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बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा, baap ne beti ko zabardusi choda

वो बोली : "यार, तेरे पापा को तो सारी तरकीबे आती है, इनसे चुद कर सच में बड़ा मजा आएगा ''.. दोनों सहेलियां फिर से अंदर देखने लगी, अपने-२ जहन में खुद को रश्मि कि जगह रखकर चुदते हुए. शायद चौथी बार था उनका , पर फिर भी समीर को देखकर लग नहीं रहा था कि वो थके हुए हैं , सटासट धक्के मारकर वो चुदाई कर रहे थे.


अचानक समीर ने अपना लंड बाहर खींच लिया, और उठकर रश्मि के चेहरे के पास आ गया, शायद इस बार वो उसके चेहरे पर अपना माल गिराकर संतुष्ट होना चाहता था.


एक दो झटके अपने हाथों से मारकर जैसे ही अंदर का माल बाहर आया, काव्या और रश्मि को लगा जैसे दुनिया रुक सी गयी है, स्लो मोशन में उन्हें समीर के लंड का सफ़ेद और मसालेदार दही रश्मि के चेहरे पर गिरता हुआ साफ़ नजर आया..


रश्मि के चेहरे को अपने पानी से धोने के बाद,बाकी के बचे हुए रस को समीर ने उसके मुम्मों पर गिरा दिया, और वहीँ बगल में लेटकर पस्त हो गया.


शायद ये उनका आखिरी राउंड था.


काव्या ने श्वेता को चलने के लिए कहा, पर जैसे ही श्वेता उठने लगी, उसके सर से खिड़की का शीशा टकरा गया और एक जोरदार आवाज के साथ वो शीशा टूट गया, दोनों सहेलियों कि फट कर हाथ में आ गयी.


दोनों जल्दी से उछलती हुई वापिस अपने कमरे कि तरफ भागी और दरवाजा बंद करके चुपचाप लेट गयी.


समीर ने जैसे ही वो आवाज सुनी वो नंगा ही भागता हुआ वह पहुंचा, जाते हुए उसने अपने ड्रावर में से पिस्टल निकाल ली थी.

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वो चिल्लाया : "कौन है, कौन है वहाँ ……''


नंगी पड़ी हुई रश्मि ने अपने शरीर पर चादर लपेटी और वो भी डरती हुई सी बाहर कि तरफ आयी, जहाँ समीर खिड़की के टूटे हुए शीशे को देख रहा था.


रश्मि : "क्या हुआ, क्या टूटा है यहाँ ''...


समीर : "खिड़की का शीशा, जरूर कोई यहाँ छुपकर हमें देख रहा था ''


रश्मि के पूरे शरीर में करंट सा लगा, ये सोचते हुए कि उसकी रात भर कि चुदाई को कोई देख रहा था


रश्मि : "कौन, ऐसे कौन आएगा यहाँ ??"..


समीर ने काव्या के रूम कि तरफ देखा तो रश्मि बोली : "तुम क्या कहना चाहते हो, काव्या थी यहाँ, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, वो भला ऐसा क्यों करेगी, उसमे इतनी अक्ल तो है कि वो ऐसा नहीं करेगी ''..


समीर ने कुछ नहीं कहा, वो समझ चूका था कि काव्या के सिवा और कोई इतनी उचाई पर आ ही नहीं सकता था, नीचे से ऊपर आने के लिए कोई भी साधन नहीं था, सिर्फ बालकनी से टापकर ही वहाँ पहुंचा जा सकता था , पर वो ये सब बाते अभी करके रश्मि को नाराज नहीं करना चाहता था..


इसलिए वो अंदर आ गया और उसके बाद दोनों सो गए.


दूसरे कमरे में काव्या और श्वेता भी थोड़ी देर में निश्चिन्त होकर सो गए.


अगले दिन श्वेता जल्दी ही निकल गयी, शायद वो समीर कि शक़ वाली नजरों से बचना चाहती थी.


रश्मि सुबह चार बजे सोयी थी, इसलिए वो अभी तक सो रही थी, पर समीर को जल्दी उठने कि आदत थी, इसलिए वो अपने समय पर उठ गया था.


श्वेता को नौ बजे के आस पास जाता हुआ देखकर उसने मन ही मन कुछ निश्चय किया और काव्या के रूम कि तरफ चल दिया.


काव्या अपने बिस्तर पर लेटी ही थी कि समीर ने दरवाजा खड़काया , काव्या ने जम्हाई लेते हुए दरवाजा खोला, और सामने समीर को खड़ा देखकर उसकी आँखे एकदम से खुल गयी, उसके दिमाग में रात कि चुदाई कि पूरी तस्वीर चलने लगी फिर से और उसकी नजर अपने आप समीर के लंड कि तरफ चली गयी.


काव्या : "अरे अंकल .... मेरा मतलब पापा , आप .... इतनी सुबह ??".


समीर कुछ नहीं बोला और अंदर आ गया , उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था, वो चलते हुए बालकनी में पहुँच गया


काव्या कि तो हालत ही खराब हो गयी, वो वहाँ से अपने कमरे कि बालकनी कि तरफ देखने लगा, और फिर अंदर आकर काव्या के सामने खड़ा हो गया, वो समीर से नजरे नहीं मिला पा रही थी..


समीर : "तुम ही थी न रात को मेरी बालकनी में, तुम्ही देख रही थी न वो सब ....''


काव्या : "क …क़ …क़्यआ …… मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है ''.


वो इतना ही बोली थी कि समीर का एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके बांये गाल पर पड़ा और वो बिस्तर पर जा गिरी.


समीर चिल्लाया : "एक तो गलती करती हो और ऊपर से झूट बोलती हो …''


इतना कहते हुए वो आगे आया और बड़ी ही बेदर्दी से उसने काव्या के बाल पकडे और उसे खड़ा किया


काव्या दर्द से चिल्ला पड़ी , पर समीर पर उसका कोई असर नहीं हुआ , समीर का एक और थप्पड़ उसके कान के पास लगा और उसे कुछ देर के लिए सुनायी देना भी बंद हो गया.


