Articles by "ससुर बहु चुदाई"

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ससुर ने रातभर चोदकर मेरी चूत को फैला दिया

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जब मेरी शादी हुई तब पहली बार मेरी चुदाई हुई और मेरे पति ने मेरी सील को तो कर मेरी चुदाई का खाता खोला। मुझे अपने पहली चुदाई में बहुत मजा आया था और जब मेरी सील टूटी थी तो जोर जोर से चीखने लगी थी और मेरी आंखे भी भर आई थी। मेरे पति थोड़े स्मार्ट काम है इसलिए मुझे उनसे ज्यादा चुदने का मन नही करता है लेकिन वो मुझे जबरदस्ती ही चोदने लगते है, इसलिए मुझे चुदवाना ही पडता है। पहले मेरे बूब्स बहुत ही टाइट और सुडोल थे।

ऐसा लगता था की जैसे कोई टाइट मुसम्मी है, लेकिन शादी के बाद मेरे पति ने मेरी चूची दबा दबा के उसको खूब बड़ा और ढीला कर दिया। लेकिन फिर भी अभी भी वो बहुत ही चिकनी और बड़े बड़े है। अब तो मुझे भी उनको मसलने में मजा आता है। और मै अपनी चूत को हमेसा साफ रखती हूँ। हर तीसरे दिन मै अपने झांटो को साफ करती हूँ ताकि मेरी चूत दिखने में अच्छी लगे। अब मेरी चूत भी थोड़ी ढीली हो गयी है लेकिन कुछ दिन ना चुदवाने से फिर थोड़ी टाइट हो जाती है।

मेरे ससुरल में मेरे पति, मेरी साँस और ससुर रहते है। मेरे ससुर की उम्र लगभग 45 साल होगी लेकिन देखने से लगता है कि अभी वो 35 के होगे। ये सब सरकारी नौकरी का कमाल है, नौकरी के पैसे से मेरे ससुर खूब खाते थे, इसलिए वो अभी भी दिखने जवान ही लगते है।मेरी शादी को 4 साल हो गया है, हमने अभी कोई बच्चे पैदा नही किया है क्योकि मेरे पति कि अभी नौकरी नही लगी थी, इसलिए वो कहते थे जब पैसे आने लगे तब बच्चे पैदा कर लेंगे, अभी केवल चुदाई करो बस। हमारा खर्चा मेरे ससुर ही उठाते है, क्योकि वो अभी रिटायर नही हुए है।

मेरे ससुर तो बहुत ही हरामी है, मेरी साँस बता रही थी कि इन्होने अपने जामने में बहुत सी लड़कियों को चोदा है और अभी भी जब मन करता है तो ये चुदाई करने के लिये रंडियो के पास जाते है। मैंने बहुत बार देखा है कि मेरे ससुर मेरी तरफ देखा करते थे लेकिन मै अपने काम में बिजी रहती थी।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। कुछ दिन पहले कि बात है मेरे पति को एक नौकरी का पेपर देने जाना था। वो अपने पेपर देने चले गये। घर में मै और मेरे सास ससुर बचे थे। मै अपने कमरे में लेटी हुई थी और मेरे ससुर मेरे कमरे में आ गये, मैंने उनसे पूछा – क्या हुआ पापा कोई काम है क्या?? 

तो उन्होंने कहा – “हाँ बैठो बता रहा हूँ।मै बैठ गयी उन्होंने कहा – “सुनो तुम्हारे पति का अभी नौकरी तो लगी नही है और मुझे लगता है कि तुम्हे पैसे कि जरूरत रहती होगी। तुम चाहो तो मै तुम्हे हर महीने पैसे दे सकता हूँ”।मैंने उनसे पूछा – आप इतना महरबान क्यों है मुझ पर ?? तो उन्होने ने हँसते हुए कहा – “मै तुम्हे पैसे दूँगा और तुम मुझे उसके बदले में कुछ दे दिया करना”। मैंने उनसे पूछा – आप को मुझसे क्या चाहिए?? तो उन्होंने कहा – “मुझे तुम्हारे चूत के दर्शन करने है और तुम्हारी चूत को चाटकर चोदना भी है”। मै ये सुन कर  मुझे गुस्सा आ गया मैंने उनसे कहा – “और आप के अंदर शर्म नाम कि चीज नही है क्या और कोई अपने बहू से ऐसे बात करता है क्या”।


मेरी बात सुनकर मेरे ससुर जाने लगे और उन्होंने फिर एक बार कहा इस बारे में सोचना जरुर। जब मेरे पति वापस घर आये तो उन्होंने कहा – “लगता है कि अब कोई काम करना ही पड़ेगा कब तक ऐसे ही चलेगा”। उन्होंने मुझसे कहा – “अगर पापा थोड़े पैसे दे दे तो मै अपना काम शुरू कर दूँ। लेकिन पापा पैसे देंगे नही जल्दी”। मैंने उनसे कहा – “एक बार कहो तो सही हो सकता पैसे देने के लिये मान जाये”। मै और मेरे पति दोनों साथ में ससुर जी के पास गये, मेरे पति ने उनसे पैसे मांगे, लेकिन उनकी नजर मेरे ऊपर ही थी

मैंने उनको इशारे में कह दिया कि मै आप से चुदने के लिये तैयार हूँ बस आप इनको पैसे दे दीजिये। मेरे ससुर ने कहा ठीक है मै पैसे दे दूँगा, कितने चाहिए ?? मेरे पति ने कहा – दो लाख रूपये दे दीजिये। उन्होंने कहा ठीक है मै बैंक से निकाल कर दे दूँगा।मेरे पति खुश हो गये, उन्होंने मुझे अपने गोद में उठा लिया और मुझको बेड पर ले गये। वो इतने खुश थे कि उन्होंने मुझे बड़े प्यार से उस दिन चोदा। उन्हें क्या पता था कि मैंने उनके खातिर अपनी चूत को बेच दिया था। उनको तो पैसे मिल जायेगे लेकिन मुझे तो उनसे चुदवाने का दर्द मिलने वाला था।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

मेरे ससुर ने मेरे पति को पैसे दे दिए, अब वो अपने काम को सेट करने में लग गये, दिन में कोई घर नही रहता था, मेरी साँस तो हमेसा दूसरों के घर में बैठी रहती थी।एक दिन घर में कोई नही था, मै अपने कमरे में लेटी थी और वहां मेरे ससुर आ गये। वो मेरे बगल में बैठ गये, और मेरे हाथो पर अपना हाथ रख के सहलाने लगे और मुझसे कहा – “अब तो तुम खुश हो, अब मै तुम्हे चोद सकता हूँ मैंने तो पैसे भी दे दिए?? मैंने उनसे कहा – “हाँ आप मुझे चोद सकते है लेकिन ये बात मेरे पति को नही पता चलनी चाहिए”। उन्होंने मुझसे कहा – “तुम चिंता मत करो किसी को पता नही चलेगा”।

मेरे ससुर मेरी चुदाई करने वाले थे, वो मेरे हाथो को सहलाते हुए मेरी मेरे हाथो के ऊपर बढ़ने लगे और कुछ ही देर में उनका हाथ मेरे कंधे पर पहुँच गया। वो मुझे जोश में लाने के लिये मेरे हाथो को सहला रहें थे। मै भी धीरे धीरे जोश में आने लगी थी। उनका हाथ मेरे कंधे से होते हुए मेरी गाल तक पहुँच गया। वो मेरे गाल को मसलते हुए मेरे होठो को ओने हाथ की उंगलियो से सहलाने लगे जिससे मै बहुत ही ज्यादा बैचैन होने लगी, और मैंने उनके हाथो को पकड लिया और अपने चुचियो के ऊपर फेरते हुए अपने चूत तक ले गयी जिससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मेरे ससुर भी धीरे धीरे पूरे पावर में आ गये उनका लंड खड़ा हो गया था और उनके हाथ भी गरम होने लगे थे।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। उन्होंने मुझे बैठा दिया और मेरे गाल पर चुम्मा लेने लगे। मैंने उनसे कहा – “आज कल ये नही चलता मै बताती हूँ कैसे किस करते है। मैंने उनके गालो को कटे हुए उनके होठ को अपने मुह में भर लिया, और मस्ती से उनके होठो को चूसने लगी।

मेरे ससुर भी धीरे धीरे मेरे होठो को चूसने लगे और कुछ ही देर में वो मेरे होठो को अपने मुह में डाल लिया और काटने लगे। मै मचलने लगी थी, वो लगातार मेरे होठो को चूस कर पीते हुए मुझे मदहोश कर रहें थे। मैंने उनके निचले होठ को अपने दांतों से काटते हुए उनको अपने बाँहों में भर लिया और उनसे कस कर चिपक गयी। मेरे ससुर भी जोश में आने लगे वो मेरे होठो को चूसते हुए मेरे मम्मो को दबाने लगे और बिना ब्लाउस की बटन खोले उसमे अपने हाथो को डालने लगे। वो बड़े मजे से मेरे होठो की चूस रहें थे और मेरे मम्मो को भी दबा रहें थे।


वो मेरे होठो को 30 मिनट तक पीते हुए मेरी चूची को खूब दबा। फिर वो मेरे गर्दन को पीते हुए मेरे चुचियो की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरे चुचियो को ब्लाउस के ऊपर ही से अपने नाक से सूंघते हुए दांतों से काटने लगे। मैंने जल्दी से अपने ब्लाउस की बटन को खोल दिया और उसे निकाल दिया। मेरी चुचियाँ मेरे लाल रंग के ब्रा में किसी शिकार की तरह फसें हुए थे मेरे ससुर ने ,मेरे मम्मो को मसलते हुए मेरे ब्रा को निकाल दिया।

मेरे ब्रा को निकलने के बाद वो मेरी चुचियो के निप्पल को अपने जीभ से गोल गोल चाटते हुए मुझे उत्तेजित करने लगे। धीरे धीरे वो मेरे मम्मो को अपने हाथो से जोर जोर दबाने लगे और साथ साथ वो अपने मुह में मेरे मम्मो को रखकर गार घार कर पीने लगे। ऐसा लग रहा था कि जैसे मै कोई भैंस हूँ और ये मेरी छाती को गार गार कर पी रहें है। वो मेरी चूची के निप्पल को मसलने लगे जिससे मै सिसक सिसक के धीरे धीरे ,…अहह ..अह्ह्ह आह ओह ओह ओह ओह्ह्ह्ह……ओह्ह्ह.. मम्मी ,,, आह … करके चीखने  लगी थी। लेकिन मजा भी आ रहा था।

वो लगातार मेरे चुचियो को दबाते हुए पी रहें थे।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।बहुत देर तक मेरे मम्मो को पीने के बाद मेरे ससुर ने अपने लंड को सहलाते हुए बाहर निकाला, मै तो उनके लंड को देखती ही रह गई। मेरे पति का लंड तो इनके लंड से बहुत छोटा है, मैंने उनके लंड जल्दी से अपने हाथो में पकड लिया और सहलाने लगी। जब उनके लौड़े को सहलाती तो उनका लंड और भी टाइट हो जाता और तन भी जाता। मैंने उनके लंड को सहलाते हुए चूसने लगी। मैंने उनके पूरे लंड को अपने मुह के अंदर ले लिये और मज़े से चूसने लगी। उनका लौड़ा मेरे मुह ठीक से नही आ रहा था, लेकिन उसको चूसने का मजा ही अलग था।

मै उनके लंड को बहुत देर तक चूसती रही और कुछ देर बाद मेरे ससुर ने अपने लंड को मेरे मुह से निकाल लिया और मेरी कमर कि पीते हुए मेरी साडी को खोल दिया और साडी निकलने के बाद धीरे से मेरे पेटीकोट के नारे को भी खोल दिया। मैंने उस दिन पैंटी नही पहनी थी। मेरी चूत बहुत ही कटीली लग रही थी, मैंने दो दिन पहले अपनी झांट बनाई थी, अब वो किसी नुकीले कटे कि तरह छोटे छोटे हो गये थे। मेरे ससुर ने मेरी चूत को देखते हुए मेरी चूत को सहलाने लगे और धीरे धीरे मेरी चूत में अपनी उंगली को डालने लगे। मै जान गयी कि मेरे ससुर मेरी चूत का पानी निकलना चाहते है, इसीलिए वो मेरी चूत में उंगली करने लगे थे।


