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मैंने चाची को चोदा बड़े प्यार से

मैंने चाची को चोदा बड़े प्यार से


मेरे परिवार में हम चार लोग हैं. मैं, मेरे पिता जी, मेरी मम्मी और मेरा एक छोटा भाई. इस वक़्त मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ. आपको पता ही है कि कॉलेज वाली उम्र में चाची भाभियों पर सबसे ज्यादा क्रश आता है और लौड़ा उनको देखते ही सलाम मारने लगता है.


आज उसी समय की काम वासना की कहानी पेश कर कर रहा हूँ, मजा लीजिएगा. यह बात आज से 8 महीने पुरानी है. मेरा क्रश मेरी चाची पर था, जो मेरी ही गली में रहती थीं. चाची का नाम ज्योति है. उनकी उम्र 31 साल है. उनका फिगर एकदम मस्त है.


चाची वैसे तो थोड़ी मोटी थीं, मगर उनके बड़े बड़े चूचे और गांड देख कर लंड खड़ा हो जाता. तब मुझसे रहा नहीं जाता और कई बार तो मुठ मारके अपने लौड़े को शांत करना पड़ता था. जब भी मुठ मारने के लिए लंड हाथ से हिलाता था, तब आंखें बंद करके अपने सपनों की रानी ज्योति चाची की चूचियां, मेरे भेजे को गर्म करती रहती थीं. लंड का रस निकालने के बाद यही सोचता था कि ज्योति चाची की चूत लेने का मजा ही कुछ और होगा.


उनकी चूत की चाहत से ही ये बात शुरू होती है. जैसे कि मैंने बताया कि मेरी गली में ज्योति चाची रहती थीं. उनकी अपने पति यानि चाचा के साथ कम बनती थी. उन दोनों की लड़ाई होती रहती थी. चाचा ने टूरिंग का काम पकड़ा हुआ था, तो वो अधिकतर बाहर ही रहते थे.


चाचा अक्सर मेरे घर पर पापा या मम्मी से मुझे उनके घर रुकने के लिए बोल जाते थे क्योंकि हमारे घर वालों की आपस में खासी बनती थी तो वो भी मना नहीं करते थे. उनके घर रुकने जाने के लिए सुनते ही मुझे बड़ा अच्छा लगता था. मेरी नजर चाची पर पहले से थी. चाची को देख लंड खड़ा हो जाता था.


इस बार चाचा पन्द्रह दिनों के लिए बाहर गए थे. तो मुझे इस बार जरा अच्छा मौका लगा.


जब मैं चाचा के घर रुकता था, तो हम दोनों एक ही कमरे में सोते थे. चाची और उनकी बेटी डबल बेड पर लेटती, मैं बगल की एक चारपाई पर सो जाता था.


शुरुआत में तो मैं रोज के जैसे चारपाई पर सो गया, पर मुझे चाची की लेनी थी तो मैंने सोचा कि अब चारपाई पर नहीं सोना है. अगर चाची के बड़े बड़े मम्मों और गांड का मजा लेना है, तो हिम्मत करनी पड़ेगी.


एक दिन ऐसे ही मौके पर मैंने कह दिया- चाची मुझे चारपाई पर नींद नहीं आती, मुझे भी बिस्तर पर सोना है.


चाची ने कहा- कोई बात नहीं, तू हमारे साथ ही सो जाना डबलबेड तो है, इतनी तो जगह रहती है.


मैं खुश हो गया. मैंने लेटने लगा. तो चाची ने अपनी बेटी को दूसरी तरफ लिटा दिया और मैं चाची के साथ सो गया. पहला दिन तो ऐसे ही निकल गया.


जब मैं तीन दिन बिस्तर पर चाची के बगल में सोया, तो मैंने कथा बांचना शुरू की. मतलब मैंने अपनी हरकत शुरू कर दी. चौथे दिन मैंने अपनी एक टांग चाची के ऊपर रखी और एक पल सांस रोके पड़ा रहा. जब चाची ने कोई हरकत नहीं की, तो मैंने अपना एक हाथ चाची के मोटे चूचे पर धर दिया और चुपचाप लेटा रहा.


कुछ समय रुकने के बाद मैंने हौले हौले चाची का चूचा दबाना शुरू किया. उनको कुछ भी अहसास नहीं हो रहा था. वो मजे से सो रही थीं और मैं स्वर्ग के मजे ले रहा था. लेकिन चूत लेने की चुल्ल थी तो मैंने टांग से चाची की टांग को हौले हौले सहलाना शुरू किया.


चाची जागने लगीं, तो मैं आंख बंद करके सोने लगा ताकि उनको पता लगे कि मैं सोते में ऐसा कर रहा हूँ. यह मेरा पहली बार था, मुझे मजा आ रहा था.


उन्होंने जाग कर मेरी स्थिति देखी और मुझे ठीक करके सो गईं. ऐसा दो तीन बार हुआ. मगर चाची ने कुछ नहीं कहा. इससे मेरी हिम्मत बढ़ गई. मैं अब लगभग रोज ही चाची के दूध दबा कर मजा लेने लगा.


एक बार ऐसे ही मजे ले रहा था और मेरा हाथ उनके मम्मों पर टिका था और अपना काम कर रहा था. इस समय चाची सो रही थीं, मुझे लगा कि रोज के जैसे ही सब हो रहा है. मैं मस्ती से दूध को हॉर्न के जैसे दबा कर लंड खड़ा कर रहा था. तभी अचानक से उन्होंने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया. मैं एकदम से डर गया और हाथ हटा लिया.


चाची मेरी तरफ मुड़ते हुए बोलीं- मजे लेने है तो खुल के ले. क्या ऊपर से दबा कर छोड़ देता है. चल आ जा.


खुले निमन्त्रण ने मैं खुश हो गया और मैंने कहा- चाची मैं आपको कब से चोदना चाहता था, मेरी ये इच्छा आज आपने समझ ली है. अब मेरी इच्छा जरूर पूरी होगी.


फिर मैंने चाची को अपनी बांहों में खींच लिया. चाची और मैं चूमने में लग गए.


चाची ने मुझे रोकते हुए गुड़िया को चारपाई बिछा कर उस पर सुलाने का कहा और गुड़िया को उधर लिटा दिया.


अब चाची और मैं लिपट गए. मैंने चाची के होंठ पर होंठ रख दिए और चूसने लगा. चाची भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.


कुछ ही देर में हम दोनों की उत्तेजना बढ़ने लगी और मैं चाची के पूरे बदन को चूमने लगा. मैंने चाची को चूमने के साथ ही हौले हौले उनके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. चाची के इतने बड़े बड़े मम्मों को पकड़ने से मुझे महसूस हो गया कि चाची के पूरे मम्मे मेरे हाथ में नहीं आ सकते थे.


मैं चाची को जोर से जकड़े हुए चूमने में लगा था. इस समय हम दोनों के बीच में से हवा भी नहीं निकल सकती थी. चाची की कामुकता देखते ही बन रही थी.

 

हम दोनों दस मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे. शायद इसका कारण था कि हम दोनों ही जिस्म की जरूरत से बहुत भूखे थे.


कुछ देर बाद मैंने चाची को नंगी करना शुरू किया. मैंने उनकी नाईट शर्ट को उतार दिया. चाची ने ब्रा नहीं पहनी थी, जिससे उनके बड़े बड़े दूध एकदम से उछाल मार कर बाहर आ गए.


चाची सीत्कार करते हुए बोलीं- आह … आराम से दबा … उखाड़ेगा क्या. ये दूध अब तेरे ही हैं.


मैं उनके मम्मों को बारी बारी से चूसने लगा. चाची ने मेरे सर को अपने मम्मों पर दबाते हुए दूध चुसवाने का मजा लेना शुरू कर दिया.


मैं दूध से तृप्त होने के बाद धीरे से नीचे आ गया. मैंने हाथ से उनका लोअर उतारा. अन्दर चाची ने ब्लैक पैंटी पहनी थी, जिसमें उनकी गोरी जांघें बहुत खूबसूरत लग रही थीं. उनकी पैंटी पूरी गीली हो गयी थी.


मैंने अब तक की शिक्षा में ये समझा था कि चूत चाटना बहुत मजेदार होता है. हालांकि मैंने आज तक किसी की चूत चाटी नहीं थी … मगर पोर्न देख कर मेरी ये एक फैंटसी बन गई थी कि चूत चाटने का मजा लेना है.


फिर मैं उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चाटने लगा. चाची कसमसाने लगीं और उनकी टांगें एक बार तो अपनी चूत को दबाने लगीं. लेकिन मैंने उनकी टांगों को खोल दिया और पैंटी के ऊपर से ही चूत पर अपने होंठ फेरने लगा. चाची की चड्डी के ऊपर लगे चुतरस का स्वाद मेरे मुँह में आने लगा. चाची ने भी जल्द ही अपनी टांगें खुद ब खुद फैला दीं और अब उनकी गांड उठने लगी थी.


चाची ने बाल खिंचने से दर्द से आउच किया और वो मेरी तरफ गुस्से से देखने लगीं.


मैंने हंस कर आंख दबाई और उनसे सॉरी बोल कर माफी मांग ली. चाची मुस्कुरा दीं और उन्होंने मेरे सर को फिर से अपनी चूत पर दबा दिया.


मैं फिर से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ चला. अबकी बार मैंने एक पल चूत की फांकों को चाटा और उनकी चूत में अपनी एक उंगली घुसा दी. उंगली के अन्दर जाते ही चाची के मुँह से हल्की सी सीत्कार निकली और उन्होंने अपनी टांगें भींचते हुए मेरी उंगली को दबा लिया.


मैं चाची की टांगों को फैला कर हौले हौले से उनकी चूत को चाटने लगा. चाची चुदास से पागल होने लगीं. उनकी गांड फिर से मेरे मुँह पर उठते हुए चूत को दबाने लगी. मुझे चाची की चूत चाटने में बड़ा मजा आ रहा था.


