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अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

 

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई



मेरे घर में मेरे सिवा मेरी एक बेटी है जो 25 साल की है। पहले मेरा भरा पूरा परिवार था। मैं मेरी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा। एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, बच्चे पढ़ रहे थे, तनख्वाह भी अच्छी थी, सब बहुत बहुत बढ़िया चल रहा था। फिर ना जाने किसकी नज़र लग गई।

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

एक एक्सीडेंट मे, मेरी पत्नी और मेरा बेटा मुझे छोड़ कर चले गए, मेरी दोनों टाँगें नकारा हो गई। जो चार पैसे बचा कर रखे थे, वो सब मेरे इलाज में और बाकी कामो में खर्च हो गए।


शुरू शुरू में तो कुछ दोस्तों रिशतेदारों ने दरियादिली दिखाई, मगर सारी उम्र कौन किसका खर्चा उठा सकता है।प्राइवेट जॉब थी तो जॉब गई तो घर में खाने के लाले पड़ गए।


कहाँ मैं सोच रहा था कि अपनी बेटी की शादी करूंगा, मगर अब हालात ये थे कि कोई रिश्ता भी नहीं आ रहा था। उस एक्सीडेंट के 4-6 महीने में ही सारी दुनिया ने जैसे मुझसे मुँह मोड़ लिया।

ना मुझे समझ में आ रहा था कि मैं क्या काम करूँ … क्योंकि चल तो मैं बिलक्कुल नहीं सकता था, सारा दिन व्हील चेयर पर बैठा रहता था।


तो एक दिन अपने एक मित्र से कह कर मैंने अपनी बेटी की नौकरी का इंतजाम कर दिया। अब जॉब तो उसकी भी प्राइवेट थी सुबह साढ़े आठ वो घर के सारे काम निपटा कर चली जाती और शाम को 7 बजे के करीब घर आती। घर आकर वो मुझे खाना बना कर देती।


मैं भी व्हील चेयर पर बैठे बैठे जितना काम हो सकता था, करता रहता। घर की सफाई कर देता, चाय बना लेता था।


इस एक्सीडेंट से उबरने में और ठीक होने में मुझे करीब एक साल लग गया।


बेटी का काम भी ठीक से जम गया था।


मगर अब मैं नोटिस कर रहा था कि उसमें भी बदलाव आने लगे हैं।


पहले वो सिर्फ सलवार कमीज़ पहनती थी, मगर वो जीन्स टीशर्ट, कैप्री, लेगिंग सब पहनने लगी।

घर में तो वो टीशर्ट और निकर में ही रहती थी।


अब इतनी बुज़ुर्गी तो मुझ पर भी नहीं आई थी, बेशक टाँगें नकारा हो चुकी थी मगर औज़ार एकदम सही था। रोज़ सुबह जब सोकर उठता हूँ तो पूरा कड़क होता है।

अब जब पेट में जाए अन्न तो खड़ा होए लन्न।


मगर इस खड़े का मैं क्या करूँ … कहाँ जाऊँ।

पैसे सारे बेटी के हाथ में होते थे तो उससे तो मांग नहीं सकता था कि बेटी थोड़े पैसे दो, मुझे किसी रंडी के पास जाना है।


तो इसका एक जवाब ये ढूंढा कि घर में काम करने वाली नौकरानी रख लो।

जो काम वाली रखी तो करीब 50 साल की रही होगी।


अब ये लोग अपना ख्याल तो रखती नहीं, तो इसलिये वो 50 में भी काफी बूढ़ी सी लगती थी।

मगर कुछ दिन बाद वो बूढ़ी भी मुझे परी लगने लगी।


अब दिक्कत यह थी कि इससे सेक्स की बात कैसे की जाए, आगे कैसे बढ़ा जाए।

और दूसरी बात अगर वो अपना घागरा उठाएगी, तो पैसे भी तो मांगेगी तो पैसे कहाँ से लाऊँगा।


फिर मैंने और स्कीम सोची कि पहले इसे पटा कर देखते हैं, पैसे का भी कोई न कोई इंतजाम हो ही जाएगा।


वो करीब 11 बजे आती थी, तो मैंने उसके आने का बड़ी बेसबरी से इंतज़ार करना, जब वो आती तो उसे चाय बना कर देनी, उससे बातें करनी, उसके दुख सुख में उसको सलाह देनी!


मतलब थोड़े दिनों में उससे मैंने दोस्ती सी तो कर ली।

अब वो भी चाय पीते वक्त मुझसे बहुत सी बातें कर लेती थी।


एक दिन मैंने उसे बातों बातों में बता दिया कि मुझे और कोई दिक्कत नहीं बस रात को नींद नहीं आती।

बीवी के जाने के बाद रात गुज़ारनी बहुत मुश्किल हो गई है। समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूँ।

अब इशारा तो वो मेरा समझ गई … मगर बोली कुछ नहीं!

लगे हाथ मैंने साथ में ये भी कह दिया कि अब मेरे पास कोई पैसे भी नहीं होते, सारी कमाई बेटी के पास होती है, तो इस काम के लिए उससे पैसे मांग भी नहीं सकता।

अपनी बात कहते हुये मैंने अपने चेहरे पर बड़ी मायूसी और बेचारगी के भाव बनाए रखे।


उस दिन तो कुछ नहीं हुआ मगर हर थोड़े दिन बाद मैं घूमा फिरा कर फिर वही बात कहता।

मुझे यकीन था कि अगर ये मेरी बात बार बार सुन रही है तो एक दिन मान भी जाएगी।


अगर इसने ये काम नहीं करना होता तो मेरी बात ही नहीं सुनती; मुझे पहले ही टोक देती।


मेरी मेहनत रंग लाई।

एक दिन फिर चाय पीते पीते मैंने बात छेड़ी।


मैंने यूं ही झूठ ही कह दिया- जानती हो, आज के ही दिन मेरी शादी की सालगिरह है। पिछले साल हम दोनों ने कितना मज़ा किया था, दोनों सारा दिन घूमे, खाया पिया और रात को को कितना एंजॉय किया. और आज मैं अकेला यहाँ सड़ रहा हूँ। कोई भी ऐसा नहीं जो आज मेरा हाथ पकड़ सके, मुझे आज के दिन सांत्वना दे सके।


मैंने जानबूझ कर कुछ रोने की एक्टिंग सी करी।

वो उठी और मेरे पास आकार बोली- साहब मैं कई दिन से आपकी ये दर्द भरी कहानी सुन रही हूँ, आपने हमेशा मेरे सुख दुख में मुझे अच्छी सलाह दी, मैं आपके लिए क्या कर सकती हूँ। आप बताओ?


मैं अंदर से खिल उठा, बोला- तुम क्या करोगी, तुम भी शादीशुदा हो बाल बच्चे वाली हो। तुम्हें मैं कैसे ये सब कह सकता हूँ?

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मैं सब समझती हूँ। आप बहुत अच्छे हैं, रोज़ मुझे चाय पिलाते हैं, मेरे हर दुख दर्द को समझते हैं, बहुत सी कोठी वाली तो औरत होकर भी मेरी बात नहीं सुनती, मगर आप एक मर्द होकर भी मेरी सब बात सुन लेते हो। आपने मुझे इतना मान दिया, अब आपके लिए मुझे भी कुछ करना चाहिए।


मैंने सोचा कि यार क्या कहूँ, इसे कैसे कहूँ।

फिर कुछ सोच कर बोला- अगर तुमसे कुछ मांगूं तो दे सकती हो?

वो बोली- आप कहिए तो सही!


मैंने कहा- मुझे अपनी पत्नी का प्यार चाहिए, उसके तन का, मन का सब सुख चाहिए।

वो खड़ी मुझे देखती रही।


मुझे लगा जैसे ये चाह रही हो कि भोंसड़ी के हाथ आगे बढ़ा कर पकड़ ले अब क्या खुद ही तेरा लौड़ा पकड़ कर अपनी चूत में डालूँ।

तो मैंने अपने दुखी भाव के साथ उसका हाथ पकड़ कर कहा- तुम्हारा साथ ही मेरी ज़िंदगी को संवार सकता है.

कहते हुए मैंने उसका हाथ चूम लिया।


बाद में मुझे ख्याल आया कि यार ये तो झाड़ू लगा रही थी, और अपने हाथ भी धोकर नहीं आई।

मगर कोई बात नहीं … मैंने उसका हाथ सिर्फ ये देखने के लिए चूमा था कि कहीं वो इस बात का विरोध तो नहीं करती।


मगर वो कुछ नहीं बोली, तो मैंने उसके हाथ को फिर से चूमा और उसकी बाजू को सहलाया।

और सहलाते हुये उसे अपनी ओर खींचा।


वो आगे आई तो मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया।

स्त्री का आलिंगन करते ही मन बाग बाग हो गया, खिल उठा।


उसके ढीले मम्मे मेरे सीने से लगे और मैंने उसके गाल पर चूमा।

उसने भी मुझे हल्के से अपनी बांहों में भरा!


बस अब और क्या चाहिए था … तीन महीने की मेहनत रंग लाई, और आज मेरी काम वाली मेरी आगोश में थी।

मैंने बिना कोई और देर किये सीधे उसका मम्मा पकड़ा, थोड़ा ढीला सा नर्म सा था, ब्रा भी नहीं पहना था.

मगर फिर भी पराई औरत के जिस्म अलग ही कशिश होती है।


एक दो बार मम्मे दबा कर मैंने उसका ब्लाउज़ ऊपर उठा कर उसके मम्मे बाहर निकाले और चूस लिए।

मुँह में मम्मे के साथ उसके गंदे पसीने का स्वाद भी आया।


मैंने उससे कहा- एक बात कहूँ, क्या तुम मेरे लिये नहा सकती हो?

वो बोली- हाँ क्यों नहीं!


वह आगे आगे और मैं व्हील चेयर पर पीछे पीछे … वो बाथरूम में घुसी, मैंने भी अपने कपड़े उतारे.

बिलकुल नंगा होकर मैं भी अपने बदन को घसीटते हुये बाथरूम में घुस गया।


उसने अपने कपड़े उतारे तो मैंने अपने मोबाइल पर उसकी वीडियो बनानी शुरू कर दी।

मैं उठ कर खड़ा नहीं हो सकता था तो वो नीचे बैठ गई।


मैंने उसके बदन को अपने हाथों से साबुन लगा कर धोया। गंदमी रंग का भरा हुआ बदन।

करीब 36 साइज़ के मम्मे, बड़ा हुआ पेट, मोटी गाँड, भरी हुई जांघें। अंदर से तो वो बहुत पर्फेक्ट थी।


उसने भी मुझे नहलाया।

उसके हाथ लगाने से मेरा लंड अकड़ गया।

तो मैंने कहा- चूस ले इसे मेरी जान!


उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मुँह में लेकर चूसा।

महीनों बाद ऐसा आनंद मिला।


मगर मैंने उसे ज़्यादा देर लंड चूसने नहीं दिया; मुझे डर था कि जैसे वो मज़े ले लेकर चूस रही थी, कहीं मेरा पानी ही न निकल जाए।


उसके बाद मैं उसे अपने बेडरूम में ले आया।

पहले अपने तौलिये से अपना बदन पौंछा, फिर उसका बदन पौंछा।


उसके बाद व्हील चेयर से उतर कर बेड पर बैठ गया, वैसे ही बिलकुल नंगा और लंड मेरा पूरा ताव में!


मैंने उसे कहा- वो अलमारी खोलो.

उसने अलमारी खोली।

मैंने कहा- उसमे ऊपर वाले दराज़ में मेरी बीवी के कपड़े हैं। तुम उनमे से एक ब्रा और पेंटी निकाल कर पहन लो।


उसने एक सफ़ेद ब्रा और एक मेरून कलर की पेंटी निकाल कर पहन ली।

फिर उसने मेरे कहने पर मेरी बीवी की लिपस्टिक लगाई, आँखों में काजल डाला। आने हिसाब से वो थोड़ा साज संवर कर मेरे पास आई।


मैंने कहा- बड़ी सुंदर लग रही हो!

जबकि वो लग नहीं रही थी.

मैंने उसकी झूठी तारीफ करी।


वो खुश हो गई, मुस्कुरा पड़ी.

मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी कमर पर बैठने को कहा।


वो मेरी कमर पर एक टांग इधर और दूसरी टांग उधर कर करके बैठ गई।

मैंने उसके दोनों कूल्हों को पकड़ कर दबाया और उसको अपनी और खींच कर उसके होंठों को चूस लिया।


लिपस्टिक के स्वाद में उसके बासी मुँह का ज़ायका दब गया.


अब तो मुझे उसके जिस्म में कोई हूर नज़र आ रही थी।

मैंने उसके दोनों मम्मे पकड़े और खूब दबाये और जी भर के उसके होंठ चूसे, गाल चूसे।

वो भी अपनी कमर हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर घिसा रही थी।


मैंने कहा- ब्रा खोल!

तो उसने अपने ब्रा की हुक खोलकर अपने दोनों मम्मे मेरे सामने आज़ाद कर दिये।


मैंने उसके मम्मे को पकड़ कर उसका निपल चूसा और जोश में आकर काट लिया तो वो सिसक उठी- अरे साहब, निपल पर मत काटो, दर्द होता है, कहीं और काट लो.

तो मैंने उसके मम्मो पर कई जगह काट काट कर निशान बना दिये।


मैंने कहा- जानेमन, बहुत दूध पी लिया, अब ज़रा अपनी मस्त चूत का नमकीन पानी का भी मज़ा दिला दो.

मेरे कहने पर वो उठकर खड़ी हुई और चड्डी उतार दी।


उसकी बालों से भरी चूत के भीगे होंठ मुझे साफ दिखे।


मैं सीधा होकर लेट गया तो वो मेरे ऊपर उल्टी हो कर लेट गई।

अपनी भरी हुई गाँड उसने मेरे मुँह पर रख दी।


मैंने उसके चूत के दोनों फांक खोल कर हल्के से अपनी जीभ से छुआ।

दरअसल मैं उसकी चूत के पानी का स्वाद देखना चाहता था.


अगर मुझे स्वाद अच्छा न लगता तो मैं शायद मैं उसकी चूत ना चाटता. मगर उसकी चूत का स्वाद ठीक था तो मैं अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर और सुराख के अंदर यहाँ वहाँ हर जगह

से चाट गया।


वो भी मेरे लंड को पूरा मज़ा लेकर चूस रही थी।

मेरे लंड टोपा बाहर निकाल कर पूरा गुलाबी टोपा उसने चाटा, चूसा; मेरे आँड ताक चाट गई।


फिर मैंने कहा- बस अब ऊपर आ जाओ, मैं तो तुम्हें चोद नहीं सकता, ये काम तुम्हें ही करना पड़ेगा।

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।


कह कर वो घूमी और मेरे ऊपर आ बैठी। उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत में लेने लगी, दो चार बार ऊपर नीचे होकर उसने मेरा सारा लंड निगल लिया।

अब वो अपने पाँव के बल बैठ कर चुदवाने लगी।


मुझे तो स्वर्ग के नज़ारे आ गए।

क्या मस्त चूत थी उसकी … गीली, चिकनी और टाईट।


मैंने पूछा- तेरा पति नहीं करता तेरे साथ?

वो बोली- करता है … पर बहुत कम! कभी कभी ही उसका मन करता है, नहीं रोज़ तो वो दारू में ही धुत्त रहता है।


मैंने पूछ लिया- तो फिर तुम किसी और के पास जाती होगी?

वो हंस कर बोली- हाँ है एक !


मैंने पूछा- कौन है?

वो बोली- जाने दो साहब, बस है कोई!

