Articles by "Ghode ke sath desi aurat ki sex story"

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नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

अगस्त का महीना था। तेलुगु कैलेंडर के मुताबिक श्रावण चल रहा था श्रावण का महीना हमारे यहाँ के औरतों के लिए बहुत ही महत्त्व पूर्ण है। श्रावण के महीने के दुसरे शुक्रवार को महिलाएं अपने पति की आयु, स्वास्थ्य और सम्पदा के वृद्धि लिए 'मंगल गौरी व्रत' मनाते है। हमारे घर में भी यह व्रत माँ मानती है। लेकिन माँ इस व्रत कोअपनी दो और बहनों के साथ मिलकर हमारे बड़ी माँ के यहाँ मानती है। बड़ी माँ विजयवाड़ा में राहटी है।

इस वर्ष भी मनके लिए हम सब विजय वाडा जाने कि तैयारियां कर रहे थे। हुकमे यहाँ से ४ घंटे का रेल की सफर है। गुरवार के दिन था। दुसरे दिन व्रत है। शाम चार बजे की गाड़ी से हम सब यानि की माँ और हम तीनों बहने जाने कि तैयारी कर रहे थे।


दोपहर बारह, एक बजे के समय में हमारे यहाँ एक नानाजी अये थे। उनका तक़रीबन कोई 53 - 54 साल की उम्र होगी। रेवेन्यू ऑफिस कोई काम था! हमारे यहाँ कोई एक सप्ताह रहने अये है। आते ही उन्होंने हम सब को गले लगाए और हमारे माथे चूमे। मुझे ऐसा लगा की उन्होंने कुछ ज्यादा ही देर मुझे गले लगये थे और और मेरे नितम्बो और चूची को धीरेसे सहलाये।


वह माँ के दूर के रिश्ते से चाचाजी लगते है। माँ उन्हें चाचाजी कहती थी तो हम उन्हें नानाजी कहकर बुलाते थे। पहलीमंज़िल के गेस्ट रूम उन्हें दिया गया। हमेशा की तरह डैडी घर में नहीं थे। डैडी सिविल कांट्रेक्टर है कंस्ट्रक्शन साइट पर थे।


नानाजी के आने से हम सब उदेढ़ बुन में थे की बड़ी माँ की यहाँ कैसे जाए। व्रत का मामला था रुक भी नहीं सकते। हमारे समस्या सुनकर नानाजी ,माँ से बोले कहे "प्रभा आज के लिए मैं किसी होटल में रहजाता हूँ, तुम अपना प्रोग्राम मत बदलो। लेकिनमा की यह पसंद नहीं था, अतिथि घर ए और हम कही और चले उन्हें अच्छा नहीं लगा।


"माँ..." मैं बोली "मैं रुक जाति हुँ, नानाजी को यही रहने के कहिये मैं उन्हें देख लूंगी " कुछ देर की वार्तालाप के बाद यह तय हुआ की मैं रुक जावूं और वह लोग विजयवाडा के लिए चले। मैं रुक गयी और मम्मी और मेरे दोनों बहने प्रेमा, रीमा चले गए।


नानाजी के साथ मैं अकेली थी। माँ और बहने रविवार शाम को आयँगे। उस रात 8.30 बजे हम ने खाना खाया और नानाजी ऊपर अपने कमरेमे चले गए।


मैं अपने कमरे में जाकर कॉलेज के कुछ assignments करने बैठी। रत के 11.30 बजे मैंने अपने assignments खतम किये और हॉल में सोफे पर बैठकर TV ऑन किया और late night अंग्रेजी मूवी देखने लगी। उस समय मैंने खुले गले वाले V शेप की सिल्क की स्लिप पहने थी और अंदर ब्रा नहीं पहनी। वह स्लिप सिर्फ चूचियों को छुपा रही थी। मेरे सफाचट पेट और नाभि खुले थे। ऊपर भुजाये का पास भी स्लिप सिर्फ स्ट्रैप्स ही थे। सिल्क का ही ढीला शॉर्ट्स पहनी थी, जिसकी वजह से मेरे गोरे, मुलायम जाँघे और नीचे पिंडलियाँ नंगे थे। मैंने सिर को हैंड रेस्ट पर रखी और आराम से लेटी थी। मेरा एक पैर नीचे कारपेट पर थी तो दूसरा सोफे दुसरे हैंड रेस्ट पर रख कर मैं मूवी देख रहीथी। चैनल पर adult मूवी आ रही थी और मैं उस नंगे सीन एन्जॉय कर रही थी।


रात के 11.30 बजे थे। पहली मन्ज़िल पर नानाजी गहरे नींद में होंगे। वह नीचे नहि आयंगे I यह सोचकर में आराम से मूवी देख रहीथी। पिक्चर में एक जवान लड़का, एक खूबसूरत जवान लड़की को जो की मेरे उम्र की थी से सेक्स कर रहा है। वह सन देखते ही मेंरी बुर में मदन रास रिसने लगा और जाँघों के अंदर कहीं खुजली शुरू होगई। मेंरा बुर पूरा गीला होगया। मैंने कंधे पर से स्लिप का स्ट्राप निकाली और उसे नीचे खींची। मेरे निपल बहार आगये। मेरे बहिना हाथ से बाहिना निप्पल को मसलते, मैंने मेरे शॉर्ट्स के नडा खींची और दाहिना हाथ अंदर घुसेड़ कर मेरे बुर के साथ खिलवाड करने लगी।


कुछ ही मिनिटो में मेरे उँगलियाँ मेरे प्रि कम से चिके और गीले होगए। मैंने ऊँगली मेरो चूत से निकाली और उन उँगलियों को नाक के पास लेगयी और सूँघि। एक अजीब सी स्मेल आ रही थी। "वाह मेरि चूत की स्मेल भी क्या मस्ती से भरा है" मैं सोची और उन उँगलियों को मुहं में रख कर सरे रस को चाट गयी। मेरे उस नमकीन स्वाद से में बहुत उत्तेजित ही गयी।


खूब चाट ने की वजह से मेरि उँगलियाँ थूक से चिपद गए है, उसे मैंने अपने चूत के होटोंसे खिलवाड़ करते और मेरे लोए बटन से कहते मूवी का स्वाद ले रहीथी। "आअह्ह्ह...उफ्फ्फ...ओहोह...उफ़..ससस..." मेरे मुहं से एक मीठी कराहे निकलने लगी। "आअह्ह्ह... ममम... मैं खलास होने वाली थी की मैंने सीढ़ियों पर पदचाप सूनी। शायद नानाजी नीचे आ रहे थे। "मै गॉड यह बूढ़ा इस समय नीचे क्यों आ रहा है?" मैं सोची।


TV को स्विच ऑफ करने का समय नहीं था। जल्दीसे मैने अपनी उँगलियाँ अपने लव चैनल (चूत) से निकली और मेरे शॉर्ट्स को कमर के ऊपर खींचली। मेरे कोहनिको मैंने अपने आंखोंपर लगाई और TV देखते, देखते सोने का नाटक करने लगी। नियंत्रित रूप से स्वास भी ले रहती ताकि देखने वाले यह सोचे की TV देखते सो गयी है। टीवी में क्या चल रहा है यह भी नहीं पता ऐसे बहना कर रहीथी। नानाजी नीचे TV रूम अये और वह TV देख ने लगे, मुझे मालूम पड़गया। उन्हें मालूम हो गया की मैं क्या देख रहीथी। मेरे दिल ढब ढब धड़कने लगा। नियंत्रित स्वास और दोल की धड़कन से मेरे उन्नत उरोज ऊपर नीचे हो रहे थे। TV स्क्रीन से आने वाली रोशिनी मेरे ऊपर गिर रहीथी। उसके सिवाय हॉल में दूसरा रोशिनी नहीं थी।


कोहिनी के नीचे की छोटीसी झिरी से मैंने देखा की नानाजी का नज़र एक बार TV पर आने वाली सिनेमा पर तो एक बार मेरे पर फिसल रहे थे। तभी मेरे नज़र नानाजी के धोती पर पड़ी। उनके जाँघों के बीचमे उभार आगया है। वह उभार किसका है मुझे मालूम है। धोती के अंदर उनका मर्दानगी खूब अकड़ कर लम्बा होगा और उछल खूद कर रहीहै। नानाजी अपने लंड को उँगलियों से मसल रहे थे। अनजाने में ही मैं उत्तेजित होने लगी और नानाजी के हरकत को मज़े लेते चाव से देख रहीथी।


जैसा की मैने कहा, मैं अपने आँखों पर मेरी कोहनी रख कर सोने का बहाना कर रही थी। नानाजी मेरे बिलकुल पास आगये यह बात मालूम पड गयी। उन्होंने सोफे के पास आए झुककर मेरे नीचे लटकते टांग को थोड़ा और चौड़ा किये और मेरे टांगों के बीच बैठ गए। कुछ देर मुझे देखते रहने का बाद उन्हीने धीरेसे मेरे पैर के नंगे भाग को धीरेसे सहलाने लगे। मेरे सारे शरीर में झुर झुरिसि हुयी। मेरे घुटनों और जाँघों पर नानाजी के हाथ की गर्मी मुझमे मस्ती पैदा कर रहीथी।


मैं खामोशी से सोने का बहाना कर रही थी। कुछ देर ऐसा करनेके बाद अब नानाजी के हाथ मेरे जाँघों के अंदर के तरफ फेर रहे है। मुझे गुद गुदी सी होने लगी, फिर भी मैं हिली ढूली नहीं और न ही मैंने अपने हाथ को मेरे आँखों पर से निकाली। मैं हिली ढुली नहीं तो उन्हें और हिम्मत आगयी और धीरे से अपना हाथ मेरी तिकोन के उभार पर रख धीरेसे दबाये। फिर भी मेरे में कुछ हरकत न पाकर अब अपनी तर्जनी ऊँगली को मेरे चूत की फुली होंठों पर ऊपर से नीचे तक चलाने लगे।

शशांक भैय्या से करवाने के बाद मेरे में सेक्स की चाहत बढ़ गयी। नानाजी अब क्या करेंगे यही सोचते मैं खामोश पड़ी थी। एक बार गुद गुदी की वजह से मैं थोड़ी सी हिली और नानाजी झट अपने हाथ निकले। शायद वह समझ गए की मैं जगी हुई हूँ। मैं फिर से बिना हिले ढूले पड़ी थी और फिर से अपना हरकत शुरू कर दिए। नानाजी मेरे कमर के पास अपने घुटनों पर बैठे और धीरेसे मेरी स्लिप को ऊपर उठाये। उनकी हरतों से मरे में फिर से झुर झूरी सी होने लगी। और मेरे रेंगते खड़े होगाये। वह आगे झुके तो उनका गर्म सांस मेरे नहीं और पथ पर पड़ने लगी।  कराह को मैं बड़ी मुश्किल से रोक पायी। फिर उन्होंने अपना जीभ को मेरे नाभि में घुमाने लगे। " मैं अंदर ही अंदर कराही।


नानाजी धीरे से मेरे सर के पास आये और मी ऊपर झुके। अब का गर्म सांस मेरे बहिना (left) चूची पर फील करने लगी। अपने जीभ से मेरे चूची के घुंडी के इर्द गिर्द फिराने लगे। नेर चूचियों में एक अजीब सी मस्ती भरी थी। फिर उनका नजर मेरे खांक पर गिरी। एक दिन पहले ही मैंने कांक और मेरी बुर पर बाल साफ़ किये थे। इसी वजह से मेरी खाँख बिना बालों के चमक रही थी।


मैं अभी भी में राइट हैंड को मेरे आँखों पर रखी थी। और कोहिनी के पास छोटी सी झिरी बनाकर मैं सब देख रहीथी। वाह धीरे से मेरी खांख पर झुके और अबमैं उनका गर्म सांस वहां महसूस करने लगी। एक बार मेरे खाँख को सूंघ कर फिर अपना जीभ निकल कर मेरे पूरी खाँख को नीचे से ऊपर तक चाटने अलगे। इनके इन हरकतों से नीचे मेरी जाँघों के बीच की मेरी मुनिया खूब रिस ने से मेरी शॉर्ट्स जिगट हो गए।


"क्या मेरी नाती सच में ही नींद में है?" कह कर जब मेरी खाँख को चाटी अपने जीभ मेंरे होंठों पर रखकर मेरे मुहं के अंदर दाल ने की कोशिश की। अब मुझे अपने आप को संभल न बहुत मुश्किल होगया है। फिर भी तक संभाली और नींद का बहाना कर रहीथी। अपने जीभ को मेरे होंठों पर फिराने के बाद अब उनकी दृष्टी मेरे बुर पर पडी।


धीरेसे अपना उँगलियाँ मेरी बुर पर लाकर मेरी बुर को शॉर्ट्स के ऊपर से ही हलका सा रगड़ न शुरू करे। मामाजी के उँगलियाँ और मेरी बुर में बेच एक सिल्क की शॉर्ट्स के अलावा लुक नहीं था। एक हाथ की उँगलियाँ मेरी बुर को रगड़ रही है तो दुसरे हाथ के उँगलियाँ मेरे तिकोन के उभर को दबाने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे खूब पहली चुत में हजारों चींटियां रेंग रहे हो। जैसे नानाजी ने मेरे चूत को होंठों को दबा रहे थे मेरे सारे शरीर में गुद गुदी सी होने लगी। फिर भी मेरे यहाँ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर उन्हने अपना बुर रगड़ने का काम चालू रखे
 

फिर मेरे शॉर्ट्स की इलास्टिक खींचकर कमर के यहाँ अपना हाथ अंदर घुसेड़दिए। अब नानजी के उंगलयां मेरे नंगे बुर की होंठों के साथ खेलने लगे। मेरे साए सरेर में झुर झुरिसि होने लगी। फॉर भी अपने आप को सम्भलते सोने बहाना जारी रखी। कुछ देर ऐसे ही खेलने के बाद अपनी उँगलियाँ निकल कर अपने मुहं में रखे और सरे लॉस लेस को चाट गए। एपीआई उँगलियों को अपने थूक से फिर से चिकना बनाकर फिर से हाथ अंदर डालकर छूट ले पुत्तियों को चौड़ा कर अपनी बीचकी ऊँगली को मेरो गीली छूट के अंदर डालने लगे। अनजाने में ही मेरे पुत्तियाँ उनकी ऊँगली को जकड कर अंदर को खींचने लगे।


नानाजी वैसे ही थोड़ी देर तक मेरे छूट के होंठों से खिलवाड़ काने का बाद मेरे शॉर्ट्स को नीचे खींचने लग्गे। शॉर्ट्स धीरे धीरे मेरे बादबान से नीचे सरकने लगी। मरे कमर के नीचे और फिर मेरे जाँघोंसे भी नीचे लेकिन वह मेरो नितम्बो के नीचे फँसी हुई थी, मैंने नींद में कुन मनाने का बहन कर मेरे कमर को थोड़ा ऊपर उठाई।

मेरे शॉर्ट्स मेरे नितम्बोंके नीचे और नीचे मेरे घटंन तक आगयी। फिर मुझे मेरी उभर दार बुर पर मामाजी के गर्म सांस की आभास हुआ। मेरी अब संभालना कठिन हो रहा था। इतने में उन्होंने मेरे बुर के पत्तों को चौड़ा कर अपना नाक उन पुत्तो के बीच रख कर सूंघे और उससे वहां दबाने लगे। फिर अपने जीभ को उस छीर में घुसेड़ कर घूमाने। मुझे इतना मज़ा आने लगा की मैंने तो नानाजी को वैसे ही अपने जीभसे मेरी बुर को चोदने की तमन्ना करने लगे।


तब तक मेरी बुर पानी रिसने लगी। दही, धीरे मेरी रिसती बुर को नीचे से ऊपर तक चाटये हुए हलके से मेरी घुंडी को दोनों लियों बीच लेकर मसलने लगे। मैंने वैसे ही सोने का बहन कर उनके हरकतें का आनन्द ले राही थी। फिर सेअपनी उँगलियों पर थूक कर उस से अपनी उँगलियों को चिकना कर मरो बुर को रगड़ने लगे। दर से रिसने वाली मदन रास से मेरी बुर पहले से ही चिकनी हो चुकी है।


उन्होंने फिर से मेरी गीली चूत को चाटने लगे और मेरी घुंडी को tease करने लगे। ऐसे कुछ देर खेलने का बाद अब उन्हीने मेरी स्लिप को ऊपर उठाने लगे।


मैंने मेरी नींद को कंटिन्यू करने का बहाना कर मेरी पीठ को ऊपर उठायी। नानाजी ने मेरी स्लिप को पूरा ही उअप्र उठाकर मेरे गले के पास डाल दिए। और अब मेरी उभारदार चूचियां और उनके गुलाबी निप्पल्स उनके आँखों के सामने नंगे थे। अपनी उँगलियों से मेरी होंठों को सितार बजाकर, दुसरे हाथ में मेरी चूचियों को लेकर दबाने लगे। फिर अपने दौड़ने हाथों से दोनों उरोजों को दबाते अपने जीभ को मेरी चूची की घुंडी इर्द गिर्द घुमाने लगे।" कह कर में धीरे से कुन मुनाई।


"क्या मेरी नाती सचमे ही नींद में है....?"
 

