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सुहागरात वाले दिन मुझे जबरदस्ती चोदा

सुहागरात वाले दिन मुझे जबरदस्ती चोदा


नमस्कार दोंस्तों, मैं प्रतिभा आपको अपनी दर्दभरी कहानी सुना रही हूँ। मैं फरुखाबाद की रहने वाली हूँ। मेरी शादी कुछ साल पहले उन्नाव निवासी भूपेंद्र से कर दी गयी। मेरे पापा ने मेरी शादी में 20 लाख नकद दिया। जो जो मेरे पति, सास ससुर ने डिमांड की उनको दिया। मैं केवल 21 साल की थी जब मेरी शादी हुई। असल में मैं चार बहने हूँ। मेरी 3 बहने और थी। इसलिये पापा ने सोचा की एक एक लड़की को निपटाते चले। इसलिये फ्रेंड्स पापा ने 30 लाख का भारी भरकम कर्ज लेकर मेरी शादी भूपेंद्र से कर दी।



जिस तरह हर लड़की अपनी शादी के हजारों सपने देखती है, वैसे ही सुनहरे सपने मैंने बुने थे। क्या क्या सपने मैंने देखे थे। पति ऐसे प्यार करेगा, वैसे करेगा। खैर मेरी शादी हो गयी। सुहागरात में मैंने बड़ा खूबसूरत सा लाल रंग का लहंगा पहना था। मैं घूंघट करके बैठी थी। मन में हजारों सपने थे। मेरी सहेलिया मुझको बताती थी की उनके पति ने उनको ये सुहागरात के दिन ये दिया वो दिया। कोई कहती थी मुझको सोने का हार गिफ्ट किया कोई सखी कहती थी मुझको हीरे की अंगूठी थी। तो दोंस्तों, मैं भी अपने होने वाले पति से हजारों उम्मीद की थी।

मेरा चेहरा शर्म से लाल था। आज पति देव मेरे साथ क्या क्या करेंगे, मुझको कैसे कैसे लेंगे, ये सब सोचकर मैं लजा जाती थी। मैं अपनी सपनों की दुनिया में हसींन सपने बन रही थी की रात ने 12 बजा दिए। मेरे पति भूपेन्द्र की भाभीयों ने उनको मेरे कमरे में धक्का दे दिया। वो अंदर आ गए। मेरा दिल तो धक्क से हो गया। मारे लाज शर्म से मैं मरी जा रही थी। पति मेरे पास आकर बैठे। उनके मुँह से शराब का एक बहुत ही तेज भभका आया। मेरा मूड आफ हो गया।

आपने पी है?? मैंने एकाएक पूछ लिया। अब मैंने शर्माना छोड़ दिया। क्योंकि मेरा दिमाग खराब हो गया था। उन्होंने अपनी शेरवानी से रम की एक छोटी बोतल निकली और मेरे सामने एक घुट और लगाया।

ये क्या बदतमीजी है!! आपको हमारी सुहागरात में ऐसा नही करना चाहिए! मैंने कहा

अगले ही छड़ मेरे गाल पर भन्नाता एक झापड़ बड़ा। मेरा जबड़ा हिल गया।

मैंने पी है और उसके लिए तू…और सिर्फ तू जिम्मेदार है! वो बोले। मैं कुछ समझ् नही पायी। मैं थोड़ा डर भी गयी थी। आज की रात का तो कबाड़ा हो गया। आज ही सुहागरात को मैं पिट गयी।

मैं?? मैंने डरते हुए पूछा। वो शराब के नशे में टल्ली थे। झूम रहे थे।

हाँ है तेरी वजह से। तेरी वजह से मैं अपनी गर्लफ्रेंड से शादी नही कर पाया। चुड़ैल तेरी वजह से!! जानती है मैं उससे कितना प्यार करता था। 10 साल से मेरा उससे ऑफर चल रहा था। पर तेरे बपने आकर सारि कहानी बिगाड़ दी। मेरे घर वालों को 20 लाख नकद दे दिया और मेरे बॉप ने जबर्दस्ती मुझे तेरे साथ शादी के खूटे में बाँध दिया। कामिनी! छिनाल! चुड़ैल! मैंने तुझको जितनी गालियाँ दू कम है! पति बोले।

बॉप रे!! ये सुनकर तो मेरी माँ चुद गयी। मेरी गाण्ड फट गई। मैं यहाँ कितने सपने देख रही थी पति ऐसा होगा। वैसा होगा। ये भोसड़ी का तो सबसे हटके निकल गया। 10 साल से हरामी अपनी माल से फसा है। पता नही कितने हजार बाद उसको चोद चूका होगा। इसका मतलब तो ये हुआ की मैं इसकी दोस्त नही दुश्मन हूँ। मेरी वजह से ये अपनी सामान से शादी नही कर पाया। तबतो ये मुझको बिलकुल भी प्यार नही करेगा। ऊपर से मेरी गांड़ मार देगा।

मैं सोच विचार कर रही थी की इतने में 2 3 झापड़ मुझको और पड़ गये। मैंने रोने लगी।

चुप!! चुप कुतिया!! खबर दार आवाज बाहर निकाली पति ने मेरा गला दोनों हाथों से दबा दिया

जैसा जैसा मैं कहता हूँ, करती जा। वरना तुझको मैं जान से मार दूँगा! वो बोला। मैं डर से थर थर काँपने लगी। अब मैं केवल आवाज दबा के सिसकियाँ ले सकती थी। पति का आदेश था कि रोने की आवाज बाहर ना जाए। दुनिया की नजर में वो भला आदमी बनना चाहता था। हाय री, मेरी तो किस्मत फुट गयी। मैंने कहा। क्या सपने देख रही थी और क्या निकला। दोंस्तों जी कर रहा था कि जहर खाके मर जाऊ।

चल कामिनी पैर दबा! मेरा पति बोला।

मैं तो उसके खूंखार रूप से अवगत हो ही चुकी थी। मेरे घर में माँ मम्मी ने यही सिखाया था कि भगवान के बाद पति ही देवता होता है। इसलिये मैं उसी शिक्षा पर चल रही थी। मैं अब उससे डरने भी लग गयी थी। इसलिए मैं चुप चाप उनके पैर दबाने लगी।

2 घण्टे हो गए। परिवार के सब लोग अब सो चुके थे। क्योंकि 2 रात से सब मेरी शादी में फंसे थे। अब 2 बज गए थे। 2 घण्टे तक पैर दबाते दबाते मैं जरा थक गयी थी। मैं झपकी लेने लगी। मुझको नींद आने लगी थी। तभी मुझको मुँह पर एक जोर की लात पड़ी। मेरे मुँह और कंधे पर लगी।

छिनाल! ये तेरा घर नही है। मायके में नही है तू! ससुराल में है! इसलिये जैसा मैं कहूंगा वैसा ही तू करेगी! पति बोला। मैंने रोने लगी।

चुप चुप! वरना अभी तेरा इससे गला दबा दूँगा! तेरी कहानी खत्म हो जाएगी और मैं अपनी माल से शादी कर लूंगा। पति बोला। मैं एक बार फिर से सिसकी लेने लगी। अब तो मैं ऐसे नर्क में फस गयी थी की खुलकर रोकर अपना दुख भी नहीं कम कर सकती थी। हाय राम फुट गयी मेरी किस्मत। मैंने खुद से कहा।

दोंस्तों, अब मैं फिरसे पति देव के पैर दबाने लगी। मेरे हाथों में दर्द हो रहा था। आधे घण्टे गुजर गए।

चल नँगी हो जा!! चोदूंगा! पति बोला। उसने 2 मोबाइल फोन के वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी और 2 जगह दीवाल में लगा दिए।

ये क्या?? ये क्या कर रहे है आप?? मैंने सिसकी लेते हुए पूछा।

कुछ नही! बाद में देखूंगा! वो धीरे से बोला। बॉप रे! ये तो भारी कमीना निकल गया। कहीं मेरा वीडियो इंटरनेट पर ना डाल दे। मेरे दिल में बड़ा डर पैदा हो गया।

नही नही!! मैं वीडियो नही बनवा सकती मैंने कहा

बस फिर क्या था दोंस्तों। पति ने मेरे बाल कसके पकड़ लिए। मेरे सारे बाल खुल गए। मुझ पर लात जूतों की बौछार हो गयी। कितने मुक्के छप्पड़ पड़े की मैं नही जानती हूँ।

पति ने चमड़े की बेल्ट उठायी और मुझपर बेल्ट ही बेल्ट पढ़ने लगी। मेरी तो खाल उधड़ गयी दोंस्तों। है भगवान! ये दिन देखने से पहले मैं मर क्यों नही गयी। मौत इससे अच्छी होती।

सुन रंडी! तेरे बापने तेरी शादी मुझसे की है। तेरा हाथ मेरे हाथ में दिया है। इसलिए मेरा तुझपर पूरा हक है। तेरे बापको भी पता है कि तू यहाँ हर रात चुदेगी। तो अब ये बात साफ हो गयी की उसने तुझको मुझे चोदने के लिए ही दिया है। तो अब छिनाल अगर मैं तुझसे चूत मांग रहा हूँ तो तू नाटक मत करना! पति बोला।

मैं रोने लगी। मैं दबकर रो रही थी। पति मेरे एक एक कपड़े नोचने लगी। मैं नही नही कर रही थी। मेरे चीर हरण का वीडियो बनना सुरु हो गया। पहले मेरा लहंगा उतारा। फिर मेरा ब्लॉउज़ तो लगभग लगभग फाड़ दी दिया। पेटीकोट भी खीच दिया। मैं नँगी हो गयी। उधर मेरा सुहागरात का चुदाई का वीडियो 2 2 मोबाइल फोन्स पर बनने लगा। मैं रोने लगी।

तेरे बॉप ने तुझको मुझे चोदने को ही दिया है, फिर क्यों रोती है! पति फिरसे चीखकर बोला।

दोंस्तों, सायद वो दिन मेरी जीवन का सबसे काला दिन था। आज मैं कसके चुदूंगी और मेरा वीडियो भी बन जाएगा। पता नही ये शराबी कही वाइरल ना कर दे।

ये सोच सोचकर मेरा धुंआ निकला जा रहा था। अब मैं लाल ब्रा और पैंटी में थी। मैं चुदना जरूर चाहती थी पर इस तरह नही। मैं काम जरूर लगवाना चाहती थी पर प्यार से। इस तरह मार मारके नही। मैं कैमरे के सामने थी। खड़ी थी। कहीं भाग भी ना सकती थी। भागती तो फिर से पिट जाती। इतने में पति पीछे से आ गए और मुझको पकड़ लिया। मेरे बदन को खिलौना समझ खेलने लगे। वो मेरे बदन से जोक की तरह चिपट गया। मेरे गाल, गले पीठ पर हाथ फिराने लगा। मेरे मम्मो को हाथ में लेने लगा। शराब की बू से मेरा दम घुट रहा था।

पति मेरे जिस्म से खेल रहा था। वो मुझ जीती जागती लड़की को खिलौना समझ् के मेरे मम्मे मसल रहा था। मैं कुछ कर भी नहीं सकती थी, क्योंकि वो मेरा पति था। मेरे बॉप ने मुझको चूदने ही तो यहाँ भेजा था। मेरा वीडियो लगातार बन रहा था। मैं सोच रही थी की अगर ये वाइरल हुआ तो सब चड्ढी बॉडी में देख लेंगे। अब पति ने मेरी लाल ब्रा के हक पीछे से खोल दिये। ब्रा खींच कर निकाल दी। हाय मैं नँगी हो गयी कमरे के सामने। मैंने अपने दोनों हाथ अपने वक्षों पर रख दिए, अपनी इज्जत बचाने लगी। पर शराबी पति ने वो भी हटा दिए। हाय, मैं कैमरे के सामने नँगी हो गयी। लगा 1000 लोग की आँखे मेरी इज्जत यानि मेरे वक्षों को घूर रही हो। मेरे दोनों मस्त दुधिया कबूतर अब कमरे में रिकॉर्ड हो गए।

