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सलवार खोलकर बुर चुदाई कर डाली ट्यूशन पढ़ने आई लड़की की

सलवार खोलकर बुर चुदाई कर डाली ट्यूशन पढ़ने आई लड़की की
सलवार खोलकर चुदाई कर डाली ट्यूशन पढ़ने आई लड़की की  हैलो दोस्तो मेरा नाम निकी है । मैं दिल्ली कॉलेज में पढ़ता हूँ।मेरी हाइट 5 फ़ीट 9 इंच है और दिखने में ठीकठाक हूँ।मेरा घर पंजाब में है। हमारा घर काफी बड़ा है,मेरा कमरा छत पर यानी पहली मंजिल पर है। यहाँ भी देखें >> पत्नी चुदवाती नहीं थी तो जवान बहु को चोदने लगा हिन्दी सेक्स कहानी वैसे तो मेरे पापा मम्मी ने कई बार चुदाई का सुख प्राप्त करा होगा पर संतान एक ही पैदा करी और वो मै हूँ. जी हाँ दोस्तों मैं अपने माता पिता की इकलौती संतान हूं। मैं पढ़ाई में पहले से ही होशियार था। लॉकडाउन की वजह से मार्च से ही घर पर हूँ।

हमारे पड़ोस में एक लड़की है जिसका नाम है आस्था,उसकी उम्र 18 वर्ष है और वो 12वी में पढ़ती है। मैं उसे बहुत पसंद करता हूँ क्योकि वो है ही बहुत सुंदर और सेक्सी। उसकी हाइट 5 फ़ीट 5 इंच है। उसका रंग बिल्कुल गोरा है और शरीर से बिल्कुल फिट है,उसके बूब्स यानी बोबे बहुत बड़े बड़े है।उन्हें देखकर हमेसा दिल मे कुछ कुछ होता था और ऊपर से रोज वो इतने सुंदर सूट पहनती थी कि ऐसा लगता था कि कोई परी आई हो। पता नही कैसे पर 12वीं में दो विषयो में फैल हो गई एक तो बायोलॉजी यानी जीव विज्ञान और दूसरा केमिस्ट्ररी यानी रसायन विज्ञान।.


इसलिए उसकी मम्मी एक दिन हमारे घर आई और मेरी मम्मी से पूछा कि बहनजी क्या निक्की आस्था को ट्यूशन पढ़ा देगा,पता नहीं ये लड़की फैल कैसे हो गयी।अब आपको तो पता है एक तो ये बीमारी चल रही है,और ऊपर से लड़की भी बड़ी हो गयी है। मैं उन दोनों की बाते सुन रहा था ,और मुझे खुशी हुई ये सुनकर।जिससे पहले मैं कुछ कहता ,मेरी मम्मी ने हाँ कर दी थी और कहा 4 बजे भेज दिया करो ,तब निक्की भी फ्री होता है।

अब वो ट्यूशन पर रोज आने लगती है. मैने कहा चलो ऊपर मेरे कमरे में यहाँ नीचे हम दोनों डिस्टर्ब रहेंगे। आस्था: ऊपर मेरे कमरे में आती है और मेरे कमरे को देखकर चुपचाप बैठ जाती है। मैने पूछा तुम फैल कैसे हो गयी? उसने कहा पता नही। मैने कहा चलो कोई नहीं आज से में तुम्हे पढ़ाऊंगा ,अगर कोई दिक्कत आए तो पुछ लेना। उसने हाँ भरते हुवे सिर हिलाया।


अब बीच-बीच में मैं हँसी मजाक कर लेता था। कभी उसके सूट के डिज़ाइन के ऊपर या कभी कोई जोक। अब वो भी मेरे से अच्छे से घुल मिल गई थी। धीरे धीरे उसके डाउट्स कम होते गए और हमारा सिलेब्स भी लगभग कवर हो गया था।एक दिन वो जीन्स टॉप पहन कर आई। मानो उस दिन तो मुझे वो हार्ट अटैक दे देती।उसके मोटे मोटे बोबे टॉप से बाहर आने को तरस रहे थे और उसकी जांघ उसकी जीन्स से सटी हुई। वो इतनी हॉट लग रही थी कि क्या बताऊँ।

मैंने पूछा आज ये ड्रेस क्यों? उसने कहा आज मम्मी नहीं थी ना, वो अपने गाँव गयी है।आज मेरा दिल किया तो पहन लिए। मैने कहा बहुत सुंदर लग रही हो। उसने कहा थैंक्स। मैने पूछा आस्था तुम्हे कोई लड़का पसंद नहीं था क्या स्कूल में? आस्था ने कहा : नहीं मुझे कोई पसंद नहीं था। आस्था: क्या आपको कोई लड़की पसंद नही आई कॉलेज में? मैने कहा नही,वो दिल्ली है वहा की लड़कियों पर विश्वास नही है मुझे क्या पता जिससे प्यार करूँ वो धंधा करने वाली निकल जाये तो मेरी तो जिन्दगी ही ख़राब हो जायगी।

आस्था : क्यो ऐसा क्या कर देती है वो ,हँसते हुवे? मैने कहा छोड़ो उनको ,पर मुझे तुम बहुत पसंद हो शूरु से ही। दिल मे कुछ कुछ होता है जब भी में तुझे देखता हूं। आस्था बोली चल जूठा ,मैं ही मिली तुम्हे पागल बनाने को। और मैने उसे पढ़ाना शूरु किया।बीच मे उसने हिचकिचाते हुवे पूछा क्या तुम मुझे सच मे पसंद करते हो। मैने कहा हाँ । आस्था शरमाते हुए बोली की ऐसा क्या पसंद है तुम्हे मुझ में? मैने हस्ते हुवे कहा ,सबकुछ, तुम्हारा साफ दिल,तुम्हारा चेहरा तुम्हारा शरीर और उसकी खुशबू ,तुम्हारे बाल। आस्था बोली और कुछ भी बच गया क्या अब मेरे इस शरीर में??

मैने कहा हाँ तुम्हारे मुलायम हाथ और उंगली दिखाते हुवे उसकी छाती पर लटके दो मोटे मोटे बूब्स की तरफ इशारा किया। मैने सोचा वो गुस्सा होगी पर वो एकदम हँसी। बहुत सुंदर लग रही थी आस्था मेरा पहला प्यार हँसते हुए। मैंने बिना कुछ सोचे उसके गालों पर एक किस कर दिया। उसने पूछा ये क्या था? मैंने कहा मेरा मन किया और वो घर चली जाती है क्योंकि आज का टयूशन समय हो गया था। सारी रात मैं उस किश के बारे में सोचता रहा ,उसके मुलायम से गाल। मैने ठान लिया था कि कल मैं उसको परपोज़ करूँगा और बहुत जल्द उसकी सलवार सूट खोलकर चुदाई भी करूँगा।

अगले दिन जब वो आती है उसके चेहरे पर अलग सी चमक दिख रही थी। मैं उसके सामने गया और घुटनों के बल बैठ गया और गुलाब देते हुवे पूछा क्या तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बनोगी?? वर्जिन आस्था थोड़ा सोचते हुवे बोली “हाँ” । मेरी खुसी का मानो कोई ठिकाना ना रहा। और हम दोनों बैड पर आकर बैठ गए। मैं उसे पढ़ाने लगा क्योकि मैं कोई जल्द बाजी नही करने वाला था। बीच में मैने आस्था से पूछा क्या तुमने कभी किसी को किश करते देखा है होठो पर?? वो शर्मा गयी और शरमाते शरमाते मुस्कुराने लगी। मैने कहा देखो आज से हम सब कुछ शेयर कर सकते है ।क्योंकि आज ही तो हम गर्लफ्रैंड बॉयफ्रैंड बने है और ये बाते सिर्फ हमारे बीच रहेगी।

आस्था ने कहा हाँ टीवी पर देखा था एक फ़िल्म में। मैने पूछा क्या हम ट्राई करें?? आस्था बोली मुझे बहुत डर लग रहा है कोई आ गया और हमें देख लिया तो। मैने कहा मेरे रूम में कोई नही आता है। और हम बैड पर एक दूसरे के सामने मुँह करके बैठ गए। हम दोनों ने अपना मुँह आगे किया और हमारे होंठ आपस मे टच हुए। बहुत अनोखा एहसास था वो आज मै मेरे पहले प्यार के साथ जो मस्ती कर रहा था ।उसके गुलाबी होंठ बहुत मुलायम और गीले थे। उसकी साँसे तेज हो गयी थी। हम दोनों 5 मिनट तक ऐसे ही बैठकर एक दूसरे के होठो को टच कर रहे थे।

हमने फ्रेंच किस करने की कोशिश की।उसके मुँह का वो गरम गरम एहसास ,उसकी स्लाइवा का टेस्ट अब भी मुझे याद है। फिर मैंने उसके चूचो को हाथ लगाया ,उसके सूट के ऊपर से। आस्था ने हल्का सा मेरे हाथ मार मारा। बहुत मुलायम और बड़े बड़े थे।मैं उन्हें देखना चाहता था। मैंने आस्था को सूट उतारने को कहा और पहले तो उसने शर्माते हुवे देखा और कहा नही कोई आ जायेगा। मैं उठा और रूम अंदर से बंद किया और कहा अब बोलो। उसने सलवार सूट उतारा ,और उसकी लाल रंग की ब्रा दिखी। मैंने कहा रुको मैं मदद करता हूँ।और मैन उसकी सेक्सी ब्रा के हूक खोले। उसके मोटे मोटे बूब्स बिल्कुल गोरे और निप्पल्स बिल्कुल टाइट हो रखे थे।

उसकी छाती पर दो तिल भी थे मानो उसकी बूब्स को बुरी नजर वालो से बचाने के लिए काला टिक्का हो। ये हम दोनों का ही पहला अनुभव था। इसलिए मैं उसे ज्यादा परेशान नही करना चाहता था। मैने कहा आस्था देखो मैं तुम्हे सही में बहुत प्यार करता हूँ इसलिए ऐसा कुछ नही करूँगा जिससे तुम्हे परेशानी हो,और वो हँसी और कहा ठीक है मुझे पता है। मैने उसके शरीर को सूँघा बहुत मनमोहक खुसबू आ रही थी।दिल कर रहा था कि सारे शरीर को किश करु। मैने उसके चूचो पर अपना हाथ रखा और उससे कहा यार सही में बहुत मुलायम और सुंदर है। क्या इनका स्वाद चेक कर लूं??

आस्था: ओके ठीक है। मैने उसके निप्पल्स को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा।अब वो गरम होने लगी थी और सिसकारियां भर रही थी।मैने आधे घंटे तक उसके दोनों निप्पल्स चूसे और प्रयास करता उसके सारे बूब(चूचो) को अपने मुँह में भरने का। आस्था ने कहा थोड़ी गुदगुदी हो रही है ,पर मजा आ रहा है।वो सिसकारियां अम्म अम्म आह अम्म अम्म अम्म ,और चूसो, ऐसे बोल रही थी। मैने अंत मे उसको फिर से किश किया और कहा यार टयूशन का समय तो खत्म हो गया। अब घर जाओ कल जल्दी आना।

मैने उससे पूछा क्या तुमने अपने झांट के बाल काट रखे है?? आस्था बोली नहीं । मैने पहले ही इंतेज़ाम कर रखा था ,मैंने उसको वीट(हेयर रिमूवल क्रीम) और एक ज़िलेट का रेजर दिया और कहा कल शेविंग करके आना ,हाथो और पैरों के बाल भी वीट से हटा लेना। आस्था पूछने लगी क्या ये जरूरी है?? मैंने उसे चुतिया बनाते हुए कहा हाँ, हमे अपने शरीर को साफ सुथरा रखना चाहिए।

अगले दिन वो ट्यूशन पर आती है. मैं और मेरी मम्मी आइस क्रीम खा रहे थे। मेरी मम्मी बोली बीटा निक्की आस्था को भी आइस क्रीम डाल कर दो। आस्था बोली नही आंटी इसकी कोई जरूरत नही है। मैने उसकी आइस क्रीम डाली और कहा हम दोनों पढ़ते पढ़ते ही खा लेंगे और ऊपर मेरे रूम में आ गए। उसके हाथों पर बाल नही थे मैं समझ गया था कि शेविंग करके आयी है आस्था। मैंने रूम अंदर से लॉक किया और आइस क्रीम बैड पर रखी।और आस्था का सूट उतारने लगा। आस्था: क्या हुवा ? मैंने कहा यार अब इंतेज़ार नही होता है।

आस्था: हँसी और बोली रुको मैं उतारती हूँ। मैंने उसे बैड पर लिटाया,और उसके बूब्स और सारे मुह पर आइस क्रीम लगा दी। उसके बूब्स बहुत सेंसिटिव थे,वो कहने लगी जल्दी करो गुदगुदी और बहुत ठंडा लग रहा है। मैंने उसके मुह और निप्पल्स को काफी देर तक चूसा और साफ किया। आस्था बोली बहुत मजा आ रहा है।

मैने उसकी सलवार में धीरे धीरे अपना हाथ डाला,उसकी चुत बहुत गर्म और मुलायम थी और गीली भी हो गयी थी।
मैंने अपने हाथों से रगड़ना स्टार्ट किया और उसकी मनमोहक आवाज़ें निकलने लगी।
मैं उसकी चुत को देखना चाहता था,अब वो इतनी गरम हो चुकी थी कि।

मैंने आज उसकी सलवार नीचे खींची ,उसने ब्लैक कलर की पैंटी पहन रखी थी। उसकी टांगें बहुत खूबसूरत लग रही थी बिना हेयर्स के। मैने उसके टांगो को किश करना स्टार्ट कर दिया और धीरे धीरे उसकी जांघो की तरफ बढ़ा। एक लुभावनी सी खुसबू आने लगी। मैंने उसकी पैंटी को उतारा और मैं देखकर हैरान रह गया कि उसकी बुर बिलकुल गोरी थी,जैसा कि फॉरेन(विदेशी) कन्ट्रीज की लड़कियों की होती है।

मैं देखना चाहता था कि इसकी चूत कितनी सेंसिटिव है। और मैंने उस पर अपना मुँह रखा और चूसने लगा। उसकी वर्जिन चूत का स्वाद नमकीन सा था,और एक अलग से खुसबू थी। वो तेज तेज सिसकारियां भर रही थी,आह आह आह आह आह आह अम्म अम्म आह आह आह आह आह आह आह आह अम्म………. इनको सुनकर मेरे अंदर जोश से आ रहा था जब वर्जिन चूत के छेद के अंदर मैं अपनी जीभ डालता तो वो बोलती नही आह दर्द होता है।

लगभग 3 मिनट बाद उसका सारा शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्लाई कुछ आने वाले है। उसने मेरे मुँह पर एक पानी का फव्वारा जैसा मारा। उसका स्वाद हल्का नमकीन और खुसबू ठीक ठाक थी। मैंने पूछा आस्था कैसा लग रहा है? आस्था बोली मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी दूसरी दुनिया मे हूं इतनी खुशी आज तक मुझे नही हुई है। आस्था थक गई थी पर उसकी वो अब भीगी हुई चिकनी चुत को देखकर दिल बोल रहा था कि अभी और खेलो इसके साथ।

