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भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से

भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से


मेरा नाम विनीता है, आज मैं आपको अपनी एक बड़ी ही हॉट चुदाई की कहानी सूना रही हु, ये चुदाई की कहानी मेरे और मेरे बड़े भैया रणवीर के बारे में है, आप को मेरी ये कहानी बहूत ही ज्यादा हॉट लगेगी क्यों की आज भी वो दिन जब याद करती हु, तभी मेरी चूत गीली हो जाती है. और अपनी चूचियां खुद ही अपने हाथों से मसलने लगती हु, आज मैं कोशिश करुँगी जो उस रात को हुआ उसे बताने की..

भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से

मैं 21 साल की हु, मैं कानपूर की रहने बाली हु, मेरे भैया जो मेरे से सिर्फ एक साल बड़े है, ये कहानी जुलाई की है.

मेरी शादी 12 जून को हुई थी. और 2 जुलाई को मेरे भैया की शादी हुई, मैं अपने ससुराल से वापस आ गई थी क्यों की भैया की जो शादी होनी थी.

दोस्तों पर मेरे चूत को लंड की आदत हो गई थी क्यों की शादी के बाद थोड़े दिनों तक ही ससुराल में रही थी, तो खूब चुदी थी, पर जब मैं अपने मायके आई तो मुझे अपने पति का लंड याद आने लगा था.

भैया के शादी में मेरे पति भी आये थे पर वो दो दिन में ही चले गए और मैं थोड़े दिन के लिए और रह गई थी.

भैया की शादी के चार दिन बाद की ये कहानी है. माँ और पापा दोनों मन्नत मांगे थे की दोनों बच्चों की शादी करने के बाद हरिद्वार जाना था. और वो दोनों चले गए.

घर में मैं और नई नवेली भाभी और भैया थे, मैं तो दिन रात सजी संवरी रहती थी क्यों की मेरी भी शादी हुई थी, हम दोनों ननद भाभी एक दूसरे का लाल लाल कपडे चूड़ियां, शेयर करते थे, और खूब खुश रहते थे

एक दिन की बात है हम दोनों ननद और भाभी ही घर पर थे, क्यों की भैया की जिगरी दोस्त की शादी थी इसलिए वो बरात चले गए थे, वो लेट नाईट वापस आते तो मैं और भाभी दोनों एक ही बेड पर सो गए थे, रात को लाइट चली गई थी, गर्मी का दिन था, पंखा भी बंद हो गया था, भाभी ज्यादा कोमल है, क्यों की वो दिल्ली की रहने बाली है.
वो हमेशा एयर कंडीशनर में रहने बाली है, यहाँ पंखा भी चलना बंद हो गया था. इसलिए वो इधर उधर घूमने लगी. और मेरी नींद कब लग गई पता ही नहीं चला.

अचानक मेरे होठ को किसी ने जोर से चूमने लगा. और मेरी चूचियों को दबाने लगा. मैंने देखा तो भैया थे, उनके मुह से शराब की बदबू आ रही थी, मैंने कुछ बोलना चाही पर उन्होंने मेरा मुह दबा दिया, जोर से और बोले की विनीता सुन लेगी.

मैं समझ गई को वो भाभी समझ कर मेरी चूचियों को दबा रहे थे और किश कर रहे थे, असल में हम दोनों दुल्हन की तरह ही थे लाल लाल साडी में ऊपर से बिजली नहीं थी. इसवजह से वो मुझे पहचान नहीं पाए. और वो मेरे ब्लाउज के हुक को खोल दिए और मेरी चूचियों को दबाने लगे. मैंने कहा ये क्या कर रहे हो, आपने शराब पिया है.
उन्होंने मेरा मुह फिर से दबा दिया, वो काफी ज्यादा नशा में थे. वो काफी मजबूत है इसलिए मैं उनको रोक नहीं पाई.
और देखते ही देखते उन्होंने मेरी साडी ऊपर कर दी और पेंटी उतार दी, अब दोस्तों सच बताऊँ मुझे भी अच्छा लगने लगा.
क्यों की मैं खुद भी लंड की प्यासी थी. मैं चुचाप हो गई. और उन्होंने अपना लंड निकाला और मेरी चूत के ऊपर रखा और जोर से पेल दिए. मैं छटपटा गई.

क्यों की भैया का लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा मोटा और लंबा महसूस हो रहा था. मेरे मुह से चीख निकल गई.
उन्होंने फिर से मेरे मुह को बंद कर दिया और बोले साली तुमको समझ नहीं आ रहा था. मेरी बहन को पता चल जायेगा. वो आँगन में सोई हुई है.
मैंने समझ गई की भाभी आँगन में सोई है. लाइट जाने की वजह से. मैं चुपचाप हो गई. और लंड का मजा लेने लगी.
मैंने अपना ब्रा का हुक खोल दिया, और मैंने अपनी चूचियां अपने भाई के मुह से लगा दी. वो मेरी चूचियों को अपनी दांतो से काट रहे थे. और मसल रहे थे. मैं सातवे आसमान में थी.
मेरे शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया था. मैं अपने आप को भाई के हवाले कर चुकी थी. और चुदाई का मजा ले रही थी.
भैया जोर जोर से धक्का लगा रहे थे. मैं भी अपना गांड उठा उठा कर लंड पेलवा रही थी. मेरी चूत काफी गीली हो गई थी. चूचियां तन गई थी. मैंने अपने भाई को बाहों में भर लिया, और अपने पैरो से लपेट ली.
मेरा भाई नशे में होने के कारण वो समझ ही नहीं पा रहा था की आज उसकी बहन चुद रही थी. भाभी तो गांड फाड़ कर आँगन में सो रही थी. उसके बाद वो गालियां दे दे के चोद रहे थे.
दोस्तों क्या बताऊँ पति से ज्यादा खुश भैया कर रहे थे. उनका गठीला बदन लंबा लौड़ा, मोटा लौड़ा और वो जोर जोर से चोदना नशे की हालत में. करीब २० मिनट की चुदाई मुझे खुश कर दिया. और वो झड़ गए. और झड़ते ही तुरंत ही सो गए.
मैंने अपने कपडे ठीक की ब्रा पहनी, ब्लाउज पहनी, तब तक भैया खराटे लगाने लगे. मैं उठी और आँगन में जाके भाभी को उठाई, बोली की भैया आ गए है.
वो जाकर भैया के साथ सो गई. और मैं वही आँगन में लेट गई. नींद जब खुली तो सुबह हो चुकी थी. भैया को आजतक पता नहीं चला की वो रात भाबी को नहीं अपने बहन यानी की मुझे चोदा था

सगी बहन अपने भाई से बारिश मैं चुदी

सगी बहन अपने भाई से बारिश मैं चुदी, sagi bahan apne bhai se barish me chudi


मैं एक प्राईवेट स्कूल में पढ़ाती हूँ। उसका एक बड़ा कारण है कि एक तो स्कूल कम समय के लिये लगता है और इसमें छुट्टियाँ खूब मिलती हैं। बी एड के बाद मैं तब से इसी टीचर की जॉब में हूँ। हाँ बड़े शहर में रहने के कारण मेरे घर पर बहुत से जान पहचान वाले आकर ठहर जाते हैं खास कर मेरे अपने गांव के लोग। इससे उनका होटल में ठहरने का खर्चा, खाने पीने का खर्चा भी बच जाता है। वो लोग यह खर्चा मेरे घर में फ़ल सब्जी लाने में व्यय करते हैं। एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में मेरे पास दो कमरो का सेट है।

जैसे कि खाली घर भूतों का डेरा होता है वैसे ही खाली दिमाग भी शैतान का घर होता है। बस जब घर में मैं अकेली होती हूँ तो कम्प्यूटर में मुझे सेक्स साईट देखना अच्छा लगता है। उसमें कई सेक्सी क्लिप होते है चुदाई के, शीमेल्स के क्लिप... लेस्बियन के क्लिप... कितना समय कट जाता है मालूम ही नहीं पड़ता है। कभी कभी तो रात के बारह तक बज जाते हैं।

मेरा दिल किसी ने बाहर निकाल कर रख दिया हो। इन दिनों मैं एक मोटी मोमबती ले आई थी। बड़े जतन से मैंने उसे चाकू से काट कर उसका अग्र भाग सुपारे की तरह से गोल बना दिया था। फिर उस पर कन्डोम चढ़ा कर मैं बहुत उत्तेजित होने पर अपनी चूत में पिरो लेती थी। पहले तो बहुत कठोर लगता था। पर धीरे धीरे उसने मेरी चूत के पट खोल दिये थे। मेरी चूत की झिल्ली इन्हीं सभी कारनामों की भेंट चढ़ गई थी।

फिर मैं कभी कभी उसका इस्तेमाल अपनी गाण्ड के छेद पर भी कर लेती थी। मैं तेल लगा कर उससे अपनी गाण्ड भी मार लिया करती थी। फिर एक दिन मैं बहुत मोटी मोमबत्ती भी ले आई। वो भी मुझे अब तो भली लगने लगी थी। पर मुझे अधिकतर इन कामों में अधिक आनन्द नहीं आता था। बस पत्थर की तरह से मुझे चोट भी लग जाती थी।

उन्हीं दिनों मेरे गांव से मेरा भाई भोंदू किसी इन्टरव्यू के सिलसिले में आया। उसकी पहले तो लिखित परीक्षा थी... फिर इन्टरव्यू था और फिर ग्रुप डिस्कशन था। फिर उसके अगले ही दिन चयनित अभ्यर्थियों की सूची लगने वाली थी।

sagi bahan apne bhai se barish me chudi


मुझे याद है वो वर्षा के दिन थे... क्योंकि मुझे भोंदू को कार से छोड़ने जाना पड़ता था। गाड़ी में पेट्रोल आदि वो ही भरवा देता था। उसकी लिखित परीक्षा हो गई थी। दो दिनों के बाद उसका एक इन्टरव्यू था। जैसे ही वो घर आया था वो पूरा भीगा हुआ था। जोर की बरसात चल रही थी। मैं बस स्नान करके बाहर आई ही थी कि वो भी आ गया। मैंने तो अपनी आदत के आनुसार एक बड़ा सा तौलिया शरीर पर डाल लिया था, पर आधे मम्मे छिपाने में असफ़ल थी। नीचे मेरी गोरी गोरी जांघें चमक रही थी।

इन सब बातों से बेखबर मैंने भोंदू से कहा- नहा लो ! चलो... फिर कपड़े भी बदल लेना...

