Latest Post

adult stories in hindi Antarvasna Story baap beti ki chudai ki kahani bahan ki chudayi balatkar ki kahani behen ki chudayi bhabhi ki chudai bhai bahan ki chudai bhai bahan sex story in hindi bollywood actress ki chudai ki kahani bollywoos sex stories in hindi chacha bhatiji ki chudai ki kahani chachi ki chudai ki kahani chhoti bahan ki chudai chhoti ladkai ki chudai chudai ki kahaniya dehati chudai ki kahani devar bhabhi ki chudai ki kahani Didi ki Chudai Free Sex Kahani gand chudai gand chudai ki kahani gangbang ki kahani Ghode ke sath desi aurat ki sex story girlfriend ki chudai gujarati bhabhi habshi lund se chudai hindi sex stories Hindi Sex Stories Nonveg hindi urdu sex story jija saali sex jija sali ki chudai ki kahani Kahani kunwari choot chudai ki kahani Losing virginity sex story mama bhanji ki chudai ki kahani mama ki ladaki ki chudai marathi sex story mote lund se chudai ki kahani muslim ladaki ki chudai muslim ladki ki chuadi nana ne choda naukarani ki chudai New Hindi Sex Story | Free Sex Kahani Nonveg Kahani Nonveg Sex Story Padosi Ki Beti pahali chudai pakistani ladaki ki chudai Pakistani Sex Stories panjaban ladki ki chudai sali ki chudai samuhik chudai sasur bahu ki chudai sasur bahu ki sex story sasural sex story school girl ki chudai ki kahani seal tod chudai sex story in marathi suhagraat ki chudai urdu chudai ki kahani in urdu Virgin Chut wife ki chudai zabardasti chudai ki kahaniya एडल्ट स्टोरी कुंवारी चूत की chudai गर्लफ्रेंड की चुदाई गांड चुदाई की कहानियाँ जीजा साली सेक्स पहलवान से चुदाई बलात्कार की कहानी बाप बेटी की chudai की सेक्सी कहानी मामा भांजी चुदाई की कहानी ससुर बहु चुदाई सेक्स स्टोरी

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा, baap ne beti ko zabardusi choda

वो बोली : "यार, तेरे पापा को तो सारी तरकीबे आती है, इनसे चुद कर सच में बड़ा मजा आएगा ''.. दोनों सहेलियां फिर से अंदर देखने लगी, अपने-२ जहन में खुद को रश्मि कि जगह रखकर चुदते हुए. शायद चौथी बार था उनका , पर फिर भी समीर को देखकर लग नहीं रहा था कि वो थके हुए हैं , सटासट धक्के मारकर वो चुदाई कर रहे थे.


अचानक समीर ने अपना लंड बाहर खींच लिया, और उठकर रश्मि के चेहरे के पास आ गया, शायद इस बार वो उसके चेहरे पर अपना माल गिराकर संतुष्ट होना चाहता था.


एक दो झटके अपने हाथों से मारकर जैसे ही अंदर का माल बाहर आया, काव्या और रश्मि को लगा जैसे दुनिया रुक सी गयी है, स्लो मोशन में उन्हें समीर के लंड का सफ़ेद और मसालेदार दही रश्मि के चेहरे पर गिरता हुआ साफ़ नजर आया..


रश्मि के चेहरे को अपने पानी से धोने के बाद,बाकी के बचे हुए रस को समीर ने उसके मुम्मों पर गिरा दिया, और वहीँ बगल में लेटकर पस्त हो गया.


शायद ये उनका आखिरी राउंड था.


काव्या ने श्वेता को चलने के लिए कहा, पर जैसे ही श्वेता उठने लगी, उसके सर से खिड़की का शीशा टकरा गया और एक जोरदार आवाज के साथ वो शीशा टूट गया, दोनों सहेलियों कि फट कर हाथ में आ गयी.


दोनों जल्दी से उछलती हुई वापिस अपने कमरे कि तरफ भागी और दरवाजा बंद करके चुपचाप लेट गयी.


समीर ने जैसे ही वो आवाज सुनी वो नंगा ही भागता हुआ वह पहुंचा, जाते हुए उसने अपने ड्रावर में से पिस्टल निकाल ली थी.

baap ne beti ko zabardusti choda



वो चिल्लाया : "कौन है, कौन है वहाँ ……''


नंगी पड़ी हुई रश्मि ने अपने शरीर पर चादर लपेटी और वो भी डरती हुई सी बाहर कि तरफ आयी, जहाँ समीर खिड़की के टूटे हुए शीशे को देख रहा था.


रश्मि : "क्या हुआ, क्या टूटा है यहाँ ''...


समीर : "खिड़की का शीशा, जरूर कोई यहाँ छुपकर हमें देख रहा था ''


रश्मि के पूरे शरीर में करंट सा लगा, ये सोचते हुए कि उसकी रात भर कि चुदाई को कोई देख रहा था


रश्मि : "कौन, ऐसे कौन आएगा यहाँ ??"..


समीर ने काव्या के रूम कि तरफ देखा तो रश्मि बोली : "तुम क्या कहना चाहते हो, काव्या थी यहाँ, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, वो भला ऐसा क्यों करेगी, उसमे इतनी अक्ल तो है कि वो ऐसा नहीं करेगी ''..


समीर ने कुछ नहीं कहा, वो समझ चूका था कि काव्या के सिवा और कोई इतनी उचाई पर आ ही नहीं सकता था, नीचे से ऊपर आने के लिए कोई भी साधन नहीं था, सिर्फ बालकनी से टापकर ही वहाँ पहुंचा जा सकता था , पर वो ये सब बाते अभी करके रश्मि को नाराज नहीं करना चाहता था..


इसलिए वो अंदर आ गया और उसके बाद दोनों सो गए.


दूसरे कमरे में काव्या और श्वेता भी थोड़ी देर में निश्चिन्त होकर सो गए.


अगले दिन श्वेता जल्दी ही निकल गयी, शायद वो समीर कि शक़ वाली नजरों से बचना चाहती थी.


रश्मि सुबह चार बजे सोयी थी, इसलिए वो अभी तक सो रही थी, पर समीर को जल्दी उठने कि आदत थी, इसलिए वो अपने समय पर उठ गया था.


श्वेता को नौ बजे के आस पास जाता हुआ देखकर उसने मन ही मन कुछ निश्चय किया और काव्या के रूम कि तरफ चल दिया.


काव्या अपने बिस्तर पर लेटी ही थी कि समीर ने दरवाजा खड़काया , काव्या ने जम्हाई लेते हुए दरवाजा खोला, और सामने समीर को खड़ा देखकर उसकी आँखे एकदम से खुल गयी, उसके दिमाग में रात कि चुदाई कि पूरी तस्वीर चलने लगी फिर से और उसकी नजर अपने आप समीर के लंड कि तरफ चली गयी.


काव्या : "अरे अंकल .... मेरा मतलब पापा , आप .... इतनी सुबह ??".


समीर कुछ नहीं बोला और अंदर आ गया , उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था, वो चलते हुए बालकनी में पहुँच गया


काव्या कि तो हालत ही खराब हो गयी, वो वहाँ से अपने कमरे कि बालकनी कि तरफ देखने लगा, और फिर अंदर आकर काव्या के सामने खड़ा हो गया, वो समीर से नजरे नहीं मिला पा रही थी..


समीर : "तुम ही थी न रात को मेरी बालकनी में, तुम्ही देख रही थी न वो सब ....''


काव्या : "क …क़ …क़्यआ …… मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है ''.


वो इतना ही बोली थी कि समीर का एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके बांये गाल पर पड़ा और वो बिस्तर पर जा गिरी.


समीर चिल्लाया : "एक तो गलती करती हो और ऊपर से झूट बोलती हो …''


इतना कहते हुए वो आगे आया और बड़ी ही बेदर्दी से उसने काव्या के बाल पकडे और उसे खड़ा किया


काव्या दर्द से चिल्ला पड़ी , पर समीर पर उसका कोई असर नहीं हुआ , समीर का एक और थप्पड़ उसके कान के पास लगा और उसे कुछ देर के लिए सुनायी देना भी बंद हो गया.


आज तक उसे रश्मि ने भी नहीं मारा था, और ना ही कभी उसके खुद के बाप ने, और आज ये समीर उसे पहले ही दिन ऐसे पीट रहा था जैसे उसकी बरसों कि दुश्मनी हो.


वैसे समीर था ही ऐसा, उसका बीबी से तलाक सिर्फ इसी वजह से हुआ था कि दोनों में झगडे और बाद में मार पीट काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी, समीर ने तो अपनी बीबी को एक-दो बार अपनी पिस्टल से डराया भी था, और यही कारण था उनके तलाक का, घरेलु हिंसा .


पर समीर का ये चेहरा सिर्फ घर तक ही था, बाहर किसी को भी उसके ऐसे बर्ताव कि उम्मीद तक नहीं थी, सोसाईटी में और ऑफिस में तो उसे शांत स्वभाव का सुलझा हुआ इंसान समझा जाता था, पर गुस्सा कब उसके दिमाग पर हावी हो जाए, ये वो खुद नहीं जानता था ..


और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था.


उसके खुद के घर में , काव्या उसके बेडरूम के बाहर छुप कर उसकी चुदाई के नज़ारे देख रही थी, ऐसा सिर्फ उसे शक था, पर फिर भी उसने अपने गर्म दिमाग कि सुनते हुए जवान लड़की पर हाथ उठा दिया, ये भी नहीं सोचा कि उसकी एक दिन कि शादी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, रश्मि क्या कहेगी जब उसे पता चलेगा कि उसकी फूल सी नाजुक लड़की को ऐसे पीटा गया है..


और काव्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है, जिस समीर पापा कि चुदाई देखकर उसकी चूत में भी पानी भर गया था कल रात और वो उनसे चुदने के सपने देखने लगी थी ,वो उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, वो सब रात भर का प्यार नफरत में बदलता जा रहा था अब..


समीर ने एक और झापड़ उसे रसीद किया और फिर बोला : "सच बोल, तू ही थी न रात को वहाँ ''.


काव्या ने आग उगलती हुई आँखों से समीर को देखा और ना में सर हिला दिया..


समीर ने उसे धक्का दिया और उसका सर दिवार से जा लगा, और उसके माथे पर एक गोला सा बन गया , वो दर्द से बिलबिला उठी.


समीर उसके करीब आया और फिर से उसके बालों को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब आकर गुर्राया : "मेरी बात कान खोलकर सुन ले साहबजादी, ये मेरा घर है, और मेरी मर्जी के बिना यहाँ का पत्ता भी नहीं हिल सकता, फिर से ऐसी कोई भी हरकत न करना कि मैं तुझे और तेरी माँ को धक्के मारकर इस घर से निकाल दू , समझी , अगर यहाँ रहना है तो सीधी तरह से रह ''.


और फिर बाहर निकलते हुए वो पीछे मुड़ा और बोला : "ये बात हम दोनों के बीच रहे तो सही है, वरना अंजाम कि तुम खुद जिम्मेदार होगी ''.


ये सारा किस्सा रश्मि को न पता चले, इसकी धमकी देकर समीर बाहर निकल आया ...... अपने बिस्तर पर दर्द से बिलखती हुई काव्या को छोड़कर .


उसने उसी वक़्त श्वेता को फ़ोन करके रोते-२ सारी बात बतायी , उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि समीर ऐसा कुछ कर सकता है उसके साथ , श्वेता ने काव्या को अपने घर पर आने के लिए कहा.


वो नहा धोकर तैयार हो गयी, तब तक रश्मि भी उठ चुकी थी, और सबके लिए नाश्ता बनाकर टेबल पर इन्तजार कर रही थी, समीर और काव्या जब टेबल पर आकर बैठे तो दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखा तक नहीं.


रश्मि ने अपनी बेटी को उदास सा देखा तो उसके पास आयी और तभी उसके माथे पर उगे गुमड़ को देखकर चिंता भरी आवाज में बोली : "अरे मेरी बच्ची, ये क्या हुआ, ये चोट कैसे लगी ''.


काव्या ने नफरत भरी नजरों से समीर कि तरफ देखा, जो बड़े मजे से नाश्ता पाड़ने में लगा हुआ था, और फिर धीरे से बोली : "कुछ नहीं माँ, रात को बिस्तर से गिर गयी थी, ऐसे बेड पर सोने कि आदत नहीं है न, इसलिए ''.


समीर उसकी बात सुनकर कुटिल मुस्कान के साथ हंस दिया..


अपना नाश्ता करने के बाद काव्या अपनी माँ को बोलकर श्वेता के घर पहुँच गयी.


उसके कमरे में पहुंचकर उसने विस्तार से वो सब बातें बतायी जो आज सुबहउसके साथ हुई थी , जिसे सुनकर श्वेता का खून भी खोलने लगा


श्वेता : "साला, कमीना कहीं का , देख तो कितने वहशी तरीके से पीटा है तुझे, ''


उसने काव्या के माथे को छूकर देखा, वहाँ अभी तक दर्द हो रहा था


श्वेता : "यार, जिस तरह से तू समीर के बारे में बता रही है, मुझे तो लगता है कि ये कोई साईको है, अगर जल्द ही इसका कुछ नहीं किया गया तो शायद किसी दिन ये आंटी के साथ भी ऐसा कुछ ना कर दे ''

ये बात सुनते ही काव्या सिहर उठी, उसे अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार था और उसे वो ऐसे पिटते हुए नहीं देख सकती थी


काव्या : "नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी ....''


श्वेता : "वो ऐसी हरकत ना करे, ना ही तेरे साथ और ना ही आंटी के साथ, इसके लिए हमें कुछ करना होगा ''


दोनों ने एक दूसरे को देखते हुए सहमति से सर हिलाया, दोनों ने मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वो कभी समीर को ऐसा कुछ नहीं करने देंगी


उनके अंदाज को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो अपनी बात पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं

दोनों समीर से निपटने कि रणनीति तैयार करने लगी


श्वेता : "देख, अभी कुछ दिन के लिए तो तू बिलकुल चुपचाप रह , तेरा ये सौतेला बाप क्या करता है, कौन-२ उसके दोस्त है, किन बातों से खुश होता है, किनसे नाराज होता है, ये सब नोट करती रह, उसके बाद हम उसके हिसाब से आगे का प्लान बनाएंगे ''.


काव्या : ''पर इससे क्या होगा …??''.


श्वेता : "हमें बस ये सुनिश्चित करना है कि जो आज तेरे साथ हुआ है वो दोबारा न हो, और न ही कभी तेरी माँ के ऊपर ऐसी नौबत आये ''.


काव्या : "और जो उसने मेरे साथ किया है आज,उसका क्या ''


श्वेता : "उसका भी बदला लिया जाएगा , तू चिंता मत कर , तभी तो मैं कह रही हु, उसपर नजर रखने के लिए, हमें उनकी कमजोरी पकड़नी है, ताकि उसका फायदा उठाकर हम अपनी मर्जी से उन्हें अपने इशारों पर नचा सके ''


काव्या कि समझ में उसकी बात आ गयी ..


थोड़ी देर तक बैठने के बाद काव्या वहाँ से वापिस घर आ गयी.


उसने अब श्वेता कि बात मानते हुए समीर के ऊपर नजर रखनी शुरू कर दी ..


वो कोई भी बात कर रहा होता, उसे सुनने कि कोशिश करती, किन लोगो से मिलता है, कहा-२ जाता है, उन सब बातों का हिसाब रखना शुरू कर दिया उसने..


चुदाई के मामले में एक नंबर का हरामी था वो..


दिन में 2-3 बार सेक्स करता था, एक सुबह ऑफिस जाते हुए और फिर रात को सोने से पहले..


उसकी माँ कि मस्ती भरी चीखे पुरे घर में गूंजती थी, जिन्हे सुनकर वो भी गीली हो जाती थी.


समीर का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं था, ऑफिस और घर के बीच चक्कर काटना , बस यही काम था उसका..


बस एक ही फ्रेंड था, उसका वकील दोस्त, लोकेश दत्त.


जिसकी सलाह मानकर समीर ने रश्मि को प्रोपोस किया था..


दोनों दोस्त अक्सर शाम को बैठकर दारु पीया करते थे और अपने दिल कि बाते एक दूसरे से शेयर करते थे..लोकेश अपनी फेमिली के साथ पास ही रहता था उनके घर के ...


ये सब वो उसी बालकनी में बैठकर करते थे जहाँ छुपकर काव्या ने अपनी माँ को चुदते हुए देखा था.


पर पीने के बाद समीर ये भूल जाता कि शायद काव्या अपने कमरे के अंदर बैठकर वो सब बाते सुन रही है जो वो दोनों कर रहे होते हैं और वो दोनों अक्सर चुदाई कि बाते भी करते थे या फिर ऑफिस में आयी किसी नयी लड़की के बारे में या कोर्ट में आये केस में फंसी बेबस लड़कियो और उनकी कारस्तानियों के बारे में..


कुल मिलाकार उनकी हर चर्चा का केंद्र सेक्स ही होता था..


शादी के एक हफ्ते बाद दोनों दोस्त बालकनी में बैठकर बारिश और दारु का मजा ले रहे थे..


