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देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat

 


देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat, देवर भाभी की चुदाई , देवर ने चोदा , प्यार से चोद दिया , मैं देवर से चुदवाई

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मेरा निकाह हो चुका था।  अभी दो दिन पहले ही मैंने अपनी सुहागरात मनाई थी।  आज तीसरे दिन मेरा देवर मेरे सामने आया।  उस समय कमरे में कोई नहीं था।  मैं थी और मेरा देवर तारिक़।  वह लगभग २२ साल का पूरा मर्द हो चुका था। गोरा चिट्टा हैंडसम और लंबा चौड़ा था।  उसे देख कर मेरे नियत ख़राब हो गई।

   

  • वह मुझे देख कर मुस्कराया और बोला - भाभी जान आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।  बिलकुल मेरे दोस्त की भाभी की तरह।  वह भी इसी तरह बेहद हसीन है।  मैं कुछ नहीं बोली और तिरछीं निगाह से देख कर मुस्कराने लगी। इतने में वह अपनी लुंगी खोल कर मेरे सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया.  उस भोसड़ी वाले का लण्ड खड़ा था . लण्ड देख कर मेरी चूत में आग लग गई बहन चोद। वह बोला - लो मेरा लण्ड पियो,  भाभी जान ।
        
  • लण्ड देख कर तो मैं ललचा ही गई थी.  मेरे मुंह से लार टपकने लगी थी और मेरी जबान लण्ड चाटने के लिए लपलपाने लगी।  पर मैं थोड़ा नखरा करने लगी।  
        
  • मैंने कहा - तुम भोसड़ी के बड़े बेशरम हो ? एक पराई बीवी के सामने इस तरह नंगे होकर खड़े होने में तुम्हे कोई शर्म नहीं आती ? अपना खड़ा लण्ड दिखाने में तुम्हे लाज नहीं आती ?
        
  • वह बोला - अरे भाभी जान अब नखरे न करो।  और भी लोग तेरे सामने नंगे खड़े होतें हैं।  तुम भी अपने कुनबे के ग़ैर मर्दों के आगे नंगी होती हो ? मैं तो कुनबे का ही लड़का हूँ।  मेरे आगे नंगी होने में तुम्हे तो कोई शर्म नहीं आना चाहिए।  अभी तो मैं ही नंगा हूँ।  मैं अभी तुझे भी नंगी कर दूंगा।
        
  • मैंने कहा - अरे यार तुम तो मेरे ऊपर खामखां ही चढ़े ही जा रहे हो ? मैं कोई ऐसी वैसी भाभी नहीं हूँ।
        
  • वह बोला - तुम जैसी  भाभी हो मुझे मालूम है । तुम बहुत खूबसूरत हो, बड़ी बड़ी आँखों वाली हो, बड़ी बड़ी चूँचियों वाली हो, मस्त गांड और बड़े बड़े चूतड़ वाली हो, बड़ी बड़ी जाँघों वाली हो और उसके बीच एक मस्तानी चूत वाली हो ? मैं जानता हूँ की तुम लण्ड बहुत अच्छी तरह पीती हो।  मेरी बड़ी भाभी भी मेरा लण्ड पीती हैं पर तुमसे अच्छा नहीं पीती। ये मुझे किसी ने बताया है।  प्लीज पकड़ कर पी लो न मेरा लण्ड।  देखो न कैसे अपना सर हिला हिला कर तुम्हे मना रहा है मेरा लण्ड।


उसकी प्यारी प्यारी बातों ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ ही लिया उसका लण्ड। लंडमेरे हाथ में आते ही छलांगें मारने लगा।  साला और बढ़ भी गया और मोटा भी हो गया एकदम से।  वह बोला देखा भाभी जान तेरे हाथ में कितना जादू है।  मेरा लण्ड इतना बड़ा और मोटा कभी नहीं हुआ जितना तेरे हाथ में जाकर हो गया।  मैं उसके लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी और वह मुझे नंगी करने लगा। मेरी चूँचियाँ दबाने लगा और मेरी चूत सहलाने लगा।  फिर मैंने उसे चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। 

अपनी चूत उसके मुंह पर रख दिया और कहा लो देवर जी पहले मेरी चूत चाटो। अपनी जबान पूरी घुसेड़ दो मेरी चूत में और मैं झुक कर उसका लंडचाट्ने लगी।  हम दोनों 69 बन गए।  सच में मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।  वह बोला भाभी जजान तेरी चूत बहुत स्वादिस्ट है।  ऐसी चूत अपने कुनबे में किसी की नहीं है।  मैंने पूंछा क्या तुम कुनबे की सबकी चूत चाट चुके हो।  वह बोला हां भाभी जान मैं सबकी चूत चाट चूका हूँ और आज भी चाटता हूँ।  सब मेरा लण्ड चाटती हैं। पीतीं हैं मेरा लण्ड।


इतने में किसी ने कहा भाभी जान लो मेरा भी लण्ड पियो ? मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वह अनजान लड़का था एकदम नंगा खड़ा था उसका बिना झांट का लण्ड भी खड़ा था।  लण्ड का सुपाड़ा एकदम तोप का गोला लग रहा था।  वह लण्ड तारिक़ के लण्ड से बेहतर लगा मुझे।  मैं कुछ बोलती उसके पहले ही तारिक़ बोला भाभी जान ये मेरा दोस्त फहीम है। हम दोनों मिलकर चुदाई करतें हैं।  चाहे किसी की लड़की हो, चाहे किसी की माँ हो, चाहे किसी की बेटी या बहू हो, चाहे किसी की सास या नन्द हो देवरानी या जेठानी हो हम दोनों मिलकर चोदेतें हैं। मैंने ही इसे बुलाया है भाभी जान। इसकी भाभी जान मेरा लण्ड पीती है इसलिए मैं चाहता हूँ की तुम भी इसका भी लण्ड पियो।


मैंने पूंछा अच्छा ये बताओ की तेरी बीवी कौन चोदता है ? वह बोला मेरी बीवी फहीम चोदता है, इसके दोस्त भी चोदते हैं मेरी बीवी।  मैं इसकी बीवी चोदता हूँ और मेरे दोस्त भी इसकी बीवी चोदतें हैं।  इसीलिए हमारी इसकी पक्की दोस्ती है।  मैंने दूसरे हाथ से फहीम का लण्ड पकड़ लिया।  मैंने दोनों लंड अपने मुंह के पास ले आयी और बारी बारी से दोनों के सुपाड़े चाटने लगी।  मुझे इतनी जल्दी दो दो लण्ड का मज़ा मिलेगा यह मैंने कभी सोंचा नहीं था। हम तीनो पूरी तरह नंगे थे।  मैंने तारिक़ को जमीन पर लिटा दिया और फहीम को भी लिटा दिया। दोनों आमने सामने लेटे। यानी दोनों के लण्ड आमने सामने हो गये।  मैंने उनको और नजदीक आने को कहा।  फिर दोनों ने टांगों पर टांगें  रख लीं और उनके लण्ड एकदम चिपक कर आमने सामने हो गये।  लण्ड से लण्ड टकरा गया और पेल्हड़ से पेल्हड़।


मैंने दोनों लण्ड एक साथ अपनी दोनों हाथ की मुठ्ठी में लिया और मस्ती से हिलाने लगी।  उनके सुपाड़े चाटने लगी और फिर दोनों लण्ड एक दूसरे से लड़ाने लगी. अब दोनों लाँड़ बिलकुल साँड़ की तरह लड़ने लगे।  मुझे यह देख कर मज़ा आने लगा। मैं तारिक़ के लण्ड से फहीम के लण्ड को मारती और कभी फहीम के लण्ड से तारिक़ के लण्ड को मारती। कभी सुपाड़े को सुपाड़े पर रगड़ती।  वो दोनों भी खूब एन्जॉय करने लगे।   फिर मैंने पर्श से दो कंडोम निकाले और दोनों लण्ड पर चढ़ा दिया।  इस तरह दोनों लण्ड मिलकर एक महा लण्ड बन गया। मैं इस महा लण्ड पर बैठ गयी तो दोनों लण्ड एक साथ मेरी चूत में घुस गए।  मैं उनके ऊपर धीरे धीरे कूदने लगी।  लण्ड बार बार बुर के अंदर लेती और फिर बाहर निकाल देती ।  इससे उन्हें  भी मज़ा आने लगा और मुझे भी। फहीम बोला भाभी जान इस तरह तो आजतक मुझसे  किसी से नहीं चुदवाया।  ये तो बड़ा मजे दार तरीका है।  तारिक़ भी बोला हां भाभी जान तुम तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हो।  चुदाई के नए नए तरीकेआतें हैं तुम्हें। खूब मज़ा लेती हो तुम चुदवाने के ?


मैंने कहा ये सब मैंने ब्लू फिल्म से सीखा है।  मुझे ब्लू फिल्म देखने का और उसी तरह चुदवाने का बड़ा शौक है। वैसे मेरे मुसलमानी समाज में कोई कंडोम इस्तेमाल नहीं करता लेकिन मैं कंडोम अपने पर्श में रखती जरूर हूँ क्योंकि मुझे कई बार नॉन मुस्लिम लण्ड से भी चुदवाने का मौक़ा मिलता है। फिर मैं फहीम का लण्ड चूसते हुए तारिक़ से चुदवाने लगी और फिर तारिक़ का लण्ड चूसते हुए फहीम से चुदवाने लगी। दोनों ने मुझे बारी बारी से  खूब चोदा। मैं इन दोनों से पीछे से भी चुदवाया और लण्ड पर बैठ कर भी चुदवाया।  मैंने मन में कहा मुझे तो लगता ही की आज ही मेरी असली सुहागरात हुई है।  जब दोनों लण्ड एक एक करके झड़ने लगे तो में झड़ते हुए लण्ड पिये।  उनका सारा वीर्य पी गयी मैं और फिर सुपाड़ा चाट चाट कर मज़ा लिया।  मुझे लण्ड का वीर्य पीना अच्छा लगता है इससे मेरी ख़बसूरती बढती रहती है। मुझे किसी का भी लण्ड पीना बड़ा अच्छा लगता है और मैं हमेशा किसी न किसी का लण्ड पीने के फ़िराक में रहती हूँ।


मैं चुदवा के उठी थी पर नंगी थी।  वो दोनों भी अभी नंगे ही थे। उनके लण्ड ठंढे हो चुके थे।  फिर हम सबने खाना खाया और कुछ देर तक हम लोग बात चीत करते रहे और फिर मैंने लण्ड सहलाना शुरू किया तो लण्ड धीरे धीरे खड़े होने लगे। रात का समय था और रात में औरतें जाने क्यों सब की सब रंडी हो जातीं हैं।  इतने में मेरी सास कमरे में आ गयी। उसने मुझे दोनों लण्ड हिलाते हुए देख लिया। उसकी नज़र सबसे पहले लण्ड पर पड़ी तो वह बोली हाय दईया इतने बड़े बड़े लण्ड बहू रानी ?  तेरी माँ का भोसड़ा बहू रानी।  तेरी  बुर चोदी नन्द की माँ की चूत  ? सास ने एक ही बार में सबको गरिया डाला।  फिर वह अपने बेटे तारिक़ का लण्ड पकड़ कर बोली हाय अल्ला कितना बड़ा और कितना प्यारा लौड़ा हो गया है मेरे बेटे का ?  ये तो बिलकुल मरद बन गया है मुझे इसका पता ही नहीं चला।  देखो न बहू रानी इसका लण्ड भोसड़ा चोदने वाला हो गया है।  और ये इसके दोस्त का लण्ड बाप रे बाप कितना मोटा और कितना सख्त है बहन चोद।बेटा फहीम तुम अपने दोस्त की माँ का भोसड़ा चोदो न।  तेरा लण्ड देख कर मैं चुदासी हो गयी हूँ।


सास ने तो उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  तब तक उसके पीछे एक लड़की नंगी नंगी आई और उसने तारिक़ का लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  बाद में मालूम हुआ की वह मेरी जेठानी की बहन है और अपने जीजू का लण्ड पी कर आई है। तब तक मेरी नन्द आ गई।  वह मुझे नंगी नंगी ही मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर ले गई और बोली भाभी चलो मैं तुम्हें एक चीज दिखाती हूँ। जब मैं उसके साथ बाहर एक बदफे कमरे में गई तो देखा की याहं तो बड़ी घनघोर चुदाई हो रही है।  कई लोग चोद रहे हैं।  कई लोगों की बुर चुद रही है।  तब नन्द ने बताया की भाभी जान देखो न मेरा अब्बू अपनी  बड़ी बहू की बुर चोद रहा है। मैं ये देख कर दंग रह गयी।  मेरी जेठानी बड़ी शिद्दत से अपने ससुर से चुदवा रही थी। नन्द ने फिर कहा और ये देखो मेरा खालू मेरी फूफी की बेटी चोद रहा है। फूफा खाला की बेटी चोद रहा है। तेरी देवरानी अपने भाई जान से चुदवा रही है. मेरे चचा जान की बेटी अपने ससुर से चुदवा रही है।