आज तक उसे रश्मि ने भी नहीं मारा था, और ना ही कभी उसके खुद के बाप ने, और आज ये समीर उसे पहले ही दिन ऐसे पीट रहा था जैसे उसकी बरसों कि दुश्मनी हो.


वैसे समीर था ही ऐसा, उसका बीबी से तलाक सिर्फ इसी वजह से हुआ था कि दोनों में झगडे और बाद में मार पीट काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी, समीर ने तो अपनी बीबी को एक-दो बार अपनी पिस्टल से डराया भी था, और यही कारण था उनके तलाक का, घरेलु हिंसा .


पर समीर का ये चेहरा सिर्फ घर तक ही था, बाहर किसी को भी उसके ऐसे बर्ताव कि उम्मीद तक नहीं थी, सोसाईटी में और ऑफिस में तो उसे शांत स्वभाव का सुलझा हुआ इंसान समझा जाता था, पर गुस्सा कब उसके दिमाग पर हावी हो जाए, ये वो खुद नहीं जानता था ..


और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था.


उसके खुद के घर में , काव्या उसके बेडरूम के बाहर छुप कर उसकी चुदाई के नज़ारे देख रही थी, ऐसा सिर्फ उसे शक था, पर फिर भी उसने अपने गर्म दिमाग कि सुनते हुए जवान लड़की पर हाथ उठा दिया, ये भी नहीं सोचा कि उसकी एक दिन कि शादी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, रश्मि क्या कहेगी जब उसे पता चलेगा कि उसकी फूल सी नाजुक लड़की को ऐसे पीटा गया है..


और काव्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है, जिस समीर पापा कि चुदाई देखकर उसकी चूत में भी पानी भर गया था कल रात और वो उनसे चुदने के सपने देखने लगी थी ,वो उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, वो सब रात भर का प्यार नफरत में बदलता जा रहा था अब..


समीर ने एक और झापड़ उसे रसीद किया और फिर बोला : "सच बोल, तू ही थी न रात को वहाँ ''.


काव्या ने आग उगलती हुई आँखों से समीर को देखा और ना में सर हिला दिया..


समीर ने उसे धक्का दिया और उसका सर दिवार से जा लगा, और उसके माथे पर एक गोला सा बन गया , वो दर्द से बिलबिला उठी.


समीर उसके करीब आया और फिर से उसके बालों को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब आकर गुर्राया : "मेरी बात कान खोलकर सुन ले साहबजादी, ये मेरा घर है, और मेरी मर्जी के बिना यहाँ का पत्ता भी नहीं हिल सकता, फिर से ऐसी कोई भी हरकत न करना कि मैं तुझे और तेरी माँ को धक्के मारकर इस घर से निकाल दू , समझी , अगर यहाँ रहना है तो सीधी तरह से रह ''.


और फिर बाहर निकलते हुए वो पीछे मुड़ा और बोला : "ये बात हम दोनों के बीच रहे तो सही है, वरना अंजाम कि तुम खुद जिम्मेदार होगी ''.


ये सारा किस्सा रश्मि को न पता चले, इसकी धमकी देकर समीर बाहर निकल आया ...... अपने बिस्तर पर दर्द से बिलखती हुई काव्या को छोड़कर .


उसने उसी वक़्त श्वेता को फ़ोन करके रोते-२ सारी बात बतायी , उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि समीर ऐसा कुछ कर सकता है उसके साथ , श्वेता ने काव्या को अपने घर पर आने के लिए कहा.


वो नहा धोकर तैयार हो गयी, तब तक रश्मि भी उठ चुकी थी, और सबके लिए नाश्ता बनाकर टेबल पर इन्तजार कर रही थी, समीर और काव्या जब टेबल पर आकर बैठे तो दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखा तक नहीं.


रश्मि ने अपनी बेटी को उदास सा देखा तो उसके पास आयी और तभी उसके माथे पर उगे गुमड़ को देखकर चिंता भरी आवाज में बोली : "अरे मेरी बच्ची, ये क्या हुआ, ये चोट कैसे लगी ''.


काव्या ने नफरत भरी नजरों से समीर कि तरफ देखा, जो बड़े मजे से नाश्ता पाड़ने में लगा हुआ था, और फिर धीरे से बोली : "कुछ नहीं माँ, रात को बिस्तर से गिर गयी थी, ऐसे बेड पर सोने कि आदत नहीं है न, इसलिए ''.


समीर उसकी बात सुनकर कुटिल मुस्कान के साथ हंस दिया..


अपना नाश्ता करने के बाद काव्या अपनी माँ को बोलकर श्वेता के घर पहुँच गयी.


उसके कमरे में पहुंचकर उसने विस्तार से वो सब बातें बतायी जो आज सुबहउसके साथ हुई थी , जिसे सुनकर श्वेता का खून भी खोलने लगा


श्वेता : "साला, कमीना कहीं का , देख तो कितने वहशी तरीके से पीटा है तुझे, ''


उसने काव्या के माथे को छूकर देखा, वहाँ अभी तक दर्द हो रहा था


श्वेता : "यार, जिस तरह से तू समीर के बारे में बता रही है, मुझे तो लगता है कि ये कोई साईको है, अगर जल्द ही इसका कुछ नहीं किया गया तो शायद किसी दिन ये आंटी के साथ भी ऐसा कुछ ना कर दे ''

ये बात सुनते ही काव्या सिहर उठी, उसे अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार था और उसे वो ऐसे पिटते हुए नहीं देख सकती थी


काव्या : "नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी ....''


