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अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

 

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई



मेरे घर में मेरे सिवा मेरी एक बेटी है जो 25 साल की है। पहले मेरा भरा पूरा परिवार था। मैं मेरी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा। एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, बच्चे पढ़ रहे थे, तनख्वाह भी अच्छी थी, सब बहुत बहुत बढ़िया चल रहा था। फिर ना जाने किसकी नज़र लग गई।

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

एक एक्सीडेंट मे, मेरी पत्नी और मेरा बेटा मुझे छोड़ कर चले गए, मेरी दोनों टाँगें नकारा हो गई। जो चार पैसे बचा कर रखे थे, वो सब मेरे इलाज में और बाकी कामो में खर्च हो गए।


शुरू शुरू में तो कुछ दोस्तों रिशतेदारों ने दरियादिली दिखाई, मगर सारी उम्र कौन किसका खर्चा उठा सकता है।प्राइवेट जॉब थी तो जॉब गई तो घर में खाने के लाले पड़ गए।


कहाँ मैं सोच रहा था कि अपनी बेटी की शादी करूंगा, मगर अब हालात ये थे कि कोई रिश्ता भी नहीं आ रहा था। उस एक्सीडेंट के 4-6 महीने में ही सारी दुनिया ने जैसे मुझसे मुँह मोड़ लिया।

ना मुझे समझ में आ रहा था कि मैं क्या काम करूँ … क्योंकि चल तो मैं बिलक्कुल नहीं सकता था, सारा दिन व्हील चेयर पर बैठा रहता था।


तो एक दिन अपने एक मित्र से कह कर मैंने अपनी बेटी की नौकरी का इंतजाम कर दिया। अब जॉब तो उसकी भी प्राइवेट थी सुबह साढ़े आठ वो घर के सारे काम निपटा कर चली जाती और शाम को 7 बजे के करीब घर आती। घर आकर वो मुझे खाना बना कर देती।


मैं भी व्हील चेयर पर बैठे बैठे जितना काम हो सकता था, करता रहता। घर की सफाई कर देता, चाय बना लेता था।


इस एक्सीडेंट से उबरने में और ठीक होने में मुझे करीब एक साल लग गया।


बेटी का काम भी ठीक से जम गया था।


मगर अब मैं नोटिस कर रहा था कि उसमें भी बदलाव आने लगे हैं।


पहले वो सिर्फ सलवार कमीज़ पहनती थी, मगर वो जीन्स टीशर्ट, कैप्री, लेगिंग सब पहनने लगी।

घर में तो वो टीशर्ट और निकर में ही रहती थी।


अब इतनी बुज़ुर्गी तो मुझ पर भी नहीं आई थी, बेशक टाँगें नकारा हो चुकी थी मगर औज़ार एकदम सही था। रोज़ सुबह जब सोकर उठता हूँ तो पूरा कड़क होता है।

अब जब पेट में जाए अन्न तो खड़ा होए लन्न।


मगर इस खड़े का मैं क्या करूँ … कहाँ जाऊँ।

पैसे सारे बेटी के हाथ में होते थे तो उससे तो मांग नहीं सकता था कि बेटी थोड़े पैसे दो, मुझे किसी रंडी के पास जाना है।


तो इसका एक जवाब ये ढूंढा कि घर में काम करने वाली नौकरानी रख लो।

जो काम वाली रखी तो करीब 50 साल की रही होगी।


अब ये लोग अपना ख्याल तो रखती नहीं, तो इसलिये वो 50 में भी काफी बूढ़ी सी लगती थी।

मगर कुछ दिन बाद वो बूढ़ी भी मुझे परी लगने लगी।


अब दिक्कत यह थी कि इससे सेक्स की बात कैसे की जाए, आगे कैसे बढ़ा जाए।

और दूसरी बात अगर वो अपना घागरा उठाएगी, तो पैसे भी तो मांगेगी तो पैसे कहाँ से लाऊँगा।


फिर मैंने और स्कीम सोची कि पहले इसे पटा कर देखते हैं, पैसे का भी कोई न कोई इंतजाम हो ही जाएगा।


वो करीब 11 बजे आती थी, तो मैंने उसके आने का बड़ी बेसबरी से इंतज़ार करना, जब वो आती तो उसे चाय बना कर देनी, उससे बातें करनी, उसके दुख सुख में उसको सलाह देनी!


मतलब थोड़े दिनों में उससे मैंने दोस्ती सी तो कर ली।

अब वो भी चाय पीते वक्त मुझसे बहुत सी बातें कर लेती थी।


एक दिन मैंने उसे बातों बातों में बता दिया कि मुझे और कोई दिक्कत नहीं बस रात को नींद नहीं आती।

बीवी के जाने के बाद रात गुज़ारनी बहुत मुश्किल हो गई है। समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूँ।

अब इशारा तो वो मेरा समझ गई … मगर बोली कुछ नहीं!

लगे हाथ मैंने साथ में ये भी कह दिया कि अब मेरे पास कोई पैसे भी नहीं होते, सारी कमाई बेटी के पास होती है, तो इस काम के लिए उससे पैसे मांग भी नहीं सकता।

अपनी बात कहते हुये मैंने अपने चेहरे पर बड़ी मायूसी और बेचारगी के भाव बनाए रखे।


उस दिन तो कुछ नहीं हुआ मगर हर थोड़े दिन बाद मैं घूमा फिरा कर फिर वही बात कहता।

मुझे यकीन था कि अगर ये मेरी बात बार बार सुन रही है तो एक दिन मान भी जाएगी।


अगर इसने ये काम नहीं करना होता तो मेरी बात ही नहीं सुनती; मुझे पहले ही टोक देती।


मेरी मेहनत रंग लाई।

एक दिन फिर चाय पीते पीते मैंने बात छेड़ी।


मैंने यूं ही झूठ ही कह दिया- जानती हो, आज के ही दिन मेरी शादी की सालगिरह है। पिछले साल हम दोनों ने कितना मज़ा किया था, दोनों सारा दिन घूमे, खाया पिया और रात को को कितना एंजॉय किया. और आज मैं अकेला यहाँ सड़ रहा हूँ। कोई भी ऐसा नहीं जो आज मेरा हाथ पकड़ सके, मुझे आज के दिन सांत्वना दे सके।


मैंने जानबूझ कर कुछ रोने की एक्टिंग सी करी।

वो उठी और मेरे पास आकार बोली- साहब मैं कई दिन से आपकी ये दर्द भरी कहानी सुन रही हूँ, आपने हमेशा मेरे सुख दुख में मुझे अच्छी सलाह दी, मैं आपके लिए क्या कर सकती हूँ। आप बताओ?


मैं अंदर से खिल उठा, बोला- तुम क्या करोगी, तुम भी शादीशुदा हो बाल बच्चे वाली हो। तुम्हें मैं कैसे ये सब कह सकता हूँ?

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मैं सब समझती हूँ। आप बहुत अच्छे हैं, रोज़ मुझे चाय पिलाते हैं, मेरे हर दुख दर्द को समझते हैं, बहुत सी कोठी वाली तो औरत होकर भी मेरी बात नहीं सुनती, मगर आप एक मर्द होकर भी मेरी सब बात सुन लेते हो। आपने मुझे इतना मान दिया, अब आपके लिए मुझे भी कुछ करना चाहिए।


मैंने सोचा कि यार क्या कहूँ, इसे कैसे कहूँ।

फिर कुछ सोच कर बोला- अगर तुमसे कुछ मांगूं तो दे सकती हो?

वो बोली- आप कहिए तो सही!


मैंने कहा- मुझे अपनी पत्नी का प्यार चाहिए, उसके तन का, मन का सब सुख चाहिए।

वो खड़ी मुझे देखती रही।


मुझे लगा जैसे ये चाह रही हो कि भोंसड़ी के हाथ आगे बढ़ा कर पकड़ ले अब क्या खुद ही तेरा लौड़ा पकड़ कर अपनी चूत में डालूँ।

तो मैंने अपने दुखी भाव के साथ उसका हाथ पकड़ कर कहा- तुम्हारा साथ ही मेरी ज़िंदगी को संवार सकता है.

कहते हुए मैंने उसका हाथ चूम लिया।


बाद में मुझे ख्याल आया कि यार ये तो झाड़ू लगा रही थी, और अपने हाथ भी धोकर नहीं आई।

मगर कोई बात नहीं … मैंने उसका हाथ सिर्फ ये देखने के लिए चूमा था कि कहीं वो इस बात का विरोध तो नहीं करती।


मगर वो कुछ नहीं बोली, तो मैंने उसके हाथ को फिर से चूमा और उसकी बाजू को सहलाया।

और सहलाते हुये उसे अपनी ओर खींचा।


वो आगे आई तो मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया।

स्त्री का आलिंगन करते ही मन बाग बाग हो गया, खिल उठा।


उसके ढीले मम्मे मेरे सीने से लगे और मैंने उसके गाल पर चूमा।

उसने भी मुझे हल्के से अपनी बांहों में भरा!


बस अब और क्या चाहिए था … तीन महीने की मेहनत रंग लाई, और आज मेरी काम वाली मेरी आगोश में थी।

मैंने बिना कोई और देर किये सीधे उसका मम्मा पकड़ा, थोड़ा ढीला सा नर्म सा था, ब्रा भी नहीं पहना था.

मगर फिर भी पराई औरत के जिस्म अलग ही कशिश होती है।


एक दो बार मम्मे दबा कर मैंने उसका ब्लाउज़ ऊपर उठा कर उसके मम्मे बाहर निकाले और चूस लिए।

मुँह में मम्मे के साथ उसके गंदे पसीने का स्वाद भी आया।


मैंने उससे कहा- एक बात कहूँ, क्या तुम मेरे लिये नहा सकती हो?

वो बोली- हाँ क्यों नहीं!


वह आगे आगे और मैं व्हील चेयर पर पीछे पीछे … वो बाथरूम में घुसी, मैंने भी अपने कपड़े उतारे.

बिलकुल नंगा होकर मैं भी अपने बदन को घसीटते हुये बाथरूम में घुस गया।


उसने अपने कपड़े उतारे तो मैंने अपने मोबाइल पर उसकी वीडियो बनानी शुरू कर दी।

मैं उठ कर खड़ा नहीं हो सकता था तो वो नीचे बैठ गई।


मैंने उसके बदन को अपने हाथों से साबुन लगा कर धोया। गंदमी रंग का भरा हुआ बदन।

करीब 36 साइज़ के मम्मे, बड़ा हुआ पेट, मोटी गाँड, भरी हुई जांघें। अंदर से तो वो बहुत पर्फेक्ट थी।


उसने भी मुझे नहलाया।

उसके हाथ लगाने से मेरा लंड अकड़ गया।

तो मैंने कहा- चूस ले इसे मेरी जान!


उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मुँह में लेकर चूसा।

महीनों बाद ऐसा आनंद मिला।


मगर मैंने उसे ज़्यादा देर लंड चूसने नहीं दिया; मुझे डर था कि जैसे वो मज़े ले लेकर चूस रही थी, कहीं मेरा पानी ही न निकल जाए।


उसके बाद मैं उसे अपने बेडरूम में ले आया।

पहले अपने तौलिये से अपना बदन पौंछा, फिर उसका बदन पौंछा।


उसके बाद व्हील चेयर से उतर कर बेड पर बैठ गया, वैसे ही बिलकुल नंगा और लंड मेरा पूरा ताव में!


मैंने उसे कहा- वो अलमारी खोलो.

उसने अलमारी खोली।

मैंने कहा- उसमे ऊपर वाले दराज़ में मेरी बीवी के कपड़े हैं। तुम उनमे से एक ब्रा और पेंटी निकाल कर पहन लो।


उसने एक सफ़ेद ब्रा और एक मेरून कलर की पेंटी निकाल कर पहन ली।

फिर उसने मेरे कहने पर मेरी बीवी की लिपस्टिक लगाई, आँखों में काजल डाला। आने हिसाब से वो थोड़ा साज संवर कर मेरे पास आई।


मैंने कहा- बड़ी सुंदर लग रही हो!

जबकि वो लग नहीं रही थी.

मैंने उसकी झूठी तारीफ करी।


वो खुश हो गई, मुस्कुरा पड़ी.

मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी कमर पर बैठने को कहा।


वो मेरी कमर पर एक टांग इधर और दूसरी टांग उधर कर करके बैठ गई।

मैंने उसके दोनों कूल्हों को पकड़ कर दबाया और उसको अपनी और खींच कर उसके होंठों को चूस लिया।


लिपस्टिक के स्वाद में उसके बासी मुँह का ज़ायका दब गया.


अब तो मुझे उसके जिस्म में कोई हूर नज़र आ रही थी।

मैंने उसके दोनों मम्मे पकड़े और खूब दबाये और जी भर के उसके होंठ चूसे, गाल चूसे।

वो भी अपनी कमर हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर घिसा रही थी।


मैंने कहा- ब्रा खोल!

तो उसने अपने ब्रा की हुक खोलकर अपने दोनों मम्मे मेरे सामने आज़ाद कर दिये।


मैंने उसके मम्मे को पकड़ कर उसका निपल चूसा और जोश में आकर काट लिया तो वो सिसक उठी- अरे साहब, निपल पर मत काटो, दर्द होता है, कहीं और काट लो.

तो मैंने उसके मम्मो पर कई जगह काट काट कर निशान बना दिये।


मैंने कहा- जानेमन, बहुत दूध पी लिया, अब ज़रा अपनी मस्त चूत का नमकीन पानी का भी मज़ा दिला दो.

मेरे कहने पर वो उठकर खड़ी हुई और चड्डी उतार दी।


उसकी बालों से भरी चूत के भीगे होंठ मुझे साफ दिखे।


मैं सीधा होकर लेट गया तो वो मेरे ऊपर उल्टी हो कर लेट गई।

अपनी भरी हुई गाँड उसने मेरे मुँह पर रख दी।


मैंने उसके चूत के दोनों फांक खोल कर हल्के से अपनी जीभ से छुआ।

दरअसल मैं उसकी चूत के पानी का स्वाद देखना चाहता था.


अगर मुझे स्वाद अच्छा न लगता तो मैं शायद मैं उसकी चूत ना चाटता. मगर उसकी चूत का स्वाद ठीक था तो मैं अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर और सुराख के अंदर यहाँ वहाँ हर जगह

से चाट गया।


वो भी मेरे लंड को पूरा मज़ा लेकर चूस रही थी।

मेरे लंड टोपा बाहर निकाल कर पूरा गुलाबी टोपा उसने चाटा, चूसा; मेरे आँड ताक चाट गई।


फिर मैंने कहा- बस अब ऊपर आ जाओ, मैं तो तुम्हें चोद नहीं सकता, ये काम तुम्हें ही करना पड़ेगा।

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।


कह कर वो घूमी और मेरे ऊपर आ बैठी। उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत में लेने लगी, दो चार बार ऊपर नीचे होकर उसने मेरा सारा लंड निगल लिया।

अब वो अपने पाँव के बल बैठ कर चुदवाने लगी।


मुझे तो स्वर्ग के नज़ारे आ गए।

क्या मस्त चूत थी उसकी … गीली, चिकनी और टाईट।


मैंने पूछा- तेरा पति नहीं करता तेरे साथ?

वो बोली- करता है … पर बहुत कम! कभी कभी ही उसका मन करता है, नहीं रोज़ तो वो दारू में ही धुत्त रहता है।


मैंने पूछ लिया- तो फिर तुम किसी और के पास जाती होगी?