इन सबकी बुर एक साथ चुद रही है तो बड़ा मज़ा आ रहा है। मैं समझ गयी की मेरी ससुराल में खूब धड़ल्ले से चुदाई होती है।  तब तक नन्द ने अपने मियां का लौड़ा मुझे पकड़ा दिया और बोली लो भाभी अब तुम मेरे मियां से चुदवाओ।  यही सके सामने पियो मेरे मियां का लण्ड और फिर पेलो इसका लौड़ा अपनी चूत में।  मैंने कहा तो फिर  तू क्या करेगी मेरी बुर चोदी नन्द रानी।  वह बोली मैं अपने चचा जान से चुदवाऊंगी। मैंने दो साल से अपने चचा जान का लण्ड अपनी चूत में नहीं पेला जबकि इसका लण्ड मुझे बहुत पसंद है।  आज मैं इससे झमाझम चुदवाऊंगी और तेरी बुर मेरे मियां से चुदती हुई देखूँगी। फिर क्या मेरे नंदोई ने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा।  उधर नन्द भी मेरे सामने अपने चचा जान का लण्ड मुंह में भर कर चूसने लगी।


मैं अपने आपको बड़ी नसीब वाली समझने लगी।  जहाँ एक दुल्हन अपने मियां के अलावा किसी और मरद का लण्ड देखने के लिए महीनो बर्षों तड़पती रहती है वहां मैं अपनी शादी के ३/४ दिन में ही अपने ससुराल के इतने सारे लण्ड एक साथ देख रही हूँ। मुझे तो नये नये लण्ड देखने का, लण्ड पकड़ने का और लण्ड पीने का बड़ा शौक है।  मुझे तो लगा की जैसे की मेरे लिये लण्ड की लाटरी खुल गयी है।  अब तो मैं किसी का भी लण्ड कभी भी हाथ बढ़ाकर पकड़ सकती हूँ।  ये सब भोसड़ी वाले मेरे आगे नंगे नंगे घूम रहें हैं तो फिर मुझे इनसे शर्म किस बात की ?  और फिर मैं भी तो इन सबके आगे नंगी हूँ। अभी एक एक करके सबके लण्ड पेलूँगी अपनी चूत में तो मैं भी एक मंजी हुई रंडी बन जाऊंगी।  फिर मुझे अपनी बुर चोदी नन्द की बुर और सास का भोसड़ा चोदने में ज़न्नत का  मज़ा आएगा।


मैं अपने नंदोई का लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी और मेरी नन्द अपने चचा जान का लौड़ा चाटने लगी।  मैं भी
हाथ बढ़ाकर उसके पेल्हड़ सहलाने लगी।  उसे मालूम हो गया की मैं भी उससे चुदवाने के लिए तैयार हूँ।  वह मेरी चूत सहलाने लगा और नंदोई मेरी चूँचियाँ मसलने लगा। दोनों ही लण्ड बिना झांट के थे और लम्बे चौड़े थे।  मुझे दोनों ही लंड एक नज़र में भा गये।  इतने में नंदोई ने लण्ड पेल दिया मेरी बुर में।  मैं चिल्ला उठी उई माँ फाड़ डाला मेरी बुर। बड़ा मोटा है तेरा लण्ड ? चुद गयी मेरी यार।  धीरे धीरे चोदो न।  मैं कभी भागी नहीं जा रही हूँ।  अच्छी तरह चुदवाकर ही जाऊंगी।  तब तक मेरी नन्द बोली हाय चचा जान तेरा लौड़ा मेरी चूत का बाजा बजा रहा है।  तेरा लौड़ा तो साला बड़ा सख्त है।  तू भोसड़ी का मेरी अम्मी की बुर चोदता है और आज उसकी बेटी की बुर भी चोद रहा है।  तेरा जैसे हरामी आदमी दूसरा कोई नहीं होगा। 

मैंने सुना है की तू अपनी बेटी की बुर भी लेता है ? वह बोला हां लेता हूँ।  वह देती है तो मैं लेता हूँ।  मेरी बेटी भी तेरी ही तरह बहुत बेशरम और चुदक्कड़ लड़की है।  वह तो मेरे दोस्तों के भी लण्ड अपनी चूत में पेलती है तो फिर मैं क्यों न पेलूं ? मेरी नज़र अपने चचिया ससुर के लण्ड पर टिकी थी।  मैं चुदवा तो रही थी नंदोई से पर देख रही थी अपने चचिया ससुर का लण्ड।  उसका काला लण्ड मेरी जान ले रहा था।  मैं बहुत गोरी हूँ और गोरी औरत को काला लण्ड बड़ा अच्छा लगता है।  तब तक मेरी नन्द का खालू आ गया।  वह भी मादर चोद नंगा था। उसका भी लण्ड टन टना रहा था।  उसने लण्ड नन्द के कंधे पर रख दिया।  नन्द उसका भी लण्ड चाटने लगी. तब तक उसकी फूफी की बेटी आ गयी।  उसने मेरे  हाथ से नंदोई का लण्ड ले लिया और बोली भाभी जान अब मुझे अपने भाई जान से चुदवाने दो। मैंने उसे नंदोई का लण्ड दे दिया और मैं चचिया ससुर का लण्ड अपनी नन्द से ले लिया और उसे चूसने लगी।


मेरे मन की इच्छा पूरी हो रही थी। मुझे काले लण्ड का मज़ा मिलने लगा। मैं पहली बार किसी काले लण्ड से खेल रही थी।  लण्ड पूरे नंगे बदन पर फिरा रही थी खास तौर से अपनी चूँचियों पर।  बीच बीच में मैं लण्ड का  सुपाड़ा चाट रही थी।  लण्ड साला बिलकुल पोर्न स्टार के लण्ड की तरह लग रहा था और मैं अपने आपको ब्लू फिल्म की हीरोइन समझने लगी।  फिर मैंने लण्ड अपनी चूत में पेला और धकाधक चुदवाने लगी।  वह बोला बहू आज मुझे किसी नई ताज़ी बहू की नई ताज़ी बुर चोदने को मिली है। आज मैं खूब जी भर के तेरी बुर चोदूंगा।  वह चोदने की स्पीड बढ़ाता गया और मैं अपनी गांड उठा कर हर धक्के का जबाब धक्के से देती गयी।


कुछ देर में मुझे एहसास हुआ की ससुर का लण्ड झड़ने वाला है और इधर मैं भी करीब  आ चुकी थी। तब तक उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठा लिया।  लण्ड पूरा मेरी बुर में घुसा हुआ था।  वह नीचे से धक्के मारने लगा और मैंभी ऊपर से कूदने लगी।  इतने में लण्ड ने उगल दिया वीर्य।  थोड़ा मेरी चूत में लगा थोड़ा मेरी गाड़ में।  मैं फिर घूम गयी और झाड़ता हुआ लण्ड चाटने लगी।  मुझे लण्ड का वीर्य चाटने का बड़ा अच्छा लगता है।  हर लण्ड का  स्वाद अलग अलग होता है।  खलास मैं भी हो गयी थी।  मैं बाथ रूम गयी और वहां से फ्रेश होकर आ गई।  मैं मस्ती से सबकी चुदाई देख रही थी।  पूरे घर में चुदाई ही चुदाई हो रही थीं।  सब भोसड़ी वाली लण्ड अदल बदल कर चुदवा रहीं थीं।


तभी अचानक मेरी फुफिया सास का बेटा नंगा नंगा अपना लण्ड मुझे दिखाते हुए बोला लो भाभी जान मेरा भी लण्ड पियो।


मैंने कहा हां देवर जी जरूर पियूँगी।  तेरा भी लण्ड पियूँगी और तेरे बाप का भी लण्ड पियूँगी।

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

बेटी ने खुद सील तुड़वायी


जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी।  मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।

एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।


चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।

मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।

चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।


मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।


उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।


अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।


उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।

मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।


मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?

मैंने उससे पूछा।

वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!

वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।


मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।

वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?

मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।


दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।


मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’

अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।


उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।

मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?

वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।

मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।


मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?

मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!


मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’

बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।


उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।

रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।


इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।

वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।


मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।

जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।

वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।


हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.

वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।

मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।


मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।

मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।


मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.

और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।


मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।


एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?

वो बोली- हाँ पापा?

मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?

दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?

मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?


वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।


उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।


मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।


मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?

मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?


मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।

तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.


बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।

19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।

मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।

वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!

वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।


उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।


मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।


वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया।

मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।


मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?

वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।


मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।


तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.

और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।

पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।


फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।

मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।

मैं तो खुशी से उछल पड़ा।


जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।


मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!

कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।

वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।

मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।


मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।

फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।


मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।

वो बोली- जी पापा?

मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।

वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।


जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।

बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।


मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।


तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।


बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।


फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?

वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।

मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?

वो बोली- पता नहीं पापा।


मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।


मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।


और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!

उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।


वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!

मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।

वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।


मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।

एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।


और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।

उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।

मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!


मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.


मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।

जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.


मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।


उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।


थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?

मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?

वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।


वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।


मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।

उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।


मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!


मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।

फिर बाहर आई।

मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।

तब कहीं वो सहज हुई।

शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।

मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.

मौसी की लड़की की चूत की सील तोड़ चुदाई

मौसी की लड़की की चूत की सील तोड़ चुदाई की


ये घटना 5 महीने पहले की है. मैं अपने गांव गया हुआ था. वहां मेरी मौसी की बेटी आई हुई थी. मेरी मौसी की दो बेटियां हैं. बड़ी वाली का नाम पारूल है, जिसकी उम्र 23 साल है. जबकि मेरी उम्र 20 साल है.

जो छोटी वाली बहन है, उसकी उम्र मेरे बराबर की ही है … यानि वो 20 साल की है. उसका नाम रचना है. वैसे तो हमारी आपस में उतनी बनती नहीं थी … इसलिए मैं उन दोनों से कम ही बोलता था.

उस दिन जैसे ही मैं अपने घर में पहुंचा, मेरी नज़र मेरी बड़ी बहन पर पड़ी. मतलब वहां मेरी मौसी की बेटी आई हुई थी.

उसे देखकर मैं हैरान सा हो गया क्योंकि उस वक्त वो एक हाफ निक्कर में बैठी हुई थी और उसकी गोरी जांघें देखकर मेरे लंड में पानी आने लगा था.

वो भरपूर मस्त माल हो चुकी थी.

मैं उसे पूरे तीन साल बाद देख रहा था.

फिर जैसे ही उसने मुझे देखा, वो किलकारी मारती हुई उठी और उसने मुझे लपक कर गले से लगा लिया.

वो मुझे देख कर बहुत खुश हुई.

उसने जैसे ही मुझे अपने सीने से लगाया तो पहले पहल मुझे बड़ा अजीब सा लगा.

लेकिन मुझे भी उसमें रस मिल रहा था, उसके तने हुए दूध मेरे सीने में गड़ रहे थे तो मैं भी उस मोमेंट को एन्जॉय करने लगा.

फिर मैं अन्दर जाकर मां से मिला.

मां ने मुझसे कहा- जाकर फ्रेश होकर थोड़ा आराम कर ले, फिर मैं तेरे लिए खाना लगाती हूँ.

मैं भी थका हुआ होने के कारण सीधा जाकर बाथरूम में घुस गया और अपनी बहन की चूचियों की रगड़न के मस्त अहसास को याद करते हुए लंड हिलाने लगा.

मुठ मार कर मैंने खुद को शांत किया और नहा लिया.

नहा कर मैंने खाना खाया और जैसे ही मैंने अपने रूम का दरवाज़ा खोला, मेरे सामने बेड पर मेरी छोटी मौसेरी बहन रचना सोई हुई थी.

वो बहुत गहरी नींद में थी.

वैसे तो उसे देखकर मेरे मन में पहले कुछ गलत ख्याल नहीं आया था. लेकिन जब उसने करवट बदली तो मैं हैरान ही हो गया था क्योंकि रचना के बूब्स भी बहुत बड़े हो चुके थे.

उसका फिगर यही कोई 34-28-36 का था … जो उसने बाद में मुझे खुद बताया था.

मैं बिना कुछ सोचे सीधे जाकर उसके बगल में लेट गया और टॉप के ऊपर से है उसके मम्मों को वासना से देखने लगा.

उसके मम्मों को देख कर मेरा झड़ा हुआ लंड मेरे निक्कर के अन्दर से फिर से सलामी देने लगा था.

कुछ देर यूं ही मैं लंड सहलाता रहा. फिर मन नहीं माना तो मैंने थोड़ी हिम्मत करके उसके पेट पर अपना हाथ रख दिया.

जब उसने कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी … तो मेरी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई.

अब मैं उसके पेट को सहलाने लगा.

तभी अचानक से किसी के आने की आहट सुनकर मैं तुरंत हाथ हटाकर सोने का नाटक करने लगा.

फिर नाटक करते करते ही मुझे सच में नींद आ गई.

मेरी गहरी नींद में सो जाने के दो घंटे बाद शाम 6 बजे मैं उठा. अब तक मेरी बहन उठ कर बैठ चुकी थी और मुझे देखकर खुश भी थी.