श्वेता : "वो ऐसी हरकत ना करे, ना ही तेरे साथ और ना ही आंटी के साथ, इसके लिए हमें कुछ करना होगा ''


दोनों ने एक दूसरे को देखते हुए सहमति से सर हिलाया, दोनों ने मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वो कभी समीर को ऐसा कुछ नहीं करने देंगी


उनके अंदाज को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो अपनी बात पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं

दोनों समीर से निपटने कि रणनीति तैयार करने लगी


श्वेता : "देख, अभी कुछ दिन के लिए तो तू बिलकुल चुपचाप रह , तेरा ये सौतेला बाप क्या करता है, कौन-२ उसके दोस्त है, किन बातों से खुश होता है, किनसे नाराज होता है, ये सब नोट करती रह, उसके बाद हम उसके हिसाब से आगे का प्लान बनाएंगे ''.


काव्या : ''पर इससे क्या होगा …??''.


श्वेता : "हमें बस ये सुनिश्चित करना है कि जो आज तेरे साथ हुआ है वो दोबारा न हो, और न ही कभी तेरी माँ के ऊपर ऐसी नौबत आये ''.


काव्या : "और जो उसने मेरे साथ किया है आज,उसका क्या ''


श्वेता : "उसका भी बदला लिया जाएगा , तू चिंता मत कर , तभी तो मैं कह रही हु, उसपर नजर रखने के लिए, हमें उनकी कमजोरी पकड़नी है, ताकि उसका फायदा उठाकर हम अपनी मर्जी से उन्हें अपने इशारों पर नचा सके ''


काव्या कि समझ में उसकी बात आ गयी ..


थोड़ी देर तक बैठने के बाद काव्या वहाँ से वापिस घर आ गयी.


उसने अब श्वेता कि बात मानते हुए समीर के ऊपर नजर रखनी शुरू कर दी ..


वो कोई भी बात कर रहा होता, उसे सुनने कि कोशिश करती, किन लोगो से मिलता है, कहा-२ जाता है, उन सब बातों का हिसाब रखना शुरू कर दिया उसने..


चुदाई के मामले में एक नंबर का हरामी था वो..


दिन में 2-3 बार सेक्स करता था, एक सुबह ऑफिस जाते हुए और फिर रात को सोने से पहले..


उसकी माँ कि मस्ती भरी चीखे पुरे घर में गूंजती थी, जिन्हे सुनकर वो भी गीली हो जाती थी.


समीर का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं था, ऑफिस और घर के बीच चक्कर काटना , बस यही काम था उसका..


बस एक ही फ्रेंड था, उसका वकील दोस्त, लोकेश दत्त.


जिसकी सलाह मानकर समीर ने रश्मि को प्रोपोस किया था..


दोनों दोस्त अक्सर शाम को बैठकर दारु पीया करते थे और अपने दिल कि बाते एक दूसरे से शेयर करते थे..लोकेश अपनी फेमिली के साथ पास ही रहता था उनके घर के ...


ये सब वो उसी बालकनी में बैठकर करते थे जहाँ छुपकर काव्या ने अपनी माँ को चुदते हुए देखा था.


पर पीने के बाद समीर ये भूल जाता कि शायद काव्या अपने कमरे के अंदर बैठकर वो सब बाते सुन रही है जो वो दोनों कर रहे होते हैं और वो दोनों अक्सर चुदाई कि बाते भी करते थे या फिर ऑफिस में आयी किसी नयी लड़की के बारे में या कोर्ट में आये केस में फंसी बेबस लड़कियो और उनकी कारस्तानियों के बारे में..


कुल मिलाकार उनकी हर चर्चा का केंद्र सेक्स ही होता था..


शादी के एक हफ्ते बाद दोनों दोस्त बालकनी में बैठकर बारिश और दारु का मजा ले रहे थे..


लोकेश : "यार आजकल कोर्ट में एक तलाक का केस आया हुआ है , मिया बीबी अपनी शादी के बीस साल बाद तलाक ले रहे हैं, मैं औरत कि तरफ से केस लड़ रहा हु, वो रोज आती है मेरे केबिन में, अपनी 19 साल कि लड़की के साथ,उसका नाम है रोज़ी..यार, क्या बताऊ, इतनी गर्म और लबाबदार जवानी मैंने कही नहीं देखि , उसमे बोबे देखकर मन करता है अपना मुंह उनके बीच डालकर अपनी सारी फीस वहीँ से वसूल लू … हा हा हा ''


समीर भी उसकी बात सुनकर बोला : "ये उम्र होती ही ऐसी है, कच्चे-२ अमरुद लगने जब शुरू होते हैं न जवान शरीर पर, उन्हें दबाने और मसलने का मजा ही कुछ और है ……''

वो आगे बोला : "वैसे मुझे उसके बारे में भी बात करनी थी, उनकी माली हालत ज्यादा ही खराब है, इसलिए रोज़ी कोई जॉब करना चाहती है, अगर तेरे ऑफिस में कोई स्टाफ कि जरुरत है तो देख ले। ।''


समीर (कुछ देर सोचकर) : "हाँ , चाहिए तो सही मुझे, अपनी पर्सनल असिस्टेंट , रश्मि से शादी करने के बाद वो जगह अब खाली हो गयी है, तू उसे मेरे ऑफिस भेज देना, मैं देख लूंगा ''


लोकेश : "देखा, सिर्फ उसके बारे में सुनकर ही तू उसे जॉब देने के लिए तैयार हो गया, है तो तू पूरा ठरकी , हा हा "

और फिर अपना गिलास एक ही बार में खाली करते हुए समीर बोला : "एक तेरे क्लाईंट कि बेटी है, जिसके मस्त शरीर कि बाते सुनकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया है, और एक मेरी बीबी कि बेटी है, साली ऐसी मनहूस है कि उसे देखकर खड़ा हुआ लंड भी बैठ जाए ''


काव्या छुपकर वो सब बातें सुन रही थी, ये पहली बार था जब समीर और लोकेश उसके बारे में बाते कर रहे थे


लोकेश : "यार, ऐसा भी कुछ नहीं है, मुझे तो उसका मासूम सा चेहरा बड़ा ही सेक्सी लगता है ''


उसने अपने लंड के ऊपर अपना हाथ फेरते हुए कहा


दोनों पर शराब पूरी तरह से चढ़ चुकी थी


Lund Ki Pyasi Ameer Bhabhi

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Usne poocha- Kya main call boy se baat kar sakti hoon?