वो हंस कर बोली- हाँ है एक !


मैंने पूछा- कौन है?

वो बोली- जाने दो साहब, बस है कोई!

मुझे भी उससे क्या था।


वो धीरे धीरे मुझे चोदती रही; मैं उसके मम्मों से खेलता रहा।


उसका हुआ या नहीं मुझे पता नहीं … मगर करीब 7-8 मिनट के चुदाई के बाद मेरा ज्वालामुखी उसकी चूत के अंदर ही फट गया।

बहुत माल गिरा। भर भर के उसकी चूत से गाढ़ा सफ़ेद माल बाहर को चू रहा था।


मगर वो नहीं रुकी, तब तक जब तक उसका काम भी नहीं हो गया।

उसके बाद वो मेरे ऊपर ही निढाल होकर गिर गई।


कुछ देर वैसे ही लेटने के बाद वो उठी।

बाथरूम में जाकर अपना मुँह धोकर आई, लिपस्टिक काजल साफ किया, फिर मेरे बदन को साफ किया।


उसके बाद मुझे कपड़े निकाल कर दिये।


मैं कपड़े पहन कर फिर से अपनी व्हील चेयर पर बैठ गया।

वो चली गई।


उसके बाद हमारा तो काम चल निकला।

जब भी दिल करता वो मेरे घर आती; सुबह 9 से 6 बजे के बीच कभी भी।

मेरी सेक्स लाइफ बिलकुल रेगुलर हो गई।

अब तो मैं हर वक्त खुश रहता।


एक दिन रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, बड़ा मन कर रहा था कि काश इस वक्त होती तो साली को पेलता।


नींद नहीं आ रही थी तो मैं बेड से उठ कर अपनी व्हील चेयर पर आ गया।

रात के करीब 11 बजे होंगे।


मुझे अपनी बेटी के कमरे से आवाज़ आई हंसी की।

मुझे लगा किसी से फोन पर बात कर रही होगी।


तो मैं धीरे धीरे से अपनी व्हील चेयर खींचता हुआ, बाहर को आ गया।


जब अपनी बेटी के कमरे के पास गया तो उसके कमरे की बत्ती जल रही थी।


खिड़की से अंदर झाँका तो मेरे पैरों के तले से ज़मीन निकल गई।

मैंने देखा कि बिस्तर पर मेरी बेटी घोड़ी बनी हुई है और एक लड़का उसे पीछे से पेल रहा है. जबकि दूसरे ने उसके मुँह में अपना लंड दे रखा है।


मैं तो जैसे शर्म से ज़मीन में ही गड़ गया … काँप उठा.

अपनी व्हील चेयर चलाते हुये मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।


आज पहली बार मैंने अपनी जवान बच्ची को बिलकुल नंगी देखा और वो भी दो मुश्टंडों से एक साथ चुदवाते हुये।

मुझे तो जैसे मरने को जगह नहीं मिल रही थी।


फिर मैंने सोचा कि वो भी जवान है, उसकी भी शादी की उम्र है, उसे भी तो अपने लिए एक साथ चाहिए।

ठीक है अगर उसका एक बॉय फ्रेंड होता तो कोई बात नहीं थी.

मगर ये तो दो थे और दोनों को देख कर लग रहा था के दोनों में से मेरी बेटी को तो कोई भी प्यार नहीं करता होगा।


मैंने सोचा कि इसके बारे में मुझे अपनी बेटी से बात करनी होगी।

एक दो दिन बाद मैंने उससे कहा- बेटा देखो अब तुम्हारी शादी की उम्र हो गई है, अगर मैं किसी काबिल होता तो तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा वर खोजता। मगर तुम भी जानती हो, मैं मजबूर हूँ। अगर तुम्हारी कोई पसंद है, तो वो बता दो। मुझे वो भी मंजूर होगा।


बेटी ने पहले हैरानी से मुझे देखा और फिर बोली- ये आज अचानक मेरी शादी की बात कैसे छेड़ दी आपने?

मैंने कहा- बस मैंने सोचा, अब तुम्हें भी शादी कर लेनी चाहिए. चलो जो गलती हो गई सो हो गई, पर आगे से सब ठीक हो जाए तो अच्छा है।


वो मेरे पास आई और बोली- कौन सी गलती कर ली मैंने?

मैंने कहा- अरे जाने दो, छोड़ो उसे! तुम ये बताओ कि तुम्हें कोई लड़का पसंद है?


वो बोली- नहीं … पहले आप ये बताओ कि आपने मेरी कौनसी गलती पकड़ी है?

फिर मुझे मजबूर हो कर उसे कहना पड़ा- परसों रात को मैं वैसे ही बाहर आया था, तो मैं देखा था वो दो लड़के और तुम …

कहते कहते मैं रुक गया।


वो मेरे पास आकर बैठ गई और बोली- पापा, वो दोनों लड़के मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे।

मैंने पूछा- तो फिर तुम उनके साथ ऐसे?


वो सुबकने लगी और खुल कर बताने लगी:


ये सब आपके उस दोस्त ने ही शुरू किया जो आपके सामने मुझे अपनी बेटी कहता था।

मगर जब उसे पता चला कि मुझे आपके इलाज के लिए और पैसे चाहिए, उसी दिन वो अपनी औकात पर आ गया.

उसने मेरे सामने उसने शर्त रख दी कि अगर मुझे पैसे चाहिए तो मुझे उसकी बात माननी पड़ेगी।


मैंने बहुत सोचा, आपसे भी बात करनी चाहिए मगर आप भी मेरी क्या मदद करते।


फिर मजबूर होकर मैंने उसकी बात मान ली।


उसके बाद तो जैसे उसने मुझे अपने लिए ही रख लिया।

जब वो मुझे पैसे देता तो अपने ढंग के कपड़े भी पहनने को कहता, उसके कहने पर ही मैंने जीन्स टी शर्ट वगैराह पहनने शुरू किए।

फिर उसका बेटा विदेश से पढ़ कर वापिस आ गया।


जब उसने फेक्टरी जॉइन की एक उसने मुझे अपने बाप के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

उसने अपने बाप को तो कुछ नहीं कहा मगर उसके बाद मेरी रेल बन गई। जब दिल करता बाप पकड़ लेता, जब दिल करता बेटा पकड़ लेता।

मुझे तो उन लोगों ने अपनी रखैल ही बना कर रख लिया।


धीरे धीरे मुझे समझ आने लगा कि ये खेल सिर्फ इसी चीज़ का है।


उसके बाद मैंने अपने दम पर अपने लिए लोग तलाश करने शुरू किए।

इसमें मुझे कोई खास दिक्कत नहीं आई।

और फिर तो मेरे बहुत से दोस्त बन गए।

उस रात जो आपने देखा वो मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे, मेरे क्लाइंट थे।


मैंने कहा- तो क्या तुम धन्धा करने लगी हो?

वो बोली- आप ये भी कह सकते हो. मगर यह मत भूलना कि ये जो आज आप अच्छा खा पीकर बढ़िया कपड़े पहन कर बैठे हो, ये सिर्फ उस फेक्टरी की कमाई है। इसमें मेरा खून पसीना सब लगा है।


इतना कहकर मेरी बेटी रोने लगी।


मैं पत्थर के बुत की तरह वहाँ बैठा रहा, अपनी रोती हुई बेटी को चुप भी न करवा सका।


रोने के बाद वो खुद हही चुप हो गई और मैं अपनी व्हील चेयर खींचता वापिस अपने कमरे में आ गया।


उस रात मुझे नींद नहीं आई, मैंने खुद को बहुत ही मजबूर पाया।


उसके बाद मैंने अपने मन में सोचा कि अगर मैंने समय से उसकी शादी कर दी होती आज मुझे ये दिन न देखना पड़ता!

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा

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वो बोली : "यार, तेरे पापा को तो सारी तरकीबे आती है, इनसे चुद कर सच में बड़ा मजा आएगा ''.. दोनों सहेलियां फिर से अंदर देखने लगी, अपने-२ जहन में खुद को रश्मि कि जगह रखकर चुदते हुए. शायद चौथी बार था उनका , पर फिर भी समीर को देखकर लग नहीं रहा था कि वो थके हुए हैं , सटासट धक्के मारकर वो चुदाई कर रहे थे.


अचानक समीर ने अपना लंड बाहर खींच लिया, और उठकर रश्मि के चेहरे के पास आ गया, शायद इस बार वो उसके चेहरे पर अपना माल गिराकर संतुष्ट होना चाहता था.


एक दो झटके अपने हाथों से मारकर जैसे ही अंदर का माल बाहर आया, काव्या और रश्मि को लगा जैसे दुनिया रुक सी गयी है, स्लो मोशन में उन्हें समीर के लंड का सफ़ेद और मसालेदार दही रश्मि के चेहरे पर गिरता हुआ साफ़ नजर आया..


रश्मि के चेहरे को अपने पानी से धोने के बाद,बाकी के बचे हुए रस को समीर ने उसके मुम्मों पर गिरा दिया, और वहीँ बगल में लेटकर पस्त हो गया.


शायद ये उनका आखिरी राउंड था.


काव्या ने श्वेता को चलने के लिए कहा, पर जैसे ही श्वेता उठने लगी, उसके सर से खिड़की का शीशा टकरा गया और एक जोरदार आवाज के साथ वो शीशा टूट गया, दोनों सहेलियों कि फट कर हाथ में आ गयी.


दोनों जल्दी से उछलती हुई वापिस अपने कमरे कि तरफ भागी और दरवाजा बंद करके चुपचाप लेट गयी.


समीर ने जैसे ही वो आवाज सुनी वो नंगा ही भागता हुआ वह पहुंचा, जाते हुए उसने अपने ड्रावर में से पिस्टल निकाल ली थी.

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वो चिल्लाया : "कौन है, कौन है वहाँ ……''


नंगी पड़ी हुई रश्मि ने अपने शरीर पर चादर लपेटी और वो भी डरती हुई सी बाहर कि तरफ आयी, जहाँ समीर खिड़की के टूटे हुए शीशे को देख रहा था.


रश्मि : "क्या हुआ, क्या टूटा है यहाँ ''...


समीर : "खिड़की का शीशा, जरूर कोई यहाँ छुपकर हमें देख रहा था ''


रश्मि के पूरे शरीर में करंट सा लगा, ये सोचते हुए कि उसकी रात भर कि चुदाई को कोई देख रहा था


रश्मि : "कौन, ऐसे कौन आएगा यहाँ ??"..


समीर ने काव्या के रूम कि तरफ देखा तो रश्मि बोली : "तुम क्या कहना चाहते हो, काव्या थी यहाँ, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, वो भला ऐसा क्यों करेगी, उसमे इतनी अक्ल तो है कि वो ऐसा नहीं करेगी ''..


समीर ने कुछ नहीं कहा, वो समझ चूका था कि काव्या के सिवा और कोई इतनी उचाई पर आ ही नहीं सकता था, नीचे से ऊपर आने के लिए कोई भी साधन नहीं था, सिर्फ बालकनी से टापकर ही वहाँ पहुंचा जा सकता था , पर वो ये सब बाते अभी करके रश्मि को नाराज नहीं करना चाहता था..


इसलिए वो अंदर आ गया और उसके बाद दोनों सो गए.


दूसरे कमरे में काव्या और श्वेता भी थोड़ी देर में निश्चिन्त होकर सो गए.


अगले दिन श्वेता जल्दी ही निकल गयी, शायद वो समीर कि शक़ वाली नजरों से बचना चाहती थी.


रश्मि सुबह चार बजे सोयी थी, इसलिए वो अभी तक सो रही थी, पर समीर को जल्दी उठने कि आदत थी, इसलिए वो अपने समय पर उठ गया था.


श्वेता को नौ बजे के आस पास जाता हुआ देखकर उसने मन ही मन कुछ निश्चय किया और काव्या के रूम कि तरफ चल दिया.


काव्या अपने बिस्तर पर लेटी ही थी कि समीर ने दरवाजा खड़काया , काव्या ने जम्हाई लेते हुए दरवाजा खोला, और सामने समीर को खड़ा देखकर उसकी आँखे एकदम से खुल गयी, उसके दिमाग में रात कि चुदाई कि पूरी तस्वीर चलने लगी फिर से और उसकी नजर अपने आप समीर के लंड कि तरफ चली गयी.


काव्या : "अरे अंकल .... मेरा मतलब पापा , आप .... इतनी सुबह ??".


समीर कुछ नहीं बोला और अंदर आ गया , उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था, वो चलते हुए बालकनी में पहुँच गया


काव्या कि तो हालत ही खराब हो गयी, वो वहाँ से अपने कमरे कि बालकनी कि तरफ देखने लगा, और फिर अंदर आकर काव्या के सामने खड़ा हो गया, वो समीर से नजरे नहीं मिला पा रही थी..


समीर : "तुम ही थी न रात को मेरी बालकनी में, तुम्ही देख रही थी न वो सब ....''


काव्या : "क …क़ …क़्यआ …… मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है ''.


वो इतना ही बोली थी कि समीर का एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके बांये गाल पर पड़ा और वो बिस्तर पर जा गिरी.


समीर चिल्लाया : "एक तो गलती करती हो और ऊपर से झूट बोलती हो …''


इतना कहते हुए वो आगे आया और बड़ी ही बेदर्दी से उसने काव्या के बाल पकडे और उसे खड़ा किया


काव्या दर्द से चिल्ला पड़ी , पर समीर पर उसका कोई असर नहीं हुआ , समीर का एक और थप्पड़ उसके कान के पास लगा और उसे कुछ देर के लिए सुनायी देना भी बंद हो गया.


आज तक उसे रश्मि ने भी नहीं मारा था, और ना ही कभी उसके खुद के बाप ने, और आज ये समीर उसे पहले ही दिन ऐसे पीट रहा था जैसे उसकी बरसों कि दुश्मनी हो.


वैसे समीर था ही ऐसा, उसका बीबी से तलाक सिर्फ इसी वजह से हुआ था कि दोनों में झगडे और बाद में मार पीट काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी, समीर ने तो अपनी बीबी को एक-दो बार अपनी पिस्टल से डराया भी था, और यही कारण था उनके तलाक का, घरेलु हिंसा .


पर समीर का ये चेहरा सिर्फ घर तक ही था, बाहर किसी को भी उसके ऐसे बर्ताव कि उम्मीद तक नहीं थी, सोसाईटी में और ऑफिस में तो उसे शांत स्वभाव का सुलझा हुआ इंसान समझा जाता था, पर गुस्सा कब उसके दिमाग पर हावी हो जाए, ये वो खुद नहीं जानता था ..


और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था.


उसके खुद के घर में , काव्या उसके बेडरूम के बाहर छुप कर उसकी चुदाई के नज़ारे देख रही थी, ऐसा सिर्फ उसे शक था, पर फिर भी उसने अपने गर्म दिमाग कि सुनते हुए जवान लड़की पर हाथ उठा दिया, ये भी नहीं सोचा कि उसकी एक दिन कि शादी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, रश्मि क्या कहेगी जब उसे पता चलेगा कि उसकी फूल सी नाजुक लड़की को ऐसे पीटा गया है..


और काव्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है, जिस समीर पापा कि चुदाई देखकर उसकी चूत में भी पानी भर गया था कल रात और वो उनसे चुदने के सपने देखने लगी थी ,वो उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, वो सब रात भर का प्यार नफरत में बदलता जा रहा था अब..


