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जुड़वा बहनों की एक साथ चुदाई किया मेरा भाई

Twins Sex Story, Judwa Bahan ki Chudai, Do Judwa Bahan ko Real Brother Ne Choda



Twins Sex Story, Judwa Bahan ki Chudai, Do Judwa Bahan ko Real Brother Ne Choda : मैं रिंकी की बड़ी बहन हूं मेरा नाम आकांक्षा है, हम दोनों जुड़वा बहन हैं हम दोनों की उम्र अभी 21 साल हुई है। कॉलेज में पढ़ते हैं एक साथ रहते हैं। फरीदाबाद में रहकर पढ़ाई करती हूं। मेरा घर लखनऊ है, मेरे मम्मी पापा दोनों लखनऊ में रहते हैं। हम दोनों फरीदाबाद में एक फ्लैट किराए पर लेकर वही पढ़ाई करते हैं। मेरा एक भाई है जो इंजीनियरिंग कर रहा है पुणे से वह फरीदाबाद आया था नए साल पर। पर हम तीनों के बीच में ऐसे केमिस्ट्री हो गई की बात सेक्स तक पहुंच गई। AdultStories.co.in पर मैं पहली बार यह कहानी लिख रही हूं। रोजाना यहां पर आकर कहानियां पढ़ती हूं पर लिखने का मौका पहली बार मुझे मिला है। अब मैं सीधे कहानी पर आती हूं मुझे पता है आप बेचैन हो रहे हैं।

मेरा भाई 22 साल का है। जिम जाता है बॉडी बनाया हुआ है देखने में हीरो जैसा लगता है। हम दोनों बहनों का वह प्यारा भाई है। हम दोनों बहन बहुत प्यार करते हैं उसको वह भी अपनी बहन को बहुत मानता है। परिवार को ज्यादा हो गया इस वजह से ठंड की रात में हम दोनों बहनों को गर्म कर दिया उसमें। कई बार जिंदगी में ऐसे कुछ बातें हो जाती है जो होना नहीं चाहिए। पर सब कुछ समय के साथ बदल जाता है। कई बार जो आप नहीं चाहते हैं वही हो जाता है वैसा ही हम दोनों बहनों के साथ ही हुआ था। हम दोनों नहीं चाहते थे कि मेरा भाई मुझसे शारीरिक संबंध बनाए। पर जवानी ऐसी दहलीज होती है जहां पर अक्सर लोग फिसल जाते हैं। यहां तक कि रिश्ते भी तार-तार हो जाते हैं। और बात वहां तक पहुंचता है जहां पहुंचना नहीं चाहिए।

जिस दिन मेरा भाई आया था हम तीनों बाहर खाना खाने गए। चिकन बिरयानी हम तीनों का फेवरेट है तो हम तीनों बाहर जाकर चिकन बिरयानी खा कर आए थे। जब हम लोग अपने फ्लैट पर वापस आए भैया बोला कोल्ड ड्रिंक पीने का मन कर रहा है। तो मैं बोली अभी नीचे से लेकर आ रही हूं नीचे जो है वहां से। मैं नीचे गई तो एक सिगरेट भी लेकर पी ली। अक्सर दिन में 2 सिगरेट पी जाती हूं। मुझे सिगरेट पीना था इस वजह से भी मैं नीचे कोल्ड्रिंक्स लेने के लिए आ गई थी।


हम दोनों जुड़वा बहन हैं एक दूसरे से कभी अलग नहीं होते हैं। पर मेरा भाई आया हुआ था इसलिए वह ऊपर रह गई। जब मैं वापस कमरे में पहुंची तो मैं दंग रह गई मेरा भाई रिंकी को किस कर रहा था। उसके चूचियां दबा रहा था। मैं थोड़ी देर के लिए बाहर रुक कर पर्दे के पीछे से देखने लगी कि आखिर यह सब क्या चल रहा है। मैं क्या देखती हूं वह दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे। मेरा भाई रिंकी के ब्रा के अंदर हाथ डाल कर उसके चुचियों को मसल रहा था। मैं हैरान हो गई यह बात कभी रिंकी ने बताया नहीं था। सच बताऊं दोस्तों मुझे गुस्सा नहीं आया। मुझे ऐसा लगा भाई मेरा है बहन भी मिली है वह दोनों जब इस चीज का मजा ले रहे। तो मैं क्यों पीछे रहूं।


और मैं कमरे के अंदर पहुंच गई वह दोनों एकदम से अलग हो गया। मैं उन दोनों से कहा मुझमें क्या कमी है। इतना प्यार कर सकते हो रिंकी को तो मुझे क्यों नहीं। इतना कहते ही मेरा भाई मुझे पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और मेरे होंठ को चूसने। रिंकी मेरा भाई मेरे चूचियों को मसलते हुए मेरे होठ को चूमने लगा था। मैंने रिंकी का हाथ पकड़ कर अपने पास लेकर आए और हम दोनों मिलकर अपने भाई को चूमने लगे। मैंने अपने भाई के पजामे में हाथ देकर उसका लंड पकड़ लिया मेरी बहन उसके गांड को सहलाने लगी।


हम दोनों ने दरवाजे खिड़कियां चारों ओर अच्छी तरक्की बंद किया और कमरे में आकर अपने अपने कपड़े खोल दे। हम दोनों का शरीर की बनावट एक जैसी है। बड़ी-बड़ी चूचियां गोरा बदन लंबे बाल होंठ गुलाबी, कजरारे आंखें, लंबी चौड़ी। हम दोनों बहन एक से बढ़कर एक हैं सुंदरता के मामले में और शरीर के मामले में। मैंने अपने भाई को बेड पर लिटा दिया। मेरी बहन रिंकी भाई का लंड पकड़ कर मुंह में लेकर चूसने लगी। और मैं अपने भाई के मुंह पर अपनी गांड रख दिया। उसने मुझे सेट किया और मेरी चूत को चाटने लगा। मेरे चुचियों को दबाते हुए मेरी चूत को चाट रहा था। और मेरी बहन लंड को चूस रही थी।


फिर मैं लंड चूसने लगी और वह अपनी चूत चटवाने लगी। कमरे में सिसकारियां ही सिसकारियां निकल रही थी। मेरा भाई चुपचाप होकर कभी मेरी चूचियों को पीता कभी मेरी बहन के चुचियों को, कभी मेरी गांड को चाटता कभी मेरी बहन के गांड को चाटता। हम दोनों की चूत पानी पानी हो गया था। हम दोनों के निप्पल टाइट हो गए थे। 10 मिनट में हम दोनों को मेरा भाई ऐसे गर्म कर दिया कि क्या बताऊं। अब बारी आई चुदाई की।


पहले मैं लेट गई नीचे अपनी टांगों को अलग अलग कर दी। मेरा भाई बीच में बैठ कर अपना निकाला और जोर से घुसा दिया। और जोर जोर से चोदने लगा। तब तक मेरी बहन अपना बूब्स भाई को पीला रही थी। वह जोर-जोर से मेरी चूत में लंड पर रहा था। मेरी बहन जब मुझे देखती तो मैं उसके हॉट को चूमने लगते। हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगते थे और एक दूसरे की चुचियों को दबाने लगते थे। ऐसा कभी पहले नहीं किया था। पर उस दिन कर रही थी।

अब रिंकी की बारी आएगी रिंकी नीचे लेट गई मेरा भाई रिंकी के टांगों को खोला और लंड घुसा दिया। मेरी चूत काफी ज्यादा गीली हो चुकी थी जब मेरा भाई रिंकी को चोद रहा था उस समय मैं अपना चूत अपने भाई से चटवा रही थी। मेरी गांड बहुत जरूरी है मेरा भाई मेरे चूतड़ पर थप्पड़ मारता था और मेरी गांड को मेरी चूत को चाटता था। जोर जोर से धक्के देकर वह हम दोनों को बारी-बारी से चोदने लगा। फिर हम दोनों ही एक साथ घोड़ी बन गए वह पीछे से कभी मेरी चूत में लंड डालता कभी रिंकी के चूत में लंड डालता। दोनों के चूतड़ पर थप्पड़ मारता और जोर-जोर से लंड घुसाता।
गरमा गरम है ये  भैया ने चोदा मुझे दिल्ली के होटल में

फिर मेरा भाई नीचे लेट गया हम दोनों बहन ऊपर से एक-एक करके अपनी चूत में उसका लंड लेकर धक्के देने लगी। तीनो भाई बहन सर्दी की रात में एक दूसरे को गर्म कर रहे थे। ऐसा लग रहा था मानो हम तीनों को जन्नत मिल गया हो। करीब डेढ़ घंटे की चुदाई के बाद मेरे भाई का माल सारा मेरे चूत के अंदर चला गया। हम तीनों ही शांत हो गए रजाई के अंदर हम तीनों सो गए बीच में मेरा भाई सोया अगल-बगल में मैं और मेरी बहन। उस दिन के बाद से 10 दिन तक लगातार हम तीनो भाई बहन रात भर रंगरेलियां मनाते हैं। 15 तारीख को वापस चला जाएगा।

अब हम दोनों बहन इसी चिंता में हैं मेरा भाई जो हम दोनों को आदत लगा दिया है वह कैसे पूरा होगा। कौन चोदेगा हम दोनों को यही सोचकर चिंता में रह रही हूँ। देखती हूं किस को पटाती हूँ। ताकि वह हम दोनों की चूत की गर्मी को शांत कर सके सर्दी के मौसम। मैं जल्द ही अपनी दूसरी कहानी इसी वेबसाइट पर यानि AdultStories.co.in पर लिखूंगी जैसे ही कोई मर्द मुझे मिलेगा वैसे ही और उसी दिन लिखूंगी। तब तक के लिए आप सभी का धन्यवाद।  

छोटी बहन को वियाग्रा खिलाकर उसकी चूत फाड़ी

Chhoti Bahan Ki Chudai Story, छोटी बहन को वियाग्रा खिलाकर उसकी चूत फाड़ी


Virgin Sex Story, Chhoti Bahan Ki Chudai Story  : मेरे प्यारे दोस्त मैं आज मैं आपको एक मस्त कहानी सुना रहा हु जो की मेरे बहन के बारे मैं है आज मैं आपको बताऊंगा मैंने कैसे अपने बहन का सील तोडा, खूब चुदाई की साली की, मजा आ गया तो सोचा क्यों ना मैं अपने नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम बाले फ्रेंड को भी अपनी बहन की चुदाई के बारे में बताऊँ, तो देर किस बात का दोस्त हाज़िर हु अपनी कहानी लिए क्यों की जब मैं यहाँ दूसरों की कहानी पढता हु तो मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की मैं भी अपनी कहानी आपलोगो से शेयर करूँ.