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Wo- Jee maine number net se liya hai, Kya mere saath aap friendship karoge?

Main- Jee bilkul.. Jarur karoonga.. Aapka naam aur City?

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Main- Waah.. Main bhi hisar ka hoon. Main bahut khush tha kyonki yah pahli aurat thi hisar se..

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Uska ghar andar se bahut sundar aur keemti banawat ka tha. Aur Vidya ko to main dekhta hi raha. Uska gora rang, Patli kamar, Mast tight boobs. Hey bhagwan.. Main to paagal ho gaya. Phir usne mujhe juice pilaaya, Baaton baaton mein ghar dikhaya aur aakhir mein hum bedroom mein aa gaye.

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Hum donon ka poora sharir ek doosre pe ghis raha tha. Phir maine use bed par lita diya aur apne kapde nikaal diye. Usne bhi apni saree blouse peticoat nikaal diya. Aur ab wo sirf laal bra aur safed panty mein thi. Uski chamakdaar jaanghein, Mast sapaat pet, Panty jaise sirf uski chut ko dhake huye thi.

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Wo apne boobs khud hi dabati rahi. Phir wo jhad gayi. Main uska saara paani saaf kar gaya. Maine mera lund itna bada kabhi nahin dekha tha, Fool ke 7 inch ka ho gaya tha. Vidya ne use kuch der masla, Chooma, Hilaaya, aur jhat se mukh mein lekar choosne lagi.

Wo choosne mein itni maahir to nahin lag rahi thi par poori tarah kho chuki thi lund choosne mein.. Main bhi itna uttejit ho chuka tha ki kab uske munh mein paani nikaal diya, Pata nahin chala. Aur wo poora paani pee gayi. Poora lund saaf kar diya.

Kuch der baad mera lund tight ho gaya tha. Usne apne pair faila karke mera lund apni chhoti chut pe rakha. Maine dheere dheere apna aadha lund andar ghusaya. Thoda andar jaane ke baad ab nahin jaa raha tha aage. Maine phir lund thoda peeche kheencha aur aage jhatka diya.

Wo cheekh uthi aur uski aankhon se ansoo aane lage. Main thoda ruka aur dheere dheere jhatke lagane laga. Uski chut mast tight thi. Main use 20 minute tak chodta raha aur baad mein paani uski chut mein nikaal diya. Uske chehre par khushi ke bhaav nazar aa rahe thay.
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Phir ek ghanta hum chipak kar so gaye. Baad mein usne mujhe uthaya aur ek glass doodh diya peene ko. Doodh peene ke baad maine kapde pahne aur uske labon par choomban kiya aur aane laga.

Usne jaate jaate mujhe 5 hazaar rupye diye jo maine waapas kar diye. Aur phir hum donon jab bhi waqt milta, Mast chudai karte.


दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

मैं भागलपुर शहर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं शहर से थोड़ी दूर एक छोटे शहर या कस्बे का रहने वाला हूँ. यह बात दीवाली की है, जब मैं घर गया था. मैं अपने गांव गया, जहाँ चाची ने मुझे बहुत स्नेह दिया और रात को पिछली बार की तरह बदले में उन्हें प्यार दिया. “Adult Stories”

फिर अगली सुबह हमारे पड़ोस में रहने वाली एक दीदी चाची के पास आईं. चूंकि बचपन में वहीं रहा, उनके साथ खेला कूदा, बड़ा हुआ, तो मैं उनके बारे में सब जानता था. मैं उन्हें नमस्ते कहकर वहाँ से चला गया.

अपने कुछ दोस्तों के साथ बगल वाले गांव से निकलती नदी पर नहाने चला गया, जहाँ हमने ठंडे ठंडे पानी में बहुत देर तक उछल कूद की. जिससे मुझे ज़ुकाम हो गया. शाम के समय तक थोड़ा बहुत बुखार भी आ गया था. बस मैं खटिया पर लेटा था.

चाची बहुत देर से कहीं बाहर गई थीं, तभी वो पड़ोसन, जिसे मैं दीदी कहता था … घर आईं. चूंकि मैं अकेला था, तो वे मेरी खटिया पर बैठकर मुझसे बात करने लगीं. खटिया के पास एक रुमाल पड़ा था, जिससे मैं कई बार अपनी नाक पौंछ चुका था. उन्होंने उसे उठाया और मुझे डांटते हुए अंदाज में बोला- क्यों बे सोनू … तू ये सब काम कब से करने लगा?

तो मैं बोला- कैसे काम? मैंने क्या गलती कर दी?

वो मुझे रूमाल दिखाकर बोलीं- ये क्या है?


मैं बोला- रुमाल ही तो है, इसमें क्या गड़बड़ है?

वो- क्या पौंछा है इससे तूने?

मैं- क्या आपको क्या दिखता है … मेरी नाक है. कहीं आपने इसे और कुछ तो नहीं समझ लिया?

वो- अरे बेबकूफ ऐसे पौंछेगा तो कोई भी गलत समझेगा ही.

मैं- ये तो समझने वाले के ऊपर है. वैसे अगर ये सचमुच में वही होता तो!

वो- तो तेरी शामत आ जाती अभी.


मैं- वैसे मुझे वो सब अपने आप करने की कोई जरूरत पड़ती ही नहीं, तो कैसी दिक्कत.

वो- मतलब? किससे करवाता है.

मैं- इससे आपको क्या? सबके अपने अपने राज होते हैं.

वो- कैसे राज? कहीं कोई गलत काम तो करके नहीं आया न.

मैं- अरे थोड़ा शांत बैठो, ऐसा कुछ नहीं है. मैं बस मजाक कर रहा था, केवल मजे ले रहा था और कुछ नहीं.

वो- मजाक ठीक है, लेकिन अगर ये सच हुआ, तो तेरी ऐसी की तैसी हो जाएगी जरा संभल के चलो, अभी बता रही हूँ.