समीर ने एक और झापड़ उसे रसीद किया और फिर बोला : "सच बोल, तू ही थी न रात को वहाँ ''.


काव्या ने आग उगलती हुई आँखों से समीर को देखा और ना में सर हिला दिया..


समीर ने उसे धक्का दिया और उसका सर दिवार से जा लगा, और उसके माथे पर एक गोला सा बन गया , वो दर्द से बिलबिला उठी.


समीर उसके करीब आया और फिर से उसके बालों को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब आकर गुर्राया : "मेरी बात कान खोलकर सुन ले साहबजादी, ये मेरा घर है, और मेरी मर्जी के बिना यहाँ का पत्ता भी नहीं हिल सकता, फिर से ऐसी कोई भी हरकत न करना कि मैं तुझे और तेरी माँ को धक्के मारकर इस घर से निकाल दू , समझी , अगर यहाँ रहना है तो सीधी तरह से रह ''.


और फिर बाहर निकलते हुए वो पीछे मुड़ा और बोला : "ये बात हम दोनों के बीच रहे तो सही है, वरना अंजाम कि तुम खुद जिम्मेदार होगी ''.


ये सारा किस्सा रश्मि को न पता चले, इसकी धमकी देकर समीर बाहर निकल आया ...... अपने बिस्तर पर दर्द से बिलखती हुई काव्या को छोड़कर .


उसने उसी वक़्त श्वेता को फ़ोन करके रोते-२ सारी बात बतायी , उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि समीर ऐसा कुछ कर सकता है उसके साथ , श्वेता ने काव्या को अपने घर पर आने के लिए कहा.


वो नहा धोकर तैयार हो गयी, तब तक रश्मि भी उठ चुकी थी, और सबके लिए नाश्ता बनाकर टेबल पर इन्तजार कर रही थी, समीर और काव्या जब टेबल पर आकर बैठे तो दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखा तक नहीं.


रश्मि ने अपनी बेटी को उदास सा देखा तो उसके पास आयी और तभी उसके माथे पर उगे गुमड़ को देखकर चिंता भरी आवाज में बोली : "अरे मेरी बच्ची, ये क्या हुआ, ये चोट कैसे लगी ''.


काव्या ने नफरत भरी नजरों से समीर कि तरफ देखा, जो बड़े मजे से नाश्ता पाड़ने में लगा हुआ था, और फिर धीरे से बोली : "कुछ नहीं माँ, रात को बिस्तर से गिर गयी थी, ऐसे बेड पर सोने कि आदत नहीं है न, इसलिए ''.


समीर उसकी बात सुनकर कुटिल मुस्कान के साथ हंस दिया..


अपना नाश्ता करने के बाद काव्या अपनी माँ को बोलकर श्वेता के घर पहुँच गयी.


उसके कमरे में पहुंचकर उसने विस्तार से वो सब बातें बतायी जो आज सुबहउसके साथ हुई थी , जिसे सुनकर श्वेता का खून भी खोलने लगा


श्वेता : "साला, कमीना कहीं का , देख तो कितने वहशी तरीके से पीटा है तुझे, ''


उसने काव्या के माथे को छूकर देखा, वहाँ अभी तक दर्द हो रहा था


श्वेता : "यार, जिस तरह से तू समीर के बारे में बता रही है, मुझे तो लगता है कि ये कोई साईको है, अगर जल्द ही इसका कुछ नहीं किया गया तो शायद किसी दिन ये आंटी के साथ भी ऐसा कुछ ना कर दे ''

ये बात सुनते ही काव्या सिहर उठी, उसे अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार था और उसे वो ऐसे पिटते हुए नहीं देख सकती थी


काव्या : "नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी ....''


श्वेता : "वो ऐसी हरकत ना करे, ना ही तेरे साथ और ना ही आंटी के साथ, इसके लिए हमें कुछ करना होगा ''


दोनों ने एक दूसरे को देखते हुए सहमति से सर हिलाया, दोनों ने मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वो कभी समीर को ऐसा कुछ नहीं करने देंगी


उनके अंदाज को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो अपनी बात पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं

दोनों समीर से निपटने कि रणनीति तैयार करने लगी


श्वेता : "देख, अभी कुछ दिन के लिए तो तू बिलकुल चुपचाप रह , तेरा ये सौतेला बाप क्या करता है, कौन-२ उसके दोस्त है, किन बातों से खुश होता है, किनसे नाराज होता है, ये सब नोट करती रह, उसके बाद हम उसके हिसाब से आगे का प्लान बनाएंगे ''.


काव्या : ''पर इससे क्या होगा …??''.


श्वेता : "हमें बस ये सुनिश्चित करना है कि जो आज तेरे साथ हुआ है वो दोबारा न हो, और न ही कभी तेरी माँ के ऊपर ऐसी नौबत आये ''.


काव्या : "और जो उसने मेरे साथ किया है आज,उसका क्या ''


श्वेता : "उसका भी बदला लिया जाएगा , तू चिंता मत कर , तभी तो मैं कह रही हु, उसपर नजर रखने के लिए, हमें उनकी कमजोरी पकड़नी है, ताकि उसका फायदा उठाकर हम अपनी मर्जी से उन्हें अपने इशारों पर नचा सके ''


काव्या कि समझ में उसकी बात आ गयी ..


थोड़ी देर तक बैठने के बाद काव्या वहाँ से वापिस घर आ गयी.


उसने अब श्वेता कि बात मानते हुए समीर के ऊपर नजर रखनी शुरू कर दी ..


वो कोई भी बात कर रहा होता, उसे सुनने कि कोशिश करती, किन लोगो से मिलता है, कहा-२ जाता है, उन सब बातों का हिसाब रखना शुरू कर दिया उसने..


चुदाई के मामले में एक नंबर का हरामी था वो..


दिन में 2-3 बार सेक्स करता था, एक सुबह ऑफिस जाते हुए और फिर रात को सोने से पहले..


उसकी माँ कि मस्ती भरी चीखे पुरे घर में गूंजती थी, जिन्हे सुनकर वो भी गीली हो जाती थी.


समीर का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं था, ऑफिस और घर के बीच चक्कर काटना , बस यही काम था उसका..


बस एक ही फ्रेंड था, उसका वकील दोस्त, लोकेश दत्त.


जिसकी सलाह मानकर समीर ने रश्मि को प्रोपोस किया था..


दोनों दोस्त अक्सर शाम को बैठकर दारु पीया करते थे और अपने दिल कि बाते एक दूसरे से शेयर करते थे..लोकेश अपनी फेमिली के साथ पास ही रहता था उनके घर के ...


ये सब वो उसी बालकनी में बैठकर करते थे जहाँ छुपकर काव्या ने अपनी माँ को चुदते हुए देखा था.


पर पीने के बाद समीर ये भूल जाता कि शायद काव्या अपने कमरे के अंदर बैठकर वो सब बाते सुन रही है जो वो दोनों कर रहे होते हैं और वो दोनों अक्सर चुदाई कि बाते भी करते थे या फिर ऑफिस में आयी किसी नयी लड़की के बारे में या कोर्ट में आये केस में फंसी बेबस लड़कियो और उनकी कारस्तानियों के बारे में..


कुल मिलाकार उनकी हर चर्चा का केंद्र सेक्स ही होता था..


शादी के एक हफ्ते बाद दोनों दोस्त बालकनी में बैठकर बारिश और दारु का मजा ले रहे थे..


लोकेश : "यार आजकल कोर्ट में एक तलाक का केस आया हुआ है , मिया बीबी अपनी शादी के बीस साल बाद तलाक ले रहे हैं, मैं औरत कि तरफ से केस लड़ रहा हु, वो रोज आती है मेरे केबिन में, अपनी 19 साल कि लड़की के साथ,उसका नाम है रोज़ी..यार, क्या बताऊ, इतनी गर्म और लबाबदार जवानी मैंने कही नहीं देखि , उसमे बोबे देखकर मन करता है अपना मुंह उनके बीच डालकर अपनी सारी फीस वहीँ से वसूल लू … हा हा हा ''


समीर भी उसकी बात सुनकर बोला : "ये उम्र होती ही ऐसी है, कच्चे-२ अमरुद लगने जब शुरू होते हैं न जवान शरीर पर, उन्हें दबाने और मसलने का मजा ही कुछ और है ……''

वो आगे बोला : "वैसे मुझे उसके बारे में भी बात करनी थी, उनकी माली हालत ज्यादा ही खराब है, इसलिए रोज़ी कोई जॉब करना चाहती है, अगर तेरे ऑफिस में कोई स्टाफ कि जरुरत है तो देख ले। ।''


समीर (कुछ देर सोचकर) : "हाँ , चाहिए तो सही मुझे, अपनी पर्सनल असिस्टेंट , रश्मि से शादी करने के बाद वो जगह अब खाली हो गयी है, तू उसे मेरे ऑफिस भेज देना, मैं देख लूंगा ''


लोकेश : "देखा, सिर्फ उसके बारे में सुनकर ही तू उसे जॉब देने के लिए तैयार हो गया, है तो तू पूरा ठरकी , हा हा "

और फिर अपना गिलास एक ही बार में खाली करते हुए समीर बोला : "एक तेरे क्लाईंट कि बेटी है, जिसके मस्त शरीर कि बाते सुनकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया है, और एक मेरी बीबी कि बेटी है, साली ऐसी मनहूस है कि उसे देखकर खड़ा हुआ लंड भी बैठ जाए ''


काव्या छुपकर वो सब बातें सुन रही थी, ये पहली बार था जब समीर और लोकेश उसके बारे में बाते कर रहे थे


लोकेश : "यार, ऐसा भी कुछ नहीं है, मुझे तो उसका मासूम सा चेहरा बड़ा ही सेक्सी लगता है ''


उसने अपने लंड के ऊपर अपना हाथ फेरते हुए कहा


दोनों पर शराब पूरी तरह से चढ़ चुकी थी


मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा

मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा


सबसे पहले मैं आपको अपने और अपनी फैमिली के बारे में बता देती हूँ. मेरी उम्र 20 साल है, मेरी अम्मी सईदा की उम्र 42 साल है. मेरी अम्मी घरेलू औरत हैं. अब्बू का नाम हमजा है, उनकी उम्र 45 साल है. वो एक बढ़िया बिजनेसमैन हैं. अब्बू का बिजनेस भी काफी बढ़िया चल रहा है.

मुझे घर में पैसे की जरा सी भी कमी महूसस नहीं होती है. अम्मी अब्बू मेरी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं.


मेरा बड़ा भाई कासिब है, उसकी उम्र 23 साल है. मेरी छोटी बहन अस्मा की उम्र 18 साल है. खूबसूरती में मैं किसी से कम नहीं हूँ. मेरी अम्मी देखने में हमारी मां कम, बड़ी बहन ज्यादा लगती हैं और वे अपनी उम्र से 8-10 साल कम की लगती हैं. मोहल्ले के बहुत लड़के मुझे चोदने की फिराक में रहते हैं.


ये माँ बाप सेक्स कहानी अगस्त की है. उस समय मैंने कालेज में दाखिला लिया ही था और मेरी छोटी बहन अस्मा 12वीं में थी. कासिब कालेज के आखिरी साल में था.


एक दिन रात को जब मैं पेशाब करके अपने कमरे में आ रही थी, तब अम्मी अब्बू के कमरे की लाइट चल रही थी.

मैंने सोचा कि रात को सोते समय अम्मी लाइट बंद करना भूल गई होंगी.


पर तभी मेरे कान में अम्मी की मादक सिसकारियां सुनाई दीं. मैं घबरा गई और सोचने लगी कि अम्मी ऐसे आवाजें क्यों कर रही हैं.


कौतूहलवश ये सब देखने के लिए अम्मी अब्बू के कमरे की तरफ को चली गई और कमरे के अन्दर का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए.


अन्दर कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे थे. अम्मी अब्बू के आगे घोड़ी बनी हुई थीं और अब्बू ने पीछे से अम्मी की चूत में अपना लंड डाल रखा था. वो जोर जोर से अम्मी की चुत में लंड के धक्के लगा रहे थे.


अम्मी भी अपने चूतड़ों को पीछे करके मजे से चुद रही थीं … और ‘अआआह उउउह ओओह ..’ कर रही थीं.


ये सब देख कर मेरे जिस्म में अजीब सी सनसनी फैल गई और मेरी चूत में चीटियां रेंगने लगीं.


मैंने अपना हाथ अपनी कैपरी में डाल लिया. मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई और मैं अपने हाथ से अपनी चूत मसलने लगी.


एक मिनट बाद ही मैंने अपनी कैपरी और कच्छी नीचे सरका दी और पूरी मस्ती में अम्मी अब्बू की चुदाई देखने लगी.


कुछ देर कुतिया बना कर चोदने के बाद अब्बू ने अम्मी की चूत से लंड निकाल लिया.


मैं अब्बू का लम्बा मोटा लंड देख कर डर गई. मैंने सोचा कि क्या लंड इतना बड़ा भी होता है. दूसरी ओर अम्मी की चूत एकदम चिकनी झांट रहित पड़ी थी.


ये सब देख कर मैं बेहद गर्म हो गई थी. मेरे हाथ की उंगलियां लगातार मेरी चूत में चल रही थीं. मेरी चूत पर बहुत घने बाल थे, जिससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था.


अब्बू ने अम्मी की गांड पर हाथ फेर कर कुछ इशारा किया, तो उसके बाद अम्मी चित लेट गईं.


इस पोजीशन में मुझे अम्मी की चूत साफ़ दिख रही थी. उनकी चुत का सुराख खुल बंद हो रहा था. तभी अम्मी के ऊपर चढ़ गए. उन्होंने एक ही झटके में अपना लंड अम्मी की चूत में डाल दिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगे.


तभी मेरे चूतड़ों पर कुछ गर्म गर्म सा चुभने लगा … मैं डर गई.


जब मैंने घूम कर देखा, तो मेरे पीछे मेरा भाई कासिब नंगा खड़ा था और उसका गर्म लंड मेरे नंगे चूतड़ों पर चुभ रहा था. मैं कुछ करती, इससे पहले ही कासिब ने मेरे मुँह पर अपना हाथ रखा और मुझे उठाकर मेरे कमरे में ले जाने लगा.


मैंने कहा- भाईजान, यहां तो अस्मा सो रही है.


ये सुनकर कासिब मुझे अपने कमरे में ले गया और मुझे बिस्तर पर पटक दिया.


अगले ही पल उनसे मेरी टांगों में फंसी मेरी कैपरी और कच्छी टांगों से निकाल दी और मेरा टॉप भी उतार कर मुझे बिल्कुल नंगी कर लिया.


इसके बाद अपने कपड़े उतार कर मेरा भाई खुद भी नंगा हो गया. वो मेरे जिस्म पर अपना हाथ फेरते हुए मेरे होंठ चूसने लगा.


मैं मस्ती में उसके नंगे जिस्म को देखने लगी,


तभी कासिब ने अपने एक हाथ से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- उउउ मेरी हॉट दिलकश … मेरी प्यारी बहना, तू कितनी खूबसूरत है. मैं ऐसे ही बाहर लड़कियों के पीछे पड़ा था और घर में इतना बढ़िया माल है.


ये कहते हुए उसने मेरा एक चूचा मुँह में भर लिया और अपना हाथ नीचे मेरी चूत से लगा कर बोला- उउउह दिलकश तेरी चूत पर तो जंगल उगा है … बहुत बड़ी बड़ी झांटें हैं. तूने कभी अपनी रसीली चूत की सफाई नहीं की क्या?


