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papa ne bina condom ke choda

papa ne bina condom ke choda,पापा ने बिना कंडोम के चोदकर प्रेग्नेंट बनाया

मैं आज आपको अपनी फर्स्ट सेक्स की स्टोरी बताने जा रही हु. मैं एक फ्लैट में रहती हु. जिसमे ४ बेडरूम और १ ड्राइंगरूम है. १ रूम मेरा है और १ मेरे भाई का और १ मदर – फादर का है और एक गेस्ट रूम है. जब मैं ११थ स्टैण्डर्ड में थी, तब से मैं पोर्न मूवी देखती थी और पोर्न मूवी देखते हुए मास्टरबेट भी करती थी. मैं कई बार अपनी चूत में ऊँगली डाल कर झडती थी और कभी गाजर, ककड़ी और मुली या बेलन डाल कर अपनी वासना को शांत करती थी. लेकिन इस से मेरी भूख और भी बढ़ने लग जाती थी. मैं १२थ स्टैण्डर्ड में थी, तब मेरी नानी की तबियत बहुत ख़राब हो गयी और इस वजह से मेरी माँ उनके वहां कुछ दिनों के लिए रहने गयी. मेरा भाई इंजीनियरिंग में पड़ता था. इसलिए वो पुणे हॉस्टल में रहता था और मैं और मेरे पापा घर अकेले रह गये थे. मेरी माँ के जाने के बाद, दूसरी रात मैंने सारा काम ख़तम कर दिया और गाजर – मुली को अपने कमरे में ले गयी.
और फिर मैंने कंप्यूटर पर पोर्न मूवी लगा दी और अपने सारे कपड़े उतार दिए और रोज की तरह बिस्तर में बैठ गयी और फिर धीरे – धीरे अपने बूब्स दबाने लगी. थोड़ी देर बूब्स दबाने के बाद, मैं ने मुली अपने हाथ में ली और उसको मेरी चूत में डाल दिया और उसको अन्दर बाहर करने लगी. मैं पूरी तरह एक्साइट हो गयी थी. तभी मेरे पापा ने दरवाजा खटखटाया और बोले – रूपा दरवाजा खोल. मैं इतनी घबरा गयी, कि मुझे कुछ पता ही नहीं चला, क्योंकि मैं पूरी नंगी थी. मैंने फटाफट कपड़े पहन ने शुरू किये और जैसे – तैसे कपड़े पहने और दरवाजा खोलने चली गयी. जल्दबाजी में मैं कंप्यूटर पर चल रही पोर्न मूवी बंद करना भूल गयी. मैंने दरवाजा खोला.
पापा – इतनी देर क्यों लगा दी. क्या कर रही थी?
मैं – कुछ नहीं पापा.. पढाई कर रही थी.
पापा – मुझे नींद नहीं आ रही थी. तो सोचा, की तुमसे थोड़ी देर बात ही कर लू.
मैं – लेकिन पापा, मैं थक चुकी हु. बस सोने ही जा रही हु.
(दरवाजे से कंप्यूटर नहीं दिख सकता था).
पापा – थोड़ी देर बेटा, बस ५ मिनट और वो अन्दर आ गये. अन्दर आते ही, मैं और वो दोनों शौक हो गए. क्योंकि कंप्यूटर पर वो पोर्न मूवी चल रही थी. ये है तेरी पढाई?
मैं – वो पापा (मुझ से कुछ बोला नहीं जा रहा था). तभी पापा की नजर बिस्तर पर पड़े गाजर और मुली पर पड़ी.
पापा ने मुली हाथ में ली. वो गीली थी. मैं ब्रा पहनना भूल गयी थी. और ब्रा भी बिस्तर में ही पड़ी थी.
पापा – ये सब क्या है रूपा? अपने कपड़े अच्छी तरह से पहन कर मेरे कमरे में आ जाओ.
पापा ने कंप्यूटर में से सीडी निकाल कर अपने साथ ले ली और चले गये. मैंने टॉप निकाला और ब्रा पहन ली. आप को बता दू, उस समय मैंने ब्लैक कलर की ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी. आप यह कहानी हिंदी सेक्स स्टोरीज वेबसाइट पर पढ़ रहे है। उस पर मैंने रेड लोअर और वाइट टॉप पहना हुआ था. मैंने कंप्यूटर बंद किया और पापा के रूम में गयी. पापा ने वो सीडी अपने डीवीडी प्लेयर पर लगा रखी थी. पापा ने मुझे रूम को बंद करने के लिए बोला और मैंने रूम को लॉक कर दिया.
पापा – ये क्या है रूपा? ये तुम्हारी पढाई है? तू ब्लू फिल्मे देखती हु?
मैं – वो पापा बस…
पापा – कब से देख रही हो तुम?
मैं – ११थ स्टैण्डर्ड से.
पापा – ओह माय गॉड. और ये सीडी तुम कहाँ से मिली.
मैं – मेरी सहेलिया लाती है.
पापा – ये देखने में मज़ा आता है?
मैं (शरमाते हुए) – हाँ.
पापा – तुम जानती हो.. ये सब शादी के बाद होता है.
मै – हाँ. लेकिन मेरी सहेली कहती है, लेकिन शादी से पहले ही सब जानना जरुरी होता है.
पापा – अच्छा, तो क्या क्या करती हो देखने के बाद, मुझे भी बताओ. शरमाओ मत.
मैं – मैं अपने हाथो से अपने स्तन दबाती हु और …
पापा – हाँ बोलो – शरमाओ मत..
मैं – पहले नीचे ऊँगली डालती थी और अब गाजर, मुली वो सब डालती हु.
पापा – तुम्हे मज़ा आता है?
मैं – हाँ.
फिर पापा ने मुझे अपने पास बुलाया और अपनी गोद में बैठा लिया.
पापा – रूपा, आज हम दोनों इस मूवी में जो चल रहा है, ऐसा करेंगे. मेरा साथ दोगी?
मैं – लेकिन?
पापा – लेकिन वेकिन कुछ नहीं. मैं तुम्हे एकदम ट्रेन कर दूंगा. मैं जानता हु, कि तेरी सेक्स की भूख बहुत बढ़ चुकी है.
मैं – ठीक है पापा. वैसे मैं किसी से सेक्स तो करना ही चाहती थी.
अब पापा ने मेरे होठो को चूमना शुरू कर दिया और मेरे होठ चूसने लगे. करीब ७ से ८ मिनट तक वो मेरे होठो को चूसते रहे और उस वक्त उनको दोनों हाथ मेरे स्तनों पर थे और दबा रहे थे. मुझे मज़ा आने लगा था. अब पापा ने मेरा टॉप निकाल दिया और अब मैं ब्रा में आ गयी थी. वो मेरी पूरी बॉडी को किस करने लगे थे और धीरे से उन्होंने मेरी ब्रा भी निकाल दी. अब वो मेरे निप्पल को चूस रहे थे. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. पापा का हाथ मेरी गांड पर था. वो मेरी गांड को सहला रहे थे और मेरे निपल को चूस रहे थे. अब पापा ने भी अपनी बनियान उतार दी. लगातार् १ओ मिनट तक वो मेरे निपल को चूसते रहे. मैं उतेजित होने लगी थी. अब पापा ने मेरा लोअर उतार दिया और अब मैं सिर्फ पेंटी में आ गयी. फिर पापा ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और उन्होंने अपनी लुंगी निकाल दी. मैं शौक हो गयी. पापा ने अन्दर कुछ नहीं पहना था और उनका लंड टाइट हो चूका था. वो काफी ज्यादा लम्बा था.
मै – पापा इसको लंड कहते है ना?
पापा बहुत उतेजित हो चुके थे मुझे नंगा देख कर और बोले – हाँ. इसी से तेरा जनम हुआ है. फिर पापा ने मेरे सारे बदन को चाटना शुरू कर दिया और किस करने लगे. मैं बहुत उतेजित हो गयी. अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था. और मैं झड गयी. मेरी पेंटी भी गीली हो चुकी थी. फिर पापा ने मेरी पेंटी उतारी और मेरी चूत के रस को चाटने लगे. और मेरी चूत पर अपनी टंग फेरने लगे. अब मेरी उतेजना बढने लगी और
मैं – पापा, कुछ हो रहा है.
पापा – अच्छा बेटी. अब इसको शांत करते है. आज तक तूने गाजर, मुली, ककड़ी और बेलन और ऊँगली ट्राई की है. आज अपने पापा का लंड अपनी चूत में लेकर देख? मैं – लेकिन पापा. आपका लंड तो बहुत ही ज्यादा लम्बा और मोटा है. मेरी चूत तो बहुत छोटी सी है. फिर पापा ने मेरी दोनों टांगो को अलग किया और अपने लंड को मेरी चूत पर लगा कर रगड़ने लगे. इस वजह से मैं मदहोश होने लगी. तभी अचानक से पापा ने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और पापा के लंड की केप वाला भाग अन्दर चले गया.
मेरे मुह से चीख निकली अहहाह आआअ ऊऊऊ माँ मर गयी… फिर पापा ने और जोर लगाया.. और उनका आधा लंड अन्दर चले गया. मैं फिर से चिल्लाने लगी हाहाहा अहहाह माया.. ओह्ह्ह्ह माँ मर गयी…और फिर एक और झटके के साथ उन्होंने अपना पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर डाल दिया. फिर वो २ मिनट तक वैसे ही रुके रहे. मैंने बेडशीट को पकड़ लिया टाइट. आज तक मैंने मुली, गाजर ही लिए थे और उसमे मुझे दर्द नहीं होता था. लेकिन आज मुझे बहुत दर्द हो रहा था. २ मिनट के बाद, पापा ने लंड को बाहर खीच कर निकाला और तुरंत ही अन्दर डाल दिया. दर्द के मारे मैं चिल्लाई… ऊओहोहोहो होहोहोह माँ.. फिर पापा लगातार अपने लंड को अन्दर – बाहर करने लगे. वो धीरे – धीरे ये कर रहे थे. इस वजह से मुझे थोड़ा – थोड़ा दर्द कम होने लगा. लेकिन उतेजना बड गयी. करीब ५ मिनट तक ऐसा करने के बाद, पापा ने स्पीड बढ़ा दी और वो लोकल ट्रेन से सुपरफ़ास्ट ट्रेन बन गये.. और अहहाह अहः अहहाह अहहाह ऊऊओ ऊओह्होहो ऊफोफोफोफोफो.. करने लगे.. २ मिनट तक की चुदाई के बाद, पापा की पिचकारी छुट गयी और उन्होंने अपना सारा पानी मेरी चूत में डाल दिया. फिर वो मेरे ऊपर ही सो गए. पानी गरम था और मुझे जन्नत का अहसास होने लगा.
करीब २० मिनट के बाद, वो फिर उठे और मुझे अपने लंड को होठो से रगड़ने को कहा. मैं उनके लंड को अपने होठो से रगड़ रही थी, बिलकुल ब्लू मूवी की तरह. थोड़ी देर के बाद, उनका लंड फिर से टाइट हो गया और उन्होंने मुझे कुतिया बनाया और पीछे से मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगे. इस से मैं फिर से उतेजित हो गयी और वो जोर – जोर से झटके मारने लगे. इस बार करीब २५ मिनट तक वो झटके मारते रहे और फिर उन्होंने अपनी स्पीड तेज कर दी. तभी मैं झड गयी. लेकिन वो तो लगातार झटके मरते रहे. मैंने पापा को कहा – पापा मेरे फेस पर अपना वीर्य निकालना प्लीज.

पापा – ठीक है बेटी. और फिर करीब ३५ मिनट के बाद, जब उनका लंड झड़ने को आया. तो वो मेरे मुह के पास आ गये. जैसे ही वो मेरे मुह पास आये, उनके लंड से एक पिचकारी निकली और मेरे होठ, गाल, नोज, आईज पर सब जगह वीर्य गिर गया.
हम फिर सुबह ५ बजे उठे और फिर से पापा ने मुझे चोदा और फिर हम वापस सो गये. दुसरे दिन छुट्टी थी और इसी वजह से हम ९ बजे तक सोते रहे. फिर उठने के बाद, मैं बाथरूम में गयी.
तब भी पापा मेरे साथ चले आये और हमने बाथरूम में भी सेक्स किया और फिर मैंने नंगी ही रह कर चाय बनायीं और नाश्ता भी बनाया और पापा के साथ डाईंगटेबल पर नंगी ही होकर नाश्ता किया और चाय ली. फिर १२ बजे, जब कामवाली के आने का टाइम हुआ, तब मैं नाइटी पहन ली और पापा ने लुंगी और बनियान. हमने अन्दर कुछ भी नहीं पहनना हुआ था. और उसके जाते ही हम फिर से नंगे हो गये और लंड लिया और दोपहर को फिर से २ बार चुदाई की. जब तक माँ वापस नहीं आ गयी. हम दोनों ने रोजाना ऐसे ही चुदाई का मज़ा लिया. मैं पापा के साथ उनके बिस्तर में नंगी ही सोती थी. एक बार मैं पापा के साथ नंगी ही थी बिस्तर में. तभी माँ का फ़ोन आ गया.
माँ – कैसे हो बेटी?
मैं – मैं ठीक हु और यहाँ भी सब ठीक है.
माँ – बेटी, मुझे ज्यादा दिन यहाँ रुकना पड़ेगा. वहां तुम सब संभाल लोगी ना.
मैं – हाँ माँ. मैं देख लुंगी. तुम यहाँ की चिंता मत करो.
ऐसे ही १ महिना बीत गया और हर रात पापा मुझे चोदते बिना कंडोम के. और बिना कंडोम की चुदाई की वजह से मेरा पीरियड मिस हो गया और जब टेस्ट करवाया, तो पता चला, की मैं प्रेग्नेंट हो गयी हु. मैंने फिर एबॉर्शन पिल्स लेना शुरू किया और कुछ दिन के सब ठीक हो गया. फिर पापा ने मुझे कंडोम के साथ चोदना शुरू किया और मुझे मज़ा देना शुरू किया. लेकिन मुझे कंडोम के साथ चुदाई में मज़ा नहीं आता था. इसलिए पापा ने मुझे बिना कंडोम के ही चोदना शुरू किया और मैंने एबॉर्शन पिल लेनी शुरू कर दी, ताकि मैं फिर से प्रेग्नेंट ना हो जाऊ. मेरे बाप ने मुझे पूरा रंडी बना दिया और रोजाना चोदा. जब मेरा भाई घर वापस आया और उसने पापा और मेरा ये वासना का खेल देखा, तो उसने भी मुझे रंडी बना कर मस्ती में पेला..

Punjaban ladki choot ki seal todi boss ne

 

पंजाबन की चूत की सील बॉस ने तोड़ी

सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार. मैं पंजाब के मोगा जिले के एक गॉव से जसदीप कौर हूँ. अभी मेरी उम्र २४ वर्ष है. मैंने कंप्यूटर की पढाई की इसलिए मुझे आसानी से नौकरी मिल गयी थी. लेकिन इस नौकरी से मैं कुछ खुश नहीं थी. मैं वेब डेवलपर की नौकरी करना चाहती थी लेकिन मेरे घर वाले मुझे दूर भेजना नहीं चाहते थे.

फिर मैंने उन सभी को किसी तरह मना लिया और मैं नौकरी के लिए चंडीगढ़ चली गयी.

मैं अब आपको अपनी देहयष्टि के बारे में बता देती हूँ. मेरा कद 5 फ़ीट 7 इंच है. रंग एकदम दूध सा गोरा है और मेरा शरीर भरा हुआ है. मैं जब टीचर थी, तब भी सूट ही पहनती थी और चंडीगढ़ में भी सूट ही पहनती थी.

इसके बाद मुझे नौकरी के लिए दिल्ली से ऑफर आया. इधर मुझे वेतन भी बहुत अच्छा मिल रहा था. मैंने अपने घर बात की, पर वो मान नहीं रहे थे. किसी तरह मैंने उनको समझाया और मना लिया.

मैं नौकरी करने के लिए दिल्ली आ गयी. मुझे कंपनी ने रहने के लिए कमरा भी दिलवा दिया. मेरे साथ एक लड़की और रहती थी. वो भी दिल्ली की ही एक सरदारनी थी. उसकी उम्र 26 साल थी और वो बहुत खूबसूरत थी.

मैंने तो अब तक सूट ही पहने थे, पर यहाँ मेरी साथ वाली बहुत मॉडर्न थी. वो कई बार बहुत छोटे कपड़े पहनती थी. उसने मुझे भी छोटे कपड़े पहनने की आदत लगा दी.

