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छोटी बहन को वियाग्रा खिलाकर उसकी चूत फाड़ी

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Virgin Sex Story, Chhoti Bahan Ki Chudai Story  : मेरे प्यारे दोस्त मैं आज मैं आपको एक मस्त कहानी सुना रहा हु जो की मेरे बहन के बारे मैं है आज मैं आपको बताऊंगा मैंने कैसे अपने बहन का सील तोडा, खूब चुदाई की साली की, मजा आ गया तो सोचा क्यों ना मैं अपने नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम बाले फ्रेंड को भी अपनी बहन की चुदाई के बारे में बताऊँ, तो देर किस बात का दोस्त हाज़िर हु अपनी कहानी लिए क्यों की जब मैं यहाँ दूसरों की कहानी पढता हु तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं भी अपनी कहानी आपलोगो से शेयर करूँ.

ये स्टोरी मेरी बहन के साथ हुए एनकाउंटर की हे उसका रंग गोरा बाल काले ओर घुंघराले ओर फिगर की क्या बात करू दोस्तो देख के ही खड़ा हो जाय सभी का ओर उसी वक़्त मूठ मार लो उसका फिगर 34 28 36 हे हेना पर्फेक्ट सेक्स फिगर चलो देर ना करके सीधा स्टोरी पर आता हू


मैं मुंबई में रहता हु, और मैं जिगोलो हु, मैं अपने घर का खर्च भी उसी से उठता हु, क्यों की मुझे अपने घर चलने के लिए काफी पैसे की जरूरत होती है और कोई छोटी मोटी नौकरी में कितना कम लेगा इसलिए मुझे जिगोलो बनने के लिए मजबूर होना पड़ा, पर मुझे मस्ती रहती है रोज रोज मैं भाभी आंटी लड़की को जो की हॉस्टल में या किसी काम से मुंबई में रहती है, कॉलेज गर्ल को, बड़े घर के औरत को जिसका पति बिज़नेस टूर पे हमेशा रहता है उसकी वाइफ को मैं चुदाई से संतुष्ट करता हु और उसके बदले में मुझे पैसे मिलते है , मेरे घर मे मेरी मा मैं बहन ओर पापा हे पापा एलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट मे है जिनकी सैलरी कुछ खास नहीं हे |

इस साल ही मेरी बहन बारह्वी पास की तो मैंने उसको गिफ्ट में एक अच्छा सा मोबाइल फ़ोन गिफ्ट किया, रात को फिर वो मेरे पास आई और फिर एंड्राइड पे कुछ नयी नयी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए बोली.मैं उसके मोबाइल में सॉफ्टवेयर डालने लगा तभी मेरे क्लाइंट का फ़ोन आने लगा था, उसी समय मैं अपनी बहन की चूची देख ली उस समय वो एक ढीली ढली सी टी शर्ट पहनी थी मेरा मन तो बहक गया मैं क्या करता मेरा तो लैंड खड़ा होने लगा कोई चारा भी नहीं था मस्त मस्त गदराई हुयी सी चूची जो थी मैं भी क्या करता तुरंत बाथरूम में गया और मूठ मार ली.


एक दिन मे अपन कमरे मे नंगा था कपड़े बदला रहा था तभी अचानक से वो कमरे मे घुस आई मे डोर लॉक करना भी भूल गया था ओर उसने मूज़े नंगा देख लिया फिर वो तुरंत ही चली गयी ओर बाद मे मुझे से माफी माँगी उसकी भूल केलिए मेने भी माफ़ कर दिया


वो अपने न्यू सेल पे एक बार पॉर्न देख रही थी तो मेने देख लिया उसे लेकिन कुछ कहा नहीं क्यू की मे भी उसे चोदना चाहता था तो उसे गरम होने दे रहा था जैसे से ही उसने पॉर्न बंद की मे उसके पीछे से पास जाकर बैठ गया उसे ये लगा की मे उसे वीडियो देखते हुए देखलिया हे लेकिन मे अनजान बना रहा वो गरम हो चुकी थी ये देख के मेरा लंड पायजामे मे ही टेंट बना दिए था वो ये देख सके इसतरह मे पास ही बैठ गया ओर टीवी देख ने लगा बात बात ओर मैं उसके कमर ओर बदन को फील करने लगा ओर वो ओर गरम होती गई ऐसा व्यवहार मेने कई दीनो तक किया आख़िर सब्रका फल मीठा जो होता हे फिर उसकी नज़र मे मेने कुछ प्यास देखी की जो मे ही बुझा सकता था फिर मेने जान भुज कर जब मे क्लाइंट से बात करता तो वो सुन सके उस समय मैं और भी सेक्सी सेक्सी बात करता था.


आख़िर मे मेरा इंतजार खत्म हुआ ओर वो घड़ी आयी गई की जब मे उसकी चूत का भोसड़ा बना डू उस रत मे अपने घर पर था ओर मां ओर पापा बाहर गये थे और वो एक हफ्ते बाद आने वाले थे मेरी सिस का भी वाकेशन था सो वो भी घर पर ही थी हम रोज रत को बाहर खाना खाने जाते थे मेरी बाइक पे तो मे जान बुजकर ब्रेक मरता ताकि उसे गर्म कर सकु लेकिन वो भी क्या खुद को कंट्रोल करती थी उसे लंड की प्यास थी


लेकिन वो उस प्यास को बुझा ना ही नई चाहती थी फिर मेने वियाग्रा उसे रात को खिलाई ओर बोला की इसे नींद अच्छी आती हे ओर उसके गरम होने का वेट किया जैसे ही वो गरमा हुई मे उसके सामने नंगा हो गया ओर वो मेरा खड़ा लंड देख के पागल हो गई ओर लोलीपोप की तरह चूस ने लगी दोस्तो क्या बतौ की क्या मज़ा अरहा था जैसे जन्नत मे हू मे फिर मेने उसको लेटया ओर उसकी अनचुई चूत को चाट कर मज़ा लिया मे ओर उसको सातवे आसमान की सेर कराई

फिर हमारा रीलेशन ही बदल सा गया हो फिर वो रह नहीं पा रही थी मेरे लंड की बगैर वो मुझे ज़ोर ज़ोर से बोल रही थी की मे कब से तेरे से चुदबाना चाहती थी आज मेरी ये ख्वाहिस पूरी कर दे ओर मेरी चूत को फाड़ दे मेरी चूत चोद दे उसे भोसड़ा बना दे मुझे आज कच्ची कली से फूल ओर देरी मत कर फाड़ दे चूत मेरी ये सब सुन कर मुज मे नया जोश जेसे अगया हो वो पहली बार चुद रही थी इसलिए मेने पास मे रखी पेट्रोलियम जेल ली

ओर थोड़ी उसकी चूत पर ओर मेरे लंड प्र ल्गाई पहले तीन चार धक्के मारे लेकिन लंड फिसल ही जाता था फिर क्या जैसे मे भाभी को चोदता वैसे ही लॅंड लगाया चूत पे ओर ज़ोर का ढाका मारा पूरा लंड एक जटके मे अंडर गुसा दिया ओर जैसे ही मेरा लंड घुसा कुछ फटा हो ऐसा महसूस हुवा मुहे ओर मे समझ आ गया की मेने इसकी सील तोड़ दी ओर वो ज़ोर से चिल्ला उठी ओर बोलने लगी की निकालो अपने लण्ड को मेरे चूत से बहुत दर्द हो रहा है, मैं रो दूंगी प्लीज निकालो मुझे सहन नहीं हो रहा है.


फिर मे उसी पोज़िशन्स मे रहा ओर उसका मूह अपने मूह से बाँध किया वो थोड़ी देर तड़पदै बाद मे नॉर्मल हो गई उसकी आँख से आँशु निकल गये थे फिर मे उसे धीरे धीरे फिर से उसके चूत में डालने लगा और उसकी चूची को दबाने लगा, वो फिर भी दर्द से कराह रही थी पर करीब दस मिनट के बाद वो नार्मल हो गयी और फिर वो अपना गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, मैंने उसको फिर अलग अलग पोसिशन में चुदाई की, और चूच के निप्पल को अपने दांत से दबाता तो वो और भी कामुक हो जाती.

उस दिन मैंने कई बार उसको चोदा उस दिन वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी क्यों की वो काली से फूल बानी थी, उसके चूत में कॅाफ़ी दर्द हो रहा था, फिर शाम को मैंने दर्द की टेबलेट के साथ साथ मैंने गर्भ निरोधक गोली भी खिलाया ताकि वो प्रेग्नेंट ना हो जाये, फिर क्या अब तो मैं रोज उसको चोदता हु,

चाची को अपना लंड दिखा कर चोदा

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Chachi ki Chudai, Desi Sex Stories, Hindi Sex Stories

यह चुदाई की कहानी मेरी और मेरी चाची के बारे में है. मेरी चाची की उम्र 31 साल है. सच बताऊं, तो अब भी सोच सोच कर मेरा लंड फटने को हो जाता है कि मैंने इतने हसीन और भरे हुए जिस्म की मालकिन की चुत मारी है.

दोस्तो, मुझे शुरू से ही लड़कियों से ज्यादा औरतों में ही रूचि रही है. ऐसा नहीं है कि मुझे लड़कियां बिल्कुल भी पसंद नहीं हैं, पर औरतें ज्यादा पसंद हैं. उनके बाहर निकलती हुए मोटी मोटी गांड, मोटे मोटे चुचे मुझे पागल कर देते हैं. मुझे ख़ासकर भाभी या शादीशुदा औरतें ज्यादा पसंद थीं … जो मुझसे चार-पांच साल बड़ी होतीं या जिनका शरीर मेरी पसन्द का होता था. उनके मोटे-मोटे होंठ, रंग सांवला हो या गोरा, मगर मम्मों का साइज़ कम से कम 34 इंच का हो. ऐसी औरतों में मेरी ज्यादा रूचि होती थी.

मेरी प्रेमिकाएं भी कई सारी रही हैं और कई औरतों से बात भी होती थी, मगर सेक्स करने का मन उन्हीं के साथ करता था, जिनका जिस्म मेरी पसंद का होता था.

ये बात आज से 4 साल पहले की है उस समय मैं 12वीं में था और ताजा ताजा जवान हो रहा था. मेरे पड़ोस में एक चाची रहती थीं, उनका नाम कविता (बदलता हुआ नाम) है, वो शुरू से ही बहुत ही समझदार और शरीफ किस्म की महिला रही हैं. उनसे मेरा एक अलग सा लगाव रहा है.


हमारे परिवार का शुरू से ही उनके घर आना जाना रहा है. वो मेरी मम्मी की एक बहुत अच्छी सहली भी हैं. जब से मैंने होश संभाला है … मतलब कि जब से लंड ठीक से खड़ा होना शुरू हुआ है, मैं उनको ही देखते आया हूं. मैं शुरू में चाची को सिर्फ प्यार भरी नजरों से देखता था. उस टाइम तक मेरे दिल में उनके लिए कोई गलत विचार नहीं था, बस वो मुझे अच्छी लगती थीं. वो मुझे जो भी काम कहती थीं, मैं उसको तुरंत पूरा करता था, चाहे वो कैसा भी काम हो और किसी भी समय हो.


मुझे पता नहीं क्यों … एक जुनून सा सवार रहता था कि मैं सारा दिन सिर्फ चाची के पास ही रहूँ. मैं भी चाची को अच्छा लगता था और काफी बार वो मुझे बोलती भी थीं कि तू मेरा सबसे प्यारा बेटा है. कभी कभी वो मुझे गले भी लगा लेती थीं, पर उस टाइम तो मुझको इन बातों की समझ ही नहीं थी.


फिर धीरे धीरे टाइम बदलता गया और मैंने 12वीं अच्छे नंबरों से पास कऱके कॉलेज में दाखिला ले लिया. मैं कॉलेज जाने लगा, वहां मेरी दोस्ती अजय नाम के लड़के से हुई और ये दोस्ती मेरे लिए सेक्स के मामले में वरदान साबित हुई.


अजय एक बहुत ही बिगड़ा हुआ लड़का था, पर मुझे वो उस टाइम नहीं लगा. हम दोनों हर रोज सेक्स की किताबें पढ़ते थे. उस टाइम ना तो मेरे पास फ़ोन होता था और सेक्स फिल्म देखना तो बहुत दूर की बात थी. मेरा दोस्त हर रोज एक सेक्स की किताब लाता था, क्योंकि उस टाइम सेक्स की किताबें ही ज्यादा आती थीं. अगर किसी ने पढ़ी होंगी, तो वो मेरी बात अच्छे से समझ सकता है.


इस तरह मुझे मेरे दोस्त के द्वारा ही धीरे धीरे सेक्स का पता लगने लगा. उसने ही पहली बार मुझे मुट्ठी मारना सिखाया और जब मेरा पानी निकला, मैं आप लोगों को पता नहीं सकता दोस्तो कि कितना मजा आया. मेरे तो हाथ पैर ही फूल गए थे और मैं पूरा खड़ा हो गया था. वो पहला अनुभव मुझे आज भी याद है और वो मेरी पहली मुट्ठी मेरे दोस्त ने ही मारी थी.


आप लोगों को तो पता होगा ही, अगर एक बार मुट्ठी मारी, फिर अपने आपको मुट्ठी मारने से रोक पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. वो भी किसी दूसरे हाथ से मारी गई हो, तो बात ही क्या है.


उस दिन से मुझे मुट्ठी मारने का ऐसा चस्का लगा कि मैं हर रोज मुट्ठी मारने लगा. मुझे मेरे दोस्त की बदौलत सेक्स का भी अच्छा ज्ञान हो गया था और धीरे धीरे हम दोनों की दोस्ती और भी गहरी होती गई. अब तो वो हर रोज मुझे एक नई सेक्स किताब ला कर देता और मैं उसके घर से भी किताब लाकर पढ़ने लगा.


अब आते हैं चाची जी के मुद्दे पर …


जब धीरे धीरे मेरा चाची को भी देखने का नजरिया बदलने लगा था, तो मुझे बस ये हो गया था कि किसी भी तरह चुत और गांड मारनी है. मैं आप लोगों को एक बात बताना चाहूँगा कि मुझे चुत से ज्यादा गांड मारना ज्यादा अच्छी लगती थी. मैं जब भी किसी महिला को देखता, तो एक बार पीछे मुड़ कर उसकी मटकती हुई गांड को जरूर देखता था.


अब जब भी मैं चाची के पास जाता तो था … पर मेरे देखने का नजरिया बदल गया था. वो जब भी झाड़ू लगातीं या पौंछा लगातीं, तो मेरी नजर या तो उनके चुचों पर होती या फिर गांड पर टिकी रहती.


आप लोगों को पता होगा कि महिलाएं आम तौर पर जब पौंछा लगाती हैं, तो अपना पीछे के हिस्से का सूट उठा लेती हैं. उस समय उनकी गांड की शेप लाजवाब दिखता है. आप कल्पना करो कि मेरी 6 फिट की चाची और वो भी इतनी मस्त गांड और चूचों वाली चाची … उस समय कैसी लगती होगी. मुझे पूरा यकीन है आप लोगों का हाथ अपने आप अपने लंड पर चला गया होगा.


मेरी चाची का यौवन इतना लाजवाब था कि बूढ़े का भी लंड खड़ा हो जाए, फिर मैं तो अभी अभी जवान हुआ था. सोचो कि मेरा क्या हाल हुआ होगा.


मैं हर रोज कम से कम दिन में 4-5 बार उनके घर जाने लगा था, अब तो मुझे बस उनके घर जाने की ही लगी रहती थी.


दोस्तो, आप सबको एक बात और बता दूँ कि जब से मैं अपने दोस्त के सम्पर्क में आया था, तब से इसका असर मेरी पढ़ाई पर भी पड़ा … क्योंकि अब मैं कॉलेज की पढ़ाई की तरफ कम ध्यान था और सेक्स की किताबों की तरफ ज्यादा हो गया था. घर वालों को इस बात की चिंता होने लगी और उन्होंने मेरी टयूशन लगवाने की सोची.


जब बात टयूशन की चली, तो मेरी मम्मी ने कहा कि तेरी चाची ने हिस्ट्री से एम.ए किया हुआ था और तेरे कॉलेज में भी तेरा विषय हिस्ट्री ही है, तो मैं उनसे बात कर लूँ?

चाची का नाम सुनते ही मेरी बांछें खिल गईं.


फिर मेरी मम्मी ने मेरी चाची से इस विषय में बात की और मेरी चाची तुरंत मान गईं. क्योंकि मैं उनके काम आता रहता था और उनको भी दुःख हुआ कि मैं पढ़ाई में पीछे होता जा रहा हूं.

इस तरह मेरा उनके घर टयूशन शुरू हो गया और मैं चाची के पास पढ़ने जाने लगा.


पहले ही दिन चाची ने जाते ही पूछा- क्या बात है दीपू (घर पर मुझे सब प्यार से दीपू ही कहते हैं), आजकल तुम्हारा ध्यान कहां रहता है? कहीं तुम्हें कॉलेज की हवा तो नहीं लग गई?

मैंने कहा- नहीं चाची जी ऐसे तो कोई बात नहीं है.

फिर उन्होंने कहा- देख तू मुझे अपनी चाची नहीं … सिर्फ अपनी दोस्त के जैसी ही समझ.


उनके मुँह से ये सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए और मैं उनके मुँह की तरफ देखने लगा.


फिर उन्होंने कहा- ऐसे क्या देख रहा है, कॉलेज में कोई लड़की नहीं देखी क्या, जो इतने गौर से देख रहा है?

मैंने भी बात में बात मिलाते हुए कह दिया- चाची लड़कियां तो बहुत सारी देखी हैं, पर आप जैसे हसीन नहीं देखी.


ये सुनते ही मेरी चाची कातिलाना नजरों से मेरी तरफ देखने लगीं और बोलीं- बेटा, चाची के साथ फ़्लर्ट कर रहा है.


इस समय चाची का ऐसे मेरी तरफ देखना मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे मेरे बदन में चीटियां रेंग रही हों. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.


फिर चाची रसोई में चली गईं और मुझे पढ़ने का बोल गईं, पर मेरा ध्यान तो पढ़ाई में कम और चाची की मटकती हुई गांड में ज्यादा था. मैं जहां बैठा था, वहा से रसोई बिल्कुल साफ़ साफ़ दिख रही थी. जब चाची नीचे झुक कर कुछ उठातीं, तो मुझे उनकी फूली हुई गांड मस्त लग रही थी. मेरा दिल कर रहा था कि अभी जाकर चाची को पीछे से पकड़ लूं और अपना लंड निकाल कर वहीं चाची की गांड में एक झटके में ही पूरा बैठा दूं. फिर उनकी गांड को पकड़ पकड़ कर जोर से जोर से झटके मारने में लग जाऊं. ये सोचते हुए मैं अपना लंड दबा कर रह जाता था.


इसके बाद चाची जहां कहीं भी जातीं, मेरी नजर सिर्फ उस तरफ ही घूम रही थीं. शायद चाची ने भी मेरी नजर को एक दो बार नोटिस कर लिया था, पर वो बोली कुछ नहीं.


दोस्तो, ऐसे ही दिन निकलते गए और साथ बैठ टाइम निकलते गए, पर अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैं कैसे भी करके चाची को पाना चाहता था.


एक दिन की बात है मेरे घर पर कोई नहीं था, किसी की शादी में गए हुए थे और मेरे परीक्षा का समय था तो मुझे नहीं ले गए. जाते जाते मम्मी ने चाची को बोल दिया था कि दीपू घर पर ही है, जब तुम फ्री हो जाओ, तब उसके लिए खाना बना आना और देख लेना कि वो ठीक से पढ़ रहा है या नहीं. ये कह कर मम्मी और पापा चले गए.