पर वो तो आँखें फ़ाड़े मुझे घूरने में लगा था। मुझे भी अपनी हालत का एकाएक ध्यान हो आया और मैं संकुचा गई और शरमा कर जल्दी से दूसरे कमरे में चली गई। मुझे अपनी हालत पर बहुत शर्म आई और मेरे दिल में एक गुदगुदी सी उठ गई। पर वास्तव में यह एक बड़ी लापरवाही थी जिसका असर ये था कि भोंदू का मुझे देखने का नजरिया बदल गया था। मैंने जल्दी से अपना काला पाजामा और एक ढीला ढाला सा टॉप पहन लिया और गरम-गरम चाय बना लाई।

वो नहा धो कर कपड़े बदल रहा था। मैंने किसी जवान मर्द को शायद पहली बार वास्तव में चड्डी में देखा था। उसके चड्डी के भीतर लण्ड का उभार... उसकी गीली चड्डी में से उसके सख्त उभरे हुये और कसे हुये चूतड़ और उसकी गहराई... मेरा दिल तेजी से धड़क उठा। मैं 24 वर्ष की कुँवारी लड़की... और भोंदू भी शायद इतनी ही उम्र का कुँवारा लड़का...

जाने क्या सोच कर एक मीठी सी टीस दिल में उठ गई। दिल में गुदगुदी सी उठने लगी। भोंदू ने अपना पाजामा पहना और आकर चाय पीने के लिये सोफ़े पर बैठ गया।

पता नहीं उसे देख कर मुझे अभी क्यू बहुत शर्म आ रही थी। दिल में कुछ कुछ होने लगा था। मैं हिम्मत करके वहीं उसके पास बैठी रही। वो अपने लिखित परीक्षा के बारे में बताता रहा।

फिर एकाएक उसके सुर बदल गये... वो बोला- मैंने आपको जाने कितने वर्षों के बाद देखा है... जब आप छोटी थी... मैं भी...

"जी हाँ ! आप भी छोटे थे... पर अब तो आप बड़े हो गये हो..."

"आप भी तो इतनी लम्बी और सुन्दर सी... मेरा मतलब है... बड़ी हो गई हैं।"

मैं उसकी बातों से शरमा रही थी। तभी उसका हाथ धीरे से बढ़ा और मेरे हाथ से टकरा गया। मुझ पर तो जैसे हजारों बिजलियाँ टूट पड़ी। मैं तो जैसे पत्थर की बुत सी हो गई थी। मैं पूरी कांप उठी। उसने हिम्मत करते हुये मेरे हाथ पर अपना हाथ जमा दिया।

"भोंदू भैया आप यह क्या कर रहे हैं? मेरे हाथ को तो छोड़..."

"बहुत मुलायम है ... जी करता है कि..."

"बस... बस... छोड़िये ना मेरा हाथ... हाय राम कोई देख लेगा..."

भोंदू ने मुस्कराते हुये मेरा हाथ छोड़ दिया।

अरे उसने तो हाथ छोड़ दिया- वो मेरा मतलब... वो नहीं था...

मेरी हिचकी सी बंध गई थी।

उसने मुझे बताया कि वो लौटते समय होटल से खाना पैक करवा कर ले आया था। बस गर्म करना है।

"ओह्ह्ह ! मुझे तो बहुत आराम हो गया... खाने बनाने से आज छुट्टी मिली।"

शाम गहराने लगी थी, बादल घने छाये हुये थे... लग रहा था कि रात हो गई है। बादल गरज रहे थे... बिजली भी चमक रही थी... लग रहा था कि जैसे मेरे ऊपर ही गिर जायेगी। पर समय कुछ खास नहीं हुआ था। कुछ देर बाद मैंने और भोंदू ने भोजन को गर्म करके खा लिया। मुझे लगा कि भोंदू की नजरें तो आज मेरे काले पाजामे पर ही थी।मेरे झुकने पर मेरी गाण्ड की मोहक गोलाइयों का जैसे वो आनन्द ले रहा था। मेरी उभरी हुई छातियों को भी वो आज ललचाई नजरों से घूर रहा था। मेरे मन में एक हूक सी उठ गई। मुझे लगा कि मैं जवानी के बोझ से लदी हुई झुकी जा रही हूँ... मर्दों की निगाहों के द्वारा जैसे मेरा बलात्कार हो रहा हो। मैंने अपने कमरे में चली आई।

बादल गरजने और जोर से बिजली तड़कने से मुझे अन्जाने में ही एक ख्याल आया... मन मैला हो रहा था, एक जवान लड़के को देख कर मेरा मन डोलने लगा था।

"भैया... यहीं आ जाओ... देखो ना कितनी बिजली कड़क रही है। कहीं गिर गई तो?"

"अरे छोड़ो ना दीदी... ये तो आजकल रोज ही गरजते-बरसते हैं।"

ठण्डी हवा का झोंका, पानी की हल्की फ़ुहारें... आज तो मन को डांवाडोल कर रही थी। मन में एक अजीब सी गुदगुदी लगने लगी थी। भोंदू भी मेरे पास खिड़की के पास आ गया। बाहर सूनी सड़क... स्ट्रीटलाईट अन्धेरे को भेदने में असफ़ल लग रही थी। कोई इक्का दुक्का राहगीर घर पहुँचने की जल्दी में थे। तभी जोर की बिजली कड़की फिर जोर से बादल गर्जन की धड़ाक से आवाज आई।

मैं सिहर उठी और अन्जाने में ही भोंदू से लिपट गई,"आईईईईईई... उफ़्फ़ भैया..."

भोंदू ने मुझे कस कर थाम लिया,"अरे बस बस भई... अकेले में क्या करती होगी...?" वो हंसा।

फिर शरारत से उसने मेरे गालों पर गुदगुदी की। तभी मुहल्ले की बत्ती गुल हो गई। मैं तो और भी उससे चिपक सी गई। गुप्प अंधेरा... हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।

"भैया मत जाना... यहीं रहना।"

भोंदू ने शरारत की... नहीं शायद शरारत नहीं थी... उसने जान करके कुछ गड़बड़ की। उसका हाथ मेरे से लिपट गया और मेरे चूतड़ के एक गोले पर उसने प्यार से हाथ घुमा दिया। मेरे सारे तन में एक गुलाबी सी लहर दौड़ गई। मेरा तन को अब तक किसी मर्द के हाथ ने नहीं छुआ था। ठण्डी हवाओं का झोंका मन को उद्वेलित कर रहा था। मैं उसके तन से लिपटी हुई... एक विचित्र सा आनन्द अनुभव करने लगी थी।

अचानक मोटी मोटी बून्दों की बरसात शुरू हो गई। बून्दें मेरे शरीर पर अंगारे की तरह लग रही थी।भोंदू ने मुझे दो कदम पीछे ले कर अन्दर कर लिया।

मैंने अन्जानी चाह से भोंदू को देखा... नजरें चार हुई... ना जाने नजरों ने क्या कहा और क्या समझा... भोंदू ने मेरी कमर को कस लिया और मेरे चेहरे पर झुक गया। मैं बेबस सी, मूढ़ सी उसे देखती रह गई। उसके होंठ मेरे होंठों से चिपकने लगे। मेरे नीचे के होंठ को उसने धीरे से अपने मुख में ले लिया। मैं तो जाने किस जहाँ में खोने सी लगी। मेरी जीभ से उसकी जीभ टकरा गई। उसने प्यार से मेरे बालों पर हाथ फ़ेरा... मेरी आँखें बन्द होने लगी... शरीर कांपता हुआ उसके बस में होता जा रहा था। मेरे उभरे हुये मम्मे उसकी छाती से दबने लगे। उसने अपनी छाती से मेरी छाती को रगड़ा मार दिया, मेरे तन में मीठी सी चिन्गारी सुलग उठी।

उसका एक हाथ अब मेरे वक्ष पर आ गया था और फिर उसका एक हल्का सा दबाव ! मेरी तो जैसे जान ही निकल गई।

"भोंदू... अह्ह्ह्ह...!"

"दीदी, यह बरसात और ये ठण्डी हवायें... कितना सुहाना मौसम हो गया है ना..."

और फिर उसके लण्ड की गुदगुदी भरी चुभन नीचे मेरी चूत के आस-पास होने लगी। उसका लण्ड सख्त हो चुका था। यह गड़ता हुआ लण्ड मोमबत्ती से बिल्कुल अलग था। नर्म सा... कड़क सा... मधुर स्पर्श देता हुआ। मैं अपनी चूत उसके लण्ड से और चिपकाने लगी। उसके लण्ड का उभार अब मुझे जोर से चुभ रहा था। तभी हवा के एक झोंके के साथ वर्षा की एक फ़ुहार हम पर पड़ीं। मैंने जल्दी से मुड़ कर दरवाजा बन्द ही कर दिया।

ओह्ह ! यह क्या ?