आपको मैंने उसका नाम नहीं बताया, उसका पूरा नाम तो मनप्रीत कौर था, लेकिन सब उसको मनु ही कहते थे. हम दोनों कमरे में छोटी स्कर्ट ही डालते थे. मैं अब उसको देखकर अपने पूरे शरीर पर वैक्सिंग करवाने लग गयी थी. मेरे ऑफिस में सभी लड़कियां बहुत चालू थीं. मेरा बॉस, जिसकी उम्र 30 साल थी, उसने बहुत अच्छी बॉडी बनाई हुई थी. वो मुझे बहुत ध्यान से देखता था. लेकिन मैंने कभी उसको मौका नहीं दिया था कि वो मेरे साथ कुछ आगे बढ़ सके. मैंने यही बात मनु को बताई, तो उसने कहा कि वो तुमसे दोस्ती करना चाहता होगा और कुछ नहीं.

धीरे धीरे मेरी अपने बॉस से दोस्ती हो गयी और वो मुझसे फ़ोन पर भी बात करने लगा.

एक दिन मनु ने मुझसे कहा- क्या तुमने और तुम्हारे बॉस ने अब तक कुछ किया है या नहीं?

मुझे मनु की ये बात सुनकर बड़ा गुस्सा आया. मैं बोली- हमारे बीच ऐसा कुछ नहीं है, हम सिर्फ दोस्त हैं.
मनु बोली- तुम्हारे बॉस ने तुमसे दोस्ती सिर्फ तुमको चोदने के लिए की है.

यह सुनकर मेरा गुस्सा और बढ़ गया, मैंने तमतमामते हुए उससे कहा- मैं तुम्हारे जैसी नहीं हूँ.
इस पर मनु हंसकर बोली- तुम जो मर्ज़ी कर लो, वो तुम्हारी चूत में अपना लंड घुसेड़ कर ही मानेगा.
मैंने भी कह दिया- मैं एक पंजाबन सरदारनी हूँ. ऐसे कोई मुझे छू भी नहीं सकता.
तभी मनु बोली- मैं तुम्हारे जैसी बहुत सरदारों की लड़कियों को जानती हूँ, जो पहले तुम्हारी तरह ही नखरे दिखाती थीं, पर अब वो खुद लंड को अपने हाथों में लेकर उसे अपनी चूत में डालती हैं.

मैंने उससे इस बात पर और बहस करना ठीक नहीं समझा. हमारी ये बात समाप्त हो गई.

कुछ दिन बाद मेरे बॉस ने मुझसे रात का खाना किसी होटल में करने के लिए पूछा, तो मैंने हाँ कर दी. मैं डिनर पर बैकलेस सूट पहन कर गयी.

उस दिन मनु ने मुझसे कहा- आज तुम बहुत गजब की माल लग रही हो, अपने बॉस से बच कर रहना.

मैंने अपने आपको शीशे में देखा. मेरे चूचे बहुत कसे हुए थे और चूतड़ भी पूरे बाहर को निकले हुए थे. मुझे कहीं न कहीं अपने ऊपर गर्व हो रहा था. मैं डिनर के लिए होटल गयी और मैंने महसूस किया कि मेरा बॉस मुझे काम भरी निगाहों से देख रहा था. वहां पर उसके और दोस्त भी थे वे सब अपनी गर्ल फ्रेंड्स के साथ उधर आए हुए थे. वो मेरे साथ बहुत मज़ाक कर रहे थे.

तभी उनमें से बॉस के एक दोस्त ने मुझसे कहा- मेरा जन्मदिन आ रहा है, मेरी पार्टी पर तुम जरूर आना.
मैंने कहा- ठीक है.

होटल से आने के बाद मैंने मनु को पूरी बात बताई. साथ ही बॉस के दोस्त के जन्मदिन की पार्टी पर जाने लिए भी बताया.
उसने मुझसे कहा- तुम पार्टी में जरूर जाना.

इसके बाद बर्थडे पार्टी वाले दिन मेरे बॉस ने मुझे एक गिफ्ट दिया और कहा- यह तुम्हारा पार्टी गिफ्ट है, आज तुम इसको ही पहन कर आना.

मैंने गिफ्ट खोला, तो उसमें क्रॉस बैक कैमी ड्रेस थी, वो बहुत सेक्सी थी. उसके साथ एक सफ़ेद ब्रा भी थी और एक जी स्ट्रिंग स्टाइल की चड्डी भी थी.

मैंने पार्टी वाले दिन शाम को ड्रेस पहन ली. उसमें मेरी पूरी टांगें दिख रही थीं और मेरी पीठ भी दिख रही थी.

मेरे बॉस ने मुझे पिक किया और वो मुझे देखते ही बोला- वाह आज तुम बहुत सेक्सी लग रही हो.
मैंने हंस कर बॉस की बात पर उनको थैंक्स बोला.

पार्टी उसके दोस्त के किसी फार्महाउस पर थी, वहां पर सिर्फ उसके दोस्त और उनकी गर्ल फ्रेंड्स थीं. सभी ने बहुत सेक्सी कपड़े पहने हुए थे. पार्टी शुरू हो गयी और उसके दोस्त मेरे पास ड्रिंक ले कर आ गए. मैंने शराब पीने से इंकार किया, पर उन्होंने मुझे मना लिया और कुछ ड्रिंक्स पिला दी.

फिर हम सभी डांस करने में लग गए. मैं अपने बॉस के साथ डांस कर रही थी. रात के 10 बजे का टाइम हुआ था. डांस करते हुए मेरे चूचे उसकी छाती से टच हो रहे थे. मेरी जांघें उसकी जांघों से टच हो रही थीं. हम दोनों नशे में थे.

तभी उसने मेरी पीठ पर प्यार से सहलाना शुरू कर दिया. अब मैं मस्त होती जा रही थी. तभी मैंने देखा उसका एक दोस्त अपनी सहेली को गोद में उठाकर ऊपर किसी कमरे में ले गया. इसी बीच मेरे बॉस ने मुझे अपनी तरफ खींचा और मुझे कसकर अपनी छाती से लगा लिया. इससे मेरे शरीर में एक कम्पन सी होने लगी. मेरे बॉस के सभी दोस्त हमारी तरफ देख रहे थे. मुझे बहुत गुस्सा आया, पर मैंने सोचा यह मेरा बॉस है. अगर मैंने कुछ कहा, तो काम खराब हो सकता है, मुझे नौकरी में भी दिक्कत आ सकती है.

बॉस ने अपना हाथ मेरी पीठ से चूतड़ों पर सहलाना शुरू कर दिया. मैंने सोचा कि चलो इतना तो मैं झेल सकती हूँ. मुझे मजा भी आ रहा था.

तभी उसने मेरी ड्रेस को ऊपर कर दिया, जिससे मेरी पेंटी दिखने लगी. उसके सभी दोस्त मेरी सफ़ेद चड्डी को घूर कर देख रहे थे.
मेरे गोरे गोरे चूतड़ों को देख कर उसके दोस्त बोलने लगे थे- वाह क्या माल है.

तभी मेरे बॉस ने मेरे कान में मुझसे कहा- मैं तुमसे प्यार करता हूँ.
यह कह कर उसने अपने होंठ मेरे होंठों से जोड़ दिए. यह मेरी पहली किस थी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था. मैं अभी भी यही मान रही थी कि इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा.

कुछ देर किस करने के बाद मैंने कहा- सब देख रहे हैं.

तभी मेरे बॉस ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. तब भी मैं यही सोच रही थी यह मुझे कहीं और ले जा कर किस करेगा. मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और वो मुझे ऊपर किसी कमरे में ले गया.

उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और दरवाज़े को बंद कर दिया. जब दरवाजा बंद हुआ, तब मुझे अहसास हुआ.

मैं भगवान को स्मरण करने लगी- हे भगवान . … आज तो मेरी सील पक्के में टूटेगी.

इससे पहले मैं कुछ कहती, बॉस मेरे ऊपर चढ़ गया. वो मुझे किस करने लगा. मुझे भी नशे की मदहोशी में उसका साथ अच्छा लगने लगा. कुछ ही देर में हम दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के होंठों को चूसने में मस्त हो गए थे.

कुछ देर बाद उसने मेरी गालों को चूसना शुरू कर दिया. उसने अपने दांतों से मेरे गालों को दबा दबा कर उनका पूरा रस पी लिया. उसके बाद मुझे पता ही नहीं चला कि कब उसने मुझे पूरी नंगी कर दिया और खुद भी पूरा नंगा हो गया.

मैंने आंखें खोलीं और उसका लंड देखा, तो मैं हैरान सी हो गई. बॉस का लंड बहुत मोटा और लम्बा था.

जब एक लड़की किसी मर्द के सामने नंगी हो जाती है. उसके बाद लड़की के हाथ में कुछ नहीं बचता है. फिर मर्ज़ी उसी मर्द की होती है कि वो लड़की की चुदाई कितने टाइम तक करता है.

मैंने अपने हाथ अपनी चूत पर रख दिए. मेरा बॉस मुस्करा रहा था. उसे मेरे चूचे दिख रहे थे, वो कसे हुए थे.

तभी उसने मेरे मम्मों को अपने हाथों में लेकर निचोड़ना शुरू कर दिया. मैं ज़ोर ज़ोर से मादक सिसकारियां लेने लगी थी. वो मेरे निप्पलों को अपने दांतों से दबा कर बड़े प्यार से काट रहा था. कभी निप्पल काटता, कभी उनको चूसता.

अब तक मेरे दिमाग पर भी वासना चढ़ चुकी थी. सब कुछ बहुत तेज़ी से हो रहा था. बॉस के हाथ में एक खूबसूरत कुंवारी सरदारनी थी. मेरे जिस्म को वो एक भूखे भेड़िए की तरह नोंच रहा था. मैं अब कुछ नहीं कर सकती थी, उसके दांतों के निशान मुझे अपने शरीर पर महसूस होने लगे थे.

कुछ पल बाद उसने मुझे उल्टा कर दिया और मेरे चूतड़ों को चूसना शुरू कर दिया.

मुझे कोई होश नहीं रह गया था. बॉस ने मेरी टांगों को उठाया और मेरी फूल जैसी चूत को चूसना शुरू कर दिया. चूत पर बॉस की जीभ का अहसास होते ही मेरे पूरे शरीर में कम्पन होने लग गयी.

मेरी आवाजें आने लगी थीं- आह … आई … उह ओह शीउई!

कुछ देर तक मेरी कुंवारी बुर चूसने के बाद उसने मेरी टांगों को उठाकर मुझे बोला कि इनको पकड़ो.

मैंने न जाने किस मद में मस्त होकर अपनी दोनों टांगें पकड़ लीं.
इसके बाद बॉस ने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया.
मैंने बॉस से कहा- प्लीज़ अन्दर मत डालना.
वो बोला- कुछ नहीं होगा मेरी जान … बस ऊपर ऊपर ही करूंगा, पूरा अन्दर नहीं डालूँगा.

मैं आश्वस्त हो गई कि चलो चुत की सील नहीं टूटेगी. वो अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ता जा रहा था. जितना ज्यादा वो सुपारे को मेरी चूत की फांकों में घिसता, मैं उतनी ही अधिक मदहोश होती जा रही थी. मेरी धड़कनें बहुत तेज़ हो गयी थीं. मुझे समझ में आने लगा था कि आज यह मेरी चूत को फाड़ ही देगा … मनु ने जो कहा था, वही हो भी रहा था. शायद मेरे दिल के किसी कोने में खुद भी चूत का फीता कटवाने की मंशा बलवती होने लगी थी.

बॉस भी मेरी चुदाई ही करना चाहता था. इसलिए मैंने भी सोचना बंद कर दिया था. चूंकि मुझे भी मज़ा आ रहा था, इसलिए मैंने प्रारब्ध को छेड़ना बंद कर दिया था और सोचने लगी थी कि जो भी होना होगा, हो जाने दूंगी.

बॉस अपने कड़क लंड को मेरी चूत के अन्दर डालने की कोशिश कर रहा था. पर कुंवारी चूत में उसका मोटा लंड अन्दर नहीं जा पा रहा था. बॉस ने मेरे होंठों पर अपना हाथ रख दिया और लंड को ज़ोर से मेरी चूत के अन्दर पेल दिया.

मोटे लंड के इस आक्रमण से मेरी आँखों से आंसू आ गए. आधा लंड अन्दर जा चुका था. मैं दर्द से छटपटाने लगी थी. मेरी हालत देख कर कुछ देर तक बॉस रुका रहा. फिर उसने आधे लंड को धीरे धीरे करके चूत के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.

मैं तो बेहोश जैसी ही हो गयी थी. कुछ देर बाद मुझे होश आया. मैंने देखा कि मेरी चूत में से खून निकल कर चादर पर लगा हुआ था. मैंने नीचे हाथ लगाया, तो खून की बूंदें मेरी उंगलियों में लग गईं. मैंने समझ लिया कि मेरी चूत लाल हो चुकी है.

चूत में कुछ चिकनाहट हो जाने से लंड अब जल्दी जल्दी अन्दर बाहर होने लगा था … मेरी सील टूट गयी थी. बॉस ने अपना पूरा लंड अन्दर तक पेल दिया था. मुझे भी दर्द का अहसास कम हो चला था.

कोई 10 मिनट के बाद मुझे भी मज़ा आना चालू हो गया. उसका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर जड़ तक जा रहा था. फिर बॉस ने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को कसकर पकड़ लिया और ज़ोर ज़ोर से चूत में धक्के मारने चालू कर दिए.

उसने मेरी चूचियों को मसल मसल कर उनका हलवा सा बना दिया था, मेरी चूचियों का बुरा हाल हो चुका था. पर इससे मेरी चुदाई से होने वाला दर्द मुझे कम महसूस हो रहा था.

अब मेरे मुँह से मादक आवाजें निकलने लगी थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गई … आहह …

इसके बाद मेरे बॉस ने मुझे छोड़ दिया और मुझे घोड़ी बना दिया. फिर पीछे से लंड पेल कर मुझे ज़ोर ज़ोर से चोदना चालू कर दिया. मुझे लग रहा था कि मेरी चुदाई की कामुक आवाजें कमरे से भी बाहर तक जाने लगी थीं.

यह मेरी पहली चुदाई थी, पर मेरे बॉस को मुझ पर कोई तरस नहीं था. वो इतनी ज़ोर से मेरी ठुकाई कर रहा था, जिससे मेरा पेट और टांगें कांप रही थीं.

बस इन सब में जो अपनी चूत में लंड लेने का मज़ा था, उसके सामने यह दर्द कुछ भी नहीं था. मुझे भी मजा आ रहा था. साथ ही मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि काश मेरी चूत में पहले ही कोई लंड घुस गया होता. मेरा दिल कर रहा था बस मेरी चुदाई यूं ही चलती रहे. लंड क्या मज़ा देता है, इसका पता तो चूत में जाने के बाद ही चलता है.

बॉस ने मेरे गोरे चूतड़ों पर थप्पड़ मार मार कर लाल कर दिए थे.

तभी मैंने देखा मेरे फ़ोन पर मेरी मम्मी की कॉल आ रही थी. मैंने फ़ोन उठाया मेरी मम्मी बोलीं- तुम फ़ोन क्यों नहीं उठा रही थी?
मैंने जवाब दिया कि मुझे नींद आ गयी थी.
मम्मी बोलीं- तुम्हारी साँस फूली हुई क्यों है?
मैंने कहा- अभी मेरी आंख खुली है, मैं कोई सपना देख रही थी … और शायद इसलिए ही ऐसा हो गया होगा.

इस दौरान बॉस का लंड मेरी चूत के अन्दर ही था. अब मुझे दर्द भी महसूस हो रहा था और मज़ा भी बहुत आ रहा था.

तभी बॉस ने धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. मैं बहुत कण्ट्रोल कर रही थी कि कहीं मेरी आवाज़ से मम्मी को शक न हो जाए.

मेरी मम्मी मेरा हाल चाल पूछ रही थीं. वो मेरी बहुत तारीफ़ कर रही थीं, पर उनको क्या पता था कि उनकी लड़की तो अपने बॉस से चुदाई करवा रही है.

तभी मेरे बॉस ने अपनी स्पीड को तेज़ कर दिया और पचक पचक की आवाजें आने लग गईं.

मेरी मम्मी बोलीं- बीच में कोई आवाज़ आ रही है, ये किस चीज की आवाज है?
मैंने कहा- कुछ नहीं मेरे साथ वाली इशारा कर रही है कि सो जाओ.
मम्मी ने कहा- ठीक है बेटा, अपना ख्याल रखना बाय.