ये स्टोरी मेरी बहन के साथ हुए एनकाउंटर की हे उसका रंग गोरा बाल काले ओर घुंघराले ओर फिगर की क्या बात करू दोस्तो देख के ही खड़ा हो जाय सभी का ओर उसी वक़्त मूठ मार लो उसका फिगर 34 28 36 हे हेना पर्फेक्ट सेक्स फिगर चलो देर ना करके सीधा स्टोरी पर आता हू


मैं मुंबई में रहता हु, और मैं जिगोलो हु, मैं अपने घर का खर्च भी उसी से उठता हु, क्यों की मुझे अपने घर चलने के लिए काफी पैसे की जरूरत होती है और कोई छोटी मोटी नौकरी में कितना कम लेगा इसलिए मुझे जिगोलो बनने के लिए मजबूर होना पड़ा, पर मुझे मस्ती रहती है रोज रोज मैं भाभी आंटी लड़की को जो की हॉस्टल में या किसी काम से मुंबई में रहती है, कॉलेज गर्ल को, बड़े घर के औरत को जिसका पति बिज़नेस टूर पे हमेशा रहता है उसकी वाइफ को मैं चुदाई से संतुष्ट करता हु और उसके बदले में मुझे पैसे मिलते है , मेरे घर मे मेरी मा मैं बहन ओर पापा हे पापा एलेक्ट्रॉनिक डिपार्टमेंट मे है जिनकी सैलरी कुछ खास नहीं हे |

इस साल ही मेरी बहन बारह्वी पास की तो मैंने उसको गिफ्ट में एक अच्छा सा मोबाइल फ़ोन गिफ्ट किया, रात को फिर वो मेरे पास आई और फिर एंड्राइड पे कुछ नयी नयी सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए बोली.मैं उसके मोबाइल में सॉफ्टवेयर डालने लगा तभी मेरे क्लाइंट का फ़ोन आने लगा था, उसी समय मैं अपनी बहन की चूची देख ली उस समय वो एक ढीली ढली सी टी शर्ट पहनी थी मेरा मन तो बहक गया मैं क्या करता मेरा तो लैंड खड़ा होने लगा कोई चारा भी नहीं था मस्त मस्त गदराई हुयी सी चूची जो थी मैं भी क्या करता तुरंत बाथरूम में गया और मूठ मार ली.


एक दिन मे अपन कमरे मे नंगा था कपड़े बदला रहा था तभी अचानक से वो कमरे मे घुस आई मे डोर लॉक करना भी भूल गया था ओर उसने मूज़े नंगा देख लिया फिर वो तुरंत ही चली गयी ओर बाद मे मुझे से माफी माँगी उसकी भूल केलिए मेने भी माफ़ कर दिया


वो अपने न्यू सेल पे एक बार पॉर्न देख रही थी तो मेने देख लिया उसे लेकिन कुछ कहा नहीं क्यू की मे भी उसे चोदना चाहता था तो उसे गरम होने दे रहा था जैसे से ही उसने पॉर्न बंद की मे उसके पीछे से पास जाकर बैठ गया उसे ये लगा की मे उसे वीडियो देखते हुए देखलिया हे लेकिन मे अनजान बना रहा वो गरम हो चुकी थी ये देख के मेरा लंड पायजामे मे ही टेंट बना दिए था वो ये देख सके इसतरह मे पास ही बैठ गया ओर टीवी देख ने लगा बात बात ओर मैं उसके कमर ओर बदन को फील करने लगा ओर वो ओर गरम होती गई ऐसा व्यवहार मेने कई दीनो तक किया आख़िर सब्रका फल मीठा जो होता हे फिर उसकी नज़र मे मेने कुछ प्यास देखी की जो मे ही बुझा सकता था फिर मेने जान भुज कर जब मे क्लाइंट से बात करता तो वो सुन सके उस समय मैं और भी सेक्सी सेक्सी बात करता था.


आख़िर मे मेरा इंतजार खत्म हुआ ओर वो घड़ी आयी गई की जब मे उसकी चूत का भोसड़ा बना डू उस रत मे अपने घर पर था ओर मां ओर पापा बाहर गये थे और वो एक हफ्ते बाद आने वाले थे मेरी सिस का भी वाकेशन था सो वो भी घर पर ही थी हम रोज रत को बाहर खाना खाने जाते थे मेरी बाइक पे तो मे जान बुजकर ब्रेक मरता ताकि उसे गर्म कर सकु लेकिन वो भी क्या खुद को कंट्रोल करती थी उसे लंड की प्यास थी


लेकिन वो उस प्यास को बुझा ना ही नई चाहती थी फिर मेने वियाग्रा उसे रात को खिलाई ओर बोला की इसे नींद अच्छी आती हे ओर उसके गरम होने का वेट किया जैसे ही वो गरमा हुई मे उसके सामने नंगा हो गया ओर वो मेरा खड़ा लंड देख के पागल हो गई ओर लोलीपोप की तरह चूस ने लगी दोस्तो क्या बतौ की क्या मज़ा अरहा था जैसे जन्नत मे हू मे फिर मेने उसको लेटया ओर उसकी अनचुई चूत को चाट कर मज़ा लिया मे ओर उसको सातवे आसमान की सेर कराई

फिर हमारा रीलेशन ही बदल सा गया हो फिर वो रह नहीं पा रही थी मेरे लंड की बगैर वो मुझे ज़ोर ज़ोर से बोल रही थी की मे कब से तेरे से चुदबाना चाहती थी आज मेरी ये ख्वाहिस पूरी कर दे ओर मेरी चूत को फाड़ दे मेरी चूत चोद दे उसे भोसड़ा बना दे मुझे आज कच्ची कली से फूल ओर देरी मत कर फाड़ दे चूत मेरी ये सब सुन कर मुज मे नया जोश जेसे अगया हो वो पहली बार चुद रही थी इसलिए मेने पास मे रखी पेट्रोलियम जेल ली

ओर थोड़ी उसकी चूत पर ओर मेरे लंड प्र ल्गाई पहले तीन चार धक्के मारे लेकिन लंड फिसल ही जाता था फिर क्या जैसे मे भाभी को चोदता वैसे ही लॅंड लगाया चूत पे ओर ज़ोर का ढाका मारा पूरा लंड एक जटके मे अंडर गुसा दिया ओर जैसे ही मेरा लंड घुसा कुछ फटा हो ऐसा महसूस हुवा मुहे ओर मे समझ आ गया की मेने इसकी सील तोड़ दी ओर वो ज़ोर से चिल्ला उठी ओर बोलने लगी की निकालो अपने लण्ड को मेरे चूत से बहुत दर्द हो रहा है, मैं रो दूंगी प्लीज निकालो मुझे सहन नहीं हो रहा है.


फिर मे उसी पोज़िशन्स मे रहा ओर उसका मूह अपने मूह से बाँध किया वो थोड़ी देर तड़पदै बाद मे नॉर्मल हो गई उसकी आँख से आँशु निकल गये थे फिर मे उसे धीरे धीरे फिर से उसके चूत में डालने लगा और उसकी चूची को दबाने लगा, वो फिर भी दर्द से कराह रही थी पर करीब दस मिनट के बाद वो नार्मल हो गयी और फिर वो अपना गांड उठा उठा के चुदवाने लगी, मैंने उसको फिर अलग अलग पोसिशन में चुदाई की, और चूच के निप्पल को अपने दांत से दबाता तो वो और भी कामुक हो जाती.

उस दिन मैंने कई बार उसको चोदा उस दिन वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी क्यों की वो काली से फूल बानी थी, उसके चूत में कॅाफ़ी दर्द हो रहा था, फिर शाम को मैंने दर्द की टेबलेट के साथ साथ मैंने गर्भ निरोधक गोली भी खिलाया ताकि वो प्रेग्नेंट ना हो जाये, फिर क्या अब तो मैं रोज उसको चोदता हु,

मुँहबोली बहन की कुवारी चुत की चुदाई

मुँहबोली बहन की कुवारी चुत की चुदाई


पहले मैं अपनी मुँहबोली बहन के बारे में बता देता हूँ. उसका नाम सौम्या है सौम्या मेरे करीबी दोस्त की गर्लफ्रेंड थी, तो वो मुझे भाई मानती थी … लेकिन मैंने जब उसे पहली बार देखा था, तो मेरा लंड उसको सलामी देने लगा था. मेरा दोस्त उससे कम ही बात करता था और मैं ज्यादा … क्योंकि मैं उसे पसंद करने लगा था. पर वो मुझे सिर्फ भाई ही मानती थी. कभी कभी मैं उससे बोल भी देता था कि काश तुम मेरी गर्लफ्रेंड होतीं … तो वो मजाक में मेरी बात हवा में उड़ा देती.


एक बार हम दोनों मार्केट गए, उसे शॉपिंग करनी थी. मैंने उसे अपने साथ बाइक पर बैठाया और हम मार्केट निकल गए. मैंने रास्ते में सोचा कि आज सौम्या से कुछ मज़ा लिया जाए. मैं जानबूझ कर डिस्क ब्रेक लगा देता और वो मुझसे चिपक जाती. जब उसका सीना मेरी पीठ पर लगता, तो उसके गठीले दूध मेरे लंड को बेचैन कर देते थे. मैंने रास्ते में कई बार ऐसा किया.


फिर हम मार्केट पहुंच गए. उसने ढेर सारी शॉपिंग की. कपड़े और सैंडल लिए. अब उसे ब्रा और पेंटी लेनी थी … तो उसने एक कॉस्मेटिक की शॉप के बाहर मुझे रुकने को कहा. मैं समझ गया कि इसे क्या लेना है.


मैंने उससे बोला- मैं भी साथ में चलता हूँ.

वो बोली- यहां पर लड़के नहीं आते हैं.

मैंने ज्यादा जिद की तो उसने कहा- ठीक है … आप काउंटर पर बैठना, मैं बस दस मिनट में आती हूँ.


मैंने हां कर दी, तो वो अन्दर जाकर ब्रा और पेंटी देखने लगी. अब मुझे भी ये देखना था वो किस स्टाइल वाली ब्रा पैन्टी खरीदती है.


मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो पर्पल कलर की ब्रा उसके हाथ में थी. कुछ पल मैं यूं ही उसे देखता रहा. उसने अगले ही मिनट में खरीदारी पूरी की और बाहर आने लगी. मैं उसे आता देख कर वापस वहीं बैठ गया.


वो सामने काऊंटर पर गयी और उसने सामान पैक करवाके पैकेट अपने बैग में डाल लिया.


फिर मेरे करीब आते ही बोली- काफी देर हो गई है … अन्धेरा होने वाला है और बहुत तेज भूख भी लगी है, चलो कुछ खाते हैं.


मैंने हामी भर दी और हम लोग पास के एक रेस्टोरेंट में चले गए. वहां हमने खाना खाया और वेटर को बिल के पैसे देकर साथ में टिप भी दी.


वेटर ने अपनी झौंक में बोल दिया- थैंक्स सर यू आर ए नाइस कपल.


उसकी बात सुनकर हम लोग मुस्कुराने लगे. कुछ देर बाद हम दोनों घर के लिए निकले.


रास्ते में मैंने सौम्या से कहा- वो वेटर हमें कपल समझ रहा था.

उसने कहा- हां कोई भी होगा, वो हमको इतने क्लोज़ देख कर कहेगा ही. मगर उसे सच कहां मालूम होता है कि हम दोनों एक नहीं हैं.

मैंने झट से बोला- तो फिर बना लो ना एक.


उसने मेरे कन्धे पर प्यार से हाथ मार दिया. मैंने भी झटके से ब्रेक लगा दिए. इससे फिर से वो उसके चूचे मेरी पीठ में लग गए. मेरा लंड सांप के जैसे सलामी देने लगा.


वो बोली- भाई, आप जानबूझ कर तो ब्रेक नहीं लगा रहे हो?

मैंने कहा- ऐसा कुछ नहीं है … तुम ठीक से खुद को पकड़ कर बैठो ना.

वो हंसने लगी.


हम दोनों इसी तरह की मस्ती करते हुए घर आ गए. मैंने उसे उसके घर पर ड्रॉप किया और बाय कहा. फिर अपने घर आ गया. अब मैं उसके चूचे याद करके बिस्तर में अपने लंड को सहला रहा था. उसके मम्मों का टच मेरे लंड को तन्ना रहा था.