लोकेश : "यार आजकल कोर्ट में एक तलाक का केस आया हुआ है , मिया बीबी अपनी शादी के बीस साल बाद तलाक ले रहे हैं, मैं औरत कि तरफ से केस लड़ रहा हु, वो रोज आती है मेरे केबिन में, अपनी 19 साल कि लड़की के साथ,उसका नाम है रोज़ी..यार, क्या बताऊ, इतनी गर्म और लबाबदार जवानी मैंने कही नहीं देखि , उसमे बोबे देखकर मन करता है अपना मुंह उनके बीच डालकर अपनी सारी फीस वहीँ से वसूल लू … हा हा हा ''


समीर भी उसकी बात सुनकर बोला : "ये उम्र होती ही ऐसी है, कच्चे-२ अमरुद लगने जब शुरू होते हैं न जवान शरीर पर, उन्हें दबाने और मसलने का मजा ही कुछ और है ……''

वो आगे बोला : "वैसे मुझे उसके बारे में भी बात करनी थी, उनकी माली हालत ज्यादा ही खराब है, इसलिए रोज़ी कोई जॉब करना चाहती है, अगर तेरे ऑफिस में कोई स्टाफ कि जरुरत है तो देख ले। ।''


समीर (कुछ देर सोचकर) : "हाँ , चाहिए तो सही मुझे, अपनी पर्सनल असिस्टेंट , रश्मि से शादी करने के बाद वो जगह अब खाली हो गयी है, तू उसे मेरे ऑफिस भेज देना, मैं देख लूंगा ''


लोकेश : "देखा, सिर्फ उसके बारे में सुनकर ही तू उसे जॉब देने के लिए तैयार हो गया, है तो तू पूरा ठरकी , हा हा "

और फिर अपना गिलास एक ही बार में खाली करते हुए समीर बोला : "एक तेरे क्लाईंट कि बेटी है, जिसके मस्त शरीर कि बाते सुनकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया है, और एक मेरी बीबी कि बेटी है, साली ऐसी मनहूस है कि उसे देखकर खड़ा हुआ लंड भी बैठ जाए ''


काव्या छुपकर वो सब बातें सुन रही थी, ये पहली बार था जब समीर और लोकेश उसके बारे में बाते कर रहे थे


लोकेश : "यार, ऐसा भी कुछ नहीं है, मुझे तो उसका मासूम सा चेहरा बड़ा ही सेक्सी लगता है ''


उसने अपने लंड के ऊपर अपना हाथ फेरते हुए कहा


दोनों पर शराब पूरी तरह से चढ़ चुकी थी


कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे

कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे


मैं लखनऊ की रहने वाली हूं। मैंने अपनी पढ़ाई लखनऊ से ही पूरी की थी। मैं यहां अपने मम्मी पापा के साथ रहती थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद मुझे तुरंत ही पुणे से जॉब का ऑफर आ गया था। मैं पुणे जाना चाहती थी। लेकिन मेरे घर वालों को मेरी बहुत चिंता सता रही थी। कि मैं वहां अकेले कैसे रह पाऊंगी। पर मैंने अपने घरवालों को समझाया और कुछ दिन बाद मैं पुणे चली गई। वहां मैं अकेली रहती थी। मेरा ऑफिस मेरे फ्लैट से ज्यादा दूर नहीं था। मैं अकेली जाती और अकेली ही आती थी। फिर ऑफिस में मेरे कुछ नए दोस्त बने।


एक दिन मैं ऑफिस से घर जा रही थी तभी अचानक विवेक मुझे मिला। मैं उसे देख कर बहुत खुश हुई।  हम दोनों स्कूल से लेकर कॉलेज तक दोनों साथ ही पढ़ते थे। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त था। एक दिन वह पुणे आया पर उसे रहने की अच्छी जगह नहीं मिल रही थी तो मैंने उसे तब तक अपने ही साथ रहने को कहा। जैसे ही उसे नौकरी मिलती वह अपने लिए दूसरा फ्लैट देख लेता। लेकिन तब तक वह मेरे साथ मेरे फ्लैट में रहता था। यह बात मैंने अपने घरवालों को नहीं बताई थी। हम दोनों पहले से ही एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। तो मुझे उसके यहां रहने से कोई दिक्कत नहीं थी।


मैं सुबह अपने ऑफिस जाती और शाम को घर आती तब तक विवेक घर पर ही रहता। कभी वह जॉब की इंटरव्यू के लिए जाता इधर उधर भटकता फिरता रहता था। हम दोनों साथ में ही रहने लगे थे। कुछ दिन बाद उसे भी अच्छी जॉब मिल गई। हम दोनों साथ में ही घर से निकलते और साथ ही घर वापस आते हैं। हम दोनों मिलकर घर का काम करते थे। साथ रहते रहते हमें एक दूसरे की आदत हो गई थी। अब हम एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। जब भी हमें समय मिलता हम दोनों आपस में घूमने जाया करते दोनों समय बिताते।


एक दिन विवेक ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा तुम्हें मुझे देखकर कुछ लगता नहीं है क्या मैंने उसे कहा लगना क्या है इसमें। हम दोनों एक साथ रहते हैं इसमें कुछ समस्या वाली बात नहीं है। तो वह कहने लगा मेरी और भी जरूरत है क्या तुम पूरी करोगी। मैंने कहा ऐसी कौन सी जरूरत है तुम्हारी जो मैं पूरी नहीं कर पा रही हूं। मैं उसके मन में क्या है वह तो समझ चुकी थी। पर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा फिर मैं नहाने चली गई। वह बाहर मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं नहा कर आई मैंने टॉवल अपने शरीर को लपेटा हुआ था। मेरे गीले बाल थे। उसने मुझे ऐसे ही अपनी बाहों में समा लिया और कहने लगा। अब तो तुम मेरी जरूरतों को समझ लो। उसके यह कहते ही मेरा टावल नीचे गिर गया। मेरी पैंटी ब्रा उसने देख ली।


मैं उसके सामने ऐसी खड़ी रही मुझे पहले अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। उसने कहा  कोई बात नहीं और यह कहते हुए उसने मुझे अपने गले लगा लिया। अब उसने मेरी लाल पैंटी में हाथ डाला और मेरी योनि को दबाने लगा। मैंने आज ही अपने चूत से बाल साफ किए थे। तो वह एकदम  चिकनी हो रखी थी। जिसको देखकर वह कहने लगा। तुम्हारे तो एक भी बाल नहीं है। यह सुनकर में हंस पडी। हंसते-हंसते उसने मेरी चूत इतनी जोर से दबा दिया कि मेरे मुंह से आवाज निकल पड़ी। और मैं उसे कहने लगी। इतनी जोर से क्यों दबा रहे हो आराम से भी तो कर सकते हो। अब यह कहते हुए मैंने उसे  गले लगा लिया।


मैंने उसके होठों को अपने होठों से मिलाते हुए किस करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे मैं किस करती जाती। वह मेरी तरफ आता जाता मैंने उसको बहुत तेजी से किस करना शुरू किया। वह मुझसे कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से किस करते हो। मेरे से भी नहीं रहा जा रहा था। मैंने जैसे ही उसकी पेंट  मैं हाथ लगाया तो उसका लंड खड़ा हो रखा था। यह देख कर मैं थोड़ा हिचकिचाने लगी। पर मैंने उसकी जीप खोल कर उसके लंड को बाहर निकाल लिया और उसको अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लिया। वह कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से कर रही हो थोड़ा और अंदर लो। मैंने भी उसको लंड को पूरे अपने गले मे ले लिया।


जैसे-जैसे मैं अंदर बाहर करती जाती उसको मजा आता। वह कहता बहुत अच्छे से कर रही हो तुम अब उसके बाद उसने मुझे खड़ा किया और मेरी ब्रा को खोलते हुए। मेरे स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगा। पहले वह धीरे धीरे दबा रहा था। किंतु अब उसने काफी तेज दबाना शुरु कर दिया। अब अपने मुंह में भी मेरे स्तनों को ले लिया और उसे चूसने लगा। धीरे-धीरे वह मेरे चूचो को चूसता तो मुझे गुदगुदी सी होती और मुझे अच्छा महसूस होने लगता। अब उसने मेरे चूचो को पूरे अपने मुंह में समा लिया था और उसको अच्छे से चूसने लगा था।


यह देखकर  मुझे अच्छा लग रहा था और अंदर से अच्छी फीलिंग आ रही थी। उसने मेरे निप्पल पर दांत भी काट दिए थे। जिससे मुझे सेक्स की मांग मेरी बढ़ गई थी। मैंने अपनी योनि में उंगली लगा कर उसे रगड़ना शुरू कर दिया।  जैसे-जैसे मेरा सेक्स की भूख बढ़ती जाती वैसे ही मुझे और अच्छा लगता जाता। वह मेरे स्तनों का  अच्छे से रसपान कर रहा था। उसके बाद उसने मुझे जमीन पर ही लेटा दिया और मेरी पैंटी उतार दी। जैसे ही उसने मेरी पैंटी उतारी उसके बाद उसने अपने मुंह में मेरी योनि को लेते हुए। मेरी योनि के ऊपरी हिस्से को दबा लिया। अब उसने मुझे उल्टा कर कर मेरी गांड को भी चाटने लगा वह मेरे दोनों तरफ चाटता कभी आगे कभी पीछे मुझे इससे अच्छा लगने लगा था। अब उसने धीरे से मुझे उठाकर थोड़ा सा किनारे पर कर दिया।


अब वह मेरे ऊपर लेट गया और जैसे ही वह मेरे ऊपर लेटा तो उसने अपने लंड को मेरी योनि में धीरे धीरे डालना शुरू किया। क्योंकि मेरी योनि गीली हो चुकी थी इस वजह से उसे डालने में कोई परेशानी नहीं हुई। वह पूरा अंदर तक चला गया मानो ऐसा लगा जैसे दीवार में उसने सटा दिया हो  उसने अपनी स्पीड पकड़ी और काफी तेज तेज करने लगा मेरे स्तन और तेज हिलने लगे। वह इतनी तेज हिल रहे थे जैसे मानो भूकंप के झटके आ रहे हो। उसने 10 मिनट तक किया उसके बाद मेरी योनि इतनी गरम हो गई कि वो बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका वीर्य पतन हो गया। जैसे ही उसका वीर्य गिरा। वह कहने लगा तुम वाकई में बहुत अच्छी हो। उसके बाद उसने दोबारा से थोड़ी देर बाद मेरे साथ सेक्स किया।


इस बार उसने मुझे इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे तो गले तक ही आ गया उसका लंड वह बड़ी तेजी से कर रहा था मानो जैसे कोई ट्रेन छूटने वाली हो लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर में उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और उठाते उठाते ही वह मुझे चोदने लगा। अब मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे मेरी इच्छा पूर्ति हो गई हो। उसने धीरे से मुझे कहा मेरा गिरने वाला है। उसके बाद उसने मुझे लिटा दिया और मेरे पेट पर ही सारा वीर्य गिरा दिया। जिससे कि मेरा पुरा पेट गीला हो गया। उसके बाद मैंने कपड़े से साफ किया और अब हम दोनों रोज रात को ऐसा करने लगे।


हमने कुछ समय बाद शादी का फैसला कर लिया। हम पहले से ही जानते थे तो हमें एक दूसरे के बारे में जानने की जरूरत नहीं पड़ी। विवेक बहुत अच्छा लड़का था। अब हम ने शादी करने का फैसला किया मैंने यह बात अपने घरवालों को बताई तो उन्होंने इनकार कर दिया। और कहां पहले हम विवेक से मिलना चाहते हैं। उसके बाद हम फैसला करेंगे। एक दो महीने बाद जब मैं घर गई तो मैंने अपने मम्मी पापा को विवेक के बारे में बताया और उसे अपने घर वालों से मिलाया। मेरे पापा को विवेक बहुत अच्छा लगा। लेकिन मेरे मम्मी अभी भी दुविधा में थी क्योंकि विवेक का इस दुनिया में कोई नहीं था।


बचपन से उसके पिताजी ने उस को पाला और उसको पढ़ाया-लिखाया पर कुछ समय बाद उनका भी देहांत हो गया। अब वह बिल्कुल अकेला रह गया था। मैं और विवेक एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। मैने जैसे तैसे करके अपनी मां को शादी के लिए मनाया। मेरी मां विवेक से शादी कराने के लिए इसलिए तैयार नहीं थी। क्योंकि मेरी मां ने मेरे लिए कहीं और रिश्ता तय कर रखा था। लेकिन यह बात मुझे पता नहीं थी। मेरी मां ने यह बात मेरे पापा से की लेकिन मेरे पापा तो मेरे फैसले से खुश थे। लेकिन मां को मेरी बहुत चिंता थी।

स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली

स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


Old And Young Hindi Chudai Ki Kahani स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली  हैल्लो दोस्तों मेरा नाम देविका है और में 18 साल की जवान और बहुत ही गरम स्कूल गर्ल हूँ. मेरा बदन बहुत सुंदर है और इसकी वजह से में कुछ लोगों के लिए अच्छी हूँ. मेरी लम्बाई भी कुछ ज़्यादा नहीं है में 5.2 लम्बाई की हूँ, किन्तु मेरा शरीर भरा हुआ है और मेरी छाती भी अच्छी है. मेरी टट्टी से भरी चूतड़ के छेद को ढके हुए मेरे कूल्हे भी बहुत मोटे मोटे है मेरे कुल्हे थोड़े बाहर निकले हुए है जिसकी वजह से हर कोई लड़का मेरी तरफ आकर्षित हो जाता है पर मुझसे खुलकर बात करने से डरता है.

दोस्तों वैसे तो आम तौर पर सुहागन महिलाये और लड़कियाँ अपनी चुदाई की चुदाई की कहानिया कहानी हिंदी में बताते हुए शरमाती है किन्तु अपनी आपबीती सुनाने में उझे कोई शरम वाली बात नहीं लगती है ? दोस्तों आज जो चुदाई की कहानियां वेबसाइट हिंदी में में आप सभी को सुनाने जा रही हूँ वो घटना आज से करीब चार पांच महीने पहले की है जब में विद्यालय में पढ़ा करती थी और में जवानी की आग में बहक गई थी और हमारे विद्यालय के एक वृद्ध चपरासी से अपनी अनचुदी फुद्दी चुदवा बैठी थी. उस 60 साल के वृद्ध चपरासी का लौड़ा बहुत लम्बा और मोटा था और मेरी अनचुदी फुद्दी का छेद बहुत छोटा था उसने मेरी अनचुदी फुद्दी चोदते चोदते फाड़ डाली थी और मेरी फटी हुई फुद्दी से बहुत सारा ब्लड भी निकला था.

Old And Young Hindi Chudai Ki Kahani स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


मेरी बहुत सारी विद्यालय फ्रेंड थी और करीब करीब उस सभी के यार थे एक बस मेरा ही कोई यार नहीं था और मेरी बो सभी फ्रेंड्स आये दिन कभी रूम पर तो कभी होटल पर उनसे अपनी फुद्दी चुदवाने जाया करती थी. मेरी फ्रेंड्स को देख देख कर मेरी भी फुद्दी में खुजली मचती थी और मेरा भी बहुत दिल करता था की काश मेरा भी कोई यार हो. मेरी फुद्दी में खुजली होने के चलते में भी लड़को को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया करती थी पर में यार बनाने में कामयाब नहीं हो पा रही थी में दिखने में भी गदराई थी और मेरा फिगर भी कमाल का था पर में एक भी लड़का सेट नहीं कर पा रही थी.

मैंने यार बनाने की चाहत में सभी प्रयास कर लिये थे और अब में भी इस बात से परेशान आ गई थी की भला इतनी हॉट और गदराई होते हुए भी कोई लड़का मुझसे खुलकर सेक्स के बारे में बात नहीं करता, क्योंकि आख़िर में भी तो एक लड़की ही थी और मेरे सर पर तो बस किसी लड़के को अपना यार बनाकर उसके लौड़े से पानी फुद्दी ठुकवाने का भूत सवार. हमारे विद्यालय के एक चपरासी की हवस से भरी गन्दी नजर मुझ पर थी, क्योंकि उसे तो बस सेक्स करने के लिए एक खिलोना चाहिए था. उसकी उम्र करीब 42 साल थी और वो बिहार का रहने वाला था, किन्तु उसका शरीर बहुत गठीला था और वो थोड़ा मोटा भी था.

दोस्तों मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि वो मेरी इन सब हरकतो पर गौर किया करता है और उसे पता था कि मेरे भीतर जवानी उफान मार रही है और अब मुझसे बिना चुदे रहा नहीं जा रहा और इसी बात का उस 60 साल के डोकरे चपरासी ने फायदा उठाया. एक दिन जब में विद्यालय से छुट्टी के वक़्त निकली तो उस चपरासी ने मुझसे कहा कि उसे मुझसे कुछ बात करनी है और में उसकी वो बात सुनने के लिए रुक गई, उस वक्त वहाँ पर कोई भी नहीं था और उसने मुझसे कहा कि उसे पता है कि में सच्चे प्यार की तलाश कर रही हूँ. उस 60 वर्ष के वृद्ध चपरासी के मुहं से यह बात सुनकर में एकदम से हैरान हो गई, किन्तु में उससे इसके आगे क्या कहती.

फिर वो आगे कहा कि एक लड़का मुझे बहुत पसंद करता है बेटी और वो मुझसे मिलना चाहता है. दोस्तों मेरी तो जैसे प्रसनी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और मुझे लगा कि मुझे अब सब कुछ मिल गया, किन्तु मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि यह चपरासी मुझे चोदना चाहता है और मेरी प्रसनी देखकर वो समझ गया कि में उसके शिकंजे में फंस गई हूँ.  स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली फिर उसने मुझसे कहा कि वो लड़का मुझसे मिलना चाहता है, मैंने पूछा कि कब? तो उसने कहा कि जब तुम्हे ठीक लगे. इसके बाद मैंने कहा कि में शाम को कोचिंग के लिए घर से बाहर जाती हूँ और आज में तुम्हारे पास आ जाउंगी, तब तुम मुझे उससे मिलवा देना.

उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि ठीक है और फिर में वहाँ से चली गई और उसी शाम को अपने घर से कोचिंग के लिए निकल गई और अब विद्यालय में चपरासी के घर पर उसके पास चली गई. फिर उसने मुझे अपने कमरे में बुला लिया उस वक्त वहां पर कोई भी नहीं था और वैसे वो मैरिड था, किन्तु उसकी वाइफ और बच्चे बिहार में ही रहते थे और इस कारण से उसका कमरा बिल्कुल खाली था, बस वहां पर एक खटिया और कुछ कपड़े और चड्डी बनियान पड़े थे. तभी उसने मुझे बैठने को कहा और में ठीक उसके सामने अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ टेक कर बैठ गई.


उस 60 साल के वृद्ध चपरासी की हवस से भरी गन्दी नजरे मेरे गदराई और हॉट बदन को खा जाने वाली थी और वो किसी भूखे कुत्ते के तरह मुझे लगातार घूर रहा था. इसके बाद मैंने उससे पूछा कि वो लड़का कहा ँ है? तो उसने कहा कि वो मुझे आज एक सच बताना चाहता है और फिर उसने कहा कि कोई लड़का नहीं है, किन्तु वो खुद ही मुझे बहुत पसंद किया करता है. दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी साँसे एकदम से रुक गई मुझे और थोड़ा सा भी समझ में नहीं आ रहा था कि में अब क्या करूं और में बिल्कुल चुप रही. वो मेरे पास आया और मुझसे कहने लगा कि तुम थोड़ा सा भी टेंशन मत करो और किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा और तुम भी मेरे साथ बहुत प्रसन रहोगी. तभी मैंने उससे गुस्से में आकर साफ मना कर दिया और फिर में उठकर वहां से जाने लगी.

फिर उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि अगर तुम्हे किसी ने यहाँ से इस तरह जाते हुए देख लिया तो तुम बहुत बदनाम हो जाओगी, तभी उसकी बात को सोचकर में वहीं पर रुक गई और बहुत डर गई और मैंने उससे कहा कि अब में क्या करूं? उसने कहा कि अगर तुम मेरा साथ दो तो में तुम्हे चुपके से यहाँ से निकाल दूँगा और इसके बाद मैंने उससे कहा कि ठीक है, किन्तु इसके लिए मुझे क्या करना होगा? तो वो कहा कि में तुम्हारे साथ शादी करना चाहता हूँ और अपनी जोरू बनाना चाहता हूँ और तुम्हारे साथ वो सब करना चाहता हूँ जो सभी लोग अपनी जोरू के साथ करते है. दोस्तों मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि सभी लोगों का कुछ करने का क्या मतलब है? तो मैंने उससे बिना सोचे समझे कहा कि ठीक है, किन्तु प्लीज मुझे यहाँ से बाहर निकालो.

फिर वो वृद्ध चपरासी लड़खड़ाते हुए मेरे पास आया और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया में कुछ बोलती उससे पहले ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया और अब मेरा मुँह बंद हो गया और वो मेरे मोटे मोटे ब्रेस्ट को मसलने लगा. मैंने उससे छूटने की बहुत नाकाम प्रयास की, किन्तु वो बहुत मजबूत था. फिर उसने मुझे छोड़ा और कहने लगा कि तुम्हे भी बहुत आनंद आएगा एक दफे मेरे लण्ड से अपनी फुद्दी चुदाई करवा कर तो देखो. फिर उसकी बातें सुनकर अब मेरा भी दिल उसके साथ सेक्स करने का कर रहा था और मैंने भी उसे एक किस किया और मुझे ऐसा करना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा.