मेरे घूमते ही भोंदू मेरी पीठ से चिपक गया और अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर रख दिये। मैंने नीचे मम्मों को देखा... मेरे दोनों कबूतरों को जो उसके हाथों की गिरफ़्त में थे। उसने एक झटके में मुझे अपने से चिपका लिया और अपना बलिष्ठ लण्ड मेरे चूतड़ों की दरार में घुमाने लगा। मैंने अपनी दोनों टांगों को खोल कर उसे अपना लण्ड ठीक से घुसाने में मदद की।

उफ़्फ़ ! ये तो मोमबत्ती जैसा बिल्कुल भी नहीं लगा। कैसा नरम-सख्त सा मेरी गाण्ड के छेद से सटा हुआ... गुदगुदा रहा था।

मैंने सारे आनन्द को अपने में समेटे हुये अपना चेहरा घुमा कर ऊपर दिया और अपने होंठ खोल दिये।भोंदू ने बहुत सम्हाल कर मेरे होंठों को फिर से पीना शुरू कर दिया। इन सारे अहसास को... चुभन को... मम्मों को दबाने से लेकर चुम्बन तक के अहसास को महसूस करते करते मेरी चूत से पानी की दो बून्दें रिस कर निकल गई। मेरी चूत में एक मीठेपन की कसक भरने लगी।

मेरे घूमते ही भोंदू मेरी पीठ से चिपक गया और अपने दोनों हाथ मेरे मम्मों पर रख दिये। मैंने नीचे मम्मों को देखा... मेरे दोनों कबूतरों को जो उसके हाथों की गिरफ़्त में थे। उसने एक झटके में मुझे अपने से चिपका लिया और अपना बलिष्ठ लण्ड मेरे चूतड़ों की दरार में घुमाने लगा। मैंने अपनी दोनों टांगों को खोल कर उसे अपना लण्ड ठीक से घुसाने में मदद की।

उफ़्फ़ ! ये तो मोमबत्ती जैसा बिल्कुल भी नहीं लगा। कैसा नरम-सख्त सा मेरी गाण्ड के छेद से सटा हुआ... गुदगुदा रहा था।

मैंने सारे आनन्द को अपने में समेटे हुये अपना चेहरा घुमा कर ऊपर दिया और अपने होंठ खोल दिये। भोंदू ने बहुत सम्हाल कर मेरे होंठों को फिर से पीना शुरू कर दिया। इन सारे अहसास को... चुभन को... मम्मों को दबाने से लेकर चुम्बन तक के अहसास को महसूस करते करते मेरी चूत से पानी की दो बून्दें रिस कर निकल गई। मेरी चूत में एक मीठेपन की कसक भरने लगी।

"दीदी... प्लीज मेरा लण्ड पकड़ लो ना... प्लीज !"

मैंने अपनी आँखें जैसे सुप्तावस्था से खोली, मुझे और क्या चाहिये था। मैंने अपना हाथ नीचे बढ़ाते हुये अपने दिल की इच्छा भी पूरी की। उसका लण्ड पजामे के ऊपर से पकड़ लिया।

"भैया ! बहुत अच्छा है... मोटा है... लम्बा है... ओह्ह्ह्ह्ह !"

उसने अपना पजामा नीचे सरका दिया तो वो नीचे गिर पड़ा। फिर उसने अपनी छोटी सी अण्डरवियर भी नीचे खिसका दी। उसका नंगा लण्ड तो बिल्कुल मोमबत्ती जैसा नहीं था राम... !! यह तो बहुत ही गुदगुदा... कड़क... और टोपे पर गीला सा था। मेरी चूत लपलपा उठी... मोमबती लेते हुये बहुत समय हो गया था अब असली लण्ड की बारी थी। उसने मेरे पाजामे का नाड़ा खींचा और वो झम से नीचे मेरे पांवों पर गिर पड़ा।

"दीदी चलो, एक बात कहूँ?"

"क्या...?"

"सुहागरात ऐसे ही मनाते हैं ! है ना...?"

"नहीं... वो तो बिस्तर पर घूंघट डाले दुल्हन की चुदाई होती है।"

तो दीदी, दुल्हन बन जाओ ना... मैं दूल्हा... फिर अपन दोनों सुहागरात मनायें?"

मैंने उसे देखा... वो तो मुझे जैसे चोदने पर उतारू था। मेरे दिल में एक गुदगुदी सी हुई, दुल्हन बन कर चुदने की इच्छा... मैं बिस्तर पर जा कर बैठ गई और अपनी चुन्नी सर पर दुल्हनिया की तरह डाल ली।

वो मेरे पास दूल्हे की तरह से आया और धीरे से मेरी चुन्नी वाला घूँघट ऊपर किया। मैंने नीचे देखते हुये थरथराते हुये होंठों को ऊपर कर दिया। उसने अपने अधर एक बार फ़िर मेरे अधरों से लगा दिये... मुझे तो सच में लगने लगा कि जैसे मैं दुल्हन ही हूँ। फिर उसने मेरे शरीर पर जोर डालते हुये मुझे लेटा दिया और वो मेरे ऊपर छाने लगा। मेरी कठोर चूचियाँ उसने दबा दी। मेरी दोनों टांगों के बीच वो पसरने लगा। नीचे से तो हम दोनो नंगे ही थे। उसका लण्ड मेरी कोमल चूत से भिड़ गया।

"उफ़्फ़्फ़... उसका सुपारा... " मेरी चूत को खोलने की कोशिश करने लगा। मेरी चूत लपलपा उठी। पानी से चिकनी चूत ने अपना मुख खोल ही दिया और उसके सुपारे को सरलता से निगल लिया- यह तो बहुत ही लजीज है... सख्त और चमड़ी तो मुलायम है।

"भैया... बहुत मस्त है... जोर से घुसा दे... आह्ह्ह्ह्ह... मेरे राजा..."

मैंने कैंची बना कर उसे जैसे जकड़ लिया। उसने अपने चूतड़ उठा कर फिर से धक्का मारा...

"उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़... मर गई रे... दे जरा मचका के... लण्ड तो लण्ड ही होता है राम..."

उसके धक्के तो तेज होते जा रहे थे... फ़च फ़च की आवाजें तेज हो गई... यह किसी मर्द के साथ मेरी पहली चुदाई थी... जिसमें कोई झिल्ली नहीं फ़टी... कोई खून नहीं निकला... बस स्वर्ग जैसा सुख... चुदाई का पहला सुख... मैं तो जैसे खुशी के मारे लहक उठी। फिर मैं धीरे धीरे चरमसीमा को छूने लगी। आनन्द कभी ना समाप्त हो । मैं अपने आप को झड़ने से रोकती रही... फिर आखिर मैं हार ही गई... मैं जोर से झड़ने लगी। तभी भोंदू भी चूत के भीतर ही झड़ने लगा। मुझसे चिपक कर वो यों लेट गया कि मानो मैं कोई बिस्तर हूँ।

"हो गई ना सुहाग रात हमारी...?"

"हाँ दीदी... कितना मजा आया ना...!"

"मुझे तो आज पता चला कि चुदने में कितना मजा आता है राम..."

बाहर बरसात अभी भी तेजी पर थी। भोंदू मुझे मेरा टॉप उतारने को कहने लगा। उसने अपनी बनियान उतार दी और पूरा ही नंगा हो गया। उसने मेरा भी टॉप उतारने की गरज से उसे ऊपर खींचा। मैंने भी यंत्रवत हाथ ऊपर करके उसे टॉप उतारने की सहूलियत दे दी।

हम दोनो जवान थे, आग फिर भड़कने लगी थी... बरसाती मौसम वासना बढ़ाने में मदद कर रहा था। भोंदू बिस्तर पर बैठे बैठे ही मेरे पास सरक आया और मुझसे पीछे से चिपकने लगा। वहाँ उसका इठलाया हुआ सख्त लण्ड लहरा रहा था। उसने मेरी गाण्ड का निशाना लिया और मेरी गाण्ड पर लण्ड को दबाने लगा।

मैंने तुरन्त उसे कहा- तुम्हारे लण्ड को पहले देखने तो दो... फिर उसे चूसना भी है।

वो खड़ा हो गया और उसने अपना तना हुआ लण्ड मेरे होंठों से रगड़ दिया। मेरा मुख तो जैसे आप ही खुल गया और उसका लण्ड मेरे मुख में फ़ंसता चला गया। बहुत मोटा जो था। मैंने उसे सुपारे के छल्ले को ब्ल्यू फ़िल्म की तरह नकल करते हुये जकड़ लिया और उसे घुमा घुमा कर चूसने लगी। मुझे तो होश भी नहीं रहा कि आज मैं ये सब सचमुच में कर रही हूँ।

तभी उसकी कमर भी चलने लगी... जैसे मुँह को चोद रहा हो। उसके मुख से तेज सिसकारियाँ निकलने लगी। तभी भोंदू का ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। मुझे एकदम से खांसी उठ गई... शायद गले में वीर्य फ़ंसने के कारण। भोंदू ने जल्दी से मुझे पानी पिलाया।

पानी पिलाने के बाद मुझे पूर्ण होश आ चुका था। मैं पहले चुदने और फिर मुख मैथुन के अपने इस कार्य से बेहद विचलित सी हो गई थी... मुझे बहुत ही शर्म आने लगी थी। मैं सर झुकाये पास में पड़ी कुर्सी पर बैठ गई।

"भोंदू... सॉरी... सॉरी..."

"दीदी, आप तो बेकार में ही ऐसी बातें कर रहीं हैं... ये तो इस उम्र में अपने आप हो जाता है... फिर आपने तो अभी किया ही क्या है?"

"इतना सब तो कर लिया... बचा क्या है?"

"सुहागरात तो मना ली... अब तो बस गाण्ड मारनी बाकी है।"

मुझे शरम आते हुये भी उसकी इस बात पर हंसी आ गई।

"यह बात हुई ना... दीदी... हंसी तो फ़ंसी... तो हो जाये एक बार...?"

"एक बार क्या हो जाये..." मैंने उसे हंसते हुये कहा।

"अरे वही... मस्त गाण्ड मराई... देखना दीदी मजा आ जायेगा..."

"अरे... तू तो बस... रहने दे..."

फिर मुझे लगा कि भोंदू ठीक ही तो कह रहा है... फिर करो तो पूरा ही कर लेना चाहिये... ताकि गाण्ड नहीं मरवाने का गम तो नहीं हो अब मोमबत्ती को छोड़, असली लण्ड का मजा तो ले लूँ।

"दीदी... बिना कपड़ों के आप तो काम की देवी लग रही हो...!"

"और तुम... अपना लण्ड खड़ा किये कामदेव जैसे नहीं लग रहे हो...?" मैंने भी कटाक्ष किया।

"तो फिर आ जाओ... इस बार तो..."

"अरे... धत्त... धत्त... हटो तो..."

मैं उसे धीरे से धक्का दे कर दूसरे कमरे में भागी। वो भी लपकता हुआ मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से कमर से पकड़ लिया। और मेरी गाण्ड में अपना लौड़ा सटा दिया।

"कब तक बचोगी से लण्ड से..."