मुझे इस बात का पता नहीं था कि मम्मी ने चाची को बोला हुआ है कि वो मुझे आज घर पर आ कर पढ़ाने वाली हैं. मैं तो बस घर पर अकेला होने का फायदा उठा कर सिर्फ अंडरवियर और बनियान में ही घूम रहा था. मैं अपने बेडरूम में जाकर सेक्स की किताबें पढ़ने लगा और लंड को हिलाने लगा. साथ ही साथ तेज आवाज में गाने चल रहे थे.


मुझे ऐसा करते हुए 20 मिनट ही हुई थे कि घर का दरवाजा बजा, पर मुझे सुनाई नहीं दिया. मैं गेट लॉक करना भूल ही गया था. मैं तो सिर्फ अपने लंड को बाहर निकाल कर अपने काम में लगा हुआ था.


दोस्तो, आप विश्वास नहीं करोगे, उस दिन मैं कहानी भी चाची और बेटा के सेक्स की ही पढ़ रहा था. उस स्टोरी में मैं अपनी चाची को ही महसूस कर रहा था और लंड हिला रहा था, पर पता नहीं चाची किस टाइम मेरे बेडरूम के गेट के सामने आ कर खड़ी हो गईं और मुझे मुट्ठी मारते हुए देखने लगीं.


जब मेरी नजर चाची पर गई, तो मैंने देखा कि वो एकटक मेरे खड़े लंड को देखे जा रही थीं. उस समय मैं चाची की आंखों में आज एक अलग ही वासना देख रहा था. जब हमारी नजर एक दूसरे से मिली, तब चाची गुस्से में लाल हो कर वहां से चली गईं.


मुझे समझ नहीं आया कि अभी तो वो मेरे लंड को खाने की नजरों से देख रही थीं और अचानक हमारी नजरें मिलते ही उनको इतना गुस्सा भी आ गया. मुझे बहुत ज्यादा डर लग रहा था कि पता नहीं अब क्या होगा. मैंने तुरंत अंडरवियर ठीक किया और बरमूडा डाला और बाहर आया.


मैंने देखा चाची जी रसोई में खाना की तैयारी कर रही थीं. मैं तो उनसे नजरें ही नहीं मिला पा रहा था.


जब वो मेरे लिए खाना लगा कर लाईं, तब भी मैं नीची नजरें करके बैठा हुआ था. वो मेरे पास आईं और थाली को जोर से रख कर चली गईं.

मैंने सोचा कि बेटा आज गया तू काम से. मैंने जोर नजरों से उनको देखा, तो वो गुस्से में मेरी तरफ ही देखी जा रही थीं.


फिर मैंने सोचा देखा जाएगा, जो होगा सो होगा. अभी बात करनी पड़गी नहीं तो चाची ने ये बात मेरे घर वालों को बता दी, तो तू तो गया काम से.

जब चाची जी मुझे दुबारा रोटी देने के लिए आईं तो मैंने कहा- सॉरी चाची जी.

उन्होंने कुछ नहीं कहा और मेरी तरफ गुस्से से देख कर चली गईं.


मैंने खाना वहीं छोड़ दिया और अन्दर रसोई में ही चला गया. मैं उनके पीछे खड़ा हो गया और फिर से सॉरी बोला.


इस बार चाची बोलीं- मैंने तुझे ऐसा नहीं समझा था कि तू भी ये काम करेगा, तभी तो तुम्हारे नंबर इतने काम आते हैं, यही सब करने तू कॉलेज जाता है क्या?

मैंने कहा- चाची जी प्लीज मुझे माफ़ कर दो … आज के बाद ऐसा कभी नहीं करूंगा.

उन्होंने कहा- नहीं नहीं कर लेना … मैंने कब मना किया है … तुम्हारी जिंदगी है, जो चाहे करो. वैसे तू कब से कर रहा है ये काम?


मैं कुछ न बोला, उन्होंने फिर जोर से बोला- मैं कुछ पूछ रही हूं तुमसे?

मैंने कहा- जब से कॉलेज शुरू हुआ है.

फिर उन्होंने कहा- ये किताबें लाता कहां से है तू?

मैंने कहा- मेरे एक दोस्त से.


फिर उन्होंने खाना बनाना बंद कर दिया और मेरी तरफ मुँह कर लिया. चाची ने अपने हाथों से मेरा मुँह पकड़ लिया और बोलीं- बेटा अभी जिंदगी बहुत पड़ी है ये सब करने की, अभी तुम्हारी उम्र सिर्फ पढ़ाई की है. अगर अभी से अपना पानी खत्म कर दोगे, तो अपनी पत्नी को क्या दोगे?


चाची के मुँह से ये बात सुनते ही मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया, जिसे चाची ने देख लिया था. क्योंकि मेरा लंड बरमूडा में से साफ साफ दिख रहा था.


उन्होंने ये देख कर फिर से मुँह फेर लिया.


मैंने कहा- चाची मैं क्या करूं, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता.

उन्होंने कहा- कोशिश कर और अपना ध्यान पढ़ाई पर लगा.

मैंने कहा- मैं बहुत कोशिश करता हूं.


फिर वो कुछ नहीं बोलीं और खाना बना कर चली गईं. जाते वक्त चाची बोल कर गईं- खाना खा कर पढ़ लेना, सिर्फ कॉलेज की किताबें …

यह कह कर वो मुस्करा कर चली गईं और ये बोल कर गईं- मैं 2 घंटे में आती हूं.


चाची के जाने के बाद मैं एक पल तो उनकी मटकती गांड को याद करता रहा. फिर मुझसे रुका ही नहीं जा रहा था. मैंने खाना खत्म किया और यही सोचने लगा कि अगर चाची ने मुझे मुट्ठी मारते हुए देख लिया था, तो उस समय क्यों नहीं बोलीं.


जब हमारी नजरें मिलीं, उसके बाद ही उनको गुस्सा क्यों आया, कहीं ये तो नहीं था कि उनको भी मेरा लंड पसंद आ गया हो. मैंने उनकी तरफ देख कर गलती कर दी हो?


बस यही सोचते सोचते मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैंने सोच लिया था कि जो होगा देखा जाएगा. अब की बार चाची को फिर से लंड दिखाना ही है.


अब तक चाची के आने का समय हो गया था. मैंने एक प्लान बनाया, मुझे पता था कि चाची जरूर वापस आएंगी. मैंने बाहर का मैंने गेट खुला छोड़ दिया और बाथरूम में जाकर नहाने लगा और पूरा नंगा होकर लंड को हिलाने लगा. थोड़ी ही देर में मेरा लंड चाची को याद कर करके खड़ा हो गया और मैं चाची के आने का इंतजार करने लगा.


जैसे ही बाहर के गेट के खुलने की आवाज आई, तो मैं जोर जोर से गाना गाने लगा ताकि उनको पता लगे कि बाथरूम में हूं. मैंने बाथरूम का भी आधे से ज्यादा गेट खोल दिया ताकि मैं चाची को लंड हिलाते हुई दिख जाऊं.


जब चाची अन्दर आईं, तो मैंने अपना लंड बाहर की तरफ कर दिया और मेरे बाथरूम के शीशे से उनको खड़ा लंड दिखने लगा. वो इधर उधर का काम करके बाथरूम की तरफ आ गईं. जब मैंने शीशे से उनको देखा, तो वो लगातार मेरे खड़े लंड को देखे जा रही थीं. मैं उनको ऐसे देखते हुए देख कर उसी समय उनका नाम ले कर जोर जोर से मुट्ठी मारने लगा.


‘आह कविता चाची … आपकी क्या मस्त चूचियां हैं … आह तेरी चूत की बड़ी याद आती है … एक बार दे दो चाची.’


जब मैं चाची का नाम ले कर मुट्ठी मार रहा था, तो मैं शीशे से चाची का हाल भी देख रहा था. चाची भी थोड़ी सी साइड में होकर अपने चूचों को जोर जोर से रगड़ने लगी थीं.


तब मुझे लगा अब मंजिल पास है. दोस्तो … आप विश्वास नहीं करोगे मुझे इतना मजा आ रहा था कि चाची जी मुझे मुट्ठी मारते हुए देख रही थीं और साथ के साथ अपने चूचों को भी रगड़ रही थीं. मेरा पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था.


वैसे भी मेरा वीर्य बहुत देर से निकलता है. आज तक मैंने जितनी भी महिलाओं को चोदा है, उन सबका दो बार हो जाता था और मेरा मुश्किल से एक बार हो पाता था.


मैं चाची को अपना मोटा और तगड़ा लंड दिखाए जा रहा था और वो भी लगातार अपने चूचों को रगड़े जा रही थीं.


मुझे मुट्ठी मारते हुए कम से कम 15 से 20 मिनट लग गए थे और तब तक चाची वहीं खड़ी, कभी अपने चुचों को रगड़ रही थीं, तो कभी अपनी सलवार के ऊपर से ही अपनी चुत रगड़ रही थीं. मैं लगातार उनको देख देख कर मुट्ठी मारने में लगा हुआ था. जब मेरा पानी निकला, तो सामने दीवार पर लंड का माल जोर से जा कर चिपक गया. आज मेरा पानी और दिनों से बहुत ज्यादा और बहुत देर तक निकला था.


जब मैं फ्री हो गया, तो मैंने शीशे से देखा कि चाची वहां नहीं थीं. जब मैं नहा कर बाहर आया, तब मैंने देखा चाची मेरी किताबों के पन्ने पलट रही थीं.


मैंने बाहर आते ही पूछा- चाची जी आप कब आईं?

उन्होंने कहा- जब तू बाथरूम में व्यस्त था …


ये कह कर चाची ने एक कातिलाना स्माइल पास कर दी. मैंने उनकी तरफ देखा और कपड़े पहनने अन्दर चला गया था. मैं बाहर आया तब उनके पास ही जांघों से जांघें मिला कर बैठ गया.


चाची ने भी मुझे दूर बैठने के लिए नहीं बोला. मुझे पता चल गया था कि चाची को मेरा लंड पसंद आ गया है. वो अब गर्म हो चुकी हैं. मेरी नज़रें अभी भी मेरी प्यारी चाची के कसे हुए चूचों पर थीं. इस नजर को चाची भी समझ गई थीं … पर वो कुछ बोली नहीं. शायद उन्हें भी मज़ा आ रहा था.


तभी अचानक से चाची बोलीं- तू बहुत हरामी हो गया है.

मैं बोला- क्यों?

वो बोलीं- फिर से बाथरूम में वही कर आया, मैंने मना किया था ना और वो भी मेरा नाम लेकर … तुझे शर्म नहीं आती, मैं तुम्हारी चाची हूं बेटा और तू मेरा ही नाम ले कर ये कर रहा था.


मैंने आंख मार कर कहा- अगर आपने देख लिया था, तो अन्दर आ जाते न, आपको और अच्छे से दिखा देता, चाची प्लीज बुरा मत मानना, आप मुझे बहुत ज्यादा अच्छी लगती हो … और मैं आपसे बहुत ज्यादा प्यार करता हूं.

चाची ने कहा- ये सब गलत है, मैं तुम्हारी चाची लगती हूं और मैंने तुम्हें कभी भी ऐसी नजरों से नहीं देखा.

मैंने कहा- तो फिर आप बाथरूम में चुपके चुपके क्या देख रही थीं?


चाची जी ने कुछ नहीं बोला और नीची गर्दन कर ली. वो उठ कर घर चली गईं. मुझे मालूम था कि चाची जी शाम को फिर से खाना बनाने के लिए आने वाली थीं.


मैंने सोचा आधा काम तो हो गया है, शायद पूरा काम हो जाए और मुझे चाची चोदने को मिल जाएं.


मैंने एक और प्लान बनाया, जब चाची आने वाली थीं, तो मैंने एक सेक्स किताब टेबल पर रख दी. वो भी चाची और बेटा की सेक्स स्टोरी निकाल कर और मेरे रूम में चला गया.


जब चाची आईं और उन्होंने मुझे आवाज लगाई.

मैंने कहा- अभी आता हूं … चाची आप बैठो.


चाची सोफे पर बैठ गईं और सामने पड़ी किताब को उठा कर पढ़ने लगीं. मैं ऊपर शीशे से सब देख रहा था, थोड़ी ही देर में चाची का मुँह लाल हो गया और वो इधर उधर देख कर अपने चूचों को दबाने लगीं और साथ ही साथ अपनी सलवार में हाथ डाल कर अपनी चुत रगड़ने लगीं.


मुझे लगा अब चाची गर्म हो गई हैं. मैं तुरंत नीचे आया और चाची को देखने लगा. चाची आंखें बंद करके बिल्कुल मगन हो रही थीं.

मैं उनके पास आकर बैठ गया और उनकी जांघ पर हाथ रखते हुए कहा- चाची जी, ये क्या कर रही हो आप?


चाची जी एकदम से डर कर उठीं और हाथ बाहर निकाल कर भागने लगीं.


मैंने तुरंत भाग कर चाची को पीछे से पकड़ लिया. सच में यार चाची तो बहुत ज्यादा गर्म हो गई थीं. वो मुझसे छुड़वाने की कोशिश करने लगी थीं. पर मैंने उनको बड़ी जोर से पकड़ा हुआ था


चाची फिर से बोलीं- बेटा, मैं तेरी चाची हूं, ये सब गलत है.

मैंने कहा- चाची प्लीज अब ये रट छोड़ दो और मुझे भी पता है कि आपकी चुत भी मेरा लंड मांग रही है.

चाची बोलीं- दीपू ये कैसी बात कर रहा है तू? तुम्हें शर्म नहीं आती … मैं तुम्हारी चाची हूं.

मैंने कहा- चाची प्लीज अब ये शर्म को छोड़ कर मजा करो, क्यों अपने आप पर और मुझे पर इतना जुल्म कर रही हो.

चाची ने कहा- दीपू ऐसा नहीं है, मैं सिर्फ तुम्हारे चाचा से ही प्यार करती हूं और उनके अलावा मैंने किसी की तरफ नहीं देखा.


मैं चाची की बात को अनसुना करते हुए पीछे से उनकी गर्दन को चूमने लगा और अपने दोनों हाथ आगे ले जाकर उनके चूचों को जोर से पकड़ कर सूट के ऊपर से ही उनके चूचों के निप्पल को अपने अंगूठे और एक उंगली से धीरे धीरे रगड़ने लगा. इससे उनके मुँह से अजीब अजीब आवाजें निकलने लगीं.


‘सी … ईईई … आहहह … आह..ई … आह … ईश्श्श … नहीं दीपू प्लीज, ऐसा मत कर … मैं मर जाऊंगी … आह … हाय दीपूउउउउ … हाय नहीं दीपू ई. … ई … ई … बस कर बस कर प्लीज मान जा..’


मैं लगातार उनकी गर्दन के पास, उनके कानों की लौ को चाटे जा रहा था और हाथ से उनके चूचों को, कभी निप्पल को रगड़े जा रहा था.

अब चाची से बर्दाश्त नहीं हो रहा था, वो बिल्कुल ढीली पड़ चुकी थीं. मैं चाची के चूचों को छोड़ कर धीरे धीरे उनके सूट को ऊपर करने लगा और उनके नंगे पेट पर हाथ फेरने लगा. धीरे धीरे ऐसा करते हुए मैंने उनका पूरा सूट उनके जिस्म से अलग कर दिया और उनको पता भी नहीं चला कि वो ऊपर से नंगी हो चुकी हैं.


उन्होंने लाल ब्रा डाली हुई थी. वो लाल ब्रा में और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं.


दोस्तो, उनका दूध से भी ज्यादा गोरा रंग और उसके ऊपर लाल रंग की ब्रा … आह मेरा तो लंड फटने को हो गया था. फिर मैंने चाची को अपनी तरफ घुमाया और उनकी तरफ देखा. उन्होंने अपनी आंखें बंद की हुई थीं. मैं अपने होंठ उनके होंठों के पास लाया, तो उन्हें मेरी गर्म सांसों से अहसास हो गया था कि मैं उनको किस करने करने वाला हूँ.


फिर उन्होंने अपनी आंखें खोलीं और मेरी तरफ देखा. सच यार उनकी आंखें इतनी लाल हो रखी थीं और एक अलग सी वासना दिख रही थी उनकी आंखों में.

मैंने देर न करते हुए अपने होंठ उनके लाल लाल होंठों से मिला दिया.


दोस्तो, ये मेरी जिंदगी का पहला किस था. आप लोगों के सामने बयान नहीं कर सकता, उस समय मुझे इतना अच्छा लग रहा था और मैं लगातार उनके होंठों को चूसे जा रहा था.


अब उन्होंने भी मेरा धीरे धीरे साथ देना शुरू कर दिया था, मैंने अपनी पूरी जीभ चाची के मुँह में दे दी और उनके मुँह में फिराने लगा. चाची भी अपनी जीभ मेरे मुँह में देकर फिराने लगीं. हमारा किस इतना लम्बा चला कि हम दोनों के मुँह से लार तक टपकने लगी थी और मैं चाची की सारी लार चाट गया.


धीरे-धीरे मैंने चाची के पेट को चाटते हुए उनके पूरे पेट को गीला कर डाला. मैंने चाची की ब्रा को उतार कर उनके एक चूचे को तो मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैंने उनके निप्पल को अपने होंठों से पकड़ कर रब करने लगा और साथ की साथ जीभ से भी उनके निप्पल को रगड़ने लगा.


चाची के मुँह से बुरी तरह से कामुक सिसकारियां निकलने लगी थीं- ईश्श्श्श् … आहहह … दीपउउउ … आंह … उंह … हाय राम … क्या मस्त चुचे चूसता है यार तू. … आह मजा आ गया रे … खा जा आज इनको … आंह पूरा का पूरा मुँह में ले दीपू प्लीज.


पूरा कमरा उनकी सिसकारियों से गूंजने लगा था. उनके चुचे इतने मस्त और सेक्सी थे कि उनकी मस्ती को शब्दों में बयान नहीं कर सकता. मैंने एक निप्पल को चूसने के साथ ही दूसरे चूचे को दबाना शुरू कर दिया.


मैं उनके दोनों निप्पलों को बारी बारी मुँह में ले कर अपने होंठों से रब करने लगा, जिससे चाची और भी तिलमिला उठीं.


मैंने उनके चूचों को चूस चूस कर लाल कर दिए, उनके चूचों पर पूरे लाल लाल निशान हो गए थे. फिर मैं नीचे की तरफ बढ़ने लगा. मैंने चाची सलवार का नाड़ा खोल दिया.


तभी अचानक चाची ने मेरे हाथ पकड़ लिए और बोलीं- नहीं दीपू … प्लीज … इससे आगे नहीं, प्लीज मुझे माफ़ कर दे … पर इससे आगे नहीं.

पता नहीं अचानक उनको कहां से होश आ गया या पता नहीं क्या हुआ था, वो मुझे और आगे करने से मना करने लगीं.


मुझे लगा कि बेटा अगर अब पीछे हट गया, तो फिर जिंदगी भर इनकी चुत नहीं मिलने वाली. मैं ऊपर उठ गया और दुबारा से उनके होंठों पर किस करने लगा और उनके चुचे दबाने लगा. इसी बीच में मैंने एक हाथ नीचे ले जा कर उनकी सलवार के ऊपर से ही उनकी चुत को रगड़ना चालू कर दिया और उनको फिर से तैयार करने लगा.


वो लगातार मुझे मना किए जा रही थीं और मैं उनके होंठों पर, उनके गर्दन पर और कान के पास लगातार किस किए जा रहा था.