उससे मेरी कुछ देर बात हुई.

फिर हम सबने मिलकर खाना खाया.

रात हो गई थी, तो हम सभी सोने की तैयारी करने लगे. हमारे घर में तीन कमरे थे … एक हॉल और दो रूम.

एक रूम में मां और पापा सोते थे और दूसरे में मैं.

लेकिन अभी घर में ज़्यादा लोग होने के कारण एड्जस्ट करना था, सो मैं हॉल में सोने वाला था और मेरी दोनों बहनों को मेरे रूम में सोने के लिए व्यवस्था हो गई.

मेरे मां और पापा सोने जा चुके थे और अभी रात के 11 बजे थे. हम तीनों भाई बहन आपस में बातें कर रहे थे.

कुछ ही देर बार पारूल को नींद आने लगी … तो वो उठकर रूम में सोने चली गई.

रचना और में अभी भी हॉल में टीवी देखते हुए बातें कर रहे थे लेकिन पता नहीं कब रचना बैठी बैठी ही सो गई.

उसे यूं अधलेटा सा सोती देख कर मेरे मन में खुरापाती बातें आने लगीं.

मैंने उसे आवाज लगाई तो उसने कोई उत्तर नहीं दिया.

जब मुझे लगा कि वो गहरी नींद में है, तो मैंने उसके पैर को लोवर के ऊपर से ही सहलाना शुरू कर दिया.

उसकी कुछ भी प्रतिक्रिया ना देखकर मैंने धीरे धीरे उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.

एकदम सॉफ्ट सा फील होने की वजह से मेरा लंड खड़ा हो चुका था.

मेरी हिम्मत और हवस दोनों ही अब चरम सीमा पर आ गए थे.

मैंने धीरे धीरे करके अपना हाथ उसकी चुत में डाला, तो महसूस किया कि उसकी चुत एकदम चिकनी थी.

मुझे उस वक्त चुदास चढ़ गई थी और मैं उसे इसी पोजीशन में चोदने की सोचने लगा.

फिर मैंने सोचा कि पहले इसे गर्म करना ठीक रहेगा.

मैं अपना हाथ उसकी चुत से निकाल कर उसके मम्मों पर ले गया और धीरे धीरे दूध मसलने लगा.

वो अभी भी नींद में थी और कोई भी प्रतिक्रिया नहीं कर रही थी.

लगभग दस मिनट तक उसके टॉप के ऊपर से ही चुचियों को सहलाने मसलने के बाद मैंने अपना हाथ उसके टॉप के अन्दर डाल दिया.

उसने अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई थी. उसके बड़े चुचों को मैं मस्ती से दबा रहा था.

अब मुझे अहसास होने लगा था कि वो जाग गई है और उसे भी मज़ा आ रहा है.

उसकी चूचियों ने सख्त होना शुरू कर दिया था जिससे मैं समझ गया था कि लौंडिया गर्म होने लगी है.

उसके गर्म होने का अहसास होते ही मैंने बेख़ौफ़ उसके लोवर को थोड़ा सा नीचे खींच दिया.

मेरे सामने उसकी पैंटी दिखने लगी थी जो कुछ कुछ भीग सी गई थी.

मैंने एक साथ में ही लोअर और पैंटी को नीचे खींचते हुए उतार दिया.

हॉल में अंधेरा होने के कारण मुझे उसकी चुत का दीदार ढंग से तो नहीं हो पाया … लेकिन फिर भी उस अंधेरे में उसकी चुत पर उभरा हुआ पानी चमक रहा था.

मेरे हाथ ने चुत को छुआ तो उसे एक करेंट सा लगा. इतनी मुलायम चुत को छूकर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी टांगों को फैला दिया.

उसकी चुत की भीनी भीनी महक मुझे मदांध करने लगी और मैंने पोजीशन बना कर उसकी चुत को चाटना शुरू कर दिया.

जैसे ही मेरी जीभ ने उसकी चुत को टच किया, वो सिहर उठी और उसने अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चुत पर दबा लिया.

अब खेल का खुलासा हो गया था.

मैं भी मस्ती से अपनी बहन की चुत चाटने लगा था और वो भी मस्ती से गांड उठा कर मुझसे चुत चटवाने का मजा लिए जा रही थी.

कुछ मिनट बाद मेरी बहन शरीर का अकड़ने लगा और वो आह आह करती हुई झड़ गई.

अब मेरी बारी थी … मैंने अपने निक्कर में से अपना 6.1 इंच का लंड निकाल कर उसकी चुत की फांकों में रखा और रगड़ने लगा.

उसने भी अपनी टांगें फैला कर मेरे लंड को दिशा दे दी. मैं उसके ऊपर चढ़ सा गया था और उसकी एक निप्पल को अपने मुँह में लेकर पीने लगा.

उसे चूची चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो अपनी छाती उठा कर मुझे पूरा दूध चुसाने की की कोशिश कर रही थी.

साथ अपनी गांड उठा कर मेरे लंड को अपनी चुत के अन्दर लेने के लिए तड़प रही थी.

मैंने उसे ज़्यादा ना तड़पाते हुए उसके होंठों पर अपने होंठों रखकर धीरे धीरे अपना लंड उसके चुत में धकेलने लगा.

बहन की चुत की फांकें एकदम कस कर चिपकी हुई थीं.

अभी मुझे मालूम नहीं था कि इसकी चुत की ओपनिंग हो चुकी है या मैं करूंगा.

मगर जो भी हो, वो एक टाईट माल थी.

मैंने जब धक्का मारा, तो लंड फिसल गया और उसकी गांड की तरफ चला गया.

वो लंड की सरसराहट अपनी गांड की तरफ पाकर चिहुंक गई मगर मैंने उठ कर लंड फिर से चुत पर टिका दिया था.

तो वो फिर से धक्के का इंतजार करने लगी.

इस बार मैंने ढेर सारा थूक अपने लंड पर लगा कर उसकी चुत की फांकों में फंसा दिया, तो उसने अपने हाथ से लंड को पकड़ कर छेद में सैट कर दिया.

अब मैंने धीरे से धक्का दिया तो लंड का सुपारा अन्दर चला गया.

लंड अन्दर घुसा तो वो एकदम से सिहर उठी.

मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद किया हुआ था … तो वो चीख नहीं सकी.

मगर उसे दर्द ज्यादा हो रहा था तो वो मुझे धक्का देते हुए हटाने की कोशिश करने लगी.

उसकी चुत एकदम ऐसी थी मानो सिली हुई हो … लंड पेलते ही मुझे अहसास हो गया था कि मैं ही इसकी चुत को फाड़ने वाला ओपनर बनने जा रहा हूँ.

चुत भले ही टाइट थी मगर जैसे ही मुझे ये अहसास हुआ कि मैं ही चुत की सील तोडूंगा, मुझमें एक गजब की मस्ती छा गई.

वो अपनी वर्जिनिटी को लेकर बहुत तड़फ रही थी और चीखने चिल्लाने की कोशिश कर रही थी.

मगर मैंने एक शिकारी की तरह उसे अपनी पकड़ में दबोच रखा था.

वो बेतहाशा छटपटा रही थी लेकिन मैं नहीं रुका और मैंने दूसरे धक्के से साथ ही अपना लंड उसकी चुत की फांकों को चीरते हुए पूरा अन्दर ठांस दिया.

मेरे होंठ उसके होंठों पर जमे होने के कारण वो चिल्ला ना सकी.

मैंने लंड अन्दर पेला और रुक गया.

उसकी छटपटाहट मुझे एक मुर्गी के जैसी लग रही थी.

उसी समय मुझे कुछ गर्म गर्म सा अपने लंड पर फील हुआ, मैं समझ गया कि इसकी सील टूट चुकी है.

मैं कुछ देर रुका रहा. उसको थोड़ा आराम मिलने पर मैंने धीरे धीरे लंड को हिलाना शुरू किया.

अब उसे भी दर्द नहीं हो रहा था क्योंकि उसकी कमर ने भी जुम्बिश देना शुरू कर दिया था.

एक दो धक्कों के बाद अब वो भी मेरा साथ देने लगी थी.

मैंने अपने होंठों का ढक्कन उसके होंठों से हटा कर उसे चूमा तो वो लम्बी सांस लेती हुई मेरे सीने पर घूंसा मारने लगी.

मैं हंस कर धीमी आवाज में पूछा- क्या हुआ?

तो वो कुछ नहीं बोली, बस मुस्कुरा दी.

अब जब उसे भी चुदाई का मज़ा आने लगा … तो मैंने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और एक बार में पूरा अन्दर घुसा दिया.

उसके मुँह से हल्की सी चीख निकली, जो उसने इस बार खुद दबा ली थी

मैंने अपनी बहन को चोदना चालू कर दिया.

तो उसके मुँह से ‘आउहह … एयेए राज चोदो … आह फक मी फक मी हार्ड राज … प्लीज़ फक मी.’ की मादक आवाजें आने लगीं.

मैंने भी अब अपने लंड के धक्के तेज़ तेज़ देने शुरू कर दिये थे.

लेकिन थोड़ा डर भी था कि कहीं कोई आ ना जाए.

इसलिए वो कहने लगी- राज जल्दी कर लो … कोई आ न जाए.

मैं भी ताबड़तोड़ चुत फाड़ने में लग गया.

करीब पन्द्रह मिनट बाद मैं उसकी चुत में ही झड़ गया.

जब वो उठने लगी तो उसे चूत और टांगों में बहुत दर्द हो रहा था, जिससे वो चल भी नहीं पा रही थी.

मैंने उससे बोला- कोई पूछे कि क्या हुआ ऐसे क्यों चल रही हो, तो बोल देना कि मोच आ गई है.

उसने हंस कर हां कह दी.

भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से

भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से


मेरा नाम विनीता है, आज मैं आपको अपनी एक बड़ी ही हॉट चुदाई की कहानी सूना रही हु, ये चुदाई की कहानी मेरे और मेरे बड़े भैया रणवीर के बारे में है, आप को मेरी ये कहानी बहूत ही ज्यादा हॉट लगेगी क्यों की आज भी वो दिन जब याद करती हु, तभी मेरी चूत गीली हो जाती है. और अपनी चूचियां खुद ही अपने हाथों से मसलने लगती हु, आज मैं कोशिश करुँगी जो उस रात को हुआ उसे बताने की..

भाई ने मुझे भाभी समझ चोद दिया, और मैं भी खूब चुदवाई भैया से

मैं 21 साल की हु, मैं कानपूर की रहने बाली हु, मेरे भैया जो मेरे से सिर्फ एक साल बड़े है, ये कहानी जुलाई की है.

मेरी शादी 12 जून को हुई थी. और 2 जुलाई को मेरे भैया की शादी हुई, मैं अपने ससुराल से वापस आ गई थी क्यों की भैया की जो शादी होनी थी.

दोस्तों पर मेरे चूत को लंड की आदत हो गई थी क्यों की शादी के बाद थोड़े दिनों तक ही ससुराल में रही थी, तो खूब चुदी थी, पर जब मैं अपने मायके आई तो मुझे अपने पति का लंड याद आने लगा था.

भैया के शादी में मेरे पति भी आये थे पर वो दो दिन में ही चले गए और मैं थोड़े दिन के लिए और रह गई थी.

भैया की शादी के चार दिन बाद की ये कहानी है. माँ और पापा दोनों मन्नत मांगे थे की दोनों बच्चों की शादी करने के बाद हरिद्वार जाना था. और वो दोनों चले गए.

घर में मैं और नई नवेली भाभी और भैया थे, मैं तो दिन रात सजी संवरी रहती थी क्यों की मेरी भी शादी हुई थी, हम दोनों ननद भाभी एक दूसरे का लाल लाल कपडे चूड़ियां, शेयर करते थे, और खूब खुश रहते थे

एक दिन की बात है हम दोनों ननद और भाभी ही घर पर थे, क्यों की भैया की जिगरी दोस्त की शादी थी इसलिए वो बरात चले गए थे, वो लेट नाईट वापस आते तो मैं और भाभी दोनों एक ही बेड पर सो गए थे, रात को लाइट चली गई थी, गर्मी का दिन था, पंखा भी बंद हो गया था, भाभी ज्यादा कोमल है, क्यों की वो दिल्ली की रहने बाली है.
वो हमेशा एयर कंडीशनर में रहने बाली है, यहाँ पंखा भी चलना बंद हो गया था. इसलिए वो इधर उधर घूमने लगी. और मेरी नींद कब लग गई पता ही नहीं चला.

अचानक मेरे होठ को किसी ने जोर से चूमने लगा. और मेरी चूचियों को दबाने लगा. मैंने देखा तो भैया थे, उनके मुह से शराब की बदबू आ रही थी, मैंने कुछ बोलना चाही पर उन्होंने मेरा मुह दबा दिया, जोर से और बोले की विनीता सुन लेगी.