मैं- इसमें गलत क्या है. अगर कोई आपसे काम के लिए कहता है या मजबूरी में आपको करना पड़ता है, तो बात अलग होती है.

वो जरा बिंदास बोलती थीं तो खुल कर कहने लगीं- ऐसा कौन होगा, जो किसी से भी चुदवा ले.

मैं- कुछ लोगों की होती है … मजबूरी या कोई ऐसा, जो आपको पसंद करता हो या फिर चुदाई के शौक़ीन.

वो- तू पहले भी किसी को चोद चुका है.

मैं- अब ये मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि थोड़ा प्राइवेट मामला है.

वो- कुछ भी हो लेकिन अपने पेरेंट्स की इज्जत का ख्याल रखना.

इतना कह कर वो चली गईं, इनके बारे में थोड़ा बहुत बताता हूं. उनका नाम डिम्पल सेक्सी बदन, उम्र-29 वर्ष, पति ने धोखा देकर इन्हें 10 साल पहले छोड़ दिया था, अब ये अपने पेरेंट्स के साथ रहती हैं.

अगले दिन चाची के भाई की तबियत खराब हो गई, जिससे वो अपने मायके घर को मेरे हवाले छोड़कर चली गईं. मैं भी अकेले होने के चक्कर में अपने लंड को हिला रहा था, तभी दीदी ने मुझे आवाज दी और कमरे में आ गईं. मैंने झट से अपने कपड़े ठीक किए.

वो बोलीं- अकेले अकेले क्या कर रहा था? जो तूने मेरी आवाज नहीं सुनी.

मैं- कुछ नहीं, वो अन्दर था तो आवाज नहीं आई.

वो- लेकिन तेरी पैन्ट को देखकर तो नहीं लगता. रुक अब तेरी मम्मी को बताना ही पड़ेगा.

मैं- अरे सॉरी न … कोई कितना कंट्रोल कर सकता है.

वो- तू रुक … अभी बताती हूँ कण्ट्रोल कैसे होता है … तेरी मम्मी को जब पता लगेगा तो अपने आप ही सीख जाएगा.

मैं- बोला न सॉरी … गलती हो गई, चाहो तो कोई सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ … बहुत मार पड़ेगी.

वो- जब मार से डरते हो तो ऐसे काम करते ही क्यों हो.

मैं- माफ़ी मांग रहा हूँ न … और क्या करूँ. आप चाहें तो कोई भी सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ प्लीज.

वो- चल ठीक है … बता किसको याद करके हिला रहा था.

मैं- आप भी न मौके का फायदा उठा रही हो.

वो- लगाऊं फोन?

मैं- हैं भागलपुर में एक दो, जिनके साथ, उन्हीं के उनके कहने पर करता हूँ. बदले में वो भी मुझे खुश रखती हैं.

वो- अभी तो मैं जा रही हूँ, लेकिन अभी तेरी सजा बाकी है, बाद में बताती हूँ.

फिर वो चली गईं. उनकी धमकियों से एक टाइम तो मेरी गांड फट गई थी, लेकिन फाइनली वो मान गईं. अब मैं सोचने लगा कि ये मुझसे क्या करवाएंगी. तभी चाची का फोन आया, उन्होंने बोला- तू डिम्पल के यहाँ खाना खा लेना, मैं सुबह आऊँगी. कुछ देर बाद मैं खाना खाने पहुंचा और उनसे बोला- दीदी भूख लगी है कुछ मिलेगा.

वो बोलीं- हाँ मिलेगा न … रसोई में बैठ, मैं अभी आई.

रसोई में बिठा कर उन्होंने मुझे खाना परोसा और मेरे सामने बैठ गईं. फिर बोलीं- आज तू मेरा एक काम करेगा.

मैं- वैसे भी आपने जो धमकी दी है, उसको ध्यान करके तो करना ही पड़ेगा.

वो- जैसे कि तूने कहा कि सबकी अपनी जरूरत होती है. मेरी भी है … क्या तू उसे ख़त्म करेगा.

मैं- मतलब?

वो- मतलब तू मुझे चोदेगा.

मैं- क्यों आपको कैसे?

वो- अबे पूछ नहीं … बता रही हूँ तैयार रहना.


मैं- ठीक है … और कर भी क्या सकता हूँ.

मैं घर आ गया और उनके बारे में सोच सोचकर उनके प्रति फीलिंग्स लाने की कोशिश करने लगा, लेकिन बात बन नहीं रही थी. मेरे मन में उनके प्रति कोई गलत विचार नहीं आ रहे थे. फिर मैंने उनकी बॉडी को इमैजिन किया. मेरी जितनी हाइट, एवरेज शरीर, एवरेज बूब्स लेकिन गांड थोड़ी बड़ी थी, जिससे थोड़ी बहुत फीलिंग मेरे अन्दर आई. तभी शाम हो गई और करीब 8-9 बजे वो आ गईं.

वो थोड़ा बहुत एडल्ट बात करके बोलीं- चल शुरू हो जा.

मैं- कैसे शुरू हो जाऊं … क्या करूँ?

वो- जो कर सकता है, वो कर.

मैं- मैं अकेला क्या करूँगा, करने को तो बहुत तरीके हैं, लेकिन अकेला कुछ नहीं कर पाउँगा.

वो- अबे भोसड़ी के सीधे सीधे बोल न … क्या करना है, बातों को घुमा क्यों रहा है?

मैं- एक काम करो, पहले एक वीडियो देख लो, फिर ही आप कुछ समझ पाओगी.

मैंने उन्हें एक पोर्न वीडियो दिखा दी, जिससे वो थोड़ा बहुत गर्म हो गईं और मेरे पास बैठकर मुझे किस करने लगीं. मैं भी बराबर साथ देने लगा और उनके बूब्स प्रेस करने लगा. किस करते करते मैंने उनके कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे कपड़े खींचते हुए उतार दिए.