मैं खड़ी थी। अब मेरा पति मेरे सामने आ गया। झुक्क्कर मेरे दूध पीने लगा। मैं कुछ नही कर पाई, मैं मना भी नहीं कर पाई। क्योंकि वो मेरा पति था। और भारतीय समाज में पति ही परमेश्वर होता है। पति मेरे खूबसूरत गर्वीले वक्षों को पीने लगा। सब उसकी हरकते कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी। उसने मेरे दूध जी भरकर पिया। अब मेरी चूत में वो ऊँगली करने लगा। कैमरे के सामने ही उसने मेरी पैंटी में हाथ डाल दिया और चुत में ऊँगली करने लगा। मुझे तो यही महसूस हुआ की मेरा बलात्कार हो गया आज दिन दहाड़े। सबके सामने। दोंस्तों, पति बड़ी देर तक खड़े खड़े मेरी बुर में ऊँगली करते रहे। मेरी पैंटी भी नहीं निकाली।

एक बार तो मैं पैंटी में ही झड़ गयी। हाय दैया, आज कैमरे के सामने मैं झड़ भी गयी। कहीं ये कुत्तापना ना दिखा दे, कहीं दोंस्तों को ये वीडियो ना दिखा दे। मैं मन ही मन डर गई थी।

मैं आपके पाँव पड़ती हूँ। ये।वीडियो इंटरनेट पर मत लगाना! मैंने बड़ी धीमे से कहा।

तेरी कसम प्रतिभा। मैं हरामी हूँ। पर दर हरामी नहीं। पति बोला। मुझको थोडा अच्छा महसूस हुआ। एक बार झड़ने ने पैंटी मेरे माल से भीग गयी थी। सारा माल पैंटी में निकल गया था। पति मुझको बिस्तर पर ले गए। पैंटी उतार दी। पहले सुंघा। फिर चाटने लगे। मेरा सारा मॉल पी गये।

उन्होंने मेरे दोनों पैर खोल दिये। मेरी बुर बड़ी मस्त गदरायी गोरी गोरी थी। पति ने मेरी बुर के दर्शन किये।

तेरी चूत भी मस्त है! पर मेरी समान से अच्छी नही! वो बोले।

आज मेरी सुहागरात पर एक परायी औरत का नाम सुनकर मैं जान गई की मेरा पति कभी सिर्फ मेरा नही हो पाएगा। क्या फूटी किस्मत है मेरी। पति ने मेरी बुर ऊँगली से फैलाई और कमरे की ओर की। बॉप रे! अब मेरी चूत कैसी है सब जान जाएंगे। मेरे दिल में धक्क से हुआ। पति नशे में झूम रहे थे। मेरी बुर चाटने लगा। खूब चाटते चले गए। मैं चुदना जरूर चाहती थी। पर प्यार से। पर इधर पति तो मार मारके मुझको ले रहे थे।

दोंस्तों अब मैं पूरी तरह नँगी बिस्तर पर थी। मेरे बालों को मोगरे के फूल फँस गये थे। क्योंकि अभी पति ने कुछ देर पहले ही मुझको लात घूसों से मारा था। तभी मेरे बालों का गजरा टूट गया था और फूल इधर उधर बाल में फस गये थे। मेरे होंठों पर लाली लगी थी। नाक में बड़ी नथ थी। गले में सोने का मंगलसूत्र था। कलाइयों में हाथ भर भरके सुहाग की चूड़िया थी। कंगन थे। हाथों में शादी की मेहंदी थी। कमर पर करधन थी। पैरों में पायल और बिछुए थे। वही मेरा कुत्ता पति मुझको चोद चोदकर वीडियो बना रहा था। भगवान जाने कल ये क्या करे।

मुझको तो टेंशन हो रही थी इस बात की। पति उधर कैमरे की तरफ मेरी बुर दिखा दिखाके पी रहा था। खूब बुर पी उसने।

चल मेरा लौड़ा चूस!! वो बोला। पर आवाज में कहीं भी प्यार ना था। बस तानाशाही थी। मैं मजबूर थी। कुत्ते का ये सांड जैसा लण्ड था। सुपाड़ा निकला था। मैं जान गई की ये साला कुंवारा नही है। अपनी माल को इसी लण्ड से 10 साल से चोद रहा होगा। तब ही लण्ड ऐसा उघड़ गया है। मैं चूसने लगी। पति मेरे मुँह को चोदने

अंदर ले और अंदर!! वो बोले। लगा मैं उनकी बीवी नही कोई रंडी हूँ। मैं चूसने लगी। कहीं हल्का सा मेरे दाँत से उनका लण्ड कट गया।

छिनार!! देखके, वरना अभी तू चप्पल ही चप्पल पाएगी! वो बोले। मैं डर गई। अब सम्भल के चूसने लगी।

दोंस्तों, कुछ देर बाद उन्होंने मेरी दोनों टांगे उठाकर अपने कंधों पर रख ली। और मुझे चोदने लगे। कहीं कोई प्यार नही, कोई मेरे लिए कोई इज्जत सम्मान नही। सिर्फ वासना और चुदास हर जगह। मुझको रंडियों की तरह वो हरामी चोदने लगा। पौन घण्टे बाद मेरी चूत में हल्की जलन होने लगी। मैं आ आआहा करने लगी। लण्ड से बचने के लिए मैं चुत्तड़ इधर उधर करने लगी की पति देव जान जाये की मुझको कुछ आराम।चाहिए। कुछ मिनट के लिए लण्ड बहार निकाल ले। पर दोंस्तों 10 साल तक अपनी सामान को पेल पेलके वो बहुत बड़ा चोदूँ बन गया था। जब मैं लण्ड से बचने के लिए चुत्तड़ बायीं तरह करती तो पति भी बाए तरफ एडजस्ट हो जाता। दाँये करती तो दायीं तरह एडजस्ट हो जाता। पर हरामी ने एक सेकंड को भी लण्ड बाहर ना निकाला। बस घप्प घप्प मुझको पेलता खाता चला गया। मैं बिना रुके चुदती चली गयी। सबसे बुरी बात थी ये सुहागरात का चुदाई कांड कैमरे में रिकॉर्ड हो रहा था।

2 घण्टे पति ने मुझको चोदा।

चल कुतिया बन! गाण्ड मारूँगा! वो बोला।

सुनिये जी! थोड़ा आराम कर लूँ। बुर दुःख रही है? ? मैंने बकरी की तरह मिमियाते हुए पूछा।

पति ने फिर आँख दिखाई। मैं जान गई हरामी टाइप का आदमी है। मानेगा नहीं। मैंने हथियार डाल दिए। कुतिया बन गए। पति 2 2 कैमरे के सामने मेरी गाण्ड मारने लगा।

1 साल बाद मैं मायके गयी। मेरी सेहेलियां मेरे पास आई।

क्यों प्रतिभा!! तूने तो बड़ी ऐश की है! हम सब जान गई सहेलियों ने कहा।

तुम लोग किसके बारे में बात कर रही हो?? मैं कुछ समझी नही! मैंने कहा। मेरी सखियों ने एक पोर्न वेबसाइट खोली। मैं उसका नाम नही बताउंगी। गुप्त है। हनीमून नाइट्स वाली कैटगोरी खोली। और एक विडियो ऑन किया। माँ कसम! मेरी गाड़ फट गई। ये मेरा ही सुहागरात वाला वीडियो था। 2 घण्टे का वीडियो था। मैंने पूरा देखा। मेरे पैर तले जमीन खिसक गयी। जिसका डऱ था वही हुआ। दोंस्तों अब तक 10 लाख लोग वो मेरा चुदाई वीडियो देख चुके थे। हाय राम 10 लाख लोग अब मुझको चुदते देख चुके थे।

दोंस्तों बस रही सुक्र मानिए की मेरे घर पर कोई इस कांड के बारे में नही जान पाया। आज भी मेरा पति हर रात शराब पीकर आता है और मुझको रण्डियों की तरह पेलता ठोकता है। मेरे पापा ने मेरी शादी के लिए 30 लाख लोन लिया था। इस कारण दोंस्तों मैं इस सूअर को नहीं छोड़ पायी। पापा को कितना नुकसान होता।

Sasur Ji Ka Mota Lund Meri Chut Mein Ghusa

Sasur Ji Ka Mota Lund Meri Chut Mein Ghusa,ससुर जी का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा


मैं शादी सुदा हूँ ये स्टोरी आज से २ साल पहले की है जब मै नई नई सुसराल आयी थी. मेरे सुसराल में केवल ४ लोग है मेरी सास ४० वर्ष की ससुर ४५ वर्ष के ननद १८ साल की और मेरे पति का मार्किटिंग का काम था इसलिए वो जयादातर शहर से बाहर ही रहते थे मेरी शादी को केवल ४ महीने ही हुए थे और मेने केवल ८-१० बार ही सेक्स किया था एक दिन की बात है, घर में मै और मेरी ननद ही थी मै अपने रूम में टी.वी देख रही थी मुझे पेशाब लगी और मैं अपने रूम से निकल कर टोलिट जाने लगी तभी मुझे ऐसा लगा की मेरी नंनद पूजा रो रही है मुझे ये आवाज उसके रूम से आ रही थी मेने सोचा आवाज लगाउ फिर कुछ सोच कर रूम के की होल से देखने लगी.

अंदर का नज़ारा देख कर में तो सन्न रह गयी अंदर पूजा फर्श पर नंगी पडी थी और हमारा कुत्ता उसकी चुत चाट रहा था ये देख कर मेरे तो होश हे उड़ गए फिर मेने देखा पूजा ने कुत्ते का लंड पकड़ कर अपनी चुत में डाल लिया और टौमी किसी पक्के चुद्दकद आदमी की तरह धकके लगाने लगा और पूजा भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी मुझसे ये सब देखा नहीं गया और में वहा से हट गयी !
थोड़ी देर बाद टौमी वहा से बाहर निकल आया फिर ……पूजा भी बाहर आ गयी. मुझे उस पे बहुत गुस्सा आ रहा था मुझे देख कर वो डर गयी मेने उसे बताया मेने सब देख लिया है अंदर क्या चल रहा था

तो वो रोने लगी और कहने लगे मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता तो मै चुप हो गयी मैने उस को समझाया कोई बॉय फ्रेंड बना लो और उसके साथ सेक्स का मज़ा लो फिर वो कहने लगी बॉय फ्रेंड तो है लेकिन डर लगता है क्योकी आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है मैने कहा किसने कहा आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है तो वो बोली की मैने देखा है मैने कहा किसका देखा है वो बोली पापा का देखा है और उसने बताया पापा का लंड गधे जितना लंबा और मोटा है 

ससुर जी का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा


मुझे विश्वास नहीं हुआ मैने किसी तरह उसको समझा कर कसम दिलाई आगे से कुते से मत चुदना लेकिन मेरे दिमाग में तो ससुर जी का लंड घूमने लगा था मैने सोचा एक बार ससुर जी का लंड देखा जावे फिर एक दिन मोका मिल ही गया घर के सब लोग बाहर गए हुए थे और दो दिन बाद आने वाले थे केवल में और ससुर जी घर पे थे मैने सोचा अच्छा मोका है,

