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कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके

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मेरा नाम बबलू गुप्ता है, मैं शादीशुदा हूँ किंतु जॉब के कारण कोलकाता में अकेले रहता हूँ. आज मैं आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. बात तब की है, जब मुझे कोलकाता में आए हुए एक साल हो गया था और मैं अपनी बीवी को मिस कर रहा था. मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि काम वाली बाई भी दे देती है, यदि उसको सही से पटा लिया जाए. मेरे यहाँ भी एक बाई काम करती थी, जिसका नाम ममता था.. वो दिखने में बहुत सुन्दर थी और दो बच्चों की माँ थी, फिर भी अपने आपको बड़ा मेन्टेन करके रखा हुआ था.

अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. आखिर एक जिस्म की प्यास तो जिस्म से ही मिटती है. बाकी सब तो सिर्फ मन बहलाने के उपाय हैं.

अब तक ममता से मेरी ज्यादा बात नहीं होती थी, हम दोनों बस अपने काम से काम ही रखते थे. वो मेरे फ़्लैट पर सुबह और शाम दोनों समय आती थी. आज तक कभी किसी औरत को पटाने के बारे में नहीं सोचा था, वो भी सिर्फ सेक्स के लिए, तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे बात कैसे की जाए और अपना काम निकलवाया जाए. डर भी लग रहा था कि कहीं बुरा मान गई तो क्या होगा.. कहीं लेने के देने न पर जाएं.

पर कहते हैं न कि जब लंड खड़ा हो तो उस समय सिर्फ चूत ही दिखाई देती है और जब तक की वो शांत न हो जाए, कुछ समझ में नहीं आता. मेरी भी हालत कुछ इसी तरह की थी कि जब ममता काम करके चली जाती तब सोचता चलो कल उससे बात करूँगा, पर जब आती तब हिम्मत ही नहीं होती.

इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था और मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी. अब तो मुठ मारने से भी चैन नहीं मिल रहा था. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा. पर चैन मिलने की जगह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर एक दिन सोच ही लिया, जो भी होगा देखा जाएगा, अब तो ममता से बात करके ही रहूँगा.

ममता जो कि दिखने में बिल्कुल सेक्सी माल थी, उसका फिगर भी मस्त था. उसका 32-28-36 का फिगर लंड खड़ा कर देता था. उस पर उसका गोऱा रंग, बड़ी बड़ी आँखें.. आह.. वो अक्सर साड़ी नाभि से नीचे बाँध कर पहना करती थी.

Kaamwali Bai Ki Chudai


जिस दिन मैंने पक्का कर लिया था कि अब उससे बात करना ही है, उसके अगले दिन में व्हिस्की की एक बोतल लेकर घर आया और शाम से ही पीने बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा.

लगभग एक घंटे बाद वो आई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

काम खत्म करके जब वो जाने लगी तब मैंने उसे बुलाया और कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

वो मेरे रूम में आई और मुझसे पूछने लगी- क्या बात है?

मैंने उससे कहा कि भाभी आप बुरा मत मानना..

वो बोली कि क्या बात है.. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

तब मैंने उसको बोला- मेरा एक दोस्त है और उसको एक लड़की चाहिए, उस काम के लिए.. क्या आप किसी ऐसी लड़की को जानती हैं.

अब वो गुस्से में आकर मुझसे बोली- आप मुझे क्या समझते हैं. आइन्दा इस तरह की बात मुझसे मत कीजिएगा.

और वो गुस्से में मेरे फ्लैट से बड़बड़ाते हुए चली गई.

मेरी तो गांड फट गई थी, पिटे हुए मुँह जैसी हालत देखने लायक थी. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये किसी से कुछ बोल न दे. मेरा नशा और लंड की गर्मी दोनों ही शांत हो गए.

अब समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ. फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ.

मुझे उस समय यही ठीक लगा, मैंने मुठ मारी और सो गया. सुबह ममता के आने से पहले ही मैं अपने ऑफिस चला गया.

अगले दिन भी मैं उसके आने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गया. शाम को मेरे लौटने के करीब एक घंटे बाद ममता काम करने आई. आज मैं किचन में देखने भी नहीं गया कि वो क्या कर रही है, वो भी कुछ पूछने नहीं आई कि क्या बनाना है.. वो अपना काम खत्म करके चली गई.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. फ़िर शनिवार को शाम में वो अपने समय से जल्दी ही आ गई और अपना काम करने लगी.

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फिर जब वो काम करके वापस जाने लगी तो मेरे पास मेरे कमरे में आई और बोलने लगी कि क्या हुआ है, अब तो आप बात भी नहीं करते?

मैं चुप ही रहा तो वो फिर से बोली- देखिए मैं ऐसी औरत नहीं हूँ.

जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. इस वजह से उसकी चूची के उभार साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.. और इसी वजह से मेरे पेंट के अन्दर मेरे लंड खड़ा हो रहा था, जिसे छिपा पाना भी मुश्किल हो रहा था.

ममता मुझसे बात कर रही थी और मेरी नज़रें उसके चूची के पहाड़ों पर टिकी थीं जिसे उसने भी पकड़ लिया और अपनी साड़ी ठीक करने लगी.

फिर एकाएक मुझसे बोली- मैं आपसे बात कर रही हूँ और आप कहाँ देख रहे हैं?

मैंने उससे बोला कि मैंने तो आपको नहीं बोला था देने के लिए, मैंने तो आपसे पूछा था कि आप किसी को जानती हैं, जो देगी और बदले में पैसे लेगी. पर आप ही बुरा मान गईं. यदि मुझे आपको बोलना होता कि आप दे दो, तो मैं अपने दोस्त के लिए थोड़ी बात करता.. अपने लिए कोशिश नहीं करता?

तब ममता ने चौंक कर मुझे देखा और बोली- क्या बोला आपने..?

मैं बोला- जो आपने सुना!

तब वो बोली- नहीं एक बार और बोलिए.. जो अभी अभी आपने बोला.

तब मैं बोला कि यदि आपको बोलना होता कि आप अपनी दे दो, तो मैं अपने लिए बोलता.. न कि दोस्त के लिए.

वो बोलने लगी- छी छी.. मुझे नहीं मालूम था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हो.

मैंने उससे बोला- इसमें खराबी क्या है? आप सुन्दर हैं, जवान हैं तो क्यों नहीं..!