मैंने धीरे से आँखे खोली और नानाजी को देख कर हलकी सी मुस्कान दी और फिर से आँखे बंद कर ली।


नानाजी ने हलके से मेरी जांघों को चौड़ा करने लगे और आराम से नीचे कारपेट पर घुटनों बल बैठ कर मेरी बुर को चाटने, चुभलाने और खाने लगे। उनका ऐसा करना मुझे इतना पसंद आया की मैं मेरी कमर ऊपर उठा उठाकर अपनी चूत को खूब अच्छी तरह चाटने में उनकी मदद करने लगी।


मेरे ऐसा कमर उछलने से उन्हें बहुत ही हिम्मत मिली, और उन्होंने मेरि शॉर्ट्स को पूरा खींच कर मेरे पैरों से निकाल फेंके। फिर उन्होंने अपनी धोती भी खींच फेंकी और अपना तगड़ा, और मोटा लवडे को हाथ में लेकर हिलाने लगे। वह एक दम मक्के की बुट्टे की तरह थी। वह फिर अपनी थूक से अपने लवडे को गीला कर मेरी चूत को होंठों को टच किये।

Oh God ... उनका सुपडे की गर्माहट मेरी बुर पर इतना अच्छा था की मैं अपने आप मेरे जाँघे और चौड़ा कर मेरे मुलायम नितम्बो को ऊपर उठाई। नानाजी ने धीरे से अपना उस मुश्टन्ड मेरे में घुसेड़े। मुझे ऐसा लगा की गर्म लोहे की सलाख मेरे में घुस रही हो। वैसे मैं पहले से ही शशांक भैय्या से चूदी थी इसी लिए उनका सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। उस सुपाडे का रगड़ मेरे बुर की अंदरी दीवारों पर गुद गुदी पैदा करने लगे।


नानाजी मेरे जांघों को और चौड़ा करने लगे, मैंने अपनी जंघों की मांस पेशियों को ढीला करदी। उन्होंने मेरे टांगों को अपने भुजावों पर रखे। अब पोजीशन ऐसी थी की वह अपनी नाती यानि कि मेरे गीले बूर में अपना मोटा और तगड़ा लुंड पेलने के लिए तैयार थे। अपने लवडे को उन्हों ने मेरी जवान बुर पर रख कर अंदर दबाए और उनका सूपड़ा 'गछ' के साथ अंदर। "आअह्ह्हा।।।ससस..." मैंने अपने होंठों से निकलती कराह को रोकने की कोशिश की। वह अपनी लुंड को अंदर और बहार करते मुझे चोदने लगे। थोड़ा थोड़ा कर नानाजी का लुंड मेरे उसमे पूरा घुस गया। जब पूरा अंदर चला गया थो उन्होंने एक जोर का धक्का दिए। में अब अपने आप को रोक न सकी और  आवाजें मेर मुहं से निकल पड़े। उनके हर शॉट के साथ मैं अपनी गांड उछालते चुदाई की आनंद ले रहीथी।


अब तो उनको मालूम है मैं जगी हूँ। अब उनका चोदना जोर पकड़ने लगा... उनके हर धक्का मेरे तिकोन पर जम कर पड़ रही है। मेरे मस्त छातियों को दोनं हाथोसे पकड़ कर मींजते और मेरे होंठों को चुभलाते हुए "गग्गुओंणरणररर" के आवाजें उनके मुहं से निकल रहे थे। ऐसा पांच छह मिनिट मुझे चोदने के बाद मैंने उनके शरीर में अकड़न महसूस की। "ऊऊउ उउउउम्मम्मम्म" एक बहार फिर जोर से कराहे। बस उनका शरीर और अकड़ा और अपने गर्म वीर्य से मेरी बुर को भर दिए। एक गहरी moan के साथ उनका शरीर झन झना उठी और अपना लव स्टिक (love stick) सोडा सायफन के तरह मेरे बुर को भर ने लगी। नानाजी का गर्म वीर्य मेरे चूत के दीवारों से बहार बहने लगी।


मैं भी खलास होने को थी। मेरे शरीर एक मीठे अनुभव से गद गद हो उठा। मैंने अपने चूत और गांड के मांस पेशियों को टाइट करी। मेरे दोनो हाथ नानाजी के कमर के गिर्द लपेट उन्हें मेरे ऊपर खींची और जोरसे उन्हें अपने से जकड की।  की मीठी कराह मेरी मुहं से निकली और मेरे बुर की पुत्तियों से उनके लुंड को जकड़ कर में भी खलास हो गयी और मेरी बुर अपना मदन रस छोड़ने लगी।


थोड़ी देर बाद नानाजी ने मेरी आँखों में देखे। उनके मुखमे खुशी धमक रहीथी। मैंने भी उनकी आँखों में चाहत से देखी और हलके से मुस्कुरा दिया। उन्होंने भी मुस्करा कर मेरी आँखों को चूमे। हम दोनों में कुछ बातें नही हुयी, बस अब तक हुयी चुदाई का आनंद उठा रहे थे। वह कोई 54 - 55 साल के है और मई 19 की। मैंने अपने दोनों हाथों से नानाजी के सर को पकड़ कर मेरी ओर खींची और उनके होंठों को मेरे में लेकर किस किया।


उनका लंड अभी भी मेरे चूत में है। मुझे एक बार कस कर चूमे और फिर जवान चूचियों को पीने लगे। जब उनका बहार निकला तो वह बिलकुल नरम पड गयी है, और मेरे बुर में से हम दोनों का रस बाहर को बह कर मेरे नितम्बी को और मेरी गांड में भी घुसने लगे। सारा जगह चिप चिपाहट होगया। नानाजी ने अपने मुहं वहाँ रखे और सारा रस अपने जीभ से चाट कर साफ़ कर दिए। जैसे ही नानाजी मेरे बुर को चाट ने लगे उसमे फिर से खुजली होने लगी।


नानाजी ने मुझे अपने गोद में बिठाये और मेरे अंगों के साथ खेलने लगे। मेरी निप्पल्स को सूचक कर रहे थे और मेरी पूरी चूचिको नीचे से लेकर ऊपर तक चाट रहे थे। मेरे चूतड़ों के बीच उनके मर्दानगी तन कर फिर से फुफकारने लगी।


मैं नानाजी सोफे पर बैठे थे। मैंने उनके गोद से उतरी और नीचे कारपेट पर पालथी मारकर बैठी, नानाजी के टाँगे नीचे लटक रहे है और उनके टांगों के बीचमे उनका मुरझा सुस्त पड़ा है। में नीचे उनके टैंगो बीच बैठी और उनके लंड को मुट्टीमे पकड़ी, से ऊपर नीचे करने लगी। इसे मसाज करने लगी "हेमा। ..हहहह ममहहाआ...." नानाजी खुशी से गुर्राए।


वह अब पूरी तरह खड़ा होगया और मैं उसे मुट्टीमे लेकर नापी। पूरा एक बालिश्त से ऊपर है उनका। ननजी का खड़ा लंड देख कर मेरे मुहं में फिर से पानी आगया मैं उसे मेरे मुहंमे लेकर चूसने करने लगी। कभी कभी मेरे जीभ को उनके सुपडे के ऊपर फिरा रही थी। उनका बहुत लम्बा है, मैं उसे पूरा का पूरा मेरे मुहं में लेने की कोशश किया केकिन ना कामयाब रही। एक चौथाई के बराबर बहार ही रह गया। अब नीचे मेरे जांघों के के बीच फिर से मदन रस रिसकर चूत होंठों तक बाह रही है।


"आअह्ह। ... हेमा... मेरी प्यारी... बहुत अच्छी चूस रही हो.. आएं...वाइस ही चूसो.. शाबाश... जिस मस्ती से तुमने मेरा सब्बाक लो अपने में लिया है... ला जवाब है.. वंडर फूल.. आख़िरी में तुम्हारी बुर का मेरे उसके गिर्द जकड़ना तो बोलो मत... बिलकुल प्रभा की तरह है तेरी बुर भी... वही जोश वही मस्ती" वह बढ़ बडाने लगे।


उनके बातें सुनकार में चौंक गयी और चकित होकर उन्हें देखने लगी। क्या नानाजी ने माँ को....


"क्यों चकित हो गयी क्या? अरी.. प्रभा.. तेरी माँ... वह भी तेरे जैसे ही जोश से चुदवाती थी। मैंने तुम्हारे माँ को ही नहीं, शुभा,तुम्हारी बड़ी माँ को और विभा छोटी माँ को भी चोदा है। तुम्हारी माँ और छोटी माँ दोनों मेरे लंड को पहले लेने के लिए लड़ते झगड़ते थे।" ननजी कह रहे थे।


मम्मी बहुत ही गर्म औरत है और खूब मज़े से चुद्वाती है, यह बात मुहे मालूम है, जिस दिन मैं शशांक भैया से करवाई थी उसी रात मैं और मेरी छोटी बहन रीमा ने माँ को भैया से चुदवाते देखे है। (पढ़िए मेरे लिखा जुआ 'मेरे शशांक भैय्या) .


नानाजी का मर्दानगी फिर से टाइट होगई जैसे इस्पात का रॉड हो। मैं उसे अपनी मुट्टी में जकड़ी थी। उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर खींचे खुद सोफे से उठकर एक गुड़िया की तरह मुझे उठाकर अपने कंधे पर डा ले। उनका एक हाथ मेरे नितम्बो के नीचे संभाली है तो दूसरा हाथ से मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते हुए ऊपर अपने कमरे में लगाए और, मुझे बेड पर लिटा दिए, अपनी कमीज उतार फेंके। अब वह पूरा नगनवस्ता में एक बर्थडे बॉय लग रहे है। उनका लंबा, मोटा लावड़ा उनके जहंघो के बीच लटक रही है। में भी कमऱ के नीचे नंगी हूँ। ऊपर सिर्फ स्लिप थी जिसे मैंने उतर नीचे डाल दी। अब मैं भी नानाजी के तरह पूरी नंगी हूँ।


नानाजी ने मुझे औंधा किये और मेरी नितम्बों को ऊपर उठाये। मैं उनका मंतव्य समझ गयी और बेड पर चौपाया छुपाया बनकर मेरी गांड कॉपर उठई एक कुतिया की तरह। दोनों घुटनों को पैलाकार मेरे टांगों को चौड़ा किया। दोनों हाथों को कोहिनी के पास मोड़कर बेड पर रखी और मेरे सिर को हाथों पर रखी, फिर मेरे गांड को ऊपर उठई।


अब मैं नानाजी मुझे पीछे से लेने के लिए तैयार हूँ। नानाजी मेरे पीछे आए अपने घुटनों पर बैठकर पीछे से मेरी बुर को खाने लगे। में इतना गरमा गयी हूँ की मेरे बुर में से गर्म हवाएं निकलने लगे और वह फूल के पाव रोटी की तरह थी।


नानाजी अंदर.. यह और अंदर...पूरा जानेदो तुम्हारे जीभ को अपने नाती की चूत में ... कितन अच्छा है. आअह ह.. मेरी बुर की लालसा ....बढ़ रही है.आमम्मा.... नानाजी कैसी मेरी। .. तुम्हे अच्छा चा लगा रहा है ना... बोलो नानाजी कैसी है मेरी चूत t.. क्या एह मेरी माँ जैसी है या मेरी छोटी माँ जैसी... उम्म्म और खाजाओ आहहहआ..." नानाजी के मुहं पर चूत को दबाते मई बड़ बड़ा रहीथी।


"आह्ह...हेमा तेरी तो मस्त है.... तेरी माँ से भी अच्छा.. और तेरी छोटी माँ से भी अच्छा... साली तु भी क्या यद् करेगी.. ले अपनी नाना के जीभ को अपने बुर में... क्या नमकीन माल है.. हाँ...हाँ.. बस..वैसे ही रगड़ अपनी बुर को नानाके मुहं पर. शभाष..आह..हां...".नानाजी मेर गीली, मस्ती से भरा चूत को चूसते ते कहने लगे।


में अपनी बुर को उमके मुहं पर रगड़ ते " नानाजी...न..ना.जी... और चोदो मेरी चूत को... फाड़ दो इस रंडी को.. ममम..." मैं कही।


मेरी पोजीशन को समझ कर नानाजी ने उठे और मेरे पीछे आकर मेरी कमर को दोनं हाथों से पकडे और अपना सूपड़ा मेरी बुर की सुराख पर रख कर रगड़ने लगे।एक मीठी कराह मेरी मुहं से निकली। फिर उन्होंने सुपडे को सुराख के बीच रख कर एक जोर का शॉट दिए। आह..ह.." अब मैं दर्द से कराही। उनका गोल मोटा सुपाड़ा मेरी बुर को चीरती अंदर घुस गयी। मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते। . कभी कभी.. एक चपत लगते अपने चमड़े की चढ़ को अंदर बाहर पंप कर ने लगे। मेरी मदन रस से अच्छी तरह ऑइलिंग हुयी मेरी चूत में उनका लंड पिस्टन रोड की तरह आगे पीछे हो रहीथी।


मैं अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़ते गांड को ऐ पीछे क्र रहीथी। उन्होंने मेर लटक थी चूही को पकडे और उसे दबाते मुझे हमच , हमच कर चोदने लगे।


"अम्माम्माम्मा... नाना..नानाजी.. मैं खलास हो रही हूँ...ऊम्मम... मारो। .और जोर से मारो अपने तोप को मेरे अंदर... आअह " कह कर मैं झाड़ गयी।


"प्यारी.. आह.. कितनी टाइट है तेरी... आह.. यह. अब तेरी बुर मेरी rod को जकड़ रहि है.. ऐसे ही जकड... तेरी माँ जैसी ही तू भी बहुत गर्म लड़की है... आह.. मैं भी खलास ही रहा हूँ.. ले नानके गर्म लावा अपने में।" कह!


उनका शरीर जहां झनाहट मुहे मालूम हो रहा थे। Iउनके मुहं के ये गुर्राह मैंने सूनी। मेरे नितम्बों को मसलते एक बड़ा शॉट उन्होंने मेरी अंदर दिए और फिर पाना गर्म लावा से मेरी बुर को भरने लगे। मैंने उनका गर्म लस लस का अनुभव किया और मेरे चूतड़ों को पीछे दखेलते मीठे से करहा " नानाजी.. नानाजी.. मेरे अच्छे नानाजी.. आअह कितना प्यारा है तुम्हार आयेह डंडा... मेरी चूत आप के लंड के हमेशा तैयार रहेगी... मैं तुमसे हमेशा चुदावउँगी। नानाजी तुमजब भी यहाँ ए तो मुझे चोदे बिना नहीं जाना। अगर मेरि शादी होने पर भी मई आपसे चुदावउँगी " कहति माई अपना गांड पीछे धकेली और झाड़ गयी। पाठकों यह मेरे एक अच्छा चुदाई है.. ऐसे एक बड़े उम्र वाले से।

खलास होने के बाद मैं अउर नानजी उसी हालत में लुक देर रहे, फिर उन्होंने मेरे बुर से अपना लंड निकली। हम दोड़नों का मदन रस जो हम में से छूटा है मेरे अंदर से बहकर मेरे जांघों को तर करते नीच बहने लगी। नानाजी ने झुके और सारी रस चाट चाट कर साफ़ किये। जब तक चार्ट रे हे की मेरे छूट की घुंडी में फिर से खड़ापन आ गया,, और बुर में फिर से खुजली होने लगी। मई भी नानाजी प्यारे सिपाही को ममेरे हाथों स स साफ़ की उसे दुलारने लगी।

Chhote bhai ki biwi ki train me chudai


Chhote bhai ki biwi ki train me chudai,छोटे भाई की बीवी की ट्रेन में चुदाई

 

मेरे छोटे भाई की बीवी की ट्रेन में चुदाई, Mere chhote bhai ki biwi ki train me chudai, भाई की बीवी की चुदाई, भाई की बीवी चुद गई, जेठ ने छोटे भाई की बीवी को चोद दिया, छोटी बहु और जेठ की कामवासना, चुद्क्कड़ छोटी बहु और सेक्सी जेठ, छोटे भाई की बीवी की चूत में बड़े भाई का लंड, छोटी बहु की चूत की प्यास बुझाई. चूत में लंड डालकर को छोटे भाई की बीवी को किया शांत, बड़े लंड से छोटे भाई की बीवी की चूत को चोदा.

नरुसा मेरे छोटे भाई आदि की वाइफ़ है। नरुसा काफ़ी सुंदर महिला है। उसका बदन ऊपरवाले ने काफ़ी तसल्ली से तराश कर बनाया है। मैं शिवम उसका जेठ हूँ। मेरी शादी को दस साल हो चुके हैं। नरुसा शुरु से ही मुझे काफ़ी अच्छी लगती थी। मुझसे वो काफ़ी खुली हुई थी। आदि एक यूके बेस्ड कम्पनी में सर्विस करता था। हां बताना तो भूल ही गया नरुसा का मायका नागपुर में है और हम जालंधर में रहते हैं। आज से कोई पांच साल पहले की बात है। हुआ यूं कि शादी के एक साल बाद ही नरुसा प्रेग्नेंट हो गयी। डिलीवरी के लिये वो अपने मायके गयी हुई थी। सात महीने में प्रीमेच्योर डिलीवरी हो गयी। बच्चा शुरु से ही काफ़ी वीक था। दो हफ़्ते बाद ही बच्चे की डेथ हो गयी। आदि तुरंत छुट्टी लेकर नागपुर चला गया। कुछ दिन वहां रह कर वापस आया। वापस अकेला ही आया था। डिसाइड ये हुआ था कि नरुसा की हालत थोड़ी ठीक होने के बाद आयेगी। एक महीने के बाद जब नरुसा को वापस लाने की बात आयी तो आदि को छुट्टी नहीं मिली।

नरुसा को लेने जाने के लिये आदि ने मुझे कहा। सो मैं नरुसा को लेने ट्रैन से निकला। नरुसा को वैसे मैने कभी गलत निगाहों से नहीं देखा था। लेकिन उस यात्रा मे हम दोनो में कुछ ऐसा हो गया कि मेरे सामने हमेशा घूंघट में घूमने वाली नरुसा बेपर्दा हो गयी। हमारी टिकट 1st class में बुक थी। चार सीटर कूपे में दो सीट पर कोई नहीं आया। हम ट्रैन में चढ़ गये। गरमी के दिन थे। जब तक ट्रैन स्टेशन से नहीं छूटी तब तक वो मेरे सामने घूंघट में खड़ी थी। मगर दूसरों के आंखों से ओझल होते ही उसने घूंघट उलट दिया और कहा, “अब आप चाहे कुछ भी समझें मैं अकेले में आपसे घूंघट नहीं करूंगी। मुझे आप अच्छे लगते हो आपके सामने तो मैं ऐसी ही रहूंगी।” मैं उसकी बात पर हँस पड़ा। “मैं भी घूंघट के समर्थन में कभी नहीं रहा।” मैने पहली बार उसके बेपर्दा चेहरे को देखा। मैं उसके खूबसूरत चेहरे को देखता ही रह गया। अचानक मेरे मुंह से निकला “अब घूंघट के पीछे इतना लाजवाब हुश्न छिपा है उसका पता कैसे लगता।” उसने मेरी ओर देखा फ़िर शर्म से लाल हो गयी।  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

उसने बोतल ग्रीन रंग की एक शिफ़ोन की साड़ी पहन रखी थी। ब्लाउज़ भी मैचिंग पहना था। गर्मी के कारण बात करते हुए साड़ी का आंचल ब्लाउज़ के ऊपर से सरक गया। तब मैने जाना कि उसने ब्लाउज़ के अन्दर ब्रा नही पहनी हुई है। उसके स्तन दूध से भरे हुए थे इसलिये काफ़ी बड़े बड़े हो गये थे। ऊपर का एक हुक टूटा हुआ था इसलिये उसकी आधी छाती साफ़ दिख रही थी। पतले ब्लाउज़ में से ब्रा नहीं होने के कारण निप्पल और उसके चारों ओर का काला घेरा साफ़ नजर आ रहा था। मेरी नजर उसकी छाती से चिपक गयी। उसने बात करते करते मेरी ओर देखा। मेरी नजरों का अपनी नजरों से पीछा किया और मुझे अपने बाहर छलकते हुए बूबस को देखता पाकर शर्मा गयी और जल्दी से उसे आंचल से ढक लिया। हम दोनो बातें करते हुए जा रहे थे। कुछ देर बाद वो उठकर बाथरूम चली गयी। कुछ देर बाद लौट कर आयी तो उसका चेहरा थोड़ा गम्भीर था। हम वापस बात करने लगे।

