घुंडी इर्द गिर्द घुमाने लगे।" कह कर में धीरे से कुन मुनाई।


"क्या मेरी नाती सचमे ही नींद में है....?"
 

मैंने धीरे से आँखे खोली और नानाजी को देख कर हलकी सी मुस्कान दी और फिर से आँखे बंद कर ली।


नानाजी ने हलके से मेरी जांघों को चौड़ा करने लगे और आराम से नीचे कारपेट पर घुटनों बल बैठ कर मेरी बुर को चाटने, चुभलाने और खाने लगे। उनका ऐसा करना मुझे इतना पसंद आया की मैं मेरी कमर ऊपर उठा उठाकर अपनी चूत को खूब अच्छी तरह चाटने में उनकी मदद करने लगी।


मेरे ऐसा कमर उछलने से उन्हें बहुत ही हिम्मत मिली, और उन्होंने मेरि शॉर्ट्स को पूरा खींच कर मेरे पैरों से निकाल फेंके। फिर उन्होंने अपनी धोती भी खींच फेंकी और अपना तगड़ा, और मोटा लवडे को हाथ में लेकर हिलाने लगे। वह एक दम मक्के की बुट्टे की तरह थी। वह फिर अपनी थूक से अपने लवडे को गीला कर मेरी चूत को होंठों को टच किये।

Oh God ... उनका सुपडे की गर्माहट मेरी बुर पर इतना अच्छा था की मैं अपने आप मेरे जाँघे और चौड़ा कर मेरे मुलायम नितम्बो को ऊपर उठाई। नानाजी ने धीरे से अपना उस मुश्टन्ड मेरे में घुसेड़े। मुझे ऐसा लगा की गर्म लोहे की सलाख मेरे में घुस रही हो। वैसे मैं पहले से ही शशांक भैय्या से चूदी थी इसी लिए उनका सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। उस सुपाडे का रगड़ मेरे बुर की अंदरी दीवारों पर गुद गुदी पैदा करने लगे।


नानाजी मेरे जांघों को और चौड़ा करने लगे, मैंने अपनी जंघों की मांस पेशियों को ढीला करदी। उन्होंने मेरे टांगों को अपने भुजावों पर रखे। अब पोजीशन ऐसी थी की वह अपनी नाती यानि कि मेरे गीले बूर में अपना मोटा और तगड़ा लुंड पेलने के लिए तैयार थे। अपने लवडे को उन्हों ने मेरी जवान बुर पर रख कर अंदर दबाए और उनका सूपड़ा 'गछ' के साथ अंदर। "आअह्ह्हा।।।ससस..." मैंने अपने होंठों से निकलती कराह को रोकने की कोशिश की। वह अपनी लुंड को अंदर और बहार करते मुझे चोदने लगे। थोड़ा थोड़ा कर नानाजी का लुंड मेरे उसमे पूरा घुस गया। जब पूरा अंदर चला गया थो उन्होंने एक जोर का धक्का दिए। में अब अपने आप को रोक न सकी और  आवाजें मेर मुहं से निकल पड़े। उनके हर शॉट के साथ मैं अपनी गांड उछालते चुदाई की आनंद ले रहीथी।


अब तो उनको मालूम है मैं जगी हूँ। अब उनका चोदना जोर पकड़ने लगा... उनके हर धक्का मेरे तिकोन पर जम कर पड़ रही है। मेरे मस्त छातियों को दोनं हाथोसे पकड़ कर मींजते और मेरे होंठों को चुभलाते हुए "गग्गुओंणरणररर" के आवाजें उनके मुहं से निकल रहे थे। ऐसा पांच छह मिनिट मुझे चोदने के बाद मैंने उनके शरीर में अकड़न महसूस की। "ऊऊउ उउउउम्मम्मम्म" एक बहार फिर जोर से कराहे। बस उनका शरीर और अकड़ा और अपने गर्म वीर्य से मेरी बुर को भर दिए। एक गहरी moan के साथ उनका शरीर झन झना उठी और अपना लव स्टिक (love stick) सोडा सायफन के तरह मेरे बुर को भर ने लगी। नानाजी का गर्म वीर्य मेरे चूत के दीवारों से बहार बहने लगी।