मैने रात को उनके दूध में नीद की गोलिया मिला दी वो रात को दूध पी कर सो गए एक घंटे बाद ससुर जी के रूम में गयी उनको हिलाया मगर वो नहीं हिले में समझ गयी अब वो जागने वाले नहीं है

मैने उनकी लूंगी हटा कर कचछे का नाडा खोला और ……उनका लंड देखा और हैरानी से सन रह गयी उनका लंड सोया हुआ भी करीब 5 ईच लंबा होगा फिर मेरी चुत में भे चीटिया दोडने लगी मेरे मन में आया इसे खडा कर के देखती हूँ मैने लंड को मुह में ले कर थोडा गीला किया और दोनों हाथो से मुठ मारने लगी लंड में जैसे बिजली का करंट दोड गया वो खडा हो कर लगभग १२ ईच लंबा हो गया फिर सोचा देखती हू अगर मेरी चुत में घुसा तो कहा तक जवेगा मैने अपनी साडी और पेटीकोट निकल कर अलग रख दिया और ऊपर से नापने लगी,

वो मेरी चुत से पेट के बीच तक आया ये सब देख कर मेरी तो हवा खराब हो गयी जेसे मेंने हटना चाहा तो ससुर जी का हाथ अपनी जाँगो पर पाया उन्होंने मेरी जाँगो को मजबूती से पकड़ लिया था उनकी आँख खुली हुई थे और मेरी और देख कर मुस्करा रहे थे

वो कहने लगे अब नाप तो लिया है चुत में तो लेकर देखो बड़ा मज़ा आयेगा में डर गयी और वहा से हटना चाहा लेकिन ससुर जी ने मुझे बेड पर पटक दिया और मेरी चूची दबाने लगे में तो उस समय मदहोस सी हो गयी थी चुत भी गीली हो गयी थी मैने उनको रोकने की कोशिश की लेकीन ससुर जी ने मेरी एक नहीं सूनी और मेरा ब्लाउज और ब्रा निकल कर फैक दी और मेरी एक चूची मुह में ले कर चूसने लगे में तो जैसे पागल सी हो गयी !

मेरी चुत में एक उंगली डाल कर अंदर ……बाहर करने लगे थोड़ी देर ऐसा करने से मेरी चुत पनिया गयी थी अब ससुर जी मेरी टांगो के बीच में आ गए और मेरी चुत जोरो से चाटने लगे मुझे लगा मेरा पानी निकल जावेगा मैने ना चाह कर भी ससुर जी का लंड हाथ में पकड़ लिया और आगे पीछे जोरो से करने लगी ससुर जी का लंड इस समय एक मोटी लोहे की राड जेसा लग रहा था अचानक ससुर जी ने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरी गीली चुत के दाने पर घिसने लगे मेरी तो जान ही निकल गयी और मेरे मुँह से कामुक सिसकियाँ निकलने लगी लग रहा था,

चुत का लावा अभी बाहर आ जवेगा और ५ मिनट बाद ही मेरी चुत से बरसात होने लगी ससुर जी मेरी तरफ मुस्करा कर देखा और बोले बहु अभी तो लंड चुत के अंदर भी नहीं गया तेरी चुत ने तो ढेर सारा पानी भी छोड दिया यह सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए और मैने धीरे से ससुर जी के कान में कहा पापा जी मेरी चुत बहुत दिनों से पयासी है इसकी प्यास बुझा दो प्लीज!

ससुर जी प्यार से मेरे होठ चूसने लगे फिर मेरी चुत चाटने लगे और अपनी जीभ मेरी चूत में घुमाने लगे , अचानक उसने अपनी जीभ मेरे चूत के दाने पर लगाई और कस कर चूस दिया। मेरे मुँह से जोर की सीत्कार निकल गई “उईई …… माँ……… और…… चूसो… न…… ।”
ससुर जी ने अब दो उंगली चुत में डाल दी और अंदर बाहर …करते हुए मेरे चूत के दाने को चूसते रहे मेरी चुत में तो अब जेसे आग लगी थी लगता था एक बार फिर चुत का रस बाहर आ जावेगा ! मैने ससुर जी को कहा पापा जी मेरी चुत मुझे बहुत ही तंग करती है, मुझे ! बहुत ही खुजली मचती है इसमें !

बस अब मेरी चूत में अपना लन्ड डाल कर कस कर चोद डालो !” मेरी प्यास बुझा दो ना अब सहा नहीं जा रहा और ससुर जी के हलंबी लंड को हाथ में ले कर मसलने लगी लंड की मोटाई मेरी मुठी में नहीं आ रही थी ये सोच कर की मेरी चुत आज जरूर फट जवेगी में थोडा डर भी गयी ससुर जी ने ये मेरे चेहरे को देख कर भाँप लिया और प्यार से बोले बहु घबरा मत आज तुझ्रे वो मज़ा दूगा फिर कभी दूसरे लंड से नहीं चुदवाओगी!

लेकिन पापा जी आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !” ससुर जी ये सुन कर थोड़े मुस्कराए और कहा बहु चल अब लंड को मुह में ले कर चूस ! लंड तो पहले से ही लोहे की राड जेसा था मै अब लंड को चूसने लगी ससुर जी भी पुरे जोश में आ गए थे और मेरे मुह को लंड से चोदने लगे मेरी तो साँस ही रुकने लगी ! कुछ देर ऐसा करने के बाद अब ससुर जी ने अपना लंड मेरी चुत के मुह पर रखा और थोडा धीरे से अंदर किया पक की आवाज से लंड का टोपा चुत में चला गया और एक जोर का धकका मारा लंड करीब ३-४ इंच अंदर चला गया …


मेरी तो जान ही निकल गयी ! ससुर जी पुराने खिलाडी थे लंड पूरा अंदर ना कर के धीरे धीरे धकके लगाने लगे ! लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरी चूत कसी हुई थी। जैसे ही वो अपना लन्ड बाहर निकालता मेरी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद उन्होंने एक तकिया मेरी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया !

अपना लन्ड मेरे योनि-द्वार पर रखा और कमर को पकड कर एक जोर से झटका दिया,ससुर जी का पूरा लन्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। में उत्तेजना में भर गई, और उनके सीने से चिपक गई और मेरे मुँह से निकल पड़ा,”ओह्ह्ह्…… …हाय्… ………अब……मजा मिला है ! बस पापा जी ऐसे ही चोदते रहो बहुत मज़ा आ रहा है !फिर उन्होंने मेरी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और मेरी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करने लगे। पुरे कमरे में फचा फच …. ….फचा फच की आवाज आ रही थी मेरी कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो गयी थी कि मेरा सारा शरीर तप रहा था, मैने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी, मेरा शरीर मछली की तरह तड़प रहा था और मुझे कुछ होश नहीं था                Sasur Ji Ka Mota Lund

जैसे ही ससुर जी का लन्ड मेरी …चूत में जाता,में अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, लन्ड के हर प्रहार का जबाव में अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। कमरे में मेरे मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं,” आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल !

मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………” अचानक मेरा पूरा जिस्म अकडने लगा और में झड़ गई इतनी जोर से स्खलित हुई की गर्म गर्म रस से मेरी चुत भर गयी। अभी भी ससुर जी लगातार मुझे तेजी से चोदे जा रहे थे और करीब १५ मिनट तक चोदने के बाद मेरी चुत में ही झड गए! मुझ में अब उठ कर बैठने की भी हिम्मत नहीं थी! ससुर जी ने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए मुझे जोर का पेसाब लगा था

मैने ससुर जी को कहा आप बाहर जाओ मुझे …पेसाब करना है लेकीन ससुर जी नहीं माने और कहा बहु तेरी चुत से पेसाब निकलता हुआ मुझे देखना है! में शरमा गयी ससुर जी बोले बहु अब क्यों शरमा रही हो और में सर नीचे कर के कमोड पर बैठ कर उनके सामने मूतने लगी और मैने देखा मेरी चुत से पेसाब के साथ खून भी आ रहा था मैने ससुर जी पर नाराजगी दिखाते हुए कहा आपने मेरी चुत फाड दी है देखो खून भी आ रहा है


ससुर जी ने नीचे झुक कर मेरी चुत के दाने पर उंगली रगड़ दी अब मेरी चुत में जोर से खुजली हुई और मैने ससुर जी को देखा उनका हलंबी लंड पुरे जोरो से खडा था एक बार तो में लंड को देखते ही डर गयी लेकीन क्या करती मेरी चुत में भी तो जोरो की खुजली लगी थी अब में बेशरम बन गयी थी ससुर जी के लन्ड को मुह मे ले कर चुसने लगी और देखते ही देखते लन्ड महाराज मेरी पकड़ से बहार होने लगे!

ससुर जी बोले बहु एक बार और चुदाई कर लेने दो मेने चुपचाप लन्ड को चुत के दाने से रगडना शुरु कर दिया मेरी चुत मे तो जेसे आग लगी थी अब ससुर जी ने एक ही झटके पुरा का पुरा लन्ड चुत मे डाल दिया मेरी तो जान ही निकल गई और मेने कहा पापा जी मज़ा आ गया चोदो अपनी बहु को जोर से चोदो! कमोड पर बैठे हुए ससुर जी ने मेरी दोनो टागे अपने कधे पर रखी हुई थी

इस तरह से मेरी गान्ड का भुरा ……छेद साफ़ दिखाई दे रहा था ससुर जी ने चुत से लन्ड निकाला और मेरी गान्ड मे पुरे जोर से अनदर कर दिया मेरी जोरो से चीख निकल गई हाय माँ मर गई! ससुर जी का लन्ड मेरी गान्ड मे पिसटन की तरह चल रहा था! मुझ से बरदाश्त नहीं हुआ और मेरी चुत ने लबालब रस छोड दिया! Sasur Ji Ka Mota Lund

आधे घंटे की घमसान गान्ड चुदाई के बाद ससुर जी ने मेरी गान्ड लन्ड रस से भर दी! अब तो ससुर जी का हलंबी लंड मेरी मुनिया चुत को भा गया था और रोज़ ही रात को चुदाई का खेल होने लगा ! एक रात को मेरी नंनद पूजा ने मेरी चुदाई का खेल देख लिया और मेने पूजा को ससुर जी यानी पूजा के पापा से केसे चुदवाया वो फिर कभी और नंनद भाभी एक साथ चुदाई का मजा लेने लगे

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में


ससुरजी का बुड्ढा लंड जवानों के लंड से भी बेहतरीन था वो कहते हैं ना "पुराने देसी घी और पिशौरी बादाम खाए हुए थे शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी एक ऐसी लौंडिया से करवाई, जो कमाल की हसीना थी। लौंडिया का नाम बता देना सही रहेगा, उस हसीना जिसकी गरमागरम जवानी कमाल की थी, उसका नाम था बबिता।

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में

जब बबिता अपने दूल्हे-राजा के घर आई तो उसके सपने काफ़ी रंगीन थे, वो अपने साथ बालीवुड के हीरो और हिरोइनों की तस्वीरें लेकर आई, लौंडिया को चुदाई और सेक्स के रंगीन ख्वाबों ने घेर रखा था।