किस के बाद मैं उनके बूब्स को चूमने लगा. उनके मम्मे मेरे अनुमान से कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे. उनका हाथ भी मेरे लौड़े तक पहुँच गया, जिसे वो सहलाने लगीं. फिर मैं उनकी चूत के पास आ गया.

उसके आस पास काफी बाल थे, उन बालों के बीच उनकी कई सालों से अनचुदी चूत रिस रही थी. मैंने उसमें उंगली की और चूत की फांकों के बीच के भाग को, मतलब दाने को अपने होंठों से खींचने लगा. जिससे वो बेड पर गांड उछालते हुए उछलने लगीं.

मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था, जिससे वो थोड़ी ही देर में झड़ गईं. मैंने उन्हें मेरा लंड चूसने को कहा, पहले तो उन्होंने मना किया. फिर मेरी जिद पर उन्होंने तब तक उसे मुँह में लिया, जब तक वो पूरी तरह खड़ा नहीं हो गया. “Adult Stories”

इन सब क्रियाओं के बाद मैं उनकी चुदाई करने जा रहा था. मैंने उनकी चूत के छेद में थूक भरा और धीरे धीरे दो तीन धक्कों में पूरा लंड अन्दर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकालकर एक ही झटके में दोबारा घुसा दिया, जिससे वो चिल्ला कर बोलीं- अबे मादरचोद धीरे कर … मार डाला साले … इतना तेज मत कर.

लेकिन मैं और तेज चुदाई करने लगा. वो बेड पर सीधी लेटी हुई थीं, उनकी एक टांग मेरे हाथ में और दूसरी टांग बेड पर रखी हुई थी. मैं अपना लंड उनकी चूत में पूरा बाहर निकालकर झटके से अन्दर डालता और दोबारा बाहर निकालकर फिर झटका दे मारता, जिससे वो गाली पर गाली बके जा रही थीं.

दीदी ‘धीरे कर … धीरे कर साले …’ चिल्ला रही थीं. थोड़ी देर बाद मैं थोड़ा आराम से करने लगा, जिससे उन्हें भी पूरा मजा आने लगा. खैर मुझे तो मजा आ ही रहा था. मैं दीदी को चोदने के साथ साथ उनके मम्मों को भी मसल रहा था. “Adult Stories”

थोड़ी देर बाद जब मैं थक गया तो मैं लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गईं. अब दीदी अपनी चूत में लंड लेकर चुदवाने लगीं. इस स्थिति में उन्हें किस भी कर सकता था. थोड़ी देर बाद उन्होंने पानी छोड़ दिया, लेकिन मैं उन्हें कुतिया बनाकर तब तक पेलता रहा, जब तक कि मैं नहीं छूटा.

जब सब ख़त्म हुआ तो वो बोलीं- मजा आ गया. शायद ही कोई इस तरह करता होगा … एक बार और हो जाए. मैं उनके दूध दबा कर बोला- जी हुजूर. बस कुछ ही देर में एक बार और पूरे जोरों शोरों के साथ ठुकाई हुई. उन्हें बहुत मजा आया, उन्होंने मुझे बकी गालियों के लिए माफी मांगी और चुदाई के लिए शुक्रिया अदा किया. 

 


दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा

दोस्त की बहन को झाड़ियों में जबरदस्ती चोदा


सभी फ्रेंड्स का मैं शेखर स्वागत करता हूँ. मेरी उम्र 26 साल है. मेरी शादी नही हुई है और कई गर्ल्स को मैंने पटा रखा है. आपको अपनी रोचक स्टोरी सुना रहा हूँ. कैसे मैंने अपने दोस्त की बहन सौम्या को पटा लिया और कैसे अपने प्यार में फंसा लिया. फ्रेंड्स सारी लड़कियाँ बस एक चीज की प्यासी होती है और वो है अपनी खूबसूरती की तारीफ की. बस मैंने ऐसा ही किया और सौम्या को पटा लिया. मेरा दोस्त हरी मेरे घर के पास ही रहता था. मेरी उससे जान पहचान कॉलेज में हुई थी. फिर हमारी दोस्ती बढ़ गयी और मैं अक्सर उसके घर आने जाने लगा. हरी की मम्मी का सुभाव काफी अच्चा था.


वहां पर पहली बार मैंने उसकी बहन सौम्या को देखा. वो मेरे सामने लॉन्ग फ्रोक यानी गाउन में आई थी. वो बहोत गोरी थी बिलकुल दूध की तरह. उसी समय वो मेरे को पसंद आ गयी थी.

हरी- सौम्या!! ये है मेरा दोस्त शेखर!

सौम्या ने मेरी ओर मुस्कुराकर देखा

मैं- हलो!

मैंने उससे हाथ मिलाया और सौम्या मुस्कुरा दी.

हरी- जाओ शेखर के लिए चाय बना लाओ

उसके बाद मैं और शेखर बैठकर बात करने लगे. कुछ देर में सौम्या मेरे वास्ते चाय ले आई. उसी समय से वो मेरे को बहोत पसंद आ गयी थी. मैंने चाय पी और कुछ देर बाद अँधेरा हो गया तो मैं घर चला आया. पर बार बार सौम्या की याद मेरे को सता रही थी. मैंने अपने लोअर में हाथ डाल दिया और लंड पकड़कर हिलाने लगा. सिर्फ हरी की बहन सौम्या की याद मैं कर रहा था. कुछ देर बाद मामला गम्भीर हो गया और मेरा 7 इंच लम्बा लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया. मैं खुद को रोक न पाया और मुठ मारने लगा. आखिर अपने लोअर को मैंने निचे सरका दिया और लंड को कच्छे से बाहर निकाल दिया. मैंने अपनी आँखे बंद कर दी और सिर्फ सौम्या को याद कर करके मुठ मारने लगा. 5 मिनट बाद मैंने अपना पानी छोड़ दिया.