मैं भी खलास होने को थी। मेरे शरीर एक मीठे अनुभव से गद गद हो उठा। मैंने अपने चूत और गांड के मांस पेशियों को टाइट करी। मेरे दोनो हाथ नानाजी के कमर के गिर्द लपेट उन्हें मेरे ऊपर खींची और जोरसे उन्हें अपने से जकड की।  की मीठी कराह मेरी मुहं से निकली और मेरे बुर की पुत्तियों से उनके लुंड को जकड़ कर में भी खलास हो गयी और मेरी बुर अपना मदन रस छोड़ने लगी।


थोड़ी देर बाद नानाजी ने मेरी आँखों में देखे। उनके मुखमे खुशी धमक रहीथी। मैंने भी उनकी आँखों में चाहत से देखी और हलके से मुस्कुरा दिया। उन्होंने भी मुस्करा कर मेरी आँखों को चूमे। हम दोनों में कुछ बातें नही हुयी, बस अब तक हुयी चुदाई का आनंद उठा रहे थे। वह कोई 54 - 55 साल के है और मई 19 की। मैंने अपने दोनों हाथों से नानाजी के सर को पकड़ कर मेरी ओर खींची और उनके होंठों को मेरे में लेकर किस किया।


उनका लंड अभी भी मेरे चूत में है। मुझे एक बार कस कर चूमे और फिर जवान चूचियों को पीने लगे। जब उनका बहार निकला तो वह बिलकुल नरम पड गयी है, और मेरे बुर में से हम दोनों का रस बाहर को बह कर मेरे नितम्बी को और मेरी गांड में भी घुसने लगे। सारा जगह चिप चिपाहट होगया। नानाजी ने अपने मुहं वहाँ रखे और सारा रस अपने जीभ से चाट कर साफ़ कर दिए। जैसे ही नानाजी मेरे बुर को चाट ने लगे उसमे फिर से खुजली होने लगी।


नानाजी ने मुझे अपने गोद में बिठाये और मेरे अंगों के साथ खेलने लगे। मेरी निप्पल्स को सूचक कर रहे थे और मेरी पूरी चूचिको नीचे से लेकर ऊपर तक चाट रहे थे। मेरे चूतड़ों के बीच उनके मर्दानगी तन कर फिर से फुफकारने लगी।


मैं नानाजी सोफे पर बैठे थे। मैंने उनके गोद से उतरी और नीचे कारपेट पर पालथी मारकर बैठी, नानाजी के टाँगे नीचे लटक रहे है और उनके टांगों के बीचमे उनका मुरझा सुस्त पड़ा है। में नीचे उनके टैंगो बीच बैठी और उनके लंड को मुट्टीमे पकड़ी, से ऊपर नीचे करने लगी। इसे मसाज करने लगी "हेमा। ..हहहह ममहहाआ...." नानाजी खुशी से गुर्राए।


वह अब पूरी तरह खड़ा होगया और मैं उसे मुट्टीमे लेकर नापी। पूरा एक बालिश्त से ऊपर है उनका। ननजी का खड़ा लंड देख कर मेरे मुहं में फिर से पानी आगया मैं उसे मेरे मुहंमे लेकर चूसने करने लगी। कभी कभी मेरे जीभ को उनके सुपडे के ऊपर फिरा रही थी। उनका बहुत लम्बा है, मैं उसे पूरा का पूरा मेरे मुहं में लेने की कोशश किया केकिन ना कामयाब रही। एक चौथाई के बराबर बहार ही रह गया। अब नीचे मेरे जांघों के के बीच फिर से मदन रस रिसकर चूत होंठों तक बाह रही है।


"आअह्ह। ... हेमा... मेरी प्यारी... बहुत अच्छी चूस रही हो.. आएं...वाइस ही चूसो.. शाबाश... जिस मस्ती से तुमने मेरा सब्बाक लो अपने में लिया है... ला जवाब है.. वंडर फूल.. आख़िरी में तुम्हारी बुर का मेरे उसके गिर्द जकड़ना तो बोलो मत... बिलकुल प्रभा की तरह है तेरी बुर भी... वही जोश वही मस्ती" वह बढ़ बडाने लगे।


उनके बातें सुनकार में चौंक गयी और चकित होकर उन्हें देखने लगी। क्या नानाजी ने माँ को....