"और तुम कब तक बचोगे...? इस लण्ड को तो मैं खा ही जाऊँगी।"

उसका लण्ड मेरी गाण्ड के छेद में मुझे घुसता सा लगा।"अरे रुको तो... वो क्रीम पड़ी है... मैं झुक जाती हूँ... तुम लगा दो।"

भोंदू मुस्कराया... उसने क्रीम की शीशी उठाई और अपने लण्ड पर लगा ली... फिर मैं झुक गई... बिस्तर पर हाथ लगाकर बहुत नीचे झुक कर क्रीम लगाने का इन्तजार करने लगी। वह मेरी गाण्ड के छिद्र में गोल झुर्रियों पर क्रीम लगाने लगा। फिर उसकी अंगुली गाण्ड में घुसती हुई सी प्रतीत हुई। एक तेज मीठी सी गुदगुदी हुई। उसके यों अंगुली करने से बहुत आनन्द आने लगा था। अच्छा हुआ जो मैं चुदने को राजी हो गई वरना इतना आनन्द कैसे मिलता।

उसके सुपारा तो चिकनाई से बहुत ही चिकना हो गया था। उसने मेरी गाण्ड के छेद पर सुपारा लगा दिया। मुझे उसका सुपारा महसूस हुआ फिर जरा से दबाव से वो अन्दर उतर गया।

"उफ़्फ़्फ़ ! यह तो बहुत आनन्दित करने वाला अनुभव है।"

"दर्द तो नहीं हुआ ना..."

"उह्ह्ह... बिल्कुल नहीं ! बल्कि मजा आया... और तो ठूंस...!'

"अब ठीक है... लगी तो नहीं।"

"अरे बाबा... अन्दर धक्का लगा ना।"

वह आश्चर्य चकित होते हुये समझदारी से जोर लगा कर लण्ड घुसेड़ने लगा।

"उस्स्स्स्स... घुसा ना... जल्दी से... जोर से..."

इस बार उसने अपना लण्ड ठीक से सेट किया और तीर की भांति अन्दर पेल दिया।

"इस बार दर्द हुआ..."

"ओ...ओ...ओ... अरे धीरे बाबा..."

"तुझे तो दीदी, दर्द ही नहीं होता है...?"

"तू तो...? अरे कर ना...!"

"चोद तो रहा हूँ ना...!"

उसने मेरी गाण्ड चोदना शुरू कर दिया... मुझे मजा आने लगा। उसका लम्बा लण्ड अन्दर बाहर घुसता निकलता महसूस होने लगा था। उसने अब एक अंगुली मेरी चूत में घुमाते हुये डाल दी। बीच बीच में वो अंगुली को गाण्ड की तरफ़ भी दबा देता था तब उसका गाण्ड में फ़ंसा हुआ लण्ड और उसकी अंगुली मुझे महसूस होती थी। उसका अंगूठा और एक अंगुली मेरे चुचूकों को गोल गोल दबा कर खींच रहे थे। सब मिला कर एक अद्भुत स्वर्गिक आनन्द की अनुभूति हो रही थी। आनन्द की अधिकता से मेरा पानी एक बार फिर से निकल पड़ा... उसने भी साथ ही अपना लण्ड का वीर्य मेरी गाण्ड में ही निकाल दिया।

बहुत आनन्द आया... जब तक उसका इन्टरव्यू चलाता रहा... उसने मुझे उतने दिनों तक सुहानी चुदाई का आनन्द दिया। मोमबत्ती का एक बड़ा फ़ायदा यह हुआ कि उससे तराशी हुई मेरी गाण्ड और चूत को एकदम से उसका भारी लण्ड मुझे झेलना नहीं पड़ा। ना ही तो मुझे झिल्ली फ़टने का दर्द हुआ और ना ही गाण्ड में पहली बार लण्ड लेने से कोई दर्द हुआ।... बस आनन्द ही आनन्द आया... ।

एक वर्ष के बाद मेरी भी शादी हो गई... पर मैं कुछ कुछ सुहागरात तो मना ही चुकी थी। पर जैसा कि मेरी सहेलियों ने बताया था कि जब मेरी झिल्ली फ़टेगी तो बहुत तेज दर्द होगा... तो मेरे पति को मैंने चिल्ला-चिल्ला कर खुश कर दिया कि मेरी तो झिल्ली फ़ाड़ दी तुमने... वगैरह...

गाण्ड चुदाते समय भी जैसे मैंने पहली बार उद्घाटन करवाया हो... खूब चिल्ल-पों की...

आपको को जरूर हंसी आई होगी मेरी इस बात पर... पर यह जरूरी है, ध्यान रखियेगा...

भैया से बारिश मैं चुदी

सोतोले भाइयों ने मेरा बलात्कार किया

सौतेली बहिन का दो भाइयों ने बलात्कार किया,सौतोले भाइयों ने मेरा बलात्कार किया


हेल्लो.. मेरा नाम सीमा रावत हें, मे 21 साल की हूँ. आज मे आप को अपनी बर्बादी की कहानी सुनाने जा रही हूँ की केसे मे बच्ची से रंडी बन गयी। जब मे 10 साल की थी तब मेरी मम्मी का स्वर्गवास हो गया था. तब मेरे पिताजी ने एक और औरत से शादी कर ली जिसको दो लड़के थे विक्रम जो की मुझसे 4साल बड़ा है और वरुण मुझसे 5 साल. मेरे पिताजी काम पर चले जाते थे. मेरी सोतेली माँ मुझ पर बहुत जुल्म करती थी. मुझसे सारे घर का काम करवाती थी और मारती भी थी।

उसने मेरे पिताजी को यह कह कर की मेरी पढ़ाई पर बहुत पैसे लगाते हैं और वेसे भी लडकी जात पढ़ कर क्या करेगी, जब मे 10th क्लास मे थी तभी मुझे स्कूल से भी निकलवा दिया.

ये उस वक़्त की बात है जब मे 16 साल की थी। मे एक दम गोरी थी। 16साल की उम्र मे बहुत चिकनी हो गयी थी. मेरे बोब्स छोटे मगर बिल्कुल टाईट हो गये थे. मेरी कमर एक दम पतली और पेट एक दम फ्लॅट था. मेरी चूत और गांड के छेद एक दम टाइट और बिल्कुल छोटे थे. चूत एकदम गुलाबी है और उस पर एक भी बाल नही था. एकदम चिकनी हाथ रखो तो फिसल जाए. मेने महसूस किया की मेरे सोतेले भाई मुझ पर गंदी नज़र रखने लगे थे।

वो मेरे बोब्स और गांड को घूर घूर के देखते, लेकिन मेने उन्हे यह पता नही लगने दिया की मुझे पता है की वो मुझे देखते हैं. उन्ही दिनो मेरी माँ का भाई मर गया जिसकी वजह से मेरे पिताजी, मेरी माँ और विक्रम को एक हफ्ते के लिए जाना पढ़ गया लेकिन वरुण किसी ज़रूरी काम की वजह से ना जा सका जो मुझे बाद मे पता चला की उसने बहाना बनाया था. उसे कोई ज़रूरी काम नही था।

जिस दिन मेरे घर वाले गये उस दिन रात को खाने के बाद जब मे सोने चली गयी तो रात को 12 बजे वरुण मेरे कमरे मे आया और मुझे कोल्ड ड्रिंक पीने को दी. मे बहुत खुश हुई पहली बार मेरे भाई ने मुझे कुछ दिया है. मुझे उस कोल्ड ड्रिंक का टेस्ट कुछ अलग लगा लेकिन मे वो पी गयी. उसके 10 मिनट बाद मेरी हालत खराब होने लगी. मुझसे हिला तक नही जा रहा था. मे बेड पर लेटी हुई थी. बोलने मे भी दिक्कत हो रही थी. मेने बहुत मुश्किल से वरुण से कहा की मेरी हालत खराब हो रही है तो उसने कहा की वो तो होगी क्युकी मेने कोल्ड ड्रिंक मे दवा डाली थी जिससे तू 9,10घंटो तक अपनी उंगली तक नही हिला सकेगी और ना ही ज्यादा ज़ोर से बोल सकेगी… मेने उस से पूछा की भैया आपने ऐसा क्यों किया? तो वो बोला की बहुत दिनो से तेरे चिकने बदन को चोदने का मन कर रहा था. यह सुन कर मे हेरान रह गयी।

सौतेली बहिन का दो भाइयों ने बलात्कार किया


मे बेड पर लेटी हुई थी और ज़रा सा भी हिला नही जा रहा था. फिर वो मेरे पास आया और मेरी कमीज़ उतारने लगा. मेने उसे बोला की भैया भगवान के लिए ऐसा ना करो.. तो वो बोला की आज तो मे तुझे रंडी बना के ही रहूंगा… फिर उसने मेरा पजामा भी उतार दिया. अब मे सिर्फ़ ब्रा और पेंटी मे थी. वरुण ब्रा के उपर से ही मेरे बोब्स दबाने लगा. उसने कहा की तेरे चिकने बदन पर तो हर लंड फिदा हो ज़ाये… थोड़ी देर बाद उसने मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी. फिर वरुण ने मेरी दोनो टांगो को फेला दी और अपने कपडे उतार कर बिल्कुल नंगा हो गया. अब मुझसे बोला भी नही जा रहा था. जब मेने उसका लंड देखा तो बिल्कुल हेरान रह गयी की किसी का इतना बड़ा लंड भी हो सकता है. उसका लंड 9” लंबा और 2.5” मोटा था. वो मेरा मुहं खोल के उसमे अपना इतना बड़ा लंड डालने लगा और कुछ देर बाद पूरा लंड डाल कर झटके देने लगा. हर झटके मे उसका लंड मेरे गले तक पहुच जाता जिससे मुझे साँस लेने मे दिक्कत होने लगी।

कुछ देर बाद वो मेरे मुहं मे ही झड़ गया और अपना लंड मेरे मुहं मे उस समय तक डाला रखा जब तक मे उसके वीर्य को निगल ना गयी. उसके बाद उसने अपना लंड निकाल कर मेरी चूत के सुराख पर रख दिया और अपने दोनो हाथों से मेरी पतली कमर पकड़ ली. अब मे चुदने के लिए बिल्कुल तैयार थी. उस बहनचोद ने पूरी ताक़त से अपना लंड मेरी चूत मे घुसा दिया. उस दर्द से मेरी आँखे पूरी तरह से खुल गयी लेकिन चीख नही निकल सकी. फिर उसने एक और ज़ोरदार झटका मारा और अपना पूरा लंड मेरी छोटी चूत मे घुसा दिया और मेरी सील तोड दी. दर्द से मेरी आँखों से आँसू निकल आए. उसके बाद उसने मुझ पर ज़रा भी रहम नही खाया और जोर ज़ोर से झटके मार के मेरी चूत मे ही झड़ गया और मेरे उपर गिर गया।