इस बार मैंने भी नोटिस किया कि वो भी चेहरे पर आश्चर्य का भाव लिए हुए वहीं पर खड़ी रही. मुझे भी लगा कि इसे भी अच्छा लग रहा है.

मैं अपने बिस्तर से उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया.. मुझे अपने सामने एकाएक पाकर वो थोड़ा घबरा गई. वो पीछे को होने लगी और दीवार से सट कर खड़ी हो गई, क्योंकि अब पीछे हटने के लिए जगह नहीं थी.

वो बेचैनी में मेरी तरफ देखकर बोलने लगी- ये आप क्या कर रहे हैं.. आप पीछे हटिए.

लेकिन मैंने आगे बढ़ कर उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला कि भाभी आप मुझे अच्छी लगती हो, क्या आप मुझे दोगी?

ममता ने हकलाते पूछा- क्या?

अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने भी बोल दिया कि आपकी चूत.. भाभी बस एक बार आप मुझसे चुदवा लो प्लीज सिर्फ एक बार..

वो दबे स्वर में बोली- आप पागल हो गए हैं.

वो मुझे धक्का देकर भाग गई. मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी तो मैं लड़खड़ाते हुए अपने बिस्तर पर गिर गया और वो दरवाज़ा खोल कर चलती बनी.

मैं थोड़ा उदास हो गया कि आज चौका मारने का अच्छा मौका था लेकिन हाथ से निकल गई, फिर सोचा कि चलो अब तो ये अपनी चूत दे ही देगी.. और एक बार दे दी तो फिर तो जब चाहो तब उसकी चूत और मेरा लंड खेल सकेंगे.

यही सोचता हुआ कि चलो अब तो एक दो दिन का कष्ट और है.. उसके बाद तो मौज ही मौज होगी.

मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने बेड पर चला गया. सोने के पहले ममता का नाम लेकर मुठ मारी और सो गया. यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

लेकिन अगले दो दिन मैं उसका इंतज़ार करता रहा और अपने लंड को समझाता रहा कि चिंता मत कर, चूत का इंतज़ाम हो गया है और मुठ मारकर सो जाता.

दो दिन से चार दिन, फिर पांच दिन इसी तरह वह पूरे सात दिन के बाद आई.. लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सजधज कर आई थी. उसे देखते ही लंड तन कर खड़ा हो गया और ममता भी तिरछी नज़र से मेरे लंड के तरफ देख रही थी.

जब वो किचन में जाने लगी, तब मैंने उसे अपने कमरे में आने के लिए बोला लेकिन वो बोली- नहीं, जो बोलना है यहीं बोलिए.. मुझे आपके बैडरूम में नहीं जाना है.. आपकी नीयत ठीक नहीं है.

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी तो मैं भी उससे बोला- तुम इतना सजधज कर आओगी भाभी.. तो क्या होगा और मेरी नियत नहीं ख़राब हुई है बल्कि आपको देखकर मेरा लंड बिगड़ गया है.

इस पर उसने इतरा कर बोला कि आपका वो बिगड़ गया है, तो आप उसको सीधा करो.. इसमें मैं क्या करूँ.

इसी तरह की बात करते हुए वो जब रोटी बनाने लगी, तब मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा, मैं कभी इधर कभी उधर.. उसके जिस्म पर अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो बोली- मुझे खाना बनाने दीजिये नहीं तो मैं लेट हो जाऊँगी.

मैंने उससे बोला- मुझे इसकी नहीं, किसी और चीज की भूख लगी है.

वो बोली- उसके लिए मैं कुछ नहीं कर कर सकती, आप जाओ यहाँ से.

अब मैं भी गुस्से से किचन से निकल कर अपने बेडरूम में चला आया और लेट गया. आज मैं उसके रहते ही अपने बेडरूम में लंड निकाल कर उसका नाम लेकर धीरे धीरे से हिलाने लगा और उसका इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे पता था कि जाने के पहले वो मेरे कमरे में जरूर आएगी.

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.. वो अपना काम खत्म कर जब जाने को हुई तब उसने मुझे आवाज़ लगाई, लेकिन मैं चुप रहा. तब उसने दो तीन बार और आवाज़ दी. जब मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरे बेडरूम में आई और मेरे हाथ में लंड को देखकर.. उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा.

कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.

अब मैंने उसके सामने खड़े होकर एक हाथ उसके कंधे पे रखा और दूसरे से उसका नाम लेते हुए लंड को सहलाता रहा.

वो बोलने लगी- आप बहुत गंदे हो, आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो? मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले.

मैं बोल पड़ा- भाभी जब लंड खड़ा होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. आप मान जाओ.. बस एक बार मेरे लंड को अपने चूत में डालने दो.

वो बोली- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है.

फिर मेरे बार बार कहने पर वो बोली कि पहले आप सच बोलो, उस दिन आप जो लड़की खोज रहे थे वो अपने दोस्त के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोज रहे थे.

मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. लेकिन अब तो मैंने आपको सच बोल दिया, अब तो आप मुझे चोदने दो प्लीज..

वो बोली- नहीं.. मुझे सोचने का कुछ समय चाहिए.

मैं बोल पड़ा कि आप मुझे चोदने दो बदले में मैं आपको पैसे भी दे दूंगा.

वो बोली कि यदि पैसे के लिए मुझे यह काम होता तो मैं आपके यहाँ नौकरानी का काम क्यों करती.. यही काम न करने लगती.

उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया. इसी तरह उसके मन में जो भी आता गया, वो बोलती रही और मैं चुपचाप सुनता रहा.

फिर वो बोली कि मुझे देर हो रही है, अब चलना चाहिए.

तब मैं बोल पड़ा- भाभी पैसे नहीं चाहिए तो मत लो, पर एक बार तो दे दो.

वो बोली कि मैंने बोला न कि मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए कि अपना जिस्म आपको दूँ कि नहीं.

तब मैं भी बोल पड़ा- ठीक है पर आज तो अपने हाथ से ही मेरी मुठ मार दो.. कम से कम आज तो ठंडक कर दो.

वो आनाकानी करने लगी- नहीं.. जब मैं बोल रही हूँ कि मुझे समय चाहिए आप तब भी नहीं मान रहे हैं.