मै धीरे धीरे और भी कामुक होने लगी और अपने बदन को ऐठने लगी। वो मेरी चूत को उंगली डाल कर अंदर अपनी उंगली को फैला देते थे जिससे मै मचल जाती थी और तडप कर सिसकने लगी। धीरे धीरे वो अपनी उंगलियो को बहुत तेजी से मेरी बुर में डालने लगे जिससे मै तड़पने लगी और … आह्ह्ह..आह अहह   …मम्मी…मम्मी….सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ……ही ही ही ही ही…..अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह…. उ उ उ  करके चीखने लगी और  साथ साथ अपने मम्मो को दबते हुए मै मचल रही थी।  कुछ देर लगातार तेजी से मेरी चूत में उंगली करने से मै बेकाबू होने लगी और कुछ ही देर में मेरी चुत से पानी निकलने लगा। मेरे ससुर ने अपने मुह को लगा के मेररी चूत के पानी को पीने लगे।पानी पीने के बाद उन्होंने मेरी चूत को चाटते हुए उसमे अपनी जीभ डालने लगे और मेरी चूत की झालरदार दाने को चाटने लगे, अब तो और भी पागल होने लगी थी।

मेरे अंदर काम की ज्वाला और भी भडकने लगी थी।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। कुछ ही देर में वो अपने लंड को मेरी चूत के पास ले गये और उसको मेरी चूत के ऊपर पटकने लगे और धीरे से मेरी चूत में डाल दिया। मुझे उनका लंड अच्छा लगा क्योकि मेरे पति से मोटा और बड़ा भी था।  ऐसा लग रहा था कि पहली बार चुदाई हो रही है।  मेरी चूत हो ढीली थी लेकिन मोटे लंड से मजा आ रहा था।  लेकिन कुछ ही देर में मेरे ससुर मुझे जानवरों कि तरह पेलने लगे मेरी चूत तो फटी जा रही थी और मै पागलो कि तरह जोर जोर से चीखने लगी थी।

उनका लंड जब मेरी फुद्दी के अंदर जाता तो ऐसा लगता कि कोई कितनी मोटी चीज मेरी चूत में जा रही है।  उनका लंड बार बार मेरी चूत के अंदर जाता और बाहर आता और मै बड़ी जोर जोर से ..आह हा ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह …उ उ उ उ ऊऊऊ ….ऊँ..ऊँ…ऊँ अहह्ह्ह्हह सी सी सी सी.. हा हा हा.. ओ हो हो…….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ. हमममम अहह्ह्ह्हह.. अई…अई….अई…आऊ….. आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह….सी….अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्……उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह…..मेरी चूत को आज ही फाड़ दोगे क्या आराम से चोदो मुझे ओह्ह्ह…. बहुत दर्द हो रहा है,,,…. लेकिन मजा भी आ रहा है चोदो लेकिन आराम से आह्ह ओह्ह्ह ,,,… करके चीख रही थी लेकिन मेरे ससुर तो मेरी चूत को फाड़ने में लगे थे।  कुछ ही देर में वो अपनी पूरी जोर लगा कर मुझे चोदने लगे, अब तो उनकी रफ़्तार और भी तेज हो गयी थी।

अब तो ऐसा लग रहा था कि कहीं मेरे प्राण ना निकाल जाये, लेकिन कुछ देर में उन्होंने अपने लंड को बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगे। जब उन्होंने अपना लंड निकाला तो मुझे थोडा आराम मिला लेकिन मेरी चूत और भी फ़ैल गई थी। कुछ देर मुठ मारने से उनके लंड का माल निकलने लगा। और कुछ ही देर में उनका लंड ढीला पड़ गया। चुदाई के बाद मैंने उनसे कहा – “अगर आप मुझे पैसे देते रहें तो मै आप से रोज चुदने के लिये तैयार हूँ”। मेरे ससुर ने कहा – “ठीक है मै तुम्हे पैसे देता रहूँगा और तुम मुझसे ऐसे ही चुदवाती रहना”।इसके बाद मेरी तो एक दिन में दो बार चुदाई होती थी। कुछ दिन बाद जब मुझे लडका हुआ तो वो भी जुड़वाँ थे, एक मेरे ससुर का और एक मेरे पति का। 


बहू की जवानी ससुर ने लूटी

 

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Kamina Sasur Ji

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ससुर जी का जवान लंड बहू की कुंवारी चूत में

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सविता की शादी को दो साल हो चुके थे. बचपन से ही सविता बहुत खूबसूरत थी. १६ साल की उम्र में ही जिस्म खिलने लग गया था. सोलहवां साल लगते लगते तो सविता की जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. ऐसा लगता ही नहीं था की अभी १०थ् क्लास में पर्ती है. स्कूल की स्किर्ट में उसकी भरी भरी जांघें लड़कों पे कहर ढाने लागी थी. स्कूल के लड़के skirt के नीचे सी झाँक कर सविता की पैंटी की एक झलक पाने के लीये पागल रहते थे. कभी कभार जब बास्केटबाल खेलते हुए या कभी हवा के झोंके सी सविता की स्किर्ट उठ जाती तो किस्मत वालों को उसकी पैंटी के दर्शन हो जाते. लड़के तो लड़के, School के Teacher भी सविता की जवानी के असर से नहीं बचे थे. सविता के भारी नितम्ब, पतली कमर और उभरती चूचियां देखके उनके सीने पे चहुरियन चल जाती. सविता को भी अपनी जवानी पे नाज़ था. वो भी लोगों का दिल जलाने में कोई कसर नहीं छोड़ती थी.

उनीस साल की होते ही सविता की शादी हो गई. सविता ने शादी तक अपने कुंवारे बदन को संभाल के रखा था. उसने सोच रखा था की उसका कुंवारा बदन ही उसके पति के लीये सुहाग रात को एक उन्मोल तोह्फहोगा. सुहाग रात को पति का मोटा लम्बा लंड देख कर सविता के होश उर गए थे. उस मोटे लंड ने सविता की कुंवारी चूत लहू लुहान कर दी थी. शादी के बाद कुछ din तो सविता का पति उसे रोज़ चार पाँच बार चोद्ता था. सविता भी एक लम्बा मोटा लौडा पा कर बहुत खुश थी. लेकीन धीरे धीरे चुदाई कम होने लगी और शादी के एक्साल बाद तो ये नौबत आ गई थी की महीने में मुश्किल से एक दो बार ही सविता की चुदाई होती. हालांकी सविता ने सुहाग रात को अपने पति को अपनी कुंवारी चूत का तोहफा दीया था, लेकीन वो बचपन से ही बहुत कामुक लड़की थी. बस कीसी तरह अपनी वासना को कंट्रोल करके, अपने School और कॉलेज के लड़कों और टीचर्स से शादी तक अपनी चूत को बचा के रखने में सफल हो गई थी. महीने में एक दो बार की चुदाई से सविता की वासना की प्यास कैसे बुझती ? उसे तो एक दिन में कम से कम तीन चार बार चुदाई की ज़रूरत थी.

आखिकार जब सविता का पति जब तीन महीने के लीये टुर पे गया तो सविता के देवर ने उसके अकेलेपन का फायदा उठा कर उसकी वासना को तृप्त किया. अब तो सविता का देवर रामू सविता को रोज़ चोद कर उसकी प्यास बुझाता था. एक दिन गाँव से टेलीग्राम आया की सास की तबियत कुछ ख़राब हो गई है. सविता के ससुर एक बड़े ज़मींदार थे. गाँव में उनकी काफ़ी खेती थी. सविता का पति राजेश काम के कारण नहीं जा सकता था और देवर रामू का कॉलेज था. सविता को ही गाँव जाना पड़ा. वैसे भी वहां सविता की ही ज़रूरत थी, जो सास और सुर दोनों का ख्याल कर सके और सास की जगह घर को संभाल सके. सविता शादी के फौरन बाद अपने ससुराल गई थी. सास सौर की खूब सेवा करके सविता ने उन्हें खुश कर दीया था.

सविता की खूबसूरती और भोलेपन से दोनों ही बहुत प्राभवित थे. सविता की सास माया देवी तो उसकी प्रशंसा करते नहीं थकती थी. दोनों इतनी सुंदर, सुशील और मेहनती बहू से बहुत खुश थे. बात बात पे शर्मा जाने की अदा पे तो ससुर रामलाल फीदा थे. उन्होंने ख़ास कर सविता को कम से कम दो महीने के लीये भेजने को कहा था. दो महीने सुन कर सविता का कलेजा धक् रह गया था. दो महीने बिना चुदाई के रहना बहुत मुश्किल था. यहाँ तो पति की कमी उसका देवर रामू पूरी कर देता था. गाँव में दो महीने तक क्या होगा, ये सोच सोच कर सविता परेशान थी लेकीन कोई चारा भी तो नहीं था. जाना तो था ही. राजेश ने सविता को कानपूर में ट्रेन में बैठा दीया. अगले दिन सबह ट्रेन गोपालपुर गाँव पहुँच गई जो की सविता की सौराल थी.

सविता ने चूरिदार पहन रखा था. कुरता सविता के घुटनों से करीब आठ इंच ऊपर था और कुरते के दोनों साइड का कटाव कमर तक था. चूरिदार सविता के नितम्ब तक तैघ्त था. चलते वक्त जब कुरते का पल्ला आगे पीछे होता या हवा के झोंके से उठ जाता तो तिघ्त चूरिदार में कसी सविता की टांगें, मदहोश कर देने वाली मांसल जांघें और विशाल नितम्ब बहुत ही Sexy लगते. ट्रेन में सब मर्दों की नज़रें सविता की टांगों पर लगी हुई थी. स्टेशन पर सविता को लेने सास और ससुर दोनों आए हुए थे. सविता अपने ससुर से परदा कत्र्ती थी इसलिए उसने चुन्नी का घूँघट अपने सिर पे ले लिया. अभी तक जो चुन्नी सविता की छातीयों के उभार को छुपा रही थी, अब उसके घूँघट का काम करने लगी. सविता की बड़ी बड़ी छातियन स्टेशन पे सबका ध्यान खींच रही थी.

सविता ने झुक के सास के पाँव छूए. जैसे ही सविता पों छूने के लीये झुकी रामलाल को उसकी चूरिदार में कसी मांसल जांघें और नितम्ब नज़र आने लगे. रामलाल का दिल एक बार तो धड़क उठा. शादी के बाद से बहू किखूब्सूरती को चार चाँद लग गए थे. बदन भर गया था और्जवानी पूरी तरह नीखर आई थी. रामलाल को साफ दीख रहा था की बहू का तिघत चूरिदार और कुरता बरी मुश्किल से उसकी जवानी को समेटे हुए थे. सास से आशिर्वाद लेने के बाद सविता ने सुर्जी के भी पैर छूए. रामलाल ने बहू को प्यार से गले लगा लीया. बहू के जवान बदन का स्पर्श पाते ही रामलाल कांप गया.

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सविता की सास माया देवी बहू के आने से बहुत खुश थी. स्टेशन के बाहर नीकल कर उन्होंने तांगा कीया. पहले माया देवी टाँगे पे चढी. उसके बाद रामलाल ने बहू को चढ़ने दीया. रामलाल को मालूम था की जब बहू टाँगे पे चढ़ने के लीये टांग ऊपर करेगी तो उसे कुरते के कटाव में से बहू की पूरी टांग और नितम्ब भी देखने को मिल जाएंगे. वाही हुआ. जैसे ही सविता ने टाँगे पे बैठने के लीये टांग ऊपर की राम्म्लाल को चूरिदार में कसी बहू की Sexy टांगों और भारी चूतडों की झलक मिल गई. यहाँ तक की रमलाल को चूरिदार के सफ़ेद महीन कपरे में से बहू की कच्छी (पैंटी) की भी झलक मिल गई. बहू ने गुलाबी रंग की कच्छी पहन रखी थी. अब तो रामलाल का लंड भी हरकत करने लगा. उसने बरी मुश्किल से अपने को संभाला. रामलाल को अपनी बहू के बरे में ऐसा सोचते हुए अपने ऊपर शरम आ रही थी. वो सोच रहा था की मैं कैसा इंसान हूँ जो अपनी ही बहू को ऐसी नज़रों से देख रहा हूँ. बहू तो बेटी के समान होती है. लेकीन क्या करता ? था तो मरद ही. घर पहुँच कर सास ससुर ने बहू की खूब खातिरदारी की.

गाँव में आ कर अब सविता को १५ दिन हो चुके थे. सास की तबियत ख़राब होने के कारण सविता ने सारा घरका काम संभाल लीया था. उसने सास ससुर की खूब सेवा करके उन्हें खुश कर दीया था. गाँव में औरतें लहंगा चोली पहनती थी, इसलिए सविता ने भी कभी कभी लहंगा चोली पहनना शुरू कर दीया. लहंगे चोली ने तो सविता की जवानी पे चार चाँद लगा दिए. गोरी पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए भारी नितम्ब ने तो रामलाल का जीना हराम कर रखा था.