आप मेरे इस अनुभव को बड़े ध्यान से पढ़ने की कोशिश कीजिएगा, आपके लंड और चूत से रस टपकना चालू न हो जाए, तो मुझे जरूर लिखना.


फिर दो मिनट बाद चाची मेरे ऊपर आ गईं और उन्होंने मेरा लोअर उतार दिया. मेरे अंडरवियर के ऊपर से मेरा खड़ा लौड़ा देखा और जोर से दबा दिया. लंड मसले जाने से मुझे बहुत जोर से दर्द हुआ.


मैंने चाची के लिए हल्के स्वर में चिल्लाते हुए गाली निकाल दी- बहन की लौड़ी, तू क्या पागल है?


चाची ने हंस कर कहा- मादरचोद साले भोसड़ी के … अब तुझे पता लगा कि झांटें खींचने से मुझे कितना दर्द हुआ होगा. चल कोई बात नहीं … अभी तेरा दर्द ठीक करती हूं.


मैं लंड पकड़े हुए सहला रहा था. चाची ने मेरा हाथ हटाया और अंडरवियर उतार कर मेरा लौड़ा मुँह में ले लिया. चाची लंड को जोर जोर से चूसने लगीं.


मैं इतना अधिक गरमा गया था कि बस दो मिनट बाद चाची कम मुँह में ही झड़ गया. चाची मेरा सारा माल निगल गईं और उन्होंने डकार भी नहीं मारी.


थोड़ी देर बाद चाची फिर से मेरा लंड चूसने लगीं. मेरा लौड़ा फिर से सलाम करने लगा. अब हम दोनों गर्म हो चुके थे.


चाची ने कहा- राहुल अब तुम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो … मुझसे अब नहीं रहा जाता.


मैंने कहा- चाची … शुभ काम में देरी कैसी … अभी लो.


मैंने चाची की चूत पर लंड रखा और रगड़ने लगा.


चाची कहने लगीं- भैन के लंड … अब डाल भी दे.


यह सुनते ही मैंने एक जोर का धक्का लगाया और लंड एक ही बार में अन्दर पेल दिया.


लंड अन्दर लेते ही चाची के मुँह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकली. चाची की चूत थोड़ी सी टाइट थी. इधर मेरा भी पहली बार था, इसलिए मुझे भी दर्द हुआ. पर उस वक़्त तो चूत का नशा सवार था, तो पता नहीं लगा.


मैं हौले हौले चाची को चोदने लगा और उनको भी मजा आने लगा. चाची मुझे दबोचे हुए अपनी गांड उठा उठाकर लंड के झटके ले रही थीं.


मैंने चाची को बिना रुके दस मिनट तक लगातार चोदा. इसके बाद चाची ने मुझे रोका और वो बिना लंड निकाले मेरे ऊपर सवार हो गईं. मेरा लंड अब भी चाची की चूत की फंकों में फंसा था. चाची अपनी गांड उठाते हुए लंड पर उछलने लगीं. मैं उनकी हिलती हुई चूचियों के मजे लेने लगा.


कोई मिनट बाद चाची थक गईं. मैंने उनसे कहा कि अब पोजीशन बदल लेते हैं. आप घोड़ी बन जाओ.


मैंने चाची को बिस्तर के किनारे घोड़ी बनाया और नीचे खड़ा होकर चूत में लंड पेलने लगा. कुछ मिनट बाद चाची कराहने लगीं. शायद उनका रस निकलने को था.


मेरा भी छूटने वाला था तो मैंने चाची को बताया- चाची, मैं झड़ने वाला हूँ.


तभी चाची ने कहा- मैं झड़ गई हूँ … तू जब झड़े, तो मेरे अन्दर ही रस छोड़ देना. मैं गोली खा लूंगी.


मैंने तेज तेज धक्के लगाए और चाची के अन्दर ही लंड का रस छोड़ दिया. एक मिनट तक लंड की पिचकारी खाली करने के बाद हम दोनों थक कर लेट गए.


इस तरह मैंने पहली बार चाची को चोदा.


थोड़ी देर बाद हमने एक राउंड और खेला और कपड़े ठीक करके सो गए.


उसके बाद मैंने कई बार चाची को चोदा.


मगर न जाने क्यों अब वो मुझे मना कर देती हैं. वो कहती हैं कि ये सब गलत है, जो पहले हो गया, सो हो गया. मगर अब नहीं करूंगी.

चाची ने किया चुदाई से इलाज

चाची ने किया चुदाई से इलाज


नमस्ते.. मैं अंगरेज एक बार फिर आप की सेवा में हाजिर हूँ। जैसा कि आप जानते हैं.. मैं पंजाब का एक जाट हूँ। मुझे हिंदी कम आती है।
मैं 6 फुट 1 इंच लम्बाई का अच्छा ख़ासा गबरू जवान हूँ। मेरा 6 इंच का जवान मोटा लण्ड है। मैं थोड़ा पतला हूँ.. पर मेरा लंड काफी मोटा है। मेरे लौड़े का टोपा तो इतना मोटा है.. कि हर औरत के आँसू निकले हैं। लंड इतना सख्त है कि जैसे लोहे की रॉड हो। मेरे लंड ने हर चुदाई की कहानी ऐसी लिखी है कि चुदने वाली की चूत काँप जाए।

बात तीन महीने पहले की है। मेरे घर वाले सब लोग कुछ दिनों के लिए बाहर गए हुए थे। खाना-पीना चाची के जिम्मे बोल दिया गया था।
मेरी चाची एक मस्त माल हैं। उनके मम्मे बहुत बड़े हैं। वो उस समय तीस साल की थीं। चाचा ट्रक चलाते थे.. सो वो घर में अपने नौ साल के बेटे के साथ रहती थीं।

रोज की तरह आज भी मैं खाना खाने उनके घर गया। हम लोग खाना खा कर उठे तो लड़का नदी में नहाने की जिद करने लगा। आज गरमी भी बहुत थी। चाची मना कर रही थीं.. वो रोने लगा।
चाची ने मुझसे कहा- जा इसे नहला लाओ.. पर ध्यान रखना।

मैं उसके साथ चला गया, वो एक तरफ बच्चों के साथ नहाने लगा। अचानक उसका पैर फिसल गया.. और वो गहरे पानी में बहने लगा। मैं उसको बचाने के चक्कर में पानी में कूद गया। पानी कम होने की वजह से मैं पत्थर से टकरा गया। मुझे चोट लग गई.. पर उसे बचा लिया।

मेरे कपड़े फट गए थे। मेरे कंधे से लेकर जांघ तक लंबी खरोंच भी आ गई थी। वो खरोंच मेरे लण्ड के पास से गुजर रही थी।
हम घर गए। मेरी ऐसी हालत देख कर चाची चौंक गईं, जब उन्हें पता चला तो वो बच्चे को डांटने लगीं।
मैंने कहा- छोड़ो भी चाची..
चाची बोलीं- तुम गीले कपड़े उतारो.. मैं तब तक दवा लाती हूँ।

मैंने कपड़े उतार दिए.. सिर्फ अंडरवियर में रह गया था।
वो दवा लेकर आईं और मजाक करते हुए बोलीं- इसे भी उतार देते।
हम दोनों हँसने लगे।

वो बोलीं- चल बिस्तर पर लेट जा।
मेरा अंडरवियर गीला होने के कारण मेरा लौड़ा साफ दिख रहा था, उनकी नजर मेरे मोटे लण्ड से हट नहीं रही थी।

दवा लगा कर बोलीं- तुम्हारे अन्दर भी चोट आई है ना..
मैंने कहा- हाँ..
वो बोलीं- तो दिखाओ न..
इतना कह कर वो अश्लील भाव से हँसने लगीं।
फिर बोली- तुम्हारी अंडरवियर भी गीली हो गई है..
मैंने कुछ नहीं कहा। वो अन्दर गईं और अपनी कच्छी ले आईं.. बोलीं- लो ये पहन लो।


वो बाहर चली गईं तो मैं चड्डी बदलने लगा था.. उसी वक्त वो एकदम से फिर से अन्दर आ गईं।
अब मैं उनके सामने नंगा खड़ा था, मेरा लण्ड देख कर वो कामुकता से हँसने लगीं।

फिर मेरे नजदीक आकर खरोंच देख कर हँस कर बोलीं- तुम तो बहुत बाल-बाल बचे..
मैंने जल्दी से कच्छी पहनी और झट से बोला- देख कर तो आतीं चाची..।
उनकी कच्छी बहुत छोटी थी। मेरा लवड़ा उसमें फूला हुआ दिख रहा था.. बगल से झांटें निकल रही थीं।

अब चाची दवा लगाने लगीं, उनका हाथ मेरे लण्ड से छू रहा था, मेरा लंड उनके स्पर्श से खड़ा हो गया।
कुछ इस तरह से उन्होंने दवा लगाईं कि लौड़ा कच्छी से बाहर आ गया।
चाची बोली- इतना बड़ा कर लिया है.. इसे अन्दर करो..
फिर खुद ही मेरे लण्ड को पकड़ कर चड्डी के अन्दर कर दिया।

उनका हाथ लगने से ही लंड और आतंक फैलाने लगा और फिर से बाहर आ गया अब लौड़ा बेकाबू हो गया था।
लंड की सख्ती देख कर चाची बोलीं- ये जिसके भी अन्दर जाएगा.. उसे मार ही देगा। तुम पूरे जवान हो गए हो.. शादी कर लो।

जब इतनी खुली बात चाची ने बोली तो मैं भी बेशर्म हो गया।
मेरा लण्ड कच्छी में टिक ही नहीं रहा था.. तो मैं बोला- चाची इसका एक ही इलाज है।
मैं उनके सामने ही मुठ्ठ मारने लगा।