मैं भाई के मुँह से चूत सुन कर शर्मा गई और चुप रही.


तभी कासिब ने मुझे चूम कर कहा- मेरी प्यारी बहन को शर्म आ रही है. दिलकश अगर तू ऐसे शर्माएगी, तो मजा कैसे ले पाएगी.

वो मेरी चूत में अपनी उंगली डालने लगा.


मैंने कासिब का हाथ पकड़ लिया और धीरे से कहा- भाई, मेरे यहां बहुत खुजली हो रही है.

कासिब मेरा हाथ अपने लंड पर रख कर बोला- आह दिलकश … देख तेरी चूत की खुजली मिटाने के लिए तेरे भाई का लंड कैसे उतावला हो रहा है.


मैं भी शर्म छोड़ कर बोली- भाई, तो फिर जल्दी से ठोक दो अपना लंड अपनी प्यारी और खूबसूरत छोटी बहन की चूत में … और मेरी चुत की आग बुझा दो.

ये कह कर मैंने जोर से कासिब का लंड दबा दिया.


फिर कासिब ने कहा- दिलकश, तूने अम्मी की चूत देखी है … अम्मी की चूत एकदम चिकनी थी. तेरी चूत पर इतने ज्यादा बाल हैं.

मैंने कहा- भाई, कल सुबह सबसे पहले मैं अपनी चूत के बाल साफ कर लूंगी.

कासिब बोला- मेरी प्यारी बहना, तो क्या अभी मजा नहीं करना है.


मैं चुप रही.


कासिब मुझे उठाकर बाथरूम में ले गया और मुझे फर्श पर लिटा दिया. फिर उसने बाथरूम में रखी अपनी शेव करने वाले रेजर से मेरी चूत साफ की और मुझे लेकर फिर से बिस्तर पर आ गया.


बिस्तर पर आकर कासिब ने मेरी दोनों टांगें खोल दीं और मेरी चूत पर एक लम्बा चुम्मा लिया. कासिब के होंठों की गर्मी से मेरी चूत पिघल गई … और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.


मैं मदहोश होकर कासिब का मुँह अपनी टांगों में भींचने लगी और ‘अआह भाई उउह ओहह भाई ..’ करने लगी.

तभी मेरी चूत से रज निकल गया और मेरी मस्ती कुछ शिथिल हो गयी.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मुझे लंड चूसने को बोला. मैंने कासिब का लंड अपने होंठों से हटा कर लंड चूसने से मना कर दिया.


कासिब ने जोर से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- साली छिनाल रंडी कुतिया … मेरा लंड चूसने से मना करती है. चल भाग यहां से … और साली रंडी जाकर किसी रंडीखाने में बैठ कर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा कर अपनी और अपने परिवार की इज्जत बढ़ा.


मैंने भी गुस्से से कहा- साले बहनचोद … अभी तू अपनी बहन को चोद कर परिवार का बहुत बड़ा नाम कर रहा है. मैं अभी ऐसे नंगी ही अम्मी के पास जाकर तेरी करतूत बताती हूँ.

कासिब मुस्करा कर बोला- जा साली रांड … वहां तेरा बाप तेरी चूत का भोसड़ा बनाने के लिए अपना लंड हिला रहा है.

 

मैं कासिब की बात सुनकर दंग रह गई और बोली- भाई ये तू क्या बोल रहा है … तुझे पता भी है, वो मेरे अब्बू हैं?


कासिब मेरा चूचा मसल कर बोला- दिलकश, जब तू मूतने के लिए बाथरूम गई थी, तब मैं अम्मी की चुदाई कर रहा था और मैं और अब्बू दोनों बहुत दिन से तेरी और अस्मा की चुदाई करने की सोच रहे हैं. पर आज मौका मिला है. और अम्मी अब्बू दोनों अपना इंतजार कर रहे हैं. अम्मी अब्बू के सामने पहले मैं तेरी चूत की सील तोडूंगा, फिर अब्बू तेरी … और मैं अम्मी की चुदाई करूंगा.

मैं अभी कुछ बोल पाती कि कासिब मुझे हाथ पकड़ कर अम्मी अब्बू के कमरे में ले गया.


कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे बैठे मेरा इंतजार कर रहे थे. मेरा नंगा जिस्म देख कर अब्बू के मुँह में पानी आ गया और अब्बू मेरे करीब आ गए.


वो मेरा चूचा मसल कर बोले- उन्ह … मेरी प्यारी बिटिया, तुझे चोदने को मेरा लंड बहुत बेचैन है.

ये कहते हुए अब्बू ने नीचे हाथ ले जाकर मेरी चूत को मसल दिया.


मैं ‘आआहहह …’ करके रह गई.

कासिब अम्मी से बोला- साली रंडी, तेरी बेटी अपने भाई का लंड चूसने से मना कर रही है … बोल इससे कि पहले ये मेरा और अब्बू का लंड चूसे, वरना हम दोनों बाप बेटा एक साथ इसकी चूत में लंड डाल कर साली रंडी की चूत का भोसड़ा बना देंगे.

 

अम्मी ये सुनकर भाई और अब्बू के बीच में बैठ गईं और कासिब और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगीं.


भाई और अब्बू दोनों मेरे चूचे मसलने और चूसने लगे. मैं ये सब देख कर मस्त हो गई थी और मदहोशी में ‘अअअआआ अब्बू … उन्ह भाई … आहहह ..’ करने लगी.


अम्मी कासिब और अब्बू का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश मेरी प्यारी बिटिया, अब तू भी अपने भाई और अब्बू का लंड चूस, वरना ये दोनों तेरी चूत को ऐसे फाड़ेंगे कि फिर तू कभी चुदने की बात भी नहीं सोचेगी.


उसी समय भाई ने झट से अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मैंने जब कासिब का लंड अपने मुँह में लिया, तो कासिब के लंड की मादक महक मुझे गर्म कर गई.


जब भाई के लंड की खुशबू मेरी सांसों में मिली, तो मैं मदहोश होकर अपने भाई कासिब के लंड को चूसने लगी. तभी अब्बू ने भी अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया. मैं अपने भाई और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगी.


कासिब का लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था. कासिब का लंड चूसने में मुझे मजा भी ज्यादा आ रहा था.


कुछ देर बाद अब्बू मेरे मुँह में झड़ गए और मैं अब्बू का वीर्य पी गई.


फिर कासिब और अब्बू का लंड छोड़ कर मैं बोली- भाई, आपका लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा है.


अम्मी ने कहा- दिलकश, तेरे अब्बू अब ज्यादा उम्र के हो गए हैं. अब तो तेरे अब्बू मेरी चुदाई भी ढंग से नहीं कर पाते हैं. तू तो अभी जवान है … इसलिए तेरी चूत की खुजली तो सिर्फ कासिब का लंड ही शांत कर सकता है.


मैंने कहा- अम्मी, भाई का लंड तो बहुत बड़ा है … और मुझे इससे चुदवाने में बहुत डर भी लग रहा है.


अम्मी ने मुझे ढांढस बंधाते हुए कहा- दिलकश तू डर मत, जब कासिब का लंड तेरी चूत में घुसेगा, तब तुझे थोड़ी देर ही दर्द होगा. फिर तो तेरे भाई का लंड, तेरी चूत में खुद ही अपना रास्ता बना लेगा और तुझे बहुत मस्त मजा आएगा.


ये बोल कर अम्मी ने कासिब को कहा- साले मादरचोद … अब जल्दी से अपनी बहन को चोद कर मादरचोद के साथ साथ बहनचोद भी बन जा.


अम्मी ने मेरी दोनों टांगें खोल कर कासिब का लंड मेरी चूत के सुराख पर रख दिया.


अब्बू ने कहा- कासिब … अब जल्दी से तू दिलकश की चुदाई कर … तेरे बाद मैं भी अब अपनी बेटी को अपनी बेगम बनाने को उत्सुक हूँ. फिर हम सब घर में शौहर बीवी की तरह रहेंगे और तेरी मां और दोनों बहनें तेरी और मेरी बीवी होंगी. तू अपनी मां और बहन का शौहर बन जाएगा.


ये सुनकर कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रख कर अभी धक्का लगाने ही वाला था कि तभी अस्मा कमरे में आ गई और बोली- अब्बू, आपने और भाई ने दीदी और अम्मी को तो अपनी जोरू बना लिया … पर मेरा क्या होगा?


अस्मा को देख कर हम सब चौंक गए. अस्मा कासिब का लंड पकड़ कर बोली- भाई, मुझे भी आपकी और अब्बू दोनों की बीवी बनना है.


वो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई. अस्मा का मस्त चिकना जिस्म देख कर कासिब और अब्बू, अस्मा पर टूट पड़े.


अम्मी ने कहा- सालों, ये रंडी कहीं भागी नहीं जा रही. जरा सब्र से काम लो, इसकी चूत का भोसड़ा भी तुम दोनों के लंड ही बनाएंगे.


ये बोल कर अम्मी, फिर से अब्बू और कासिब का लंड चूसने लगीं. अब्बू और कासिब मेरे और अस्मा के चूचे मसलने लगे.


कमरे में मादक आवाजों का संगीत गूंजने लगा … अअअआआ उन्ह ओओओहह की सिसकारियां गूंजने लगीं.


अम्मी, अब्बू और कासिब का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश, चल अब तू अपनी टांगें खोल कर लेट … और अस्मा तू घोड़ी बन जा.


जब मैं टांगें खोल कर लेट गई और अस्मा घोड़ी बन गई.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रखा और दूसरी तरफ अब्बू ने अपना लंड अस्मा की गांड से लगा दिया.


कासिब ने एक धक्का लगाया और उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में फंस गया और मैं ‘आआहहह मर गई ..’ चिल्ला उठी.


तभी कासिब ने फिर से एक धक्का लगा दिया और उसका लंड मेरी चूत में घुसता चला गया.

मैं दर्द से तड़पने लगी.


कासिब ने मेरे दोनों चूचे अपने हाथ में ले लिए और जोरों से मसलने लगा. चूचे मसलने के साथ ही वो धीरे धीरे लंड के धक्के भी लगाने लगा.

कुछ ही धक्कों में कासिब का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और मुझे भी दर्द के साथ साथ मजा आने लगा.


मैं ‘अआआ उन्ह …’ करके अपने चूतड़ों उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत में लेने लगी.


दूसरी तरफ अब्बू ने अस्मा की गांड में अपना लंड डाल दिया और अस्मा भी दर्द से चिल्लाने लगी.


मगर मुझे मजा लेते देख कर वो बोली- आपा, तुझे तो बहुत मजा आ रहा है … और यहां मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा है. मुझे जरा सा भी मजा नहीं आ रहा.


अम्मी ने कहा- अस्मा, गांड मारने और मरवाने में मजा नहीं आता. असली मजा तो चूत चुदवाने में आता है.


उन्होंने आगे कहा- अभी कासिब के लंड से दिलकश की चूत की सील टूटी है. कुछ देर में दिलकश की चूत अपना रज छोड़ देगी तो कासिब का लंड दिलकश की चूत में अपना रास्ता अपने आप बना लेगा. उसके बाद जब कासिब तेरी चूत की सील तोड़ कर तेरी चुदाई करेगा, तब तुझे भी दिलकश जैसे मजा आएगा.


अस्मा ‘उन्ह आंह ..’ करते हुए अपनी गांड में अब्बू के लंड को झेलने लगी.


अम्मी ने अब कासिब से कहा- साले मादरचोद … पहले मेरा बेटा बना, फिर शौहर बना और अब साले मेरी सौतन बनी बेटी को चोद कर मेरा जमाई भी बन गया. साले अच्छे से चोद अपनी बहन को वरना तेरी गांड पर लात मारूंगी.


ये सुनकर कासिब जोर जोर से मुझे चोदने लगा.


यही कहानी सेक्सी लड़की की आवाज में सुन कर लुत्फ़ उठायें.


मैं अपने चूतड़ों को उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत की जड़ तक लेते हुए मजा लेने लगी- अअअआ … उन्ह … ओओओहह भाई … आह और जोर से …


“चोद दे अपनी बहन को … आंह साले भैन के लौड़े और जोर से चोद … तेरा लंड तेरी बहन की चूत में आखिरी छोर तक जा रहा है. आह मुझे बहुत मजा आ रहा है साले जोर से चोद मुझे … अअअआआ साले बहनचोद च..चोओओद.” यही सब कहते हुए मैं एकदम से अकड़ उठी और मेरी चूत से रज निकल गया.


मैं कासिब को लंड निकालने को बोलने लगी.

मगर कासिब पर तो जैसे मुझे चोदने का भूत सवार था. वो मुझे दनादन चोदने लगा और मेरे दोनों चूचे मसलने लगा.

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

बेटी ने खुद सील तुड़वायी


जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी।  मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।

एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।


चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।

मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।

चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।


मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।


उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।


अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।


उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।

मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।


मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?

मैंने उससे पूछा।

वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!

वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।


मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।

वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?

मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।


दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।


मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’

अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।


उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।

मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?

वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।

मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।


मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?

मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!


मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’

बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।


उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।

रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।


इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।

वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।


मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।

जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।

वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।


हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.

वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।

मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।


मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।

मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।


मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.

और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।


मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।


एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?

वो बोली- हाँ पापा?

मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?

दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?

मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?


वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।


उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।


मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।


मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?

मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?


मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।

तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.


बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।

19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।

मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।

वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!

वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।


उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।


मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।


वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया।

मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।


मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?

वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।


मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।


तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.

और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।

पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।


फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।

मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।

मैं तो खुशी से उछल पड़ा।


जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।


मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!

कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।

वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।

मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।


मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।

फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।


मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।

वो बोली- जी पापा?

मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।

वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।


जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।

बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।


मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।


तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।


बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।


फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?

वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।

मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?

वो बोली- पता नहीं पापा।


मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।


मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।


और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!

उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।


वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!

मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।

वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।


मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।

एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।


और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।

उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।

मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!


मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.


मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।

जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.


मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।


उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।


थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?

मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?

वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।


वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।


मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।

उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।


मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!


मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।

फिर बाहर आई।

मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।

तब कहीं वो सहज हुई।

शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।

मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.