मुझे भी उससे क्या था।


वो धीरे धीरे मुझे चोदती रही; मैं उसके मम्मों से खेलता रहा।


उसका हुआ या नहीं मुझे पता नहीं … मगर करीब 7-8 मिनट के चुदाई के बाद मेरा ज्वालामुखी उसकी चूत के अंदर ही फट गया।

बहुत माल गिरा। भर भर के उसकी चूत से गाढ़ा सफ़ेद माल बाहर को चू रहा था।


मगर वो नहीं रुकी, तब तक जब तक उसका काम भी नहीं हो गया।

उसके बाद वो मेरे ऊपर ही निढाल होकर गिर गई।


कुछ देर वैसे ही लेटने के बाद वो उठी।

बाथरूम में जाकर अपना मुँह धोकर आई, लिपस्टिक काजल साफ किया, फिर मेरे बदन को साफ किया।


उसके बाद मुझे कपड़े निकाल कर दिये।


मैं कपड़े पहन कर फिर से अपनी व्हील चेयर पर बैठ गया।

वो चली गई।


उसके बाद हमारा तो काम चल निकला।

जब भी दिल करता वो मेरे घर आती; सुबह 9 से 6 बजे के बीच कभी भी।

मेरी सेक्स लाइफ बिलकुल रेगुलर हो गई।

अब तो मैं हर वक्त खुश रहता।


एक दिन रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, बड़ा मन कर रहा था कि काश इस वक्त होती तो साली को पेलता।


नींद नहीं आ रही थी तो मैं बेड से उठ कर अपनी व्हील चेयर पर आ गया।

रात के करीब 11 बजे होंगे।


मुझे अपनी बेटी के कमरे से आवाज़ आई हंसी की।

मुझे लगा किसी से फोन पर बात कर रही होगी।


तो मैं धीरे धीरे से अपनी व्हील चेयर खींचता हुआ, बाहर को आ गया।


जब अपनी बेटी के कमरे के पास गया तो उसके कमरे की बत्ती जल रही थी।


खिड़की से अंदर झाँका तो मेरे पैरों के तले से ज़मीन निकल गई।

मैंने देखा कि बिस्तर पर मेरी बेटी घोड़ी बनी हुई है और एक लड़का उसे पीछे से पेल रहा है. जबकि दूसरे ने उसके मुँह में अपना लंड दे रखा है।


मैं तो जैसे शर्म से ज़मीन में ही गड़ गया … काँप उठा.

अपनी व्हील चेयर चलाते हुये मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।


आज पहली बार मैंने अपनी जवान बच्ची को बिलकुल नंगी देखा और वो भी दो मुश्टंडों से एक साथ चुदवाते हुये।

मुझे तो जैसे मरने को जगह नहीं मिल रही थी।


फिर मैंने सोचा कि वो भी जवान है, उसकी भी शादी की उम्र है, उसे भी तो अपने लिए एक साथ चाहिए।

ठीक है अगर उसका एक बॉय फ्रेंड होता तो कोई बात नहीं थी.

मगर ये तो दो थे और दोनों को देख कर लग रहा था के दोनों में से मेरी बेटी को तो कोई भी प्यार नहीं करता होगा।


मैंने सोचा कि इसके बारे में मुझे अपनी बेटी से बात करनी होगी।

एक दो दिन बाद मैंने उससे कहा- बेटा देखो अब तुम्हारी शादी की उम्र हो गई है, अगर मैं किसी काबिल होता तो तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा वर खोजता। मगर तुम भी जानती हो, मैं मजबूर हूँ। अगर तुम्हारी कोई पसंद है, तो वो बता दो। मुझे वो भी मंजूर होगा।


बेटी ने पहले हैरानी से मुझे देखा और फिर बोली- ये आज अचानक मेरी शादी की बात कैसे छेड़ दी आपने?

मैंने कहा- बस मैंने सोचा, अब तुम्हें भी शादी कर लेनी चाहिए. चलो जो गलती हो गई सो हो गई, पर आगे से सब ठीक हो जाए तो अच्छा है।


वो मेरे पास आई और बोली- कौन सी गलती कर ली मैंने?

मैंने कहा- अरे जाने दो, छोड़ो उसे! तुम ये बताओ कि तुम्हें कोई लड़का पसंद है?


वो बोली- नहीं … पहले आप ये बताओ कि आपने मेरी कौनसी गलती पकड़ी है?

फिर मुझे मजबूर हो कर उसे कहना पड़ा- परसों रात को मैं वैसे ही बाहर आया था, तो मैं देखा था वो दो लड़के और तुम …

कहते कहते मैं रुक गया।


वो मेरे पास आकर बैठ गई और बोली- पापा, वो दोनों लड़के मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे।

मैंने पूछा- तो फिर तुम उनके साथ ऐसे?


वो सुबकने लगी और खुल कर बताने लगी:


ये सब आपके उस दोस्त ने ही शुरू किया जो आपके सामने मुझे अपनी बेटी कहता था।

मगर जब उसे पता चला कि मुझे आपके इलाज के लिए और पैसे चाहिए, उसी दिन वो अपनी औकात पर आ गया.

उसने मेरे सामने उसने शर्त रख दी कि अगर मुझे पैसे चाहिए तो मुझे उसकी बात माननी पड़ेगी।


मैंने बहुत सोचा, आपसे भी बात करनी चाहिए मगर आप भी मेरी क्या मदद करते।


फिर मजबूर होकर मैंने उसकी बात मान ली।


उसके बाद तो जैसे उसने मुझे अपने लिए ही रख लिया।

जब वो मुझे पैसे देता तो अपने ढंग के कपड़े भी पहनने को कहता, उसके कहने पर ही मैंने जीन्स टी शर्ट वगैराह पहनने शुरू किए।

फिर उसका बेटा विदेश से पढ़ कर वापिस आ गया।


जब उसने फेक्टरी जॉइन की एक उसने मुझे अपने बाप के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

उसने अपने बाप को तो कुछ नहीं कहा मगर उसके बाद मेरी रेल बन गई। जब दिल करता बाप पकड़ लेता, जब दिल करता बेटा पकड़ लेता।

मुझे तो उन लोगों ने अपनी रखैल ही बना कर रख लिया।


धीरे धीरे मुझे समझ आने लगा कि ये खेल सिर्फ इसी चीज़ का है।


उसके बाद मैंने अपने दम पर अपने लिए लोग तलाश करने शुरू किए।

इसमें मुझे कोई खास दिक्कत नहीं आई।

और फिर तो मेरे बहुत से दोस्त बन गए।

उस रात जो आपने देखा वो मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे, मेरे क्लाइंट थे।


मैंने कहा- तो क्या तुम धन्धा करने लगी हो?

वो बोली- आप ये भी कह सकते हो. मगर यह मत भूलना कि ये जो आज आप अच्छा खा पीकर बढ़िया कपड़े पहन कर बैठे हो, ये सिर्फ उस फेक्टरी की कमाई है। इसमें मेरा खून पसीना सब लगा है।


इतना कहकर मेरी बेटी रोने लगी।


मैं पत्थर के बुत की तरह वहाँ बैठा रहा, अपनी रोती हुई बेटी को चुप भी न करवा सका।


रोने के बाद वो खुद हही चुप हो गई और मैं अपनी व्हील चेयर खींचता वापिस अपने कमरे में आ गया।


उस रात मुझे नींद नहीं आई, मैंने खुद को बहुत ही मजबूर पाया।


उसके बाद मैंने अपने मन में सोचा कि अगर मैंने समय से उसकी शादी कर दी होती आज मुझे ये दिन न देखना पड़ता!

कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे

कुंवारी नौकरानी की चूत के मजे लूटे


मैं लखनऊ की रहने वाली हूं। मैंने अपनी पढ़ाई लखनऊ से ही पूरी की थी। मैं यहां अपने मम्मी पापा के साथ रहती थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद मुझे तुरंत ही पुणे से जॉब का ऑफर आ गया था। मैं पुणे जाना चाहती थी। लेकिन मेरे घर वालों को मेरी बहुत चिंता सता रही थी। कि मैं वहां अकेले कैसे रह पाऊंगी। पर मैंने अपने घरवालों को समझाया और कुछ दिन बाद मैं पुणे चली गई। वहां मैं अकेली रहती थी। मेरा ऑफिस मेरे फ्लैट से ज्यादा दूर नहीं था। मैं अकेली जाती और अकेली ही आती थी। फिर ऑफिस में मेरे कुछ नए दोस्त बने।


एक दिन मैं ऑफिस से घर जा रही थी तभी अचानक विवेक मुझे मिला। मैं उसे देख कर बहुत खुश हुई।  हम दोनों स्कूल से लेकर कॉलेज तक दोनों साथ ही पढ़ते थे। वह मेरा बहुत अच्छा दोस्त था। एक दिन वह पुणे आया पर उसे रहने की अच्छी जगह नहीं मिल रही थी तो मैंने उसे तब तक अपने ही साथ रहने को कहा। जैसे ही उसे नौकरी मिलती वह अपने लिए दूसरा फ्लैट देख लेता। लेकिन तब तक वह मेरे साथ मेरे फ्लैट में रहता था। यह बात मैंने अपने घरवालों को नहीं बताई थी। हम दोनों पहले से ही एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। तो मुझे उसके यहां रहने से कोई दिक्कत नहीं थी।


मैं सुबह अपने ऑफिस जाती और शाम को घर आती तब तक विवेक घर पर ही रहता। कभी वह जॉब की इंटरव्यू के लिए जाता इधर उधर भटकता फिरता रहता था। हम दोनों साथ में ही रहने लगे थे। कुछ दिन बाद उसे भी अच्छी जॉब मिल गई। हम दोनों साथ में ही घर से निकलते और साथ ही घर वापस आते हैं। हम दोनों मिलकर घर का काम करते थे। साथ रहते रहते हमें एक दूसरे की आदत हो गई थी। अब हम एक दूसरे के बिना नहीं रह पाते थे। हम दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे। जब भी हमें समय मिलता हम दोनों आपस में घूमने जाया करते दोनों समय बिताते।


एक दिन विवेक ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहने लगा तुम्हें मुझे देखकर कुछ लगता नहीं है क्या मैंने उसे कहा लगना क्या है इसमें। हम दोनों एक साथ रहते हैं इसमें कुछ समस्या वाली बात नहीं है। तो वह कहने लगा मेरी और भी जरूरत है क्या तुम पूरी करोगी। मैंने कहा ऐसी कौन सी जरूरत है तुम्हारी जो मैं पूरी नहीं कर पा रही हूं। मैं उसके मन में क्या है वह तो समझ चुकी थी। पर उस समय मैंने कुछ नहीं कहा फिर मैं नहाने चली गई। वह बाहर मेरा इंतजार कर रहा था। जैसे ही मैं नहा कर आई मैंने टॉवल अपने शरीर को लपेटा हुआ था। मेरे गीले बाल थे। उसने मुझे ऐसे ही अपनी बाहों में समा लिया और कहने लगा। अब तो तुम मेरी जरूरतों को समझ लो। उसके यह कहते ही मेरा टावल नीचे गिर गया। मेरी पैंटी ब्रा उसने देख ली।


मैं उसके सामने ऐसी खड़ी रही मुझे पहले अच्छा महसूस नहीं हो रहा था। उसने कहा  कोई बात नहीं और यह कहते हुए उसने मुझे अपने गले लगा लिया। अब उसने मेरी लाल पैंटी में हाथ डाला और मेरी योनि को दबाने लगा। मैंने आज ही अपने चूत से बाल साफ किए थे। तो वह एकदम  चिकनी हो रखी थी। जिसको देखकर वह कहने लगा। तुम्हारे तो एक भी बाल नहीं है। यह सुनकर में हंस पडी। हंसते-हंसते उसने मेरी चूत इतनी जोर से दबा दिया कि मेरे मुंह से आवाज निकल पड़ी। और मैं उसे कहने लगी। इतनी जोर से क्यों दबा रहे हो आराम से भी तो कर सकते हो। अब यह कहते हुए मैंने उसे  गले लगा लिया।


मैंने उसके होठों को अपने होठों से मिलाते हुए किस करना शुरू कर दिया। जैसे-जैसे मैं किस करती जाती। वह मेरी तरफ आता जाता मैंने उसको बहुत तेजी से किस करना शुरू किया। वह मुझसे कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से किस करते हो। मेरे से भी नहीं रहा जा रहा था। मैंने जैसे ही उसकी पेंट  मैं हाथ लगाया तो उसका लंड खड़ा हो रखा था। यह देख कर मैं थोड़ा हिचकिचाने लगी। पर मैंने उसकी जीप खोल कर उसके लंड को बाहर निकाल लिया और उसको अपने मुंह में ले लिया। जैसे ही मैंने उसके लंड को अपने मुंह में लिया। वह कहने लगा तुम तो बड़े अच्छे से कर रही हो थोड़ा और अंदर लो। मैंने भी उसको लंड को पूरे अपने गले मे ले लिया।


जैसे-जैसे मैं अंदर बाहर करती जाती उसको मजा आता। वह कहता बहुत अच्छे से कर रही हो तुम अब उसके बाद उसने मुझे खड़ा किया और मेरी ब्रा को खोलते हुए। मेरे स्तनों को अपने हाथों से दबाने लगा। पहले वह धीरे धीरे दबा रहा था। किंतु अब उसने काफी तेज दबाना शुरु कर दिया। अब अपने मुंह में भी मेरे स्तनों को ले लिया और उसे चूसने लगा। धीरे-धीरे वह मेरे चूचो को चूसता तो मुझे गुदगुदी सी होती और मुझे अच्छा महसूस होने लगता। अब उसने मेरे चूचो को पूरे अपने मुंह में समा लिया था और उसको अच्छे से चूसने लगा था।


यह देखकर  मुझे अच्छा लग रहा था और अंदर से अच्छी फीलिंग आ रही थी। उसने मेरे निप्पल पर दांत भी काट दिए थे। जिससे मुझे सेक्स की मांग मेरी बढ़ गई थी। मैंने अपनी योनि में उंगली लगा कर उसे रगड़ना शुरू कर दिया।  जैसे-जैसे मेरा सेक्स की भूख बढ़ती जाती वैसे ही मुझे और अच्छा लगता जाता। वह मेरे स्तनों का  अच्छे से रसपान कर रहा था। उसके बाद उसने मुझे जमीन पर ही लेटा दिया और मेरी पैंटी उतार दी। जैसे ही उसने मेरी पैंटी उतारी उसके बाद उसने अपने मुंह में मेरी योनि को लेते हुए। मेरी योनि के ऊपरी हिस्से को दबा लिया। अब उसने मुझे उल्टा कर कर मेरी गांड को भी चाटने लगा वह मेरे दोनों तरफ चाटता कभी आगे कभी पीछे मुझे इससे अच्छा लगने लगा था। अब उसने धीरे से मुझे उठाकर थोड़ा सा किनारे पर कर दिया।


अब वह मेरे ऊपर लेट गया और जैसे ही वह मेरे ऊपर लेटा तो उसने अपने लंड को मेरी योनि में धीरे धीरे डालना शुरू किया। क्योंकि मेरी योनि गीली हो चुकी थी इस वजह से उसे डालने में कोई परेशानी नहीं हुई। वह पूरा अंदर तक चला गया मानो ऐसा लगा जैसे दीवार में उसने सटा दिया हो  उसने अपनी स्पीड पकड़ी और काफी तेज तेज करने लगा मेरे स्तन और तेज हिलने लगे। वह इतनी तेज हिल रहे थे जैसे मानो भूकंप के झटके आ रहे हो। उसने 10 मिनट तक किया उसके बाद मेरी योनि इतनी गरम हो गई कि वो बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसका वीर्य पतन हो गया। जैसे ही उसका वीर्य गिरा। वह कहने लगा तुम वाकई में बहुत अच्छी हो। उसके बाद उसने दोबारा से थोड़ी देर बाद मेरे साथ सेक्स किया।


इस बार उसने मुझे इतनी जोर से धक्का मारा कि मेरे तो गले तक ही आ गया उसका लंड वह बड़ी तेजी से कर रहा था मानो जैसे कोई ट्रेन छूटने वाली हो लेकिन मुझे अच्छा लग रहा था। थोड़ी देर में उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और उठाते उठाते ही वह मुझे चोदने लगा। अब मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा था। मानो ऐसा लग रहा था जैसे मेरी इच्छा पूर्ति हो गई हो। उसने धीरे से मुझे कहा मेरा गिरने वाला है। उसके बाद उसने मुझे लिटा दिया और मेरे पेट पर ही सारा वीर्य गिरा दिया। जिससे कि मेरा पुरा पेट गीला हो गया। उसके बाद मैंने कपड़े से साफ किया और अब हम दोनों रोज रात को ऐसा करने लगे।


हमने कुछ समय बाद शादी का फैसला कर लिया। हम पहले से ही जानते थे तो हमें एक दूसरे के बारे में जानने की जरूरत नहीं पड़ी। विवेक बहुत अच्छा लड़का था। अब हम ने शादी करने का फैसला किया मैंने यह बात अपने घरवालों को बताई तो उन्होंने इनकार कर दिया। और कहां पहले हम विवेक से मिलना चाहते हैं। उसके बाद हम फैसला करेंगे। एक दो महीने बाद जब मैं घर गई तो मैंने अपने मम्मी पापा को विवेक के बारे में बताया और उसे अपने घर वालों से मिलाया। मेरे पापा को विवेक बहुत अच्छा लगा। लेकिन मेरे मम्मी अभी भी दुविधा में थी क्योंकि विवेक का इस दुनिया में कोई नहीं था।


बचपन से उसके पिताजी ने उस को पाला और उसको पढ़ाया-लिखाया पर कुछ समय बाद उनका भी देहांत हो गया। अब वह बिल्कुल अकेला रह गया था। मैं और विवेक एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। मैने जैसे तैसे करके अपनी मां को शादी के लिए मनाया। मेरी मां विवेक से शादी कराने के लिए इसलिए तैयार नहीं थी। क्योंकि मेरी मां ने मेरे लिए कहीं और रिश्ता तय कर रखा था। लेकिन यह बात मुझे पता नहीं थी। मेरी मां ने यह बात मेरे पापा से की लेकिन मेरे पापा तो मेरे फैसले से खुश थे। लेकिन मां को मेरी बहुत चिंता थी।

भैंस चराने गई लड़की को पेला

भैंस चराने गई लड़की को चोदा


यारों मैं फिर एक बार अपनी कहानी लेकर हाजिर हूँ. इस बार मैं आपको अपने बचपन की एक कहानी सुना रहा हूं मेरा परिवार शुरू में गांव में रहता था. गांव का माहौल शहर के माहौल से बिल्कुल अलग होता है मेरे घर का माहौल भी एक गांव के माहौल की तरह ही था. घर में मैं मेरे पिताजी और माताजी थे सबसे छोटा होने के कारण मैं अपने मां-बाप का बहुत लाड़ला बेटा था इस कारण थोड़ा जिद्दी भी हो गया था. Desi Village XXX Story

मैं करीब 14- 15 साल की उम्र अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता है इसीलिए कई बार मुझे मां की लाइफ चुदाई देखने का मौका मिला! गांव में पति पत्नी एक साथ नहीं सोते हैं एक ही कमरे में भी अलग अलग खटिया पर सोते हैं. मेरे पापा अलग खटिया पर और मैं और मेरी मां उसी कमरे में अलग खटिया पर सोते थे. मैं तीन-चार साल तक तो अपनी मां का दूध पीता ऱहा था, इसीलिए मैं उनके साथ ही सोता था.