मैं समझ गई को वो भाभी समझ कर मेरी चूचियों को दबा रहे थे और किश कर रहे थे, असल में हम दोनों दुल्हन की तरह ही थे लाल लाल साडी में ऊपर से बिजली नहीं थी. इसवजह से वो मुझे पहचान नहीं पाए. और वो मेरे ब्लाउज के हुक को खोल दिए और मेरी चूचियों को दबाने लगे. मैंने कहा ये क्या कर रहे हो, आपने शराब पिया है.
उन्होंने मेरा मुह फिर से दबा दिया, वो काफी ज्यादा नशा में थे. वो काफी मजबूत है इसलिए मैं उनको रोक नहीं पाई.
और देखते ही देखते उन्होंने मेरी साडी ऊपर कर दी और पेंटी उतार दी, अब दोस्तों सच बताऊँ मुझे भी अच्छा लगने लगा.
क्यों की मैं खुद भी लंड की प्यासी थी. मैं चुचाप हो गई. और उन्होंने अपना लंड निकाला और मेरी चूत के ऊपर रखा और जोर से पेल दिए. मैं छटपटा गई.

क्यों की भैया का लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा मोटा और लंबा महसूस हो रहा था. मेरे मुह से चीख निकल गई.
उन्होंने फिर से मेरे मुह को बंद कर दिया और बोले साली तुमको समझ नहीं आ रहा था. मेरी बहन को पता चल जायेगा. वो आँगन में सोई हुई है.
मैंने समझ गई की भाभी आँगन में सोई है. लाइट जाने की वजह से. मैं चुपचाप हो गई. और लंड का मजा लेने लगी.
मैंने अपना ब्रा का हुक खोल दिया, और मैंने अपनी चूचियां अपने भाई के मुह से लगा दी. वो मेरी चूचियों को अपनी दांतो से काट रहे थे. और मसल रहे थे. मैं सातवे आसमान में थी.
मेरे शरीर का रोम रोम खड़ा हो गया था. मैं अपने आप को भाई के हवाले कर चुकी थी. और चुदाई का मजा ले रही थी.
भैया जोर जोर से धक्का लगा रहे थे. मैं भी अपना गांड उठा उठा कर लंड पेलवा रही थी. मेरी चूत काफी गीली हो गई थी. चूचियां तन गई थी. मैंने अपने भाई को बाहों में भर लिया, और अपने पैरो से लपेट ली.
मेरा भाई नशे में होने के कारण वो समझ ही नहीं पा रहा था की आज उसकी बहन चुद रही थी. भाभी तो गांड फाड़ कर आँगन में सो रही थी. उसके बाद वो गालियां दे दे के चोद रहे थे.
दोस्तों क्या बताऊँ पति से ज्यादा खुश भैया कर रहे थे. उनका गठीला बदन लंबा लौड़ा, मोटा लौड़ा और वो जोर जोर से चोदना नशे की हालत में. करीब २० मिनट की चुदाई मुझे खुश कर दिया. और वो झड़ गए. और झड़ते ही तुरंत ही सो गए.
मैंने अपने कपडे ठीक की ब्रा पहनी, ब्लाउज पहनी, तब तक भैया खराटे लगाने लगे. मैं उठी और आँगन में जाके भाभी को उठाई, बोली की भैया आ गए है.
वो जाकर भैया के साथ सो गई. और मैं वही आँगन में लेट गई. नींद जब खुली तो सुबह हो चुकी थी. भैया को आजतक पता नहीं चला की वो रात भाबी को नहीं अपने बहन यानी की मुझे चोदा था

 

मकान मालिक की कुंवारी बेटी की चुदाई,मकान मालिक की अविवाहित बेटी की चुदाई

मेरे मकान मालिक वहीँ रहते थे। उनका दो मंजिल का घर था और उन्होंने मुझे ऊपर वाला कमरा किराये पर दे दिया। मेरा मकान मालिक बहुत ही अच्छा था। उसके घर में वो पति – पत्नी और उनकी एक 19 साल की बेटी और 10 साल का बेटा रहते थे। मकान मालिक कोई सरकारी जॉब करते थे तो वो हमेशा दिन के समय घर से बाहर रहते थे।मैंने अपना सारा सामान सेट करके अपनी पहली दिन के क्लास के लिए निकल गया। जब मै वहन पहुंचा तो पहले से ही क्लास चल रही थी। मै बाहर ही बैठ गया। कुछ देर बाद बच्चे धीरे धीरे आने लगे। कुछ देर बाद अक लड़का आया, वो मेरे ही बगल में बैठ गया। कुछ देर बाद मेरी उससे दोस्ती हो गई।

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उसने अपना नाम सुनील बताया। उसके बोलने और ओके बात करने के स्टायल से लग रहा था कि वो पढने में तेज है। हम लोग वहां इंतजार ही कर रहे थे कि कुछ देर बाद एक लड़की आई और सुनील से बात करने लगी। वो दिखने में बहुत ही मस्त थी। बिल्कुल पटाका लग रही थी। उसको देखने के बाद मेरे मुह में तो पानी आ गया था। जब वो चली गयी तो मैंने सुनील से पूछा ये कौन थी??  तो उसने कहा – “यार ये मेरी क्लासमेट थी”। बस उसके साथ में दोस्ती है। मैंने सुनील से कहा – दोस्त या उससे बढकर ?? तो उसने कहा – “ऐसी कुछ बात नही है बस दोस्ती ही है”।

कुछ देर बाद हमारा क्लास शुरु ही गया। हमारे उस बैच में बहुत सी लड़कियां थी। अगर थोडा भी ध्यान भटक जाये तो तुम पढ़ नही सकते थे। उसमे में तो बहुत से लड़के केवल सिटीयाबाज़ी  करने आये थे। मै अपने दोस्त सुनील के साथ में ध्यान से पढ़ रहा था। हम दोनों का ध्यान केवल पढाई पर ही था। कोचिंग का पहला दिन काफी अच्छा था। जब क्लास छूटी तो मै और सुनील दोनो साथ में ही बात करते निकल रहे थे। जब बाहर निकले तो सुनील की दोस्त फिर से मिल गई। उसके उससे पूछा ये कौन है?? तो उसने कहा – “ये हिमांशु है मेरा नया दोस्त आज ही मिले है”।

उसकी दोस्त ने मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम ज्योति बताया। कुछ देर बाद वो चली गई। मै भी घर चला आया। वहां से आने के बाद मैंने थोडा सा खाना अपने बनाया और खाया। खाना खाने के बाद मै पढने के लिए बैठ गया। 3 घंटे पढने के बाद जब मै थोडा थक गया तो मैंने सोचा कुछ देर बाहर घूम लेता हूँ उसके बाद फिर पढता हूँ। मै घूमने के लिए छत पर चला गया। कुछ देर बाद जब मै वापस आया तो मैंने देखा ज्योति मकान मालिक से घर में चली गई। मै जान गया कि ये यहीं रहती है।   लेकिन उसे नही पता था। धीरे धीरे हमारी दोस्ती और भी ज्यादा हो गई। मेरे ग्रुप में मै सुनील और ज्योति 3 लोग रहते थे।

 

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एक दिन मैंने सोचा इसको बता दूँ की मै वहीँ तुम्हारे घर में ही रहता हूँ लेकिन मैंने सोचा सामने आकर बताऊंगा। कोचिंग के बाद मै घर चला आया। ज्योति भी घर आ गयी, मैंने नमक मांगने के बहाने से उसके घर गया और दरवाज़ा खटखटाया तो मकान मालकिन ने कहा – बेटी ज्योति देखना तो कौन आया है?? उसने जब दरवाज़ा खोला तो कहा – तुम यहाँ क्या कर रहे हो। मैंने उससे कहा – “मै तो नमक मांगने आया था”।

ये तुम्हारा घर है क्या ?? मुझे तो पता ही नही था मै इतने दिनों से यहीं पर रह रहा हूँ। कुछ देर में उसकी मम्मी आ गई। मैंने उनसे नमस्ते कहा और कहा – आंटी जी थोडा सा नमक मिल जायेगा। तो उन्होंने कहा – “क्यों नही बेटा अभी देती हूँ”। उन्होंने कहा – ज्योति तुम यहाँ क्या कर रही हो?? तो उसने कहा मम्मी ये मेरे दोस्त है मेरे साथ में पढता है। कुछ देर बात करने के बाद मै नमक लेकर वहां से चल आया। उसके बाद मेरी ज्योति से और भी तगड़ी दोस्ती हो गई। अब तो वो दिन में मेरे साथ में ही पढने के लिया आ जाया करती थी। ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है।

मुझे अभी भी वो दिन याद है, रविवार का दिन था मै केवल कटिग वाली चड्डी पहने हुए पढ़ रहा था और ज्योति के बार में कुछ गन्दी बातें सोच रहा था, कि इतने में वो आ गई। मेरा लंड खड़ा था और वो सामने आ गई  मुझे तो शर्म आ गई मैंने जल्दी से एक कपडे से अपने लंड को ढक लिया। मैंने उससे कहा जरा थोड़ी देर के लिए अपना मुह उधर करो मै पेंट पहन लूँ। उसने मुह उधर कर लिया लेकिन वो हंस रही थी। मैंने जल्दी से पेंट पहन ली।  मैंने कहा – अब देख सकती हो।  वो हस रही थी मैंने उससे कहा यार इसमें हंसने वाली कौन सी बात है। मै बैठ गया और वो भी मेरे ही बगल में बैठ गई। मेरा लंड उसके बारे में सोच कर खड़ा था, वो बहुत हॉट लग रही थी।

मेरा मन उसको चोदने को कर रहा था। मुझे थोडा डर लग रहा था कैसे कहूँ। कुछ देर बाद बातो ही बातो मैंने अपना उसके जांघ पर रख दिया। मेरा तो पूरा मूड था उसको चोदने का लेकिन अगर ज्योति तैयार हो जाती तो मज़ा आ जाता, मैंने सोचा। कुछ देर बाद मैंने अपने हाथो को उसकी पैरो पर से हटाने लगा , तो ज्योति ने बड़े जोश में मुझसे कहा – अपना हाथ मत हटाओ मुझे अच्छा लग रहा है।  मै समझ गया कि ज्योतो भी आज मूड में है। मैंने अपने हाथ को ज्योति के जन्घो पर सहलने लगा। और मै उसको किस करने के लिए धीरे धीरे उसके होठो की तरफ बढ़ने लगा। वो भी मेरे होठो की तरफ बढ़ने लगी। और हम दोनों एक दुसरे के होठो के पास पहुँच गए और मैंने उसके होठो को चूमना शुरु कर दिया।

 

उसने भी मेरे होठो को अपने होठो से चूमती हुई मेरे होठो को अपने मुह में भर लिया और मेरे होठो को पीने लगी मैंने भी उसको अपने बांहों में भर लिया और कास के उसके होठो को पीने लगा। हम दोनों एक दुसरे से लिपटे हुए थे, और बड़े जोश से एक दूसरे के होठो को पी रहे थे। कुछ देर बाद मैंने उसको किस करना बंद कर दिया और मैंने उससे कहा – यार जो पहले कहना चाहिए था वो बाद में कहने जा रहा हूँ। “I LOVE YOU SO…. MUCH BABY” उसने भी मुझे I LOVE YOU 2 बोल दिया।

ज्योति का मन था की मै उसकी चुदाई भी करूँ लेकिन मैंने ऐसा कुछ नही कहा उससे। तो उसने खुद ही मुझे अपने बाँहों में भर कर मेरे लंड को सहलाते हुए मुझसे कहा – “तुम और कुछ नही करना चाहोगे”। मै समझ गया उसका इशारा। मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और अपने कमरे के दरवाज़े को बंद कर लिया। मैंने पहले तो ज्योति के बदन को कपड़ो के ऊपर से चूमते हुए उसके मम्मो को दबाया और फिर मैंने उसके सरे कपड़ो को एक एक करके निकल दिए। और मैने भी अपने कपड़ो को निकल दिया। अब ज्योति ब्रा और पैंटी में और मै अपनी कटिंग वाली चड्डी में।

मैंने ज्योति के मम्मो को मसलते हुए उसके ब्रा को निकल दिया और उसके गोर गोर और काफी मुलायम चूचियो को अपने दोनों हाथो से पकड कर मसलने लगा और साथ में ही उसकी दूध को भी पीने लगा। मै नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मुझे मज़ा आ रहा था मै उसके  नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी भी रहा  था, जिससे उसे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी  आ  रहा था।  जब मै उसके छातियो को मसलते हुए पी रहा था तो ज्योति आह आह्ह अहह उफ़ उफ़ उफ् आराम से मेरी नारियल जैसे चूचियो को चुसो आराम से   ओह ओह  करके सिसक रही थी। हम दोनों को मज़ा आ रहा था।