कुछ देर बाद वो वापस उठा और मेरे मुहं मे अपना लंड डाल दिया और कुछ देर बाद अपना लंड मेरे मुह से निकाल कर वापिस पूरी शक्ति से मेरी चूत मे डाल दिया. मे फिर दर्द से कांप उठी. मे ऐसे मे कई बार झरी. उसने मुझे उस रात कई बार चोदा और इतनी बुरी तरह से चोदा की मे रात को बेहोश हो गई. अगले दिन जब मेरी आँख खुली तो मे बेड पर बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी. शाम के 5बज रहे थे. लेकिन अब उस दवा का इफेक्ट खत्म हो गया था. मे उठी तो दर्द से चला भी नही जा रहा था. बेड पर मेरा और वरुण का वीर्य गिरा हुआ था और साथ मेरी चूत से निकला हुआ खून भी था. मे बहुत मुश्किल से उठी और आईने के सामने आई. मेने देखा की मेरी चूत फूल गयी थी और एक दम लाल हो गई थी. मेने नंगी ही घर मे देखा लेकिन वरुण घर मे नही था और दरवाजा भी बंद था।

उसके बाद मेने गर्म पानी से शावर लिया. मे जब बाहर आई तो देखा की वरुण वापिस आ गया है और टीवी देख रहा है. हमारे घर मे सब के पास मैं दरवाजे की एक्सट्रा चाबी हैं. मेने उस समय सिर्फ़ टावल लपेटा हुवा था. वरुण ने मुझे अपने पास बुलाया. मे उस से आँख नही मिला पा रही थी. उसने मुझे अपने पास सोफे पर बेठने को कहा और उसने टीवी पर कुछ लगाया जिसे देख कर मे शक मे आ गयी. मूवी मेरी ही चुदाई की थी. फिर वरुण ने मुझे बोला की अगर मेने किसी को बताने की कोशिश की तो ये मूवी पिताजी को दिखा दूंगा और बोलूगा की तुम अपनी मर्ज़ी से मुझ से चुदी हो… ये सुनकर मे डर गयी. और उसने कहा की जब तक घरवाले वापस नही आ जाते तू नंगी ही रहेगी… अगर मुझे तेरे बदन पर एक भी कपडा नज़र आया तो तेरी चूत का भोसड़ा बना दूंगा…

फिर उसने मेरे बदन से टावल खींच कर मुझे नंगा कर दिया. उसने मुझसे खाना भी नंगा ही बनवाया. खाना खाने से पहले उसने अपना लंड मेरे मुहं मे डाल दिया और झटके मारने लगा और जब वो झड़ने वाला था तो उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया और अपना वीर्य मेरे खाने पर गिरा दिया और बोला चल रंडी इसे खा जा.. मुझे खाना पड़ा. रात के 8 बज चुके थे उसने मुझे बेड पर जाने को कहा, मे समझ गयी और चुप चाप चली गयी. थोड़ी देर बाद वो आया और उसने अपने लंड पर तेल लगाया और मुझे कुत्तिया की तरह बनने को कहा. मे डर के मारे उसकी हर बात मान रही थी. फिर उसने पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड टिका दिया और आहिस्ता2 अंदर डालने लगा. अब मुझे और दर्द होने लगा और मे आआआआः ऊऊऊऊः ईईईईईईईईई करने लगी. अभी उसका लंड तोडा ही अंदर गया था की उसने एक ज़ोर का झटका मारा और उसका लंड पूरा अंदर चल गया. मेरी बहुत ज़ोर की चीख निकली. वो हँसने लगा और कहा की चिल्लाती क्यूँ है अब तो तू रंडी बन गयी है… फिर वो थोड़ी देर बाद तेज़ झटके मारने लगा. कुछ देर बाद मुझे अपनी चुदाई का मज़ा आने लगा और मे झड़ गयी. ये देख कर वो बोलने लगा की हरामी तू भी मज़े ले रही है.. ! अब मे अपनी गांड पीछे कर के उसका साथ देने लगी।

अभी ये सब चल ही रहा था की अचानक विक्रम आ गया. ये देख कर मे और वरुण डर गये क्युकी विक्रम को तो 1 महीने के बाद आना था. वरुण ने मेरी चूत से अपना लंड निकाल लिया. विक्रम गुस्से मे बोला की भैया ये आप क्या कर रहे हैं? वरुण कुछ नही बोला तो विक्रम ने उस से कहा की भैया इस रंडी को तो मुझे चोदना था! ये सुन कर मे हेरान रह गयी और मुझे अपने कान पर यक़ीन नही आया. विक्रम की बात सुन कर वरुण हंस पड़ा और कहा की मेने अभी तक इस रंडी की गांड नही मारी.. तो विक्रम ने कहा की चलो इसकी गांड चोडी करते हें… विक्रम ने बताया की मे मम्मी और पिताजी से एग्जाम का बहाना कर के आया था. ताकि मे इसको चोद सकू लेकिन भैया आपने इसे मुझसे पहले ही चोद दिया. मे बेड पर लेटी उन दोनो की बाते सुन रही थी. तब विक्रम ने जल्दी से अपने कपडे उतार दिए. मे देख कर हेरान रह गयी की उसका लंड तो वरुण से भी बड़ा था. विक्रम ने अपना लंड मेरे मुहं के सामने रखा और बोला की चल इसे चूस… मेने विक्रम से कहा की विक्रम भैया ऐसा ना करो तो उसने मुझे ज़ोर से एक थप्पड़ मारा और कहा की भैया का लंड तो बड़े मझे से अपनी चूत मे ले रही थी.. मुझे अपना मुहं खोलना ही पड़ा।

थोड़ी देर अपने लंड से मेरे मुहं मे झटके मारने के बाद विक्रम ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुझे उल्टा करके मेरे पेट के नीचे एक गोल तकिया रख दिया. उतने मे वरुण तेल ले आया और मेरी गांड पेट पर तेल लगाने के बाद विक्रम से बोला की फाड़ दे इस कुत्तिया की गांड!!! विक्रम ने जोर ज़ोर से झटके मार कर थोड़ी ही देर मे अपना पूरा लंड मेरी गांड मे घुसा दिया और थोरी देर के लिए रुक गया. मे जोर ज़ोर से चिल्लाने लगी और कहा की तुम दोनो भाइयों ने मेरा सत्यानाश कर दिया आआआआआः ऊऊऊवई हाआआआआआआआई.. मे मर गयी निकालो इसे बहनचोद…!!!! वो दोनो मेरी हालत पर हसने लगे और कहा की यह जगह लंड निकालने की नही घुसेड़ने की जगह होती है और मेरा लंड जब ही निकलेगा जब तेरी गांड पूरी तरहा से फट जाएगी !!!

विक्रम ने वरुण को कहा की ये कुत्तिया तो चिल्लाती रहेगी तो रग़ड डाल इसकी गांड को…बिल्कुल रहम ना कर… विक्रम ने जी भय्या कह कर मेरी गांड मे चक्की चला दी और मेरी गांड मारना शुरू कर दिया और जब तक करता रहा जब तक उसे विश्वास ना हो गया की मेरी गांड फट गयी है. फिर उसने मेरी गांड से अपना लंड निकाला और विक्रम ने मुझे सीधा करके अपना लंड मेरे मुहं के सामने कर दिया और बोला की चल चूस इसे. मेने मना किया तो पीछे से वरुण ने मेरी चूत पर खींच के लात मारी जिससे मे बलबला उठी और दर्द से तडपने लगी. विक्रम ने मेरे होंठो पर अपना लंड चिपकाया तो अब की बार मेने चुपचाप अपना मुहं खोल दिया और उसका लंड चूसने लगी ।

इसके बाद उन दोनो ने एक एक बार फिर से मेरी चूत को ठोका और हम सो गये. उसके बाद जब तक पिताजी और माँ नही आ गये उंन दोनो ने जम कर मेरी चुदाई की. जिस दिन पिताजी और माँ ने आना था उस पूरे दिन उंन दोनो ने मेरी बारी बारी गांड फाड़ी और आख़िर मे आईने में से मुझे मेरी गांड दिखाई।

चाचा का मकान बनवाते समय उनकी लड़की को choot फाड़ के चार बार चोदा

 

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मैं अंशुमान आपको अपनी पहली कहानी एडल्ट स्टोरी इन हिंदी पर सुना रहा हूँ.. जबसे मेरे चाचा मेरे घर के पास अपना मकान बनाकर रहने लगे थे तबसे मेरी नजर रूपाली पर थी.. रूपाली मेरे चाचा की इकलौती बेटी थी और अब एक छह साल की हो चुकी थी.. मैं एकसात का था.. मैं इस वक़्त में पढ़ रहा था वहीँ रूपाली 0 वीं में.. मेरे पापा और चाचा दोनों एक प्राइवेट ऑफिस में बाबू थे.. जादा आमदनी हो नहीं पाती थी.. चाचा को २ नए कमरे बनवाने थे, पर पैसा कम था उनके पास.. इसलिए उन्होंने मुझे काम करने को कहा.. मेरा मकान बनवाने में चाचा ने बहुत ईटा, मौरंग, बालू ढोया था.. इसलिए ये मेरा फर्ज बनता था की चाचा की मैं मदद करूँ.. इसके साथ ही सबसे बड़ा आकर्षण था रूपाली से रोज मिलने को मिलेगा.. मैं रूपाली को पटाये हुए था.. उसका चुम्मा भी मैंने ले लिया था पर कभी चो…..दने का सुनेहरा अवसर नही मिला था.. चाचा का मकान बनना शुरू हो गया.. मैं मिस्त्री के साथ एक लेबर की तरह काम करने लगा..