बेटी के साथ सामूहिक चुदाई


 

बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

मेरा नाम है माहिरा। मैं २५ साल की हूँ। मेरी शादी अभी पिछले साल ही हुई है। मेरी अम्मी आबिदा खातून हैं वह ४५ साल की हैं और बड़ी मस्त जवान हैं। अपनी बॉडी मैन्टन कर रखी है और वह ३०/३२ साल की ही लगतीं हैं। हां मन से वह २० साल से ज्यादा उम्र की नहीं लगती हैं।
खूब हंसी मजाक करतीं हैं गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं और हमारे साथ बैठ कर पोर्न फिल्म देखतीं हैं। फिल्म देखते हुए भी बोलती रहतीं है इसका लण्ड मोटा है उसका पतला है इसकी चूत टाइट है उसकी ढीली हो चुकी है।

ये बुर चोदी चुदवाकर ही जाएगी वगैरह वगैरह ? हमारे साथ मेरी भाभी भी हैं समीना। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी पर मेरा भाई विदेश में काम करता है . भाभी यहाँ हमारे साथ ही रहतीं हैं। मैं भी खूबसूरत हूँ और मेरी भाभी भी। हम दोनों के बूब्स बड़े बड़े हैं। चूतड़ उभरे हुए हैं और जांघें मोटी मोटी हैं। इत्तिफाक से हम तीनो ही लण्ड की जबरदस्त शौक़ीन हैं।

मैं १९ साल की उम्र में ही अम्मी से खुल गयी थी।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

एक दिन मैं अपनी सहेली से फोन पर बात कर रही थी। मैं बोली – हाय बोल साइमा, माँ की चूत, क्या हो रहा है ? ,,,,,,,,,,,, क्या बात करती है तू ,माँ की चूत, ऐसा भी कहीं होता है। उसने तेरी गांड मार दी और तू खड़ी खड़ी देखती रही, माँ की चूत।

मैं होती तो उसकी माँ चोद देती, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,? अरे यार मेरी सुन, उसकी गांड में मैं पेल दूँगी लण्ड, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,मेरी माँ की न पूंछो वो तो, लौड़े से, चुदवाती रहती है।,,,,,,,,,,,,? तेरी भी माँ भी यही करती है बाप रे बाप, माँ की चूत ,,,,,,,,,,,,,,,,? कोई बात नहीं मैं सब ठीक कर दूँगी माँ की चूत। अम्मी ने मुझे सुन लिया उसे पक्का यकीन हो गया की मेरा तकिया कलाम है माँ की चूत।

एक दिन मैं अपने दोस्त को चुपके से घर ले आयी। मैं समझी की अम्मी घर पर नहीं हैं। मैं उसे नंगा करके उसका लण्ड हिलाने लगी। फिर मैं भी नंगी हो गयी। वह मेरी चूँचियाँ और चूत सहलाने लगा। मुझे मस्ती चढ़ गयी तो मैं जबान निकाल कर लण्ड चाटने लगी। इतने में अम्मी आ गयी। उसे देख कर मेरी तो गांड फट गयी। उसका लण्ड सिकुड़ गया।

पर अम्मी मुस्कराते हुए बोली हाय दईया तू इतनी बड़ी हो गयी है भोसड़ी की अभी तक ठीक से लण्ड चाटना भी नहीं जानती ? मैं बताती हूँ, लौड़े से, की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? इतनी बड़ी बड़ी चूँचियाँ और गांड लिए घूम रही है तू, लौड़े से, और इतने दिनों के बाद आज एक लौड़ा तुझे मिला है, लौड़े से ?

अभी तक क्या तू अपनी माँ चुदा रही थी ? मुझे देख मैं लण्ड चाट कर बताती हूँ तुझे की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? अम्मी लण्ड चाटने लगीं। फिर अम्मी ने उससे पूंछा बेटा मेरी बिटिया की बुर लेते हो ? वह कुछ बोला नहीं। तब अम्मी ने कहा कोई बात नहीं बेटा, आज पहले मेरी बिटिया की बुर ले लो फिर उसकी माँ का भोसड़ा चोद लेना ?बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

तेरी बेटी की माँ चोदूँगी सासू जी

तेरी माँ की चूत, बहन का लण्ड

ऐसा बोल कर अम्मी ने लण्ड मेरे मुंह में घुसा दिया। मैं लण्ड चूसने लगी। अम्मी मुझसे इतना ज्यादा खुल जायेगीं यह मुझे नहीं मालूम था। अम्मी ने फिर आहिस्ते से लण्ड मेरी चूत में पेल ही दिया। मैं पहले चिल्लाई तो लेकिन फिर मजे से चुदवाने लगी। थोड़ी देर बाद अम्मी ने भी लण्ड पेल लिया अपनी चूत बोली देख माहिरा ऐसे चुदवाई जाती है बुर ? अब उसे क्या मालूम की मैं कई बार कई लड़कों से चुदवा चुकी हूँ। आज से तू अपनी बुर क्या अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदाना सीख ले ? मैंने मन में कहा अब आएगा जवानी का असली मज़ा ?

अम्मी कुछ ज्यादा ही मस्ती में थीं। वह बोली माहिरा तेरी माँ की चूत बहन चोद आ गया न तुझे माँ चुदाना ? मैंने कहा हां आबिदा खातून भोसड़ी की तुझे भी आ गया बिटिया की बुर चुदाना। वह मेरे मुंह से गालियां सुनकर बहुत खुश हुई और मेरे गाल थपथपाकर बोली हां बेटी इसी तरह लिया जाता है चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ?

एक दिन मैं जेसिका आंटी के घर चली गयी, माँ की चूत ? मैंने कहा अम्मी अरे वह तो बड़ी मजेदार हैं और बड़ी गहरी मजाक करतीं है, माँ की चूत ? अम्मी ने कहा – तुझे मालूम नहीं है लौड़े से की जेसिका बुर चोदी सेक्स की बहुत बड़ी खिलाड़ी है। उसकी बेटी भी उसका साथ देती है। जेसिका लण्ड अपनी बेटी की चूत में दानादन्न घुसेड़ती है और उसकी बेटी भी अपनी माँ के भोसड़ा में एक के एक बाद ठोंकती जाती है। दोनों खूब खुलकर गली गलौज करती है और खूब एन्जॉय करतीं हैं। मैंने मन में कहा एक मैं ही नहीं हूँ माँ चुदाने वाली बेटी और भी हैं बेटियां हैं जो अपनी माँ चुदवाती हैं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

मेरी समीना भाभी बड़ी मजेदार भी हैं और खूबसूरत भी। एक दिन हम तीनो बैठी हुई बातें कर रहीं थी। मेरे मुंहसे निकला अरे समीना भाभी तुम तो बहुत शर्माती हो ? शरमाओगी तो फिर लण्ड का मज़ा कैसे ले पाओगी ? वह बोली हाय दईया नन्द रानी मैं लण्ड किसी ने नहीं शर्माती।

मैं तो सबके लण्ड से बड़ी मोहब्बत करती हूँ। मैं जब कॉलेज में थी तो खूब लण्ड पकड़ा करती थी। घर में लोगों के लण्ड पकड़ती थी। सबसे पहले मैंने मामू लण्ड पकड़ा फिर उसके दोस्त का लण्ड पकड़ा और एक दिन मैंने खालू का लण्ड पकड़ लिया।

इसी तरह एक दिन जीजू का लण्ड भी मेरे हाथ लग गया। मैं तो दिन रात लण्ड के सपने देखती थी और आज भी देखती हूँ। इसीलिए मुझे ‘लण्ड’ कहने की आदत पड़ गयी। मैंने मजाक में कहा समीना भाभी कभी अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड पेला तुमने ? वह बोली हां बिलकुल पेला।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

भाभी ने बताया की एक दिन की बात है। मैं जब कमरे में घुसी तो देखा की अम्मी पड़ोस के शब्बीर अंकल के पैजामे में हाथ डाल कर उसका लण्ड हिला रहीं हैं।

मैं वहां से घूम कर जाने लगी तो अम्मी ने कहा अरी भोसड़ी की समीना इधर आ तेरी माँ की चूत ? इतना शरमायेगी तो जवानी का मज़ा कैसे ले पायेगी ? इधर आ मरे पास। मैं जब पास में गयी तो अम्मी ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे लण्ड दिखाते हुए बोली लो बेटी समीना अंकल का लण्ड चाटो ?

अंकल का लंबा चौड़ा लण्ड देख कर मैं भी ललचा गयी। मेरा हाथ अपने आप बढ़ गया और मैं लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लण्ड बहन चोद और सख्त हो गया। अम्मी ने पूंछा कैसा लगा लण्ड तुम्हे समीना ? मैंने कहा अम्मी ये तो बिलकुल खालू के लण्ड की तरह है। अम्मी ने कहा हाय दईया तो तू बुर चोदी खालू का लण्ड चूसती है। तेरे खालू का लण्ड खड़ा होने पर थोड़ा टेढ़ा हो जाता है न समीना।

मैंने कहा हां अम्मी तुम ठीक कह रही हो। वह बोली जानती हो समीना तेरा खालू तेरी माँ का भोसड़ा चोदता है। मैंने भी जोश में आकर कह दिया अम्मी मेरा खालू तेरी बिटिया की भी बुर लेता है। अम्मी ने मेरा गाल चूम लिया और बोली कोई बात नहीं बेटी ये चूत बुर चोदी चुदवाने के लिए ही होती है।

एक दिन समीना भाभी जाने किस मूड में थीं।

वह आई और बोली :- माहिरा, तेरी माँ की चूत, तेरी भाभी की बुर ?

मैं भी मूड में आ गयी तो मैने भी जबाब दे दिया।

मैंने कहा :- भाभी, तेरी नन्द की बुर, तेरी सास का भोसड़ा ? तब तक मेरी अम्मी भी आ गयी।

वह बोली :- बहू, तेरी नन्द की माँ का भोसड़ा, तेरी तेरी माँ की बिटिया की बुर ?

फिर हम सब बड़ी जोर से हंसने लगीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

उसी दिन शाम को मेरा ससुर आ गया और भाभी का जीजा भी। मैंने कहा हाय दईया लो दो लण्ड का

इन्तज़ाम हो गया है। आज मैं अपनी भाभी की बुर तो चोद लूंगी और चोद लूंगी उसकी सास का भोसड़ा ? तब तक भाभी बोली नहीं मैं चोदूँगी अपनी सास का भोसड़ा और अपनी नन्द की बुर ?

अम्मी ने कहा हाय दईया तुम सब लोग ऐसा क्यों कह रही हूँ। फिर तो मैं भी चोदूँगी बिटिया की बुर और बहू की चूत ? लेकिन तुम लोग परेशान न हो मैंने फ़ोन कर दिया है और आज ही मेरा देवर दुबई से आ रहा है। वो चोदेगा तुम दोनों की चूत ? तब आएगा चुदाई का घनघोर मज़ा ?

कुछ देर बाद सब लोग इकठ्ठा हो गये। मेरा ससुर तस्कीम आ गया उधर भाभी का जीजू सकीब मियां भी आ गया। मैं दोनों को जानती थी लेकिन लण्ड इनमे से किसी का नहीं जानती थी। मेरी इच्छा बढ़ने लगी की जल्दी से जल्दी इनके लण्ड पकड़ कर देखूं। तभी किसी ने घंटी बजा दी। अम्मी ने दरवाजा खोला और बोली हाय उस्मान आ जा जल्दी से हम लोग तेरा ही इंतज़ार कर रहीं हैं।

अम्मी ने उसे हम सबसे मिलवाया। मैं तो समझती थी की कोई ४५/५० साल का आदमी होगा पर वह तो मस्त जवान लड़का निकला उम्र शायद २५/२६ के लगभग होगी। मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगीं। यही हाल भाभी जान भी था। अम्मी ने फटाफट ड्रिंक्स का इंतज़ाम कर दिया और हम लोग मस्ती से दारू का मज़ा लेने लगे।

चुदाई के खेल के पहले अगर थोड़ा नशा वगैरह कर लिया जाये तो चुदाई एक मज़ा दुगुना हो जाता है।अब जब हमें अय्यासी करनी है तो फिर अच्छी तरह क्यों न की जाए ? दारू चालू हो गयी और नशा भी चढाने लगा। मस्तियाँ भी छाने लगीं और दिमाग में खुराफात भी चलने लगी। मेरी नज़र ससुर के लण्ड पर जैम गयी।

मैं सोंचने लगी की इसका लण्ड कैसा होगा, कितना बड़ा होगा, कितना मोटा होगा, कैसे चोदता होगा। मैंने कभी उसका लण्ड न देखा और मन पकड़ा ? मैंने फिर सोंचा की आज तो मौक़ा है। आज तो मुझे चूकना नहीं चाहिए। बस मैं ससुर के पैजामे का नाड़ा बड़े प्यार से खोलने लगी। उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। किसी ने कुछ कहा नहीं। बस मैंने हाथ अंदर घुसेड़ दिया। तब भाभी ने भी अपने जीजू के पैजामे के अंदर हाथ घुसेड़ दिया।

मैं तो बड़ी बेशर्मी से ससुर का लण्ड अंदर ही अंदर सहलाने लगी। लण्ड बहन चोद खड़ा होने लगा। तब मुझे अहसास हुआ की लण्ड बड़ा जबरदस्त है।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

सबसे पहले मैंने ही ससुर का लण्ड बाहर निकाल लिया, उसका सुपाड़ा चूमा और अम्मी को लण्ड दिखाते हुए बोली लो अम्मी मेरे ससुर का लण्ड पियो। अम्मी ने मुस्कराकर लण्ड मेरे हाथ से ले लिया। तब तक भाभी बोली अरे मेरी बुर चोदी नन्द रानी लो तुम मेरे जीजू का लण्ड पियो ? उधर अम्मी ने बहू को अपने पास इशारे से बुलाया और कहा बहू ले तू पी ले मेरे देवर का लण्ड ? ये भोसड़ा का तेरा ससुर ही है। फिर एक एक करके हम तीनो ने अपने अपने कपड़े खोल डाले और एकदम नंगी हो गयीं तो महफ़िल में आग लग गयी।

उधर मरद भी मादर चोद तीन के तीनो एकदम नंगे हो गए और उनके लण्ड टन टनाने लगे। अम्मी को मेरे ससुर का लण्ड पसंद आ गया। पसंद तो मुझे भी आ गया पर मैं चाहती हूँ की पहले वह मेरी माँ चोद ले फिर मुझे चोदे। मैं तो भाभी के जीजू के लण्ड में खो गयी। सकीब के लण्ड से मुझे भी मोहब्बत होने लगी। मैं जबान निकाल कर लण्ड का टोपा चाटने लगी। भी मस्ती से उस्मान का लौड़ा हिला हिला आकर पहले तो बड़ी देर तक देखतीं रहीं और फिर उसे मुंह में घुसेड़ कर चूसने लगीं।

एक ज़माना था की जब की मरद का लण्ड खड़ा होते ही चूत में घुस जाता था और वह थोड़ी देर तक चोद चाद कर झड़ जाता था। पर अब ज़माना बदल गया है। अब तो लण्ड खड़ा होते ही लड़कियों के मुंह खुल जातें हैं। लण्ड सीधे मुंह में घुस जाता है या यूँ कहें की लड़कियां सबसे पहले लण्ड मुँह में लेतीं हैं फिर कर कहीं। आजकल तो लण्ड चाटने, लण्ड चूसने का और लण्ड पीने का समय है।

झड़ता हुआ लण्ड पीना और मुठ्ठ मार कर लण्ड पीना आजकल का फैसन हैं।

थोड़ी देर में अम्मी ने लण्ड अपने भोसड़ा में घुसा लिया और यह भकाभक चुदवाने लगीं। अम्मी तो वास्तव में चुदवाने में बड़ी बेशर्म है। हम दोनों भी बेशर्म हो गयीं। मैंने भी सकीब का लण्ड घुसेड़ा अपनी चूत में और गचागच चुदवाने लगी। अब तक तो मुझे चुदवाने का अच्छा ख़ासा तज़ुर्बा हो चुका था। मेरी समीना तो ऐसे चुदवाने लगीं जैसे की वह एक मंजी हुई रंडी हों।

अम्मी को मस्ती सूझी तो वह बोली ;- हाय बुर चोदी समीना तू बहन चोद अपनी नन्द की माँ चुदवा रही है।

समीना भाभी बोली :- हां सासू जी मुझे अपनी नन्द की माँ चुदाने में मज़ा आ रहा है पर तू भी तो अपनी बिटिया की भाभी की बुर चुदवा रही है, हरामजादी।

मैंने कहा :- अरे भाभी तेरी सास भोसड़ी की अपनी बिटिया की बुर देखो न कितनी शिद्दत से चुदवा रही है और तेरी नन्द की बुर में लौड़ा घुसेड़ने के लिए कितनी बेताब हो रही है ? इसकी तो बहन की बुर ?