छोटे भाई की बीवी की ट्रेन में चुदाई


कुछ देर बाद वो वापस उठी और कुछ देर बाद लौट कर आ गयी। मैने देखा वो बात करते करते कसमसा रही है। अपने हाथो से अपने ब्रेस्ट को हलके से दबा रही है। “कोई प्रोब्लम है क्या?’ मैने पूछा। “न ।। नहीं” मैने उसे असमंजस में देखा। कुछ देर बाद वो फिर उठी तो मैने कहा “मुझे बताओ न क्या प्रोब्लम है?” वो झिझकती हुई सी खड़ी रही। फ़िर बिना कुछ बोले बाहर चली गयी। कुछ देर बाद वापस आकर वो सामने बैठ गयी। बोली – ”मेरी छातियों में दर्द हो रहा है।” उसने चेहरा ऊपर उठाया तो मैने देखा उसकी आंखें आंसु से छलक रही हैं। ”क्यों क्या हुआ” मर्द वैसे ही औरतों के मामले में थोड़े नासमझ होते हैं।

मेरी भी समझ में नहीं आया अचानक उसे क्या हो गया। ”जी वो क्या है म्म वो मेरी छातियां भारी हो रही हैं। ” वो समझ नहीं पा रही थी कि मुझे कैसे समझाये आखिर मैं उसका जेठ था। ” म्मम मेरी छातियों में दूध भर गया है लेकिन निकल नहीं पा रहा है।” उसने नजरें नीची करते हुए कहा। मैने पूछा – ”बाथरूम जाना है क्या?” ”गयी थी लेकिन वाश-वेसिन बहुत गंदा है इसलिये मैं वापस चली अयी” उसने कहा “और बाहर के वाश-वेसिन में मुझे शर्म आती है कोई देख ले तो क्या सोचेगा?” “फ़िर क्या किया जाए?” मैं सोचने लगा “कुछ ऐसा करें जिससे तुम यहीं अपना दूध खाली कर सको। लेकिन किसमें खाली करोगी? नीचे फ़र्श पर गिरा नहीं सकती और यहां कोई बर्तन भी नही है जिसमें दूध निकाल सको”उसने झिझकते हुये फ़िर मेरी तरफ़ एक नजर डाल कर अपनी नजरें झुका ली। वो अपने पैर के नखूनों को कुरेदती हुई बोली, “अगर आप गलत नहीं समझें तो कुछ कहूं?””बोलो””आप इन्हें खाली कर दीजिये न””मैं? मैं इन्हें कैसे खाली कर सकता हूं।” मैने उसकी छातियों को निगाह भर कर देखा। ”आप अगर इस दूध को पीलो……”उसने आगे कुछ नहीं कहा।

मैं उसकी बातों से एकदम भौचक्का रह गया। ”लेकिन ये कैसे हो सकता है। तुम मेरे छोटे भाई की बीवी हो। मैं तुम्हारे स्तनों में मुंह कैसे लगा सकता हूं” ”जी आप मेरे दर्द को कम कर रहे हैं इसमें गलत क्या है। क्या मेरा आप पर कोई हक नहीं है?” उसने मुझसे कहा. “मेरा दर्द से बुरा हाल है और आप सही गलत के बारे में सोच रहे हो। प्लीज़। ”मैं चुप चाप बैठा रहा समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। अपने छोटे भाई की बीवी के निप्पल मुंह में लेकर दूध पीना एक बड़ी बात थी। उसने अपने ब्लाउज़ के सारे बटन खोल दिये। ”प्लीज़” उसने फ़िर कहा लेकिन मैं अपनी जगह से नहीं हिला। ”जाइये आपको कुछ भी करने की जरूरत नहीं है। आप अपने रूढ़ीवादी विचारों से घिरे बैठे रहिये चाहे मैं दर्द से मर ही जाउं।” कह कर उसने वापस अपने स्तनों को आंचल से ढक लिया और अपने हाथ आंचल के अंदर करके ब्लाउज़ के बटन बंद करने की कोशिश करने लगी लेकिन दर्द से उसके मुंह से चीख निकल गयी “आआह्हह्ह” । मैने उसके हाथ थाम कर ब्लाउज़ से बाहर निकाल दिये।

फ़िर एक झटके में उसके आंचल को सीने से हटा दिया। उसने मेरी तरफ़ देखा। मैंने अपनी सीट से उठ कर केबिन के दरवाजे को लोक किया और उसके बगल में आ गया। उसने अपने ब्लाउज़ को उतार दिया। उसके नग्न ब्रेस्ट जो कि मेरे भाई की अपनी मिल्कियत थी मेरे सामने मेरे होंठों को छूने के लिये बेताब थे। मै अपनी एक उंगली को उसके एक ब्रेस्ट पर ऊपर से फ़ेरते हुए निप्पल के ऊपर लाया। मेरी उंगली की छुअन पा कर उसके निप्पल अंगूर की साइज़ के हो गये। मैं उसकी गोद में सिर रख कर लेट गया। उसके बड़े बड़े दूध से भरे हुए स्तन मेरे चेहरे के ऊपर लटक रहे थे। उसने मेरे बालों को सहलाते हुए अपने स्तन को नीचे झुकाया। उसका निप्पल अब मेरे होंठों को छू रहा था। मैने जीभ निकाल कर उसके निप्पल को छूआ। ”ऊओफ़्फ़फ़्फ़ जेठजी अब मत सताओ। पहले इनका दूध चूस लो। ” कहकर उसने अपनी छाती को मेरे चेहरे पर टिका दिया। मैने अपने होंठ खोल कर सिर्फ़ उसके निप्पल को अपने होंठों में लेकर चूसा। मीठे दूध की एकतेज़ धार से मेरा मुंह भर गया। मैने उसकी आंखों में देखा। उसकी आंखों में शर्म की परछाई तैर रही थी।

मैने मुंह में भरे दूध को एक घूंठ में अपने गले के नीचे उतार दिया। ”आआअह्हह्हह” उसने अपने सिर को एक झटका दिया। मैने फ़िर उसके निप्पल को जोर से चूसा और एक घूंट दूध पिया। मैं उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदने लगा। ”ऊओह्हह ह्हह्हाआन्न हा आन्नन जोर से चूसो और जोर से। प्लीज़ मेरे निप्पल को दांतों से दबाओ। काफ़ी खुजली हो रही है।” उसने कहा। वो मेरे बालों में अपनी उंगलियां फ़ेर रही थी। मैने दांतों से उसके निप्पल को जोर से दबाया।”ऊउईईइ” कर उठी। वो अपने ब्रेस्ट को मेरे चेहरे पर दबा रही थी। उसके हाथ मेरे बालों से होते हुए मेरी गर्दन से आगे बढ़ कर मेरे शर्ट के अन्दर घुस गये। वो मेरी बालों भरी छाती पर हाथ फ़ेरने लगी। फ़िर उसने मेरे निप्पल को अपनी उंगलियों से कुरेदा। “क्या कर रही हो?” मैने उससे पूछा।”वही जो तुम कर रहे हो मेरे साथ” उसने कहा” क्या कर रहा हूं मैं तुम्हारे साथ” मैने उसे छेड़ा” दूध पी रहे हो अपने छोटे भाई की बीवी के स्तनों से” ”काफ़ी मीठा है” ”धत” कहकर उसने अपने हाथ मेरे शर्ट से निकाल लिये और मेरे चेहरे पर झुक गयी। इससे उसका निप्पल मेरे मुंह से निकल गया।

उसने झुक कर मेरे लिप्स पर अपने लिप्स रख दिये और मेरे होंठों के कोने पर लगे दूध को अपनी जीभ से साफ़ किया। फ़िर उसने अपने हाथों से वापस अपने निप्पल को मेरे लिप्स पर रख दिया। मैने मुंह को काफ़ी खोल कर निप्पल के साथ उसके बूब का एक पोर्शन भी मुंह में भर लिया। वापस उसके दूध को चूसने लगा। कुछ देर बाद उस स्तन से दूध आना कम हो गया तो उसने अपने स्तन को दबा दबा कर जितना हो सकता था दूध निचोड़ कर मेरे मुंह में डाल दिया। ”अब दूसरा” मैने उसके स्तन को मुंह से निकाल दिया फ़िर अपने सिर को दूसरे स्तन के नीचे एडजस्ट किया और उस स्तन को पीने लगा। उसके हाथ मेरे पूरे बदन पर फ़िर रहे थे।  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

हम दोनो ही उत्तेजित हो गये थे। उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे पैंट की ज़िप पर रख दिया। मेरे लिंग पर कुछ देर हाथ यूं ही रखे रही। फ़िर उसे अपने हाथों से दबा कर उसके साइज़ का जायजा लिया।” काफ़ी तन रहा है” उसने शर्माते हुए कहा।”तुम्हारी जैसी हूर पास इस अन्दाज में बैठी हो तो एक बार तो विश्वामित्र की भी नीयत डोल जाये।””म्मम्म अच्छा। और आप? आपके क्या हाल हैं” उसने मेरे ज़िप की चैन को खोलते हुए पूछा”तुम इतने कातिल मूड में हो तो मेरी हालत ठीक कैसे रह सकती है” उसने अपना हाथ मेरे ज़िप से अन्दर कर ब्रीफ़ को हटाया और मेरे तने हुए लिंग को निकालते हुए कहा “देखूं तो सही कैसा लगता है दिखने में”मेरे मोटे लिंग को देख कर खूब खुश हुयी। “अरे बाप रे कितना बड़ा लिंग है आपका। दीदी कैसे लेती है इसे?” ”आ जाओ तुम्हें भी दिखा देता हूं कि इसे कैसे लिया जाता है।” ”धत् मुझे नहीं देखना कुछ। आप बड़े वो हो” उसने शर्मा कर कहा। लेकिन उसने हाथ हटाने की कोई जल्दी नहीं की।” इसे एक बार किस तो करो” मैने उसके सिर को पकड़ कर अपने लिंग पर झुकाते हुए कहा। उसने झिझकते हुए मेरे लिंग पर अपने होंठ टिका दिये।

अब तक उसका दूसरा स्तन भी खाली हो गया था। उसके झुकने के कारण मेरे मुंह से निप्पल छूट गया। मैने उसके सिर को हलके से दबाया तो उसने अपने होंठों को खोल कर मेरे लिंग को जगह दे दी। मेरा लिंग उसके मुंह में चला गया। उसने दो तीन बार मेरे लिंग को अन्दर बाहर किया फ़िर उसे अपने मुंह से निकाल लिया।” ऐसे नहीं… ऐसे मजा नहीं आ रहा है” ”हां अब हमें अपने बीच की इन दीवारों को हटा देना चाहिये” मैने अपने कपड़ों की तरफ़ इशारा किया। मैने उठकर अपने कपड़े उतार दिये फ़िर उसे बाहों से पकड़ कर उठाया। उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसके बदन से अलग कर दिया। अब हम दोनो बिल्कुल नग्न थे। तभी किसी ने दरवाजे पर नोक किया। “कौन हो सकता है।” हम दोनो हड़बड़ी में अपने अपने कपड़े एक थैली में भर लिये और नरुसा बर्थ पर सो गयी। मैने उसके नग्न शरीर पर एक चादर डाल दी। इस बीच दो बार नोक और हुआ।

मैने दरवाजा खोला बाहर टीटी खड़ा था। उसने अन्दर आकर टिकट चेक किया और कहा “ये दोनो सीट खाली रहेंगी इसलिये आप चाहें तो अन्दर से लोक करके सो सकते हैं” और बाहर चला गया। मैने दरवाजा बंद किया और नरुसा के बदन से चादर को हटा दिया। नरुसा शर्म से अपनी जांघों के जोड़ को और अपनी छातियों को ढकने की कोशिश कर रही थी। मैने उसके हाथों को पकड़ कर हटा दिया तो उसने अपने शरीर को सिकोड़ लिया और कहा “प्लीज़ मुझे शर्म आ रही है।” मैं उसके ऊपर चढ़ कर उसकी योनि पर अपने मुंह को रखा। इससे मेरा लिंग उसके मुंह के ऊपर था। उसने अपने मुंह और पैरों को खोला। एक साथ उसके मुंह में मेरा लिंग चला गया और उसकी योनि पर मेरे होंठ सैट हो गए। “आह विशाल जी क्या कर रहे हो मेरा बदन जलने लगा है। पंकज ने कभी इस तरह मेरी योनि पर अपनी जीभ नहीं डाली” उसके पैर छटपटा रहे थे। उसने अपनी टांगों को हवा में उठा दिया और मेरे सिर को उत्तेजना में अपनी योनि पर दबाने लगी।

मैं उसके मुंह में अपना लिंग अंदर बाहर करने लगा। मेरे होंठ उसकी योनि की फ़ांकों को अलग कर रहे थे और मेरी जीभ अंदर घूम रही थी। वो पूरी तन्मयता से अपने मुंह में मेरे लिंग को जितना हो सकता था उतना अंदर ले रही थी। काफ़ी देर तक इसी तरह 69 पोज़िशन में एक दूसरे के साथ मुख मैथुन करने के बाद लगभग दोनो एक साथ खल्लास हो गये। उसका मुंह मेरे रस से पूरा भर गया था। उसके मुंह से चू कर मेरा रस एकपतली धार के रूप में उसके गुलाबी गालों से होता हुआ उसके बालों में जाकर खो रहा था। मैं उसके शरीर से उठा तो वो भी उठ कर बैठ गयी। हम दोनो एक दम नग्न थे और दोनो के शरीर पसीने से लथपथ थे। दोनो एक दूसरे से लिपट गये और हमारे होंठ एक दूसरे से ऐसे चिपक गये मानो अब कभी भी न अलग होने की कसम खा ली हो। कुछ मिनट तक यूं ही एक दूसरे के होंठों को चूमते रहे फ़िर हमारे होंठ एक दूसरे के बदन पर घूमने लगे।”अब आ जाओ” मैने नरुसा को कहा।”जेठजी थोड़ा सम्भाल कर। अभी अंदर नाजुक है। आपका बहुत मोटा है कहीं कोई जख्म न हो जाये।””ठीक है। चलो बर्थ पर हाथों और पैरों के बल झुक जाओ। इससे ज्यादा अंदर तक जाता है और दर्द भी कम होता है।” नरुसा उठकर बर्थ पर चौपाया हो गयी।

मैंने पीछे से उसकी योनि पर अपना लंड सटा कर हलका सा धक्का मारा। गीली तो पहले ही हो रही थी। धक्के से मेरे लंड के आगे का टोपा अंदर धंस गया। एक बच्चा होने के बाद भी उसकी योनि काफ़ी टाइट थी। वो दर्द से “आआह्हह” कर उठी। मैं कुछ देर के लिये उसी पोज़ में शांत खड़ा रहा। कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो नरुसा ने ही अपनी गांड को पीछे धकेला जिससे मेरा लंड पूरा अंदर चला जाये।”डालो न रुक क्यों गये।””मैने सोचा तुम्हें दर्द हो रहा है इसलिये।””इस दर्द का मजा तो कुछ और ही होता है। आखिर इतना बड़ा है दर्द तो करेगा ही।” उसने कहा। फ़िर वो भी मेरे धक्कों का साथ देते हुए अपनी कमर को आगे पीछे करने लगी। मैं पीछे से शुरु शुरु में सम्भल कर धक्का मार रहा था लेकिन कुछ देर के बाद मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के से उसके दूध भरे स्तन उछल जाते थे। मैने उसकी पीठ पर झुकते हुए उसके स्तनो को अपने हाथों से थाम लिया। लेकिन मसला नहीं, नहीं तो सारी बर्थ उसके दूध की धार से भीग जाती।

काफ़ी देर तक उसे धक्के मारने के बाद उसने अपने सिर को जोर जोर से झटकना चालू किया। ”आआह्हह्ह शीईव्वव्वाअम्मम आआअह्हह्ह तूउम्म इतनीए दिन कहा थीए। ऊऊओह्हह माआईईइ माअर्रर्रर जाऊऊं गीइ। मुझीए माअर्रर्रर डालूऊओ मुझीए मसाअल्ल डाअल्लूऊ” और उसकी योनि में रस की बौछार होने लगी। कुछ धक्के मारने के बाद मैने उसे चित लिटा दिया और ऊपर से अब धक्के मारने लगा। ”आअह मेरा गला सूख रहा है।” उसका मुंह खुला हुआ था। और जीभ अंदर बाहर हो रही थी। मैने हाथ बढ़ा कर मिनरल वाटर की बोतल उठाई और उसे दो घूंठ पानी पिलाया। उसने पानी पीकर मेरे होंठों पर एक किस किया।” चोदो शिवम चोदो। जी भर कर चोदो मुझे।” मैं ऊपर से धक्के लगाने लगा। काफ़ी देर तक धक्के लगाने के बाद मैने रस में डूबे अपने लिंग को उसकी योनि से निकाला और सामने वाली सीट पर पीठ के बल लेट गया।” आजा मेरे उपर” मैने नरुसा को कहा।

नरुसा उठ कर मेरे बर्थ पर आ गयी और अपने घुटने मेरी कमर के दोनो ओर रख कर अपनी योनि को मेरे लिंग पर सेट करके धीरे धीरे मेरे लिंग पर बैठ गयी। अब वो मेरे लिंग की सवारी कर रही थी। मैने उसके निप्पल को पकड़ कर अपनी ओर खींचा। तो वो मेरे ऊपर झुक गयी। मैने उसके निप्पल को सेट कर के दबाया तो दूध की एक धार मेरे मुंह में गिरी। अब वो मुझे चोद रही थी और मैं उसका दूध निचोड़ रहा था। काफ़ी देर तक मुझे चोदने के बाद वो चीखी “शिवम मेरा पानी निकलने वाला है। मेरा साथ दो। मुझे भी अपने रस से भिगो दो।” हम दोनो साथ साथ झड़ गये। काफ़ी देर तक वो मेरे ऊपर लेटी हुई लम्बी लम्बी सांसे लेती रही।  आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है।

फ़िर जब कुछ नोर्मल हुई तो उठ कर सामने वाली सीट पर लेट गयी। हम दोनो लगभग पूरे रास्ते नग्न एक दूसरे को प्यार करते रहे। लेकिन उसने दोबारा मुझे उस दिन और चोदने नहीं दिया, उसके बच्चेदानी में हल्का हल्का दर्द हो रहा था। लेकिन उसने मुझे आश्वासन दिया। “आज तो मैं आपको और नहीं दे सकुंगी लेकिन दोबारा जब भी मौका मिला तो मैं आपको निचोड़ लुंगी अपने अंदर। और हां अगली बार मेरे पेट में देखते हैं दोनो भाईयों में से किसका बच्चा आता है। उस यात्रा के दौरान कई बार मैने उसके दूध की बोतल पर जरूर हाथ साफ़ किया।

पापा ने चूत में अपना 12 इंच पूरा लौड़ा घुसा दिया

पापा ने मेरे चूत में अपना 12 Inch पूरा लौड़ा घुसा दिया


मेरा नाम मधु गुप्ता है. मेरी उम्र लगभग 21 वर्ष की हो चुकी है. मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सूना रही हूँ. तब मैं अपने मामा के यहाँ रह कर पढ़ाई करती थी. मेरी उम्र १९ वर्ष की थी. मेरा घर गाँव में था. मेरे कॉलेज में छुट्टी हो गयी थी. मैंने अपने पापा को फ़ोन किया और कहा कि वो आ कर घर ले जाएँ. मेरे पापा मुझे लेने आ गए. हम दोनों ने रात नौ बजे ट्रेन पर चढ़ गए. ट्रेन पैसेंजर थी. रात भर सफ़र कर के सुबह के ६ बजे हम लोग अपने गाँव के निकट उतरते थे. उस ट्रेन में काफी कम पैसेंजर थे.