फिर मेरे बहुत मनाने पर बोली- ठीक है लेकिन फिर कभी नहीं और यदि आपने जोर जबरदस्ती की तो मैं काम छोड़कर चली जाऊँगी.

मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैंने भी मौका पाकर ममता की चूचियों पर हाथ रखकर सहलाने लगा, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहा- नहीं ये मत कीजिये.. नहीं तो मैं चली जाउंगी.

फिर मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लंड का मजा लेता रहा. उसने मेरे लंड की मुठ मारकर मेरे माल को गिरा दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक करके चली गई.

उसके अगले दिन से वो आती और अपना काम करके चली जाती. मैंने उससे नहीं पूछा कि उसने क्या सोचा, बस उससे इधर उधर की बातें करता रहता, जब तक वो रहती.

ऐसे ही 20-25 दिन बीत गए. फिर एक दिन मैं व्हिस्की की बोतल लेकर घर गया और टीवी पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए व्हिस्की पीने लगा.

तभी दरवाजे की घन्टी बजी तो मैंने टाइम देखा, अभी सात बज रहे थे. मैंने मन ही मन सोचा कि इस समय कौन आ गया क्योंकि ममता आठ बजे आती है. इसी उधेड़बुन में मैंने दरवाज़ा खोल तो ममता गेट पर खड़ी थी.

वो मुझसे हँसते हुए बोली- हटिये, अन्दर आने दीजिये.

मैं गेट से हटा और उसे अन्दर आने दिया. अन्दर आते समय ममता के होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी. अन्दर आने के बाद मैंने उसके हँसने का कारण पूछा तो कहने लगी कि वो तो ऐसे ही हँस रही थी.

अन्दर आकर जब उसने व्हिस्की की बोतल और गिलास देखा और टीवी को बंद देखा तो बोल पड़ी- लगता है कि आज फिर मूड बनाया जा रहा है.

मैंने कहा- क्या करूँ तुम देने के लिए मानती ही नहीं हो तो टीवी देख कर ही काम चला रहा हूँ. आज एक महीना हो गया लेकिन तुम अभी तक सोच ही रही हो.

इस पर उसने जो कहा, उसे सुनकर मैं तो चौंक ही गया. ममता बोली- आपने ही तो नहीं पूछा कि मैंने क्या सोचा.

मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं.

ममता बोली- आग मुझे नहीं बल्कि आपके वहां पर लगी है, तब मैं क्यों आपको बिना पूछे बोलती कि मैंने क्या सोचा.

अब उसकी इतनी पॉजिटिव रिस्पांस पाकर मैंने टीवी को चालू किया और उसे पकड़ कर अपने गोद में बैठा लिया और बोला कि अब बोल भी दो ममता भाभी.. क्या मेरा लंड तुम्हारी चूत की गहराई में छिपी ज़न्नत का मजा पा पाएगा या नहीं.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

ममता बोली- अपने उसको संभालिये.

मैं बोला- अब बोल भी दो.

वो बोली- देखिये उस दिन जैसे किया था वो करने को राज़ी हूँ और आप ऊपर से सब कुछ कर सकते हैं.. लेकिन मैं आपका अपने अन्दर नहीं लूँगी.

मैं बोला- ये क्या बात हुई.. हाथ से तो मैं भी अपने आप कर सकता हूँ.. फिर क्या फायदा..?

वो बोली- ज्यादा से ज्यादा आप मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल कर चूस सकते हैं या सहला सकते हैं और पेटीकोट भी खोल दीजिये.. लेकिन पैंटी नहीं खोलूंगी और आप मेरे अन्दर अपने उसे नहीं डालेंगे.

एक तो शराब का नशा और दूसरी ब्लू फ़िल्म की खुमार.. और अब उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया. मैंने उससे बोला कि क्या फायदा.. जात भी गवाऊं और भात भी नहीं खाऊं. तुम जाओ बाहर.. मैं किसी और को खोज लूंगा.

वो भी बड़बड़ाते हुए चली गई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

अब मैं भी डीवीडी बंद करके टीवी पर कुछ कॉमेडी सीरियल देखने लगा. शराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

जब कुछ देर बाद दिमाग हल्का हुआ तो मैंने सोचा कि ममता भाभी तो अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार ही है, अब खुल कर नहीं बोल पा रही है या सिर्फ मुझे तरसा रही है. क्योंकि जब वो सब कुछ खोलने के लिए मान ही गई है तो उसे भी पता है कि इतना करने के बाद तो उसे भी चुदना ही है.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने जल्दी से शराब का गिलास नीचे रखा और लपक कर किचन में गया और ममता से बोला- भाभी.

वो गुस्से में बोली- क्या है?

तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा.

ममता बोली- अब क्या हुआ उस समय तो बड़े गुस्से में बोले थे कि दूसरी खोज लेंगे तो अब जाइए, मुझे अब आपके साथ उतना भी नहीं करना.

मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.

वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर, मेरे सीने में ममता की तनी हुई चूचियों के दबे होने का कोमल सा एहसास हो रहा था और वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उसकी आँखों में देख रहा था. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गुलाब की तरह लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब ममता भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी.

अब उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसके गालों.. कंधों और कानों को चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. अब हमारी साँसों की गर्मी एक दूसरे के जिस्म को छूने लगीं. अब जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लग रहे थे. मैंने ममता की साड़ी को उसके जिस्म से अलग किया और उसकी नग्न नाभि को अपनी जीभ से सहलाने लगा. ममता मेरे बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी. मैं उसकी नाभि को चूमते हुए धीरे से अपने हाथ को उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा.

क्या मुलायम और कड़क चूचियां थीं उसकी, दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने अपना सर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा- तो भाभी चूत चुदवाओगी अब?

वो बोली कि नहीं.. मुझे मालूम है मुझे क्या करना है.

फिर मैंने एक एक कर उसके ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ और ब्रा दोनों को एक साथ ही उसके जिस्म से अलग कर दिया. उसकी नंगी चूचियों पर से नज़र ही नहीं हट रही थी, क्या सुन्दर नज़ारा था, गोरी गोरी.. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

अब बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मैं भाभी की चूचियों को मुँह में भर कर चुभलाने लगा और ममता भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी पेंट के अन्दर घुसा दिया. भाभी मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था.. दूसरी चूची को अपने एक हाथ से सहला और दबा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं ममता भाभी की चूची चूसते हुए, एक हाथ से उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया और उसे उसके मखमली जिस्म से उतार फेंका.