कभी-कभी मैं चड्डी पहन के तो कभी एकदम नंगा सो जाता हूं गांव में बच्चे अक्सर ऐसे ही सोते हैं. चड्डी पहन कर बनियान पहनकर गांव में भी घूमते रहते हैं अक्सर मेरे पापा रात में मम्मी की चुदाई करते थे बिल्कुल नंगा करके. एक रात जब मेरी नींद टूटी तो देखा पापा मेरे पास मम्मी के पास लेते हैं. और मम्मी की पीठ के पास चिपकर कुछ कर रहे हो मुझे यह सब समझ में नहीं आता था.


फिर भी मैंने देख पापा मम्मी बिल्कुल नंगे हो मैं उठ कर बैठ गया और मम्मी मम्मी करने लगा. मम्मी ने मुझे अपने पास लेटा लिया पापा भी मम्मी के पास ही लेटे रहे मैंने देखा पापा मम्मी की चुदाई कर रहे. पापा का लंड मम्मी की चूत में डाला था दोनों बिल्कुल नंगी थे. थोड़ी देर बाद मुझे सोया जानकर पापा मम्मी को अपने पास खटिया पर ले गए. उन्होंने मम्मी की चूत चाटना शुरू कर दी है.

मैं फिर उठकर मम्मी पापा के पास पहुंच गया मुझे देखकर पापा कहने लगे तेरे को नींद नहीं आ रही है. मैंने आप मिलते हुए कहा मुझे आपके पास लेटना है पापा ने मुझे अपने पास लिटा लिया और फिर मम्मी की चुदाई करने लगे. पापा ने इस बार मम्मी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके बूब्स दबाने लगे. मैं जाग रहा था और सब कुछ देख रहा था लेकिन मेरे पापा मम्मी को मेरे जागने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा वे तो अपने काम में मस्त थे.

थोड़ी देर बाद में जब उठ गया तो पापा ने मुझे अपनी जांघो के पास बैठा लिया. और अपना लंड मुझे पकड़ा दिया और कहा तू इसके साथ खेल. मैं पापा का लंड पकड़ कर खेलने लगा कभी पापा का लंड पकडकर हिलाता तो कभी चूसता, मुझे और मजा आ रहा था. थोड़ी देर बाद में मम्मी के जनों के बीच बैठ गया और मैंने मम्मी की चूत में उंगली डालना शुरू कर दिया. कि बीच बीच मे कभी जीभ से चुम्मी लेकर चूत चाट लेता था.

मैं काफी छोटी उम्र से पापा से लंड से खेलता था मुझे लंड से खेलना और चूत में उंगली डालना बहुत अच्छा लगता था. जब मैं छोटा था तो रात में उठ जाता था तो पापा मुझे इसी तरह अपनी जांघों के बीच बिठाकर लंड से खेलने को कह देते थे. और पापा मम्मी कै कभी होठों का रस पीते तो कभी दुघ चूसते थे. पापा जब मम्मी की चूत चाटने लगे तो मैं मम्मी के दूध चूसने लगता था.


मेरी मम्मी मेरे सामने छोटे से ही नंगी हो जाते थे मेरे सामने नहा भी लेते अपने कपड़े बदल लेते हैं. इसी तरह मेरे पापा मेरे सामने नंगे होकर नहा लेते थे और कपड़े भी बदल लेते थे. 1 दिन जोरदार बारिश हो रही थी मैं बाहर से जब घर पर आया तो मुझे घर पर मम्मी कहीं नहीं देखी. मैंने पूरा घर छान मारा लेकिन मुझे मम्मी कहीं नहीं देखी फिर मैं बेडरूम में गया यहां मेरे मम्मी पापा सोते थे.

मैंने गेट खोल कर देखा तो पापा मम्मी की चुदाई कर रहे थे पापा मम्मी दोनों एकदम नंगे थे. पापा ने मम्मी को घोड़ी बना रखा था और उनकी चूत में अपना लंड डाल रखा है मैं गेट खोल कर सीधे कमरे में घुस गया. अचानक मुझे देखकर मेरे मम्मी पापा हड़बड़ाबे और अलग हो गए. मम्मी बोली बेटा तू कब आया मैंने बोला मैं अभी आया आप नहीं दिखे तो मैं घर आ गया.

उस समय मेरा सिर्फ खड़ा होता था लंड को पकड़ कर मसलने में मजा आता था लेकिन पिचकारी नहीं छूटती थी मैं कमरे में खटिया पर बैठ गया. मैं यह देखकर हैरान रह गया कि मेरे मम्मी पापा मेरे पास ऐसे नंगे ही बैठ गए. पापा खटिया पर लेट गए मैं हर बार की तरह पापा लण्ड सहलाने लगा. पापा मम्मी की चूत चाटने लगी थोड़ी देर बाद पापा ने मुझे अलग कर दिया और मम्मी को आगे की ओर झुका दिया और अपना लंड एक ही झटके में मम्मी की चूत में डाल दिया.

मैंने पहली बार मम्मी की लाइफ चुदाई अपनी आंखों से देखें. पापा मम्मी ने मुझे कमरे से बाहर जाने को भी नहीं कहा मम्मी ने पापा के कान में कहा कि इसको बाहर भेज दो. पापा बोले अभी तो बहुत छोटा है उसे कोई ज्ञान नहीं है बैठा रहने दो. मैंने पापा से मासूमीयत इसलिए पूछा पापा आप यह क्या कर रहे है तो पापा कहने लगी मैं संभोग कर रहा हूं. मैंने कहा यह क्या होता है पापा बोले जब तुम बड़ा हो जाएगा तो तू भी अपनी पत्नी के साथ यह सब करेगा.

पापा कहने लगे तू भी तो इसी चू से निकला है मैंने कहा पापा यह चूत क्या होती है. तो पापा कहने लगे औरत की नंगू को चूत कहते हैं और पापा के सुसु को लंड कहते हैं. मैंने कहा तो क्या मेरी सुसु भी लंड कहेगी पापा कहने लगी हां तेरा भी अब खड़ा होने लगा है तेरी सुसु अब लंड बन गया है. पापा और मैं बातें कर रहा था और पापा मेरे सामने ही मम्मी की चूत मार रहे थे.


20 मिनट की चुदाई के बाद पापा ने मम्मी की चूत में ही अपना माल पानी छोड़ दिया. पापा मम्मी को नंगा देखकर मैं भी उत्तेजित हो गया था मैंने भी अपनी चड्डी उतार और अपनी सुसु को सहलाता रहा और हम तीनों मजा करते रहे. घर में रोज मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैं भी उत्तेजित हो जाता था और मुझे भी किसी की चूत मारने की इच्छा होने लगी थी.

गांव में अक्सर लड़का लड़की अपने पालतू जानवरों को चराने के लिए जंगल जाते हैं. मेरे पड़ोस में भी एक लड़की मेरी ही हम उम्र थी वह भी अपनी गाय भैंस चलाने के लिए जंगल जाती थी. मैं भी एक दिन उसी के साथ जंगल चला गया जंगल में हम दोनों एक सिला पर बैठ गए और आसपास ही हमारे जानवर चलने लगे. हम लोगों की बातें करते रहे मैंने चड्डी बनियान पहन रखी थी तो उस लड़की ने भी देखा ब्लाउज और घाघरा पहन रखा था.

कुछ देर बाद छोकरी को लैट्रिन लगी छोकरी मुझसे बोली मेरे जानवर देखना मैं लैट्रिन होकर आती हूं. छोकरी एक बोतल में पानी लेकर झाड़ियों के पीछे बैठ गई और पॉटी करने लगी. थोड़ी देर में मैं भी उसी लड़की के सामने जा पहुंचा लड़की मुझे देख कर कहने लगी तुम यहां क्यों आ गए. मैंने कहा मुझे भी लेट्रिन आ रही है और मैं अपनी चड्डी खिसका कर उसी के सामने पॉटी करने बैठेगा.

लड़की कहने कोई आ जाएगा मैंने कहा इस जंगल में अभी कोई नहीं आएगा. मुझे वैसे पॉटी नहीं आ रही थी लेकिन मैं तो लड़की की चूत देखने के लिए बैठ गया था. थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा तेरी सुसु तो बहुत अच्छी है मैं उसे छूकर देखना चाहता हूं. छोकरी बोली कोई आ जाएगा मैंने कहा कोई नहीं आएगा. और मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और एक उंगली उसकी चूत के अंदर डाल दी और उसकी चूत में उंगली करने लगा

मेरे उंगली करने से लड़की को मजा आने लगा मैंने लड़की से कहा मेरी सुसु भी पकड़ कर देख. डरते डरते लड़की ने मेरा लंड पकड़ लिया और जोर से दबाने लगी. उसके लंड दबाने से और उसकी चूत में उंगली करने से मेरा लंड पहले ही खड़ा हो गया था. लड़की से मैंने कहा इसकी खाल पीछे करो तो उसने मेरे लंड की खाल पीछे की तो मेरा लाल सुपडा देखकर वह खुश हो गई.


कहने लगी तेरी सुसु तो बहुत अच्छी और बड़ी है मेरे पापा की सुसु भी ऐसी ही है. मैंने उससे कहा जब लड़का बड़ा हो जाता है तो उसको सुसु नहीं लड कहते हैं और तू भी अब बड़ी हो गई है तो तेरी चू चू चू तो बन गई है. लड़की मेरे लंड को शहला टी रही मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा. थोड़ी देर बाद हम लोग फिर टीले पर आकर बैठ गए मैंने लड़की से कहा चलो पापा मम्मी वाला खेल खेलते हैं.

लड़की कहने लगी मुझे यह खेल नहीं आता है मैंने कहा मुझे यह खेल आता है. मैंने पापा मम्मी को कई बार खेलते हुए देखा है मैं लड़की को झाड़ी के पीछे ले गया. और मैंने लड़की को पीठ के बल सीधा लिटा दिया लड़की का घाघरा और उसकी चड्डी उतार दी. और मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया मैंने उसकी सुसु अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दी.

तो लड़की मस्त हो गई कहने लगी बहुत मजा आ रहा है फिर मैं सिक्सटी नाइन की स्थिति में उसके ऊपर लेट गया. और मैंने अपना लंड उसके मुंह में दे दिया और कहा यह तू भी चूस तेरे को भी बहुत मजा आएगा. लड़की ने मेरा पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. हम दोनों एक दूसरे के लंड और चूत चूस रहे थे तभी किसी की आने की आहट सुनाई दी. “Desi Village XXX Story”

तो हम लोग अलग हो गए और अपने कपड़े पहन कर टीले के पास आ गए. उस दिन मैं उस लड़की की चुदाई नहीं कर सका, लड़की चुदाई के लिए तैयार थी लेकिन किसी के आज आने की आहट के कारण में चुदाई नहीं कर सका. मेरा लंड प्यासा ही रह गया मैंने लड़की के सामने ही अपनी मुठ मारी लड़की कहने लगी यह क्या कर रहे हो. मैंने कहा यह मैं मुठ मार रहा हूं कल पापा मम्मी वाला बाकी खेल भी खेलेंगे.

दूसरे दिन जब हम लोग गए तो पहले की तरह झाड़ियों के पीछे पहुंच गए. मैंने लड़की की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स चूसने लगा. थोड़ी देर में लड़की की चूत पानी छोड़ने लगी तो मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया और अपना लंड उस लड़की के मुंह में दे दिया. हम दोनों ने 10 मिनट तक एक दूसरे की चूत और लंड चाहते लड़की की चूत नमकीन पानी छोड़ने लगी.

तो मैंने उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और अपना लंड थूक लगा धीरे-धीरे लड़की की चूत में डालना शुरू किया. लड़की कहने लगी दर्द हो रहा है दर्द हो रहा है, मैंने उससे कहा तेरी चूत अभी फ्री नहीं है इसलिए थोड़ा सा दर्द होगा थोड़ा सा बर्दाश्त करो. मैं रोका नहीं धीरे-धीरे मैंने लड़की की चूत में लण्ड डालकर चुपचाप लेट गया. थोड़ी देर बाद जब लड़की का दर्द कम हो गया तो मैंने फिर मैंने चूत में लंड घिसना शुरू कर दिया.
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

धीरे-धीरे लड़की को भी मजा आने लगा और वह भी मेरी चुदाई में सहयोग करने लगी. 15 मिनट की चुदाई के बाद में अपना माल पानी उसी की चूत में छोड़ गए. हम दोनों एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही देते रहे फिर अलग होगए. कई दिनों तक हम लोग इसी तरह चुदाई का मजा लेते रहे. मेरे पापा मम्मी जिस तरह से अलग-अलग आसन में चुदाई का मजा लेते थे मैं भी उसी को देखकर लड़की के साथ चुदाई का मजा लेता था.

एक बार मैंने लड़की को घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत चाटी फिर उसकी चूत घोड़ी बनाकर मारी. हम दोनों को बहुत मजा आया लड़की को भी मरवाने में बहुत मजा आता था. इसलिए वह भी जल्दी तैयार हो जाती थी हम लोग झाड़ी के पीछे जाकर रोज संभोग करते थे. लड़की उस समय एमसी से ठीक से नहीं होती थी इसलिए प्रेग्नेंट होने का ज्यादा डर नहीं था.

पहली बार जब मैंने लड़की की चुदाई की तो उसकी चूत से ढेर सारा खून निकला मेरा लंड भी खून से रंगे आता लड़की डर गई. लेकिन मैंने उससे कहा कि मैंने बीएफ में देखा है लड़की चूत से खून निकलता है तो लड़की समझ गई. हम दोनों ने उस दिन चुदाई के बाद अपने पास के ही एक तालाब में धोया और लड़की की चूत भी धोकर साफ कर दी. ताकि उसके घर वालों को पता ना पड़े की लड़की चुदाई करवा कर आई है आगे की कहानी अगले भाग में मैं लिखूंगा!

Khet Me Pahla Lund Liya Maine

Khet Me Pahla Lund Liya Maine

Adult Stories Main Vaani Greater Noida se aaj apni pehli jabardast dard se bhari chudai ki ek majedar kahani le kar aayi hoon. Wese main Greater Noida me ek call center me kaam karti hoon. Meri umar aaj 23 saal hoon, aur apni umar ke hisab se main 23 ladko se ab tak chud chuki hoon. Village Girl Virgin Pussy

Main apni call center ke office me ek manger ki post par hoon. Whan tak pouchne ke liye, main apne raste me aane wale. Un sab mardo ke bistar garam kiye hai. Jo jo mere raste me aaye hai, aur aaj bhi main time to time unko khush karti rehti hoon.

Dosto main apni life ke ye 23 chudai ke kisse baten ke liye aayi hoon. Par aaj main aapko apni life ki pehli chudai ke bare me batana chahati hoon. Jo meri life ka sabse majedar aur dard bhara rha hai. Mujhe puri umeed hai, ki aapko meri ye pehli kahani pasnad aayegi.