उस पूरी बोगी में सिर्फ २०-२२ यात्री रहे होंगे. उस पैसेंजर ट्रेन में लाईट भी नहीं थी. जब ट्रेन खुली तो स्टेशन की लाईट से पर्याप्त रौशनी हो रही थी. लेकिन ट्रेन के प्लेटफोर्म को छोड़ते ही पुरे ट्रेन में घना अँधेरा छा गया. हम दोनों अकेले ही थे. करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन एक सुनसान जगह खड़ी हो गयी. यहाँ पर कुछ दिन पूर्व ट्रेन में डकैती हुयी थी. पूरी ट्रेन में घुप्प अँधेरा था और आसपास भी अँधेरा था. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

हम दोनों को डर सा लग रहा था. पापा ने मुझसे कहा – बेटी एक काम कर. ऊपर वाले सीट पर सो जा. मैंने कम्बल निकाला और ऊपर वाले सीट पर लेट गयी. लेकिन ट्रेन लगभग १५ मिनट से उस सुनसान जगह पर खड़ी थी. तभी कुछ हो हंगामा की आवाज आई. मैंने पापा से कहा – पापा मुझे डर लग रहा है. पापा ने कहा – कोई बात नहीं है बेटी, मैं हूँ ना.

मैंने कहा – लेकिन आप तो अकेले हैं पापा, यदि कोई बदमाश आ गया और मुझे देख ले तो वो कुछ भी कर सकता है. आप प्लीज ऊपर आ जाईये ना. पापा – ठीक है बेटी. पापा भी ऊपर आ गए और कम्बल ओढ़ कर मेरे साथ सो गए. अब मैं उनके और दीवार के बीच में आराम से छिप कर थी. अब किसी को पता भी नहीं चल पायेगा कि इस कम्बल में कोई लड़की भी है. थोड़ी ही देर में ट्रेन चल पड़ी. हम दोनों ने राहत की सांस ली. मैंने पापा को कस कर पकड़ लिया. ट्रेन की सीट कितनी कम चौड़ी होती है आपको पता ही होता है. इसी में हम दोनों एक दुसरे से सट कर लेटे हुए थे. पापा ने भी मुझे अपने से साट लिया और कम्बल को चारो तरफ से अच्छी तरह से लपेट लिया. पापा मेरी पीठ सहला रहे थे. और मुझसे कहा – अब तो डर नहीं लग रहा ना बेटी? मैंने पापा से और अधिक चिपकते हुए कहा – नहीं पापा.

अब आप मेरे साथ हैं तो डर किस बात की? पापा – ठीक है बेटी. अब भर रास्ते हम दोनों इसी तरह सटे रहेंगे. ताकि किसी को ये पता नहीं चल सके कि कोई लड़की भी इस बर्थ पर है. ट्रेन अब धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ चुकी थी. पापा ने थोड़ी देर के बाद कहा – बेटी तू कष्ट में है. एक काम कर अपना एक पैर मेरे ऊपर से ले ले. ताकि कुछ आराम से सो सके. मैंने ऐसा ही किया. इस से मुझे आराम मिला. लेकिन मेरा बुर पापा के लंड से सटने लगा. ट्रेन के हिलने से पापा का लंड बार बार मेरे बुर से सट जा रहा था. अचानक पापा ने मेरे चूची को दबाना चालू कर दिए. मैंने शर्म के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी. हम दोनों के मुंह बिलकुल सटे हुए थे. पापा ने मुझे चूमना भी चालू कर दिया. मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल रही थी. पापा ने मेरी सलवार का नाडा पकड़ा और उसे खोल दिया और कहा – बेटा तू सलवार खोल ले.

मैंने सलवार खोल दिया. पापा ने भी अपना पायजामा खोल दिया. अब पापा ने मेरी पेंटी में हाथ डाला और मेरी चूत के बाल को खींचने लगे. मैंने भी पापा के अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और पापा के तने हुए 6 इंच के लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी. आह कितना मोटा लौड़ा था… मुठ्ठी में ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी. पापा ने मेरी पेंटी को खोल कर मुझे नग्न कर दिया. फिर अपना अंडरवियर खोल कर मेरे ऊपर चढ़ गए. मेरे चूत में ऊँगली डाल कर मेरे चूत का मुंह खोला और अपना लंड उसमे धीरे धीरे घुसाने लगे. मैं शर्म से मरी जा रही थी. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है  

लेकिन मज़ा भी आ रहा था. पापा ने मेरे चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया. मेरी चूत की झिल्ली फट गयी. दर्द भी हुआ और मैं कराह उठी. लेकिन ट्रेन की छुक छुक में मेरी कराह छिप गयी. पापा मुझे चोदने लगे. थोड़े देर में ही मेरा दर्द ठीक हो गया और मैं भी चुपचाप चुदवाती रही. करीब 10 मिनट की चुदाई में मेरा 2 बार झड गया. 10 मिनट के बाद पापा के लौड़े ने भी माल उगल दिया. पापा निढाल हो कर मेरे बगल में लेट गए. लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था. मैंने पापा के लंड को सहलाना चालू किया.

पापा समझ गए कि उनकी बेटी अभी और चुदाई चाहती है. पापा – बेटी, तू क्या एक बार और चुदाई चाहती है. मैंने – हाँ पापा.. एक बार और कीजिये न..बड़ा मजा आया.. पापा – अरे बेटी, तू एक बार क्या कहे मैं तो तुझे रात भर चोद सकता हूँ. मैंने – ठीक है पापा, आप की जब तक मन ना भरे मुझे चोदिये. मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा है. पापा ने मुझे उस रात 4 बार चोदा. सारा बर्थ पर माल और रस और खून गिरा हुआ था. सुबह से साढ़े तीन बज चुके थे. पांचवी बार चुदाई के बाद हम दोनों नीचे उतर आये. मैंने और पापा ने अपने पहने हुए सारे कपडे को बदल लिया और गंदे हो चुके कपडे और कम्बल को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

मैंने बोतल से पानी निकाला और मुंह हाथ साफ़ कर के बालों में कंघी कर के एकदम फ्रेश हो गयी. पापा ने मुझे लड़की से स्त्री बना दिया था. मुझे इस बात की ख़ुशी हो रही थी कि यदि मेरे कौमार्य को कोई पराया मर्द विवाह पूर्व भाग करता और पापा को पता चल जाता तो पापा को कितनी तकलीफ होती. लेकिन जब पापा ने ही मेरे कौमार्य को भंग कर मुझे संतुष्टि प्रदान की है तो मैं पापा की नजर में दोषी होने से भी बच गयी और मज़ा भी ले लिया. यही सब विचार करते करते ठीक पांच बजे हमारा स्टेशन आ गया और हम ट्रेन से उतर कर घर की तरफ प्रस्थान कर गए. घर पहुँचने पर मौका मिलते ही पापा मुझे चोद कर मुझे और खुद को मज़े देते थे

रात में सौतेला बाप ने मेरा रेप किया



कुछ साल पहले मेरे पिताजी की कैंसर से मौत हो गयी थी.। इसलिए मेरी माँ को दुबारा शादी करनी पड़ गयी.। मेरी माँ बहुत सुंदर औरत थी और गजब की माल थी.। उसका कद ५ फुट ४ इंच का था, बहुत दूध जितनी गोरी थी और उसके बूब्स तो ३४ ३६” के होंगे.। जो आदमी मेरी माँ से शादी करने जा रहा था उसकी औरत खत्म हो गयी थी.।वो भी अकेला था और माँ भी अकेली थी.। दोनों में बात हो गयी और फिर शादी हो गयी.। सुहागरात के दिन उस आदमी ने मेरी माँ को खूब चोदा.। माँ की गर्म गर्म चीखे मैं साफ साफ़ सुन सकती थी.। आआआअह्हह्हह्ह….ऊऊऊ….अईईईईई…आऊऊऊउ …माँ गर्म गर्म सिसकारी निकाल रही थी और मजे लेकर चुद रही थी.। तब मेरी उम्र १८ साल की थी.।



मैं बालिग़ हो चुकी थी और चुदने लायक सामान हो गयी थी.। शुरू के साल भर मेरे सौतेले बाप ने मुझे बहुत प्यार दिया.। मेरे लिए नये नये कपड़े लेकर आया.। तरह तरह की चीजे, खाने की अच्छी अच्छी चीजे वो लेकर आता था.। साल भर उसने मेरी माँ को खूब जी भरकर चोदा और ठोंका.। उसके बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आना शुरू हो गया.।ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है.। मेरा सौतेला बाप जब मेरा पास आता तो मेरे दोनों कंधों पर अपने हाथ रख देता और सहलाने लगा जाता.।



“बेटी!! मुझे तुझसे कुछ बात अकेले में करनी है!!” मेरा सौतेला बाप बोला



एक दिन जब माँ नही थी तो उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया.।



“बेटी अंजली! ….क्या तेरा कोई बॉयफ्रेंड है???” उसने पूछा



“नही …पिताजी!” मैं बोली



“बेटी बनाना भी नही.। ये बोयफ्रेंड बहुत गंदे होते है, मासूम लड़कियों को चोद लेते है और खा पीकर चूत का छेद बड़ा करके भाग जाते है.। कुछ बॉयफ्रेंड तो शादी का झांसा देकर मासूम लड़कियों को चोद लेते है!!” मेरे सौतेले बाप ने मुझे समझाया.। उस दिन से मैं पिताजी को अपना बड़ा अच्छा दोस्त मानने लगी.। एक दिन जब मेरी माँ घर पर नही थी, मेरे सौतेले पिताजी ने मुझे टीवी पर एक ब्लू फिल्म दिखाई.।



“अंजली!! बेटी ….देखो अच्छी लगी ये पिक्चर??” मेरे सौतेले बाप ने पूछा



मैंने देखा तो वो एक गर्मा गर्म चुदाई वाली पिक्चर थी.। लड़का लकड़ी को गोद में उठाकर चोद रहा था और लड़की गर्म गर्म मादक सिस्कारियां निकाल रही थी.। मैं शर्मा गयी.।



“अंजली बेटी….अच्छी लगी??” मेरे सौतेले बाप ने फिर पूछा



“धत्त!! पिताजी........क्या कोई पिताजी अपनी बेटी से ये पूछता है!!” मैं कहा.। मैं बहुत लजा गयी थी और शर्म कर रही थी.।



“बेटी, आजकल युवाओं को सेक्स एजुकेशन देना बहुत जरूरी हो गया है.। वरना लड़कियां कई मर्दों से चुदवा लेती है और ऐड्स जैसी जानलेवा बिमारी का शिकार बन जाती है.। इसलिए बेटी आजकल हर बाप अपनी जवान चुदने लायक लड़की को चुपके चुपके सेक्स एजुकेशन देते रहते है, ये बात सीक्रेट ही रखी जाती है.। तुम ये दोनों टेप अच्छी तरह से देख लेना, जिससे तुमको सेक्स एजुकेशन मिल जाए!” मेरे सौतेले बाप [पिताजी] ने कहा.। उसने सेक्स की चुदाई वाली गर्मा गर्म फिल्मे मेरे कमरे में छोड़ दी और अपने काम पर चला गया.। मेरे पास करने को और कोई काम था नही, मेरा कॉलेज तो एक महीने के लिए बंद ही हो गया था तो मैंने सोचा की चलो सेक्स एजुकेशन ही ले लूँ.। वैसे भी कोई बाप इतना पाप नही होगा की अपनी लड़की को गलत शिक्षा दे.।ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है.।



दोस्तों, मैंने जैसे जैसे वो चुदाई वाले फिल्मे देखना शुरू की मुझे अच्छी लगने लगी.। कुछ देर बाद तो मैंने अपना सारा काम धाम छोड़ दिया और सुबह से रात तक बैठ कर मैंने वो दोनों चुदाई की ४ ४ घंटे की फिल्म देख ली.। शाम को पिताजी और मम्मी अपने अपने ऑफिस से लौटे तो मुझे पता नही क्या हो गया है.। उन चुदाई फिल्मो का मेरे किशोर मन पर बहुत असर हुआ था.।“पिताजी!! मुझे और सेक्स एजुकेशन लेनी है, कल आप और टेप ले आना!!” मैं अपने सौतेले बाप से बोल दिया,मेरा चुदाई फिल्मो में इंटरेस्ट देखकर मन ही मन वो मुस्कुराने लगे.। सायद वो कोई कुटिल प्लान अपने दिमाग में बना रहे थे.। इस तरह पिताजी रोज नई नई चुदाई वाली फिल्मे मेरे लिए लाने लगे.। कभी जापानी चुदाई की फिल्मे, कभी चाईनीस चुदाई की फिल्मे , कभी कोई….कभी कोई.। दोस्तों २ महीने बाद मुझे ब्लू फिल्म देखने का भयानक चस्का लग गया था, जैसे किसी गंजेड़ी को गांजा पीने के बुरा चस्का लग गया था.। एक दिन सुबह सुबह जब मेरी माँ अपनी नौकरी पर गयी थी मैंने पिताजी से फिर कहा की मेरे लिए चुदाई फिल्म लेकर आये.। मेरे पिताजी गये और मार्किट से खाली हाथ लौट आये.।



“ये क्या पिताजी........आप खाली हाथ क्यों लौट आये, अब मेरा वक़्त कैसे बीतेगा???” मैं बहुत बेचैन महसूस कर रही थी.। जैसे किसी अफीमची को अगर अफीम सूंघने को ना मिले तो वो बड़ा बेचैन हो जाता है, मेरी हालत बिलकुल ऐसी ही थी.।



“बेटी……वो दूकान बंद थी.। पता नही खुलेगी!!” पिताजी बोले



“नही पिताजी........आप फिर से मार्केट जाइये और मेरे लिए वो सेक्स एजुकेशन वाला टेप लेकर आईये!!” मैंने झल्लाते हुए कहा.। मेरा सौतेला बाप जा जाने क्यों हल्का हल्का मुस्कुरा रहा था.। उसका पूरा प्लान मुझे रगड़कर चोदने और खाने का था.। अपनी हवस को पूरी करने के लिए उस बहनचोद ने मुझे सेक्स एजुकेशन का झांसा दिया था.। उसका असली मकसद मुझे चोदना था.। मैं २ महीनो ने रोज नई नई चुदाई वाली फिल्मे देखने लगी थी और चूत में बैंगन और मूली, गाजर और ऊँगली डालकर मुठ मारना भी सीख गयी थी.। अब मैं चुदाई के बारे में सब कुछ जान गयी थी.। अब मैं गांड मरवाने के बारे में सब कुछ जान गयी थी.।



मेरी झल्लाहट देखकर मेरा सौतेला बाप बहुत खुश हो रहा था.। “बेटी आज दूकान तो बंद है….तुम रोज रोज नई नई चुदाई फिल्मे देखकर सेक्स एजुकेशन लेती तो.। बेटी……अगर तुम चाहो तो मैं तुमको रिअल सेक्स का मजा दे सकता हूँ…किसी को पता नही चलेगा.। देखने से जादा करने में मजा आता है बेटी........जरा सोचो….सोचो!!” मेरा कपटी बाप बोला,“हाँ!! पिताजी ........ये मस्त आईडिया है.। रोज मैं सेक्स एजुकेशन लेती हूँ, पर कभी सेक्स नही करती.। पिताजी आज आप मेरे साथ सेक्स करो और मुझे रिअल सेक्स एजुकेशन दो!!”“बेटी……तुम्हारा मतलब मैं तुमको चोदकर........सेक्स एजुकेशन दूँ???” मेरे कुटिल सौतेले बाप ने पूछा.। वो अच्छी तरह से जान गया था की उसने मुझे कोई सेक्स वेक्स एजुकेशन नही दी थी.। उसका कुटिल मकसद मुझे सेक्स की लत लगवाकर जी भरकर चोदना था.। वो हमारी सेक्स एजुकेशन के नाम पर मुझे धोखे से चोदना खाना नोचना चाहता है.। मैं मासूम कली थी, उसकी चाल समझ ना पायी.।



“हाँ ........पिताजी हाँ!! …आप मुझे चोदिये और सेक्स एजुकेशन दीजिये!!” मैंने बोली



ये सुनकर मेरा सौतेला बाप बहुत खुश.। उसने मुझे बाहों में भर लिया और अब उसे किसी बात का डर नही था.। क्यूंकि अब मुझे ही सेक्स की बुरी लत लग गयी थी.। मैं खुद ही अपने पिताजी से चिपक गयी.। मैंने फिरोजी रंग का सलवार सूट पहन रखा था.। मेरा पिताजी यानी मेरा सौतेला बाप मेरे मस्त मस्त मम्मे ताड़ रहा था.। फिर उसने मेरा दुप्पटा खींच दिया और हटा दिया.। मेरे बड़े बड़े मम्मे मेरी कमीज के सूती कपड़े से साफ़ साफ़ दिख रहे थे.। फिर पिताजी मुझे चोदने के लिए कमरे में ले गये.। मुझे सेक्स की बुरी लत लग चुकी थी.। वरना कोई शरीफ लड़की अपने बाप से चुदवाने के लिए उनके कमरे में नही जाती.।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है.। पिताजी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.। मेरे होठ पीने लगे.। पिताजी ने मुझे बाहों में भर लिया था.। दोस्तों, आज मैं भी फुल मूड में थी.। चुदाई फिल्मे मैंने बहुत देख ली थी आज मैं खुद चुदना चाहती थी.। मैं भी पिताजी के होठ पीने लगी.।