इसके साथ ही अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत की फाँकों के बीच से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे ऐसा करते ही ममता जोरों से चिहुंक उठी और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी उंगलियों का दबाव भी मेरे लंड पर बढ़ गया.

अब अपने को रोक पाना मुश्किल था तो मैं जल्दी से उससे अलग हुआ. मैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

मैंने कामवाली ममता भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी मस्त चूचियों के बीच में अपना लंड घुसा कर आगे पीछे करने लगा. मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था, कुछ देर तक इसी तरह उसकी चूचियों को लंड से चोदता रहा. फिर नीचे उतर कर ममता के बगल में लेट गया. इसके बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अपने दोनों हाथों को उसकी पैंटी के अन्दर पीछे से डालकर उसके चूतड़ों को सहलाना चालू कर दिया. ममता भी पूरे जोश में आकर मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैंने ममता को अपने नीचे लिटाया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो ममता ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया. उसके मुँह की गर्मी जब लंड पर पड़ी तो एक अजब तरह का सुकून मिला और करीब 5 मिनट के बाद मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसे चित करके मैं उसकी जांघों के बीच में अपना मुँह ले जाकर उसकी जांघों को चूमने लगा. भाभी की पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत की फाँकों को सहलाते हुए अपने दो उंगलियों को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया. मैं उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा.

फिर अपना सर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आँखें बंद किए हुए चूत की चुदाई का मजा ले रही और हल्की हल्की आहें भर रही थी.

मैं इस मौके का फायदा उठाकर उसकी पैंटी को निकालने लगा, पहले तो उसने भी कमर उठाकर मदद की, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि मैं क्या कर रहा हूँ तो तुरंत ही उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोलने लगी- ये नहीं, ये नहीं.

मैं उसको बोला- ममता भाभी मैं सिर्फ आपकी चूत को देखूंगा और हाथों से ही सहलाऊँगा, लंड अन्दर नहीं डालूँगा.

तब जाकर उसने अपनी पैंटी उतारने दी.

अब अपनी आँखों के सामने ममता की कसी हुई और फूली हुई चूत को देखकर तो मेरे होश ही उड़ गए. क्या मस्त चूत थी, गोरी गोरी.. दोनों फाँकें आपस में चिपकी हुईं. ममता के कामरस से भीगी हुई चूत देखकर तो मेरा लंड और भी कड़ा हो गया.

तभी मैंने उसकी चूत के फाँकों को अलग किया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया. ममता बेचैन होकर मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से सहलाने लगी.

इसके बाद तो उसकी चूत में लंड घुसाए बिना चैन नहीं आने वाला था. अब काफी फोरप्ले हो चुका था. सिर्फ ममता की चूत में लंड डाल कर उसे चोदना बाक़ी रह गया था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.. उसकी चूची को अपने हाथों से दबाता हुआ.. ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

फिर उसकी बाईं चूची की घुंडी को अपने मुँह में लेकर उसकी लाल लाल मख़मली चूची का दूध पीने लगा और अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद उसकी चूची को छोड़ कर ऊपर हुआ और ममता के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुभलाने लगा और अपने लंड को उसकी चूत पर सहलाने लगा.

तभी ममता ने अपने होंठों को मेरे होंठों से अलग करते हुए कहा- लंड अन्दर नहीं डालना है.

मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

ये कह कर मैं फिर से उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूची को भी साथ साथ दबाने लगा और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड को सहलाने भी लगा.

कुछ पलों बाद मैंने देखा कि ममता आँख बंद करके पूरे मज़े में है और उसने अपनी जांघों को भी थोड़ा ढीला छोड़ दिया है. उसके ऐसा करते ही मैंने अपने लंड को एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड ममता की चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया.

मेरे ऐसा करते ही ममता अपनी आँखें खोलकर मुझे धक्का देने लगी, किन्तु मैंने उसे जोर से अपने से चिपका लिया और लंड को भाभी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ देर बाद ममता भी साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर चुदवाने लगी.

अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

इतना मजा आ रहा था कि ममता ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया था. करीब 15 मिनट तक लगातार उसकी चूत को चोदने के बाद अब लंड में भी प्रेशर बनने लगा था. मैंने ममता की चूत को अपने माल से भर दिया. तभी ममता ने भी अपना माल छोड़ दिया और मेरे साथ चिपक गई.. और मैं भी उसके ऊपर लेट गया.

कुछ देर बाद जब अलग हुए तो देखा कि चादर हमारे कामरस से पूरी तरह भीग चुका था और हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था.

यह थी ममता के साथ मेरी चुत चुदाई की शुरुआत. मैं उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को मेरी इंडियन सेक्स स्टोरीज पसंद आई होगी. प्लीज अपने विचार पर जरूर भेजें.

ऑफिस में मेरी बीवी एक साथ 8 लोगों से चुदवा रही थी 

ऑफिस में मेरी बीवी एक साथ 8 लोगों से चुदवा रही थी


मेरी बीवी दीपिका एक बहुत सेक्सी औरत है, उसकी उम्र 26 साल है, हम दोनों मुंबई में जॉब करते है, मेरी बीवी का फिगर 40″38″44 है, दीपिका मोटी है लेकिन बहुत खूबसूरत है।

हमेशा जीन्स टॉप और छोटे कपडे पहनती है, ऐसी बीवी को हर पति दिन रात चोदना चाहेगा। मैं भी यही करता हूँ, हमारी शादी को 2 साल हो गए है मैं पूरी तरह से उसे चोद कर खुस रखने की कोशिस करता हूँ, हर रात चुदाई होती है लेकिन मेरा लंड सिर्फ 4 इंच का छोटा और पतला है जिसकी वजह से उसकी प्यास अधूरी रह जाती है दीपिका ने कभी मुझे बोला नहीं फिर भी मैं उसे देख कर समझ जाता हूँ।