इतने में उसका कॉल आया कि भाई वो में कपड़े लिए थे, वो साइज़ में फिट नहीं आ रहे हैं.

मैंने पूछा- तो फिर क्या करें?

वो बोली- कल फिर से मार्केट चलना है.


मैंने झट से कहा- और उनकी साइज़ फिट हुई है?

वो बोली- किसकी?

मैंने कहा- तुमने और भी कुछ लिया था ना.

वो बोली- डायरेक्ट बोलो ना भाई.

मैंने कहा- अरे ब्रा और पैंटी की साइज़ कैसी रही?

वो हट कहते हुए बोली- मैंने उनको अभी चैक नहीं किया है.


मैंने कहा- एक आइडिया है तुम वीडियो कॉल करके मेरे सामने उनको भी चैक कर लो.

वो- अरे यार आप मेरे भाई हो … आपके सामने कैसे कर लूं?

मैंने कहा- मैं तो तुमको गर्लफ्रेंड मानता हूँ.

सौम्या बोली- अच्छा जाओ … आपसे कोई नहीं जीत सकता … बाय कल बात करते हैं.


उसने फोन काट दिया.


अब मैं रात में उसकी चुदाई के सपने देखने लगा. मैंने सोच लिया था कि कैसे भी करके मुझे इसे चोदना ही है. मैंने उसकी जवानी को याद करके लंड हाथ से हिलाया और उसके नाम की मुठ मारके सो गया.


सुबह मैंने प्लान बनाया कि कल सौम्या को किसी न किसी तरह से चोदना ही है.


उसे पता था कि मैं कभी कभी शराब पीता हूँ. बस मुझे आईडिया आ गया. मैंने उसे कॉल किया और बोला- तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड किसी दूसरी लड़की के साथ डेट पर गया है.

उसने कहा- इस बात का आपके पास क्या प्रूफ है?

मैंने बोला- एक मिनट रुको.


मैंने दोस्त को कॉल किया और उससे पूछा- कहां हो भाई?

वो बोला- तुम्हारी नई भाभी के साथ.


मैंने कॉल को कॉन्फ्रेंस पर लिया हुआ था. इसलिए सौम्या ने सब कुछ सुन लिया. अभी मेरा दोस्त कुछ और कहता, तब तक मैंने कॉन्फ्रेंस कॉल कट कर दी.


वो इस बात को सुनकर रोने लगी थी. मैंने उससे कहा- मत रो पगली … चल ब्रेकअप पार्टी करते हैं.

वो बोली- आप अभी कहां हो?

मैंने कहा- अपने घर पर अकेला ही हूँ. सब लोग दो दिन के लिए बाहर गए हैं … तो मैं ड्रिंक कर रहा हूँ. तुम लेना चाहो … तो आ जाओ.

सौम्या बोली- मैं आती हूँ भाई और आज मैं भी पियूंगी.

मैंने कहा- आ जा सौम्या आज तुझे ब्लैक लेबल पिलाऊंगा.

वो बोली- लेबल बेबल मैं कुछ नहीं जानती हूँ, बस आ रही हूँ.


मैं पहले से ही ब्लैक लेबल की बोतल लेकर आया था. थोड़ी देर में वो मेरे घर आ गई और आते ही मुझे गले लगा कर रोने लगी.


उसके गले लगते ही मेरा लंड खड़ा हो गया. उसके तने हुए ठोस मम्मे मुझे पागल बना रहे थे. मम्मों के टच होते ही में मदहोश हो गया. मैं पहले ही दो पैग ड्रिंक पिए हुए था.


वो जब सामान्य हुई, तो मैंने झट से उसका पैग बना दिया. वो बिना कुछ सोचे समझे एक बार में ही पूरा गिलास पी गयी. उसका मुँह बना, तो मैंने उसके मुँह में एक नमकीन काजू का टुकड़ा दे दिया. उसका स्वाद ठीक हुआ. तब तक फिर मैंने एक और बड़ा पैग बना दिया. वो उसे भी झट से पी गयी.


मैंने इस तरह उसे 4-5 हार्ड पैग दिए. शराब धीरे धीरे पी जाए, तो नशा होता है … मगर एक साथ गटगट करके ये पता ही चलता कि दारू चढ़ भी रही है या नहीं.


अब उसे नशा काफी हो गया था. मैंने सिगरेट जला कर उसे पकड़ा दी. वो सिगरेट को होंठों में लगा कर कश खींचने लगी.


मैंने उससे कहा- सौम्या … ये तुम्हारे साथ अच्छा नहीं हुआ.


बस फिर क्या था … वो नशे की टुन्नी में सब बताने लगी.

वो बोली- साले के लिए मैंने क्या नहीं किया … हरामी कुत्ते के साथ मैंने दो बार सेक्स किया … उस मादरचोद का लंड मुँह में लिया. मैं उसे पैसे भी देती थी.


उसके मुँह से गालियां सुनकर मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने मौके का फायदा उठाया और एक हार्ड पैग बना कर उसके हाथ में पकड़ा दिया. उसने बिना सोचे समझे उस पैग को भी पी लिया.


अब वो नशे में मदहोश हो कर अपने पैर फैला कर मेरे सामने बैठी थी. मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघ पर फेरते हुए उससे कहा- काश अगर उसकी जगह मैं होता, तो तुम्हारे जैसी इतनी सुन्दर माल को धोखा नहीं देता.


वो मुझे नशीली आंखों से देखने लगी और बोली- आप इतना प्यार करते मुझे?


मैंने हां कर दिया और सीधे उसके होंठों पर अपने होंठ रख कर उसे किस करने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी. मैं उसे चूमते हुए अपने एक हाथ को उसके मम्मे पर ले गया और दबाने लगा.


अब उसे सेक्स का नशा भी चढ़ गया. उसने मेरी शर्ट खींची. मैंने उसकी इच्छा समझ कर अपने सारे कपड़े झट से निकाल फेंके. अब मैं उसके सामने एकदम नंगा खड़ा था. मैंने उसको किस किया और नीचे लंड पर इशारा करते हुए उसको लंड मुँह में लेने को कहा.


उसने झट से मेरा 7 इंच का लंड मुँह में भर लिया और लॉलीपॉप के जैसे चूसने लगी. वो इतना मस्त लंड चूस रही थी कि मैं कुछ ही मिनट में उसके मुँह में ही झड़ गया. वो मेरे लंड का पूरा माल पी गयी.


अब मैं उसे बिस्तर पर ले गया और उसके सारे कपड़े निकाल दिए. वो मेरे सामने एकदम नंगी हो गयी थी. मैं उसके मम्मों को मसलने लगा, उसके एक निप्पल को चूसे जा रहा था. वो मस्त होकर मेरा साथ दे रही थी.


फिर वो बोली- भाई, मैं बहुत प्यासी हूँ … बहुत दिनों से चुदायी नहीं की … आप जल्दी से चुदाई करो … अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है … प्लीज फ़क मी ब्रो.

मैंने कहा- अभी तो सारी रात बाकी है मेरी जान … आज मैं तुझे बहुत चोदने वाला हूँ … क्योंकि मैंने आज तक तेरे नाम की बहुत मुठ मारी है.

वो बोली- भाई मैं भी आपसे कब का चुद जाती … पर मैं आपको भाई बोलती थी ना … इसलिए मैं झिझकती थी. पर आज आपने मेरा सारा संकोच निकाल दिया है … आप आज मुझे जमकर चोदो और मुझे अपनी बना लो.


ये सुनकर मैं उसकी टांगों के बीच में आया और उसकी चुत चाटने लगा.

वो गांड उठाते हुए कहे जा रही थी- आह … और चाटो भाई … और और … आह ऐसे ही … उफ्फ करते रहो.


कुछ ही पलों में वो एकदम से अकड़ गयी और उसने अपनी चुत से पानी छोड़दिया. मैं उसका सारा चुत रस पी गया.


थोड़ी देर तक वो शिथिल पड़ी रही. दारू के नशे से उसकी आंखें बोझिल हुई जा रही थीं. मैंने देर करना उचित न समझा और अपना 7 इंच का मोटा लंड उसकी चुत पर रख दिया.


वो बोली- एक मिनट रुको.

मैंने कहा- क्यों?

सौम्या बोली- पहले आप मेरी कसम लो कि कभी मुझे धोखा नहीं दोगे.

मैंने कहा- जान तेरी कसम … मैं तुझे सारी जिन्दगी ऐसे ही चोदूंगा और तू अब मेरी लुगाई बनके रहेगी.


वो हंस दी और हम दोनों ने एक लम्बा किस किया. फिर मैंने दुबारा से चुत पर लंड सैट किया और एक ही झटके में अपना 7 इंच का लंड डाल दिया.


वो लंड घुसते ही एकदम से चिल्ला पड़ी और बोली- आह मर गई … रुक जा हरजाई … कोई भला ऐसे अपनी लुगाई को चोदता है … तुम तो मुझे रंडी के जैसे चोद रहे हो.


मैंने वासना में गुर्राते हुए कहा- आज मैं तुझे रंडी के जैसे ही चोदना चाहता हूँ … ताकि तू मेरी पहली चुदाई भूल ना पाए.

वो बोली- ठीक है … तो चोदो … आज मुझे आप अपनी रंडी ही समझो.


मैंने लंड को बाहर निकाला और फिर से एक झटके में डाल दिया. अब मैं उसे किस करता रहा और तेज झटकों से चोदता रहा.


मैं उसे चोदते हुए बोला- मादरचोद … साली छिनाल … रंडी … इतने दिनों से तड़पा रही थी … अब जाकर मुझे तेरा छेद चोदने को मिला है. कितनी सुन्दर है तू … आह तेरी चुत का भी जवाब नहीं है मेरी जान … तेरी चुत में बहुत रस है मेरी रंडी …


सौम्या गांड उठाते हुए बोली- आह साले बहनचोद पी ले मेरा सारा रस … बहन के लौड़े मेरा पूरा बदन अब तेरा है … चोद साले मुझे … अपनी रंडी बना कर चोद दे हरामी … तेरा लंड भी कम नहीं है. मैं सिर्फ आज ही नहीं … मैं तुझसे रोज चुदूंगी … आह तेरे लंड से चुत की खाज मिटवाऊंगी … आह चोद साले.


मैं उसकी नशीली बातें सुनकर और जोश में आ गया. मैंने धक्के और तेज कर दिए. चुदाई के साथ मैं उसके मम्मे को चूस रहा था.


वो अपने हाथ से अपना एक दूध पकड़ कर मुझे पिलाते हुए बोली- आह पी ले साले … भैनचोद … आज अपनी बहन का दूध चूस ले … आज तूने बहन को अपनी रंड़ी बना लिया … आह तू बहुत बड़ा बहनचोद है.


मैं 25 मिनट तक उसको तेजी से चोदता रहा. फिर मैं झड़ने को होने लगा.

मैंने उससे बोला- मेरा निकलने वाला है.

वो बोली- भाई, मेरी चुत में ही छोड़ दो.

मैंने अपना सारा माल उसकी चुत में भर दिया. हम कुछ देर एसे ही चिपके पड़े रहे.


थोड़ी देर बाद वो मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर उसे फिर से जगाने लगी.

अब मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने उससे कहा- शायद लंड को भी पता है कि उसकी बहन अभी बहुत प्यासी है.


उसने मेरा लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी.


मैंने उससे कहा- मुझे अब तुम्हारी गांड मारनी है.