कुछ देर बाद हम दोनों की चुदास और कामवासना जाग गयी.। मुझे अपने पिताजी के होठ चूसना पता नही क्यों अच्छा लग रहा था.। पिताजी के हाथ मेरे बड़े बड़े दूध पर आ गये.। वो मेरे दूध दबाने लगे.। मैं उनको नही रोका.। क्यूंकि मुझे अच्छा लग रहा था.।“आह्ह्ह्ह........पिताजी दबाइये!!….मेरे दूध और दबाइये!!” मैंने पिताजी से कहा तो पिताजी की कामवासना जाग गयी.। वो कस कसके मेरे दूध दबाने लगे.। मुझे बहुत अच्छा लग.। पिताजी मेरे साथ फ्रेंच किस का मजा ले रहे थे.। मेरे पतले नीचे वाले होठो को चूस रहे थे.। मेरे ओंठ बहुत रसीले थे.। कुछ देर में पिताजी ने मेरी कनीज निकाल दी.। फिर मेरी ब्रा निकाल दिए.। पता नही क्यूँ मुझे हल्की से शर्म आई.। पिताजी की नजरे मेरे दूध पर टिकी थी.। वासना उनकी आँखों में बैठ चुकी थी.। वो जल्द से जल्द मुझे चोदना चाहते थे.।



“बेटी........तेरे दूध तो माशाअल्ला है…इतने खूबसूरत मम्मे मैंने आज तक नही देखे है!!” पिताजी मेरे बूब्स की तारीफ़ करने लगे



“पी लो पिताजी........आज जी भरकर मेरे रसीले बूब्स पी लो!” मैंने कहा



तो पिताजी जोर जोर से मेरे ३६” के दूध हाथ से दबाने लगे और फिर मजे से पीने लगे.। आज मेरा सपना पूरा होने वाला था.। मैं रोज तरह तरह की चुदाई देखा करती थी, पर आज मैं खुद चुदने वाली थी.। पिताजी पर वासना हावी हो गयी.। उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे हसीन दूध मुँह में भर लिए और मजे लेकर पीने लगे.। मैं कितनी बेशर्म लड़की थी.। अपने बाप से चुदवाने वाली थी.। मैंने भी पिताजी को बाहों में भर लिया और बिस्तर पर हम दोनों लेट गये.। आज मेरे सौतेले पिताजी मेरे बॉयफ्रेंड और मेरे सैयां बन चुके थे.। वो मजे ले लेकर मेरे रसीले दूध पी रहे थे.।



आह….एक अजीब सा नशा चढ़ रहा था.। पिताजी को मेरे दूध पीने में तो मजा मिल ही रहा था, पर मुझे भी खूब आनंद प्राप्त हो रहा था.।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है.। मेरे दूध पीते पीते पिताजी का हाथ मेरी सलवार पर चला गया.। उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी.। तो मैं भी पिताजी के लंड को सहलाने लगी और मैंने उनकी पैंट खोल दी.। उसके बाद हम दोनों ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.। पिताजी अब बिस्तर पर लेट गये और मैं उनका लंड चुसने लगी.।



“पिताजी!!….तुम्हारा लंड तो कितना बड़ा और विशाल है!!” मैं आश्चर्य से कहा



“चूस ले बेटी........अब समझ ले की ये लंड तेरा ही है!!” पिताजी बोले



मैंने २ महीने में १०० से जादा चुदाई फिल्मे देखी थी.। अच्छी तरह लंड चुसना मैं वही पर सीखा था.। मैं भी मजे लेकर पिताजी के लंड चूसने लगी.। अरे कितना बड़ा गुलाबी लंड था और सुपाडा तो बहुत ही बड़ा था और गुलाबी था.। मैंने पिताजी की जाँघों पर लेट गयी.। गोलियां भी मजे से चूस रही थी और लंड भी मुँह में लेकर चूस रही थी.। पिताजी को बहुत आनंद मिल रहा था.।“चूस बेटी….और मुँह में अंदर तक लेकर चूस!!” पिताजी बोले तो मैं और जोर जोर से पिताजी का लंड चूसने लगी.। मुझे बहुत मजा आ रहा था.। मैं जोर जोर से सर हिलाकर लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी.। पिताजी का लंड कोई 8” लम्बा था और बहुत जूसी था.। पिताजी का लंड चूसते चूसते मेरी चूत बहने लगी.। फिर पिताजी ने मुझे सीधा बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगे.। मैं कुवारी कन्या थी.। इसलिए पिताजी को बहुत जोर से धक्का मारना पड़ा.।



तब जाकर मेरी कुवारी चूत की सील टूट पायी.। पिताजी का लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया.। मैंने खुद अपनी दोनों टाँगे उपर कर ली और चुदवाने लगी.। पिताजी मेरे लाल लाल खूबसूरत भोसड़े में गहरे धक्के देने लगा.। मैंने पिताजी को अपनी बाहों में छुपा लिया था, क्यूंकि मुझे चूत में काफी दर्द हो रहा था.। पिताजी ने मेरे दोनों कोमल कंधे पकड़ रखे थे और किसी आवारा रंडी की तरह मुझे कमर मटका मटकाकर चोद रहे थे.। दोस्तों, दर्द के साथ साथ मुझे मीठा मीठा अहसास भी हो रहा था.। पर ये जो कुछ भी था मुझे अच्छा लग रहा था.। पिताजी ने मुझे अपने कब्जे में ले लिया और पक पक चोदने लगे.। वो फिर मेरे उपर लेट गये और मेरे बूब्स पीते पीते मुझे पेलने लगे.। २० मिनट बाद पिताजी मेरी रसीली चूत में शहीद हो गये.। मैंने पिताजी को दिल में छुपा लिया.। मुझे अभी भी चूत में दर्द हो रहा था.।



“बेटी........बताओ कैसी लगी मेरी सेक्स एजुकेशन????” पिताजी ने हँसते हुए पूछा



“अच्छी लगी पिताजी!!” मैंने जावाब दिया



फिर हम दोनों किसी युगल प्रेमी जोड़े की तरह एक दुसरे के रसीले ओठ पीने लगे.। आज मैं पहली बार अपने सौतेले बाप से चुद गयी.। अच्छा रहा ये एक्सपीरियंस.। कुछ दिन बाद पिताजी और मैं घर पर अकेली थी.। मेरी मम्मी अपनी नौकरी के सिलसिले में शहर से बाहर गयी थी.।



“बेटी ……सेक्स एजुकेशन हो जाए???” पिताजी मुझे फुसलाते हुए बोले



“जी ........ठीक है!!” मैंने कहा



हम दोनों फिर से चुदाई में तल्लीन हो गये.। पिताजी ने मुझे और मैं पिताजी को नंगा कर दिया.। पिताजी मेरी चूत पीने लगे और ऊँगली करने लगे.। दोस्तों, आज मुझे तनिक भी दर्द नही हुआ.। पिताजी ने अपनी जीभ चला चलाकर मेरी चूत मजे लेकर पी.। फिर लंड डालकर मुझे चोदने लगे.। कुछ देर बाद पिताजी मुझ पर पूरी तरह से हावी हो गये और इतने जोर जोर चोदने लगे की मेरी जान निकलने लगी.। पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, इसलिए दर्द होने के बाद भी मैंने उनसे रुकने के लिए नही कहा.। फिर पिताजी ने मुझे अपनी कमर पर बिठा लिया और मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे बिस्तर पर उछाल उछालकर मुझे चोदने लगे.। मैंने इस तरह की चुदाई विडियो में देखी थी जो पिताजी मेरे लिए लेकर आये थे.।



पर दोस्तों, मैं ये बात जरुर कहूँगी की देखने से जादा करने में आनंद प्राप्त होता है.। पिताजी के दोनों हाथ किसी सांप की तरह मेरी पतली चिकनी सेक्सी कमर पर लिपट गये और पिताजी ने सवा घंटा मुझे लंड पर बिठाकर चोदा.। आज ४ साल से पिताजी हर दिन माँ से छुपकर मेरी चूत मारते है और मैं भी उनको नही रोक पाती हूँ.। क्यूंकि मुझे सेक्स करने का बुरा चस्का लग चुका है.।कैसी लगी मेरा रेप कहानी, अच्छा लगी तो जरूर शेयर भी करे


जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

मुझे इस बात का कभी अंदाजा नहीं था कि मैं कभी अपने जेठ जी के साथ सेक्स करुँगी. वो तो मेरे पति से भी अच्छा चोदते हैं. चलिए आपको अपनी कहानी बताती हूँ. ये मेरी जिंदगी के बहुत यादगार कहानी है. मैं आशा करती हूँ कि आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी.
जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

मैं शहर में रहती हूँ इसलिए मैं बहुत बार अपने पड़ोस की औरतों के साथ बाजार करने और ब्यूटीपार्लर जाती रहती हूँ. जब भी मैं उनके साथ जाती थी तो वो औरतें मेरे जेठ जी के बारे में बहुत बातें करती थी. जेठ जी नाम अमन है लेकिन मैं उनका नाम नहीं ले सकती हूँ क्योंकि मैं उनको जेठ जी बुलाती हूँ.

उनका पर्सनालिटी थोड़ा अच्छा है इसलिए वो हमारे घर के एक प्रकार से मालिक की तरह रहते हैं. यहाँ तक कि मेरे पति भी उनसे पूछ कर ही कोई काम करते हैं और मैं भी उनसे पूछ कर ही घर से बाहर जाती हूँ.

जेठ जी के बारे में पड़ोस की औरतों से सुनकर मुझे ये लगता था कि उनका चक्कर मेरे जेठ जी के साथ चलता है. लेकिन उनमें से कोई भी खुलकर कुछ नहीं बताती थी.म मुझे भी अपने जेठ जी में रूचि आने लगी थी.

मेरी जेठानी कुछ दिन के लिए अपने माइके गयी हुई थी. उनकी माता जी की तबियत ठीक नहीं थी.

बाद में पता चला कि जेठानी जी कुछ दिन और अपने मायके रुकेंगी. मेरे पति तो सुबह ही ऑफिस के लिए निकल जाते थे.

मैं जेठ जी को खाना खिलाती थी. जेठ जी के कपड़े कभी कभी मुझे साफ़ करने पड़ते थे.

जेठ जी देर से खाना खाते थे तो मैं उनके रूम में खाना लेकर जाती थी.

उनकी बॉडी अच्छी है. कभी कभी जेठ जी को देख कर मेरे अन्दर कुछ कुछ होने लगता था..

और वो भी कभी कभी मुझे देखकर मुस्कुरा देते थे.

इसका अंदाजा मुझे था कि जेठजी के लंड का साइज़ मेरे पति से बड़ा होगा क्योंकि वो शरीर से ताकतवर हैं

जेठ जी की आँखें भी कुछ कहना चाहती थी क्योंकि जब भी मैं उनको देखती थी और वो मुझे देखते थे तो लगता था कि वो मेरे से कुछ कहना चाहते हैं लेकिन मुझसे खुलकर कह नहीं पाते थे.

मैं रात को साड़ी निकाल कर नाइटी में सोती हूँ और इस ड्रेस में जेठ जी के सामने नहीं जाती हूँ.

एक दिन जेठ जी थोड़ा ज्यादा काम करके आ गए थे और उनके सर में दर्द हो रहा था.

वो मुझे अपने कमरे में बुलाने लगे और मेरे से दवाई मांगने लगे.

मैं एक टेबलेट लेकर उनके रूम में गयी और उन्होंने मुझे नाइटी में देख लिया. उनको मेरी चूची का साइज़ पता चल गया होगा.

मुझे बाद में याद आया कि मैं नाइटी में हूँ तो जल्दी से अपने रूम में आ गयी.

उस दिन के बाद से जेठ से मुझे अलग निगाहों से देखने लगे.

जेठ जी और मैं एक दिन घर में अकेले थे और मेरे पति ऑफिस गए थे.

मैं कपड़े धो रही थी और पीछे से जेठ जी मुझे देख रहे थे; ये बात मुझे पता नहीं थी.

आज वो मजाकिया अंदाज में मेरे से बात करने लगे.

मैं कपड़े धोने में व्यस्त थी तो उनकी तरफ देख नहीं रही थी लेकिन उनकी बातें सुनकर हंस रही थी.

हम लोगों की बातें चलती रही.

और जेठ जी बोलने लगे- तुमको तो कपड़े धोते धोते थकान हो जाती होगी. तुम कहो तो मैं तुम्हारी मालिश कर दूँ?

ये बात सुनकर मुझे ये बात मालूम हो गया कि जेठ जी मुझे पसंद करते हैं.

मैं कपड़े धो रही थी तो जेठ जी पीछे से मेरी गांड देख रहे थे.

पति जी भी ऑफिस के काम में बहुत बिजी थे तो हम लोग सेक्स कम ही कर पाते थे.

मैं कपड़े धोने के बाद सुखाने के लिए छत में लेकर जाने लगी तो जेठ जी ने मेरे हाथ से बाल्टी ले ली और वो छत पर कपड़े सुखाने के लिए चले गए.

उनका हाथ और मेरा हाथ पहली बार एक दूसरे से मिला था. जब वो मेरे हाथ से बाल्टी जबरदस्ती ले रहे थे तो हम दोनों लोग का हाथ एक दूसरे से मिल रहे थे.

मैं रसोई में काम करने चली गयी और जेठ जी कपड़े सुखाने के बाद रसोई में आ गए और पीछे से मेरी पीठ को सहलाने लगे.

इससे पहले कि मैं कुछ उनसे कहती कि वो मेरे पीठ को और कंधों की मालिश करने लगे और कहने लगे- तुमने इतने सारे कपड़े धोये हैं, थक गई होगी.

मैं भी थक गई थी और उनके मालिश से मुझे बहुत आराम मिला.

तो मैं उनके बाँहों में आ गई थी और वो पीछे से मेरी मालिश कर रहे थे.

हम दोनों गर्म होने लगे थे. घर में कोई नहीं था इसलिए हम दोनों को किसी बात का डर नहीं था.

जेठ से मालिश करते हुए मुझे अपने कमरे में ले गए और मेरी चूची को दबाने लगे.

मैं भी मूड में आ गयी और सिसकारियाँ लेने लगी.

वो मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चूची को दबा रहे थे.

मैं भी उनके बालों को खींच रही थी.

उन्होंने मेरी साड़ी को निकालना शुरू किया.

मेरे मुंह से कामुक आवाजें निकल रही थी.

मेरी इन मादक आवाजों से जेठ जी भी मूड में आ रहे थे. वो मेरी साड़ी को निकाल रहे थे और साथ ही मेरी गांड को दबा रहे थे.

मुझे ये बात पता भी नहीं चली कि मैं जेठ जी के साथ ये सब कर रही हूँ. हम दोनों लोग का रिश्ता ही बदल गया था.

उन्होंने मेरी साड़ी को निकल दिया और उसके बाद उन्होंने मेरी ब्लाउज को निकाल दिया.

मैं उनके सामने ब्रा में आ गयी थी और उसके बाद जेठजी ने मेरा पेटीकोट भी निकाल दिया.

अब मैं जेठ जी के सामने ब्रा और पेंटी में थी.

मुझे नंगी देख कर उनका लंड उनकी पैन्ट में खड़ा होने लगा. मैं ब्रा और पेंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी.

जेठ जी के लंड को देखकर मेरी चूत में पानी आने लगा.

तभी उन्होंने मेरी ब्रा निकाल दिया और मेरी चूची को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे.

मेरे अन्दर इतना सेक्स आ गया था कि मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

वो मेरी चूची को दबाते हुए उसको अपने मुंह में लेकर चूसने लगे.

हम दोनों की वासना बढ़ती जा रही थी.

जेठ जी चूची को बहुत देर तक चूसने के बाद वो मुझे चुम्बन देने लगे.

हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में थे.

जेठ जी ने मुझे बताया कि उनकी पत्नी मायके गई हुई है इसलिए वो अपने लंड को हिलाकर शांत करते हैं.

इधर मेरे पति को अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती है मुझे चोदने के लिए … इसलिए मैं आज उनके बड़े भाई के सामने थी.

मुझे अपने जेठ जी का लंड बड़ा लग रहा था.

जेठ जी ने बातों बातों में मुझे बताया कि वो मुझे कई दिनों से चोदना चाहते थे.

हम दोनों लोग बात करते करते हंसने लगे और एक दूसरे को चुम्बन देने लगे.

जेठ जी ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी पीठ को चूमने लगे.

मैं सिसकारियाँ लेने लगी. मेरी कामुक आहें निकलने लगी.

फिर जेठ जी ने मेरी पेंटी भी निकाल दी और मैं उनके सामने एकदम नंगी हो गयी थी.

उन्होंने मेरी पीठ को चूमने के बाद मुझे सीधा लिटाया और मेरी बड़ी बड़ी चूची को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे.

मेरी चूत गीली हो गयी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था और मोटे लम्बे लंड का इंतजार कर रही थी.

उनके चूची मसलने और चूसने के अंदाज मैं बहुत गर्म हो गयी थी और सिसकारियाँ लेने लगी थी- आह उह्ह … आह उह्ह जेठ जी … आराम से करिए

जेठ जी भी कामुक हो गए थे और वो अपने कपड़े निकलने लगे.

उनका मोटा लम्बा लंड देख कर मैं डर गई लेकिन मुझे सेक्स करने की आदत थी इसलिए बाद में मुझे अच्छा लगने लगा.

जेठ जी के लंड को मैं हिलाने लगी और वो अपने मजे में सिसकारियाँ लेने लगे.

उनका लंड मैं जोर जोर से हिलाने लगी और उनके लंड से पानी निकलने लगा.

जेठ जी ने मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहा और मैं उनका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.

मेरे लंड चूसने के स्टाइल से उनको बहुत मजा आ रहा था.

अब जेठ जी मेरी चूत को चाटना चालू किये और मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

मैं सिसकारियाँ लेने लगी.

जेठ जी मेरी चूत को चाटने लगे और साथ में रुक रुक कर मेरी चूत को अपने दाँतों से हल्का हल्का काट रहे थे.

इससे मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था.

वे मेरी चूत में उंगली करने लगे जिससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा.