चाची ने मुठ्ठ मारते हुए देखा तो उन्होंने भी बोल दिया- मैं मदद करूँ।
मैंने ‘हाँ’ कहा.. तो वो खुल कर बोलीं- एक शर्त पर मुठ्ठ मारूँगी.. तुम्हें मेरी चूत चूसनी होगी.. ये मेरा एक सपना था.. पर तेरे चाचा को ये पसंद नहीं है।
मैंने कहा- ठीक है।
चाची ने मेरा लंड पकड़ा और मुँह में ले लिया।
चाची बड़ी मस्त होकर लण्ड चूस रही थीं.. दस मिनट बाद मेरा माल निकला जिससे चाची का सारा मुँह भर गया।
माल इतना सारा निकला था कि चाची हैरान रह गईं।

फिर चाची मेरे टट्टे पकड़ कर बोलीं- यहाँ कोई माल बनाने की फैक्ट्री लगी है क्या?
मैं मस्ती से मुस्कुराने लगा।
फिर वो मेरा लंड पकड़ कर बाथरूम ले गईं। बाथरूम में चाची ने अपने भी कपड़े उतार दिए। अब मेरे सामने उनकी नंगी साफ चूत थी.. मैं बैठ गया और उनकी फूली हुई चूत को चूसने लगा।

चाची ने शावर चालू कर दिया, मैंने चूत का दाना चूस-चूस कर सारा रस निकाल दिया।
चाची बोलीं- आह.. अब डाल दो जा लौड़ा.. उह..फाड़ दो चूत..
मैंने चाची को घोड़ी बनाया, लंड पर साबुन लगाया, फिर चूत के ऊपर रगड़ने लगा।

चाची बोली- ज्यादा मत तड़फाओ मेरी जान.. डाल दो ना अन्दर.. बना दो मेरी चूत को भोसड़ा।
मैंने ‘फचाक’ से धक्का मारा.. पूरा लंड चिकनाहट के कारण सटाक से चूत के अन्दर घुसता चला गया।
चाची तड़फने लगी- ओह्ह.. बाबाजी.. मार डाला रे.. लंड है कि लोहे की रॉड.. तेरा टोपा मेरी बच्चेदानी को फाड़ रहा है रे..
वास्तव में चाची की चूत बहुत कसी हुई थी.. लौड़ा चूत पर कहर बरपा रहा था।

मेरा सुपारा आंवले जितना बड़ा होने के कारण चूत में फंस सा रहा था.. जिससे मुझे भी दर्द हो रहा था.. पर चुदाई में मजा आ रहा था।
दस मिनट बाद चाची की चूत ने लंड को और अधिक कस लिया, चाची सिसकारने लगीं, मेरा टोपा भी फूलने लगा, हम झड़ने वाले थे।
मैंने उनकी चूची मसकी और इशारा किया तो चाची ने कहा- अन्दर ही आने दो।

अब हमारी आँखें बंद हो गई थीं, एक आनन्द की लहर दौड़ उठी, हम दोनों एक साथ ही झड़ उठे। चाची की बच्चेदानी मेरे माल से भर गई थी। फिर चूत ने लंड को आजाद किया, लंड बाहर आया.. तो चाची ने उसे चूमा और कहा- वाह मेरे शेर.. तुम असली मर्द हो। फिर हम दोनों नहा कर सो गए, रात को दो बार फिर चुदाई की। चाची की चूत सूज गई थी.. पर वे मेरे लंड की दीवानी हो गई थीं।

कुँवारी चाची की चुदाई - सुहागरात से पहले ही चाची को चोदा

Chachi ki seel tod chudai ki


मेरी घर में बहुत इज्जत है क्योंकि मैं पढाई में बहुत तेज हूँ और छोटे चाचा 8 क्लास के बाद नहीं पढ़े। जब मैं शादी में गया तो चाची को देखता ही रह गया। वो बहुत मस्त थी, उस समय उनका फिगर 32-28-34 था। चाचा और चाची की जोड़ी बिल्कुल नहीं जम रही थी, जैसे लंगूर के हाथ में अंगूर या हूर!

मन तो कर रहा था कि ये अंगूर मुझे खाने को मिल जाये!

घर में शादी के बाद एक रिवाज़ की वजह से पहली रात चाची को अलग सोना था। घर पर मेहमान काफी थे इसलिए मैं पहले से जा कर चाची के कमरे में सो गया। चाचा को बाहर ही सोना था।

रात में मेरी नींद खुली तो देखा कि चाची मेरे बगल में सोयी हैं, शायद शादी की वजह से उन्हें थकान बहुत थी इसलिए वो बेधड़क सो रही थी। उनका पल्लू सीने से हट गया था। उनकी काले रंग की ब्रा देख कर मेरा 7 इंच का लंड बेकाबू हो गया।

मैंने धीरे -2 उनके ब्लोउज के बटन खोल दिए। उनकी गोरी-2 चूचियाँ देख कर मेरा लंड फ़नफ़ना रहा था। मैंने हौले से उनकी ब्रा की पट्टी कन्धों से किनारे हटा दी और एक हाथ से चूची को हलके-2 दबाने लगा, दूसरी चूची को अपने मुँह में भर के चूसने लगा।

मुझे लगा चाची जाग गयी हैं पर सोने का बहाना कर रही हैं तो मैं धीरे से उनकी साड़ी को उपर खिसका कर उनकी चूत पर उपर से हाथ फरने लगा। थोड़ी देर में मुझे पैंटी में गीलापन महसूस हुआ। मुझे लगा चाची को मजा आ रहा है तो मैंने धीरे से उन्हें आवाज दी- चाची…!

उन्होंने कहा- कुछ मत बोलो बस करते रहो…!

यह सुनते ही मैं उनके उपर आ गया और उनके रसीले होटों को चूमने लगा..

अब चाची मेरा पूरा साथ दे रही थी…

उन्होंने मेरे पायजामे में हाथ डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया और उसकी सुपाड़े की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी। मैं भी दोनों हाथो से उनकी गोल-2 चूचियाँ दबा रहा था। उनके मुँह से सेक्सी आवाजें आ रही थी- चोदो मुझे मेरे राजा… आज मेरी सुहागरात है… 18 साल से ये अनचुदी है आज इसकी प्यास बुझा दो मेरे राजा…

मैं भी गरम हो रहा था, मैंने उनकी पैंटी को उतार फेंका…और उनकी चूत में मुह लगा दिया। वो शायद एक बार झड़ चुकी थी। उनकी चूत से पानी निकल रहा था, मैं सब पी गया। मैंने दो ऊँगलियाँ उनकी चूत में डाल दी और अंदर बाहर करने लगा।

उन्हें मजा आने लगा…

उन्होंने भी मेरा लंड पकड़ के मुँह में भर लिया और सटासट चाटने लगी…

मैं उनके मुँह में ही झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गयीं। उन्होंने चूस-2 कर फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया…

वो बोली- जान अब और न तड़पाओ! अपनी रानी को चोद दो! मुझे मेरी प्यास बुझा दो…

मैं तो तैयार था, उसने मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के मुहाने पर रखा और कहा- धक्का मारो!

मैंने भी बहुत जोर से पेल दिया पर चूत बहुत टाइट थी, लंड घुसा ही नहीं तो उसने लंड पकड़ कर ढेर सारा थूक मेरे सुपाड़े पर पोत दिया…

अबकी बार मैंने धीरे-2 धकेला तो आधा लंड अंदर चला गया…

वो दर्द से पागल हो गई, बोली- निकालो! बाहर करो! मैं नहीं सह पाऊँगी!

पर अब मैं कहाँ मानने वाला था, मैंने उसे कमर से पकड़ कर पूरे जोर से एक धक्का मारा और लंड उसकी चूत की गहराइयों को छू गया…

वो दर्द से रोने लगी पर मैं धीरे धक्के लगाने लगा। थोड़ी देर में उसे भी मजा आने लगा, उसके मुँह से आवाज निकलने लगी थी- चोदो… और जोर से… आह… आह… मेरे राजा… मुझे जन्नत की सैर कराओ… और अंदर डालो… आह… सी…सी…

आह… मैं पूरे जोर से पेले जा रहा था- हाँ रानी… ले… खा ले… पूरा मेरा खा जा… ले… ले… पूरा ले… आह… राजा… मैं गई… सी… थाम लो…मुझे… आह…

मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी…10-15 धक्कों के बाद हम दोनों साथ ही झड़ गये… मैंने अपनी सारी गर्मी उसकी चूत में भर दी… मैंने उठ कर देखा- खून से उसकी साड़ी लाल हो गई थी… मुझे गम न था आज एक कुंवारी चूत का रसपान जो किया था… उस रात मैंने उसे 4 बार चोदा… वो शायद सबसे हसीं रात थी…

17 साल की कुंवारी लड़की की सील तोड़कर चुदाई

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हमने अपने घर के नीचे के हिस्से को किराये पर दिया हुआ है। वहाँ पर तीन परिवार रहते हैं। एक परिवार में एक पुरुष और दो नेपाली लड़कियाँ रहती हैं, जो बहुत सुन्दर हैं। दूसरे परिवार में एक मियां-बीवी रहते हैं। उसकी तो बात ही मत पूछो। चूचे मध्यम आकार के लेकिन एकदम तने हुए, रंग गोरा। हमारे नीचे वाले बाथरूम के ऊपर तक दरवाजा नहीं है इसी लिए मैं उसके गोरे गोरे मलाई जैसे चूचों के दर्शन कई बार कर चुका हूँ। लेकिन उसकी मेरे साथ सेट्टिंग नहीं हो सकती थी।