वो बोली- नहीं … मैंने कभी गांड नहीं मरवायी … बहुत दर्द होगा.

मैंने कहा- जान मैं आराम से डालूंगा … और अब तो मैं तुझे लुगाई के जैसे ही चोदूंगा.

उसने हां कर दी.


मैंने उसे एक लार्ज पैग बना कर उसे पिलाया और उसकी गांड मारने की तैयारी कर ली. मैंने उसकी गांड में तेल की शीशी का ढक्कन खोल दिया और ढेर सारा तेल उसकी गांड में भर दिया. फिर एक उंगली से उसकी गांड को खोदा. फिर दो उंगलियों से गांड ढीली की.


अब वो खुद ही नशे में कहने लगी- साले भोसड़ी के लंड डालकर गांड मार ना … क्यों उंगली से खेल कर रहा है.


मैंने भी एक पैग ठोका और लंड का सुपारा उसकी गांड से टिका दिया. फिर उसकी कमर पकड़ कर मैंने लौड़ा गांड में पेल दिया. उसकी मां चुद गई मगर वो लंड झेल गई. मैंने पूरा लंड पेल कर उसकी गांड मारने का सुख भी ले लिया.


उस रात मैंने उसे 6 बार चोदा. अब हमें जब भी मौका मिलता है, हम जमकर चुदाई का मजा ले लेते हैं.


आपको मेरी मुँहबोली बहन सौम्या की चुत चुदाई की कहानी कैसी लगी … प्लीज़ मुझे मेल करके जरूर बताएं.

घर की छत पर पड़ोसन की चुदाई Ghar ki chhat par ladki ki chudai

घर की छत पर पड़ोसन की चुदाई - पडोस की लड़की को चोदा - Ghar ki chhat par ladki ki chudai , मस्त और जबरदस्त चुदाई
घर की छत पर पड़ोसन की चुदाई - पडोस की लड़की को चोदा - Ghar ki chhat par ladki ki chudai , मस्त और जबरदस्त चुदाई

मेरे कॉलेज की छुट्टियाँ शुरू हो गई थी और मैं घर वापस आ गया था। कुछ दिन घर पर बीते ही थे कि पता चला ननिहाल जाना है। मैं काफी खुश था क्योंकि गाँव की लड़कियों से बात करने का मौका मिलता और गाँव में हमारी इज्ज़त थी तो लोगों से मिलने-जुलने में उनकी खातिरदारी का भोग भी करने को मिल जाता था।



खैर सामान बांधा गया और मैं भाई और माँ के साथ गाँव के लिए दोपहर की ट्रेन से निकल गया। गाँव तक जाने के लिए ट्रेन से उतर कर एक घंटे की और सवारी थी।



कुल मिला कर हम पाँच घंटे में गाँव पहुँच गए। गर्मी की वजह से काफी थके हुए थे। जैसा कि ननिहाल में होता है, हमारा बड़ी ही खुशदिली से स्वागत हुआ और जलपान हुआ। ननिहाल में मेरे नानी नाना और मामी रहते हैं, मामा काम के चलते बाहर रहते थे !



मामी और मेरी काफी बनती थी। मेरा भाई बहुत कम बोलता है और नॉवल का ख़ास शौक़ीन है तो वह एक नॉवल लेकर चला गया और मैं मामी से बात करने लगा।



मुझे गाँव गए लगभग एक साल हो गया था तो मामी ने गाँव की काफ़ी बातें बताई जिसमें से काम की यह थी कि हमारे सामने वाले घर में एक लड़की काव्या(बदला हुआ नाम) थी उसकी सगाई होने वाली थी।



काव्याऔर मैं समौरी, यानि की हम उम्र के थे और मैं उसके साथ बचपन में खेला करता था पर बीच में हमारी बातचीत कम हो गई थी। मैं कॉलेज में दाखिले के चक्कर में लगा था और गाँव नहीं आ सका था। मुझे एक दुःख सा हुआ सुन कर कि उसकी सगाई हो रही है पर यह तो होना ही था।



हालाँकि गाँव के हिसाब से काव्याकी काफी देर से सगाई हो रही थी। कुछ दिन बीते और एक दिन काव्याहमारे घर आई, मामी से उसे गप्पें मारनी थी शायद !



मुझे देख कर थोड़ा शरमा गई, संकोचवश कुछ बोल न सकी तो मामी ने कहा- पहचाना?



जिस पर वो हंस दी।



मुझे उसकी अदा और नखरे बड़े ही कोमल और मनभावुक लगे। वह लगभग मेरे कंधे तक की लम्बी, गेहुंआ रंग और एकदम साफ़ चेहरे की थी, बेहद सुन्दर थी। गाँव की होने के कारण शरीर भी बेहद अच्छा था उसका, भरा और कटा हुआ !



हमारे बीच काफी बातचीत हुई और मैंने उसे कॉलेज-लाइफ के बारे में बताया। उसने मेरी पसंद और आदतों के बारे में पूछा और उन्हें बेहद साधारण पाकर प्रभावित सी लगी। मामी हमारी बातचीत का माध्यम थी। मुझे पता चला कि काव्यामामी से सिलाई बुनाई सीखती है और इस कारण काफी आती जाती है।



उस दिन के बाद मैं उसके ख्यालों में खोया रहता था, उसका सुन्दर चेहरा, प्यारी हंसी और घने बालों के बारे में सोचकर गर्मी की दोपहर में ठंडक महसूस करता था।



वह कुछ दिन के अंतराल पर हमारे यहाँ आती रहती थी और अक्सर हमारी बात होती थी पर और लोग भी रहते थे इसलिए संकोचवश मैं ज्यादा बोलता नहीं था। मैंने उसे अक्सर अपनी ओर देखते हुए पाया और मैं खुद उसे नज़र बचा कर देखता था। हम अक्सर एक दूसरे को अपने घर की छत से देखा करते थे। मुझे लगा कि वह मुझमें कुछ रुचि ले रही है पर मैं कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि उसकी सगाई हो रही थी और जोखिम उठाना ठीक न था।



खैर मैं उससे हंसी मजाक भी करता था। कुछ दिन बीते ही थे की उसके परिवार वाले उसके ससुराल जाने लगे किसी काम से ! पर क्योंकि अभी सगाई होनी थी, इस कारण लड़की को ससुराल नहीं ले जा सकते थे, तो उन्होंने काव्याको हमारे यहाँ मामी के साथ रहने के लिए कहा। वह हमारे यहाँ रहने आई, पहले दिन सबकुछ ठीकठाक गया, काफी हंसी-मज़ाक हुआ और अगला दिन आया। हमारे यहाँ नानी और माँ नीचे सोते थे और नाना बाहर ! मैं और मामी ऊपर छत पर सोते थे जहाँ भाई को भी सोना होता था पर वो नीचे सोना पसंद करता था माँ और नानी के पास।



काव्याजब आई तो तय हुआ कि वो मामी के साथ ऊपर सोएगी। अब ऊपर यह व्यवस्था थी कि मैं एक तरफ़ सोता था, मामी बीच में और काव्याउनकी बगल में !



एक दिन की बात है मैं गाँव के बाज़ार घूमने चला गया लड़कों के साथ, उसके कारण थक गया था, इसलिए मैं खाना खाकर छत पर जल्दी सो गया।



रात को करीब 2 बजे आँख खुली तो देखा कि काफी चाँदनी रात है। मुझे आदत है चादर के साथ सोने की तो मैंने चादर के लिए इधर उधर देखा तो देखा बगल में मामी के सिरहाने के उस तरफ है। मैंने अपना बिस्तर थोड़ा मामी के बिस्तर के पास खींच लिया और उनके उस तरफ रखी चादर उठाने के लिए झुका तो देखा मेरे बगल में मामी के बजाये काव्यालेटी थी। एकदम से मेरी धड़कन तेज़ हो गई !



मैं वापस लेट गया चादर खींच कर और सोचने लगा कि क्या करूँ? मेरा मन बिजली की रफ़्तार से भाग रहा था ! फिर मैंने सोचा अगर आज कुछ नहीं किया तो बहुत पछतावा होगा तो मैंने चादर अपने ऊपर से हटा कर देखा कि काव्याउस तरफ चेहरा किये लेटी थी और पीठ मेरी तरफ थी। उसने साड़ी पहन रखी थी, नीचे से उसकी साड़ी घुटनों तक उठी हुई थी और पल्लू कंधे से उतर चुका था, जिसके कारण कमर साफ़ दिख रही थी। मैंने आँख मली और ध्यान से देखा, मुझे विश्वास नहीं हो रहा था जो मैं देख रहा था। उसके गोरे चिकने पैर और उन पर सजी चांदी की पायल, तीखे कटाव वाली कमर और उठे हुए गोल गोल कूल्हे… आय हाय !!!



उसकी कमर साफ़ गोरी सी, ब्लाउज़ में छिपी मक्खन जैसी चिकनी पीठ, चाँद की रोशनी में वो क़यामत लग रही थी ! ज़िन्दगी में पहली बार ऐसी चीज़ देख कर मैं हैरान रह गया था !



फिर मैंने धीरे से खिसक कर अपना सर उसके पैरों की तरफ कर लिया और कुछ देर वैसे ही लेटा रहा यह देखने के लिए कि कोई जाग न रहा हो। फिर मैंने बहुत ही आराम से अपने हाथ से उसकी साड़ी का छोर पकड़ा और बहुत धीमे धीमे उसे ऊपर खिसकाया। मैंने साड़ी इतनी ऊपर कर दी कि उसकी जांघें दिखने लगी, चाँद की रोशनी में कसी हुई दूध सी जांघें देख कर मुझे पसीने आ गए। मेरा दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे बाहर आ जायेगा, मेरा हाथ कांपने लगा इसलिए मैं वापिस सीधा हो गया और थोड़ा रुक कर गहरी साँसें लेने लगा।



मैं बार बार उसकी चिकनी जांघ को देख रहा था जिससे मेरा लंड काफी कड़ा हो गया था। फिर मैंने धड़कन धीमी होने पर थोड़ी हिम्मत जुटाई और काव्याके करीब खिसक कर लेट गया। मुझे उसके बालों की मंद मंद सी महक आ रही थी। मैंने आँख बंद की और फिर हाथ को संतुलित कर के धीरे से उसके जांघों पर रख दिया, अगर वो जाग जाती तो सोचती कि मैंने नींद में रखा होगा। मैं थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा और जब लगा वो गहरी नीद में है तो मैंने हथेली को फैला कर उसकी जांघ को महसूस किया। उसकी जाँघ गजब की मुलायम-चिकनी थी मैंने हाथ को जांघों पर फेरा और उसकी चिकनाहट को भी महसूस किया। मेरे रोयें खड़े हो गएथे।



फिर मैंने हाथ हटा लिया और काव्याके और करीब खिसक गया। थोड़ी देर वैसे ही रुका रहा क्योकि मुझे डर था कि अगर वो उठ गई तो शायद मामी से सब बोल देगी। यह कहानी आप adultstories.co.in पर पढ़ रहे हैं।



डर के मारे मैं और कुछ नहीं कर रहा था। मैं वैसे ही लेटा रहा और पता नहीं कितना समय बीता होगा कि वो पीछे की ओर यानि मेरी तरफ पलटने लगी पर मैं इतनी करीब था कि वो मुझसे सट गई और वो एक तरह से मेरे बदन के ऊपर उसका बदन टिक गया था। मेरे दिल की धड़कन फ़िर बढ़ गई !