सविता का ससुर रामलाल एक लम्बा तगर आदमी था. अब उसकी उम्र करीब ५५ साल हो चली थी. जवानी में उसे पहलवानी का शौक था. आज भी उसका जिस्म बिल्कुल गाथा हुआ था. रोज़ लंगोट बाँध के कसरत करता था और पूरे बदन की मालिश करवाता था. सबसे बरी चीज़ जिस पर उसे बहुत नाज़ था, वो थी उसके मुस्क्लेस और उसका ११ इंच लम्बा फौलादी लंड. लेकीन रामलाल की बदकिस्मती ये थी की उसकी पत्नी माया देवी उसकी वासना की भूख कभी शांत नहीं कर सकी. माया देवी धार्मिक स्वभाव की थी. उसे सेक्स का कोई शौक नहीं था.

रामलाल के मोटे लंबे लौदे से डरती भी थी क्योंकि हेर बार चुदाई में बहुत दर्द होता था. वो मजाक में रामलाल को गधा कहती थी. पत्नी की बेरुखी के कारण रामलाल को अपने जिस्म की भूख मिटाने के लीये दूसरी औरतों का सहारा लेना पड़ा. राम लाल के खेतों में कई औरतें काम करती थी. In मजदूर औरतों में से सुंदर और जवान औरतों को पैसे का लालच दे कर अपने खेत के पम्प हौस में चोद्ता था. जिन औरतों को रामलाल ने एक बार चोद दीया वो तो मानो उसकी गुलाम बुन जाती थी. आख़िर ऐसा लम्बा मोटा लंड बहुत किस्मत वाली औरतों को ही नसीब होता है. तीन चार औरतें तो पहली चुदाई में बेहोश भी हो गई.

दो औरतें तो ऐसी थी जिनकी चूत रामलाल के फौलादी लौदे ने सुच्मुच ही फाड़ दी थी. अब तक रामलाल कम से कम बीस औरतों को चोद चुका था. लेकीन रामलाल जानता था की पैसा दे कर चोदने में वो मज़ा नहीं जो लड़की को पटा के चोदने में है. आज तक चुदाई का सबसे ज़्यादा मज़ा उसे अपनी साली को चोदने में आया था. माया देवी की बहिन सीता, माया देवी से १० साल छोटी थी. रामलाल ने जब उसे पहली बार चोदा उस वक्त उसकी उम्र १७ साल की थी. कॉलेज में पर्ती थी. गर्मिओं की छुट्टी बिताने अपने जीजा जी के पास आई थी. बिल्कुल कुंवारी चूत थी. रामलाल ने उसे भी खेत के पम्प हौस में ही चोदा था. रामलाल के मूसल ने सीता की कुंवारी नाज़ुक सी चूत को फाड़ ही दीया था. सीता बहुत चिल्लाई थी और फीर बेहोश हो गई थी. उसकी चूत से बहुत खून निकला था.

रामलाल ने सीता के होश में आने से पहले ही उसकी चूत का सारा खून साफ कर दीया था ताकी वो डर न जाए. रामलाल से चुदने के बाद सीता सात दिन ठीक से चल भी नहीं पाई और जब ठीक से चलने लायक हुई तो शहर चली गई. लेकीन ज़्यादा दिन शहर में नहीं रह सकी. रामलाल के फौलादी लौडे की याद उसे फीर से अपने जीजू के पास खींच लायी. इस बार तो सीता सिर्फ़ जीजा जी से चुदवाने ही आई थी. रामलाल ने तो समझा था की साली जी नाराज़ हो कर चली गई. आते ही सीता ने रामलाल को कहा ” जीजा जी मैं सिर्फ़ आपके लीये ही आई हूँ.” उसके बाद तो करीब रोज़ ही रामलाल सीता को खेत के पम्प हौस में चोद्ता था. सीता भी पूरा मज़ा ले कर चुदवाती थी. रामलाल के खेत में काम करने वाली सभी औरतों को पटा था की जीजा जी साली की खूब चुदाई कर रहे हैं.

ये सिलसिला करीब चार साल चला. सीता की शादी के बाद रामलाल फीर खेत में काम करने वालिओं को चोदने लगा. लेकीन वो मज़ा कहाँ जो सीता को चोदने में आता था. बरे नाज़ नखरों के साथ चुदवाती थी. शादी के बाद एक बार सीता गाँव आई थी. मोका देख कर रामलाल ने फीर उसे चोदा. सीता ने रामलाल को बताया था की रामलाल के लंबे मोटे लौडे के बाद उसे पति के लंड से त्रिप्ती नहीं होती थी. सीता भी राम लाल को कहती ” जीजू आपका लंड तो सुच्मुच गधे के लंड जैसा है.” गाँव में गधे कुछ ज़्यादा ही थे. जहाँ नज़र डालो वहीं चार पाँच गधे नज़र आ जाते. कुछ दिन बाद सीता के पति और सीता दुबई चले गए. उसके बाद से रामलाल को कभी भी चुदाई से तृप्ति नहीं मिली. अब तो सीता को दुबई जा कर २० साल हो चुके थे.

रामलाल के लीये अब वो सिर्फ़ याद बुन कर रह गई थी. माया देवी तो अब पूजा पथ में ही ध्यान लगाती थी. इस उम्र में खेत में काम करने वाली औरतों को भी छोड़ना मुश्किल हो गया था. अब तो जब कभी माया देवी की कृपा होती तो साल में एक दो बार उनको चोद कर ही काम चलाना परता था. लेकीन माया देवी को चोदने में बिल्कुल भी मज़ा नहीं आता था. धीरे धीरे रामलाल को विश्वास होने लगा था की अब उसकी चोदने की उम्र नीकल गई है. लेकीन जब से बहू घर आई थी रामलाल की जवानी की यादें फीर से ताज़ा हो गई थी.

बहू की जवानी तो सुच्मुच ही जान लेवा थी. सीता तो बहू के सामने कुछ भी नहीं थी. शादी कऐ बाद से तो बहू की जवानी मनो बहू के ही काबू में नहीं थी. बहू के कपरे बहू की जवानी को छुपा नहीं पाते थे. जब से बहू आई थी रामलाल की रातों की नींद उर गई थी. बहू रामलाल से परदा करती थी. मुंह तो दहक लेती थी लेकीन उसकी बड़ी बड़ी छूचियन खुली रहती थी. गोरा बदन, लंबे काले घने बाल, बड़ी बड़ी छातियन, पतली कमर और उसके नीचे फैलते हुए चूतडों बहुत जान लेवा थे. तिघत चूरिदार में तो बहू की मांसल टांगें रामलाल की वासना भड़का देती थी. सविता जी जान से अपने सास ससुर की सेवा करने में लगी हुई थी.सविता को महसूस होने लगा था की सुर्जी उसे कुछ अजीब सी नाज्रोंसे देखते हैं.

वैसे भी औरतों को मरद के इरादों का बहुत जल्दिपता लग जाता है. फीर वो अक्सर सोचती की शायद ये उसका वहम है.सुर जी तो उसके पिता के समान थे.एक दिन की बात है. सविता ने अपने कपरे धो कर छत पर सूख्नेदाल रखे थे. इतने में घने बादल छा गए. बारिश होने कोठी. रामलाल सविता से बोले,” बहू बारिश होने वाली है मैं ऊपर से कपडे ले आता हूँ.”" नहीं. नहीं पिताजी आप क्यों तकलीफ करते हैं मैं अभी जा के लाती हूँ.” सविता बोली. उसे मालूम था की आज सिर्फ़ उसी के कपडे सूख रहे थे.” अरे बहू टब सारा दिन इतना काम करती हो. इसमे तकलीफ कैसी? हमें भी तो कुछ काम करने दो.” ये कह के रामलाल चाट पे चल पड़ा. छत पे पहुँच के रामलाल को पटा लगा की क्यों बहू ख़ुद ही कपरे लेन की जीद कर रही थी. डोरी पर सिर्फ़ दो ही कपरे सूख रहे थे. एक बहू की कच्छी और एक उसकी ब्रा.

रामलाल का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा.कितनी छोटी सी कच्छी थी, बहू के विशाल नितम्ब को कैसे धक्तिहोगी. रामलाल से नहीं रहा गया और उसने सविता की पैंटी को डोरी सुतार लीया और हाथों में पैंटी के मुलायम कपरे को फील कर्नेलगा. फीर उसने पैंटी को उस जगह से सूंघ लीया जहाँ सविता किचूत पैंटी से तौच करती थी. हालांकी पैंटी धुली हुई थी फीर भि राम्लाल औरत के बदन की खुशबू पहचान गया. रामलाल मन ही मन सोचने लगा की अगर धुली हुई कच्छी में से इतनी मादक खुश्बू आती है तो पहनी हुई कच्छी की गंध तो उसे पागल बना देगी. राम्लाल्का लौडा हरकत करने लगा. वो बहू की पैंटी और ब्रा ले कर नीचे आया,

” बहू ऊपर तो ये दो ही कपडे थे.” ससुर के हाथ में अपनी पंत्यौर ब्रा देख कर सविता शरम से लाल हो गई. उसने घूघट तोनिकाल ही रखा था इसलिए रामलाल उसका चेहरा नहीं देख सकता था.सविता शर्माते हुए बोली,” पिताजी इसीलिए तो मैं कह रही थी की मैं ले आती हूँ. आप्नेबेकार तकलीफ की.”

” नहीं बहू तकलीफ किस बात की? लेकीन ये इतनी छोटी सी कछितुम्हारी है?” अब तो सविता का चेहरा टमाटर की तरह सुर्ख लाल होगया.

” ज्ज्ज..जी पिताजी.” सविता सिर नीचे किए हुए बोली.” लेकीन बहू ये तो तुम्हारे लीये बहुत छोटी है. इससे तुम्हारा काम्चल तो जाता है न?”" जी पिताजी.” सविता सोच रही थी की कीसी तरह ये धरती फत्जाए और मैं उसमे समा जाऊं.” बेटी इसमे शर्माने की क्या बात है ?. तुम्हारी उम्र में लड़किओं कि कछी अक्सर बहुत जल्दी छोटी हो जाती है.

गाँव में तो और्तें कच्च्ही पहनती नहीं हैं. अगर छोटी हो गई है तो सासू माँ सेकः देना शहर जा कर और खरीद एंगी. हम गए तो हम ले आएँगे.लो ये सूख गई है, रख लो.” ये कह कर रामलाल ने सविता को उस्कि पंटी और ब्रा दे दी. इस घटना के बाद रामलाल ने सविता के साथ और्खुल कर बातें करना शुरू कर दीया था एक दिन माया देवी को शहर सत्संग में जन था. रामलाल उनको ले कर शहर जाने वाला था. दोनों घर से सबह स्टेशन की और चल पड़े.रास्ते में रामलाल के जान पहचान का लड़का कार से शहर जाता हामिल गया. रामलाल ने कहा की Aunty को भी साथ ले जाओ.

लड़का मंगाया और माया देवी उसके साथ कार में शहर चली गई. रामलाल घर्वापस आ गया. दरवाज़ा उंदर से बूंद था. बाथरूम से पानी गिरने किअवाज़ आ रही थी. शायद बहू नहा रही थी. सविता तो समझ रहिथि की सास ससुर शाम तक ही वापस लौटेंगे. रामलाल के कमरे का एक्दार्वाज़ा गली में भी खुलता था. रामलाल कमरे का टला खोल के अप्नेकमरे में आ गया. उधर सविता बेखबर थी. वो तो समझ रही थीकि घर में कोई नहीं है. नहा कर सविता सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में ही बाथरूम से बाहर नीकल आई. उसका बदन अब भी गीला था. बाल भीगे हुए थे. सविता अपनी पैंटी और ब्रा जो अभी उसने धोई थी सुखाने के लीये आँगन में आ गई. रामलाल अपने कमरे के परदे के पीछे से सारा नज़ारा देख रहा था. बहू को पेटीकोट और ब्लाउज में देख कर रामलाल को पसीना आ गया. क्या बाला की खूबसूरत थी.

बहुत कसा हुआ पेटीकोट पहनती थी. बदन गीला होने के कारण पेटीकोट उसके चूतडों से चिपका जा रहा था. बहू के फैले हुए चूतडों पेटीकोट में बरी मुश्किल से समा रहे थे. बहू का मादक रूप मनो उसके ब्लाउज और पेटीकोट में से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उफ क्या गद्राया हुआ बदन था. बहू ने अपनी धुली हुई कच्छी और ब्रा डोरी पर सूखने दाल दी. अचानक वो कुछ उठाने के लीये झुकी तो पेटीकोट उसके विशाल चूतडों पर कास गया. पेटीकोट के सफ़ेद कपरे में से रामलाल को साफ दीख रहा था की आज बहू ने काले रंग की कच्छी पहन रखी है.

उफ बहू के सिर्फ़ बीस प्रतिशत चूतडों ही कच्छी में थे बाकी तो बाहर गिर रहे थे. जब बहू सीधी हुई तो उसकी कच्छी और पेटीकोट उसके विशाल चूतडों के बीच में फास गए. अब तो रामलाल का लौडा फन्फनाने लगा. उसका मन कर रहा था की वो जा कर बहू के चूतडों की दरार में फँसी पेटीकोट और कच्छी को खींच के निकाल ले. बहू ने मानो रामलाल के दिल की आवाज़ सुन ली. उसने अपनी चूतडों की दरार में फँसे पेटीकोट को कींच के बाहर निकाला लीया. बहू आँगन में खरी थी इसलिए पेटीकोट में से उसकी मांसल टांगें भी नज़र आ रही थी.