अब बात तीसरे परिवार की, उसमें पांच लोग हैं आदमी-औरत उनके दो 10-12 साल के दो लड़के और एक 17 साल की लड़की जिसका नाम कीर्ति है। कीर्ति का रंग सांवला है लेकिन फिगर का क्या कहना, चूचे एकदम तने हुए। यह तो थी जान-पहचान ! अब आता हूँ कहानी या यों कहो की आपबीती पर। कीर्ति बारहवीं क्लास में पढ़ती है। वो रोज शाम को कपड़े सुखाने छत पर आती है। सेक्स कहानी एक दिन मेरी मम्मी ने कहा- कीर्ति आई थी, वो बोल रही थी कि उसने कंप्यूटर सीखना है। मैं मन ही मन खुश होने लगा। वो शाम को 7.00 बजे कंप्यूटर सीखने के लिए आई। मैं उसे कंप्यूटर सिखाने लगा वो मेरी दांई और बैठी थी इसलिए कभी कभी जानबूझ कर मैं माउस चलते समय उसके छाती से अपनी कोहनी लगा देता।उसने कंप्यूटर पर लिख दिया- मनीष आई लव यू। सेक्स कहानी मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि मनीष उसकी क्लास में पढ़ता है।

मैंने उससे बोला- मैं इसके बारे में तेरी मम्मी को बताऊँगा। वो मुझसे कहने लगी- आपको इससे क्या मिलेगा? लेकिन मैं फंस जाऊँगी, मैंने तो गलती से लिख दिया, मैं अब मनीष से प्यार नहीं करती। फिर उसकी मम्मी ने बुला लिया और वो चली गई।अगले दिन उसने ऊपर छत पर जाते समय मेरे कमरे में एक पर्चा फेंक दिया। उसमें लिखा था कि मैं उसकी मम्मी से शिकायत न करूँ, और वो रात को कंप्यूटर सीखने आएगी। मैं शाम को उसका इंतजार करने लगा, वो 7.00 बजे आ गई। सेक्स कहानी वो मुझसे पूछने लगी कि क्या मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। तो मैंने उसे न में जवाब दिया। उसने मुझे हमारी गली की लड़कियों के चक्करों के बारे में बताया। उसने बोला- न तो आप किसी से प्यार करते हैं और न ही मैं।

17 saal ki kuwari ladki ki chudai


मुझे लगा कि उसका इशारा मेरी ओर था। तो मैंने उसे आई लव यू बोल दिया। उसने शरमाते हुए हाँ कर दी। और इस तरह से हमरी प्रेम कहानी शुरू हो गई। जब भी वो छत पर जाने लगती वो मुझसे मिलने आ जाती। कुछ दिनों के बाद मैंने उसके गाल पर चुम्बन कर लिया। मेरी बहन एक साल से होस्टल में रहती थी और मम्मी पापा का भी विचार बन गया पुणे रहते रिश्तेदारों से मिलने का। मेरे कॉलेज शुरु होने वाले थे इस लिए मैंने जाना रद्द दिया। वो दो हफ्ते के लिए जा रहे थे।सेक्स कहानी कीर्ति और उसका परिवार रोज़ रात को सोने के लिए छत पर आते थे। मैंने कीर्ति को बोल दिया रात को नीचे मुझसे मिलने के लिए आये।वो रात के करीब सवा एक बजे मुझसे मिलने आ गई। मैंने उसे अन्दर बुलकर दरवाजा बंद कर लिया।

मैं उसके गाल पर चुम्बन करने लगा, फिर उसके होंठ चूसने लगा।

उसने अपनी ऑंखें बंद कर ली, मैंने उसके छाती पर हाथ फिराया। तो उसने मुझे ऐसा करने से रोका।

लेकिन मैं उसे समझाते हुए उसके चूचे दबाने लगा और वो गर्म होने लगी, मुझे जोर जोर के पकड़ने लगी।

मैंने उसका कमीज उतार दिया। वो शरमा रही थी और अपने हाथों से अपने आप को छुपा रही थी।

मैंने उसके हाथ फ़ैलाए और उसे अपनी बाहों में समां लिया। मैंने उसकी पजामी ब्रा और चड्डी उतार दी। और खुद तो मैं निक्कर में था मैंने उसे इसको उतारने के लिए कहा तो पहले तो उसने मना किया लेकिन मेरे कहने पर उसने उतार दी। सेक्स कहानी फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाकर चूमना चालू कर दिया। वो मदहोश हो रही थी, मेरे चूमते हुए उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और उसकी चूत से पानी बहने लगा। मैं उसका पूरा शरीर चूमने लगा, वो कहने लगी- प्लीज़ ! मेरी प्यास बुझा दो।

उसने मुझे बताया कि वो पहले किसी लड़के के इतना करीब नहीं आई और इस पर मुझे विश्वास तब आया जब मैंने अपना 7 इंच का लंड उसकी कसी हुई चूत में डाला और उसकी चीखें निकल गई।

मैंने अपनी रफ़्तार कम की और उसके होठों को चूसने लगा इससे वो थोड़ी शांत हुई। उसके बाद मैंने अपनी गति बढ़ा दी उसे भी मजा आने लगा और वो भी चूतड़ उठा कर मेरा लंड अपनी चूत की गहराई तक ले जाने लगी। जब उसकी चूत की दीवारे मेरे लंड को दबा रही थी तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

अगले 15 मिनट में वो दो बार अपना कामरस छोड़ चुकी थी। अब मेरी बारी थी, मैंने उसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ। तो उसने बोला कि वो प्रेग्नेंट नहीं होना चाहती।

तो मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुंह पर अपना पानी छोड़ दिया। उसके बाद मैंने 2 बार उसकी चूत और गांड भी मारी। यह मेरी जिंदगी का पहला सेक्स अनुभव था। अब हमें जब भी मौका मिलता है हम सेक्स जरूर करते हैं।