फिर उस डोकरे चपरासी ने मुझसे कहा कि अभी और भी बहुत सारे काम करने बाकी है, तुम अब जल्दी से अपने कपड़े उतार दो और उसने भी अब अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और जब मैंने पहली बार उसका लण्ड देखा तो में डर गई और उसे आहिस्ता आहिस्ता खड़ा और अपना आकार बदलते हुए देखकर में बहुत हैरान रह गई, किन्तु वो अभी भी पूरी तरह खड़ा भी नहीं हुआ था, किन्तु फिर भी 6 इंच का था और मैंने उससे कहा कि क्यों तुम्हारा लण्ड इतना बड़ा है? और यह तो अभी पूरी तरह से खड़ा भी नहीं हुआ है. तभी उस डोकरे चपरासी ने मुझसे कहा कि बेटी ये पूरा खड़ा होकर 9 इंच लम्बा और करीब पांच इंच मोटा हो जायगा फिर वो मुझसे कहा की बेटी अब इस पप्पू को खड़ा तो तुम्हे ही करना पड़ेगा, मैंने पूछा कि बाबा वो कैसे? तो उसने कहा कि इसे अपने मुँह में लेकर चुसो. तभी मैंने कहा कि में कभी भी ऐसा नहीं करूँगी.

उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि बेटी अब कोई फायदा नहीं है जो तेरी मर्ज़ी पड़े कर ले, किन्तु तेरी बदनामी हो जाएगी. अब में बहुत डर गई थी और मुझे अब अच्छा भी लग रहा था और फिर उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरा कामुक बदन देखकर वो तो पागल हो गया और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया. फिर उसने मुझसे कहा कि अगर में उसका पूरा पूरा साथ दूँगी तो सब कुछ एकदम ठीक रहेगा. फिर उसने अपना काला मोटा लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया, किन्तु अब मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था और मुझे भी आहिस्ता आहिस्ता ऐसा करने में आनंद आ रहा था और में उसके पेनिस को धीरे से मुहं में लेकर चूसने लगी और अपनी जबान से लोलीपोप की तरह चाटने लगी.

मेरी विद्यालय के उस डोकरे चपरासी का लौड़ा वाकई बहुत तगड़ा था वो मेरे मुँह में पूरी तरह से आ ही नहीं रहा था और मुझे अपना पूरा मुहं जबरदस्ती खोलना पड़ रहा था. अब वो कुछ देर बाद और भी बड़ा हो गया, किन्तु उस चपरासी ने ज़बरदस्ती मेरे मुँह में अपना पूरा का पूरा लण्ड घुसा दिया, किन्तु तभी उसने देखा कि मेरे मुँह में उसका लण्ड नहीं आ रहा है, जिसकी वजह से मेरी सांसे रुकने लगी थी और मेरी आंख से आंसू बाहर आने लगे थे. फिर उसने कुछ ही देर बाद मुझसे कहा कि चलो तुम अब रहने दे. फिर उसने मुझे बिस्तर पर जाने को कहा और में वहाँ पर चली गई.

फिर वो डोकर चपरासी लडखडाता हुआ गया और जाकर सरसों का तेल ले आया और उसने थोड़ा सा तेल मेरी अनचुदी फुद्दी पर लगाया और बहुत अच्छी तरह से मेरी फुद्दी की मालिश करने लगा और फिर उसने अपनी एक उंगली को फुद्दी में भीतर डाल दिया जिसकी वजह से तेल मेरी फुद्दी के भीतर चला गया और मुझे ऐसा लगा कि कोई गरम गरम चीज़ मेरी फुद्दी के भीतर चली गई हो, मुझे थोड़ा सा दर्द भी हुआ, किन्तु अब कुछ समय बाद मुझे उसके ऐसा करने से बहुत आनंद आने लगा. फिर उसने अपनी दूसरी उंगली और फिर उसने अपनी तीसरी उंगली को भी मेरी अनचुदी फुद्दी के छेद के भीतर घुसा दिया.


मुझे उसकी वजह से दर्द तो बहुत हुआ, किन्तु कुछ देर बाद में वो दर्द आनंद बन गया था और उसने अभी तक मेरी सील नहीं तोड़ी थी, शायद वो उसे अपने लण्ड के साथ ही तोड़ना चाहता था. फिर उसने मेरा सारा बदन अपनी जबान से चाट चाटकर साफ कर दिया और अब उसने मेरे दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लण्ड का टोपा मेरी फुद्दी पर लगा दिया. मैंने उससे कहा कि यह भीतर नहीं जाएगा तो वो कहा कि चला जाएगा.

इसके बाद मैंने उससे कहा कि अगर मुझे कुछ हो गया तो? वो कहा कि तुम टेंशन मत करो तुम्हे कुछ नहीं होगा, आज तुम्हार पहला सेक्स है इस लिये थोडा दर्द ज्यादा होगा बेटी तुम बस थोड़ा धीरज रखो और अब में बिल्कुल चुप हो गई. फिर उसने अपना काला मोटा लौड़ा भीतर डालना प्रारम्भ करा. अभी उस साले चोदू के तंदरुस्त और फौलादी लण्ड का केवल टोपा ही थोड़ा भीतर गया था कि मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा में ज़ोर ज़ोर से चीखने, चिल्लाने लगी सीईईईई अह्ह्ह्हह आईईईईइ प्लीज बाहर निकालो इसे उह्ह्ह्हह्ह मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है.

फिर उसने मेरा मुँह अपने लिप्स को उन पर रखकर बिल्कुल बंद कर दिया और कुछ समय बाद मुझे थोड़ा सा आराम मिला, मैंने सोच कि शायद अब लण्ड भीतर चला गया है और अब आनंद आएगा? किन्तु जब मैंने अपना सर उठाकर नीचे की तरफ देखा तो में चौंक गई, क्योंकि अभी तक तो उसका पूरा लण्ड बाहर ही था तो मैंने उससे बहुत चकित होते हुए पूछा कि यह कब भीतर जाएगा? तो उसने एक और धक्का मारा और दो इंच लण्ड भीतर चला गया और अब मैंने महसूस किया कि मेरी फुद्दी की सील फट गई है और में दर्द के मारे बेहोश हो गई थी.

में उस दर्द से छटपटाने लगी थी और जब मुझे होश आया तो मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा कि उसका लण्ड अब तक पूरा भीतर चला गया था और वो बहुत मस्ती से मेरे निप्पल को चूस रहा था. मैंने उससे दर्द से करहाते हुए कहा कि प्लीज अब इसे मेरी फुद्दी से बाहर निकाल लो वरना में इसके दर्द से मर ही जाउंगी. फिर वो कहने लगा कि मेरी रानी आज अगर मैंने इसे अधूरे में बाहर निकाल लिया तो फिर कभी ऐसा मज़ा नहीं ले पाएगी और अगर आज ले लिया तो पूरी जिन्दगी बहुत मज़े करेगी, बस थोड़ा सा दर्द और होगा. इसके बाद मैंने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली और उसने फिर से अपने लण्ड का मेरी फुद्दी पर ज़ोर से दबाव बनाना शुरू कर दिया और अब आहिस्ता आहिस्ता उसका लण्ड सरकता हुआ भीतर जा रहा था.

इसके बाद मैंने महसूस किया कि कुछ ही सेकिंड में उसका लण्ड फिसलता हुआ करीब दो इंच और भीतर चला गया और अब उसका आधा लण्ड मेरी फुद्दी के भीतर था और में तो दर्द के मारे तड़प रही थी. इसके बाद मैंने उससे कहा कि में तो आपकी बेटी जैसी हूँ अह्ह्ह्हह्ह प्लीज अब इसे बाहर उह्ह्ह्ह निकाल लो छोड़ दो मुझे. फिर उसने कहा कि अब तो तू मेरी वाइफ जैसी है और मेरे होने वाले बच्चे की माँ भी बनेगी और यह बात कहकर वो मुझे किस करने लगा और आहिस्ता आहिस्ता अपनी कमर हिलाने लगा. वो मेरे दर्द की वजह से बहुत आहिस्ता आहिस्ता झटके मार रहा था.


इसके बाद मैंने उससे कहा कि प्लीज मुझे अब छोड़ दो वरना में मर जाउंगी. उसने कहा कि तुम्हे कुछ नहीं होगा तुम बस थोड़ा इंतजार रखो और फिर उसने मुझे बिस्तर से उठाया, किन्तु मेरी फुद्दी से पेनिस को बाहर नहीं निकाला और वो खुद बिस्तर पर लेट गया. अब में उसके ऊपर आ गई थी और उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी कमर को हिलाने लगा. दोस्तों मुझे अब दर्द के साथ साथ आनंद भी आ रहा था वो ऐसा लगातार करता रहा और कुछ देर बाद मैंने अपना पानी छोड़ दिया, किन्तु वो अभी तक मेरी फुद्दी में अपना काला मोटा लौड़ा हिला रहा था. फिर उसने मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से जकड़ा और एक ज़ोर काशॉट मारा तो मुझे लगा कि जैसे उसका लण्ड अब मेरे गले तक पहुंच गया और में फिर से बैहोश हो गई.

फिर कुछ समय बाद बाद जब मुझे होश आया तो मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा कि वो मुझे चूम रहा था और मेरे ब्रेस्ट को दबा रहा था, किन्तु अब भी मुझे फुद्दी में बहुत तेज दर्द हो रहा था और मेरी फुद्दी से ब्लड भी बहुत निकल रहा था, किन्तु में अब प्रसन भी थी कि मैंने अपनी दोस्तों में सबसे बड़ा लण्ड लिया है फिर चाहे वो किसी भी मर्द का था और जो उम्र में मेरे बाप के बराबर ही क्यों ना हो और अब मुझे भी उससे प्यार हो गया था और मुझे लगा कि सच में ही यह मेरा पति है. फिर उसने आहिस्ता आहिस्ता अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वो थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालता और फिर धीरे से भीतर डाल देता अब मुझे ज़्यादा तकलीफ़ नहीं हो रही थी और आनंद भी बहुत आ रहा था.

स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


फिर जब उस रांड बाज वृद्ध चपरासी को लगा कि में उसके लम्बे मोटे पेनिस को सहन कर रही हूँ तो वो अपने पुरे लौड़े को बाहर निकालता और पूरे ज़ोर से भीतर डाल देता. उसके ऐसा करने से में तो बहुत आनंद ले रही थी और आहिस्ता आहिस्ता उसने अपना पूरा 9 इंच लम्बा और 5 इंच मोटा लौड़ा बाहर निकालना शुरू कर दिया. अब मुझे बहुत आनंद आ रहा था और अब तो में भी उसे किस कर रही थी और में इस बीच करीब दो बार और झड़ चुकी थी, किन्तु वो नहीं.


फिर उस वृद्ध चपरासी ने मुझे खटिया पर लिटा दिया और अपना काला मोटा लौड़ा मेरी फुद्दी में डालने लगा अब वो 60 साल का वृद्ध चपरासी मेरे बोबे के निप्पल चूस रहा था जिसकी वजह से मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वो अपने मन की सारी हसरत पूरी करना चाहता हो, किन्तु मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि उसके बाद मेरी फुद्दी का क्या हाल हुआ होगा? मुझे तो बस चुदवाने का जोश आ रहा था कि में इतनी ज्यादा उम्र के आदमी से इतनी छोटी उम्र में चुद रहीं हूँ और हम दोनों पसीने से एकदम भीग गये थे, किन्तु में पूरे जोश में थी.


तभी उस वृद्ध चपरासी ने मुझसे कहा कि वो मुझे अब कुतिया बनाकर पीछे से चोदना चाहता है. यारों मैंने पहले से ही बहुत सारी गदराई ब्लू फिल्मो में सेक्स करने की करीब करीब सारी पोजीशन देख रखी थी और में तभी अपने दोनों घुटनो को टेक कर अपने दोनों हांथो को आगे जमीं पर टेक कर कुतिया बन गई. फिर उस 60 साल के वृद्ध चपरासी ने पीछे से पेनिस को मेरी फुद्दी के भीतर डाल दिया और मुझे भी कुतिया बनकर उस वृद्ध चपरासी से चुदवाने के बाद ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी अंतिम तमन्ना पूरी हो गई है.

अब वो डोकर चपरासी बहुत ज़ोर ज़ोर से मेरी नासमझ फुद्दी में शोर्ट मार रहा था और फिर उसने कहा कि वो अब झड़ने वाला है और उसने कहा कि वो मेरी फुद्दी में ही अपना गरमा गरम वीर्य झाड़ना चाहता है ताकि उसका बच्चा मेरे पेट से जन्म ले और फ्मे उस वृद्ध चपरासी के बच्चे की माँ बन जाऊं. इसके बाद मैंने उस वृद्ध चपरासी सेकहा कि नहीं अपना माल मेरी फुद्दी के भीतर मत निकालना तुम 60 साल के वृद्ध हो और अभी मेरी उम्र मात्र 18 साल है अभी में माँ बन्ने के लिये तैयार नहीं हूँ इससे मेरी बदनामी हो जाएगी और अभी ठीक सही वक्त नहीं है और फिर उसने यह बात सुनकर अपना काला मोटा लौड़ा बाहर निकालकर मेरे मुँह में डाल दिया और अपना सारा स्पर्म मेरे मुँह में डाल दिया और में एक आज्ञाकारी वाइफ की तरह उसका सारा गरमा गरम स्पर्म शर्बत समझ कर पी गई.

जब मैंने अपनी फुद्दी को देखा तो में एकदम से चौंक गई क्योंकि मेरी अनचुदी फुद्दी बिल्कुल फट गई थी और उसमे से ब्लड बह रहा था वृद्ध चपरासी ने मेरी अनचुदी फुद्दी को अपने मोटे तगड़े लौड़े से चोदकर फाड़ डाली थी. में मेरी फटी हुई फुद्दी देखकर जोर जोर से रोने लगी फिर मेरे विद्यालय के उस वृद्ध चपरासी ने मुझे समझाया की बेटी तू टेंशन मत आज तेरी अनचुदी फुद्दी की पहली बार चुदाई हुई है आज मैंने तेरी अनचुदी फुद्दी की सील फाड़ी है इस लिये तेरी फटी हुई फुद्दी से ब्लड निकल रहा है यह अपने आप ठीक हो जाएगी और फिर उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरी फुद्दी से अभी भी थोड़ा थोड़ा ब्लड आ रहा था.

फिर उसने मुझे एक दवाई दी और मुझसे अपनी फटी हुई खुनम खान फुद्दी पर लगाने को कहा तो उससे मेरी फुद्दी का दर्द बिल्कुल कम हो गया और उसने कहा कि इससे सब ठीक हो जाएगा और इसके बाद मैंने उससे कहा कि अब मुझे घर पर जाना है और दोबारा मिलने का वादा लेकर उसने मुझे अपने कमरे से चोरी से बाहर निकाल दिया और उसकी दी हुई दवाई की वजह से मेरा दर्द अब ठीक था किन्तु फिर भी मुझे थोड़ी सी तकलीफ़ थी और में अपने घर पर आकर चुपचाप सो गई और मोर्निंग उठकर जब विद्यालय गई तो वो वृद्ध चपरासी जिसने कल मेरी अनचुदी फुद्दी चोद चादकर फाड़ डाली थी वो विद्यालय के दरवाजे पर ही खड़ा हुआ था, उसने मुझसे मेरी फटी हुई फुद्दी का हाल चल पूछा तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब मेरी फुद्दी एकदम ठीक है और एक दो दिन में फिर से तुम्हार लौड़ा झेलने के लिये तैयार हो जायगी.

मेरी बात सुन वो वृद्ध चपरासी बहुत प्रसन हो गया और उसने मुझे आशीर्वाद दिया जीती रहो बेटी. में उस वृद्ध चपरासी से बाते कर ही रही थी की तभी विद्यालय की घंटी बज उठी और फिर में मुस्कुराहट के साथ अपनी क्लास में चली गई. अब में और मेरे विद्यालय का वृद्ध चपरासी चोरी छुपे अवैध सेक्स संबंध बनाते है. दोस्तों वह चपरासी भले एक 60 वर्ष का वृद्ध मर्द हो पर उस साले चोदू के तंदरुस्त और फौलादी लण्ड में आज भी किसी जवान मर्द के लौड़े जैसा दम है.

चुदाई के दौरान निकली गदराई कंगना रनौत की नशीली सिसकियाँ

 

चुदाई के दौरान निकली गदराई कंगना रनौत की नशीली सिसकियाँ

चूत की खतरनाक चुदाई के दौरान निकली गदराई हुई कंगना रनौत की नशीली सिसकियाँ मुफ्त नई हिंदी : रविवार के दिन हृतिक रोशन मुझसे मिलने के लिए मेरे घर पर आया हुआ था. मोर्निंग के 9:00 बज रहे थे और हृतिक रोशन और मैं साथ में बैठे हुए थे हृतिक रोशन मुझसे काफी दिनों के बाद मिला था हृतिक रोशन ने मुझे बताया कि उसने नई कंपनी ज्वाइन कर ली है. मैंने हृतिक रोशन को उसके लिए बधाई दी और कहा कि चलो यह तो बड़ा ही अच्छा है. हम दोनों बातें कर रहे थे कि मां हम दोनों के लिए चाय बनाकर ले आई और हम दोनों कुत्ते कमीनो ने चाय पी.

हृतिक रोशन और मेरी उस दिन काफी देर तक बातें हुई मुझे काफी अच्छा लगा उस दिन हृतिक रोशन से बातें कर के काफी लंबे वक्त के बाद वह घर पर आया था और मुझसे मिला था. जब हृतिक रोशन घर गया तो उस वक्त 12 बज रहे थे और मैंने भी सोचा कि क्यों ना आज सलमान खान को मिल आऊं. सलमान खान को मिलने के लिए मैं उस दिन उसकी शॉप पर चला गया था. मैं सलमान खान से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा और सलमान खान भी काफी प्रसन था काफी दिनों के बाद मैं सलमान खान को मिल रहा था.


सलमान खान ने मुझे बताया कि उसके भाई साहब की शादी जल्द ही होने वाली है. हालांकि यह बात मुझे पहले से ही पता थी सलमान खान ने मुझे शादी का कार्ड दिया और कहा कि तुम्हें भाई साहब की शादी में जरुर जरुर आना है. मैं सलमान खान के साथ करीब 3 घंटे तक बैठा रहा फिर मैं घर वापस लौट आया था. जब मैं घर वापस लौटा तो उसके बाद मैं अपने रूम चला गया और आराम करने लगा।  मुझे कुछ दिनों के बाद सलमान खान के भाई साहब की शादी में जाना था और मैं जब सलमान खान के भाई साहब की शादी में गया तो वहां पर मुझे काफी अच्छा लगा.

सलमान खान को भी बड़ा अच्छा लगा था जिस तरीके से हम लोगों ने उस दिन शादी का इंजॉय किया. मैं नाईट के वक्त घर लौट आया था, जब मैं घर लौटा तो उस दिन मुझे काफी देर हो गई थी और मैं घर पर ही था. काफी दिन हो गए थे मैं मुंबई नहीं जा पाया था तो मैंने सोचा कि क्यों ना कुछ दिनों के लिए मैं मुंबई चला जाऊं. मुंबई में मेरी बड़ी बहिन रहती है और उनसे मिले हुए मुझे काफी वक्त हो चुका था इस कारण से मैं मुंबई जाना चाहता था. मैंने उस दिन ऑनलाइन टिकट बुक करवा दी.

जिस दिन मुझे मुंबई जाना था उस दिन मैंने बहिन को फोन किया. यह बात मैंने उनसे अभी तक नहीं कही थी की मैं मुंबई आ रहा हूँ.  जब मैंने दीदी से इस बारे में कहा तो दीदी मुझे बोलने लगी कि क्या तुम वाकई में मुंबई आ रहे हो मैंने दीदी से कहा कि हां मैं मुंबई आ रहा हूं. मैं रेलवे स्टेशन पर रेल गाड़ी का इंतजार कर रहा था जैसे ही रेल गाड़ी आई तो मैंने अपना सामान रेल गाड़ी में रखा और मैं अपनी सीट पर बैठा गया था. उस दिन मुझे सफर का पता ही नहीं चला और मैं नाईट को मुंबई पहुंच चुका था.