मेरी इस हरकत पर चाची की और भी गर्म सिसकारी निकलना शुरू हो गईं. चाची ने मेरे बालों को पकड़ कर मेरे होंठों को काटना शुरू कर दिया. चाची पागल हो चुकी थीं. उनकी चूत लगातार पानी छोड़ने लगी थी.


जब चाची से और ज्यादा बर्दाश्त नहीं हुआ, तो मैंने चाची को अपनी गोद में ले लिया और लगातार चूमने लगा. फिर ले जाकर उनके बेड पर पटक दिया.


मैंने चाची के पैरों से फिर शुरूआत कर डाली. मैंने चाची के एक पैर को अपनी छाती पर रख दिया. मैं उसके पैरों के नीचे बैठा हुआ था और उनके पैरों की उंगलियों को मुँह में लेकर चूस रहा था. चाची अपनी आंखें बंद लीं. मैं उनके पैर के अंगूठे को मुँह ले कर चूसने लगा, जिससे चाची तिलमिला उठीं.


उनके मुँह से निकल रहा था- दीपू, चोद दे अपनी चाची को प्लीज … तेरे चाचा से तो ठीक से चोदा नहीं जाता है.


आखिरकार चाची का सच सामने आ ही गया था और उन पर सेक्स हावी हो ही गया था. मुझे मेरे कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि ये वही चाची हैं क्या?


इतना सुनते ही मेरी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ गई और मैं चाची की सलवार को खोलने लगा और जब मैंने सलवार नीचे की … और चुत की तरफ देखा, तो मैं देखता ही रह गया.


चाची ने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी, काली पेंटी में चाची और भी लाजबाब लग रही थीं. मैं चाची की चुत को पैन्टी के ऊपर से ही चाटने लगा, तो वो जोर जोर से तिलमिला उठीं. अब उनसे सहन नहीं हो रहा था, वो मेरे मुँह को पकड़ कर अपनी चुत पर रगड़ रही थीं.


मैंने देर ना करते हुए उनकी पैंटी को निकाल दिया और अब मेरे सामने वो चीज थी, जिसका मुझे कबसे इंतजार था. आखिरकार वो समय आ ही गया था. चाची की बिल्कुल नंगी और लाल लाल चुत, जिस पर एक भी झांट का बाल नहीं था मेरे सामने चुदने को खुली पड़ी थी. इतनी चिकनी चूत देख कर मुझे लगा, जैसे चाची अपनी झांटों को आज ही साफ़ करके आई हों.


मैं धीरे धीरे उनकी चुत पर हाथ फेरने लगा और वो बिन पानी के मछली की तरफ तड़फने लगी और जोर जोर से सिसकारियां लेने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ह्म्म्म … अमन्न आह अआआह आह.’

मैं भी चूत के दाने से छेड़खानी करे जा रहा था.


चाची ने कहा- हरामखोर मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और खुद ने कुछ ना निकाला.

मैंने कहा- मैंने आपके निकाले है … तो आप मेरे निकाल दो.


चाची एकदम से भूखी शेरनी की तरह उठ कर मेरे कपड़े निकालने लगीं. दो मिनट में ही उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए. जब चाची ने मेरा अंडरवियर निकाला और मेरा लंड इतने पास से देखा, तो उनकी आंखों में एक अलग ही चमक आ गई थी.


चाची मेरे लंड को जोर जोर से रगड़ने लगीं और बोलीं- मैं तो कल ही मोहित हो गई थी तेरे इतने मोटे लंड पर, मैंने आज तक इतना मोटा लंड कभी नहीं देखा … अब तक कहां छिपा रखा था इस खजाने को.

मैंने कहा- अब ये आपका ही है चाची जी.

उन्होंने लंड सहलाते हुए कहा- हां ये तो है … अब मैं इसे कहीं नहीं जाने दूंगी, अब तो जब भी टाइम लगेगा, मैं हर रोज चुदूँगी इससे.

वे मेरे लंड को जोर जोर से रगड़ने लगीं.


उसी समय मैंने एक उंगली चूत में घुसा दी और अन्दर बाहर करने लगा.

चाची- ओहह्ह … ओह्ह्ह्ह … अह्ह ह्हह … अई … अई…


मैं जल्दी जल्दी चूत में उंगली करने लगा. उंगली खूब अन्दर बाहर करके मजा लेने लगा. चाची की कामुकता भरी चीखें निकालने लगीं. धीरे धीरे उनकी चूत का रस बाहर निकलने लगा. मैं जल्दी जल्दी चाटने लगा.


अब मैंने चाची को अपना लंड हाथ में पकड़ा दिया और लंड चूसने को कहा.


चाची तो जैसे तैयार ही बैठी थीं. हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए. चाची मेरे ऊपर थीं और मैं चाची के नीचे था. जब पहली बार चाची ने मेरे लंड की टोपी अपने मुँह में ली, उस टाइम तो मैं समझो स्वर्ग में पहुंच गया था. मैं जोर जोर से चाची की चुत चाटने लगा. मैंने अपनी पूरी जीभ चाची की चुत के अन्दर दे दी.


उसी समय चाची के मुँह से बहुत जोर से सिसकारी निकली- हाय माँआआआ मर गई … आह आह ओह मेरी जान श्श्श्श्श्श यस उन्ह आंह …


चाची भी लगातार मेरे लंड को पूरा मुँह में ले कर चूसने लगीं. वो बार बार मेरा मुँह अपनी चुत पर रगड़े जा रही थीं.


अब चाची लगातार कहने लगी थीं- प्लीज दीपू … यार अब सहा नहीं जाता … डाल दो अपना … मैं तुम्हारे मोटे और लम्बे लंड से चुद कर आनन्द लेना चाहती हूँ.


फिर मैं भी समय की नजाकत को समझते हुए उनके दोनों पैरों के बीच में आ गया. अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा, पर चुत के अन्दर नहीं डाल रहा था. मैं चाची को ओर तरसाना चाहता था. मैं उनकी चुत के दाने को अपने लंड से रगड़ देता, तो कभी उनकी चुत के पास सहलाने लगता.


अब चाची से बर्दाश्त नहीं हुआ तो वो गाली बकने लगीं- दीपू साले हरामी जल्दी से डाल भी दे, मादरचोद … मुझसे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा.


फिर मैंने अपने लंड की टोपी उनकी चुत के मुँह पर रख कर एक करारा धक्का लगा दिया. मेरे लंड की टोपी अन्दर चली गई और उसके साथ ही दूसरा करारा झटका लगा दिया, तो मेरा आधा लंड अन्दर चला गया.

उनको इतना दर्द हुआ कि उनकी आंखों से आंसू आ गए थे … क्योंकि उनके पति का लंड कुछ इंच लम्बा ही था. जिस वजह से चाची की चुत का छेद भी ज्यादा बड़ा नहीं हो सका था.


उन्होंने कहा- उई मर गई … साले दीपू अब ये तेरी ही चुत है … प्लीज धीरे धीरे चोद ना यार.


अब मैंने चाची को सॉरी बोला और कहा- अब आराम से डालूंगा.


फिर मैं वहीं रुक गया और उनके चूचों को चूसने लगा, उनके निप्पल को काटने लगा और उनके होंठों को चूसने लगा. जब तक उनको भी कुछ आराम मिल गया था.


फिर मैंने धीरे धीरे करके पूरा लंड उनकी चुत में घुसा दिया, क्योंकि दोस्तों मेरा मानना है कि अगर महिला को दर्द हो रहा है, तो रुक जाओ, मेरा मकसद मजा देना है … न कि दर्द.


जैसे ही उनका दर्द कम हुआ, तो मैंने उनसे पूछा कि आगे की कार्रवाही शुरू की जाए.

चाची ने आंख मार कर कहा- जरूर मेरी जान.


बस फिर धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और फिर जोर जोर से झटके मारने लगा. फिर तो चाची भी अपनी गांड को ऊपर उछाल उछाल कर मेरा साथ देने लगीं.

कुछ ही देर में चाची में पूरा जोश आ गया था, वो ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी थीं- उईई ईईई … हाय आअहाआआ बाबू आहा मेरी जान ओह्ह्ह श्शह, हाय माँ मर गई … आआअह्ह ह्हह … ईईईई दीपू प्लीज, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा और मोटा है तुम्हारे चाचा का तो इसके सामने झांत बराबर है … आह तेरे इस लंड ने तो पूरा मजा दे दिया … इतना मजा मुझे आज तक नहीं आया.


मैंने अपनी स्पीड और तेज कर दी.


चाची मस्ती में बोले जा रही थीं- आआहह … उह्ह्ह ह्ह हां … और ज़ोर से चोदो … और ज़ोर से आईईई … दीपू प्लीज आह … मैं बस तुम्हारी हूं … हां और उह्ह्ह्ह ह्ह ज़ोर से चोद मुझे … उह्ह्ह्ह ह्ह्ह्ह. प्लीज दीपू मुझे अपनी रंडी बना ले यार … आज से तू जो कहेगा, मैं वो करूंगी.


करीब आधे घंटे की लगातार चुदाई में वो तीन बार झड़ गई थीं. मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था कि मैं इतने समय तक रुक पाऊंगा … क्योंकि ये मेरा पहली बार था.


इस दौरान मैंने उनको कम से कम 5-6 आसनों में चोदा और जब मेरा होने को हुआ तो मैंने कहा- चाची मेरा होने वाला है, कहां करूं?

उन्होंने कहा- यार दीपू, प्लीज मेरी चुत में ही डाल दे, बहुत दिन से गर्म गर्म रस नहीं गया है मेरी चुत में.


मैं भी उनकी चूत के अन्दर ही झड़ गया. मैं हांफता हुआ उनके ऊपर ही पड़ गया और कुछ समय तक ऐसे ही रहा.


कुछ देर बाद मैं उठा और उसके बाद मैंने चाची जी की पूरी बॉडी पर किस किया. उसके बाद अब मैं उनका हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखने लगा.

तो चाची बोलीं- क्या बात है लाड़ले … अभी भी दिल नहीं भरा क्या? इतनी जबरदस्त चुदाई करने के बाद भी तू जोर लगा रहा है … मेरा तो एक एक अंग डोल गया है.

चाची ये कह कर हंसने लगीं.


मैंने कहा- आप हो ही इतने लाजवाब और सेक्सी कि पूरी रात और दिन आपकी चुदाई करता रहूँ, तो भी दिल ना भरे.

चाची हंसने लगीं और कहने लगीं- दीपू तुमने आज जो सेक्स का असली मजा दिया है न … वो मजा आज तक मेरे पति ने कभी नहीं दिया. उनका तो लंड भी 3.5 इंच से ज्यादा नहीं है और वो अन्दर डालते ही 8-10 झटकों में ही निकल जाते हैं. पर तुम्हारा तो आज पहली बार था और तुमने इतने देर तक चोदा, आज तुमने मेरी सारी तमन्ना पूरी कर दी. मेरे पति तो चुत को चाटना तो दूर की बात है, उन्होंने तो आज तक मेरी चुत को ढंग से छुआ भी नहीं है. थैंक्यू मेरी जान.

ये कहते हुए उन्होंने मेरे होंठों को काट खाया.


ये बात सच है दोस्तो … आज भी मेरा लंड बहुत देर तक नहीं झड़ता. इस तरह मैंने अपनी शरीफ दिखने वाली चाची को अपना लंड दिखा कर और चोद कर अपना बना लिया.

चाची के साथ मैंने आगे क्या क्या मजे लिए और कैसे मैंने उनकी गांड मारी, वो सब अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा. अगर मुझे कोई गलती हो गई हो, तो अपना समझ कर माफ़ कर देना और आप लोगों को मेरी पहली सेक्स स्टोरी कैसी लगी … ये बताना जरूर दोस्तों मुझे आपके कमेंट का इंतजार रहेगा.

पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

adult stories मेरा नाम कंचन यादव है और यह कोई स्टोरी नहीं एक सच है, जो मेरे साथ हुआ है. में एक हाउसवाईफ हूँ और एक मिड्ल क्लास फेमिली से बिलॉंग करती हूँ, में 32 साल की हूँ और मेरे पति का नाम दिव्यांश है, वो 35 साल के है और वो एक इंजिनियर है. में एक बहुत ही नॉर्मल औरत हूँ और हमेशा अपनी फेमिली का ख्याल रखती हूँ, मेरे दो बच्चे है. पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया.

मेरी शादी को 12 साल हो चुके है और हम दोनों पति-पत्नी एक दूसरे से बेहद प्यार करते है, लेकिन पता नहीं क्यों मेरे पति मुझसे सेक्स में संतुष्ट नहीं रहते है? में उन्हें काफ़ी कोशिश के बाद भी खुश नहीं रख पाती हूँ. वो पिछले 3 साल से मेरे साथ नहीं है, उनका ट्रान्सफर बंगलोरे हो गया है, वो आजकल मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते है. में कई बार उनसे मिलने भी गयी, लेकिन वो आजकल एकदम घुटे-घुटे से रहते है.

अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि में क्या करूँ? फिर मेरी एक सहेली से मैंने इस बारे में बात की. फिर उसने कहा कि तू उन्हें वॉच कर शायद उनका किसी और के साथ चक्कर हो. अब में अब उन पर वॉच करने लगी और उन्हें बहलाकर सब कुछ जानने की कोशिश करने लगी थी. फिर मैंने देखा कि वो हमेशा उदास रहते है और खाली टाईम में ब्लू फिल्म देखते रहते है और कहानियाँ पढ़ते रहते है. फिर काफ़ी दिनों के बाद भी मुझे ऐसा नहीं लगा कि उनका किसी और से चक्कर है.

अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि शायद में ही कहीं ना कहीं ग़लत हूँ. अब मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ? फिर काफ़ी सोचने के बाद एक दिन मैंने उनके मोबाईल से सारा डाटा अपने मोबाईल में कॉपी कर लिया और उनके मोबाईल में लोड की हुई सारी ब्लू फिल्मों को बड़े ध्यान से देखना शुरू किया.


अब मुझे सारी मूवी देखने और स्टोरी पढ़ने में 1 हफ्ता लग गया था, क्योंकि मैंने बहुत ज़्यादा ध्यान देकर और समझकर सारी स्टोरी पढ़ी और ब्लू फिल्म देखी थी. अब में यह सब देखकर और पढ़कर एकदम हैरान हो गयी थी, अब मेरे दिमाग़ और हाथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया था. अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ?

क्योंकि जो कुछ मैंने पढ़ा और देखा था, वो करना मेरे लिए नामुमकिन था. अब में 2-3 दिन तक इसी सोच में पड़ी रही, क्योंकि इस तरह का ब्रूटल सेक्स मेरे लिए करना तो दूर सोचना भी मुश्किल था. फिर में वापस अपने घर आ गयी, लेकिन अब यह सब कुछ मेरे दिमाग़ से निकल ही नहीं रहा था. अब में हर पल परेशान रहने लगी और अकेले में रोती रहती थी, अब घर में सभी मुझसे इसका कारण पूछते, तो अब में उन्हें क्या बताती?

फिर मैंने मेरी सहेली को सब कुछ बताया, तो उसने मुझे समझाया और कहा कि देख तू चाहे तो सब कुछ कर सकती है, एक बार कोशिश तो करके देख हर मर्द एक जैसे नहीं होते है और सभी की जरूरतें अलग-अलग होती है, तू वापस अपने पति के पास जा और वही कर जो वो चाहते है, इसी से तू और तेरा पूरा परिवार खुश हो सकता है.

फिर मैंने उससे इसका कारण पूछा, तो वो मुझे एक बड़ी डॉक्टर के पास ले गयी. तब उस डॉक्टर ने मुझे बताया कि ब्रूटल सेक्स की चाहत किसी भी व्यक्ति को 3 कारण से होती है.

अगर कोई व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा परेशानी और टॉर्चर से रहा हो और उसके बाद भी अपनी चाहत पूरी ना कर पा रहा हो, मतलब अपनी ज़िंदगी से बिल्कुल निराश हो गया हो तो ऐसा व्यक्ति इस टाईप का सेक्स चाहता है, क्योंकि वो अपने आपको बेहद दर्द और तक़लीफ़ देना चाहता है, क्योंकि अगर फिज़िकल दर्द बहुत ज़्यादा होगा तो शायद वो मेंटली दर्द भूल जाएगा.

ऐसे व्यक्ति जिन्हें बहुत कोशिश करने के बाद भी अपनी मर्ज़ी के मुताबिक सेक्सुल सन्तुष्टी अपने पार्ट्नर से ना मिले तो ऐसे लोग ब्रूटल सेक्स अपने उसी पार्ट्नर से चाहते है, क्योंकि ये लोग यह सोच लेते है कि चलो अब दर्द से करके ही जी लेंगे

ऐसे लोग जो बिल्कुल ज़िंदगी से हार जाते है और जो अपनी ज़िंदगी में अपनी कोई भी इच्छा पूरी नहीं कर पाते है, ऐसे लोग भी ऐसा सेक्स चाहते है, वैसे ब्रूटल सेक्स की बहुत ज़्यादा ब्लू फिल्म देखना भी एक कारण है.

फिर उसने कहा कि अब तू खुद सोच कि तेरे पति के साथ कौन-कौन सा कारण है? जितने ज़्यादा कारण होंगे, वो उतना ही ज़्यादा ब्रूटल डिमांड करेगा. फिर मैंने उससे पूछा कि यह प्रोब्लम ठीक कैसे होगी? तो उसने कहा कि कुछ ही दिनों में यह ठीक हो जाएगी, अगर में बहुत ज़्यादा ब्रूटली सेक्स करती रहूँ और उसे संतुष्ट कर दूँ. “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर काफ़ी सोचने के बाद मैंने फ़ैसला किया कि अब में वही करूँगी, जो मेरा पति चाहता है. अब में उन्हें हर वो चीज़ दूँगी, जो वो चाहते है और इतनी ज़्यादा ब्रूटल बनाउंगी, जितना किसी भी ब्लू फिल्म में भी आज तक ना दिखाया गया हो और फिर में उनके पास पहुँच गयी. फिर पहले दिन मैंने उन्हें काफ़ी प्यार दिया और एक बहुत ही रोमांटिक सेक्स करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेरा ज़रा सा भी साथ नहीं दिया, क्योंकि उन्हें तो सिर्फ़ ब्रूटल सेक्स ही चाहिए था, वैसे भी अकेलेपन ने उन्हें काफ़ी बदल दिया था और वो बहुत चिड़चिड़े हो गये थे. अब में मायूस हो गयी थी.

फिर मेरी आत्मा ने मुझसे कहा कि तू यहाँ जो करने आई है वो कर, रोमांटिक सेक्स और प्यार तो में काफ़ी दे चुकी हूँ, लेकिन उन्हें अब यह पसंद नहीं है.


अब पता नहीं क्यों में चाहकर भी उस टाईप का सेक्स नहीं कर पा रही थी? अब मुझे एक अंजाना सा डर लग रहा था, या यूँ समझ लीजिए कि में ब्लू फिल्म की तरह नहीं बन पा रही थी. खैर फिर मैंने अपने आपसे वादा किया कि अब में ब्लू फिल्म में दिखाई जाने वाली औरत की तरह ही ब्रूटल और वहसी बनकर ही रहूंगी, चाहे जो भी हो.

फिर में 3 दिनों तक दुबारा से ब्लू फिल्म देखती रही और स्टोरी पढ़ती रही और उसमें दिखाई जाने वाली हर एक स्टेप और बातों को अपने दिमाग़ में सेट करती रही, ताकि कुछ भी छूट ना जाए. फिर एक दिन मैंने हर तरह से सारी तैयारी कर ली. फिर जब मेरे पति शाम को घर आए तो मैंने बहुत बढ़िया से सज-सवरकर एक बहुत ही मॉडर्न ड्रेस पहनकर उनका स्वागत किया.