बहुत देर तक उसके चूचियो को पीने के बाद मैने धीरे धीरे मै उसकी चूत की तरफ आकर्षित होते हुए मै उसके कमर चूमते हुए उसके नाभि को पीने लगा और कुछ ही देर मै और ज्योति दोनों बहुत ही जोश में आ गए और वो अपने चूचियो को जल्दी जल्दी मसलने लगी और मै उसके कमर को पीते हुए अपने हाथो को उसकी चूत के ऊपर फेरने लगा। कुछ ही देर में मै जोश से पागल होने लगा। मेरे अंदर एक अजीब सी बैचैनी होने लगी। मैने जल्दी से ज्योति के पैंटी को धीरे से निकाल दिया, और मै अपने हाथो की उंगलियो से उसकी चूत को सहलाते हुए मैंने उसके टांगो को फैला दिया और अपने मुह को उसकी चूत में लगा कर उसकी चूत को पीने लगा। मैं अपने जीभ से उसकी चूत के दाने को बार बार चाट रहा था और ज्योति जोश से सिसक रही थी।

 

बहुत देर तक उसके चूत को पीने के बाद मैंने अपने लंड को बाहर निकाल, मेरे लंड को देख कर ज्योति का मन मेरे लंड को चूसने का था लेकिन मै इतने जोश में आया गया था की मै अपने आप को उसकी चुदाई करने से रोक नही पाया। मैंने अपने लंड को उसकी बुर पर जोर जोर से पटकते हुए धीरे से अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया। जब मेरा लंड उसकी चूत में गया तो ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरे लंड पर कोई गर्म चीज रख दी है। उसकी चूत बहुत गर्म थी। मै अपने लंड को उसकी चूत में धीरे धीरे डालने लगा। उसकी चूत की गर्मी मेरे लंड के अंदर जा रही थी। और धीरे धीरे मेरे चोदने की रफ़्तार बढ़ने लगी। मै तेजी से उसकी चूत को चोदने लगा।

मेरा लौडा ज्योति चूत के अंदर तक जा रहा था., ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड किसी गड्डे में जा रहा है। लेकिन उसकी चूत के किनारे पर मेरे लंड की रगड़ से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और ज्योति तो जैसे जैसे मै तेजी से चोदता तो वो तेजी से ..आह उम् उम उम उम्म्म्म ओह ओह ओह ऊह्ह्ह्हह्ह्ह उह्ह्ह्ह हा हा हां  सी सी सी सीईईईईईईइ. उफ़ उफ़ उफ़ फफफफफ मम्मी मामी आह अहह ह्ह्होह उनहू उनहू उनहू उनहू  आराम से अह्ह्ह अहह ..अह हहह हहह .. प्लीसससससस प्लीसससससस,  उ उ उ उ ऊऊऊ  ऊँ..ऊँ   माँ माँ ओह माँ करके चीख रही थी।

लगातार 50 तक चोदने के बाद जब उसकी चूत रमा हो गई तो उसको भी मज़ा आने लगा। और छोड़ो और तेजी तेजी से मज़ा आ रहा है और भी तेज अहह अहह हा  करके मुझे और तेज चोदने के लिए मजबूर कर रही थी। ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैंने और भी तेजी से उसकी चोदने शुरु कर दिया। जिससे उसकी चूत तो फटने लगी थी और वो जोर जोर से चीखने लगी। कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था। ,मैंने जल्दी से उसकी चूत से अपने लंड को बहर निकाल लिया और उसके दोनों पैरो के पंजो के बीच में अपने लंड को रख कर उसके पैरो के बीच  में पेलने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड से सफ़ेद वार्य निकलने लगा। उसके कुछ ही देर बाद मेरा लंड ढीला हो गया।

ज्योति को चोदने के बाद भी मैंने उसकी चूचियो को दबा कर खूब पिया और साथ में उसके चूत उंगली कर कर के उसकी चूत का पानी भी निकाल लिया।  उसकी चुदाई करने में मुझे बहुत मज़ा आया क्योकि बहुत दिनों बाद चूत के दर्शन हुए थे। उस दिन के बाद मै और ज्योति दोनों ने साथ में बहुत बार सेक्स किया। मै तो उसको इतनी बार चोद चूका था की मेरा तो अब उसको चोदने का मन भी नही करता था लेकिन उसके कहने पर उसको चोदना ही पड़ता था। कैसी लगी अविवाहित जवान लड़की की चुदाई , अच्छा लगी तो जरूर रेट करें और शेयर भी करे ,अगर कोई मेरी मकान मालिक के की बेटी चुदाई करना चाहते हैं.

फूफाजी ने मेरी कुंवारी चूत को चोदकर सील तोड़ी

फूफाजी ने मेरी कुंवारी चूत को चोदकर सील तोड़ी


मैं एक गांव की रहने वाली लड़की हूं मैं अभी 19 साल की हूँ। मेरे घर में मेरे मां-पापा, एक भाई और मेरी दो बहने हैं। पापा फलों की दुकान चलाते हैं और मम्मी घर का काम करती है। मां फ्री टाइम में पापा की दुकान पर मदद करती हैं।
ये बात आज से साल भर पहले की है। उस वक्त तक मैंने किसी के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाए थे। मैंने अपनी एक सहेली से ये तो सुना था कि मर्द और औरत का मिलन किस तरह होता है, लड़की की जवानी की चुदाई होती है.
मगर मैंने अभी तक न तो किसी लड़के का लण्ड देखा था और न ही मुझे असल में पता था कि जब लण्ड चूत में जाता है तो कैसा अनुभव होता है। लेकिन मेरा मन बहुत करता था कि मेरा भी एक बॉयफ्रेंड हो।
मैं भी चाहती थी कि किसी के साथ बाहर घूमने जाऊं, मस्ती करूं, सेक्स करूं, अपने बॉयफ्रेंड को प्यार करूं, जवानी की चुदाई का मजा लूं.
इधर मेरी किस्मत ने कुछ और ही खेल खेल दिया मेरे साथ। एक दिन की बात है कि मेरे फूफा जी हमारे घर आ गये। हम लोग लम्बे अरसे के बाद मिल रहे थे। जब फूफाजी ने मुझे गले से लगाया तो मेरे संतरे उनकी छाती से दब गए।
उन्होंने मुझे कस कर बांहों में भर लिया और मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए मुझे कस कर भींच लिया। फिर मुझे छोड़ते हुए बोले- हमारी महिमा हो तो बहुत बड़ी हो गई है। कितनी जल्दी जवान हो गई है।
मेरे घर वाले उनकी इस बात पर मुस्करा दिए। मैं तो शर्मा गई थी।
फिर मैं उनके लिए पानी लाने के लिए चली गयी जब उन्होंने मुझे अपने गले लगाया था तो मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई थी। मुझे पहली बार किसी मर्द के शरीर का अहसास मिला था।
उस दिन मुझे पहली बार ये अहसास हुआ कि मर्द के शरीर से चिपक कर कितना मजा आता है।
मेरे फूफा का नाम रंजीत ठाकुर है। वो 45 साल के हैं और बहुत ही ठरकी किस्म के आदमी हैं। मगर देखने में जवान ही लगते हैं।
मैंने फूफा को पानी दिया और बातें करने लगी।
फिर मेरे घरवालों से बात करने के बाद वो मेरे कमरा में आ गये।
हम दोनों में बातें होने लगीं।
मैं बोली- फूफाजी ..... बुआ नहीं आई?
फूफा- अरे महिमा बेटी ..... क्या बताऊँ ..... वो तो आजकल बीमार ही रहती है। कोई काम भी नहीं होता उससे। मेरा तो दिल करता है कि तेरे जैसी किसी जवान लड़की से शादी कर लूं। तुम्हारी बुआ तो अब बजुर्गों में शामिल हो गई है।
मैंने मुस्कराकर कहा- फूफाजी, आप भी तो बुजुर्ग हो गए हैं।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- महिमा ..... मैं तो आज भी कुश्ती लड़ सकता हूँ।
फिर वो मेरे करीब आ गये और मेरे कान में बोले- मैं केवल उम्र से बड़ा लगता हूं, मेरे शरीर में ताकत अभी भी 25 साल के लौंडे जितनी है। अगर तुझे यकीन न हो तो कभी आजमाकर देख लेना।
मैं बोली- जाने दो फूफाजी ..... मुझे चाये बनानी है।
फूफाजी बोले- जा बना ले चाय!
फिर मैं चाय बनाने लगी तो फूफाजी मुझे ही देख रहे थे और मन ही मन में मुस्करा रहे थे।
चाये बनाते बनाते मम्मी भी आ गई।
मैं फूफाजी और मम्मी को चाय देकर रसोई में आई।
फिर फूफाजी मम्मी से बाते करने लगे और मैं शाम के खाने की तैयारी करने लगी।
मगर मैं जिधर भी जा रही थी उनकी नजर मेरा पीछा कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे जवान कसमिन बदन का नाप ले रहे हों।
नजरों ही नजरों में मेरे कपड़ों के भीतर झांकने की कोशिश कर रहे हों।
फिर ऐसे ही शाम हो गई। सब लोग खाना खाने लगे।
इतने में फिर पापा भी आ गये।
फूफा बोले- मैं महिमा को लेने आया था। आपकी बहन की तबियत ठीक नहीं है कई दिनों से। हमने सोचा कि महिमा कुछ दिन रहेगी तो तब तक वो ठीक हो जाएगी।
पापा बोले- अरे रंजीत जी, इसमें पूछने की क्या बात है? आपकी भी बेटी है, आप ले जाइये इसे अपने साथ!
फिर पापा ने कहा- महिमा, कल तुझे अपने फूफा के साथ जाना है ..... तो अभी से अपना सामान पैक कर लेना।
मैंने कहा- ठीक है पापा!
अब रात को सामान पैक करते हुए मेरे मन में अजीब सी गुदगुदी हो रही थी।
मुझे पता था कि फूफा की नजर मेरे बदन पर है। वो मुझे वहां ले जाकर कुछ न कुछ तो जरूर करेंगे।
ये सोचकर मैं मन ही मन रोमांचित भी हो रही थी और थोड़ा डर भी लग रहा था।
सुबह जब मैं उठी तो फूफाजी तैयार थे।
मैं भी तैयार हो गई।
खाना खाकर मैं और फूफाजी बस स्टैंड पर गए।
उन्होंने मेरा बैग उठा लिया था, जैसे पति पत्नी जाते हैं।
रास्ते में वो बोले- महिमा, कुछ चाहिए खाने के लिए बता दे, फिर बस चलने का समय हो जाएगा।
मैंने कहा- नहीं फूफाजी, मुझे अभी तो कुछ नहीं चाहिए।
उसके बाद हम बस में चढ़ गए। बस पूरी भर गई थी।
फूफाजी बैग ऊपर रखकर मेरे पीछे खड़े हो गए।
मैंने सलवार सूट पहना हुआ था और फूफाजी ने लुंगी कुर्ता पहना था। जब बस चलने लगी तो वो मेरे साथ चिपक कर खड़े हो गए।
मैं भी जैसे अनजान बनकर खड़ी रही। कुछ ही देर में मुझे कुछ महसूस होने लगा अपनी गांड पर।
मैं समझ गई कि फूफाजी का लण्ड खड़ा हो गया है। मुझे लण्ड का अहसास बहुत उत्तेजित कर रहा था।
इससे पहले मुझे किसी मर्द के लण्ड की छुअन का अहसास नहीं मिला था।
वो बार बार आगे की ओर हल्का धक्का देते हुए लण्ड को मेरी गांड की ओर धकेल रहे थे जैसे कि मेरी गांड में अपने लण्ड को घुसाना चाहते हों।
मगर लण्ड मेरी गांड की दरार में सेट नहीं हो पा रहा था।
मैंने टांगें हल्की सी खोल लीं और पंजों के बल हल्की ऊपर उठकर उनके लण्ड अपनी गांड की दरार में जगह दे दी। अब फूफाजी का लण्ड मेरी गांड की दरार में सेट हो चुका था।
ऐसा लग रहा था कि यदि मैंने सलवार नहीं पहनी होती तो उनका लण्ड मेरी गांड में ही घुस जाना था।
उनका लण्ड काफी मोटा और लंबा था, मुझे अपनी गांड पर अलग से महसूस हो रहा था।
अचानक बस के ब्रेक लगे तो मैं आगे की ओर गिरने लगी।
फौरन फूफाजी ने मेरे बूब्स पकड़ लिए और मुझे संभालने के बहाने से उनको पकड़ कर भींच दिया।
मेरी आह्ह निकल गई।
वो बोले- थोड़ी संभल कर महिमा, अभी गिर जाती तो?
मैंने बस की छत से लगे पाइप का सहारा ले लिया।
दो मिनट बाद उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
वो अब पूरी तरह मेरे शरीर से चिपके हुए थे। उनकी गर्म सांसें मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
मैं भी इस वजह से गर्म होती जा रही थी। अबकी बार जब बस में दोबारा ब्रेक लगे तो उन्होंने बहाने से मेरी गर्दन पर चूम लिया।
वो अब लगातार अपने लण्ड को मेरी गांड पर घिस रहे थे और हिलते हुए आगे पीछे हो रहे थे।
ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चुदाई कर रहे हों।
फिर धीरे से मेरे कान में बोले- आज का सफर तो हमेशा याद रहेगा मुझे!
ये सुनकर मैं शर्मा गई।
सफर में 50 मिनट लगे मगर ये 50 मिनट बहुत जल्दी बीत गए।
उसके बाद हम उतर कर उनके घर की ओर जाने लगे।
घर बस स्टैंड से ज्यादा दूर नहीं था।
हम लोग घर पहुंचे तो बुआ हमें देखकर खुश हो गई।
उन्होंने मुझे बैठाया और चाय-पानी के लिए पूछा।
फिर मैं बोली- बुआ, मेरा कमरा कौन सा है।
बुआ ने मेरा कमरा मुझे दिखा दिया।
मैं अपना सामान लेकर जाने लगी तो बुआ ने फूफाजी से कहा- ये इतना भारी सामान कैसे लेकर जाएगी सीढ़ियों से? इसका सामान कमरा में रखवा दीजिए।
वो मेरा सामान लेकर मेरे कमरा में साथ ही आ गये।
सामान रखकर उन्होंने पूछा- तो कैसा लगा महिमा?
मैंने कहा- कमरा तो बहुत अच्छा है।
वो बोले- मैं कमरा की बात नहीं कर रहा।
इससे पहले मैं कुछ और कहती तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रखवा दिया और बोले- ये कैसा लगा?
लण्ड पर हाथ लगते ही मैंने अपने चेहरे को दूसरे हाथ से ढक लिया।
उन्होंने मुझे दोनों हाथों सो गोदी में उठाया और बेड पर ले जाकर गिरा दिया। वो मेरे ऊपर आ गये। मैंने दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया था।
मगर उन्होंने मेरे हाथ हटाकर मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
वो बोले- बता ना ..... कैसा लगा?
वो मेरे होंठों को चूमते रहे
मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैंने उनका साथ देना शुरू कर दिया।
अब उनका लण्ड मेरी चूत में घुसने की कोशिश कर रहा था।
वो बहुत उतावले हो गए और मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लग
इतने में ही नीचे से बुआ की आवाज आई तो फूफा एकदम से उठ गए।
फिर बुआ को गाली देते हुए मरे मन से नीचे चले गए।
मैं बहुत खुश हुई।
फूफा मेरे लिए पागल थे और मुझे आज बहुत मजा आया।
ये मेरा पहला अहसास था।
मगर मुझे नहीं पता था कि मेरी चूत आज ही चुदने वाली है।
दोपहर का खाना होने के बाद मैं अपने कमरा में आ गयी थी।
मौका पाकर फूफाजी भी आ पहुंचे।
आते ही उन्होंने कमरा को अंदर से बंद कर लिया और मुझे बांहों में लेकर चूमने लगे।
मैंने कहा- बुआ देख लेगी।
वो बोले- वो पड़ोसन के यहां गई है। एक घंटे से पहले नहीं आने वाली।
इतना बोलकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।
मैं भी उनका साथ देने लगी।
एकदम से उन्होंने मेरी सलवार में हाथ डाल दिया।
नहाने के बाद मैंने पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए हाथ सीधा मेरी नंगी चूत पर जा लगा।
वो मेरी चूत को रगड़ने लगे।
मैं चुदासी होने लगी।
पहली बार किसी मर्द का हाथ मेरी चूत को रगड़ रहा था।
देखते ही देखते फूफाजी ने मुझे नंगी कर दिया और खुद भी नंगे हो गये।
मुझे उनके सामने नंगी होकर शर्म आ रही थी। मैंने अपने चेहरे को ढक लिया और टांगों को भींचकर चूत को छिपाने लगी।
वो मेरी जांघों को खोलकर मेरी कमसिन चूत को देखने लगे, फिर उसको जीभ से चाटने लगे।
मैं तो एकदम से सिहर गई ..... ऐसा अहसास कभी नहीं मिला था।
फूफाजी अब मेरी चूत को चाटने लगे।
मैं भी मजा लेने लगी, बहुत उत्तेजना हो रही थी।
फिर काफी देर चाटने के बाद मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- बस करो फूफा जी ..... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। बहुत तड़प गई हूं। अब कैसे शांत होगी ये प्यास?
वो बोले- अभी कर देता हूं मेरी रानी ..... बस तू घबराना मत! दर्द होगा तुझे लेकिन मेरा साथ देना।
मैंने हां में गर्दन हिला दी और फूफा ने मेरी चूत पर लण्ड टिका दिया।
फिर धीरे धीरे उसको चूत पर रगड़ने लगे।
मैं और ज्यादा तड़पने लगी।
फिर उन्होंने एक धक्का मारा तो जैसे मेरी जान निकल गयी।
उनका लण्ड मेरी चूत में घुस गया।
मुझे ऐसा दर्द हुआ जैसे टांगों के बीच में से किसी ने चीर दिया हो।
मैं छटपटाने लगी तो उन्होंने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया कि कहीं मेरी चीख न निकल जाए।
उन्होंने एक और धक्का मारा तो मेरी फिर से रूह कांप गई। इतना दर्द हो गया कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मेरी आँखों में आंसू आ गये। वो मेरे ऊपर लेटे रहे और मुझे चूमते रहे।
कुछ देर तक वो बस लेटे रहे।
फिर जब मेरा दर्द हल्का हुआ तो उन्होंने धीरे धीरे लण्ड को चूत में चलाना शुरू किया।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू से मेरी चूत को चीरने के बाद उसके जख्म को कुरेद रहा है।
मगर बाद में फिर जब लण्ड की रगड़ चूत की दीवारों पर लगने का मीठा अहसास हुआ तो मेरा दर्द गायब होता चला गया।
अब मैं चुदने में फूफाजी का साथ देने लगी।
वो तेजी से अब मेरी चूत मारने लगे और मैं उनके नशे में खो सी गई।
दस मिनट की चुदाई के बाद एकदम से उन्होंने मेरी चूत से लण्ड निकाला और मेरे पेट पर अपना गाढ़ा सफेद माल गिरा दिया।
मैंने अपनी चूत को देखा तो वो फट गयी थी, सूजकर लाल हो गयी थी, खून के धब्बे लग गए थे उस पर।
फिर उन्होंने मेरी चूत को साफ किया और फिर नीचे से दर्द की गोली लाकर दी।
कुछ देर के बाद मुझे आराम मिला और फिर मैं सो गई।
वो भी नीचे चले गये।
उस दिन पहली बार मेरे फूफा ने मेरी चूत चोदकर मेरी सील तोड़ी। इस तरह से मेरी चुदाई की शुरूआत हुई। जब तक मैं बुआ के यहां रही तो उन्होंने मुझे खूब चोदा। मुझे भी अब लण्ड का चस्का लग गया था इसलिए मजे मजे में चुदती रही।