फ़ोन काटते ही मैंने बॉस से कहा- यार, तुम से कुछ देर के लिए सब्र भी नहीं हुआ … तुम्हारे सामने नंगी सरदारनी लेटी है … वो हर तरह से तुमको मजा देने को राजी है. अगर मम्मी को पता चल जाता तो मेरा क्या होता, अब जो करना है … जल्दी कर लो.
बॉस ने मेरे चूतड़ों पर ज़ोर से थप्पड़ मारे और बोला- तुमको क्या लगता है, मैं तुम्हें ऐसे ही छोड़ दूंगा. मेरी जान अभी तो पूरी रात पड़ी है. मैं सारी रात तुम्हारी चूत को चोद कर इसका भोसड़ा बना दूंगा. वैसे भी कुंवारी सरदारनी की चूत रोज़ नहीं मिलती है.

उसने ये कहते हुए ज़ोर ज़ोर से झटके मारने शुरू कर दिए.

मेरी चूत अब परपराने लगी थी, ये दो बार झड़ चुकी थी. कोई दो मिनट तक बॉस ने मुझे तेज रफ्तार से चोदा और अपना सारा वीर्य मेरी चूत में ही निकाल दिया.

उसने झड़ते हुए कहा- कुछ देर हम आराम करते हैं … और फिर तुम्हारी चुदाई शुरू करेंगे.
वो मुझसे चुदाई को लेकर बात कर रहा था. वो बोला- तुमको मज़ा आया?
मैंने कहा- हां मजा बहुत आया, पर दर्द भी हुआ.

उसने कहा- जब मैंने पहली बार तुमको देखा था, उसी वक्त सोच लिया था कि इस सरदारनी की चूत तो मैं ही फाड़ूंगा. मैंने पहले भी कई सरदारनियों की चुदाई की है, पर जो स्वाद एक कुंवारी सरदारनी की चुदाई में मुझे आया, वो उन चुदी-पिटी फुद्दियों में नहीं आया था.

तभी मेरे मन में आया कि यह बंदा तो शिकारी है, इसने तो मेरा शिकार कर लिया है. अब मैं कुछ नहीं कर सकती थी. मेरी चूत तो अब उसके लंड की हो चुकी थी. बेड पर मेरी चूत का खून लगा हुआ था. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी पहली चुदाई ऐसी होगी.

उसने मुझे चूमते हुए कहा- तुम्हारे गोल गोल चूतड़ और गोल गोल मम्मों पर मैं फ़िदा हो गया था.
मैं उसको सुन भर रही थी.

उसने आगे कहा- डिनर पर तुम एक माल लग रही थी, तभी मैंने तुमको चोदने का प्लान बना लिया था. अब तुम्हारी गांड और चूचे पहले से और बड़े हो जाएंगे.
मैं बस मस्त पड़ी थी.
बॉस ने कहा- अब तुमको मेरे लंड को फिर से खड़ा करना है. लंड को अपने मुँह में ले लो.

उसने अपना लंड कपड़े से साफ़ करके मेरे मुँह में दे दिया और मेरी चूत को अपने मुँह में ले लिया. उसका लंड बहुत मोटा था. मेरे चूसने से वो बहुत सख्त हो गया.

तभी उसने मुझे उठाकर अपने ऊपर लिटा लिया. अपना लंड फिर से मेरी चूत में डाल दिया और फिर से मेरी चुदाई शुरू हो गयी. अब मुझे दर्द भी कम हो रहा था और पहली चुदाई का मज़ा भी बहुत आ रहा था.

बॉस ने मेरे होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और एक ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी. पचक पचक की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं. मेरी चूत अब काफी खुल गयी थी.

बॉस मुझे बहुत तेज़ पेल रहा था. इसी बीच उसका लंड मेरी चूत से बाहर निकल गया, तभी मैंने अपने हाथों से लंड को अपनी चूत में डाल लिया.

उसी वक्त मुझे मनु की बात याद आ गयी, जब उसने कहा था कि तुम्हारे जैसी खुद लंड को अपनी चूत में डालती हैं. मैं मन ही मन मुस्कुरा दी.

कुछ देर बाद बॉस खड़ा हो गया और मुझे अपनी गोद में उठा उठा कर चोदने लगा. उस रात मेरे बॉस ने मुझे बहुत सारे आसनों में चोदा. वो मुझसे खिलौने की तरह खेल रहा था. कभी मुझे उल्टा करके चोदता, कभी मेरी टांगें उठाकर ज़ोर ज़ोर से चुदाई करने लगता.

बॉस ने मेरे मम्मों को इतना ज्यादा मसला, मेरे निप्पलों को इतना काटा और अपनी उंगलियों से दबाया कि मैं उनका दर्द ही भूल गयी थी. क्योंकि मैं अपनी चुदाई में मदहोश हो चुकी थी. मेरी चूत सुन्न पड़ गयी थी. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि मैं अब तक कितनी बार झड़ चुकी थी.

चुदाई के बीच बॉस ने मुझे कई बार पैग पिलाए, जिससे मुझे होश आ जाता था. मेरे होश में आते ही मेरी चुदाई फिर से शुरू हो जाती थी. सारी रात वो मुझे चोदता रहा.

रात 3 बजे मेरी चुदाई बंद हुई. उसने अपने वीर्य से मेरी चूत को भर दिया था. बॉस ने कसकर मुझे अपनी छाती से लगा लिया. मुझे कोई होश नहीं था, बस इतना पता था कि आज मेरी चूत का भोसड़ा बन गया है. अब यह पहले जैसी कभी नहीं होगी.

हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए.

अगले दिन सुबह 10 बजे जब मेरी आंख खुली, तो मैंने देखा कि बॉस पहले ही उठ गया था. मैंने अपने आपको देखा, तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरा पूरा रस निचोड़ लिया गया हो. मेरे मम्मों में दर्द हो रहा था … वो एकदम लाल थे. मेरी चूत सूज गयी थी. जब मैं चलने लगी तो मुझे पूरे शरीर में दर्द हुआ.

मैंने अपने आपको शीशे में देखा. मेरा शरीर पूरा लाल हो चुका था. बॉस ने मुझे सारी रात चोद कर मेरा बुरा हाल कर दिया था.

तभी मेरा बॉस कमरे में आया. उसने मुझे उठाया और बाथरूम में ले गया. मुझे पेशाब करते हुए भी दर्द हो रहा था.
मैंने उसकी तरफ कातर भाव से देखा, तो उसने कहा- घबराओ मत, पहली बार में ऐसा होता ही है.

उसने मेरी चूत पर एक क्रीम भी लगाई. उस दिन मेरा पेट भी ख़राब हो गया था. मुझे प्रेग्नेंसी रोकने के लिए गोलियां खानी पड़ीं.

बॉस मुझे मेरे कमरे में छोड़ कर आया. जब मनु आयी और उसने मुझे देखा तो वो बोली- अरे, तुम्हारे बॉस ने तो तुम्हारा पूरा रस ही पी लिया.

उसके बाद मैं बहुत बदल गयी. अब मेरे चूचे बड़े हो गए हैं और मेरे चूतड़ बाहर को निकल आए थे.

बॉस अब मुझे हर शनिवार को कहीं ले जाने लगा था और मेरी खूब चुदाई करता था.



Beti Ki Rasili Choot Dekh Man Bahaka

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सभी adultstories.co.in प्रेमियों को राना का नमस्कार! मैं कई सालों से adultstories.co.in पर कहानी पढ़कर अपने लंड की प्यास बुझाता हूँ.
अन्तर्वासना पर यह मेरी पहला लेख है. दोस्तो, यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है.
कई लोग अन्तर्वासना पर कहानियां पढ़कर इस सोच में रहते हैं कि क्या असल में ये कहानियाँ सत्य होती होंगी. बाकी का तो पता नहीं … पर मेरी ये कहानी बिलकुल सत्य है.
इस कहानी में मैं अकेला ही एक किरदार हूँ. मगर आप लोगों की मदद से अगली बार इस कहानी में दूसरा किरदार भी हो सकता है. मेरे लिए सिर्फ ये एक कहानी नहीं बल्कि एक सुझाव भी होगा. और आगे का रास्ता भी.

मेरी बीवी बहुत सुंदर है. मेरी एक ही औलाद है मेरी बेटी … वो अठारह साल की हो चुकी है, उसका नाम है आरज़ू. वो भी अपनी माँ पर गयी है, बहुत खूबसूरत है. छोटी छोटी चूचियां और मुलायम सी चूत है मेरी बिटिया की. उस मुलायम चूत पर हल्के से बाल उगने शुरू हो गये हैं.
बात कुछ दिन पहले की है. उस दिन मेरी पत्नी घर पर नहीं थी. रात को हम दोनों बाप बेटी ने खाना खाया और बिटिया सो गयी.

मैं लेपटोप पर गन्दी मूवी देखने लग गया. पता नहीं मुझे क्या हो गया और मैं बिटिया के कमरे में गया. वो कम्बल ओढ़ कर सोयी हुई थी. मैं अपनी बेटी का कम्बल हटा कर उसकी चूत देखने की कोशिश करने लग गया. पर दिखी नहीं. फिर मैंने उसकी सलवार ब्लेड से फाड़ दी और हल्के हल्के हाथ से उसका सलवार हटा दी. फिर मैंने अपनी बेटी की अंदर से कच्छी भी ब्लेड से काट दी. उसके बाद मुझे जो दिखा मैं पागल हो गया. 18 साल की लड़की की इतनी सुन्दर चूत … क्या चूत थी. छोटी सी और मुलायम … हल्के हल्के बाल!

मेरा दिमाग जैसा पगला सा गया, मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था. और लंड मानो अभी बिटिया की चूत में घुस कर सील तोड़ दे. मगर खुद पर काबू रखा और हाथ लगा कर उसे धीरे धीरे सहलाने लगा. मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत की दरार में फिरायी तो मेरी बेटी के बदन में जैसे सिरहन सी हुयी. ऐसी चूत नसीब वालों को देखने को मिलती है.

Baap Ne Beti Ko Choda Masti Se


मैं लगातार पर धीमे धीमे हल्के हाथ से अपनी बिटिया की चूत की दरार सहला रहा था. कुछ ही देर में मेरी उंगली गीली हो गयी. इतनी मस्त और रसीली चूत तेरी मेरी बिटिया की … क्या कहूँ! कोई भी ऐसी चूत के लिए तरस जाये.

उस रात मैंने अपनी बिटिया की चूत देख देख कर चार बार मुठ मारी. जब भी वो नहाने के लिए जाती तो मेरा मन करता कि मैं अपनी बेटी को नंगी नहाते हुए देखूं इसलिए मैंने बाथरूम में फोन का कैमरा छुपा कर लगा दिया. फिर 1 बजे के करीब वो नहाने के लिए गयी.

जब मेरी जवान बेटी नहा कर बाहर निकली तो मैंने अपना फोन चेक किया और देखा पहले मेरी बिटिया आरज़ू ने अपनी काली लेगी उतारी. उसकी गोरी और मुलायम टाँगें बहुत सेक्सी थी. मेरी बिटिया की टाँगें बहुत हॉट और सेक्सी थी. आरज़ू ने ब्लेक कलर की पारदर्शी पेंटी पहन रखी थी जिसे उसने अब उतार दिया था. अब वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे और उसे देखकर तो जैसे मेरे बदन मे बिजली सी मचल गयी थी.

फिर आरज़ू ने अपना कुर्ता उतारा और अब वो सिर्फ एक सफेद कलर की पारदर्शी बनियान में थी और फिर कुछ देर बाद वो भी नीचे उतर गयी. अब मेरी बिटिया आरज़ू पूरी नंगी थी और मैं विडियो देख कर अपना लंड पकड़कर बैठा सब देख रहा था.

अब आरज़ू की छोटे-छोटे और मासूम सी चूची देखकर तो मैं पागल ही हो गया था. अब आरज़ू को नंगा देखने के बाद मैं पागल हो चुका था. फिर कुछ देर सोचने के बाद मैं वापस बाथरूम में गया. और उसकी उतारी कच्छी और बनियान को चूमने और चाटने लग गया.

उसके बाद उसकी विडियो दुबारा देख मैंने अपनी बिटिया के नाम से मुठ मारी.

दोस्तो, इस कहानी में यहीं तक!

अब आपको लोगों से सवाल पूछना चाहता हूँ कि क्या मुझे अपनी बिटिया को चोदना चाहिए. मैं चाहता हूँ अपनी बिटिया को सेक्स के पूरे मजे दूँ. अगर आप लोगों को लगता है कि चोदना चाहिए तो प्लीज मुझे कमेंट्स करके बताएं.

14 saal ki kunwari ladki ki chudai - Chhoti umar ka sex

चौदह साल की लड़की को चोद दिया , छोटी उम्र की नादान लड़की की चुदाई - 14 saal ki kunwari ladki ki chudai - Chhoti umar ka sex , नाबालिक लड़की से सेक्स किया.


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Dosto aaj jo kuwari chut ki chudai ki kahani batane jaa raha hu wo mere mahalle ki ek sirf 14 saal ki kuwari ladki ki chudai ki kahani hai. Uski naam twinkle hai. jo ki 14 saal ki hai aur dekhne mein bahut hi jabartdust hai. Hamara twinkle ke ghar aur unka hamare ghar aana jaana laga rehta tha. Main jab bhi apni chatt pe chadta to usse dekhta to main dangg reh jaata tha aur neeche aakar muth maar leta tha. Main usse dekhkar ek dum josh mein aa jaata tha aur usse chodne ke baare mein sochne lagg jaata tha. Ek din main apne kamre mein baitha huya net par surfing kar raha tha tabhi bahar kissi ke aane ki awaaz sunayi di. Main uth kar bahar gaya to mummy se pucha ki koun hai to maa ne kaha ki twinkle aayi thi aur pooch rahi thi ki,”sunny ghar pe hi hai, maine maths ke question samjhne hai usse.” aur meri maa ne keh ka ki,”woh samajhne ke liye aa rahi hai samjha dena usko,” maine keh diya ki theek hai.

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मुस्लिम समाज में चुदाई का मज़ा

Muslim samaaj me chudai ka majaa nirala


एक बात तो है बेटी खुशबू की मुस्लिम समाज में चुदाई की जितनी आज़ादी है उतनी आज़ादी किसी और समाज में नहीं है। हमारे यहाँ जब लड़का जवान हो जाता है तो  वह किसी को भी चोदने के लिए आज़ाद हो जाता है और लड़की जब जवान हो जाती है तो वह भी किसी से भी चुदवाने के लिए आज़ाद हो जाती है। सबसे बड़ी बात यह है इस समाज में चुदाई में कोई नाता रिस्ता नहीं माना जाता। इनका कहना है की चुदाई में एक ही रिस्ता होता है और वह है लण्ड और चूत का रिस्ता। न लण्ड पर कोई रिस्ता लिखा होता है और न चूत पर।  लण्ड जब खड़ा  होता है तो वह किसी की भी चूत में घुस सकता है। उसे जायज़ माना जाता है और इसी तरह चूत जब चुदासी हो जाती है तो वह किसी का भी लण्ड अपने अंदर पेलवा सकती है, उसे भी जायज़ माना जाता है। मेरा नाम खुशबू है और मेरीअम्मी जान मुझे ये बातें बता रहीं थी जब मैं पूरी तरह जवान हो गयी थी।  मैं 19 साल की थी।  अम्मी जान को यह मालूम हो गया था की मैं भी  लण्ड पकड़ने लगी हूँ, लण्ड का थोड़ा थोडा मज़ा लेने लगी हूँ तो उसने मुझसे कहा बेटी अब तुम बच्चो के साथ नहीं बल्कि यहाँ फर्श पर हम सबके साथ सोना शुरू कर दो। मैंने वैसा ही किया और दो दिन तो मुझे कुछ पता ही नहीं चला क्योंकि मैं रात भर  घनघोर तरह से सोती रही। लेकिन तीसरे दिन मेरी नींद रात में खुल गयी।

मैंने जो देखा वह तो मुझे मस्त करने वाला था।  मुझे अम्मी जान की बात बिलकुल  सही मालूम पड़ रही थी। मैंने बड़ी हैरानी से देखा की मेरा अब्बू जान तो एकदम नंगे नंगे मेरी भाभी जान के ऊपर चढ़े हुए थे।  भाभी जान भी एकदम नंगी टी और अब्बू उसे दनादन चोदे जा रहा था।  में मन  वाह !  ही बहू की बुर चोद।   बात है ! इस तरह की चुदाई तो वाकई बड़ी मजे दार है।   उधर मैंने देखा की मेरा भाई जान मेरी खाला के भोसड़ा में लण्ड पेले हुए है। वह खाला का भोसड़ा चोद रहा है और खाला जान भी ऐसे चुदवा रहीं हैं  जैसे की वह मेरा भाई नहीं बल्कि उसका अपना शौहर हो। मुझे दोनों लण्ड तो पूरी दिखाई नहीं पड़े लेकिन यह जरूर मालूम हो गया की यहाँ किसी को  किसी से कोई शर्म नहीं है।  दूसरी तरफ देखा की मेरी अम्मी जान भी मस्ती से मेरे खालू से चुदवा रहीं हैं।  खाला जान अम्मी का भोसड़ा पागलों की तरह चोद रहा था।  अम्मी को भी किसी तरह की कोई शर्म नहीं थी बल्कि वह खुद ही उछल उछल कर चुदवाने का मज़ा ले रहीं थीं। खाला का बेटा भी हमारे साथ लेता था।  उसने हाथ बढाकर मुझे पकड़ लिया।  मैं भी यह सब देख कर बुरी तरह गरम हो गयी थी और जबरदस्त चुदासी हो चुकी थी।  मैं भी उससे चिपका गयी।  उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरी चूँचियाँ दबाने लगा।  मेरी चूत पर हाथ फिराने लगा और मैं उसका लौड़ा पकड़ कर हिलाने लगी।  लौड़ा भी मादर चोद बड़ा लम्बा भी था और मोटा भी।