फिर उनके फ्रेश होने के बाद मैंने उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाया और उन्हें बहुत प्यार किया और कहा कि जान आज में तुम्हें हर तरह से खुश करूँगी, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों ना करना पड़े? तो उन्होंने मुझे अपने से दूर कर दिया और बड़ी बेरूख़ी से कहा कि तुम इस लायक नहीं हो.

अब मुझे बहुत दुख हुआ, मगर मैंने उनसे कहा कि आज बस तुम देखते जाओ. फिर में विस्की की बोतल लेकर बालकनी में आ गयी और अकेले बैठकर पीने लगी और फिर उन्हें भी पीने को कहा. अब वो तो जैसे हैरान हो गये और मेरे चेहरे पर एक कातिलाना स्माईल आ गयी, क्योंकि आज में पहली बार पी रही थी, इसलिए मैंने बहुत थोड़ी सी ही पी और उन्हें भी थोड़ी सी ही पिलाई, ताकि मेरा सारा प्लान बर्बाद ना हो. अब वो बहुत खुश लग रहे थे. उसके बाद में उन्हें रूम में ले गयी और उन्हें कपड़े खोलने को कहा. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो यह नहीं जानते थे कि में आज क्या करने वाली हूँ? इसलिए उन्होंने मना कर दिया और कहा कि मेरा मूड नहीं है. अब मुझे यह प्रूफ करना था कि में आज रियली में उन्हें खुश करना चाहती हूँ. फिर मैंने एक बार अपने मन में दुबारा से ब्लू फिल्म में देखे गये सीन को याद किया और अपने आपको आने वाले पल के लिए अंदर से तैयार किया और दुबारा से उन्हें थोड़े गुस्से में अपने कपड़े खोलने को कहा, मगर उन्होंने फिर से मना कर दिया.

तभी मैंने उन्हें खींचकर एक थप्पड़ उनके गाल पर मारा और कहा कि खोल मादरचोद नहीं तो फाड़ दूँगी. अब वो एकदम से हैरान हो गये और अपने गाल सहलाने लगे, इससे पहले कि में दूसरा थप्पड़ मारती, उन्होंने तुरंत अपने कपड़े खोल दिए और नंगे हो गये. फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी और कसकर उनके बालों को पकड़कर मेरे बूब्स उनके मुँह में दबा दिए और बोली कि चूस कुत्ते जी भरकर चूस. अब मैंने उनके बाल इतने ज़ोर से पकड़े थे कि उनकी आँखों से आँसू निकल गये थे.

फिर मैंने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी. अब मेरे मुँह से निकलती सिसकारियों को सुनकर वो खुश हो गये और ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स चूसने लगे, अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.

अब में बीच-बीच में उनके गालों पर धीरे-धीरे थप्पड़ मारती जा रही थी और अपने बूब्स चुसवाए जा रही थी और उन्हें गालियाँ भी देती जा रही थी. अब उनके चेहरे पर वर्षो की दबी हुई चाहत पूरी होने की खुशी और दर्द का मिला जुला असर था.

अब मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था. फिर मैंने अपनी स्कर्ट खोल दी और जैसे ही मैंने अपनी स्कर्ट खोली तो उनका दिमाग़ घूम गया, क्योंकि मैंने स्कर्ट के नीचे उनसे छुपाकर बहुत पहले से ही एक बहुत ही मोटा और लंबा रबड़ का लंड पहना हुआ था, जिसे देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी थी और मेरे चेहरे पर एक कातिलाना स्माईल आ गयी थी.


फिर मैंने उनके बालों को पकड़ा और उनके मुँह में रबड़ का लंड डाल दिया. अब में ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड उनके मुँह में अंदर बाहर करती रही, जिससे उन्हें बहुत तकलीफ़ हो रही थी, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब में रबड़ के लंड को ज़बरदस्ती उनके मुहं के अंदर घुसाने लगी थी, जिससे उन्हें उल्टी आनी शुरू हो गयी थी, लेकिन मैंने इसकी कोई परवाह नहीं की और ज़ोर-ज़ोर से उनका मुँह चोदती रही, अब उन्हें काफ़ी उल्टी हुई थी. फिर में काफ़ी देर तक अलग-अलग पोजिशन और स्टाईल से उनका मुँह चोदती रही. अब में उनके चेहरे पर और उनके मुँह के अंदर थूकती जा रही थी और उनके गालों पर कभी थप्पड़ और कभी रबड़ के लंड से मारती जा रही थी.

अब उनका पूरा चेहरा मेरे और उनके थूक से भर गया था और थप्पड़ की चोट से पूरा लाल हो गया था. अब यह देखकर में सोचने लगी थी कि में यह क्या कर रही हूँ? अपने पति के मुँह पर थूक रही हूँ और मार भी रही हूँ, लेकिन आख़िर मैंने अपने मन में आते ख्यालों को बाहर निकाला, क्योंकि आज मेरा असली टारगेट उन्हें पूरी तरह से खुश करके हमारे बीच के प्यार को दुबारा जिंदा करना था, वैसे भी आज मुझे हर काम हद से ज़्यादा ही करना था.

फिर मैंने बार-बार स्टाईल और तरीका चेंज कर-करके और अपने रबड़ के लंड पर बीच-बीच में हनी डाल डालकर उनसे रबड़ का लंड चुसवाया. फिर मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया और उन्हें पेट के बल सुलाकर उनकी गांड की क्रीम से मसाज करने लगी. अब काफ़ी देर तक मसाज करने के बाद मैंने उनकी गांड में बहुत सारा नारियल तेल भर दिया और बहुत सारी क्रीम भी भर दी, जिससे उनकी गांड एकदम सॉफ्ट हो गयी.

फिर मैंने अपने रबड़ के लंड पर कंडोम लगाया और फिर में उनके ऊपर चढ़ गयी और अपना रबड़ का लंड उनकी गांड में घुसाना शुरू किया, क्योंकि रबड़ का लंड बहुत ज़्यादा मोटा था, इसलिए वो उनकी गांड में घुस नहीं रहा था और बार-बार फिसल रहा था. फिर मैंने उनसे अपने दोनों हाथों से चूतड़ को पूरा फैलाने को कहा, लेकिन वो नहीं माने.

फिर मैंने पास में पड़ी हुई उनकी बेल्ट से कसकर उनके चूतड़ पर एक बेल्ट मारी तो वो ज़ोर-जोर से चिल्लाने लगे और उन्होंने तुरंत अपने चूतड़ फैला दिए. फिर मैंने थोड़ी और क्रीम अपने रबड़ के लंड पर लगाई और फिर अपने रबड़ के लंड को उनकी गांड के छेद पर सेट किया और एक जोरदार झटका मारा. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब मेरा आधा रबड़ का लंड उनकी गांड को फाड़ते हुए अंदर घुस गया था. अब वो इतनी ज़ोर से चिल्लाए जैसे मैंने उनकी गांड में कोई चाकू घुसेड़ दिया हो और मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने लगे.

 फिर मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और 3-4 बेल्ट खींचकर उनके चूतड़ और पीठ पर मारे, तो वो ज़ोर- ज़ोर से चिल्लाने और रोने लगे. फिर मैंने अपनी पेंटी उनके मुँह में घुसेड़ दी और बोली कि चुप हो ज़ा मादरचोद तुझे ब्रूटल सेक्स की बहुत चाहत थी ना, तुम दिनभर मोबाईल में यही देखते हो ना, इसी सेक्स के लिए तुमने हमारे बीच के रिश्तों को खराब किया हुआ था, आज में तेरी हर चाहत पूरी करूँगी, चुप हो जा और शांति से मुझे तेरी गांड फाड़ने दे, नहीं तो बेल्ट से मार-मारकर तेरा पूरा बदन छील दूँगी.

अब मेरा इतना रुद्र और वहसी रूप देखकर दिव्यांश चुप हो गया था. अब उनकी गांड में मेरा रबड़ का लंड आधा घुस चुका था. फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक जोरदार शॉट मारा तो मेरा लंड आधा अंदर घुस गया.


अब उसकी जोरदार चीख मेरी पेंटी पर अपना मुँह होने के कारण अंदर ही घुट कर रह गयी थी. अब वो मुझे धक्का देने लगा और ज़ोर-ज़ोर से अपने हाथ-पैर पटकने लगा था. फिर मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और कस-कसकर उसकी पीठ और चूतड़ों पर मारने लगी. फिर में पूरी उसकी पीठ पर सो गयी और ज़ोर से उसके कंधे पर अपने दाँत से काटा.

अब वो भयंकर दर्द से बिलबिलाने लगा और मुझसे हाथ जोड़कर दया की भीख माँगने लगा, लेकिन में आज किसी भी कीमत पर मानने वाली नहीं थी, अब में उसके चूतड़ों पर बैठ गयी और एक और जोरदार शॉट मारा तो अब उसकी गांड से खून निकलने लगा था. अब वो लगभग बेहोश सा हो गया था, अब में भी काफ़ी थक गयी थी. फिर में अपना रबड़ का लंड उनकी गांड में घुसाकर उनके चूतड़ों पर ही बैठ गयी और थोड़ी देर आराम करने लगी. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो लगातार रोए जा रहे थे, अब मुझे भी उन पर दया आने लगी थी, लेकिन मैंने तुरंत ही अपने मन को संभाला, क्योंकि अगर आज मैंने ज़रा सी भी दया दिखाई तो शायद फिर सारी ज़िंदगी अपना खोया प्यार दुबारा नहीं पा सकूँगी. फिर थोड़ी देर तक आराम करने के बाद मैंने फिर से उनकी गांड मारना शुरू किया. अब में धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाती जा रही थी.

फिर काफ़ी देर तक उनकी गांड मारने के बाद मैंने अपनी पोज़िशन चेंज की और उन्हें कुत्ता बनाकर चोदने लगी और साथ ही उनके चूतड़ों पर ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ भी मारने लगी और अपने नाखूनों से उसकी पीठ नोचने लगी.

अब उन्हें बहुत दर्द हो रहा था और वो रोते जा रहे थे. फिर धीरे-धीरे उनका रोना कम होता गया. फिर मैंने उन्हें पीठ के बल सुला दिया और उनके ऊपर लेट गयी और जोरदार तरीके से चुदाई करने लगी. अब में साथ ही उनके पूरे बदन को अपने हाथों से सहला रही थी और उनके निप्पल को और होंठो को चूसती जा रही थी. अब इस पोज़िशन में और मेरे प्यार से अब उनका दर्द काफ़ी कम हो रहा था.

फिर मैंने उनको पीठ के बल ही थोड़ा नीचे खींचा और में बेड के नीचे खड़ी हो गयी. फिर मैंने दुबारा से खड़े-खड़े ही उनकी गांड में पूरी ताक़त से एक ही बार में अपना पूरा रबड़ का लंड जड़ तक डाल दिया. अब वो इतनी ज़ोर से चिल्लाए कि बताना मुश्क़िल है, लेकिन मैंने उन पर ज़रा सा भी रहम ना करते हुए इस बार अपनी पूरी ताक़त से भयंकर चुदाई शुरू कर दी. यह इतना जबरदस्त था कि पूरा बेड ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगा था और साथ ही में उन्हें अपने हाथों से मारती भी जा रही थी और उन्हें गालियाँ भी देती जा रही थी.

फिर में उनका लंड सहलाने लगी, जिससे उन्हें कुछ राहत मिली. अब में भी बहुत ज़्यादा थक चुकी थी, क्योंकि हमने यह सब रात में 8 बजे शुरू किया था और अब 1 बज चुके थे. फिर में उनके ऊपर 69 की पोज़िशन में आ गयी और उनका लंड चूसने लगी और अपनी गांड उनके मुँह में घुसेड़ दी और ज़बरदस्ती उनसे अपनी गांड चटवाने लगी. अब में उनका लंड चूसती रही और उनसे अपनी गांड चटवाती रही. “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर जब उनका वीर्य निकला, तो मैंने वो सारा स्पर्म अपने मुँह में भरकर उनके मुँह में डालकर ज़बरदस्ती उनको पिला दिया. फिर मैंने उनको बेड से नीचे उतार दिया और उनके ऊपर चढ़कर उनके मुँह और सारे बदन पर मूतने लगी.

अब उनका पूरा बदन मेरे पेशाब से भर गया था. फिर मैंने ज़बरदस्ती उन्हें बाथरूम में ले जाकर नहलाया और बेड पर सुला दिया. अब उनकी हालत काफ़ी खराब हो गयी थी, वो अभी भी सिसक रहे थे और रो रहे थे. सच ही है अगर 4 घंटे तक लगातार किसी की गांड मारी जाए तो सोचिए उसका क्या होगा?


अब मुझे भी अपनी चूत चुदवाने की ज़रूरत थी, लेकिन उनकी हालत इतनी खराब थी कि फिलहाल यह संभव नहीं था, वैसे भी रात के 1 बज गये थे. फिर मैंने भी रूम में फैले अपने पेशाब को साफ किया और सुबह 5 बजे का अलार्म सेट करके सो गयी. फिर सुबह 5 बजे मेरी नींद खुल गयी तो मैंने देखा कि मेरे पति नंगे ही सोए हुए है और अब में भी नंगी ही थी.

फिर में उठी और अपनी ज़रूरत का सारा सामान बेड पर ले आई. अब वो एकदम बेहोशी में सोए हुए थे. फिर मैंने नींद में ही उनकी गांड और चूतड़ों की क्रीम और तेल से खूब मसाज की, अब उन्हें होश ही नहीं था. फिर उसके बाद मैंने एक दवा और क्रीम बहुत सारी उनकी गांड में घुसेड़ दी.

इस क्रीम की ख़ासियत यह है कि इसे स्किन में जहाँ भी लगाया जाता है, वहाँ की स्किन 3-4 घंटे के लिए सुन्न हो जाती है, बस इस क्रीम को ठीक से लगाकर 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है. फिर में क्रीम लगाकर टॉयलेट में चली गयी. फिर मैंने वो रबड़ का लंड दुबारा से पहना और उस पर कंडोम लगाया और बहुत सारी क्रीम लगाई और उन्हें ठीक से पेट के बल सुलाया. फिर मैंने उनके चूतड़ पूरे फैलाए और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और फिर उनकी गांड में घुसेड़ दिया. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो नींद में ही थोड़ा सा झटपटाए, लेकिन क्रीम लगाने के कारण शायद उन्हें ज़्यादा एहसास नहीं हुआ था, अभी मेरा रबड़ का लंड ज़रा सा ही अंदर घुसा था. फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से एक ही झटके में पूरा लंड उनकी गांड में जड़ तक घुसेड़ दिया. अब उनकी गांड से खून की धार बहने लगी थी और अब एक झटके में उनकी आँख खुल गयी और वो चीख उठे थे.

हालांकि मैंने उनकी गांड पर क्रीम लगाई थी. फिर भी इतनी बेरहमी से एक झटके में इतना मोटा लंड घुसने पर कुछ तो दर्द होना ही था. अब वो चीखने लगे और अपनी पूरी ताक़त से मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटा दिया. अब मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और उन्हें बेल्ट से मारना शुरू कर दिया. अब उनके चूतड़ एकदम लाल हो गये थे और वो रोने लगे थे.

फिर मैंने उनके गालों पर 3-4 थप्पड़ मारे और उन्हें फिर से बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़कर दुबारा से अपने लंड को पूरा उनकी गांड में घुसेड़ दिया. हालांकि वो मुझसे ताक़त में काफ़ी ज़्यादा थे, लेकिन फिर भी वो अपनी ताक़त प्रयोग नहीं कर रहे थे. इसी से में समझ गयी थी कि अगर ये ताक़त का प्रयोग करते तो में कभी भी यह सब नहीं कर पाती, लेकिन वो भी कई सालों से यही सब करवाना चाहते थे, इसलिए वो अपनी ताक़त का प्रयोग नहीं कर रहे थे.

वैसे भी इस बार उन्हें दर्द नहीं होना था, क्योंकि मैंने क्रीम जो लगाई थी. फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से और फुल स्पीड में उनकी चुदाई करनी स्टार्ट कर दी. बस इतना समझ लीजिए कि इस बार की चुदाई इतनी ख़तरनाक और जबरदस्त थी कि अगर मैंने क्रीम ना लगाई होती तो शायद उन्हें इतना भयंकर दर्द होता कि वो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर पाते. फिर थोड़ी ही देर में उनकी गांड पूरी सुन्न हो गयी, इसलिए उन्हें इसका एहसास नहीं हुआ और वो बोले कि क्या हुआ लंड क्यों निकाल लिया?

अब में समझ गयी थी कि अब चाहे इनकी गांड में चाकू ही घुसेड़ दो, लेकिन इन्हें कुछ पता नहीं चलेगा और में अपनी पूरी ताक़त और फुल स्पीड में उनकी गांड मारती रही. अब लगभग 1 घंटे में ही में बुरी तरह से थक गयी थी. फिर लास्ट में मैंने एक बार फिर उन्हें कुत्ता बनाकर बहुत बुरी तरह से चोदा और उसके बाद अपना रबड़ का लंड बाहर निकल लिया.


फिर मैंने देखा कि अब मेरे रबड़ के लंड पर बहुत सारा खून लगा हुआ है और उनकी गांड से भी खून बह रहा है. फिर मैंने सब कुछ ठीक से साफ करके थोड़ी सी क्रीम एक रुई में लेकर उनकी गांड में भर दी, लेकिन मैंने उन्हें यह सब नहीं बताया था. अब में जानती थी कि 3-4 घंटे के बाद जब क्रीम का असर ख़त्म होगा, तब इनकी हालत बहुत खराब होने वाली है. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वक़्त था मेरी चूत की आग शांत करने का, जो रातभर से चुदाई के लिए तड़प रही थी. फिर मैंने उनको सीधा किया और उनका लंड चूसने लगी, अब जल्दी ही उनका लंड खड़ा हो गया था. फिर में उनके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चूत को उनके लंड पर सेट किया और एक ही झटके में उनका लंड जड़ तक अपनी चूत में डाल लिया. अब मुझे एक जबरदस्त शांति मिली थी, आख़िर में भी पिछले 3-4 महीनों से चुदाई के लिए तड़प रही थी और फिर में उनके लंड पर कूदने लगी.

में आज इतनी खुश थी कि में बता नहीं सकती. अब में जल्दी ही थक गयी और उनसे एक मस्त चुदाई की रिक्वेस्ट की. फिर वो मेरे ऊपर आ गये और उन्होंने मेरी इतनी मस्त और जबरदस्त चुदाई की, जो में आपको शब्दों में बता नहीं सकती हूँ. फिर जब उनका स्पर्म मेरी चूत में निकला, तो मुझे इतनी शांति और सुकून मिला, जो शायद इस दुनिया की और किसी चीज़ में नहीं है.

अब मैंने कसकर उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया था और पागलों की तरह उन्हें किस करने लगी और उनके चेहरे को चाटने लगी थी, अब उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया था. फिर काफ़ी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को जकड़कर प्यार करते रहे, शायद यह पल मेरी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल थे, जिन्हें में खोना नहीं चाहती थी, क्योंकि आज की इस रात को मैंने वो सब कुछ किया था, जिसके बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी.

फिर में उठी और उनको एक पैन किलर टैबलेट दी, जिससे उन्हें ज़्यादा दर्द ना हो. फिर वो टैबलेट खाकर फिर से सो गये. अब उनके सोने के बाद मैंने उनके पूरे बदन पर जहाँ- जहाँ बेल्ट से मारा था, नाखूनों से नोचा था और दाँत से काटा था, सभी जगह दवा लगाने लगी.