सुहागरात में कुंवारी बीवी को बनाया सुहागन

सुहागरात में कुंवारी बीवी को बनाया सुहागन,Honeymoon Sex Story In Hindi


मेरी शादी को एक साल हो गया है। मेरी शादी दिसम्बर में हुई थी, उस समय बहुत ठण्ड थी लेकिन मैं तो बस अपनी पहली रात के बारे में सोच-सोच कर मन ही मन खुश हो रहा था। शादी की सारी थकन तो मानो सुहागरात के कारण महसूस हो ही नहीं रही थी।

अधिकतर मेहमान जा चुके थे पर तब भी कुछ मेहमान थे और वो बाहर के कमरे में सो रहे थे। हमारे लिए अंदर का कमरा तैयार किया गया था। उस रात मैं पहली बार चुदाई करने वाला था, इससे पहले बस पिक्चर्स में देखा था।

मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और उस रात पूरे शबाब पर था। वो रात मेरे और मेरी बीवी दोनों के लिए यादगार था क्योंकि हम दोनों पहली बार सेक्स करने वाले थे।

जब सब सोने चले गए तो हम दोनों भी कमरे में आ गए। बात करते-करते मैंने उसे बाँहों में ले लिया और फिर एक किस लिया। हम शादी से पहले मिलते जरूर थे तब हमने एक दूसरे को गले लगाया था और किस भी किया था तो किस का अनुभव तो हो गया था। फिर हम बहुत देर तक एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भींच लिया। फिर धीरे-धीरे मैंने उसका लहंगा और जेवर उतारे, उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा और वो भी मुझे सहलाती रही। फिर मैंने उसका ब्लाऊज भी उतार फेंका और उसने भी मुझे सिर्फ अंडरवियर में कर दिया।

अब वो सिर्फ ब्रा पेंटी में थी और मैं अंडरवियर में। हम दोनों ऐसे ही रजाई के अंदर एक दूसरे से लिपट कर लेट गए और शरीर गर्म करने लगे। जब गर्माहट शरीर में फैल गई तो मैंने अपनी अंडरवियर और उसकी ब्रा पेंटी उतार फेंकी। फिर हम दोनों 69 पोजिशन में एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। मुझे उसकी चिकनी चूत चाटने में मजा आ रहा था और यही मजा लेने क लिए ही मैंने उसे शादी से एक दिन पहले ही चूत की शेविंग करने को कहा था और खुद के लंड की भी सफाई की थी।

Honeymoon Sex Story In Hindi


जब वो लंड चूस रही थी तो मुझे शरारत सूझी और मैंने जोर से अपने लंड को उसके मुँह में घुसेड़ दिया जो सीधा उसके तालू में जा टकराया और वो बेड पर ही उछल गई।

जब हमारे चुसाई कार्यक्रम को बहुत देर हो गई तो फिर चुदाई की तैयारी करने लगे।

मैंने अपने दोस्तों द्वारा गिफ्ट किया हुआ डोटेड कॉन्डम निकाला और अपने तने हुए लंड पर चढ़ा लिया। मैंने अपनी बीवी को पलंग पर सीधा लिटाया और उसके ऊपर आ गया। फिर मैं धीरे-धीरे अपने लंड से उसकी चूत सहलाने लगा ताकि उसकी चूत गीली हो जाये और चुदाई में दर्द ना हो।

उसी समय मैं उसके मम्मों को दबाने लगा…….. और वो धीरे-धीरे सिसकियाँ लेने लगी। उसके मम्मे भी काफी कड़क थे जो अब तो दब-दब कर, चुस-चुस कर बड़े और भारी हो गए हैं। मम्मों को दबाते दबाते मैं उन्हें चूसने लगा और उसके गले पर भी चूमता रहा और वो सिसकियाँ लेती रही………..

फिर धीरे से मैंने अपने तना हुआ लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और अंदर डालने लगा। पर जैसे ही डालने को हुआ, वो दर्द से तड़पने लगी और उसके मुँह से आः ह्ह्ह …….. निकलने लगी।

तुरंत मैंने अपने लंड चूत पर से हटाया और उसका मुँह अपने हाथ से बंद किया ताकि उसकी आवाज बाहर मेहमानों के कान में ना चली जाये।

अब तो मैं यह सोच रहा था कि कैसे इसकी चुदाई करूँ…..

मैंने उसकी चूत पर अपना थूक लगा कर उसे गीला किया और फिर से उसके पैर उठा कर लंड अंदर डालने लगा। पर वो फिर से आ आह्ह ह्ह्ह …. करने लगी और कहने लगी मत करो- जान ……… बहुत दर्द हो रहा है !

तब मैंने उसका मनोबल बढ़ाया और धीरे-धीरे लंड अंदर करने लगा और वो आ आह्ह्ह् ह्ह्ह्ह ……. उम्म्मह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह…… करने लगी।

फिर मैंने हिम्मत करके थोड़ा ज्यादा दम लगा कर लंड उसकी चूत के अंदर सरकाया। कुछ ही देर में मेरे लंड को उसकी चूत को भेदने में सफलता मिल गई और वो एक दम से ऊह्ह्ह्ह मम्मी ईईई………………कर के निढाल हो गई और मैं भी लंड उसकी चूत में रखे ही उसके ऊपर लेट गया और उसे होश में लाने लगा। मैं उसे हिलाने डुलाने लगा पर वो होश में नहीं आई। तब मैंने उसके गले और वक्ष पर चूमना शुरू किया। मैं उठ कर पानी नहीं ला पा रहा था क्योंकि ऐसा करने के लिए लंड बाहर निकालना पड़ता। फिर मैं उसे हल्के से काटने लगा, तब उसे होश आया और होश में आते ही फिर से आःह्ह्ह…… बहुत दर्द हो रहा है ! कहने लगी।

फिर मैंने लंड को चूत में अंदर-बाहर करना शुरु किया जैस मैं पिक्चर में देखता था और उसे चूमता भी रहा ताकि उसकी आवाज बाहर ना जाये और वो हल्की आवाज में ऊऊऊम्म्म्म्म…… आ आअह्ह्ह्ह्ह करने लगी….. और मैं उसकी खूब चुदाई करता रहा…..

फिर लंड को अंदर ही डाले मैंने करवट बदल ली और वो मेरे ऊपर आ गई। फिर मैंने अपनी गांड उठा कर उसकी चुदाई चालू कर दी और अब वो मजे लेने लगी थी। वो भी कहने लगी थी- करते रहो जानू…..

और मैं उसे चोदता रहा !