मैने आधी आइस क्रीम उसकी चुत पे डाल ली,चूंकि चूत का तापमान ज्यादा होता है वो एक बार कापी और मेरे मुँह को पकड़कर अपनी चूत पर किया और कहा जल्दी हटाओ इसे। मैंने उसकी बुर को चाटना फिर से चालू किया अब आइस क्रीम का स्वाद ही बदल गया था। अबकी बार उसको पूरे 5 मिनट लगे।और थोड़ा सा पानी मेरे मुँह पर फिर से मारा। वो इतनी निढ़ाल होकर गिरी थी कि मानो दुनिया की सबसे खुश लड़की हो।

और मैं उसके ऊपर लेट गया ।उसके बूब्स मेरी शरीर से बिल्कुल टच थे।उसने मुझे किश किया, पर मेरा लन्ड इतने दिन से बहुत हार्ड रहता था क्योंकि पहले दिन से जब ,आस्था टयूशन के लिए आई थी उसी दिन मैंने सोच लिया था कि मैं हस्तमैथून खुद नही करूँगा। उस दिन से आज तक ,मैं मेरे लन्ड को बड़ी मुश्किल से संभाल रहा हूँ। आस्था ने आज महसूस किया और कहा कुछ चुभ रहा है। मैंने कहा मेरे लन्ड को भी तुम्हारी चुत के साथ खेलना है। आस्था बोली नही मैं बहुत थक गई हूं।उठने की हिम्मत नही है। मैने मेरे कपड़े उतारे ,और आस्था को अपना अंडर वियर उतारने को कहा। वो मेरा लौड़ा देखकर चौक गयी और कही इतना बड़ा और मोटा लंड। ये कैसे हो गया। बच्चों का तो छोटा सा नुन्नू जैसा होता है।

मैंने कहा ये अभी बड़ा है जब तुम्हारी चूत के साथ खेलेगा और थक जाएगा तो ये भी छोटा हो जाएगा। मैं उसके ऊपर बैठ गया। और मेरा लन्ड उसके मुँह में डाल दिया और कहा इसे चूसो। आस्था ने कमाल कर दिया,मुझे इतना अच्छा लग रहा था ,उसका गरम गरम मुह और उसकी चिकनी लार। मैं अपने लन्ड को आगे पीछे करने लगा। वो इतने जोर जोर से उसे चूश रही थी कि मेरा लन्ड से 4 मिनट बाद वीर्य (पानी ) निकल गया,जो उसके मुँह में भर गया था।

मैं समझ गया उसके चेहरे को देखकर की वो उसका क्या करे??
मैंने उसको फ्रेंच किश करते हुए आधा वीर्य अपने मुह में लिया और पी गया।और मैंने उससे भी ऐसा करने को कहा।
वीर्य का स्वाद हम दोनो ने ही पहली बार चखा था।
अजीब सा स्वाद था।
आज का ट्यूशन टाइम भी खत्म होने वाला था सिर्फ 5 मिनट बचे थे।
पर मेरा लन्ड दोबारा खड़ा हो रहा था धीरे धीरे।
आस्था: ओह्ह नो ,फिर से नही, ये कब थकेगा।
मैंने पहले तो उसके बड़े बड़े चूचो के बीच अपने लन्ड को हिलाया,बहुत मजा आया फिर उसकी चिकनी चूत पर लन्ड रगड़ने लगा,बहुत स्लिपरी हो रखी थी
इसलिए ज्यादा टाइम ना लगा और मैंने मेरा वीर्य उसके दोनों चूचो पर गिरा दिया ।
और उनकी काफी देर तक मालिश की जबतक वो वीर्य सुख नही गया।

मैंने उसके शरीर को एक कपडे से साफ किया और कपड़े पहनने में मदद की क्योकि ट्यूशन का टाइम खत्म हो गया था। मैंने आस्था से कल के लिए पूछा की इससे आगे करे क्या?? आस्था बोली मुझे नही पता इससे आगे क्या क्या होता है।पर मुझे बहुत मजा आया।इसलिए हाँ मैं तैयार रहूंगी।और वो घर चली गयी। और मैंने कल की तैयारी उसके जाने के बाद स्टार्ट कर दी। मैं नारियल का तेल,एंटीसेप्टिक क्रीम,बाजार से लेके आया। मेरे कमरे में ही बाथरूम था।इसलिए कोई दिक्कत वाली बात नही थी। अगले दिन मैं बेसब्री से उसका इंतजार कर रहा था।जैसे ही वो घर के अंदर आयी मैं तुरंत उसे ऊपर मेरे कमरे में लेके गया और दरवाजा बंद किया।

दोनो ने कपड़े उतारे,और पुरे नंगे होकर बैड पर लेट गए। पहले किस किये,उसके बूब्स को सहलाया,उन्हें चूसा, उसके पेट पर किस किये,और उसकी गुलाबी चुत चाटी। वो बहुत गर्म हो चुकी थी। आज आखिर कार वो दिन आ गया था जब हम दोनों अपनी वर्जिनीटी खोते। मैंने उसके मोटे मोटे कूल्हों के नीचे एक तकिया लगाया उसकी दोनों टांगे खुलवाई और उन्हें मेरे कंधो पर रख दिया।

मुझे पता था बहुत दर्द होगा पहली बार वर्जिन बुर की चुदाई करवाने में इस वर्जिन लड़की को,इसलिए आस्था की आवाज को भी संभालना था ताकि नीचे कोई सुन ना ले की उप्पर पढाई के नाम पर चुदाई चल रही है । लंड और चूत के बिच घर्षण को कम करने के लिए मैंने आस्ता की चुत चोदने से पहले उसकी वर्जिन चुत पर नारियल का तेल लगाया और अपने 9 इंच लम्बे और 4 इंच मोटे लंड पर भी। उसकी बुर के छेद पर अपना तगड़ा लंड रखकर,अपने दोनों हाथों से उसके कंधो को पकड़ा हुवा था और अपने मुँह से उसके मुलायम होठो को बंद कर रखा था।

जैसे ही मैने पहला झटका मारा,उसके हाथ मेरे पेट पर गए और ऊपर धकेलने लगे।वो काँप उठी। उसकी आँखों मे आंसू आ गए थे।पर लन्ड अभी उसकी वर्जिन चूत में आधा ही गया था। आस्था की वर्जिन चूत की मसल्स मेरे तगड़े लन्ड को जकड़े हुए थी उसकी चुत बहुत गर्म थी जैसे उसकी बुर के अंदर हीटर चल रहा हो धीरे धीरे । मैंने एक और जोरदार झटका मारा और मेरा लन्ड उसकी बुर की सील तोड़ते हुए पूरा अंदर चला गया। चुदते चुदते वो कुँवारी लड़की दर्द के मारे मछली की तरह तिलमीला रही थी। मगर पहली चुदाई का ये दर्द तो उसे एक बार सहन करना ही पड़ेगा। उसको दर्द के मारे तड़पते देख मेरा दिल भी रोने को हो रहा था। मैंने कुछ समय के लिये उसकी फटी हुई चूत की चुदाई रोक दी और मैं ऐसे ही उसके ऊपर 3 मिनट तक लेटा रहा।

मैंने अपना मुँह उसके मुह से हटाते हुवे पूछा आस्था तुम्हारी चूत में दर्द हो रहा है क्या अभी भी? आस्था बोली अब तो इतना नही हो रहा पर तुम ऐसे ही लेटे रहो मेरे ऊपर। मैं भी उससे अलग नही होना चाहता था।उसकी नाजुक सी त्वचा मेरे शरीर को बहुत सुकून दे रही थी। मैंने जोर शोरो से उसे किश करना चालू किया। जैसे ही मेरा लन्ड थोड़ा सा हिलता वो दर्द से चिल्लाती आह आह दर्द होता है। मैंने उससे कहा देखो आज तो इतना दर्द ही होगा ये तुम्हे सहना पड़ेगा,वरना बार बार तुम्हे ये दर्द होगा।

आस्था: तो फिर जल्दी पूरा करो इसे और मैंने उसे किश करते हुवे लन्ड बाहर भीतर करने लगा।उसे हल्का हल्का दर्द होता और वो मेरे होठो को मजबूती से पकड़ लेती। लगभग 5 मिनट बाद मैं झड़ने वाला था इसलिए मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला जो खून का सना हुवा था। आस्था बोली ये खून कहा से आया?? मैने कहा ये तुम्हारा खून है ,ये पहली बार आता ही है जब कोई लड़की सेक्स करती है। मैने लन्ड को हिलाना शूरू किया पहले तो कुछ लाल लाल बूंदे खून की आयी फिर सफेद पानी(वीर्य) जो मैंने उसके पेट पर गिरा दिया। और उसको अपनी बाहों में मजबूती से जकड़ कर लेट गया। मैंने उसके माथे पर किश किया। लगभग 10 मिनट बाद मैंने उसे अपनी बाहों में उठाया और बाथरूम में लेकर गया और वहां पानी से साफ किया।

अब उसकी बुर में एंटीसेप्टिक क्रीम लगानी थी,इसलिए पहले मैंने मेरे लन्ड पर एंटीसेप्टिक क्रीम लगाई और उसे पास बुलाकर एक दम लन्ड उसकी आधी चुत के अंदर डाल कर बाहर निकाल लिया। आस्था बोली अंदर थोड़ी जलन हो रही है। मैने कहा थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी और आज का ट्यूशन का टाइम भी चला गया और वो घर जाने लगी। आस्था की चाल भी थोड़ी बदल गयी थी। पर उसने कहा वो संभाल लेगी। सारी रात मुझे आस्था के सपने आये।और सपनों में मेरी शादी उसके साथ ही हुई। मैं सुबह बहुत खुश था उन सपनों को सोच सोच कर।

अगले दिन वो फिर आती है ट्यूशन पर: मैंने पूछा कैसी हो तुम अब?? आस्था बोली बढ़िया, अब दर्द भी नही हो रहा है। मैंने कहा चलो तो आज फिर पढ़ाई करते है,वो हैरान रह गयी ये सुनकर। मैंने फिर से उसे पढ़ाना स्टार्ट किया क्योकि मुझे उसे अच्छे नम्बरो से पास भी करवाना था। कुछ टाइम पढ़ाने के बाद मेरे से रुका नही गया,और मैने उसे बहुत टाइट गले लगा लिया। मैने कहा आई लव यू वेरी मच आस्था। आस्था:आज क्या हो गया है तुम्हे? मैंने कहा कुछ नही तुम मेरा पहला प्यार हो और मै तुमसे प्यार करने लगा हूँ।

मैने उसे किस करना शुरू किया। उस वर्जिन गर्ल की दिल की धड़कन बढ़ गयी थी। मैंने उसकी चूड़ीदार सलवार सूट उतारने में उसकी मदद की। मैने अपने कान उसकी छाती पर रखे और उसकी दिल की धड़कन साफ सुनाई दे रही थी। उसके गालों पर किश किया,फिर उसकी गर्दन पर,फिर उसके क्लीवेज पर फिर दोनो बूब्स पर। उसकी उतेजना बढ़ती जा रही थी,और साँसे और भी तेज।

मैंने आज उसके चूचे दबाने शुरू किए और उन्हें काफी देर तक चूसा।उसके मुँह से हल्की हल्की आवाजे निकल रही थी अम्म उम्म अम्म ऐसे ही करते रहो। फिर मैं उसके पेट की तरफ बढ़ा ,उसकी नाभि पर किश किया ,और अपनी जीभ से वह खेलने लगा। आस्था हँसी और बोली नही गुदगुदी होती है। मैने उसकी वी टाइप वाली सेक्सी ब्लू कलर की पैंटी उतारी, उसकी चुत का तो जैसे में दीवाना हो गया था।

अपने आप को रोक ही नही पाता था। मेरा मुह सीधे उसकी फटी हुई चुत पर गया और मैं उसे चाटने लगा। उसकी आवाजे अब और तेज हो गयी थी,थोड़ी देर में उसने मेरे मुह पर पानी का फव्वारा मारा। आस्था:तुम बहुत बढ़िया हो। मैने कहा अब तुम्हारी बारी,उसने मेरे कपड़े उतारे और सीधा मेरे लन्ड की तरफ गयी। उसने मेरे लन्ड को मुह में लिया और एक हाथ से लन्ड की त्वचा को आगे पीछे कर रही थी। मैंने कहा इसे अच्छे से गीला कर देना ताकि तुम्हारी चुत के अंदर आसानी से चला जाये।

थोड़ी देर बाद मैंने उसे बैड पर वापस लिटाया और पूछा क्या तुम तैयार हो?? आज तुम्हे काफी मजा आएगा। आस्था: धीरे से करना और कहा मुझे चुम्मा चाटी करते रहो। मैंने उसके सेक्सी और हॉट जिस्म को बिलकुल टाइट पकड़ रखा था,उसके चुत के छेद पर लन्ड रखा और चुम्मा चाटी करना स्टार्ट किया। मैंने एक झटका मारा और लन्ड उसकी फटी हुई चूत में पूरा अंदर चला गया और उसकी फटी हुई चूत से खून बहने लगा और वो दर्द के मारे रोने लगी पर मैंने उसको चोदना जारी रखा और धीरे धीरे अपना लंड उसकी फटी हुई चूत के अंदर बाहर करने लगा।

आज उसकी पहली चुदाई थी थोड़ी देर तक तो उसे बहुत तेज दर्द हुआ लेकिन बाद में उसे मुझसे चुदवाने में काफी मजा आ रहा था और मेरे मुह में उसकी आवाज़ें आ रही थी। आह आह आह आह यस उम्म अम्म आह आह आह आह । आस्था ने अपने हाथ मेरे पेट पर रखे हुवे थे और चुदने की स्पीड कंट्रोल कर रही थी। मुझे भी आस्था को चोदने में बहुत मजा आ रहा था आखिर आस्था मेरा पहला प्यार जो थी ।

मैं और आस्था चुदाई करते करते अब चरमसुख प्राप्त करने वाले थे। जैसे ही वो झड़ी मैंने अपना लौड़ा उसकी चुत से बाहर निकाला और हिलाकर अपना सारा पानी उसके नाभि पर डाल दिया।और हम दोनों निढाल होकर एक दूसरे के ऊपर लेट गए। मेरा लंड दोबारा खड़ा हो रहा था कि तभी नीचे से मेरी मम्मी की आवाज आई :-निक्की और आस्था बेटा नीचे आओ जल्दी शेष कहानी अगले भाग में… ।


घरीच ठोकले सेक्सी चुलत बहिणीला

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मित्रानो नमस्कार। माझे नाव सुरज आहे। मी आज माझ्या चाळीस वर्षाचा आहे। मी आज तुम्हाला अशी एक गोष्ट सांगणार आहे ज्यामुळे मी माझ्या चुलत बहिणीला उपभोगू शकलो।


तेव्हा मी माझ्या कॉलेज ला होतो। दिसायला मी चांगला होतो। उंच, धिप्पाड आणि पिळदार स्नायू यामुळे मी सगळ्यांना आवडत होतो। त्यातच मी अभ्यासात देखील खूप चांगला असल्याने तर माझी डिमांड जास्तच होती तशी। त्यामुळे मला पण खूपच मजा येत असे। मी गावी राहत असे। शेती करत होतो आम्ही। सुरवातीस आम्ही सगळे एकत्र राहत होतो। पण नंतर माझे काका नोकरी निम्मित शहरात सेट झाले।