रामलाल के लंड में इतना तनाव सीता को चोदते वक्त भी नहीं हुआ था. बहू के सेक्सी चूतडों को देख के रामलाल सोचने लगा की इसकी गांड मार के तो आदमी धन्य हो जाए. रामलाल ने आज तक कीसी औरत की गांड नहीं मारी थी. असलियत तो ये थी की रामलाल का गधे जैसा लौडा देख कर कोई औरत गांड मरवाने के लीये राज़ी ही नहीं थी. माया देवी तो चूत ही बरी मुश्किल से देती थी गांड देना तो बहुत दूर की बात थी. एक दिन सविता ने खेतों में जाने की इच्छा प्रकट की. उसने सासू माँ से कहा, ” मम्मी जी मैं खेतों में जाना चाहती हूँ, अगर आप इजाज़त देन तो आपके खेत और फसल देख औन. शहर में तो ये देखने को मिलता नहीं है.”

” अरे बेटी इसमें इजाज़त की क्या बात है? तुम्हारे ही खेत हैं जब चाहो चली जाओ. मैं अभी तुम्हारे ससुर जी से कहती हूँ तुम्हें खेत दिखाने ले जाएँ.”

” नहीं नहीं मम्मी जी आप पिताजी को क्यों परेशान करती हैं मैं अकेली ही चली जाउंगी.”

” इसमे परेशान करने की क्या बात है? कई दिन से ये भी खेत नहीं गए हैं तुझे भी साथ ले जाएंगे. जाओ टब तैयार हो जाओ. और हाँ लहंगा चोली पहन लेना, खेतों में जाने के लीये वही ठीक रहता है.” सविता तैयार होने गई. माया देवी ने रामलाल को कहा,

” अजी सुनते हो, आज बहू को खेत दिखा लाओ. कह रही थी मैं अकेली ही चली जाती हूँ. मैंने ही उसको रोका और कहा ससुरजी तुझे ले जाएंगे.”

” ठीक है मैं ले जाऊंगा, लेकीन अकेली भी चली जाती तो क्या हो जाता ? गाँव में किस बात का डर?”"

” कैसी बातें करते हो जी? जवान बहू को अकेले भेजना चाहते हो. अभी नादाँ है. अपनी जवानी तो उससे संभाली नहीं जाती, अपने आप को क्या संभालेगी? ” इतने में सविता आ गई. लहंगा चोली में बला की खूबसूरत लग रही थी.

” चलिए पिताजी मैं टायर हूँ.”

” चलो बहू हम भी टायर हैं.” ससुर और बहू दोनों खेत की और नीकल परे. सविता आगे आगे चल रही थी और रामलाल उसके पीछे. सविता ने घूंघट निकाल रखा था. रामलाल बहू की मस्तानी चाल देख कर पागल हुआ जा रहा था. बहू की पतली गोरी कमर बल खा रही थी. उसके नीचे फैले हुए मोटे मोटे चूतडों चलते वक्त ऊपर नीचे हो रहे थे. लहंगा घुटनों से थोड़ा ही नीचे था. बहू की गोरी गोरी टांगें और चूतडों तक लटकते लंबे घने काले बाल रामलाल की दिल की धड़कन बारह रहे थे. ऐसा नज़ारा तो रामलाल को ज़िंदगी में पहले कभी नसीब नहीं हुआ. रामलाल की नज़रें बहू के मटकते हुए मोटे मोटे चूतडों और पतली बल खाती कमर पर ही टिकी हुई थी.

जान लेवा चूतडों को मटकते देख कर रामलाल की आंखों के सामने उस दिन का नजारा घूम गया जिस दिन उसने बहू के चूतडों के बीच उसके पेटीकोट और कच्छी को फँसे हुए देखा था. रामलाल का लौडा खड़ा होने लगा. सविता घूंघट निकाले आगे आगे चली जा रही थी. वो अच्छी तरह जानती थी की ससुर जी की आँखें उसके मटकते हुए नितम्ब पे लगी हुई हैं. रास्ता संकरा हो गया था और अब वो दोनों एक पूग डंडी पे चल रहे थे. अचानक साइड की पूग डंडी से दो गधे सविता के सामने आ गए. रास्ता इतना कम चौरा था की साइड से आगे निकलना भी मुश्किल था. मजबूरन सविता को गधों के पीछे पीछे चलना पड़ा. अचानक सविता का ध्यान पीछे वाले गधे पे गया.

” अरे पिताजी देखिये ये कैसा गधा है ? इसकी तो पाँच टांगें हैं.” सविता आगे चल रहे गधे की और इशारा करते हुए बोली.

” बेटी, टब तो बहुत भोली हो, ज़रा ध्यान से देखो इसकी पाँच टांगें नहीं हैं.” सविता ने फीर ध्यान से देखा तो उसका कलेजा दहक सा रह गया. गधे की पाँच टांगें नहीं थी, वो तो गधे का लंड था. बाप रे क्या लम्बा लंड था ! ऐसा लग रहा था जैसे उसकी टांग हो. सविता ने ये भी नोटिस कीया की आगे वाला गधा, गधा नहीं बल्कि गधी थी क्योंकि उसका लंड नहीं था. गधे का लंड खरा हुआ था. सविता समझ गई की गधा क्या करने वाला था. अब तो सविता के पसीने चूत गए. पीछे पीछे ससुर जी चल रहे थे. सविता अपने आप को कोसने लगी की ससुर जी से क्या सवाल पूछ लीया. सविता का शरम के मरे बुरा हाल था. रामलाल को अच्छा मोका मिल गया था. उसने फीर से कहा,

” बोलो, बहू हैं क्या इसकी पाँच टांगें ?” सविता का मुंह शरम से लाल हो गया, और हक्लाती हुई बोली,

” जज..जी चार ही हैं.”

” तो वो पांचवी चीज़ क्या है बहु?”

” ज्ज्ज…जी वो तो ……जी हमें नहीं पटा.”

„ पहले कभी देखा नहीं बेटी ?” रामलाल मेज़ लेता हुआ बोला.

” नहीं पिताजी.” सविता शर्माते हुए बोली.

” मर्दों की टांगों के बीच में जो होता है वो तो देखा है न?”

” जी..” अब तो सविता का मुंह लाल हो गया.

” अरे बहू जो चीज़ मर्दों के टांगों के बीच में होती है ये वाही चीज़ तो है.” रामलाल सविता के साथ इस तरह की बातें कर ही रहा था की वाही हुआ जो सविता मन ही मन मन रही थी की ना हो. गधा अचानक गधी पे चढ़ गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड गधी की चूत में पेल दीया. गधा वहीं खरा हो कर गधी के उंदर अपना लंड पेलने लगा. इतना लम्बा लंड गधी की चूत में जाता देख सविता हार्बर कर रुक गई और उसके मुंह से चीख नीकल गई,

” ऊओईइ मा….”

” क्या हुआ बहू ?”

” ज्ज्ज..जी कुछ नहीं.” सविता घबराते हुए बोली.

” लगता है हमारी बहू डर गई.” रामलाल मौके का पूरा फायदा उठता हुआ दरी हुई सविता का साहस बर्हाने के बहाने उसकी पीठ पे हाथ रखता हुआ बोला.

” जी पिताजी.”

” क्यों डरने की क्या बात है ?”

” वैसे ही.”

” वैसे ही क्या मतलब ? कोई तो बात ज़रूर है. पहली बार देख रही हो न?” रामलाल सविता की पीठ सहलाता हुआ बोला.

” जी.” सविता शर्माते हुए बोली.

” अरे इसमें शर्माने की क्या बात है बहु. जो राकेश तुम्हारे साथ हेर रात करता है वाही ये गधा भी गधी के साथ कर रहा है.”

” लेकीन इसका तो इतना…….” सविता के मुंह से अनायास ही नीकल गया और फीर वो पच्छ्तायी..

” बहुत बड़ा है बहु?” रामलाल सविता की बात पूरी करता हुआ बोला.

अब रामलाल का हाथ फिसल कर सविता के नितम्ब पे आ गया था.

” ज्ज्जी….” सविता सिर नीचे किए हुए बोली.

” ओ ! तो इसका इतना बार देख के डर गई ? कुछ मर्दों का भी गधे जैसा ही होता है बहु. इसमें डरने की क्या बात है ?. जब औरत बरे से बार झेल लेती है, फीर ये तो गधी है.”

सविता का चेहरा शरम से लाल हो गया था. वो बोली,

” चलिए पिताजी वापस चलते हैं, हमें बहुत शरम आ रही है.”

” क्यों बहू वापस जाने की क्या बात है? तुम तो बहुत शर्माती हो. बस दो मिनट में इस गधे का काम खत्म हो जाएगा फीर खेत में चैलेन्ज.” बातों बातों में रामलाल एक दो बार सविता के नितम्ब पे हाथ भी फेर चुक्का था. रामलाल का लंड सविता के मुलायम नितम्ब पर हाथ फेर के खड़ा होने लगा था. वो सविता की पैंटी भी फील कर रहा था. सविता क्या करती ? घूंघट में से गधे को अपना लंड गधी के उंदर पेलते हुए देखती रही. इतना लम्बा लंड गधी के उंदर बाहर जाता देख उसकी चूत पे भी चीतियन रेंगने लगी थी.

सविता को रामलाल का हाथ अपने नितम्ब पर महसूस हो रहा था. इतनी भोली तो थी नहीं. दुनियादारी अच्छी तरह से समझती थी. वो अच्छी तरह समझ रही थी की ससुर जी मौके का फायदा उठा के सहानुभूति जताने का बहाना करके उसकी पीठ और नितम्ब पे हाथ फेर रहे हैं. इतने में गधा झर गया और उसने अपना तीन फ़ुट लम्बा लंड बाहर निकाल लीया. गधे के लंड में से अब भी वीर्य गिर रहा था. ससुर जी ने दोनों गधों को रास्ते से हटाया और सविता के चूतडों पे हथेली रख कर उसे आगे की और हलके से धक्का देता हुआ बोला,

” चलो बहू अब हम खेत चलत हैं.”

” चलिए पिताजी.”

” बहू मालूम है तुम्हारी सासू माँ भी मुझे गधा बोलती है.”

” हा.. ! क्यों ? आप तो इतने अच्छे हैं.”

” बहू तुम तो बहुत भोली हो. वो तो कीसी और वझे से मुझे गधा बोलती है.” अचानक सविता रामलाल का मतलब समझ गई. शायद ससुर जी का लंड भी गधे के लंड के माफिक लम्बा था तुभी सासू माँ ससुर जी को गधा बोलती थी. इतनी सी बात समझ नहीं आई ये सोच कर सविता अपने आप को मन ही मन कोसने लगी. सविता सोच रही थी की ससुर जी उससे कुछ ज़्यादा ही खुल कर बातें करने लगे हैं. इस तरह की बातें बहू और ससुर के बीच तो नहीं होती हैं. बात बात में प्यार जताने के लीये उसकी पीठ और नितम्ब पे भी हाथ फेर देते थे.थोरी ही देर में दोनों खेत में पहुँच गए. रामलाल ने सविता को सारा खेत दिखाया और खेत में काम करने वाली औरतों से भी मिलवाया. सविता थक गई थी इसलिए रामलाल ने उसे एक आम के पैर के नीचे बैठा दीया.

” बहू तुम यहाँ आराम करो मैं कीसी औरत को तुम्हारे पास भेजता हूँ. मुझे थोड़ा पम्प हौस में काम है.”

” ठीक है पिताजी मैं यहाँ बैठ जाती हूँ.”