उनके लंड से लार टपक रहा था और मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

जेठ जी दुबारा से मुझे अपना लंड चूसने के कहे और मैं उनका लंड चूसने लगी और इस तरह से उनके लंड से पानी निकल गया.

उसके बाद मैं उनके लंड को हिलाने लगी और उनका लंड दोबारा पूरा खड़ा हो गया था.

जेठ जी को सेक्स का बहुत अनुभव था. वो अपने लंड को मेरी चूत पर रखकर रगड़ने लगे जिससे मुझे सिहरन होने लगी.

वो मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने के बाद मेरे होंठों को चूसने लगे.

जेठजी अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे और मेरी चूत में उनका लंड चला गया. जिससे मैं कामुक हो गयी और आहें भरने लगी.

वो मेरी चूत को अपने लंड से चोद रहे थे, मैं उनसे चुदवा रही थी और वो मेरी चूत में धक्का दे रहे थे.

जेठ जी कुछ देर के बाद अपना पूरा लंड मेरी चूत में डालकर चोदने लगे.

इस बार मुझे और भी मजा आ रहा था. उनका पूरा लंड मेरी चूत में जा रहा था जिससे मैं चिल्लाने लगी.

उनका लंड बहुत बड़ा था. मुझे चुदवाने में मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

मैं चिल्लाने लगी और वो चोदने लगे.

वो मेरे होंठ को चूसने लगे जिससे मैं शांत हो गयी और वो मेरी चूत को चोदने लगे.

उनकी चुदाई से मुझे बहुत अच्छा लगा.

हम दोनों का जिस्म पसीने से भीग गया था. वो बहुत ताकत से मुझे चोद रहे थे. उनका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर जा रहा था. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

उनका लंड मेरी चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और कभी कभी वो मेरी चूत में लंड डालकर मुझे चुम्बन दे रहे थे.

सेक्स में जेठजी का अनुभव बहुत अच्छा है.

इतनी अच्छी चुदाई से मैं आज बहुत खुश हो गयी.

घर में कोई नहीं था इसलिए खुलकर मैं और मेरे जेठ जी चुदाई कर रहे थे. हम दोनों लोग चुदाई करते हुए झड गए.

कुछ देर के बाद जेठ जी ने चुदाई का तरीका बदल दिया, वे मुझे पीछे से चोदने लगे.

वो मेरी कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी चूत में डालकर चोदने लगे.

कभी कभी वो अपने जीभ से मेरी चूत चाट ले रहे थे.

उनको कई तरीके से चुदाई करने आता था.

हम दोनों एक बार झड़ने के बाद बहुत देर तक आपस में चूमाचाटी करते रहे.

इस बार मैंने उनके ऊपर आकर भी मजे किये.

साथ में हम दोनों लोग बीच बीच में एक दूसरे के गुप्तांग भी सहला रहे थे.

इसके बाद जेठ जी का लंड खडा हो गया और उन्होंने मुझे दोबारा छोड़ना शुरू किया.

इतनी अच्छी चुदाई के बाद मैं दुबारा झड़ गयी.

हम दोनों सेक्स करने के बाद एक दूसरे की बांहों में ही सो गए.

थोड़ी देर बाद जेठ जी को सोता छोड़ मैंने अपने कपड़े पहन लिए और रसोई में काम करने चली गयी.

तब से मेरे पति के ऑफिस जाने के बाद दोपहर में हम दोनों जेठ बहू सेक्स करने लगे थे.

अब जेठानी जी आ गयी हैं तो हमारी चुदाई रुक गयी.

अब तो जब जेठ जी मुझे छोड़ेंगे तो आपको बताऊंगी.


 जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी

jiju ke papa ne meri choot ki seal tod di,जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी



देसी अंकल सेक्स स्टोरी मेरी चुदाई की है. मेरी दीदी के ससुर ने मुझे चोद कर मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी. ये सब कैसे हुआ? इस एडल्टस्टोरीज कहानी में पढ़ें.


हाय ऑल! मैं अंजलि प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं अभी 21 साल की हूँ. मैं अभी पिछले 2 महीने से ही एडल्टस्टोरीज की देसी सेक्स कहानी की दुनिया से जुड़ी हूँ.

एडल्ट स्टोरीज की सेक्स कहानियों को पढ़ कर मुझे मानो एक ऐसा पटल मिल गया था, जिधर मैं अपनी सारी बात खुल कर जाहिर कर सकती थी.

मुझे इसमें प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ कर बहुत मज़ा आता है.
चुदाई की बातें पढ़ कर मेरा मन चुदाई के लिए मचलने लगा था जबकि पहले मुझे चुदाई के नाम से ही बहुत डर लगता था.

अब मैं अपनी सहेलियों के बीच सेक्स की बातों को सुनकर काफ़ी मज़े लेती हूँ.

जब मैं कल एक सेक्स कहानी पढ़ रही थी, तो अपनी चुत रगड़ रही थी. उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था.

ये देसी अंकल सेक्स स्टोरी 2 साल पहले की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी. उस समय मैं अपने जीजू के घर गई थी क्योंकि उनके घर पर उस टाइम कोई नहीं रहने वाला था.
चूंकि मेरे जीजू के छोटे भाई की वाइफ को गांव वाले घर में बच्चा हुआ था, तो जीजू दीदी और बच्चे गांव जाने वाले थे.

जीजू के पापा जो लखनऊ में सरकारी नौकरी में थे, वो एक पुलिस स्टेशन में दारोगा थे, तो उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी, इस वजह से वो लखनऊ में ही रह गए थे.

मेरे पापा ने मुझसे कहा- तुम उनके घर लखनऊ चली जाओ, वहां उनके लिए खाना पीना और देखभाल कर लेना.
जीजू और उनकी फैमिली भी यही चाहती थी.

फिर मैं अगले दिन ट्रेन से निकल गई. चूंकि मैं भी अपनी बी.ए के पहले वर्ष के एग्जाम दे चुकी थी, तो बिल्कुल फ्री थी.

जब मैं वहां शाम को पहुंची, तो मेरी तबीयत खराब हो गई थी. ये जून का महीना था और ट्रेन में काफ़ी गर्मी थी, जिस वजह से मुझे कुछ असहज लगने लगा था.

लखनऊ पहुंचते पहुंचते मेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब हो गई थी. तो मेरे जीजू के पापा मुझे अपनी बाइक से डॉक्टर के पास ले गए.
उस दिन जीजू काफी व्यस्त थे और उनको दूसरे दिन सुबह दीदी को लेकर गांव निकलना था.

दोस्तो, अब इधर मैं अपने जीजू के पापा के बारे में कुछ बता देती हूँ. वो बहुत ही हैंडसम हैं. उनकी उम्र लगभग 55 साल की रही होगी. चूंकि वो एक दारोगा थे, तो उनकी बॉडी काफ़ी मजबूत थी और उनकी हाईट भी 6 फिट से कुछ ज्यादा ही थी.

मैं उनके साथ बाइक पर जा रही थी, तभी उन्होंने मुझे अपनी कमर पकड़ने को बोला.
मैंने सहज भाव से अंकल की कमर पकड़ ली.

उनकी कमर पकड़ते ही मुझे कुछ अजीब सा लगा और उनकी बॉडी की मर्दाना सुगंध से मैं मदहोश सी हो गई.

फिर डॉक्टर से चैकअप कराने के बाद मैं वापस घर आ गई.

रात में हम सब खाना खाकर सो गए. अगले दिन मेरे जीजू और दीदी की ट्रेन थी, तो वो लोग भी गांव निकल गए.

अब घर में मैं और मेरे जीजू के पापा ही अकेले रह गए थे. चूंकि मेरी दीदी की शादी के एक साल पहले ही मेरे जीजू की मम्मी की मृत्यु हो चुकी थी और जीजू के भाई और उसकी वाइफ पहले से ही गांव में थे.

दूसरे दिन मैं सुबह 9 बजे सोकर उठी और चाय आदि बनाई.

मैंने जीजू के पापा को चाय दी तो वो बोले- मैं आज शाम को खाना बाहर से ही ले आऊंगा, तो तुम घर पर खाना मत बनाना.
मैंने कहा- ठीक है अंकल.

मैं उनको अंकल जी बुलाती थी. मुझे उनसे बहुत शर्म आती थी, मैं उनके सामने ज्यादा कुछ नहीं बोलती थी.

अगले 7 दिन तक सब कुछ नॉर्मल चला. फिर एक दिन रात में नींद खुली, तो मैंने कुछ आवाज़ सुनी.

जब अपने रूम से बाहर आई, तो देखा कि ये आवाज़ तो अंकल जी के रूम से आ रही है.
तो मैं वहां गई.

उनके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, जब मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.

अंकल जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और एकदम नंगे होकर अपने लंड को हिला रहे थे. उनके एक हाथ में उनकी वाइफ की फोटो थी और फोटो देख कर वो लंड हिला रहे थे.

ये सीन देखकर मैं उधर से भाग कर अपने रूम में आ गई.
उस रात में अंकल जी के बारे में ही सोच रही थी. मेरी सांसें तेज तेज चल रही थीं क्योंकि मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था.

उस दिन से मैं अंकल जी के बारे में ना चाहते हुए भी सोचने लगी.
मैं अपने मन में मानती थी कि ये रिश्ता सही नहीं होगा. लेकिन मेरा मन उनका मोटा लंड देख कर मचल उठा था और मान ही नहीं रहा था.

मुझे उनके बारे में सोच कर बहुत मज़ा आ रहा था. चूंकि मैं अभी तक कुंवारी कमसिन कली थी, तो मुझे काफ़ी उत्तेजना हो रही थी.

इस तरह दस दिन बीत गए. अब मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अंकल जी को पटाकर उनसे अपनी प्यास बुझाऊंगी … आख़िर उन्हें भी एक चुत की ज़रूरत थी.
उनकी वाइफ की डेथ हुए लगभग 6 साल हो चुके थे.

फिर मैं हर दिन कोशिश करने लगी कि अंकल जी के सामने कामुक बन कर रहूँ.
जब वो घर आते तो मैं उनको देख कर स्माइल करती और उनके साथ बाहर घूमने को कहती.

वो भी मुझे अपने साथ बाइक पर बिठा कर ले जाते और मैं भी उनकी कमर पकड कर उनके मर्दाना जिस्म को स्पर्श करके अपने अन्दर की आग को भड़काती रहती.
उधर अंकल जी भी मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़ते हुए महसूस करके मुझे प्यार से देखने लगे थे.

एक रात जब वो घर आए, तो बोले- मैं बहुत थक गया हूँ. जल्दी से नहा लेता हूँ, फिर कुछ देर आराम करूंगा.
मैं हां करके चुप हो गई.

अंकल जी नहाने के बाद अपने रूम में चले गए.

मैं तेल की बोतल लेकर जानबूझ कर उनके शरीर कि मालिश करने चली गई.

वो मुझसे बोले- क्या हुआ?
मैंने कहा- आप थक गए हो, मैं आपकी मालिश कर देती हूँ. आपको आराम मिल जाएगा.

वो मना कर रहे थे.
लेकिन मैंने ज़िद की तो वो मान गए.

वो पेट के बल लेट गए और मैं उनकी पीठ पर तेल टपका कर अपने नर्म मुलायम हाथों से मालिश करने लगी.

उनकी बॉडी एकदम पहलवानों के जैसी थी. मैं उनके जिस्म की तपिश से बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

मैंने अंकल के पूरे शरीर पर अपने हाथों से मालिश की.

अब मैं उनकी टांगों पर पहुंच गई थी. मैंने महसूस किया कि वो अंडरवियर नहीं पहने हुए थे चूंकि अभी नहा कर आए थे.
और उनके मुँह से शराब की महक आ रही थी. अंकल जी ने शराब पी रखी थी.

मैं मुस्कुरा उठी.

मैंने जानबूझ कर अपना एक हाथ उनकी तौलिया के अन्दर कर दिया और उनकी गांड पर मालिश करने लगी. अंकल जी ने भी अपने पैर फैला दिए.

कुछ देर के बाद मेरी चुत बिल्कुल गीली हो गई और ना जाने मुझे क्या हुआ, मैं वहां से जाने लगी.

तभी अंकल जी उठे और उन्होंने मेरे एक हाथ को पकड़ लिया. जब मैं उनकी तरफ मुड़ी, तो वो मुझे अपनी गोद में खींच कर किस करने लगे.
मुझे अजीब सा लगा और मैं उन्हें मना करने लगी, लेकिन वो नहीं माने.

हालांकि मैं खुद भी यही चाहती थी. मैंने अपना विरोध बंद कर दिया और आंख बंद करके उनकी गतिविधियों को महसूस करने लगी.

अंकल जी ने मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने बेड पर लिटा दिया और मुझे किस करने लगे. उनके मुँह से शराब की तेज स्मेल आ रही थी, वो नशे में थे.
आज मुझे ये महक काफी मस्त लग रही थी.

फिर वो अपने एक हाथ से मेरी चुत को दबाने लगे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी … लेकिन चुदने का मन भी कर रहा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया.

फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और ब्रा को अलग कर दिया. अंकल जी मेरे मम्मे चूसने लगे.
वो जोर जोर से मेरे दूध चूस रहे थे, इससे मुझे मीठा मीठा दर्द होने लगा. मुझे बेहद मज़ा भी आ रहा था.

इसके कुछ देर बाद अंकल जी ने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी कमसिन चुत देख कर बोले- तुम अभी वर्जिन हो?
मैं बोली- जी.

तो वो बोले- आज मैं तुम्हारी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा.
मैं शर्मा गई और अपना मुँह उनके सीने में छिपा कर उनसे चिपक गई.

फिर अंकल जी ने अपनी तौलिया हटा दिया और पूरे नंगे हो गए.
मैं उनका लम्बा और मोटा खड़ा लंड देख कर सहम गई लेकिन चूत में चुनचुनी हो रही थी कि बस किसी तरह से इस लम्बे लौड़े से चुद लूं.

अंकल जी मेरी चुत चाटने लगे.
अपनी कुंवारी चुत पर एक मर्द की जीभ का अहसास पाते ही मेरे पूरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया था.

मेरे शरीर में सिहरन होने लगी तो अंकल जी को मजा आने लगा और वो पूरे मनोयोग से मेरी कमसिन चुत का नमकीन पानी चाटते हुए चुत के अन्दर तक जीभ देने लगे.

मैंने अंकल जी से पूछा- मुझे सनसनी सी क्यों हो रही है?
तो वो बोले कि ये तुम्हारा पहली बार है … इसीलिए तुम मस्त हो रही हो.

कोई पांच मिनट तक की चुत चटाई में मैं पूरी तरह से पागल हो गई थी.

अंकल जी अब समझ गए थे कि लौंडिया गर्मा गई है.
उन्होंने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.

अंकल जी ने अपने लंड को मेरी चुत कि फांकों में रखा और रगड़ने लगे.
मुझे मर्द के लंड का अहसास अपनी चुत पर हुआ तो मैं अपनी गांड उठाने लगी.

अंकल जी ने लंड को चुत पर दबाया तो लंड चुत के अन्दर नहीं गया. क्योंकि मेरी चुत का छेद बिल्कुल छोटा सा था और अंकल जी लंड गधे जैसा हब्शी लंड था.

फिर उन्होंने अपने लंड पर एक क्रीम लगाई और चुत में डालने लगे.

मैं बोली- अंकल कुछ प्राब्लम तो नहीं हो जाएगी?
अंकल जी बोले- कुछ नहीं होगा. बस शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. फिर मज़ा ही मज़ा आएगा.

ये कह कर उन्होंने अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया.
अंकल जी का लंड अभी थोड़ा सा ही चुत के अन्दर गया था कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं रोने लगी.

वो रुक गए और मुझे किस करने लगे.
जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो फिर अंकल जी ने एक बार अपनी गांड हिलाई और झटका दे दिया.

इस बार अंकल जी का आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया था. उनके पूरे शरीर का वजन मेरे ऊपर आ गया था.

मैं उनकी बॉडी से दब चुकी थी उनकी जांघें भी काफ़ी मजबूत थीं. वो एक पहलवान मर्द थे.

थोड़ी देर तक अंकल जी मेरे ऊपर चढ़े रहे.
फिर उन्होंने मुझसे पूछा- अब दर्द कुछ कम हुआ?
मैं मरी हुई कुतिया की आवाज में बोली- जी.

उन्होंने फिर से अपनी गांड हिलाई और ताकत से पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
मुझे वो धीरे धीरे चोदने लगे.

कुछ धक्कों के बाद मुझे भी चुदने में मज़ा आने लगा.
अंकल जी समझ गए थे कि अब मुझे मज़ा आ रहा है तो वो अपनी गांड जोर जोर से हिलाने लगे और मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

सच में मुझे मज़ा तो बहुत आ रहा था लेकिन शर्म भी आ रही थी. क्योंकि मैं एक 55 साल के मर्द से चुद रही थी, वो भी मेरे जीजू के पापा से.

करीब दस मिनट तक मुझे चोदने के बाद अंकल जी ने अपना लंड मेरी चुत से निकाल लिया.

मैं भी उठी और देखी कि मेरी चुत से खून निकल रहा था. मैं खून देख कर रोने लगी.

तो उन्होंने मुझे समझाया कि ये सामान्य सी बात है कुंवारी लड़कियों की चुत की सील टूटने के कारण ऐसा होता है. अब तुम एक पूर्ण औरत बन चुकी हो.
मैं शांत हो गई.

फिर उन्होंने मेरी चुत को साफ़ किया. उसके बाद मुझे पेशाब लगी, तो मैं उठ कर जाने लगी.

वो बोले- रूको मैं भी चलता हूँ.

अंकल जी मुझे अपनी गोद में ले गए और उन्होंने भी मेरे सामने पेशाब की. मैंने भी उनके लंड से मूत की धार देखी और खुद भी मूत कर खुद को साफ़ किया.

उन्होंने चाय बनाई और हम दोनों ने चाय पी.

मुझे चलने में बहुत प्राब्लम हो रही थी तो चाय पीने के बाद वो मेरे बगल में लेटकर मुझे किस करने लगे.

कुछ देर बाद हम दोनों गर्म हो गए तो अंकल जी मुझे फिर से चोदा.

उस रात हम दोनों ने तीन बार चुदाई का मजा लिया. हर बार अलग अलग स्टाइल में चुदाई हुई. कभी अंकल जी मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदते तो कभी कभी गोद में लेकर, कभी डॉगी स्टाइल में चोदने लगते.

पूरी रात मैं उनके कमरे में ही नंगी चुदती रही. अंकल जी भी मुझे अपनी बांहों में लेकर सो गए.