मैं जब नाईट के वक्त मुंबई पहुंचा तो वहां से मैंने टैक्सी ली और मैं दीदी के घर पर चला गया. दीदी से मिलकर मुझे बड़ा अच्छा लगा था और दीदी भी बड़ी प्रसन थी. काफी लंबे वक्त बाद मैं बहिन को मिल रहा था और दीदी ने मुझे कहा कि तुमने बहुत ही अच्छा किया जो तुम मुझसे मिलने के लिए आ गए. दीदी और मैं एक दूसरे से बातें कर रहे थे मैंने दीदी से कहा कि दीदी जीजू नजर नहीं आ रहे हैं तो दीदी ने मुझे बताया कि वह अपने काम के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए कोलकाता गए हुए हैं. दीदी और जीजाजी मुंबई में रहते हैं और उनका फैमिली दिल्ली में ही रहता है बहिन को मुंबई में रहते हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं.

मैं मुंबई में 4 दिनों तक रुका और फिर मैं वापस दिल्ली लौट आया था. जब मैं दिल्ली वापस लौटा तो उस दिन मुझसे मां ने कहा कि बेटा आज मुझे पड़ोस में जाना है और मुझे आने में देर हो जाएगी. मैंने मां से कहा कि मां कोई बात नहीं मैं आज खाना बाहर से ही आर्डर करवा देता हूं मां ने कहा कि ठीक है बेटा तुम आज खाना बाहर से ही आर्डर करवा देना. उस दिन मैंने खाने का आर्डर बाहर से ही करवा दिया था. जब मैंने खाने का आर्डर करवाया तो उस वक्त मां भी घर पर आ चुकी थी और हम लोगों ने उस दिन साथ में डिनर किया डिनर करने के बाद मैं अपने रूम में चला गया.

मुझे उस दिन गदराई हुई कंगना रनौत का फोन आया और जब मुझे उसका फोन आया तो मैंने उससे फोन पर काफी देर तक बातें की. गदराई हुई कंगना रनौत से मेरी काफी लंबे वक्त के बाद बातें हो रही थी. हम दोनों एक दूसरे को काफी लंबे वक्त से मिले भी नहीं थे. उस दिन जब मेरी और उसकी बातें हुई तो हम लोगों को बड़ा ही अच्छा लगा और हम दोनों बड़े प्रसन थे जिस तरीके से हम दोनों की बातें हुई. एक दिन मैं और गदराई हुई कंगना रनौत साथ में थे हम दोनों कुत्ते कमीनो ने उस दिन मिलने का फैसला किया था.

गदराई हुई कंगना रनौत मेरे साथ मेरे ऑफिस में जॉब किया करती थी किन्तु अब वह ऑफिस से रिजाइन दे चुकी है और उसने अपने घर के नजदीकी एक विद्यालय में पढ़ाना शुरू कर दिया है और वह उसी विद्यालय में पढ़ाती है. यहाँ भी देखें: बहन के ससुर ने ब्लैकमेल करके चोदा इंडियन हिंदी सेक्स विडियो मुझे बहुत ही अच्छा लगा जिस तरीके से मैं और गदराई हुई कंगना रनौत एक दूसरे से बातें कर रहे थे और हम दोनों की बातें काफी देर तक हुई. उस दिन हम दोनों एक दूसरे को मिलकर बड़े प्रसन थे और फिर मैं घर लौट आया था. कुछ ही दिनों में मुझे अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में नागपुर जाना था और मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में नागपुर चला गया.


जब मैं नागपुर गया तो वहां पर मुझे कुछ दिनों तक रहना पड़ा और मैं कुछ दिनों तक नागपुर में ही रहा उसके बाद मैं वहां से वापस लौट आया था. जब मैं वापस लौटा तो उस दिन मुझे गदराई हुई कंगना रनौत ने मिलने के लिए बुलाया और हम दोनों की मुलाकात हुई. हम दोनों की मुलाकात बड़ी ही अच्छी रही. हम दोनों एक दूसरे को मिले तो हम दोनों बड़े ही प्रसन थे मैं बहुत ज्यादा प्रसन था जिस तरीके से मेरी और गदराई हुई कंगना रनौत की मुलाकात हुई थी और हम दोनों एक दूसरे को मिले थे.

हालांकि पहले हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं था किन्तु अब हम दोनों के बीच प्यार पनपने लगा था और हम दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे थे. इसी वजह से तो मेरे और गदराई हुई कंगना रनौत के बीच की नजदीकियां बढ़ती ही जा रही थी और हम दोनों बड़े प्रसन है जिस तरीके से हम दोनों के बीच की नजदीकियां बढ़ने लगी थी. हम दोनों रंडी भाड़वे एक दूसरे को डेट करने लगे थे मैंने कभी भी गदराई हुई कंगना रनौत के बारे में ऐसा नहीं सोचा था किन्तु अब हम दोनों एक दूसरे को डेट कर रहे थे. हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही प्रसन हैं जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे के साथ होते हैं और एक दूसरे के साथ में टाइम स्पेंड किया करते हैं.

सेक्सी गदराई हुई कंगना रनौत और मै जब कभी भी फोन पर बाते करते तो हमारी बात गरमा गरमा हो ही जाती थी. जिस से हम दोनो को ही अच्छा लगता और हम दोनो एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तडप रहे थे. जब मैंने एक दिन गदराई हुई कंगना रनौत को कहा आज हम लोग सेक्स कर लेते है तो मै भी तडप रहा था और गदराई हुई कंगना रनौत भी तडप रही थी. वह भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए तडप रही थी और मैं भी गदराई हुई कंगना रनौत की गांड और चूत को अपने 9 इंच लम्बे और 3 इंच मोटे लंड से चोदना चाहता था.

जब हम दोनो उस दिन साथ मे थे तो मैं गदराई हुई कंगना रनौत के गुलाबी गुलाबी होंठो को चूम रहा था वह भी तडप रही थी और मैं भी तडप रहा था. अब मैं अपने आप पर काबू नही कर पा रहा था और वह भी रह नहीं पा रही थी. वह मुझसे अपने नरम होंठो को टकरा रही थी और मेरी आग को बढा रही थी. जब हम दोनो गरम होने लगे तो मैंने उसे कहा तुम अपने कपड़े उतार दो और उसने अपने कपड़े उतार दिए थे जिस से वह रह नहीं पा रही थी.

मैंने अब गदराई हुई कंगना रनौत के स्तनो को भी दबाया और गदराई हुई कंगना रनौत के नरम और गोल स्तन मुझे दबाने मे आनंद आ रहा था वह नशीली सिसकियाँ ले रही थी और उस साली रांड की नशीली सिसकियाँ मुझे और ज्यादा गरम कर रही थी. नंगी गदराई हुई कंगना रनौत की मखमली योनि से पानी बहुत निकल रहा था वह अपने पैरो को आपस मे मिलाने लगी थी और उसकी गर्मी बढने लगी थी. मेरी आग भी बढ चुकी थी और मैंने गदराई हुई कंगना रनौत की पैंटी को खोलते हुए उसकी गरम चूत के भीतर अपने लण्ड को घुसा दिया था.


अब वह दर्द के मारे नशीली सिसकियाँ ले रही थी और बहुत ही ज्यादा जोर जोर से चीख रही थी. चोदने के दौरान मुझे भी उस साली बहन की लौड़ी की नशीली सिसकियाँ और दर्द भरी चीखें सुनने में बहुत ही ज्यादा आनंद आ रहा था जब वह जोर से नशीली सिसकियाँ ले रही थी और मेरा साथ देती. मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा गदराई हुई कंगना रनौत की मखमली योनि से पानी बहुत ज्यादा मात्रा मे निकल रहा है इस वजह से उसे आनंद आ रहा था और मुझे भी आनंद आ रहा था.

कुछ देर शोर्ट मारने के बाद मेरा तंदरुस्त लौड़ा उसकी चुत मे गिर चुका था. अभी भी नंगी गदराई हुई कंगना रनौत चुदवाते चुदवाते नशीली सिसकियाँ ले रही थी. यहाँ भी देखें: मेरी चूत के अंदर बहुत गर्मी है खुजली जलन भी रहती है फिर मैंने मेरा लण्ड को बाहर निकाला तो मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा गदराई हुई कंगना रनौत की मखमली योनि से ब्लड भी निकल रहा था. मैं बढा प्रसन था और गदराई हुई कंगना रनौत भी बहुत प्रसन थी जिस तरह से मैंने पूरी नंगी करके गदराई हुई कंगना रनौत की चूत को चोदा था पर वह चाहती थी हम दोनो दोबारा सेक्स करे और हम दोनो ने दोबारा सेक्स करना प्रारम्भ करा.

मैं गदराई हुई कंगना रनौत की चूत के भीतर बाहर अपने लण्ड को किए जा रहा था. वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी. मै और गदराई हुई कंगना रनौत बहुत ही अच्छे से एक दूसरे का साथ दे रहे थे. मेरा माल अब गदराई हुई कंगना रनौत की बुर मे गिर चुका था और मैं प्रसन था जिस तरह से मैंने गदराई हुई कंगना रनौत की गुलाबी चूत की खतरनाक चुदाई के मजे लिए थे।

Mauseri Bahan Ko Saja Kar Choda

Mauseri Bahan Ko Saja Kar Choda

Chudai Ki Kahaniya Mera naam Tipendra hai. Mai abhi job kar raha hu aur acha khaasa kamaata hu. Meri ek mauseri Behan hai, jiska naam Trisha hai aur jo ki us waqt college me padhayi kar rahi thi. Wo dikhne me kaafi sundar hai, bas thodi si saawli hai. Uski ubhri gaand ki golayi kamaal ki hai aur na-mard ko bhi mard hone ka ehsaas dila de. Doggy Style Incest Sex

Wo gaaon ki hone ke kaaran shehar ka rang dhang nahi jaanti thi aur shehar waalo se thoda kam baat cheet karti thi. Wo sab kuch apne mann me hi rakhti thi aur bahut shy kisam ki thi. Uska sharmaana to seene me waar kar deta tha. Wo bachpan se hi mere se close thi aur mere peeche hi padi rehti thi.

Fir padhayi ki wajah se uska shehar aana kam ho gaya, lekin jab usne hamaare yaha college join kiya, to wo bahut khush thi. Wo hamaare ghar par nahi rehne waali thi, kyuki college ghar se zara doori par tha aur waha se college jaane ke liye direct bus nahi thi aur 3 buses badal kar college jana padta tha.

Wo jab aayi thi, to 10 din hamaare yaha rahi thi. Maine usko bachpan ke baad seedha aaj jawaani me dekha tha. Usne eyebrow, upper lip, makeup, ye sab nahi kiya tha, so zyada khoobsurat nahi dikh rahi thi. Lekin jab maine usko gale se lagaya tha, to uske mamme mujhe mehsoos ho gaye the. Pata chalta tha, ki chhori jawaan ho gayi thi.


Fir doosre din Maa usko parlour se lekar aayi. Jab wo parlour hoke mere saamne aayi, to Mai to usko dekh kar pehchaan hi nahi saka. Jaise Mai apne office me shehri ladkiyo ki gaand aur mammo ko taadta hu, wo bilkul un ladkiyo jaisi hi dikh rahi thi.

Fir mujhe laga, ki uska pakka koi to chodu hoga, warna itni maal kaise banti. Lekin un 10 dino me usne mujhe akela hi nahi chodha. Usne pata nahi kayi baar galti se, ya jaan-boojh kar apni gaand, mamme mujhse touch karwaye.

Ab wo hostel chali gayi thi aur wo mujhse phone par baate karti thi. Raat ko ghar-waale so gaye hote the aur hum baat kar rahe hote the. Ab to Mai pakka sure tha, ki uske saath kuch kiya jaa sakta tha. Ab wo har roz phone karke mera dimaag chaat-ti thi aur kehti thi-

Trisha: Exam me fail ho jaungi, kyuki maine kuch nahi padha hai.

Waise to wo hoshiyaar thi. Fir maine usko aise hi bol diya-

Mai: Agar tum pass ho gayi to?

Fir wo boli: Aap jo kahoge, Mai wo aapko doongi.

Ispe maine kaha: Dekh le, baad me mukar to nahi jaayegi?

Usne kaha: Nahi baba. Waise aap kya maangoge?

Mai bola: Mujhe tumhaari pappi chahiye.

Ye sun kar wo hasne lagi aur boli-

Trisha: Chee, shee, gande, bolu kya Mausi ko? Koi behan se aisi baat karta hai kya?

Uski ye baat sun kar Mai thoda darr gaya, ki wo kahi sach me Mummy ko naa bata de. Lekin saali mujhe chidha rahi thi. Maine bola-


Mai: Aisa kar, tu rehne de. Tujhse nahi hoga.

To wo boli: Kyu nahi hoga, zaroor hoga. Gaal pe hi to pappi deni hai.

Maine kaha: Arre nahi, poori baat to sun lo. Agar tum pass ho gayi naa, to poore ek ghante tak Mai lagataar jaha chaahu waha pappi deni padegi.

Trisha: Oh ho! Sahi hai Bhaiya. Aap to bahut hi us type ke ho.

Maine bola: Dekha, maloom tha mujhe.

To wo boli: Theek hai, mujhe shart manzoor hai.

Fir kya tha, firse normal baate chalne lagi. Fir 1 maheene baad uska result aaya. Mai kaam par tha, to mujhe uske result ke baare me pata nahi tha. Shaam ko ghar aane ke baad, Maa ne mujhe uske result ke baare me bataya.

Maine usko phone nahi kiya aur naa hi message kiya. Raat ko 2 baje uska phone aaya. Jab maine pehli baar me phone nahi uthaya, to wo wapas se phone karne lagi. Phone uthaane par wo jaal me fass gayi. Wo dheemi awaaz me baat kar rahi thi aur boli-

Trisha: Kya hua Bhaiya, aaj aapne phone nahi kiya.

Maine uske saath aise behave kiya, jaise kuch pata hi naa ho.

To wo boli: Bhaiya aap shart jeet gaye.

Maine kaha: Kya baat kar rahi ho Trisha, tum pass ho gayi? Ye to achi baat hai. Tumhe bahut-bahut badhayi ho. Chal ab Mai sone jaa raha hu, kal baat karte hai.

Tabhi wo shart ka poochne lagi. Ispe Maine bola-

Mai: Arre Mai to mazaak kar raha tha. Tu bhi kaha serious ho gayi.

Fir usne mujhe doosre din bula liya. Us din wo ek-dum saj-dhaj kar mera intezaar kar rahi thi. Usne t-shirt pehani thi aur neeche lambi skirt pehni thi. Mai usko aise dikha raha tha, jaise mujhe kuch khaas farak nahi padta. Fir hum mall me gaye aur wo boli-


Trisha: Bhaiya aap aise kyu behave kar rahe ho. Galti ho gayi kya mujhse koi? Agar hui hai to sorry, maaf kardo mujhe.

Maine kaha: Arre nahi re, aisa kuch nahi hai.

To usne kaha: Movie dikhao fir.

Hum andar gaye aur maine corner seat li thi. Thodi der baad wo kaan me boli-

Trisha: Bhaiya shart ki chummi chahiye?

Aur ye keh kar wo seedha mujhe choomne lagi. Usne mere hontho pe apne honth rakh diye. Mai kitni der usse gussa reh sakta tha, to ab Mai bhi usko choomne lag gaya. Mai paaglo ki tarah usko choom raha tha, jaise saalo se bhookha hu.

Hum dono hi ek-doosre ko chodh nahi rahe the. Aakhir hame alag hona pada, kyuki hame saans lene me bhi takleef ho rahi thi. Jaise hi hum dono alag hue, ham lambi saanse le rahe the aur haanf rahe the.

Fir maine usko apni aur kheencha. Ab jeebh ki chusayi chaalu ho gayi aur mere haath na-jaane kaise uske mammo par chale gaye aur Mai uske mamme dabaane laga. Wo bhi apne boobs dabwa kar maze lene lagi. Thodi der baad interval hua aur lights onn ho gayi. Hum dono ne ek-doosre ko dekha aur hum dono ki aankhen vaasna se bhari hui thi. Maine usko bola-

Mai: Aisa karo, toilet jaa kar bra-panty nikaal do.

Wo chali gayi aur bra-panty nikaal kar wapas aa gayi. Fir baad me jaise hi light band hui, hum firse chaalu ho gaye. Is baar maine uski kameez upar karke, uske nange mammo ke darshan kiye. Fir Mai uske mammo ko choosne lag gaya. Wo ab dheere-dheere siskiya le rahi thi.

Trisha: Ssshh.. ssshhhh.. aahhh..


Maine uski skirt upar uthaani chaalu ki. Ab uska nanga mulayam badan mere lund ko uksa raha tha. Maine apne lund ko azaad kiya aur Trisha ko lund pakadne ko kaha. Usne jhat se lund daboch liya.

Ab mere haath uski jaangho par the. Usne pair faila kar apni chut khol di, jo poori clean chut thi. Mai us par apni ungliya ragadne laga aur wo pagal hi ho gayi. Maine apne jeb se rumaal nikaala aur uske muh me daal diya, taaki awaaz naa aaye.

Ab Mai uske mammo aur chut se khel raha tha. Fir maine rumaal uske muh se nikaal diya aur usko apne lund ki chummi lene ke liye bola. Wo jhat se neeche jhuk gayi aur mere lund ki chummi lene lagi. Maine waise hi uska sir pakad liya aur lund uske muh me de diya. Fir maine usko bola-

Mai: Chooso ab is lund ko.

Aur wo lund choosne lagi aur Mai uske muh ko chodne laga. Fir Mai uske muh ke andar hi jhad gaya. Usne mera maal waha kone me hi thook diya aur rumaal se khud ko saaf kar liya. Baad me hum jab baahar aaye, tab usne mujhe propose kar diya. “Doggy Style Incest Sex”

Maine kaha: Dekh mujhe tu bahut pasand hai, lekin behan ke nazariye se.

Mai tujhe girlfriend ya Biwi se bhi zyada pyaar doonga, par Behan ke taur par. Wo bhi meri baat maan gayi. Fir hum aise hi baithe the aur ab mujhe usko chodna tha. Mai usko lodge me leke gaya. Waha hum dono aadhe ghante tak ek-doosre ko choom rahe the aur chaat rahe the.

Ab mujhe uski gulaabi chut maarni thi, lekin mere paas condom nahi tha. Wo bhi mujhe mana kar rahi thi, lekin Mai nahi maana. Fir jaise hi maine aadhe lund ke 2-4 dhakke maare, to uski chut se khoon nikalna chaalu ho gaya aur seal toot gayi.

Fir wo rone lag gayi aur mere poore mood ka bhonsda ho gaya tha. Maine usko samjhaya, ki pehle-pehle aise hi hota hai. Abhi dard bardaasht kar lo, baad me maza aayega. Usne mere dimaag ka bhonsda kar diya, lekin maine bhi usko chod ke hi chodha.

Us din ke 10 -12 din baad uska phone aa gaya aur usne mujhe milne ke liye bulaya. Fir us din Mai usko leke room par gaya. Waha maine usko mast garam kiya aur uski chut maarne laga. Aaj wo maze se apni chut chudwa rahi thi aur mujhe mast maza aa raha tha.

Wo gaand uchaal-uchaal kar mera saath de rahi thi. Fir maine usko doggy style me bhi choda aur usko godi me leke bhi choda. Wo itni kush thi, ki mujhe chodh hi nahi rahi thi. Saali ne us din 4 baar apni chut chudwa li thi aur fir bhi shaant nahi hui thi. “Doggy Style Incest Sex”


Mera lund ab sooj gaya tha. Maine fir jaise-taise usko shaant karke bhej diya. Fir kya tha? Mujhe har sunday chudai karne ko milti thi. Ab wo 2 bachho ki Maa lag rahi thi. Maine uske neembu jaise mamme aam bana diye the aur uski gaand kharbooze jaisi ho gayi thi.