माझ्या घरी मी आणि आई वडील होते। ते दोघे पण सकाळी लवकर शेताला गेले कि खूप उशिरा अंधार पडला कि येत असत। त्यामुळे दिवसभर मी घरी एकटाच असायचो। मग काय मूठ मारणे हा एकमेव कार्यक्रम मी करत असे। रोज कोणाला ना कोणाला तरी आठवायचे आणि तिच्यावर मूठ मारायचे हेच मी दिवसभर करत असे। टीव्ही तरी किती बघणार ना शेवटी आणि त्यावर पण जरी काही बघितले तरी अश्लील असेल तरच मी बघत असे।


काका कडे तो काकी आणि त्यांची मुलगी म्हणजे माझी चुलत बहीण असे तिघेच रहात असत। माझ्या चुलत बहिणीचे नाव मोनिका होते। मोनिका आणि मी तसे दोघे पण समवयस्क होतो। लहानपणी आम्ही एकत्रच होतो त्यामुळे आमच्यात एक प्रकारचे वेगळेच संबंध होते। त्या नंतर काका बदली झाली म्हणून जे गेला ते आजवर आम्ही दोघे कधी भेटू शकलो नाही। बाकी फोन वर तेवढे आम्ही नियमितपणे बोलत असू।


मोनिका पण कॉलेज ला होती आणि ती ऍग्रीकल्चर बाजूला होती। त्यासाठी तिला माझी मदत हवी होती।तेव्हा सुट्टीचा कालावधी नेमका चालू होता। उन्हाळ्याच्या सुट्ट्या असल्याने कॉलेज वगैरे सगळे काही बंद होते। त्यामुळे ती आमच्याकडे सुट्टीला येणार होती। त्यामुळे मी खूप खुश झालो होतो। कारण खूपच वर्षांनी आम्ही दोघे एकमेकांना भेटणार होतो।


त्या दिवशी मोनिका आली आणि तिला मी बघतच राहिलो। लहानपणी एवढी एवढी असणारी मोनिका आता एक परिपूर्ण स्त्री झाली होती। तिला बघून मी अचंबितच झालो खरे। ती दिसायला आधीपासूनच देखणी होती। पण आता तिच्या त्या देखणेपणात तिच्या शरीराची देखील भर पडली होती। तिचा तो मदमस्त देह बघून मी काय बघू आणि कुठे बघू असे मला झाले होते।


तिचा गोर गोरा वर्ण तिच्या शरीराच्या ठेवणीला उठून दिसत होता। तिचे ते नाजूक ओठ अतिशय रसाळ होते। तिचे ते घारे डोळे समोरच्याच्या मनात लगेच घर करत होते। तिची छाती अशी काही होती कि नुकत्याच वयात आलेल्या आणि तारुण्याने मुसमुसलेल्या मुलीचे प्रतिबिंबच होते ते। तिची ती ३६-२४-३६ फिगर म्हणजे माझ्या रात्रीची मूठ मारण्याची सोय करून देणारी होती। तिची गांड अशी काही बाहेर अली होती कि जणू काही ती रोजच कोणाकडून तरी गांड मारून घेत आहे कि असेच बघताना वाटावे।


ती मला बघताच खूपच खुश झाली। ती मला म्हणाली "काय रे सुरज। किती मोठा झाला आहेस? मी तर तुला ओळखलेच नाही। खूपच बदल झाला आहे तुझ्यात।एकदम हँडसम दिसत आहेस"


ती असे म्हणताच मी पण तिला म्हणालो "मोनिका तुला बघ। तू किती चेंज झाली आहेस। तुझ्याकडे बघून मला तर असे वाटले कि मी कोना नटी कडे बघत आहे कि काय" असे म्हणून मी तिच्या शरीराकडे वर खाली अशी माझी एक नजर फिरवताच ती माझ्याकडे बघून हसली आणि तिने मला एक लाडाने चापटी मारली आणि मला म्हणाली "तुझे आपले काहीही असते सुरज"


आमचे रुटीन चालू झाले। आई बाबा शेताला गेलो कि मी आणि मोनिका दोघेच घरी असायचो। तिच्या समवेत वेळ घालवता येत असल्याने मी खूप खुश होतो। तिच्या शरीराच्या हालचाली टिपत माझा वेळ अगदी मजेत जात असे। आम्ही खूप दंगा मस्ती करत होतो। मोठ्या शहरातील ती आता झाली होती ना ती त्यामुळे ती तशीच मॉडर्न झाली होती। आमच्यात प्रौढ गप्पा त्यामुळे लगेचच चालू झाल्या होत्या।


ती माझ्या शरीराकडे बघून खूप वेळा अश्लील शेरेबाजी करत होती। मी पण मग तेच चालू केले। मला लक्षात आले कि मोनिका आता पूर्ण ताणात आलेली आहे आणि तिला पण संभोगाची गरज आहे। मी लगेच काही केले नाही पण।


त्या दिवशी माझे सगळे कपडे धुवायला टाकले होते। मला माहीतच नसल्याने मी जुनी एक शॉर्ट घातली होती। अंडर वियर पण घातली नव्हती। पण मला हे माहित नव्हते कि ती खालून फाटली आहे ते। त्याच दिवशी आदल्या दिवशी आणलेल्या चिंचेचा गोळा खात मोनिका माझ्या जवळच बसली होती। तिच्याकडे मी रोखून बघत होतोच। तिची छाती तिच्या श्वासा बरोबर अशी काही वर येत होती कि काही विचारू नका।


तिच्या सगळ्या चिंचा खाऊन झाल्या आणि ती माझ्याकडे बघत मला म्हणाली "मला अजून चिंचा हव्या आहेत"


"आता आज बाबा घेऊन येतील शेतातून त्या खा उद्या" मी असे म्हणत असताना तिची नजर माझ्या शॉर्ट कडे खाली गेल्याचे माझ्या लक्षात आले। ती काय बघत आहे ते मला नेमके समजले नाही। तोच ती मला म्हणाली "अरे तुझ्या कडे असलेला चिंचेचा गोळा दे ना मला"


मला काही समजले नाही।मी तिला म्हणालो "माझ्याकडे कुठे आला आहे चिंचेचा गोळा ग?"


मी असे म्हणताच ती मला म्हणाली "अरे हे काय खाली तू लपवून खाली ठेवला आहेस" असे म्हणून तिने सरळ माझ्या शॉर्ट मधून खाली असलेल्या गोट्या तिच्या हातात पकडल्या आणि ती त्यांना चोळू लागली।


माझी शॉर्ट फाटली आहे ते मला तेव्हा समजले आणि मग खजील झालो। तिने माझ्या गोट्या सरळ तिच्या हातात घेतल्या असल्याने मला काही समजायचे बंद झाले। ती मला म्हणाली "तुझ्या चिंचेचा गोळा इतका मोठा असेल असे वाटले नव्हते मला। आणि काय रे इतका मोठा गोळा असेल तर पुढे असलेली चिंच किती मोठी असेल बरे?"


असे म्हणताच मी हसू लागलो। तीला काय हवे आहे ते मला समजले होते त्यामुळे मी पण मग तिला म्हणालो "माझी चिंच आहे मोठी। पण तुझे आंबे पण काही कमी मोठे दिसत नाहीत। म्हणजे बाहेरून तरी किमान ते मोठे दिसतात।" तिच्या छातीला दाबत मी तिला म्हणालो।


त्या सरशी तिने तिचा टीशर्ट वर केला आणि मला तिच्या छातीचे धावते दर्शन मला दिले। मी तिला म्हणालो "असे बघून कसे समजणार?" मी असे म्हणताच ती मला म्हणाली "मी एवढे तरी दाखवले आहे तू कुठे तुझी चिंच दाखवली आहेस?"
घरीच ठोकले सेक्सी चुलत बहिणीला



असे म्हणताच मी माझी पॅन्ट काढली आणि माझा सोटा मी बाहेर काढला। माझा तो भलामोठा सोटा बघून ती वेडीच झाली। तिने काही विचार न करता तो तिच्या हातात घेतला आणि त्याला हलवू लागली। माझा आधीच मोठा असलेला सोटा तिच्या हाताच्या स्पर्शाने अधिकच मोठा झाला। तिने मग त्याला तिच्या तोंडात घेतले आणि त्याला चोकू लागली।


तोंड वर खाली करत ती त्याच्यावर तुटून पडली होती। अस्सल गावरान सोटा तिला पहिल्यांदाच मिळाला होता आणि त्यामुळे ती वेडीपिशी झाली होती। तिच्या तोंडाच्या मानाने माझा सोटा खूपच मोठा होता। तरीही ती जमेल तसे त्याला तिच्या तोंडात घेऊन चोकत होती। हळू हळू करत तिने त्याला पूर्णपणे तिच्या तोंडात मावेल असा शेवटी घेतलाच आणि ती त्याचा आनंद लुटू लागली।


खूप वेळ तिने माझा सोटा चोकून झाला आणि मग मी तिला सोफ्यावर झोपवले। तिच्या भरदार छातीला मी जोरजोरात माझ्या हाताने दाबू लागलो। तिची छाती कमालीची मोठी झाली। तिचे ते टपोरे निप्पल्स मी माझ्या तोंडात घेतले आणि मी त्यांना चोकू लागले। चोकून चोकून मी ते निप्पल्स खूपच जास्त बाहेर आणले होते।


मग मी गेलो तिच्या योनीकडे। तिच्या मांड्या फाकवुन दिसणारी तिची ती नाजूक पण कमालीची मादक योनी मी बघता बघता माझ्या जिभेने चाटू लागलो। तिच्या योनीला मी वेड्यासारखे काढले। ओल्या चिंब झालेल्या त्या योनीत मग मी माझे भलेमोठे हत्यार कचकन कोंबले आणि तिच्यावर उडू लागलो। प्रचंड वेगाने मी माझी कंबर जोरजोरात हलवत होतो।


तिच्या योनीच्या मी चिंध्या केल्या होत्या। आह आह आह आह करत ती त्याचा आस्वाद घेत होती। खूप वेळ तिला मी ठोकून काढले आणि मग शेवटी माझे सगळे विरी तिच्या योनीत सोडले आणि आम्ही दोघे शांत झालो। अश्या प्रकारे मी मोनिका ला त्या दिवशी ठोकून तर काढलेच पण पुढे जेव्हा ती कॉलेज साठी म्हणून आमच्याकडे शिफ्ट झाली तेव्हा तर मी रोजच तिला घरी ठोक ठोक ठोकून काढू लागलो होतो।

मेरे यार ने मेरे घर में मेरी चूत की सील तोड़ी

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adult stories में पढ़ें कि कैसे मेरे क्लासमेट यार ने मेरे ही घर में मेरी अनचुदी बुर की सील तोडी। वो मुझे पसंद करता था। एक दिन उसने मुझे प्रोपोज़ किया।

दोस्तो, मेरा नाम स्नेहा है। मैं 20 साल की हूँ। अभी मैं कॉलेज में पढ़ रही हूं।
मेरा रंग गोरा है और मेरी हाइट 5 फ़ीट 6 इंच है और फिगर 32-30-34 है।

आज मैं जो बॉयफ्रेंड सेक्स स्टोरी सुनाने जा रही हूं वह बिल्कुल सच्ची है।


यह कहानी एक साल पहले की है जब मैं अपने 12वीं के एक्जाम देने वाली थी। उससे कुछ दिन पहले की ही बात है। उस समय मेरे स्तन उतने बड़े नहीं थे लेकिन ठीक-ठाक ही थे।

उस समय मेरा एक दोस्त था जिसका नाम हर्ष चौहान था और हम लोग अच्छे दोस्त थे। मुझे वो पसंद भी था लेकिन मैंने उसे बताया नहीं।

मेरी कुछ सहेलियाँ अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स करती थीं और क्लास में दोस्तों के बीच बताती भी थी।
सहेलियों की चुदाई की बातें सुनकर मेरा भी सेक्स करने का मन करता था लेकिन मेरा कोई बॉयफ्रेंड ही नहीं था।

एक दिन साइंस की क्लास चल रही थी तो मैं अपनी एक सखी के साथ पीछे बैठी हुई लिख रही थी।

मेरी बाजू वाली डेस्क में हर्ष चौहान भी अपने दोस्त के साथ बैठ कर मस्ती कर रहा था।
कुछ समय के बाद मैंने देखा कि हर्ष चौहान चुपके से मेरे स्तन को देख रहा है लेकिन मैंने उसे कुछ नहीं बोला।

फिर क्लास खत्म हो गयी और मैं घर आ गई।

शाम को करीब 7 बजे मेरे पास हर्ष चौहान का मैसज आया।
उसमें लिखा था- मुझे तेरे से कुछ बात करनी है।
मैंने भी रिप्लाई दे दिया- बता क्या बात है?

वो बोला- मुझे कुछ चाहिेए है।
मैंने पूछा- क्या चाहिए?
हर्ष चौहान- आज जब मैं तेरे बाजू में बैठा था और तू लिख रही थी तो मुझे तेरे बूब्स दिख रहे थे। यार सच बताऊं तो मेरा मन कर गया। (सेक्स करने का)

मैं बोली- तू पागल है क्या? क्या बोले जा रहा है? ऐसा कुछ नहीं हो सकता।
वो मुझे मनाने लगा।

मैंने उसको साफ मना कर दिया। हालांकि अंदर से मेरा भी मन कर रहा था उसके साथ सेक्स करने का।
मगर मैंने खुद को कंट्रोल में रखा।

अगले दिन सुबह सुबह ही बहुत तेज की बारिश होने लगी। तीन चार घंटे तक बारिश रुकी ही नहीं।
क्लास में केवल हम तीन विद्यार्थी ही पहुंचे। एक मेरी सखी, मैं और हर्ष चौहान।

जब गेम्स का पीरियड आया तो मेरी सखी उसके बॉयफ्रेंड से मिलने चली गयी।

अब क्लास में मैं और हर्ष चौहान ही थे। टीचर नीचे प्ले ग्राउंड में थे।
चूंकि हमारी क्लास में कोई नहीं था इसलिए हमें किसी ने आने को नहीं कहा क्योंकि बहुत कम बच्चे थे उस दिन।

मेरी सहेली के जाते ही हर्ष चौहान उठकर मेरे पास आकर बैठ गया। उसने मेरी कमर में हाथ डाल दिया।

मैंने उसकी ओर देखा तो वो बोला- यार एक बार टच करने दे ना प्लीज?
मैं बोली- नहीं, दिमाग नाम की चीज है या नहीं? यहां क्लास में कैसी हरकत कर रहा है, किसी ने देख लिया तो?
वो बोला- यार कोई नहीं देखेगा, अभी आधे घंटे से पहले कोई नहीं आने वाला।

फिर वो मेरे पेट पर सहलाने लगा। मुझे अच्छा लगने लगा उसका छूना।
वो मेरे बूब्स छूने के लिए बोलता रहा।

और आखिर में मैंने हां कर दी और बोली- एक बार ही कर लो। उससे ज्यादा नहीं करने दूंगी।

मेरी हां मिलते ही उसने मेरी दाईं चूची को पकड़ कर दबा दिया। एक बार दबाते ही उसको सेक्स चढ़ गया और वो फिर दोनों हाथों में दोनों चूचियों को दबाने लगा। मुझे भी अच्छा लगने लगा और मजा आने लगा।

वो मेरी चूची दबाते हुए मेरी गर्दन को सूंघने लगा और बोला- स्नेहा, मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं। मैं तुझे प्यार करना चाहता हूं। तू मेरी गर्लफ्रेंड बनेगी क्या?