Toh chaliye main aaj ki kahani aap sab ko batati hoon. Ye kahani aaj se 5 saal pehle ki hai. Jab main gaon me apne ghar walo ke sath rehti thi. Mujhe sex ke bare me itna nhi pata tha. Bas jitna school me meri friends ne mujhe btaya tha, sirf hi utna hi pata tha.
Mast Hindi Sex Story : Young Didi Hawas Me Andhi Hui

Par us umar me hi sex naam sunte hi choot aur meri pure jism me ek ajeeb si halchal honi shuru ho jati hai. Mere ghar me mere sath mere mummy papa rehte hai. Main ek gaon me rehti thi, mere papa ke pass apne 11 khet hai. Jis vajah se unhone apni help ke liye.

Ek nokar rkha hua tha, wo bahot time se humare pass rehta tha. Isliye main bachapan se hi use chacha kehti thi. Ab wo humari family ka member jesa hi tha. Dheere dheere main badi aur jawan hone lag gyi. Chacha ek dam kale rang ke patle se the, wo dikhne me bahot ajeeb se lagte the.

Par wo mere sath majak karte the, isliye hum dono ki achi baat chit thi. Par fir bhi main usne kafi kam bolte thi. Papa ne use apne ghar ke pass wale ek aur apna hi ek chhota sa room rehne ke liye diya hua tha. Isliye wo subah hi humhare ghar aa jate the, aur wo breakfast karke papa ke sath khet me chale jate the.

Fir main ya mummy dopher ko khet me lunch dene ke liye jati thi. Main aur mummy papa ke jane ke baad, ek dam akeli reh jati thi. Jis vajah se hum dono kafi boor ho jate the. Par ek din main ghar par thi, school ke aane ke baad mujhe nind nhi aa rhi thi.

Isliye main aise hi apne ghar ke charo taraf ghum rhi thi. Jahan par bhanise rkhte the, main us side gyi. Tabhi mujhe pani ki awaj aayi, main aise us awaj ki taraf gyi. Main tabhi ek diwar ke pass gyi toh maine dekha ki chacha apna lamba bada kala lund bahar nikal kar diwar par peshab kar rhe the.
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Jese hi maine unka lund dekha, meri ankhen us pad jam gyi. Chacha ne jab mujhe dekha ki main unka lund dekh rhi hoon. Toh wo mujhe dekh kar meri aur smile karte hue. Apna lund apne hath se hilane lag gye, unka lamba lund hawa hilate dekh mujhe kuch kuch hone lag gya.

Thodi der baad jab mujhe ehsas hua, ki chacha mujhe dekh kar apna lund hila rhe hai. Toh main sharam se pani pani ho gyi, aur bhag kar apne ghar me ja kar ghus gyi. Us time meri dil ki dhadkan bahot tez ho chuki thi.

Meri choot me ek ajeeb si san sani si fail gyi thi. Meri ankho ke samne se chacha ka lamba kala lund hatne ke naam tak nhi le rha tha. Mujhe us raat nind nhi aayi, kyoki main sari raat chacha ke lund ke bare me jo soch rhi thi.

Mujhe us time apni firends ki baat yaad aayi, ki wo kehti hai ki lund dekhne me hi bahot mast hota hai. Use dekhte hi apne pure jism me kuch kuch hona shuru ho jata hai. Mujhe aaj unki ek ek baat kehi sach lag rhi thi. Kyoki aaj wo sab mere sath real me ho rha tha.

Jo pehle mujhe sab kuch nakali aur bakwas lagta tha. Aaj wo hi sab mujhe pagal kar rha tha. Meri choot me ajeeb sa chikna pani nikal rha tha. Maine mehsus kiya, ki main puri tarah garam ho rhi hoon. Maine jese raat wo raat nikali, agle din sunday tha. Isliye main ghar par hi thi, par aaj subah se hi papa ko bukhar ho rha tha.

Chacha ji subah hi aa gye, unhe dekhte hi main sexy si smile kar di. Aur wo bhi mujhe hawas se bhari najaro se dekhne lag gye. Aaj mujhe unki najar kuch thik nhi lag rhi thi. Kyoki aaj wo mere jism ko uper se le kar niche tak ache se ghur ghur kar dekh rhe the. Mujhe unki najaren kuch kuch kar rhi thi. Mummy mere chacha ke pass aayi aur boli.

Mummy – Bhai aaj Vaani ke papa ki tabyit thik nhi hai. Aaj aap akele hi chale jayo khet me.

Chacha – Thik hai bhabhi ji koi baat nhi, aaj bhayia koi rest karne do. Main chalta hoon, kaam bahot hai.

Mummy – Thik hai par khana toh kha lete.

Chacha – Are aap pack karke le aana.

Mummy – Mujhe time lag skata hai, chal thik hai main Vaani ko bhej dungi.

Jab mummy ne mera naam liya toh mere chehre par ek ajeeb si khushi aa gyi. Main chacha ko dekha toh chaha mujhe hawas se bhari smile kar rhe the. Fir wo whan se jane lage aur piche mud kar mujhe fir se smile karte hue, ishare me mujhe kuch keh gye.

Unke jate hi main bathroom me gyi aur nahane lag gyi. Aaj main na jane kyo apni choot ko shave kar liya, aur apni choot ache se saaf kar liya. Us din na jane kyo mujhe ander se lag rha tha, ki aaj jarur main apni choot marwaungi.
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Fir main subah hi kafi ache se tyar ho gyi. Maine apne gulabi hontho par halki halki gulabi lipstick laga li. Aur halka halka makeup karke main chacha ka khana le kar khet ki taraf chal padi. Jese hi main chacha ke pass pounchi toh maine dekha ki wo mujhe dekhte hi ek dam khade ho gye.

Unhe dekh kar aisa laga ki mano wo kab se mera hi wait kar rhe the. Wo mujhe dekh kar smile kar rhe the, aur sath hi mujhe sath wale chhote se room me jane ka ishara kar rhe the. Maine charo taraf dekha, whan door door tak koi nhi tha. Isliye main sidha room me ghus gyi.

Mere dil ki dhadkan bahot tez chal rhi thi, na jane ab mere sath kya hone wala tha. Main ander darwaje ki taraf kamar karke manje par baith gyi. Tabhi kuch der baad darwaja khulne ki mujhe awaj aayi. Chacha ne ander se darwaja band kar liya, maine piche mud kar halka sa dekha toh meri gand fat gyi.

Kyoki maine dekha ki chacha pure nange the. Unka lund lamba kala bahot hi khatarnak lag rha tha. Maine jhat se apna muh aage kar liya, fir wo mere pass aa gye aur mere piche khade ho gye. Maine jese hi piche dekha toh unka lund mere hontho ke pass aa gya. Itna lamba aur kala mota lund ek dam mere ankho ke samne tha.

Maine ye dekh kar kafi hairan ho gyi. Fir chacha mere samne aa gye aur apne lund ko mere hontho par ragad kar mere muh me dalne lag gye. Par maine unhe mana kar diya, par unhone fir mere sath thodi jabardasti kari. Aur fir maine na chahate bhi unka lund apne muh me bhar liya.

Unka lund sach me bahot hi acha tha, main unke lund ko chusne lag gyi. Lund ki khushboo ne pehle hi mujhe apna diwana bana diya tha. Shayad chacha ko ab mujhe lund chusawane me maja aane lag gya tha. Isliye ab wo dheere dheere apne lund se mera muh chodne lag gye.
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Mujhe bhi ab unka lund chusne me bahot maja aa rha tha, tabhi chacha ne pehle se jyada jor se mera muh chodna shuru kar diya. Aur fir achanak unke muh se aahh nikali aur mere muh ke ander lasi bhar gyi. Unke lund se ek tarah ki malai nikal rhi thi. “Village Girl Virgin Pussy”

Jiska sawad mujhe lasi jesa laga, maine unka sara pani pee liya. Uske baad fir unhone mere sare kapade nikal diye. Chacha ne mujhe manje par leta diya, aur mere uper leat kar wo mere dono boobs ko pagalo ki tarah chusne lag gye.

Mujhe us time aisa lag rha tha, mano chacha ne ek hafate se kahana nhi khaya. Aur ab wo mere dono boobs ko kha rhe hai. Fir wo meri choot par gye aur meri gelli choot ko wo apni jeeb se chatne lag gye. Unhone meri choot ko puri tarah se chat chat kar saaf kar diya.

Itne me unka lund fir se khada ho gya, jab main bhi puri tarah garam ho gyi. Unhone apna lund meri choot par ragadna shuru kar diya. Isse main lund lene ke liye machalne lag gyi, aur mast ho kar boli.

Main – Chachu ab dal do apna lund meri choot me.

Meri ye mast awaj sun kar chacha ne ek jordar dhaka mara aur apna mota lund meri choot me adha dal diya. Unke chaku jese lund ne meri choot ko faad kar rkh diya. Jisse mujhe bahot jyada dard hua, main dard ke vajah se bahot jor se chila uthi.

Meri awaj sun ker chacha dar gye, unhone tabhi pass padi meri panty ko utha kar mere muh me thus diya. Aur mere dono hath pakad kar apna lund ek aur dhake se meri choot me dal diya. Mujhe itna dard hua ki main aapko bta nhi skati.

Par chacha ek berheam insan ki tarah meri choot ko chod rhe the. Meri choot me se khoon nikal rha tha, kyoki mera khoon unke pet par lag rha tha. Par 10 minute ki dard bhari chudai ke baad mujhe maja aane lag gya. “Village Girl Virgin Pussy”
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Fir kuch der baad meri choot ne apna pani nikal diya aur thodi der baad chacha ke lund ne bhi meri choot me apna pani bhar diya. Fir uske baad wo thak kar mere uper gir gye. Karib 10 minute wo mere uper uthe aur main apne kapade dalne lag gyi.

Par tabhi chacha aur unka lund fir se uth gya, main jese hi jane lagi. Tabhi chacha ne mujhe fir se pakad liya. Aur meri panty fir se utar kar jabardasti meri choot me apna lund fir se dal diya. Unhone fir meri choot ko 20 minute tak aur choda, mujhe bhi unse chud kar bahot maja aaya.

Uske baad fir hum dono ka pani nikal gya, toh unhone mujhe choda. Aur fir maine apne kapade aur apne ghar aa gyi. Ghar aakar kisi ko mere uper shak nhi hua, ki aaj apni choot apne hi chacha se fadwa kar ghar aayi hoon.


देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat

 


देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat, देवर भाभी की चुदाई , देवर ने चोदा , प्यार से चोद दिया , मैं देवर से चुदवाई

देवर भाभी की चुदाई , देवर ने चोदा , प्यार से चोद दिया , मैं देवर से चुदवाई , बार - बार चुदने लगी , देवर का लंड चूसा , चूत भी चटवाई.


मेरा निकाह हो चुका था।  अभी दो दिन पहले ही मैंने अपनी सुहागरात मनाई थी।  आज तीसरे दिन मेरा देवर मेरे सामने आया।  उस समय कमरे में कोई नहीं था।  मैं थी और मेरा देवर तारिक़।  वह लगभग २२ साल का पूरा मर्द हो चुका था। गोरा चिट्टा हैंडसम और लंबा चौड़ा था।  उसे देख कर मेरे नियत ख़राब हो गई।

   

  • वह मुझे देख कर मुस्कराया और बोला - भाभी जान आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।  बिलकुल मेरे दोस्त की भाभी की तरह।  वह भी इसी तरह बेहद हसीन है।  मैं कुछ नहीं बोली और तिरछीं निगाह से देख कर मुस्कराने लगी। इतने में वह अपनी लुंगी खोल कर मेरे सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया.  उस भोसड़ी वाले का लण्ड खड़ा था . लण्ड देख कर मेरी चूत में आग लग गई बहन चोद। वह बोला - लो मेरा लण्ड पियो,  भाभी जान ।
        
  • लण्ड देख कर तो मैं ललचा ही गई थी.  मेरे मुंह से लार टपकने लगी थी और मेरी जबान लण्ड चाटने के लिए लपलपाने लगी।  पर मैं थोड़ा नखरा करने लगी।  
        
  • मैंने कहा - तुम भोसड़ी के बड़े बेशरम हो ? एक पराई बीवी के सामने इस तरह नंगे होकर खड़े होने में तुम्हे कोई शर्म नहीं आती ? अपना खड़ा लण्ड दिखाने में तुम्हे लाज नहीं आती ?
        
  • वह बोला - अरे भाभी जान अब नखरे न करो।  और भी लोग तेरे सामने नंगे खड़े होतें हैं।  तुम भी अपने कुनबे के ग़ैर मर्दों के आगे नंगी होती हो ? मैं तो कुनबे का ही लड़का हूँ।  मेरे आगे नंगी होने में तुम्हे तो कोई शर्म नहीं आना चाहिए।  अभी तो मैं ही नंगा हूँ।  मैं अभी तुझे भी नंगी कर दूंगा।
        
  • मैंने कहा - अरे यार तुम तो मेरे ऊपर खामखां ही चढ़े ही जा रहे हो ? मैं कोई ऐसी वैसी भाभी नहीं हूँ।
        
  • वह बोला - तुम जैसी  भाभी हो मुझे मालूम है । तुम बहुत खूबसूरत हो, बड़ी बड़ी आँखों वाली हो, बड़ी बड़ी चूँचियों वाली हो, मस्त गांड और बड़े बड़े चूतड़ वाली हो, बड़ी बड़ी जाँघों वाली हो और उसके बीच एक मस्तानी चूत वाली हो ? मैं जानता हूँ की तुम लण्ड बहुत अच्छी तरह पीती हो।  मेरी बड़ी भाभी भी मेरा लण्ड पीती हैं पर तुमसे अच्छा नहीं पीती। ये मुझे किसी ने बताया है।  प्लीज पकड़ कर पी लो न मेरा लण्ड।  देखो न कैसे अपना सर हिला हिला कर तुम्हे मना रहा है मेरा लण्ड।


उसकी प्यारी प्यारी बातों ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ ही लिया उसका लण्ड। लंडमेरे हाथ में आते ही छलांगें मारने लगा।  साला और बढ़ भी गया और मोटा भी हो गया एकदम से।  वह बोला देखा भाभी जान तेरे हाथ में कितना जादू है।  मेरा लण्ड इतना बड़ा और मोटा कभी नहीं हुआ जितना तेरे हाथ में जाकर हो गया।  मैं उसके लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी और वह मुझे नंगी करने लगा। मेरी चूँचियाँ दबाने लगा और मेरी चूत सहलाने लगा।  फिर मैंने उसे चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। 

अपनी चूत उसके मुंह पर रख दिया और कहा लो देवर जी पहले मेरी चूत चाटो। अपनी जबान पूरी घुसेड़ दो मेरी चूत में और मैं झुक कर उसका लंडचाट्ने लगी।  हम दोनों 69 बन गए।  सच में मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।  वह बोला भाभी जजान तेरी चूत बहुत स्वादिस्ट है।  ऐसी चूत अपने कुनबे में किसी की नहीं है।  मैंने पूंछा क्या तुम कुनबे की सबकी चूत चाट चुके हो।  वह बोला हां भाभी जान मैं सबकी चूत चाट चूका हूँ और आज भी चाटता हूँ।  सब मेरा लण्ड चाटती हैं। पीतीं हैं मेरा लण्ड।


इतने में किसी ने कहा भाभी जान लो मेरा भी लण्ड पियो ? मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वह अनजान लड़का था एकदम नंगा खड़ा था उसका बिना झांट का लण्ड भी खड़ा था।  लण्ड का सुपाड़ा एकदम तोप का गोला लग रहा था।  वह लण्ड तारिक़ के लण्ड से बेहतर लगा मुझे।  मैं कुछ बोलती उसके पहले ही तारिक़ बोला भाभी जान ये मेरा दोस्त फहीम है। हम दोनों मिलकर चुदाई करतें हैं।  चाहे किसी की लड़की हो, चाहे किसी की माँ हो, चाहे किसी की बेटी या बहू हो, चाहे किसी की सास या नन्द हो देवरानी या जेठानी हो हम दोनों मिलकर चोदेतें हैं। मैंने ही इसे बुलाया है भाभी जान। इसकी भाभी जान मेरा लण्ड पीती है इसलिए मैं चाहता हूँ की तुम भी इसका भी लण्ड पियो।


मैंने पूंछा अच्छा ये बताओ की तेरी बीवी कौन चोदता है ? वह बोला मेरी बीवी फहीम चोदता है, इसके दोस्त भी चोदते हैं मेरी बीवी।  मैं इसकी बीवी चोदता हूँ और मेरे दोस्त भी इसकी बीवी चोदतें हैं।  इसीलिए हमारी इसकी पक्की दोस्ती है।  मैंने दूसरे हाथ से फहीम का लण्ड पकड़ लिया।  मैंने दोनों लंड अपने मुंह के पास ले आयी और बारी बारी से दोनों के सुपाड़े चाटने लगी।  मुझे इतनी जल्दी दो दो लण्ड का मज़ा मिलेगा यह मैंने कभी सोंचा नहीं था। हम तीनो पूरी तरह नंगे थे।  मैंने तारिक़ को जमीन पर लिटा दिया और फहीम को भी लिटा दिया। दोनों आमने सामने लेटे। यानी दोनों के लण्ड आमने सामने हो गये।  मैंने उनको और नजदीक आने को कहा।  फिर दोनों ने टांगों पर टांगें  रख लीं और उनके लण्ड एकदम चिपक कर आमने सामने हो गये।  लण्ड से लण्ड टकरा गया और पेल्हड़ से पेल्हड़।


मैंने दोनों लण्ड एक साथ अपनी दोनों हाथ की मुठ्ठी में लिया और मस्ती से हिलाने लगी।  उनके सुपाड़े चाटने लगी और फिर दोनों लण्ड एक दूसरे से लड़ाने लगी. अब दोनों लाँड़ बिलकुल साँड़ की तरह लड़ने लगे।  मुझे यह देख कर मज़ा आने लगा। मैं तारिक़ के लण्ड से फहीम के लण्ड को मारती और कभी फहीम के लण्ड से तारिक़ के लण्ड को मारती। कभी सुपाड़े को सुपाड़े पर रगड़ती।  वो दोनों भी खूब एन्जॉय करने लगे।   फिर मैंने पर्श से दो कंडोम निकाले और दोनों लण्ड पर चढ़ा दिया।  इस तरह दोनों लण्ड मिलकर एक महा लण्ड बन गया। मैं इस महा लण्ड पर बैठ गयी तो दोनों लण्ड एक साथ मेरी चूत में घुस गए।  मैं उनके ऊपर धीरे धीरे कूदने लगी।  लण्ड बार बार बुर के अंदर लेती और फिर बाहर निकाल देती ।  इससे उन्हें  भी मज़ा आने लगा और मुझे भी। फहीम बोला भाभी जान इस तरह तो आजतक मुझसे  किसी से नहीं चुदवाया।  ये तो बड़ा मजे दार तरीका है।  तारिक़ भी बोला हां भाभी जान तुम तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हो।  चुदाई के नए नए तरीकेआतें हैं तुम्हें। खूब मज़ा लेती हो तुम चुदवाने के ?