पर जब वो सीधी नहीं हुई तो मुझे लगा कि शायद वह भी जाग रही और जानबूझ कर ऐसा कर रही है। इससे मुझे थोड़ी हिम्मत मिली और मैंने धीरे से, फिर भी सावधानी के साथ, उसकी कमर पर हाथ रख दिया।



कोई हलचल नहीं हुई।



मैं थोड़ा सा नीचे खिसक गया इतना कि उसके कूल्हों के बीच मेरा लिंग बैठ जाए, पर उसके पुट्ठे थोड़ा नीचे थे तो मैंने धीरे से उन बड़े बड़े कसे हुए पुट्ठों पर हाथ रखा और थोड़ा ठेलने लगा, मुझे डर था कहीं काव्याजाग न जाए पर वो धीरे धीरे वापस पुरानी अवस्था में हो गई और उसकी पीठ सीधी हो गई पहले जैसे।



अब उसके पुट्ठों के बीच की दरार थोड़ी ऊपर हो गई। मेरा लंड पत्थर की तरह कड़ा था और खड़ा होकर फड़फड़ा रहा था। मैंने धीरे से अपनी निक्कर नीचे सरकाई और अपनी चड्डी उतार कर बगल में रखकर वापस निक्कर पहन ली। उसकी साड़ी को मैंने धीरे धीरे ऊपर खींचा और कमर तक ले आया। अब तक मुझे विश्वास हो गया था कि काव्याजाग रही है और मेरी मदद कर रही थी क्योंकि अन्दर पेटीकोट के नीचे उसने कुछ नहीं पहना था।



इस कारण बिना समय बर्बाद किये मैंने अपनी निक्कर को नीचे खींच दिया और अपना लंड निकाल लिया। वह एकदम फनफना रहा था और 7 इंच का हो रहा था। लंड आगे से थोड़ा सा गीला हो चुका था इस कारण और आनन्द आ रहा था। हम छत पर थे और कोई देख न ले इसलिए मैंने चादर को खींच कर काव्याके खुले हुए उभरे भरे चूतडों पर भी डाल दिया।



अब दृश्य यह था कि काव्याऔर मैं एक चादर में थे, उसकी साड़ी कमर तक उठ चुकी थी जिससे उसका पिछवाड़ा पूरा नंगा था और मैंने भी अपनी निक्कर उतार दी थी और नीचे से पूरा नंगा था।



चूँकि मुझे पता था कि काव्यासाथ देने वाली है इसलिए मुझे अन्दर ही अन्दर काफी ख़ुशी और आवेश महसूस हो रहा था, मैंने अपने गर्म-गर्म सख्त लंड को पकड़ा और उसके सुपारे को काव्याकी चिकनी गांड की दरार में धीरे से खिसका दिया। मैं उसे काव्याकी योनि में डालना चाहता था पर वह चिकनेपन के कारण बार बार फिसल जा रहा था।



मैंने पुनः प्रयास किया और उसके एक पुट्ठे को थोड़ा ऊपर करके लंड को उस दरार में सटा दिया। उस चिकनी, गर्म गांड के गूदों के बीच में फंसे लंड को मैंने हल्का सा आगे पीछे किया तो वो मज़ा आया जिसे मैं बयान नहीं कर सकता !



काव्याने अब तक कोई हलचल नहीं की थी तो मैंने सोचा कि पहले यह तय करना आवश्यक है कि क्या काव्यासही में सोने का नाटक कर रही है?



मैंने फिर लंड को बाहर खींच लिया और धीरे से और नीचे खिसक कर अपना सर उसकी गांड के पास ले गया। मेरी कोशिश थी कि चादर के अन्दर ही रहूँ। मैंने उसके पैरों को धीरे से आगे पीछे कर दिया, अब वह उस करवट थी जिससे मेरी तरफ उसकी पीठ थी और उसके घुटनों से मुड़े हुए पैर आगे पीछे थे जिससे उसकी योनि और उसके आसपास के घने बालों को मैं देख सकता था। हालाँकि रात के चलते कुछ ख़ास न दिखता पर चाँदनी रात के कारण चादर के अन्दर भी काम भर का दिख रहा था।



मैंने उसकी योनि के अगल-बगल थोड़ा ऊँगली फेरी। एकदम आहिस्ता से उसके योनि के मुंह पर दो उंगली रगड़ी और फिर एक उंगली छोटी सी दरार में पेल दी। मेरी एक उंगली उसकी चूत में और अंगूठा उसके योनि के ऊपर के दाने को दबाने में व्यस्त था। कुछ ही सेकेंड हुए कि वह ऐंठ गई और एकदम से चूत कस ली।



मुझे मेरा जवाब मिल गया था, मैं अपना मुंह उसकी योनि के पास ले गया और पूरी चूत को चाट लिया धीरे से ! हालाँकि मेरे लिए यह सब पहली बार था पर मैंने नग्न फ़िल्मों में और काफी और स्रोतों से यह सीख रखा था और कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था। मैंने एक बार और चूत पर अपनी जीभ चौड़ी करके फेरी ही थी कि उससे एक गीला पदार्थ निकला। मैंने अब सीधे होना ठीक समझा और फट से वापस ऊपर सर करके लेट गया काव्याके पीछे।



मैं अभी भी उसके एकदम पीछे सट कर लेटा था। मैं सीधा हुआ ही था कि काव्याने अपने कूल्हे थोड़ा पीछे किये और ऐसे चिपक गई मुझसे कि मेरा लंड उसकी योनि के एकदम नीचे छूने लगा। मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था ! मैंने अब अपना संयम खो दिया और उसकी पीठ से अपनी छाती चिपका दी। मेरी गर्म-गर्म साँसें उसकी पतली गर्दन पर लग रहीं थी! मुझे उसकी तेज़ धड़कन महसूस हो रही थी और उसकी छाती भी ऊपर-नीचे होती दिख रही थी। मैं एकदम मदहोश होने लगा।



फिर मैंने चादर को पूरा खींच कर उसको और अपने को अच्छे से ढक लिया। काव्याअभी तक कुछ बोली नहीं थी। हम दोनों एक करवट लेटे थे और मैं उसके पीछे चिपका था। उसने अपने पैरों के बीच में से हाथ डाला और मेरे खड़े हुए क़ुतुब मीनार को अपनी योनि के छेद पर रख कर थोड़ा सा नीचे हो गई, चूत काफी गीली थी और लंड पत्थर सा कड़ा इसलिए लंड का टोपा अन्दर घुस गया।



फिर मैंने धीरे धीरे अपनी कमर ऊपर खींची और पुट्ठे आगे बढ़ाया तो बात बन गई और लंड अन्दर घुसने लगा।



ऐसा लग रहा था जैसे मक्खन में चाक़ू !



मेरा पूरा शरीर रोमांचित हो उठा !



मैंने थोड़ी देर लंड को अन्दर ही रहने दिया इस डर से कहीं काव्याको दर्द न हो ! वो कड़ा लोहे सा लंड उसकी गरम गीली और चिकनी योनि में घुसा हुआ था और मैं मदहोश सी हालत में ऊपर उसके ब्लाऊज़ को खोलने की कोशिश कर रहा था।



मैंने ब्लाऊज़ खोला और पीठ पर बहुत ही हल्के से अपनी एक उंगली उसकी पीठ पर फ़िरानी शुरू की। उसे गुदगुदी हुई तो उसने गर्दन घुमा कर मेरी ओर देखा। उसकी गोल गोल काजल लगी हुई हिरनी सी ऑंखें और वो शरारत भरी हंसी ने मुझे अपनेपन का वो एहसास दिया जो इस दुनिया में किस्मत वालों को ही शायद मिलता है !



मैं उससे मंत्रमुग्ध हो गया! इसी दौरान मैंने धीरे धीरे अपने लिंग को थोड़ा अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। फिर मैं अपना एक हाथ उसकी चूची पर ले गया और धीरे से पर अच्छी पकड़ से दबाया तो उसके मुंह से आह निकल गई, मैंने झट से उसके मुंह पर हाथ रख लिया।



मामी को देखा तो वह सो रही थी।



मैंने फिर धीरे से उसके बोबे सहलाए और निप्प्ल को मसला। अब धीरे धीरे वो थोड़ा पेट के बल हो गई थी और मैं उसके थोड़ा और ऊपर !



मैंने अपनी छाती उसकी पीठ से सटा ली और दोनों हाथों से बोबे पकड़ लिए फिर धीरे धीरे पर ताकत वाले झटके देने लगा। इसमें उम्मीद से ज्यादा ताकत लग रही थी पर आनंद उससे कहीं अधिक !



फिर मुझे लगा मैं झड़ जाऊँगा तो मैं रुक गया, अपना लंड बाहर खींचा और अपने एक हाथ से काव्याकी घनी चूत रगड़ने लगा। वह कुछ देर में बहुत तेज़ ऐंठ गई और उसे एकदम से परम आनन्द मिल गया। मैंने अपनी जानकारी से इससे झड़ना ही समझा।



इसी दौरान मैं अपने होंठों को उसके कानों पर, गर्दन पर और गर्दन के पीछे फेर रहा था। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। वह हाथ हटा के सीधे लेट गई पीठ के बल और फिर वापस मेरा लंड पकड़ कर हिलाने लगी। मुझे तो उसको कोमल हाथों के स्पर्श से ही चरम आनंद प्राप्त हो गया। मैंने उसके कंधे को चूमा और धीमे से उसके कान में बोला- थोड़ा और तेज़ !



वो हंस पड़ी, फिर उसने हिलाने की रफ़्तार बढ़ा दी और कुछ ही देर में मैं भी झड़ गया !



मैंने उसके होंठो पर एक बहुत ही मीठा और गीला चुम्बन दिया और फिर कपड़े पहनने लगा।



उसने भी अपनी साड़ी समेटी !



हम और मज़े करना चाहते थे पर थोड़ा थोड़ा उजाला होने लगा था और गाँव में लोग जल्दी उठ जाते हैं तो हम खतरा नहीं लेना चाहते थे ! मैंने अपना बिस्तर थोड़ा पीछे कर लिया और दोबारा सोने का प्रयास करने लगा।



सुबह 9 बजे मेरी नींद खुली तो घर में सब अपने अपने काम में लगे थे। हमें हमेशा की तरह जगाया नहीं गया था।



उस दिन मैंने काव्यासे दिन में बात करने की कोशिश की तो उसने की नहीं, वह थोड़ा संकोच कर रही थी।



मैं बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था अगली रात का पर अफ़सोस उसी दिन पिताजी आ गये हमें लेने !



मेरे मन में काव्यासे बात करने की कसक रह गई। अभी भी वह कभी कभी मेरे ख्यालों में आ जाती है।



काव्या ने मुझे ये तो दिखा दिया कि औरत के पास वो ताकत है जिसका कोई मुकाबला नहीं और जिसकी कोई सीमा नहीं। हम मर्दों को औरतों के लिए मन में पूरी इज्ज़त रखनी चाहिए! वह हम जो दे सकती है, वह अमूल्य है।


Didi Ki Sleeper Bus Me Chudai

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Hindi Sex Story Hello dosto samajh sakta hua ap sab thik hi hoge is story ko padh kar apko bahut maza ane wala he kyuki jisne apni bahan ko chod diya samjho sab kuch pa liya ye bahut rishki kaam he hnn agar bahan maan jay to jo maje bahan ke sath mil sakte he wo girlfriend ke sath nahi to chaliye story shuru karte. Real Bhai Bahan Porn

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Me hatta khata dikhta hu gym jata hu or college ke last year me hu fir ati he mujh se badi meri bahan jiska naam simran he mere se 4 sal badi uski age 26 he apko to pta hi hoga 1 panjabi girl kesi dikhti he to me btata hu simran didi collage pura kar chuki thi bas ghar par rahti thi.