अब मैं भी उसके प्यार को पाना चाहती थी इसलिए मैंने ये मौका हाथ से गंवाना ठीक नहीं समझा और मैंने उसी वक्त उसको हां कर दी।
फिर हमने किस किया और मुझे बहुत अच्छा लगा।

उस दिन के बाद से हमारी लव स्टोरी शुरू हो गयी।
वो मौका देखकर मेरे स्तन दबा देता था और कभी कभी किस भी कर देता था।

एक दिन उसने मुझसे बोला- अब मुझे तुझको और अच्छे से प्यार करना है।
मैं उसका मतलब समझ गयी। उसको सेक्स करना था।
मैं बोली- ठीक है, थोड़ा रुको। वो भी कर लेना।

उसके ठीक 2 दिन बाद संडे था और मेरे मम्मी पापा को उस दिन बाहर जरूरी काम से जाना था। वो लोग शाम को आने वाले थे। मैंने सोचा कि हर्ष चौहान को बुला लेती हूं।

मां पापा के जाते ही मैंने हर्ष चौहान को फोन कर दिया- मैं घर पर अकेली हूं। अगर तू मिलना चाहता है तो मिल सकता है।
वो बोला- ठीक है मेरी रानी, बस मैं अभी आता हूं।

फोन रखने के 15 मिनट के बाद ही वो मेरे घर आ पहुंचा। उसने बेल बजाई और मैंने दरवाजा खोल दिया।
उसने हेलमेट लगा रखा था ताकि किसी को वो पहचान में न आये।

हम लोग अंदर आ गये और अंदर से दरवाजा लॉक कर लिया।

कमरे में जाते साथ हर्ष चौहान मुझे किस करने लगा। मैं भी उसका साथ देने लगी।

5 मिनट किस करने के बाद उसने मेरे टीशर्ट को उतार दिया।

मैंने नीचे से पिंक ब्रा पहनी हुई थी। वो ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों पर टूट पड़ा। उनको जोर जोर से दबाने लगा।
मैं दर्द से कसमसाने लगी और बोली- आह्ह … धीरे करो यार, दर्द हो रहा है।

मगर उसको जैसे सेक्स का भूत सवार था। वो मेरी चूचियों में ब्रा के ऊपर से ही मुंह से चूसने लगा।
फिर उसने मुझे घुमाया और मेरी गांड में अपना लंड सटा दिया।

उसका सख्त लंड मुझे अपनी गांड पर महसूस हो रहा था। फिर वो मेरी गर्दन पर चूमने लगा और मेरी ब्रा के हुक खोलने लगा।

मेरी ब्रा को उसने पीछे से ही उतार दिया और मेरी नर्म नर्म चूची नंगी होकर उसके हाथ में आ गयीं।

वो पीछे से ही मेरी चूची दबाने लगा और मेरी गांड में लंड लगाता रहा। फिर उसने मुझे सामने की तरफ किया और मेरी चूचियों को मुंह में लेकर जोर जोर से भींचते हुए पीने लगा।

मैं दर्द से कराह उठी और साथ ही मुझे अजीब सा नशा भी होने लगा। उसकी जीभ जब मेरे निप्पलों को चूस रही थी तो मैं मदहोश होती जा रही थी।

काफी देर तक वो मेरी चूचियों को पीता रहा।
उसके बाद उसने मेरी जीन्स को खोलना शुरू कर दिया।
मेरी चूचियां तनकर खड़ी हो गयी थीं और निप्पल भी कड़क हो गये थे।

जब उसने जीन्स खोलकर नीचे की तो मेरी गुलाबी पैंटी पर गीला निशान हो गया था।
मैं देखकर हैरान थी।
उसके बदन की आग ने मेरी चूत का पानी निकाल दिया था।

फिर वो मेरी पैंटी को सूंघने लगा। उसने मेरी चूत पर नाक लगा दी और मैं सिहर सी गयी।
मेरा मन कर रहा था कि उसके सिर को थोड़ा दबा कर उसकी नाक को चूत पर और जोर से रगड़वा दूं।

फिर धीरे धीरे उसने मेरी पैंटी नीचे कर दी। मेरी गोरी कुंवारी गुलाबी चूत उसने नंगी कर दी जिस पर छोटे छोटे रोएंदार बाल थे।

वो मेरी चूत को चूसने लगा। मेरे पूरे बदन में सिरहन होने लगी और अजीब सा मजा आने लगा।
इससे पहले मैंने कभी ऐसा अहसास नहीं पाया था।

वो मेरी चूत को ऊपर से चाटता रहा और मैं जैसे पागल सी होने लगी।

फिर उसने मेरी चूत में जीभ अंदर दे दी।
मेरी जोर से आह्ह … निकल गयी और मैंने उसके बालों में हाथ फंसा दिये। उसके सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर जोर से दबा दिया।

उसने मुझे सोफे पर गिराया और मेरी टांगों को चौड़ी करके मेरी चूत में जीभ से तेजी से अंदर बाहर करने लगा।
मैं मदहोश होने लगी। अपनी गांड को उठाकर अपनी चूत उसके मुंह की ओर उछालने लगी।

वो भी जानवरों की तरह मेरी चूत को काट और खा रहा था। मेरा चेहरा लाल हो चुका था और वासना के मारे मैं बेहोश होने वाली थी।

फिर मेरे पूरे बदन में एक लहर सी उठी और मैंने उसके मुंह को कसकर अपनी चूत पर दबा दिया।
मेरी चूत से गर्म गर्म पानी निकल कर उसके मुंह में जाने लगा।

उसने मेरी चूत को चाट चाट कर मुझे तड़पा दिया।

फिर वो खड़ा हो गया और अपने कपड़े उतारने लगा। मैं पहली बार उसको कपड़े उतारते देख रही थी।
मैंने कभी किसी लड़के को नंगा नहीं देखा था।

हर्ष चौहान ने अपनी शर्ट उतार दी। नीचे बनियान थी। उसके बाद उसने वो भी निकाल दी। उसकी छाती नंगी देखकर मुझे अच्छा लगा।

फिर वो अपनी पैंट उतारने लगा।
उसने पैंट उतारी तो उसके अंडरवियर में एक डंडे जैसा कुछ उठा हुआ था।
वो उसका लंड था।

मैंने पहली बार तना हुआ लंड देखा था। फिर उसने अंडरवियर भी उतार दिया और पूरा नंगा हो गया।

वो मुझे लंड चूसने के लिए कहने लगा लेकिन मैंने मना कर दिया।
फिर वो मुझे अपनी गोद में उठाकर बेड पर ले गया।
वहां उसने मुझे लिटाया और मेरे ऊपर आ गया।

अब हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे।
उसने मेरी टांगें खुलवा दी थी और वो उनके बीच में था जिससे उसका लंड मेरी चूत पर नीचे ही नीचे टकरा रहा था।
मुझे अपनी चूत पर लंड की छुअन बहुत अच्छी लग रही थी।

काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे को किस करते रहे।

फिर वो दोबारा से मेरी चूचियों पर आ गया।
वो बारी बारी से मेरी दोनों चूचियों को पीने लगा।

अब वो चूमते हुए नीचे बढ़ा और मेरी नाभि पर किस करने लगा।
मैं फिर से गर्म होने लगी थी।

फिर वो मेरी चूत तक पहुंच गया और उसमें धीरे से उंगली दे दी।
मैं उचक गयी और उसने आधी उंगली मेरी चूत में चलानी शुरू की।
मुझे अच्छा लगने लगा।

कुछ देर उसने उंगली की और फिर वो मेरे ऊपर आ गया।

उसने मेरी चूत पर लंड रखा और रगड़ने लगा। उसका लंड 6 इंच के करीब था।
उसने चूत के मुंह पर लंड लगाया और धक्का देने लगा।

मुझे दर्द होने लगा और मैं चिल्लाने लगी।
मगर उसने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और लंड को अंदर धकेलता चला गया।
दर्द के मारे मेरी जान निकल गयी और वो लंड धकेलता हुआ आह्ह … आह्ह … करता हुआ मेरे ऊपर लेट गया।

मेरी आंखों में आंसू आ गये और मैं रोने लगी।
वो लेटा रहा और मुझे किस करता रहा। काफी देर तक उसने कुछ नहीं किया। वो मुझे बस किस करता रहा।

मुझे चूत में लंड लेने का अब मजा मिलना शुरू हो गया था और दर्द हल्का पड़ गया था।

कुछ समय बाद जब दर्द कम हुआ तो उसने लंड अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।
अब मुझे फिर से दर्द होने लगा लेकिन हल्का मजा भी आ रहा था।
हर्ष चौहान मेरी चूचियों को पीते हुए मेरी चूत में लंड अंदर बाहर करने लगा।

उसके कुछ देर के बाद मेरी चूत में से दर्द जैसे गायब हो गया और मैं चुदने का मजा लेने लगी।
वो भी अब मस्ती में चोदने लगा। कुछ देर तक चोदने के बाद उसकी स्पीड बढ़ने लगी।

अब मेरी चूत में पूरा लंड अंदर बाहर हो रहा था।
वो तेजी से मुझे चोदे जा रहा था और मैं सिसकारने लगी थी- आह्ह … हर्ष चौहान … ओह्ह … बेबी … मैं तुमसे प्यार करती हूं … आह्ह … ओह्ह जान … ओह्ह … आई लव यू।

उधर हर्ष चौहान भी चुदाई के मजे में डूब गया था और सिसकार रहा था- आह्ह … जान … मजा आ रहा है ना … आह्ह … तेरी चूत तो बहुत गर्म और टाइट है … आह्ह … मेरी रानी … तू पहले क्यों नहीं चुदी … आह्ह … तेरी चूत … ओह्ह।

इस तरह से करीब 20 मिनट तक हम दोनों चुदाई करते रहे।

मुझे बहुत मजा आ रहा था और अब मैं गांड उठा उठाकर चूत में लंड ले रही थी। फिर अचानक मेरी चूत से पानी निकल गया।

अब भी मेरा बॉयफ्रेंड सेक्स करने में तेजी से लगा हुआ था। अब रूम में पच पच की आवाज होने लगी। मेरी चूत बहुत चिकनी हो गयी थी।

फिर जब उसका निकलने को हुआ तो उसने एकदम से लंड को बाहर निकाल लिया।
वो लंड को निकाल कर हाथ से हिलाने लगा और कुछ ही सेकेन्ड के बाद उसके लंड से सफेद पदार्थ निकला।
उसके लंड से कई पिचकारी निकली और उसने अपना सारा माल मेरे पेट पर गिरा दिया।

फिर हम दोनों लेट गये।

मैंने देखा कि मेरी चूत से खून निकल आया था।
उसने बताया कि पहली चुदाई में अक्सर खून आता है। चूत की सील टूटती है।

उसके बाद हम लिपट कर बातें करने लगे और कुछ देर बाद फिर से किस करने लगे।

थोड़ी देर में ही उसका लंड फिर से खड़ा हो गया और वो एक बार फिर से मुझे चोदने लगा।

इस बार मुझे और भी ज्यादा मज़ा आने लगा और मैं भी अपनी कमर उठा उठा कर चुदवा रही थी। दूसरी बार उसने मुझे बहुत देर तक अलग अलग पोजीशन में चोदा।

शाम को मां पापा के आने से पहले तक उसने मुझे तीन बार चोदा और मेरी चूत सूज गयी पूरी।
फिर वो अपने घर के लिए निकल गया।

उस दिन के बाद से बॉयफ्रेंड सेक्स का सिलसिला शुरू हो गया।

हर्ष चौहान मुझे काफी बार चोद चुका है। अभी भी हम कभी मिलते हैं तो चुदाई जरूर करते हैं।
वो मेरा पुराना आशिक है और मैं उसको कभी मना नहीं कर पाती।

कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे

कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे


मैं लखनऊ की रहने वाली हूं। मैंने अपनी पढ़ाई लखनऊ से ही पूरी की थी। मैं यहां अपने मम्मी पापा के साथ रहती थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद मुझे तुरंत ही पुणे से जॉब का ऑफर आ गया था। मैं पुणे जाना चाहती थी। लेकिन मेरे घर वालों को मेरी बहुत चिंता सता रही थी। कि मैं वहां अकेले कैसे रह पाऊंगी। पर मैंने अपने घरवालों को समझाया और कुछ दिन बाद मैं पुणे चली गई। वहां मैं अकेली रहती थी। मेरा ऑफिस मेरे फ्लैट से ज्यादा दूर नहीं था। मैं अकेली जाती और अकेली ही आती थी। फिर ऑफिस में मेरे कुछ नए दोस्त बने।


एक दिन मैं ऑफिस से घर जा रही थी तभी अचानक विवेक मुझे मिला। मैं उसे देख कर बहुत खुश हुई।  हम दोनों स्कूल से लेकर कॉलेज तक दोनों साथ ही पढ़ते थे। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त था। एक दिन वह पुणे आया पर उसे रहने की अच्छी जगह नहीं मिल रही थी तो मैंने उसे तब तक अपने ही साथ रहने को कहा। जैसे ही उसे नौकरी मिलती वह अपने लिए दूसरा फ्लैट देख लेता। लेकिन तब तक वह मेरे साथ मेरे फ्लैट में रहता था। यह बात मैंने अपने घरवालों को नहीं बताई थी। हम दोनों पहले से ही एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। तो मुझे उसके यहां रहने से कोई दिक्कत नहीं थी।


मैं सुबह अपने ऑफिस जाती और शाम को घर आती तब तक विवेक घर पर ही रहता। कभी वह जॉब की इंटरव्यू के लिए जाता इधर उधर भटकता फिरता रहता था। हम दोनों साथ में ही रहने लगे थे। कुछ दिन बाद उसे भी अच्छी जॉब मिल गई। हम दोनों साथ में ही घर से निकलते और साथ ही घर वापस आते हैं। हम दोनों मिलकर घर का काम करते थे। साथ रहते रहते हमें एक दूसरे की आदत हो गई थी। अब हम एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। जब भी हमें समय मिलता हम दोनों आपस में घूमने जाया करते दोनों समय बिताते।


एक दिन विवेक ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा तुम्हें मुझे देखकर कुछ लगता नहीं है क्या मैंने उसे कहा लगना क्या है इसमें। हम दोनों एक साथ रहते हैं इसमें कुछ समस्या वाली बात नहीं है। तो वह कहने लगा मेरी और भी जरूरत है क्या तुम पूरी करोगी। मैंने कहा ऐसी कौन सी जरूरत है तुम्हारी जो मैं पूरी नहीं कर पा रही हूं। मैं उसके मन में क्या है वह तो समझ चुकी थी। पर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा फिर मैं नहाने चली गई। वह बाहर मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं नहा कर आई मैंने टॉवल अपने शरीर को लपेटा हुआ था। मेरे गीले बाल थे। उसने मुझे ऐसे ही अपनी बाहों में समा लिया और कहने लगा। अब तो तुम मेरी जरूरतों को समझ लो। उसके यह कहते ही मेरा टावल नीचे गिर गया। मेरी पैंटी ब्रा उसने देख ली।