मैंने कहा ये सब मैंने ब्लू फिल्म से सीखा है।  मुझे ब्लू फिल्म देखने का और उसी तरह चुदवाने का बड़ा शौक है। वैसे मेरे मुसलमानी समाज में कोई कंडोम इस्तेमाल नहीं करता लेकिन मैं कंडोम अपने पर्श में रखती जरूर हूँ क्योंकि मुझे कई बार नॉन मुस्लिम लण्ड से भी चुदवाने का मौक़ा मिलता है। फिर मैं फहीम का लण्ड चूसते हुए तारिक़ से चुदवाने लगी और फिर तारिक़ का लण्ड चूसते हुए फहीम से चुदवाने लगी। दोनों ने मुझे बारी बारी से  खूब चोदा। मैं इन दोनों से पीछे से भी चुदवाया और लण्ड पर बैठ कर भी चुदवाया।  मैंने मन में कहा मुझे तो लगता ही की आज ही मेरी असली सुहागरात हुई है।  जब दोनों लण्ड एक एक करके झड़ने लगे तो में झड़ते हुए लण्ड पिये।  उनका सारा वीर्य पी गयी मैं और फिर सुपाड़ा चाट चाट कर मज़ा लिया।  मुझे लण्ड का वीर्य पीना अच्छा लगता है इससे मेरी ख़बसूरती बढती रहती है। मुझे किसी का भी लण्ड पीना बड़ा अच्छा लगता है और मैं हमेशा किसी न किसी का लण्ड पीने के फ़िराक में रहती हूँ।


मैं चुदवा के उठी थी पर नंगी थी।  वो दोनों भी अभी नंगे ही थे। उनके लण्ड ठंढे हो चुके थे।  फिर हम सबने खाना खाया और कुछ देर तक हम लोग बात चीत करते रहे और फिर मैंने लण्ड सहलाना शुरू किया तो लण्ड धीरे धीरे खड़े होने लगे। रात का समय था और रात में औरतें जाने क्यों सब की सब रंडी हो जातीं हैं।  इतने में मेरी सास कमरे में आ गयी। उसने मुझे दोनों लण्ड हिलाते हुए देख लिया। उसकी नज़र सबसे पहले लण्ड पर पड़ी तो वह बोली हाय दईया इतने बड़े बड़े लण्ड बहू रानी ?  तेरी माँ का भोसड़ा बहू रानी।  तेरी  बुर चोदी नन्द की माँ की चूत  ? सास ने एक ही बार में सबको गरिया डाला।  फिर वह अपने बेटे तारिक़ का लण्ड पकड़ कर बोली हाय अल्ला कितना बड़ा और कितना प्यारा लौड़ा हो गया है मेरे बेटे का ?  ये तो बिलकुल मरद बन गया है मुझे इसका पता ही नहीं चला।  देखो न बहू रानी इसका लण्ड भोसड़ा चोदने वाला हो गया है।  और ये इसके दोस्त का लण्ड बाप रे बाप कितना मोटा और कितना सख्त है बहन चोद।बेटा फहीम तुम अपने दोस्त की माँ का भोसड़ा चोदो न।  तेरा लण्ड देख कर मैं चुदासी हो गयी हूँ।


सास ने तो उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  तब तक उसके पीछे एक लड़की नंगी नंगी आई और उसने तारिक़ का लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  बाद में मालूम हुआ की वह मेरी जेठानी की बहन है और अपने जीजू का लण्ड पी कर आई है। तब तक मेरी नन्द आ गई।  वह मुझे नंगी नंगी ही मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर ले गई और बोली भाभी चलो मैं तुम्हें एक चीज दिखाती हूँ। जब मैं उसके साथ बाहर एक बदफे कमरे में गई तो देखा की याहं तो बड़ी घनघोर चुदाई हो रही है।  कई लोग चोद रहे हैं।  कई लोगों की बुर चुद रही है।  तब नन्द ने बताया की भाभी जान देखो न मेरा अब्बू अपनी  बड़ी बहू की बुर चोद रहा है। मैं ये देख कर दंग रह गयी।  मेरी जेठानी बड़ी शिद्दत से अपने ससुर से चुदवा रही थी। नन्द ने फिर कहा और ये देखो मेरा खालू मेरी फूफी की बेटी चोद रहा है। फूफा खाला की बेटी चोद रहा है। तेरी देवरानी अपने भाई जान से चुदवा रही है. मेरे चचा जान की बेटी अपने ससुर से चुदवा रही है।


इन सबकी बुर एक साथ चुद रही है तो बड़ा मज़ा आ रहा है। मैं समझ गयी की मेरी ससुराल में खूब धड़ल्ले से चुदाई होती है।  तब तक नन्द ने अपने मियां का लौड़ा मुझे पकड़ा दिया और बोली लो भाभी अब तुम मेरे मियां से चुदवाओ।  यही सके सामने पियो मेरे मियां का लण्ड और फिर पेलो इसका लौड़ा अपनी चूत में।  मैंने कहा तो फिर  तू क्या करेगी मेरी बुर चोदी नन्द रानी।  वह बोली मैं अपने चचा जान से चुदवाऊंगी। मैंने दो साल से अपने चचा जान का लण्ड अपनी चूत में नहीं पेला जबकि इसका लण्ड मुझे बहुत पसंद है।  आज मैं इससे झमाझम चुदवाऊंगी और तेरी बुर मेरे मियां से चुदती हुई देखूँगी। फिर क्या मेरे नंदोई ने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा।  उधर नन्द भी मेरे सामने अपने चचा जान का लण्ड मुंह में भर कर चूसने लगी।


मैं अपने आपको बड़ी नसीब वाली समझने लगी।  जहाँ एक दुल्हन अपने मियां के अलावा किसी और मरद का लण्ड देखने के लिए महीनो बर्षों तड़पती रहती है वहां मैं अपनी शादी के ३/४ दिन में ही अपने ससुराल के इतने सारे लण्ड एक साथ देख रही हूँ। मुझे तो नये नये लण्ड देखने का, लण्ड पकड़ने का और लण्ड पीने का बड़ा शौक है।  मुझे तो लगा की जैसे की मेरे लिये लण्ड की लाटरी खुल गयी है।  अब तो मैं किसी का भी लण्ड कभी भी हाथ बढ़ाकर पकड़ सकती हूँ।  ये सब भोसड़ी वाले मेरे आगे नंगे नंगे घूम रहें हैं तो फिर मुझे इनसे शर्म किस बात की ?  और फिर मैं भी तो इन सबके आगे नंगी हूँ। अभी एक एक करके सबके लण्ड पेलूँगी अपनी चूत में तो मैं भी एक मंजी हुई रंडी बन जाऊंगी।  फिर मुझे अपनी बुर चोदी नन्द की बुर और सास का भोसड़ा चोदने में ज़न्नत का  मज़ा आएगा।


मैं अपने नंदोई का लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी और मेरी नन्द अपने चचा जान का लौड़ा चाटने लगी।  मैं भी
हाथ बढ़ाकर उसके पेल्हड़ सहलाने लगी।  उसे मालूम हो गया की मैं भी उससे चुदवाने के लिए तैयार हूँ।  वह मेरी चूत सहलाने लगा और नंदोई मेरी चूँचियाँ मसलने लगा। दोनों ही लण्ड बिना झांट के थे और लम्बे चौड़े थे।  मुझे दोनों ही लंड एक नज़र में भा गये।  इतने में नंदोई ने लण्ड पेल दिया मेरी बुर में।  मैं चिल्ला उठी उई माँ फाड़ डाला मेरी बुर। बड़ा मोटा है तेरा लण्ड ? चुद गयी मेरी यार।  धीरे धीरे चोदो न।  मैं कभी भागी नहीं जा रही हूँ।  अच्छी तरह चुदवाकर ही जाऊंगी।  तब तक मेरी नन्द बोली हाय चचा जान तेरा लौड़ा मेरी चूत का बाजा बजा रहा है।  तेरा लौड़ा तो साला बड़ा सख्त है।  तू भोसड़ी का मेरी अम्मी की बुर चोदता है और आज उसकी बेटी की बुर भी चोद रहा है।  तेरा जैसे हरामी आदमी दूसरा कोई नहीं होगा। 

मैंने सुना है की तू अपनी बेटी की बुर भी लेता है ? वह बोला हां लेता हूँ।  वह देती है तो मैं लेता हूँ।  मेरी बेटी भी तेरी ही तरह बहुत बेशरम और चुदक्कड़ लड़की है।  वह तो मेरे दोस्तों के भी लण्ड अपनी चूत में पेलती है तो फिर मैं क्यों न पेलूं ? मेरी नज़र अपने चचिया ससुर के लण्ड पर टिकी थी।  मैं चुदवा तो रही थी नंदोई से पर देख रही थी अपने चचिया ससुर का लण्ड।  उसका काला लण्ड मेरी जान ले रहा था।  मैं बहुत गोरी हूँ और गोरी औरत को काला लण्ड बड़ा अच्छा लगता है।  तब तक मेरी नन्द का खालू आ गया।  वह भी मादर चोद नंगा था। उसका भी लण्ड टन टना रहा था।  उसने लण्ड नन्द के कंधे पर रख दिया।  नन्द उसका भी लण्ड चाटने लगी. तब तक उसकी फूफी की बेटी आ गयी।  उसने मेरे  हाथ से नंदोई का लण्ड ले लिया और बोली भाभी जान अब मुझे अपने भाई जान से चुदवाने दो। मैंने उसे नंदोई का लण्ड दे दिया और मैं चचिया ससुर का लण्ड अपनी नन्द से ले लिया और उसे चूसने लगी।


मेरे मन की इच्छा पूरी हो रही थी। मुझे काले लण्ड का मज़ा मिलने लगा। मैं पहली बार किसी काले लण्ड से खेल रही थी।  लण्ड पूरे नंगे बदन पर फिरा रही थी खास तौर से अपनी चूँचियों पर।  बीच बीच में मैं लण्ड का  सुपाड़ा चाट रही थी।  लण्ड साला बिलकुल पोर्न स्टार के लण्ड की तरह लग रहा था और मैं अपने आपको ब्लू फिल्म की हीरोइन समझने लगी।  फिर मैंने लण्ड अपनी चूत में पेला और धकाधक चुदवाने लगी।  वह बोला बहू आज मुझे किसी नई ताज़ी बहू की नई ताज़ी बुर चोदने को मिली है। आज मैं खूब जी भर के तेरी बुर चोदूंगा।  वह चोदने की स्पीड बढ़ाता गया और मैं अपनी गांड उठा कर हर धक्के का जबाब धक्के से देती गयी।


कुछ देर में मुझे एहसास हुआ की ससुर का लण्ड झड़ने वाला है और इधर मैं भी करीब  आ चुकी थी। तब तक उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठा लिया।  लण्ड पूरा मेरी बुर में घुसा हुआ था।  वह नीचे से धक्के मारने लगा और मैंभी ऊपर से कूदने लगी।  इतने में लण्ड ने उगल दिया वीर्य।  थोड़ा मेरी चूत में लगा थोड़ा मेरी गाड़ में।  मैं फिर घूम गयी और झाड़ता हुआ लण्ड चाटने लगी।  मुझे लण्ड का वीर्य चाटने का बड़ा अच्छा लगता है।  हर लण्ड का  स्वाद अलग अलग होता है।  खलास मैं भी हो गयी थी।  मैं बाथ रूम गयी और वहां से फ्रेश होकर आ गई।  मैं मस्ती से सबकी चुदाई देख रही थी।  पूरे घर में चुदाई ही चुदाई हो रही थीं।  सब भोसड़ी वाली लण्ड अदल बदल कर चुदवा रहीं थीं।


तभी अचानक मेरी फुफिया सास का बेटा नंगा नंगा अपना लण्ड मुझे दिखाते हुए बोला लो भाभी जान मेरा भी लण्ड पियो।


मैंने कहा हां देवर जी जरूर पियूँगी।  तेरा भी लण्ड पियूँगी और तेरे बाप का भी लण्ड पियूँगी।

कुँवारी चाची की चुदाई - सुहागरात से पहले ही चाची को चोदा

Chachi ki seel tod chudai ki


मेरी घर में बहुत इज्जत है क्योंकि मैं पढाई में बहुत तेज हूँ और छोटे चाचा 8 क्लास के बाद नहीं पढ़े। जब मैं शादी में गया तो चाची को देखता ही रह गया। वो बहुत मस्त थी, उस समय उनका फिगर 32-28-34 था। चाचा और चाची की जोड़ी बिल्कुल नहीं जम रही थी, जैसे लंगूर के हाथ में अंगूर या हूर!

मन तो कर रहा था कि ये अंगूर मुझे खाने को मिल जाये!

घर में शादी के बाद एक रिवाज़ की वजह से पहली रात चाची को अलग सोना था। घर पर मेहमान काफी थे इसलिए मैं पहले से जा कर चाची के कमरे में सो गया। चाचा को बाहर ही सोना था।

रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि चाची मेरे बगल में सोयी हैं, शायद शादी की वजह से उन्हें थकान बहुत थी इसलिए वो बेधड़क सो रही थी। उनका पल्लू सीने से हट गया था। उनकी काले रंग की ब्रा देख कर मेरा 7 इंच का लंड बेकाबू हो गया।

मैंने धीरे -2 उनके ब्लोउज के बटन खोल दिए। उनकी गोरी-2 चूचियाँ देख कर मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था। मैंने हौले से उनकी ब्रा की पट्टी कन्धों से किनारे हटा दी और एक हाथ से चूची को हलके-2 दबाने लगा, दूसरी चूची को अपने मुँह में भर के चूसने लगा।

मुझे लगा चाची जाग गयी हैं पर सोने का बहाना कर रही हैं तो मैं धीरे से उनकी साड़ी को उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। थोड़ी देर में मुझे पैंटी में गीलापन महसूस हुआ। मुझे लगा चाची को मजा आ रहा है तो मैंने धीरे से उन्हें आवाज दी- चाची…!

उन्होंने कहा- कुछ मत बोलो बस करते रहो…!

यह सुनते ही मैं उनके उपर आ गया और उनके रसीले होटों को चूमने लगा..