अम्मी ने फिर कहा – बहू, तेरी नन्द की बुर चोदी बुर बहुत टाइट है इसमें कोई मोटा लण्ड पेलना ?

इसी तरह की मस्ती करती हूँ हम तीनो धकापेल ऊपर से नीचे तक आगे से पीछे तक चुदवाने में लगीं थीं। अचानक लण्ड की अदला बदली होने लगी। मेरे ससुर ने अम्मी की बुर से लण्ड निकाल कर भाभी की बूर में घुसा दिया। उस्मान ने भाभी की बुर से लण्ड निकाल कर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। सकीब ने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल कर अम्मी के भोसड़ा में ठोंक दिया। लण्ड बदलते ही चुदाई का मज़ा दूना हो गया।

एक दिन मेरी खाला जान आ गयी। उसकी शादी शुदा बेटी भी उसके साथ थी। रात को खूब झमाझम बातें हुईं। मैंने भी खूब खुल कर बातें की और अपनी कहानी सुनाई। अम्मी ने भी कुछ छुपाया नहीं और मेरी भाभी जान भी खुल कर बोलीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

तभी उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा, यह सब तो मेरे घर मे भी होता है। एक दिन मेरा अब्बू मेरी ससुराल आया और मेरी नन्द की बुर में रात भर लण्ड पेला। सवेरे जब वह जाने लगा तो नन्द बोली अरे अंकल कहाँ जा रहे हो ? आज तो मेरी माँ चोदो। मुझे चोदा है तो मेरी माँ चोद कर जाओ न प्लीज। उधर मेरा ससुर भोसड़ी का बड़ा हरामी है।

एक दिन लण्ड खोल कर मेरे सामने खड़ा हो गया बोला बहू एक बार इसे भी पकड़ कर देख लो न ? अच्छा लगे तो आगे भी पकड़ती रहना ? उसका साला ८” लण्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। लण्ड का सुपाड़ा साला तोप का गोला लग रहा था। फिर क्या मैंने पकड़ ही लिया। उस दिन मैंने जब उससे चुदवाया तो पता चला की बड़ी लोगों से चुदवाने में कितना मज़ा आता है।

इस तरह एक बार हमने खाला और उसकी बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया। खाला भी बहुत बड़ी चुड़क्कड़ औरत हैं।

कहा :- खाला जान तेरी बहन का भोसड़ा ? तू तो बिलकुल हम लोगों जैसी ही है।

वह बोली :- माहिरा, तेरी माँ की बिटिया की बुर ? तेरी खाला की बेटी भी बहन चोद लण्ड की बड़ी शौक़ीन है। जाने कहाँ कहाँ के लण्ड अपनी माँ की चूत में घुसेड़ा करती है ?

तब तक उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा तेरी खाला भी भोसड़ी वाली एक से एक बेहतर लण्ड अपनी बेटी की चूत में पेलती है ? बड़ी हरामजादी है तेरी खाला और तेरी खाला का भोसड़ा ?

इस मस्ती का रिजल्ट यह है की पिछले कई सालों से हमारे घर में कोई परेशानी नहीं है। कभी कोई बीमार नहीं हुआ और कभी किसी डॉक्टर की जरुरत नहीं पड़ी।

पापा ने चूत में अपना 12 इंच पूरा लौड़ा घुसा दिया

पापा ने मेरे चूत में अपना 12 Inch पूरा लौड़ा घुसा दिया


मेरा नाम मधु गुप्ता है. मेरी उम्र लगभग 21 वर्ष की हो चुकी है. मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सूना रही हूँ. तब मैं अपने मामा के यहाँ रह कर पढ़ाई करती थी. मेरी उम्र १९ वर्ष की थी. मेरा घर गाँव में था. मेरे कॉलेज में छुट्टी हो गयी थी. मैंने अपने पापा को फ़ोन किया और कहा कि वो आ कर घर ले जाएँ. मेरे पापा मुझे लेने आ गए. हम दोनों ने रात नौ बजे ट्रेन पर चढ़ गए. ट्रेन पैसेंजर थी. रात भर सफ़र कर के सुबह के ६ बजे हम लोग अपने गाँव के निकट उतरते थे. उस ट्रेन में काफी कम पैसेंजर थे.

उस पूरी बोगी में सिर्फ २०-२२ यात्री रहे होंगे. उस पैसेंजर ट्रेन में लाईट भी नहीं थी. जब ट्रेन खुली तो स्टेशन की लाईट से पर्याप्त रौशनी हो रही थी. लेकिन ट्रेन के प्लेटफोर्म को छोड़ते ही पुरे ट्रेन में घना अँधेरा छा गया. हम दोनों अकेले ही थे. करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन एक सुनसान जगह खड़ी हो गयी. यहाँ पर कुछ दिन पूर्व ट्रेन में डकैती हुयी थी. पूरी ट्रेन में घुप्प अँधेरा था और आसपास भी अँधेरा था. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

हम दोनों को डर सा लग रहा था. पापा ने मुझसे कहा – बेटी एक काम कर. ऊपर वाले सीट पर सो जा. मैंने कम्बल निकाला और ऊपर वाले सीट पर लेट गयी. लेकिन ट्रेन लगभग १५ मिनट से उस सुनसान जगह पर खड़ी थी. तभी कुछ हो हंगामा की आवाज आई. मैंने पापा से कहा – पापा मुझे डर लग रहा है. पापा ने कहा – कोई बात नहीं है बेटी, मैं हूँ ना.

मैंने कहा – लेकिन आप तो अकेले हैं पापा, यदि कोई बदमाश आ गया और मुझे देख ले तो वो कुछ भी कर सकता है. आप प्लीज ऊपर आ जाईये ना. पापा – ठीक है बेटी. पापा भी ऊपर आ गए और कम्बल ओढ़ कर मेरे साथ सो गए. अब मैं उनके और दीवार के बीच में आराम से छिप कर थी. अब किसी को पता भी नहीं चल पायेगा कि इस कम्बल में कोई लड़की भी है. थोड़ी ही देर में ट्रेन चल पड़ी. हम दोनों ने राहत की सांस ली. मैंने पापा को कस कर पकड़ लिया. ट्रेन की सीट कितनी कम चौड़ी होती है आपको पता ही होता है. इसी में हम दोनों एक दुसरे से सट कर लेटे हुए थे. पापा ने भी मुझे अपने से साट लिया और कम्बल को चारो तरफ से अच्छी तरह से लपेट लिया. पापा मेरी पीठ सहला रहे थे. और मुझसे कहा – अब तो डर नहीं लग रहा ना बेटी? मैंने पापा से और अधिक चिपकते हुए कहा – नहीं पापा.

अब आप मेरे साथ हैं तो डर किस बात की? पापा – ठीक है बेटी. अब भर रास्ते हम दोनों इसी तरह सटे रहेंगे. ताकि किसी को ये पता नहीं चल सके कि कोई लड़की भी इस बर्थ पर है. ट्रेन अब धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ चुकी थी. पापा ने थोड़ी देर के बाद कहा – बेटी तू कष्ट में है. एक काम कर अपना एक पैर मेरे ऊपर से ले ले. ताकि कुछ आराम से सो सके. मैंने ऐसा ही किया. इस से मुझे आराम मिला. लेकिन मेरा बुर पापा के लंड से सटने लगा. ट्रेन के हिलने से पापा का लंड बार बार मेरे बुर से सट जा रहा था. अचानक पापा ने मेरे चूची को दबाना चालू कर दिए. मैंने शर्म के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी. हम दोनों के मुंह बिलकुल सटे हुए थे. पापा ने मुझे चूमना भी चालू कर दिया. मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल रही थी. पापा ने मेरी सलवार का नाडा पकड़ा और उसे खोल दिया और कहा – बेटा तू सलवार खोल ले.

मैंने सलवार खोल दिया. पापा ने भी अपना पायजामा खोल दिया. अब पापा ने मेरी पेंटी में हाथ डाला और मेरी चूत के बाल को खींचने लगे. मैंने भी पापा के अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और पापा के तने हुए 6 इंच के लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी. आह कितना मोटा लौड़ा था… मुठ्ठी में ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी. पापा ने मेरी पेंटी को खोल कर मुझे नग्न कर दिया. फिर अपना अंडरवियर खोल कर मेरे ऊपर चढ़ गए. मेरे चूत में ऊँगली डाल कर मेरे चूत का मुंह खोला और अपना लंड उसमे धीरे धीरे घुसाने लगे. मैं शर्म से मरी जा रही थी. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है  

लेकिन मज़ा भी आ रहा था. पापा ने मेरे चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया. मेरी चूत की झिल्ली फट गयी. दर्द भी हुआ और मैं कराह उठी. लेकिन ट्रेन की छुक छुक में मेरी कराह छिप गयी. पापा मुझे चोदने लगे. थोड़े देर में ही मेरा दर्द ठीक हो गया और मैं भी चुपचाप चुदवाती रही. करीब 10 मिनट की चुदाई में मेरा 2 बार झड गया. 10 मिनट के बाद पापा के लौड़े ने भी माल उगल दिया. पापा निढाल हो कर मेरे बगल में लेट गए. लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था. मैंने पापा के लंड को सहलाना चालू किया.

पापा समझ गए कि उनकी बेटी अभी और चुदाई चाहती है. पापा – बेटी, तू क्या एक बार और चुदाई चाहती है. मैंने – हाँ पापा.. एक बार और कीजिये न..बड़ा मजा आया.. पापा – अरे बेटी, तू एक बार क्या कहे मैं तो तुझे रात भर चोद सकता हूँ. मैंने – ठीक है पापा, आप की जब तक मन ना भरे मुझे चोदिये. मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा है. पापा ने मुझे उस रात 4 बार चोदा. सारा बर्थ पर माल और रस और खून गिरा हुआ था. सुबह से साढ़े तीन बज चुके थे. पांचवी बार चुदाई के बाद हम दोनों नीचे उतर आये. मैंने और पापा ने अपने पहने हुए सारे कपडे को बदल लिया और गंदे हो चुके कपडे और कम्बल को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

मैंने बोतल से पानी निकाला और मुंह हाथ साफ़ कर के बालों में कंघी कर के एकदम फ्रेश हो गयी. पापा ने मुझे लड़की से स्त्री बना दिया था. मुझे इस बात की ख़ुशी हो रही थी कि यदि मेरे कौमार्य को कोई पराया मर्द विवाह पूर्व भाग करता और पापा को पता चल जाता तो पापा को कितनी तकलीफ होती. लेकिन जब पापा ने ही मेरे कौमार्य को भंग कर मुझे संतुष्टि प्रदान की है तो मैं पापा की नजर में दोषी होने से भी बच गयी और मज़ा भी ले लिया. यही सब विचार करते करते ठीक पांच बजे हमारा स्टेशन आ गया और हम ट्रेन से उतर कर घर की तरफ प्रस्थान कर गए. घर पहुँचने पर मौका मिलते ही पापा मुझे चोद कर मुझे और खुद को मज़े देते थे

रात में सौतेला बाप ने मेरा रेप किया



कुछ साल पहले मेरे पिताजी की कैंसर से मौत हो गयी थी.। इसलिए मेरी माँ को दुबारा शादी करनी पड़ गयी.। मेरी माँ बहुत सुंदर औरत थी और गजब की माल थी.। उसका कद ५ फुट ४ इंच का था, बहुत दूध जितनी गोरी थी और उसके बूब्स तो ३४ ३६” के होंगे.। जो आदमी मेरी माँ से शादी करने जा रहा था उसकी औरत खत्म हो गयी थी.।वो भी अकेला था और माँ भी अकेली थी.। दोनों में बात हो गयी और फिर शादी हो गयी.। सुहागरात के दिन उस आदमी ने मेरी माँ को खूब चोदा.। माँ की गर्म गर्म चीखे मैं साफ साफ़ सुन सकती थी.। आआआअह्हह्हह्ह….ऊऊऊ….अईईईईई…आऊऊऊउ …माँ गर्म गर्म सिसकारी निकाल रही थी और मजे लेकर चुद रही थी.। तब मेरी उम्र १८ साल की थी.।



मैं बालिग़ हो चुकी थी और चुदने लायक सामान हो गयी थी.। शुरू के साल भर मेरे सौतेले बाप ने मुझे बहुत प्यार दिया.। मेरे लिए नये नये कपड़े लेकर आया.। तरह तरह की चीजे, खाने की अच्छी अच्छी चीजे वो लेकर आता था.। साल भर उसने मेरी माँ को खूब जी भरकर चोदा और ठोंका.। उसके बाद उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आना शुरू हो गया.।ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है.। मेरा सौतेला बाप जब मेरा पास आता तो मेरे दोनों कंधों पर अपने हाथ रख देता और सहलाने लगा जाता.।



“बेटी!! मुझे तुझसे कुछ बात अकेले में करनी है!!” मेरा सौतेला बाप बोला



एक दिन जब माँ नही थी तो उसने मुझे अपने कमरे में बुलाया.।



“बेटी अंजली! ….क्या तेरा कोई बॉयफ्रेंड है???” उसने पूछा



“नही …पिताजी!” मैं बोली



“बेटी बनाना भी नही.। ये बोयफ्रेंड बहुत गंदे होते है, मासूम लड़कियों को चोद लेते है और खा पीकर चूत का छेद बड़ा करके भाग जाते है.। कुछ बॉयफ्रेंड तो शादी का झांसा देकर मासूम लड़कियों को चोद लेते है!!” मेरे सौतेले बाप ने मुझे समझाया.। उस दिन से मैं पिताजी को अपना बड़ा अच्छा दोस्त मानने लगी.। एक दिन जब मेरी माँ घर पर नही थी, मेरे सौतेले पिताजी ने मुझे टीवी पर एक ब्लू फिल्म दिखाई.।



“अंजली!! बेटी ….देखो अच्छी लगी ये पिक्चर??” मेरे सौतेले बाप ने पूछा



मैंने देखा तो वो एक गर्मा गर्म चुदाई वाली पिक्चर थी.। लड़का लकड़ी को गोद में उठाकर चोद रहा था और लड़की गर्म गर्म मादक सिस्कारियां निकाल रही थी.। मैं शर्मा गयी.।



“अंजली बेटी….अच्छी लगी??” मेरे सौतेले बाप ने फिर पूछा



“धत्त!! पिताजी........क्या कोई पिताजी अपनी बेटी से ये पूछता है!!” मैं कहा.। मैं बहुत लजा गयी थी और शर्म कर रही थी.।