ससुर करवा चौथ पर बहु को धका धक पेलने लगे

ससुर करवा चौथ पर बहु को धका धक पेलने लगे  May 9, 2021 by crazy Sasur Bahu Antarvasna  मेरा नाम लतिका है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं अपने ससुर के साथ अकेली रहती हूँ। मेरे पति कोलकाता में नौकरी करते है। वो 2 3 महीने में एक बार ही घर आते है। जब भी आते है मुझे बहुत प्यार करते है। मेरे ससुर जी भी बहुत अच्छे है। मेरे देवर की नौकरी कानपुर में लग गयी है। पहले वो हमारे साथ ही प्रयागराज में रहता था पर नौकरी लगने के बाद वो चला गया। Sasur Bahu Antarvasna  अब घर में मैं और ससुर जी है। मैं आप लोगो को अपने बारे में बताना चाहती हूँ। मैं 35 साल की जवान और सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे बच्चे नही हुए है। मैं सुंदर और जवान हूँ और आकर्षक व्यक्तित्व वाली औरत हूँ। मेरा कद 5’ 4” का है। जिस्म भरा हुआ है। मैं काफी गोरी हूँ और चेहरा का फेस कट बहुत सेक्सी है।  मेरी जवानी देखकर मर्दों के लंड खड़े हो जाते है। मन ही मन वो मुझे चोद लेना चाहते है पर ये मौका तो कुछ लोगो को ही मिला है। मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। मेरे पति मेरे 38” के मम्मो को दबा दबा कर मेरी चूत मारते है। मेरा फिगर 38 32 36 का है। मुझे अपनी चूचियां दबवाने में बहुत अच्छा लगता है।  जब कभी पराये मर्द के साथ चुदाई करने का मौक़ा मिलता है तो मैं चुदवा लेती हूँ। “खाओ खुजाओ और बत्ती बुजाओ” वाले कांसेप्ट में मैं विश्वास करती हूँ। 2 दिन पहले की बात है मेरी बात मेरे पति से हुई थी।  “जान!! क्या तुम करवाचौथ पर घर नही आ रहे हो?? हर बार तुम करवाचौथ पर नही आते हो। देखो ये बुरी बात है। मैं किसके साथ पूजा करुँगी” मैंने अपने पति ऋतुराज से पूछा। मस्त हिंदी सेक्स स्टोरी : Buaa Ne Mujhe Condom Lane Ko Bheja Chudai Liye 2  फिर से उसने बहाना बना दिया। “देखो मैं अपने बोंस से बात करूंगा और छुट्टी मागूंगा। अगर मिलती है तो आ जाऊँगा” ऋतुराज बोला.  असल में कुछ महीनो से उसका उसकी सेक्रेटरी से चक्कर चल रहा था। ऋतुराज कोलकाता की एक फर्म में चार्टर अकाउंटेंट था। वो बस पैसे के पीछे भागने वाला मर्द था और खूबसूरत और जवान लडकियों को देखकर फिसल जाता था।  मुझे कुछ दिन पहले उसके ऑफिस से किसी ने बताया था की ऋतुराज का उसकी सेक्रेटरी से अफेयर चल रहा है और दोनों ऑफिस में ही मजे लूट लेते है। ये बात जानकर मैं काफी दुखी हो गयी थी। आखिर 2 दिन बाद करवाचौथ का त्यौहार आ गया और ऋतुराज नही आया।  “पापा जी!! वो नही आये” मैंने कहा और रोने लगी.  मेरे ससुर बहुत अच्छे आदमी थे। मेरा पति बहुत नालायक था पर ससुर जी बहुत अच्छे थे। मेरी बहुत देखभाल करते थे। उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। मैं फूट फूट कर रोने लगी।  “रो मत मेरी बच्ची!! रो मत!! मेरा बेटा इतना नालायक निकलेगा मुझे नही मालुम था” वो बोले और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फिराने लगे।  “पापा जी!! अब मैं पूजा किसकी करूं। देखो चाँद भी निकल आया है” मैंने आशुं बहाते हुए पूछा.  “बहू! चलो तुम मेरे साथ पूजा कर लो” ससुर जी बोले।  उनको मैं हमेशा पापा जी कहकर बुलाती थी. फिर वो भी नये कपड़े पहनकर छत पर आ गये। मैंने अपनी सुहाग वाली साड़ी पहनी थी जब मेरी शादी हुई थी। मैंने चाँद को देखकर पूजा की फिर ससुर जी को छन्नी में देखा। फिर किसी बीबी की तरह मुझे अपने पति के पैर छूने थे। पति तो थे नही मैंने झुककर ससुर जी के पैर छू लिए। चुदाई की गरम देसी कहानी : Chudai Ka Khel Park Mein Girlfriend Ke Sath  वो अच्छे मूड में दिख रहे थे। उन्होंने ही मुझे पानी पिलाकर मेरा व्रत तुड़वाया। आज ससुर जी से सुबह से कुछ नही खाया था क्यूंकि मेरे साथ वो भी व्रत थे। हम दोनों नीचे चले गये। मैंने उनको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। मैं पूरी तरह से नवविवाहिता दुल्हन लग रही थी। हाथो और पैरों में मैंने मेहँदी लगा रखी थी। रात के 10 बजे हुए थे।  घर में सन्नाटा था। सिर्फ 2 लोग घर में थे इसलिए थोडा अजीब लग रहा था। ससुर जी बार बार मेरे दूध की तरफ देख रहे थे। मैं बाही खुला वाला कट स्लीव ब्लाउस पहना था और ब्लाउस भी आगे से गहरा था। मेरी 38” की गोल गोल चूचियां साफ साफ़ दिख रही थी। ससुर जी मेरे मम्मो की तरफ ताड़ रहे थे और जैसे मैं उसकी तरह देखने लग जाती वो नजरे दूसरी तरफ घुमा लेते।  मैं सुंदर और जवान औरत थी। आखिर वो क्यों नही मेरी जवानी देखते। फिर मैंने सोचा की आज ससुर जी भी पूरा दिन व्रत रहे है। क्यों न मैं उनको अपने हाथ से खाना खिला दूँ। मैंने पुड़ी का एक कौर तोड़ा और सब्जी में डुबोया और ससुर जी को खिलाने लगी। वो संकोच कर रहे थे।  “क्या पापा जी! आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे है। अब अपनी बहू से कैसी शर्म” मैंने बिंदास लड़की की तरह चहक कर कहा और उनको खाना खिलाने लगी। पर दूसरी बार मेरा हाथ उसके मुंह में अंदर चला गया और जल्दबाजी में उन्होने मेरी ऊँगली को काट दिया।  “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी लग गयी” मैं चिल्लाई.  ससुर जी ने जल्दी से मेरी ऊँगली मुंह में दबा ली और चूसने लगे। जिससे मुझे आराम मिल सके। कुछ देर में मुझे आराम मिलने लगा। पर वो चूसते ही चले गये। फिर मुझे देखकर रुक गये और मेरी तरफ दूसरी नजर से देखने लगे। मैं भी उनको ही देख रही थी। कुछ अजीब अब होने वाला था।  फिर अचानक उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठे बैठे ही पकड़ लिया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए। जल्दी जल्दी चूसने लगे और मुझे कुछ सोचने का मौक़ा नही दिया। मैं मना कर रही थी पर तब तक बहुत देर हो गयी थी। ससुर जी से 5 मिनट तक मेरे रसीले होठ चूस डाले। फिर अपना मुंह मेरे मुंह से हटाया। वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गयी थी।  आगे के 15 मिनट कैसे गुजरे मुझे याद नही है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और सीधा अपने बेडरूम की तरह बढ़ने लगे। मैं चुप थी। मैं सोच नही पा रही थी की क्या करू। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और जल्दी से अपनी शर्ट की बटन खोलकर शर्ट उतारकर फेंक दी। वो मेरे उपर लेट गये और जल्दी जल्दी मेरे गालों पर किस करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna” मस्तराम की गन्दी चुदाई की कहानी : Barish Wala Romantic Sex Kiya Pyasi Aurat Ke Sath  मैं परेशान थी। मैं बहुत हैरान थी। पर ना जाने क्यों मैंने उनको मना नही किया। मैं चाहती तो ससुर जी को रोक सकती थी। पर शायद इस काली सुनसान रात में चुदाई के मजे लूटना चाहती थी। ससुर जी से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे ब्लाउस से हटा दिया और मुझे बाहों में भर लिया।  मेरे ब्लाउस पर वो हाथ घुमाने लगे। वो आज मेरी जवानी और खूबसूरती के आशिक हो गये थे। मैं पूरी तरह से नई दुल्हन की तरह सजी धजी थी और ससुर जी आप मेरे पति का रोल निभा रहे थे। वो मेरे गाल, गले, काम, चेहरे सब जगह किस कर रहे थे। मैं भी साथ दे रही थी।  “बहु!! आज तुमने करवाचौथ की पूजा मेरे साथ की है। छन्नी में तुमने मेरा चेहरा देखा है। तो आज मुझसे प्यार करके तुम अपने व्रत को पूरा कर दो” ससुर जी बोले.  “….तो क्या आप चाहते है की मैं आपको अपनी रसीली चूत चोदने क दे दूँ” मैंने हांफते हुए और लम्बी लम्बी सांसे खीचते हुए कहा.  “हा बहू!! मैं बिलकुल यही चाहता हूँ। तुम्हारा पति वहां कोलकाता में अपनी सेक्रेटरी के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहाँ पर प्यासी रह जाओ। ये तो सरासर गलत है। बोलो बहू क्या ख्याल है?  ससुर जी से चमकती आँखों से इस तरह से पूछा की मैं मना नही करपाई। मैंने हां में सिर हिला दिया। उसके बाद तो ससुर जी शुरू हो गये। मेरे बड़े बड़े कसे कसे मम्मो को ब्लाउस के उपर से लप्प लप्प करके दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। ससुर जी मुझे प्यार करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”  ब्लाउस के अंदर से जितना दूध दिख रहा था उस पर चुम्बन की बारिश करने लगे। मैं भी गर्म होने लगी। मुझे मजा आने लगा। फिर से उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह पर रख दिया और फिर से मेरे रसीले को काट काटकर किस करने लगे।  अब मैं गर्म हो गयी थी। मेरे अंदर की वासना भी अब जाग गयी थी। मैं भी अब ससुर जी से चुदना चाहती थी। वो अपने दोनों हाथो को गोल गोल मेरे ब्लाउस पर घुमा रहे थे। दबा दबाकर मजा लूट रहे थे।  “प्यार करो पापा जी!! आज मुझसे खुलकर प्यार करो” उतेज्जना में मैंने कह दिया.  वो मेरे ब्लाउस की बटन ढूढने लगे और खोलने लगे। पर शायद वो बहुत जल्दी में थे। बस जल्दी से मुझे चोद लेना चाहते थे। जोश में आकर उन्होंने बटन खोलनी शुरू की पर बहुत देर लग रही थी। ससुर जी ने मेरे ब्लाउस को बीच से दोनों हाथो से पकड़ा और जोर से खीचा। ब्लाउस फट गया।  लाल ब्रा में मेरी कसी कसी 38” की रसेदार चूचियों के दर्शन ससुर जी को होने लगे। ब्रा के उपर से वो मेरे कबूतर सहलाने लगे और दबाने लगे। “आह बहू!! तुम तो बहुत खूबसूरत हो” वो बोले और फिर ब्रा को दोनों हाथ से पकड़कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया। अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरीज : Biwi Ki Chudai Ka Raj Suhagrat Mein Khula  अब मैं उपर से नंगी हो गयी थी। पापा जी वासना में आकर मेरे मम्मो के दर्शन करने लगे। आपको बता दूँ की मेरी चूचियां बेहद सुंदर थी। कसी कसी गोल गोल बड़ी बड़ी। संगमरमर जैसी चिकनी। ससुर जी की आँखें वासना में चमक उठी। मेरे दोनों दूध पर रख दिया और सहलाने लगे।  मैंने आँखे बंद कर ली और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। वो मेरे उपर ले लेट गये और मम्मो के बीच में अपना चेहरा रखकर खेलने लगे। मेरे दूध किसी गेंद की तरह बड़े बड़े और बेहद सॉफ्ट थे। ससुर जी हाथ से मेरी गेंद को दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। “Sasur Bahu Antarvasna”  फिर वो पूरी तरह से मेरी जवानी के दीवाने हो गये। मेरी दोनों गेंद से खेलने लगे और मेरे क्लीवेज (मम्मो के बीच के गड्ढे) में अपना मुंह अंदर डालने लगे। जल्दी जल्दी अपना चेहरा इधर उधर करने लगे जिससे मेरे दूध उसके मुंह से जल्दी जल्दी टकरा रहे थे। मेरी तो चूत से नदी ही बहने लगी। मेरी चूत से पानी निकलने लगा।  “आह पापा जी!! आज रात के लिए मैं आपकी औरत हूँ। आज चोद लो मुझे आप। ले लो मजा मेरी भरी जवानी का” मैंने भी नशे में कह दिया. उसके बाद वो जल्दी जल्दी मेरे कबूतर हाथ से मसलने लगे और दबाने लगे। आटे की तरह गूथ रहे थे मेरी दोनों चूचियों को। फिर मुंह में लेकर चूसने लगे।  मैं तो “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…”करने लगी। क्यूंकि मुझे भी अच्छा लग रहा था। कितने महीनो से मेरा पति ऋतुराज घर नही आया था। तो आज ससुर जी ही उसकी जगह उसका कर्तव्य निभा रहे थे। वो मेरी लेफ्ट साइड वाली चूची को मुंह में अंदर तक ठूस कर जल्दी जल्दी चूस रहे थे। पीये जा रहे थे।  मेरे जिस्म में अब चुदाई वाली आग लग रही थी। ससुर जी तो रुक ही नही रहे थे। बस जल्दी जल्दी चूसते ही जा रहे थे। कामुकता में आकर मैंने उनके सिर के बाल पकड़ लिया और अपनी उँगलियों से पकड़कर नोचने लगी। मैंने 2 चांटे भी उनको गाल पर मार दिए। वो समझ गये की बहुत अब गर्म हो रही है। चूत तो अब जरुर देगी।  ससुर जी ने 15 से 20 मिनट मेरी चूचियों का रस चूसा। खूब मुंह चलाकर पिया। इसी गरमा गर्मी में उन्होंने मेरी चूची की उभरी हुई गद्देदार निपल्स को कई बार दांत से पकड़कर उपर की तरह खींच खीच चूसा जिससे मुझे दर्द हुआ। पर मजा भी खूब मिला। मेरे दोनों बूब्स पर उनके दांत के निशान बन गये। “Sasur Bahu Antarvasna”  “चोदिये पापा जी!! आज करवाचौथ है। आज मैं आपको बीबी हूँ। पति धर्म आज निभा दीजिये। आज चोद लीजिये मुझको” मैंने कहने लगी.  ससुर जी ने अपनी पेंट उतार दी और अंडरवियर भी उतार दिया। उन्होंने अपने हाथो से आज मेरा द्रौपदी की तरह चीर हरड कर दिया। मेरी साड़ी उन्होंने ही मेरी कमर से खोली और उतार दी। मैंने लाल रंग का साड़ी से मैच करता पेटीकोट पहना था। ससुर जी ने अपने मुंह से मेरे पेटीकोट का नारा खोला और उतार दी।  मेरी पेंटी मेरे ही चूत के रस से भीग गयी थी। ससुर जी उसे निकालने लगे तो घुटनों पर पेंटी फस गयी। फिर उन्होंने हाथ घुमाकर उसे उतार दिया। मैं झेप गयी। अपने चेहरे को अपने दोनों हाथो से मैंने जल्दी से छुपा लिया क्यूंकि आज मैं ससुर जी के साथ हमबिस्तर होने जा रही थी। उसने चुदने जा रही थी।  ससुर जी पागल हो गये। मेरी जांघे और पैर बहुत सुंदर थे। गोरे गोरे और कमाल के चिकने। वो मुझे प्यार करने लगे। मेरे पैरो को हाथ से टच करने लगे। फिर मेरे पैर खोल दिए। 2 सेकंड ससुर जी से रस से पूरी तरह से तर और भीगी चूत के दर्शन करने लगे फिर तो ऐसा मेरी चूत पर टूट पड़े जैसे रबड़ी को देखकर बिल्ली उस पर टूट पड़ती है।  लेटकर अपना मुंह मेरी चूत पर उन्होंने टिका दिया और जल्दी जल्दी चूत की चटनी पीने लगे। कामुकता के नशे में आकर मैं “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरी आँखे बंद थी। मैं ससुर जी से नजरे नही मिला पा रही थी। वो जल्दी जल्दी मेरी तर चूत को रबड़ी की तरह चाट रहे थे। कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पैसे की लालची औरत को पटा लिया मैंने  मेरी खूबसूरत चुद्दी गुलाबी रंग की थी। अब तो मुझे दोहरा नशा मिल रहा था। वो अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाल रहे थे। मैं अभी भी अपने चेहरे को अपने हाथो से छुपा रही थी। कितना मजा लुट रही थी मैं। ससुर ने 10 मिनट मेरी चुद्दी चाटी। अंत में लंड चूत पर सेट कर दिया और जोर का धक्का दिया। “Sasur Bahu Antarvasna”  लंड 4” अंदर घुस गया। मुझे दर्द हो रहा था। फिर ससुर जी ने एक जोर का धक्का फिर से दिया। अब उनका 8” लंड पूरा अंदर घुस गया। मैं दर्द से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”बोलकर चिल्ला पड़ी। मैंने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा दिए और उनको मुंह पर मुक्के मारने लगी।  ससुर जी भी असली मर्द के बच्चे थे। उन्होंने बड़ी ताकत से मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ लिए और बिस्तर पर रख दिये। मेरी नाजुक कलाई पकड़कर उन्होंने चुदाई स्टार्ट कर दी। मुझे धका धक पेलने लगे। आज पुरे 3 महीनो बाद मैं चुद रही थी क्यूंकि मेरा पति ऋतुराज घर ही नही आया था। इस वजह से मेरी चूत का रास्ता बंद हो गया था।  पर आज मेरे मर्दाना मिजाज वाले ससुर जी मुझे पेल रहे थे। वो कमर उठा उठाकर मुझे चोद रहे थे। मैं लम्बी सांसे ले रही थी। मेरे दूध हिल रहे थे। उपर नीचे डांस कर रहे थे। ससुर जी सिर्फ मेरी चूत की तरह देखकर पेल रहे थे। मैं मर रही थी। 15 मिनट बिता तो चूत रंवा हो गयी। अब ससुर जी का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा। दिल खोलकर चुदी है। फिर हाँफते हांफते ससुर जी से मुझे 10 मिनट और चोदा। फिर उनका चेहरा ढीला पड़ गया। मेरी चूत में गर्म गर्म माल उन्होंने छोड़ दिया। मेरे उपर को थक कर गिर गये। मैंने उनके होठ फिर से चूमने लगी।