Wo ab mera lund apni gaand me bhi leti thi. Ab lodge waale bhi hame pehchaan-ne lage the aur wo bhi hamaare naam se. Unko bhi lagta tha, ki hum shaadi karenge. Ab Mai usko bina condom ke hi choda karta tha aur apne maal uske andar hi chodh deta tha.

Ab uski shaadi ho gayi hai, lekin shaadi ke baad bhi uske Pati ke kaam par jaane ke baad, Mai usko milne ke bahaane se jaata hu aur poori-poori dopahar usko chodta hu. Wo bhi apni gaand jhuka kar mera lund leti hai.


Lund Ki Pyasi Ameer Bhabhi

Lund Ki Pyasi Ameer Bhabhi

Adult Stories pe mere diye invitation ko bahut dino ke baad ek mast Bhabhi ne accept kar lee Namaste mitron, Mera naam rajesh hai, Main jab school mein padhta tha, Tab se Crazy Sex Story ka reader hoon. Indian Gigolo Porn

Main hisar shahar hariyana mein rahta hoon. Yah meri pahli kahani hai, Agar kuch kami ho to maaf karna. Kahani meri aur ek 28 saal ki shaadishuda aurat ki hai jiska naam Vidya hai, Yah kaalpnik naam hai. Vidya ek 28 saal sundar manmohak, Gori, Height 5′ 6″ ke lagbhag, Patli si kamar si par uske chhati mast sudaul 32 size ke hain.

Kamar to poocho mat itni naahuk ki koi dekhe to paagal ho jaaye, Chootad wo mote mote.. Uska Pati ek company ka maalik hai. Main hamesha ek networking site pe call boy ke naam se comment karta tha ki kisi Bhabhi, Aunty, Divorcee, Vidhwa ko sex ya achhi friendship ki jarurat ho to call boy se sampark karein. Aur aage main mera mobile number daalta tha.

Shuruaat mein mujhe bahut door se miss call ya message aate thay Bhabhi aur ladkiyon ke. Ek din mujhe raat ko 9:30 ko ek call aayi. Main samajh gaya ki yah kisi ladki ya Bhabhi ka hoga. Maine recieve kiya. Udhar se ek aurat ki awaaz aayi.
Mast Hindi Sex Story : Didi Ki Chut Dekha Bhai Ne Behosh Karke

Usne poocha- Kya main call boy se baat kar sakti hoon?

Maine kaha- Main kya madad kar sakta hoon aapki?

Wo- Jee maine number net se liya hai, Kya mere saath aap friendship karoge?

Main- Jee bilkul.. Jarur karoonga.. Aapka naam aur City?

Wo- Jee mera naam Vidya hai aur main hisar ki hi rahne waali hoon.

Main- Waah.. Main bhi hisar ka hoon. Main bahut khush tha kyonki yah pahli aurat thi hisar se..

Main bola- Kahiye aapki kis tarah seva karoon?

Vidya aur main us raat bahut der tak baatein karte rahe. Usne bataya ki uska Pati hamesha kaam ki wajah se baahar rahta hai. Aur aajkal wo akelapan mahsoos karti hai. Phir hamari roj baatein hone lagi aur kuch dinon mein hum sex ki baatein karne lage.

Ek din usne kaha- Kya tum mujhe sex ka sukh doge?

Maine haan kaha.

Phir usne mujhe apne ghar ka pata diya jo mere ghar se jyada door nahin tha, Mast hisar ka posche area tha. Main agle hi din uske ghar pahuncha, Bell bajaayi. Jaise hi darwaaza khula, Main use dekhta rah gaya. Kya sundar thi wo.. Usne mujhe andar bulaaya.
Chudai Ki Garam Desi Kahani : Bahan Ghodi Ban Kar Chut Faila Di

Uska ghar andar se bahut sundar aur keemti banawat ka tha. Aur Vidya ko to main dekhta hi raha. Uska gora rang, Patli kamar, Mast tight boobs. Hey bhagwan.. Main to paagal ho gaya. Phir usne mujhe juice pilaaya, Baaton baaton mein ghar dikhaya aur aakhir mein hum bedroom mein aa gaye.

Wo mere paas aayi, Maine der na karte huye use apni baahon mein pakad liya, Uske honthon ko choomne laga, Wo bhi mera saath de rahi thi. 15minute ki choomachati ke baad maine uske boobs dabane shuru kiye. Kya kadak thay uske boobs. Mast gol…

Hum donon ka poora sharir ek doosre pe ghis raha tha. Phir maine use bed par lita diya aur apne kapde nikaal diye. Usne bhi apni saree blouse peticoat nikaal diya. Aur ab wo sirf laal bra aur safed panty mein thi. Uski chamakdaar jaanghein, Mast sapaat pet, Panty jaise sirf uski chut ko dhake huye thi.

Uska chehra laal ho chuka tha. Maine jhat se uski panty utaar fenki aur mast chhoti do inch ki chut ke saath haath se khelne laga aur phir chaatne laga. Uski chut chaatne mein mast khaari lag rahi thi. 20 minute main Vidya ki chut chatta raha.
Mastram Ki Gandi Chudai Ki Kahani : Ameer Client Ne Farm House Par Bulaya

Wo apne boobs khud hi dabati rahi. Phir wo jhad gayi. Main uska saara paani saaf kar gaya. Maine mera lund itna bada kabhi nahin dekha tha, Fool ke 7 inch ka ho gaya tha. Vidya ne use kuch der masla, Chooma, Hilaaya, aur jhat se mukh mein lekar choosne lagi.

Wo choosne mein itni maahir to nahin lag rahi thi par poori tarah kho chuki thi lund choosne mein.. Main bhi itna uttejit ho chuka tha ki kab uske munh mein paani nikaal diya, Pata nahin chala. Aur wo poora paani pee gayi. Poora lund saaf kar diya.

Kuch der baad mera lund tight ho gaya tha. Usne apne pair faila karke mera lund apni chhoti chut pe rakha. Maine dheere dheere apna aadha lund andar ghusaya. Thoda andar jaane ke baad ab nahin jaa raha tha aage. Maine phir lund thoda peeche kheencha aur aage jhatka diya.

Wo cheekh uthi aur uski aankhon se ansoo aane lage. Main thoda ruka aur dheere dheere jhatke lagane laga. Uski chut mast tight thi. Main use 20 minute tak chodta raha aur baad mein paani uski chut mein nikaal diya. Uske chehre par khushi ke bhaav nazar aa rahe thay.
Antarvasna Hindi Sex Stories : Coaching Wali Diksha Didi Virgin Nikli Chodne Pe Pata

Phir ek ghanta hum chipak kar so gaye. Baad mein usne mujhe uthaya aur ek glass doodh diya peene ko. Doodh peene ke baad maine kapde pahne aur uske labon par choomban kiya aur aane laga.

Usne jaate jaate mujhe 5 hazaar rupye diye jo maine waapas kar diye. Aur phir hum donon jab bhi waqt milta, Mast chudai karte.


पडोसी की बेटी को चोदा अकेला पाकर

पडोसी की बेटी को चोदा अकेला पाकर


दोस्तो, मुझे नहीं मालूम था कि मुझे इतनी जल्दी चुदाई का मौका मिल जाएगा!! हमारे घर के सामने एक मकान था, जिसमे वर्मा साहब की फैमली रहती थी। उनके घर में वर्मा जी और उनकी दो बेटियाँ मिनाक्षी व पूजा और उनकी मां सपना रहती थी।


उनकी मां 55 की होने के बाद भी 45 की लगती थी!! कसा हुआ बदन… मोटे-मोटे चुचे और भारी-भारी गाण्ड… लम्बे बाल… जब वो रोड पर चलती थी तो जवानों के हाथ तो अपने लण्ड पर होते ही थे, बुढों की भी जीभ लपलपा जाती थी!!!


जाहिर है, ऐसे में उनकी बेटियाँ भी कयामत थीं। उनकी एक झलक पाते ही लडके मुठ मारे बगैर नहीं सो सकते होगें और सोएँ भी कैसे, यह हाल मेरा भी तो था…


मिनाक्षी की उम्र मुझसे दो साल कम, 19 की थी और पूजा उससे एक साल छोटी थी।


मुझे जन्नत का मजा मिनाक्षी ने दिलवाया!!!


तो अब मैं असल कहानी पर आता हूँ…


वर्मा परिवार का हमारे साथ लगाव था, मेरे घर हम दो भाई और मम्मी-पापा हैं।


मेरा भाई विदेशी टूर कम्पनी में काम करता है और मुंबई ओफिस का हैड है। वो वहीं रहता है। पापा मेरे प्राईवेट कम्पनी में काम करते हैं तथा मम्मी भी… दोनों सुबह ओफिस जाते हैं और देर शाम को आते हैं।


मेरा कमरा बाहर गेट के पास है तथा मम्मी-पापा का घर के अंदर। उस दिन मैं घर पर अकेला था और टी वी देख रहा था। तभी मुवी में एक सैक्सी सीन आया और मैं अपना 10 इंची लण्ड निकाल कर सहलाने लगा!!!


मेरे घर का मुख्य गेट खुला हुआ था, इसका मुझे अहसास ही नहीं था कि कब उसमें से मिनाक्षी अंदर आई और मुझे लण्ड से खेलते हुए देखने लगी!!!


अचानक उसके पैरों से कुछ टकराया और आवाज़ सुनकर मेरी मस्ती टूटी। मैंने पीछे देखा तो मिनाक्षी खडी मेरे लण्ड को घूर रही है!!


मैंने फट से अपना लण्ड अंदर किया और पूछा – कैसे आना हुआ, मिनाक्षी? तो वह बोली – मैं तो न्यूज पेपर लेने आई थी।


मैं उसे न्यूज पेपर देने लगा, तो उसने मेरा हाथ पकड लिया।


मैं एक बार घबराया तभी उसने मुझे खींच लिया, मैं सीधा उसके सीने से टकरा गया। उसने मेरे लण्ड पर हाथ रख कर कहा – हथियार, तो तगड़ा है!!! कभी इस्तेमाल भी किया है, या बस वैसे ही हाथ से काम चला रहे हो…


मैं सकपकाया पर होश में आते ही समझ गया की आम पक कर खुद झोली में आ गिरा है, तो चख क्यों नहीं लेता!! !!!


मैंने उसका सिर पकड कर उसके होंठों पर किस करते हुए कहा – तेरे जैसा कोई माल नहीं मिला, जान… इस्तेमाल कैसे करता…!!

मैंने सोचा कि जब उसे खुद ही कोई प्रॉब्लम नहीं है तो मैं क्यों पीछे हटूँ और उसे चूमने लगा।


मैं भी खुश हो गया और धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने लगा और साथ ही उसके होंठों पर चूमने लगा क्योंकि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव था तभी मिनाक्षी ने मुझे धक्का दिया और कहा – जानवर है, क्या…?? आराम से कर!! आज तो मैं तेरी हूँ।


मैंने कहा- सॉरी… !! और इतने में मिनाक्षी ने अपना सूट उतार दिया। मैंने कहा – मिनाक्षी, इतने बड़े बड़े स्तन हैं, आपके… !!


मैं उनको हाथ में लेकर चूसने लगा और दबाने लगा। मिनाक्षी भी जोश में आ चुकी थी और मुझसे चिपक गई थी।


मेरा तो सपना साकार हो गया था!!!


मैंने मिनाक्षी को धीरे धीरे पूर्ण नग्न कर दिया और खुद भी नंगा हो गया… फिर क्या था, मैंने जैसा ही अपना लण्ड निकाला मिनाक्षी बोली- हे राम… !! इतना मोटा? साले, तूने आज तक कितनी लड़कियों को चोदा है?


मैंने कहा – किसी को नहीं!! वो बोली – चल आज, चोद… !! खुद भी मजा ले और मुझे भी मजा दे!!! !!


मैंने कहा – तो देर किस बात की। मैं उसे चूमने लगा और उसने मेरा लण्ड हाथ में ले लिया और आगे पीछे करने लगी।


मुझे काफी मजा आ रहा था। मैं उनके बोबे दबा रहा था और होंठ चूस रहा था…


फिर वो बोली- साले, केवल चूसेगा ही या खायेगा भी… ?? मैं बोला – साली, बड़ी जल्दी है तुझे… चल घोड़ी बन जा, साली रांड… !! जल्दी कर… मुझे तो तुझसे ज्यादा जल्दी है, रंडी…


वो बोली – अच्छा, ऐसी बात है तो लो… और वो घोड़ी बन गई, मैं उसे पेलने लगा।


वो बोली – थोड़ा तेज नहीं चोद सकता… ?? और मैंने झटके तेज कर दिए और उसे चोदने लगा!!


थोड़ा धीरे !! उई माँ… मर गई साले! थोड़ा धीरे!! …


मैंने कहा- अब पता चला साली रंडी, तेरी गाण्ड का तो आज मैं बुरा हाल बना कर छोड़ूंगा!!


वो भी कहने लगी – हाँ कुत्ते… !! और मेरा साथ देने लगी… मैं उसकी चूत जोर जोर से चोदने लगा। अब वो मजे से चुदने लगी!!! !!


बीस मिनट तक मैं उसे चोदता रहा… मैंने उसे अलग अलग ढंग से चोदा!! 20-25 मिनट बाद जब मेरी छूट होने को आई तो मैंने लण्ड बाहर कर उसके मुँह पर पिचकारी मारी और उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और सारा वीर्य चाट गई… !!


फिर मैं उससे चिपक गया।


हम दोनों एक दूसरे के साथ देर तक चिपके रहे। इतने में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और मैंने कहा – मिनाक्षी, एक बार और हो जाये… ??


वो बोली – हाँ हाँ!! क्यों नहीं? नेकी और पूछ पूछ !! … आजा मेरे राजा, फाड़ दे अपनी मिनाक्षी की चूत!!


उस दिन मैंने मिनाक्षी को पाँच बार चोदा… नए नए स्टाइल में!!! और उसके बाद हमारे बीच सिलसिला चल पडा।


उसे जब भी मौका मिलता, वो मेरे घर आ जाती या फिर मुझे मौका मिलता तो मैं उसके घर…


हम जमकर चुदाई करते, फिर एक दिन पूजा ने हमे रगें हाथों पकड लिया और फिर क्या हुआ यह अगली कहानी में…

भैंस चराने गई लड़की को पेला

भैंस चराने गई लड़की को चोदा


यारों मैं फिर एक बार अपनी कहानी लेकर हाजिर हूँ. इस बार मैं आपको अपने बचपन की एक कहानी सुना रहा हूं मेरा परिवार शुरू में गांव में रहता था. गांव का माहौल शहर के माहौल से बिल्कुल अलग होता है मेरे घर का माहौल भी एक गांव के माहौल की तरह ही था. घर में मैं मेरे पिताजी और माताजी थे सबसे छोटा होने के कारण मैं अपने मां-बाप का बहुत लाड़ला बेटा था इस कारण थोड़ा जिद्दी भी हो गया था. Desi Village XXX Story

मैं करीब 14- 15 साल की उम्र अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता है इसीलिए कई बार मुझे मां की लाइफ चुदाई देखने का मौका मिला! गांव में पति पत्नी एक साथ नहीं सोते हैं एक ही कमरे में भी अलग अलग खटिया पर सोते हैं. मेरे पापा अलग खटिया पर और मैं और मेरी मां उसी कमरे में अलग खटिया पर सोते थे. मैं तीन-चार साल तक तो अपनी मां का दूध पीता ऱहा था, इसीलिए मैं उनके साथ ही सोता था.

कभी-कभी मैं चड्डी पहन के तो कभी एकदम नंगा सो जाता हूं गांव में बच्चे अक्सर ऐसे ही सोते हैं. चड्डी पहन कर बनियान पहनकर गांव में भी घूमते रहते हैं अक्सर मेरे पापा रात में मम्मी की चुदाई करते थे बिल्कुल नंगा करके. एक रात जब मेरी नींद टूटी तो देखा पापा मेरे पास मम्मी के पास लेते हैं. और मम्मी की पीठ के पास चिपकर कुछ कर रहे हो मुझे यह सब समझ में नहीं आता था.


फिर भी मैंने देख पापा मम्मी बिल्कुल नंगे हो मैं उठ कर बैठ गया और मम्मी मम्मी करने लगा. मम्मी ने मुझे अपने पास लेटा लिया पापा भी मम्मी के पास ही लेटे रहे मैंने देखा पापा मम्मी की चुदाई कर रहे. पापा का लंड मम्मी की चूत में डाला था दोनों बिल्कुल नंगी थे. थोड़ी देर बाद मुझे सोया जानकर पापा मम्मी को अपने पास खटिया पर ले गए. उन्होंने मम्मी की चूत चाटना शुरू कर दी है.

मैं फिर उठकर मम्मी पापा के पास पहुंच गया मुझे देखकर पापा कहने लगे तेरे को नींद नहीं आ रही है. मैंने आप मिलते हुए कहा मुझे आपके पास लेटना है पापा ने मुझे अपने पास लिटा लिया और फिर मम्मी की चुदाई करने लगे. पापा ने इस बार मम्मी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके बूब्स दबाने लगे. मैं जाग रहा था और सब कुछ देख रहा था लेकिन मेरे पापा मम्मी को मेरे जागने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा वे तो अपने काम में मस्त थे.

थोड़ी देर बाद में जब उठ गया तो पापा ने मुझे अपनी जांघो के पास बैठा लिया. और अपना लंड मुझे पकड़ा दिया और कहा तू इसके साथ खेल. मैं पापा का लंड पकड़ कर खेलने लगा कभी पापा का लंड पकडकर हिलाता तो कभी चूसता, मुझे और मजा आ रहा था. थोड़ी देर बाद में मम्मी के जनों के बीच बैठ गया और मैंने मम्मी की चूत में उंगली डालना शुरू कर दिया. कि बीच बीच मे कभी जीभ से चुम्मी लेकर चूत चाट लेता था.

मैं काफी छोटी उम्र से पापा से लंड से खेलता था मुझे लंड से खेलना और चूत में उंगली डालना बहुत अच्छा लगता था. जब मैं छोटा था तो रात में उठ जाता था तो पापा मुझे इसी तरह अपनी जांघों के बीच बिठाकर लंड से खेलने को कह देते थे. और पापा मम्मी कै कभी होठों का रस पीते तो कभी दुघ चूसते थे. पापा जब मम्मी की चूत चाटने लगे तो मैं मम्मी के दूध चूसने लगता था.


मेरी मम्मी मेरे सामने छोटे से ही नंगी हो जाते थे मेरे सामने नहा भी लेते अपने कपड़े बदल लेते हैं. इसी तरह मेरे पापा मेरे सामने नंगे होकर नहा लेते थे और कपड़े भी बदल लेते थे. 1 दिन जोरदार बारिश हो रही थी मैं बाहर से जब घर पर आया तो मुझे घर पर मम्मी कहीं नहीं देखी. मैंने पूरा घर छान मारा लेकिन मुझे मम्मी कहीं नहीं देखी फिर मैं बेडरूम में गया यहां मेरे मम्मी पापा सोते थे.

मैंने गेट खोल कर देखा तो पापा मम्मी की चुदाई कर रहे थे पापा मम्मी दोनों एकदम नंगे थे. पापा ने मम्मी को घोड़ी बना रखा था और उनकी चूत में अपना लंड डाल रखा है मैं गेट खोल कर सीधे कमरे में घुस गया. अचानक मुझे देखकर मेरे मम्मी पापा हड़बड़ाबे और अलग हो गए. मम्मी बोली बेटा तू कब आया मैंने बोला मैं अभी आया आप नहीं दिखे तो मैं घर आ गया.