अब चाची मेरा पूरा साथ दे रही थी…

उन्होंने मेरे पायजामे में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसकी सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथो से उनकी गोल-2 चूचियाँ दबा रहा था। उनके मुँह से सेक्सी आवाजें आ रही थी- चोदो मुझे मेरे राजा… आज मेरी सुहागरात है… 18 साल से ये अनचुदी है आज इसकी प्यास बुझा दो मेरे राजा…

मैं भी गरम हो रहा था, मैंने उनकी पैंटी को उतार फेंका…और उनकी चूत में मुह लगा दिया। वो शायद एक बार झड़ चुकी थी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैं सब पी गया। मैंने दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।

उन्हें मजा आने लगा…

उन्होंने भी मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी…

मैं उनके मुँह में ही झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गयीं। उन्होंने चूस-2 कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया…

वो बोली- जान अब और न तड़पाओ! अपनी रानी को चोद दो! मुझे मेरी प्यास बुझा दो…

मैं तो तैयार था, उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो!

मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…

अबकी बार मैंने धीरे-2 धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया…

वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो! बाहर करो! मैं नहीं सह पाऊँगी!

पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसे कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया…

वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो… और जोर से… आह… आह… मेरे राजा… मुझे जन्नत की सैर कराओ… और अंदर डालो… आह… सी…सी…

आह… मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले… पूरा मेरा खा जा… ले… ले… पूरा ले… आह… राजा… मैं गई… सी… थाम लो…मुझे… आह…

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…10-15 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये… मैंने अपनी सारी गर्मी उसकी चूत में भर दी… मैंने उठ कर देखा- खून से उसकी साड़ी लाल हो गई थी… मुझे गम न था आज एक कुंवारी चूत का रसपान जो किया था… उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा… वो शायद सबसे हसीं रात थी…

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

बेटी ने खुद सील तुड़वायी


जब मेरी आँख खुली तो उस वक्त साढ़े दस बज रहे थे। रूपा बिस्तर पर नहीं थी।  मगर रात को मैंने जो उसका ब्रा और पेंटी उतार के फेंकी थी, तो अभी भी फर्श पर पड़े थे। बेशक मैं चादर लेकर लेटा था, मगर चादर के अंदर तो मैं बिल्कुल नंगा था और सुबह सुबह मेरा लंड भी पूरा अकड़ा हुआ था।

बेटी ने खुद सील तुड़वायी

तभी कमरे में दिव्या आई और मुझे गुड मॉर्निंग पापा बोल कर चाय का कप मेरे सिरहाने रखा।

एक बार तो मुझे बड़ी शर्म आई, अरे भाई अपनी बेटी के सामने मैं नंगा था और मेरे तने हुये लंड ने चादर को तम्बू बना रखा था जो दिव्या ने देख भी लिया था।


चाय रख कर दिव्या ने फर्श पर पड़े अपनी मम्मी के ब्रा पेंटी उठाए और चली गई।

मैं चाय पीते सोचने लगा, ये लड़की क्या सोच रही होगी कि इसके माँ को कोई गैर मर्द सारी रात चोदता रहा। रूपा की चीखें, सिसकारियाँ, सब इसने भी तो सुनी होगी। मगर मैंने इस बात को अनदेखा कर दिया।

चाय पीकर मैं उठा और बाथरूम में चला गया। नहा कर तैयार होकर मैं नीचे आया तो रूपा पूरी तरह से नहा धोकर सज संवर कर तैयार खड़ी थी।


मेरे आते ही उसने अपनी बेटियों के सामने मेरे पाँव छूये, उसके बाद उसने नाश्ता लगाया, हम चारों ने नाश्ता किया, मगर मैंने देखा दोनों लड़कियों के चेहरे पर एक शरारती मुस्कान थी।


उस दिन मेरी छुट्टी थी तो उस दिन दोपहर को भी मैंने एक बार रूपा को चोदा, रात को फिर वही सब कुछ हुआ।


अभी रम्या कुछ शांत थी मगर दिव्या इस बात से बहुत खुश थी, वो अपनी खुशी की इज़हार मुझे कई बार चूम कर चुकी थी। हर वक्त पापा पापा करके मेरे आस पास ही रहती थी।


उससे अगले दिन दिव्या मेरे सर में तेल लगा रही थी, मैं अपने मोबाइल पर कुछ देख रहा था। जब वो तेल लगा चुकी, तो मैंने लेटना चाहा, तो दिव्या ने अपनी गोद में ही मेरा सर रख लिया। मुझे इसमें कुछ अजीब नहीं लगा।

मैं बेखयाली में ही अपने मोबाइल में बिज़ी रहा कि अचानक दिव्या ने मेरे होंठ चूम लिए।


मैं एकदम से चौंक कर उठा। मैं बहुत हैरान था- दिव्या, ये क्या किया तुमने?

मैंने उससे पूछा।

वो बोली- आप मम्मी से इतना प्यार करते हो तो मैंने सोचा मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूँ!

वो थोड़ा डरी हुई सी लगी।


मैंने कहा- पर बेटा, ये सब तो तुम्हारी मम्मी मुझे दे ही रही है, तुम्हें अलग से कुछ करने या देने की ज़रूरत नहीं है।

वो बोली- क्यों पापा, क्या मैं आपको अपनी तरफ से कुछ नहीं दे सकती?

मैंने कहा- पर बेटा, होंठों का चुम्बन तो उसके लिए होता है, जिसे आप बहुत ज़्यादा प्यार करते हो, वो इंसान आपकी बॉय फ्रेंड या पति हो।


दिव्या पहले तो चुप सी कर गई, फिर थोड़ा भुन्नाती हुई उठ कर जाती हुई बोली- आपकी मर्ज़ी आप जो भी समझो।


मेरे तो गोटे हलक में आ गए कि ‘अरे यार ये क्या हो रहा है, ये कल की लड़की भी देने को तैयार है।’

अब मेरे सामने दिक्कत यह थी कि शुरू से ही मैं दिव्या को अपनी बेटी कहता और समझता आया हूँ, तो उसके साथ ये सब? नहीं नहीं … ऐसे कैसे हो सकता है? उसे मैं समझाऊँगा।


उसके बाद मैंने 2-3 बार दिव्या को समझाने की कोशिश करी मगर इसका उल्टा ही असर हुआ और दिव्या ने ही खुद ही इकरार कर लिया कि वो मुझसे प्यार करती है।

मैंने कहा भी- पर तुम तो मुझे पापा कहती हो?

वो बोली- ओ के, आज बाद नहीं कहूँगी।

मैंने बहुत समझाया मगर वो लड़की ज़िद पर ही अड़ गई।


मैंने उसे ये भी कहा- तुमने तो मुझसे वादा लिया था कि मैं तुम्हारी मम्मी से कभी धोखा नहीं करूंगा और अब तुम ही उस वादे को तोड़ने के लिए मुझे उकसा रही हो?

मगर लड़की नहीं मानी और बोली- भाड़ में जाए मम्मी। आई लव यू तो मतलब आई लव यू!


मेरे लिए बड़ी कश्मकश थी मगर फिर मैंने सोचा ‘यार क्यों किसी का दिल दुखाऊँ? कौन सा मेरी अपनी बेटी है और कौन सा मैं उसका असली बाप हूँ। असली बाप असली होता है और नकली बाप नकली होता है।’

बस ये विचार मन में आए और अगले ही पल मुझे वो 19 साल की अपनी बेटी, सेक्स के लिए पर्फेक्ट लगने लगी। मुझे एक ही पल में रूपा के बदन में बहुत सी कमियाँ, और दिव्या के कच्चे बदन में खूबियाँ ही खूबियाँ दिखने लगी।


उसके बाद जब भी मैं रूपा के घर जाता और दिव्या मुझसे गले मिलती तो मैं जानबूझ कर उसे अपने जिस्म से सटा लेता ताकि उसके नर्म नर्म मम्मे मेरे सीने से लगे और मुझे उसके कोमल कुँवारे जिस्म की गंध सूंघने को मिल सके।

रूपा समझती थी कि ये बाप बेटी का प्यार है मगर अब मेरी निगाह रूपा की बेटी के लिए बदल चुकी थी।


इस बीच एक दो बार मौका मिला जब मैं रूपा, दिव्या और रम्या को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया। बेशक रूपा और लड़कियों ने जीन्स पहनी थी मगर फिर भी मैंने बाज़ार में घूमते हुये, दिव्या से कहा- जीन्स तो सब लड़कियां पहनती थीं, मगर आजकल तो निकर का फैशन है।

वो चहक कर बोली- तो पापा ले दो मुझे भी एक निकर।


मैं उन्हें एक दुकान में ले गया, वहाँ मैंने सबको जीन्स ले कर दी, मगर दिव्या के लिए खुद एक निकर पसंद की।

जब वो ट्राई रूम से निकर पहन कर बाहर निकली, तो मैंने उसकी गोरी गोरी खूबसूरत जांघों को घूरते हुये कहा- बेटा निकर तो ठीक है, मगर इसे पहनने के लिए तुम्हें अपनी वेक्सिंग भी करवानी होगी।

वो बोली- ये कौन सी बड़ी बात है, वो तो मम्मी भी कर देंगी।


हालांकि दिव्या की टाँगों पर कोई ज़्यादा बाल नहीं थे। मैंने उसे निकर पहन कर ही चलने को कहा। बाज़ार में बहुत से लोग उसे निकर में देख कर घूरते हुये जा रहे थे.

वो मुझसे बोली भी- पापा, सब मेरी टाँगें ही घूर रहे हैं।

मैंने कहा- तू परवाह मत कर, ये सब बस यही कर सकते हैं घूरते हैं तो घूरने दे। बल्कि तू यह सोच कि अगर तुम में कुछ खास बात है, तभी तो ये सब तुम्हें इतने ध्यान से देख रहे हैं।


मेरी बात का दिव्या पर असर हुआ, और काफी उन्मुक्त हो कर बाज़ार में घूमी और घर आ कर मुझे लिपट कर मेरे गाल पर चूम कर बोली- सच में पापा, आज जितना मज़ा बाज़ार में घूम कर आया, पहले कभी नहीं आया।

मैंने मन में सोचा ‘अरे पगली, मैं तो तुझे दाना डाल रहा हूँ, तुझे इतना बिंदास बना रहा हूँ कि एक दिन या तो तो तू मुझसे चुदेगी, या फिर अपना कोई न कोई यार पटा लेगी और उससे अपनी फुद्दी मरवा कर आएगी। मैं तो तुझे एक तरह से बिगाड़ रहा हूँ।


मगर वो नादान कहाँ मेरी कुटिल चालों को समझ रही थी.

और रहा सवाल उसकी माँ का … उसकी फुद्दी में तो हर हफ्ते मैं अपना लंड फेरता था तो वो उस बुनतारे में उलझी थी। उसे भी नहीं पता था कि मैं न सिर्फ उसे बल्कि उसकी जवान हो रही बेटी पर निगाह रखे हूँ कि कब वो मेरे से चुदवाए।


मेरी कोशिशें रंग ला रही थी, दिव्या मेरे और करीब, और करीब आती जा रही थी। बढ़ते बढ़ते बात यहाँ तक बढ़ गई कि बातों बातों में मैंने उसे यह बात बता दी थी कि मुझे उसका प्यार मंजूर है।


एक दिन मौका मिला, जब मैं और दिव्या अकेले बैठे थे तो मैंने दिव्या से कहा- दिव्या एक बार कहूँ?

वो बोली- हाँ पापा?

मैंने कहा- यार उस दिन जो तुमने किस किया था, बहुत छोटा सा था, मज़ा नहीं आया, एक और मिलेगा?

दिव्या ने शर्मा कर मेरी और देखा और बोली- फ्री में ही?

मैंने कहा- तो बोल मेरी जान क्या चाहिए?


वो बोली तो कुछ नहीं पर थोड़ा दूर जा कर दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी हो गई। मैं भी उठ कर उसके पीछे गया, और उसे पीछे से ही अपनी बांहों में भर लिया, उसे अपनी ओर घुमाया और उसका चेहरा ऊपर को उठा कर अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिये।


उस लड़की ने कोई विरोध नहीं किया और मैंने बड़े अच्छे से उसके दोनों होंठ चूसे, न सिर्फ होंठ चूसे बल्कि उसके छोटे छोटे मम्मे भी दबा दिये। उसके बाद वो जब मेरी गिरफ्त से छूट कर भागी तो एक बार दरवाजे के पास जा कर रुकी, मुड़ के पीछे देखा, एक बड़ी सारी स्माइल दी और फिर भाग गई।


मैं तो खुशी के मारे बिस्तर पर ही गिर गया, माँ भी सेट, बेटी भी सेट। अब मैं अपने मन में दिव्या को चोदने के सपने बुनने लगा।


मगर एक बात मुझे अभी तक समझ नहीं आई थी कि दिव्या तो कॉलेज में पढ़ती है, उसके साथ बहुत से लड़के भी पढ़ते होंगे, तो वो अपने हमउम्र किसी लड़के से क्यों नहीं पटी?

मैं तो उम्र में उसके बाप से भी बड़ा था, फिर मुझमे उसे क्या दिखा?


मगर ये बात ज़रूर थी कि अब मेरे दोनों हाथों में लड्डू थे, जब जिसको भी मौका मिलता उसी को मैं पकड़ लेता। दो चार दिन में ही मैंने दिव्या के जिस्म के हर अंग को छू कर देख लिया। बल्कि एक उसे कहा- दिव्या, मैं तुम्हें बिल्कुल नंगी देखना चाहता हूँ।

तो वो बाथरूम में गई और अंदर उसने अपने सारे कपड़े उतारे और फिर थोड़ा सा दरवाजा खोल कर बाहर देखा.


बाहर कमरे में मैं अकेला था, रूपा और रम्या नीचे रसोई में थी। मैंने उसे इशारा किया तो दिव्या बाथरूम से निकल कर बिल्कुल मेरे सामने आ गई।

19 साल की दिव्या काया वाली खूबसूरत पतली दुबली लड़की। मगर उसके खड़े मम्मे, और कसे हुये चूतड़ मुझे दीवाना बना गए, मैंने उसके दोनों मम्मों को और बाकी जिस्म को भी छूकर देखा।

मेरा तो लंड तन गया मैंने उसे कहा- दिव्या, अब तुम्हें चोदना ही पड़ेगा।

वो बोली- पापा, आपकी बेटी हूँ, जब आपका दिल करे!

वो अपने छोटे छोटे चूतड़ मटकाती वापिस बाथरूम में चली गई।


उसके बाद वो फिर से कपड़े पहन कर आ गई।


मैंने उससे पूछा- दिव्या एक बात बता, तू सुंदर हैं, तेरी क्लास में भी बहुत से लड़के तुम पर लाइन मारते होंगे, फिर तुझे मुझमें क्या दिखा और वैसे भी मेरा तो तेरी मम्मी के साथ चक्कर चल ही रहा है।


वो बोली- पापा, आप मुझे शुरू से ही अच्छे लगते थे, मगर हमारे बीच कुछ कुछ रिश्ता ही अलग बन गया, आप मेरे पापा बन गए और मैं आपकी बेटी बन गई। और उस रात जब आप हमारे घर रुके तो आप और मम्मी के बीच जो कुछ हुआ, वो हम दोनों बहनों ने सब सुना. सच कहती हूँ, मम्मी की सिसकारियाँ और चीखें सुन कर मैं इतनी उत्तेजित हो गई कि मैंने अपने हाथ से खुद को शांत किया।

मेरा भी अक्सर दिल करता है कि जैसे आप मम्मी के साथ करते हो अगर मेरे साथ करते तो कैसा लगता, और ये सोचते सोचते मैं आप पर ही मर मिटी। मैं खुद ये सोच रही थी के आपसे मैं ये बात कैसे कहूँ, मगर आप ने कह तो ठीक ठीक है, मुझे कहने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी, और आप मेरे बहुत प्यारे वाले पापा हो इस लिए मैं आपसे कुछ नहीं छुपआऊँगी। आप मुझसे कुछ भी पूछ सकते हो, कह सकते हो। अब जब बेटी ही नंगी हो गई हो, नकली बाप को क्या ज़रूरत पड़ी है, शराफत का ढोंग करने की।


मैंने कहा- मुझसे सेक्स करोगी दिव्या?

वो बोली- आप कुछ भी कर लो, मैं आपको मना नहीं करूंगी।


मैंने उसको चेक करने के लिए अपनी जीभ निकाली और सीधी दिव्या में मुंह में डाल दी और मेरी बेटी मेरी जीभ को चूस गई. उसके दोनों मम्मों को मैंने कस कस कर दबाया। मगर इससे ज़्यादा मैं उसके साथ और कुछ नहीं कर पा रहा था क्योंकि रूपा तो हमेशा ही घर में होती थी. और उसके होते मैं उसकी बेटी को कैसे चोद सकता था।


तड़प मैं पूरा रहा था कि कब मौका मिले और कब मैं इस कुँवारी कन्या के कोमल तन का भोग लगाऊँ। मगर अब रूपा को गले लगाना और चूमना तो मैं दिव्या के सामने भी कर लेता.