अब उनके ज़ख़्मों को देखकर मेरी आँखों से आँसू बहने लगे थे और में फूट-फूटकर रोने लगी थी कि आख़िर मैंने यह क्या कर दिया? अब मुझे अपनी इस हरकत पर अपने आपसे इतनी तकलीफ़ हो रही थी कि में शब्दों में बता नहीं सकती. फिर मुझे भी रोते-रोते नींद आ गयी, जबकि दोपहर के 1 बज चुके थे. फिर भी में सो गयी.

फिर शाम को 4 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि दिव्यांश भयंकर दर्द से बुरी तरह तड़प रहे है और फिर मैंने गर्म पानी से उनकी गांड की 3 दिनों तक खूब सिकाई की और दवा लगाई, तब जाकर उन्हें कुछ आराम हुआ और वो ठीक हो पाए. आज ज़िंदगी में पहली बार वो मुझसे इतना खुश थे कि बताना मुश्क़िल है.

फिर वो बोले कि आज तुमने मेरी सबसे बड़ी तमन्ना पूरी की है. अब उनका स्वभाव मेरे साथ पूरी तरह से बदल चुका था, अब वो मुझे इतना प्यार कर रहे थे, जितना शायद कोई पति अपनी पत्नी से नहीं करता होगा. अब में हमेशा सोचती हूँ कि क्या ये सब मैंने ठीक किया? क्या मुझे ऐसा करना चाहिए था? क्या इस दुनिया में ऐसे अजीब शौक रखने वाले मर्द भी है? जिनकी जरूरतें इतनी ख़तरनाक है. अब उन्हें हर महीने में 1-2 बार ऐसा ही ब्रूटल सेक्स चाहिए था, आख़िर क्यों दिव्यांश को यह सब चाहिए था? “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर मैंने बहुत सोचा, लेकिन आज तक मुझे इसका जवाब नहीं मिला. खैर अब तो मैंने भी अपने आपको उनके अनुसार बदल लिया है. अब में महीने में 2 बार ऐसा उनके साथ ज़रूर करती हूँ और कोशिश करती हूँ कि इस दौरान ज़्यादा से ज़्यादा ब्रूटल बनूँ और हर बार कुछ नया और अलग करूँ. अब ऐसा करने से मुझे अंदर से बहुत तकलीफ़ होती है, क्योंकि में उनसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन क्या करूँ मजबूर हूँ? बगैर ऐसा किए हमारी ज़िंदगी में खुशी नहीं आ सकती है.


वैसे भी अब में अक्सर उन्हें सताती रहती हूँ और कई बार उन्हें परेशान करने के लिए में खूब उनका लंड चूसती हूँ और जैसे ही उनका स्पर्म निकलने वाला होता है तो में चूसना बंद कर देती हूँ, तब वो मुझसे एक बार चोदने की कुत्ते की तरह भीख माँगते है. सच में मुझे उन्हें ऐसे चुदाई की आग में जलाने और तड़पाने में बहुत मज़ा आता है. फिर थोड़ी देर तक उन्हें तड़पाने के बाद उनसे चुदवाने में बहुत मज़ा आता है.

अब हमारी ज़िंदगी ऐसे ही बहुत मज़े में कट रही है. अब अक्सर वो भी मेरी गांड मारते है, वो कभी-कभी तो खुद रबड़ का लंड पहनकर एक साथ दो लंड मेरी गांड और चूत में घुसा देते है. मुझे दर्द भी बहुत होता है, लेकिन क्या करूँ? उनके बेपनाह प्यार के कारण में सारा दर्द भी सह लेती हूँ. अब वैसे भी मुझे धीरे-धीरे इन सबकी आदत भी पड़ती जा रही है, क्योंकि अगर अपने पति को खुश रखना है और उनका प्यार पाना है तो इतना तो सहना और करना ही पड़ेगा.


Didi Ki Sleeper Bus Me Chudai

Didi Ki Sleeper Bus Me Chudai


Hindi Sex Story Hello dosto samajh sakta hua ap sab thik hi hoge is story ko padh kar apko bahut maza ane wala he kyuki jisne apni bahan ko chod diya samjho sab kuch pa liya ye bahut rishki kaam he hnn agar bahan maan jay to jo maje bahan ke sath mil sakte he wo girlfriend ke sath nahi to chaliye story shuru karte. Real Bhai Bahan Porn

Is stor me sab kuch real he bas naam ko chod kar or hnn story me kuch bahar se bhi add he matlab jese hua same nahi he story ko kamuk bnane ke liye he Mere ghar me 5 members he mammy papa dadi or me and badi bahan Mera naam gurmit he me punjab ludhiyana se hu.

Me hatta khata dikhta hu gym jata hu or college ke last year me hu fir ati he mujh se badi meri bahan jiska naam simran he mere se 4 sal badi uski age 26 he apko to pta hi hoga 1 panjabi girl kesi dikhti he to me btata hu simran didi collage pura kar chuki thi bas ghar par rahti thi.

Didi ka figer 34/23/36 he kya mast ankhe he hiran ke jesi gulabi honth jise bas chusta hi rahu lambi gardan 34 ke bade tight boobs sangemarmar badan didi ki chut akdam gulabi he kul mila kar didi bollywood singer (SHAKIRA) jesi dikhti he hair bhi didi ke khulke golden he fair color ghar me sabka alag room he.


Abhi tak sab sahi chal raha tha mera didi ko or koi bhi gandi najar nahi hi hnn but bhai bahan me pyar bahut tha didi mujhe mathe or mere lips pe apne lips rakh kar chumma de deti thi didi mere bager khana nahi khati thi pahla tukda apne hath se deti mom dad bhi ye dekh kar bolte simran jab teri shadi ho jaygi to ise khana kon khilayga.

To didi bolti me shadi nhi krugi humesha bhai ke pass rahungi mom dad haste or bolte 1 din sabko jana he mera mumbai me 1 exam tha to me usi ki teyari kar raha tha ki simran didi mere room me aai or boli bhai mujhe bhi apke sath jana he isi bahane mumbai ghoom lungi.

Me bola me apna flight ticket kara chuka hu didi simran didi bhai koi nhi hum train se jayge me aaj tak train ka safar nahi kiya to me socha or hun kar diya papa ka acha bussiness he or jameen bhi he isi kiye jaha bhi hum jate car se jate the me flight ticket cancel kiya or do a.c koch ke ticket kara diye.

Kal hume nikalna tha to hum jaldi so gye fir hum morning me nikalne lage to didi ko me sath lekar chal diya station pahuche waha hume train mili hum chal diye pura dun safar kiya fir night hone lagi (mumbai jane me 2 din lagte he train se) ab hum sone ki teyari karne lage.


Didi apna combel lena bhul gyi thi use thand lagne lagi usne mujhe rat 11baje uthaya me bola didi ap mere burth pe aa jao combel bahut bada he dono adjust kar lege to didi mere baju me akar let gyi didi ne dai or se leti thi me bhi didi ke gand ki traf apna lund lga rkha tha.

Jab didi mere blanket me aai to pure blanket me ak ajeeb si small fal gyi wo didi ki body ki small thi mujhe bahut achi lagne lagi (ye first time tha hum dono bhai bahno ka jo aksath lete the) mera lund khada hone lga or didi ki badi 34 ki gand ki drar me jane lga.

Ab mujhe azeeb sa nasha hone lga or me apna 1 per didi me uper rakh diya jisse mera lund full kadak hokar didi ki gand me didi ki pent fadne ko teyar tha didi so chuki thi me ak hath didi ke uper rakha jo didi ki shirt ke uper se unki boobs ko tuch hone lga.

Mujhe bahut maza ane lga tha 2 minat aise hi karte hue me didi ko seedha leta diya or didi ke shirt ke button kholne lga mene sare button khol diye or dekha to ander white color ki sport bra pahan rakhi thi humara cabin lock tha hume koi nahi dekh sakta tha pata nahi mujhe kya hota gya.


Me didi ki bra ke uper se didi ke boobs dabane lga or bra ko uper karke boobs shuk karne lga didi ke boobs le red nippel the jo boobs ki shan ko bdha rahe the me. Nipple ko danto se dabane lga kuch hi der me didi ke nippel khade hone lage me chuste gya ab to or bhi maza ane lga tha.

Didi ke boobs kareeb 1 inch kade ho gye hoge ab me ak hath se didi ki pent ka button khol diya dheere se didi ki chain kholi or niche white color ki penty thi me panty ke uper se hi didi ki chut ko tham liya jisse didi akdam machal gyi kr meri gardan pakad ke meri gardan pakad ke apne lips se mere lips sata diya or mera niche wala hont ko chusne lagi.

Me bhi didi ke uper ke lips ko chusne lga kabhi didi meri jeeb chusti kabhi me didi ki jeeb chhat ta 10 minat ho gye hoge kiss karte hue or jab kiss tuti to jor jor se hafne lge simran didi boli bhai is pyar ka me kab se intazar kar rahi thi ahh aj mujhe jannat me jana he bhai chod do mujhe me kab se tujhe samjhana cha rahi thi par tu ise bhai bahan ka pyar samjh ta tha.

Fir humne kiss start kar diya or 5 minat baad didi ne meri tshart nikal diya or mera lover bhi me bhi didi ki jins utar di ab didi panty me thi jise me fad diya didi bhai aram se me apki hi hu ab mujhe tumhare se koi juda nahi kar sakta or hum 69 pose me aa gye. “Real Bhai Bahan Porn”


Didi mera kund chus rahi thi me didi ki chut didi ki kya mast chut thi abhi tak me aisi chut nahi dekhi akdam chikni safed red chut ke lips jab bhi me didi ki calory chut ke dane ko chatta didi gunn ahhh gunn karti ab hum alag hue or kiss kiya.

Fir me didi ke muh me apna lund dal diya jise didi ahhh gunnn gunnnn gunnn karke pine lagi ab me didi ka muh pakad ke dhakke marne laga didi ahuccc hhh gunnnnhhh gunnnnnnhhh gunnnnhhh gunnnnhh gunnnnhh ahhhhmmm karti or mouth fucking karwa ti rahi.

10 minat muh chodne ke baad me didi ke muh me jhad gya jise didi ne apne boobs pe ugal diya or window khol ke ulti kar diya simran didi bhai bta sakte the mujhe virya ganda lagta he fir me didi ko hanky se saf kiya or nunge hi let gye ak dusre ki baho me fir me 15 minat baad teyar hua or didi Ke boobs ko fuck kiya kr ab didi ke chut pe lund rakha.

Didi ne shihar bhari thoda thuk lga kar ak jordar dhakka mara mera adha lund didi ki chut me gya or didi ko michi lagne lagi ahhhh bhaaaiiii marrrr jauuuungiii me plz mat karo abhi he sab ahhh mummy meri chut fat rahi he aahhhh .Mere bbaii ahhhhh siiiiiihiiiii. “Real Bhai Bahan Porn”

Fir me jordar dhakka mara mera pura lund ander chala gya or didi ki chut ko chir diya didi rone lagi hath jhatpata ne lagi ahh bhai ahhhh or me pelta gya didi ki chut akdam lal ho chuki thi ab didi ko bhi maza ane lga or sath dene lagi didi ko mene sab angel me choda kabhi ghodi bna kar ya uper bitha kar or me ander hi jhad gya.


Morning ye result aaya ki didi ki chut sooj gyi jise didi ko problem bahut hue or fir agli rat bhi humne train me chudai ki or mumbai jakar bhi khoob maze kiye mumbai me didi ne mere se shadi kar liya cort me jakar fir hum flight se ghar aa gye ab hum jab bhi man hota chudai karte.

Didi bahut badal gyi he ab to ak orat jesi dikhti he didi ki age ab 29 ho gyi mom dad bahut forse karte he shadi ke liye but nahi karti fir me didi ko samjhaya tab jakar shadi ke kiye mani agle mahine didi ki shadi he me abhi didi ki kokh bhar chuka hu didi 1 month se pregnant he to kesi lagi humari story share kare


पडोसी की बेटी को चोदा अकेला पाकर

पडोसी की बेटी को चोदा अकेला पाकर


दोस्तो, मुझे नहीं मालूम था कि मुझे इतनी जल्दी चुदाई का मौका मिल जाएगा!! हमारे घर के सामने एक मकान था, जिसमे वर्मा साहब की फैमली रहती थी। उनके घर में वर्मा जी और उनकी दो बेटियाँ मिनाक्षी व पूजा और उनकी मां सपना रहती थी।


उनकी मां 55 की होने के बाद भी 45 की लगती थी!! कसा हुआ बदन… मोटे-मोटे चुचे और भारी-भारी गाण्ड… लम्बे बाल… जब वो रोड पर चलती थी तो जवानों के हाथ तो अपने लण्ड पर होते ही थे, बुढों की भी जीभ लपलपा जाती थी!!!


जाहिर है, ऐसे में उनकी बेटियाँ भी कयामत थीं। उनकी एक झलक पाते ही लडके मुठ मारे बगैर नहीं सो सकते होगें और सोएँ भी कैसे, यह हाल मेरा भी तो था…


मिनाक्षी की उम्र मुझसे दो साल कम, 19 की थी और पूजा उससे एक साल छोटी थी।


मुझे जन्नत का मजा मिनाक्षी ने दिलवाया!!!


तो अब मैं असल कहानी पर आता हूँ…


वर्मा परिवार का हमारे साथ लगाव था, मेरे घर हम दो भाई और मम्मी-पापा हैं।


मेरा भाई विदेशी टूर कम्पनी में काम करता है और मुंबई ओफिस का हैड है। वो वहीं रहता है। पापा मेरे प्राईवेट कम्पनी में काम करते हैं तथा मम्मी भी… दोनों सुबह ओफिस जाते हैं और देर शाम को आते हैं।


मेरा कमरा बाहर गेट के पास है तथा मम्मी-पापा का घर के अंदर। उस दिन मैं घर पर अकेला था और टी वी देख रहा था। तभी मुवी में एक सैक्सी सीन आया और मैं अपना 10 इंची लण्ड निकाल कर सहलाने लगा!!!


मेरे घर का मुख्य गेट खुला हुआ था, इसका मुझे अहसास ही नहीं था कि कब उसमें से मिनाक्षी अंदर आई और मुझे लण्ड से खेलते हुए देखने लगी!!!


अचानक उसके पैरों से कुछ टकराया और आवाज़ सुनकर मेरी मस्ती टूटी। मैंने पीछे देखा तो मिनाक्षी खडी मेरे लण्ड को घूर रही है!!


मैंने फट से अपना लण्ड अंदर किया और पूछा – कैसे आना हुआ, मिनाक्षी? तो वह बोली – मैं तो न्यूज पेपर लेने आई थी।


मैं उसे न्यूज पेपर देने लगा, तो उसने मेरा हाथ पकड लिया।


मैं एक बार घबराया तभी उसने मुझे खींच लिया, मैं सीधा उसके सीने से टकरा गया। उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख कर कहा – हथियार, तो तगड़ा है!!! कभी इस्तेमाल भी किया है, या बस वैसे ही हाथ से काम चला रहे हो…


मैं सकपकाया पर होश में आते ही समझ गया की आम पक कर खुद झोली में आ गिरा है, तो चख क्यों नहीं लेता!! !!!


मैंने उसका सिर पकड कर उसके होंठों पर किस करते हुए कहा – तेरे जैसा कोई माल नहीं मिला, जान… इस्तेमाल कैसे करता…!!

मैंने सोचा कि जब उसे खुद ही कोई प्रॉब्लम नहीं है तो मैं क्यों पीछे हटूँ और उसे चूमने लगा।


मैं भी खुश हो गया और धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगा और साथ ही उसके होंठों पर चूमने लगा क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तभी मिनाक्षी ने मुझे धक्का दिया और कहा – जानवर है, क्या…?? आराम से कर!! आज तो मैं तेरी हूँ।


मैंने कहा- सॉरी… !! और इतने में मिनाक्षी ने अपना सूट उतार दिया। मैंने कहा – मिनाक्षी, इतने बड़े बड़े स्तन हैं, आपके… !!


मैं उनको हाथ में लेकर चूसने लगा और दबाने लगा। मिनाक्षी भी जोश में आ चुकी थी और मुझसे चिपक गई थी।


मेरा तो सपना साकार हो गया था!!!


मैंने मिनाक्षी को धीरे धीरे पूर्ण नग्न कर दिया और खुद भी नंगा हो गया… फिर क्या था, मैंने जैसा ही अपना लण्ड निकाला मिनाक्षी बोली- हे राम… !! इतना मोटा? साले, तूने आज तक कितनी लड़कियों को चोदा है?


मैंने कहा – किसी को नहीं!! वो बोली – चल आज, चोद… !! खुद भी मजा ले और मुझे भी मजा दे!!! !!


मैंने कहा – तो देर किस बात की। मैं उसे चूमने लगा और उसने मेरा लण्ड हाथ में ले लिया और आगे पीछे करने लगी।


मुझे काफी मजा आ रहा था। मैं उनके बोबे दबा रहा था और होंठ चूस रहा था…


फिर वो बोली- साले, केवल चूसेगा ही या खायेगा भी… ?? मैं बोला – साली, बड़ी जल्दी है तुझे… चल घोड़ी बन जा, साली रांड… !! जल्दी कर… मुझे तो तुझसे ज्यादा जल्दी है, रंडी…


वो बोली – अच्छा, ऐसी बात है तो लो… और वो घोड़ी बन गई, मैं उसे पेलने लगा।


वो बोली – थोड़ा तेज नहीं चोद सकता… ?? और मैंने झटके तेज कर दिए और उसे चोदने लगा!!


थोड़ा धीरे !! उई माँ… मर गई साले! थोड़ा धीरे!! …


मैंने कहा- अब पता चला साली रंडी, तेरी गाण्ड का तो आज मैं बुरा हाल बना कर छोड़ूंगा!!


वो भी कहने लगी – हाँ कुत्ते… !! और मेरा साथ देने लगी… मैं उसकी चूत जोर जोर से चोदने लगा। अब वो मजे से चुदने लगी!!! !!


बीस मिनट तक मैं उसे चोदता रहा… मैंने उसे अलग अलग ढंग से चोदा!! 20-25 मिनट बाद जब मेरी छूट होने को आई तो मैंने लण्ड बाहर कर उसके मुँह पर पिचकारी मारी और उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और सारा वीर्य चाट गई… !!


फिर मैं उससे चिपक गया।


हम दोनों एक दूसरे के साथ देर तक चिपके रहे। इतने में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और मैंने कहा – मिनाक्षी, एक बार और हो जाये… ??


वो बोली – हाँ हाँ!! क्यों नहीं? नेकी और पूछ पूछ !! … आजा मेरे राजा, फाड़ दे अपनी मिनाक्षी की चूत!!


उस दिन मैंने मिनाक्षी को पाँच बार चोदा… नए नए स्टाइल में!!! और उसके बाद हमारे बीच सिलसिला चल पडा।


उसे जब भी मौका मिलता, वो मेरे घर आ जाती या फिर मुझे मौका मिलता तो मैं उसके घर…


हम जमकर चुदाई करते, फिर एक दिन पूजा ने हमे रगें हाथों पकड लिया और फिर क्या हुआ यह अगली कहानी में…

कुँवारी चाची की चुदाई - सुहागरात से पहले ही चाची को चोदा

Chachi ki seel tod chudai ki


मेरी घर में बहुत इज्जत है क्योंकि मैं पढाई में बहुत तेज हूँ और छोटे चाचा 8 क्लास के बाद नहीं पढ़े। जब मैं शादी में गया तो चाची को देखता ही रह गया। वो बहुत मस्त थी, उस समय उनका फिगर 32-28-34 था। चाचा और चाची की जोड़ी बिल्कुल नहीं जम रही थी, जैसे लंगूर के हाथ में अंगूर या हूर!