हो भी क्यों न ! आखिर उसका हुस्न लाखों में एक था ! वह थी भी एक माल जैसा पीस।

मैं आपको जरा उसकी जवानी का नक्शा बता दूँ- कुछ लहलहाते हुए धान के खेतों के रंग का सुनहरा सा रूप, सावन-भादों के काले बादलों जैसे घने बाल और उनके नीचे सुराहीदार गरदन। चूचियों का विवरण देने के लिये शब्द नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि इन कुवाँरी चूचियों को देखकर बड़े से लेकर बुड्डे तक सबका दिमाग, इन्हें पीने को बेताब हो जाता था। ये मयखाने थे, जो अब तक किसी ने चखे नहीं थे।

शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी करके उसके लिये एक खूबसूरत कामुक गरमा-गर्म बहू के रूप में अपने मतलब का माल ले आये थे।

शमशेर सिंह रिटायर्ड टीचर हैं और उनका लंड बड़ा ही घातक और प्रचंड है। उस पर तुर्रा यह कि उनकी बीवी की चूत एकदम सड़े हुए पपीते की तरह नाकाम हो चली है।

अब काम कैसे चलेगा, तो शमशेर सिंह ने अपने भतीजे की शादी एक गरीब बाप की खबसूरत बेटी से तय कर दी थी।

दुल्हन अपने पिया के घर आई, चुदाई के रंगीन सपने लिये। सुहागरात का नजारा, चलने से पहले बता दें कि रणधीर सिंह जी बड़े ही दुबले-पतले लंड वाले और हिले हुए पुर्जे टाइप के इंसान थे, जिनके बस का किसी गांड को मारना या, चूत की सील तोड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।

सुहागरात की रात शमशेर सिंह ने यह नजारा देखने के लिये एक बड़ा ही चौकस जुगाड़ किया और जैसा कि पहले से ही सब तय था कि खुद का कमरा और सुहागरात वाला कमरा आजू-बाजू ही थे और एक ही दीवार दोनों को अलग करती थी। एक खिड़की थी जो सुहागरात वाले कमरे में झांकने का रास्ता थी। उसे उसने पहले से ही थोड़ा हिला-हिला के झिर्रीदार बना दिया था।

जैसे ही चूत की कहानी शुरु होती, शमशेर सिंह ने अपनी आँखें खिड़की से लगा दीं। रणधीर सिंह हिलते हुए अपनी दुल्हन के सामने खड़ा था, वो नीचे देख रही थी और वो ऊपर देख रहा था। कौन किसको चोदने वाला है, यही समझ नहीं आ रहा था लेकिन दुल्हन ने पहल की।

वो समझ गई थी कि ये लौंडा एकदम बकचोदू है और चिकलांडू है क्योंकि सामने चूत का मौका देख कर कोई बकलँड ही इस तरह कांप सकता है।

शमशेर सिंह को खिड़की से यह दृश्य दिखाई दे रहा था और उनका लंड धोती के अंदर डिस्को भांगड़ा करने लगा था। उन्होंने आंखें गड़ा दीं।

बहू ने रणधीर सिंह की शेरवानी खोल दी और पजामे का नाड़ा जल्दी में खींच के तोड़ डाला। कहानी उल्टी चल रही थी और शमशेर सिंह इतनी गर्म बहू देख कर एकदम बाग-बाग थे क्योंकि वो जान गये थे कि इतनी गर्म और कामुक बहू इस नादान और नामर्द लौंडे से संभलने वाली नहीं है, इसीलिए तो उन्होंने इसकी जल्दी ही शादी करवा दी थी।

बहू ने रणधीर सिंह को पूरा नंगा कर दिया। आज वो अपना हक अपने मर्द से छीन लेने वाली थी कि अपने पति का ‘टिंगू-लंड’ देख कर उसका दिल बैठ गया। एकदम दो इंच का लंड था और खड़ा होकर साढे तीन इंच का हो गया था। इसे तो चूसा भी नही जा सकता, हद है भई !

रणधीर सिंह जी हांफ़ रहे थे, दुल्हन के इस गर्मागर्म रूप को देख कर। उसने रणधीर सिंह को पटक कर उनके मुँह पर अपनी चूत रख दी और रणधीर सिंह की सांसें फ़ूलने लगीं

;साले लंड में नहीं था गूदा तो लंका में काहे कूदा !' गाली देते हुए बोली- काहे तेरे मास्टर चाचा ने मेरी शादी तेरे से की ! मादरचोद ले, अब चूस मेरी चूत और सुबह उस धोती वाले की धोती में आग लगा न दी तो मेरा नाम बबिता नहीं।

लगभग आधा घंटा अपनी चूत और गांड उसके मुँह पर रगड़ने के बाद उसने लाईट आफ़ कर दी और अपनी चूत पसार कर सोने चली गई।

शमशेर सिंह का दिल बागम-बाग हो गया, लंड को तेल लगा कर उन्होंने मोटा और नुकीला किया और अपनी धोती खोल कर सहलाते हुए सो गये। बहुत जल्दी सीन में उन्हें एंट्री मारते हुए अपनी बहू को कब्जा लेना था। सुहागरात में अपने भतीजे रणधीर सिंह का नाकाम फ़्लाप शो देख कर खुश हुआ कि अब तो मेरे लंड को चौका मारने का मौका मिलना तय ही है।

सुबह उसने अपने भतीजे रणधीर सिंह को किसी काम से 6-7 दिनों के लिये बाहर भेज दिया। अब घर में अकेले बहू बबिता और खूसट ठरकी बुढ़ऊ शमशेरसिंह ही बचे थे। खाना परोसते समय बहू का आँचल सरक गया, उसके ब्लाउज का मुँह बड़ा चौड़ा था, तो उजली चूचियों शमशेर सिंह के नजरों में चमक गईं। शायद यह बबिता की सोची समझी चाल थी। शाम को शौच के लिये उसे बाहर जाना था, खुले में।

बहू को डर लगा तो शमशेर सिंह के पास आई और पूछा- चाचाजी, मुझे बाहर जाना है, दो नम्बर के लिये ! लेकिन पहली बार इस गांव में निकलते हुए डर लग रहा है।

बुढ़ऊ का दिल बाग-बाग हो गया और उसने कहा- चिन्ता ना कर बहू, घर की चारदीवारी में ही खुले में इसी काम के लिए गड्डा बना रखा है, चली जा। मैं छत पर ही रहूँगा, कोई डरने की बात नहीं है।

बबिता चली गई और बुड्डा छत पर से उसे टट्टी करते देखता रहा। अचानक दोनों की नजरें मिल गईं। बबिता ने अपनी चूत पर टार्च जला कर बुड्डे को अपनी झांट वाली ‘बम्बाट’ बुर दिखा ही दी।

वहीं छत पर खड़े-खड़े बुड्डे की धोती में आग लग गई, लंड खड़ा होने लगा और बुड्डे शमशेर ने अपना सुपारा हाथ में लेकर रगड़ना शुरु कर दिया। अब वह चूत का मैदान मारने की तैयारी कर चुका था। जैसे ही बबिता अंदर आई, दरवाजे पर ही उसने उसे दबोच लिया।

वो बोली- अरे पापा जी रुकिये, गांड तो धो लेने दीजिए अभी टट्टी लगी है उसमें, इतने बेसबरे मत होइये।

शमशेर तुरंत हैंड्पंप के पास जाकर पानी चलाने लगा और बबिता ने लोटे से पानी लेकर अपनी गांड उस बुड्डे के सामने ही छप्पाक-छ्प्पाक धो डाली।

कहानी बुड्डे के अनुसार ही चल रही थी। बूढ़े को अपनी बहू की बड़ी गांड का छोटा छेद बड़ा प्यारा और नाजनीन लगा। वह समझ गया कि यही है मेरे लंड का अंतिम डेस्टिनेशन !

बबिता के खड़े होते ही शमशेर ससुर ने उसे दबोच लिया और उसकी साड़ी वहीं आंगन में ही खोलने लगा। घर में कोई नहीं था, चांदनी रात में भतीज-बहू का चीर-हरण, और दूधिया जवानी, दोनों का मेल गजब का था।

सारे कपड़े खोल बुड्डे ने बबिता के बड़ी चूचियों पर सबसे पहले मुँह मारा।

जैसे ही उसने मुँह मारा, बबिता गाली देने लगी- पी ले अपनी माँ के चूचे... बहनचोद बुड्डे ! कर दी शादी तूने मेरी नामर्द गांडू से?

शमशेर ने कहा- तो कोई बात नहीं बेटी, ये ले बदले में मेरा हल्लबी लौड़ा.. किसी भी जवान से ज्यादा सख्त और बुलंद है।

अपना लंड पकड़ कर वो खड़ा रहा और बबिता नीचे बैठ गई। लंड के सुपारे से चमड़े की टोपी हटा उसने लंड को सूंघा तो उसे उस गंध से समझ में आ गया कि यह पुराना चावल काफ़ी मजेदार है।

अपने मुँह में ढेर सारा थूक लेकर उसने लंड के ऊपर थूक दिया। मुँह में पेलने को बुड्डा बेताब हो रहा था लेकिन बबिता को अपनी ‘हायजीन’ का पूरा ख्याल था। उसने लंड को थूक से धोने के बाद उस थूक से लंड की मसाज चालू कर दी। बुढ़ऊ शमशेर गाली बक रहा था- हाय मादरचोद, मार डालेगी क्या ! साली जल्दी से मुँह में डाल ! इतना रगड़ती क्यों है... तेरी माँ का लौड़ा !! उफ़्फ़ चूस ना, चूस ना !

बबिता ने अधीरता नहीं दिखाई और आराम से लंड को थूक कर चाटती रही। जब पूरा लंड साफ़ चकाचक हो गया, अपने मुँह का रास्ता उस लंड को दिखा दिया। अब बुड्डे के लंड ने मुँह को चूत समझ लिया और उसमें अपना लंड किसी एक्सप्रेस की तरह घुसम-घुसाई करने लगा।

"आह… आह… ले… ले… ये ले… मादरचोद… तुम्हारा ससुर अभी जवान है... ये ले चूस तेरी माँ का लौड़ा।"

बबिता एकदम अवाक थी अपने बुड्डे ससुर की ‘परफ़ार्मेंस’ से। उसने अपना गला फ़ड़वाने की बजाय रात की प्यासी चूत की चुदास बुझाना बेहतर समझा।

अब बुड्डे का सपना सच हो गया था। बहू चोद ससुर शमशेर सिंह ने अपनी बहू बबिता को चोदने की सेटिंग कर ली। अब आप देखेंगे उन दोनों की चुदाई का भयंकर नजारा।

बबिता ने तुरंत उसका लंड ऐंठ कर शमशेर सिंह को नीचे गिरा दिया। बुड्डा अपनी बहू के इस कदम से भौंचक्का रह गया, लेकिन यह काम बबिता ने उसके अंदर गुस्सा जगाने के लिये किया था जिससे कि वह बदले की भावना से जबरदस्त पेल सके।

बुड्डे ने अपनी धोती खोल फ़ेंकी, उसके अंडकोष किसी पपीते की तरह आधा-आधा किलो के थे। बबिता को पटक कर उसने अपना अंडकोष उसके मुँह में दे डाले, कहा- ले चूस बहू, बहुत कलाकार है तू बे मादरचोद साली, लाया था बहू, निकली रंडी। अब तो मेरा काम सैट कर देगी तू !

बबिता ने उस अन्डकोष को शरीफ़ा की तरह अपनी जीभ से कुरेदना जारी रखा। बुड्डा अपने मोटे लंबे लंड से चूत उसके बड़े चूचों की पिटाई कर रहा था और अपनी ऊँगलियाँ उसकी झांटों पर फ़िरा रहा था।

जब पूरे अंडकोष पर उसने अपनी जीभ फ़िरा चुकी तो बुड्डे ने अपनी गांड का छेद अपनी बहू के मुँह पर रख दिया।

"ले कर रिम-जॉब !"