मेरा नाम लतिका है। मैं प्रयागराज की रहने वाली हूँ। मेरी शादी हो चुकी है। मैं अपने ससुर के साथ अकेली रहती हूँ। मेरे पति कोलकाता में नौकरी करते है। वो 2 3 महीने में एक बार ही घर आते है। जब भी आते है मुझे बहुत प्यार करते है। मेरे ससुर जी भी बहुत अच्छे है। मेरे देवर की नौकरी कानपुर में लग गयी है। पहले वो हमारे साथ ही प्रयागराज में रहता था पर नौकरी लगने के बाद वो चला गया। Sasur Bahu Antarvasna

अब घर में मैं और ससुर जी है। मैं आप लोगो को अपने बारे में बताना चाहती हूँ। मैं 35 साल की जवान और सेक्सी औरत हूँ। अभी मेरे बच्चे नही हुए है। मैं सुंदर और जवान हूँ और आकर्षक व्यक्तित्व वाली औरत हूँ। मेरा कद 5’ 4” का है। जिस्म भरा हुआ है। मैं काफी गोरी हूँ और चेहरा का फेस कट बहुत सेक्सी है।

मेरी जवानी देखकर मर्दों के लंड खड़े हो जाते है। मन ही मन वो मुझे चोद लेना चाहते है पर ये मौका तो कुछ लोगो को ही मिला है। मुझे सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है। मेरे पति मेरे 38” के मम्मो को दबा दबा कर मेरी चूत मारते है। मेरा फिगर 38 32 36 का है। मुझे अपनी चूचियां दबवाने में बहुत अच्छा लगता है।

जब कभी पराये मर्द के साथ चुदाई करने का मौक़ा मिलता है तो मैं चुदवा लेती हूँ। “खाओ खुजाओ और बत्ती बुजाओ” वाले कांसेप्ट में मैं विश्वास करती हूँ। 2 दिन पहले की बात है मेरी बात मेरे पति से हुई थी।

“जान!! क्या तुम करवाचौथ पर घर नही आ रहे हो?? हर बार तुम करवाचौथ पर नही आते हो। देखो ये बुरी बात है। मैं किसके साथ पूजा करुँगी” मैंने अपने पति ऋतुराज से पूछा।


फिर से उसने बहाना बना दिया। “देखो मैं अपने बोंस से बात करूंगा और छुट्टी मागूंगा। अगर मिलती है तो आ जाऊँगा” ऋतुराज बोला.

असल में कुछ महीनो से उसका उसकी सेक्रेटरी से चक्कर चल रहा था। ऋतुराज कोलकाता की एक फर्म में चार्टर अकाउंटेंट था। वो बस पैसे के पीछे भागने वाला मर्द था और खूबसूरत और जवान लडकियों को देखकर फिसल जाता था।

मुझे कुछ दिन पहले उसके ऑफिस से किसी ने बताया था की ऋतुराज का उसकी सेक्रेटरी से अफेयर चल रहा है और दोनों ऑफिस में ही मजे लूट लेते है। ये बात जानकर मैं काफी दुखी हो गयी थी। आखिर 2 दिन बाद करवाचौथ का त्यौहार आ गया और ऋतुराज नही आया।

“पापा जी!! वो नही आये” मैंने कहा और रोने लगी.

मेरे ससुर बहुत अच्छे आदमी थे। मेरा पति बहुत नालायक था पर ससुर जी बहुत अच्छे थे। मेरी बहुत देखभाल करते थे। उन्होंने मुझे सीने से लगा लिया। मैं फूट फूट कर रोने लगी।

“रो मत मेरी बच्ची!! रो मत!! मेरा बेटा इतना नालायक निकलेगा मुझे नही मालुम था” वो बोले और मेरे सिर पर बड़े प्यार से हाथ फिराने लगे।

“पापा जी!! अब मैं पूजा किसकी करूं। देखो चाँद भी निकल आया है” मैंने आशुं बहाते हुए पूछा.

“बहू! चलो तुम मेरे साथ पूजा कर लो” ससुर जी बोले।

उनको मैं हमेशा पापा जी कहकर बुलाती थी. फिर वो भी नये कपड़े पहनकर छत पर आ गये। मैंने अपनी सुहाग वाली साड़ी पहनी थी जब मेरी शादी हुई थी। मैंने चाँद को देखकर पूजा की फिर ससुर जी को छन्नी में देखा। फिर किसी बीबी की तरह मुझे अपने पति के पैर छूने थे। पति तो थे नही मैंने झुककर ससुर जी के पैर छू लिए।


वो अच्छे मूड में दिख रहे थे। उन्होंने ही मुझे पानी पिलाकर मेरा व्रत तुड़वाया। आज ससुर जी से सुबह से कुछ नही खाया था क्यूंकि मेरे साथ वो भी व्रत थे। हम दोनों नीचे चले गये। मैंने उनको अपने हाथ से खाना खिलाने लगी। मैं पूरी तरह से नवविवाहिता दुल्हन लग रही थी। हाथो और पैरों में मैंने मेहँदी लगा रखी थी। रात के 10 बजे हुए थे।

घर में सन्नाटा था। सिर्फ 2 लोग घर में थे इसलिए थोडा अजीब लग रहा था। ससुर जी बार बार मेरे दूध की तरफ देख रहे थे। मैं बाही खुला वाला कट स्लीव ब्लाउस पहना था और ब्लाउस भी आगे से गहरा था। मेरी 38” की गोल गोल चूचियां साफ साफ़ दिख रही थी। ससुर जी मेरे मम्मो की तरफ ताड़ रहे थे और जैसे मैं उसकी तरह देखने लग जाती वो नजरे दूसरी तरफ घुमा लेते।

मैं सुंदर और जवान औरत थी। आखिर वो क्यों नही मेरी जवानी देखते। फिर मैंने सोचा की आज ससुर जी भी पूरा दिन व्रत रहे है। क्यों न मैं उनको अपने हाथ से खाना खिला दूँ। मैंने पुड़ी का एक कौर तोड़ा और सब्जी में डुबोया और ससुर जी को खिलाने लगी। वो संकोच कर रहे थे।

“क्या पापा जी! आप तो लड़कियों की तरह शरमा रहे है। अब अपनी बहू से कैसी शर्म” मैंने बिंदास लड़की की तरह चहक कर कहा और उनको खाना खिलाने लगी। पर दूसरी बार मेरा हाथ उसके मुंह में अंदर चला गया और जल्दबाजी में उन्होने मेरी ऊँगली को काट दिया।

“अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी लग गयी” मैं चिल्लाई.