मैं उसके सामने ऐसी खड़ी रही मुझे पहले अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। उसने कहा  कोई बात नहीं और यह कहते हुए उसने मुझे अपने गले लगा लिया। अब उसने मेरी लाल पैंटी में हाथ डाला और मेरी योनि को दबाने लगा। मैंने आज ही अपने चूत से बाल साफ किए थे। तो वह एकदम  चिकनी हो रखी थी। जिसको देखकर वह कहने लगा। तुम्हारे तो एक भी बाल नहीं है। यह सुनकर में हंस पडी। हंसते-हंसते उसने मेरी चूत इतनी जोर से दबा दिया कि मेरे मुंह से आवाज निकल पड़ी। और मैं उसे कहने लगी। इतनी जोर से क्यों दबा रहे हो आराम से भी तो कर सकते हो। अब यह कहते हुए मैंने उसे  गले लगा लिया।


मैंने उसके होठों को अपने होठों से मिलाते हुए किस करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे मैं किस करती जाती। वह मेरी तरफ आता जाता मैंने उसको बहुत तेजी से किस करना शुरू किया। वह मुझसे कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से किस करते हो। मेरे से भी नहीं रहा जा रहा था। मैंने जैसे ही उसकी पेंट  मैं हाथ लगाया तो उसका लंड खड़ा हो रखा था। यह देख कर मैं थोड़ा हिचकिचाने लगी। पर मैंने उसकी जीप खोल कर उसके लंड को बाहर निकाल लिया और उसको अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लिया। वह कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से कर रही हो थोड़ा और अंदर लो। मैंने भी उसको लंड को पूरे अपने गले मे ले लिया।


जैसे-जैसे मैं अंदर बाहर करती जाती उसको मजा आता। वह कहता बहुत अच्छे से कर रही हो तुम अब उसके बाद उसने मुझे खड़ा किया और मेरी ब्रा को खोलते हुए। मेरे स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगा। पहले वह धीरे धीरे दबा रहा था। किंतु अब उसने काफी तेज दबाना शुरु कर दिया। अब अपने मुंह में भी मेरे स्तनों को ले लिया और उसे चूसने लगा। धीरे-धीरे वह मेरे चूचो को चूसता तो मुझे गुदगुदी सी होती और मुझे अच्छा महसूस होने लगता। अब उसने मेरे चूचो को पूरे अपने मुंह में समा लिया था और उसको अच्छे से चूसने लगा था।


यह देखकर  मुझे अच्छा लग रहा था और अंदर से अच्छी फीलिंग आ रही थी। उसने मेरे निप्पल पर दांत भी काट दिए थे। जिससे मुझे सेक्स की मांग मेरी बढ़ गई थी। मैंने अपनी योनि में उंगली लगा कर उसे रगड़ना शुरू कर दिया।  जैसे-जैसे मेरा सेक्स की भूख बढ़ती जाती वैसे ही मुझे और अच्छा लगता जाता। वह मेरे स्तनों का  अच्छे से रसपान कर रहा था। उसके बाद उसने मुझे जमीन पर ही लेटा दिया और मेरी पैंटी उतार दी। जैसे ही उसने मेरी पैंटी उतारी उसके बाद उसने अपने मुंह में मेरी योनि को लेते हुए। मेरी योनि के ऊपरी हिस्से को दबा लिया। अब उसने मुझे उल्टा कर कर मेरी गांड को भी चाटने लगा वह मेरे दोनों तरफ चाटता कभी आगे कभी पीछे मुझे इससे अच्छा लगने लगा था। अब उसने धीरे से मुझे उठाकर थोड़ा सा किनारे पर कर दिया।


अब वह मेरे ऊपर लेट गया और जैसे ही वह मेरे ऊपर लेटा तो उसने अपने लंड को मेरी योनि में धीरे धीरे डालना शुरू किया। क्योंकि मेरी योनि गीली हो चुकी थी इस वजह से उसे डालने में कोई परेशानी नहीं हुई। वह पूरा अंदर तक चला गया मानो ऐसा लगा जैसे दीवार में उसने सटा दिया हो  उसने अपनी स्पीड पकड़ी और काफी तेज तेज करने लगा मेरे स्तन और तेज हिलने लगे। वह इतनी तेज हिल रहे थे जैसे मानो भूकंप के झटके आ रहे हो। उसने 10 मिनट तक किया उसके बाद मेरी योनि इतनी गरम हो गई कि वो बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका वीर्य पतन हो गया। जैसे ही उसका वीर्य गिरा। वह कहने लगा तुम वाकई में बहुत अच्छी हो। उसके बाद उसने दोबारा से थोड़ी देर बाद मेरे साथ सेक्स किया।


इस बार उसने मुझे इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे तो गले तक ही आ गया उसका लंड वह बड़ी तेजी से कर रहा था मानो जैसे कोई ट्रेन छूटने वाली हो लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर में उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और उठाते उठाते ही वह मुझे चोदने लगा। अब मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे मेरी इच्छा पूर्ति हो गई हो। उसने धीरे से मुझे कहा मेरा गिरने वाला है। उसके बाद उसने मुझे लिटा दिया और मेरे पेट पर ही सारा वीर्य गिरा दिया। जिससे कि मेरा पुरा पेट गीला हो गया। उसके बाद मैंने कपड़े से साफ किया और अब हम दोनों रोज रात को ऐसा करने लगे।


हमने कुछ समय बाद शादी का फैसला कर लिया। हम पहले से ही जानते थे तो हमें एक दूसरे के बारे में जानने की जरूरत नहीं पड़ी। विवेक बहुत अच्छा लड़का था। अब हम ने शादी करने का फैसला किया मैंने यह बात अपने घरवालों को बताई तो उन्होंने इनकार कर दिया। और कहां पहले हम विवेक से मिलना चाहते हैं। उसके बाद हम फैसला करेंगे। एक दो महीने बाद जब मैं घर गई तो मैंने अपने मम्मी पापा को विवेक के बारे में बताया और उसे अपने घर वालों से मिलाया। मेरे पापा को विवेक बहुत अच्छा लगा। लेकिन मेरे मम्मी अभी भी दुविधा में थी क्योंकि विवेक का इस दुनिया में कोई नहीं था।


बचपन से उसके पिताजी ने उस को पाला और उसको पढ़ाया-लिखाया पर कुछ समय बाद उनका भी देहांत हो गया। अब वह बिल्कुल अकेला रह गया था। मैं और विवेक एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। मैने जैसे तैसे करके अपनी मां को शादी के लिए मनाया। मेरी मां विवेक से शादी कराने के लिए इसलिए तैयार नहीं थी। क्योंकि मेरी मां ने मेरे लिए कहीं और रिश्ता तय कर रखा था। लेकिन यह बात मुझे पता नहीं थी। मेरी मां ने यह बात मेरे पापा से की लेकिन मेरे पापा तो मेरे फैसले से खुश थे। लेकिन मां को मेरी बहुत चिंता थी।

बचपन के प्यार की सील तोड़ चुत चुदाई

बचपन के प्यार की सील तोड़ चुत चुदाई

मेरे पड़ोस में मेरी एक प्यारी सी लड़की रहती है, जिससे मैं बचपन से प्यार करता आ रहा हूँ … लेकिन उसे अपना प्यार जताने की मेरी कभी हिम्मत नहीं हुई-. हम दोनों के परिवारों में काफी अच्छे सम्बन्ध थे, इस वजह से मैं ज्यादा हिम्मत नहीं कर पा रहा था कि कहीं हमारे परिवारों के बीच कोई कटुता न पैदा हो जाए-.
बचपन के प्यार की सील तोड़ चुत चुदाई


फिर एक दिन मैंने हिम्मत करके उसे अपने दिल की बात बता ही दी-. लेकिन उस समय उसने मेरा प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया कि वो लव मैरिज नहीं करना चाहती है-.

मेरे लाख समझाने और कोशिश करने पर भी वो नहीं मानी-. मैंने भी उसे फ़ोर्स करना अच्छा नहीं समझा-. फिर हम दोनों अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए-. एक दिन मुझे खबर लगी कि उसके लिए एक विदेश में नौकरी कर रहे लड़के का रिश्ता आया है-.

ये जानकर मैं बहुत निराश हुआ क्योंकि मैं अभी भी उससे बहुत प्यार करता था-. एक दिन हमारे परिवार के लोग किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे-. मैं घर पर अकेला था-. मैं पूरे दिन काम का थका शाम को हाफ-डे लेकर ऑफिस से जल्दी आ गया था और आते ही बेड पर सो गया-.

करीब आधे घंटे बाद मेरे घर की डोर बेल बजी-.

मैंने पूछा- कौन है?

बाहर से महिमा की आवाज आई- मैं हूँ-.

ये महिमा मेरी वही पड़ोसन है … जिससे में प्यार करता हूँ-.

मैं आपको महिमा के बारे में बता दूँ कि वो एक सुन्दर, कमसिन, कोमल, हॉट एवं काफी प्यारी सी लड़की है-. उसका फिगर 32-24-30 का है-.


पहली नजर में जो भी उसे देखता, उसकी खूबसूरती का दीवाना बन जाता था-.

जब दरवाजे पर उसकी आवाज सुनी, तो मैं उठ गया और उसे अन्दर आने को कहा-.

जैसे ही वो अन्दर आई, मैंने उसे ऊपर से नीचे तक निहारा-.

उसने टाइट कुर्ती सलवार पहना हुआ था-. उसके तने हुए दूध देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए-.

मैंने उसे अन्दर आने को कहा-.

हम दोनों अन्दर आकर बात करने लगे-.

उसने सभी की अनुपस्थिति को लेकर पूछा-.

तो मैंने सभी को शादी में जाना बताया-.

उसने मुझसे पूछा कि तुम शादी में क्यों नहीं गए?

तो मैंने उत्तर दिया कि मेरा मन नहीं था-.

कुछ देर तक यूं ही बात करते रहने के बाद उसने पूछा- घर के लोग वापस कब आएंगे?

मैंने कहा- दो दिन बाद आएंगे-.

उसने मुझे खाना खाने के लिए पूछा-.

तो मैंने जवाब में मना कर दिया क्योंकि मैं तो उसके प्यार का भूखा था-.

मेरे मना करने पर वो जाने लगी और जैसे ही वो मुड़ी … तो उसकी चुनरी उसके पैरों में फंस गई और वो घूम कर मेरे ऊपर गिर गयी-.

इस तरह से हम दोनों में एक चुम्बन का सीन हो गया-.

यह अहसास मेरे लिए काफी रोमांचक था-. हम दोनों की आंखें एक दूसरे की आंखों में स्थिर हो गईं और कुछ आश्चर्यचकित सी रह गईं-.

क्या बताऊं दोस्तो, उसका कोमल शरीर मेरे बदन से सट गया था और उसके बड़े बड़े स्तन मेरी छाती को छू रहे थे-.

मुझे लग रहा था मानो कोई मुलायम गद्दे मेरे सीने दब गए हों-.

हमारी धड़कनें तेज हो गईं-.

फिर वो धीरे से उठने हो हुई-.

मगर उसी समय मैंने उसकी आंखों में एक अजीब सी चमक और होंठों पर मुस्कान देखी-.

मुझे उसकी आंखों में एक ऐसी कामना सी दिखी मानो वो मुझे फिर से चूमने का न्यौता दे रही हो-.

हमारी सांसें गर्म हो चुकी थीं और हमारी नजरें एक दूसरे को ही ताक रही थीं-.

मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसे चूमने लगा-.

पहले तो उसने विरोध किया लेकिन फिर उसने भी मेरा साथ दिया और हम एक दूसरे को चूमने चाटने लगे-.

कभी मैं उसके मुलायम गुलाब जैसे होंठों को चूमता, तो कभी गर्दन पर किस करता, तो कभी उसके कान की लौ काट लेता-.

वो भी मुझे इसी तरह से चूमने लगी-. हमें कोई होश नहीं था … हम एक दूसरे में मदहोश हुए जा रहे थे-.

थोड़ी देर चूमने के बाद मैंने उसे जल्दी से पलटा दिया और मैं उसके ऊपर आकर उसे चूमने लगा-.

उसे चूमते चूमते मेरा हाथ उसके स्तनों को दबाने लगे-.

उसके स्तन इतने बड़े थे कि एक स्तन मेरे पूरे हाथ में नहीं आ रहा था-.

मैं यूं ही धीरे धीरे उसके स्तनों को मसलता रहा और दबाता रहा-.

उसे भी मजा आने लगा और उसके मुंह से ‘आह … आह …’ की मादक आवाज आने लगी-.

उसकी कामुक सिस्कारियां मुझे और उकसाने लगी थीं-.

धीरे धीरे मैं अपना एक हाथ उसकी चूत पर ले गया और चुत को कपड़ों के ऊपर से ही मसलने लगा-.

पहले तो उसने मुझे रोका, लेकिन जब मैं नहीं रुका तो थोड़ी देर बाद उसने मुझे रोकना बंद कर दिया-.

शायद उसे भी अब मज़ा आने लगा था-.

ये सब चलते चलते पूरे कमरे में उसकी मादक सिसकारियों और मनमोहक खुशबू फ़ैल गई थी-.

मेरा लंड धीरे धीरे कड़क होने लगा था और उसे पैंट में से चुभने लगा था-.

वो धीमी आवाज में बोली- ये क्या चुभ रहा है?

उसकी बात सुनकर मैं रुक गया और जरा उठ सा गया-.

उसने मेरे पैंट पर बने तम्बू को देखा और सोच में पड़ गयी कि ये क्या है?

मैंने मुस्कुराकर कहा- क्या तुम्हें वाकयी नहीं पता कि ये क्या है?

उसने शर्मा कर न में सर हिला दिया-.

मैंने उसके कान में कहा कि ये मेरा औज़ार है और इससे हम मर्द, चुत चोदते हैं-.

उसने शर्मा कर पूछा कि चुत माने क्या?

मैंने उसकी चूत की ओर इशारा करते हुए उसे बताया कि चुत इधर होती है-.

वो शर्मा गई और मुस्कुराने लगी-.

उसे मुस्कुराता देख कर मेरी उत्तेजना और भी बढ़ गयी-.

तभी उसने आव देखा न ताव … और फट से मेरी पैंट का बटन और चैन खोल दी-.

मैंने अंडरवियर पहना था, जिसमें से मेरा लंड और भी बड़ा लग रहा था-.

उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और मसलने लगी-.

पहली बार किसी लड़की ने मेरे लंड को टच किया था; मैं सिहर उठा और पागल सा हो गया-.

वासना में मैं उसके मम्मों को जोरों से दबाने लगा और किस करने लगा-.

वो भी गर्मा उठी थी-.

मैंने देर न करते हुए उसकी कुर्ती को ऊपर किया और उसकी गर्दन से निकालते हुए अलग को फेंक दिया-.

उसने अन्दर लाल कलर की नेट वाली ब्रा पहनी थी-.

लाल मेरा पसंदीदा रंग है तो मेरी वासना और भी भड़क गई-.

मैं ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तन दबाता और चूमता रहा और उसकी गर्म गर्म सांसें तेज होने लगीं-.

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी पीठ के पीछे हाथ लेजाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया-.

उसकी ब्रा उतार कर अलग कर दी तो उसने शर्मा कर अपने स्तनों पर हाथ रख लिया और उन्हें ढक दिया-.

मैंने उसके हाथों को प्यार से हटाया और उसके स्तनों से अलग कर दिया-.

मेरे सामने दुनिया के बेहतरीन स्तन खुल गए थे-.