धिरे धिरे हमारी मुलाकाते बढ़ने लगी. कुछ दिनों बाद हरी ने मुझे अपने घर पर क्रिकेट खेलने के लिए बुला लिया. हम सब खेलने लगे. हरी की बहन भी हमारे साथ खेलने लगी. उसने मेरे को कई बार बोलिंग की. आज उसने व्हाईट शर्ट और नीली जींस पहनी थी. जब वो बोलिंग करने के लिए जोर से दौड़ती थी तो उसके दूध बार बार किसी गेंद की तरह उछलते थे जिसे देखकर बड़ा मजा आता था. मेरे को तो सौम्या शुरू से अच्ची लगती थी. नीली चुस्त जींस में उसकी कमर, नितम्ब और गांड का नजारा तो देखने लायक था. आज अच्छी तरह से मैं उसके पिछवाड़े को ताड रहा था. मैंने सौम्या की बाल पर कई बार चौके जड़ दिए. क्रिकेट का खेल मेरे को भी बहोत पसंद था. कुछ देर बाद मेरे सारे ओवर खत्म हो गये और हरी की बैटिंग आ गयी. अब मैं बोलिंग कर रहा था. जैसे ही पहली बाल डाली हरी से उसे बहोत जोर से मारा की बोल बहोत दूर पेड़ों के पीछे चली गयी.

हरी- जाओ शेखर!! बाल लेकर आओ

मैं- न बाबा न!! वहां पर इतनी झाड़ी है. पता नही कहा मार दी तुमने. वहां तो सांप, बिच्छु भी होगा. मैं तो उस झाडी में नही जाउंगा

हरी- कोई बात नही!! मैंने बाल लेकर आता हूँ

वो बोला और चला गया. अब मैं और सौम्या अकेले रह गये. मौका देखकर सौम्या को मै एक बड़े पेड़ के पीछे ले गया और किस करने लगा

सौम्या- अभी मुझे किस मत करो. कही हरी से देख लिया तो गुस्सा करेगा

मैं- उसे बोल ढूंढने में करीब 10 मिनट लग जाएगा

मैंने बोला और फिर सौम्या को पकड़ लिया. उसे पेड़ से सटाकर खड़ा कर दिया और किस करने लगा. फ्रेंड्स, सौम्या बहोत गजब की माल थी. मेरे को पता था की वो अभी कुवारी है और एक वार भी चुदी नही है. जब उसे किस कर रहा था तो वो भी गर्म हो गयी और मेरे को किस करने लगी. कुछ देर बाद हम दोनों ही गर्म हो गये. उसकी सफ़ेद शर्ट पर उसके दूध बड़े बड़े बाहर की तरफ निकले थे. ऐसा लगता था की अभी शर्ट को फाड़कर बाहर निकल आएँगे. जैसे ही मैंने उसके गेंद जैसे दूध पर हाथ रखा वो “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. ऊँ—ऊँ…ऊँ….” करने लगी. उसके बाद तो मैं रुक न सका. और हरी की खूबसूरत जवान बहन की चूचियां मसलने लगा. वो बार बार सिसकारी लेने लगी. मैंने दूसरी तरफ झांककर देखा की हरी कहाँ है. पर वो पेड़ो के पीछे गेंद ढूढ़ रहा था. मेरे पास कुछ समय था.

मैं फिर से सौम्या पर झुक गया और किस करने लगा. कुछ देर बाद वो फ्रेंक हो गयी और अच्छी तरह से मेरे को किस करने लगी. अब उसको भी मजा आ रहा था. मैंने उसे पेड़ से सटाकर खड़ा रखा और तबियत भरके उसके दूध दबा लिए. मुझे इसमें बहोत आनन्द आया. जब जब दूध मसलता था सौम्या …ऊँ…ऊँ सी सी सी सी… हा हा हा.. ओ हो हो….” चिल्लाती थी. मेरे को और मस्ती चढ़ गयी. मैंने उसकी नीली जींस पर चूत के उपर हाथ लगाना शुरू कर दिया. अब तो सौम्या सी सी करने लगी. उसकी जींस की जिप मैंने नीचे सरका दी और हाथ अंदर घुसा दिया. सौम्या की चूत मेरे को मिल गयी. मैं चूत को ऊँगली से हिलाने लगा तो सौम्या अजीब अजीब कामुक आवाजे निकलने लगी. लगा की अभी अपनी चूत का पानी छोड़ देगी. काफी देर तक मैं उसके साथ इंटरटेनमेंट करता रहा. चूत में ऊँगली कर करके मैंने उसकी चूत को गीला कर दिया. फिर हरी आ गया. हम दोनों जल्दी से पेड़ के पीछे से आ गये. उस रात मैंने सौम्या को काल किया.

मैं- कैसी हो जाने बहार?? सच सच वोलना की आज तेरे को मैच में मजा आया की नही??

सौम्या- आज मेरे को बहोत आनन्द आया

मैं- गुलबदन! मैं तेरे को इससे वी जादा आनन्द दे सकता हूँ. पर किसी काम से तुम हरी को वाहर भेज दो बस!

सौम्या- कल मैं हरी को किसी काम से वाहर भेज दूंगी. तब तुम मेरे घर आ जाना

अगले दिन सुबह के 11 बजे हरी को गैस सिलिंडर भरवाने भेज दिया और मेरे को काल कर दिया. मैं तुरंत ही उसके घर आ गया क्यूंकि हम दोनों का घर मुस्किल से 300 मीटर दूर था. सौम्या की माँ कहीं गयी हुई थी. आज तो हम दोनों की सुहागरात होने वाली थी. मैं गया तो सौम्या बाहर सीढियों पर ही खड़ी हुई थी. उसके बाद हम दोनों अंदर चले गये. हम दोनों की किसिंग शुरू हो गयी. दोनों कमरे में चले गये. अब हम दोनों के पास काफी समय था जिसमे हम चुदाई कर सकते थे.