मैंने देखा की अम्मी जान मुझे देख रहीं हैं और उसने मुझे आगे बढ़ने का संकेत दिया। इससे मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैंने उसका लौड़ा अपने मुंह में ले लिया। मैं लण्ड चूसने लगी और वह मेरी चूत चाटने लगा।  न उसे किसी की शर्म और न मुझे किसी की शर्म।  मैंने मन में सोंचा की जब सब लोग मादर चोद चोदा चोदी कर रहे हैं तो फिर मैं क्यों न करूं ?  मैं क्यों पीछे रहूं ? मैं भी अब जवान हूँ।  मैं भी सबके सामने खुल्लम खुल्ला लण्ड का मज़ा लूटूँगी और एन्जॉय करूंगी।  कुछ देर बाद उसने लण्ड मेरी चूत पर टिकाया और एक धक्का मारा तो लण्ड अंदर घुसने लगा।  चूत तो मेरी टाइट थी ही तो थोड़ा दर्द तो हुआ और मैं चिल्ला भी पड़ी।  उई माँ मर गयी मैं।  फट गयी मेरी चूत।  इसने फाड़ डाला मेरी बुर. हाय रे अब क्या होगा ? तब तक अम्मी जान बोली चुप रह भोसड़ी की।  अभी सब ठीक हो जायेगा और सच में ठीक हो भी गया।  मुझे मज़ा आने लगा और तब मैं भी उचक उचक कर चुदवाने लगी।
सबके साथ चुदवाने का मज़ा कुछ और ही होता है।  मुझे जितना मज़ा अपनी बुर चुदवाने में आ रहा था उतना ही मज़ा सबकी चुदाई देखने में आ रहा था।  मन कर रहा था की रात और लम्बी हो जाए ताकि ये सामूहिक चुदाई  बड़ी देर तक चली रहे और आज ही मुझे सबके लण्ड अपनी बुर में पेलने का मौक़ा मिले।  मैं अब तक इतनी बेशर्म हो चुकी थी की मैं सबके लण्ड अपनी बुर में पेलना चाहती थी।  अब्बू का लण्ड , भाई जान का लण्ड , खालू जान का लण्ड, और भी जो लोग घर आएं उन सबके लण्ड का मज़ा लूटना चाहती थी।  मैंने सोंच लिया  चलो अगर आज नहीं तो कल से मैं एक एक करके सबके पेलूँगी अपनी चूत में।  अब मुझे कोई डर तो है नहीं कोई शर्म तो है नहीं।  अब तो मैं एक रंडी से भी ज्यादा बेशरम, बेहाया और छिनार हो चुकी हूँ।  मैं जवानी का पूरा पूरा मज़ा लूंगी।  बाकी दुनिया की माँ का भोसड़ा।

एक मजेदार बात आपको बता रही हूँ। आपको मालूम है की यहाँ मेरी खाला जान चुदवा रहीं हैं ।  खाला जान के बेटा भी चोद रहा है और खालू भी चोद रहा है।  यानी पूरी फॅमिली एक साथ चोदा चोदी कर रही है।  बस खाला जान की बहू नहीं हैं इस महफ़िल में।  यानी खाला के बेटे की बीवी नहीं है।  तो मैंने उससे पूंछ ही लिया यार ये बताओ की तेरी बीवी हमारे साथ क्यों नहीं है।  उसने बड़े जोश में आकर पहले तो मेरी चूत में २/३ धक्के कस कस के धक्के लगाए और फिर बोला वह बुर चोदी मेरे दोस्त से चुदवाने गयी है। मैंने कहा अच्छा तो यह बात है। तेरी बीवी किसी और से चुदवाती है और तू किसी और को चोदता है।  उसने कहा यार मैं अपने दोस्तों के साथ बीवियां अदल बदल कर चोदता हूँ।  कल मैंने उसकी बीवी चोदी थी तो आज वह मेरी बीवी चोद रहा है।  कल मेरी बीवी किसी और दोस्त से चुदवाने जाएगी और मैं किसी और दोस्त की बीवी चोदूंगा।  हम सब लोग इसी तरह मज़ा लेते है और हमारी बीवियां भी इसी तरह खूब मस्ती करतीं हैं और एन्जॉय करतीं हैं। हम लोग भी खुश और हमारी बीवियां भी खुश।
बात करते करते ही चुदाई के पार्टनर बदल गए। मेरी नज़र भाई जान के लण्ड पर टिक गयी , मुझे लण्ड बड़ा मस्त लग रहा था और तब मेरा दिल उस पर आ गया , मैंने हाथ बढ़ाया और उसका लण्ड पकड़ लिया। मैं मजे से लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी।  तब मेरी खाला के बेटे ने अपना लण्ड मेरी अम्मी जान को पकड़ा दिया। अम्मी ने लपक कर लण्ड ऐसे पकड़ा जैसे की वह खुद ही उससे चुदवाने के लिए बेताब थीं।  जो लण्ड अभी तक मेरी बुर चोद रहा था वही लण्ड अब मेरी माँ का भोसड़ा चोदेगा।  उधर अब्बू ने लण्ड खाला जान के भोसड़ा में पेल दिया। खाला जान भी बड़े मजे से चुदवाने लगीं।  उसके मन में था देखो मेरा भोसड़ा खुला है जिसका मन हो वो लण्ड पेल दे अपना और चोद ले मेरा भोसड़ा ।  मैं सबसे चुदवाने के लिए तैयार हूँ।  मेरी भाभी जान मेरे खालू की तरफ बढ़ीं और उसका लण्ड पहले तो अपने मुंह में पेला और मस्ती से चूसने लगीं।  पेल्हड़ भी चाटने लगी और फिर अपने टांगें फैलाकर लण्ड अपनी चूत में घुसा लिया।  उसे भी अपने खालू ससुर से चुदवाने में मज़ा आने लगा।  तो ये सब और इस तरह से चुदाई की मस्ती मुस्लिम समाज में भी संभव है. पूरा कमरा साला चुदाई की आवाज़ से गूंजे लगा और हम सबको ये आवाज़ बहुत ही पसंद है।
ये सामूहिक चुदाई करीब सुबह 3 बजे ख़तम हुई और तब हम सब सो गए।

दूसरे दिन मैंने अपनी खाला के बेटे से पूंछा यार ये बताओ क्या तुमने कभी अपनी माँ का भोसड़ा चोदा है  
वह बोला हां हां चोदा है। बिलकुल चोदा है।  
अच्छा तो कैसे चोदा और कब चोदा ?
उस दिन मैं सच्च्ची में अपनी फूफी की बेटी की बुर ले रहा था।  मैं भी चोदने में जितना मस्त था उतनी वह भी चुदवाने में मस्त थी।  तभी अचानक मेरी अम्मी जान कमरे आ गईं।  न मैंने उसे देखा और न उसने।  वह थोड़ी देर तक मेरी चुदाई देखतीं रहीं।  फिर अचानक उसने मेरा लण्ड पकड़ लिया।  मैंने देखा की ये तो मेरी अम्मी जान है तो लण्ड साला सिकुड़ गया। मैं भी थोड़ा सकपका गया और कहा सॉरी अम्मी जान।  वह बोली नहीं बेटा इसमें सॉरी की कोई बात नहीं है। ये तो मेरे लिए ख़ुशी की बात है।  आज मुझे मालूम हो गया की मेरा बेटा भी जवान हो गया है।  उसका लण्ड भी जवान हो गया है। तू भी मर्द बना गया है बेटा और तेरा लण्ड भी मर्द बन गया है. मैं तो कहती हूँ तुम अब जिसको चाहो उसको बेधड़क चोदो। बेटा जब मर्द बन जाता है तो और सारे मर्दों की तरह हो जाता है और हम औरतें उससे चुदवाने में कोई शर्म नहीं करतीं। ऐसा कह कर अम्मी ने मेरा लण्ड उसकी चूत में फिर घुसा दिया।  
पर तूने ऐसे में अपनी माँ तो नहीं चोदी न ?  
अरे यार सुनी तो । उसी रात को अम्मी ने मुझे सबके साथ चुदाई करने में शामिल कर लिया।  पहले मैं अपनी भाभी की बुर चोदने लगा और मेरे चचा जान मेरी अम्मी का भोसड़ा चोदने लगा।  कुछ देर बाद भाभी जान मेरा लण्ड पकड़ कर अम्मी के चूत में पेल दिया और चचा जान का लण्ड अपनी चूत  में पेल लिया।  मेरा भी लण्ड ताव पर था और अम्मी का भोसड़ा भी गरमागरम था तो मैंने भी घुसा दिया लण्ड। फिर मैं चोदने लगा उसे और वह भी बिना हिचक चुदवाने लगीं.
बहुत हरामजादे तो तुम भोसड़ी के ? ,,,,,,,,,,

एक दिन मैं अपनी सहेली माहिरा के घर चली गयी।  मैं उसकी अम्मी से मिली। मैंने उससे पूंछा आंटी जी माहिरा कहाँ हैं ?   वह बोली सच बताऊँ खुशबू, माहिरा तो मेरे बेटे से अपनी सहेली चुदवाने ऊपर कमरे में गयी है। मुझे थोड़ी हैरानी हुई तो मैंने खुल कर पूंछा आंटी जी आप सच कह रही है ? क्या ऐसा भी होता है ?  यानी आपका बेटा अपनी बहन के सामने किसी और लड़की को चोदेगा और यह बात आपको मालूम है ?   वह बोली हां तो क्या हुआ ? देखो खुशबू शायद तुम्हे अच्छी तरह हमारे समाज के बारे में मालूम नहीं है . हमारे यहाँ बड़ी नजदीकी रिश्तों में शादियां हो जातीं  हैं। आज का भाई जान कल  शौहर हो जाता है।  जो आज  मेरी बेटी है वह कल हमारी बहू बन जाती हैं।  हमारी कभी नन्द हो जाती है कभी मैं उसकी नन्द हो जाती हूँ वह मेरी भाभी हो जाती है।,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


इसलिए हमारे यहाँ चोदा चोदी का रिस्ता हमेशा बना ही रहता है।  वैसे भी हम लोग चुदाई में कोई पाबन्दी नहीं लगातीं।  कोई रोक टोक नहीं होती।  हां बस जबरदस्ती किसी के साथ नहीं होनी चाहिए।  यहाँ तो भाई अपनी बहन चोद लेता है तो कोई गुनाह नहीं है।  माँ अपने बेटे से चुदवा लेती है तो कोई गुनाह नहीं है। बेटी अपने बाप का लण्ड पकड़ लेती है तो कोई गुनाह नहीं है।  ये सब चलता है।  चुदाई में कोई रिस्ता न होता है और न माना जाता है। चुदाई तो बस लण्ड और चूत का खेल है बस ? अब देखो न  शादी होते भी रिश्ते भी बदल जातें हैं। कभी कभी तो बाप भी देवर बन जाता है।  ऐसे में भाभी तो अपने देवर से चुदवायेगी ही।  देवर अगर भाभी को नहीं चोदेग तो किसे चोदेगा ? चोदने की इस तरह की आज़ादी दूसरे समाज में यह नहीं होता।  अब माहिरा की सहेली दूसरे समाज की है। बिचारी भद्दर जवान है। अब उसे लण्ड न घर में मिल रहा है और न कहीं बाहर ?  तो मेरी बेटी ने कहा तुम मेरे घर  आ जाओ मैं तुम्हे अपने भाई जान से चुदवा देती हूँ। मैंने कहा तो मैं वहां जा सकती हूँ न आंटी जी ? वह बोली हां हां बिलकुल जा सकती हो मैं तो कहती हूँ की तुम भी मेरे बेटे से चुदवा लो।  बड़ा मज़ा आएगा तुझे।  मैं बस सीधे उसके कमरे में पहुँच गयी।

मैंने देखा की माहिरा एकदम नंगी बैठी हुई अपने भाई जान के लण्ड के पेल्हड़ सहला रही है।  वह लड़की उसके भाई जान का लण्ड मुंह में लेकर बड़ी मस्ती से चूस रही है और भाई जान उसकी लड़की की चूत सहला रहा है।  ये सब देख कर मैं भी उत्तेजित हो गयी।  मुझे देख कर माहिरा बोली अरे खुशबू तू भोसड़ी की कब आ गयी ?  वह बोली अच्छा लो इससे मिलो ये है पम्मी मेरी पक्की सहेली।  ये बिचारी बहुत चुदासी है।  आज मैं अपने भाई जान का लण्ड पेलना चाहती हूँ।  पर अब तू।   मैं चाहती हूँ की तू पम्मी की बुर में मेरे भाई जान का लण्ड पेल दे। उसके बाद पम्मी भी इसका लण्ड तेरी बुर में पेल देगी ? मैंने कहा अच्छा तू क्या बैठी बैठी अपनी झांटें गिनेगी मादर चोद,  माहिरा ?  वह बोली नहीं यार मैं तो अपने भाई जान से कई बार चुदवा चुकी हूँ और आगे भी  चुदवाती रहूंगी क्योंकि ये तो मेरे घर का लण्ड है जब चाहूंगी तब पेल लूंगी।  पर तुम्हारे लिए ये दूर की बात है तो तुम लोग आज इसके लण्ड का फायदा उठा लो।  वैसे मैं भी किसी दिन पम्मी के भाई लण्ड अपनी बुर में पेलूँगी और फिर उसे अपनी अम्मी के भोसड़ा में भी पेलूँगी।  उसे भी नये नये लण्ड का मज़ा लेना आता है। मेरी अम्मी बुर चोदी मुझसे ज्यादा चुदक्कड़ हैं।

मैं फिर पम्मी की चुदती हुई बुर देखने लगी। कुछ देर बाद सच में माहिरा ने लण्ड मेरी चूत में घुसाते हुए कहा लो खुशबू यार तुम भी मज़ा ले लो मेरे भाई जान के लण्ड का ।  मैं भी असल में चुदासी थी तो चुदवाने लगी।  वह हम दोनों की बुर लेने लगा।  कभी उसकी बुर में पेलता लण्ड कभी मेरी बुर में ? कभी मेरे मुंह में पेलता लण्ड कभी उसके मुंह में।  माहिरा वास्तव में अपनी भाईजान का लण्ड देखने में लगी थी की कैसे वह दो दो बुर चोद चोद कर गुर्रा रहा था।  मुझे उस दिन की चुदाई बड़ी मजेदार  लगी।
एक दिन मेरे मन में आया की चलो देखें की फूफी जान के घर में ये सब कैसा होता है ? अलग अलग चुदाई होती है की एक साथ ? कौन किसको चोदता है कौन किससे चुदवाती है।  किसको किसका लण्ड पसंद है और किसको किसकी बुर ? यह सब जानने के लिए मैं एक दिन सीधे फूफी जान के घर पहुँच गयी।  इत्तिफाक से फूफी जान घर पर नहीं थीं पर उसकी बेटी रफ़ा थी। उससे मुलाकात हुई तो वह बहुत खुश हुई और मैं भी।  तब उसने बताया की वह कल ही अपनी ससुराल से आयी है और यहाँ वह अपने ससुर असलम और नन्द रिया के साथ आयी है।  मैं उन दोनों से भी मिली तो बहुत अच्छा लगा।  मैं मदीन फूफा से तो पहले मिल ही चुकी थी। रफ़ा का तब तक जीजू  सलीम भी आ चुका था।  हां अफ़सोस इस बात का था न तो फूफी जान मिलीं और न ही रफा का शौहर ?
रात को मैंने देखा की यहाँ भी सब एक साथ ज़मीन पर ही सोते हैं।  तो मेरा भी बिस्तर वहीं लग गया। सबकी तरह मैं भी लेट गई। मेरे बगल में ही फूफी की बेटी रफ़ा लेटी हुई थी।