Didi ka figer 34/23/36 he kya mast ankhe he hiran ke jesi gulabi honth jise bas chusta hi rahu lambi gardan 34 ke bade tight boobs sangemarmar badan didi ki chut akdam gulabi he kul mila kar didi bollywood singer (SHAKIRA) jesi dikhti he hair bhi didi ke khulke golden he fair color ghar me sabka alag room he.


Abhi tak sab sahi chal raha tha mera didi ko or koi bhi gandi najar nahi hi hnn but bhai bahan me pyar bahut tha didi mujhe mathe or mere lips pe apne lips rakh kar chumma de deti thi didi mere bager khana nahi khati thi pahla tukda apne hath se deti mom dad bhi ye dekh kar bolte simran jab teri shadi ho jaygi to ise khana kon khilayga.

To didi bolti me shadi nhi krugi humesha bhai ke pass rahungi mom dad haste or bolte 1 din sabko jana he mera mumbai me 1 exam tha to me usi ki teyari kar raha tha ki simran didi mere room me aai or boli bhai mujhe bhi apke sath jana he isi bahane mumbai ghoom lungi.

Me bola me apna flight ticket kara chuka hu didi simran didi bhai koi nhi hum train se jayge me aaj tak train ka safar nahi kiya to me socha or hun kar diya papa ka acha bussiness he or jameen bhi he isi kiye jaha bhi hum jate car se jate the me flight ticket cancel kiya or do a.c koch ke ticket kara diye.

Kal hume nikalna tha to hum jaldi so gye fir hum morning me nikalne lage to didi ko me sath lekar chal diya station pahuche waha hume train mili hum chal diye pura dun safar kiya fir night hone lagi (mumbai jane me 2 din lagte he train se) ab hum sone ki teyari karne lage.


Didi apna combel lena bhul gyi thi use thand lagne lagi usne mujhe rat 11baje uthaya me bola didi ap mere burth pe aa jao combel bahut bada he dono adjust kar lege to didi mere baju me akar let gyi didi ne dai or se leti thi me bhi didi ke gand ki traf apna lund lga rkha tha.

Jab didi mere blanket me aai to pure blanket me ak ajeeb si small fal gyi wo didi ki body ki small thi mujhe bahut achi lagne lagi (ye first time tha hum dono bhai bahno ka jo aksath lete the) mera lund khada hone lga or didi ki badi 34 ki gand ki drar me jane lga.

Ab mujhe azeeb sa nasha hone lga or me apna 1 per didi me uper rakh diya jisse mera lund full kadak hokar didi ki gand me didi ki pent fadne ko teyar tha didi so chuki thi me ak hath didi ke uper rakha jo didi ki shirt ke uper se unki boobs ko tuch hone lga.

Mujhe bahut maza ane lga tha 2 minat aise hi karte hue me didi ko seedha leta diya or didi ke shirt ke button kholne lga mene sare button khol diye or dekha to ander white color ki sport bra pahan rakhi thi humara cabin lock tha hume koi nahi dekh sakta tha pata nahi mujhe kya hota gya.


Me didi ki bra ke uper se didi ke boobs dabane lga or bra ko uper karke boobs shuk karne lga didi ke boobs le red nippel the jo boobs ki shan ko bdha rahe the me. Nipple ko danto se dabane lga kuch hi der me didi ke nippel khade hone lage me chuste gya ab to or bhi maza ane lga tha.

Didi ke boobs kareeb 1 inch kade ho gye hoge ab me ak hath se didi ki pent ka button khol diya dheere se didi ki chain kholi or niche white color ki penty thi me panty ke uper se hi didi ki chut ko tham liya jisse didi akdam machal gyi kr meri gardan pakad ke meri gardan pakad ke apne lips se mere lips sata diya or mera niche wala hont ko chusne lagi.

Me bhi didi ke uper ke lips ko chusne lga kabhi didi meri jeeb chusti kabhi me didi ki jeeb chhat ta 10 minat ho gye hoge kiss karte hue or jab kiss tuti to jor jor se hafne lge simran didi boli bhai is pyar ka me kab se intazar kar rahi thi ahh aj mujhe jannat me jana he bhai chod do mujhe me kab se tujhe samjhana cha rahi thi par tu ise bhai bahan ka pyar samjh ta tha.

Fir humne kiss start kar diya or 5 minat baad didi ne meri tshart nikal diya or mera lover bhi me bhi didi ki jins utar di ab didi panty me thi jise me fad diya didi bhai aram se me apki hi hu ab mujhe tumhare se koi juda nahi kar sakta or hum 69 pose me aa gye. “Real Bhai Bahan Porn”


Didi mera kund chus rahi thi me didi ki chut didi ki kya mast chut thi abhi tak me aisi chut nahi dekhi akdam chikni safed red chut ke lips jab bhi me didi ki calory chut ke dane ko chatta didi gunn ahhh gunn karti ab hum alag hue or kiss kiya.

Fir me didi ke muh me apna lund dal diya jise didi ahhh gunnn gunnnn gunnn karke pine lagi ab me didi ka muh pakad ke dhakke marne laga didi ahuccc hhh gunnnnhhh gunnnnnnhhh gunnnnhhh gunnnnhh gunnnnhh ahhhhmmm karti or mouth fucking karwa ti rahi.

10 minat muh chodne ke baad me didi ke muh me jhad gya jise didi ne apne boobs pe ugal diya or window khol ke ulti kar diya simran didi bhai bta sakte the mujhe virya ganda lagta he fir me didi ko hanky se saf kiya or nunge hi let gye ak dusre ki baho me fir me 15 minat baad teyar hua or didi Ke boobs ko fuck kiya kr ab didi ke chut pe lund rakha.

Didi ne shihar bhari thoda thuk lga kar ak jordar dhakka mara mera adha lund didi ki chut me gya or didi ko michi lagne lagi ahhhh bhaaaiiii marrrr jauuuungiii me plz mat karo abhi he sab ahhh mummy meri chut fat rahi he aahhhh .Mere bbaii ahhhhh siiiiiihiiiii. “Real Bhai Bahan Porn”

Fir me jordar dhakka mara mera pura lund ander chala gya or didi ki chut ko chir diya didi rone lagi hath jhatpata ne lagi ahh bhai ahhhh or me pelta gya didi ki chut akdam lal ho chuki thi ab didi ko bhi maza ane lga or sath dene lagi didi ko mene sab angel me choda kabhi ghodi bna kar ya uper bitha kar or me ander hi jhad gya.


Morning ye result aaya ki didi ki chut sooj gyi jise didi ko problem bahut hue or fir agli rat bhi humne train me chudai ki or mumbai jakar bhi khoob maze kiye mumbai me didi ne mere se shadi kar liya cort me jakar fir hum flight se ghar aa gye ab hum jab bhi man hota chudai karte.

Didi bahut badal gyi he ab to ak orat jesi dikhti he didi ki age ab 29 ho gyi mom dad bahut forse karte he shadi ke liye but nahi karti fir me didi ko samjhaya tab jakar shadi ke kiye mani agle mahine didi ki shadi he me abhi didi ki kokh bhar chuka hu didi 1 month se pregnant he to kesi lagi humari story share kare


Mauseri Bahan Ko Saja Kar Choda

Mauseri Bahan Ko Saja Kar Choda

Chudai Ki Kahaniya Mera naam Tipendra hai. Mai abhi job kar raha hu aur acha khaasa kamaata hu. Meri ek mauseri Behan hai, jiska naam Trisha hai aur jo ki us waqt college me padhayi kar rahi thi. Wo dikhne me kaafi sundar hai, bas thodi si saawli hai. Uski ubhri gaand ki golayi kamaal ki hai aur na-mard ko bhi mard hone ka ehsaas dila de. Doggy Style Incest Sex

Wo gaaon ki hone ke kaaran shehar ka rang dhang nahi jaanti thi aur shehar waalo se thoda kam baat cheet karti thi. Wo sab kuch apne mann me hi rakhti thi aur bahut shy kisam ki thi. Uska sharmaana to seene me waar kar deta tha. Wo bachpan se hi mere se close thi aur mere peeche hi padi rehti thi.

Fir padhayi ki wajah se uska shehar aana kam ho gaya, lekin jab usne hamaare yaha college join kiya, to wo bahut khush thi. Wo hamaare ghar par nahi rehne waali thi, kyuki college ghar se zara doori par tha aur waha se college jaane ke liye direct bus nahi thi aur 3 buses badal kar college jana padta tha.

Wo jab aayi thi, to 10 din hamaare yaha rahi thi. Maine usko bachpan ke baad seedha aaj jawaani me dekha tha. Usne eyebrow, upper lip, makeup, ye sab nahi kiya tha, so zyada khoobsurat nahi dikh rahi thi. Lekin jab maine usko gale se lagaya tha, to uske mamme mujhe mehsoos ho gaye the. Pata chalta tha, ki chhori jawaan ho gayi thi.


Fir doosre din Maa usko parlour se lekar aayi. Jab wo parlour hoke mere saamne aayi, to Mai to usko dekh kar pehchaan hi nahi saka. Jaise Mai apne office me shehri ladkiyo ki gaand aur mammo ko taadta hu, wo bilkul un ladkiyo jaisi hi dikh rahi thi.

Fir mujhe laga, ki uska pakka koi to chodu hoga, warna itni maal kaise banti. Lekin un 10 dino me usne mujhe akela hi nahi chodha. Usne pata nahi kayi baar galti se, ya jaan-boojh kar apni gaand, mamme mujhse touch karwaye.

Ab wo hostel chali gayi thi aur wo mujhse phone par baate karti thi. Raat ko ghar-waale so gaye hote the aur hum baat kar rahe hote the. Ab to Mai pakka sure tha, ki uske saath kuch kiya jaa sakta tha. Ab wo har roz phone karke mera dimaag chaat-ti thi aur kehti thi-

Trisha: Exam me fail ho jaungi, kyuki maine kuch nahi padha hai.

Waise to wo hoshiyaar thi. Fir maine usko aise hi bol diya-

Mai: Agar tum pass ho gayi to?

Fir wo boli: Aap jo kahoge, Mai wo aapko doongi.

Ispe maine kaha: Dekh le, baad me mukar to nahi jaayegi?

Usne kaha: Nahi baba. Waise aap kya maangoge?

Mai bola: Mujhe tumhaari pappi chahiye.

Ye sun kar wo hasne lagi aur boli-

Trisha: Chee, shee, gande, bolu kya Mausi ko? Koi behan se aisi baat karta hai kya?

Uski ye baat sun kar Mai thoda darr gaya, ki wo kahi sach me Mummy ko naa bata de. Lekin saali mujhe chidha rahi thi. Maine bola-


Mai: Aisa kar, tu rehne de. Tujhse nahi hoga.

To wo boli: Kyu nahi hoga, zaroor hoga. Gaal pe hi to pappi deni hai.

Maine kaha: Arre nahi, poori baat to sun lo. Agar tum pass ho gayi naa, to poore ek ghante tak Mai lagataar jaha chaahu waha pappi deni padegi.

Trisha: Oh ho! Sahi hai Bhaiya. Aap to bahut hi us type ke ho.

Maine bola: Dekha, maloom tha mujhe.

To wo boli: Theek hai, mujhe shart manzoor hai.