14 saal ki kuwari choot ki chudai



Dosto aaj jo kuwari chut ki chudai ki kahani batane jaa raha hu wo mere mahalle ki ek sirf 14 saal ki kuwari ladki ki chudai ki kahani hai. Uski naam Priya hai. jo ki 14 saal ki hai aur dekhne mein bahut hi jabartdust hai. Hamara Priya ke ghar aur unka hamare ghar aana jaana laga rehta tha. Main jab bhi apni chatt pe chadta to usse dekhta to main dangg reh jaata tha aur neeche aakar muth maar leta tha. Main usse dekhkar ek dum josh mein aa jaata tha aur usse chodne ke baare mein sochne lagg jaata tha. Ek din main apne kamre mein baitha huya net par surfing kar raha tha tabhi bahar kissi ke aane ki awaaz sunayi di. Main uth kar bahar gaya to mummy se pucha ki koun hai to maa ne kaha ki Priya aayi thi aur pooch rahi thi ki,”sunny ghar pe hi hai, maine maths ke question samjhne hai usse.” aur meri maa ne keh ka ki,”woh samajhne ke liye aa rahi hai samjha dena usko,” maine keh diya ki theek hai.
5 min baad woh book le kar aa gayi. Maine usse kamre mein hi bula liya Aur usse samjhaane lag gaya. Woh mere saamne book par jhukk kar dhayaan de rahi mera dhayaan baar baar uski chotti chooti chuchiyon par jaa raha tha aur mera lund bhi dheere dheere khadda hone laga. Itne mein bahar se maa ki awwaz ayyi,”ki main Priya ki mummy ke paas ja rahi hoon.” maine kaha ki theek hai Ab main aur Priya akle the ghar par.maine notice kiya Priya ne mere khadde lund ko baar baar dekh rahi thi. Tabhi maine kaha ki tum thoda apne aap padho main thoda computer par kaam kar loon tabhi usne kaha ki mujhe bhi computer sikhna hai. Maine dheek hai ki theek hai to mere saath computer ke aage baith gayi. Thodi der maine himmat kar ke jaan bhooj kar sexy site khol di. Nangi pictures dekh kar woh thoda sharma gayi maine kaha ki kya huya to woh boli ki yeh band kar do.Aap ye kahani hindichudaikikahani.com paar paad rahe hai. Maine uski jaangh par haath rakhte huye kaha ki kyon to woh kuch nahi boli. Meri thodi si himmat bad gayi aur maine uski jaangh ko halke se dabba diya. Ab mujhse raha nahi gaya aur maine usko kiss kar diya. Toi woh kehne laggi ki yeh tum kya kar rahe ho maine kuch nahi kaha aur usse kass ke pakad liya aur uske hothon ko choosta raha. Ab usne kuch na kehte huye mujhe jor se gaale laga liya. Kuch der main uske hothon ko choosna band kar diya to usne mere hothon ko kiss kar liya.maine apne dono haatho se uski kamar ko neech se pakad liya. Aur krte karte maine uske chutad dabba diye. Mera lund khadda huya tha aur uske pet par lag raha tha usne apne ek haath se mere lund ko pakda aur thodi saham gayi. Tab maine usse poocha ki tum isse dekhna chaahogi to usne haan me sir hilla diyatabhi maine apna lower nichekar diya aur usko kaha ki mera underwear niche utaarr kar kar dekh le. Usne jaisa hi mera underwear niche utaara to mera lund ek dum se uske saame aa gaya.
Usne kaha ki haaye ram itna bada aur mota. Tab maine usse kaha ki ise pakde aur sahlaye usne vaisa hi kiya. Tab maine use computer pe ek 5 min ki sexy film dikhayi aur woh thoda josh mein aa gayi. Tab maine usse kaha ki chalo hum bhi aisa hi kar te hain aur na na karte huye maan gayi. Tab main kaha ki chalo ab mera lund apne munh mein lo to usne kaha ki yeh mere munh mein nahi aayega maine kaha tum try to karo. Tab usne niche baith kar mere lund ko pakad kar use chumne laggi. Jaise hi usne chumna shuru kiya to mujhe aisa laga ki main satwe aasmaan pe hoon. Tabhi usne apna munh khol kar mere lund ka agla hiaas apne munh mein le liya aur usse jor ke choosne laggi. Tab maine usse kaha ki thoda sa apna munh aur khole jaise hi usne apna munh thoda sa aur khola to maine jhatke dekar apna lund aur uske munh mein ghussa diya, mera aisa karne par usne lund munh se nikaal diya maine bhi jyada jabardasti nahi ki.Aap ye kahani hindichudaikikahani.com paar paad rahe hai. Tab main usse kaha ki apne kapde utaar de to usne mana kar diya. Maine usse se poocha ki kyon to usne kaha ki tum hi utaar do.tab maine uske haath uppar kiye aur uska kameez utaar diya usne niche keval underpehna hi pehna hua tha maine uska under under shirt bhi uttar diya . Ab uski dono chuchiyan mere saamne thi chuchiyan thodi chotti thi par maine unko kiss kiya aur unko apne munh mein le liya mera aise kjarne par usko maza aane laga. Chuchiyan chooste huye maine apnba ek haath uski salwaar mein daal diya aur uske panty ke uppar se hi uski kuwari chut ko sehlaane laga. Mera aisa karne se woh aah aah aah aaha ….. Karne lagi. Tab maine uski chuchioyaon ko chodd uske hothon par jor kiss kiya aur ghutno ke bal baith gaya aur dheere dheere uski salwaar kja naada khol diya uski salwaar jhatt se zameen par gir gayi ab woh kewal blue color ki panty mein thi. Tab maine pantgy ke uppar se hi usko chuma uski pantyu thodi gili thi. Tab maine chumna band karke halke se uski panty uttarne laga . Maine dekha ki chut par halke halke se bhoore bhoore baal the . Maine unhe dekhkar madhosh ho gaya tha tha. Maine uski chut ko jor se chuma.
Ab maine usse bed par letne ke liye kaha aur woh bed par chadd kar let gayi. Maine zindagi mein pehli itnio sundar chut dekhi thi baaki maine isse se pehle jin 2 ladkiyon kop choda tha unki chut par ghanne kaale baal the. Jab woh bed par let gayi to maine uski taango ko khola aur uski sundar chut ko nihaarne laga. Phir maine nichhe jhukk kar uski chut ke munh ko khol kar kiss kiya to woh tadap uthi. Tab main Priya ki kuwari chut ko jor jor ke chaatne laga. Chaate huye main kabhie kabhie apni jeebh ko kuwari choot ke andar kar deta jisse se wah tadap uthti. Tyab thodi der baad Priya ki choot se juicy material bahne laga chakhne mein wah namkeen tha. Tab maine uth kar usko chooma aur kaha ki ab main apna lund tumahari chut mein dalne laga hoon isse tumhe thoda dard hoga par tum ghabrana nahi. Maine itna keh kar apne lund ke sir ko Aap ye kahani hindichudaikikahani.com paar paad rahe hai.uski choot par ragdne laga mera aisa karne par wah sisiiyane laggi. Tab maine thoda sa thuk apne lund par aur thoda sa uski choot par lagaya. Aur maine apne lund ka sir uski chut ke munh par rakh diya. Uski choot ka munh bahut tight tha kyonki ki wah kunwari thi. Is liye maine kha ki tum apne hathin se choot ka munh thoda sa kholo. Mera aisa kehne par usne apni choot ka munh khola aur maine apne lund ka sir uski choot mein ghussa diya woh cheekhi aur kahne laggi ki ise bahar nikalo bahut dard ho raha hai. Tab maine jhukk kar uske honthon par apne honth rakh diya aur kiss karne laga.
Woh apna munh khol ke mujhse lipat gayi aur kiss karne laggi. Amine usse kass ke pakad liya. Jab wah thodi shaant huyi to maine kaha ki ab kaisa lag raha hai to usne kaha uski chut mein dard aur jalan ho rahi hai. Tab maine kaha ki thodi der mein tumhe mazza aane lagega par tum chilna mat aur usne haan mein sir hilla diya. Ab amin ahista ahista jhatke marne laga use thoda mazza aane laga to maine ek jor ka jhata mara jisse mera lund 2 inch aur uski kunwari chut mein ghuss gaya woh phir dard tadap uthi maine kuch na sunte huye jhatke marne laga ek aur jhatke ke saath mera lund 5 inch tak uski chut mein chala gaya. Aap ye kahani hindichudaikikahani.com paar paad rahe hai.Ab to wah dard se buri tarah karah rahi thi aur uski aankhon mein aansoo bhi aagaye the par abhi tak mera lund sitrf 5 inch hi ghussa tha aur 4 inch bahar tha. Main phir jhatk marne laga aur 2-4 jor ke jhatko ke baad mera poora 9 inch ka lund uski choot ke andar tha. Wah buri tarah se kanmp rahi thi aur pasine se naha gayi thi. Maine thodi der tak lund uski choot ke andar hi rakha aur ahista-2 jhatke maarne laga. Jab wah thodi shaant ho gayi to maine lund bahar nikaal liya jisse use thodi rahat huyi maine deri na karte huye ek baar phir apna lund uski choot ke munh pe rakha aur is baar 4 jhatko mein hi maine poora lund kuwari chut mein ghussa diya. Maine aisa 3-4 baar kiya to wah jhadd gayi. Jhaddne ke baad uski chut ek dum geeli ho gayi thi aur mujhe lund andar bahar karne mein jhyada mushkil nahi ho rahi thi. Main ab use aaram se chod raha tha aur woh bhi chudayi ka mazza le rahi thi.
Woh bhi apni kamr ko hilla kar mera saath dene lag gayi maine use poocha ki ab kaisa lagg raha hai to usne sharma kar kaha ki mujhe bahut mazza aa raha hai. Lagbhag 25-30 min ki chudai ke baad jab mujhe lagga ki main jhadne wala hoon to maine apna lund uski chut mein se nikaal kar saara virya uske pett par girra diya. Hum dono boori tarah se haanf rahe the. 2 min ruk kar main utha Priya ko saaf karne ke liye kapda lene gaya. Aap ye kahani hindichudaikikahani.com paar paad rahe hai.Jab main kapda lekar aaya to choot ko saaf karne ke liye jab maine uski taango khola to dekha ki uski sundar si gulaabi choot khoon se laal huyi padi hai. Maine use kuch nahi kaha aur kapde se uski choot se khoon ko aur pett se apne virza ko saaf kiya. Maine jab uski taraf dekha to wah muskarai aur mujhe kiss karne ke liye kaha maine usse 25-30 seconds ke liye kiss kiya aur kaha ki ab wah apne kapde pehan le usne kaha ki nahi ki please mujhse ek baar aur karo. Tab maine use kaha ki nahi abhi nahi phiar kabhie abhi tum kapde pehno aur ghar jaayo kahin meri maa aa gayi to usne kaha ki theek hai. Usne apne kapde pehne aur apni book lekar ghar chali gayi. Main us din bahut khush tha kyonki maine zindagi mein pehli baar kissi kunwari ladki ko choda tha.. friends.. kaisi lagi kuwari chut ki chudai ki kahani .



Pados Wali Chachi Ki Jabardast Chudai

 

Wo 33 saal ki hain ek beta hai unka uncle job kartey hain our unki happy married life chal rahi hai hum log kareeb 10 saal se padosi hain wo itni gori hain ki kya bataaoon, ek dum doodh ki tarah hoth gulabi hain, brownish hair medium height aur kafi bhari hui kasi hui body hai unki.
Aksar suit salwar pehnti hain chunni wo zyadatar use nahin karti aise mein boobs tan kar saamne dikhai dete hain kafi bade aur bhare hue boobs. Uncle timely office chale jaatey aur beta school to din mein wo akeli hi hoti hain main kuch tests ki preparation kar raha tha to ghar par hi rehta tha, parents working hain to office chale jaate main aunty se aksar batein karne k bahane khoja karta aur unhein impress
Karne ki koshish mein bhi laga rehta Hamare ghar par landline phone connection hai, kareeb 6-7 saal pehle mobile kafi rare hua kartey they toh aunty, uncle ne unke relatives ko hamare ghar ka phone no. diya hua tha baat karney ke liye to aunty aksar phone karney ya sunne ke liye mere ghar aati rehti thi mujhe bada mazza aata tha unhein dekhne mein chahta tha ki wo hamesha phone par battein karti rahein aur main


Unhein dekhta rahoon kabhi wo suit mein hoti to kabhi gown mein. Ek baar unhone telephone use karne ke baad kuchh paise bhi offer karney chahe or kehti ki jab bill ayega to half bill wo pay karengi is par maine unke kareeb jaate hue bhari saanso ke saath kaha. Aunty ye aap kya keh rahi hai, hum koi pco thodi chala rahe hain paise dene hain toh kahin aur jaiye aisi batein karke dil mat dukhaiye aur kehte hue almost Unhein haathon se choone hi wala tha, phir kuchh sochkar reh gaya. Unhone muskurakar kaha naraaz mat ho, aage se aisi baat nahin karoongi aur kehte hue unhone mere balon mein ungliyan pheri mujhe to jaise koi gift mil gaya issi tarah time pass hota gaya main kabhi kabhi unke ghar bhi chala jaata tha aur 10-15 minute baatein karke wapas aa jata main is koshish mein bhi rehta ki unhein koi kaam pade Aur main market wagarah ka unka kaam nipta diya karta jisse wo meri mureed hoti chali gayi aur mummy se aksar kehti ki aapka beta to lakhon mein ek hai. Ek din main ghar mein akela tha, aasman mein badal chhaye hue they thandi hawa chal rahi thi, aise mousam mein dil ki umange jag uthin aur lund maharaj tan kar khade ho gaye mann mein sexy vichaar aa rahe they aur main fantasy world ki sair kar raha tha. Tabhi khyaal aaya ki aunty kya kar rahi hongi maine kuchh socha aur bahar nikal kar unke ghar ki doorbell bajai aunty ne darwaza khola wo ek gown pehne hue thi, baal khule hue they chehre par ek glow tha chunni nahin thi to neck se lekar boobs tak ka area saaf dikh raha tha ek dum gori chikni haathon ki ungliyon mein nailpolish badi sunder lag rahi thi aur pairon ki skin aisi gori aur chikni thi ki chatne ka mann kar raha tha. Unhone muskurate hue kaha kya baat hai dev? 