थोड़ी देर के बाद उसने अपना हाथ धीरे धीरे अपने ससुर की तरफ बढ़ाया।  मैं पहले तो समझ नहीं पाई लेकिन जब उसने अपने ससुर के पजामा का नाड़ा खोला तो मैं समझ गयी।  उसने  नाड़ा खोल कर हाथ अंदर घुसेड़ दिया।  मैं जान गई की रफ़ा बुर चोदी अपने ससुर का लण्ड पकड़े हुए हिला रही है।  तब वह मेरे कान में बोली हाय दईया बहुत बड़ा लण्ड है मेरे ससुर का खुशबू।  खुदा कसम आज तो मज़ा आ जायेगा। तू मेरे जीजू का लण्ड पकड़ ले खुशबू।  तुझे भी मज़ा आएगा। मैंने भी हाथ बढ़ाया और उसका लण्ड लुंगी से बाहर निकाल लिया।  उधर फूफा जान भी आगे बढ़ा और रफ़ा की नन्द को अपने बदन से चिपका लिया।  उसके कपड़े उतार कर उसे नंगी  करने  लगा।  वह एक मिनट में ही नंगी हो गयी।  उसने भी बेशर्मी से फूफा का लण्ड पकड़ा और हिलाना शुरू कर दिया।  फूफा का लण्ड साला बड़ा गज़ब का था।  मैं समझ गयी की आज रिया की बुर फट लाएगी।  मैंने रफ़ा के कान में कहा वह बोली मै अपनी नन्द की बुर फड़वाने ही आई हूँ। आज मेरा अब्बू मेरे सामने ही फाड़ेगा मेरी नन्द की बुर।   ये जब चली जाएगी तो इसकी माँ यानी मेरी सास आएगी मैं उसका भी भोसड़ा अपने अब्बू से फड़वाऊंगी। मैंने मन में कहा वाओ हमारे समाज में बहन चोद वाकई बहुत कुछ होता है और सब कुछ होता। है  यार तेरी नन्द की बुर आज फट जाएगी।

वह बोली मै अपनी नन्द की बुर फड़वाने ही आई हूँ। आज मेरा अब्बू मेरे सामने ही फाड़ेगा मेरी नन्द की बुर।  ये जब चली जाएगी तो इसकी माँ यानी मेरी सास आएगी मैं उसका भी भोसड़ा अपने अब्बू से फड़वाऊंगी।  मैंने मन में कहा वाओ हमारे समाज में बहन चोद वाकई बहुत कुछ होता है और सब कुछ होता है।  बस  थोड़ी ही देर में सब लोग एक एक करके नंगे होने लगे।  ५ मिनट में ही सबके बदन से कपड़े उतर गए और तब मैंने भी अपने कपड़े उतार दिया।  मैं भी  मादर चोद हो गई बिलकुल नंगी।  मेरे हाथ उसके जीजू का लण्ड हिनहिना रहा था।  मैंने उसे अपने मुंह में डाला और एक हाथ से पेल्हड़ थामे हुए लण्ड चूसने  लगी। रफ़ा तो मस्ती से अपने ससुर
का लण्ड आधे से अधिक लण्ड अपने मुंह में घुसेड़े हुए थी।  उसकी नन्द भी नंगी नंगी फूफा का लौड़ा अपने पूरे बदन पर घुमा रही थी. अपनी चूँचियों पर रगड़ रही थीं लण्ड ।  हम तीनो के हाथ में पराये मरद के लण्ड जितनी मस्ती कर रहे थे उतनी मस्ती हम लोग भी कर रहीं थीं। मुझे तो सबको लण्ड चूसते हुए और चाटते हुए  देखने में बड़ा अच्छा लग रहा था।  मुझे तो सबकी चूत सबकी चूँचियाँ सबकी  गांड और सबके लण्ड  देखने में ही मज़ा आ रहा था। तब एकदम  लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया  आहिस्ते आहिस्ते चोदने लगा  चुदवाने में  मज़ा आने लगा।  उधर रफ़ा भी मस्ती से अपने ससुर से चुदवाने लगी।  वह बोली हाय ससुर जी तेरा तो लण्ड बड़ा मोटा है बहन चोद ?  मेरी चूत में चारों  चिपक कर घुस रहा है।  बड़ा अच्छा लग रहा है मुझे।  बस इसी तरह चोदे जाओ।  उधर रफ़ा का अब्बू रफा की नन्द की बुर में लण्ड पेले हुए चोदने में जुट गया।   अब देखो न, बेटी अपने बाप के आगे किसी और से चुदवा रही है ।  बाप अपनी बेटी के सामने ही किसी और बुर ले रहा था।  ससुर अपनी बहू की बुर खुले आम चोद रहा है।

बहू भी बुर चोदी अपने ससुर से बड़ी बेशर्मी से  धकाधक चुदवा रही है। नन्द अपनी भाभी के आगे किसी और से चुदवा रही है और भाभी अपनी नन्द के आगे किसी और से चुदवा रही है।  मेरी बहन रफा मेरे आगे किसी और का लौड़ा पेले हुए है और मैं भी उसके आगे किसी और के लौड़े से चुदवा रही हूँ।  मैं अपने फूफा के आगे नंगी लेटी किसी का लण्ड चूस रही हूँ।  मैं भी किसी ससुर को अपनी बहू की बुर लेते हुए देख रही हूँ।  ये सब हमारे मुस्लिम समाज में ही संभव है कहीं और नहीं।  इतनी मस्ती और इतनी सामूहिक चुदाई का आनंद हमारे समाज में ही मिलेगा।

थोड़ी देर तक सबकी चुदाई इसी तरह होती रही। फिर अचानक पार्टनर बदल गए।  मेरा ससुर  उठा और अपना लण्ड मेरी नन्द की बुर में घुसेड़ दिया।  यानी एक बाप ने अपनी बेटी की बुर में लण्ड पेल दिया।  बेटी भी मस्ती से लण्ड पेलवाती हुए चुदवाने लगी।  उसे देख कर रफ़ा भी  तरफ बढ़ी और उसका लण्ड अपनी चूत में घुसेड़। लिया  वह भी अपने अब्बू से चुदवाने लगी।  यह देख कर मुझे तो बहुत मज़ा आया।  ये दोनों भोसड़ी वाले एक दूसरे के सामने अपनी बेटी चोदने लगे। अपनी बेटियां चोदने में भी  किसी को कोई शर्म नहीं थी और बेटियों को भी बाप से चुदवाने में भी कोई शर्म नहीं थी।  मैं तो जीजू से चुदवाने में ही मस्त थी। मैंने सोंचा की सच ही कहा  गया है की रात में सभी औरतें रंडी हो जातीं हैं।
न कोई बाप और न कोई बेटी ? न  कोई ससुर न कोई बहू ?  बस लण्ड ही लण्ड और चूत ही चूत ?  
कुछ देर बाद रफ़ा का ससुर मेरे ऊपर चढ़ बैठा और मुझे ही चोदने लगा।  उधर फूफा जान ने भी लण्ड  मेरे मुंह में पेल दिया। अब एक लण्ड मेरी बुर में और एक लण्ड मेरे मुंह में।  मैं दो दो लण्ड का मज़ा लेने लगी।  उधर रफ़ा का जीजू रफ़ा की बुर चोदने लगा और साथ साथ उसकी नन्द की बुर चाटने लगा।

Goa Me Punjabi ladki ki gand aur Choot ka Swad Chakha

गोवा में पंजाबी लड़की की गांड और चूत का स्वाद चखा

दोस्तों ये कहानी आज से कुछ डेढ़ साल पहले की हे. मैं कोलेज में था और मेरे ग्रुप में मेरे अलावा, अंजलि, बबिता, सोनिया, मिहिर, अनवर, टोनी और बाबु थे. सब को रहने दे क्यूंकि वो लोग इस हिंदी सेक्स कहानी में उतने इन्वोल्व नहीं हे. अंजलि के बारे में जान लें क्यूंकि वही इस पोर्न कहानी की मेन हिरोइन हे. अंजलि छाबरा साहब की बेटी हे. छाबरा साहब का यहाँ मुंबई में और मुंबई के पास के एरिया में मिनरल वोटर सप्लाय का बहुत बड़ा धंधा हे. अंजलि एक सेक्सी पंजाबी लड़की हे जो हॉट कपडे पहनती हे और हॉट बातें भी करती हे.
अंजलि को मैं उस दिन से पहले कभी ख़राब नियत या नजर से नहीं देखा था. पर उस दिन संजोग ऐसे हुए की मैंने उसे सब छेद में लंड डाल के चोदा. अगस्त का महिना था. गर्मी ठीक ठीक ही थी मुंबई में. हम लोग गोवा गए थे. मतलब की पूरा ग्रुप. शाम को हम लोग वहां पहुंचे. और होटल में चेक इन के बाद सीधे ही हम लोग कलंगुट बिच पर आ गए. वहां पर माहोल बड़ा सुहाना सा था. एक रंगीन शाम जिसे कहते हे वो सब माहोल था वहाँ का. शराब, शबाब और बोटी कबाब!



वही बिच के एक रेस्टोरेंट में हम लोगों ने डिनर किया. लड़कियों ने अपने लिए बियर तो हम लोगों ने हार्ड ड्रिंक ऑर्डर की. खाने में सी-फ़ूड बड़ा ही मस्त था. मैंने 2 ही पेग लिए क्यूंकि मैं नॉर्मली कम ही पीता हूँ. लेकिन बाकी सब ने अच्छा खासा ड्रिंक कर रखा था. खाने के बाद हम लोग वापस बिच पर आ गए. लड़कियों के ऊपर भी चिल्ड बियर का नशा था और लौंडे तो बिना पिए भी नशे में होते हे फिर वो तो अभी पिए हुए थे. मुझे भी आल्कोहोल के ओएच ग्रुप में दिल में ओये ओये करवा दिया था. अंजलि ने ब्लेक लूज टी और जींस पहनी हुई थी. उसकी चुंचियां बहार आने के लिए मरी जा रही थी जैसे. बाकी लडकिया भी टी में ही थी लेकीन अंजलि का टी सब से सेक्सी था.
अनवर और बाबु ने कहा चलो नहाते हे. और सब लोगों ने अपने अपने कपडे खोल दिए. मेरा ध्यान अंजलि पर था. उसने अन्दर ब्लेक ब्रा और निचे लम्बी वाली पेंटी पहनी थी. वो बिना शर्म के ब्रा पेंटी में खड़ी थी. बाकी सब लड़के भी अंडरवेर में आ गए. मैंने भी पेंट खोली और अंडरवेर में आ गया. अंजलि की गांड मेरी तरफ थी. वो अपने बदन के ऊपर लोशन लगा रही थी. और पीछे उसके कुल्हे इधर से उधर हो रहे थे. मेरा लंड खड़ा होने लगा. दोस्तों की नजर से बचने के लिए मैं दरिया में चला गया. और फिर सब लोग वन बाय वन आ गए. अंजलि के ऊपर ही मेरा ध्यान था. वो मुझे देख के मुस्काई, शायद उसे अब तक पता नहीं था की पहली बार उसे चोदने के लिए मेरा बाबुराव कडक हो गया था. सब लोग एक दुसरे के ऊपर पानी उड़ा रहे थे. मैंने भी अंजलि के ऊपर पानी डाला. वो भी मेरे ऊपर पानी डाल के बदला ले रही थी. ऐसा करते करते हम दोनों करीब आ गए. मैंने उसे पकड़ के निचे खिंचा. वो आआउच बोल पड़ी. लेकिन उतने में तो उसके बूब्स मेरी छाती से लग गए थे. मैंने उसे खींचे रखा और उसे मेरे लंड का गरम गरम टच भी हुआ तो होगा. वो छटपटा रही थी. हमारे सब तरफ बाकी के दोस्त भी मस्ती में ही थे. किसी ने कुछ नहीं देखा.


लेकिन मेरी आँखे अंजलि की आँखों में डूब सी गई. शायद वासना के उमड़े हुए सैलाब ने उसे अपना रंग दिखा दिया था. उसने छटपटाना छोड़ दिया. और उसने जैसे अपनेआप को समर्पित कर दिया. लेकिन यहाँ कुछ हो भी तो नहीं सकता था! मेरे लंड ने उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से ही टच किया था. पर मैं उसे चूसने और चाटने के अगिनित खवाब अभी से देखने लगा था. अंजलि के होंठो पर चुम्बन किया और उसने आँखे बंध कर ली. मैंने फट से चुम्बन तोड़ भी दिया क्यूंकि सब लोग देख भी सकते थे. अंजलिको मैंने छोड़ दिया. वो अपने बाल सीधे करते हुए मेरे चहरे और मेरे लौड़े दोनों को देख रही थी.
और फिर मुड़ते हुए उसने एक ऐसी स्माइल दी जिस से मुझे लगा की वो भी इंटरेस्टेड ही हे! मैं भी तौलिया पकड के अपने बदन को पूछने लगा. या यूँ कहिये की मैंने अपने कडक हुए लंड को छिपाने के लिए ही तौलिया ले लिया था. अंजलि बाल सुखा के मेरे पास आ गई. मैंने उसे कहा, सोरी इफ आई हर्ट यु!
अंजलि ने कहा, अरे बाबा इट्स ओके!
ये सुन के मेरी जान में जान आई. लेकिन मैं थोडा बहुत तो जानता ही था की उसके ऊपर भी चुदाई का नशा चढ़ा ही था. मैंने उसका हाथ पकड़ के कहा, यु नो आई लाइक यु?
वो मेरी तरफ देख के बोली, रियली?
मैंने कहा, याह.
अंजलि ने कहा, ये प्रोपोस था?
मैं हंस पड़ा और उसे कहा, यु नो मेरी एंगेज माँ पापा ने बहुत पहले ही कर दी हे. हमारे वहां रिवाज ने ब्लडी एवरीथिंग!
वो हंस पड़ी. और फिर मेरी आँखों में देख के बोली, यु नो इवन आई हेट ये सब. पर करना पड़ता हे मोम डेड के लिए, शायद मेरे लिए भी पापा पंजाब में कोई पगड़ी वाला सरदार ही देखेंगे. वो चाहते हे की हम खुश रहे इसलिए वो अरेंज्ड मेरेजिस में बिलीव करते हे.
मैंने देखा की मेरे बाकी के सब दोस्त अभी भी नहाने में ही थे.
बाबु ने बिच में कहा भी, कम ओं अंजली एंड रघु.
मैंने हाथ से उसे वेव किया और कहा, मैं यही ठीक हूँ!
अंजलि ने कहा, सो….!
वो आइस ब्रेक करना चाहती थी.
मैंने हिम्मत कर के कहा, केन वी कम क्लोज़?
अंजलि बोली, मतलब की?
मैंने उसे देखा और उसके हाथ को दबा के कहा, रोमांस.
वो कुछ नहीं बोली तो मैंने थोडा रु के कहा, सेक्स!
अब की उसने मेरी और देख के कहा, क्या ये सही होगा?
मैंने कहा, तुम राजी हो तो करेंगे अधरवाइस नहीं.
अंजलि कुछ बोली तो नहीं लेकिन मेरे हाथ को उसने अपने हाथ से दबा दिया. शायद वो उसके हाँ कहने की स्टाइल थी!
कुछ देर में सब नाहा के बहार आ गए. फिर अबाउट 20 मिनट तक सब ने अपने बदन को साफ़ किया. और फिर सब ने अपना अपना बेकपेक उठाया. हमलोग होटल की और चल पड़े.
लोबी में अंजलि को उसके कमरे में जाते हुए मैंने देखा! वो भी जैसे अन्दर जाने से पहले मुझे देख लेना चाहती थी.
अंदर जा के मेरे दोस्तों ने कुछ और शराब मंगवा ली. और मिनी फ्रिज का सामान भी निकाल के बैठ गए. मैंने कहा, गायस मेरे विलेज के दोस्त का शॉप यही कलंगुट में हे इफ यु डोंट माइंड यु केन केरी ओन. मैं उनकी शॉप पर ही उन्हें मिल लेता हु. दोस्त लोगों ने कहा, तू आज पिएगा नहीं?
मैंने कहा, मेरा मुड़ कम हे एसिडिटी की वजह से.
फिर मैंने अपने कपडे चेंज किये. और मैं बहार लोबी में आ गया. मैंने बहार से अंजली को टेक्स्ट किया की विल यु कम आउट विथ मी?
उसका रिप्लाय आया, कहा?
मैंने कहा, कही भी जहाँ हम दोनों अकेले हो!
वो बोली, वेइट.
मैंने कहा, मैं निचे पार्किंग के बहार खड़ा हूँ.
करीब 10-12 मिनट के बाद वो आई तो जींस और टी में थी. मैंने उसके हाथ को पकड़ के कहा, आई लव यु!
अंजलि ने जवाब नहीं दिया और सिर्फ हंस दिया.
मैंने कहा, शेल वी गो टू अनधर होटल?
वो अब भी कुछ नहीं बोली.
मैंने हम जहाँ रुके थे उस से १०० मीटर दूर एक होटल पर पूछा. उसने देखा की मैं लड़की के साथ हूँ तो एक्स्ट्रा ही पैसे बोले. मैं कच कच कर के चुदाई का मजा बिगाड़ना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने उसे कहा ओके.
2 मिनट के बाद हम दोनों कमरे में थे. अंजलि के कंधे को पकड़ के मैं उसे अन्दर ले आया. और दरवाजे को बंध करते ही मैंने उसे अपनी तरफ खिंच लिया. ग्रीन कमरे में डिम लाईट ओन थी उसके अन्दर अंजलि का सेक्सी गोरा बदन चमक सा रहा था. मैंने उसे अपनी तरफ खिंच के अपने होंठो से उसके होंठो पर किस दे दी वो भी मेरे से लिपट गई. और उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के स्लाईट ऊपर रख दिए.
वो मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी. मैंने अपने होंठो को उसके होंठो से हटा के उसकी क्लीवेज पर लगा दिया. वो जोर जोर से साँसे ले रही थी. और उसके फर्म बूब्स ऊपर निचे हो रहे थे. उसके बदन से लाईट लेडीज़ परफ्यूम की महक भी आ रही थी. मैंने अपने हाथ को ऊपर कर के उसके बूब्स दबा दिए. वो उछल सी गई.