और वो भी देख देख कर मुसकुराती कि कैसे मैं उसकी माँ की जवानी को भोग रहा हूँ।

पता तो उसे भी था कि जब भी मौका मिलता है, मैं भी जम कर उसकी माँ को चोदता हूँ, अपनी माँ की चीखें सुन कर वो और भी उत्तेजित होती।


फिर फिर एक दिन दिव्या का फोन आया- पापा, मम्मी और रम्या बाबाजी के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं, मैंने अपने पेपर का झूठा बहाना लगा दिया और मैं नहीं जा रही।

मतलब वो घर में अकेली रहेगी, घर में।

मैं तो खुशी से उछल पड़ा।


जिस दिन रूपा और रम्या गई, मैं खुद उन दोनों को बस चढ़ा कर आया और कह कर आया- तुम चिंता मत करो, मैं दिव्या को अपने घर ले जाऊंगा।


मगर मैं उन्हें बस चढ़ा कर सबसे पहले रूपा के ही घर गया। वहाँ दिव्या बैठी थी, मैंने जाते ही उसे अपनी बांहों में भर लिया- ओह मेरी प्यारी बेटी!

कह कर मैंने उसके कई सारे चुम्बन ले लिए।

वो भी बड़ी खुश हुई- अरे पापा, ये क्या, आप को अधीर हो गए।

मैंने कहा- अरे मेरी जान, तेरे इस कच्चे कुँवारे जिस्म को देख कर कौन अधीर नहीं होगा।


मैंने उसे बहुत चूमा, उसके गाल चूस गया, उसके होंठ चूस गया।

फिर मैंने खुद को संभाला कि अरे यार ये कहाँ भाग चली है, शाम तक मेरे पास है, आराम से करते हैं।


मैंने दिव्या से कहा- बेटा एक काम करो।

वो बोली- जी पापा?

मैंने कहा- आज शाम को हम दोनों मेरे घर चलेंगे, मगर उससे पहले यहाँ हम वो सब कर लेंगे, जो हम इतने दिनों से अपने मन में सोच रहे थे. इसलिए मेरी इच्छा है कि अगर शाम तक हम दोनों इस घर में पूरी तरह से नंगे रह कर अपना समय गुजारें, ताकि मैं जी भर के तुम्हें अपनी आँखों से नंगी देख सकूँ।

वो बोली- आप तो मेरे पापा हो, आपकी बात मैं कैसे मना कर सकती हूँ।


जब वो अपने कपड़े खोलने के लिए उठी, तो मैंने उसे रोका और खुद उसी टी शर्ट, उसका लोअर, अंडर शर्ट और चड्डी उतार कर उसको नंगी किया और फिर खुद भी बिल्कुल नंगा हो गया।

बाप बेटी आज दोनों एक दूसरे के सामने नंगे खड़े थे।


मैंने दिव्या को अपने कलेजे से लगा लिया। वो भी मुझसे चिपक गई और मेरा लंड हम दोनों के पेट के बीच में अपनी जगह बना कर ऊपर को उठ रहा था।


तब मैंने दिव्या के सारे जिस्म को चूमा, उसके मम्मे चूसे, उसके पेट, पीठ, जाघें सब जगह चूमा। उसकी फुद्दी भी चाटी, उसकी गांड भी चाट गया।


बेशक मैं सब कुछ आराम से करना चाहता था, मगर लालची इंसान को सब्र कहाँ … मैंने उसकी फुद्दी को अपनी अपनी जीभ से खूब चाटा, इतना चाटा कि वो पानी छोड़ने लगी और उसकी फुद्दी का नमकीन पानी मैं खूब मज़े ले लेकर चाट लिया।


फिर मैंने उससे कहा- बेटा, पापा का लंड चूसोगी?

वो बोली- मैंने ये काम कभी नहीं किया, और सच पूछो तो मुझे ये सब गंदा लगता है।

मैंने कहा- ठीक है, मत चूसो, पर अगर दिल किया तो चूस लोगी?

वो बोली- पता नहीं पापा।


मैं जाकर दीवान पर सीधा लेट गया और उसे अपने ऊपर उल्टा लेटा लिया। अब मैंने उसकी दोनों टाँगें खोली, उसकी फुद्दी को अपने मुंह पर सेट किया और उसकी फुद्दी में जीभ लगाने से पहले मैंने उसे कहा- दिव्या बेटा, पापा का लंड अपने हाथ में पकड़ो और अपने मुंह के पास रखो, अगर दिल किया तो चूस लेना।


मुझे पता था कि जब मैं इसकी फुद्दी इतनी चाटूंगा कि ये बहुत सारा पानी छोड़ने लगे, तो काम के आवेश में आकर ये लड़की खुद ही मेरा लंड चूस लेगी।


और हुआ भी यही … मुश्किल से मैंने दो तीन मिनट ही उसकी फुद्दी चाटी होगी, उसकी जांघों की जकड़ मेरे चेहरे पर और उसके हाथ की पकड़ मेरे लंड पर कस गई। और फिर मुझे हुआ एक कोमल अहसास!

उसके कोमल, गुलाबी होंठों का स्पर्श जब मेरे लंड के टोपे के इर्द गिर्द हुआ तो मेरा मन तो झूम उठा, मेरी बेटी मेरे लंड को अपने मुंह में ले चुकी थी। मुझे उसे कुछ कहने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद ही अपने अंदाज़ से मेरे लंड को चूसती चाटती रही।


वो भी पूरी गर्म थी और मैं भी … फिर देर किस बात की!

मैंने उसे रोका, उसे दीवान पर सीधा लेटाया और बोला- देखो बेटा, अब मैं अपना लौड़ा तुम्हारी कुँवारी फुद्दी में डालूँगा। तुम्हारा पहली बार है, शायद थोड़ा दर्द हो, इसलिए, मेरी बेटी, अगर दर्द हुआ तो बता देना, हम रुक रुक कर लेंगे। पर इतना ज़रूर है कि आज मैं अपना पूरा लंड तुम्हारी फुद्दी में उतार देना चाहता हूँ, तुमने साथ दिया तो ठीक, नहीं तो ज़बरदस्ती ही सही।

वो बोली- पापा बस आराम से करना, ये तो मेरे मुंह में भी बड़ी मुश्किल से घुसा था। दर्द तो होगा ही, पर मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूंगी।


मैंने अपने लंड पर बहुत सारा थूक लगाया, उसे अच्छी तरह से गीला किया और फिर दिव्या की कुँवारी गुलाबी फुद्दी पर रखा।

एक बार तो दिल आया ‘अरे यार क्या बेटी जैसी लड़की की फाड़ रहा है, मगर फिर मैंने एक बार ऊपर को देखा और भगवान से कहा ‘बेशक मैं दुनिया की नज़र में गलत काम कर रहा हूँ, पर मेरी नज़र में ये ठीक है, इस लिए अपनी कृपा बनाए रखना और इस लड़की को सब सहने की शक्ति देना।


और फिर मैंने अपनी कमर का ज़ोर लगाया, मेरा लौड़ा दिव्या की कुँवारी फुद्दी फाड़ कर अंदर घुस गया।

उसकी तो जैसे आँखें बाहर आ गई हों।

मेरे कंधों को पकड़ कर वो सिर्फ एक बार यही बोली- उम्म्ह … अहह … हय … ओह … पापा… नहही!


मगर तब तक पापा के लंड का टोपा बेटी की फुद्दी में घुस चुका था। वो एकदम से जैसे सदमे में थी, मगर मैं पूरी तरह से काम से ग्रसित था. उसके दर्द की परवाह किए बिना मैंने और ज़ोर लगाया और अपने लंड को और उसकी फुद्दी में घुसेड़ा.


मगर अब दिव्या के मुंह से कोई दर्दभरी चीख नहीं निकली, उसकी आँखें फटी हुई, और चेहरा फक्क पड़ा था और मैं ज़ोर लगा लगा कर अपने लंड को उसके जिस्म में पिरोने में लगा था।

जब तक दिव्या अपने होशो हवस में वापिस आई, तब तक मैंने अपना पूरा लंड उसकी फुद्दी में घुसेड़ दिया था.


मेरे मन में एक अजब सी खुशी थी, शायद 50 साल की उम्र में एक 19 साल की लड़की की सील तोड़ने की, या अपनी ही बेटी के साथ सेक्स करके मेरी इनसेस्ट सेक्स की इच्छा पूरी होने की, या अपनी ही माशूक की बेटी चोदने की, पता नहीं क्या था, मगर मैं बहुत खुश था।


उस लड़की के दर्द की परवाह नहीं थी, मुझे तो सिर्फ अपने ही दिल की ख़ुशी नज़र आ रही थी।


थोड़ा संभालने के बाद दिव्या बोली- पापा ये क्या कर दिया आपने?

मैंने पूछा- क्या हुआ बेटा?

वो बोली- पापा ऐसा लग रहा है, जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो, तलवार से काट दिया हो। ऐसा लग रहा है, जैसे मैं मर जाऊँगी।

मैंने कहा- कुछ नहीं होगा बेटा, हर लड़की के साथ पहली बार ऐसा ही होता है। मगर अगली बार जब तुम सेक्स करोगी, तो तुम बहुत एंजॉय करोगी। बस ये पहली बार ही है, फिर नहीं होगा।


वो लड़की बेसुध से मेरे नीचे लेटी रही। उसके चेहरे को देख कर लग रहा था कि उसे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है, सिवाय दर्द के! और मैं एक कामुक लंपट रंडीबाज़ मर्द, उस लड़की को किसी वेश्या की तरह भोगने में लगा था।


मैं नहीं रुका और उसे चोदता रहा तब तक जब तक मेरा माल नहीं झड़ गया। अपना गाढ़ा वीर्य उसके पेट पर गिरा कर मुझे बहुत सुकून मिला, बहुत मर्दानगी की फीलिंग आई।

उसको उसी हाल में छोड़ कर मैं बाथरूम में गया. पहले तो मैंने मूता, फिर शीशे के सामने खड़े हो कर खुद को देखा।


मन में एक विकार आया- अरे वाह रे तूने तो साले कच्ची कली फाड़ दी, क्या बात है साले, तू तो बहुत बड़ा मर्द है रे, वो भी 50 की उम्र में!


मैं मन ही मन खुश होता वापिस कमरे में आया तो दिव्या उठ कर बाथरूम में गई और काफी देर तक अंदर रही।

फिर बाहर आई।

मैंने उसे एक गिलास बोर्नविटा वाला दूध गर्म करके पिलाया और तेल से हल्के हाथों से उसके सारे बदन की मालिश की।

तब कहीं वो सहज हुई।

शाम को करीब 5 बजे मैं उसको लेकर अपने घर गया और बीवी से कह दिया- इसकी तबीयत खराब है, थोड़ा खयाल रखना।

मुझे एक बार लगा कि मेरी बीवी उसकी हालात देख कर सब समझ गई.

Fauji Baap Ne beti ko Nanga Karke Choda

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फौजियों का लंड तगड़ा होता है पर उन्हें चूत कम ही नसीब होती है। आईये पढते हैं एक कहानी एक पुलिस जवान और उसकी बीबी और जवान बेटी सीमा की। सीमा, उमर अठारह साल पर यार अठारह से ज्यादा, चूंचियां छत्तीस की और गांड भी इतनी ही। कमर है बस अठाइस की और अचरज होता है कि कैसे ये पतली कमर इस भारी भरकम चूंचे का बोझ संभालती होगी।


फौजी बाप ने बेटी को नंगा करके चोदा


तो आईये सुनाते हैं कहानी आपको एक लड़की की जो हमारे छोटे शहर सीतापुर के एक मुहल्ले की रहने वाली है। पूरवैया कल्चर वैसे तो है बहुत मधुर पर जब इसमें वासना घुलती है तो और मीठे जहर के तरह से रंगीन और रसदार हो जाती है, पता ही नहीं चलता आदमी इस दलदल में कैसे और कब फंस गया। सीमा के पिताजी पुलिस में हैं, और माताजी अकेले सीमा के साथ रहती हैं।एक बात तो जान लीजिए, पुलिस वालों की बीबियां मनमानी होती हैं और उनको लंड का अकाल हमेशा रहता है, अक्सर उनकी ड्यूटी आउट आफ सिटी होती है और चौबीस घंटों की भी होती है। इसलिए वह अक्सर बेवफा और तानाशाही रवैये की होती हैं।

सीमा की मां भी चालीस साल की उमर में भी एक दम से जवान दिखती हैं और उसकी शारीरिक संबंध मुहल्ले के पनवारी, सब्जी वाले दूध वाले, वो सब जिनका कि रोजमर्रा कि जिंदगी में काम है, उन सब वर्ग के दुकानदारों से है। सच तो ये है, सीमा के पापा अक्सर बाहर रहते हैं और घर पर पैसे भी कम देते हैं। कंजूसी में घर कहां चलता है, इसलिए सीमा की मां ने भी अक्सर समझौते कर लिये हैं। सबका मामला सेट है, बड़े चतुराई से मैनेज करती हैं, अपने अपने रिश्ते को। वैसे आईये उसकी फिगर भी बता ही दें। चालीस की उम्र की गदराई हुई आंटी, मस्त चूंचे, पतली कमर फैली प्लेटफार्म जैसी गांड और रसीले होठ। कुल मिला के मलैका जैसी दिखती है और अपनी बेटी से बस जरा सा ही उन्नीस दिखती है। इस वजह से वो भी अपने ब्वायफ्रेंड्स मैनेज करती है।अपने लंड लेगी और बेटी सीमा पर कड़ी निगरानी अच्छी बात है कि वो सीमा पर बड़ा नियंत्रण रखती है, पर सीमा जो कि अक्सर अपनी मां की काली करतूत देख रही होती है, उसे अपनी जवानी संभाले नहीं संभल रही। कालेज गर्ल्स का है और बगल में है, इसलिए बाइक पर घूमने जाने और ब्वायफ्रेंड बनाने का सपना उसका पूरा न हो सका, पर सच ये है कि अक्सर सीमा को अपने पापा को देख कर एक उम्मीद बंधती है। वो जानती है उसके पिताजी कितने वफादार, और मेहनती हैं और मां कितना चीट करती है उनको। इसलिए इस बार पापा आएंगे तो उनको भरपूर प्यार देगी और हो सके तो इस बार मम्मी को नीचा दिखा के मानेगी।

तो गर्मी की छुट्टियों में पापा आ गये। मां को मायके जाना पड़ा और इस बार घर में सीमा और पापा रह गये। सीमा ने देखा, इस बार उसका रवैया बदला हुआ था, उसने देखा कि पापा के बदन में चालीस पार होने के बाद भी गजब की मांसल मांसपेशियां हैं और मजबूत बदन, वाले उसके पापा एक दम से जबरदस्त दिख रहे हैं। उसने देखा, पापा का बदन एक दम से एथलिट जैसा है, चौड़ी छाती, सटी गांड और लंबे हाथ, लंबाई तो उनकी वैसे भी अच्छी है। फिर उसका ध्यान गया पापा के लंड के उपर क्या, वो भी उतना ही बड़ा होगा, जितना कि पापा के अन्य अंग हैं। ये तो कमाल की बात होगी, उसने आज पापा को बाथरुम में नहाते हुए देखने के बारे में सोचा। अक्सर पापा बाथरुम का दरवाजा खोलके ही नहाते हैं। आज उन्होंने लंगोट कसी हुई थी।

बाथरुम में घुस कर के उन्होने अपने बदन पर पानी डाला और रगड़ रगड़ कर नहाने लगे, इसी बीच सीमा धीरे से पीछे से आकर खुले दरवाजे से उनको देखने लगी। उसे लगा कि आज पापा का लंड देख ही लेना है। पीछे से उसने देखा कि पापा की गांड में लंगोट की रस्सी ऐसे घुसी हुई है कि पिछवाड़ा पूरा नंगा है। उसे बहुत सनसनी हो रही थी। अकेले मर्द और वो, आज उसे अपने बाप में अकेला मर्द दिख रहा था जो कि मौके का फायदा उठाने में कत ई नहीं चूकता। तो सीमा ने अपनी बुर को सलवार के उपर से ही मसलना शुरु कर दिया और सोचने लगी कि कैसे देखूंगी पापा का लंड। अचानक से उसे एक शरारत सूझी।

उसने अपने कपड़े उतारकर के सिर्फ ब्रा और पैंटी पहनी और बाथरुम में घुस कर बोली हेलो पापा, मुझे भी नहाना है। उसके पापा ने जब उसे इस रुप में देखा तो अवाक रह गये और उनका लंड एक दम से तन गया। सच तो ये है कि लंड को दिमाग नहीं होता, वह रिश्ते नहीं पहचानता और इसी वजह से अपनी बेटी को अचानक अधनंगी देखते ही सीमा के पापा का लंड तन गया, ढीली और भीग चुकी लंगोट अचानक से खुल कर नीचे गिर गयी।