1 महीने पहले मेरी नौकरी छूट गयी मैं घर पर ही रहता और नयी जॉब की तलाश में था लेकिन कही बात बन नहीं रही थी। दीपिका को डेली उसके ऑफिस बाइक से लेने और छोड़ने जाता था। एक दिन दीपिका खुश हो कर घर आयी और बोली मेरा प्रमोशन हुआ है, मैं सुन कर बहुत खुस हुआ और दीपिका से बोला चलो पार्टी हो जाये, लेकिन वो मना करने लगी, काम बहोत था थक गयी हूँ किसी और दिन पार्टी करेंगे। खाना खा कर हम दोनों सोने चले आये, मैं खुसी के मौके पर अपनी बीवी को चोदना चाहता था मैं उसको पकड़ कर चूमने लगा दीपिका मुझे गुस्से से धक्का दे कर बोली अरे यार थक गयी हूँ और तुम सुरु हो गए। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम


मैं रुक गया और सोचा काम से थक गयी है आराम करने देता हूँ, एक सप्ताह ऐसे ही निकल गए दीपिका उसके बाद ऑफिस से लेने आने को मना करने लगी। बोली आप शाम को मत आना मुझे काम से देर हो सकता है मैं कैब से घर आ जाउंगी। मैं मान गया मेरी पत्नी की खुसी में मेरी खुसी थी।

दूसरे दिन मैं बाहर सामान लेने निकला और दीपिका को साथ लेकर जाऊंगा सोच कर उसके ऑफिस चला गया 7 बज गए थे ऑफिस बंद होने का टाइम था। मैं अंदर गया वह कोई नहीं थी सभी जा चुके थे। अंदर हॉल की लाइट जल रही थी और कुछ लोगो की आवाज आ रही थी। मैं जैसे आगे बढ़ा मुझे सामने की गेट पर चपरासी आते हुए दिखा, सायद उसने मुझे नहीं देखा था। मैं चपरासी से बात किये बिना आगे बढ़ गया हॉल के विंडो पर जाली वाला पर्दा लगा हुआ था मैं अपनी पत्नी को ढूंढता हुआ वो पर्दा हलके से उठा कर अंदर देखा।

अंदर बहोत से आदमी बैठ कर शराब पी रहे थे तभी मेरी नजर मेरी बीवी पर गयी वो अपने बॉस की गोद में बैठी थी, ये सब देख कर मेरा गुस्सा बढ़ गया मैं जाकर अपनी बीवी को दो थप्पड़ मारना चाहता था लेकिन खुद को काबू किया और सोचने लगा देखता हूँ ये किस हद तक गिर सकती है आज पता चल ही जाये। वहाँ पर टोटल 8 आदमी थे सभी हट्टे कट्टे मोटे थे, मेरी बीवी अपने बोस की गोद में बैठी थी और उसका बॉस दीपिका के कमर में हाथ रख कर सहला रहा था। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

तभी दीपिका बोली राजीव सर मुझे देर हो रही है आज जल्दी कर लेते है वैसे भी 8 लोग है टाइम लग जायेगा। मेरी समझ में कुछ नहीं आया ये 8 लोग से क्या करना चाहती है। मेरी बीवी दीपिका का बॉस अपने पेन्ट की ज़िप खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लिया, दीपिका उसका मोटा लम्बा लंड हाथ में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

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वहाँ बैठे बाकी के 7 लोग अपने पेन्ट उतार कर चड्डी निकाल फेके और मेरी बीवी के पास आकर खड़े हो गए, दीपिका राजीव का लंड छोड़ कर उन सब के लंड को बारी – बारी चूसने लगी। राजीव उठा और अपनी पुरे कपडे उतार कर नंगा हो गया। दीपिका को खड़ा किया और उसके टॉप जीन्स निकाल कर सब दीपिका पर टूट पड़े ब्रा पेन्टी के ऊपर से 8 लोग उसको चूसने लगे। दीपिका पुरे मजे में सिसकारियां ले कर उनको खुस करने की पूरी कोसिस कर रही थी।

तभी एक ने दीपिका के पेंटी नीचे उतार कर उसकी चुत चाटने लगा एक बन्दा पीछे से उसकी गांड चाट रहा था। ऊपर से दो लोग उसकी ब्रा उतारकर दोनों निप्पल चूसने में लगे थे। बाकी के ४ लोग दीपिका के सरीर पर अपना लौड़ा रगड़ रहे थे। दीपिका का बॉस बोला ये ले तेरी चुत की खुजली मिटाने के लिए आज 8 लोग हो गए है बता अब तो खुजली मिट जाएगी तेरी। दीपिका बोली अरे ये तो कुछ भी नहीं मैं कॉलेज के दिनों में एक साथ 10 लड़को के साथ ग्रुप सेक्स करती थी।

मेरी चुदाई की प्यास बुझाना आसान नहीं है। दीपिका का बॉस बोला – तेरे गांडू पति से तो ज्यादा मजा देंगे हम लोग तेरे को। दीपिका चुप थी और वो लोग उसको मसल रहे थे। अपनी बुराई सुन कर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था लेकिन मैं बर्दास्त कर गया। 5 मिनट बाद दीपिका का बॉस टेबल पर लेट गया और दीपिका को अपने लंड पर बैठा लिया पीछे से उसका एक काला दोस्त अपना 7-8 इंच का लंड लिए दीपिका की गांड में डाल कर दोनों एक साथ चोदने लगे। दीपिका उम्म्म्म अह्ह्ह्हह चोदा सालों मेरी प्यास बुझा दो ,, और चोदो साले चोदो चोदो अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह कर रही थी। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

बाकी लोग अपना लंड हाथ में लिए मुठ मार रहे थे, 2 लोग दीपिका की तरफ बढे और एक ने दीपिका क्वे मुँह में लंड डाल दिया। अब दीपिका के तीनो छेद में लंड था। तीसरा बन्दा दीपिका के बूब्स चूसने लगा दीपिका उसका लंड अपने एक हाथ से हिलाने लगी। बाकी के ४ लोग खड़े थे दीपिका को चोदने का इन्तजार कर रह थे। 10 मिनट बाद शिफ्ट चेंज हुई और ये चार गए और बाकी के 4 दीपिका की वैसे ही चुदाई करने लगे। दीपिका के मुँह से गुन गु गु गु गु गु सिर्फ इतने आवाज निकल रही थी। कमरे से शराब की बदबू चुदाई की थपेड़ो की आवाज तप तप थप थप गन्दी गालिया और हंसने की आवाज आ रही थी 15 -20 मिनट ऐसे वो लोग चोद रहे थे सब अपना लंड हाथ में लेकर मुठ मारने लगे दीपिका टेबल पर लेटी हुई चारो तरफ से वो लोग उसके ऊपर अपना वीर्य गिरा रहे थे।