"क्यों चकित हो गयी क्या? अरी.. प्रभा.. तेरी माँ... वह भी तेरे जैसे ही जोश से चुदवाती थी। मैंने तुम्हारे माँ को ही नहीं, शुभा,तुम्हारी बड़ी माँ को और विभा छोटी माँ को भी चोदा है। तुम्हारी माँ और छोटी माँ दोनों मेरे लंड को पहले लेने के लिए लड़ते झगड़ते थे।" ननजी कह रहे थे।


मम्मी बहुत ही गर्म औरत है और खूब मज़े से चुद्वाती है, यह बात मुहे मालूम है, जिस दिन मैं शशांक भैया से करवाई थी उसी रात मैं और मेरी छोटी बहन रीमा ने माँ को भैया से चुदवाते देखे है। (पढ़िए मेरे लिखा जुआ 'मेरे शशांक भैय्या) .


नानाजी का मर्दानगी फिर से टाइट होगई जैसे इस्पात का रॉड हो। मैं उसे अपनी मुट्टी में जकड़ी थी। उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर खींचे खुद सोफे से उठकर एक गुड़िया की तरह मुझे उठाकर अपने कंधे पर डा ले। उनका एक हाथ मेरे नितम्बो के नीचे संभाली है तो दूसरा हाथ से मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते हुए ऊपर अपने कमरे में लगाए और, मुझे बेड पर लिटा दिए, अपनी कमीज उतार फेंके। अब वह पूरा नगनवस्ता में एक बर्थडे बॉय लग रहे है। उनका लंबा, मोटा लावड़ा उनके जहंघो के बीच लटक रही है। में भी कमऱ के नीचे नंगी हूँ। ऊपर सिर्फ स्लिप थी जिसे मैंने उतर नीचे डाल दी। अब मैं भी नानाजी के तरह पूरी नंगी हूँ।


नानाजी ने मुझे औंधा किये और मेरी नितम्बों को ऊपर उठाये। मैं उनका मंतव्य समझ गयी और बेड पर चौपाया छुपाया बनकर मेरी गांड कॉपर उठई एक कुतिया की तरह। दोनों घुटनों को पैलाकार मेरे टांगों को चौड़ा किया। दोनों हाथों को कोहिनी के पास मोड़कर बेड पर रखी और मेरे सिर को हाथों पर रखी, फिर मेरे गांड को ऊपर उठई।


अब मैं नानाजी मुझे पीछे से लेने के लिए तैयार हूँ। नानाजी मेरे पीछे आए अपने घुटनों पर बैठकर पीछे से मेरी बुर को खाने लगे। में इतना गरमा गयी हूँ की मेरे बुर में से गर्म हवाएं निकलने लगे और वह फूल के पाव रोटी की तरह थी।


नानाजी अंदर.. यह और अंदर...पूरा जानेदो तुम्हारे जीभ को अपने नाती की चूत में ... कितन अच्छा है. आअह ह.. मेरी बुर की लालसा ....बढ़ रही है.आमम्मा.... नानाजी कैसी मेरी। .. तुम्हे अच्छा चा लगा रहा है ना... बोलो नानाजी कैसी है मेरी चूत t.. क्या एह मेरी माँ जैसी है या मेरी छोटी माँ जैसी... उम्म्म और खाजाओ आहहहआ..." नानाजी के मुहं पर चूत को दबाते मई बड़ बड़ा रहीथी।