और मैंने दुसरे हाथ से उसकी गांड को टच किया. जींस के अन्दर भी उसकी गांड एकदम सॉफ्ट लग रही थी. मैंने उसे अपने बदन पर दबा दिया और उसकी क्लीवेज के बिच की चमड़ी को चाटने लगा. मैं अपनी जबान को उसके बदन पर घुमा रहा था. और वो सिसकियाँ रही थी मदहोशी के साथ!
तभी मैंने महसूस किया की अंजलि ने अपना हाथ आगे ला के मेरे लंड वाली जगह पर रख दिया. वाऊ, वो मेरे लंड से खेलने लगी थी. मैंने उसे आराम से मजे देने के लिए अपनी जिप को खोला. लंड को उसने बहार नहीं निकला. और उसकी जगह उसने अपने हाथ को ही अन्दर पेंट और अंडरवेर में घुसेड दिया. वो पेंट के अंदर ही मेरे लंड को दबा रही थी. मैं भी कामुकता के सातवें सिखर पर था. मैंने अंजलि की टी को पेट के पास से पकड़ लिया. उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर दिए. मैंने टी उतार फेंकी. अंदर पिंक ब्रा थी जिसके स्ट्रिप्स लाईट ब्राउन थे और वो क्लियर प्लास्टिक के थे. मैं अपने हाथ को पीछे ले गया. वहां पर के हुक को मैंने खोला और उसकी ब्रा निचे गिर पड़ी. अंजलि ने अपने हाथ चूचो पर रख दिये. मैंने हाथो को अपने हाथ से दूर किया. क्या मस्त टाईट चुचिया थी इस पंजाबी लड़की की. मैंने उन्हें चूसने की लालच को छिपा नहीं सका और मेरे मुहं में पानी आ गया.
मैंने उसकी एक निपल को टच किया जबान से और दूसरी को दो उंगलियों में ले के एकदम प्यार से दबा दी. अंजलि सिसक उठी. मैंने अपनी पेंट की बटन खोली. और लंड को बहार निकाल दिया पेंट निचे गिरा के. अंडरवेर के होल से लंड अंजलि पहले ही बहार कर चुकी थी. मैंने अंडरवेर को भी उतार दिया.


अंजलि ने मेरे लंड को देखा और बोली, नाईस कोक!
मैंने हाथ से उसकी पजींस खोली और फिर पेंटी भी निकाल दी. उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे. हम लोग अभी भी दरवाजे पर ही थे. फिर मैंने उसे अपनी गोदी में उठाया और गद्दे में फेंका. मिनी फ्रिज से मैंने बर्फ का एक टुकड़ा निकाला. और अंजलि की टांगो को खोल के उसकी चूत पर रख दिया. वो मस्तियाँ उठी. मैंने बर्फ के टुकड़े को उसके पुसी होल, टमी, नावेल बटन सब पर घुमाया. और फिर मैं उसे चूसने लगा. अंजलि ने बर्फ मेरे हाथ से ले ली और मेरे सुपाडे पर लगा दी. मुझे ठंडा ठंडा लगा.
बर्फ का टुकड़ा बहुत सब घुल चूका था. अंजलि ने उसे मुहं खोल के खा लिया. फिर मैंने और उसने 69 पोजीशन बनाई. मैंने उसकी चूत पर अपनी जबान लगाईं और उसने मेरा लंड अपने मुहं में दबाया. कसम से उसकी चूत की खुसबू लंड को पागल कर देने वाली थी. मैंने चूत के दाने यानि की क्लाइटोरिस को ऐसे चाटा की अंजलि पागल कुतिया के जैसे सिसकियाँ उठी. कमरे में उसकी चुदास की चीखें गूँज रही थी. और वो भी बड़े सेक्सी ढंग से मेरा लोडा चूस रही थी! हम दोनों ने करीब 10 मिनट तक ओरल सेक्स का मजा दिया एक दुसरे को. और इतने समय में मैं एक बार और अंजलि 2 बार झड़ चुके थे. मैंने उसकी चूत का रस पिया और उसने मेरे स्पर्मस खा लिए.
फिर मैंने लंड उसके मुहं से निकाला. वो बोली कम ओन रघु, लेट्स फक नाऊ.
मैंने कहा, यस बेबी!
और अंजलि ने अपनी टाँगे फैला दी. मैंने अपने लंड के सुपाडे को उसकी चूत के होल पर लगा दिया. वो बड़ा चिकना था. एक ही झटके में लंड अन्दर डाला तो वो दर्द के मारे बौखला उठी, ऊऊऊउ अह्ह्ह्हह्ह ह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह माय गॉड, इट पेइन्न्न्नन्नस लाइक फक, अह्ह्ह्हह्ह निकालूऊऊऊऊऊ! मैंने उसे अपने गले से लगाया और उसके शोल्डर के ऊपर किस करते हुए कहा, इट इस फक डार्लिंग!
वो छटपटा रही थी. मैंने जरा भी जल्दबाजी नहीं की. लंड को अन्दर रहने दिया और मैं कभी उसके बूब्स मसलता था तो कभी उसे छोटे छोटे किस देता था.
2 मिनिट के बाद उसके अंदर चुदाई के होरमोंस का जोश आया और वो सामने से अपने बदन को हिलाने लगी. मैंने कहा, यु आर ओके नाऊ?
वो सिर्फ हूँऊऊउ बोली.


और मैंने धक्के लगाने चालू कर दिए. उसकी सेक्सी चिकनी चूत में मेरे लंड की पणजी एक्प्रेस चालु हो गई!!!
वो भी अपनी कमर को बड़े ही सेक्सी ढंग से हिला के मुझे चुदाई का पूरा सपोर्ट दे रही थी. और मैं भी उसके बदन को हाथ से सहलाते हुए उसे प्यार देते हुए चोद रहा था.
करीब 5 मिनिट की चुदाई में ही मेरे लंड का पानी उसके बुर में चूत गया. वो अपनी पुसी टाईट कर के बोली, आईपिल लेनी पड़ेंगी. मैंने कहाँ हां वापस जाते हुए ले लेंगे.

मैंने जब लंड अंजलि की चूत से निकाला तो वो लाल होगया था. और सुपाड़ा एकदम फुला हुआ था. अंजलि ने अपनी चूत को टिश्यु से साफ़ किया और वो थकान की वजह से पलंग पर ही लेट गई!!!

पंजाबी लड़की को बिहारी नोकर ने चोदा

पंजाबी लड़की को बिहारी नोकर ने चोदा

दोस्तों मैं एक Kamukta पंजाबी लड़की हूँ जो ट्रेडिशनल पंजाबी कल्चर में ही पैदा और बड़ा हुई. पहले पहले मैं छोटा थी तब बहुत ही सीधी सादी थी. लेकिन फिर बढती उम्र के साथ मेरे अंदर की सेक्स की क्युरीओसिटी ने मुझे परेशां कर दिया. मैंने कभी सेक्स किया तो नहीं था लेकिन मैं पोर्न वीडियो की साइट्स डेली देखने लगी थी. मेरी फिगर 34 32 36 हे.

यहाँ इस साईट पर सेक्स की कहानियां पढ़ के मेरे अंदर की हिम्मत और सेक्स की चाह और भी बढ़ने लगी थी. लेकिन सच में कहू तो इतनी हिम्मत नहीं हुई की ट्राय करूँ. फिर एक बार मैं अपने दादा जी के घर पर गई. वो लोग एक गाँव वाले एरिया में रहते हे. और शहर से बाहर उनका एक बड़ा डेरी फ़ार्म हे. मैं वहां कुछ दिन रहने के लिए गई थी. वहां उन्के डेरी फ़ार्म में कुछ बिहारी नोकर थे जो गायो की देखभाल का काम करते थे.

शाम को डेली वो दादा जी के घर के बहार बनी हुई टंकी में नहाने के लिए आता था. मैं अक्सर इन नोकर लोगों को वहां पर नहाते हुए देखने के लिए शाम को वही से निकलती थी. उन्के बड़े बड़े लंड तोवेल के पीछे छिपे होते थे. और मुझे देख के वो कडक होते हुए मैं देख सकती थी. वो लोग तोवेल निचे कर के अपनी पेंट पहनते थे और मैं सामने एक बेंच के ऊपर बैठ के सेक्स की कहानियाँ पढ़ती थी. कभी कभी तो मैं उतनी गरम हो जाती थी की मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चूत के ऊपर चला जाता था. मैं सोचती थी की इन बिहारियों में से किसी एक के साथ भी चुदने का मौका मिल जाए तो मजा आ जाए! और फिर मैंने मन ही मन एक प्लान सोच लिया.

दुसरे दिन शाम के करीब साड़े 6 बज रहे थे. वो लोग नहाने के लिए नहीं आये थे, मैं वही उनकी वेट में थी. मेरे दादा दादी आज किसी काम से बहार गए थे और वो लेट आनेवाले थे. मैंने स्कर्ट और शर्ट पहना हुआ था और निचे ब्रा पेंटी कुछ नहीं डाला था. मैं टंकी के इर्द गिर्द ही घूम रही थी. फिर वो बिहारी नोकर लोग आने लगे. वो लोग नाहा रहे थे और मैं वही घूम रही थी. जब लास्ट वाला नहाने के लिए गया तो मैं और करीब हुई. बाकी के अपने अपने कपडे पहन के वहां से निकल लिए थे.

वो लास्ट वाला लड़का ऊँचा और अच्छी बॉडी वाला था. वैसे सभी महनत मजदूरी करनेवाले थे इसलिए बॉडी तो सभी की मस्त थी. और मैंने मन ही मन सोच रही थी की इसका लंड कम से कम 7 इंच का तो होगा ही होगा. मैं उसके पास चली गई और उसे देखा. वो पूरा गिला था और उसका बदन तोवेल में लिपटा हुआ था. मैंने उसे देख के अपने शर्ट के पहले दो बटन खोले उसके सामने ही जिसकी वजह से मेरी आधी चूचियां बहार को दिखने लगी. उसका मुहं खुल गया और मेरे बूब्स को देख के उसके मुहं से लाळ टपकने लगी. मैंने अंदर हाथ डाल के अपनी चूचियां दबाई उसके सामने ही.

वो अभी कुछ समझता उसके पहले तो मैं उसके पास गई और उसके मजबूत बाहों को अपने हाथ से टच करने लगी. उसके मुहं से अहह निकल गई. शायद किसी लड़की ने उसे छुआ नहीं था पहले. मैंने अपनी एक चूची को बहार निकाली और अपनी कडक निपल से उसके बदन को टच किया. वो एकदम से सन्न रह गया था मेरा ऐसा बर्ताव देख के. मेन गेट बंद था और पुरे कम्पाउंड में एकदम अँधेरा था. मैंने उसे कहा, चूस ले इसको!!!


वो भी शायद आदेश की ही राह में था. उसने मेरे बूब्स को अपने हाथ में पकड़ के मसले और भूखे कुत्ते के जैसे वो मेरी निपल को चूसने लगा. साला ऐसे चूस रहा था जैसे उसमे से दूध निकाल के पी लेगा. वो एकदम उत्तेजित था और बड़े मजे से सक करने लगा था. वो जैसे पूरी चूची को अपने मुहं में भर लेना चाहता था. फिर मैंने अपने दो बटन और खोले उसके लिए. वो पागल हो गया मेरी दोनों बूब्स को देख के और दोनों को साथ में मिला के दबाने और चूसने लगा. वो बूब्स को इतनी जोत से चूस रहा था की मुझे दर्द सा हुआ. लेकिन मैं उस वक्त दर्द की जरा भी परवाह नहीं की. क्यूंकि जो मजा आ रहा था वो दर्द से काफी ज्यादा था.

मैंने अब अपने एक हाथ को अपनी पुसी के ऊपर और दुसरे को उसके लंड के ऊपर रख दिया. सच कहूँ तो ये सब अपनेआप ही हो रहा था, बिना कुछ सोचे मैं उसके लंड के साथ खेलने लगी थी. और वो मेरे दूध को जोर जोर से मसल के प्यार दे रहा था उन्हें.

फिर मैंने उसे अपनी तरफ खिंचा और उसका लंड सीधे ही मेरी पुसी के ऊपर टच हो गया. वाऊ क्या फिलिंग थी वो! शब्द ही नहीं हे उसे बयान करने के लिए! वो भी मुझे पागलो की तरह कंधे के ऊपर और छाती के ऊपर बूब्स के उपरी हिस्से में चूसने लगा था. उसकी मजबूत बाहों ने मुझे उसके बदन के ऊपर दबाया हुआ था. और उसका लंड सीधा मेरे चूत के दाने को सट सा गया था जैसे. मैं बेहाल थी और उसकी हो के रह गई थी. फिर वो अपने हाथ को निचे ले आया और उसने लंड को पकड़ के मेरी चूत के ऊपर घिसना चालू कर दिया. मेरी स्कर्ट ऊपर थी और मैंने पेंटी नहीं पहनी थी इसलिए मैं निचे नंगी ही थी.

वो घिसता गया और अपनी स्पीड को बढाता गया. मेरी मोअनिंग निकल रही थी और बढ़ने लगी थी. और फिर उसके मुहं से एक आह निकली और उसके लंड का ज्यूस निकल के मेरी चूत के ऊपर और जांघो के ऊपर बह गया. मैंने उसमे से थोडा अपनी ऊँगली के ऊपर ले के उसका सवाद चखा. वो सवाद में खारा था. मैंने उसे कहा, चूत चाटोगे मेरी?

वो बोला मेडम यहाँ नहीं, शाब मेमसाब आ गए या फिर कोई नहाने आ गया तो प्रॉब्लम होगी. फिर वो मुझे ले गया पीछे की साइड जहाँ पर गायों के लिए सूखी घास रखी गई थी. मैंने निचे घास के ऊपर ही लेट गई अपनी टाँगे खोल के और उसे ऊँगली से इशारा किया चूत की तरफ. उसने मेरी स्कर्ट को पूरी निकाल दी और वो निचे लेट गया मेरी लेग्स को झांघो से पकड़ के. उसने अपने होंठो को मेरे चूत के फांको पर लगा दिया. और ये बिहारी नोकर किसी इंग्लिश गोरे पोर्नस्टार के जैसे मेरी चूत को लिक करने लगा. मैंने टांगो को हवा में उठा दिया और मैं उसकी मस्त पुसी लिकिंग को एन्जॉय करने लगी.
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उसने मुझे अपनी तरफ खिंचा और अपनी जबान को चूत के होल में डाला. वो इतनी मस्ती से चूत को चाट रहा था जैसे मख्खन खा रहा हो. फिर उसने मेरी चूत के दाने को मुहं में ले के मुहं को बंद कर दिया. और जैसे अचार को खा रहा हो वैसे मेरी चूत के दाने को चाटने लगा. मेरी तो हालत खराब हो चुकी थी उसकी इस हरकत से. मैं जैसे हवा में उड़ने लगी थी बिना पंख के ही! फिर उसने अपने दांतों के निचे दबा दिया मेरी चूत के दाने को. वो जबान से चाट के दांतों को दाने के ऊपर घिसता था तो मुझे एकदम सेक्सी फिलिंग होती थी. मैं उसके मुहं के ऊपर ही झड़ गई और उसने मुझे छोड़ा ही नहीं और मेरी चूत से निकलती हुई एक एक बूंद को वो चाट गया.