दीपिका ब्लू फिल्म के तरह उन लोगो से चुदवा कर उनका वीर्य चाटचाट कर पी गई।

अपनी बीवी के प्यास मैं बुझा नहीं सकता इसका दुःख था, लेकिन इस तरह वो दुसरो से चुदा कर मेरा मजाक बना रही थी इसका गुस्सा मुझे था। सब लोग कपडे पहनने लगे दीपिका नंगी थी तभी चपरासी हॉल में आया और बोला शाहब आप लोग का हो गया हो तो मैडम की मैं भी ले लूँ ? इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

राजीव बोला – हां जरूर तू हमारा वफादार है तेरा तो पूरा हक़ है। वैसे भी सब से बड़ा औजार तो तेरा है दीपिका तेरी दीवानी हो जाएगी।

दीपिका बोली आ चंदू आज तेरा लंड भी देखूँ कितना लम्बा – मोटा है। दीपिका चपरासी के कपडे निकाल कर फेकने लगी बाकी के 8 लोग बैठ कर किसी फिल्म की तरह इनकी चुदाई का खेल देखने को तैयार थे। चंदू का कपडा उतारते ही मेरी नजर उसके लंड पर गयी। उसका लंड ब्लू फिल्म में काले लोगो के जैसी 10 इंच से भी ज्यादा लम्बी और मोटी थी। दीपिका बोली ये क्या है कहा से इतना लम्बा मोटा ले आया तू ? बता न कैसे इतना बड़ा हुआ ?

ये सब देख कर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया, मुझे मेरा 4 इंच का लंड याद आया जिसकी लम्बाई चंदू के लंड की आधी भी नहीं थी।

चंदू बिना समय बर्बाद किये दीपिका को गोद में उठा कर अपने लंड पर बैठा लिया और एक झटके से लंड चुत के अंदर डाल दिया। दीपिका बोली – हयी माँ मर गयी मैं साले बहनचोद धीरे से डालना था न भोसड़ीके। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

चंदू खड़े खड़े मेरी बीवी को उछाल कर चोदने लगा सब चुदाई देखने का आनंद ले रहे थे। चंदू कभी दीपिका कि गांड कभी चुत दोनों छेद बदल कर चोद रहा था। दीपिका उम्म्म्म अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह चोद माधरचोद और तेज और तेज बोल कर मजे ली रही थी। पैट पैट पैट पैट पैट की आवाज से पूरा ऑफिस गूंज गया।

मेरा दिमाग सुननन पड़ गया था मैं वहाँ से बाहर निकला और घर आ गया। रात को 9 बजे मेरी बीवी आयी और नहाने चली गयी, हमने साथ खाना खाया। जब सोने गए दीपिका बोली मुझे नींद आ रही है आज बहुत काम था थक गयी हूँ पूरा सरीर दर्द हो रहा है। मैं उसको गुड नाईट बोल कर लेट गया।

मेरी आँखों में नींद नहीं था पूरा नजारा घूम रहा था। मैंने फैसला किया जैसे भी है ठीक है, मेरा लंड छोटा है अगर इसकी चुत की आग ज्यादा है तो इसकी मर्जी किसी से चुदाई, अगर मैं कुछ बोला तो मेरा ही इनसल्ट होगा। उस दिन से आज 3 साल हो गए है मेरी दीपिका से सेक्स नहीं हुई है। दीपिका अपनी कंपनी में टॉप लेवल पर पहुँच गयी है,

14 साल की कुँवारी लड़की की टाइट चूत की चुदाई (Kuwari ladki ki virgin chut chudai)

Kuwari ladki ki virgin chut chudai


हेलो दोस्तों, आज जो कुमारी चूत की चुदाई कहानियां बताने जा रहा हू वो मेरी पडोश में एक कुँवारी लड़की की चुदाई की हैं . मेरे पडोश में एक फैमिली रहती थी, उनकी दो बेटियां ही थी, एक करीब आठवी में और एक चौथी में पढ़ती थी, मैं उस मकान में करीब ४ साल तक रहा था इस वजह से वो लोग अच्छे तरह से पहचान गए थे, फिर मैंने वह से मकान खली कर दिया और कही और रहने लगा इस दरम्यान कई जगह चेंज किया, इस साल जहाँ मैं चेंज कर के आया.

14 साल की कुँवारी लड़की की टाइट चूत की चुदाई


एक दिन पार्क में घूमते घूमते वही फैमिली मिल गयी, वो हाल चाल पूछने लगी, बड़ी बेटी तो शादी कर के चली गयी, और छोटी बेटी की शादी तो हो गयी पर उसने अपने हस्बैंड से तलाक ले लिया, मैंने पूछा और इनके पापा तो वो लोग बोले की वो आज कल दुबई में रहते है साल में दस दिन के लिए ही आते है. फिर मैंने पूछा बड़ी बेटी आपकी तो बोली वो अपने ससुराल में रहती है, और छोटी बेटी तो आप देख ही रहे हो, मैंने पूछा क्या बात है तलाक क्यों हो गया तो बोली क्या बताऊँ बोलने लायक बात नहीं है.

वो लोग मेरे निचे के फ्लोर में रहते थे, अचानक मेरी वाइफ को गाँव जाना पड़ गया मैंने अकेला था यहाँ पर, तो निचे बाली आंटी बोली रणबीर ऐसा करना तुम्हारी वाइफ नहीं है यहाँ पे तो तब तक मेरे यहाँ ही खा लेना, मैंने कहा ठीक है रात का खाना मैं आपके यहाँ ही खा लूंगा, शाम को करीब ६ बजे आंटी आई और बोली रणबीर मेरी माँ का तबियत बहुत खराब है मुझे अभी हिसार जाना पड़ रहा है, ध्यान रखना मेरे घर का भी और नेहा घर पर ही है( नेहा उनकी छोटी बेटी) तुम्हारा खाना वही बन रहा है खा लेना. और वो चली गई.