ये इतने मादक थे कि मैंने अब तक कभी भी किसी साईट में नहीं देखे थे … बल्कि अपनी कल्पना में भी ऐसे चुचे नहीं सोचे थे-.

उसके स्तन किसी पोर्नस्टार से भी अच्छे थे-. मैं तो बस उन्हें देखता ही रह गया-.

दूसरी तरफ उसने शर्म के मारे अपनी आंखें बंद कर लीं-.

मैंने उसके एक स्तन को हाथ में लिया और सहलाते हुए दबाने लगा-. दूसरे स्तन की चौंच को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा-.

आह ऐसा स्वाद मैंने अब तक कभी नहीं लिया था-.

मैं एकदम से बौरा सा गया था-. कभी उसके एक स्तन को दबाता, तो कभी कसके चूसने लगता-. उसके दूध को जोर जोर से पीता … तो कभी उसकी चूची को जोर से भींच देता-.

कुछ पल बाद मैं नीचे नाभि पर चूमने लगा-. मैं अपनी जुबान से उसकी नाभि को चोदने सा लगा था-.

वो तेज तेज स्वर में ‘आह -.-. आह -.-.’ की आवाजें निकालने लगी थी-.

कुछ देर बाद उसने मुझे खड़ा किया और खुद बैठ कर मेरी अंडरवियर को उतारने की जगह एक झटके से फाड़ दिया और मेरे लंड को आज़ाद कर दिया-.

मेरा 7 इंच का फनफनाता लंड देख कर उसके होश उड़ गए और वो घबरा गयी-.

वो लंड देख कर कहने लगी कि य…ये क्या है … इतना बड़ा और सख्त!

मैंने कहा- ये मेरा औजार है और इसे लंड भी कहते हैं-. अंग्रेजी में पेनिस इसे कहते हैं-. क्यों … क्या तुमने पहले कभी लंड नहीं देखा?

उसने कहा- देखा है … लेकिन केवल फोटो में … मगर इतना बड़ा नहीं देखा-.

वो मेरे लंड को हाथ में लेकर मसलने लगी-.

उससे रहा नहीं गया और उसने मेरे लंड को मुंह में भर लिया और उसे कुल्फी की तरह चूसने चाटने लगी-.

मुझे मज़ा आने लगा-.

लेकिन मेरा सिर्फ आधा लंड ही उसके मुँह में जा रहा था तो मैंने जोर से उसका मुँह दबाया और मेरा पूरा लंड उसके गले तक चला गया-.

उसने झट से लंड बाहर निकाला और खांसने लगी-.

मैंने उसे उठाया और उसे किस करने लगा और उसका स्तन पान करने लगा-.

वो मुझे खुद दूध पिलाने लगी-.

कुछ पल बाद मैंने उसे उठा कर बेड पर लुढ़का दिया और उसे पागलों की तरह चूमने लगा; उसके मम्मों को दबाने लगा-.

उसकी वासना से लबरेज सिसकारियां पूरे वातावरण को मादक बना रही थीं-.

अचानक से उसका शरीर अकड़ने लगा-.

मैं समझ गया कि उसका पानी छूट गया है-. लेकिन उसके लिए ये पहला अनुभव था … तो वो डर गई कि उसे क्या हो रहा है … कहीं पीरियड्स तो नहीं होने लगे हैं-.

मैंने उसे समझाया कि ये तुम्हारी चुत से निकलने वाला पानी है … जो उत्तेजना बढ़ने पर निकलता है-.

उसकी सलवार गीली हो चुकी थी-.

मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खोला और उसे उतार दिया-.

उसने अन्दर नेट वाली लाल पैंटी पहनी थी, जो पूरी गीली हो चुकी थी-.

मैं लाल रंग की गीली पैंटी में उसकी फूली हुई चुत देख कर एकदम पागल हो गया और मैंने देर न करते हुए उसकी पैंटी को उतार फैंका-.

अब मेरे सामने एक कमसिन कुंवारी नंगी चूत थी-. उसकी चुत पर बारीक झांटें उगी थीं-.

चुत ऐसी लग रही थी … जैसे कुछ ही दिन पहले उसने चुत की झांटें साफ़ की हों-.

मैंने उसकी चूत पर अपना मुँह रखा और उसकी खुशबू लेने लगा-.

काफी मनमोहक सुगंध थी-.

मैं उसकी चूत को चाटने लगा, उसे गुदगुदी होने लगी और वो हंस पड़ी-.

धीरे से मैंने उसकी चुत में अपनी जीभ लगा दी … लेकिन उसकी चुत काफी टाइट थी और मेरी जुबान अन्दर न जा सकी-.

मैंने फिर से कोशिश की मगर फिर से असफल हो गया-.

अब मैंने अपनी उंगलियों से उसकी चुत को फैलाया और अपनी जीभ दरार में डाली-.

मेरी जीभ अन्दर तो गई मगर एक तंग जगह में फंस सी गयी-.

मैं धीरे धीरे जुबान को अन्दर बाहर करने लगा और अपने हाथों से उसके बड़े स्तनों को दबाता रहा-.

वो ‘आह … आह … आह …’ की मादक आवाज निकालने लगी थी-.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद वो फिर से झड़ गयी और मैंने उसका सारा पानी पी लिया-.

उसकी कुंवारी चुत का रस ऐसा लगा मानो मैंने अमृत पी लिया हो-.

वो झड़ने के बाद निढाल हो चुकी थी-.

कुछ देर बाद हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए-.

मैंने अपना लंड उसके मुंह में दे दिया और वो उसे मसल मसल कर चूसने लगी-.

कभी वो लंड के ऊपर के सुपारे को चूसती … तो कभी मेरे आंडों को बारी बारी से अपने मुँह में लेकर चूसती-.

एक तरफ वो मेरे लंड को चूस रही थी और दूसरी तरफ मैं अपनी उंगली उसकी चुत में डालने लगा था-.

उसकी चुत एकदम टाईट थी तो उंगली तक घुसेड़ने में मुश्किल हो रही थी-.

मैंने मेज़ पर रखा तेल उठा लिया और हाथ पर लगा कर उसकी चुत में मलने लगा-.

उसकी चुत के अन्दर तक कुछ तेल गया, तो अब मेरी उंगली उसकी चुत में आसानी से अन्दर चली गयी-.

उंगली को अपनी चुत के अन्दर लेते ही वो सिसक उठी और गांड उठाने लगी-.

कुछ देर एक उंगली से ही चुत को ढीला करने के बाद मैं अपनी दो उंगलियों से उसे चोदने लगा और उसकी चूत को चाटने लगा-.

अब उससे रहा नहीं गया और वो गिड़गिड़ाने सी लगी- आह रॉकी प्लीज … मुझसे रहा नहीं जाता … अब मुझे चोद दो-. मुझे अपनी रानी बना लो-.

उसके मुँह से यह सुन कर मैं चौंक गया और काफी खुश हुआ-.

मैं उस पर से उठा और नंगा ही भाग कर अपने बड़े भाई के कमरे में गया, उसकी अलमारी से कंडोम का पैकेट ले आया-.

मेरे बड़े भाई की शादी कुछ महीने पहले ही हुयी थी-. मुझे मालूम था कि वो भाभी को कंडोम लगा कर ही चोदता है-.

दोस्तो, चाहे कुछ भी हो … सेफ्टी फर्स्ट होती है-. कभी कोई रिस्क नहीं लेना चाहिए-.

मैं जल्दी से कंडोम लेकर आया और अपने लंड पर पहनने लगा-.

उसने पूछा कि ये क्यों?

मैंने कहा- सेफ्टी जरूरी है … तुम्हारे लिए भी … और मेरे लिए भी!

मेरी बात सुनकर वो खुश हो गई और उसने मुझे गले से लगा लिया-.

मैंने झट से कंडोम पहन लिया और उसे लिटा कर चूमने चाटने लगा-.

अब मैंने अपना तना हुआ लंड उसकी बुर पर रखा और चुत के ऊपर घिसने लगा-.

वो मेरे लंड को चुत में लेने के लिए तड़प रही थी-.

अपनी आंखें बंद किए हुए वो मादक सिसकारियां ले रही थी-.

मैं लंड चुत पर घिस कर उसे और उकसा रहा था-.

वो कहने लगी- मेरे राजा … अब देर मत करो … और डाल दो इस हथियार को मेरी चुत में-.

मैंने अपना लंड उसकी गर्म चूत के द्वार पर सैट किया और हल्का सा धक्का दे दिया-.

लेकिन उसकी चूत काफी टाइट थी … पहली बार जो चुद रही थी-.

मेरा लंड फिसल गया और यह देख कर वो हंस पड़ी-.

मैंने उसकी गांड को कसके पकड़ा और लंड को फिर से सैट किया-.

इस बार सुपारा चुत की फांकों के मध्य जैसे ही सैट हुआ … मैंने जोर का धक्का लगा दिया-. मेरे लंड का मुखड़ा उसकी चूत में घुसता चला गया-.

मोटा लंड जब संकरी चुत में घुसा, तो वो जोर से चीख पड़ी-.

वो रोने लगी … मैं उसे किस करने लगा ताकि उसकी चीख दब जाए-.

वो रोती हुई कहने लगी- इसे निकालो … मुझे बहुत दर्द हो रहा है-.

मैं उसे चूमने लगा और उसके स्तन दबाने लगा-.

थोड़ी देर बाद वो शांत हुई तो मैंने एक और जोर का धक्का दे दिया-.

इस बार मेरा आधा लंड उसकी चूत में चला गया था-.

वो फिर से चीख उठी- हाय मर गई मैं तो … इसे निकालो … मुझे नहीं करना-.

लेकिन अब मैं कहां रुकने वाला था … मैंने एक और जोर का झटका दे दिया और मेरा पूरा लंड उसकी चुत में घुस गया था-.

वो दर्द से कराह रही थी और उसके आंसू रुक ही नहीं रहे थे-. मैं उसे चूमता रहा ताकि वो शांत हो जाए-.

थोड़ी देर मैं ऐसे ही पड़ा रहा-.

फिर कुछ पल बाद जब वो शांत हुई तो मैं आगे पीछे होकर लंड को अन्दर बाहर करने लगा-.

पहले उसे दर्द हुआ … फिर वो भी मजे लेकर मेरा साथ देने लगी-.

अब तो वो अपनी गांड को उछाल उछाल कर साथ देने लगी थी-.

मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर लिया और उसकी गांड पकड़ कर जोर जोर से झटके मारने लगा-.

पूरे कमरे में उसकी सिस्कारियों की आवाज ‘आह … आह … ओह माय गॉड … फ़क मी फ़क मी … रॉकी-.’ और ‘फच्च फच्च …’ की आवाजें गूंजने लगीं-.

मैंने दस बारह तेज शॉट मारे और उससे पूछा- मजा आ रहा है जान!

वो चीखने लगी, चिल्लाने लगी- ओह रॉकी बहुत मज़ा आ रहा … और जोर से करो … आह-.

मैंने अपनी स्पीड को बढ़ा दी-.

करीब 15 मिनट बाद मैं झड़ गया-.

इस बीच वो दो बार झड़ चुकी थी-. मैं लंड उसकी चूत में रखे ही उस पर लेटकर सो गया-.

कुछ देर बाद मेरी आंखें खुलीं, तो मैंने देखा कि मेरे लंड पर खून लगा था-.

मैंने देखा कि वो खून महिमा की चूत से आ रहा था-.

मुझे पता था कि पहली चुदाई में लड़की की सील टूटने पर खून निकलता है-.

मुझे लगा अगर महिमा ने ये देख लिया तो वो घबरा जाएगी-.

वो अभी सो रही थी-.

मैं जल्दी से बाथरूम से गीला कपड़ा लेकर आया और उसकी चूत और मेरे लंड से खून साफ़ किया-.

लेकिन अभी भी बेडशीट पर खून लगा था-. मैंने महिमा को उठाया तो उसमें उठने की भी ताकत नहीं थी-.

मैंने उसे सहारा देकर उठाया और अपनी गोद में उठा कर उसे बाथरूम में ले गया, उसे बाथटब में लिटा दिया और हल्का गर्म पानी भर दिया-.

गर्म पानी में उसे अच्छा लगा-.

वो अपने बदन की गुनगुने पानी से सिकाई करने लगी-.

तब तक मैंने जल्दी से कमरे में आकर बेडशीट को हटाया और धोने में डाल दिया-.

फिर मैं भी बाथरूम में आ गया और महिमा के साथ बाथटब में बैठ गया-.

मैंने उसे अपनी तरफ किया और उसके गोरे बदन पर साबुन मलने लगा-.

कभी उसके स्तन पर साबुन लगा कर दूध मसलता और दबाता, तो कभी उसकी चूत के ऊपर साबुन लगाता और अन्दर तक उंगली डाल कर चुत को मसलता-.

इसी तरह वो भी मेरे लंड पर साबुन मलती और उसे मसलती रही-.

मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया-. मैं उसकी गांड मसलने लगा-.

मैं टब में ही लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गयी-.

मेरे लंड को हाथ में लेकर वो अपनी चूत पर सैट करने लगी-.

धीरे से मेरा लंड उसकी चूत में जाने लगा-.

अब वो धीरे धीरे अपनी गांड को हिलाने लगी और ऊपर नीचे होने लगी-. इसी तरह हमने कई पोजीशन में टब में ही चुदाई की-.

डॉगी स्टाइल में कभी 69 में चुदाई का मजा आता रहा-. कभी मैं उसके ऊपर चढ़ जाता … तो कभी वो मेरे ऊपर चढ़ जाती-.

1st सेक्स करने के बाद मैंने उसे पूछा- तू तो बड़ी अनजान बन रही थी चूत लंड से? फिर कैसे तुझे सब पता चल गया और …

वो बोली- वो तो मैं ऐसे ही भोली बन कर दिखा रही थी-. ब्लू फ़िल्में देख कर मुझे सब पता था पहले से!

उस रात हमने पूरे घर में कई जगह और कई बार चुदाई की-. किचन में, खाना खाते समय डाइनिंग टेबल पर भी उसे चोदा, टीवी देखते समय सोफे पर चोदा-. टहलते समय छत पर भी चोदा-.

उस रात की सेक्स कहानी आगे भी बताऊंगा मगर वो सब अगली बार लिखूंगा-.

उस दिन के बाद जब भी हम दोनों अकेले में मिलते हैं, तो मिनटों तक किस करते हैं और कभी कभी मैं उसके मम्मों को भी चूस लेता हूँ-.

जब भी हम दोनों देर के लिए अकेले में मिलते हैं, तो चुदाई भी कर लेते हैं-.

Neha Ki Chudai Ki Kahani

Neha Ki Chudai Ki Kahani,नेहा की चुदाई की कहानी
नमस्ते दोस्तों, मैं नीरज अपनी दूसरी कहानी लेकर आया हूँ. मेरी पहली कहानी तो आप भूल गए होंगें जो मैंने 2015 में पोस्ट करी थी.

सच कहूँ लिखने में मुझे बहुत आलस आता है. मेरी पहली कहानी हमारी अधूरी कहानी दो पार्ट में है। मैं एक एक करके मैं अपनी सारी कहानी आप तक पहुँचाऊँगा.