उसने फिर और कुछ देर तक मेरी चूत के दाने को चाटा. फिर उसने मेरी चूत के ऊपर थूंक दिया और बोला, लगता हे मालिक आ गए.

मुझे भी ऐसा लगा क्यूंकि मेन गेट के लोहे की डोर की खुलने की आवाज आई थी. मुझे लगा की शायद मैं इतनी नजदीक आ के भी लंड से दूर ही रह जाउंगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वो बोला, जल्दी से डाल के पानी छुड़ा देता हूँ मेरा.

उसके ये कहने से मुझे बहुत ही अच्छा लगा. उसने अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रखा और बिना कुछ कहे ही अंदर डाल दिया. मेरी चूत का सिल उसके गरम लंड से खुल गया. मेरे मुहं से चीख निकलने को थी लेकिन उसने मेरे मुहं को कस के दबा दिया अपने हाथ से इसलिए आवाज अंदर ही दब गई.

वो बेदर्दी फकर था और गच गच चोदने लगा मेरी चूत को. उसका लंड पूरा अंदर घुस के बहार आता था और मेरी चूत से खून बहने लगा था. एक मिनिट तक तो मैं खूब रोई उसके लंड के धक्को की वजह से लेकिन फिर मुझे भी अच्छा लगने लगा था. मैं अब उसके लंड को एन्जॉय करने लगी थी.

उसने मुझे खूब चोदा और 3 4 मिनिट में ही उसका सब पानी मेरी चूत में छोड़ दिया उसने. फिर उसने मुझे छोड़ा और अपने कपडे पहनते हुए बोला, पहले मैं जाता हूँ फिर पांच मिनिट के बाद तुम निकलना.

और वो वहां से निकल गया. मैंने खड़े हो के अपना स्कर्ट पहना और शर्ट के बटन बंद किये. मैं खड़ी हुई लेकिन मेरे से चला भी नहीं जा रही थी. दादी ने आवाज दी तो मैंने कहा, आई.

दादी ने कहा कहाँ गई थी. मैंने कहा, पता नहीं अंदर मोबाइल का टावर नहीं आ रहा था तो बहार कम्पाउंड में ही घूम रही थी.

दादी बोली, बहार अकेले नहीं घूमते हे बेटा!

अब भला उन्हें कौन कहे की उनकी पोती घूम नहीं रही थी लेकिन पीछे घास में लेट के चुदवा रही थी!



सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद चोदे

सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद चोदे


हाय फ्रेंड्स, आप लोगो का Adult Sories में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली स्टोरीज पढने को बोलूंगी। मेरा नाम अवन्तिका है। आज फर्स्ट टाइम आप लोगो को अपनी कामुक स्टोरी सुना रही हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रही थी। अगर मेरे से कोई गलती हो तो माफ़ कर देना।


मै अभी अभी जवान हुई हूँ। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा अमेरिका में डॉक्टर हैं। मै बहुत ही गोरी हूँ। लड़के मुझे देखते ही फ़िदा हो जाते है। मेरा बदन बहुत ही रसीला है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब है। चूंचिया तो खरबूजे की तरह बड़ी बड़ी है। मेरी चूत भी बहुत लाजबाब है। इसका रस अभी तक बहुत कम ही लोगो को नसीब हुआ है। पूरा रस मैंने अपने होने वाले पति के लिए बचा कर रखा था। मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी। मेरे सैयां जी के साथ सुहागरात का अवसर मुझे मिलने वाला था। मैं बहुत ही खुश थी। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था।


दोस्तों ये बात 2013 की है। जो की आज के 4 साल पहले की है। मेरे घर वाले मेरी शादी ढूंढ रहे थे। मै भी हर लड़की की तरह ख्वाब को सजा कर रखा था। अपने होंने वाले सैयां जी के साथ। फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई। मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत था। उसकी पर्सनालिटी पर तो मै फोटो में ही देख कर फ़िदा हो चुकी थी। मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समा रही थी। उसका घराना भी बहुत ऊँचा था। उसके पापा और मेरे पापा दोनों ही लोग अमेरिका में रहते थे।


वही उनकी दोस्ती हुई और रिश्तेदारी में बदल गईं। अब मेरी चूत का रिश्ता रितेश के लंड से हो गया था। हमारी शादी बड़ी धूम धाम से हुई। सुबह मै उनके घर विदा होकर आ गईं। सासू माँ ने और अन्य मेहमानों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मै बहुत ही खुश थी। आज मैं चुदने वाली थी। मुझे आज जबरदस्त लंड मिलेगा। मै उसे खाने को बेकरार हो रही थी। फिर वो रात भी आ गयी। जिसका हर चूत को इंतजार होता है। जिस रात बीबी को लंड का दर्शन होता है। मै सज धज के अपने रूम में बैठी थी। मैं सुहागरात की सेज पर परियो सी सजी बैठी थी। अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी। रितेश आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे। बातो ही बातो में वो रोमांटिक होने लगे। लेकिन मुझे तो इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं। मगर मैं कैसे उनसे कहूँ की मुझे चुदने की बेचैनी हो रही है।


मैंने बहुत देर तक सोचा की क्या करूँ। अचानक मैंने एक आईडिया सोचा और धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपनी साडी का पल्लू नीचे खिसका कर सीने से हटा दिया। ऐसा करते ही रितेश मेरी तरफ आकर्षित होने लगे। मेरे सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर उनकी आँखे फटी की फटी रह गई। बिना पलक झपकाये मेरी चूंचियो को ताड़े जा रहे थे। उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठा कर अपनी गोद में घसीटा और मेरी होंठो से अपने होंठ को चिपका कर मेरी सारी लिपस्टिक छुड़ा डाली। मेरे होंठो के लिप लाइनर को चूस लिया। अब मेरी देसी लुक उनसे भी देखी नहीं जा रही थी। मै अपना होश खो बैठी थी। मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनके पूरे शरीर पर फिराने लगी। रितेश ने कब एक एक करके सारे कपड़े निकाल दिए मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब का मुझे नंगी कर दिया था।


मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक..’ से मेरे गांड में चोट सी महसूस हुई। मै चौंक गई। मैंने सकपका कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ बुरी निगाहों से देखा.. तो वो मुस्कुरा रहे थे, बोले- ” क्या करूं अवन्तिका आदत से मजबूर हूँ। मुझे तुम्हारी गांड बहुत ही जबरदस्त लगी तो मार दिया। मुझे सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता। मै क्या कर रहा हूँ। इस बात का मुझे पता ही नहीं चलता। मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा- कोई बात नही। मैं भी तुम्हारी तरह हूँ। मुझे भी कुछ होश नहीं रहता” मेरी गांड में कुछ लंबा मोटा सा महसूस हुआ। मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ। उनका लंड ही मेरी गांड में चुभ रहा था। मै उनकी गर्दन पर अपना हाथ टिका कर बैठी हुई थी।


मैं पूरी नंगी अपने पतिदेव रितेश की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लण्ड देखने की चाहत अभी बरक़रार थी। हम दोनों खूब सेक्सी सेक्सी बाते करने लगे। वो मेरी चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए मुझे गर्म कर रहे थे। मै“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी। मेरी पेट खींचते ही सिकुड़ जाती। मेरा दिल धक धक कर रहा था। साँसे तेज होने लगी।


मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- “अवन्तिका !! तुम मुझे एकदम देसी गाय की तरह लगती हो। एकदम मासूम सी चाहे जहाँ हाथ लगाओ। कोई विरोध नहीं करती” मैंने भी कहा- “और तुम मुझे देसी साँड़ के जैसे लग रहे हो। पीछे पड़े हो। हर पल मेरे गुप्तांगों को ही छू कर मजा ले रहे हो” रितेश हंस दिए। उन्होंने मुझे कस के जकड लिया। मुझे चिपकाते हुए फिर एक बार होंठो को चूसने लगे। इतना जोश तो मैंने पहले कभी किसी में नही देखा था। जोशीले होकर होंठो को ही काटने लगे। मै तड़पती हुई “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की मदमस्त आवाज निकाल रही थी। धीरे धीरे उनके होंठ मेरी शरीर के नीचे के अंगों की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरी चूचियों को पकड़ कर मींजने और सहलाने लगे। उन्होंने अपना मुह मेरी गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। रितेश बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर मेरा दूध पी रहे थे। कुछ देर तक पीने के बाद मुझे अपनी गोद से उतार कर बिस्तर पर ही खड़े होकर अपना कुरता उतारने लगे। फिर बनियान और पायजामा उतार कर बोले- “लो जी अब तुम्हारी बारी आ गई”
मैं उनके बड़े से मोटे लंड को देख कर डर गई। मेरा सर उनकी जाँघों के पास था। रितेश अपना लंड चूसने और सहला कर मुठ मारने को कह रहे थे।


मैं बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”
उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़ कर अपने लण्ड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया। बहुत ही जोश में दिख रहे थे। मेरे दिमाग में अजीब अजीब हलचल होने लगी। मैं भी मदहोश सी होने लगी। मैंने उनका अंडरवियर पकड़ कर नीचे किया तो मेरे होश उड़ गए। बाप रे इतना मोटा काला लण्ड करीब 5 इंच का था। खड़ा होता तो कितना बड़ा हो जाता यही सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था। मेरे शौहर और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है। मगर पता नहीं क्यूँ उनका लण्ड एकदम भुजंग काला था। मैं उनका लौड़ा देख कर हल्के से चिल्ला पड़ी- हे भगवान् ये क्या है? इतना बड़ा लंड तो किसी का जल्दी खड़ा होने पर भी नहीं होता। रितेश मन ही मन खुश हो रहे थे। वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगे। मैंने जोर लगाने की कोशिश की मगर वो ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लंड पर घुम रहे थे। कुछ ही देर मे मै विरोध करते करते थक गई थी। फिर मुझे पता नहीं क्यों वो काला साँप जैसा लंड बहुत ही मेरे मन को भाने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया। तभी रितेश ने मेरे बालो की चोटी को जोर से खींचा तो मेरी मुह से आह निकलते ही मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला वैसे ही उन्होंने अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया। मुझे उनका लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था। मुझे लगने लगा की उलटी हो जायेगी। मेरा पूरा मुँह उनके लंड से भर गया।


तभी रितेश के लण्ड ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। उसका साइज़ बढ़ने लगा। मेरी छोटी सी मुह में उनका बड़ा लंड बड़ा होकर मुझे तड़पाने लगा। मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा। मैं छटपटा रही थी। हाथ-पांव पटकने लगी। मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। वो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहे थे।अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लण्ड मेरे गले से होता हुआ सीने तक चला गया है। मेरी आँखों से आंसुओं नदी बह पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी। नाखून गड़ा रही थी। मगर उन पर कोई असर न हुआ। वो बेदर्दी मुझे दर्द देकर मार ही डालेगा। मेरा सांस लेना दुष्वार हो गया। वो मेरा सर दबाये हुए थे। मै कुछ बोल भी नहीं सकती थी। मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लण्ड निकालने के लिए बड़ी ही नम्रता वाली नजरों से देखा। मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। वो अचानक मुझे छोड़ दिया। बैठ कर उन्होंने मेरी गांड पर जमकर एक तमाचा मारा। मै उछल पड़ी। वो बोले- “क्यों कैसा लगा”


मै रो रही थीं। कहने लगे- “अब मानोगी न मेरी बात”
मैंने अपना सर हिला दिया। मैं बिस्तर पर धड़ाम से गिर पड़ी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी। इतने में पति बोले- “अब तू पूरी तरह से गाय लग रही है” वो मेरे दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर घुटने रख कर मेरे सीने पर बैठ गए। कहने लगे इसे अब चाट। जैसे तू गाय अपने बछड़े को चाटती है। चाट साली चाट…. अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था। तो उनका सांडो वाला लंड देख कर मेरी आँखें चौंधिया गईं। कही मै सपना तो नहीं देख रही। मैंने अपने आँखों को मलते हुए उनका लंड देखा। करीब 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लौकी जैसा लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था। मैं लण्ड देख के मेरी सिट्टी पिट्टी गुल थी। मेरे पति का लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लण्ड को देख कर हैरान थी। मेरे पति बोले- “चाट इसे जल्दी”


मैंने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया। वो बोले- “हाँ अब जाकर तू पूरी तरह से गाय बनी है” मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे। मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लंड मुक्के की तरह पड़ रहा था। लगभग पांच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठा कर गोद में बिठा लिया। अपने शेव किये चेहरे से मेरी चूंचियो पर मसाज करने लगे। कही कही की दाढ़ियां मेरी चूंचियो पर चुभ रही थी। उनका लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था। उन्होंने मेरी दोनों टांगो को खोलकर जोर का झटका मारा। मै उछल पड़ी। जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा मेरी चूत में जाकर फंस गया।

वो और भी धक्का मार मार कर मेरी चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। मै दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो मेरी चूत की फडाई में लगे हुए थे। मुझे लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके मेरी चूत में डाल दिया हो। मै भी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक उनका मोटा काला लंड मेरी चूत में हलचल मचाने लगा। वो मुझे किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। वो ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनकी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। मैं दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। मेरी गाड़ पर मार मार कर मुझे भी जोश दिला रहे थे। मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। मै उसे महसूस करने लगी।


अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा। मै भी अपनी चूत को उठा कर चुदवाने लगी। वो एंह…एंह करके मेरी चूत में अपना लंड हचक हचक कर पेल रहे थे। इतनी जोर की चुदाई ने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे उसका लंड अब अच्छा लगने लगा। मैं उस लंड को खाकर मन ही मन खुश होने लगी। उसने अपने बल का प्रयोग करके मुझे अपने गोद में उठाकर चोदने लगा। मै भी उसका गला पकड कर उछल उछल कर चुदवा रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ मार मार कर मुझे उछाल उछाल कर चोद रहे थे। कुछ देर बाद लंड की रगड़ मेरी चूत न सह सकी और अपना सफ़ेद मलाई निकाल दिया। मै झड़ गई। वो मेरी चूत को मलाई के साथ ही चोदने लगे। कुछ देर में उन्होंने मुझसे मेरी गांड चोदने को कहा। मै डर से हाँ करके बैठ गई। उन्होंने मुझे अपने खड़े लंड को गांड में डालकर उसपर ऊपर नीचे होने को कहा। मैं जैसा वो बोले करने लगी। उनका मोटा घोड़े जैसा काला लंड अपनी गांड में घुसाकर ऊपर नीचे होने लगी। जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ मैं अपनी गांड खुद ही चुदवा रही थी। मैंने भी स्पीड बढ़ाई लेकिन इस बार वो भी जबाब दे गए। उनका लंड माल निकालने वाला था।


सारा माल रितेश ने मेरी गांड में ही डाल दिया। मै थक गई थी। मै बिस्तर पर गिर पड़ी। वो हसते हुए मेरे ऊपर पैर रख कर चूंचियो को दबाने लगे। उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया। मै आज भी उस लंड से खूब खेलती हूँ। मेरी चूत का अब तक भोषणा बन चुका है।

सुहागरात में बीबी की सील तोड़ी

सुहागरात में टूटी बीबी की सील


हेल्लो दोस्तों मैं आप सभी का Adult Stories में बहुत बहुत स्वागत करता हूँ। मैं पिछले कई सालों से इसका नियमित पाठक रहा हूँ और ऐसी कोई रात नही जाती जब मैं इसकी रसीली चुदाई कहानियाँ नही पढ़ता हूँ। आज मैं आपको अपनी स्टोरी सूना रहा हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी सभी लोगों को जरुर पसंद आएगी। ये मेरी जिन्दगी की सच्ची घटना है।

मेरा नाम पुष्कर है। मैं मध्य प्रदेश में रहता हूँ। मेरा कद 5 फ़ीट 10 इंच है। मेरा लौड़ा भी 8 इंच का है। जो की मेरी तरहही गोरा गोरा है। मेरा लौड़ा बहुत ही तेजी से खड़ा होकर लड़कियों की चुदाई करता है। मैने अब तक कई भाभियों के साथ सेक्स करके उन्हें उसका आनन्द दिया है। भाभियों को चोदने में कुछ ज्यादा ही आता है। मैने अब तक भभियो जैसी चुदाई अपने गर्लफ्रेंड के साथ भी नहीं किया है। भाभियो को उनके घर पर चोदने में कोई डर ही नहीं रहता। गर्ल फ्रेंड को घर पर चोदने में कोई आ न जाये यही डर लगा रहता हैं। और दोस्तों जहां डर हो जाता है वहाँ सेक्स ठीक से नहीं हो पाता है। दोस्तों मैं अब अपनी कहानी पर आता हूँ।