 

समय समय पर रूपाली मुझे और मिस्त्री को चाय देने आती थी.. मेरा काम मिस्त्री को मसाला बनाकर देना, पानी देना, और ईट देना था.. इन सब काम में वाकई बड़ी मेहनत थी दोस्तों.. मैं ६ ६ ईट एक बार में उठाता था.. मेरे दोनों हाथ छिल जाते थे.. धुप में पसीना निकलने लगता था.. ये मकान बनवाने वाला काम बहुत कठोर था.. जरा भी आसान काम नही था.. कोई मर्द ही इसे कर सकता था.. काम में बीच में जब चाचा की मस्त मस्त जवान लडकी रूपाली चाय लेकर आ जाती थी तो मेरी सारी थकान दूर हो जाती थी.. मैं उसको छिप छिप के आँख मारता रहता था.. मेरे चाचा मेरे काम से बहुत खुश थे.. एक दिन जब दोपहर २ बजे मिस्त्री खाना खाने चला गया तो काम बंद हो गया.. मेरे पास पूरा एक घंटा था.. मैंने रूपाली को आँख मारी और पास आने को कहा.. धूप बड़ी तेज थी.. मेरी चाची [रूपाली की मम्मी] घर के अंदर थी.. वो इतनी नाजुक थी की धुप में जरा सा निकल जाती थी तो उनका रंग काला हो जाता था.. इस वजह से वो धूप में नही निकलती थी.. रूपाली ही हम लेबर मिस्त्री को चाय पानी देने का काम करती थी.. जादा गर्मी होने पर वो हम लोगों के लिए फ्रिज से बोतल लेकर आती थी.. मैंने रूपाली को आँख मारी.. कुछ देर बाद रूपाली इस तरह आ गयी जहाँ नया कमरा बन रहा था.. अभी ५ ५ फुट ऊँची दीवाल ही उठ पायी थी.. रूपाली आ गयी तो मैंने उसे पकड़ लिया..

 

ये क्या कर रहे हो अंशुमन! हाथ छोड़ो, अभी मम्मी आ गयी तो बवाल हो जाएगा!रूपाली बोली

 

अरे तू भी कितना डरती है.. कुछ नही होगा.. चाची कहाँ धूप में निकलती है!’ मैंने कहा और रूपाली को चूमने लगा.. वो थोडा डर रही थी.. पर फिर भी मैं उनके होठ पीने लगा.. कुछ देर में वो चुदासी हो गयी.. ऐ रूपाली! चूत देना.. कितना दिन हो गया तेरी चूत मारे हुएमैंने कहा और नाराजगी जताई.. वो ना में सर हिलाने लगी.. करीब चार महीने पहले उसको मैंने ३ दिन तक चोदा था जब चाचा चाची वैस्ड़ोदेवी गए थे.. उसके बाद से कभी अपने चाचा की लडकी रूपाली को चोदना का मौका नही मिला.. पर आज तो मेरा फुल मूड बना हुआ था.. जब रूपाली मना करने लगी तो मुझे काफी गुस्सा लग गयी..

 

एक मैं हूँ की तुम्हारा मकान बनवाने के लिए अपना खून पसीना एक कर रहा हूँ.. और तू है की एक २ इंच की चूत भी नही दे सकती है!’’ मैंने नाराजगी दिखाते हुए कहा.. कुछ देर बाद रूपाली चुदवाने को तैयार हो गयी.. अभी मिस्त्री ने एक घंटे का इंटरवल किया है.. इसलिए बड़े आराम से मैं अपने चाचा की लडकी रूपाली को एक २ बार चोद सकता था.. ये बात मैं जानता था.. उस नये कमरे में जहाँ अभी ५ फुट ऊँची दीवाल ही उठ पायी थी वहीँ कुछ खाली सीमेंट की बोरीयां पड़ी थी.. इस जगह पर रूपाली को आराम से चोदा जा सकता था.. मैंने झट से चार ५ बोरियों को जोड़ कर बिछा दिया.. रूपाली को वहीँ लिटा लिया.. सीधा रूपाली की चूत पर हमला किया.. उसने महरून रंग का सलवार कमीज पहन रखा था.. मैंने सीधा उसकी चूत पर हमला करना सही समझा.. पहले इसको चोद लूँ.. बात में चुम्मा चाटी करता रहूँगा.. अभी हाल में रूपाली की छातियां और भी जादा बड़ी हो गयी थी.. उभार में अंतर मैं साफ साफ पकड़ सकता था.. मैंने रूपाली की सलवार निकाल दी, फिर पैंटी निकाल दी.. रूपाली की चूत बहुत मस्त थी.. मैंने पैंट खोल कर लेट गया.. रूपाली की चूत पीने लगा.. आज कितने दिनों बाद उसकी चूत के दर्शन हुए थे.. ३ चार बार चुदी चूत भी क्या चुदी होती है.. मैं जीभ लगा लगाकर आज फिर से उसकी चूत पीने लगा.. अगर इस वक़्त मेरी चाची [रूपाली की मम्मी] निकल आती और हम दोनों भाई बहन को पकड़ लेती तो कोहराम मच जाता..

 

कोई भी चाची ये बर्दास्त नहीं करेगी की उसकी लडकी को उसके जेठ का लड़का चोदे.. ये कोई भी चाची नही बर्दास्त करेगी.. रूपाली मेरे नर्म नर्म ओंठ की छुअन से मचलने लगी और पांव चलाने लगी.. रूपाली पैर हिलाएगी तो मैंने कैसे तुझे चोद पाऊंगा.. दोनों पैर खोल के रखमैंने कहा.. रूपाली शांत हो गयी.. मुझे मजे से चूत पिलाने लगी.. मैंने कई बार उसकी choot के होठों को हाथ से छुआ और सहलाया.. फिर चूत पीने लगा.. कुछ देर बाद मैंने रूपाली की चूत में लंड डाल दिया और उस नए नए बन रहे कमरे में ही खुले आकाश में अपनी चचेरी बहन को चोदने खाने लगा.. कितनी अजीब बात थी अभी कुछ देर पहले मुझे बड़ी थकावट लग रही थी.. पर अब मेरी माल रूपाली के आ जाने से थकावट बिलकुल गायब हो गयी थी.. मैं रूपाली को पेल रहा था.. उनसे अपनी कमीज पहन रखी थी.. क्यूंकि असली काम उसकी चूत का था..

 

उसकी चूची तो मैं बाद में ही दबा सकता था.. जहाँ मैं रूपाली को ले रहा था वहां बगल में मौरंग, ईट, सीमेंट की बोरियों का ढेर लगा हुआ था.. कितनी अजीब बात थी.. ऐसी धूल मिट्टी में कोई भी आशिक अपनी महबूबा को चोदना नहीं चाहेगा.. क्यूंकि धूल मिट्टी किसे पसंद होती है.. पर दोस्तों मेरे हालात ही ऐसे थे की मैं क्या करता.. मैं खट खट करके अपनी चचेरी बहन को चोदने लगा.. मेरा लौड़ा पूरा का पूरा रूपाली की चूत में अंदर जाता फिर बाहर आता.. फिर अंदर जाता फिर बाहर आता..

 

मैंने एक नजर अपने पैर की ओर देखा.. सीमेंट, मौरंग वाले मसाले से मेरा दोनों पैर रंगे हुए थे.. ये तो कहो पैर में मसाला लगा है मेरा लंड में नही लगा है वरना रूपाली मुझसे चुदवाती भी नही.. क्यूंकि लडकियाँ बड़ी सफाई वाली होती है.. जबकि मेरे जैसे लडके सफाई पर जादा ध्यान नही देते है.. मेरा पप्पू [लंड] मजे से रूपाली के भोसड़े में फिसल रहा था और उसके चूत के छेद को चोद रहा था.. वो भी खुश लग रही थी.. और मैं तो इधर मजे में था ही.. चूत कितनी छोटी सी होती है, पर इसकी डिमांड बहुत जादा है.. रूपाली को पेलते पेलते मैं सोचने लगा.. फिर मैंने रूपाली की कमर पकड़ ली और खूब जोर जोर से धक्के मारने लगा.. मेरे धक्कों की रगड़ से वो गांड उठा उठाकर चुदवाने लगी.. जब रूपाली गांड उठाती और सिसकती तब मुझे बड़ी मौज आ जाती.. फिर मैं उसे जोर जोर से ठोकने लगा.. रूपाली ने जैसे इस बार अपनी गांड उठाई मैंने अपना हाथ नीचे रख दिया.. इससे अब उसकी चूत जादा उचाई पर आ गयी और मैं नीचे हाथ रखकर चचेरी बहन को चोदने खाने लगा..

 

इस समय मैं जन्नत में टहल रहा था.. कुछ देर बाद मैं उसकी चूत में ही झड गया.. मैंने तुरंत घडी देखी.. अभी कुल ३० मिनट ही हुए थे.. जबकि अभी भी मिस्त्री को आने में आधे घंटे बाकी थे.. मैंने रूपाली को गले लगाया लिया.. उसकी कमीज के उपर से मैं उनके नारियल जैसे नुकीले मम्मे दबाने लगा और रूपाली के ओंठ पीने लगा.. नीचे ने मैंने उसको नंगा ही रखा क्यूंकि उसे अभी एक बार और लेने का मूड था.. हम दोनों उस चार ५ सीमेंट की बोरियों पर लेटे थे.. कितना अजीब था ये.. मैंने ओंठ से रूपाली के होंठो को मुँह में दबाकर पीने लगा.. मैं ५ मिनट का ब्रेक लिया..

 

रूपाली!! अभी सलवार मत पहनना! एक बार और चोदूंगा! मूत के आता हूँमैंने उससे कहा और मुतने चला गया.. वहीँ पास में एक दीवाल थी.. मैं उस दीवाल के पीछे मूतने चला गया.. जब मैं पेशाब कर रहा था तो लंड में थोड़ी जलन हो रही थी.. अपने चाचा की लडकी रूपाली को चोदने से लंड का टोपा पीछे खिसक आया था.. लंड का सुपाडा बिलकुल गुलाबी गुलाबी रंग का हो गया था.. जबकि लंड की खाल मुड़ मुड़कर लंड पर नीचे की तरह खिसक आई थी.. लंड में जलन हो रही थी.. जब मैं पेशाब की धार छोड़ रहा था, तब भी जलन हो रही थी.. खैर धार छोड़ छोड़कर अपनी टंकी खाली कर दी.. मैं वापिस रूपाली के पास आ गया.. दूर से उसे बिना सलवार पहने उस सीमेंट की बोरी पर लेटे देखा तो प्यार आ गया.. अपना मकान बनवाने में उसे कितना सहयोग करना पड़ रहा है.. उसे भी चुदवाना पड़ रहा है.. कोई भी लडकी सिर्फ कमीज में बिना सलवार पहने बहुत सुंदर लगती है.. ठीक चाचा की लडकी रूपाली भी लग रही थी..