Fir kya tha, firse normal baate chalne lagi. Fir 1 maheene baad uska result aaya. Mai kaam par tha, to mujhe uske result ke baare me pata nahi tha. Shaam ko ghar aane ke baad, Maa ne mujhe uske result ke baare me bataya.

Maine usko phone nahi kiya aur naa hi message kiya. Raat ko 2 baje uska phone aaya. Jab maine pehli baar me phone nahi uthaya, to wo wapas se phone karne lagi. Phone uthaane par wo jaal me fass gayi. Wo dheemi awaaz me baat kar rahi thi aur boli-

Trisha: Kya hua Bhaiya, aaj aapne phone nahi kiya.

Maine uske saath aise behave kiya, jaise kuch pata hi naa ho.

To wo boli: Bhaiya aap shart jeet gaye.

Maine kaha: Kya baat kar rahi ho Trisha, tum pass ho gayi? Ye to achi baat hai. Tumhe bahut-bahut badhayi ho. Chal ab Mai sone jaa raha hu, kal baat karte hai.

Tabhi wo shart ka poochne lagi. Ispe Maine bola-

Mai: Arre Mai to mazaak kar raha tha. Tu bhi kaha serious ho gayi.

Fir usne mujhe doosre din bula liya. Us din wo ek-dum saj-dhaj kar mera intezaar kar rahi thi. Usne t-shirt pehani thi aur neeche lambi skirt pehni thi. Mai usko aise dikha raha tha, jaise mujhe kuch khaas farak nahi padta. Fir hum mall me gaye aur wo boli-


Trisha: Bhaiya aap aise kyu behave kar rahe ho. Galti ho gayi kya mujhse koi? Agar hui hai to sorry, maaf kardo mujhe.

Maine kaha: Arre nahi re, aisa kuch nahi hai.

To usne kaha: Movie dikhao fir.

Hum andar gaye aur maine corner seat li thi. Thodi der baad wo kaan me boli-

Trisha: Bhaiya shart ki chummi chahiye?

Aur ye keh kar wo seedha mujhe choomne lagi. Usne mere hontho pe apne honth rakh diye. Mai kitni der usse gussa reh sakta tha, to ab Mai bhi usko choomne lag gaya. Mai paaglo ki tarah usko choom raha tha, jaise saalo se bhookha hu.

Hum dono hi ek-doosre ko chodh nahi rahe the. Aakhir hame alag hona pada, kyuki hame saans lene me bhi takleef ho rahi thi. Jaise hi hum dono alag hue, ham lambi saanse le rahe the aur haanf rahe the.

Fir maine usko apni aur kheencha. Ab jeebh ki chusayi chaalu ho gayi aur mere haath na-jaane kaise uske mammo par chale gaye aur Mai uske mamme dabaane laga. Wo bhi apne boobs dabwa kar maze lene lagi. Thodi der baad interval hua aur lights onn ho gayi. Hum dono ne ek-doosre ko dekha aur hum dono ki aankhen vaasna se bhari hui thi. Maine usko bola-

Mai: Aisa karo, toilet jaa kar bra-panty nikaal do.

Wo chali gayi aur bra-panty nikaal kar wapas aa gayi. Fir baad me jaise hi light band hui, hum firse chaalu ho gaye. Is baar maine uski kameez upar karke, uske nange mammo ke darshan kiye. Fir Mai uske mammo ko choosne lag gaya. Wo ab dheere-dheere siskiya le rahi thi.

Trisha: Ssshh.. ssshhhh.. aahhh..


Maine uski skirt upar uthaani chaalu ki. Ab uska nanga mulayam badan mere lund ko uksa raha tha. Maine apne lund ko azaad kiya aur Trisha ko lund pakadne ko kaha. Usne jhat se lund daboch liya.

Ab mere haath uski jaangho par the. Usne pair faila kar apni chut khol di, jo poori clean chut thi. Mai us par apni ungliya ragadne laga aur wo pagal hi ho gayi. Maine apne jeb se rumaal nikaala aur uske muh me daal diya, taaki awaaz naa aaye.

Ab Mai uske mammo aur chut se khel raha tha. Fir maine rumaal uske muh se nikaal diya aur usko apne lund ki chummi lene ke liye bola. Wo jhat se neeche jhuk gayi aur mere lund ki chummi lene lagi. Maine waise hi uska sir pakad liya aur lund uske muh me de diya. Fir maine usko bola-

Mai: Chooso ab is lund ko.

Aur wo lund choosne lagi aur Mai uske muh ko chodne laga. Fir Mai uske muh ke andar hi jhad gaya. Usne mera maal waha kone me hi thook diya aur rumaal se khud ko saaf kar liya. Baad me hum jab baahar aaye, tab usne mujhe propose kar diya. “Doggy Style Incest Sex”

Maine kaha: Dekh mujhe tu bahut pasand hai, lekin behan ke nazariye se.

Mai tujhe girlfriend ya Biwi se bhi zyada pyaar doonga, par Behan ke taur par. Wo bhi meri baat maan gayi. Fir hum aise hi baithe the aur ab mujhe usko chodna tha. Mai usko lodge me leke gaya. Waha hum dono aadhe ghante tak ek-doosre ko choom rahe the aur chaat rahe the.

Ab mujhe uski gulaabi chut maarni thi, lekin mere paas condom nahi tha. Wo bhi mujhe mana kar rahi thi, lekin Mai nahi maana. Fir jaise hi maine aadhe lund ke 2-4 dhakke maare, to uski chut se khoon nikalna chaalu ho gaya aur seal toot gayi.

Fir wo rone lag gayi aur mere poore mood ka bhonsda ho gaya tha. Maine usko samjhaya, ki pehle-pehle aise hi hota hai. Abhi dard bardaasht kar lo, baad me maza aayega. Usne mere dimaag ka bhonsda kar diya, lekin maine bhi usko chod ke hi chodha.

Us din ke 10 -12 din baad uska phone aa gaya aur usne mujhe milne ke liye bulaya. Fir us din Mai usko leke room par gaya. Waha maine usko mast garam kiya aur uski chut maarne laga. Aaj wo maze se apni chut chudwa rahi thi aur mujhe mast maza aa raha tha.

Wo gaand uchaal-uchaal kar mera saath de rahi thi. Fir maine usko doggy style me bhi choda aur usko godi me leke bhi choda. Wo itni kush thi, ki mujhe chodh hi nahi rahi thi. Saali ne us din 4 baar apni chut chudwa li thi aur fir bhi shaant nahi hui thi. “Doggy Style Incest Sex”


Mera lund ab sooj gaya tha. Maine fir jaise-taise usko shaant karke bhej diya. Fir kya tha? Mujhe har sunday chudai karne ko milti thi. Ab wo 2 bachho ki Maa lag rahi thi. Maine uske neembu jaise mamme aam bana diye the aur uski gaand kharbooze jaisi ho gayi thi.

Wo ab mera lund apni gaand me bhi leti thi. Ab lodge waale bhi hame pehchaan-ne lage the aur wo bhi hamaare naam se. Unko bhi lagta tha, ki hum shaadi karenge. Ab Mai usko bina condom ke hi choda karta tha aur apne maal uske andar hi chodh deta tha.

Ab uski shaadi ho gayi hai, lekin shaadi ke baad bhi uske Pati ke kaam par jaane ke baad, Mai usko milne ke bahaane se jaata hu aur poori-poori dopahar usko chodta hu. Wo bhi apni gaand jhuka kar mera lund leti hai.


दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा

दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा


सभी फ्रेंड्स का मैं शेखर स्वागत करता हूँ. मेरी उम्र 26 साल है. मेरी शादी नही हुई है और कई गर्ल्स को मैंने पटा रखा है. आपको अपनी रोचक स्टोरी सुना रहा हूँ. कैसे मैंने अपने दोस्त की बहन सौम्या को पटा लिया और कैसे अपने प्यार में फंसा लिया. फ्रेंड्स सारी लड़कियाँ बस एक चीज की प्यासी होती है और वो है अपनी खूबसूरती की तारीफ की. बस मैंने ऐसा ही किया और सौम्या को पटा लिया. मेरा दोस्त हरी मेरे घर के पास ही रहता था. मेरी उससे जान पहचान कॉलेज में हुई थी. फिर हमारी दोस्ती बढ़ गयी और मैं अक्सर उसके घर आने जाने लगा. हरी की मम्मी का सुभाव काफी अच्चा था.


वहां पर पहली बार मैंने उसकी बहन सौम्या को देखा. वो मेरे सामने लॉन्ग फ्रोक यानी गाउन में आई थी. वो बहोत गोरी थी बिलकुल दूध की तरह. उसी समय वो मेरे को पसंद आ गयी थी.

हरी- सौम्या!! ये है मेरा दोस्त शेखर!

सौम्या ने मेरी ओर मुस्कुराकर देखा

मैं- हलो!

मैंने उससे हाथ मिलाया और सौम्या मुस्कुरा दी.

हरी- जाओ शेखर के लिए चाय बना लाओ

उसके बाद मैं और शेखर बैठकर बात करने लगे. कुछ देर में सौम्या मेरे वास्ते चाय ले आई. उसी समय से वो मेरे को बहोत पसंद आ गयी थी. मैंने चाय पी और कुछ देर बाद अँधेरा हो गया तो मैं घर चला आया. पर बार बार सौम्या की याद मेरे को सता रही थी. मैंने अपने लोअर में हाथ डाल दिया और लंड पकड़कर हिलाने लगा. सिर्फ हरी की बहन सौम्या की याद मैं कर रहा था. कुछ देर बाद मामला गम्भीर हो गया और मेरा 7 इंच लम्बा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया. मैं खुद को रोक न पाया और मुठ मारने लगा. आखिर अपने लोअर को मैंने निचे सरका दिया और लंड को कच्छे से बाहर निकाल दिया. मैंने अपनी आँखे बंद कर दी और सिर्फ सौम्या को याद कर करके मुठ मारने लगा. 5 मिनट बाद मैंने अपना पानी छोड़ दिया.

धिरे धिरे हमारी मुलाकाते बढ़ने लगी. कुछ दिनों बाद हरी ने मुझे अपने घर पर क्रिकेट खेलने के लिए बुला लिया. हम सब खेलने लगे. हरी की बहन भी हमारे साथ खेलने लगी. उसने मेरे को कई बार बोलिंग की. आज उसने व्हाईट शर्ट और नीली जींस पहनी थी. जब वो बोलिंग करने के लिए जोर से दौड़ती थी तो उसके दूध बार बार किसी गेंद की तरह उछलते थे जिसे देखकर बड़ा मजा आता था. मेरे को तो सौम्या शुरू से अच्ची लगती थी. नीली चुस्त जींस में उसकी कमर, नितम्ब और गांड का नजारा तो देखने लायक था. आज अच्छी तरह से मैं उसके पिछवाड़े को ताड रहा था. मैंने सौम्या की बाल पर कई बार चौके जड़ दिए. क्रिकेट का खेल मेरे को भी बहोत पसंद था. कुछ देर बाद मेरे सारे ओवर खत्म हो गये और हरी की बैटिंग आ गयी. अब मैं बोलिंग कर रहा था. जैसे ही पहली बाल डाली हरी से उसे बहोत जोर से मारा की बोल बहोत दूर पेड़ों के पीछे चली गयी.