जब मैं ये कहानी लिख रहा हूँ तो आज तक मैंने सिर्फ 8 औरतों के साथ सेक्स किया है. जिसमें से एक मेरी वाइफ है. तो बाकी 7 की कहानी मैं आप तक पहुँचाऊँगा. जिसमे से एक आप पढ़ चुके हैं. तो दुसरी चुदाई की कहानी पेश है.

ये बात तब की है जब मैं 22 साल का था. मैं पढ़ाई पूरी करके मैं दिल्ली जॉब की तलाश में आया.

दिल्ली में मेरा एक दोस्त रमेश 6 महीने पहले ही आ गया था और उसकी जॉब लग गई. वो फील्ड जॉब में था और आउट स्टेशन जाता रहता था. तो मैं उसी के रूम में एडजस्ट हो गया.

हमारे मकान मालिक पंजाबी थे. वो हसबैंड वाइफ उनका एक बेटा बहु 3 साल की पोती और बेटी रहती थी। बेटी का नाम नेहा था. हम फर्स्ट फ्लोर पर रहते थे फर्स्ट फ्लोर किराये के लिए ही बनाया था, जिसमे तीन रूम थे हमारे रूम में किचन था बाकी दो रूम के साथ किचन नहीं था. बाथरूम कॉमन था. बाकी दो रूम अभी खाली थे. घर की एंट्री कॉमन थी.

अब मैं आता हूँ इस कहानी की मुख्य किरदार पर नेहा. नेहा की उम्र 19 साल के आस पास थी. हद से ज्यादा गोरा रंग. मग़र चेहरा साधारण. शरीर की बनावट सोनम कपूर जैसी. कद 5′ 4″. स्तन 32 साइज़ के. मतलब साधरण रूप वाली बस कद और रंग ज़बरदस्त.

तो मै न्यूज़ पेपर में क्लासीफाइड में जॉब देखता. कहीं रेफरेंस से इंटरव्यू देने जाता फिर घर लौटता तो अक्सर वही दरवाजा खोलती और स्माइल देती.

लेकिन मैँ उस पर कोई ज्यादा ध्यान नहीं देता था बाद हेल्लो हाय ही होता.

ऐसे ही 9. 10 दिन बीत गए मेरी कहीं जॉब नहीं लगी. एक दिन रमेश बोला मकान मालिक की लड़की तेरे पे फिदा लगती है मैंने कहा अरे नहीं यार. मगर रमेश बार मुझे ऐसे ही बोलता तो मैं उस पर ध्यान देनेलगा.

एक दिन मैं घर पर था मई का महीना था. मैं म्यूजिक सिस्टम में सोनू निगम के गाने सुन रहा था. गर्मी बहुत थी तो मैंने केवल बॉक्सर पहना हुआ था. हमारे रूम में स्टैंडिंग फैन था उसी से काम चल रहा था.

तभी हमारे रूम के दरवाजे पर किसी ने नौक किया दरवाजा खुला था पर पर्दा गिरा हुआ था। मैंने पूछा कौन तो लड़की की आवाज आई मै.

मैं चौंक गया मैने जल्दी सेt शर्ट डाली और पर्दा हटाया.

मैं – जी.

नेहा – हेल्लो.

मैं- जी हेल्लो.

नेहा – ये जो आप सांग सुन रहे हैं ये मुझे बहुत पसंद हैं कि ये आप मुझे सीडी में डाल कर के दे सकते हैं.

मैं – सॉरी मेरे पास कंप्यूटर नहीं है मैं तो ये म्यूजिक सिस्टम में सुन रहा हूं. आप चाहो तो मेरे साथ सुन सकती हो.

नेहा – अच्छा! ये बोलकर वो अंदर आ गई. हमारे रूम में कोई चेयर नहीं थी तो वो चारपाई में ही बैठ गई. मैं भी चारपाई में बैठ गया.

फिर मैं बोला – आपका नाम क्या है?

वो बोली – नेहा, और आपका नाम?

मैं बोला – नीरज.

मै – आप क्या करती हैं.

नेहा – अभी बीए फर्स्ट इयर के एग्जाम. दिए है अभी छुटियाँ है और आप?

मैं – अभी तो जॉब की तलाश चल रही है. अंकल आंटी कहाँ हैं.

नेहा- पापा और भाई तो काम पर गए हैं. मां और भाभी और पीहू भाभी के मायके गए हैं.

मै – आप नहीं गई.

नेहा – नहीं. घर पर भी तो कोई होना चाहिये.

मै – हाँ वो तो है.

फिर मुझे रमेश की बात याद आई. तो मैंने सोचा कुछ चांस मरता हूँ.

नेहा- यँहा तो बहुत गर्मी है आप कैसे रहते हो.

मैं – क्या करे अब रहना तो है ही. वैसे आपकी स्माइल बहुत अच्छी है बिल्कुल नेचुरल.

नेहा – हाँ थैंक यू.

मैं – आपका कोई बॉयफ्रैंड है?

नेहा – नहीं कोई नहीं है.

मैं – सच में. मैंने तो सुना था दिल्ली की हर लड़की का बॉयफ्रैंड होता है.

नेहा- नहीं तो, ऐसा ज़रूरी थोड़ी है. आपकी कोई गर्लफ्रैंड है.

मै – नहीं, अभी तो जॉब पर ही फोकस है.

नेहा- अच्छा.

मै – एक बात बोलूं अगर बुरा ना मानो तो.

नेहा- बोलो!

मैं- मेरा मन तुम्हे किस करने का कर रहा है. (मै आप से तुम पे आ गया था)

नेहा- क्या.. ?? फिर उसने नज़रे झुका ली. अभी मैं उससे दूर बैठा था अब मै उसके पास आ गया.

सच कहूं तो मेरा इरादा उसे सिर्फ किस करने का था.

मैने उसका हाथ अपने दोनों हाथों में पकड़ा और बोला – बोलो ना, कर लूं?

वो कुछ नहीं बोली नज़रे भी नहीं मिला रही थी. उसके चेहरे पर शर्म साफ नजर आ रही थी.

मैंने सोचा अब जो भी हो देखा जाएगा.

मैंने उसकी ठुडी के नीचे हाथ लगया और उसके चेहरे को ऊपर उठाया. उसने आंखे बंद कर ली.

उसके कानों के नीचे पसीने की बूंदे थी. गर्मी की वजह से या कुछ और वजह से पता नहीं.

फिर मैंने अपने होंठ उसके पतले गुलाबी होंठो पर रख दिये. धीरे धीरे उसे किस करने लगा. मैने उसके निचले होंठ को अपने मुंह मे लेके चूसने लगा. फिर कुछ देर बाद नेहा भी मेरे होंठ चूसने लगी फिर मैं उसकी जीभ को चूसने लगा.

ऐसे ही हम लगभग 15 मिनट तक किस करते रहे. मेरा लंड खड़ा हो गया और बॉक्सर में टेंट सा बन गया.फिर मैंने नेहा का एक हाथ बॉक्सर के ऊपर से ही लन्ड पर रख दिया. वो कुछ चौंक गई पर उसने हाथ नहीं हटाया.

फिर मैं उसकी गर्दन पर किस करने लगा. और एक हाथ से उसके बूब्स दबाने लगा. उसने कोई प्रतिरोध नहीं किया.

मैंने उसे ऐसे किस करते करते बिस्तर पर लिटा दिया पर हम दोनों के पैर बिस्तर से नीचे लटक रहे थे. नेहा ने सूट सलवार पहना था.

फिर मैंने उसका सूट थोड़ा ऊपर उठाया तो उसका गोरा फ्लैट पेट और नाभि दिखने लगी. उसने सूट के अंदर वाइट समीज भी पहनी थी. उसे भी ऊपर किया.

अब मै उसकी नाभि को अपनी जीभ से चाटने लगा. नेहा की आंख बंद थी. उसके हाथ मेरे सिर पे थे. थोड़ी देर में वो बोली बस करो नीरज मैं पागल हो जाउंगी.

लेकिन मैं नही रुका. एक हाथ से मैंने उसका नाडा खोल दिया और उसकी सलवार नीचे उतार दी. नेहा ने अपनी टांगे बन्द कर दी. उसने प्रिंटेड पैंटी पहनी थी.

मैं पैंटी के ऊपर से किस करने लगा तो देखा उसकी पैंटी गीली है. मैं समझ गया ये भी बहुत गर्म है. मैंने उसे बोला नेहा अपना सूट उतारो.

वो बोली – मुझे शर्म आ रही है.

मै बोला – कमओन!

मैंने उसे ऊपर उठाया और इसका सूट और समीज भी उतार दी.अब वो सफेद ब्रा में थी. मैं उसके बूब्स को किस करने लगा. किस करते करते मैंने उसके ब्रा के हक खोल दिये. और फिर उसकी ब्रा उतार फेंकी.

अब उसके छोटे संतरे के समान बूब्स मेरे सामने थे. उसके निपल पिंक थे. बिल्कुल अनछुहे लग रहे थे. उसके बूब्स छोटे थे लेकिन कमाल लग रहे थे. फिर मैंने उसके एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा.

ओह नीरज तुम मुझे पागल करके छोड़ोगे. फिर मैं उसका दूसरा निप्पल चूसने लगा. और उसकी चूत को पैंटी के ऊपर से सहला रहा था. मैने उसके निप्पल्स को चूस चूस के लाल कर दिया. उसकी पैंटी भी गीली होने लगी.

फिर मैंने उसकी पैंटी घुटनो तक उतार दी.क्या मस्त चूत थी.

ब्राउन हेयर थे जो अभी छोटे छोटे थे चूत भी गोरी और भी पिंक. मज़ा आ गया चूत देख के. अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसकी चूत चाटने लगा.

मेरा लंड फड़पडा रहा था. मैं उसकी चूत में जीभ अंदर बाहर करने लगा. मै 5 मिनट तक ऐसा करता रहा. फिर उसने मेरा सर पकड़ लिया और वो बोलने लगी मुझे कुछ हो रहा है. और वो झटके से झड़ गई. उसका मस्त पानी निकलने लगा.

फिर मैंने अपना बॉक्सर. त सर्टऔर अंडरवियर उतार दिया. मै अब पूरा नंगा था. नेहा की नज़र मेरे खड़े लन्ड पर थी. फिर मैं अपना लन्ड उसके मुंह पर ले गया.

मैंने उसे बोला – लन्ड में किस कर.

वो बोली – इसको कैसे किस करूं.

फिर मैं जबरदस्ती लन्ड के सुपडे को उसके होंठो से रगड़ने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने थोड़ा लन्ड उसके मुंह में घुस दिया. धीरे धीरे उसे भी मजा आने लगा. मैं लंड अंदर बहार करने लगा.

फिर मैंने पूरा लंड उसके मुंह मे गले तक उतार दिया. उसका गला चौक होने लगा. तो मैने लन्ड बाहर निकाल. उसको बोला चाट इसे.

वो लन्ड को आइस क्रीम की तरह चाटने लगी वो मेरा लन्ड चाट रही थी और मैं उसके बूब्स मसल रहा था.

फ़िर मैने फिर से उसके मुंह मे लन्ड डाल दिया. और उसके बाल पकड़ के ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा.

नेहा मज़ा आ गया, और चूस मेरा लन्ड 5 मिनट बाद मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूं. नेहा मुझे होने वाला है. और मैं उसके मुँह में ही झड़ गया.

उसने मुँह हटाने की कोशिश की पर मैने उसका सर जोर से पकड़ के रखा. जब पूरा झड़ गया तब उसका सर छोड़ा.

उसने तुरंत ही सारा माल फर्श पर थूक दिया और बोली – तुम बहुत गन्दे हो.

मैं उसके बगल में लेट गया और उसको खींच कर अपनी बाहों में ले लिया!




कोमल की सील तोड़ी बड़े प्यार से

 

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हैल्लो फ्रेंड्स.. मैं राज एक बार फिर इस साईट पर आप सभी के सामने एक और घटना लेकर आया हूँ और मैं दिल से आप सभी को मेरी पिछली कहानी को इतना प्यार देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ। दोस्तों.. मेरी उम्र 22 साल है और मैं एक बहुत स्मार्ट लड़का हूँ और मेरी हाईट 5.11 इंच और मेरा लंड 6 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है। दोस्तों.. मैं अब अपनी कहानी शुरू करता हूँ.. यह एक सच्ची कहानी है। मेरी पहले वाली कहानी की तरह यह भी एक साल पहले की है। दोस्तों एक दिन मुझे कॉल आया और यह कॉल गुडगाँव से कोमल नाम की लड़की का था। उसका असली नाम नहीं बता सकता इसलिए नाम चेंज किया है। उसने अभी अभी बारहवीं की पढ़ाई पूरी थी और नई नई घर से बाहर कॉलेज लाईफ मैं प्रवेश किया था। एक दिन उसका मुझे कॉल आया और वो थोड़ी परेशान और डरी हुई थी.. क्योंकि लाईफ मैं पहली बार किसी लड़के से बात कर रही थी और वो भी सेक्स के लिए.. किसी को पता चल जाएगा तो? यह सब उसने मुझे कॉल मैं बताया था.. लेकिन जब मैंने उसे समझाया कि मैं किसी को कुछ नहीं बताऊँगा.. तब जाकर उसको मुझ पर थोड़ा विश्वास हुआ।

 

फिर उसने बताया कि मैंने इस साईट पर आपकी स्टोरी पढ़ी है और वो मुझे बहुत अच्छी लगी। आपने एक वर्जिन लड़की को कितने प्यार से संतुष्ट किया है.. इसलिए मैं आपको कॉल कर रही हूँ। तभी मैंने उससे पूछा कि क्या तुम भी वर्जिन हो? तो उसने कहा कि हाँ.. मुझे अभी तक किसी ने भी नहीं छुआ है और ना ही मैंने किसी को कुछ करने दिया है। तो मैंने पूछा कि फिर मुझसे सेक्स के लिए कैसे मन बना लिया? तो उसने कहा कि आपकी कहानी मुझे बहुत पसंद आई और मैंने अपनी फ्रेंड से सुना था कि अनुभवी लड़के के साथ सेक्स करने मैं बहुत मज़ा आता है। आपने इतनी वर्जिन गर्ल के साथ सेक्स किया हुआ है और मैं भी वर्जिन हूँ इसलिए मैं आपके साथ सेक्स करना चाहती हूँ। मैंने उससे पूछा कि फिर कब मिलना चाहती हो? तो उसने कहा कि अगले सप्ताह उसकी फ्रेंड का जन्मदिन है और मैं रात को उसके घर पर ही रुकने वाली हूँ.. तो उस रात हम मिल सकते है.. अगर आप फ्री हो तो। फिर मैंने कहा कि मैं आ जाऊंगा.. लेकिन क्या उसके घर पर उसके माता, पिता नहीं होंगे? तो उसने कहा कि उसके माता, पिता बिज़नेस के काम से दो दिन के लिए चंडीगढ़ गये है। घर पर वो और उसके है और दादा, दादी नीचे के कमरे मैं सोते है और रात को ऊपर नहीं आते।

 

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तो मैंने पूछा कि.. तुम्हारी फ्रेंड का क्या? तो उसने कह दिया कि वो अपने बॉयफ्रेंड के साथ साईड वाले रूम मैं रहेगी और मैं उससे यह कहूंगी कि आप मेरे बॉयफ्रेंड है फिर उसने पूछा कि क्या आप ज्यादा उम्र के तो नहीं लगते? तो मैंने कहा कि मैं जवान और सुंदर लड़का हूँ। तुम्हारी फ्रेंड को शक भी नहीं होगा। फिर हमने एक सप्ताह तक चेटिंग की और उसने अपना मोबाईल नंबर भी मुझे दे दिया था और देर रात को हमारी बातें भी होती थी और कभी कभी फोन सेक्स भी। फिर एक सप्ताह के बाद उसका मुझे शाम को कॉल आया कि वो अपनी फ्रेंड के घर जा रही है और वो रात को मुझे कॉल कर देगी। मैं उसके फोन का इन्तजार करने लगा। रात 11 बजे तक कोई कॉल नहीं आया। मुझे लगा कि वो पागल बना रही थी। फिर 11:-15 पर उसका कॉल आया.. वो बोली कि आप आ जाओ मैंने अपनी फ्रेंड को बोल दिया है उसका फ्रेंड भी आ गया है। मैं आपको नीचे लेने आ जाउंगी.. आप मुझे कॉल कर देना। मैं बताये हुए एड्रेस पर गया और उसे कॉल किया तो वो नीचे आई और दरवाजा खोला तो मैंने देखा कि मेरे सामने बेहद ही सेक्सी और ब्यूटीफुल लड़की पिंक कलर की ड्रेस मैं थी। मैं उसे देखता ही रह गया। मैंने उससे पूछा तुम कोमल हो तो उसने कहा हाँ मैं ही हूँ.. वो थोड़ी परेशान थी और बोली की जल्दी ऊपर चलो कोई देख लेगा। मैं उसके साथ ऊपर चला गया। तब तक उसकी फ्रेंड के दादा, दादी सो चुके थे और वो अपने बोयफ्रेंड साथ अपने रूम मैं थी। कोमल मुझे दूसरे रूम मैं ले गयी.. वो खुश भी थी और परेशान भी। मैंने उससे पूछा कि तुम इतनी परेशान क्यों हो?