अगले दिन वो ड्यूटी भी नहीं गए. हमने पूरे दिन सेक्स किया.

मैं लखनऊ में 24 दिन तक रही और हमने इस दौरान कई बार सेक्स किया. अंकल जी ने मुझे शराब पिला कर भी खूब चोदा. मेरी गांड भी मारी.

इसके बाद जब भी मैं वहां जाती हूँ … तो हम दोनों मौका मिलते ही चुदाई कर लेते थे.

सच में दोस्तो, मुझे अंकल जी से चुदने में बहुत मज़ा आने लगा था, इसलिए मैंने आज तक किसी लड़के को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया.
मैं उनसे सच में बहुत प्यार करती हूँ, अभी मैं उनसे रोज फोन पर बात करती हूँ.

आज तक मेरी फैमिली और उनकी फैमिली में किसी को पता नहीं है क्योंकि हमारा ऐसा रिश्ता है कि किसी को शक भी नहीं होता है. लव यू अंकल जी.

पूरी रात बिस्तर में बहू की चुदाई

Sasur bahu ki chudai,पूरी रात बिस्तर में बहू की चुदाई


ससुर जी- चल आज तेरा सारी स्ट्रिपिंग शूट लेता हूँ..!

मैं घबरा गई, मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं… बाबूजी?

ससुर जी- कुछ नहीं इसमे तू पहले साड़ी में होगी और फिर धीरे-धीरे स्ट्रिपिंग करनी होगी, मैं तेरा शूट लेता रहूँगा और आखिरी में लिंगरी में शूट करूँगा!

मैंने एकदम सुन्न रह गई- मैं ये सब कुछ नहीं करूँगी बाबूजी, मैं आपकी बहू हूँ… आपके सामने ये सब कैसे कर सकती हूँ?

मैंने एकदम गुस्से में कहा और उनके कमरे से जाने लगी।

तो उन्होंने मेरा साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और खींच कर अपने बिस्तर पर गिरा दिया। उन्होंने जल्दी से कमरा अन्दर से बन्द कर दिया।

ससुर जी ने कहा- बहू.. तू भी तो प्यासी रहती है और मैं भी… क्यों ना हम दोनों एक-दूसरे की मदद करें..!

और यह कह कर उन्होंने मेरी साड़ी खींचनी शुरु कर दी, फ़िर मेरे पेटिकोट का नाड़ा खींच दिया।

मैं भी प्यासी थी तो मैंने भी अपने ससुर का कोई खास विरोध नही किया बस थोड़ा बहुत दिखावा किया।

तभी मेरे ससुर ने मेरे ब्लाऊज के हुक खोल कर उसे उतार दिया।

और फ़िर ब्रा और पैन्टी को भी मुझसे अलग कर दिया।

मैं अब अपने ससुर के सामने एकदम नंगी थी। मैंने तो घबराहट के मारे आँखें बंद कर लीं और रोने का ड्रामा करने लगी।

मेरे ससुर ने मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। वो कभी मेरी बाईं चूची को तो कभी दाईं चूची को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे। वो एक ताकतवर मर्द थे

और तभी मेरे नीचे कुछ चुभने लगा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका लंड बहुत बड़ा है और वो उनके पजामे में एकदम तम्बू की तरह तन गया है।

ससुर जी बोले- वाह बहू… तू तो चूत एकदम साफ़ रखती है!

उन्होंने एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मैं दर्द से चीख पड़ी क्योंकि मैंने तो अभी तक अताउल्ला के साथ भी अच्छे से चुदाई नहीं की थी, तो मेरी योनि एकदम तंग थी। फिर उन्होंने अपनी ऊँगली को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं दर्द के मारे तड़पने लगी।

उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। मैंने अभी भी आँखें बंद कर रखी थीं और अपने होंठ भी एकदम बंद कर रखे थे।

ससुर जी ने मेरी चूचियों को और जोर से मसलना शुरू कर दिया और मैं चिल्लाने लगी।

ससुर जी का कमरा एकदम अन्दर है इसलिए बाहर तक मेरी आवाज़ शायद नहीं जा रही थी। वो अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करते रहे और मैं कहती रही- बाबूजी प्लीज़ ऐसा मत करो… मैं आपकी बहू हूँ..!’

ससुर जी- कौसर बेटा.. तू तो बहुत ही कामुक है… तेरी ये जवानी छोड़ कर अताउल्ला बेकार में बाहर रहता है… बेटा प्लीज़ मेरे साथ सहयोग कर ले… मैं तुझे पूरा मज़ा दूँगा…!

उनकी ये सब बातें सुनना मुझे अच्छा लग रहा था, मेरे शरीर में एक सनसनी होने लगी और अब दर्द भी कम हो गया था। मेरी चिल्लाना अब सिसकारियों में बदल गया और मुझे अब उनकी ऊँगली अन्दर-बाहर करना अच्छा लग रहा था।

तभी उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और मुझे अपनी चूत पर कुछ गरम-गरम सा लगा!

या अल्लाह.. ये ससुर जी क्या कर रहे थे…! वो मेरी चूत में अपना लंड डालने वाले थे।

मैं छटपटाने लगी और तभी उन्होंने एक हल्का धक्का दिया और उनका करीब 2½ इंच लंड मेरी चूत में घुस चुका था, मेरी जान निकलने लगी।

Sasur bahu ki chudai


उनका लौड़ा अताउल्ला से भी मोटा था। करीब 2½ इंच मोटा और तभी उन्होंने एक और धक्का दिया और मुझे लगा कि किसी ने गरम लोहे की छड़ मेरी चूत में पेल दी हो।

करीब 7 इंच लंबा और 2½ इंच मोटा लंड मेरी चूत में था और अब मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था।

उन्होंने अपना एक हाथ मेरे होंठों पर रख कर मुझे चीखने से रोका हुआ था।

वो अब हल्के धक्के दे रहे थे और मेरी चूचियों को मसल रहे थे और उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए थे। मैं एकदम बेसुध सी थी। अब तो मुझसे चीख भी नहीं निकल रही थी।

उन्होंने हल्के-हल्के झटके मारना शुरू किए। मैंने उनके हर झटके के साथ मचल उठती थी। अब मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था, अब मुझे उनका धक्के देना अच्छा लगने लगा और उनके हर धक्के का अब मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल कर साथ दे रही थी।

अब ससुर जी ने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मेरी जान से निकलने लगी, जैसे ही वो पूरा लंड मेरे अन्दर करते मुझे लगता कि उनका लंड मेरा पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा, पर मुझे भी अब बहुत मज़ा आ रहा था।

शादी के अभी कुछ महीने ही बीते थे और मैंने ऐसा सम्भोग अताउल्ला के साथ भी नहीं किया था।

अताउल्ला ने हमेशा हल्के-हल्के ही सब कुछ किया था।

पर आज तो ससुर जी ने मुझे बुरी तरह मसल दिया था। मेरी चूत ने भी अब पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, मैं झड़ने वाली थी।

मैंने आँखें अब भी नहीं खोली थीं, पर मैंने अपने ससुर जी को अपने से एकदम चिपका लिया और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं- उह्ह ओह्ह… बाबूजी प्लीज़… नहीं..!

मैं अब भी उन्हें मना कर रही थी, पर उन्हें अपने ऊपर भी खींच रही थी और एकदम से मेरी चूत से पानी की धार निकल पड़ी और मैं एकदम से निढाल हो गई।

ससुर जी- बहुत अच्छा कौसर बेटा, मैं भी अब आने वाला हूँ।

उन्होंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और एकदम से मेरे ऊपर गिर पड़े। उनका गरम-गरम पानी मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था।

मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ, उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मेरे ऊपर एक चादर पड़ी थी और मैं अभी भी ससुर जी के बिस्तर पर ही थी।

घड़ी में देखा तो करीब 2 बज रहे थे।

मैं उठी तो मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े ढूँढने शुरू किए तो पाया कि सिर्फ़ साड़ी को छोड़ कर सब कपड़े फटे हुए थे।

ससुर जी ने उन्हें बुरी तरह फाड़ दिया था। मैंने सब कपड़े समेटे और फ़ौरन अपने कमरे में आ गई। मुझे नहीं पता कि ससुर जी उस समय कहाँ थे। मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।

अब मैं सोचने लगी कि आज मेरे साथ क्या हो गया। अब मुझे खुद पर ग्लानि आ रही थी कि मैंने अपनी अन्तर्वासना के वशीभूत होकर अपने ससुर को यह क्या करने दिया। फ़िर मैंने सोचा कि मैं नासमझ हूँ तो मेरे ससुर तो समझदार हैं, उन्होंने यह हरकत क्यों की, अगर वो पहल ना करते तो मैं इस पचड़े में ना पड़ती। मुझे लगा कि इसके गुनाहगार मेरे ससुर ही हैं, मैं नहीं, उन्हें सजा मिलनी ही चहिये।

मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर मैं रोने लगी। काफ़ी देर तक रोती रही और मैंने मन बना लिया कि आज इस आदमी को सबक सिखाऊँगी और अताउल्ला को सारी बात बता कर पुलिस को फोन करूँगी। मैंने अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।

मैंने जल्दी से एक सलवार-सूट अलमारी से निकाल कर पहना और सोचा की शायद ड्राइंग-रूम में फोन होगा। मैं एकदम गुस्से में थी और ड्राइंग-रूम में फोन देखने लगी तो देखा ससुर जी अपने कंप्यूटर पर बैठे है और मेरी नग्न-चित्र कंप्यूटर पर चला रहे हैं। मैं एकदम सुन्न रह गई।

मेरे ससुर जी ने मेरी नग्न चित्र जब मैं बेहोशी की हालत में थी, तब ले लिए थे। मैं भाग कर फिर अपने कमरे में आ गई और अंदर से बन्द कर लिया।

मुझे नहीं पता था मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है। मैं अपनी किस्मत पर रो रही थी कि मैं कहाँ फंस गई। मेरा फोन भी मेरे पास नहीं था, मैं अताउल्ला को तुरंत कॉल करके सब बताना चाहती थी, पर मेरे पास फोन नहीं था।

मैं फिर अपनी किस्मत पर रोने लगी, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बेटा.. आज क्या भूखा रखेगी, दोपहर का खाना तो लगा दे..!’

वो मेरे कमरे के एकदम पास थे, मैंने कहा- चले जाओ यहाँ से, मैं अताउल्ला को अभी कॉल करती हूँ..!

ससुर जी- बहू सोच कर कॉल करियो, जो तू अताउल्ला से कहेगी तो मैं भी कह सकता हूँ कि मैंने तुझे पराए मर्द के साथ पकड़ लिया, इसलिए तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है और मेरे पास तो तेरी फोटो भी हैं। वो मैं अगर इंटरनेट पर डाल दूँ। तो तेरी दोनों बहनों की शादी तो होने से रही बेटा…!

‘आप यहाँ से चले जाओ… मुझे आपसे बात नहीं करनी..!’ मैं चिल्लाई और फिर फूट-फूट कर रोने लगी।

मैं अपने कमरे में फर्श पर ही बैठ गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और ससुर जी ने जो अभी कहा उसे सोचने लगी।

क्या अताउल्ला मेरी बात मानेंगे..या अपने पिता की…! मुझे तो अभी वो सही से जानते भी नहीं..! क्या वो मुझ पर यक़ीन करेंगे कि उनके बाप ने मेरे साथ ऐसा किया?

मेरा सर, दर्द के मारे फटने लगा।

और अगर क्या मैं पुलिस मैं जाऊँ तो क्या ससुर जी सच में मेरे नग्न चित्र इंटरनेट पर डाल देंगे?

मैं अपनी बहनों को बहुत प्यार करती थी, क्या इससे मेरी बहनों पर फर्क पड़ेगा, मेरी आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा, मैं अभी भी फर्श पर बैठी थी और मुझे बहुत तेज़ प्यास लग रही थी, मेरा गला सूख रहा था।

मैं उठी और अपने कमरे से रसोई में चली गई। वहाँ जाकर पानी पिया, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बहू, बहुत भूख लगी है, तुझे जो करना है कर लियो.. पर प्लीज़ खाना तो खिला दे… देख तीन बजने वाले हैं और मैंने तुझसे जो कहा है पहले उस पर भी सोच-विचार कर लेना बेटा…!

मेरी आँखों से फिर आँसू आ गए और मैं वापिस रसोई में आ गई।

फ्रिज खोला उसमें सब्ज़ी बनी पड़ी थी, मैंने वो गर्म की, 4 रोटी बनाई और ड्राइंग कमरे में ससुर जी को देने आ गई।

मैंने देखा वो सोफे पर सो रहे थे, मैंने ज़ोर से टेबल पर थाली रख दी और वहाँ से जाने लगी।

ससुर जी की आँख मेरी थाली रखने से खुल गई, वो बोले- बेटा, तू नहा कर ठीक से कपड़े पहन ले, देख ऐसे अच्छा नहीं लगता और कुछ खा भी लेना..!

और उन्होंने खाना शुरू कर दिया।

मैंने अपने आप को देखा तो मैंने जो सलवार-सूट जल्दी में पहना था, उसके ऊपर मैंने चुन्नी भी नहीं ली थी और मेरे सारे बाल बिखरे पड़े थे।

मैं जल्दी से गुसलखाने में चली गई और फिर नहाने लगी।

मैंने अपने जिस्म को देखा तो जगह-जगह से लाल हो रहा था। ससुर जी ने मेरी चूचियाँ इतनी बुरी तरह मसली थी कि उनमें अभी तक दर्द हो रहा था और मुझे अपनी चूत में भी दर्द महसूस हो रहा था।

मैं एकदम गोरी थी, इसलिए ससुर जी ने जहाँ-जहाँ मसला था, वहाँ लाल निशान पड़ गए थे। जिस्म पर पानी पड़ना अच्छा लग रहा था। मैं 20 मिनट तक नहाती रही और फिर देखा तो मैं अपने कपड़े और तौलिया भी लाना भूल गई थी।

मैं जल्दी से नंगी ही भाग कर अपने कमरे में आ गई और अन्दर से बन्द कर लिया और फिर जल्दी से एक दूसरी साड़ी निकाली, नई ब्रा और पैन्टी निकाली, जो मैंने शादी के लिए ही खरीदी थी क्योंकि एक सैट तो बाबूजी ने फाड़ दिया था। दूसरी साड़ी पहनी और फिर अपने कमरे में ही लेट गई।

मुझे घर की याद आने लगी और फिर रोना आ गया। मुझे पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई और जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे।

मुझे रोज अताउल्ला सात बजे शाम को फोन करते हैं, मैं यही सोच कर कि जब फोन आएगा तो उन्हें सब बता दूँगी, इंतज़ार करने लगी, पर तभी मुझे याद आया कि मेरा फोन तो ड्राइंग कमरे में है, मैं उनका फोन कैसे उठा पाऊँगी।

मैंने अपना दरवाजा खोला और ड्राइंग कमरे में आ गई। उधर देखा तो ससुर जी बैठे थे, अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रहे थे।

ससुर जी- बहू चाय तो बना दे!

वो तो ऐसे बात कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और फिर बोले- ले बेटा, तेरा फोन यहीं पड़ा था,

अताउल्ला का फोन आने वाला होगा… इसे रख ले अपने पास!

उन्होंने मुझे मेरा फोन दे दिया। मैंने जल्दी से अपना फोन ले लिया और रसोई में आ गई।

मेरा मन कर रहा था कि तुरंत अताउल्ला को फोन करके उनके बाप की करतूत बता दूँ, पर सोचने लगी क्या वो मेरी बात पर यकीन करेंगे और फिर ससुर जी की धमकी भी याद आने लगी।

ये सोचते-सोचते मैंने उनके लिए चाय बना दी और चाय लेकर ड्राइंग कमरे में आ गई और टेबल पर रख कर जाने लगी।

तो ससुर जी बोले- बेटा दो मिनट बैठ जा, मुझे कुछ बात करनी है।

मैंने कहा- मुझे आपसे कुछ बात नहीं करनी…

और अपना मुँह फेर लिया।

ससुर जी- तू प्यार की ज़ुबान नहीं समझेगी, तो फिर मुझे दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा..!

उनकी आवाज़ में काफ़ी गुस्सा था।

मैं सिहर गई और मैं वहीं सोफे पर बैठ गई, बोली- क्या बात करनी है.. जल्दी करिए..

मैंने आँखें अभी भी नीचे की हुई थीं।

ससुर जी- बेटा.. मुझे माफ़ कर दे, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ.. जिस दिन से तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया है, उस दिन से उसके नसीब की दाद देता हूँ कि उसे तेरी जैसी सुंदर बीवी मिली है। पर तू ज़रा सोच उसे तेरी कितनी कदर है?

ससुर जी- हर समय काम-काम करता रहता है, तुझे क्या लगता है, उसकी कम्पनी में लड़कियों की कमी है? वो रोज अपनी सेटिंग को चोदता होगा लाहौर में.. मैं उसे बचपन से जानता हूँ!

मेरी तो शर्म के मारे आँख बंद हो गई कि ससुर जी मेरे सामने कैसे लफ्ज़ बोल रहे हैं.. वो ऐसे तो कभी नहीं बोलते थे।

में चिल्ला कर बोली- तो फिर जब आपको पता था, तो फिर उनकी शादी क्यों की मेरे साथ? उनके साथ ही कर देते जो उनकी सेटिंग हैं।

ससुर जी- तू मेरी पसंद है बहू, अताउल्ला की नहीं.. और तू उसे सब कुछ बता भी दे तो भी वो तेरी बात नहीं मानेगा और वो लाहौर में खुश है, यहाँ कभी-कभी आएगा तेरे साथ एक-दो रात बिताएगा और फिर लाहौर चला जाएगा.. उसे मॉडर्न लड़कियों का चस्का है, मैंने उसे फोन पर बात करते सुना था। अब तक अपनी कंपनी की करीब 8-10 लड़कियाँ पटा कर चोद चुका है वो..

मैंने कहा- बस करिए.. आप ये सब मुझे क्यों बता रहे हैं… और मेरे सामने ऐसी गंदी बातें ना करिए प्लीज़..! मुझ को आप से बात नहीं करनी…

और मैं रोने लगी।

ससुर जी- बहू.. रो मत, मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ और तुझे कोई पेरशानी नहीं होगी यहाँ पर… तू यहाँ खुश रह और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो तुझे जो मैंने कहा है, मैं वो सब कर दूँगा और अताउल्ला से मैं खुद बात करूँगा और वो तुझे तलाक दे देगा, ना तू कहीं की रहेगी और ना तेरी दोनों कुंवारी बहनें..! बस इन सब चीजों का अंजाम दिमाग़ से सोच ले और मुझे कुछ नहीं कहना…

तभी मेरा फोन बज उठा, अताउल्ला का कॉल था। मैं अपने कमरे में भाग आई, काफ़ी घंटियाँ बज गईं, तब मैंने फोन उठाया।

अताउल्ला- कहाँ हो आप, कब से कॉल कर रहा हूँ!