हरी- जाओ शेखर!! बाल लेकर आओ

मैं- न बाबा न!! वहां पर इतनी झाड़ी है. पता नही कहा मार दी तुमने. वहां तो सांप, बिच्छु भी होगा. मैं तो उस झाडी में नही जाउंगा

हरी- कोई बात नही!! मैंने बाल लेकर आता हूँ

वो बोला और चला गया. अब मैं और सौम्या अकेले रह गये. मौका देखकर सौम्या को मै एक बड़े पेड़ के पीछे ले गया और किस करने लगा

सौम्या- अभी मुझे किस मत करो. कही हरी से देख लिया तो गुस्सा करेगा

मैं- उसे बोल ढूंढने में करीब 10 मिनट लग जाएगा

मैंने बोला और फिर सौम्या को पकड़ लिया. उसे पेड़ से सटाकर खड़ा कर दिया और किस करने लगा. फ्रेंड्स, सौम्या बहोत गजब की माल थी. मेरे को पता था की वो अभी कुवारी है और एक वार भी चुदी नही है. जब उसे किस कर रहा था तो वो भी गर्म हो गयी और मेरे को किस करने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों ही गर्म हो गये. उसकी सफ़ेद शर्ट पर उसके दूध बड़े बड़े बाहर की तरफ निकले थे. ऐसा लगता था की अभी शर्ट को फाड़कर बाहर निकल आएँगे. जैसे ही मैंने उसके गेंद जैसे दूध पर हाथ रखा वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” करने लगी. उसके बाद तो मैं रुक न सका. और हरी की खूबसूरत जवान बहन की चूचियां मसलने लगा. वो बार बार सिसकारी लेने लगी. मैंने दूसरी तरफ झांककर देखा की हरी कहाँ है. पर वो पेड़ो के पीछे गेंद ढूढ़ रहा था. मेरे पास कुछ समय था.

मैं फिर से सौम्या पर झुक गया और किस करने लगा. कुछ देर बाद वो फ्रेंक हो गयी और अच्छी तरह से मेरे को किस करने लगी. अब उसको भी मजा आ रहा था. मैंने उसे पेड़ से सटाकर खड़ा रखा और तबियत भरके उसके दूध दबा लिए. मुझे इसमें बहोत आनन्द आया. जब जब दूध मसलता था सौम्या …ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” चिल्लाती थी. मेरे को और मस्ती चढ़ गयी. मैंने उसकी नीली जींस पर चूत के उपर हाथ लगाना शुरू कर दिया. अब तो सौम्या सी सी करने लगी. उसकी जींस की जिप मैंने नीचे सरका दी और हाथ अंदर घुसा दिया. सौम्या की चूत मेरे को मिल गयी. मैं चूत को ऊँगली से हिलाने लगा तो सौम्या अजीब अजीब कामुक आवाजे निकलने लगी. लगा की अभी अपनी चूत का पानी छोड़ देगी. काफी देर तक मैं उसके साथ इंटरटेनमेंट करता रहा. चूत में ऊँगली कर करके मैंने उसकी चूत को गीला कर दिया. फिर हरी आ गया. हम दोनों जल्दी से पेड़ के पीछे से आ गये. उस रात मैंने सौम्या को काल किया.

मैं- कैसी हो जाने बहार?? सच सच वोलना की आज तेरे को मैच में मजा आया की नही??

सौम्या- आज मेरे को बहोत आनन्द आया

मैं- गुलबदन! मैं तेरे को इससे वी जादा आनन्द दे सकता हूँ. पर किसी काम से तुम हरी को वाहर भेज दो बस!

सौम्या- कल मैं हरी को किसी काम से वाहर भेज दूंगी. तब तुम मेरे घर आ जाना

अगले दिन सुबह के 11 बजे हरी को गैस सिलिंडर भरवाने भेज दिया और मेरे को काल कर दिया. मैं तुरंत ही उसके घर आ गया क्यूंकि हम दोनों का घर मुस्किल से 300 मीटर दूर था. सौम्या की माँ कहीं गयी हुई थी. आज तो हम दोनों की सुहागरात होने वाली थी. मैं गया तो सौम्या बाहर सीढियों पर ही खड़ी हुई थी. उसके बाद हम दोनों अंदर चले गये. हम दोनों की किसिंग शुरू हो गयी. दोनों कमरे में चले गये. अब हम दोनों के पास काफी समय था जिसमे हम चुदाई कर सकते थे.

आज तो सौम्या भी पुरे मूड में दिख रही थी. वो मेरे को बड़े जोश से किस कर रही थी. दोनों के लिप्स से लिप्स आपस में टकराकर चिंगारी निकाल रही थी. जितने जोश से मैं उसे चुस रहा था उतने ही जोश से वो मेरे को चुस रही थी. आज उसने फिर से लोग गाउन पहना था. उसे मैंने एक दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और गोल गोल 36 इंच के दूध को मसलने लगा. वो “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” कर रही थी. फिर हम दोनों ही बेडरूम में चले गये.

मैं- सौम्या!! आज मेरे को तेरे मस्त मस्त दूध देखने है

सौम्या- शेखर! मैं भी चाहती हूँ की तुम मेरे मस्त मस्त दूध मुंह में लेकर चूसो. मेरा वी कबसे चुसाने का दिल कर रहा है

उसने कहा और फिर अपना गुलाबी रंग का गाउन उतार दिया. उसे जव मेने ब्रा और पेंटी में देखा तो सोये अरमान जाग गये. आज कितने दिनों बाद कोई गर्ल को फक करने का मौका मिल रहा था. मैं खुद को किस्मत वाला समझ रहा था. उसने रंग बिरंगी ब्रा और पेंटी पहनी थी जिसमे वो बहोत सेक्सी दिख रही थी. जिस तरह से समुद्र के बीच पर लडकियां स्विम सूट में दिखती है, उसी तरह सौम्या मेरे को दिख रही थी. मैं भी पूरे जोश में आ गया. मैंने खड़े खड़े ही उसे बाँहों में लपेट लिया. उसके बाद तो हम दोनों की खुब किसिंग हुई.

सौम्या- शेखर! क्या तुम कपड़े नही उतारोगे??

मैं- लगता है रानी बड़ी जल्दी में हो. लो उतार देता हूँ

उसके बाद मैंने अपनी टी शर्ट और जींस उतार दी. मेरा लंड 7” का था जो कबसे मेरे अंडरवियर में था और बूंद बूंद करके रस छोड़ रहा था. मैंने वो भी उतार दिया. अब मैं फुल न्यूड हो गया था. धिरे धिरे अपन ने सौम्या की ब्रा और पेंटी भी उतार दी. वो बेड पर सीधी लेट गयी. मैं उसके करीब आ गया और फिर से किसिंग शुरू हो गयी. अब मेरे को उसके रसीले दूध सक करने थे. मैंने उसके चूचियां पर हाथ लगाना स्टार्ट कर दिया. सौम्या के दूध काफी कसे थे और बिलकुल देसी थे. फ्रेंड्स, जिस तरह से तन्दुरुस्त इंडियन गर्ल्स के दूध काफी बड़े बड़े और रसीले होते है, उसी तरह से हरी की बहन सौम्या के दूध थे. मैं हाथ में लेकर दबाने लगा तो वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी. मेरे को पता चल गया था उसको भी बड़ा एन्जॉय मिल रहा है. उसके बूब्स काफी चिकने और सॉफ्ट थे.

मेरे को बहोत मजा आ रहा था. उसके बाद मैंने उसके दूध को मुंह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगा. अब तो वो और कराहने लगी. मुझे बार बार प्यार कर रही थी. हम दोनों ही अब नंगे थे. मैं तो उसके दूध ऐसे चुस रहा था जैसे वो मेरी वाइफ हो. मैं अच्छी तरह से मुंह चलाकर सक कर रहा था. मेरे को पता था की अगर उसे एक बार में मैंने मजा दे दिया तो वो मेरे से बार बार अपने बूब्स सक करवाएगी. इस तरह मैं अच्छी तरह से सक कर रहा था. सब रस पी रहा था. उसके बाद मैंने दूसरी निपल को मुंह में लगा लिया और फिर से चूसने लगा. मैंने सौम्या की तरफ देखा तो वो आँख बंद की हुई थी. उसके बाद मैं 69 में आ गया.

मैं- बेबी!! तेरे को मेरा लंड आज सक करना है. देखो अच्छे से करना वरना ये ठीक से खड़ा नही हुआ तो तेरे को चुदाई में मजा नही आएगा

सौम्या- शेखर!! मैं सक करती हूँ. पर तेरे को भी मेरी चुत अच्छे से चाटनी है

उसके बाद हम दोनों 69 में आ गये और काम पर लग गये. मेरे मुंह के ठीक उपर सौम्या की चुत थी. मैं जीभ लगाकर अविलम्ब चाटने लगा. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मेरे को तो देख देख कर ही बड़ा आनन्द आ रहा था. मैं जल्दी जल्दी चाट रहा था. उधर हरी की बहन सौम्या वी अपने काम पर लगी हुई थी. मेरे लंड को जल्दी जल्दी हिलाकर मुंह में लेकर चुस रही थी. काफी देर तक दोनों 69 में मजे लेते रहे. उसके बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया. सौम्या ने अपना कंधा बेड पर रखा और अपनी गांड उपर उठा दी. आज पहली बार उसके न्यूड नितम्ब और पिछवाडा देखने का अवसर मिला. फ्रेंड्स, सच में वो कच्ची कली थी.

मेरे को बहोत स्वीट लग रही थी. उसके न्यूड नितम्ब पर मैंने कई बार हाथ फिराया और किस किया. फिर मैंने उसकी चूत सक करना शुरू कर दिया. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मैं जल्दी जल्दी सक (चाटने) करने लगा. धिरे धिरे सौम्या की चुत अपना रस छोड़ने लगी. मैंने कई बार उसकी चुत का पानी पिया.

मेरे को बड़ा आनंद आया. उसके बाद मैंने उसकी चुत फकिंग (चुदाई) शुरू कर दी.

मैंने हल्का सा झुककर उसकी चूत में अपना लंड घुसाकर उसे चोदने लगा. सौम्या “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” कर रही थी. अपना अंगूठा उसने अपने मुंह में डाल दिया था और आँखे बंद करके चूस रही थी जैसे बचपन में छोटे बच्चे चुसते है. ऐसे में वो मेरे को बड़ी प्यारी लग रही थी. मैंने जल्दी जल्दी उसे चोदने लगा जिससे वो जादा से जादा आवाज निकाले और मेरे को और मजा आये. वो अपने सीधे हाथ का अंगूठा चुस्ती रही और एक अच्छी बच्ची की तरह घोड़ी बनकर चुदवाती रही. उसके सेक्सी नितम्ब को मैंने कई बार हाथ से छुकर आनंद लिया. फिर जल्दी जल्दी किसी जोश में आकर पेलने लगा. सौम्या फिर से “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” चिल्लाने लगी. मैं रुका नही और जल्दी जल्दी उसे फक करता रहा. एंड में 15 मिनट वाद मैंने खल्लास हो गया.

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा


मैं आप लोगों को आज अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन! बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।

घर की बात बहन के साथ

मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !

लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !

तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !

मैंने उससे कहा- ठीक है !

फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।

दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।

तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?

तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !

तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।

इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।

तो वो बोली- ठीक है !

फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।

थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।

वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।

मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !

मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।

क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !

मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।

इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !

रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !

उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।

वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !

और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !

तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !

मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !

मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !

वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !

और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।

फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !

मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।

वो बोली- भईया, अब क्या?

मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !

तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !

तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !

वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।

मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।

मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।

मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

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