बुड्डा वाकई चोदूमल था, उसे रिम-जाब मतलब कि गांड को चटवाने की कला भी आती थी और वो इसका रस खूब लेता रहा था। वाकयी में जब भी वो सोना-गाछी जाता रंडियाँ उसे नया-नया तरीका सिखातीं और अब तो वह अपने घर में ही परमानेंट रंडी ले आया था।

बबिता ने उसकी गांड को चाट कर उसमें एक उंगली करनी शुरु कर दी। बुढ्ढा पगला गया, उसने तपाक बहू की झांटें पकड़ी और ‘चर्र’ से एक मुठ्ठी उखाड़ लीं।

"हाय !! मादरचोद बुड्डे !! तुझको अभी देखती हूँ !"

बबिता ने बदले में पूरी उंगली उसकी गांड में घुसेड़ कर कहा- मादरचोद पेलेगा नहीं सिर्फ खेलेगा ही क्या बे?

कहानी मजेदार होती जा रही थी। अब बुढ़ऊ की मर्दानगी जग चुकी थी, भयंकर रूप लिये बरसों से चूत के प्यासे मोटे लंबे लंड को, उसने अपनी प्यारी बहू की मुलायम चिकनी चूत में डाल देने का फ़ैसला कर लिया था।

उसने बबिता की टाँगें खोल दीं और अपनी उंगलियों से चूत का दरवाजा खोला।

बबिता मारे उत्तेजना के गालियाँ बक रही थी। वो खेली-खाई माल थी। बुड्ढे ने अपने लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर छोटे से छेद की बाहरी दीवार वाली लाल-लाल पंखुड़ी पर घिसना चालू किया।

बबिता की सिसकारियाँ गहरी होती चली जा रही थीं। ससुर शमशेर ने उसकी बाहर की ‘मेजोरा- लीबिया’ मतलब कि चूत की बाहरी दीवाल को ऐसे खींच रखा था, जैसे टीचर किसी छोटे बच्चे का कान खींच के सजा दे रहा हो। माहौल एकदम गर्म हो चुका था।दोनों तरफ़ की दीवालों को रगड़ने के बाद बुड्ढे ने अपना लंड का मुँह बबिता के थूक से दोबारा गीला करने के लिये बबिता के मुँह में हाथ डाल ढेर सारा थूक बटोरा और फ़िर अपने लंड के मुहाने पर लगा और अपना थूक उसकी चूत में चारों तरफ़ घिस कर अपना लंड धंसाना शुरु कर दिया।

बबिता की आँखें नाचने लगीं थी। उसकी कहानी ससुर के लंड से लिखी जा रही थी और वाकयी ससुर शमशेर का बुड्ढा लंड जवानों के लंड से भी बेहतरीन था वो कहते हैं ना "पुराने देसी घी और पिशौरी बादाम खाए हुए थे !"

वो रुका नहीं और चूत के पेंदे पर जाकर सीधा टक्कर मारी, बबिता चिल्लाई- अई माँ ! मर गई प्लीज पापा रुकिये ना !

लेकिन नहीं... शमशेर सिंह को चुदास चढ़ चुकी थी और सालों बाद कोई करारा माल और उसकी चूत की कहानी लिखने का मौका मिला था। लंड नुकीला करके उन्होंने उस चूत का सत्यानाश करना शुरु कर दिया था और फ़िर उसके सुनामी छाप धक्कों से चूत की दीवालें तहस-नहस हो रही थीं।

बबिता अध-बेहोश हो चली थी और शमशेर ने उसे पलट कर पेट के बल लिटा दिया। अब उसकी गांड फ़टने वाली थी, दो उंगलियों से पकड़कर उसकी गांड खोल दी शमशेर ने और अपनी जीभ अंदर डाल दी। ताजा-ताजा धुली गांड खूश्बूदार थी। गांड को गीला कर के ढेर सारा थूक अंदर कर दिया, गांड तैयार थी।

उसने अपना मोटा लंड एक ही बार में अंदर कर दिया और बबिता चिल्लाई- बचाओ !!

लेकिन कोई फ़ायदा नहीं। उसकी गांड खुल चुकी थी और लंड उसे छेदते हुए अंदर था। आधे घंटे तक यह गांड मारने के बाद शमशेर सिंह ने अपना वीर्य उसके पिछवाड़े पर निकाल कर लंड को चूचों में पोंछ दिया।

रात में यह कार्यक्रम तीन-चार बार उस खुली चांदनी में फ़िर चला। ससुर और बहू की यह कहानी अनवरत चुदाई के साथ चलती रही।

नई नवेली बहू की रसमलाई चूत की पहली चुदाई

नई नवेली बहू की रसमलाई चूत की पहली चुदाई, नई बहू की कुंवारी चूत की पहली चुदाई
मैं आपको एक बहुत ही रोचक घटना बताने जा रहा हूँ मैंने कैसे अपनी नई नवेली बहू की रसमलाई चूत की पहली चुदाई bahu ki chudai कर डाली मेरा नाम विक्रम सिंह है और मेरी उम्र 48 साल है मेरी पत्नी का देहांत करीब 5 साल पहले हो गया था फिटनेस फ्रिक होने की वजह से मैं अभी तक बहुत फिट रहता हूँ पत्नी के जाने के बाद मेरे कई औरतों और कम उम्र की लड़कियों से शारीरिक सम्बन्ध रहे हैं

मेरा एक ही बेटा है और कोई औलाद नहीं घर में हम 2 लोग ही थे पर अभी 2 महीने पहले मैंने मेरे बेटे रवि की शादी करवा दी मेरी बहु आरती बहुत सुन्दर, आकर्षक और अच्छे स्वाभाव की लड़की है

अब चूंकि रवि अपने काम में इतना व्यस्त है कि आरती पूरे दिन में कई घण्टे मेरे साथ ही बिताती है। उसने मुझसे पूछा भी कि क्या वह मेरे साथ मेर जिम में, टेनिस, तैराकी में साथ आ सकती है तो मुझे उसे अपने साथ रखने में कुछ ज्यादा ही खुशी का अनुभव हुआ। हम अक्सर साथ साथ शॉपिंग के लिए भी जाते तो एक बार क्या हुआ कि-

आरती-रवि की शादी को दो महीने ही हुए थे, हम मत्लब आरती और मैं एक मॉल में स्विम सूट देख रहे थे, थोड़ा मुस्कुराते हुए, थोड़ा शरमाते हुए आरती ने मुझे एक छोटी सी टू पीस बिकिनी दिखाई और पूछा- यह कैसी है पापा?

और जिस तरह से यह पूछते हुए उसने मेरी ओर देखा, तो दोस्तो, मेरे जीवन में शायद इससे उत्तेजक अदा किसी लड़की या औरत ने नहीं दिखाई थी। उसके चेहरे पर मुस्कान थी, आँखों में शरारत भरा प्रश्न था, उसकी यह कामुक अदा मुझे मेरे अन्दर तक हिला गई।

मैंने बिना एक भी पल गंवाए उसकी कमर पर अपने दोनों हाथ रखे और दबाते हुए कहा- हाँ ! इसमें तुम लाजवाब लगोगी, तुम्हारी ही फ़िगर है इसे पहनने के

लिए एकदम उपयुक्त !

वो खिलखिलाई- मैं तो बस मजाक कर रही थी पापा ! मैं इसे आम स्विमिंगपूल में कैसे पहन सकती हूँ.

“लेकिन जान ! मैं मजाक नहीं कर रहा !” मैंने अपना एक हाथ उसकी कमर के पीछे लेजा कर, दूसरा हाथ उसके कूल्हे पर रखकर उसे अपनी तरफ़ दबाते हुए

कहा- हमारा क्लब एक विशिष्ट क्लब है और यहाँ पर काफ़ी लड़कियाँ और महिलाएँ ऐसे कपड़े पहनती हैं। और वीक-एण्ड्स को छोड़ कर अंधेरा होने के बाद तो शायद ही कोई क्लब में होता हो ! तुम इसे उस वक्त तो पहन ही सकती हो !

अब तक मेरा ऊपर वाला हाथ भी नीचे फ़िसल कर उसके चूतड़ों पर आ टिका था।

मैंने सेलगर्ल की ओर घूमते हुए वो बिकिनी भी पैक करने को कह दिया।

अगली सुबह आरती मेरे साथ ज़िम में थी, उसकी छरहरी-सुडौल काया से मेरी नजर तो हट ही नहीं रही थी। उसने भी शायद मेरी घूरती नजर को पहचान लिया था,

तभी तो उसके गुलाबी गाल और लाल लाल से हो गए थे, और ज्यादा प्यारे हो गए थे। वो मेरे पास आकर मेरे गले में एक बाजू डालते हुए बोली- जब आप मेरी तरफ़ इस तरह से देखते हैं ना पापा ! मुझे बहुत शर्म आती है पर अच्छा भी बहुत लगता है।

उसने अपना चेहरा मेरी छाती में छिपा लिया, मैं उसकी पीठ थपथपाते हुए उससे जिम में रखी मशीनों के बारे में बात करने लगा कि उन्हें कैसे इस्तेमाल करना है और उनसे क्या नहीं करना है।

उसे मेरी बातें तुरन्त समझ आ जाती थी और अपनी बात भी मुझसे कह देती थी।

हमने ज़िम में थोड़ी वर्जिश करने के बाद आराम किया, फ़िर नाश्ता करके टेनिस के लिये क्लब आ गये।

उसे टेनिस बिल्कुल नहीं आता था तो मैंने उसे रैकेट पकड़ना आदि बता कर

शुरु में दीवार पर कुछ शॉट मार कर कुछ सीखने को कहा। गयारह बजे तक हम वापिस घर आ गए और आते ही वो तो बगीचे में ही कुर्सी पर ढेर हो गई।

मैं उसके पास वाली कुर्सी पर बैठ गया और पूछा- क्या मैंने तुझे ज्यादा ही थका दिया?

उसने कहा- नहीं पापा, ऐसी कोई बात नहीं !

पर उसके चेहरे के हाव भाव से साफ़ नजर आ रहा था कि वो थक चुकी है, मैं उसकी कुर्सी के पीछे खड़ा हुआ और उसके कंधे और ऊपरी बाजुएँ सहलाते हुए

बोला- टेनिस प्रैक्टिस कुछ ज्यादा हो गई !

वो बोली- पापा, कई महीनों से मैंने कसरत आदि नहीं की थी ना, शायद इसलिए !

मैंने कुछ देर उसकी बाजू, कन्धे और पीठ सहलाई तो वो कुर्सी छोड़ खड़े होते हुए बोली- पापा, आप कितने अच्छे हैं।

यह कहते हुए उसने मुझे अपनी बाहों में भींच लिया। मैंने भी उसके बदन को अपनी बाहों के घेरे में ले लिया और कहा- मेरी आरती भी तो कितनी प्यारी है !

कहते हुए मैंने उसके माथे का चुम्बन लिया और जानबूझ कर अपनी जीभ से मुख का थोड़ा गीलापन उसके माथे पर छोड़ दिया।

“पापा, मैं कितनी खुशनसीब हूँ जो मैं आपकी बहू बन कर इस घर में आई !”