आप सब यकीन नहीं मानेंगे- उस रात को मैंने उसे पूरे 50 मिनट तक चोदा जो कि मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था कि इतनी देर चुदाई करने पर भी मैं झड़ा नहीं। जब बहुत देर हो गई तो फिर से मैंने उसे अपने नीचे लिटा लिया और जोर से चोदने लगा और वो तो बस आःह्ह्ह …… ऊऊउह्ह्ह्ह्ह…… .मम्मीईईई ….. आ आआह्ह्ह्ह ……… मजा आ गया ! कहती रही।

और फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और उसकी आवाज भी तेज होने लगी…….

उस समय मैं भी जोश में आ गया था, तो मैंने भी आवाज की और मेहमानों की परवाह नहीं की, सोचा कि यही तो सोचेंगे कि चलो सुहागरात मजे से मन रही है ! यही सोच कर मैं निश्चिन्त हो कर अपनी बीवी को चोदने लगा और जैसे ही मैं झड़ने के करीब आया तो अपने लंड की चोदने की रफ़्तार बहुत तेज कर दी। मेरी बीवी मेरी पीठ को खरोंचने लगी और कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का वीर्य छोड़ दिया और वो सीधा कॉन्डम में इकट्ठा हो गया।

फिर कुछ देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। जैसे ही मैंने लंड निकाला तो कॉन्डम पूरा लाल था जो मेरी कुंवारी बीवी की सील टूटने की वजह से निकले खून से लाल हुआ था। हम इस बारे में पहले ही फोन पर बात कर चुके थे इसलिए खून देख कर मेरी बीवी भी डरी नहीं और उसके मन में भी संतोष था कि वो अपनी जिंदगी में पहली बार अपने पति से ही चुदी।

फिर हम दोनों बाथरूम मैं अपने लंड और चूत साफ़ करने चले गए और फिर ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गए। फिर एक घंटे बाद दुबारा से चुदाई की। उस रात पूरी तीन बार हमारा चुदाई कार्यक्रम चला।

इस तरह मैंने अपनी कुंवारी बीवी की सील तोड़ के उसे सुहागन बना दिया।

साली की छोटी बेटी की कुंवारी चूत की चुदाई


नई चुत की एडल्ट हिंदी कहानी में पढ़ें कि मैंने अपने साले की बड़ी बेटी की मदद से उसकी छोटी बहन की चूत चुदाई का जुगाड़ किया.. उसे होटल में लेजाकर चोदा..

दोस्तो, मैं दर्शन सिंह फिर से अपनी नई चुत की एडल्ट स्टोरीज इन हिंदी लेकर आप सभी के सामने हाजिर हूँ..
आपको मेरी सेक्स कहानी के एक भाग
साले की बेटी की चुदाई
में इस बात की जानकारी होगी कि मैंने अपनी भतीजी मनु की चुदाई करते समय उससे अपनी एक इच्छा जाहिर की थी कि मुझे मनु की छोटी बहन रुबिका की शादी से पहले उसकी चुत चोदने का मन है..

इस बात पर मनु ने हंस कर हामी भर दी थी.. वो बात किस तरह से आगे बढ़ी इसका जिक्र मैंने अपनी इस सेक्स कहानी में किया है..

मेरी पिछली सेक्स कहानी
साले के दामाद ने कोरी चुत चुदवाई
में आपने पढ़ा था कि मेरे साले के दामाद विमल ने मुझे अपनी दुकान के पास की एक कमसिन लौंडिया की कोरी चुत चुदवाई थी..

अब आगे नई चुत की एडल्ट हिंदी कहानी:

सील पैक लौंडिया की चुत फाड़ने के बाद मैं फारिग हुआ और कपड़े पहन कर विमल दुकान पर आ गया..
उसकी दुकान पर आते ही मैं बोला- विमल मुझे घर जाना है..

चूंकि मैं बहुत टुन्नी में था, तो विमल ने अपने नौकर को मुझे घर तक भेजने की हिदायत दी और उसे मेरे साथ भेज दिया..
हम दोनों घर की ओर लौट आए..

घर आकर मैं अपने साले की बेटी मनु के ऊपर चढ़ गया और उसे एक बार हचक कर चोदने के बाद सो गया..

वीणा मौसी को अचानक जाना पड़ गया था.. इस बात की जानकारी मुझे तब हुई, जब मैं सोकर उठा..

मैं उठ कर बाहर आया तो देखा कि मनु और विमल दोनों बैठ कर पैग जमा रहे थे..
उसी समय मेरे घर से मेरे बेटे का फोन आ गया और उसने मुझे तुरन्त घर वापस आने को बोला..

मैंने जाने की तैयारी की, तो विमल मेरी तरफ लालसा से देखने लगा..

विमल के अकाउंट में मैंने दो लाख ट्रान्सफर कर दिया.. विमल खुश हो गया..

मैंने उसको एक कार टैक्सी लेने भेज दिया.. क्योंकि वो भी टुन्न था और मेरे साथ मुझे छोड़ने जाने से अच्छा था कि मैं टैक्सी से ही चला जाऊं..
फिर मुझे जाते वक्त एक बार मनु को और चोदने का मन भी कर रहा था..

विमल मेरे लिए टैक्सी लेने चला गया.. इधर मनु और मैंने जल्दी जल्दी अपना सामान पैक किया..

पता नहीं क्यों विमल को देर हो रही थी.. मैंने मनु की तरफ देखा तो उसने बताया कि मैंने ही उससे देर से आने को कहा था..

मैं समझ गया मेरा मन तो खुद ही मनु की चुदाई करने का था..

उसी समय मैं मनु के साथ एक जल्दी वाली छोटी सी चुदाई करने लगा.. मनु मेरे नीचे से अपनी गांड उचकाते हुए मुझसे बार बार खुद को मुंबई शिफ्ट करवाने को बोल रही थी..

मैं लंड चलाने में मस्त था.. चूंकि मैं जल्दी झड़ता नहीं हूँ … लेकिन जैसे तैसे मैं स्खलित हुआ..

अपनी भतीजी मनु की चुदाई के बाद मैंने एक सिगरेट सुलगाई और कश खींचने लगा.. कुछ ही देर में विमल टैक्सी कार लेकर आ गया..

मैं उधर से मनु और विमल को जल्दी मुम्बई बुलाने का वादा करके मेहसाणा से निकलने लगा.. जाने से पहले मनु ने पानी, कुछ नमकीन, दो शराब की बोतलें और सर्दी से बचने को एक कंबल कार में रख दिया था..

मैं सुबह मुम्बई पहुंच गया.. कुछ दिन ठहर कर एक मकान और दुकान देख कर मैंने मनु और विमल को मुम्बई बुला कर शिफ्ट कर दिया..

अब जब भी मेरा मन होता, तब मनु के घर चला जाता और उसकी मस्त चुदाई कर लिया करता..

विमल का भी बिजनेस इधर सैट करवा दिया था.. वो अपने काम के सिलसिले में ज्यादातर घर से बाहर रहने लगा था.. इसलिए मुझे और मनु को खुल कर चुदाई का खेल खेलने में सुविधा होने लगी थी..

मैंने एक दिन मनु को चोदते हुए उससे रुबिका की चुदाई की बात याद दिलाई..

मनु ने अपने वादे के मुताबिक अपनी छोटी बहन को अपने पास बुला लिया..

रुबिका के आने के बाद मनु के घर मेरा आना जाना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया.. विमल, मनु और रुबिका के साथ रोजाना किसी अच्छे होटल में जाते, बियर मंगवा कर पीते हुए मौज करने लगे थे..

पहले दिन तो रुबिका ने बियर पीने से मना कर दिया था, मगर मनु रुबिका को साइड में ले जाकर उसे समझा बुझा कर ले आई..

पहली बार रुबिका को बियर पीने में कुछ कठिनाई हुई.. आधी बोतल पीने के बाद रुबिका बहकने लगी..

मनु ने मुझे सीट बदलने का इशारा किया.. मनु मेरी जगह आकर बैठ गयी और मैं मनु की जगह आकर बैठ गया..

सोफा की साइज छोटी होने के कारण मुझे रुबिका से चिपक कर बैठना पड़ा..

अब रुबिका कोई पत्थर की मूर्ति तो थी नहीं … उसे भी मेरा बदन अपने बदन से चिपका होने का अहसास था, परन्तु बियर का नशा होने के कारण उसमें भी मादकता आई हुई थी..

मनु ने बियर खाली देख कर और बियर का ऑर्डर दे दिया.. रुबिका धीरे धीरे डेढ़ बोतल डकार गई.. वो बियर पीने के बाद मुझसे और मनु से खुल कर बातें करने लगी..

हमारी बातें बड़ी सेक्सी हो रही थीं.. मैंने रुबिका के मादक बदन पर भी हाथ से टच करके मजा ले लिया था..

इस तरह कुछ देर हम सभी ने एन्जॉय किया.. फिर उसी होटल में खाना खाकर वापस आने लगे..

आते वक्त टैक्सी में बैठते समय मनु ने पहले खुद बैठ कर मुझे बीच में बैठा दिया.. मेरे पास रुबिका बैठ गई थी.. आगे ड्राइवर के पास विमल बैठ गया था.. इस तरह तीन चार दिन हम लोग इसी तरह से मजा लेते रहे..

एक दिन होटल से वापसी के समय मनु ने अपना बायां हाथ मेरे गले में डाल दिया.. कुछ देर रुबिका ने ये महसूस किया मगर वो उस समय कुछ नहीं बोली..

रास्ते में जहां कहीं सड़क पर अंधेरा आता, तब मनु मेरे लंड को सहलाने लगती.. रुबिका ये सब कनखियों से देख रही थी..
इस बात का पता दूसरे दिन मुझे मनु के फोन से मिला..

दूसरे दिन मनु ने सारी बात बताई और साथ में ये भी बोली कि उसने रुबिका को सच्चाई बता दी है कि किस तरह शादी होने के बाद भी वो प्यासी रह जाती थी.. यह तो संयोग हुआ था कि फूफाजी मिल गए थे.. वरना आज तक उसकी प्यास को बुझाने वाला कोई नहीं था..

मनु ने रुबिका को सब डिटेल में बताया था कि उसकी शादी के दो साल तक सब ठीक रहा था.. उसके बाद विमल नकारा हो गया.. इसलिए मुझे फूफाजी का साथ मिल गया था और हमारे रिश्ते के बारे में विमल को भी सब मालूम है..

मैंने मनु से ये सुना, तो मैंने उससे पूछा कि ये सब तो ठीक किया, मगर रुबिका को मेरे साथ सैट करने के लिए तूने क्या किया?

मनु बोली- मैंने रुबिका को अपना सुझाव दिया है कि जिस्म का सुख लेने में कोई बात नहीं होती है.. मैंने फूफाजी के बड़े लंड का खूब मजा लिया है.. मैंने उससे कहा कि मैं तेरी बड़ी बहन हूँ, तू भी चाहे तो ये सुख ले सकती है.. कहीं ऐसा न हो कि एक दिन तेरा भी मेरे जैसा हाल हो जाए..

मैं मनु की बात सुनकर खुश हुआ कि उसने रुबिका को मेरे मजबूत लंड के बारे में बता दिया है..

फिर मनु ने आगे बताया कि उसने रुबिका को कहा कि मान ले आज तेरी सगाई हो चुकी है, कुछ महीने बाद शादी भी हो जाएगी.. एक दो साल बात करते निकल जाएंगे, फिर मेरे जैसी तू भी तड़पती रहना.. अभी फूफाजी तुम्हारे ऊपर फ़िदा हैं.. एक बार तू फूफाजी को खुश कर दे.. तेरी शादी बाद तुझे मुम्बई में किसी मकान में शिफ्ट कर लेंगे..

इस तरह से मनु ने एक हफ्ते में किसी तरह से रुबिका को राजी कर लिया था..

रुबिका को मनाने के मनु ने मुझे फोन किया और खुशखबरी सुनाई..

उस दिन रुबिका और मैं दोनों ही होटल की और निकल पड़े, आज विमल और मनु को मैंने साथ नहीं लिया था..

हम दोनों एक फाइव स्टार होटल में चले गए.. उधर जाकर बियर पीने लगे..

कुछ देर के बाद मैंने रुबिका की जांघ पर हाथ रख दिया.. हम बार में कोने में बैठे थे, वहां रोशनी बहुत कम मात्रा में आ रही थी..
रुबिका की जांघ पर हाथ रखने से रुबिका ने एतराज नहीं किया.. इस दरम्यान बियर खत्म हो चुकी थी.. हम नई बियर मंगवा कर पीने लगे..

जब मैंने देखा कि रुबिका पूर्ण रूप से होश में नहीं रह गई है, तो मैं उठ कर काउन्टर पर गया और उधर एक कमरा बुक करवा आया..

मैं कमरे को देख कर कमरे की चाबी भी ले आया..

जब मैं वापिस बार में पहुंचा, तब तक रुबिका की जुबान लड़खड़ा रही थी.. मैंने रुबिका की कमर में हाथ डाला और रेस्टोरेन्ट में पहुंच कुछ खाया.. खाने के बाद मैंने रुबिका को निम्बू पानी पिलाया.. अब रुबिका की जुबान लड़खड़ा नहीं रही थी.. रुबिका के साथ बिल अदा करके हम तीनों होटल के उसी कमरे में पहुंच गए..