“बेटी, आजकल युवाओं को सेक्स एजुकेशन देना बहुत जरूरी हो गया है.। वरना लड़कियां कई मर्दों से चुदवा लेती है और ऐड्स जैसी जानलेवा बिमारी का शिकार बन जाती है.। इसलिए बेटी आजकल हर बाप अपनी जवान चुदने लायक लड़की को चुपके चुपके सेक्स एजुकेशन देते रहते है, ये बात सीक्रेट ही रखी जाती है.। तुम ये दोनों टेप अच्छी तरह से देख लेना, जिससे तुमको सेक्स एजुकेशन मिल जाए!” मेरे सौतेले बाप [पिताजी] ने कहा.। उसने सेक्स की चुदाई वाली गर्मा गर्म फिल्मे मेरे कमरे में छोड़ दी और अपने काम पर चला गया.। मेरे पास करने को और कोई काम था नही, मेरा कॉलेज तो एक महीने के लिए बंद ही हो गया था तो मैंने सोचा की चलो सेक्स एजुकेशन ही ले लूँ.। वैसे भी कोई बाप इतना पाप नही होगा की अपनी लड़की को गलत शिक्षा दे.।ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है.।



दोस्तों, मैंने जैसे जैसे वो चुदाई वाले फिल्मे देखना शुरू की मुझे अच्छी लगने लगी.। कुछ देर बाद तो मैंने अपना सारा काम धाम छोड़ दिया और सुबह से रात तक बैठ कर मैंने वो दोनों चुदाई की ४ ४ घंटे की फिल्म देख ली.। शाम को पिताजी और मम्मी अपने अपने ऑफिस से लौटे तो मुझे पता नही क्या हो गया है.। उन चुदाई फिल्मो का मेरे किशोर मन पर बहुत असर हुआ था.।“पिताजी!! मुझे और सेक्स एजुकेशन लेनी है, कल आप और टेप ले आना!!” मैं अपने सौतेले बाप से बोल दिया,मेरा चुदाई फिल्मो में इंटरेस्ट देखकर मन ही मन वो मुस्कुराने लगे.। सायद वो कोई कुटिल प्लान अपने दिमाग में बना रहे थे.। इस तरह पिताजी रोज नई नई चुदाई वाली फिल्मे मेरे लिए लाने लगे.। कभी जापानी चुदाई की फिल्मे, कभी चाईनीस चुदाई की फिल्मे , कभी कोई….कभी कोई.। दोस्तों २ महीने बाद मुझे ब्लू फिल्म देखने का भयानक चस्का लग गया था, जैसे किसी गंजेड़ी को गांजा पीने के बुरा चस्का लग गया था.। एक दिन सुबह सुबह जब मेरी माँ अपनी नौकरी पर गयी थी मैंने पिताजी से फिर कहा की मेरे लिए चुदाई फिल्म लेकर आये.। मेरे पिताजी गये और मार्किट से खाली हाथ लौट आये.।



“ये क्या पिताजी........आप खाली हाथ क्यों लौट आये, अब मेरा वक़्त कैसे बीतेगा???” मैं बहुत बेचैन महसूस कर रही थी.। जैसे किसी अफीमची को अगर अफीम सूंघने को ना मिले तो वो बड़ा बेचैन हो जाता है, मेरी हालत बिलकुल ऐसी ही थी.।



“बेटी……वो दूकान बंद थी.। पता नही खुलेगी!!” पिताजी बोले



“नही पिताजी........आप फिर से मार्केट जाइये और मेरे लिए वो सेक्स एजुकेशन वाला टेप लेकर आईये!!” मैंने झल्लाते हुए कहा.। मेरा सौतेला बाप जा जाने क्यों हल्का हल्का मुस्कुरा रहा था.। उसका पूरा प्लान मुझे रगड़कर चोदने और खाने का था.। अपनी हवस को पूरी करने के लिए उस बहनचोद ने मुझे सेक्स एजुकेशन का झांसा दिया था.। उसका असली मकसद मुझे चोदना था.। मैं २ महीनो ने रोज नई नई चुदाई वाली फिल्मे देखने लगी थी और चूत में बैंगन और मूली, गाजर और ऊँगली डालकर मुठ मारना भी सीख गयी थी.। अब मैं चुदाई के बारे में सब कुछ जान गयी थी.। अब मैं गांड मरवाने के बारे में सब कुछ जान गयी थी.।



मेरी झल्लाहट देखकर मेरा सौतेला बाप बहुत खुश हो रहा था.। “बेटी आज दूकान तो बंद है….तुम रोज रोज नई नई चुदाई फिल्मे देखकर सेक्स एजुकेशन लेती तो.। बेटी……अगर तुम चाहो तो मैं तुमको रिअल सेक्स का मजा दे सकता हूँ…किसी को पता नही चलेगा.। देखने से जादा करने में मजा आता है बेटी........जरा सोचो….सोचो!!” मेरा कपटी बाप बोला,“हाँ!! पिताजी ........ये मस्त आईडिया है.। रोज मैं सेक्स एजुकेशन लेती हूँ, पर कभी सेक्स नही करती.। पिताजी आज आप मेरे साथ सेक्स करो और मुझे रिअल सेक्स एजुकेशन दो!!”“बेटी……तुम्हारा मतलब मैं तुमको चोदकर........सेक्स एजुकेशन दूँ???” मेरे कुटिल सौतेले बाप ने पूछा.। वो अच्छी तरह से जान गया था की उसने मुझे कोई सेक्स वेक्स एजुकेशन नही दी थी.। उसका कुटिल मकसद मुझे सेक्स की लत लगवाकर जी भरकर चोदना था.। वो हमारी सेक्स एजुकेशन के नाम पर मुझे धोखे से चोदना खाना नोचना चाहता है.। मैं मासूम कली थी, उसकी चाल समझ ना पायी.।



“हाँ ........पिताजी हाँ!! …आप मुझे चोदिये और सेक्स एजुकेशन दीजिये!!” मैंने बोली



ये सुनकर मेरा सौतेला बाप बहुत खुश.। उसने मुझे बाहों में भर लिया और अब उसे किसी बात का डर नही था.। क्यूंकि अब मुझे ही सेक्स की बुरी लत लग गयी थी.। मैं खुद ही अपने पिताजी से चिपक गयी.। मैंने फिरोजी रंग का सलवार सूट पहन रखा था.। मेरा पिताजी यानी मेरा सौतेला बाप मेरे मस्त मस्त मम्मे ताड़ रहा था.। फिर उसने मेरा दुप्पटा खींच दिया और हटा दिया.। मेरे बड़े बड़े मम्मे मेरी कमीज के सूती कपड़े से साफ़ साफ़ दिख रहे थे.। फिर पिताजी मुझे चोदने के लिए कमरे में ले गये.। मुझे सेक्स की बुरी लत लग चुकी थी.। वरना कोई शरीफ लड़की अपने बाप से चुदवाने के लिए उनके कमरे में नही जाती.।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है.। पिताजी ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया.। मेरे होठ पीने लगे.। पिताजी ने मुझे बाहों में भर लिया था.। दोस्तों, आज मैं भी फुल मूड में थी.। चुदाई फिल्मे मैंने बहुत देख ली थी आज मैं खुद चुदना चाहती थी.। मैं भी पिताजी के होठ पीने लगी.।



कुछ देर बाद हम दोनों की चुदास और कामवासना जाग गयी.। मुझे अपने पिताजी के होठ चूसना पता नही क्यों अच्छा लग रहा था.। पिताजी के हाथ मेरे बड़े बड़े दूध पर आ गये.। वो मेरे दूध दबाने लगे.। मैं उनको नही रोका.। क्यूंकि मुझे अच्छा लग रहा था.।“आह्ह्ह्ह........पिताजी दबाइये!!….मेरे दूध और दबाइये!!” मैंने पिताजी से कहा तो पिताजी की कामवासना जाग गयी.। वो कस कसके मेरे दूध दबाने लगे.। मुझे बहुत अच्छा लग.। पिताजी मेरे साथ फ्रेंच किस का मजा ले रहे थे.। मेरे पतले नीचे वाले होठो को चूस रहे थे.। मेरे ओंठ बहुत रसीले थे.। कुछ देर में पिताजी ने मेरी कनीज निकाल दी.। फिर मेरी ब्रा निकाल दिए.। पता नही क्यूँ मुझे हल्की से शर्म आई.। पिताजी की नजरे मेरे दूध पर टिकी थी.। वासना उनकी आँखों में बैठ चुकी थी.। वो जल्द से जल्द मुझे चोदना चाहते थे.।



“बेटी........तेरे दूध तो माशाअल्ला है…इतने खूबसूरत मम्मे मैंने आज तक नही देखे है!!” पिताजी मेरे बूब्स की तारीफ़ करने लगे



“पी लो पिताजी........आज जी भरकर मेरे रसीले बूब्स पी लो!” मैंने कहा



तो पिताजी जोर जोर से मेरे ३६” के दूध हाथ से दबाने लगे और फिर मजे से पीने लगे.। आज मेरा सपना पूरा होने वाला था.। मैं रोज तरह तरह की चुदाई देखा करती थी, पर आज मैं खुद चुदने वाली थी.। पिताजी पर वासना हावी हो गयी.। उन्होंने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे हसीन दूध मुँह में भर लिए और मजे लेकर पीने लगे.। मैं कितनी बेशर्म लड़की थी.। अपने बाप से चुदवाने वाली थी.। मैंने भी पिताजी को बाहों में भर लिया और बिस्तर पर हम दोनों लेट गये.। आज मेरे सौतेले पिताजी मेरे बॉयफ्रेंड और मेरे सैयां बन चुके थे.। वो मजे ले लेकर मेरे रसीले दूध पी रहे थे.।



आह….एक अजीब सा नशा चढ़ रहा था.। पिताजी को मेरे दूध पीने में तो मजा मिल ही रहा था, पर मुझे भी खूब आनंद प्राप्त हो रहा था.।ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है.। मेरे दूध पीते पीते पिताजी का हाथ मेरी सलवार पर चला गया.। उन्होंने मेरी सलवार निकाल दी.। तो मैं भी पिताजी के लंड को सहलाने लगी और मैंने उनकी पैंट खोल दी.। उसके बाद हम दोनों ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.। पिताजी अब बिस्तर पर लेट गये और मैं उनका लंड चुसने लगी.।



“पिताजी!!….तुम्हारा लंड तो कितना बड़ा और विशाल है!!” मैं आश्चर्य से कहा



“चूस ले बेटी........अब समझ ले की ये लंड तेरा ही है!!” पिताजी बोले



मैंने २ महीने में १०० से जादा चुदाई फिल्मे देखी थी.। अच्छी तरह लंड चुसना मैं वही पर सीखा था.। मैं भी मजे लेकर पिताजी के लंड चूसने लगी.। अरे कितना बड़ा गुलाबी लंड था और सुपाडा तो बहुत ही बड़ा था और गुलाबी था.। मैंने पिताजी की जाँघों पर लेट गयी.। गोलियां भी मजे से चूस रही थी और लंड भी मुँह में लेकर चूस रही थी.। पिताजी को बहुत आनंद मिल रहा था.।“चूस बेटी….और मुँह में अंदर तक लेकर चूस!!” पिताजी बोले तो मैं और जोर जोर से पिताजी का लंड चूसने लगी.। मुझे बहुत मजा आ रहा था.। मैं जोर जोर से सर हिलाकर लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी.। पिताजी का लंड कोई 8” लम्बा था और बहुत जूसी था.। पिताजी का लंड चूसते चूसते मेरी चूत बहने लगी.। फिर पिताजी ने मुझे सीधा बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगे.। मैं कुवारी कन्या थी.। इसलिए पिताजी को बहुत जोर से धक्का मारना पड़ा.।



तब जाकर मेरी कुवारी चूत की सील टूट पायी.। पिताजी का लंड मेरे गाढे लाल खून से रंग गया.। मैंने खुद अपनी दोनों टाँगे उपर कर ली और चुदवाने लगी.। पिताजी मेरे लाल लाल खूबसूरत भोसड़े में गहरे धक्के देने लगा.। मैंने पिताजी को अपनी बाहों में छुपा लिया था, क्यूंकि मुझे चूत में काफी दर्द हो रहा था.। पिताजी ने मेरे दोनों कोमल कंधे पकड़ रखे थे और किसी आवारा रंडी की तरह मुझे कमर मटका मटकाकर चोद रहे थे.। दोस्तों, दर्द के साथ साथ मुझे मीठा मीठा अहसास भी हो रहा था.। पर ये जो कुछ भी था मुझे अच्छा लग रहा था.। पिताजी ने मुझे अपने कब्जे में ले लिया और पक पक चोदने लगे.। वो फिर मेरे उपर लेट गये और मेरे बूब्स पीते पीते मुझे पेलने लगे.। २० मिनट बाद पिताजी मेरी रसीली चूत में शहीद हो गये.। मैंने पिताजी को दिल में छुपा लिया.। मुझे अभी भी चूत में दर्द हो रहा था.।



“बेटी........बताओ कैसी लगी मेरी सेक्स एजुकेशन????” पिताजी ने हँसते हुए पूछा



“अच्छी लगी पिताजी!!” मैंने जावाब दिया



फिर हम दोनों किसी युगल प्रेमी जोड़े की तरह एक दुसरे के रसीले ओठ पीने लगे.। आज मैं पहली बार अपने सौतेले बाप से चुद गयी.। अच्छा रहा ये एक्सपीरियंस.। कुछ दिन बाद पिताजी और मैं घर पर अकेली थी.। मेरी मम्मी अपनी नौकरी के सिलसिले में शहर से बाहर गयी थी.।



“बेटी ……सेक्स एजुकेशन हो जाए???” पिताजी मुझे फुसलाते हुए बोले



“जी ........ठीक है!!” मैंने कहा



हम दोनों फिर से चुदाई में तल्लीन हो गये.। पिताजी ने मुझे और मैं पिताजी को नंगा कर दिया.। पिताजी मेरी चूत पीने लगे और ऊँगली करने लगे.। दोस्तों, आज मुझे तनिक भी दर्द नही हुआ.। पिताजी ने अपनी जीभ चला चलाकर मेरी चूत मजे लेकर पी.। फिर लंड डालकर मुझे चोदने लगे.। कुछ देर बाद पिताजी मुझ पर पूरी तरह से हावी हो गये और इतने जोर जोर चोदने लगे की मेरी जान निकलने लगी.। पर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, इसलिए दर्द होने के बाद भी मैंने उनसे रुकने के लिए नही कहा.। फिर पिताजी ने मुझे अपनी कमर पर बिठा लिया और मेरी चूत में लंड डाल दिया और मुझे बिस्तर पर उछाल उछालकर मुझे चोदने लगे.। मैंने इस तरह की चुदाई विडियो में देखी थी जो पिताजी मेरे लिए लेकर आये थे.।



पर दोस्तों, मैं ये बात जरुर कहूँगी की देखने से जादा करने में आनंद प्राप्त होता है.। पिताजी के दोनों हाथ किसी सांप की तरह मेरी पतली चिकनी सेक्सी कमर पर लिपट गये और पिताजी ने सवा घंटा मुझे लंड पर बिठाकर चोदा.। आज ४ साल से पिताजी हर दिन माँ से छुपकर मेरी चूत मारते है और मैं भी उनको नही रोक पाती हूँ.। क्यूंकि मुझे सेक्स करने का बुरा चस्का लग चुका है.।कैसी लगी मेरा रेप कहानी, अच्छा लगी तो जरूर शेयर भी करे


छोटी बहन को पापा से चुदवाया



2 दिनों तक शिखा (मेरी छोटी बहन) और मैं चुदाई के चक्कर में शिखा की चूत की कली खिलने से जो खून निकला उस चादर को हम बदलना भूल गये और माँ पापा शादी से लौट आये।

चादर देख माँ बोली- चादर पर ये क्या लगा है?