"आह्ह...हेमा तेरी तो मस्त है.... तेरी माँ से भी अच्छा.. और तेरी छोटी माँ से भी अच्छा... साली तु भी क्या यद् करेगी.. ले अपनी नाना के जीभ को अपने बुर में... क्या नमकीन माल है.. हाँ...हाँ.. बस..वैसे ही रगड़ अपनी बुर को नानाके मुहं पर. शभाष..आह..हां...".नानाजी मेर गीली, मस्ती से भरा चूत को चूसते ते कहने लगे।


में अपनी बुर को उमके मुहं पर रगड़ ते " नानाजी...न..ना.जी... और चोदो मेरी चूत को... फाड़ दो इस रंडी को.. ममम..." मैं कही।


मेरी पोजीशन को समझ कर नानाजी ने उठे और मेरे पीछे आकर मेरी कमर को दोनं हाथों से पकडे और अपना सूपड़ा मेरी बुर की सुराख पर रख कर रगड़ने लगे।एक मीठी कराह मेरी मुहं से निकली। फिर उन्होंने सुपडे को सुराख के बीच रख कर एक जोर का शॉट दिए। आह..ह.." अब मैं दर्द से कराही। उनका गोल मोटा सुपाड़ा मेरी बुर को चीरती अंदर घुस गयी। मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते। . कभी कभी.. एक चपत लगते अपने चमड़े की चढ़ को अंदर बाहर पंप कर ने लगे। मेरी मदन रस से अच्छी तरह ऑइलिंग हुयी मेरी चूत में उनका लंड पिस्टन रोड की तरह आगे पीछे हो रहीथी।


मैं अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़ते गांड को ऐ पीछे क्र रहीथी। उन्होंने मेर लटक थी चूही को पकडे और उसे दबाते मुझे हमच , हमच कर चोदने लगे।


"अम्माम्माम्मा... नाना..नानाजी.. मैं खलास हो रही हूँ...ऊम्मम... मारो। .और जोर से मारो अपने तोप को मेरे अंदर... आअह " कह कर मैं झाड़ गयी।


"प्यारी.. आह.. कितनी टाइट है तेरी... आह.. यह. अब तेरी बुर मेरी rod को जकड़ रहि है.. ऐसे ही जकड... तेरी माँ जैसी ही तू भी बहुत गर्म लड़की है... आह.. मैं भी खलास ही रहा हूँ.. ले नानके गर्म लावा अपने में।" कह!


उनका शरीर जहां झनाहट मुहे मालूम हो रहा थे। Iउनके मुहं के ये गुर्राह मैंने सूनी। मेरे नितम्बों को मसलते एक बड़ा शॉट उन्होंने मेरी अंदर दिए और फिर पाना गर्म लावा से मेरी बुर को भरने लगे। मैंने उनका गर्म लस लस का अनुभव किया और मेरे चूतड़ों को पीछे दखेलते मीठे से करहा " नानाजी.. नानाजी.. मेरे अच्छे नानाजी.. आअह कितना प्यारा है तुम्हार आयेह डंडा... मेरी चूत आप के लंड के हमेशा तैयार रहेगी... मैं तुमसे हमेशा चुदावउँगी। नानाजी तुमजब भी यहाँ ए तो मुझे चोदे बिना नहीं जाना। अगर मेरि शादी होने पर भी मई आपसे चुदावउँगी " कहति माई अपना गांड पीछे धकेली और झाड़ गयी। पाठकों यह मेरे एक अच्छा चुदाई है.. ऐसे एक बड़े उम्र वाले से।

खलास होने के बाद मैं अउर नानजी उसी हालत में लुक देर रहे, फिर उन्होंने मेरे बुर से अपना लंड निकली। हम दोड़नों का मदन रस जो हम में से छूटा है मेरे अंदर से बहकर मेरे जांघों को तर करते नीच बहने लगी। नानाजी ने झुके और सारी रस चाट चाट कर साफ़ किये। जब तक चार्ट रे हे की मेरे छूट की घुंडी में फिर से खड़ापन आ गया,, और बुर में फिर से खुजली होने लगी। मई भी नानाजी प्यारे सिपाही को ममेरे हाथों स स साफ़ की उसे दुलारने लगी।

Author Name

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.