कमरे में पहुंचते ही मैंने अन्दर का दरवाजा बन्द कर लिया और रुबिका को लेकर बिस्तर में घुस गया.. उसके होंठों से होंठों को मिला कर मैं उस गर्म माल का चुम्बन लेने लगा..

कुछ ही देर में रुबिका भी काफी गर्म हो चुकी थी.. मैंने रुबिका के सारे कपड़े खोल कर उसको नंगी कर दिया..

कुंवारी रुबिका का मस्त जिस्म मेरे सामने खुला पड़ा था.. मैंने एक बार नजर भर कर उसकी जवानी को देखा और अगले ही पल उसी कमसिन बुर में जीभ डाल कर चुत चूसने लगा..

रुबिका को पहले से ही मस्ती चढ़ी हुई थी..
अब वो थोड़ा डरने लगी, मगर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और रुबिका के पैरों से चुंबन लेते लेते ऊपर तक पहुंच गया..

इस समय मेरा लंड उसकी नई चुत पर टकरा रहा था.. कुछ देर लंड को उसकी बुर पर ऊपर से नीचे तक फिराने लगा..

रुबिका की हालत जल बिन मछली की तरह हो गयी थी.. वो लंड अन्दर लेने के लिए मचल रही थी..
मैं उचित मौका देख कर लंड को उसकी बुर में धीरे धीरे पेलने लगा.. जब तक मेरा एक चौथाई लंड नई चुत के अन्दर पहुंचा, तब तक तो रुबिका ने आसानी से लंड सहन कर लिया..

फिर अचानक से रुबिका अपनी गांड को उठा कर ऊपर नीचे होने लगी.. मुझे मौका अच्छा दिखा.. मैंने उसके होंठों को होंठों से कस कर पकड़ कर लंड को जोर से धक्का दे दिया.. एक बार में ही लंड आधे से ज्यादा चुत चीरता हुआ घुस गया..

रुबिका की चीख निकल गयी.. वो छूटने के लिए मचलने लगी.. मगर में बलिष्ठ भुजाओं की कैद से वो नाजनीन अलग हो ही न सकी..

मैंने रुबिका की नई चुत का उद्घाटन कर दिया था.. मैंने एक पल के लिए बिस्तर की सफ़ेद चादर पर देखा … तो चुत फटने से उसका खून बिखरा हुआ था..

मैं कुछ देर रुक गया और रुबिका को विश्राम करने दिया.. जब रुबिका को दर्द होना कम हुआ, तो मैं फिर से धीरे धीरे लंड नई चुत में पेलने लगा..

कुछ ही देर बाद चुदाई अपनी मस्ती में होना शुरू हो गई.. रुबिका भी लंड को झेल चुकी थी और वो भी चुत चुदाई का मजा ले रही थी..

आधा घटा तक मैंने रुबिका को लगातार पेला.. फिर हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए.. रुबिका ने स्वर्ग जैसा सुख पहली बार महसूस किया था.. इस कारण उसने मुझे अपनी बांहों में कस कर जकड़ लिया था.. वो अपने दोनों पैरों को मेरे पैरों से लपेट कर लेट गयी.. कुछ देर बाद आवेग समाप्त हो गया था..

रुबिका ने बहुत बढ़िया चुंबन मेरे होंठों पर दिए … फिर वो बताने लगी कि किस तरह मनु ने उसे राजी किया थ..

मुझे रुबिका को फिर से चोदने का हुआ तो मैं फिर से उसकी चुदाई में मग्न हो गया.. उस रात में मैंने रुबिका की चार बार चुदाई की सुबह हम दोनों ने बाथरूम में जाकर स्नान किया..

घर वापिस आकर रुबिका बोली- फूफाजी, जिस तरह आप मनु को रख रहे हैं … मेरी शादी के बाद आपको मुझे भी मुम्बई में रखना होगा..
मैंने वादा कर लिया..

सुबह के इस वक्त पांच बज रहे थे.. टैक्सी में बैठ कर मैंने रुबिका को बताया कि मेरी तुम्हारे साथ हनीमून मनाने की इच्छा है..
रुबिका बोली- मेरी भी है … आप प्रोग्राम बनाओ … किसी हिल स्टेशन चलते हैं..

तभी टैक्सी घर पहुंच गयी.. मैंने मनु को फोन पर रिंग दी और मनु ने दरवाजा खोल कर हम दोनों को अन्दर ले लिया, साथ ही वो मुस्करा पड़ी..

चाय के साथ हम तीनों कमरे में बैठ किसी हिल स्टेशन का प्रोग्राम बनाने लगे.. इसी दरम्यान सुबह के सात बज चुके थे..

तभी मेरे मोबाईल पर फोन आया..
मनु बोली- फूफाजी, मौसी का फोन है.. आप ही उनसे बात करो..
मैंने फोन लिया, तो वीणा मौसी ने पहले तो अपने मुँह से मुझे ढेर सारी गालियां निकालीं..

उसके बाद साली गिड़गिड़ाने लगी.. मौसी बोली- अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती..
मैंने एक दो दिन में ही उसे मुम्बई बुलाने का आश्वासन दे कर फोन बन्द कर दिया.. इसके आगे की चुदाई की कहानी में मौसी, रुबिका और मनु को मैं एक हिल स्टेशन ले गया.. आप सभी को वो सेक्स कहानी जल्द ही पढ़ने को मिलेगी..

Shraddha Kapoor Ki Chudai Ki Uske Ghar Jakar

 

Shraddha Kapoor Ki Chudai Ki Uske Ghar Jakar

मेरा नाम कुमार है और मैं दिल्ली का रहने वाला हू! यह मेरी पहली स्टोरी है अगर कुछ ग़लती हो तो माफ़ करना, अब स्टोरी पर आता हू! कहानी तब शुरू होती हैं जब मैं 12थ क्लास मे पढ़ता था, एग्ज़ॅम के दिन चल रहे थे उसी वक़्त मेरे भाई ने मुझे बताया की तेरे लिए एक लड़की का ऑफर आया है तब उसने बताया की वो लड़की श्रद्धा है! रेखा मेरी पड़ोसन थी वो एक हुस्न की बला नही थी पर वो लुक मे कमाल थी उसे देख कर तो आछे अछो का पानी छूट जाए उसका फिगर 34 28 32 था, मेरे भाई के ज़ुबान से श्रद्धा का प्रपोज़ल सुन के मैं फुल्ले नही समाया और उस रात मुझे उसके ख्यालो में खो कर नींद भी नही आई, नेक्स्ट डे श्रद्धा का कॉल आया और उसने हेलो कहा उसकी आवाज़ सुन कर मैं काफ़ी खुश हुआ और कुछ बोल भी नही पाया उसने कहा की मैने तो आपको पसंद किया हैं क्या

 

तो मैने कहा की ऐसी बात फोन पर नही मिल के होती हैं तो हमने घूमने का प्लॅन बनाया नेक्स्ट डे हम मेट्रो से आईपी पार्क गये ही मैने एक गुलाब खरीदा और पार्क में घुटनो के बल बैठ के उसे आई लव यू कहा तो वो बहुत खुश हुई और आई लव यू टू कह के हग करने लगी, श्रद्धा के हग करते ही पूरी बॉडी मे करंट सा दौड़ गया, उस दिन हमने कुछ और नही किया बस ढेरो बाते की, अब हम धीरे धीरे एक दूसरे के करीब भी आने लगे थे हमने कई बार एक दूसरे को किस भी किया पर उससे ज़्यादा कोई मौका नही मिला, एक दिन मैने प्लॅन बनाया की श्रद्धा को मेरे दोस्त के घर पर ले जाकर चोदा जाए जिसके लिए वो भी मान गई थी तो हम मंडे की सुबह को मेरे दोस्त के फ्लॅट पर पहुच गये जहा की की मैने संडे को ही ले ली थी अंदर रूम मे एंटर होकर मैने डोर लॉक क्र दिया और श्रद्धा! से पूछा अब क्या इरादा हैं ये सुनते ही वो मेरे सीने से लग गई फिर क्या था मैं उसे किस करने लगा हम ऐसे किस कर रहे थे जैसे कभी दुबारा मिलेंगे ही नही!

 

किस करते करते मैने श्रद्धा को बेड पर लेटा दिया और अब मैं उसके उपर था अब मैं उसके बूब्स को उपर स ही दबा रहा था इतने में वो सिसकारिया लेने लगी मैने उसका टॉप उतार दिया और ब्रा को भी हटा दिया अब उसके बूब्स मेरे सामने नंगे थे अब उसके चुचे कभी दबा रहा था तो कभी उनको चूसे जा रहा था अब मुझे और श्रद्धा को कंट्रोल से बाहर हो रहा क्यूंकी ये पहली बार था दोनो का तो मैने उसकी पैंट उतार दी और पेंटी को भी अलग कर दिया उसकी चुत मेरे सामने थी जिसमे से कुछ गीला गीला निकल रहा था मुझसे रहा नही जा रहा था तो मैने उसकी चुत में उंगली डाल दी और वो उछल पड़ी अब मैं उसे उंगली से ही चोदने लग गया कुछ देर में वो भी झढ़ गई अब उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरे लॅंड देख के वो डर गई और कहने लगी की ये अंदर नही जाएगा मैने कहा मैं आराम से करूँगा तो श्रद्धा मान गई मैने अब अपना सुपरा सेट किया और धक्का लगाया तो लंड कुछ अंदर गया तो वो चिल्ला पड़ी मर गई!

 

तो मैने अपने लिप्स से उसको किस करके उसकी आवाज़ दबा दी इतना करने में भी उसकी चुत से खून निकल आया था तो मैने उसे नही बताया अब मैने एक धक्का मारा लंड आधा अंदर पहुच गया वो रोने लगी पर उसकी आवाज़! दबी हुई थी तो वो चिल्ला नही पाई मैं कुछ देर रुक क्र उसे शांत किया और शांत होते ही एक ज़ोर का धक्का लगा कर लंड अंदर पूरा उतार दिया अब वो मेरा साथ देने लगी अब गॅंड उठा उठा के मेरा साथ देने लगी करीब 10 मिनिट मे हम दोनो झढ़ गये और ठंडे पड़ गये उस दिन हमने 2 बार चुदाई की! उसके बाद हमने अपने अपने कपड़े पहने और हम दोनो घर आ गये, पहली बार चुदाई करने के कारण हम दोनो काफ़ी थक गये थे और आते ही हम दोनो सो गये, नेक्स्ट डे मेरी श्रद्धा से बात हुई कल के बारे में पूछा तो उसने बताया की उसे बहुत मज़ा आया और जिंदगी का सबसे बड़ा सुख मिला उसने कहा की वो मेरे साथ पूरी जिंदगी बिता सकती हैं!

 

हम धीरे धीरे से और ज़्यादा अडल्ट होने लगे हम फोन पर भी सेक्स चॅट करने लगे अब मेरा मन उसे रोज चोदने को करता था पर! रोज रोज रूम मिलना मुश्किल था एक दिन की बात हैं की उसके मम्मी पापा किसी काम से बाहर चले गये और वो शाम को आने वाले थे तो उसने मुझे बताया तो मैं उसके पेरेंट्स के जाते ही उसके घर में घुस गया और पीछे से उसे कस के पकड़ लिया वो डर गई और चिल्लाई कौन है मैने उसका मूह बंद किया और उसको घुमाया मुझे देखते ही उसकी आँखो में चमक आ गई और मुझे हग करने लगी मैने भी उसे जी भर के हग किया आज मैं श्रद्धा को अलग ढंग से चोदने के मूड मे था तो मैने उसको कमरे में बेड पर लेटा दिया और उसको पूरी नंगी कर दिया कमरे की लाइट में परी लग रही थी तो मैने एक बोटल में ओइल लेकर आया और अपने कपड़े भी उतार दिए मैने ओइल उसकी पूरी बॉडी पर लगाया और अपने लंड पर जिससे वो भी मेरे लंड की!मसाज कर सके!

 

अब मैने उसके बूब्स से उसकी मसाज शुरू की धीरे धीरे वो गरम हो रही थी और वो भी मेरे लंड की ज़ोर ज़ोर से मसाज क्र रही थी की श्रद्धा ने मेरा 25 मिनिट में पानी निकाल दिया अब मैं उसकी चुत की मसाज करने लगा उसे बहुत!मज़े आने लगा और ससस्स की आवाज़ करने लगी मैने धीरे धीरे सारा ओइल चुत पर डाला और ज़ोर ज़ोर से मसाज करने लगा उसने अब अपना पानी छोढ़ दिया अब उससे भी रहा नही जा रहा था उसने कहा आज जान निकाल दोगे क्या अब डाल दो वारना मैं सेक्स की आग से मर जाउन्गि मैने देर ना करके उसकी चुत में लॅंड डाला और ओइल के कारण आसानी से चला गया और हमने जमकर चुदाई की और 30 मिनिट्स में हम दोनो झढ़ गये और उस दिन हमने 3 बार पूरी जान लगा के सेक्स किया जो आज भी मेरी फीलिंग्स!में झलाकता हैं!

 

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