दोस्तों मेरी शादी इसी साल हुई है। मेरी दुल्हनिया विदा होकर घर आई। मम्मी ने अपनी बहू का अच्छे ढंग से स्वागत किया। बारात 12 बजे तक वापस आ गई थी। पूरा दिन मैंने सोया था। रात भर का जगा था। मुझे घर पर आते ही नींद लग गयी। मै सो गया। शाम को मैं सो रहा था। तो सभी लोग आकर  मुझसे कहने लगे। सो लो बेटा आज रात फिर से जागनी पड़ेगा। सभी लोग ऐसा कहकर मजा ले रहे थे। इतना कह कर सब लोग हंस पड़े। मै तो सोच में पड़ गया आखिर बात क्या है भाई सब लोग कह कर हंस क्यों रहे है। मैंने भी कुछ नहीं बोला चुप चाप वही लेटा रहा।

रात को मैं उठा। बॉथरूम में जाकर नहाया। फ्रेश होकर मै सबके  साथ खाना खाने बैठा। सभी लोग मेरी तरफ देख देख कर हँस रहे थे। मै अकेला चुप चाप बैठा खाना खाकर उठ गया। मैंने अपने रूम में ना जाकर मम्मी के रूम में जाकर सोने लगा। मम्मी डांटने लगी। मै बाहर बरामदे में सोने लगा। मम्मी ने मुझे वहाँ से भगा मेरे रूम के बाहर दरवाजे के पास ले आई। मम्मी कहने लगी तुम्हारा अंदर कोई इन्तजार कर रहा है। और तुम यहाँ वहाँ सोते फिर रहे हो। मम्मी ने मुझे डांटकर अंदर कमरे में करके दरवाजा बन्द कर दिया। मै कुछ देर तक दरवाजा खट खटाया लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मुझे ये शादी मंजूर नहीं थी। लेकिन घरवालों के प्रेसर से मुझे ये शादी करनी पड़ी। मै और क्या कर सकता था। मैंने भी हाँ बोल के शादी कर ली।

तो मैंने भी कुछ नहीं कहा। मैंने अभी तक लड़की भी नहीं देखी थी। जयमाल के समय मैंने एक पल के लिए देखा था। लेकिन मैंने उसे गौर से नहीं देखा था। मैंने सोचा मेकअप में तो हर कोई अच्छा लगता है। शायद ये भी उसी तरह की हो। मेरी बीबी का नाम रूचि था। बिस्तर पर बैठी मेरा इंतज़ार कर रही थी। बिल्कुल फिल्मो की तरह। मैंने उसे न देखते हुए उसके बगल में जाकर लेट गया। मैंने अपना मुह घुमा लिया। रात के करीब 11 बजे थे। कुछ देर बाद रूचि मुझसे पूंछने लगी।

रुचि- “क्या बात है। आप मुझसे बोल क्यों नहीं रहे”
मैं- “चुप चाप लेट जाओ। मुझे कोई बात नहीं करनी”

रूचि- “मै अगर तुमको नहीं पसंद थी। तो शादी ही क्यों की मुझसे। तुम्हे ना बोल देना चाहिए था”
मै- “मुझे बोलने ही किसने दिया। किसी ने मेरी मर्जी भी नहीं पूँछी। मै क्या चाहता हूँ। बस यही बात बोल रहे थे सब। लड़की बहुत अच्छी है”
रुचि- “हाँ वो तो मै हूँ ही”

इतना कह कर रूचि भी मेरे बगल में लेट गयी। मै चुपचाप लेटा रहा। रूचि कुछ देर बाद सो गई। मैंने अपना मुँह उसकी तरफ किया। रुचि तो वास्तव में बहुत ही सुंदर लग रही थी। मैंने जैसा सोचा था वैसा कुछ भी नहीं था। रुचि का फेसकटिंग बहुत ही जबरदस्त थी। रूचि की नाक और उस पर पहनी नथ बहुत ही जबरदस्त लग रही थी। मैने उसको बहुत ही गौर से देखा। रूचि की चूंचियां ब्लाउज में उभरी उभरी लग रही थी। वो प्यारी और सुंदर दिख रही थी। मुझे रुचि को देख कर प्यार आने लगा। रूचि की चूंचियो को मैंने छूने के लिए अपना हाथ बढ़ाया। मैंने धीऱे से उसकी चूंची को दबाया। रूचि की चूंचिया बहुत ही सॉफ्ट थी। वो शादी के जोड़े में बहुत ही अच्छी लग रही थी। मै रूचि से चिपक कर करीब जाकर उसे देखने लगा। उसकी आँख कुछ देर बाद खुली तो मुझे खुद को देखते हुए बहुत ही खुश हो रही थी। मैं कुछ न बोल कर सिर्फ उसे देखता रहा। उसने मुझे देखता देख कर कहा- “क्या बात है अब बड़ा प्यार आ रहा है”

मै- “हाँ आ तो रहा है”

मैंने भी बात बनाई। मैंने कहा- “अब तो जिंदगी साथ गुजारनी है तुम्हारे साथ तो प्यार तो करना ही पडेगा। मैं इतना कह कर चुप चाप हो गया। रूचि भी मुझे देखने लगी। देखते ही देखते सुहागरात का माहौल बनने लगा। हम एक दूसरे की तरफ देखने लगे। मैं थोड़ा सा रूचि की तरफ खिसक कर चला गया। पूरा कमरा खूब अच्छे से सजाया गया था। बिस्तर पर गुलाब के फूल बिखरे पड़े थे। मुझे ये सब देख कर बहुत अच्छा लग रगा था। मुझे तो उसी पल प्यार हो गया जैसे ही मैंने उसे देखा था। मैंने रूचि को अपने सामने कर लिया और देखता रहा।

मैंने अपनी बीबी को बाहों में भर लिया। इससे पहले वो कुछ बोलती मैंने उसे सॉरी बोल दिया। रूचि का खुला मुह तुरंत बंद हो गया।
रुचि- “सच में आप मुझे प्यार करने लगे हो”

मै- “लेकिन मुझे नहीं पता था। मेरे घरवालों  मेरे लिए तेरी जैसी लड़की से मेरी शादी कर देंगे। मैंने तुम्हे पहले देखा होता तो शायद इतना कुछ हुआ ही ना होता” इतना कह कर मैंने उसे कस कर दबा लिया। उसने भी मुझे देख कर चिपक कर दबा लिया। उसका चिपकना बता रहा था उसने मुझे माफ़ कर दिया। मैंने अब तक उसे ना देखा  होता तो शायद उसकी पहली रात यानि सुहागरात का कोई आनंद न ले पाता। उसका चेहरा अपने सामने करके उसके होंठो को देखने लगा। क्या मस्त लग रही थी। मुझसे कंट्रोल नहीं हो पा रहा था। मै किस करने को बेचैन होने लगा। उसने अपनी आँखे बंद कर ली। उसकी आँखों का काजल बहुत ही अच्छा लग रहा था। उसके होंठ पर लगी लिप्स्टिक बहुत ही जबरदस्त लग रही थी।

मैंने उसके होंठो को देखा। लिप्स्टिक के साथ साथ रूचि के होंठो पर लगा लिप लाइनर बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने बिना कुछ सोचे समझे ही उसके होंठ पर अपना होंठ रख दिया। चूमने में बहुत ही अच्छा लग रहा था। चूमते ही उसके होंठ की कुछ लिप्स्टिक मेरे होंठ पर भी लग गई। मैं चूसने लगा। रूचि मेरा गला पकड़ कर अपने होंठो को चुसा रही थी। मैने  चूस चूस कर सारी लिपस्टिक छुडा दी। मैंने उसे अच्छे से किस करना सीखा दिया। किस करने से लग रहा था कि रूचि अभी तक इन सबसे अनजान थी। वो अपनी आँखे बंद करके मुझे किस कर रही थी। बहुत ही चुदासी होने लगी। रूचि की गर्म गर्म साँसे बहुत ही जोश दिला रही थीं। उसकी साँसों को महसूस करके मैंने रुचि की तरफ देखा। उसने शर्म के मारे अपनी आँखे झुका ली। मैंने उसकी आँखों में शर्म देखकर बहुत ही अच्छा लग रहा था। वो मुझे देखकर हँसने लगी.

मैंने रूचि से पूंछा क्यों हँस रही हो। वह मेरे होंठ पर लगी लिप्स्टिक को देखकर हँस रही थी। उसको हंसता देख कर लगरहा था कोई परी आ गई हो नीचे। उसकी हंसी बहुत ही किलर लग रही थी। उसकी चूंचियो की तरफ देखकर अपने हाथों से पकड़ लिया। वह अब भी शरमा रही थी। मैंने हाथों में लेकर खेलने लगा। उसके बूब्स बहुत ही मुलायम लग रहे थे।  उसकी चूंची को मैंने देखने के लिए ब्लाउज को निकाल दिया। उसकी ब्लाउज का हुक खोलते ही उसकी ब्रा दिखने लगीं। लाल रंग की ब्लाउज के नीचे लाल रंग का ब्रा बहुत ही रोमांचक लग रहा था। उसकी ब्लाउज को निकाल कर बिस्तर पर रख दिया। रूचि तो बहुत ही हॉट लगने लगी। उसके हॉट सेक्सी रूप को देख कर मेरा लौड़ा बेकाबू होता जा रहा था। उसकी चूंचियो को ब्रा ने कस कर दबा रखा था। उसकी चूंचियो को मैंने ब्रा से आजाद करने के लिए  अपना हाथ बढ़ाया। उसकी चूंचियो के ऊपर ब्रा की पट्टियां गोरे बदन पर बहुत ही अच्छी लग रही थी। मैंने उसकी ब्रा की पट्टियो पर हाथ चलाकर पीछे से रूचि की ब्रा का हुक खोलकर उसकी ब्रा को निकाल दिया। उसकी ब्रा को निकालते ही उसकी गोरी गोरी चूंचियां दिखने लगी। दोनों चूंचियां जैसे किसी गाडी के हेडलाइट लग रहे थे। गोरी चूंचियों पर काले कलर का निप्पल बहुत ही अच्छा लग रहा था। मैंने उसकी हेडलाइट को दबा दिया।

मैंने रूचि के निप्पल को अपने मुह में भर लिया। वह सुसुक सुसुक कर “आई….आई.. .आई….अहह्ह्ह्हह. ..सी सी सी सी…हा हा हा…” करने लगी। मै जब भी उसकी चूंचियो को पीता था वह सिसकने लगती। बहुत मजा आ रहा था। रूचि पिलाने में आनंद ले रही थी। काफी देर तक पीने के बाद मैंने उसकी साडी निकालने के लिए उसको खड़ा  कर दिया। वह खड़ी हो गई। मैंने उसकी साडी को निकाल दिया। उसको सिर्फ पेटीकोट में कर दिया। उसे पेटीकोट में देखना अच्छा नहीं लग रहा था। मैंने रूचि की पेटीकोट को भी निकाल दिया। वो अब अपने सारे गहने को निकालने लगी। तब तक मैं उसकी गांड़ को पैंटी के ऊपर से ही सहला रहा था। उसने बिस्तर के बगल टेबल पर अपने गहने रख दिये। मैंउसे चोदने को बेकरार होने लगा। उसकी हेडलाइट दबाने जे बाद मेरे अंदर करंट दौड़ने लगा।

मैंने भी अपना पैंट निकाला। मेरे पैंट को निकलते ही मेरा लौड़ा कच्छा फाड कर बाहर आने को तैयार था। वो मेरे लौड़े का क्रिया कलाप देख कर डर रही थी। उसको मैंने लौंडा दिखाने के लिए अपना कच्छा निकाला।  निकलते ही मेरा लौड़ा खड़ा होकर उसके सामने प्रस्तुत हो गया। उसने लौड़ा बहुत ही गौर से देखना शुरू किया। मैंने हाथों में पकड़ा दिया। उसने डरते हुये पकड़ लिया। मैंने उसका डर छुड़ाते हुए अपना हाथ उसकी हाथ पर रख कर अपना लौड़ा आगे पीछे करवाने लगा। उसका डर ख़त्म हुआ।

उसने मुठ मार मार कर मेरा लौड़ा बड़ा कर मोटा कर दिया। मैंने रुचि को लौड़ा चूसने को कहा। उसने चूसने से मना कर दिया। मैंने उसको बिस्तर पर लिटाकर उसकी पैंटी को निकाला। मैंने उसे अपने नाक में लगा कर सूंघा। उसकी पैंटी से बड़ी मादक खुशबू आ रही थी। उसकी चूत को देखने को मैं बेकरार था। उसकी दोनों टांगों को फैला दिया। टांगोंके बीच में छुपी चूत दिखने लगी। उसकी चूत पर बहुत गजब की चमक थी। देखते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो गया। उसने एक दो दिन में ही अपनी चूत के बालों को हटाया था। मुझे साफ़ चिकनी चूत को देख कर मुह में पानी आ जाता है। मैंने तुरंत ही उसकी चूत में अपना मुह लगा कर  चाटने लगा। मुझे चाटने में बहुत ही मजा आ रहा था। मैने उसकी चूत के दोनों टुकड़ो के बीच की दरार में अपनी जीभ नीचे से ऊपर करके चाटने लगा। मेरे ऐसा करने पर रूचि की चूत ने अपना गर्म गर्म ताजा माल निकाल दी। मैंने उसके चूत के रस का रसपान किया। बहुत ही मीठा स्वाद लग रहा था। मैंने साऱा माल चाट लिया। मै उसकी चूत के दाने को पकड़ कर खींच कर अपने दांतों से काट कर चूस रहा था।

रूचि मेरा सर पकड़ कर दबा देती और“ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्हआआआअह्हह्हह… अई…अई….अ… उ उ उ उ उ..” की आवाज निकाल रही थी। वह चुदवाने को तड़प रही थी। उसकी तड़प मुझसे देखी नहीं गई। मैंने अपना लौड़ा उसके चूत के छेद पर रख कर रगड़ने लगा। उसकी चूत गर्म होकर लाल हो गई। उसकी छेद में अपना लौड़ा डालने को मैं भी बेकरार होने लगा। रूचि की चूत में अपना लौड़ा घुसाने की कोशिश करने लगा। मेऱा लंड उसकी चूत में घुस ही नहीं रहा था। मैंने बहुत धक्का मारा लेकिन हर बार मेरा लंड बाहर आ जाता था। मैंने गुस्से में आकर खूब तेज धक्का मारा। मेरे लौडा टोपा सहित थोड़ा सा  अंदर घुस गया। रूचि जोर से“….मम्मी…मम्मी…सी सी सी सी…हा हाहा ….ऊऊऊ …ऊँ…ऊँ. .ऊँ…उनहूँ उनहूँ…”की चीख निकालने लगी। मैंने सोचा यही दर्द पर और दर्द दे दूं नहीं तो बाद में और चिल्लयेगी। मैंने अपना लौड़ा धक्का मार कर पूरा अंदर कर दिया।

उसके दर्द के कारण मैं धीऱे धीऱे चुदाई करने लगा। उसने चिल्ला चिल्ला कर पूरा कमरा भर दिया। हर तरफ बस उसी की आवाज गूँज रही थी। कुछ देर बाद उसे उसकी चूत के  दर्द से छुटकारा मिल रहा था। मैंने लौड़े पर कुछ गीला गीला लगा महसूस किया।  मैंने  उसकी चूत से लौड़ा निकाला। पूरा लाल लाल हो गया था। उसकी सील टूटने से निकला खून मेरे लौड़े को रंग दिया। सारा खून बिस्तर पर लगता उससे पहले मैंने पास में रखे पेपर को रूचि की चूत के नीचे लगा दिया। उसको मैंने बिस्तर से नीचे उतार कर टेबल के सहारे खड़ा किया। रूचि टेबल पकडे खड़ी थी। मैं उसके पीछे खड़ा हो गया, उसकी चूत में अपना लौड़ा डाल कर जोर जोर से चुदाई करने लगा। वह भी“ हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ …ऊँ… ऊँ… ऊँ  सी सी सी सी… हा हा हा… ओ हो हो…” की आवाज के साथ चुदवा रही थी।

मैंने उसको टेबल पर लिटा कर उसकी कमर को पकड़ कर जबरदस्त  चुदाई करने लगा। उसकी तेज चुदाई से मेरा लौड़ा जल्दी ही स्खलित होने वाला हो गया। मैंने अपना लौड़ा रूचि की चूत से बाहर निकाल कर उसकी चूत पर ही झड़ दिया। हमने एक दूसरे को साफ किया। दोनो लोग खूब थक गए थे। हम लोग नंगे ही लेटे रहे। मैंने कुछ देर बाद उठ कर एक बार फिर से चुदाई की। उसके बाद मैंने उसकी गांड़ मारी। हम दोनों रात भर खूब चुदाई करते हैं

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