Me: Apke liye phone aaya hai, maine hold pe rakha hai aap aakar sun lijiye.
Aunty: Ok, chalo aur wo darwaza band karke mere saath mere ghar par aa gayi.
Kyunki maine jhooth bola tha, phone to koi aaya nahin tha isliye thodi der hello karne ke baad unhone kaha ki phone kat gaya hai waise kon tha aur kya keh raha tha?
Me: maine details to nahin poochhi bas unhone uncle ka naam liya aur kaha ki unke Ghar pe baat kara do so mein apko bulakar le aaya chalo koi bat nahin thod der wait kar lijiye, ho sakta hai phir se call aaye.
Aunty: Ok, kuchh der wait kar lete hain waise tum kya kar rahe ho abhi?
Me: nothing much, just studying a bit lekin is waqt mousam aisa ho gaya hai ki padhai mein concentrate nahin kar paa raha hoon lovely mausam hai na.
Aunty: oh, to shayri bhi kar lete ho aisi kya khaas baat hai iss mausam mein?
Me: aap to experienced hain aapko to pata hi hoga kaise jab din mein baadal chhaa jate hain aur andhera hone lagta hai to dil machalne lagta hai sexy ho jaata hai dil aap nahin chahti ki abhi uncle aa jayein aur phir hmmm.
Aunty: Oh badmaash, chup karo kuchh bhi bole jaa rahe ho abhi padhai mein dhyan do, ye sab shaadi ke baad sochna.


Me: aap thik kah rahin hain, lekin soch par kiska control hai, dil hai ki manta nahin aur kehte hue maine apne pant ki zipper ki taraf dekha aunty ne bhi udhar tirchhi nazron se dekha aur phir discussion ko divert karne ki koshish karne lagi. Tabhi unhone kaha ki ab shayad phone nahin aayega main chalti hoon wo jaane lagi aur tabhi unka pair paas rakhi table se takra gaya unhein chot lagi.
Aunty: oh maa mar gayi isi pair mein thand ki wajah se thoda dard pehle se tha aur ab chot lag gayi
Me: Aunty thodi der yahin baith jao maine unhein sofe par bithate hue unka pair table par rakha aur usse sahlane laga, kabhi kabhi munh se phoonk mar deta haye, itna mulayam aur naram paon tha, mann kar raha tha ki isse choom loon. Aunty dard ki


Wajah se dard bhare expressions de rahi thi phir main utha aur pain relief spray laakar unke pair ko spray kiya aur massage karne laga thodi der baad unhein raahat mili aur wo kuchh normal lag rahi thi, phir maine unhein kaha ki main ek mantra jaanta hoon jise padhkar pain wali jagah par haath phero toh dard dheere dheere kam ho jaata hai aur ek din almost gayab ho jaata hai unhone kaha abhi to thik hai jab kabi zaroorat hogi to try kareinge.


Itna kehkar wo ghar jaane lagi, maine unka ek haath apne kandhey par rakha aur unki kamar ko sahara detey hue unhe unke room tak chhodkar aaya unka bhara hua shareer itna pyara lag raha tha ki bas unhein kha jaane ko mann ho raha tha, aur unke badan ki khushboo ne to mujhe deewana kar rakha tha jab main unhein sahara dekar le jaa raha tha to unki neck ke pass fragrance bhi le raha tha aunty ne notice kiya ye sab aur kaha
Tum bahut naughty ho rahe ho maine phir kaha kya karein aaj mausam bada be imaan hai aaj mausam, phir wo muskurati hui apne ghar chali gayi. Ek din main intentionally unke ghar gaya aur unse kuchh change paise maange, haalanki mujhe zoroorat nahin thi par yun hi naya idea socha aur 1000 ka note lekar pahunch gaya ki aunty zara change de do is bahane unke har mein baithne ka mouka mil gaya, waise bina kisi
Bahane ke kya karne jaao isliye main aise hi ulte seedhe ideas lagata rehta tha unhone mujhe change diye, paise lete waqt maine intentionally unka haat pakd liya aur sahlate hue kaha aunty ab aapka dard kaisa hai?

chachi ki chudai ki kahaniya


Aunty: budhdhu dard pair mein hai, haath mein nahin
Me: Oh haan yaad aaya to kya main pair chhookar dekh loon?
Aunty: aashirwad lena hai kya?
Me: Haan kyun nahin, aapse to jo mil jayye achchha hi hai.
Phir aunty aur main wahin baith gaye aur unhone apni salwar ko thoda upar kheencha maine pehle to unke pairon par sar rakhna chaha par unhone mujhe rok liyaaur kaha aisa mat karo main to mazak kar rahi thi meri duaayein to hamesha tumhare saath hain.
Phir maine unke pair par haath phera aur mantra padhne laga, mujhe nahin pata wo kaargar tha ya nahin par mujhe aisa karna bada achchha lag raha tha aur aunty bhi feel kar rahi thi jaise unka dard kam ho raha hai main inki narm skin ke touch se beqaaboo hua jaa raha tha hum sofe par they aamne saamne maine unka pair apni lap mein rakha hua tha aur maze se sahla raha tha.
Me: aunty kaisa lag raha hai?


Aunty: Hmmm it feels good your good at this. Aunty ne deep neck suit pehna tha aur main saamne hi tha to mujhe unka cleavage achchhe se dikh raha tha, suit ki sleeves short thi to gori baahein aur kammal lag rahi thi, honthon par strawberry flavor ki lipstic thi jiski fragrance mujhe madhosh kar rahi thi baalon ka bun bana hua tha ek
Dum tight, gore gaal chamak rahe they body kasi hui hone ke karan suit skin fit ho raha tha jis wajah se unka pet aur nabhi saaf jhalak rahe they. Pet par suit ke beechon beech wo gehra sa crater mujhe apni taraf attract kar raha tha, meri saanse tez ho rahi thi, aunty experienced thi to wo samajh rahi thi par ek dum normal react kar rahi thi tabhi maine inka pair sahlate hue hi apne lund par rakh diya aur mere munh se siski nikal gayi.

           
Aunty: Kya hua mera dard tumein mil gaya kya kehte hue unhone mujhe aankh mari maine josh mein aakar unke pair ki ungliyong ko suck karna shuru kar diya aura b siskiyan lene ki baari thi unki, wo apne hothon ko daanton ke beech dabati hui karahne lagi, main bade maze se unke pair ko chaat raha tha aur kabhi kabhi gudgudi bhi kar deta tha ab maine unhe bahon mein bhar liya aur unke boobs ko apne seeney
Se sata liya, unke low-cut suit mein peechhe se ek haath ghusa diya aur bra ki straps khol di phir maine unke strawberry flavor wale hothon ka swad liya uff hai kya ras tha main madhosh ho chukka tha us waqt main saari duniya ko bhul chukka tha unke upper honth ko apney dono hothon mein dabkar main pyar se licking and sucking kar raha tha, kabhi kabhi apni jeebh unke teeths par ghuma deta bada mazza aa raha tha
Mere dono haath suit ke upar se hi unke bhare bhare boobs ko daba rahe they. Main unke poore shareerpar haath ghuma raha tha aur issi beech maine unki salwar ka nada khol diya aur salwar ko taangon se juda kar diya oh gosh! Kya nazaara tha unki black panty unki gori maansal jaanghon par aise lag rahi thi jaise phool par titli baithi ho. Maine ab apni jeebh ko unki jaanghon par phirana shuru kiya wo siskariyan bharRahi thi aur ek jhatke mein hi unhone apna suit bhi khol diya bra to main pehli khol chukka tha suit ke hatne par bra bhi shareer se alag ho gayi ab unke gulabi nipples mere saamne they main kiss karte hue unke pet par pahunch gaya aur aunty ne der na karte hue meri t shirt ko utar diya, main abi bhi lower mein tha aur wahan ek tent sa bana hua tha.
Aunty: is panchhi ko azad kar do kabse padhphada raha hai


Me: ye chahta hai ki aunty hi isse haathon mein lekar azaad kar dein. Unhone muskurate hue mere lower ko khol diya aur jhat se under wear bhi taangon se alag kar diya, mera lund unke haathon ka sparsh pakar aur mazboot ho gaya, wo pyar se use sahla rahi thi aur kiss bhi kar rahi thi, unhone hath mein lekar uski skin ko aage-
Peechhe kiya to main sihar utha phir apni gulabi jeebh se mere lund ki pink skin ko chatne lagi, main us waqt jannat ki sair kar raha tha main unki gori aur chikni peeth par haath ghuma raha tha, boobs press kar raha tha jab main out of control hone laga to maine aunty ko pakad kar bed par pet ke bal litaya aur unki peeth ko khoob chata or chooma phir unhein seedha karke unke sar se lekar paon tak khoob choosa aur chaata.