ससुर जी ने जल्दी से मेरी ऊँगली मुंह में दबा ली और चूसने लगे। जिससे मुझे आराम मिल सके। कुछ देर में मुझे आराम मिलने लगा। पर वो चूसते ही चले गये। फिर मुझे देखकर रुक गये और मेरी तरफ दूसरी नजर से देखने लगे। मैं भी उनको ही देख रही थी। कुछ अजीब अब होने वाला था।

फिर अचानक उन्होंने मुझे कुर्सी पर बैठे बैठे ही पकड़ लिया और मेरे होठ पर अपने होठ रख दिए। जल्दी जल्दी चूसने लगे और मुझे कुछ सोचने का मौक़ा नही दिया। मैं मना कर रही थी पर तब तक बहुत देर हो गयी थी। ससुर जी से 5 मिनट तक मेरे रसीले होठ चूस डाले। फिर अपना मुंह मेरे मुंह से हटाया। वो मुझे चोदना चाहते थे मैं जान गयी थी।

आगे के 15 मिनट कैसे गुजरे मुझे याद नही है। पापा ने मुझे गोद में उठा लिया और सीधा अपने बेडरूम की तरह बढ़ने लगे। मैं चुप थी। मैं सोच नही पा रही थी की क्या करू। उन्होंने मुझे बेड पर लिटा दिया और जल्दी से अपनी शर्ट की बटन खोलकर शर्ट उतारकर फेंक दी। वो मेरे उपर लेट गये और जल्दी जल्दी मेरे गालों पर किस करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”


मैं परेशान थी। मैं बहुत हैरान थी। पर ना जाने क्यों मैंने उनको मना नही किया। मैं चाहती तो ससुर जी को रोक सकती थी। पर शायद इस काली सुनसान रात में चुदाई के मजे लूटना चाहती थी। ससुर जी से मेरी साड़ी का पल्लू मेरे ब्लाउस से हटा दिया और मुझे बाहों में भर लिया।

मेरे ब्लाउस पर वो हाथ घुमाने लगे। वो आज मेरी जवानी और खूबसूरती के आशिक हो गये थे। मैं पूरी तरह से नई दुल्हन की तरह सजी धजी थी और ससुर जी आप मेरे पति का रोल निभा रहे थे। वो मेरे गाल, गले, काम, चेहरे सब जगह किस कर रहे थे। मैं भी साथ दे रही थी।

“बहु!! आज तुमने करवाचौथ की पूजा मेरे साथ की है। छन्नी में तुमने मेरा चेहरा देखा है। तो आज मुझसे प्यार करके तुम अपने व्रत को पूरा कर दो” ससुर जी बोले.

“….तो क्या आप चाहते है की मैं आपको अपनी रसीली चूत चोदने क दे दूँ” मैंने हांफते हुए और लम्बी लम्बी सांसे खीचते हुए कहा.

“हा बहू!! मैं बिलकुल यही चाहता हूँ। तुम्हारा पति वहां कोलकाता में अपनी सेक्रेटरी के साथ मजे लूट रहा होगा और तुम यहाँ पर प्यासी रह जाओ। ये तो सरासर गलत है। बोलो बहू क्या ख्याल है?

ससुर जी से चमकती आँखों से इस तरह से पूछा की मैं मना नही करपाई। मैंने हां में सिर हिला दिया। उसके बाद तो ससुर जी शुरू हो गये। मेरे बड़े बड़े कसे कसे मम्मो को ब्लाउस के उपर से लप्प लप्प करके दबाने लगे। मैं “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” करने लगी। ससुर जी मुझे प्यार करने लगे। “Sasur Bahu Antarvasna”

ब्लाउस के अंदर से जितना दूध दिख रहा था उस पर चुम्बन की बारिश करने लगे। मैं भी गर्म होने लगी। मुझे मजा आने लगा। फिर से उन्होंने अपना मुंह मेरे मुंह पर रख दिया और फिर से मेरे रसीले को काट काटकर किस करने लगे।

अब मैं गर्म हो गयी थी। मेरे अंदर की वासना भी अब जाग गयी थी। मैं भी अब ससुर जी से चुदना चाहती थी। वो अपने दोनों हाथो को गोल गोल मेरे ब्लाउस पर घुमा रहे थे। दबा दबाकर मजा लूट रहे थे।

“प्यार करो पापा जी!! आज मुझसे खुलकर प्यार करो” उतेज्जना में मैंने कह दिया.

वो मेरे ब्लाउस की बटन ढूढने लगे और खोलने लगे। पर शायद वो बहुत जल्दी में थे। बस जल्दी से मुझे चोद लेना चाहते थे। जोश में आकर उन्होंने बटन खोलनी शुरू की पर बहुत देर लग रही थी। ससुर जी ने मेरे ब्लाउस को बीच से दोनों हाथो से पकड़ा और जोर से खीचा। ब्लाउस फट गया।

लाल ब्रा में मेरी कसी कसी 38” की रसेदार चूचियों के दर्शन ससुर जी को होने लगे। ब्रा के उपर से वो मेरे कबूतर सहलाने लगे और दबाने लगे। “आह बहू!! तुम तो बहुत खूबसूरत हो” वो बोले और फिर ब्रा को दोनों हाथ से पकड़कर फाड़ दिया और दूर फेंक दिया।


अब मैं उपर से नंगी हो गयी थी। पापा जी वासना में आकर मेरे मम्मो के दर्शन करने लगे। आपको बता दूँ की मेरी चूचियां बेहद सुंदर थी। कसी कसी गोल गोल बड़ी बड़ी। संगमरमर जैसी चिकनी। ससुर जी की आँखें वासना में चमक उठी। मेरे दोनों दूध पर रख दिया और सहलाने लगे।

मैंने आँखे बंद कर ली और “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….”करने लगी। वो मेरे उपर ले लेट गये और मम्मो के बीच में अपना चेहरा रखकर खेलने लगे। मेरे दूध किसी गेंद की तरह बड़े बड़े और बेहद सॉफ्ट थे। ससुर जी हाथ से मेरी गेंद को दबाने लगे। मुझे भी अच्छा लग रहा था। “Sasur Bahu Antarvasna”

फिर वो पूरी तरह से मेरी जवानी के दीवाने हो गये। मेरी दोनों गेंद से खेलने लगे और मेरे क्लीवेज (मम्मो के बीच के गड्ढे) में अपना मुंह अंदर डालने लगे। जल्दी जल्दी अपना चेहरा इधर उधर करने लगे जिससे मेरे दूध उसके मुंह से जल्दी जल्दी टकरा रहे थे। मेरी तो चूत से नदी ही बहने लगी। मेरी चूत से पानी निकलने लगा।

“आह पापा जी!! आज रात के लिए मैं आपकी औरत हूँ। आज चोद लो मुझे आप। ले लो मजा मेरी भरी जवानी का” मैंने भी नशे में कह दिया. उसके बाद वो जल्दी जल्दी मेरे कबूतर हाथ से मसलने लगे और दबाने लगे। आटे की तरह गूथ रहे थे मेरी दोनों चूचियों को। फिर मुंह में लेकर चूसने लगे।

मैं तो “…..ही ही ही……अ अ अ अ .अहह्ह्ह्हह उहह्ह्ह्हह….. उ उ उ…”करने लगी। क्यूंकि मुझे भी अच्छा लग रहा था। कितने महीनो से मेरा पति ऋतुराज घर नही आया था। तो आज ससुर जी ही उसकी जगह उसका कर्तव्य निभा रहे थे। वो मेरी लेफ्ट साइड वाली चूची को मुंह में अंदर तक ठूस कर जल्दी जल्दी चूस रहे थे। पीये जा रहे थे।

मेरे जिस्म में अब चुदाई वाली आग लग रही थी। ससुर जी तो रुक ही नही रहे थे। बस जल्दी जल्दी चूसते ही जा रहे थे। कामुकता में आकर मैंने उनके सिर के बाल पकड़ लिया और अपनी उँगलियों से पकड़कर नोचने लगी। मैंने 2 चांटे भी उनको गाल पर मार दिए। वो समझ गये की बहुत अब गर्म हो रही है। चूत तो अब जरुर देगी।

ससुर जी ने 15 से 20 मिनट मेरी चूचियों का रस चूसा। खूब मुंह चलाकर पिया। इसी गरमा गर्मी में उन्होंने मेरी चूची की उभरी हुई गद्देदार निपल्स को कई बार दांत से पकड़कर उपर की तरह खींच खीच चूसा जिससे मुझे दर्द हुआ। पर मजा भी खूब मिला। मेरे दोनों बूब्स पर उनके दांत के निशान बन गये। “Sasur Bahu Antarvasna”

“चोदिये पापा जी!! आज करवाचौथ है। आज मैं आपको बीबी हूँ। पति धर्म आज निभा दीजिये। आज चोद लीजिये मुझको” मैंने कहने लगी.

ससुर जी ने अपनी पेंट उतार दी और अंडरवियर भी उतार दिया। उन्होंने अपने हाथो से आज मेरा द्रौपदी की तरह चीर हरड कर दिया। मेरी साड़ी उन्होंने ही मेरी कमर से खोली और उतार दी। मैंने लाल रंग का साड़ी से मैच करता पेटीकोट पहना था। ससुर जी ने अपने मुंह से मेरे पेटीकोट का नारा खोला और उतार दी।

मेरी पेंटी मेरे ही चूत के रस से भीग गयी थी। ससुर जी उसे निकालने लगे तो घुटनों पर पेंटी फस गयी। फिर उन्होंने हाथ घुमाकर उसे उतार दिया। मैं झेप गयी। अपने चेहरे को अपने दोनों हाथो से मैंने जल्दी से छुपा लिया क्यूंकि आज मैं ससुर जी के साथ हमबिस्तर होने जा रही थी। उसने चुदने जा रही थी।

ससुर जी पागल हो गये। मेरी जांघे और पैर बहुत सुंदर थे। गोरे गोरे और कमाल के चिकने। वो मुझे प्यार करने लगे। मेरे पैरो को हाथ से टच करने लगे। फिर मेरे पैर खोल दिए। 2 सेकंड ससुर जी से रस से पूरी तरह से तर और भीगी चूत के दर्शन करने लगे फिर तो ऐसा मेरी चूत पर टूट पड़े जैसे रबड़ी को देखकर बिल्ली उस पर टूट पड़ती है।

लेटकर अपना मुंह मेरी चूत पर उन्होंने टिका दिया और जल्दी जल्दी चूत की चटनी पीने लगे। कामुकता के नशे में आकर मैं “अई…..अई….अई… अहह्ह्ह्हह…..सी सी सी सी….हा हा हा…”की कामुक आवाजे निकाल रही थी। मेरी आँखे बंद थी। मैं ससुर जी से नजरे नही मिला पा रही थी। वो जल्दी जल्दी मेरी तर चूत को रबड़ी की तरह चाट रहे थे।
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पैसे की लालची औरत को पटा लिया मैंने

मेरी खूबसूरत चुद्दी गुलाबी रंग की थी। अब तो मुझे दोहरा नशा मिल रहा था। वो अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाल रहे थे। मैं अभी भी अपने चेहरे को अपने हाथो से छुपा रही थी। कितना मजा लुट रही थी मैं। ससुर ने 10 मिनट मेरी चुद्दी चाटी। अंत में लंड चूत पर सेट कर दिया और जोर का धक्का दिया। “Sasur Bahu Antarvasna”

लंड 4” अंदर घुस गया। मुझे दर्द हो रहा था। फिर ससुर जी ने एक जोर का धक्का फिर से दिया। अब उनका 8” लंड पूरा अंदर घुस गया। मैं दर्द से “आऊ…..आऊ….हमममम अहह्ह्ह्हह…सी सी सी सी..हा हा हा..”बोलकर चिल्ला पड़ी। मैंने अपने हाथ अपने चेहरे से हटा दिए और उनको मुंह पर मुक्के मारने लगी।

ससुर जी भी असली मर्द के बच्चे थे। उन्होंने बड़ी ताकत से मेरे दोनों हाथ कसके पकड़ लिए और बिस्तर पर रख दिये। मेरी नाजुक कलाई पकड़कर उन्होंने चुदाई स्टार्ट कर दी। मुझे धका धक पेलने लगे। आज पुरे 3 महीनो बाद मैं चुद रही थी क्यूंकि मेरा पति ऋतुराज घर ही नही आया था। इस वजह से मेरी चूत का रास्ता बंद हो गया था।

पर आज मेरे मर्दाना मिजाज वाले ससुर जी मुझे पेल रहे थे। वो कमर उठा उठाकर मुझे चोद रहे थे। मैं लम्बी सांसे ले रही थी। मेरे दूध हिल रहे थे। उपर नीचे डांस कर रहे थे। ससुर जी सिर्फ मेरी चूत की तरह देखकर पेल रहे थे। मैं मर रही थी। 15 मिनट बिता तो चूत रंवा हो गयी। अब ससुर जी का लंड आराम से अंदर बाहर होने लगा। दिल खोलकर चुदी है। फिर हाँफते हांफते ससुर जी से मुझे 10 मिनट और चोदा। फिर उनका चेहरा ढीला पड़ गया। मेरी चूत में गर्म गर्म माल उन्होंने छोड़ दिया। मेरे उपर को थक कर गिर गये। मैंने उनके होठ फिर से चूमने लगी।


Sasur Ji Ka Mota Lund Meri Chut Mein Ghusa

Sasur Ji Ka Mota Lund Meri Chut Mein Ghusa,ससुर जी का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा


मैं शादी सुदा हूँ ये स्टोरी आज से २ साल पहले की है जब मै नई नई सुसराल आयी थी. मेरे सुसराल में केवल ४ लोग है मेरी सास ४० वर्ष की ससुर ४५ वर्ष के ननद १८ साल की और मेरे पति का मार्किटिंग का काम था इसलिए वो जयादातर शहर से बाहर ही रहते थे मेरी शादी को केवल ४ महीने ही हुए थे और मेने केवल ८-१० बार ही सेक्स किया था एक दिन की बात है, घर में मै और मेरी ननद ही थी मै अपने रूम में टी.वी देख रही थी मुझे पेशाब लगी और मैं अपने रूम से निकल कर टोलिट जाने लगी तभी मुझे ऐसा लगा की मेरी नंनद पूजा रो रही है मुझे ये आवाज उसके रूम से आ रही थी मेने सोचा आवाज लगाउ फिर कुछ सोच कर रूम के की होल से देखने लगी.