तो शिखा तो सहम गयी.

पर मैंने कह दिया- माँ, वो कल रात लाल रंग गिर गया ड्राइंग करते समय।

तो माँ तो मान गयी.

पर पापा हमें शक की निगाहों से देख रहे थे।

खैर पापा और माँ थकान की वजह से वहां से चले गये।

जाते ही शिखा बोल पड़ी- पापा को शक हो रहा है भैया!

मैंने कहा- हाँ, मुझे भी पता है।

शिखा- तो अब क्या करें भैया?

फिर मैंने उसे समझाया कि शिखा अगर यूं ही पापा को शक रहा तो हम चुदाई नहीं कर पाएंगे, इसका सिर्फ एक ही हल है।

शिखा- क्या?

“अगर तू पापा को भी अपने इस जवान जिस्म का मजा चखा दे और अपनी चूत का उन्हें दीवाना बना दे तो काम बन जायेगा” मैंने कहा।

शिखा- भैया आप पागल हो, क्या कोई बेटी अपने बाप से चुदवाती है?

फिर मैंने उसे अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी साईट पर पर स्टोरी पढ़ने को कहा और कुछ बाप-बेटी पोर्न दिखाई।

तो वो बोली- रुको सोचने दो।

मैंने कहा- ठीक है, तू शाम तक बता.

तब तक मैं छोटा कैमरा ले आया और माँ पापा के कमरे में लगा दिया।

शाम को खाने के बाद माँ पापा सफर की थकन के कारण जल्दी ही सो गए.

और फिर मैं शिखा के पीछे रसोई में चला गया. वहां वो सिंक के पास खड़े होकर बर्तन साफ कर रही थी. उसने टॉप और लैगी पहना था और लैगी पीछे से अंदर तक उसकी गांड में घुस गयी थी जिससे मेरी बहन की गांड उभर के आ रही थी.

यह देखकर मेरा मन उसे चोदने को हुआ और मैंने उसे पीछे से जाकर कस के जकड़ लिया. वो भिंच गयी और कहा- मुझे काम करने दो!

पर मैंने अपना लण्ड उसकी गांड की गहराई तक घुसा दिया और पीछे से ही उसके दूध निचोड़ने लगा और पूछा- तो बहन तूने क्या सोचा है जो तुझे सुबह कहा था?

शिखा ने कहा- भैया आप सही थे, मुझे भी अब पापा का लण्ड चाहिए. उसे मैं चूस कर उसका रस पीना चाहती हूँ जैसे और बाकी लड़कियों को भी उनके पापा का लण्ड मिला है।

मैं समझ गया कि बाक़ी लड़कियां मतलब सुबह जो कहानी और पोर्न दी थी उसकी बात कर रही है।

मैंने कहा- हाँ मेरी छोटी बहन, मैं भाई होने के नाते तेरी सारी इच्छा पूरी करूँगा।

और मैंने उसकी लैगी और पैंटी घुटनों तक सरका दी और पीछे से ही उसकी चूत में लण्ड सेट किया और चुदाई करने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगा तो शिखा से बताया.

तो वो बोली- नीचे मत गिराना!

और जल्दी से घूम कर नीचे झुक कर मेरी बहन ने लण्ड को मुंह में ले लिया. उसने नाजुक से कोमल होंठों से जैसे ही लण्ड पर सहलाया, मेरी तेज़ी से धार निकल पड़ी और उसने सारा पानी पी गयी।

मैंने शिखा से कहा- अब तू पापा को अपनी मटकती गांड दिखा और थोड़े ढीले ज्यादा गले के टॉप पहन के घूम घर में! पापा भी एक मर्द हैं, देखना उनके मन में भी बेटी के लिए वासना जरूर जागेगी।

कुछ दिन बाद, मैंने कैमरा निकाला. शिखा और मैंने हर रात की फुटेज देखी और जिसमे पापा ने एक बार भी माँ को नहीं चोदा, कई बार पापा ने कोशिश की पर माँ ने हाथ झटक दिया।

शिखा और मैं खुश हुए कि अब पापा को अब उनकी बेटी की चूत मिलेगी। फिर शिखा वहाँ से चली गयी और मैं दिन के समय की भी रिकॉर्ड हुई फुटेज देखने लगा.

तभी मेरी नज़र वीडियो में माँ पर पड़ी जो सिर्फ एक तौलिया लपेटकर बाथरूम से आ रही थी. दोस्तों ऐसा भरा पूरा बदन देखकर मेरा मन हिल गया.

chhoti bahan ko papa se chudawaya

मेरी माँ का फिगर 34 32 34 होगा मुझे पता नहीं, पर उनका रंग गोरा है बिल्कुल मेरी बहन के तरह या ये कहूँ कि मेरी माँ की चूत भी शिखा की तरह ही बिल्कुल गोरी होगी जिसमें चूतड़ों के बीच से गुलाबी रंग निखर रहा होगा।

मेरे मन में माँ के लिए वासना जाग उठी और सोचा घर में ही एक चूत और है और मैं फालतू में ही शिखा के लिए तरसता हूँ। मैं माँ को नँगी देखना चाहता था इसलिए मैंने इस बार बाथरूम में कैमरा लगा दिया।

फिर 2 दिन बाद मैंने कैमरे से फुटेज देखी. पर कैमरे में तो कुछ और ही रिकॉर्ड हुआ था मैंने तुरन्त शिखा को रिकॉर्डिंग दिखायी।

उसमें हम भाई बहन ने देखा कि पापा अपनी बेटी शिखा की उतारी हुई ब्रा और पैंटी को सूंघ रहे हैं और उससे अपना लण्ड रगड़ रहे हैं. फिर उन्होंने उसमें अपना सारा माल निकाल कर वहीं छोड़ दिया।

“अच्छा तो ये मलाई पापा की थी.” शिखा फुसफुसायी।

मैंने पूछा- मतलब?

शिखा- अरे भैया, मतलब मैंने देखा तो था अपनी पैंटी पर ये वीर्य! पर मुझे लगा कि ये आपने किया होगा इसलिए मैंने आपको नहीं बताया। पर भैया पापा का लण्ड देखो न … तुमसे बड़ा है मुझे उसे चूसना है।

मुझे थोड़ी जलन हुई और मैंने कहा दिया- चल जा यहां से अपना काम कर! बड़ी आयी पापा का लण्ड लेनी वाली।

शिखा मुस्कुरायी और चली गयी।

और मैंने जो असली काम के लिए कैमरा लगाया था वो फुटेज देखने लगा।

मैंने देखा माँ नंगी होकर ही नहाती है पर माँ की चूत में थोड़े बाल थे जिसे वो साफ़ कर रही थी. मुझे उन्हें वीडियो में नंगी देखकर बस ऐसा मन किया कि अभी रसोई में जाऊ और उनकी साड़ी उठाकर घोड़ी बनाकर चुदाई कर दूँ.

पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था इसलिए बाथरूम में गया और मैंने उनका वीडियो देखकर उनकी अभी वाली धोने के लिए उतारी पैंटी को सूंघने और चाटने लगा.

मुझे वो खुशबू बहुत मादक लग रही थी और पैंटी से थोड़ा थोड़ा उनकी चूत का पानी का भी स्वाद आ रहा था.

दोस्तो, अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो बस एक बार करके देखो.

मैं मुठ मारकर बाथरूम से बाहर आया और दोपहर का खाना खाते हुए माँ के बोबे और गांड ही देख रहा था।

यह बात मैंने शिखा को नहीं बतायी कि माँ को मैं चोदना चाहता हूँ. न जाने वो क्या सोचे।

फिर खाना खाते हुए पापा ने कहा- कल मेरी छट्टी है, चलो घूमने चलते हैं।

पर माँ बोली- नहीं, कल मैं कविता(माँ की सहेली) के साथ बाहर जा रही हूँ, शाम तक ही लौटूंगी।

मुझे मौका अच्छा लगा और मैंने भी कह दिया- कल मेरी भी एक्स्ट्रा क्लास है तो घूमना नहीं हो पायेगा।

तभी शिखा समझ गयी और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरायी। शायद शिखा समझ गयी की कल ही उसे पापा का लण्ड मिलेगा

फिर मैंने रात में शिखा को समझा दिया की कल माँ तो रहेगी नहीं, तुझे ब्रा और पैंटी नहीं पहनना है बस ऊपर एक पतली सी समीज पहन ले और नीचे नेट वाली ओढ़नी लपेट ले।

“ठीक है भैया!” शिखा ने शर्माकर कहा।

दूसरे दिन 12 बजे”

पापा हॉल में टीवी के सामने सोफे पर बैठे थे, उनका न्यूज़ देखने का समय यही था.

तभी मैंने शिखा को आवाज़ दी- शिखा, मैं जा रहा हूँ क्लास में! बाय!

और मैं चुपके से हाल वाली खिड़की पर चला गया।

तभी शिखा मुझे बाय बोलने हॉल में आयी और पापा ने उसकी तरफ देखा और देखते ही रह गये.

पापा ने अपनी नज़रें हटाई और टीवी ऑन किया.

पर मैंने टीवी पर बाप बेटी चुदाई हिंदी साउंड पर पोर्न लगा रखी थी जो फुल साउंड पर चलने लगी. उसमें आवाज आ रही थी- पापा मुझे चोदो और जोर जोर से चोदो, फाड़ डालो इस आपकी ही दी हुई अमानत को!

ऐसी आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी.

तभी पापा और शिखा दोनों टीवी बन्द करने झपटे. पर शिखा पापा के ऊपर गिर गयी जिससे उसकी ओढ़नी खुल गयी और पंखे की वजह से दूर उड़ गई।

शिखा पापा के ऊपर ऐसे ही नंगी पड़ी रही.

और अब तक पापा का 7 इंच लण्ड भी टनटना चुका था जो पैंट के अंदर से ही शिखा की चूत पर गड़ रहा था और इधर पोर्न टीवी पर आवाज़ के साथ चालू ही थी।

पापा ने शिखा से कहा- उठो।

पर शिखा ने पापा का लण्ड पकड़ते हुए बोला- ये गड़ रहा है।

शिखा के मुलायम हाथ पापा के लण्ड के ऊपर … पापा को एकदम भारी उत्तेजना हुई.

पापा ने उसे उठाया और अपनी पैंट खोल कर कच्छा नीचे करते हुए कहा- तुम्हें बेटी … ये चुभ रहा है. और इसे लण्ड कहते हैं।

शिखा ने आँखें बंद कर ली.

तभी पापा ने शिखा की समीज उतारकर उसे पूरी नंगी कर दिया और उसे हाथ पकड़कर सोफे बैठा दिया.

फिर पापा ने अपनी बेटी से कहा- देखो टीवी पर … जो हो रहा है, इसे सेक्स कहते हैं।

शिखा ने कहा- मुझे सब पता है पापा।

तो पापा खुश हो गए और बोले- चलो तो फिर!

और शिखा की दोनों टांगें उठाकर फैलायी और अपना लण्ड चूत पर सेट किया और शिखा को चोदने लगे।

बड़े लण्ड की वजह से शिखा चिल्ला रही थी. तब भी पापा नहीं रुके और चोदते रहे. फिर थोड़ी देर बाद मेरी रांड बहन उछल उछल कर चुदवाने लगी और कहने लगी- पापा, मुझे आपका लण्ड चूसना है प्लीज।

पापा ने अपना लण्ड बेटी की चूत से निकाला और उसके मुंह में दे दिया।

शिखा बहुत मज़े से चूस रही थी, पूरा लण्ड मुंह में ले रही थी।

कुछ देर बाद पापा बोले- हट, मुझे झड़ना है.

तो मेरी रंडी बहन ने कहा- मुझे पिलाओगे नहीं क्या पापा?

पापा मुस्कुरा दिये और कहा- ठीक है.

और अपनी बेटी शिखा के मुंह में सारा माल दे दिया और शिखा पूरा चाट चाट कर पी गयी

शायद शिखा को मुठ पीने में मज़ा आने लगा है।

तभी उनके बीच दूसरा राउंड शुरू हुआ.

पापा अपनी बेटी शिखा को चोद ही रहे थे कि मैं वहां हाल में चला गया जहां बाप बेटी की चोदन क्रिया चल रही थी।

पापा मुझे देखकर चौंक गये और शिखा को भी अंदाज़ा नहीं था। पापा ने कहा- बेटा, तुम जल्दी आ गये?

यही सही मौका था मैंने पूछ ही लिया- आप अपनी बेटी को चोद रहे हैं? माँ को चोदने को नहीं मिलता क्या?

पापा ने कहा- बेटा, मैं तेरी माँ को बिना कंडोम के चोदना चाहता हूँ पर तेरी माँ कहती है कंडोम लगाओ. इसी अनबन के बीच में तेरी माँ को चोद नहीं पा रहा।

फिर पापा मुझे सॉरी सॉरी कहने लगे।

तभी शिखा आगे आयी और बनकर कहा- भैया अगर आप भी मुझे चोदना चाहते हो तो चोद लो. पर माँ को मत बताना।

फिर क्या था, मैंने पैंट उतारी और अपनी बहन की चुदाई ज़ोर ज़ोर से करने लगा. आखिर इतने देर से देखने के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

मेरे और शिखा के झड़ने के बाद हमने रेस्ट लिया।

पर पापा कहाँ मानने वाले थे, वो शिखा के बदन का हर हिस्सा चूम रहे थे बोबे, चूत, गर्दन गांड कलाई पेट सब कुछ।

फिर मैंने पापा से कहा- हम साथ में चोदें?

शिखा डर गयी- नहीं बाबा!

वो नहीं नहीं करने लगी

पर पापा ने समझाया कि बेटी बस थोड़ा सा दर्द होगा, फिर मज़े ही मज़े।

तो मैं लेट गया. मेरे ऊपर शिखा आ गयी. मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया.

अब बारी पापा की थी, पापा ने तेल डाला पहले बेटी की गांड में … फिर अपने लण्ड में लगाया।

मैंने शिखा के होंठों को अपने मुंह में भर लिया ताकि वो चिल्लाये न!

फिर पापा ने अपनी बेटी की गांड में धीरे धीरे लंड डालना शुरू किया।

शिखा छटपटाने लगी.

पर पापा ने अपना आधा लण्ड अंदर डाल दिया और हम थोड़ी देर रुक गए।

शिखा की आँखों में आँसू थे.

फिर जब हम नॉर्मल हुए तो पापा ने एक झटके और दिया और पूरा लण्ड अंदर कर दिया.

इस बार शिखा चीख पड़ी- मार डाला रे दोनों बाप बेटे ने मिल कर।

फिर कुछ देर बाद मेरी बहन नार्मल हुई और हमने खूब चुदाई की. शिखा बहुत थक गयी और वो कमरे में चली गयी और सो गई।

माँ आयी शाम को 6 बजे।

“शिखा कहाँ है?” माँ ने पूछा।

“उसकी तबीयत खराब है, खाना उसको कमरे में दे दूंगा आज मैं!” पापा ने कहा।

रात को खाना खाने के बाद माँ सोने चली गयी।

मैं और पापा बाहर टहल रहे थे. तभी अचानक पापा बोल पड़े- मैं शिखा के रूम में जा रहा हूँ, तू तेरी माँ पर नज़र रख।

मैं बोला- मैं उन्हीं के साथ सो जाता हूं. अगर माँ उठी तो मैं तुरंत आपको काल कर दूंगा।

पापा बोले- ठीक है. और चले गए.

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