Baap beti ki chudai desi kahani



बड़ा लंड फुफकारने लगा और सीमा जोर जोर से हंसने लगी, बोली पापा ये क्या है ये तो अच्छा खिलौना है, मुझे कभी खेलने को नहीं दिया, ही ही, जरा दो ना और वहीं उसने तपाक से लंड को पकड़ लिया। उसका प्लान सफल रहा। उसने अपने बाप का लंड पकड़ कर मसलना शुरु कर दिया। भीगा लंड तन कर गर्म हो गया था और नर्म नर्म हथेलियों से उसका लन्ड को मसलना और कयामत ढा रहा था।उसने अपनी बेटी सीमा को दूर करने की कोशिश की लेकिन वो लंड को छोड़ नहीं रही थी और खुद सिपाही का मन भी आज चूत चोदने का कर रहा था। उसकी छिनाल बीबी मायके में थी और बिचारे क ई महीने से चूत से दूर रहने वाले सिपाही को चूत की जोरदार दरकार थी।उसने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और हुक खोल दिया। मारे उत्तेजना के सीमा के स्तन खड़े हो चले थे। जब सिपाही ने अपनी बेटी के चूंचे को पकड़ कर दबाना शुरु किया तो सीमा सिस्कारियां मारते हुए बोली स्स्स, आह्ह, पापा, प्लीज करो ना अच्छा लग रहा है।

फिर क्या था। अपनी ही बेटी को चोदने के लिए सिपाही का लंड तो पहले ही तन चुका था, अब वो उसको चोदने के लिए एकदम से बेकरार हो उठा। उसने उसके बदन पर दो लोटे पानी डाल कर भिगा दिया। उसके चूंचों से सरक सरक कर छन के आता हुआ पानी उसके नाभि पर ज्यों ही पहुंचा सिपाही ने उसको अपनी जीभ लगा के लपक लिया।इस प्रकार से जैसे उसने अपनी बेटी सीमा के नाभि पर जीभ लगाई, और उपर चूंचों से छन के आते हुए पानी को पीने लगा, सीमा को ऐसा लगा जैसे कि उसकी नाभि एक दम सुर सुराहट से भर गयी हो। कसम से इस एहसास को पाने के लिए वो सालों से तड़प रही थी और आज उसका सपना सच हो रहा था। इधर सिपाही का लंड भी एक दम दन्नाया हुआ था।

उसको हमेशा यह लगता था कि उसकी मां उसके साथ ना इंसाफी करती है और आज उसको पता चल गया था कि इस खेल में कितना मजा आता है। उसने सिपाही के बाल पकड़ कर के अपने नाभि की तरफ उसका सिर और जोर से दबा दिया। उसके बाप की नाक और होठ सब उसके सेक्सी बद्न को टच कर रहे थे। इस बात पर उसके पापा ने उसकी नाभि में अपनी जीभ घुसाकर फिरानी शुरु कर दी। सीमा ने उत्तेजित होकर आंखें बंद कर लीं और कहने लगी, आह्ह पापा बहुत अच्छा लग रहा है। वो बोल रही थी और उसके बाप का जोश बढता जा रहा था। सच में आज सिपाही ने देखा कि वो उसकी बीबी जैसी ही दिखती है, जवानी में सीमा की मां भी तो ऐसा ही दिखती थी। फिर क्या था, उसने अपनी बेटी को चोदने के बारे में अपना निश्चय दृढ कर लिया। वैसे भी, उसकी जवानी और मस्त चूंचे के आगे अब उसकी मां फीकी पड़ चु्की थी।

मस्त चूंचे देख कर रिश्ता भूला।उसने उसकी कोमल त्वचा का रस लेने के लिए जीभ उसके नाभि से उपर बढाई। एक एक इंच सरकते हुए उपर की तरफ, उसने हर इंच को अच्छे से चूमा। पूरी जीभ उसके बदन के हर अक्षांश और देशांतर रे्खा पर फिराने के साथ ही साथ आज उसका इरादा अपनी कुंवारी बेटी के कुंवारे बदन को वो मजा देना था कि बस वो अपने बाप की बन के रह जाए। हालांकि वह जानता था कि यह थाना उसका नहीं है पर उसको तो दूसरे के थाने में ड्यूटी देने की इच्छा थी। अप्ने दामाद के लिए वह काम सुगम बनाने जा रहा था। उसने नाभि से उपर सारा पेट चूम लिया। और फिर पीछे घूम गया। जींस बांधने की जगह से उपर की पीठ पर जीभ की नोक से स्पर्श करते हुए उसने हल्की लार टपकानी भी जारी रखी। भीगा बदन, गर्म जीभ और गर्म बदन के साथ ही उसने सीमा के बदन की गरमी और भी बढानी जारी रखी।

चूसते हुए सीमा के बदन को उसने पूरी नंगी पीठ चूस डाली। अब सीमा अपनी पीठ सिकोड कर यह बता रही थी कि उसको और मजा चाहिए। उसने ब्रा का एक हुक खोल दिया। एक चूंची आगे की तरफ लटक गयी।

अब सिपाही सामने आकर अपनी सीमा बेटी के उस नंगे चूंचे को पकड़ कर के दबाने लगा। ऐसे जैसे कि दूहने की कोशिश कर रहा हो। इस अदा पर सीमा को बहुत आनंद मिल रहा था क्योंकि उसने सर उपर करके आंखें मूंद ली थी और पूरी उत्तेजना को पीने की कोशिश कर रही थी। सिपाही ने उसके चूंचे को मसल के रख दिया और जब वह एक दम लाल और कड़ा हो गया, अपने मुह से लगाकर स्तन पान करने लगा। आह्ह्, आह्ह करती सीमा ने खुद ही दूसरा चूंचा खोल कर अपने बाप के हाथों में थमा दिया।बारी बारी से चूसे चूंचे।

सिपाही अपनी जीत पर मुस्कराया और उसके दूसरे चूंचे को दूहते हुए पहले वाले को चूसता रहा। वो एकदम मस्ती में डोलती रही और खड़े खड़े बाथरुम में ही चुसवाती रही। खैर अब सिपाही ने दूसरे चूंचे का भी वही हश्र किया और आखिर में उसको भी अच्छे से चूसा। चूंचे अब देखने में साढे छत्तीस लग रहे थे। अब बारी थी नीचे कुछ करने की, सीमा ने अपनी पैंटी सरका दी और फिर अपने हाथों से अपनी नंगी चूत ढंक ली।

उसको ऐसा करते देख सिपाही ने सोचा साली गयी है एक दम अपनी रंडी मां पर पर क्या करें चोदने में इसे बहुत मजा आने वाला है। और उसने उसके गांड की तरफ मुह करके उसके दोनों गांड की गोलाईयों को दबोच लिया अपने हाथों से। दबोचने के बाद उसने जोर से उनको दबाया। और हल्के हल्के चपत तेजी से लगाने शुरु कर दिये। गांड हर थपकी के बाद हिल हिल कर अपनी पोजिशन पर आजाती और फिर उस्का बाप उसी तरह से उसको थपथपाता। उसकी गोरी नाजुक चमड़ी एक दम से लाल हो गयी अपने बाप के थपेड़ों से तो उसके बाप ने अपने मुह से एक बड़ा बाईट उसकी गांड पर लिया, ऐसे जैसे कि तरबूज खा रहा हो।

सीमा चिल्लाई, पर उसने हल्के दांतों का अहसास कराया था, जो कि उसको अच्छा लगा। वो उत्तेजना में फुसफुसाई, काट लो मेरी गांड को।और सिपाही ने दूसरे नितंब को भी ऐसे ही किया, हल्के दांत गड़ाकर उसकी गांड को चुदवाने के लिए पैंपर कर लिया। सच तो ये है सिपाही भी बड़ा खिलाड़ी था। चुदाई के मामले में वो राउडी था, भले ही उसकी बीबी उसको सीधा समझती हो।दोनों नितम्बों को काटकर के उसने अब दो उंगलियां जोड़ीं, हल्का साबुन अपनी बेटी के गांड पर मला और फिर धीरे धीरे करके, उसमें अपने दो उंगलिओं को ठेलने लगा। सीमा चिल्लाई, उईईई, पर कोई बात नहीं थोड़ी देर में दोनों उंगलियां अंदर थीं। अब सिपाही ने अपनी बेटी की गांड फड़ाई शुरु कर दीथी। एक नया अहसास था यह। पीछे से गांड में उंगली पेलने के बाद सिपाही सामने की तरफ आ गया और उसने सीमा के चूत के फांकों पर अपने दोनों होठ रख दिये। इस तरह से उसने होठ रखे कि दोनों होठ एक दम से उसके चूत के फांकों की लंबाई की दिशा में थे।

अब वो अपनी कुंवारी बेटी की बुर को चाट चाट कर एक दम रसीली बना देने पर तुल गया था। तो सिपाही अब अपनी बिटिया को चोदने से पहले बुरचटाई के रस्म से नवाज रहा था, मजे से चूत चुसवाती हुई सीमा अपने दोनों चूंचे मल रही थी और बार बार अपनी टांगें सटा के अपने पापा के मुह को दोनों टांगों के बीच चांप दे रही थी। यह एक अत्यंत रोमांचकारी अनुभव था उसके लिए। उसके मुह से सिर्फ एक ही शब्द निकल रहा था, आई लव यू पापा, आप कितने अच्छे हो। आह्ह चूस लो, आह्ह्ह ये तो और अच्छा है, प्लीज फिर से करो ना।अपने फौजी बाप को अपनी चूत का दीवाना बना लिया सीमा ने।

बेटी द्वारा इतना उकसाए जाने पर पुलिस के जवान अधेड़ उम्र के बाप की जवानी भी एक दम शोला बन चुकी थी, उसने अपने लंड को भी अब तक छुआ न था पर वो नीचे लटक कर के एक दम से गदहे के लंड जैसे आकार का हो गया था। समझ में नहीं आता है कि इतने बड़े लंड वाले पति के होते हुए उसकी आखिर उसकी बीबी किसी दूसरे के झांसे में पड़ कैसे सकती है। खैर जो भी हो सच तो ये है कि वो छिनाल हो गयी थी और आखिर में उसके संबंध कितने ही गैर मर्दों से थे। इसलिए उसकी अपनी बेटी भी बिगड़ चुकी थी और आज अपने पापा से ही इश्क फरमा रही थी।ऐसा सुनने के बाद और बार बार प्लीज दुबारा करो ना कहने पर उसके सिपाही बाप का लंड एक दम हथोड़ा हो चुका था।

खून का प्रवाह लंड में अतिरेक से था और एक ऐसे रिश्ते जिसके बारे में सोचा न जा सके, उसमें चोदने की कल्पना करना ही अपने आप में अति उत्तेजक होता है, तो खैर अपने लंड को देखते हुए उसके बाप ने अपनी बिटिया के फुद्दी के फांकों को पीना जारी रखा। लंड एक दम कड़ा हो गया तो उसने सीमा को नीचे बिठा दिया।घुटनों के बल सीमा बैठ गयी तो उसने अपने अंडे को उसके मुह में डाल कर हिलाना शुरु कर दिया। सीमा उसे अपने होठों के बीच चूस कर ऐसे कर रही थी जैसे कि उसको आमलेट बना देगी। वह बार बार उसको चूसे जा रही थी और वो अपने लंड को अपने हाथों में पकड़ कर मूठ मार कर और भी धारदार बनाने के कोशिश में था।

इस प्रकार से अपने लँड को सहलाते हुए और उसके मुह में अंडकोष को देते हुए उसने देखा, सीमा के मस्त चूंचे एक दम से उपर नीचे हो रहे थे, यह एक अत्यंत रोमांचक पल था और नजारा भी। काश कि जिंदगी ऐसे ही चोदते हुए बीत जाती पर ऐसा नहीं होता रियल लाईफ में। ऐसे मजेदार लम्हें कभी कभी ही मिलते हैं। उसने सीमा को अंडों को खूब जम के चूसने दिया।अब बारी थी देसी मुखमैथुन की। इसलिए उसने सीमा के मुह में अपना बड़ा सुपाड़ा डाल कर के धकियाया। छोटे से मुह और बड़े से लंड के सुपाड़े को देख कर के ऐसा लग रहा था कि कैसे घुसेगा उसके मुह में पर सीमा ने अपनी औकात से ज्यादा मेहनत करके लंड को मुह में ले लिया। किसी छोटी सी चूत के छेद की तरह उसका मुह और होठ उस मोटे लंड पर पकड़ बनाए हुए थे। उसके पापा ने अंदर की तरफ लंड ठेलते हुए देखा कि कैसे उसके आंखें खुली जा रही थीं लंड को अंदर लेते हुए। फिर भी मुखमैथुन का जोर ऐसा चढता है कि फिर रोके से नहीं रुकता है। ऐसा ही हाल था उस समय उन दोनों का। चूंकि सिपाही अपने बेटी की बुर पहले ही चूस चुका था इसलिए उसको अब लंड चूसवाना ही था किसी तरह से।अब लंड को अंदर ठेल कर हल्के हल्के अंदर बाहर करना शुरु कर दिया।

लंड ने जब गति पकड़ी तो कभी सीमा के हलक में उतरा, कभी उसके गालों पर अंदर से मालिश की और कभी तालू का तबला बजाया। पूरे मुह को अखाड़ा बना के रख दिया था सीमा के पापा ने। खैर बेटी को इतना अच्छा गिफ्ट देते हुए आज वो बहुत खुश था। सीमा भी अपनी मां को चैलेंज दे रही थी।रंडियों सी हालत हो गयी चुदते समय उसकी अपने बाप के सामने।अब जब कि लंड मुह की गर्माहट पाकर और भी तन चुका था, बारी थी सीमा के चूत की गहराई की थाह लेने की। उसके पापा ने उसको कंधे पर उठाया और बाथरुम से उठा कर सीधा बेडरुम मे बेड पर पटक दिया। उसके टांगों को खोल कर बिना बाल वाली कुंवारी चूत को नजदीक से देखा।

एक दम गुलाबी चूत के अंदर छोटा सा छेद और उसमें झलकती हायमन का नजारा। उसको याद आया, इसकी मां तो बिना हायमन मतलब कि फटी हुई चूत लेके आई थी, चलो कमसे कम अब उस कमी को उसकी बेटी पूरा कर रही है।उसने उसके पैरों को कमर तक बेड के बाहर खींच लिया और अपने हथौड़े जैसे मोटे और गदहे जैसे लंबे लंड को उसके चूत के उपर रगड़ना शुरु किया। अब सीमा को डर लग रहा था, उसने कहा – पापा मुझे कुछ होगा तो नहीं न, मुझे डर लग रहा है। इस बात पर सीमा के पापा ने कहा, नहीं बेटा ये सब तो बस खेल जैसा है, थोड़ी देर में सब ठीक हो जाएगा। और सिपाही ने सीमा के चूंचे पकड़ लिये और फिर अपने लंड को उसके छेद के उपर टिका दिया।

अपने हाथों से उसके मुह को बंद करने के बजाय बेडरुम के ड्रावर में रखा चाकलेट निकाला और उसको थमा के बोले, ले इसको एक ही बार में खा जा, इसके बाद जब तक तू इसे निगलेगी। सब कुछ हो जाएगा, डरने की कोई जरुरत नहीं है।सीमा ने एक बड़ी बाईट कैडबरी की ली और उसके पापा ने उसके चूत में अपने लंड का कीला ठोक दिया। दन्न से चूत की झिल्ली की बखिया उधेड़ते हुए लौड़ा उसके बच्चेदानी के दरवाजे पर टकराया, चरम सुख देने वाले जी स्पाट का लंड के सुपाड़े से स्पर्श और कोमल और नाजुक झिल्ली का फटना दोनोंएक साथ हुआ। अब सब कुछ आसान था।

हालांकि सीमा के हाथ से चाकलेट छूट चुकी थी पर फिर भी एक टुकड़ा मुह में था, दर्द के साथ चाकलेट का स्वाद भी कसैला हो चला था पर लंड के अंदर जाने के बाद उसकी मिठास और भी बढ़ गयी। अब सीमा अपने पापा की रखैल बन चुकी थी और वो भी उसे अपनी प्रेमिका की तरह ही ट्रीट कर रहा था। उसके चूंचों को मलते हुए और अंदर की तरफ पुरजोर धक्के लगाते हुए सि्पाही जी ने सीमा को अपने लंड का स्वाद चखाना जारी रखा। आधे घंटे तक इस स्टाइल में चोदने के बाद उसने अपना वीर्य अपनी बेटी को पिला दिया। और फिर यह लड़ाई लंड और चूत की, पहले दिन तो आठ घंटे कामुकता के रसीले और रंगीन खेल में चलती रही।”

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