 

उसकी पतली पलती नाजुक गोरी गोरी टाँगे सच में बहुत आकर्षक थी.. घुटने भी बहुत गोरे और सुंदर थे.. मेरी चाची बहुत गोरी थी.. रूपाली उन्ही को गयी थी.. उन्ही का रूप रंग उसे मिला था.. मैंने रूपाली के बगल लेट गया.. मेरे हाथ उसके गोल गोल नये पुट्ठों पर चले गए.. मैं सहलाने लगा.. रूपाली के ओंठ पीते पीते हम दोनों बात करने लगे..

 

रूपाली आज के बाद फिर कब चूत देगी!’ मैंने पूछा

 

पता नहीवो बोली

 

क्यूँ नही पता? क्या तेरा चुदवाने का दिल नही करता है!”

 

करता है

 

अच्छा आगे चलकर तो तेरी शादी हो जाएगी.. अगर तेरा पति तुझे अच्छे से चोद न पाया तो!’ मैंने पूछा

 

तो तुम्हारे पास आ जाया करुँगी और चुदवा लिया करुँगी!रूपाली बोली

 

ये सुनकर मेरा दिल खुश हो गया.. मेरे हाथ रूपाली के सूट पर उसकी मस्त मस्त गठीली उपर से दबाने लगा.. दिल तो यही कर रहा था की उनका सूट निकाल दूँ.. उनकी अंडरशर्ट भी निकाल दूँ.. उसको पूरा नंगा करके चोदूं.. पर इसमें बहुत रिस्क था.. इसलिए मैंने कोई रिस्क नही लिया.. मैं अपनी चचेरी बहन की चूत पर फिर से आ गया.. फिर से उसकी चूत पीने लगा.. रूपाली सिसकने लगी.. रूपाली अभी एक६ साल की ही थी.. इसलिए उसकी चूत अभी बहुत छोटी और जरा सी थी.. पर मेरा लंड तो पूरा का पूरा अंदर ले ही लेती थी.. मैंने ऊँगली और अंगूठे से रूपाली की रूपवती चूत खोल दी और पीने लगा.. मैं उसके मूतने वाले छेद पर भी जोर जोर से जीभ फेर रहा था.. जिससे वो जादा चुदासी हो जाए और जोर जोर से लौड़ा अंदर ले.. मैं मेहनत से अपनी चचेरी बहन की चूत पीने लगा.. कुछ देर में वो जादा चुदासी हो गयी.. रूपाली की चुदास देखकर मैं उसकी चूत में २ ऊँगली डाल दी और जोर जोर से उसकी गुलाबी गुलाबी चूत फेटने लगा..

 

मेरे जोर जोर से choot फेटने से रूपाली का दिमाग ख़राब हो गया.. वो खुद अपने हाथों से अपने चुचे दबाने लगी.. वो गर्म गर्म सिसकी लेने लगी.. उसने अपना मुँह भी खोल दिया.. मैं उसके दांत साफ साफ देख सकता था.. वो मुँह से गर्म गर्म सिसकारी छोड़ रही थी.. मेरे चूत फेटने से ही चचेरी बहन का ये हाल हुआ था.. रूपाली चुदाई का चरम सुख बटोर रही थी.. मेरी कामवासना और भी जादा बढ़ गयी.. मैं और मेहनत से चूत फेटने लगा.. फच फच की आवाज उस नए बन रहे कमरे में गूंज गयी.. खुले आकाश के नीचे रूपाली की चुदाई चल रही थी.. मैं और भी मस्ती में आ गया था.. चूत को जोर जोर से अंदर बाहर करके मैं फेट रहा था.. फिर रूपाली का कुछ मक्खन चूत से बाहर निकल आया और मेरी ऊँगली में लग गया.. मैं वो मक्खन चाट गया.. मैंने रूपाली की एक इंची दरार वाली चूत में अपना मोटा लंड डाल दिया.. कसी चूत में थोड़ी मेहनत के बाद मैं रूपाली को चोदने लगा.. उनके आँखें बंद कर ली थी..

 

आँखें खोल रूपाली! आँखें खोल!मैंने कहा..  पहले तो उसने आँखें नहीं खोली.. वैसे ही एक० मिनट तक चुदवाती रही.. मैं खट खट करके धक्के मारता रहा.. फिर उसने आँखें खोली.. मेरी नजरों में उसने अपनी नजरें डाल दी.. छिनाल को मैं घूरते घूरते ताड़ते ताड़ते पेलने लगा.. मैं जोर जोर से अपनी कमर चला चलाकर उसे चोद रहा था.. रूपाली की इस तरह आँखों में आँखें डालकर खाने में विशेष मजा और सुख मिल रहा था.. मेरा लौड़ा किसी ट्रेन की तरह उसकी चूत की दरार में फिसल रहा था.. बहुत अच्छे से चूत मार रहा था.. फिर मुझे बड़ी जोर की चुदास चढ़ी.. बिजली की तरह मैं रूपाली को खाने लगा.. इतनी जोर जोर से उसे चोदने लगा की एक समय लगा की कहीं उसकी choot ही ना फट जाए.. मेरे खटर खटर के धक्कों से रूपाली का पूरा जिस्म काँप गया.. उसके चुचे हिलकर थरथराने लगे.. मैं बिजली की तरह रूपाली को पेलने लगा.. मुझे लगा रहा था की झड़ने वाला हूँ.. पर ऐसा नही हुआ मेरा मोटा सा लौड़ा चचेरी बहन के भोसडे में झड़ने का नाम नही ले रहा था.. अभी कुछ देर पहले मैंने रूपाली को एक राउंड चोद लिया था.. सायद इसी वजह से ऐसा हो रहा था..

 

मैंने उस आधे बने कमरे में बालू, मौरंग, सीमेंट के बीच ही अपने चाचा की लडकी को खूब लिया.. मैं बहुत देर तक रूपाली को चोदता रहा पर फिर भी नहीं झडा.. मैंने लौड़ा झटके से निकाल लिया और रूपाली की गर्म गर्म जलती चूत को पीने लगा.. वाकई ये के शानदार अनुभव था.. कुछ देर बाद रूपाली की चूत ठंडी पड़ गयी थी.. मेरे लौड़े की खाल पीछे को सरक आई थी.. गोल गोल मुड़कर मेरे लौड़े की खाल पीछे आ गयी.. मेरा सुपाडा अब गहरे गुलाबी रंग का हो गया था.. मेरे लौड़े का रूप ही बदल गया था रूपाली की choot चोदकर.. अब मेरा लौड़ा किसी बड़े उम्र के आदमी वाला लौड़ा दिख रहा था.. मैं कुछ देर तक अपना लौड़ा देखता रहा फिर मैंने रूपाली की छोटी सी चूत में डाल दिया.. फिर से मैं उसे चोदने लगा.. इस बार मैंने बिना रुके उसे काई मिनट तक चोदा क्यूंकि एक बार भी मैं रुकता या आराम करता तो माल उसके भोसड़े में नही गिरता..

 

इसलिए मैं उसको फट फट करके चोदने लगा.. बिना रुके कई मिनट तक चोदने से आखिर मैं झड गया और उसकी जरा सी छोटी सी चूत में मैंने मॉल छोड़ दिया.. रूपाली को चोदकर मैं उठ गया और खड़ा होकर पैंट पहनने लगा.. रूपाली! ऐ रूपाली!’ तब तक चाची ने आवाज दे दी.. आई मम्मी!!रूपाली बोली.. जल्दी से उनसे सलवार पहनी, नारा बाँधा और घर में भाग गयी.. आज का एक्सपीरियंस बहुत मजेदार था.. कुछ देर बाद मिस्त्री खाना खाकर आ गया.. चाचा के २ कमरे में महीना भर लग गया.. इस दौरान चार बार रूपाली की चूत मारने को मिली..

 

बहन को खेत में चोदा

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हेल्लो दोस्तो मेरा नाम धवल है! दोस्तों मेरी उम्र 23 साल की है मेरी लम्बाई 5!7 है रंग गौरा और में बहुत हेंडसम हूँ! अभी कुछ समय पहले मेरी बाहर नई नई नौकरी लगी थी! में वहाँ से कुछ दिनों कि छुट्टी ले कर घर पर आया था! दोस्तो पहले में आपका परिचय अपनी बहन से करा देता हूँ! दोस्तों मेरी छोटी बहन का नाम प्रिया है! उसकी उम्र 20 साल तक होगी उसके फिगर बहुत बड़े 36 28 34 है! और वो बहुत सुंदर है वैसे तो वो शहर मे रहकर पड़ाई कर रही है!

लेकिन अभी उसकी कॉलेज की छुट्टियाँ चल रही है! और प्रिया जब से शहर से आई है! वो काफ़ी समझदार हो गई है! एक तो वो वैसे ही बहुत सुंदर है उपर से उसके छोटे छोटे कपड़े मे वो तो और सेक्सी लगती है! और उसका फिगर देख कर तो किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए! क्या फिगर है मोटे और गोरे बूब्स पतली कमर भरी हुई गांड दोस्तो आप तो जानते है की बाहर नौकरी जब कुछ भी नही कर सकते और वहाँ उन्हे कुछ भी देखने को नही मिलता! अब घर पर आकर तो बस मुझसे रहा नही जा रहा था! में हर समय बस यही सोच रहता था की बस किसी की भी चूत मिल जाए चाहे वो चूत प्रिया की ही क्यों ना हो बस मुझे तो चूत कि चुदाई करनी थी!तभी एक दिन की बात है! में बैठ कर प्रिया के बूब्स को निहार रहा था! की तभी माँ ने कहा की बेटा जा कर अपने बाबूजी को खेत पर खाना दे कर आओ! तो मैने कहा ठीक है माँ आप खाने को पैक कर दो तो मैं बाबूजी को दे कर आता हूँ! तभी प्रिया ने कहा की माँ मैं भी भैया के साथ खेत देखने जाउंगी मुझे बहुत दिन हो गये खेत पर गये हुए तो माँ ने कहा की ठीक है! और माँ ने खाना पैक कर के मुझे दे दिया और हम दोनों जाने लगे!मैने एक सायकिल ले ली और प्रिया को आगे बैठने के लिए कहा तो प्रिया आगे बैठ गई! और हम चल दिए और फिर खेत पर पहुंच कर बाबूजी को खाना खिलाया! और फिर हम खेत पर टहलने लग गये! बाबू जी खाना खा के एक मजदूर को घर उसे बुलाने चले गये! और हम दोनों को कहा की में जा रहा हूँ! और हो सकता है कि मुझे थोड़ी देर हो जाएगी तुम लोग टहल कर घर चले जाना! फिर क्या था मैं और प्रिया टहलने लगे वहाँ पर हमारा एक गन्ने का खेत था! में उसमे से एक गन्ना तोड़ कर उसे चूसने लगा था!