उस समय मेरा सिर्फ खड़ा होता था लंड को पकड़ कर मसलने में मजा आता था लेकिन पिचकारी नहीं छूटती थी मैं कमरे में खटिया पर बैठ गया. मैं यह देखकर हैरान रह गया कि मेरे मम्मी पापा मेरे पास ऐसे नंगे ही बैठ गए. पापा खटिया पर लेट गए मैं हर बार की तरह पापा लण्ड सहलाने लगा. पापा मम्मी की चूत चाटने लगी थोड़ी देर बाद पापा ने मुझे अलग कर दिया और मम्मी को आगे की ओर झुका दिया और अपना लंड एक ही झटके में मम्मी की चूत में डाल दिया.

मैंने पहली बार मम्मी की लाइफ चुदाई अपनी आंखों से देखें. पापा मम्मी ने मुझे कमरे से बाहर जाने को भी नहीं कहा मम्मी ने पापा के कान में कहा कि इसको बाहर भेज दो. पापा बोले अभी तो बहुत छोटा है उसे कोई ज्ञान नहीं है बैठा रहने दो. मैंने पापा से मासूमीयत इसलिए पूछा पापा आप यह क्या कर रहे है तो पापा कहने लगी मैं संभोग कर रहा हूं. मैंने कहा यह क्या होता है पापा बोले जब तुम बड़ा हो जाएगा तो तू भी अपनी पत्नी के साथ यह सब करेगा.

पापा कहने लगे तू भी तो इसी चू से निकला है मैंने कहा पापा यह चूत क्या होती है. तो पापा कहने लगे औरत की नंगू को चूत कहते हैं और पापा के सुसु को लंड कहते हैं. मैंने कहा तो क्या मेरी सुसु भी लंड कहेगी पापा कहने लगी हां तेरा भी अब खड़ा होने लगा है तेरी सुसु अब लंड बन गया है. पापा और मैं बातें कर रहा था और पापा मेरे सामने ही मम्मी की चूत मार रहे थे.


20 मिनट की चुदाई के बाद पापा ने मम्मी की चूत में ही अपना माल पानी छोड़ दिया. पापा मम्मी को नंगा देखकर मैं भी उत्तेजित हो गया था मैंने भी अपनी चड्डी उतार और अपनी सुसु को सहलाता रहा और हम तीनों मजा करते रहे. घर में रोज मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैं भी उत्तेजित हो जाता था और मुझे भी किसी की चूत मारने की इच्छा होने लगी थी.

गांव में अक्सर लड़का लड़की अपने पालतू जानवरों को चराने के लिए जंगल जाते हैं. मेरे पड़ोस में भी एक लड़की मेरी ही हम उम्र थी वह भी अपनी गाय भैंस चलाने के लिए जंगल जाती थी. मैं भी एक दिन उसी के साथ जंगल चला गया जंगल में हम दोनों एक सिला पर बैठ गए और आसपास ही हमारे जानवर चलने लगे. हम लोगों की बातें करते रहे मैंने चड्डी बनियान पहन रखी थी तो उस लड़की ने भी देखा ब्लाउज और घाघरा पहन रखा था.

कुछ देर बाद छोकरी को लैट्रिन लगी छोकरी मुझसे बोली मेरे जानवर देखना मैं लैट्रिन होकर आती हूं. छोकरी एक बोतल में पानी लेकर झाड़ियों के पीछे बैठ गई और पॉटी करने लगी. थोड़ी देर में मैं भी उसी लड़की के सामने जा पहुंचा लड़की मुझे देख कर कहने लगी तुम यहां क्यों आ गए. मैंने कहा मुझे भी लेट्रिन आ रही है और मैं अपनी चड्डी खिसका कर उसी के सामने पॉटी करने बैठेगा.

लड़की कहने कोई आ जाएगा मैंने कहा इस जंगल में अभी कोई नहीं आएगा. मुझे वैसे पॉटी नहीं आ रही थी लेकिन मैं तो लड़की की चूत देखने के लिए बैठ गया था. थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा तेरी सुसु तो बहुत अच्छी है मैं उसे छूकर देखना चाहता हूं. छोकरी बोली कोई आ जाएगा मैंने कहा कोई नहीं आएगा. और मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और एक उंगली उसकी चूत के अंदर डाल दी और उसकी चूत में उंगली करने लगा

मेरे उंगली करने से लड़की को मजा आने लगा मैंने लड़की से कहा मेरी सुसु भी पकड़ कर देख. डरते डरते लड़की ने मेरा लंड पकड़ लिया और जोर से दबाने लगी. उसके लंड दबाने से और उसकी चूत में उंगली करने से मेरा लंड पहले ही खड़ा हो गया था. लड़की से मैंने कहा इसकी खाल पीछे करो तो उसने मेरे लंड की खाल पीछे की तो मेरा लाल सुपडा देखकर वह खुश हो गई.


कहने लगी तेरी सुसु तो बहुत अच्छी और बड़ी है मेरे पापा की सुसु भी ऐसी ही है. मैंने उससे कहा जब लड़का बड़ा हो जाता है तो उसको सुसु नहीं लड कहते हैं और तू भी अब बड़ी हो गई है तो तेरी चू चू चू तो बन गई है. लड़की मेरे लंड को शहला टी रही मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा. थोड़ी देर बाद हम लोग फिर टीले पर आकर बैठ गए मैंने लड़की से कहा चलो पापा मम्मी वाला खेल खेलते हैं.

लड़की कहने लगी मुझे यह खेल नहीं आता है मैंने कहा मुझे यह खेल आता है. मैंने पापा मम्मी को कई बार खेलते हुए देखा है मैं लड़की को झाड़ी के पीछे ले गया. और मैंने लड़की को पीठ के बल सीधा लिटा दिया लड़की का घाघरा और उसकी चड्डी उतार दी. और मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया मैंने उसकी सुसु अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दी.

तो लड़की मस्त हो गई कहने लगी बहुत मजा आ रहा है फिर मैं सिक्सटी नाइन की स्थिति में उसके ऊपर लेट गया. और मैंने अपना लंड उसके मुंह में दे दिया और कहा यह तू भी चूस तेरे को भी बहुत मजा आएगा. लड़की ने मेरा पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. हम दोनों एक दूसरे के लंड और चूत चूस रहे थे तभी किसी की आने की आहट सुनाई दी. “Desi Village XXX Story”

तो हम लोग अलग हो गए और अपने कपड़े पहन कर टीले के पास आ गए. उस दिन मैं उस लड़की की चुदाई नहीं कर सका, लड़की चुदाई के लिए तैयार थी लेकिन किसी के आज आने की आहट के कारण में चुदाई नहीं कर सका. मेरा लंड प्यासा ही रह गया मैंने लड़की के सामने ही अपनी मुठ मारी लड़की कहने लगी यह क्या कर रहे हो. मैंने कहा यह मैं मुठ मार रहा हूं कल पापा मम्मी वाला बाकी खेल भी खेलेंगे.

दूसरे दिन जब हम लोग गए तो पहले की तरह झाड़ियों के पीछे पहुंच गए. मैंने लड़की की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स चूसने लगा. थोड़ी देर में लड़की की चूत पानी छोड़ने लगी तो मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया और अपना लंड उस लड़की के मुंह में दे दिया. हम दोनों ने 10 मिनट तक एक दूसरे की चूत और लंड चाहते लड़की की चूत नमकीन पानी छोड़ने लगी.

तो मैंने उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और अपना लंड थूक लगा धीरे-धीरे लड़की की चूत में डालना शुरू किया. लड़की कहने लगी दर्द हो रहा है दर्द हो रहा है, मैंने उससे कहा तेरी चूत अभी फ्री नहीं है इसलिए थोड़ा सा दर्द होगा थोड़ा सा बर्दाश्त करो. मैं रोका नहीं धीरे-धीरे मैंने लड़की की चूत में लण्ड डालकर चुपचाप लेट गया. थोड़ी देर बाद जब लड़की का दर्द कम हो गया तो मैंने फिर मैंने चूत में लंड घिसना शुरू कर दिया.
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

धीरे-धीरे लड़की को भी मजा आने लगा और वह भी मेरी चुदाई में सहयोग करने लगी. 15 मिनट की चुदाई के बाद में अपना माल पानी उसी की चूत में छोड़ गए. हम दोनों एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही देते रहे फिर अलग होगए. कई दिनों तक हम लोग इसी तरह चुदाई का मजा लेते रहे. मेरे पापा मम्मी जिस तरह से अलग-अलग आसन में चुदाई का मजा लेते थे मैं भी उसी को देखकर लड़की के साथ चुदाई का मजा लेता था.

एक बार मैंने लड़की को घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत चाटी फिर उसकी चूत घोड़ी बनाकर मारी. हम दोनों को बहुत मजा आया लड़की को भी मरवाने में बहुत मजा आता था. इसलिए वह भी जल्दी तैयार हो जाती थी हम लोग झाड़ी के पीछे जाकर रोज संभोग करते थे. लड़की उस समय एमसी से ठीक से नहीं होती थी इसलिए प्रेग्नेंट होने का ज्यादा डर नहीं था.

पहली बार जब मैंने लड़की की चुदाई की तो उसकी चूत से ढेर सारा खून निकला मेरा लंड भी खून से रंगे आता लड़की डर गई. लेकिन मैंने उससे कहा कि मैंने बीएफ में देखा है लड़की चूत से खून निकलता है तो लड़की समझ गई. हम दोनों ने उस दिन चुदाई के बाद अपने पास के ही एक तालाब में धोया और लड़की की चूत भी धोकर साफ कर दी. ताकि उसके घर वालों को पता ना पड़े की लड़की चुदाई करवा कर आई है आगे की कहानी अगले भाग में मैं लिखूंगा!

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

मैं भागलपुर शहर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं शहर से थोड़ी दूर एक छोटे शहर या कस्बे का रहने वाला हूँ. यह बात दीवाली की है, जब मैं घर गया था. मैं अपने गांव गया, जहाँ चाची ने मुझे बहुत स्नेह दिया और रात को पिछली बार की तरह बदले में उन्हें प्यार दिया. “Adult Stories”

फिर अगली सुबह हमारे पड़ोस में रहने वाली एक दीदी चाची के पास आईं. चूंकि बचपन में वहीं रहा, उनके साथ खेला कूदा, बड़ा हुआ, तो मैं उनके बारे में सब जानता था. मैं उन्हें नमस्ते कहकर वहाँ से चला गया.

अपने कुछ दोस्तों के साथ बगल वाले गांव से निकलती नदी पर नहाने चला गया, जहाँ हमने ठंडे ठंडे पानी में बहुत देर तक उछल कूद की. जिससे मुझे ज़ुकाम हो गया. शाम के समय तक थोड़ा बहुत बुखार भी आ गया था. बस मैं खटिया पर लेटा था.

चाची बहुत देर से कहीं बाहर गई थीं, तभी वो पड़ोसन, जिसे मैं दीदी कहता था … घर आईं. चूंकि मैं अकेला था, तो वे मेरी खटिया पर बैठकर मुझसे बात करने लगीं. खटिया के पास एक रुमाल पड़ा था, जिससे मैं कई बार अपनी नाक पौंछ चुका था. उन्होंने उसे उठाया और मुझे डांटते हुए अंदाज में बोला- क्यों बे सोनू … तू ये सब काम कब से करने लगा?

तो मैं बोला- कैसे काम? मैंने क्या गलती कर दी?

वो मुझे रूमाल दिखाकर बोलीं- ये क्या है?


मैं बोला- रुमाल ही तो है, इसमें क्या गड़बड़ है?

वो- क्या पौंछा है इससे तूने?

मैं- क्या आपको क्या दिखता है … मेरी नाक है. कहीं आपने इसे और कुछ तो नहीं समझ लिया?

वो- अरे बेबकूफ ऐसे पौंछेगा तो कोई भी गलत समझेगा ही.

मैं- ये तो समझने वाले के ऊपर है. वैसे अगर ये सचमुच में वही होता तो!

वो- तो तेरी शामत आ जाती अभी.


मैं- वैसे मुझे वो सब अपने आप करने की कोई जरूरत पड़ती ही नहीं, तो कैसी दिक्कत.

वो- मतलब? किससे करवाता है.

मैं- इससे आपको क्या? सबके अपने अपने राज होते हैं.

वो- कैसे राज? कहीं कोई गलत काम तो करके नहीं आया न.

मैं- अरे थोड़ा शांत बैठो, ऐसा कुछ नहीं है. मैं बस मजाक कर रहा था, केवल मजे ले रहा था और कुछ नहीं.

वो- मजाक ठीक है, लेकिन अगर ये सच हुआ, तो तेरी ऐसी की तैसी हो जाएगी जरा संभल के चलो, अभी बता रही हूँ.

मैं- इसमें गलत क्या है. अगर कोई आपसे काम के लिए कहता है या मजबूरी में आपको करना पड़ता है, तो बात अलग होती है.

वो जरा बिंदास बोलती थीं तो खुल कर कहने लगीं- ऐसा कौन होगा, जो किसी से भी चुदवा ले.

मैं- कुछ लोगों की होती है … मजबूरी या कोई ऐसा, जो आपको पसंद करता हो या फिर चुदाई के शौक़ीन.

वो- तू पहले भी किसी को चोद चुका है.

मैं- अब ये मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि थोड़ा प्राइवेट मामला है.

वो- कुछ भी हो लेकिन अपने पेरेंट्स की इज्जत का ख्याल रखना.

इतना कह कर वो चली गईं, इनके बारे में थोड़ा बहुत बताता हूं. उनका नाम डिम्पल सेक्सी बदन, उम्र-29 वर्ष, पति ने धोखा देकर इन्हें 10 साल पहले छोड़ दिया था, अब ये अपने पेरेंट्स के साथ रहती हैं.

अगले दिन चाची के भाई की तबियत खराब हो गई, जिससे वो अपने मायके घर को मेरे हवाले छोड़कर चली गईं. मैं भी अकेले होने के चक्कर में अपने लंड को हिला रहा था, तभी दीदी ने मुझे आवाज दी और कमरे में आ गईं. मैंने झट से अपने कपड़े ठीक किए.

वो बोलीं- अकेले अकेले क्या कर रहा था? जो तूने मेरी आवाज नहीं सुनी.

मैं- कुछ नहीं, वो अन्दर था तो आवाज नहीं आई.

वो- लेकिन तेरी पैन्ट को देखकर तो नहीं लगता. रुक अब तेरी मम्मी को बताना ही पड़ेगा.

मैं- अरे सॉरी न … कोई कितना कंट्रोल कर सकता है.

वो- तू रुक … अभी बताती हूँ कण्ट्रोल कैसे होता है … तेरी मम्मी को जब पता लगेगा तो अपने आप ही सीख जाएगा.

मैं- बोला न सॉरी … गलती हो गई, चाहो तो कोई सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ … बहुत मार पड़ेगी.

वो- जब मार से डरते हो तो ऐसे काम करते ही क्यों हो.

मैं- माफ़ी मांग रहा हूँ न … और क्या करूँ. आप चाहें तो कोई भी सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ प्लीज.

वो- चल ठीक है … बता किसको याद करके हिला रहा था.

मैं- आप भी न मौके का फायदा उठा रही हो.

वो- लगाऊं फोन?

मैं- हैं भागलपुर में एक दो, जिनके साथ, उन्हीं के उनके कहने पर करता हूँ. बदले में वो भी मुझे खुश रखती हैं.

वो- अभी तो मैं जा रही हूँ, लेकिन अभी तेरी सजा बाकी है, बाद में बताती हूँ.

फिर वो चली गईं. उनकी धमकियों से एक टाइम तो मेरी गांड फट गई थी, लेकिन फाइनली वो मान गईं. अब मैं सोचने लगा कि ये मुझसे क्या करवाएंगी. तभी चाची का फोन आया, उन्होंने बोला- तू डिम्पल के यहाँ खाना खा लेना, मैं सुबह आऊँगी. कुछ देर बाद मैं खाना खाने पहुंचा और उनसे बोला- दीदी भूख लगी है कुछ मिलेगा.

वो बोलीं- हाँ मिलेगा न … रसोई में बैठ, मैं अभी आई.

रसोई में बिठा कर उन्होंने मुझे खाना परोसा और मेरे सामने बैठ गईं. फिर बोलीं- आज तू मेरा एक काम करेगा.

मैं- वैसे भी आपने जो धमकी दी है, उसको ध्यान करके तो करना ही पड़ेगा.

वो- जैसे कि तूने कहा कि सबकी अपनी जरूरत होती है. मेरी भी है … क्या तू उसे ख़त्म करेगा.

मैं- मतलब?

वो- मतलब तू मुझे चोदेगा.

मैं- क्यों आपको कैसे?

वो- अबे पूछ नहीं … बता रही हूँ तैयार रहना.


मैं- ठीक है … और कर भी क्या सकता हूँ.

मैं घर आ गया और उनके बारे में सोच सोचकर उनके प्रति फीलिंग्स लाने की कोशिश करने लगा, लेकिन बात बन नहीं रही थी. मेरे मन में उनके प्रति कोई गलत विचार नहीं आ रहे थे. फिर मैंने उनकी बॉडी को इमैजिन किया. मेरी जितनी हाइट, एवरेज शरीर, एवरेज बूब्स लेकिन गांड थोड़ी बड़ी थी, जिससे थोड़ी बहुत फीलिंग मेरे अन्दर आई. तभी शाम हो गई और करीब 8-9 बजे वो आ गईं.

वो थोड़ा बहुत एडल्ट बात करके बोलीं- चल शुरू हो जा.

मैं- कैसे शुरू हो जाऊं … क्या करूँ?

वो- जो कर सकता है, वो कर.

मैं- मैं अकेला क्या करूँगा, करने को तो बहुत तरीके हैं, लेकिन अकेला कुछ नहीं कर पाउँगा.

वो- अबे भोसड़ी के सीधे सीधे बोल न … क्या करना है, बातों को घुमा क्यों रहा है?

मैं- एक काम करो, पहले एक वीडियो देख लो, फिर ही आप कुछ समझ पाओगी.

मैंने उन्हें एक पोर्न वीडियो दिखा दी, जिससे वो थोड़ा बहुत गर्म हो गईं और मेरे पास बैठकर मुझे किस करने लगीं. मैं भी बराबर साथ देने लगा और उनके बूब्स प्रेस करने लगा. किस करते करते मैंने उनके कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे कपड़े खींचते हुए उतार दिए.

किस के बाद मैं उनके बूब्स को चूमने लगा. उनके मम्मे मेरे अनुमान से कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे. उनका हाथ भी मेरे लौड़े तक पहुँच गया, जिसे वो सहलाने लगीं. फिर मैं उनकी चूत के पास आ गया.

उसके आस पास काफी बाल थे, उन बालों के बीच उनकी कई सालों से अनचुदी चूत रिस रही थी. मैंने उसमें उंगली की और चूत की फांकों के बीच के भाग को, मतलब दाने को अपने होंठों से खींचने लगा. जिससे वो बेड पर गांड उछालते हुए उछलने लगीं.

मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था, जिससे वो थोड़ी ही देर में झड़ गईं. मैंने उन्हें मेरा लंड चूसने को कहा, पहले तो उन्होंने मना किया. फिर मेरी जिद पर उन्होंने तब तक उसे मुँह में लिया, जब तक वो पूरी तरह खड़ा नहीं हो गया. “Adult Stories”

इन सब क्रियाओं के बाद मैं उनकी चुदाई करने जा रहा था. मैंने उनकी चूत के छेद में थूक भरा और धीरे धीरे दो तीन धक्कों में पूरा लंड अन्दर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकालकर एक ही झटके में दोबारा घुसा दिया, जिससे वो चिल्ला कर बोलीं- अबे मादरचोद धीरे कर … मार डाला साले … इतना तेज मत कर.

लेकिन मैं और तेज चुदाई करने लगा. वो बेड पर सीधी लेटी हुई थीं, उनकी एक टांग मेरे हाथ में और दूसरी टांग बेड पर रखी हुई थी. मैं अपना लंड उनकी चूत में पूरा बाहर निकालकर झटके से अन्दर डालता और दोबारा बाहर निकालकर फिर झटका दे मारता, जिससे वो गाली पर गाली बके जा रही थीं.

दीदी ‘धीरे कर … धीरे कर साले …’ चिल्ला रही थीं. थोड़ी देर बाद मैं थोड़ा आराम से करने लगा, जिससे उन्हें भी पूरा मजा आने लगा. खैर मुझे तो मजा आ ही रहा था. मैं दीदी को चोदने के साथ साथ उनके मम्मों को भी मसल रहा था. “Adult Stories”

थोड़ी देर बाद जब मैं थक गया तो मैं लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गईं. अब दीदी अपनी चूत में लंड लेकर चुदवाने लगीं. इस स्थिति में उन्हें किस भी कर सकता था. थोड़ी देर बाद उन्होंने पानी छोड़ दिया, लेकिन मैं उन्हें कुतिया बनाकर तब तक पेलता रहा, जब तक कि मैं नहीं छूटा.

जब सब ख़त्म हुआ तो वो बोलीं- मजा आ गया. शायद ही कोई इस तरह करता होगा … एक बार और हो जाए. मैं उनके दूध दबा कर बोला- जी हुजूर. बस कुछ ही देर में एक बार और पूरे जोरों शोरों के साथ ठुकाई हुई. उन्हें बहुत मजा आया, उन्होंने मुझे बकी गालियों के लिए माफी मांगी और चुदाई के लिए शुक्रिया अदा किया. 

 


ससुर करवा चौथ पर बहु को धका धक पेलने लगे

ससुर करवा चौथ पर बहु को धका धक पेलने लगे  May 9, 2021 by crazy Sasur Bahu Antarvasna  मेरा नाम लतिका है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं अपने ससुर के साथ अकेली रहती हूँ। मेरे पति कोलकाता में नौकरी करते है। वो 2 3 महीने में एक बार ही घर आते है। जब भी आते है मुझे बहुत प्यार करते है। मेरे ससुर जी भी बहुत अच्छे है। मेरे देवर की नौकरी कानपुर में लग गयी है। पहले वो हमारे साथ ही प्रयागराज में रहता था पर नौकरी लगने के बाद वो चला गया। Sasur Bahu Antarvasna  अब घर में मैं और ससुर जी है। मैं आप लोगो को अपने बारे में बताना चाहती हूँ। मैं 35 साल की जवान और सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे बच्चे नही हुए है। मैं सुंदर और जवान हूँ और आकर्षक व्यक्तित्व वाली औरत हूँ। मेरा कद 5’ 4” का है। जिस्म भरा हुआ है। मैं काफी गोरी हूँ और चेहरा का फेस कट बहुत सेक्सी है।  मेरी जवानी देखकर मर्दों के लंड खड़े हो जाते है। मन ही मन वो मुझे चोद लेना चाहते है पर ये मौका तो कुछ लोगो को ही मिला है। मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। मेरे पति मेरे 38” के मम्मो को दबा दबा कर मेरी चूत मारते है। मेरा फिगर 38 32 36 का है। मुझे अपनी चूचियां दबवाने में बहुत अच्छा लगता है।  जब कभी पराये मर्द के साथ चुदाई करने का मौक़ा मिलता है तो मैं चुदवा लेती हूँ। “खाओ खुजाओ और बत्ती बुजाओ” वाले कांसेप्ट में मैं विश्वास करती हूँ। 2 दिन पहले की बात है मेरी बात मेरे पति से हुई थी।  “जान!! क्या तुम करवाचौथ पर घर नही आ रहे हो?? हर बार तुम करवाचौथ पर नही आते हो। देखो ये बुरी बात है। मैं किसके साथ पूजा करुँगी” मैंने अपने पति ऋतुराज से पूछा। मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी : Buaa Ne Mujhe Condom Lane Ko Bheja Chudai Liye 2  फिर से उसने बहाना बना दिया। “देखो मैं अपने बोंस से बात करूंगा और छुट्टी मागूंगा। अगर मिलती है तो आ जाऊँगा” ऋतुराज बोला.  असल में कुछ महीनो से उसका उसकी सेक्रेटरी से चक्कर चल रहा था। ऋतुराज कोलकाता की एक फर्म में चार्टर अकाउंटेंट था। वो बस पैसे के पीछे भागने वाला मर्द था और खूबसूरत और जवान लडकियों को देखकर फिसल जाता था।  मुझे कुछ दिन पहले उसके ऑफिस से किसी ने बताया था की ऋतुराज का उसकी सेक्रेटरी से अफेयर चल रहा है और दोनों ऑफिस में ही मजे लूट लेते है। ये बात जानकर मैं काफी दुखी हो गयी थी। आखिर 2 दिन बाद करवाचौथ का त्यौहार आ गया और ऋतुराज नही आया।  “पापा जी!! वो नही आये” मैंने कहा और रोने लगी.  मेरे ससुर बहुत अच्छे आदमी थे। मेरा पति बहुत नालायक था पर ससुर जी बहुत अच्छे थे। मेरी बहुत देखभाल करते थे। उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। मैं फूट फूट कर रोने लगी।  “रो मत मेरी बच्ची!! रो मत!! मेरा बेटा इतना नालायक निकलेगा मुझे नही मालुम था” वो बोले और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फिराने लगे।  “पापा जी!! अब मैं पूजा किसकी करूं। देखो चाँद भी निकल आया है” मैंने आशुं बहाते हुए पूछा.  “बहू! चलो तुम मेरे साथ पूजा कर लो” ससुर जी बोले।  उनको मैं हमेशा पापा जी कहकर बुलाती थी. फिर वो भी नये कपड़े पहनकर छत पर आ गये। मैंने अपनी सुहाग वाली साड़ी पहनी थी जब मेरी शादी हुई थी। मैंने चाँद को देखकर पूजा की फिर ससुर जी को छन्नी में देखा। फिर किसी बीबी की तरह मुझे अपने पति के पैर छूने थे। पति तो थे नही मैंने झुककर ससुर जी के पैर छू लिए। चुदाई की गरम देसी कहानी : Chudai Ka Khel Park Mein Girlfriend Ke Sath  वो अच्छे मूड में दिख रहे थे। उन्होंने ही मुझे पानी पिलाकर मेरा व्रत तुड़वाया। आज ससुर जी से सुबह से कुछ नही खाया था क्यूंकि मेरे साथ वो भी व्रत थे। हम दोनों नीचे चले गये। मैंने उनको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। मैं पूरी तरह से नवविवाहिता दुल्हन लग रही थी। हाथो और पैरों में मैंने मेहँदी लगा रखी थी। रात के 10 बजे हुए थे।  घर में सन्नाटा था। सिर्फ 2 लोग घर में थे इसलिए थोडा अजीब लग रहा था। ससुर जी बार बार मेरे दूध की तरफ देख रहे थे। मैं बाही खुला वाला कट स्लीव ब्लाउस पहना था और ब्लाउस भी आगे से गहरा था। मेरी 38” की गोल गोल चूचियां साफ साफ़ दिख रही थी। ससुर जी मेरे मम्मो की तरफ ताड़ रहे थे और जैसे मैं उसकी तरह देखने लग जाती वो नजरे दूसरी तरफ घुमा लेते।  मैं सुंदर और जवान औरत थी। आखिर वो क्यों नही मेरी जवानी देखते। फिर मैंने सोचा की आज ससुर जी भी पूरा दिन व्रत रहे है। क्यों न मैं उनको अपने हाथ से खाना खिला दूँ। मैंने पुड़ी का एक कौर तोड़ा और सब्जी में डुबोया और ससुर जी को खिलाने लगी। वो संकोच कर रहे थे।  “क्या पापा जी! आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे है। अब अपनी बहू से कैसी शर्म” मैंने बिंदास लड़की की तरह चहक कर कहा और उनको खाना खिलाने लगी। पर दूसरी बार मेरा हाथ उसके मुंह में अंदर चला गया और जल्दबाजी में उन्होने मेरी ऊँगली को काट दिया।  “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी लग गयी” मैं चिल्लाई.  ससुर जी ने जल्दी से मेरी ऊँगली मुंह में दबा ली और चूसने लगे। जिससे मुझे आराम मिल सके। कुछ देर में मुझे आराम मिलने लगा। पर वो चूसते ही चले गये। फिर मुझे देखकर रुक गये और मेरी तरफ दूसरी नजर से देखने लगे। मैं भी उनको ही देख रही थी। कुछ अजीब अब होने वाला था।  फिर अचानक उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठे बैठे ही पकड़ लिया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए। जल्दी जल्दी चूसने लगे और मुझे कुछ सोचने का मौक़ा नही दिया। मैं मना कर रही थी पर तब तक बहुत देर हो गयी थी। ससुर जी से 5 मिनट तक मेरे रसीले होठ चूस डाले। फिर अपना मुंह मेरे मुंह से हटाया। वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गयी थी।  आगे के 15 मिनट कैसे गुजरे मुझे याद नही है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और सीधा अपने बेडरूम की तरह बढ़ने लगे। मैं चुप थी। मैं सोच नही पा रही थी की क्या करू। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और जल्दी से अपनी शर्ट की बटन खोलकर शर्ट उतारकर फेंक दी। वो मेरे उपर लेट गये और जल्दी जल्दी मेरे गालों पर किस करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna” मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : Barish Wala Romantic Sex Kiya Pyasi Aurat Ke Sath  मैं परेशान थी। मैं बहुत हैरान थी। पर ना जाने क्यों मैंने उनको मना नही किया। मैं चाहती तो ससुर जी को रोक सकती थी। पर शायद इस काली सुनसान रात में चुदाई के मजे लूटना चाहती थी। ससुर जी से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे ब्लाउस से हटा दिया और मुझे बाहों में भर लिया।  मेरे ब्लाउस पर वो हाथ घुमाने लगे। वो आज मेरी जवानी और खूबसूरती के आशिक हो गये थे। मैं पूरी तरह से नई दुल्हन की तरह सजी धजी थी और ससुर जी आप मेरे पति का रोल निभा रहे थे। वो मेरे गाल, गले, काम, चेहरे सब जगह किस कर रहे थे। मैं भी साथ दे रही थी।  “बहु!! आज तुमने करवाचौथ की पूजा मेरे साथ की है। छन्नी में तुमने मेरा चेहरा देखा है। तो आज मुझसे प्यार करके तुम अपने व्रत को पूरा कर दो” ससुर जी बोले.  “….तो क्या आप चाहते है की मैं आपको अपनी रसीली चूत चोदने क दे दूँ” मैंने हांफते हुए और लम्बी लम्बी सांसे खीचते हुए कहा.  “हा बहू!! मैं बिलकुल यही चाहता हूँ। तुम्हारा पति वहां कोलकाता में अपनी सेक्रेटरी के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहाँ पर प्यासी रह जाओ। ये तो सरासर गलत है। बोलो बहू क्या ख्याल है?  ससुर जी से चमकती आँखों से इस तरह से पूछा की मैं मना नही करपाई। मैंने हां में सिर हिला दिया। उसके बाद तो ससुर जी शुरू हो गये। मेरे बड़े बड़े कसे कसे मम्मो को ब्लाउस के उपर से लप्प लप्प करके दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। ससुर जी मुझे प्यार करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”  ब्लाउस के अंदर से जितना दूध दिख रहा था उस पर चुम्बन की बारिश करने लगे। मैं भी गर्म होने लगी। मुझे मजा आने लगा। फिर से उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह पर रख दिया और फिर से मेरे रसीले को काट काटकर किस करने लगे।  अब मैं गर्म हो गयी थी। मेरे अंदर की वासना भी अब जाग गयी थी। मैं भी अब ससुर जी से चुदना चाहती थी। वो अपने दोनों हाथो को गोल गोल मेरे ब्लाउस पर घुमा रहे थे। दबा दबाकर मजा लूट रहे थे।  “प्यार करो पापा जी!! आज मुझसे खुलकर प्यार करो” उतेज्जना में मैंने कह दिया.  वो मेरे ब्लाउस की बटन ढूढने लगे और खोलने लगे। पर शायद वो बहुत जल्दी में थे। बस जल्दी से मुझे चोद लेना चाहते थे। जोश में आकर उन्होंने बटन खोलनी शुरू की पर बहुत देर लग रही थी। ससुर जी ने मेरे ब्लाउस को बीच से दोनों हाथो से पकड़ा और जोर से खीचा। ब्लाउस फट गया।  लाल ब्रा में मेरी कसी कसी 38” की रसेदार चूचियों के दर्शन ससुर जी को होने लगे। ब्रा के उपर से वो मेरे कबूतर सहलाने लगे और दबाने लगे। “आह बहू!! तुम तो बहुत खूबसूरत हो” वो बोले और फिर ब्रा को दोनों हाथ से पकड़कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया। अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : Biwi Ki Chudai Ka Raj Suhagrat Mein Khula  अब मैं उपर से नंगी हो गयी थी। पापा जी वासना में आकर मेरे मम्मो के दर्शन करने लगे। आपको बता दूँ की मेरी चूचियां बेहद सुंदर थी। कसी कसी गोल गोल बड़ी बड़ी। संगमरमर जैसी चिकनी। ससुर जी की आँखें वासना में चमक उठी। मेरे दोनों दूध पर रख दिया और सहलाने लगे।  मैंने आँखे बंद कर ली और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। वो मेरे उपर ले लेट गये और मम्मो के बीच में अपना चेहरा रखकर खेलने लगे। मेरे दूध किसी गेंद की तरह बड़े बड़े और बेहद सॉफ्ट थे। ससुर जी हाथ से मेरी गेंद को दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। “Sasur Bahu Antarvasna”  फिर वो पूरी तरह से मेरी जवानी के दीवाने हो गये। मेरी दोनों गेंद से खेलने लगे और मेरे क्लीवेज (मम्मो के बीच के गड्ढे) में अपना मुंह अंदर डालने लगे। जल्दी जल्दी अपना चेहरा इधर उधर करने लगे जिससे मेरे दूध उसके मुंह से जल्दी जल्दी टकरा रहे थे। मेरी तो चूत से नदी ही बहने लगी। मेरी चूत से पानी निकलने लगा।  “आह पापा जी!! आज रात के लिए मैं आपकी औरत हूँ। आज चोद लो मुझे आप। ले लो मजा मेरी भरी जवानी का” मैंने भी नशे में कह दिया. उसके बाद वो जल्दी जल्दी मेरे कबूतर हाथ से मसलने लगे और दबाने लगे। आटे की तरह गूथ रहे थे मेरी दोनों चूचियों को। फिर मुंह में लेकर चूसने लगे।  मैं तो “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…”करने लगी। क्यूंकि मुझे भी अच्छा लग रहा था। कितने महीनो से मेरा पति ऋतुराज घर नही आया था। तो आज ससुर जी ही उसकी जगह उसका कर्तव्य निभा रहे थे। वो मेरी लेफ्ट साइड वाली चूची को मुंह में अंदर तक ठूस कर जल्दी जल्दी चूस रहे थे। पीये जा रहे थे।  मेरे जिस्म में अब चुदाई वाली आग लग रही थी। ससुर जी तो रुक ही नही रहे थे। बस जल्दी जल्दी चूसते ही जा रहे थे। कामुकता में आकर मैंने उनके सिर के बाल पकड़ लिया और अपनी उँगलियों से पकड़कर नोचने लगी। मैंने 2 चांटे भी उनको गाल पर मार दिए। वो समझ गये की बहुत अब गर्म हो रही है। चूत तो अब जरुर देगी।  ससुर जी ने 15 से 20 मिनट मेरी चूचियों का रस चूसा। खूब मुंह चलाकर पिया। इसी गरमा गर्मी में उन्होंने मेरी चूची की उभरी हुई गद्देदार निपल्स को कई बार दांत से पकड़कर उपर की तरह खींच खीच चूसा जिससे मुझे दर्द हुआ। पर मजा भी खूब मिला। मेरे दोनों बूब्स पर उनके दांत के निशान बन गये। “Sasur Bahu Antarvasna”  “चोदिये पापा जी!! आज करवाचौथ है। आज मैं आपको बीबी हूँ। पति धर्म आज निभा दीजिये। आज चोद लीजिये मुझको” मैंने कहने लगी.  ससुर जी ने अपनी पेंट उतार दी और अंडरवियर भी उतार दिया। उन्होंने अपने हाथो से आज मेरा द्रौपदी की तरह चीर हरड कर दिया। मेरी साड़ी उन्होंने ही मेरी कमर से खोली और उतार दी। मैंने लाल रंग का साड़ी से मैच करता पेटीकोट पहना था। ससुर जी ने अपने मुंह से मेरे पेटीकोट का नारा खोला और उतार दी।  मेरी पेंटी मेरे ही चूत के रस से भीग गयी थी। ससुर जी उसे निकालने लगे तो घुटनों पर पेंटी फस गयी। फिर उन्होंने हाथ घुमाकर उसे उतार दिया। मैं झेप गयी। अपने चेहरे को अपने दोनों हाथो से मैंने जल्दी से छुपा लिया क्यूंकि आज मैं ससुर जी के साथ हमबिस्तर होने जा रही थी। उसने चुदने जा रही थी।  ससुर जी पागल हो गये। मेरी जांघे और पैर बहुत सुंदर थे। गोरे गोरे और कमाल के चिकने। वो मुझे प्यार करने लगे। मेरे पैरो को हाथ से टच करने लगे। फिर मेरे पैर खोल दिए। 2 सेकंड ससुर जी से रस से पूरी तरह से तर और भीगी चूत के दर्शन करने लगे फिर तो ऐसा मेरी चूत पर टूट पड़े जैसे रबड़ी को देखकर बिल्ली उस पर टूट पड़ती है।  लेटकर अपना मुंह मेरी चूत पर उन्होंने टिका दिया और जल्दी जल्दी चूत की चटनी पीने लगे। कामुकता के नशे में आकर मैं “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरी आँखे बंद थी। मैं ससुर जी से नजरे नही मिला पा रही थी। वो जल्दी जल्दी मेरी तर चूत को रबड़ी की तरह चाट रहे थे। कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पैसे की लालची औरत को पटा लिया मैंने  मेरी खूबसूरत चुद्दी गुलाबी रंग की थी। अब तो मुझे दोहरा नशा मिल रहा था। वो अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाल रहे थे। मैं अभी भी अपने चेहरे को अपने हाथो से छुपा रही थी। कितना मजा लुट रही थी मैं। ससुर ने 10 मिनट मेरी चुद्दी चाटी। अंत में लंड चूत पर सेट कर दिया और जोर का धक्का दिया। “Sasur Bahu Antarvasna”  लंड 4” अंदर घुस गया। मुझे दर्द हो रहा था। फिर ससुर जी ने एक जोर का धक्का फिर से दिया। अब उनका 8” लंड पूरा अंदर घुस गया। मैं दर्द से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”बोलकर चिल्ला पड़ी। मैंने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा दिए और उनको मुंह पर मुक्के मारने लगी।  ससुर जी भी असली मर्द के बच्चे थे। उन्होंने बड़ी ताकत से मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ लिए और बिस्तर पर रख दिये। मेरी नाजुक कलाई पकड़कर उन्होंने चुदाई स्टार्ट कर दी। मुझे धका धक पेलने लगे। आज पुरे 3 महीनो बाद मैं चुद रही थी क्यूंकि मेरा पति ऋतुराज घर ही नही आया था। इस वजह से मेरी चूत का रास्ता बंद हो गया था।  पर आज मेरे मर्दाना मिजाज वाले ससुर जी मुझे पेल रहे थे। वो कमर उठा उठाकर मुझे चोद रहे थे। मैं लम्बी सांसे ले रही थी। मेरे दूध हिल रहे थे। उपर नीचे डांस कर रहे थे। ससुर जी सिर्फ मेरी चूत की तरह देखकर पेल रहे थे। मैं मर रही थी। 15 मिनट बिता तो चूत रंवा हो गयी। अब ससुर जी का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा। दिल खोलकर चुदी है। फिर हाँफते हांफते ससुर जी से मुझे 10 मिनट और चोदा। फिर उनका चेहरा ढीला पड़ गया। मेरी चूत में गर्म गर्म माल उन्होंने छोड़ दिया। मेरे उपर को थक कर गिर गये। मैंने उनके होठ फिर से चूमने लगी।