रात को करीब साढ़े नौ बजे मैं खाना खाने के लिए उसके घर गया, वो दरवाजा खोली और मुझे बड़े ही आदर से बुलाया, क्या बताऊँ यार क्या लग रही थी, उसने पिंक कलर की नाईटी पहनी थी, नाईटी शरीर से चिपका हुआ था उसके शरीर का अंग अंग दिख रहा था नाईटी के ऊपर से ही, उसपर से वो ब्रा नहीं पहनी थी, माय गॉड, मेरी तो धड़कन बढ़ गयी,  उसको देख कर क्यों की उसकी चूचियाँ बड़ी बड़ी थी और वो थोड़ी मोटी भी थी, श्यामली थी, घर में गुलाब की भीनी भीनी खुशबु आ रही थी मैंने पूछा खुशबु बड़ी अच्छी आ रही है, बोली हां ये खुसबू आपके लिए है, और मुस्कुरा दी, मैं चुपचाप सोफे पे बैठ गया, और उसके घर को निहारने लगा, जब भी मौक़ा मिल रहा था मैं उसको देख लेता था क्यों की मुझे ये भी लग रहा था की अगर मैं टक टकी लगा कर देखूंगा तो पता नहीं वो क्या सोचेगी, पर मेरी धड़कन तेज हो गया था.

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वो मेरे सामने बैठ गयी, अब उसकी नाईटी के ऊपर से दोनों चूच का थोड़ा थोड़ा गोल गोल पार्ट बीच में दरार दिखने लगा था और पूरा चूच कपडे के ऊपर से ही दिख रहा था, कपडे जाँघों में चिपके थे, यहाँ टक की पेट पे नेवल भी दिख रहा था कपडे के ऊपर से ही, मैं तो पागल हो रहा था, मुझे बस देखना था और खाना खाके ऊपर जाके मुझे मूठ मारना था उसकी याद में. थोड़ा देर तक इधर उधर की बात हुयी फिर बोली मैं खाना लगाऊं तो मैंने हामी भर दी, वो किचन के लिए जाने लगी पीछे से उसके दोनों चूतड़ ऊपर निचे जैसे जा रहा था मेरा कलेजा कट रहा था, ऐसा लग रहा था मैं दौड़कर पकड़ लू उसे, तभी वो एकदम से मुड़ी और मुझे देखि उस समय मैं आँख पहाड़ पहाड़ के आँखे सेक रहा था, मैं शर्मा गया, वो मुस्कुरा दी.

जब तक वो खाना निकाल रही थी मेरे मन में कई सवाल आ रहे थे, की ये सारे कुछ नार्मल तो नहीं है, ऐसा तो कोई नहीं करता है रात के करीब १० बजने बाले है, और वो मुझे इस तरह से देख रही है , बलखा के चल रही है, कुछ तो है इस लड़की के मन में, मैंने एक लम्बी सांस ली, अब मुझे लग रहा था की काश आज रात मैं इसके साथ बिताता तो आनंद आ जाता, वो खाना लेके आ गयी, सेंटर टेबल पर ही हम दोनों खाना खाए, वो मुझे कातिल नज़रो से देख रही थी और बात चित भी चल रही थी.  

खाना खाकर हाथ मुह धोया और मैंने बोला थैंक्स, तो बोली क्यों किस बात का ये तो मेरा फ़र्ज़ है, मैं कहा थैंक्स आपने इतनी की मेरे लिए, तो वो बोली फिर मेरे लिए भी कुछ कर दो और मुस्करा दी. मैंने कहा समझा नहीं, बोली बस मैं यहाँ कह रही हु, माँ यहाँ नहीं है मुझे अकेले डर लगता है, आपके यहाँ भी कोई नहीं है तो आप रात में यही सो जाओ ऐसे भी कल संडे है ऑफिस तो जाना नहीं है आपको.

मैंने कहा ठीक है, बैठ के बातचित करने लगे, फिर मैंने पूछा क्या बात है आप इतने सुन्दर हो फिर भी आपका पति छोड़ दिया है, तो बोली उसने नहीं छोड़ा मैंने उसको छोड़ दिया, क्यों की वो मुझे संतुष्ट नहीं कर पाटा था, और एक साल में एक दिन भी सेक्स नहीं किया, आप बताओ मैं क्या करती, और रोने लगी, मैंने उसके पास बैठ गया और पीठ पे हाथ रख दिया, क्यों की वो मेरे से आधे उम्र की थी, उस समय मुझे खराब लगा पर वो मेरी आँखों में आँखे दाल के देखने लगी और उसके होठ सकपकाने लगे, थोड़ा वो बढ़ी थोड़ा मैं बढ़ा दोनों के होठ मिल गए, वो मेरा पीठ सहलाने लगी मैंने उसका पीठ, वो और करीब हो गयी उसकी चूची मेरे साइन को टच किया तो ऐसा लगा गुलाब का फूल मेरे साइन से रगड़ खा रहा हो, फिर होश ना रहा, मेरा हाथ उसके पुरे शरीर को टटोलने लगा और वो भी मेरे शरीर को टटोलने लगी ।

फिर दोनों खड़े हो गया और एक दूसरे को थामे हुए, बैडरूम में आ गए, वो निचे मैं ऊपर मेरे हाथ में उसका चूच जो की समा नहीं रहा था, और होठ को चूस रहा था, कब हम दोनों ने अपने अपने कपडे उतार दिया पता ही नहीं चला अब बचा तो साँसे अलग अलग और जिस्म एक हो गया, चूत उसकी गीली इतनी हो गयी थी की मेरा लौड़ा चूत में अनायास ही आ जा रहा था, चूत काफी टाइट था

इसवजह से जब बहार मेरा लण्ड निकलता अंडर डालने में थोड़ा जोर लगाना पड़ता वो अपनी आँखे बंद कर के होठो को दाँतों से दबा के, मेरे पीठ को सहलाते हुए, अपने पैरों से मुझे फसाते हुआ निचे से धक्का दे रही थी, और मैं ऊपर से धक्का दे रहा था, फच फच की आवाज और आअह आआह आआअह आआह्ह्ह्ह की आवाज आ रही थी, करीब एक लय में आधे घंटे तक चोदने के बाद हम दोनों निढाल हो गया

मेरा सारा वीर्य उसके चूत में लबालब भर गया था, करीब १० मिनट टक पड़े रहे फिर लण्ड निकाला जब छोटा हो गया था, उसको चूमा और एक दूसरे को पकड़ के बात करने लगे, वो कहने लगी आज मैं संतुष्ट हुई हु, आज रात भर मुझे इसी तरह से सेक्स करो, रात में करीब ४ बार मैंने उसको चोदा. और सो गया मैंने अभी अपने कमरे में नहा के ये कहानी लिख रहा हु, बिलकुल ताज़ी है इसवजह से मैंने अच्छे तरीके से उस समय को शब्दों में आपके सामने ला पाया हु. कैसी लगी मेरी सेक्स की कहानियों अच्छा लगी तो जरूर रेट करें और शेयर भी करे.