“आप यहीं बैठ कर आराम कीजिए, मैं चाय बना कर लाती हूँ !” कहते हुए आरती मुड़ी।

मैं कुर्सी पर बैठ कर सोचने लगा- मैं भी कितना खुश हूँ आरती जैसी बहू पाकर ! आज कितना अच्छा लगा आरती के साथ !

तभी मन में यह विचार भी आया कि उसके वक्ष कैसे मेरी छाती में गड़े जा रहे थे जब वो मेरी बाहों में थी।

ओह ! जब आरती चाय बनाने के लिए जाने लगी तो मेरी नजर उसके चूतड़ों पर पड़ी, उसका टॉप थोड़ा ऊपर सरक गया था और शायद टेनिस खेलने से उसकी सफ़ेद निक्कर थोड़ी नीचे होकर मुझे उसके चूतड़ों की घाटी का दीदार करा रही थी। अब या तो उसने पैंटी पहनी ही नहीं था या फ़िर पैन्टी निक्कर के साथ नीचे खिसक गई थी।

अब तो यह देखते ही छलांगें मारने लगी।

मैं भूल गया कि यह मेरी पुत्र वधू है, मैं उठ कर उसके पीछे रसोई में गया, उसके पीछे खड़े होकर उसे चाय बनाते देखने लगा। मेरी निक्कर का उभार उसके कूल्हों के मध्य में छू रहा था !

उसने पीछे मुड़ कर अपने कन्धे के ऊपर से मेरी आँखों में झांका और बोली- पापा, मैं तो चाय लेकर बाहर ही आने वाली थी।

उसने मेरे लिंग के पड़ रहे दबाव से मुक्त होने के लिए अपने चूतड़ थोड़े अन्दर दबा लिए और मैं उसकी टॉप और निक्कर के बीच चमक रही नंगी कमर पर अपनी दोनों हथेलियाँ रख कर बोला- मैं कुछ मदद करूँ?

मेरे इस स्पर्श से उसे एक झटका सा लगा और वो मेरी ओर देखने के लिए मुड़ी कि उसके चूतड़ मेरे लिंग पर दब गए, मेरा उत्थित लिंग उसके पृष्ठ उभारों के बिल्कुल बीच में जैसे घुस सा गया।

उसे मेरी उत्तेजना का आभास हो चुका था पर कोई प्रतिक्रिया दिखाए बिना वो बोली- चलिए पापा ! चाय तैयार है।

वो मेरे आगे आगे चलने लगी और मैं उसके पीछे पीछे उसकी नंगी कमर और ऊपर नीचे होते कूल्हों पर नजर गड़ाए चलने लगा।

बाहर पहुँचते पहुँचते मैं अपने को रोक नहीं पाया और जैसे ही आरती चाय स्टूल पर रखने के लिए झुकी, मैं अपनी दोनों हथेलियाँ उसके कूल्हों पर टिकाते हुए बोला- नाइस बम्स !

इसी के साथ मैंने अपनी दोनों कन्नी उंगलियाँ कूल्हों की दरार में दबा दी।

“ओह पापा ! आप भी ना ! अभी चाय छलक जाती !” चाय रखने के बाद वो मेरी तरफ़ घूमते हुए बोली और मेरे हाथ फ़िर से उसकी कमर पर आ गये।

“तुम्हारे कूल्हे बहुत लाजवाब हैं आरती ! आई लाइक दैम !” पता नहीं

मैं कैसे बोल गया और इसी के साथ मेरी आठों उंगलियाँ उसकी निक्कर की इलास्टिक को खींचते हुए उसके चूतड़ों के नंगे मांस में गड़ गई।

आरती के बदन में जैसी बिजली सी दौड़ गई और थोड़ी लज्जा मिश्रित मुस्कान के साथ बोली- सच में पापा?

हाँ आरती ! तुम्हारे चूतड़ एकदम परफ़ेक्ट हैं ! इससे बढ़िया चूतड़ मैंने

शायद किसी के नहीं देखे !” कहले हुए मैंने अपनी हथेलियाँ कुछ इस तरह नीचे फ़िसलाई कि सफ़ेद निक्कर उसकी जांघों में लटक गई।

आरती अपनी जगह से हिली नहीं और अब मैं उसके नंगे चूतड़ अपने हाथों में मसल रहा था।

मैंने फ़ुसफ़ुसाते हुए उससे कहा- आरती ! मैंने बहुत सारे चूतड़ इस तरह

नंगे देखे हैं, सहलाए हैं, चाटे भी हैं पर… कहते कहते मैंने अपनी उंगलियों

के पोर उन दोनों कूल्हों के बीच की दरार में घुसा दिए।

हाँ पापा ! मैंने सुना है कि आपने खूब… !” कहते हुए वो कामुक मुस्कान के साथ शरमा गई।

“तुम्हें किसने बताया?”

उसके कनखियों से मेरी तरफ़ देखा और अर्थपूर्ण मुस्कुराहट के साथ

बोली- काम्या ने ! वो मेरे साथ कॉलेज में पढ़ती थी, वो मेरी सहेली थी और चटखारे ले ले कर आपकी रसीली कहानियाँ मुझे सुनाया करती थी। इसी के साथ वो खिलखिला कर हंस पड़ी।

अब यह मेरे लिए परेशानी वाली बात थी, मैंने पूछा- काम्या ने तुम्हें क्या क्या बताया?

अब मेरे हाथ खुल्लमखुल्ला आरती के चूतड़ों से खेल रहे थे।

वो फ़िर खिलखिलाई- ये लड़कियों की आपस की बातें हैं ! मैं आपको नहीं बताऊँगी।

“लेकिन ना कभी काम्या ने ना कभी तुमने बताया कि तुम सहेलियाँ थी?”

“रवि से मेरी शादी करवाने में काम्या का ही तो हाथ है ! दो साल पहले जब एक बार आप लन्दन गये हुए थे तो काम्या मुझे यहाँ इस घर में लेकर आई थी। उस समय सुमन मौसी भी यहीं थी। तो काम्या ने ही मौसी को बीच में डाल कर रवि की शादी मुझसे करवाई।”

“ओह ! तो सुमन भी तुम्हारे साथ मिली हुई है?”

“तो क्या पापा? सुमन मौसी तो आपके साथ भी… है ना?”

“ह्म्म !”

“सुमन मौसी ने ही तो बताया था कि…!!”

“क्या बताया था उसने? बोलो !?!”

“उन्होंने बताया था कि आप किसी भी लड़की को अपने चुम्बन से पागल कर सकते हो !”

“सुमन से भी ना चुप नहीं रहा जाता… तो अब तुम भी पागल…? हंह…?” मैंने उसके टॉप के अन्दर उसकी पीठ पर एक हाथ फ़िराते हुए कहा।

“हाँ पापा, मुझे भी अपने होंठों का जादू दिखाइए ना !” आरती ने अपना चेहरा ऊपर उठा कर अपने होंठों को गोल करते हुए कहा।

मैं अपना हाथ उसकी पीठ से सरका कर गर्दन तक ले आया और उसके सिर को पीछे के जकड़ते हुए अपने होंठ उसके रसीले होंठों पर रख दिये।

मेरे हाथ के उसके सिर पर जाने से हुआ यह कि उसका टॉप भी मेरे हाथ के साथ आरती के कन्धों में आकर रुका।

मेरा दूसरा हाथ जो अभी तक उसके चूतड़ों पर था, वो फ़िसल कर उसकी जांघ तक चला गया और उसकी जांघ को उठा कर मैंने अपनी बाजू पर ले लिया।

आरती ने अपने को मुझसे छुटवाते हुए कहा- पापा, अन्दर चलते हैं।

मैंने उसे छोड़ते हुए कहा- चलो ड्राइंग रूम में चलो !

जैसे ही वो सीधी खड़ी हुई, उसकी निक्कर उसके पैरों में ढेर हो गई।

मैंने निक्कर को पकड़ कर उसके पैरों से निकाल कर कहा- चलो, मैं इसे सम्भालता हूँ।

वो आगे आगे, मैं पीछे पीछे उसकी निक्कर को हाथ में लेकर सूंघते हुए चल रहा था, उसकी जांघों और योनि की गन्ध उस निक्कर में रमी हुई थी। कपड़ों के नाम पर आरती के गले में उसका टॉप एक घेरा सा बनाए पड़ा था। निक्कर मेरे हाथ में थी, ब्रा पैन्टी पहनना शायद उसे भाता नहीं था।

अन्दर ड्राइंग रूम में जाकर आरती ने ऐ सी और सारी बत्तियाँ जला दी। पूरा कमरा रोशनी से नहा गया।

और जैसे ही आरती बत्तियाँ जला कर मेरी तरफ़ घूमी, उसने अपने गले से वो टॉप निकाल कर मेरे मुँह पर फ़ेंक दिया।

लेकिन मेरी नजर तो उसकी नाभि पर थी, उसमें उसने एक बाली पहनी हुई

थी। उसके बाद मेरी निगाहें सरक कर नीचे गई तो देखा योनि ने घने सुनहरे-भूरे

बालों का घूंघट औढ़ा हुआ था।

आरती ने मेरी तरफ़ अपनी बाहें फ़ैलाते हुए कहा- आओ ना पापा ! मुझे अपने होंठों से पागल करो ना !

आरती अपने होंठों पर जीभ फ़िरा रही थी, उसके गीले होंठ मुझे निमंत्रण दे रहे थे।

मैंने उसके गालों को अपनी हथेलियों में पकड़ कर उसकी गहरी आँखों में झांका और अपने होंठ उसके होंठों पर हल्के से रगड़ दिया।

उसके मुख से सिसकारी फ़ूटी- पापा ! और करो ! प्लीज़ !

“जानू… अब तुम्हारी बारी है !” मैं उसके नंगे चूतड़ों को अपने हाथों में सहेजते हुए फ़ुसफ़ुसाया।

“पापा…प्लीज़ आप करो ना ! प्लीज़ पापा ! करो !” वो एक छोटे बच्चे की तरह मचलते हुए बोली- जन्नत का मजा तो आप ही मुझे देंगे ना पापा !

“ओ… ठीक है ! मेरे सिर को आपने हाथों में थाम लो आरती !”

बिना एक भी शब्द बोले उसने मेरा सिर पकड़ कर अपने चेहरे पर झुका लिया, हमारे होंठों ने एक दूसरे को छुआ और मैं उसे अपने होंठों से सताने लगा।

आरती का पूरा बदन काम्प रहा था और उसके मुख से कामुक सीत्कारें निकल रही थी।

और तभी अचानक एकदम से उसने मेरे होंठों को चॉकलेट की तरह चूसना-खाना शुरु कर दिया।

आरती की इस हरकत ने मुझे भी पागल सा कर दिया, मैंने उसके चूतड़ों के

नीचे अपने दोनों हाथ ले जा कर उसे ऊपर को उठाया तो उसने अपनी टांगें मेरे

कूल्हों के पीछे जकड़ ली।

इससे उसके चूतड़ों के बीच की दरार चौड़ी हो गई और मेरा मध्यमा उंगली उसकी गाण्ड के छिद्र को कुरेदने लगी।

लड़की मेरे बदन पर सांप की तरह लहरा कर रह गई और मेरी उंगली उस कसे छिद्र को भेदते हुए लगभग एक इंच तक अन्दर घुस गई।

आरती हांफ़ रही थी- ऊ… पापा… उह पा…आह… ना…

मुझे याद नहीं हम कितनी देर तक इस हालत में रहे होंगे कि तभी उसका मोबाइल घनघना उठा।

और इस आवाज से हमारे प्यार के रंग में भंग हो गया।

उसने एक हल्के से झटके के साथ अपनी टांगें मेरी कमर से नीचे उतारी और बोली- पापा, जरा उंगली निकालो, मैं फ़ोन देख लूँ !