मन तो कर रहा था कि ये अंगूर मुझे खाने को मिल जाये!

घर में शादी के बाद एक रिवाज़ की वजह से पहली रात चाची को अलग सोना था। घर पर मेहमान काफी थे इसलिए मैं पहले से जा कर चाची के कमरे में सो गया। चाचा को बाहर ही सोना था।

रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि चाची मेरे बगल में सोयी हैं, शायद शादी की वजह से उन्हें थकान बहुत थी इसलिए वो बेधड़क सो रही थी। उनका पल्लू सीने से हट गया था। उनकी काले रंग की ब्रा देख कर मेरा 7 इंच का लंड बेकाबू हो गया।

मैंने धीरे -2 उनके ब्लोउज के बटन खोल दिए। उनकी गोरी-2 चूचियाँ देख कर मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था। मैंने हौले से उनकी ब्रा की पट्टी कन्धों से किनारे हटा दी और एक हाथ से चूची को हलके-2 दबाने लगा, दूसरी चूची को अपने मुँह में भर के चूसने लगा।

मुझे लगा चाची जाग गयी हैं पर सोने का बहाना कर रही हैं तो मैं धीरे से उनकी साड़ी को उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। थोड़ी देर में मुझे पैंटी में गीलापन महसूस हुआ। मुझे लगा चाची को मजा आ रहा है तो मैंने धीरे से उन्हें आवाज दी- चाची…!

उन्होंने कहा- कुछ मत बोलो बस करते रहो…!

यह सुनते ही मैं उनके उपर आ गया और उनके रसीले होटों को चूमने लगा..

अब चाची मेरा पूरा साथ दे रही थी…

उन्होंने मेरे पायजामे में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसकी सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथो से उनकी गोल-2 चूचियाँ दबा रहा था। उनके मुँह से सेक्सी आवाजें आ रही थी- चोदो मुझे मेरे राजा… आज मेरी सुहागरात है… 18 साल से ये अनचुदी है आज इसकी प्यास बुझा दो मेरे राजा…

मैं भी गरम हो रहा था, मैंने उनकी पैंटी को उतार फेंका…और उनकी चूत में मुह लगा दिया। वो शायद एक बार झड़ चुकी थी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैं सब पी गया। मैंने दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।

उन्हें मजा आने लगा…

उन्होंने भी मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी…

मैं उनके मुँह में ही झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गयीं। उन्होंने चूस-2 कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया…

वो बोली- जान अब और न तड़पाओ! अपनी रानी को चोद दो! मुझे मेरी प्यास बुझा दो…

मैं तो तैयार था, उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो!

मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…

अबकी बार मैंने धीरे-2 धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया…

वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो! बाहर करो! मैं नहीं सह पाऊँगी!

पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसे कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया…

वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो… और जोर से… आह… आह… मेरे राजा… मुझे जन्नत की सैर कराओ… और अंदर डालो… आह… सी…सी…

आह… मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले… पूरा मेरा खा जा… ले… ले… पूरा ले… आह… राजा… मैं गई… सी… थाम लो…मुझे… आह…

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…10-15 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये… मैंने अपनी सारी गर्मी उसकी चूत में भर दी… मैंने उठ कर देखा- खून से उसकी साड़ी लाल हो गई थी… मुझे गम न था आज एक कुंवारी चूत का रसपान जो किया था… उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा… वो शायद सबसे हसीं रात थी…

Fauji Baap Ne beti ko Nanga Karke Choda

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फौजियों का लंड तगड़ा होता है पर उन्हें चूत कम ही नसीब होती है। आईये पढते हैं एक कहानी एक पुलिस जवान और उसकी बीबी और जवान बेटी सीमा की। सीमा, उमर अठारह साल पर यार अठारह से ज्यादा, चूंचियां छत्तीस की और गांड भी इतनी ही। कमर है बस अठाइस की और अचरज होता है कि कैसे ये पतली कमर इस भारी भरकम चूंचे का बोझ संभालती होगी।


फौजी बाप ने बेटी को नंगा करके चोदा


तो आईये सुनाते हैं कहानी आपको एक लड़की की जो हमारे छोटे शहर सीतापुर के एक मुहल्ले की रहने वाली है। पूरवैया कल्चर वैसे तो है बहुत मधुर पर जब इसमें वासना घुलती है तो और मीठे जहर के तरह से रंगीन और रसदार हो जाती है, पता ही नहीं चलता आदमी इस दलदल में कैसे और कब फंस गया। सीमा के पिताजी पुलिस में हैं, और माताजी अकेले सीमा के साथ रहती हैं।एक बात तो जान लीजिए, पुलिस वालों की बीबियां मनमानी होती हैं और उनको लंड का अकाल हमेशा रहता है, अक्सर उनकी ड्यूटी आउट आफ सिटी होती है और चौबीस घंटों की भी होती है। इसलिए वह अक्सर बेवफा और तानाशाही रवैये की होती हैं।

सीमा की मां भी चालीस साल की उमर में भी एक दम से जवान दिखती हैं और उसकी शारीरिक संबंध मुहल्ले के पनवारी, सब्जी वाले दूध वाले, वो सब जिनका कि रोजमर्रा कि जिंदगी में काम है, उन सब वर्ग के दुकानदारों से है। सच तो ये है, सीमा के पापा अक्सर बाहर रहते हैं और घर पर पैसे भी कम देते हैं। कंजूसी में घर कहां चलता है, इसलिए सीमा की मां ने भी अक्सर समझौते कर लिये हैं। सबका मामला सेट है, बड़े चतुराई से मैनेज करती हैं, अपने अपने रिश्ते को। वैसे आईये उसकी फिगर भी बता ही दें। चालीस की उम्र की गदराई हुई आंटी, मस्त चूंचे, पतली कमर फैली प्लेटफार्म जैसी गांड और रसीले होठ। कुल मिला के मलैका जैसी दिखती है और अपनी बेटी से बस जरा सा ही उन्नीस दिखती है। इस वजह से वो भी अपने ब्वायफ्रेंड्स मैनेज करती है।अपने लंड लेगी और बेटी सीमा पर कड़ी निगरानी अच्छी बात है कि वो सीमा पर बड़ा नियंत्रण रखती है, पर सीमा जो कि अक्सर अपनी मां की काली करतूत देख रही होती है, उसे अपनी जवानी संभाले नहीं संभल रही। कालेज गर्ल्स का है और बगल में है, इसलिए बाइक पर घूमने जाने और ब्वायफ्रेंड बनाने का सपना उसका पूरा न हो सका, पर सच ये है कि अक्सर सीमा को अपने पापा को देख कर एक उम्मीद बंधती है। वो जानती है उसके पिताजी कितने वफादार, और मेहनती हैं और मां कितना चीट करती है उनको। इसलिए इस बार पापा आएंगे तो उनको भरपूर प्यार देगी और हो सके तो इस बार मम्मी को नीचा दिखा के मानेगी।

तो गर्मी की छुट्टियों में पापा आ गये। मां को मायके जाना पड़ा और इस बार घर में सीमा और पापा रह गये। सीमा ने देखा, इस बार उसका रवैया बदला हुआ था, उसने देखा कि पापा के बदन में चालीस पार होने के बाद भी गजब की मांसल मांसपेशियां हैं और मजबूत बदन, वाले उसके पापा एक दम से जबरदस्त दिख रहे हैं। उसने देखा, पापा का बदन एक दम से एथलिट जैसा है, चौड़ी छाती, सटी गांड और लंबे हाथ, लंबाई तो उनकी वैसे भी अच्छी है। फिर उसका ध्यान गया पापा के लंड के उपर क्या, वो भी उतना ही बड़ा होगा, जितना कि पापा के अन्य अंग हैं। ये तो कमाल की बात होगी, उसने आज पापा को बाथरुम में नहाते हुए देखने के बारे में सोचा। अक्सर पापा बाथरुम का दरवाजा खोलके ही नहाते हैं। आज उन्होंने लंगोट कसी हुई थी।

बाथरुम में घुस कर के उन्होने अपने बदन पर पानी डाला और रगड़ रगड़ कर नहाने लगे, इसी बीच सीमा धीरे से पीछे से आकर खुले दरवाजे से उनको देखने लगी। उसे लगा कि आज पापा का लंड देख ही लेना है। पीछे से उसने देखा कि पापा की गांड में लंगोट की रस्सी ऐसे घुसी हुई है कि पिछवाड़ा पूरा नंगा है। उसे बहुत सनसनी हो रही थी। अकेले मर्द और वो, आज उसे अपने बाप में अकेला मर्द दिख रहा था जो कि मौके का फायदा उठाने में कत ई नहीं चूकता। तो सीमा ने अपनी बुर को सलवार के उपर से ही मसलना शुरु कर दिया और सोचने लगी कि कैसे देखूंगी पापा का लंड। अचानक से उसे एक शरारत सूझी।

उसने अपने कपड़े उतारकर के सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनी और बाथरुम में घुस कर बोली हेलो पापा, मुझे भी नहाना है। उसके पापा ने जब उसे इस रुप में देखा तो अवाक रह गये और उनका लंड एक दम से तन गया। सच तो ये है कि लंड को दिमाग नहीं होता, वह रिश्ते नहीं पहचानता और इसी वजह से अपनी बेटी को अचानक अधनंगी देखते ही सीमा के पापा का लंड तन गया, ढीली और भीग चुकी लंगोट अचानक से खुल कर नीचे गिर गयी।

Baap beti ki chudai desi kahani



बड़ा लंड फुफकारने लगा और सीमा जोर जोर से हंसने लगी, बोली पापा ये क्या है ये तो अच्छा खिलौना है, मुझे कभी खेलने को नहीं दिया, ही ही, जरा दो ना और वहीं उसने तपाक से लंड को पकड़ लिया। उसका प्लान सफल रहा। उसने अपने बाप का लंड पकड़ कर मसलना शुरु कर दिया। भीगा लंड तन कर गर्म हो गया था और नर्म नर्म हथेलियों से उसका लन्ड को मसलना और कयामत ढा रहा था।उसने अपनी बेटी सीमा को दूर करने की कोशिश की लेकिन वो लंड को छोड़ नहीं रही थी और खुद सिपाही का मन भी आज चूत चोदने का कर रहा था। उसकी छिनाल बीबी मायके में थी और बिचारे क ई महीने से चूत से दूर रहने वाले सिपाही को चूत की जोरदार दरकार थी।उसने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और हुक खोल दिया। मारे उत्तेजना के सीमा के स्तन खड़े हो चले थे। जब सिपाही ने अपनी बेटी के चूंचे को पकड़ कर दबाना शुरु किया तो सीमा सिस्कारियां मारते हुए बोली स्स्स, आह्ह, पापा, प्लीज करो ना अच्छा लग रहा है।

फिर क्या था। अपनी ही बेटी को चोदने के लिए सिपाही का लंड तो पहले ही तन चुका था, अब वो उसको चोदने के लिए एकदम से बेकरार हो उठा। उसने उसके बदन पर दो लोटे पानी डाल कर भिगा दिया। उसके चूंचों से सरक सरक कर छन के आता हुआ पानी उसके नाभि पर ज्यों ही पहुंचा सिपाही ने उसको अपनी जीभ लगा के लपक लिया।इस प्रकार से जैसे उसने अपनी बेटी सीमा के नाभि पर जीभ लगाई, और उपर चूंचों से छन के आते हुए पानी को पीने लगा, सीमा को ऐसा लगा जैसे कि उसकी नाभि एक दम सुर सुराहट से भर गयी हो। कसम से इस एहसास को पाने के लिए वो सालों से तड़प रही थी और आज उसका सपना सच हो रहा था। इधर सिपाही का लंड भी एक दम दन्नाया हुआ था।

उसको हमेशा यह लगता था कि उसकी मां उसके साथ ना इंसाफी करती है और आज उसको पता चल गया था कि इस खेल में कितना मजा आता है। उसने सिपाही के बाल पकड़ कर के अपने नाभि की तरफ उसका सिर और जोर से दबा दिया। उसके बाप की नाक और होठ सब उसके सेक्सी बद्न को टच कर रहे थे। इस बात पर उसके पापा ने उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसाकर फिरानी शुरु कर दी। सीमा ने उत्तेजित होकर आंखें बंद कर लीं और कहने लगी, आह्ह पापा बहुत अच्छा लग रहा है। वो बोल रही थी और उसके बाप का जोश बढता जा रहा था। सच में आज सिपाही ने देखा कि वो उसकी बीबी जैसी ही दिखती है, जवानी में सीमा की मां भी तो ऐसा ही दिखती थी। फिर क्या था, उसने अपनी बेटी को चोदने के बारे में अपना निश्चय दृढ कर लिया। वैसे भी, उसकी जवानी और मस्त चूंचे के आगे अब उसकी मां फीकी पड़ चु्की थी।

मस्त चूंचे देख कर रिश्ता भूला।उसने उसकी कोमल त्वचा का रस लेने के लिए जीभ उसके नाभि से उपर बढाई। एक एक इंच सरकते हुए उपर की तरफ, उसने हर इंच को अच्छे से चूमा। पूरी जीभ उसके बदन के हर अक्षांश और देशांतर रे्खा पर फिराने के साथ ही साथ आज उसका इरादा अपनी कुंवारी बेटी के कुंवारे बदन को वो मजा देना था कि बस वो अपने बाप की बन के रह जाए। हालांकि वह जानता था कि यह थाना उसका नहीं है पर उसको तो दूसरे के थाने में ड्यूटी देने की इच्छा थी। अप्ने दामाद के लिए वह काम सुगम बनाने जा रहा था। उसने नाभि से उपर सारा पेट चूम लिया। और फिर पीछे घूम गया। जींस बांधने की जगह से उपर की पीठ पर जीभ की नोक से स्पर्श करते हुए उसने हल्की लार टपकानी भी जारी रखी। भीगा बदन, गर्म जीभ और गर्म बदन के साथ ही उसने सीमा के बदन की गरमी और भी बढानी जारी रखी।

चूसते हुए सीमा के बदन को उसने पूरी नंगी पीठ चूस डाली। अब सीमा अपनी पीठ सिकोड कर यह बता रही थी कि उसको और मजा चाहिए। उसने ब्रा का एक हुक खोल दिया। एक चूंची आगे की तरफ लटक गयी।

अब सिपाही सामने आकर अपनी सीमा बेटी के उस नंगे चूंचे को पकड़ कर के दबाने लगा। ऐसे जैसे कि दूहने की कोशिश कर रहा हो। इस अदा पर सीमा को बहुत आनंद मिल रहा था क्योंकि उसने सर उपर करके आंखें मूंद ली थी और पूरी उत्तेजना को पीने की कोशिश कर रही थी। सिपाही ने उसके चूंचे को मसल के रख दिया और जब वह एक दम लाल और कड़ा हो गया, अपने मुह से लगाकर स्तन पान करने लगा। आह्ह्, आह्ह करती सीमा ने खुद ही दूसरा चूंचा खोल कर अपने बाप के हाथों में थमा दिया।बारी बारी से चूसे चूंचे।

सिपाही अपनी जीत पर मुस्कराया और उसके दूसरे चूंचे को दूहते हुए पहले वाले को चूसता रहा। वो एकदम मस्ती में डोलती रही और खड़े खड़े बाथरुम में ही चुसवाती रही। खैर अब सिपाही ने दूसरे चूंचे का भी वही हश्र किया और आखिर में उसको भी अच्छे से चूसा। चूंचे अब देखने में साढे छत्तीस लग रहे थे। अब बारी थी नीचे कुछ करने की, सीमा ने अपनी पैंटी सरका दी और फिर अपने हाथों से अपनी नंगी चूत ढंक ली।

उसको ऐसा करते देख सिपाही ने सोचा साली गयी है एक दम अपनी रंडी मां पर पर क्या करें चोदने में इसे बहुत मजा आने वाला है। और उसने उसके गांड की तरफ मुह करके उसके दोनों गांड की गोलाईयों को दबोच लिया अपने हाथों से। दबोचने के बाद उसने जोर से उनको दबाया। और हल्के हल्के चपत तेजी से लगाने शुरु कर दिये। गांड हर थपकी के बाद हिल हिल कर अपनी पोजिशन पर आजाती और फिर उस्का बाप उसी तरह से उसको थपथपाता। उसकी गोरी नाजुक चमड़ी एक दम से लाल हो गयी अपने बाप के थपेड़ों से तो उसके बाप ने अपने मुह से एक बड़ा बाईट उसकी गांड पर लिया, ऐसे जैसे कि तरबूज खा रहा हो।

सीमा चिल्लाई, पर उसने हल्के दांतों का अहसास कराया था, जो कि उसको अच्छा लगा। वो उत्तेजना में फुसफुसाई, काट लो मेरी गांड को।और सिपाही ने दूसरे नितंब को भी ऐसे ही किया, हल्के दांत गड़ाकर उसकी गांड को चुदवाने के लिए पैंपर कर लिया। सच तो ये है सिपाही भी बड़ा खिलाड़ी था। चुदाई के मामले में वो राउडी था, भले ही उसकी बीबी उसको सीधा समझती हो।दोनों नितम्बों को काटकर के उसने अब दो उंगलियां जोड़ीं, हल्का साबुन अपनी बेटी के गांड पर मला और फिर धीरे धीरे करके, उसमें अपने दो उंगलिओं को ठेलने लगा। सीमा चिल्लाई, उईईई, पर कोई बात नहीं थोड़ी देर में दोनों उंगलियां अंदर थीं। अब सिपाही ने अपनी बेटी की गांड फड़ाई शुरु कर दीथी। एक नया अहसास था यह। पीछे से गांड में उंगली पेलने के बाद सिपाही सामने की तरफ आ गया और उसने सीमा के चूत के फांकों पर अपने दोनों होठ रख दिये। इस तरह से उसने होठ रखे कि दोनों होठ एक दम से उसके चूत के फांकों की लंबाई की दिशा में थे।

अब वो अपनी कुंवारी बेटी की बुर को चाट चाट कर एक दम रसीली बना देने पर तुल गया था। तो सिपाही अब अपनी बिटिया को चोदने से पहले बुरचटाई के रस्म से नवाज रहा था, मजे से चूत चुसवाती हुई सीमा अपने दोनों चूंचे मल रही थी और बार बार अपनी टांगें सटा के अपने पापा के मुह को दोनों टांगों के बीच चांप दे रही थी। यह एक अत्यंत रोमांचकारी अनुभव था उसके लिए। उसके मुह से सिर्फ एक ही शब्द निकल रहा था, आई लव यू पापा, आप कितने अच्छे हो। आह्ह चूस लो, आह्ह्ह ये तो और अच्छा है, प्लीज फिर से करो ना।अपने फौजी बाप को अपनी चूत का दीवाना बना लिया सीमा ने।

बेटी द्वारा इतना उकसाए जाने पर पुलिस के जवान अधेड़ उम्र के बाप की जवानी भी एक दम शोला बन चुकी थी, उसने अपने लंड को भी अब तक छुआ न था पर वो नीचे लटक कर के एक दम से गदहे के लंड जैसे आकार का हो गया था। समझ में नहीं आता है कि इतने बड़े लंड वाले पति के होते हुए उसकी आखिर उसकी बीबी किसी दूसरे के झांसे में पड़ कैसे सकती है। खैर जो भी हो सच तो ये है कि वो छिनाल हो गयी थी और आखिर में उसके संबंध कितने ही गैर मर्दों से थे। इसलिए उसकी अपनी बेटी भी बिगड़ चुकी थी और आज अपने पापा से ही इश्क फरमा रही थी।ऐसा सुनने के बाद और बार बार प्लीज दुबारा करो ना कहने पर उसके सिपाही बाप का लंड एक दम हथोड़ा हो चुका था।