अंदर का नज़ारा देख कर में तो सन्न रह गयी अंदर पूजा फर्श पर नंगी पडी थी और हमारा कुत्ता उसकी चुत चाट रहा था ये देख कर मेरे तो होश हे उड़ गए फिर मेने देखा पूजा ने कुत्ते का लंड पकड़ कर अपनी चुत में डाल लिया और टौमी किसी पक्के चुद्दकद आदमी की तरह धकके लगाने लगा और पूजा भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी मुझसे ये सब देखा नहीं गया और में वहा से हट गयी !
थोड़ी देर बाद टौमी वहा से बाहर निकल आया फिर ……पूजा भी बाहर आ गयी. मुझे उस पे बहुत गुस्सा आ रहा था मुझे देख कर वो डर गयी मेने उसे बताया मेने सब देख लिया है अंदर क्या चल रहा था

तो वो रोने लगी और कहने लगे मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता तो मै चुप हो गयी मैने उस को समझाया कोई बॉय फ्रेंड बना लो और उसके साथ सेक्स का मज़ा लो फिर वो कहने लगी बॉय फ्रेंड तो है लेकिन डर लगता है क्योकी आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है मैने कहा किसने कहा आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है तो वो बोली की मैने देखा है मैने कहा किसका देखा है वो बोली पापा का देखा है और उसने बताया पापा का लंड गधे जितना लंबा और मोटा है 

ससुर जी का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा


मुझे विश्वास नहीं हुआ मैने किसी तरह उसको समझा कर कसम दिलाई आगे से कुते से मत चुदना लेकिन मेरे दिमाग में तो ससुर जी का लंड घूमने लगा था मैने सोचा एक बार ससुर जी का लंड देखा जावे फिर एक दिन मोका मिल ही गया घर के सब लोग बाहर गए हुए थे और दो दिन बाद आने वाले थे केवल में और ससुर जी घर पे थे मैने सोचा अच्छा मोका है,

मैने रात को उनके दूध में नीद की गोलिया मिला दी वो रात को दूध पी कर सो गए एक घंटे बाद ससुर जी के रूम में गयी उनको हिलाया मगर वो नहीं हिले में समझ गयी अब वो जागने वाले नहीं है

मैने उनकी लूंगी हटा कर कचछे का नाडा खोला और ……उनका लंड देखा और हैरानी से सन रह गयी उनका लंड सोया हुआ भी करीब 5 ईच लंबा होगा फिर मेरी चुत में भे चीटिया दोडने लगी मेरे मन में आया इसे खडा कर के देखती हूँ मैने लंड को मुह में ले कर थोडा गीला किया और दोनों हाथो से मुठ मारने लगी लंड में जैसे बिजली का करंट दोड गया वो खडा हो कर लगभग १२ ईच लंबा हो गया फिर सोचा देखती हू अगर मेरी चुत में घुसा तो कहा तक जवेगा मैने अपनी साडी और पेटीकोट निकल कर अलग रख दिया और ऊपर से नापने लगी,

वो मेरी चुत से पेट के बीच तक आया ये सब देख कर मेरी तो हवा खराब हो गयी जेसे मेंने हटना चाहा तो ससुर जी का हाथ अपनी जाँगो पर पाया उन्होंने मेरी जाँगो को मजबूती से पकड़ लिया था उनकी आँख खुली हुई थे और मेरी और देख कर मुस्करा रहे थे

वो कहने लगे अब नाप तो लिया है चुत में तो लेकर देखो बड़ा मज़ा आयेगा में डर गयी और वहा से हटना चाहा लेकिन ससुर जी ने मुझे बेड पर पटक दिया और मेरी चूची दबाने लगे में तो उस समय मदहोस सी हो गयी थी चुत भी गीली हो गयी थी मैने उनको रोकने की कोशिश की लेकीन ससुर जी ने मेरी एक नहीं सूनी और मेरा ब्लाउज और ब्रा निकल कर फैक दी और मेरी एक चूची मुह में ले कर चूसने लगे में तो जैसे पागल सी हो गयी !

मेरी चुत में एक उंगली डाल कर अंदर ……बाहर करने लगे थोड़ी देर ऐसा करने से मेरी चुत पनिया गयी थी अब ससुर जी मेरी टांगो के बीच में आ गए और मेरी चुत जोरो से चाटने लगे मुझे लगा मेरा पानी निकल जावेगा मैने ना चाह कर भी ससुर जी का लंड हाथ में पकड़ लिया और आगे पीछे जोरो से करने लगी ससुर जी का लंड इस समय एक मोटी लोहे की राड जेसा लग रहा था अचानक ससुर जी ने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरी गीली चुत के दाने पर घिसने लगे मेरी तो जान ही निकल गयी और मेरे मुँह से कामुक सिसकियाँ निकलने लगी लग रहा था,

चुत का लावा अभी बाहर आ जवेगा और ५ मिनट बाद ही मेरी चुत से बरसात होने लगी ससुर जी मेरी तरफ मुस्करा कर देखा और बोले बहु अभी तो लंड चुत के अंदर भी नहीं गया तेरी चुत ने तो ढेर सारा पानी भी छोड दिया यह सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए और मैने धीरे से ससुर जी के कान में कहा पापा जी मेरी चुत बहुत दिनों से पयासी है इसकी प्यास बुझा दो प्लीज!

ससुर जी प्यार से मेरे होठ चूसने लगे फिर मेरी चुत चाटने लगे और अपनी जीभ मेरी चूत में घुमाने लगे , अचानक उसने अपनी जीभ मेरे चूत के दाने पर लगाई और कस कर चूस दिया। मेरे मुँह से जोर की सीत्कार निकल गई “उईई …… माँ……… और…… चूसो… न…… ।”
ससुर जी ने अब दो उंगली चुत में डाल दी और अंदर बाहर …करते हुए मेरे चूत के दाने को चूसते रहे मेरी चुत में तो अब जेसे आग लगी थी लगता था एक बार फिर चुत का रस बाहर आ जावेगा ! मैने ससुर जी को कहा पापा जी मेरी चुत मुझे बहुत ही तंग करती है, मुझे ! बहुत ही खुजली मचती है इसमें !

बस अब मेरी चूत में अपना लन्ड डाल कर कस कर चोद डालो !” मेरी प्यास बुझा दो ना अब सहा नहीं जा रहा और ससुर जी के हलंबी लंड को हाथ में ले कर मसलने लगी लंड की मोटाई मेरी मुठी में नहीं आ रही थी ये सोच कर की मेरी चुत आज जरूर फट जवेगी में थोडा डर भी गयी ससुर जी ने ये मेरे चेहरे को देख कर भाँप लिया और प्यार से बोले बहु घबरा मत आज तुझ्रे वो मज़ा दूगा फिर कभी दूसरे लंड से नहीं चुदवाओगी!

लेकिन पापा जी आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !” ससुर जी ये सुन कर थोड़े मुस्कराए और कहा बहु चल अब लंड को मुह में ले कर चूस ! लंड तो पहले से ही लोहे की राड जेसा था मै अब लंड को चूसने लगी ससुर जी भी पुरे जोश में आ गए थे और मेरे मुह को लंड से चोदने लगे मेरी तो साँस ही रुकने लगी ! कुछ देर ऐसा करने के बाद अब ससुर जी ने अपना लंड मेरी चुत के मुह पर रखा और थोडा धीरे से अंदर किया पक की आवाज से लंड का टोपा चुत में चला गया और एक जोर का धकका मारा लंड करीब ३-४ इंच अंदर चला गया …


मेरी तो जान ही निकल गयी ! ससुर जी पुराने खिलाडी थे लंड पूरा अंदर ना कर के धीरे धीरे धकके लगाने लगे ! लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरी चूत कसी हुई थी। जैसे ही वो अपना लन्ड बाहर निकालता मेरी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद उन्होंने एक तकिया मेरी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया !

अपना लन्ड मेरे योनि-द्वार पर रखा और कमर को पकड कर एक जोर से झटका दिया,ससुर जी का पूरा लन्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। में उत्तेजना में भर गई, और उनके सीने से चिपक गई और मेरे मुँह से निकल पड़ा,”ओह्ह्ह्…… …हाय्… ………अब……मजा मिला है ! बस पापा जी ऐसे ही चोदते रहो बहुत मज़ा आ रहा है !फिर उन्होंने मेरी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और मेरी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करने लगे। पुरे कमरे में फचा फच …. ….फचा फच की आवाज आ रही थी मेरी कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो गयी थी कि मेरा सारा शरीर तप रहा था, मैने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी, मेरा शरीर मछली की तरह तड़प रहा था और मुझे कुछ होश नहीं था                Sasur Ji Ka Mota Lund

जैसे ही ससुर जी का लन्ड मेरी …चूत में जाता,में अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, लन्ड के हर प्रहार का जबाव में अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। कमरे में मेरे मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं,” आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल !

मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………” अचानक मेरा पूरा जिस्म अकडने लगा और में झड़ गई इतनी जोर से स्खलित हुई की गर्म गर्म रस से मेरी चुत भर गयी। अभी भी ससुर जी लगातार मुझे तेजी से चोदे जा रहे थे और करीब १५ मिनट तक चोदने के बाद मेरी चुत में ही झड गए! मुझ में अब उठ कर बैठने की भी हिम्मत नहीं थी! ससुर जी ने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए मुझे जोर का पेसाब लगा था

मैने ससुर जी को कहा आप बाहर जाओ मुझे …पेसाब करना है लेकीन ससुर जी नहीं माने और कहा बहु तेरी चुत से पेसाब निकलता हुआ मुझे देखना है! में शरमा गयी ससुर जी बोले बहु अब क्यों शरमा रही हो और में सर नीचे कर के कमोड पर बैठ कर उनके सामने मूतने लगी और मैने देखा मेरी चुत से पेसाब के साथ खून भी आ रहा था मैने ससुर जी पर नाराजगी दिखाते हुए कहा आपने मेरी चुत फाड दी है देखो खून भी आ रहा है


ससुर जी ने नीचे झुक कर मेरी चुत के दाने पर उंगली रगड़ दी अब मेरी चुत में जोर से खुजली हुई और मैने ससुर जी को देखा उनका हलंबी लंड पुरे जोरो से खडा था एक बार तो में लंड को देखते ही डर गयी लेकीन क्या करती मेरी चुत में भी तो जोरो की खुजली लगी थी अब में बेशरम बन गयी थी ससुर जी के लन्ड को मुह मे ले कर चुसने लगी और देखते ही देखते लन्ड महाराज मेरी पकड़ से बहार होने लगे!

ससुर जी बोले बहु एक बार और चुदाई कर लेने दो मेने चुपचाप लन्ड को चुत के दाने से रगडना शुरु कर दिया मेरी चुत मे तो जेसे आग लगी थी अब ससुर जी ने एक ही झटके पुरा का पुरा लन्ड चुत मे डाल दिया मेरी तो जान ही निकल गई और मेने कहा पापा जी मज़ा आ गया चोदो अपनी बहु को जोर से चोदो! कमोड पर बैठे हुए ससुर जी ने मेरी दोनो टागे अपने कधे पर रखी हुई थी

इस तरह से मेरी गान्ड का भुरा ……छेद साफ़ दिखाई दे रहा था ससुर जी ने चुत से लन्ड निकाला और मेरी गान्ड मे पुरे जोर से अनदर कर दिया मेरी जोरो से चीख निकल गई हाय माँ मर गई! ससुर जी का लन्ड मेरी गान्ड मे पिसटन की तरह चल रहा था! मुझ से बरदाश्त नहीं हुआ और मेरी चुत ने लबालब रस छोड दिया! Sasur Ji Ka Mota Lund

आधे घंटे की घमसान गान्ड चुदाई के बाद ससुर जी ने मेरी गान्ड लन्ड रस से भर दी! अब तो ससुर जी का हलंबी लंड मेरी मुनिया चुत को भा गया था और रोज़ ही रात को चुदाई का खेल होने लगा ! एक रात को मेरी नंनद पूजा ने मेरी चुदाई का खेल देख लिया और मेने पूजा को ससुर जी यानी पूजा के पापा से केसे चुदवाया वो फिर कभी और नंनद भाभी एक साथ चुदाई का मजा लेने लगे

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