मेरा नाम लतिका है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं अपने ससुर के साथ अकेली रहती हूँ। मेरे पति कोलकाता में नौकरी करते है। वो 2 3 महीने में एक बार ही घर आते है। जब भी आते है मुझे बहुत प्यार करते है। मेरे ससुर जी भी बहुत अच्छे है। मेरे देवर की नौकरी कानपुर में लग गयी है। पहले वो हमारे साथ ही प्रयागराज में रहता था पर नौकरी लगने के बाद वो चला गया। Sasur Bahu Antarvasna

अब घर में मैं और ससुर जी है। मैं आप लोगो को अपने बारे में बताना चाहती हूँ। मैं 35 साल की जवान और सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे बच्चे नही हुए है। मैं सुंदर और जवान हूँ और आकर्षक व्यक्तित्व वाली औरत हूँ। मेरा कद 5’ 4” का है। जिस्म भरा हुआ है। मैं काफी गोरी हूँ और चेहरा का फेस कट बहुत सेक्सी है।

मेरी जवानी देखकर मर्दों के लंड खड़े हो जाते है। मन ही मन वो मुझे चोद लेना चाहते है पर ये मौका तो कुछ लोगो को ही मिला है। मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। मेरे पति मेरे 38” के मम्मो को दबा दबा कर मेरी चूत मारते है। मेरा फिगर 38 32 36 का है। मुझे अपनी चूचियां दबवाने में बहुत अच्छा लगता है।

जब कभी पराये मर्द के साथ चुदाई करने का मौक़ा मिलता है तो मैं चुदवा लेती हूँ। “खाओ खुजाओ और बत्ती बुजाओ” वाले कांसेप्ट में मैं विश्वास करती हूँ। 2 दिन पहले की बात है मेरी बात मेरे पति से हुई थी।

“जान!! क्या तुम करवाचौथ पर घर नही आ रहे हो?? हर बार तुम करवाचौथ पर नही आते हो। देखो ये बुरी बात है। मैं किसके साथ पूजा करुँगी” मैंने अपने पति ऋतुराज से पूछा।


फिर से उसने बहाना बना दिया। “देखो मैं अपने बोंस से बात करूंगा और छुट्टी मागूंगा। अगर मिलती है तो आ जाऊँगा” ऋतुराज बोला.

असल में कुछ महीनो से उसका उसकी सेक्रेटरी से चक्कर चल रहा था। ऋतुराज कोलकाता की एक फर्म में चार्टर अकाउंटेंट था। वो बस पैसे के पीछे भागने वाला मर्द था और खूबसूरत और जवान लडकियों को देखकर फिसल जाता था।

मुझे कुछ दिन पहले उसके ऑफिस से किसी ने बताया था की ऋतुराज का उसकी सेक्रेटरी से अफेयर चल रहा है और दोनों ऑफिस में ही मजे लूट लेते है। ये बात जानकर मैं काफी दुखी हो गयी थी। आखिर 2 दिन बाद करवाचौथ का त्यौहार आ गया और ऋतुराज नही आया।

“पापा जी!! वो नही आये” मैंने कहा और रोने लगी.

मेरे ससुर बहुत अच्छे आदमी थे। मेरा पति बहुत नालायक था पर ससुर जी बहुत अच्छे थे। मेरी बहुत देखभाल करते थे। उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। मैं फूट फूट कर रोने लगी।

“रो मत मेरी बच्ची!! रो मत!! मेरा बेटा इतना नालायक निकलेगा मुझे नही मालुम था” वो बोले और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फिराने लगे।

“पापा जी!! अब मैं पूजा किसकी करूं। देखो चाँद भी निकल आया है” मैंने आशुं बहाते हुए पूछा.

“बहू! चलो तुम मेरे साथ पूजा कर लो” ससुर जी बोले।

उनको मैं हमेशा पापा जी कहकर बुलाती थी. फिर वो भी नये कपड़े पहनकर छत पर आ गये। मैंने अपनी सुहाग वाली साड़ी पहनी थी जब मेरी शादी हुई थी। मैंने चाँद को देखकर पूजा की फिर ससुर जी को छन्नी में देखा। फिर किसी बीबी की तरह मुझे अपने पति के पैर छूने थे। पति तो थे नही मैंने झुककर ससुर जी के पैर छू लिए।


वो अच्छे मूड में दिख रहे थे। उन्होंने ही मुझे पानी पिलाकर मेरा व्रत तुड़वाया। आज ससुर जी से सुबह से कुछ नही खाया था क्यूंकि मेरे साथ वो भी व्रत थे। हम दोनों नीचे चले गये। मैंने उनको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। मैं पूरी तरह से नवविवाहिता दुल्हन लग रही थी। हाथो और पैरों में मैंने मेहँदी लगा रखी थी। रात के 10 बजे हुए थे।

घर में सन्नाटा था। सिर्फ 2 लोग घर में थे इसलिए थोडा अजीब लग रहा था। ससुर जी बार बार मेरे दूध की तरफ देख रहे थे। मैं बाही खुला वाला कट स्लीव ब्लाउस पहना था और ब्लाउस भी आगे से गहरा था। मेरी 38” की गोल गोल चूचियां साफ साफ़ दिख रही थी। ससुर जी मेरे मम्मो की तरफ ताड़ रहे थे और जैसे मैं उसकी तरह देखने लग जाती वो नजरे दूसरी तरफ घुमा लेते।

मैं सुंदर और जवान औरत थी। आखिर वो क्यों नही मेरी जवानी देखते। फिर मैंने सोचा की आज ससुर जी भी पूरा दिन व्रत रहे है। क्यों न मैं उनको अपने हाथ से खाना खिला दूँ। मैंने पुड़ी का एक कौर तोड़ा और सब्जी में डुबोया और ससुर जी को खिलाने लगी। वो संकोच कर रहे थे।

“क्या पापा जी! आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे है। अब अपनी बहू से कैसी शर्म” मैंने बिंदास लड़की की तरह चहक कर कहा और उनको खाना खिलाने लगी। पर दूसरी बार मेरा हाथ उसके मुंह में अंदर चला गया और जल्दबाजी में उन्होने मेरी ऊँगली को काट दिया।

“अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी लग गयी” मैं चिल्लाई.

ससुर जी ने जल्दी से मेरी ऊँगली मुंह में दबा ली और चूसने लगे। जिससे मुझे आराम मिल सके। कुछ देर में मुझे आराम मिलने लगा। पर वो चूसते ही चले गये। फिर मुझे देखकर रुक गये और मेरी तरफ दूसरी नजर से देखने लगे। मैं भी उनको ही देख रही थी। कुछ अजीब अब होने वाला था।

फिर अचानक उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठे बैठे ही पकड़ लिया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए। जल्दी जल्दी चूसने लगे और मुझे कुछ सोचने का मौक़ा नही दिया। मैं मना कर रही थी पर तब तक बहुत देर हो गयी थी। ससुर जी से 5 मिनट तक मेरे रसीले होठ चूस डाले। फिर अपना मुंह मेरे मुंह से हटाया। वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गयी थी।

आगे के 15 मिनट कैसे गुजरे मुझे याद नही है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और सीधा अपने बेडरूम की तरह बढ़ने लगे। मैं चुप थी। मैं सोच नही पा रही थी की क्या करू। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और जल्दी से अपनी शर्ट की बटन खोलकर शर्ट उतारकर फेंक दी। वो मेरे उपर लेट गये और जल्दी जल्दी मेरे गालों पर किस करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”


मैं परेशान थी। मैं बहुत हैरान थी। पर ना जाने क्यों मैंने उनको मना नही किया। मैं चाहती तो ससुर जी को रोक सकती थी। पर शायद इस काली सुनसान रात में चुदाई के मजे लूटना चाहती थी। ससुर जी से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे ब्लाउस से हटा दिया और मुझे बाहों में भर लिया।

मेरे ब्लाउस पर वो हाथ घुमाने लगे। वो आज मेरी जवानी और खूबसूरती के आशिक हो गये थे। मैं पूरी तरह से नई दुल्हन की तरह सजी धजी थी और ससुर जी आप मेरे पति का रोल निभा रहे थे। वो मेरे गाल, गले, काम, चेहरे सब जगह किस कर रहे थे। मैं भी साथ दे रही थी।

“बहु!! आज तुमने करवाचौथ की पूजा मेरे साथ की है। छन्नी में तुमने मेरा चेहरा देखा है। तो आज मुझसे प्यार करके तुम अपने व्रत को पूरा कर दो” ससुर जी बोले.

“….तो क्या आप चाहते है की मैं आपको अपनी रसीली चूत चोदने क दे दूँ” मैंने हांफते हुए और लम्बी लम्बी सांसे खीचते हुए कहा.

“हा बहू!! मैं बिलकुल यही चाहता हूँ। तुम्हारा पति वहां कोलकाता में अपनी सेक्रेटरी के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहाँ पर प्यासी रह जाओ। ये तो सरासर गलत है। बोलो बहू क्या ख्याल है?

ससुर जी से चमकती आँखों से इस तरह से पूछा की मैं मना नही करपाई। मैंने हां में सिर हिला दिया। उसके बाद तो ससुर जी शुरू हो गये। मेरे बड़े बड़े कसे कसे मम्मो को ब्लाउस के उपर से लप्प लप्प करके दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। ससुर जी मुझे प्यार करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”

ब्लाउस के अंदर से जितना दूध दिख रहा था उस पर चुम्बन की बारिश करने लगे। मैं भी गर्म होने लगी। मुझे मजा आने लगा। फिर से उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह पर रख दिया और फिर से मेरे रसीले को काट काटकर किस करने लगे।

अब मैं गर्म हो गयी थी। मेरे अंदर की वासना भी अब जाग गयी थी। मैं भी अब ससुर जी से चुदना चाहती थी। वो अपने दोनों हाथो को गोल गोल मेरे ब्लाउस पर घुमा रहे थे। दबा दबाकर मजा लूट रहे थे।

“प्यार करो पापा जी!! आज मुझसे खुलकर प्यार करो” उतेज्जना में मैंने कह दिया.

वो मेरे ब्लाउस की बटन ढूढने लगे और खोलने लगे। पर शायद वो बहुत जल्दी में थे। बस जल्दी से मुझे चोद लेना चाहते थे। जोश में आकर उन्होंने बटन खोलनी शुरू की पर बहुत देर लग रही थी। ससुर जी ने मेरे ब्लाउस को बीच से दोनों हाथो से पकड़ा और जोर से खीचा। ब्लाउस फट गया।

लाल ब्रा में मेरी कसी कसी 38” की रसेदार चूचियों के दर्शन ससुर जी को होने लगे। ब्रा के उपर से वो मेरे कबूतर सहलाने लगे और दबाने लगे। “आह बहू!! तुम तो बहुत खूबसूरत हो” वो बोले और फिर ब्रा को दोनों हाथ से पकड़कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया।


अब मैं उपर से नंगी हो गयी थी। पापा जी वासना में आकर मेरे मम्मो के दर्शन करने लगे। आपको बता दूँ की मेरी चूचियां बेहद सुंदर थी। कसी कसी गोल गोल बड़ी बड़ी। संगमरमर जैसी चिकनी। ससुर जी की आँखें वासना में चमक उठी। मेरे दोनों दूध पर रख दिया और सहलाने लगे।

मैंने आँखे बंद कर ली और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। वो मेरे उपर ले लेट गये और मम्मो के बीच में अपना चेहरा रखकर खेलने लगे। मेरे दूध किसी गेंद की तरह बड़े बड़े और बेहद सॉफ्ट थे। ससुर जी हाथ से मेरी गेंद को दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। “Sasur Bahu Antarvasna”

फिर वो पूरी तरह से मेरी जवानी के दीवाने हो गये। मेरी दोनों गेंद से खेलने लगे और मेरे क्लीवेज (मम्मो के बीच के गड्ढे) में अपना मुंह अंदर डालने लगे। जल्दी जल्दी अपना चेहरा इधर उधर करने लगे जिससे मेरे दूध उसके मुंह से जल्दी जल्दी टकरा रहे थे। मेरी तो चूत से नदी ही बहने लगी। मेरी चूत से पानी निकलने लगा।

“आह पापा जी!! आज रात के लिए मैं आपकी औरत हूँ। आज चोद लो मुझे आप। ले लो मजा मेरी भरी जवानी का” मैंने भी नशे में कह दिया. उसके बाद वो जल्दी जल्दी मेरे कबूतर हाथ से मसलने लगे और दबाने लगे। आटे की तरह गूथ रहे थे मेरी दोनों चूचियों को। फिर मुंह में लेकर चूसने लगे।

मैं तो “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…”करने लगी। क्यूंकि मुझे भी अच्छा लग रहा था। कितने महीनो से मेरा पति ऋतुराज घर नही आया था। तो आज ससुर जी ही उसकी जगह उसका कर्तव्य निभा रहे थे। वो मेरी लेफ्ट साइड वाली चूची को मुंह में अंदर तक ठूस कर जल्दी जल्दी चूस रहे थे। पीये जा रहे थे।

मेरे जिस्म में अब चुदाई वाली आग लग रही थी। ससुर जी तो रुक ही नही रहे थे। बस जल्दी जल्दी चूसते ही जा रहे थे। कामुकता में आकर मैंने उनके सिर के बाल पकड़ लिया और अपनी उँगलियों से पकड़कर नोचने लगी। मैंने 2 चांटे भी उनको गाल पर मार दिए। वो समझ गये की बहुत अब गर्म हो रही है। चूत तो अब जरुर देगी।

ससुर जी ने 15 से 20 मिनट मेरी चूचियों का रस चूसा। खूब मुंह चलाकर पिया। इसी गरमा गर्मी में उन्होंने मेरी चूची की उभरी हुई गद्देदार निपल्स को कई बार दांत से पकड़कर उपर की तरह खींच खीच चूसा जिससे मुझे दर्द हुआ। पर मजा भी खूब मिला। मेरे दोनों बूब्स पर उनके दांत के निशान बन गये। “Sasur Bahu Antarvasna”

“चोदिये पापा जी!! आज करवाचौथ है। आज मैं आपको बीबी हूँ। पति धर्म आज निभा दीजिये। आज चोद लीजिये मुझको” मैंने कहने लगी.

ससुर जी ने अपनी पेंट उतार दी और अंडरवियर भी उतार दिया। उन्होंने अपने हाथो से आज मेरा द्रौपदी की तरह चीर हरड कर दिया। मेरी साड़ी उन्होंने ही मेरी कमर से खोली और उतार दी। मैंने लाल रंग का साड़ी से मैच करता पेटीकोट पहना था। ससुर जी ने अपने मुंह से मेरे पेटीकोट का नारा खोला और उतार दी।

मेरी पेंटी मेरे ही चूत के रस से भीग गयी थी। ससुर जी उसे निकालने लगे तो घुटनों पर पेंटी फस गयी। फिर उन्होंने हाथ घुमाकर उसे उतार दिया। मैं झेप गयी। अपने चेहरे को अपने दोनों हाथो से मैंने जल्दी से छुपा लिया क्यूंकि आज मैं ससुर जी के साथ हमबिस्तर होने जा रही थी। उसने चुदने जा रही थी।

ससुर जी पागल हो गये। मेरी जांघे और पैर बहुत सुंदर थे। गोरे गोरे और कमाल के चिकने। वो मुझे प्यार करने लगे। मेरे पैरो को हाथ से टच करने लगे। फिर मेरे पैर खोल दिए। 2 सेकंड ससुर जी से रस से पूरी तरह से तर और भीगी चूत के दर्शन करने लगे फिर तो ऐसा मेरी चूत पर टूट पड़े जैसे रबड़ी को देखकर बिल्ली उस पर टूट पड़ती है।

लेटकर अपना मुंह मेरी चूत पर उन्होंने टिका दिया और जल्दी जल्दी चूत की चटनी पीने लगे। कामुकता के नशे में आकर मैं “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरी आँखे बंद थी। मैं ससुर जी से नजरे नही मिला पा रही थी। वो जल्दी जल्दी मेरी तर चूत को रबड़ी की तरह चाट रहे थे।
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पैसे की लालची औरत को पटा लिया मैंने

मेरी खूबसूरत चुद्दी गुलाबी रंग की थी। अब तो मुझे दोहरा नशा मिल रहा था। वो अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाल रहे थे। मैं अभी भी अपने चेहरे को अपने हाथो से छुपा रही थी। कितना मजा लुट रही थी मैं। ससुर ने 10 मिनट मेरी चुद्दी चाटी। अंत में लंड चूत पर सेट कर दिया और जोर का धक्का दिया। “Sasur Bahu Antarvasna”

लंड 4” अंदर घुस गया। मुझे दर्द हो रहा था। फिर ससुर जी ने एक जोर का धक्का फिर से दिया। अब उनका 8” लंड पूरा अंदर घुस गया। मैं दर्द से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”बोलकर चिल्ला पड़ी। मैंने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा दिए और उनको मुंह पर मुक्के मारने लगी।

ससुर जी भी असली मर्द के बच्चे थे। उन्होंने बड़ी ताकत से मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ लिए और बिस्तर पर रख दिये। मेरी नाजुक कलाई पकड़कर उन्होंने चुदाई स्टार्ट कर दी। मुझे धका धक पेलने लगे। आज पुरे 3 महीनो बाद मैं चुद रही थी क्यूंकि मेरा पति ऋतुराज घर ही नही आया था। इस वजह से मेरी चूत का रास्ता बंद हो गया था।

पर आज मेरे मर्दाना मिजाज वाले ससुर जी मुझे पेल रहे थे। वो कमर उठा उठाकर मुझे चोद रहे थे। मैं लम्बी सांसे ले रही थी। मेरे दूध हिल रहे थे। उपर नीचे डांस कर रहे थे। ससुर जी सिर्फ मेरी चूत की तरह देखकर पेल रहे थे। मैं मर रही थी। 15 मिनट बिता तो चूत रंवा हो गयी। अब ससुर जी का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा। दिल खोलकर चुदी है। फिर हाँफते हांफते ससुर जी से मुझे 10 मिनट और चोदा। फिर उनका चेहरा ढीला पड़ गया। मेरी चूत में गर्म गर्म माल उन्होंने छोड़ दिया। मेरे उपर को थक कर गिर गये। मैंने उनके होठ फिर से चूमने लगी।


Author Name

Adult Stories

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.