Unke boobs ke gulabi circles ko main jeebh se circle banate hue hi choosta raha iske baad chikne pet ko dekha aur apna poora chehra usme ghusa diya aunty chahak uthi hai dev, mere bachche my darling, mere hero tum kamala ho janu main unki nabhi ko jeebh se circle banate hue chaat raha tha, aunty bahut garam ho chuki thi, unki panty jo maine abhi tak nahin kholi thi wo main point par kafi gili ho chuki thi.Aunty: Dev, ab bardaasht nahin ho raha aa jao chad jaao mujh par meri garmi ko shant kar do yaar maine unki panty ko unki taangon se alag kar diya aur unki choot mein do ungliyan ghusa di aunty bed par dohari ho gayi jaise unhein current laga ho main thodi der unhein fingering karta raha aur issi beech wo jahd gayi mera haath geela ho chukka tha.Ab mujhse control nahin ho raha tha maine aunty ko seedha litaya aur apna poora shareer aunty ke shareer se chipka diya honth se honth mil rahe they, seeney se seena, pet se pet taangon se taangein phir maine apne hips ko thoda uthaya aur lund ko choot ke munh par rakhte hue use wahin ragadne laga bada mazaa aa raha tha.Aunty: Ab aur mat tadpao dev main kafi gili ho chuki hoon Me: Chinta mat karo aunty abhi aapka gilapan door kiye deta hoon itna kehkar main ek jhatke mein lund unki choot me sarka diya choot ki deewarein itni chikni ki jaise makkhan par fisal rahe ho lekin choot garam itni thi lag raha tha ki mera lund agar loha hota to wahin pighal jaata.Maine lund ghusaya aur aunty k hothon ko chusta raha, phir achanak poora kund bahar nikal liya phir doosre jhatke mein poora pel diya aunty machal rahi thi aur mere balon mein ungliyan phirate hue meri peeth ko sahla rahi thi. Tabhi aunty ne neeche se dhakke marne shuru kiya phir maine speed pakad li aur 10-15 minute tak wahi in-out, in-out, andar-bahar chalta raha gharshan mein bada mazza aa raha tha. 


Aunty: Kya baat hai jaanu, aise sex karna kahaan se seekha hai tum to bade chhupe rustam ho hai uff ummm ohh uiii
Me: Appko dekhkar sab apne aap hi ho raha hai, aap hi motivating factor ho aur ek cheez aur hai lovely mausam. Aunty hansi aur kaha haan aaj mausam bada be imaan hai aaj mausaa issi beech aunty jahd chuki thi aur maine bhi speed badhai phir final moment par lund ko bahar kheenchkar sara cum unke pet par gira diya aunty aur main dono hi kafi khush they.

दोस्त की चाची की गांड की चुदाई

मैंने अपने दोस्त की चाची की गांड की चुदाई कर डाली एक दिन मैं अपने दोस्त के घर गया तो उसकी चाची से नजर मिली. उनकी कामुक आँखों से पता चल गया कि माल चंचल है और लंड ले सकती है.

प्रणाम, मैं राहुल आप सबके लिए एक सेक्स कहानी लेकर उपस्थित हूँ. मैं काफी समय से adultstories का पाठक हूँ. यह कहानी मेरे दोस्त राज से सम्बन्धित है.

मैं राज के घर अक्सर जाता रहता था. राज मुझसे करीब पाँच साल छोटा है और उसका शरीर व शक्ल एकदम लड़की के जैसा है. मैं उसको लड़की ही की तरह देखता था और उसकी गांड मारने के बारे में सोचता रहता था, पर वो इस सबसे अन्जान था.

एक रोज मैं राज से मिलने उसके घर गया, तो बगीचे में एक जवान मदमस्त औरत को देख कर दंग रह गया. छोटे बाल, गदराया बदन, मखमली गोरी जांघें, भरा हुआ चेहरा, भरे भरे गाल. उसे देखते ही मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया.

राज की आवाज सुनकर मैं चौंका और पूछने पर उसने बताया कि यह उसकी चाची है और कुछ दिनों के लिए आई है. क्योंकि मेरे घर वाले कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहे है. इसलिए चाची मेरी देखभाल के लिए आ गई हैं.

मैं सोच रहा था कि अगर राज अकेला होता, तो मैं उसकी गांड मार सकता था. लेकिन अब मैं उसकी चाची की गांड भी मारने की सोचने लगा था.

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चाची से मेरी निगाह मिली, तो उनकी कामुक आँखों ने मुझे काफी कुछ बता दिया था कि ये माल चंचल है और लंड ले सकती है.

मैंने राज से कहा- चल थोड़ा बाहर चल कर घूमते हैं.

वह मेरे साथ आ गया.

मैंने उससे पूछा- तुम्हारे घर वाले कब जा रहे हैं?

तो उसने बताया- कल सुबह छह बजे की ट्रेन है.

मैंने कहा- कोई बात नहीं, पाँच छः दिन मस्ती करेंगे.

वो बोला- नहीं यार कालेज का एक बहुत जरूरी प्रोजेक्ट है, जिसमें मुझे बहुत व्यस्त रहना होगा.

मैं उससे बोला- कालेज की छुट्टी कर लो.

पर उसने एकदम से मना कर दिया.

मैंने उससे पूछा कि कालेज कब जाओगे?

वो बोला- सुबह आठ बजे और शाम को चार बजे वापस आऊंगा.

यह सुन कर तो मेरा लंड पैन्ट फाड़ कर बाहर आने को हो गया क्योंकि उतनी देर राज की चाची घर में अकेली रह जाने वाली थी. अब मैं उसकी चाची की गांड मारने की योजना बनाने लगा.

मैंने राज से कहा- चलो कल शाम को मिलते हैं.

रात भर राज की चाची मेरी आखों के सामने आती रहीं और मेरे लंड ने मुझको सारी रात सोने नहीं दिया. रात भर मैं उनको चोदने के बारे में सोचता हुआ कब सो गया, पता ही नहीं चला.

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सुबह करीब आठ बजे मेरी आंख खुली, तो मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था. रात भर मैं राज की चाची की कभी गांड, तो कभी चूत मारता रहा. वैसे मुझे गांड की चुदाई करने में ज्यादा मजा आता है.

मैं नहा धोकर तैयार हुआ और नाश्ता करने लगा. मेरे दिमाग में तो राज की चाची ही घूम रही थीं और आज मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था.

मैंने अपने बदन पे तेल की अच्छी मालिश की और लंड की भी बहुत अच्छी तेल मालिश की. मैंने सिर्फ जीन्स पहनी, जिससे मेरा लंड बिल्कुल फ्री था. ऊपर मैंने टी-शर्ट डाल ली ताकि नंगा होने में आसानी रहे. सेक्स का मजा नंगे में ही आता है.

अब दस बज चुके थे. मुझको पता था कि राज कालेज जा चुका होगा और उसकी चाची अकेली होंगी.

मैं राज के घर की तरफ चल दिया और उसके घर से कुछ दूर मोटर साइकिल खड़ी दी. राज का घर थोड़ा सुनसान जगह पर सड़क से थोड़ी दूरी पर है. आसपास के घर भी थोड़ी दूरी पर बने हुए हैं.

मैं घर पर पहुंचा, तो सन्न रह गया. राज की चाची ने आसमानी रंग की स्कर्ट पहनी हुई थी और हल्के पीले रंग का टॉप पहन रखा था. वो नीचे बैठी हुई फूलों को देख रही थीं और अन्जाने में अपने संगमरमर जैसे जिस्म के दर्शन करा रही थीं. उनकी मखमली जांघों में से उनकी सफेद पैन्टी साफ़ दिखाई दे रही थी. उनके बड़े बड़े चूचों का उभार भी उनके चुस्त टॉप से साफ दिख रहा था.

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप पर काबू किया लेकिन मेरा लंड पूरा बेकाबू हो गया था और खड़ा हुआ साफ दिख रहा था.

मैंने कंपाउंड गेट खटखटाया, तो चाची ने मुझे देखा और पूछा- आप कौन हैं?

मैं- जी मैं राज का दोस्त हूँ.

चाची- राज तो घर पर नहीं है.

मैं- कहां गया है?

चाची- कालेज गया है.

मैं- कब तक आ जाएगा?

चाची- शाम तक ही आएगा, बोल रहा था कि काफी काम है.

चाची का भरा पूरा बदन, मांसल गोरी जांघें, भरे भरे गाल मेरे लंड की उठक बैठक करा रहे थे और शायद वो यह समझ भी गयी थीं. मैं उनसे बात करते हुए उनको घूर कर देख जो रहा था. मेरी निगाहें चाची के मदमस्त जोबन पर ही टिकी थीं. मैं उनको हर हाल में चोदना चाहता था.

मैं- आप कौन हैं?

चाची- मैं राज की चाची हूँ.

मैं- आप उसकी चाची लगती तो नहीं हो.

चाची- क्यों इसमें लगने वाली क्या बात है?

मैं- मेरा मतलब आप काफी कम उम्र की एक मार्डन और स्मार्ट लड़की सी लग रही हो ना इसलिए कहा.

मेरी बात पर वो हँस पड़ीं और बोलीं- तुम कहां से आए हो?

मैंने बोला- काफी दूर से.

वो बोलीं- आओ बैठो, चाय लोगे?

मैं अब इस मौकै का फायदा उठाना चाहता था. मैं गेट खोल कर उनके सामने जाकर अपना तना लंड और आंखों में मचल रहे उनको चोदने के इरादे जता देना चाहता था. वो मेरी वासना में डूबी आंखें देख कर इस चाहत को बखूबी समझ भी गई थीं.

मैं उनके एकदम पास जाकर बोला- जी जरूर . पर आपको तकलीफ होगी.

वो भी शायद अब मस्ती में आ गई थीं. वो इठला कर बोलीं- इसमें तकलीफ कैसी. आओ न मुझे भी अच्छा लगेगा.

मुझे अब उनकी तरफ से हरा सिग्नल मिल चुका था.

मैंने कहा कि मेरी मोटर साइकिल बाहर खड़ी है मैं उसको लेकर आता हूँ.

वो बोलीं- ठीक है.

अब मैं थोड़ा रिलेक्स महसूस कर रहा था क्योंकि काफी हद तक मैंने उनको चोदने के लिए पटा लिया था. अब मैं आस पड़ोस के बारे में भी निश्चिंत हो जाना चाहता था कि ऐन वक्त पर कोई आ ना जाए. इस समय पड़ोस काफी सुनसान लग रहा था. लगता था कि जैसे कोई जंगल हो.