जैसे ही मैंने अपनी उंगली उसकी गाण्ड से निकाली उसने मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने नाक तक ले जा कर मेरी उंगली सूंघने लगi।

उसने पीछे हटकर फ़ोन उठाकर देखा तो उसके पति यानि मेरे बेटे रवि का फ़ोन था

मैंने आरती की आँखों में देखा तो वो शर्म के मारे मुझसे नजरें चुराने लगी।

मैं इसके पास गया और आरती से सट कर फ़ोन पर अपना कान लगा दिया।

रवि उससे पूछ रहा था कि सुबह क्या क्या किया और आरती ने भी अभी आखिर की कुछ घटनाओं को छोड़ कर उसे सब बता दिया।

रवि ने पूछा कि वो हांफ़ क्यों रही है तो आरती ने बताया कि वो नीचे

थी और फ़ोन ऊपर, फ़ोन की घण्टी सुन कर वो भाग कर ऊपर आई तो उसकी सांस फ़ूल गई।

सच में मेरी पुत्र-वधू काफ़ी चतुर है ! मैंने मन ही मन भगवान को इसके लिये धन्यवाद किया।

मैं अपने बीते अनुभवों से जानता था कि गर्म लोहे पर चोट करने का

कितना फ़ायदा होता है। मेरे बेटे का फ़ोन बहुत गलत समय पर आया था, बिल्कुल उस समय जब मैं अपने बहू की योनि तक पहुँच ही रहा था और वो भी मेरी हरकतों का माकूल जवाब दे रही थी।

अगर रवि का फ़ोन बीस मिनट भी बाद में आया होता तो मेरी बहू अपने ससुर के अनुभवी लौड़े का पूरा मजा ले रही होती।

लेकिन शायद भाग्य को यह मंजूर नहीं था !

मैं फ़ोन पर कान लगाए सुन रहा था– मेरे बेट-बहू लगातार ‘लव यू !’ और चुम्बनों का आदान प्रदान कर रहे थे फ़ोन पर !

और मुझे महसूस हो रहा था कि जितनी देर फ़ोन पर मेरे बेटे बहू की यह

रासलीला चलती रहेगी, मेरे लण्ड और मेरी बहू आरती की चूत के बीच की दूरी

बढ़ती जाएगी। और शायद रवि को बातचीत खत्म करने की कोई जल्दी भी नहीं थी।

मुझे आज मिले इस अनमोल अवसर को मैं व्यर्थ ही नहीं गंवा देना चाहता था, तो मैंने अपनी बहू को उसके पीछे आकर अपनी बाहों में जकड़ लिया।

आरती मेरे बेटे के साथ प्यार भरी बातों में मस्त थी और उसने मेरी

हरकत पर ज्यादा गौर नहीं किया, वो अपने पति से बिना रुके बातें करती रही

लेकिन उसकी आवाज में एक कम्पकंपाहट आ गई थी !

“क्या हुआ? तुम ठीक तो हो ना?” मेरे बेटे रवि ने थोड़ी चिन्ता जताते हुए पूछा।

थोड़ा रुकते हुए आरती ने जवाब दिया- उंह… हाँ ! ठीक हूँ… जरा हिचकी आ गई थी।

मैंने आरती के जवाब की प्रशंसा में उसके एक उरोज को अपनी मुट्ठी में भींचते हुए दूसरा हाथ उसके गाल पर फ़िरा दिया।

रवि अपनी पत्नी और मेरी बहू आरती से कुछ इधर उधर की बातें करने लगा।

लेकिन उसे लगा कि आरती की आवाज में वो जोश नहीं है जो कुछ पल पहले था क्योंकि आरती हाँ हूँ में जवाब दे रही थी और अपने बदन को थिरका कर, लचक कर मेरी तरफ़ देख देख कर मेरी हरकतों का यथोचित उत्तर दे रही थी।

इससे मुझे यकीन हो गया था कि वो वास्तव में अपने पति के साथ मेरे सामने प्रेम-प्यार की बातें करने में आनन्द अनुभव कर रही थी।

जरा सोच कर देखिए जिस लड़की की शादी को अभी दो महीने ही हुए हों वो अपने पति से प्यार भरी बातें करते हुए अपने ससुर के सामने पूर्ण नग्न हो और उसका ससुर उसकी चूचियों से खेल रहा हो !

अब मैं समझ चुका था कि मेरी बहू मुझसे इसके अलावा भी बहुत कुछ पाना चाह रही है तो मैंने भी और आगे बढ़ने का फैसला कर लिया।

मैंने फोन के माउथपीस पर हाथ रखा और फुसफुसाया- बात चालू रखना, फोन बंद मत होने देना ! ठीक है?

उसने मेरी तरफ वासनामयी नजरों से देखा और हाँ में सर हिलाया। आरती भी अब खुल कर इस खेल में घुस गई थी।

अब मैं उसके सामने आया और नीचे अपने घुटनों पर बैठ कर अपने हाथ उसके चूतड़ों पर रख कर उसे अपने पास खींचा और अपने होंठ उसके योनि लबों पर टिका

दिए !

“ओअ अयाह ऊउह !!!” आरती के होंठों से प्यास भरी सिसकारी निकली !


सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद चोदे

सुहागरात रात में पति ने दोनों छेद चोदे


हाय फ्रेंड्स, आप लोगो का Adult Sories में स्वागत है। मैं रोज ही इसकी सेक्सी स्टोरीज पढ़ती हूँ और आनन्द लेती हूँ। आप लोगो को भी यहाँ की सेक्सी और रसीली स्टोरीज पढने को बोलूंगी। मेरा नाम अवन्तिका है। आज फर्स्ट टाइम आप लोगो को अपनी कामुक स्टोरी सुना रही हूँ। कई दिन से मैं लिखने की सोच रही थी। अगर मेरे से कोई गलती हो तो माफ़ कर देना।


मै अभी अभी जवान हुई हूँ। मैं एक अमीर घराने से हूँ। मेरे पापा अमेरिका में डॉक्टर हैं। मै बहुत ही गोरी हूँ। लड़के मुझे देखते ही फ़िदा हो जाते है। मेरा बदन बहुत ही रसीला है। मेरे लिप्स तो एकदम गुलाब है। चूंचिया तो खरबूजे की तरह बड़ी बड़ी है। मेरी चूत भी बहुत लाजबाब है। इसका रस अभी तक बहुत कम ही लोगो को नसीब हुआ है। पूरा रस मैंने अपने होने वाले पति के लिए बचा कर रखा था। मेरी उम्र भी अब शादी की हो चुकी थी। मेरे सैयां जी के साथ सुहागरात का अवसर मुझे मिलने वाला था। मैं बहुत ही खुश थी। वो रात मुझे आज तक नहीं भूली जिस रात सैयां जी ने मेरा पहली बार काम लगाया था।


दोस्तों ये बात 2013 की है। जो की आज के 4 साल पहले की है। मेरे घर वाले मेरी शादी ढूंढ रहे थे। मै भी हर लड़की की तरह ख्वाब को सजा कर रखा था। अपने होंने वाले सैयां जी के साथ। फिर वो समय आया जब मेरी शादी तय हो गई। मेरा होने वाला पति किसी हीरो की तरह खूबसूरत था। उसकी पर्सनालिटी पर तो मै फोटो में ही देख कर फ़िदा हो चुकी थी। मैं तो उसे पाकर फूली नहीं समा रही थी। उसका घराना भी बहुत ऊँचा था। उसके पापा और मेरे पापा दोनों ही लोग अमेरिका में रहते थे।


वही उनकी दोस्ती हुई और रिश्तेदारी में बदल गईं। अब मेरी चूत का रिश्ता रितेश के लंड से हो गया था। हमारी शादी बड़ी धूम धाम से हुई। सुबह मै उनके घर विदा होकर आ गईं। सासू माँ ने और अन्य मेहमानों ने मेरा भव्य स्वागत किया। मै बहुत ही खुश थी। आज मैं चुदने वाली थी। मुझे आज जबरदस्त लंड मिलेगा। मै उसे खाने को बेकरार हो रही थी। फिर वो रात भी आ गयी। जिसका हर चूत को इंतजार होता है। जिस रात बीबी को लंड का दर्शन होता है। मै सज धज के अपने रूम में बैठी थी। मैं सुहागरात की सेज पर परियो सी सजी बैठी थी। अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार कर रही थी। रितेश आए और मेरे पास आकर मुझसे ज़माने भर की बात करने लगे। बातो ही बातो में वो रोमांटिक होने लगे। लेकिन मुझे तो इंतजार था कि वो कब अपना लण्ड मुझे दिखाएं। मगर मैं कैसे उनसे कहूँ की मुझे चुदने की बेचैनी हो रही है।


मैंने बहुत देर तक सोचा की क्या करूँ। अचानक मैंने एक आईडिया सोचा और धीरे-धीरे अपने गहने उतारने शुरू किए और अपनी साडी का पल्लू नीचे खिसका कर सीने से हटा दिया। ऐसा करते ही रितेश मेरी तरफ आकर्षित होने लगे। मेरे सफ़ेद बड़े-बड़े खरबूजे देख कर उनकी आँखे फटी की फटी रह गई। बिना पलक झपकाये मेरी चूंचियो को ताड़े जा रहे थे। उन्होंने मुझे बिना कुछ कहे उठा कर अपनी गोद में घसीटा और मेरी होंठो से अपने होंठ को चिपका कर मेरी सारी लिपस्टिक छुड़ा डाली। मेरे होंठो के लिप लाइनर को चूस लिया। अब मेरी देसी लुक उनसे भी देखी नहीं जा रही थी। मै अपना होश खो बैठी थी। मैं भी पागल सी हो गई और अपने हाथ उनके पूरे शरीर पर फिराने लगी। रितेश ने कब एक एक करके सारे कपड़े निकाल दिए मुझे तो पता भी नहीं चला कि उन्होंने कब का मुझे नंगी कर दिया था।


मैं तो उनके होंठों में ही गुम थी कि अचानक से एक ‘चटाक..’ से मेरे गांड में चोट सी महसूस हुई। मै चौंक गई। मैंने सकपका कर उनके होंठ छोड़ दिए और उनकी तरफ बुरी निगाहों से देखा.. तो वो मुस्कुरा रहे थे, बोले- ” क्या करूं अवन्तिका आदत से मजबूर हूँ। मुझे तुम्हारी गांड बहुत ही जबरदस्त लगी तो मार दिया। मुझे सेक्स करते समय कुछ भी होश नहीं रहता। मै क्या कर रहा हूँ। इस बात का मुझे पता ही नहीं चलता। मैंने भी मुस्कुरा दिया और कहा- कोई बात नही। मैं भी तुम्हारी तरह हूँ। मुझे भी कुछ होश नहीं रहता” मेरी गांड में कुछ लंबा मोटा सा महसूस हुआ। मैंने अपने ऊपर ध्यान दिया तो पता चला कि मैं उनके ऊपर नंगी बैठी हूँ। उनका लंड ही मेरी गांड में चुभ रहा था। मै उनकी गर्दन पर अपना हाथ टिका कर बैठी हुई थी।