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तभी प्रिया ने मुझसे कहा की भैया मुझे भी गन्ना चाहिए! तो मैने उसे भी तोड़ कर गन्ना दे दिया! और वो मजे से उसे चूसने लगी कुछ देर के बाद प्रिया ने मुझसे कहा की भैया मुझे टयलेट लगी है! तो मैने कहा की यहीं पर कहीं भी जगह देख कर कर लो! यहाँ पर कोई दरवाजा तो नही है! और मैं आगे की तरफ चला गया फिर मैने एक गन्ने के झुंड के पीछे छुप गया और चुप कर प्रिया को देखने लगा! प्रिया ने अपनी जीस उतारी! और मैने देखा की उसने अंदर एक पिंक कलर की पेंटी पहनी हुई थी उसे भी उतार दी! तब मैने पहली बार प्रिया की गोरी गांड देखी जिसे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया!

 

और फिर प्रिया जब खड़ी हो रही थी! अब मैने उसकी गांद का गुलाबी छेद भी देखा जिसे देख कर मुझसे रहा नही जा रहा था! फिर प्रिया ने अपनी जींस पहन कर मुझे आवाज़ लगाई! तो मैं उसके पास गया और मेरे पास आते ही उसकी नज़र मेरे लोवर पर पड़ी! जो की एक टेंट बना हुआ था! अब वो ज़रूर समझ गई थी की मैं उसे टायलेट करते हुऐ देख रहा था! फिर वो मुस्कुराने लगी और उसने मुझसे कहा की भैया मुझे कोई अच्छा सा गन्ना तोड़ कर दो ना!

 

में पहले तो ये समझ नही पा रहा था! पर मैने कहा की तू यहीं रुक मैं तेरे लिए एक अच्छा से गन्ने का इंतज़ाम करता हूँ! तो प्रिया ने कहा की सच भैया जल्दी करो मुझसे रहा नहीं जा रहा! मुझे प्रिया की बातों मे मुझे कुछ शरारत नज़र आ रही थी! मैं खेत के अंदर चला गया और वहाँ मुझे एक जगह खाली और साफ सी नज़र आई! और अब तो मेरे सामने सिर्फ प्रिया की गोरी गांड ही घूम रही थी! फिर क्या था मैने अपना 8 इंच का लण्ड बाहर निकल कर मूठ मारने लगा उधर प्रिया काफ़ी देर तक मेरा बाहर इंतजार करने के बाद जाने कब अंदर आ गयी! और मेरी आँखे बंद थी अचानक मुझे किसी और का हाथ अपने लण्ड पर महसूस हुआ! तभी मैने आँख खोली तो देखा की प्रिया घुटनो के बल बैठ कर मेरे लण्ड को सहला रही है! मैने उसको कहा की प्रिया ये क्या कर रही हो! तो प्रिया ने कहा की भैया ये आपकी हालत मेरी वजह से हुई है ना तो मैने सोच की इससे ठीक भी मैं ही कर दूँ! फिर क्या था मेरे चेहरे पर मुस्कान थी! और मैंने प्रिया को कुछ नही कहा जिसे उसने मेरी हाँ समझी और उसने मेरा लण्ड मुहं मे लेकर उसे चूसने लगी मैं उसके सर पर हाथ फिरा रहा था और मेरे मुहं से अहाआ आआआहा की आवाज़ निकल रही थी! प्रिया मेरा लण्ड को एक गन्ने की तरह चूस रही थी! जैसे कि उसने पहले भी कई बार लण्ड चूसा हो! आप यह कहानी मस्तराम  डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

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काफ़ी देर बाद मैने प्रिया को खड़ा किया और उसकी टी-शर्ट के उपर से ही उसके मोटे बूब्स दबाए! और मैंने उसे कहा की रूको मैं अभी आता हूँ तो उसने कहा की कहाँ जा रहे हो तुम! तो मैने कहा की बस दो मिनट मे आया और मैं भाग के गया और जिस चादर पर बाऊजी ने खाना खाया था! वो चादर उठा कर लाया और फिर उसे वहाँ पर बिछा दिया! और मैने प्रिया के सभी कपड़े उतार दिये और प्रिया को पूरा नंगा कर दिया! और अपने भी सारे कपड़े उतार लिये! प्रिया के बड़े बड़े बूब्स पपीते की तरह हवा मे झूल रहे थे! मैने प्रिया को लिटा कर उसके बूब्स को मुहं मे लेकर चूसने लगा! और मैने एक उंगली प्रिया की चूत मे डालकर अंदर बाहर करने लगा! काफ़ी देर अंदर बाहर करने से प्रिया की चूत बहुत गीली हो गई थी! और प्रिया ने मुझसे कहा की भैया अब रहा नही जा रहा तो मैने भी अपने लण्ड पर थूक लगाकर प्रिया की चूत लण्ड लगाया और जोर से एक धक्का लगाया और मेरा आधे से ज्यादा लण्ड सरक कर उसकी चूत मे समा गया! और फिर दो चार धक्के मारने के बाद मे पूरा लण्ड प्रिया की चूत मे समा गया और मैं प्रिया को चोदने लगा! उसे चोदते वक़्त मेरे मन मे एक ही ख़याल आ रहा था! की जिस तरह प्रिया की चूत मे मेरा लण्ड गया है! इस चुदाई से तो ये साफ हो जाता है की प्रिया पहले भी कई बार चुद चुकी है! लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नही पड़ता की मेरी बहन किससे चुद्वाती है! क्योकि वो तो इतनी सेक्सी माल है की उसे चोदने के लिए कोई भी तैयार हो जाए और इसी उधेड़ वन मे प्रिया को करीब 20 मिनट से में ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था! और प्रिया भी खूब आवाज़ निकाल रही थी आआआहाल्ह भैया और छोड़ो मुझे में झड़ने वाली हूँ! तब मैने और तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिये! और प्रिया झड़ गई इधर में भी झड़ने वाला था! थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया! जैसे ही में ने अपना लण्ड प्रिया की चूत मे से बाहर निकल कर हम खड़े हुए तो हम दोनो के होश उड़ गये सामने बाबूजी खड़े थे! उन्हे देख कर हम दोनो की ज़ुबान पर जैसे ताला लग गया था! बहन को खेत में चोदा

 

और फिर बाबूजी आगे आए और मुझे समझ नही आ रहा था! की में उनसे क्या कहूँ तभी बाबूजी आगे आए और उन्होने प्रिया की गांड पर हाथ फेरा और कहा की अरे प्रिया तू तो शहर जा कर और भी कड़क माल बन गई हो! इसे सुन कर तो हमारी जान मे जान आई! और फिर क्या था! प्रिया ने झट से घुटनो के बल बैठ कर बाबूजी के लण्ड को बाहर निकल लिया! बाबूजी का लण्ड 9 इंच लंबा और दो इंच मोटा है! फिर प्रिया ने बाबूजी का लण्ड को सहलाते हुए कहा की इतने मोटे ताज़े लण्ड हमारे घर मे ही है! आप यह कहानी मस्तराम  डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

 

और में ऐसे ही बाहर के मर्दो से चुद्वाती रही! और फिर प्रिया ने बाबूजी का लण्ड मुहं मे ले लिया और चूसने लगी उसे देखा मेरा लण्ड भी फिर से खड़ा हो गया! और मैं भी प्रिया के सामने जा कर खड़ा हो गया! तभी प्रिया ने मेरा भी लण्ड हाथ मे ले लिया! और उसे भी चूसने लगी काफ़ी देर के बाद बाबूजी लेट गये! और प्रिया बाबूजी के लण्ड पर अपनी चूत को लगाकर बैठ गई फिर और बाबूजी धक्के मारने लगे! पहले तो थोड़ी देर तक प्रिया ने मेरा लण्ड चूसा फिर मैने अपने हाथ मे लेकर अपना लण्ड सहलाने लगा! और जब मुझे पीछे की वार मिल गया तो प्रिया की गोरी गांड देखकर मेरे मुहं मे पानी आ गया था!

 

मैने अपने लण्ड पर तोड़ा सा थूक लगाया! और पीछे से प्रिया की गांद के गुलाबी छेद पर लगाया! तो प्रिया ने पीछे देखकर मुझे एक स्माइल दी तो जैसे उसने हाँ भर दी फिर क्या था! मैने एक ज़ोर दार धक्का मारा और मेरा लण्ड प्रिया की गांड मे फिसलता हुआ चला गया! फिर हम दोनो ने धक्के मारने शुरू कर दिये और प्रिया आवाज़े निकल रही थी!  आप यह कहानी मस्तराम  डॉट नेट पर पढ़ रहे है | आआहाआआहहाहा बाबूजी और तेज़ और तेज़ और बाबूजी भी और तेज़ मारने लग गये करीब 30 मिनट के बाद हम लोग बारी बारी से झड़ गये और फिर प्रिया ने मेरा और बाबूजी का लण्ड चूस कर साफ किया! और फिर हमने अपने कपड़े पहन कर बाहर आ गये! फिर हम दोनो घर आ गये उस दिन रात को भी माँ के सोने के बाद हम तीनो ने छत पर चुदाई की जब तक हमारी छुट्टियां थी हमने चुदाई के खूब मज़े लिए! और फिर प्रिया अपने कालेज चली गई! और में अपनी जॉब पर चला गया! अब भी में रोज़ शाम को प्रिया से फ़ोन पर बात करता हूँ! अभी कुछ दिनो के बाद में दीवाली की छुट्टीयां ले कर घर जाऊंगा और प्रिया भी आएगी तो हम फिर से चुदाई करेंगे!

 

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