खून का प्रवाह लंड में अतिरेक से था और एक ऐसे रिश्ते जिसके बारे में सोचा न जा सके, उसमें चोदने की कल्पना करना ही अपने आप में अति उत्तेजक होता है, तो खैर अपने लंड को देखते हुए उसके बाप ने अपनी बिटिया के फुद्दी के फांकों को पीना जारी रखा। लंड एक दम कड़ा हो गया तो उसने सीमा को नीचे बिठा दिया।घुटनों के बल सीमा बैठ गयी तो उसने अपने अंडे को उसके मुह में डाल कर हिलाना शुरु कर दिया। सीमा उसे अपने होठों के बीच चूस कर ऐसे कर रही थी जैसे कि उसको आमलेट बना देगी। वह बार बार उसको चूसे जा रही थी और वो अपने लंड को अपने हाथों में पकड़ कर मूठ मार कर और भी धारदार बनाने के कोशिश में था।

इस प्रकार से अपने लँड को सहलाते हुए और उसके मुह में अंडकोष को देते हुए उसने देखा, सीमा के मस्त चूंचे एक दम से उपर नीचे हो रहे थे, यह एक अत्यंत रोमांचक पल था और नजारा भी। काश कि जिंदगी ऐसे ही चोदते हुए बीत जाती पर ऐसा नहीं होता रियल लाईफ में। ऐसे मजेदार लम्हें कभी कभी ही मिलते हैं। उसने सीमा को अंडों को खूब जम के चूसने दिया।अब बारी थी देसी मुखमैथुन की। इसलिए उसने सीमा के मुह में अपना बड़ा सुपाड़ा डाल कर के धकियाया। छोटे से मुह और बड़े से लंड के सुपाड़े को देख कर के ऐसा लग रहा था कि कैसे घुसेगा उसके मुह में पर सीमा ने अपनी औकात से ज्यादा मेहनत करके लंड को मुह में ले लिया। किसी छोटी सी चूत के छेद की तरह उसका मुह और होठ उस मोटे लंड पर पकड़ बनाए हुए थे। उसके पापा ने अंदर की तरफ लंड ठेलते हुए देखा कि कैसे उसके आंखें खुली जा रही थीं लंड को अंदर लेते हुए। फिर भी मुखमैथुन का जोर ऐसा चढता है कि फिर रोके से नहीं रुकता है। ऐसा ही हाल था उस समय उन दोनों का। चूंकि सिपाही अपने बेटी की बुर पहले ही चूस चुका था इसलिए उसको अब लंड चूसवाना ही था किसी तरह से।अब लंड को अंदर ठेल कर हल्के हल्के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया।

लंड ने जब गति पकड़ी तो कभी सीमा के हलक में उतरा, कभी उसके गालों पर अंदर से मालिश की और कभी तालू का तबला बजाया। पूरे मुह को अखाड़ा बना के रख दिया था सीमा के पापा ने। खैर बेटी को इतना अच्छा गिफ्ट देते हुए आज वो बहुत खुश था। सीमा भी अपनी मां को चैलेंज दे रही थी।रंडियों सी हालत हो गयी चुदते समय उसकी अपने बाप के सामने।अब जब कि लंड मुह की गर्माहट पाकर और भी तन चुका था, बारी थी सीमा के चूत की गहराई की थाह लेने की। उसके पापा ने उसको कंधे पर उठाया और बाथरुम से उठा कर सीधा बेडरुम मे बेड पर पटक दिया। उसके टांगों को खोल कर बिना बाल वाली कुंवारी चूत को नजदीक से देखा।

एक दम गुलाबी चूत के अंदर छोटा सा छेद और उसमें झलकती हायमन का नजारा। उसको याद आया, इसकी मां तो बिना हायमन मतलब कि फटी हुई चूत लेके आई थी, चलो कमसे कम अब उस कमी को उसकी बेटी पूरा कर रही है।उसने उसके पैरों को कमर तक बेड के बाहर खींच लिया और अपने हथौड़े जैसे मोटे और गदहे जैसे लंबे लंड को उसके चूत के उपर रगड़ना शुरु किया। अब सीमा को डर लग रहा था, उसने कहा – पापा मुझे कुछ होगा तो नहीं न, मुझे डर लग रहा है। इस बात पर सीमा के पापा ने कहा, नहीं बेटा ये सब तो बस खेल जैसा है, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। और सिपाही ने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और फिर अपने लंड को उसके छेद के उपर टिका दिया।

अपने हाथों से उसके मुह को बंद करने के बजाय बेडरुम के ड्रावर में रखा चाकलेट निकाला और उसको थमा के बोले, ले इसको एक ही बार में खा जा, इसके बाद जब तक तू इसे निगलेगी। सब कुछ हो जाएगा, डरने की कोई जरुरत नहीं है।सीमा ने एक बड़ी बाईट कैडबरी की ली और उसके पापा ने उसके चूत में अपने लंड का कीला ठोक दिया। दन्न से चूत की झिल्ली की बखिया उधेड़ते हुए लौड़ा उसके बच्चेदानी के दरवाजे पर टकराया, चरम सुख देने वाले जी स्पाट का लंड के सुपाड़े से स्पर्श और कोमल और नाजुक झिल्ली का फटना दोनोंएक साथ हुआ। अब सब कुछ आसान था।

हालांकि सीमा के हाथ से चाकलेट छूट चुकी थी पर फिर भी एक टुकड़ा मुह में था, दर्द के साथ चाकलेट का स्वाद भी कसैला हो चला था पर लंड के अंदर जाने के बाद उसकी मिठास और भी बढ़ गयी। अब सीमा अपने पापा की रखैल बन चुकी थी और वो भी उसे अपनी प्रेमिका की तरह ही ट्रीट कर रहा था। उसके चूंचों को मलते हुए और अंदर की तरफ पुरजोर धक्के लगाते हुए सि्पाही जी ने सीमा को अपने लंड का स्वाद चखाना जारी रखा। आधे घंटे तक इस स्टाइल में चोदने के बाद उसने अपना वीर्य अपनी बेटी को पिला दिया। और फिर यह लड़ाई लंड और चूत की, पहले दिन तो आठ घंटे कामुकता के रसीले और रंगीन खेल में चलती रही।”

नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

नानाजी ने अपनी उंगलिया मेरी जांघों के बीच फसाया

अगस्त का महीना था। तेलुगु कैलेंडर के मुताबिक श्रावण चल रहा था श्रावण का महीना हमारे यहाँ के औरतों के लिए बहुत ही महत्त्व पूर्ण है। श्रावण के महीने के दुसरे शुक्रवार को महिलाएं अपने पति की आयु, स्वास्थ्य और सम्पदा के वृद्धि लिए 'मंगल गौरी व्रत' मनाते है। हमारे घर में भी यह व्रत माँ मानती है। लेकिन माँ इस व्रत कोअपनी दो और बहनों के साथ मिलकर हमारे बड़ी माँ के यहाँ मानती है। बड़ी माँ विजयवाड़ा में राहटी है।

इस वर्ष भी मनके लिए हम सब विजय वाडा जाने कि तैयारियां कर रहे थे। हुकमे यहाँ से ४ घंटे का रेल की सफर है। गुरवार के दिन था। दुसरे दिन व्रत है। शाम चार बजे की गाड़ी से हम सब यानि की माँ और हम तीनों बहने जाने कि तैयारी कर रहे थे।


दोपहर बारह, एक बजे के समय में हमारे यहाँ एक नानाजी अये थे। उनका तक़रीबन कोई 53 - 54 साल की उम्र होगी। रेवेन्यू ऑफिस कोई काम था! हमारे यहाँ कोई एक सप्ताह रहने अये है। आते ही उन्होंने हम सब को गले लगाए और हमारे माथे चूमे। मुझे ऐसा लगा की उन्होंने कुछ ज्यादा ही देर मुझे गले लगये थे और और मेरे नितम्बो और चूची को धीरेसे सहलाये।


वह माँ के दूर के रिश्ते से चाचाजी लगते है। माँ उन्हें चाचाजी कहती थी तो हम उन्हें नानाजी कहकर बुलाते थे। पहलीमंज़िल के गेस्ट रूम उन्हें दिया गया। हमेशा की तरह डैडी घर में नहीं थे। डैडी सिविल कांट्रेक्टर है कंस्ट्रक्शन साइट पर थे।


नानाजी के आने से हम सब उदेढ़ बुन में थे की बड़ी माँ की यहाँ कैसे जाए। व्रत का मामला था रुक भी नहीं सकते। हमारे समस्या सुनकर नानाजी ,माँ से बोले कहे "प्रभा आज के लिए मैं किसी होटल में रहजाता हूँ, तुम अपना प्रोग्राम मत बदलो। लेकिनमा की यह पसंद नहीं था, अतिथि घर ए और हम कही और चले उन्हें अच्छा नहीं लगा।


"माँ..." मैं बोली "मैं रुक जाति हुँ, नानाजी को यही रहने के कहिये मैं उन्हें देख लूंगी " कुछ देर की वार्तालाप के बाद यह तय हुआ की मैं रुक जावूं और वह लोग विजयवाडा के लिए चले। मैं रुक गयी और मम्मी और मेरे दोनों बहने प्रेमा, रीमा चले गए।


नानाजी के साथ मैं अकेली थी। माँ और बहने रविवार शाम को आयँगे। उस रात 8.30 बजे हम ने खाना खाया और नानाजी ऊपर अपने कमरेमे चले गए।


मैं अपने कमरे में जाकर कॉलेज के कुछ assignments करने बैठी। रत के 11.30 बजे मैंने अपने assignments खतम किये और हॉल में सोफे पर बैठकर TV ऑन किया और late night अंग्रेजी मूवी देखने लगी। उस समय मैंने खुले गले वाले V शेप की सिल्क की स्लिप पहने थी और अंदर ब्रा नहीं पहनी। वह स्लिप सिर्फ चूचियों को छुपा रही थी। मेरे सफाचट पेट और नाभि खुले थे। ऊपर भुजाये का पास भी स्लिप सिर्फ स्ट्रैप्स ही थे। सिल्क का ही ढीला शॉर्ट्स पहनी थी, जिसकी वजह से मेरे गोरे, मुलायम जाँघे और नीचे पिंडलियाँ नंगे थे। मैंने सिर को हैंड रेस्ट पर रखी और आराम से लेटी थी। मेरा एक पैर नीचे कारपेट पर थी तो दूसरा सोफे दुसरे हैंड रेस्ट पर रख कर मैं मूवी देख रहीथी। चैनल पर adult मूवी आ रही थी और मैं उस नंगे सीन एन्जॉय कर रही थी।


रात के 11.30 बजे थे। पहली मन्ज़िल पर नानाजी गहरे नींद में होंगे। वह नीचे नहि आयंगे I यह सोचकर में आराम से मूवी देख रहीथी। पिक्चर में एक जवान लड़का, एक खूबसूरत जवान लड़की को जो की मेरे उम्र की थी से सेक्स कर रहा है। वह सन देखते ही मेंरी बुर में मदन रास रिसने लगा और जाँघों के अंदर कहीं खुजली शुरू होगई। मेंरा बुर पूरा गीला होगया। मैंने कंधे पर से स्लिप का स्ट्राप निकाली और उसे नीचे खींची। मेरे निपल बहार आगये। मेरे बहिना हाथ से बाहिना निप्पल को मसलते, मैंने मेरे शॉर्ट्स के नडा खींची और दाहिना हाथ अंदर घुसेड़ कर मेरे बुर के साथ खिलवाड करने लगी।


कुछ ही मिनिटो में मेरे उँगलियाँ मेरे प्रि कम से चिके और गीले होगए। मैंने ऊँगली मेरो चूत से निकाली और उन उँगलियों को नाक के पास लेगयी और सूँघि। एक अजीब सी स्मेल आ रही थी। "वाह मेरि चूत की स्मेल भी क्या मस्ती से भरा है" मैं सोची और उन उँगलियों को मुहं में रख कर सरे रस को चाट गयी। मेरे उस नमकीन स्वाद से में बहुत उत्तेजित ही गयी।


खूब चाट ने की वजह से मेरि उँगलियाँ थूक से चिपद गए है, उसे मैंने अपने चूत के होटोंसे खिलवाड़ करते और मेरे लोए बटन से कहते मूवी का स्वाद ले रहीथी। "आअह्ह्ह...उफ्फ्फ...ओहोह...उफ़..ससस..." मेरे मुहं से एक मीठी कराहे निकलने लगी। "आअह्ह्ह... ममम... मैं खलास होने वाली थी की मैंने सीढ़ियों पर पदचाप सूनी। शायद नानाजी नीचे आ रहे थे। "मै गॉड यह बूढ़ा इस समय नीचे क्यों आ रहा है?" मैं सोची।


TV को स्विच ऑफ करने का समय नहीं था। जल्दीसे मैने अपनी उँगलियाँ अपने लव चैनल (चूत) से निकली और मेरे शॉर्ट्स को कमर के ऊपर खींचली। मेरे कोहनिको मैंने अपने आंखोंपर लगाई और TV देखते, देखते सोने का नाटक करने लगी। नियंत्रित रूप से स्वास भी ले रहती ताकि देखने वाले यह सोचे की TV देखते सो गयी है। टीवी में क्या चल रहा है यह भी नहीं पता ऐसे बहना कर रहीथी। नानाजी नीचे TV रूम अये और वह TV देख ने लगे, मुझे मालूम पड़गया। उन्हें मालूम हो गया की मैं क्या देख रहीथी। मेरे दिल ढब ढब धड़कने लगा। नियंत्रित स्वास और दोल की धड़कन से मेरे उन्नत उरोज ऊपर नीचे हो रहे थे। TV स्क्रीन से आने वाली रोशिनी मेरे ऊपर गिर रहीथी। उसके सिवाय हॉल में दूसरा रोशिनी नहीं थी।


कोहिनी के नीचे की छोटीसी झिरी से मैंने देखा की नानाजी का नज़र एक बार TV पर आने वाली सिनेमा पर तो एक बार मेरे पर फिसल रहे थे। तभी मेरे नज़र नानाजी के धोती पर पड़ी। उनके जाँघों के बीचमे उभार आगया है। वह उभार किसका है मुझे मालूम है। धोती के अंदर उनका मर्दानगी खूब अकड़ कर लम्बा होगा और उछल खूद कर रहीहै। नानाजी अपने लंड को उँगलियों से मसल रहे थे। अनजाने में ही मैं उत्तेजित होने लगी और नानाजी के हरकत को मज़े लेते चाव से देख रहीथी।


जैसा की मैने कहा, मैं अपने आँखों पर मेरी कोहनी रख कर सोने का बहाना कर रही थी। नानाजी मेरे बिलकुल पास आगये यह बात मालूम पड गयी। उन्होंने सोफे के पास आए झुककर मेरे नीचे लटकते टांग को थोड़ा और चौड़ा किये और मेरे टांगों के बीच बैठ गए। कुछ देर मुझे देखते रहने का बाद उन्हीने धीरेसे मेरे पैर के नंगे भाग को धीरेसे सहलाने लगे। मेरे सारे शरीर में झुर झुरिसि हुयी। मेरे घुटनों और जाँघों पर नानाजी के हाथ की गर्मी मुझमे मस्ती पैदा कर रहीथी।


मैं खामोशी से सोने का बहाना कर रही थी। कुछ देर ऐसा करनेके बाद अब नानाजी के हाथ मेरे जाँघों के अंदर के तरफ फेर रहे है। मुझे गुद गुदी सी होने लगी, फिर भी मैं हिली ढूली नहीं और न ही मैंने अपने हाथ को मेरे आँखों पर से निकाली। मैं हिली ढुली नहीं तो उन्हें और हिम्मत आगयी और धीरे से अपना हाथ मेरी तिकोन के उभार पर रख धीरेसे दबाये। फिर भी मेरे में कुछ हरकत न पाकर अब अपनी तर्जनी ऊँगली को मेरे चूत की फुली होंठों पर ऊपर से नीचे तक चलाने लगे।

शशांक भैय्या से करवाने के बाद मेरे में सेक्स की चाहत बढ़ गयी। नानाजी अब क्या करेंगे यही सोचते मैं खामोश पड़ी थी। एक बार गुद गुदी की वजह से मैं थोड़ी सी हिली और नानाजी झट अपने हाथ निकले। शायद वह समझ गए की मैं जगी हुई हूँ। मैं फिर से बिना हिले ढूले पड़ी थी और फिर से अपना हरकत शुरू कर दिए। नानाजी मेरे कमर के पास अपने घुटनों पर बैठे और धीरेसे मेरी स्लिप को ऊपर उठाये। उनकी हरतों से मरे में फिर से झुर झूरी सी होने लगी। और मेरे रेंगते खड़े होगाये। वह आगे झुके तो उनका गर्म सांस मेरे नहीं और पथ पर पड़ने लगी।  कराह को मैं बड़ी मुश्किल से रोक पायी। फिर उन्होंने अपना जीभ को मेरे नाभि में घुमाने लगे। " मैं अंदर ही अंदर कराही।


नानाजी धीरे से मेरे सर के पास आये और मी ऊपर झुके। अब का गर्म सांस मेरे बहिना (left) चूची पर फील करने लगी। अपने जीभ से मेरे चूची के घुंडी के इर्द गिर्द फिराने लगे। नेर चूचियों में एक अजीब सी मस्ती भरी थी। फिर उनका नजर मेरे खांक पर गिरी। एक दिन पहले ही मैंने कांक और मेरी बुर पर बाल साफ़ किये थे। इसी वजह से मेरी खाँख बिना बालों के चमक रही थी।


मैं अभी भी में राइट हैंड को मेरे आँखों पर रखी थी। और कोहिनी के पास छोटी सी झिरी बनाकर मैं सब देख रहीथी। वाह धीरे से मेरी खांख पर झुके और अबमैं उनका गर्म सांस वहां महसूस करने लगी। एक बार मेरे खाँख को सूंघ कर फिर अपना जीभ निकल कर मेरे पूरी खाँख को नीचे से ऊपर तक चाटने अलगे। इनके इन हरकतों से नीचे मेरी जाँघों के बीच की मेरी मुनिया खूब रिस ने से मेरी शॉर्ट्स जिगट हो गए।


"क्या मेरी नाती सच में ही नींद में है?" कह कर जब मेरी खाँख को चाटी अपने जीभ मेंरे होंठों पर रखकर मेरे मुहं के अंदर दाल ने की कोशिश की। अब मुझे अपने आप को संभल न बहुत मुश्किल होगया है। फिर भी तक संभाली और नींद का बहाना कर रहीथी। अपने जीभ को मेरे होंठों पर फिराने के बाद अब उनकी दृष्टी मेरे बुर पर पडी।


धीरेसे अपना उँगलियाँ मेरी बुर पर लाकर मेरी बुर को शॉर्ट्स के ऊपर से ही हलका सा रगड़ न शुरू करे। मामाजी के उँगलियाँ और मेरी बुर में बेच एक सिल्क की शॉर्ट्स के अलावा लुक नहीं था। एक हाथ की उँगलियाँ मेरी बुर को रगड़ रही है तो दुसरे हाथ के उँगलियाँ मेरे तिकोन के उभर को दबाने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था की मेरे खूब पहली चुत में हजारों चींटियां रेंग रहे हो। जैसे नानाजी ने मेरे चूत को होंठों को दबा रहे थे मेरे सारे शरीर में गुद गुदी सी होने लगी। फिर भी मेरे यहाँ से कोई प्रतिक्रिया ना पाकर उन्हने अपना बुर रगड़ने का काम चालू रखे
 