मैंने अपनी मोटर साइकिल को घर में लाकर गेट बंद कर दिया. फिर मैं घर के अन्दर चला गया और दरवाजे को बन्द कर दिया. अन्दर मेरी कयामत रसोई में चाय बना रही थी.

राज का घर तो काफी बड़ा था, लेकिन रसोई में फ्रिज की वजह से बहुत तंग जगह हो गई थी. जिस वजह से एक सतह दो लोग आपस में मिले बिना आ जा नहीं सकते थे.

मेरी दिलरुबा रसोई में चाय बना रही थी. मैं तेजी से उनके पीछे आ गया और अपने लंड को उनके चूतड़ों के बीच घुसा के एक धक्का दे मारा.

चाची का मुँह लाल हो गया. वो बोलीं- ये क्या कर रहे हो?

मैंने अन्जान बनते हुए कहा कि मैं पानी लेने जा रहा था.

वो बोलीं- मेरे को कह देते.

अब मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था. मैं बोला- मैं आपको परेशान नहीं करना चाहता था.

यह बोल कर मैं उनकी जांघों को हाथ से सहलाते हुए हट कर कमरे में आ गया. चाची ने हंस कर मुझे समझ लिया.

थोड़ी देर बाद उनकी खनकती हुई आवाज आई- लो इधर आकर ले लो.

मैंने पूछा- क्या ले लूँ.

चाची हंस कर बोलीं- चाय ले लो.

मैं बोला- यहीं ले आओ.

वो चाय लेकर मेरे कमरे में आ गईं. वो जैसे ही कमरे में आईं, मैंने एकदम से कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और उनको पीछे से पकड़ लिया. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके चूचे मसल रहे थे.

एकदम से ये सब होने से वो थोड़ा घबरा सी गईं, पर मेरे बदन और लंड की गर्मी ने उन्हें मस्त सा कर दिया था.

वो दबे हुए स्वर में बोलीं- क्या कर रहे हो?

मैं बोला- आज तेरी गांड मारने का मन है.

मैंने उनको जोर से जकड़ रखा था. मेरा लंड उनकी गांड में लगा हुआ था और मेरे हाथ उनके मम्मे मसल रहे थे.

मैं भी पूरा गर्म हो चुका था और उसे गालियाँ बके जा रहा था- तेरी माँ का भोसड़ा मारूं हरामजादी कल से लंड तड़पा रखा है कुतिया रात भर तेरे गदराये बदन ने मेरी नींद उड़ा रखी थी साली अब भुगत लंड का कहर.

मेरे ठोस बदन कड़कते लंड बदन की गर्मी ने उनको दर्द और मजा दोनों मिल रहा था. चाची के भरे बदन ने मुझे हैवान बना दिया था. मैं अपने लंड के धक्के उनकी गांड में मारे जा रहा था. मेरे दोनों हाथ चाची के चूचे निचोड़ रहे थे.

चाची भी अब तक गर्मा गयी थीं. मैंने मौका देख कर उनका टॉप अलग कर दिया. अब वो छिनाल ऊपर से पूरी नंगी मेरे सामने थी. मैंने जल्दी से अपनी टी-शर्ट उतार दी और अपने नंगे बदन से उनकी नंगी पीठ को सटा दी. मैं चाची के मम्मों की घुन्डियां मसलने लगा. वो भी अब थोड़ी मदहोश सी हो गई थीं.

वो जैसे ही कुछ ढीली पड़ीं, मैंने तेजी से हाथ नीचे ले जाकर उनकी कच्छी को उतार दिया.

उफ्फ अब उनके बदन पर सिर्फ स्कर्ट ही रह गयी थी. मेरे बदन में तो अब खून के बजाय सेक्स दौड़ रहा था. चाची की गोरी मांसल जांघों को तो मैं पहले ही देख चुका था और अब उनके नंगे कूल्हों ने मुझे मानो वहशी बना दिया था.

मैं उनकी फूली गुलाबी चिकनी चूत को देखकर पागल हो गया था. मेरा लंड तो अब पूरा लोहा बन कर सीधा खड़ा हो गया था. मैं बिल्कुल जंगलियों की तरह चाची पर टूट पड़ा. मेरे बोझ की वजह से वो पास के बिस्तर पर दोनों हाथ टिका कर झुक गईं, तो मैंने अपनी जींस निकाल दी.

मेरा लंड छुट्टा सांड की तरह लाल होकर खड़ा था. मेरे दिमाग पे तो जैसे शैतान सवार हो चुका था. मैंने चाची की दोनों टांगों को अपने हाथों से उठा लीं. मेरे हाथों की पकड़ इतनी कसी हुई थी कि वो एक बार के लिए सिहर सी गईं.

मैं गौर से उनकी चूत और गांड देखकर उत्तेजना से हांफ रहा था और मेरा लंड ऊपर नीचे हो रहा था. वो भी अब चुदने को बिल्कुल तैयार थीं. पर मेरे शैतानी दिमाग में कुछ और ही चल रहा था. अब मैं चाची को जरा तड़पाना चाहता था, उनको दर्द देना चाहता था. उनसे अपनी एक रात की तड़फन का बदला लेना चाहता था. मैं भी उनको तरसाना चाहता था.

मुझे पता था कि चाची एक हफ्ते तक तो मेरी ही हैं. मैंने चाची की गांड की चुदाई की सोची, जिससे कि वो चुदवाने को तरसे और गांड में मेरे लौड़े का दर्द झेल लें.

मैंने उनकी टांगें छोड़ दीं, तो चाची ने चुदने के लिए अपनी टांगें थोड़ी चौड़ी कर लीं.

मैंने अपने लंड का सुपारा उनकी गांड के छल्ले के ऊपर करके लगा दिया और उनके चुच्चे मसलने लगा. मेरे लंड की गर्मी उनकी गांड के छल्ले को गर्म कर रही थी. पीछे से मेरा पूरा नंगा बदन उनको गर्म कर रहा था. मेरी गर्म सांसें धौंकनी की तरह उनके कानों को गर्माहट दे रही थीं.

वो अब निढाल हो गई थीं, उन्होंने जैसे ही अपनी गांड के छल्ले को थोड़ा ढीला छोड़ा, मैंने जोर मार कर अपने लंड को चाची की गांड में घुसा दिया.

वो दर्द से तड़प उठीं और उईईई ईईईईई..चिल्लाते हुए बोलने लगीं- क्या कर रहे हो? वो गलत जगह है.

चाची मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थीं, मगर मेरी मजबूत पकड़ की वजह से उनको कोई मौका नहीं मिल पा रहा था.

मैं- साली मैं तेरी गांड मार रहा हूँ.

चाची- आह कुत्ते मुझे दर्द हो रहा है बाहर निकाल इसे.

मैं- कुतिया तूने कल से मुझे परेशान किया हुआ है अब भुगत.

चाची- हरामजादे किसी लड़की से नहीं किया क्या कभी या लड़कों की ही मारता रहा?

मैं- भोसड़ी की, तेरी तो आज गांड ही बजेगी.

यह बोल कर मैंने पूरी ताकत से पूरे लंड को चाची की गांड में अन्दर घुसा दिया. वो दर्द से बिलख पड़ीं उम्म्ह अहह हय ओह …’

पूरा लंड पेलने के बाद मैंने उनको कुछ देर तक ऐसे ही जकड़े रखा. उसके बाद मैंने गांड की चुदाई शुरू की, हल्के हल्के धक्के मारने शुरू किए. वो दर्द से रोने लगीं, लेकिन मुझे उनको रोता देखकर मजा आ रहा था. मेरे धक्कों से जब वो बहुत रोने लगीं, तो मैंने उनको जकड़ कर लंड पूरा घुसा दिया और उनकी चूत सहलाने लगा. थोड़ी देर चूत सहलाने पर उनका दर्द कुछ कम हो गया.

अब मैंने अपनी उंगली उनकी चूत में घुसा दी और चूत में उंगली करने लगा. इससे उनको दर्द और मजा दोनों आ रहे थे. मैंने लंड के धक्के मारने शुरू कर दिए साथ ही साथ चूत में उंगली भी कर रहा था.

कुछ ही पलों में वो एक अलग ही मस्ती में आ गई थीं. चाची दर्द और मजा दोनों एक साथ ले रही थीं. मैं भी अब अपने लंड को पूरा अन्दर बाहर कर रहा था और चाची की चूत में उंगली किए जा रहा था.

चाची को अब गांड मरवाने में मजा आने लगा था और वो अब मेरे लंड पे अपनी गांड के धक्के मार रही थीं. ये देख कर मैंने एक हाथ से उनके चूचे दबाने चालू कर दिए और दूसरा हाथ चूत में उंगली करने में लगाए रखा. मेरा लंड पिस्टन की तरह उनकी गांड में घचाघच करे जा रहा था.

थोड़ी देर में चाची की चूत ने पानी छोड़ दिया और अपनी गांड भींच ली. तभी मेरा लंड भी फैलने लगा, वो दर्द से चिल्लाईं लेकिन मैं अब गांड की तेज चुदाई करने लगा. थोड़ी देर बाद ही मैं झड़ गया. वो भी एकदम से निढाल हो गई थीं और मैं भी बेसुध उनके ऊपर पड़ गया था.

काफी देर बाद वो मेरे नीचे से निकलीं. मैंने भी जल्दी से कपड़े पहने. वो भी कपड़े पहन चुकी थीं.

मैंने उनको कसके अपनी छाती से लगा कर उनको बहुत चूमा- कैसा लगा मेरा अन्दाज?

वो शरमा गईं.

तब मैंने उनके होंठों को चूमते हुए कहा- आज आपकी गांड की चुदाई की कल आपकी चूत चोदेंगे.

ये बोल कर मैंने उनकी चूत पकड़ ली.

वो हंस पड़ीं और मैं वहां से निकल गया.

 

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