मैंने कहा- कुछ नहीं… वो मैं रसोई में थी..!

और अपने आँसू पोंछने लगी।

‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।

अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?

मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।

मैंने कहा- हाँ.. सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!

मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।

अताउल्ला- ठीक है.. अपना और अब्बू दोनों का ख़याल रखना… अल्ला हाफ़िज़..!

यह कह कर उन्होंने फोन काट दिया और मैं फिर अकेली रह गई। घड़ी में समय देखा तो शाम के 7-30 बज रहे थे। मैं जल्दी से फोन रख कर रसोई में आ गई।

मैं वो सब भूल जाना चाहती थी और रसोई में काम करने लगी। खाना बनाते-बनाते एक घंटा गुजर गया, ससुर जी का खाना ड्राइंग कमरे में लगाया और अपने कमरे में जाने लगी।

तभी ससुर जी बोले- बहू, तूने कुछ खाया?

मैंने गुस्से में कहा- मुझे भूख नहीं है, आप को कुछ चाहिए हो तो मुझे आवाज़ दे देना, मैं अपने कमरे में जा रही हूँ!

यह कह कर मैं अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बन्द करके लेट गई, उसके बाद पता ही नहीं चला कब आँख लग गई।

जब सुबह का अलार्म बजा तब आँख खुली, सुबह के 5 बजे थे।

मुझे पता था ससुर जी को स्कूल जाना होगा, उनका लंच लगाना था। तो मैं नहा-धो कर जल्दी से रसोई में गई और उनका ब्रेकफास्ट और लंच जल्दी से तैयार किया।

मुझे उनकी तिलावत करने की आवाज़ आ रही थी, मैंने मन में कहा कि कैसा ढोंगी इंसान है, यह तो उस ऊपर वाले से भी नहीं डर रहा।

फिर थोड़ी देर में मैंने उनका नाश्ता ड्राइंग रूम में लगा दिया। आज मैंने रोज की तरह साड़ी ही पहनी थी।

वैसे तो मैं रोज ससुर जी को सलाम करती थी, पर आज चुपचाप खड़ी रही।

ससुर जी- बहू… मुझे पता है तूने कल से कुछ नहीं खाया है.. चल बैठ मेरे साथ और कुछ खा ले!

मैंने कहा- मुझे अभी भूख नहीं है।

ससुर जी बोले- तू मेरे साथ खाती है या मैं फिर आज छुट्टी करूँ स्कूल की.. बोल?

कल छुट्टी करने पर मेरा क्या हाल हुआ था, वो सोच कर मैं फिर काँप गई और चुपचाप सोफे पर बैठ गई।

मैं नज़रें झुका कर बैठी थी और धीरे-धीरे मैंने ससुर जी के साथ नाश्ता कर लिया।

उन्होंने अपना दूध का कप भी मेरे आगे कर दिया और कहा- चलो पियो इसे!

वो मुझे ऐसे नाश्ता करा रहे थे, जैसे कोई बच्चे को कराता है।

ससुर जी बोले- बहू.. इस घर में हम दोनों अकले हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का ख़याल रखना चाहिए… खुश रह बेटा और तू साड़ी में सिर पर पल्लू डाल कर बड़ी सुंदर लगती है… चल अब मैं स्कूल जा रहा हूँ.. तू दरवाज़ा बंद कर ले..!

वो ऐसा कह कर चले गए। मैंने फिर दरवाज़ा बंद कर लिया और सोचने लगी कि ससुर जी आज इतने अच्छे से बात कर के गए हैं और कल उन्होंने मेरी इज़्ज़त तार-तार कर दी थी, वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।

फिर मैं अपने घर के काम में लग गई। दोपहर के 2-00 बज चुके थे, आम तौर पर ससुर जी अब तक स्कूल से आ जाते थे, पर वो आज नहीं आए थे। मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ, वो आज कहाँ चले गए।

करीब तीन बजे दरवाजे की घंटी बजी, तो मैंने दरवाज़ा खोला।

ससुर जी अन्दर आ गए थे, मैंने कहा- बाबूजी आप फ्रेश हो लो, मैं आपका खाना लगा देती हूँ।

तो ससुर जी बोले- बेटा ये ले!

मैंने देखा तो उनके हाथ में एक पोली बैग था, उसमें कुछ कपड़े थे।

मैंने कहा- यह क्या है?

ससुर जी- बहू.. कल तेरे कपड़े फट गए थे ना मुझसे… मुझे मुआफ़ करना… मैं नए लाया हूँ। आज शाम को तू इन्हीं को पहन लेना..!

और वो फ्रेश होने चले गए।

मैंने वो पोली बैग अपने कमरे में रख दिया और उनका खाना लगाया, खुद भी खाया और फिर अपने कमरे में थोड़ा आराम करने आ गई।

अब मेरा ध्यान उस पोली बैग पर गया, जो ससुर जी ने मुझे दिया था।

मैंने सोचा देखूँ इसमें वो क्या लाए हैं। बैग खोला तो मैं एकदम दंग रह गई, उसमें एक मशहूर ब्रांड की बहुत ही महंगी सुनहरे रंग की ब्रा थी और साथ में एक सुनहरे रंग की थोंग (पैन्टी) थी। पैन्टी तो बिल्कुल किसी डोरी की तरह थी। उसमें पीछे की तरफ की डोरी पर कुछ चमकदार नग लगे हुए थे।

और साथ में एक नाईटी भी थी, जो काले रंग की एकदम पारदर्शी थी। उसमें बहुत ही कम कपड़ा था, वो एकदम लेस वाली नाईटी थी। उसे कोई पहन ले तो शायद ही उसमें लड़की का कोई अंग छुप सके।

आज तक अताउल्ला ने भी मुझे ऐसी कोई ड्रेस नहीं दी थी। ऐसी ड्रेस तो मैंने सिर्फ़ फिल्मों में ही देखी थी। तो ससुर जी को आज आने में इसलिए देरी हुई थी।

मुझे यकीन नहीं हुआ कि वो मेरे लिए ऐसी ड्रेस भी खरीद सकते हैं।

मैंने फ़ौरन उस पोली बैग को बंद कर के बेड पर एक तरफ रख दिया और फिर मैं लेट गई और मेरी आँख लग गई।

जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे। मैंने जल्दी से उठ कर चाय बनाई और ससुर जी को देने के लिए ड्राइंग रूम में आ गई।

वो ड्राइंग रूम में अख़बार पढ़ रहे थे।

मैंने चाय मेज पर रख दी और जाने लगी।

ससुर जी- बहू… तुझे कहा था मैंने कि शाम को वो कपड़े पहन लेना, जो मैं आज लाया था और तूने अभी तक साड़ी पहन रखी है। मुझे तेरा फोटोशूट लेना है, चलो जल्दी से वो ड्रेस पहन कर आ जा..

मैं हाथ जोड़ते हुए बोली- बाबूजी… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मैं वो कपड़े पहन कर आप के सामने कैसे आ सकती हूँ.. प्लीज़ बाबूजी!

मैंने अपनी आँखें नीचे की हुई थीं।

ससुर जी- बहू, तू एक बार मेरी बात मान ले, आज के बाद तुझे कुछ पहनने को नहीं बोलूँगा.. प्लीज़, मान जा!

मैं उनसे अर्ज कर रही थी और वो मुझसे..!

ससुर जी- जा अब.. और मुझे तू रात तक उसी ड्रेस में दिखनी चाहिए, बस!

मुझे लगा वो गुस्सा होने वाले हैं, इसलिए मैं तुरंत अपने कमरे में आ गई।

मरती क्या ना करती.. मैंने वो पोली बैग उठाया और उसमें से वो ब्रा, पैन्टी और वो नाईटी निकाल ली। मैंने ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर अपनी साड़ी उतारी और फिर वो नई ब्रा और पैन्टी पहन ली।

मैंने पहली बार इतनी महंगी ब्रा और पैन्टी पहनी थी। मैंने शीशे में खुद को देखा, मैं उस समय बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैं एकदम गोरी हूँ और वो सुनहरे रंग की ब्रा और थोंग (पैन्टी) मेरे जिस्म पर एकदम ग्लो कर रही थी। थोंग तो ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से मेरी चूत उसमें छुप पा रही थी और उसके पतले डोरे मेरी टांगों के बीच में डाल लिए थे।

मैंने ऊपर से वो पारदर्शी नाईटी डाल ली, मैंने ड्रेसिंग टेबल में देखा तो मैं एकदम मॉडल सी लग रही थी।

उस समय मैं सब कुछ भूल गई और अपने बालों को अच्छे से बनाए, अपना मेकअप किया और फिर खुद को शीशे में निहारने लगी।

मुझे नहीं लगता कि उस नाईटी में कुछ भी छुप रहा था। मेरी चूचियां और तनी हुई लग रही थी उस ब्रा में और थोंग तो सिर्फ़ 3 इंच का कपड़ा डोरियों के साथ था, उसमें यक़ीनन मैं बहुत ही मादक और कामुक लग रही थी।

मेरी टाँगें एकदम नंगी थीं। मुझे इतना भी ध्यान नहीं रहा कि मैंने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया है। पीछे मुड़ी तो देखा कि ससुर जी मुझे टकटकी लगाए देख रहे हैं.. मैं एकदम शरमा गई।

मैंने कहा- बाबूजी.. आप यहाँ क्या कर रहे हैं?

और अपने हाथों से अपने तन को ढकने लगी।

ससुर जी- बहू अब शरमा मत… देख मैं कैमरा भी लाया हूँ.. अब मैं जैसा कहूँगा तू वैसा करेगी, नहीं तो तू सोच ले!

मैंने नजरें झुका लीं और चुपचाप खड़ी रही।

ससुर जी- चल अब सीधी खड़ी हो जा… मैं तेरे इस मादक रूप की फोटो तो खींच लूँ!

मैंने हाथ हटा लिए, ससुर जी ने कई फोटो लिए।

ससुर जी- चल.. अब नाईटी भी उतार दे..

यह कहानी देसिबीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।

मैंने उनकी वो बात भी मान ली। अब मैं अपने ससुर के सामने केवल एक ब्रा और एक पतली डोरी वाली की थोंग में थी। अपने को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इन कपड़ों में कुछ छुपता कहाँ है।

ससुर जी ने मुझे अलग-अलग हालत में खड़ा कर के कई फोटो लिए।

फिर बोले- चल अब पूरी नंगी हो जा बहू और नंगी तू इस कैमरा के सामने होगी..!

मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ… प्लीज़ मुझे नंगा मत करिए, आपने जो कहा, वो मैंने किया!

ससुर जी- बेटा… तू अभी कौन से कपड़ों में है?

यह कहते हुए उन्होंने मेरे शरीर से ब्रा और पैन्टी भी उतार दी। मैं अब एकदम नंगी थी, मैं एकदम सीधी खड़ी हो गई।

उन्होंने मेरी कई नंगी फोटो खींची।

फिर मेरी चूचियाँ देख कर बोले- बेटा.. ये तो अब तक लाल है, कल मैंने ज़्यादा तेज़ मसल दी थी क्या!

और मेरे चूचुक छूने लगे।

मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी, ऐसे मत करिए!

ससुर जी- चल अब दोनों हाथ दीवार पर रख और पीछे मुँह कर के खड़ी हो जा!

जैसा उन्होंने कहा, मैं वैसे ही खड़ी हो गई। मेरे हाथ दीवार पर थे, मेरे बाल खुले हुए थे और वो मेरे चूतड़ों तक आ रहे थे।

उन्होंने उस स्थिति के कई कोणों से फोटो लिए।

थोड़ी देर बाद मैंने पीछे मुड़ कर देखा वो एकदम नंगे हो चुके थे और उनका लंड एकदम तना हुआ था। उनका लवड़ा आज तो और भी लंबा लग रहा था। मैंने फिर से दीवार की तरफ मुँह कर लिया और अपनी आँखें बंद कर लीं।

मुझे अब अपने जिस्म पर उनके हाथ महसूस हो रहे थे, उनका एक हाथ मेरी बाईं चूची को मसल रहा था और दूसरा दाईं चूची को भभोंड़ रहा था।

मेरे मुँह से ‘उफआह.. बाबूजी प्लीज़… उफ्फ….नहीं…आह.. बस करो.. आ..’ जैसे अल्फ़ाज़ निकल रहे थे।

तभी उन्होंने दायें हाथ की एक उंगली मेरी चूत में डाल दी, मैं एकदम से उछल सी गई, तो उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए।

ससुर जी- बहू.. बस थोड़ी देर ऐसे ही खड़ी रह..!

और फिर मुझे अपनी चूत पर उनका मोटा लण्ड महसूस होने लगा। उन्होंने मेरे बाल पकड़े हुए थे और दाईं वाली चूची मसल रहे थे। उन्होंने एक झटका मारा और पूरा लंड मेरे अन्दर समा गया।

बिल्कुल जैसे हीटर की रॉड मेरे अन्दर समा गई हो।

आज वो मेरे साथ खड़े-खड़े ही चुदाई कर रहे थे।

मैंने अपनी आँखें बंद की हुई थीं।

फिर पता नहीं क्या हुआ मुझे अपनी चूत में सनसनी होने लकी और लगा मेरी चूचियाँ खड़ी हो रही हैं…!

या अल्लाह…. मेरा जिस्म मेरा साथ छोड़ रहा था, अब मैं भी मजे में डूबती जा रही थी, अब उनका लंड मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मेरे मुँह से निकल रहा था- उफ़फ्फ़… बाबूजी…प्लीज़ नहीं…आहाहहा..!

और में उनके हर झटके का जवाब अपने चूतड़ हिला-हिला कर दे रही थी।

ससुर जी- ऊ…आहह.. बहू… तू बहुत ही प्यारी है बस दस मिनट और खड़ी रह…!

और इस तरह वो मुझे 20 मिनट तक दीवार पर खड़ा करके चोदते रहे, वो भी मेरे अपने कमरे में।

उसके बाद एक करेंट सा लगा और मेरी चूत से पानी की धार बह गई!

मुझे लगा वो भी झड़ गए हैं, वो एकदम मुझसे चिपक गए और मुझे सीधा करके मेरे होंठों को चूसने की कोशिश करने लगे।

फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और मुझे गोदी में उठा कर मेरे बेड पर लिटा दिया और खुद भी लेट गए।

हम दोनों 15 मिनट ऐसे ही लेट रहे।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपने ससुर के साथ अपने बिस्तर पर नंगी पड़ी हूँ।

और इतने में मेरा फोन बजने लगा।

समय देखा तो सात बज रहे थे और अताउल्ला का फोन था।

ससुर जी- बेटा, अताउल्ला का फोन है… उठा ले!

और मेरी चूत को सहलाने लगे, मैंने उनका हाथ हटाया और अताउल्ला का फोन उठा लिया।

अताउल्ला- हैलो कौसर, कैसी हो आप?

मैंने कहा- ठीक हूँ, आप बताइए..!

अताउल्ला- क्या कर रही थी?

अब मैं उन्हें कैसे बताती कि मैं एकदम नंगी उनके बाप के साथ अपने बेड पर हूँ और ससुर जी मेरी चूत में उंगली डाल रहे थे। मैंने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका हुआ था।

मैंने कहा- मैं रसोई में काम कर रही थी..!

तभी ससुरजी ने मेरी एक चूची बड़ी ज़ोर से दबा दी, मेरे मुँह से फोन पर ही चीख निकल गई- ओफ़फ्फ़…

अताउल्ला घबरा गए, पूछने लगे- क्या हुआ?

मैंने ससुर जी से हाथ जोड़ कर इशारा किया कि प्लीज़ मुझे बात करने दो, तब जाकर उन्होंने मेरी चूची छोड़ी।

मैं नंगी ही बेड से उठ कर बोली- कुछ नहीं सब्ज़ी काट रही थी, थोड़ा सा लग गया..!

अताउल्ला- अपना ध्यान रखा करो और अब्बू कहाँ हैं?

उन्हें क्या पता था कि अभी थोड़ी देर पहले ही मेरी चूत के अन्दर अपना लण्ड डाले पड़े थे।

मैंने कहा- वो शायद बेडरूम में हैं, टीवी देख रहे हैं।

अताउल्ला- ठीक है अपना ख्याल रखना!

और उन्होंने फोन रख दिया।

मैंने ससुर जी को देखा तो वो बेड पर लेट मुझे ही देख रहे थे, पर उन्होंने अपने कपड़े पहन लिए थे।

मैं उनसे नज़रें नहीं मिला रही थी इसलिए फ़ौरन दूसरी तरफ देखने लगी।

मैंने भी सोचा कि मैं भी अपने कपड़े पहन लूँ और अलमारी खोल कर अपना एक सूट निकाल लिया।

ससुर जी- क्या कर रही है बेटा?

मैंने बिना उनकी तरफ देखे कहा- खाना बनाना है, देर हो जाएगी इसलिए रसोई में जा रही हूँ।

उन्होंने तभी बेड से उठ कर मेरा सूट छीन लिया, बोले- तो इसमें सूट का क्या काम? आज से तू खाना नंगी हो कर ही बनाएगी।

मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़… मेरा सूट छोड़िए साढ़े सात बज गए हैं, बहुत काम है।

मुझे लगा शायद वो ऐसे ही कह रहे हैं।

ससुरजी- तुझे समझ नहीं आता क्या… अब शाम को तू ऐसे ही रहा करेगी, चल जा अब खाना बना…

और मेरा सूट बेड के दूसरी तरफ फेंक दिया।

मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी… मुझे कुछ तो पहनने दो!

और मैं नजरें झुकाए खड़ी रही।

ससुरजी- अच्छा चल तू इतना कह रही है तो तू कुछ चीज़ पहन सकती है..!

फिर बोले- तू अपनी कोई भी ज्वैलरी, अपनी चुन्नी और कोई भी हील वाली सैंडिल पहन सकती है.. ठीक है अब?

मैंने सोचा इसमें तो एक भी कपड़ा नहीं है, पहनूँ क्या और चुन्नी का क्या करूँगी जब नीचे से पूरी नंगी हूँ।

ससुर जी- और थोड़ा फ्रेश हो ले पहले, बाल भी बना ले, देख एकदम बिखरे पड़े हैं!

इतना कह कर वो अपने कमरे में चले गए।

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