Pakistani Kuwari Ladki Ko Choda

Pakistani Kuwari Ladki ki chudai ki kahani

Meri umar 26 saal hai. Mai ek American company mai Katar mai kaam karta tha. Aab meri posting Kuwait mai ho gayi hai.
Kuwait mai office ke pehale din mai sabse mila waha par ek ladki thi, ekdum gori, badan essa ki dil kare abhi use chod du. Jab lunch time hua toh usne mujhe kaha – aap bhi khana kha lo !
Toh maine uske saath khoob baate ki aur maine usko pucha –tum kaha se ho?
Usne bataya ki woh Pakistan se hai,uski umar 26 saal hai aur naam Sadaf Khan ! Woh apne parivaar ke saath Kuwait mai rehati thi. Dosto, aab hum kahani par aate hai ki maine use kaise chod diya.
Uss din Friday tha, mai net par baitha tha toh Sadaf bhi online aa gayi. Usne mujhse pucha – tum kahi ghumne gaye? Aaj chutti hai, kahi bahar ghumne chale jate ! Vaise bhi tum naye ho Kuwait nahi dekha tumne.


Maine use kaha – mera koi dost nahi hai yaha par! nayi jagah mai mei kisi ko janta nahi!
Toh usne kaha – mai hu na dost ! aap mere saath chalo ghumne !
Maine use ha kar di. Usne mujhe ek mall mai bulaya aur mai jaldi se taaiyar hokar waha chala gaya. Hum log shaam ko 4 baje tak ghume.


Phir usne kaha – aaj India-Pakistan ka match hai, mujhe bahut shauk hai match dekhne ka !
Toh maine kaha – mere kamre par chalte hai, waha baith kar match dekhenge.
Waha raazi ho hi gayi. Mera kamra mujhe company ki taraf se mila tha. Hum kamre par pahuch kar match dekhne lage. Usne achanak channel badal diya toh usmai ek ladka ladki ko choom raha tha aur phir uske kapde utar kar chodne laga. Woh yeh dekhkar kuch sharma se gayi aur meri taraf dekhne lagi.
Maine kaha – tumne kabhi kiya hai yeh sab?


Toh usne kaha – uska boy friend tha lekin kabhi sex nahi kiya, kiss kiya tha uske saath.
Mai uske pass jakar bola – kabhi dil karta hai sex karne ka?
Toh woh sharma gayi aur kehane lagi – mai chalti hu aab! Ammi intezaar kar rahi hogi!
Maine kaha – tumne jawab nahi diya?


Toh woh achanak mere seene se chipak gayi aur boli – pyaase ko puch rahe ho ki paani chahiye?
Bus mujhe yeh mauka mila aur mai uske hotho par apne hoth rakh kar choosne laga. Kaafi der tak choosne ke baad usne meri shirt khol di aur maine uski shirt utar fenki. Aab mai underwear mai tha aur woh bra aur penty mai thi. Aab maine uss ki bra aur penty ko bhi utar fenka aur usne mera underwear utar fenka. Aab hum dono ekdum nange the. Maine use mera lund choosne ko kaha toh usne lund muh mai le liya. Kuch der chusne ke baad maine use bister par letne ko kaha aur taange chaudi karne ko kaha. Usne vaisa he kiya toh uski choot ekdum mere samne thi – ekdum gulabi aur mast!
Mai pagalo ki tarah uski choot par toot pada aur chatne laga. Maine kaafi der uski choot chati. Woh pagalo ki tarah karne lagi – aaah aaahhh uuuuuiii.

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Phir usne dhire se kaha – aab chod do mujhe! mujhe chod kar apni bana lo!
Maine apna lund uski choot par rakha aur halka sa dhakka maara toh lund ka top uski choot mai chala gaya. Woh chikh padi, maine jaldi se apne hoth uske hotho par rakhe phir maine use samjhaya – tum kuwari ho na! iss liye dard ho raha hai!
Toh usne kaha kuch karo! bardasht nahi ho raha! bahut dard ho raha hai
Mai uske upar se utha aur lund par tel laga kar phir uski choot mai dala toh lund ek dhakke ke saath addha andar chala gaya. Phir woh chikhi lekin iss baar maine jaldi se uske hoth daba diye aur halke-halke dhakke marne laga. Laga ki uska dard bhi kam hone laga aur woh bhi gand uchal-uchal kar maaze lene lagi. Kaafi der esse karne ke baad maine use apne upar aane ko kaha tohwoh fatafat upar aa gayi aur gand uchal uchal kar dhakke marne lagi. Uski gand kaafi bahar nikali hui thi.Phir maine use kaha – ghodi ban jaayo! mujhe esse chodna hai tumhe!


Toh woh mast awaaz nikalne lagi aaa… uuiii… aur maaze lete hue ghodi ban gayi. Jaisai woh ghodi bani maine uski chikani choot mai lund daal kar dhakke marne laga aur woh mast awaaze nikalti rahi.
Usne kaha – ma jaane wali hu! meri choot se paani nikal raha hai! uiiiin aaaaaah iiiiiii maaaai luvvvvv!
Woh jhad gayi aur maine apne dhakko ki speed badha di aur tab maine use kaha- pehale lund ka pehala paani lene ke liye taiyaar ho jaayo! aur maine do aur jhatke maare aur paani uski choot mai daal diya. Phir usne lund ko chaat kar saaf kiya aur hum dono nahane chale gaye.
Iss tarah hum dono ki chudai ka silsila kai mahino tak chalta raha. Maine kai dafa uski gand bhi maari.
Lekin dosto, aab mai waapis India aa gaya hu kyunki meri company aab mujhe Canada bhejne wali hai. Woh net par mere se baat karti hai aur mujhe yaad karti hai.

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