फिर मेरे शॉर्ट्स की इलास्टिक खींचकर कमर के यहाँ अपना हाथ अंदर घुसेड़दिए। अब नानजी के उंगलयां मेरे नंगे बुर की होंठों के साथ खेलने लगे। मेरे साए सरेर में झुर झुरिसि होने लगी। फॉर भी अपने आप को सम्भलते सोने बहाना जारी रखी। कुछ देर ऐसे ही खेलने के बाद अपनी उँगलियाँ निकल कर अपने मुहं में रखे और सरे लॉस लेस को चाट गए। एपीआई उँगलियों को अपने थूक से फिर से चिकना बनाकर फिर से हाथ अंदर डालकर छूट ले पुत्तियों को चौड़ा कर अपनी बीचकी ऊँगली को मेरो गीली छूट के अंदर डालने लगे। अनजाने में ही मेरे पुत्तियाँ उनकी ऊँगली को जकड कर अंदर को खींचने लगे।


नानाजी वैसे ही थोड़ी देर तक मेरे छूट के होंठों से खिलवाड़ काने का बाद मेरे शॉर्ट्स को नीचे खींचने लग्गे। शॉर्ट्स धीरे धीरे मेरे बादबान से नीचे सरकने लगी। मरे कमर के नीचे और फिर मेरे जाँघोंसे भी नीचे लेकिन वह मेरो नितम्बो के नीचे फँसी हुई थी, मैंने नींद में कुन मनाने का बहन कर मेरे कमर को थोड़ा ऊपर उठाई।

मेरे शॉर्ट्स मेरे नितम्बोंके नीचे और नीचे मेरे घटंन तक आगयी। फिर मुझे मेरी उभर दार बुर पर मामाजी के गर्म सांस की आभास हुआ। मेरी अब संभालना कठिन हो रहा था। इतने में उन्होंने मेरे बुर के पत्तों को चौड़ा कर अपना नाक उन पुत्तो के बीच रख कर सूंघे और उससे वहां दबाने लगे। फिर अपने जीभ को उस छीर में घुसेड़ कर घूमाने। मुझे इतना मज़ा आने लगा की मैंने तो नानाजी को वैसे ही अपने जीभसे मेरी बुर को चोदने की तमन्ना करने लगे।


तब तक मेरी बुर पानी रिसने लगी। दही, धीरे मेरी रिसती बुर को नीचे से ऊपर तक चाटये हुए हलके से मेरी घुंडी को दोनों लियों बीच लेकर मसलने लगे। मैंने वैसे ही सोने का बहन कर उनके हरकतें का आनन्द ले राही थी। फिर सेअपनी उँगलियों पर थूक कर उस से अपनी उँगलियों को चिकना कर मरो बुर को रगड़ने लगे। दर से रिसने वाली मदन रास से मेरी बुर पहले से ही चिकनी हो चुकी है।


उन्होंने फिर से मेरी गीली चूत को चाटने लगे और मेरी घुंडी को tease करने लगे। ऐसे कुछ देर खेलने का बाद अब उन्हीने मेरी स्लिप को ऊपर उठाने लगे।


मैंने मेरी नींद को कंटिन्यू करने का बहाना कर मेरी पीठ को ऊपर उठायी। नानाजी ने मेरी स्लिप को पूरा ही उअप्र उठाकर मेरे गले के पास डाल दिए। और अब मेरी उभारदार चूचियां और उनके गुलाबी निप्पल्स उनके आँखों के सामने नंगे थे। अपनी उँगलियों से मेरी होंठों को सितार बजाकर, दुसरे हाथ में मेरी चूचियों को लेकर दबाने लगे। फिर अपने दौड़ने हाथों से दोनों उरोजों को दबाते अपने जीभ को मेरी चूची की घुंडी इर्द गिर्द घुमाने लगे।" कह कर में धीरे से कुन मुनाई।


"क्या मेरी नाती सचमे ही नींद में है....?"
 

मैंने धीरे से आँखे खोली और नानाजी को देख कर हलकी सी मुस्कान दी और फिर से आँखे बंद कर ली।


नानाजी ने हलके से मेरी जांघों को चौड़ा करने लगे और आराम से नीचे कारपेट पर घुटनों बल बैठ कर मेरी बुर को चाटने, चुभलाने और खाने लगे। उनका ऐसा करना मुझे इतना पसंद आया की मैं मेरी कमर ऊपर उठा उठाकर अपनी चूत को खूब अच्छी तरह चाटने में उनकी मदद करने लगी।


मेरे ऐसा कमर उछलने से उन्हें बहुत ही हिम्मत मिली, और उन्होंने मेरि शॉर्ट्स को पूरा खींच कर मेरे पैरों से निकाल फेंके। फिर उन्होंने अपनी धोती भी खींच फेंकी और अपना तगड़ा, और मोटा लवडे को हाथ में लेकर हिलाने लगे। वह एक दम मक्के की बुट्टे की तरह थी। वह फिर अपनी थूक से अपने लवडे को गीला कर मेरी चूत को होंठों को टच किये।

Oh God ... उनका सुपडे की गर्माहट मेरी बुर पर इतना अच्छा था की मैं अपने आप मेरे जाँघे और चौड़ा कर मेरे मुलायम नितम्बो को ऊपर उठाई। नानाजी ने धीरे से अपना उस मुश्टन्ड मेरे में घुसेड़े। मुझे ऐसा लगा की गर्म लोहे की सलाख मेरे में घुस रही हो। वैसे मैं पहले से ही शशांक भैय्या से चूदी थी इसी लिए उनका सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। उस सुपाडे का रगड़ मेरे बुर की अंदरी दीवारों पर गुद गुदी पैदा करने लगे।


नानाजी मेरे जांघों को और चौड़ा करने लगे, मैंने अपनी जंघों की मांस पेशियों को ढीला करदी। उन्होंने मेरे टांगों को अपने भुजावों पर रखे। अब पोजीशन ऐसी थी की वह अपनी नाती यानि कि मेरे गीले बूर में अपना मोटा और तगड़ा लुंड पेलने के लिए तैयार थे। अपने लवडे को उन्हों ने मेरी जवान बुर पर रख कर अंदर दबाए और उनका सूपड़ा 'गछ' के साथ अंदर। "आअह्ह्हा।।।ससस..." मैंने अपने होंठों से निकलती कराह को रोकने की कोशिश की। वह अपनी लुंड को अंदर और बहार करते मुझे चोदने लगे। थोड़ा थोड़ा कर नानाजी का लुंड मेरे उसमे पूरा घुस गया। जब पूरा अंदर चला गया थो उन्होंने एक जोर का धक्का दिए। में अब अपने आप को रोक न सकी और  आवाजें मेर मुहं से निकल पड़े। उनके हर शॉट के साथ मैं अपनी गांड उछालते चुदाई की आनंद ले रहीथी।


अब तो उनको मालूम है मैं जगी हूँ। अब उनका चोदना जोर पकड़ने लगा... उनके हर धक्का मेरे तिकोन पर जम कर पड़ रही है। मेरे मस्त छातियों को दोनं हाथोसे पकड़ कर मींजते और मेरे होंठों को चुभलाते हुए "गग्गुओंणरणररर" के आवाजें उनके मुहं से निकल रहे थे। ऐसा पांच छह मिनिट मुझे चोदने के बाद मैंने उनके शरीर में अकड़न महसूस की। "ऊऊउ उउउउम्मम्मम्म" एक बहार फिर जोर से कराहे। बस उनका शरीर और अकड़ा और अपने गर्म वीर्य से मेरी बुर को भर दिए। एक गहरी moan के साथ उनका शरीर झन झना उठी और अपना लव स्टिक (love stick) सोडा सायफन के तरह मेरे बुर को भर ने लगी। नानाजी का गर्म वीर्य मेरे चूत के दीवारों से बहार बहने लगी।


मैं भी खलास होने को थी। मेरे शरीर एक मीठे अनुभव से गद गद हो उठा। मैंने अपने चूत और गांड के मांस पेशियों को टाइट करी। मेरे दोनो हाथ नानाजी के कमर के गिर्द लपेट उन्हें मेरे ऊपर खींची और जोरसे उन्हें अपने से जकड की।  की मीठी कराह मेरी मुहं से निकली और मेरे बुर की पुत्तियों से उनके लुंड को जकड़ कर में भी खलास हो गयी और मेरी बुर अपना मदन रस छोड़ने लगी।


थोड़ी देर बाद नानाजी ने मेरी आँखों में देखे। उनके मुखमे खुशी धमक रहीथी। मैंने भी उनकी आँखों में चाहत से देखी और हलके से मुस्कुरा दिया। उन्होंने भी मुस्करा कर मेरी आँखों को चूमे। हम दोनों में कुछ बातें नही हुयी, बस अब तक हुयी चुदाई का आनंद उठा रहे थे। वह कोई 54 - 55 साल के है और मई 19 की। मैंने अपने दोनों हाथों से नानाजी के सर को पकड़ कर मेरी ओर खींची और उनके होंठों को मेरे में लेकर किस किया।


उनका लंड अभी भी मेरे चूत में है। मुझे एक बार कस कर चूमे और फिर जवान चूचियों को पीने लगे। जब उनका बहार निकला तो वह बिलकुल नरम पड गयी है, और मेरे बुर में से हम दोनों का रस बाहर को बह कर मेरे नितम्बी को और मेरी गांड में भी घुसने लगे। सारा जगह चिप चिपाहट होगया। नानाजी ने अपने मुहं वहाँ रखे और सारा रस अपने जीभ से चाट कर साफ़ कर दिए। जैसे ही नानाजी मेरे बुर को चाट ने लगे उसमे फिर से खुजली होने लगी।


नानाजी ने मुझे अपने गोद में बिठाये और मेरे अंगों के साथ खेलने लगे। मेरी निप्पल्स को सूचक कर रहे थे और मेरी पूरी चूचिको नीचे से लेकर ऊपर तक चाट रहे थे। मेरे चूतड़ों के बीच उनके मर्दानगी तन कर फिर से फुफकारने लगी।


मैं नानाजी सोफे पर बैठे थे। मैंने उनके गोद से उतरी और नीचे कारपेट पर पालथी मारकर बैठी, नानाजी के टाँगे नीचे लटक रहे है और उनके टांगों के बीचमे उनका मुरझा सुस्त पड़ा है। में नीचे उनके टैंगो बीच बैठी और उनके लंड को मुट्टीमे पकड़ी, से ऊपर नीचे करने लगी। इसे मसाज करने लगी "हेमा। ..हहहह ममहहाआ...." नानाजी खुशी से गुर्राए।


वह अब पूरी तरह खड़ा होगया और मैं उसे मुट्टीमे लेकर नापी। पूरा एक बालिश्त से ऊपर है उनका। ननजी का खड़ा लंड देख कर मेरे मुहं में फिर से पानी आगया मैं उसे मेरे मुहंमे लेकर चूसने करने लगी। कभी कभी मेरे जीभ को उनके सुपडे के ऊपर फिरा रही थी। उनका बहुत लम्बा है, मैं उसे पूरा का पूरा मेरे मुहं में लेने की कोशश किया केकिन ना कामयाब रही। एक चौथाई के बराबर बहार ही रह गया। अब नीचे मेरे जांघों के के बीच फिर से मदन रस रिसकर चूत होंठों तक बाह रही है।


"आअह्ह। ... हेमा... मेरी प्यारी... बहुत अच्छी चूस रही हो.. आएं...वाइस ही चूसो.. शाबाश... जिस मस्ती से तुमने मेरा सब्बाक लो अपने में लिया है... ला जवाब है.. वंडर फूल.. आख़िरी में तुम्हारी बुर का मेरे उसके गिर्द जकड़ना तो बोलो मत... बिलकुल प्रभा की तरह है तेरी बुर भी... वही जोश वही मस्ती" वह बढ़ बडाने लगे।


उनके बातें सुनकार में चौंक गयी और चकित होकर उन्हें देखने लगी। क्या नानाजी ने माँ को....


"क्यों चकित हो गयी क्या? अरी.. प्रभा.. तेरी माँ... वह भी तेरे जैसे ही जोश से चुदवाती थी। मैंने तुम्हारे माँ को ही नहीं, शुभा,तुम्हारी बड़ी माँ को और विभा छोटी माँ को भी चोदा है। तुम्हारी माँ और छोटी माँ दोनों मेरे लंड को पहले लेने के लिए लड़ते झगड़ते थे।" ननजी कह रहे थे।


मम्मी बहुत ही गर्म औरत है और खूब मज़े से चुद्वाती है, यह बात मुहे मालूम है, जिस दिन मैं शशांक भैया से करवाई थी उसी रात मैं और मेरी छोटी बहन रीमा ने माँ को भैया से चुदवाते देखे है। (पढ़िए मेरे लिखा जुआ 'मेरे शशांक भैय्या) .


नानाजी का मर्दानगी फिर से टाइट होगई जैसे इस्पात का रॉड हो। मैं उसे अपनी मुट्टी में जकड़ी थी। उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर खींचे खुद सोफे से उठकर एक गुड़िया की तरह मुझे उठाकर अपने कंधे पर डा ले। उनका एक हाथ मेरे नितम्बो के नीचे संभाली है तो दूसरा हाथ से मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते हुए ऊपर अपने कमरे में लगाए और, मुझे बेड पर लिटा दिए, अपनी कमीज उतार फेंके। अब वह पूरा नगनवस्ता में एक बर्थडे बॉय लग रहे है। उनका लंबा, मोटा लावड़ा उनके जहंघो के बीच लटक रही है। में भी कमऱ के नीचे नंगी हूँ। ऊपर सिर्फ स्लिप थी जिसे मैंने उतर नीचे डाल दी। अब मैं भी नानाजी के तरह पूरी नंगी हूँ।


नानाजी ने मुझे औंधा किये और मेरी नितम्बों को ऊपर उठाये। मैं उनका मंतव्य समझ गयी और बेड पर चौपाया छुपाया बनकर मेरी गांड कॉपर उठई एक कुतिया की तरह। दोनों घुटनों को पैलाकार मेरे टांगों को चौड़ा किया। दोनों हाथों को कोहिनी के पास मोड़कर बेड पर रखी और मेरे सिर को हाथों पर रखी, फिर मेरे गांड को ऊपर उठई।


अब मैं नानाजी मुझे पीछे से लेने के लिए तैयार हूँ। नानाजी मेरे पीछे आए अपने घुटनों पर बैठकर पीछे से मेरी बुर को खाने लगे। में इतना गरमा गयी हूँ की मेरे बुर में से गर्म हवाएं निकलने लगे और वह फूल के पाव रोटी की तरह थी।


नानाजी अंदर.. यह और अंदर...पूरा जानेदो तुम्हारे जीभ को अपने नाती की चूत में ... कितन अच्छा है. आअह ह.. मेरी बुर की लालसा ....बढ़ रही है.आमम्मा.... नानाजी कैसी मेरी। .. तुम्हे अच्छा चा लगा रहा है ना... बोलो नानाजी कैसी है मेरी चूत t.. क्या एह मेरी माँ जैसी है या मेरी छोटी माँ जैसी... उम्म्म और खाजाओ आहहहआ..." नानाजी के मुहं पर चूत को दबाते मई बड़ बड़ा रहीथी।


"आह्ह...हेमा तेरी तो मस्त है.... तेरी माँ से भी अच्छा.. और तेरी छोटी माँ से भी अच्छा... साली तु भी क्या यद् करेगी.. ले अपनी नाना के जीभ को अपने बुर में... क्या नमकीन माल है.. हाँ...हाँ.. बस..वैसे ही रगड़ अपनी बुर को नानाके मुहं पर. शभाष..आह..हां...".नानाजी मेर गीली, मस्ती से भरा चूत को चूसते ते कहने लगे।


में अपनी बुर को उमके मुहं पर रगड़ ते " नानाजी...न..ना.जी... और चोदो मेरी चूत को... फाड़ दो इस रंडी को.. ममम..." मैं कही।


मेरी पोजीशन को समझ कर नानाजी ने उठे और मेरे पीछे आकर मेरी कमर को दोनं हाथों से पकडे और अपना सूपड़ा मेरी बुर की सुराख पर रख कर रगड़ने लगे।एक मीठी कराह मेरी मुहं से निकली। फिर उन्होंने सुपडे को सुराख के बीच रख कर एक जोर का शॉट दिए। आह..ह.." अब मैं दर्द से कराही। उनका गोल मोटा सुपाड़ा मेरी बुर को चीरती अंदर घुस गयी। मेरे स्पंजी नितम्बों को दबाते। . कभी कभी.. एक चपत लगते अपने चमड़े की चढ़ को अंदर बाहर पंप कर ने लगे। मेरी मदन रस से अच्छी तरह ऑइलिंग हुयी मेरी चूत में उनका लंड पिस्टन रोड की तरह आगे पीछे हो रहीथी।


मैं अपनी गांड को उनके लंड पर रगड़ते गांड को ऐ पीछे क्र रहीथी। उन्होंने मेर लटक थी चूही को पकडे और उसे दबाते मुझे हमच , हमच कर चोदने लगे।


"अम्माम्माम्मा... नाना..नानाजी.. मैं खलास हो रही हूँ...ऊम्मम... मारो। .और जोर से मारो अपने तोप को मेरे अंदर... आअह " कह कर मैं झाड़ गयी।


"प्यारी.. आह.. कितनी टाइट है तेरी... आह.. यह. अब तेरी बुर मेरी rod को जकड़ रहि है.. ऐसे ही जकड... तेरी माँ जैसी ही तू भी बहुत गर्म लड़की है... आह.. मैं भी खलास ही रहा हूँ.. ले नानके गर्म लावा अपने में।" कह!


उनका शरीर जहां झनाहट मुहे मालूम हो रहा थे। Iउनके मुहं के ये गुर्राह मैंने सूनी। मेरे नितम्बों को मसलते एक बड़ा शॉट उन्होंने मेरी अंदर दिए और फिर पाना गर्म लावा से मेरी बुर को भरने लगे। मैंने उनका गर्म लस लस का अनुभव किया और मेरे चूतड़ों को पीछे दखेलते मीठे से करहा " नानाजी.. नानाजी.. मेरे अच्छे नानाजी.. आअह कितना प्यारा है तुम्हार आयेह डंडा... मेरी चूत आप के लंड के हमेशा तैयार रहेगी... मैं तुमसे हमेशा चुदावउँगी। नानाजी तुमजब भी यहाँ ए तो मुझे चोदे बिना नहीं जाना। अगर मेरि शादी होने पर भी मई आपसे चुदावउँगी " कहति माई अपना गांड पीछे धकेली और झाड़ गयी। पाठकों यह मेरे एक अच्छा चुदाई है.. ऐसे एक बड़े उम्र वाले से।

खलास होने के बाद मैं अउर नानजी उसी हालत में लुक देर रहे, फिर उन्होंने मेरे बुर से अपना लंड निकली। हम दोड़नों का मदन रस जो हम में से छूटा है मेरे अंदर से बहकर मेरे जांघों को तर करते नीच बहने लगी। नानाजी ने झुके और सारी रस चाट चाट कर साफ़ किये। जब तक चार्ट रे हे की मेरे छूट की घुंडी में फिर से खड़ापन आ गया,, और बुर में फिर से खुजली होने लगी। मई भी नानाजी प्यारे सिपाही को ममेरे हाथों स स साफ़ की उसे दुलारने लगी।

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