 

कोमल :- मुझे बहुत डर लग रहा है।

 

मैं :- लेकिन किस से?

 

कोमल :- मेरी फ्रेंड ने मुझे अभी अभी बताया है कि पहली बार सेक्स करने पर बहुत दर्द होता है।

 

मैं :- तुम डरो मत ऐसा कुछ भी नहीं होता और मैं हूँ ना.. मैं तुम्हे बिल्कुल भी दर्द नहीं होने दूंगा और थोड़ा बहुत होगा ज्यादा नहीं.. जिसे तुम आराम से सह सकती हो।

 

 

फिर मैंने उससे बातें की और करीब एक घंटे के बाद वो थोड़ी शांत हुई। मैंने उसे कंधे पर छुआ तो वो स्माईल करने लगी.. फिर मैंने उसे गर्दन पर किस किया तो उसने अपनी दोनों आंखे बंद कर ली। मैं उसे किस करते हुए आँखों पर गया और फिर होंठ पर। उसके होंठ गुलाब की तरह मुलायम थे और मैंने उसे स्मूच करना शुरू कर दिया। वो कुछ नहीं कर रही थी.. लेकिन मैं उससे लगातार स्मूच करता रहा। फिर उसका भी जवाब आने लगा.. उसने अपने होंठ खोल दिए। यार क्या टेस्ट था उसके होंठो मैं? फिर हमने 10 मिनट तक स्मूच किया और स्मूच करते करते मैंने उसके टॉप मैं हाथ डालकर उसके बूब्स को दबाने, सहलाने लगा वो बहुत ज्यादा मुलायम थे और धीरे धीरे उनकी निप्पल टाईट हो रही थी। जब मैंने उसके बूब्स को प्रेस किया तो वो धीर धीरे आवाज़ निकालने लगी, मैं समझ गया था कि उसे मज़ा आ रहा है। फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और उसके ऊपर आकर उसकी गर्दन पर किस करने लगा और किस करते हुए मैं नीचे उसके बूब्स पर टॉप के ऊपर से ही किस करने लगा और निप्पल अपने दांत से पकड़ने लगा। उसने मेरे चहरे को पकड़ लिया और बोली कि आराम से करो.. मैं आपकी ही हूँ। तो मैं और जोश मैं आ गया और उसके बूब्स पर किस करता रहा और फिर उसके टॉप को ऊपर उठाकर बूब्स को सक करने लगा। फिर जीभ को नाभि मैं डाल दिया। वो तो मेरे ऐसा करने से जैसे पागल हो गयी। तो उसने मुझसे कहा कि प्लीज़ और तड़पाओ मत अब मेरे साथ सेक्स करो।

 

मैं :- इतनी जल्दी नहीं.. आज तुम्हे सेक्स के पूरे मज़े दूंगा जिसे तुम जिंदगी भर याद करोगी।

 

कोमल :- तो ठीक है फिर आप जो करना चाहो करो मैं मना नहीं करूंगी.. लेकिन अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा।

 

मैं :- तुम कंट्रोल मैं मत रहो.. आऊट ऑफ कंट्रोल हो जाओ।

 

कोमल :- ह्म्‍म्म्मम अह्ह्ह।

 

फिर उसने अपनी आंखे बंद कर ली और पूरे पूरे मज़े लेने लगी.. तो मैंने उसका टॉप निकाल दिया और फिर ब्रा भी.. वो क्या लग रही थी बिना टॉप के एकदम सेक्सी.. मानो कि उसके शरीर के हर हिस्से को तराश कर बनाया हो। मैंने उससे कहा कि तुम बहुत ज्यादा सुंदर हो तो वो शरमा गई।

 

कोमल :- आज पहली बार किसी ने मेरी इतनी ज्यादा तारीफ की है और वो भी इतने प्यार से.. आप सही मैं बहुत अच्छे हो।

 

फिर मैं उसके बूब्स और निप्पल चूसने लगा वो ज़ोर ज़ोर से जोश मैं आवाजे निकालने लगी और मेरे सर को बूब्स पर ज़ोर से दबा रही थी और कह रही थी कि और ज़ोर से चूसो राज। तो मैंने भी उसके बूब्स के निप्पल चूस चूसकर उसके गुलाबी निप्पल लाल कर दिए और मैं बहुत ज्यादा प्यार से सक कर रहा था। फिर नीचे नाभि पर किस करते हुए चूत तक गया और लोवर के ऊपर से ही उसकी चूत पर किस किया.. वो कामुक हो रही थी और किस करते ही लोवर गीला हो गया.. फिर मैंने लोवर को नीचे करना शुरू किया उसने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

 

कोमल :- प्लीज़ मुझे बहुत शरम आ रही है। प्लीज़ नीचे नहीं.. मैंने यह सब कभी नहीं किया।

 

मैं :- मैंने ऊपर जो किया वो भी तुमने पहली बार किया था.. फिर क्यों तुम इतनी शरम महसूस कर रही हो?

 

तभी उसने हाथ हटा लिए और मैंने लोवर निकाल दिया और उसकी पेंटी पर किस करने लगा.. जो कि पूरी गीली थी और वो बहुत ज्यादा गरम भी हो रही थी। वो आहे भरने लगी और सिसकियाँ लेने लगी।

 

मैं :- जान अभी से ही यह हाल है तो जब मैं तुम्हारी चूत चाटूंगा तब क्या होगा?

 

कोमल :- राज अभी ही कंट्रोल नहीं हो रहा है.. तब तो मैं मार ही जाऊंगी।

 

मैं :- मैं तुम्हे अभी नहीं मरने दूंगा.. क्योंकि अभी तो तुम्हे जन्नत के मज़े लेने है।

 

फिर मैंने उसकी पेंटी को अपने मुँह से निकाल दिया.. वाह क्या चिकनी चूत थी? उसकी गुलाबी, बहुत मुलायम और बहुत हॉट चूत.. मैं तो देखते ही उस पर टूट पड़ा और उसके दोनों पैरों को खोलकर चूसने लग गया।

 

कोमल :- राज प्लीज़ रुक जाओ.. मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।

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इतने मैं वो मेरे मुहं पर ही झड़ गई और उसका सारा जूस मैं पी गया और वो पहले से थोड़ी ठंडी हो गयी थी.. लेकिन उसे गरम करना ज़रूरी था। तो मैं फिर से उसकी चूत को सक करने लगा और दोनों बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और फिर धीरे धीरे वो गरम होने लगी और कामुक आवाज़े निकालने लगी।

 

कोमल :- आहह मैंने इतना अच्छा तो आज तक कभी भी महसूस नहीं किया था.. अह्ह्ह धन्यवाद राज।

 

मैं :- अभी तुम धन्यवाद मत बोलो.. क्योंकि यह तो अभी शुरुवात है।

 

कोमल :- क्या तुम सच कह रहे हो राज.. फिर तो मुझे आज वो अहसास दे दो जो मैंने कभी महसूस नहीं किया।

 

मैं :- जान मैं आज वो सब दूंगा तुम्हे जो तुम मुझसे चाहती हो।

 

फिर चूत सक करते करते मैंने अपनी पेंट निकाल दी.. अब मैं अंडरवियर मैं था। मैंने उससे कहा कि तुम मेरा अंडरवियर भी निकाल दो।

 

कोमल :- नहीं मुझे बहुत शरम आ रही है।

 

मैं :- प्लीज़ मेरे लिए प्लीज़ एक बार।

 

कोमल :- ठीक है फिर उसने मेरा लोवर निकाला और मेरे लंड को देखते ही डर गयी।

 

कोमल :- इतना बड़ा, मोटा लंड अंदर कैसे जाएगा?

 

मैं :- जान यह दिखता मोटा है.. लेकिन चूत मैं बड़े आराम से चला जाएगा। तुमसे पहले भी तो यह बहुत सी लड़कियों की चूत मैं गया है ना।

 

मैंने प्यार से उसे समझाया तो वो समझ गयी और फिर वो कहने लगी कि प्लीज़ अब कुछ करो ना मुझसे रहा नहीं जा रहा है। तो मैंने कहा कि बस दो मिनट रुको और फिर से उसके निप्पल सक करने लगा.. वो पागल हो गयी निप्पल सक करते हुए उंगली से चूत पर सहला रहा था.. लेकिन अब उससे बिल्कुल भी कंट्रोल नहीं हुआ।

 

कोमल :- राज प्लीज़ करो नहीं तो मैं मर जाऊंगी।

 

मैं :- ठीक है जान मैं करता हूँ.. फिर मैंने लंड उसकी चूत पर लगाया और अंदर डालने की कोशिश की.. लेकिन लंड नहीं गया और फिर से ट्राई किया.. लेकिन फिर भी नहीं गया तो मैंने थोड़ा उसकी चूत का जूस लंड पर लगाया और फिर से ट्राई किया। मैंने उसे बहुत टाईट पकड़कर लंड को धक्का दिया तो लंड दो इंच चूत के अंदर चला गया और वो बहुत ज़ोर से चिल्लाने लगी उईईई माँ मर गई अहह अह्ह्ह्हह। मैंने उसके मुहं पर हाथ रख लिया। उसकी आंखो से आंसू आ गये फिर मैं रुक गया और प्यार से उसे किस करने लगा.. तो उसे भी थोड़ा अच्छा लगा और वो जब थोड़ी ठीक हुई.. तब मैंने पूछा कि अगर नहीं करना है तो हम नहीं करते। तो वो बोली कि करना है। तो मैंने थोड़ा दबाव डाला और एक झटका दिया और लंड 4 इंच अंदर चला गया। वो फिर से चिल्लाने लगी आअहह निकालो प्लीज़ बहुत दर्द हो रहा है। मैंने एक और धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर चला गया और उसने अपनी आंखे बंद कर ली, दांत टाईट कर लिए.. लेकिन फिर से चिल्लाई नहीं।

 

कोमल :- आअहह मुऊउंमाआअ प्लीज़ राज निकालो प्लीज़ मैं मर जाउंगी आअहह।

 

मैं :- जान बस अब ज्यादा दर्द नहीं होगा.. सच मैं।

 

फिर मैं थोड़ी देर कोमल पर लेटा रहा और उसके बाद वो थोड़ी नॉर्मल हुई तो लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा और अब उसे भी मज़ा आ रहा था और वो भी अब गांड को उठा उठाकर पूरे मज़े लेने लगी.. मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और वो आआअहह माँ मरी की आवाज़ निकालने लगी। मैं उसे 20 मिनट तक लगातार चोदता रहा और फिर वो मुझसे बोली कि मुझे कुछ हो रहा है राज तो मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है और उसने मुझे बहुत टाईट पकड़ लिया और मेरी पीठ पर नाख़ून भी गड़ा दिए और वो आअहह उईईइ राज करते करते डिसचार्ज हो गयी.. लेकिन मैं अभी भी अपनी स्पीड मैं चुदाई कर रहा था। 12 मिनट तक चोदने के बाद जब मैं झड़ने लगा तो मैंने उससे कहा कि मैं झड़ने वाला हूँ। उसने कहा कि अंदर कुछ मत करना.. हमने कंडोम का उपयोग नहीं किया है।

 

तो मैंने कहा कि इसकी एक गोली आती है उसको खाने से तुम्हें कुछ नहीं होगा.. तुम डरो मत। तो मैंने अपनी स्पीड और ज्यादा कर दी और ज़ोर ज़ोर के धक्को के साथ मैं उसकी चूत मैं ही झड़ गया। वो बहुत ज्यादा खुश लग रही थी। वो मुझे किस करते हुए बोली कि धन्यवाद मुझे इतना प्यार करने के लिए और फिर मैंने भी उसे धन्यवाद किया। फिर मैं उसे उठाकर बाथरूम मैं ले गया और नहाने के लिए जैसे ही नीचे उतरा तो वो ठीक से खड़ी नहीं हो पा रही थी। फिर मैंने उसे समझाया कि पहली चुदाई के समय ऐसा ही होता है और थोड़ी देर मैं ठीक हो जाएगा। फिर हम दोनों एक साथ नहाए और वापस रूम मैं गये। रूम मैं जाकर देखा तो बेडशीट बहुत गन्दी हो गई थी। वो उसे बदलने लगी। मैंने कहा कि क्यों मज़ा नहीं आया क्या? उसने कहा कि मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आया।

 

कोमल :- आज मैं लाईफ मैं सब से ज्यादा खुश हुई हूँ। आप इतना ध्यान रखने वाले और प्यार से करने वाले हो.. मैंने आपसे अपनी वर्जिनिटी खत्म करवा कर एकदम ठीक किया है आज मैं बहुत बहुत ज्यादा खुश हूँ।

 

मैं :- तो बेड शीट चेंज क्यों कर रही हो? और सेक्स नहीं करना क्या ?

 

वो बहुत खुश हो गयी और मुझसे गले लग गयी और उस रात सुबह के 6 बजे तक हमने सेक्स किया। उसकी फ्रेंड के दादा, दादी के उठने का समय हो गया था.. तो मैं अपने घर वापस आ गया और फिर उसने मुझे फोन पर बहुत किस किए और बोली कि मेरी चूत थोड़ा दर्द कर रही है और मुझे बार बार आपकी याद दिला रही है। तो मैंने कहा कि जब भी तुम्हे सेक्स करना हो मुझे बता देना मैं आ जाऊंगा। फिर उसके बाद हमने कई दिनों तक बहुत बार सेक्स किया और फिर वो कुछ दिनों के बाद अपनी पढ़ाई के लिए बेंगलोर चली गयी

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