मैं पूरी नंगी अपने पतिदेव रितेश की गोद में किसी बच्चे की तरह बैठी हुई थी। उन्होंने कुरता पायजामा अभी तक पहन रखा था। उनके कसरती बदन की मजबूती बाहर से ही महसूस हो रही थी। मगर उनका लण्ड देखने की चाहत अभी बरक़रार थी। हम दोनों खूब सेक्सी सेक्सी बाते करने लगे। वो मेरी चूंचियो के निप्पल को पकड़ पकड़ कर खीचते हुए मुझे गर्म कर रहे थे। मै“……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” की सिकरिया भर रही थी। मेरी पेट खींचते ही सिकुड़ जाती। मेरा दिल धक धक कर रहा था। साँसे तेज होने लगी।


मैं उनकी गोद से उतरने ही वाली थी कि उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- “अवन्तिका !! तुम मुझे एकदम देसी गाय की तरह लगती हो। एकदम मासूम सी चाहे जहाँ हाथ लगाओ। कोई विरोध नहीं करती” मैंने भी कहा- “और तुम मुझे देसी साँड़ के जैसे लग रहे हो। पीछे पड़े हो। हर पल मेरे गुप्तांगों को ही छू कर मजा ले रहे हो” रितेश हंस दिए। उन्होंने मुझे कस के जकड लिया। मुझे चिपकाते हुए फिर एक बार होंठो को चूसने लगे। इतना जोश तो मैंने पहले कभी किसी में नही देखा था। जोशीले होकर होंठो को ही काटने लगे। मै तड़पती हुई “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ ….अअअअअ….आहा …हा हा हा” की मदमस्त आवाज निकाल रही थी। धीरे धीरे उनके होंठ मेरी शरीर के नीचे के अंगों की तरफ बढ़ने लगे। वो मेरी चूचियों को पकड़ कर मींजने और सहलाने लगे। उन्होंने अपना मुह मेरी गोरी गोरी चूंचियो के काले काले निप्पल पर लगा दिया। रितेश बछड़े की तरह निप्पल को खींच खींच कर मेरा दूध पी रहे थे। कुछ देर तक पीने के बाद मुझे अपनी गोद से उतार कर बिस्तर पर ही खड़े होकर अपना कुरता उतारने लगे। फिर बनियान और पायजामा उतार कर बोले- “लो जी अब तुम्हारी बारी आ गई”
मैं उनके बड़े से मोटे लंड को देख कर डर गई। मेरा सर उनकी जाँघों के पास था। रितेश अपना लंड चूसने और सहला कर मुठ मारने को कह रहे थे।


मैं बोली- “आज नहीं। ये सब कल से किया जायेगा”
उन्होंने बिना कुछ कहे मेरा सर पकड़ कर अपने लण्ड पर अंडरवियर के ऊपर से ही रगड़ना चालू कर दिया। बहुत ही जोश में दिख रहे थे। मेरे दिमाग में अजीब अजीब हलचल होने लगी। मैं भी मदहोश सी होने लगी। मैंने उनका अंडरवियर पकड़ कर नीचे किया तो मेरे होश उड़ गए। बाप रे इतना मोटा काला लण्ड करीब 5 इंच का था। खड़ा होता तो कितना बड़ा हो जाता यही सोचकर मेरा दिमाग खराब हो रहा था। मेरे शौहर और मेरा दोनों का रंग एकदम गोरा है। मगर पता नहीं क्यूँ उनका लण्ड एकदम भुजंग काला था। मैं उनका लौड़ा देख कर हल्के से चिल्ला पड़ी- हे भगवान् ये क्या है? इतना बड़ा लंड तो किसी का जल्दी खड़ा होने पर भी नहीं होता। रितेश मन ही मन खुश हो रहे थे। वो हंसे मगर बोले कुछ नहीं और मेरा सर पकड़ कर अपने लंड को रगड़ने लगे। मैंने जोर लगाने की कोशिश की मगर वो ज्यादा ताकतवर थे। मेरे होंठ न चाहते हुए भी उनके काले लंड पर घुम रहे थे। कुछ ही देर मे मै विरोध करते करते थक गई थी। फिर मुझे पता नहीं क्यों वो काला साँप जैसा लंड बहुत ही मेरे मन को भाने लगा। कुछ देर बाद मुझे भी अच्छा लगने लगा, मैंने भी जोर लगाना बंद कर दिया। तभी रितेश ने मेरे बालो की चोटी को जोर से खींचा तो मेरी मुह से आह निकलते ही मेरा मुँह खुल गया। जैसे ही मेरा मुँह खुला वैसे ही उन्होंने अपना लण्ड अन्दर करके मे चुसाना शुरू कर दिया। मुझे उनका लंड मुह में रख कर बहुत बुरा लग रहा था। मुझे लगने लगा की उलटी हो जायेगी। मेरा पूरा मुँह उनके लंड से भर गया।


तभी रितेश के लण्ड ने अपना रूप बदलना शुरू कर दिया। उसका साइज़ बढ़ने लगा। मेरी छोटी सी मुह में उनका बड़ा लंड बड़ा होकर मुझे तड़पाने लगा। मुझे लगा कि मेरा मुँह फट जाएगा। मैं छटपटा रही थी। हाथ-पांव पटकने लगी। मगर उन्होंने मुझे नहीं छोड़ा। वो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहे थे।अब मुझे साफ-साफ महसूस हुआ कि उनका लण्ड मेरे गले से होता हुआ सीने तक चला गया है। मेरी आँखों से आंसुओं नदी बह पड़ी। मैं उनकी जाँघों पर मर रही थी। नाखून गड़ा रही थी। मगर उन पर कोई असर न हुआ। वो बेदर्दी मुझे दर्द देकर मार ही डालेगा। मेरा सांस लेना दुष्वार हो गया। वो मेरा सर दबाये हुए थे। मै कुछ बोल भी नहीं सकती थी। मैंने हाथ जोड़ लिए और उनसे लण्ड निकालने के लिए बड़ी ही नम्रता वाली नजरों से देखा। मेरी आँखों के आगे अब तक अँधेरा छाने लगा था। वो अचानक मुझे छोड़ दिया। बैठ कर उन्होंने मेरी गांड पर जमकर एक तमाचा मारा। मै उछल पड़ी। वो बोले- “क्यों कैसा लगा”


मै रो रही थीं। कहने लगे- “अब मानोगी न मेरी बात”
मैंने अपना सर हिला दिया। मैं बिस्तर पर धड़ाम से गिर पड़ी। मेरा दिमाग ही काम नहीं कर रहा था, मैं दमे के मरीज की तरह हांफ रही थी। इतने में पति बोले- “अब तू पूरी तरह से गाय लग रही है” वो मेरे दोनों हाथ फैला कर उनके ऊपर घुटने रख कर मेरे सीने पर बैठ गए। कहने लगे इसे अब चाट। जैसे तू गाय अपने बछड़े को चाटती है। चाट साली चाट…. अब मेरा दिमाग कुछ समझने के काबिल हुआ था। तो उनका सांडो वाला लंड देख कर मेरी आँखें चौंधिया गईं। कही मै सपना तो नहीं देख रही। मैंने अपने आँखों को मलते हुए उनका लंड देखा। करीब 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा काला लौकी जैसा लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था। मैं लण्ड देख के मेरी सिट्टी पिट्टी गुल थी। मेरे पति का लण्ड मेरे मुँह पर रखा हुआ था, मैं इतने बड़े लण्ड को देख कर हैरान थी। मेरे पति बोले- “चाट इसे जल्दी”


मैंने जल्दी से जीभ निकाल कर लण्ड चाटना शुरू कर दिया। वो बोले- “हाँ अब जाकर तू पूरी तरह से गाय बनी है” मैं रोती जा रही थी और लंड चाटती जा रही थी, मेरे दोनों हाथ उनके पैरों के नीचे दबे हुए थे। मेरे गोरे गालों पर उनका भारी लंड मुक्के की तरह पड़ रहा था। लगभग पांच मिनट बाद वो उठे और मुझे उठा कर गोद में बिठा लिया। अपने शेव किये चेहरे से मेरी चूंचियो पर मसाज करने लगे। कही कही की दाढ़ियां मेरी चूंचियो पर चुभ रही थी। उनका लण्ड ठीक मेरी चूत के नीचे था। उन्होंने मेरी दोनों टांगो को खोलकर जोर का झटका मारा। मै उछल पड़ी। जोर जोर से “आआआअ ह्हह् हह …..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” चिल्लाने लगी। उनके लंड का टोपा मेरी चूत में जाकर फंस गया।

वो और भी धक्का मार मार कर मेरी चूत में डाल डाल कर निकालने लगे। मै दर्द से तड़प रही थी। लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। वो मेरी चूत की फडाई में लगे हुए थे। मुझे लग रहा था। किसी ने लोहे का मोटा रॉड गर्म करके मेरी चूत में डाल दिया हो। मै भी चूत की दर्द को भूल कर चुदाई करवा रही थी। अचानक उनका मोटा काला लंड मेरी चूत में हलचल मचाने लगा। वो मुझे किसी कुत्ते की तरह जल्दी जल्दी चोदने लगे। सैयां जी की ट्रेन ने स्पीड पकड़ ली थी। वो ब्रेक मारने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उनकी स्पीड की रगड़ से मै बहुत परेशान हो गई थी। मैं दर्द से “उ उ उ उ उ……अ अ अ अ अ आ आ आ आ… सी सी सी सी….. ऊँ— ऊँ… ऊँ….” की आवाज के साथ अपनी चूत फड़वा रही थी। मेरी गाड़ पर मार मार कर मुझे भी जोश दिला रहे थे। मेरी चूत का दर्द धीरे धीरे कम होने लगा। मै उसे महसूस करने लगी।


अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा। मै भी अपनी चूत को उठा कर चुदवाने लगी। वो एंह…एंह करके मेरी चूत में अपना लंड हचक हचक कर पेल रहे थे। इतनी जोर की चुदाई ने तो मेरी जान ही निकाल दी। मुझे उसका लंड अब अच्छा लगने लगा। मैं उस लंड को खाकर मन ही मन खुश होने लगी। उसने अपने बल का प्रयोग करके मुझे अपने गोद में उठाकर चोदने लगा। मै भी उसका गला पकड कर उछल उछल कर चुदवा रही थी। वो मेरी गांड पर हाथ मार मार कर मुझे उछाल उछाल कर चोद रहे थे। कुछ देर बाद लंड की रगड़ मेरी चूत न सह सकी और अपना सफ़ेद मलाई निकाल दिया। मै झड़ गई। वो मेरी चूत को मलाई के साथ ही चोदने लगे। कुछ देर में उन्होंने मुझसे मेरी गांड चोदने को कहा। मै डर से हाँ करके बैठ गई। उन्होंने मुझे अपने खड़े लंड को गांड में डालकर उसपर ऊपर नीचे होने को कहा। मैं जैसा वो बोले करने लगी। उनका मोटा घोड़े जैसा काला लंड अपनी गांड में घुसाकर ऊपर नीचे होने लगी। जोर जोर से “….उंह उंह उंह हूँ.. हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” की आवाज के साथ मैं अपनी गांड खुद ही चुदवा रही थी। मैंने भी स्पीड बढ़ाई लेकिन इस बार वो भी जबाब दे गए। उनका लंड माल निकालने वाला था।


सारा माल रितेश ने मेरी गांड में ही डाल दिया। मै थक गई थी। मै बिस्तर पर गिर पड़ी। वो हसते हुए मेरे ऊपर पैर रख कर चूंचियो को दबाने लगे। उस दिन की चुदाई ने तो सब यादगार बना दिया। मै आज भी उस लंड से खूब खेलती हूँ। मेरी चूत का अब तक भोषणा बन चुका है।

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