आज तो सौम्या भी पुरे मूड में दिख रही थी. वो मेरे को बड़े जोश से किस कर रही थी. दोनों के लिप्स से लिप्स आपस में टकराकर चिंगारी निकाल रही थी. जितने जोश से मैं उसे चुस रहा था उतने ही जोश से वो मेरे को चुस रही थी. आज उसने फिर से लोग गाउन पहना था. उसे मैंने एक दीवाल से सटाकर खड़ा कर दिया और गोल गोल 36 इंच के दूध को मसलने लगा. वो “…….उई. .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” कर रही थी. फिर हम दोनों ही बेडरूम में चले गये.

मैं- सौम्या!! आज मेरे को तेरे मस्त मस्त दूध देखने है

सौम्या- शेखर! मैं भी चाहती हूँ की तुम मेरे मस्त मस्त दूध मुंह में लेकर चूसो. मेरा वी कबसे चुसाने का दिल कर रहा है

उसने कहा और फिर अपना गुलाबी रंग का गाउन उतार दिया. उसे जव मेने ब्रा और पेंटी में देखा तो सोये अरमान जाग गये. आज कितने दिनों बाद कोई गर्ल को फक करने का मौका मिल रहा था. मैं खुद को किस्मत वाला समझ रहा था. उसने रंग बिरंगी ब्रा और पेंटी पहनी थी जिसमे वो बहोत सेक्सी दिख रही थी. जिस तरह से समुद्र के बीच पर लडकियां स्विम सूट में दिखती है, उसी तरह सौम्या मेरे को दिख रही थी. मैं भी पूरे जोश में आ गया. मैंने खड़े खड़े ही उसे बाँहों में लपेट लिया. उसके बाद तो हम दोनों की खुब किसिंग हुई.

सौम्या- शेखर! क्या तुम कपड़े नही उतारोगे??

मैं- लगता है रानी बड़ी जल्दी में हो. लो उतार देता हूँ

उसके बाद मैंने अपनी टी शर्ट और जींस उतार दी. मेरा लंड 7” का था जो कबसे मेरे अंडरवियर में था और बूंद बूंद करके रस छोड़ रहा था. मैंने वो भी उतार दिया. अब मैं फुल न्यूड हो गया था. धिरे धिरे अपन ने सौम्या की ब्रा और पेंटी भी उतार दी. वो बेड पर सीधी लेट गयी. मैं उसके करीब आ गया और फिर से किसिंग शुरू हो गयी. अब मेरे को उसके रसीले दूध सक करने थे. मैंने उसके चूचियां पर हाथ लगाना स्टार्ट कर दिया. सौम्या के दूध काफी कसे थे और बिलकुल देसी थे. फ्रेंड्स, जिस तरह से तन्दुरुस्त इंडियन गर्ल्स के दूध काफी बड़े बड़े और रसीले होते है, उसी तरह से हरी की बहन सौम्या के दूध थे. मैं हाथ में लेकर दबाने लगा तो वो “……मम्मी…मम्मी…..सी सी सी सी.. हा हा हा …..ऊऊऊ ….ऊँ. .ऊँ…ऊँ…उनहूँ उनहूँ..” करने लगी. मेरे को पता चल गया था उसको भी बड़ा एन्जॉय मिल रहा है. उसके बूब्स काफी चिकने और सॉफ्ट थे.

मेरे को बहोत मजा आ रहा था. उसके बाद मैंने उसके दूध को मुंह में भर लिया और मस्ती से चूसने लगा. अब तो वो और कराहने लगी. मुझे बार बार प्यार कर रही थी. हम दोनों ही अब नंगे थे. मैं तो उसके दूध ऐसे चुस रहा था जैसे वो मेरी वाइफ हो. मैं अच्छी तरह से मुंह चलाकर सक कर रहा था. मेरे को पता था की अगर उसे एक बार में मैंने मजा दे दिया तो वो मेरे से बार बार अपने बूब्स सक करवाएगी. इस तरह मैं अच्छी तरह से सक कर रहा था. सब रस पी रहा था. उसके बाद मैंने दूसरी निपल को मुंह में लगा लिया और फिर से चूसने लगा. मैंने सौम्या की तरफ देखा तो वो आँख बंद की हुई थी. उसके बाद मैं 69 में आ गया.

मैं- बेबी!! तेरे को मेरा लंड आज सक करना है. देखो अच्छे से करना वरना ये ठीक से खड़ा नही हुआ तो तेरे को चुदाई में मजा नही आएगा

सौम्या- शेखर!! मैं सक करती हूँ. पर तेरे को भी मेरी चुत अच्छे से चाटनी है

उसके बाद हम दोनों 69 में आ गये और काम पर लग गये. मेरे मुंह के ठीक उपर सौम्या की चुत थी. मैं जीभ लगाकर अविलम्ब चाटने लगा. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मेरे को तो देख देख कर ही बड़ा आनन्द आ रहा था. मैं जल्दी जल्दी चाट रहा था. उधर हरी की बहन सौम्या वी अपने काम पर लगी हुई थी. मेरे लंड को जल्दी जल्दी हिलाकर मुंह में लेकर चुस रही थी. काफी देर तक दोनों 69 में मजे लेते रहे. उसके बाद मैंने उसको घोड़ी बना दिया. सौम्या ने अपना कंधा बेड पर रखा और अपनी गांड उपर उठा दी. आज पहली बार उसके न्यूड नितम्ब और पिछवाडा देखने का अवसर मिला. फ्रेंड्स, सच में वो कच्ची कली थी.

मेरे को बहोत स्वीट लग रही थी. उसके न्यूड नितम्ब पर मैंने कई बार हाथ फिराया और किस किया. फिर मैंने उसकी चूत सक करना शुरू कर दिया. उसकी चूत बहोत सुंदर थी. मैं जल्दी जल्दी सक (चाटने) करने लगा. धिरे धिरे सौम्या की चुत अपना रस छोड़ने लगी. मैंने कई बार उसकी चुत का पानी पिया.

मेरे को बड़ा आनंद आया. उसके बाद मैंने उसकी चुत फकिंग (चुदाई) शुरू कर दी.

मैंने हल्का सा झुककर उसकी चूत में अपना लंड घुसाकर उसे चोदने लगा. सौम्या “आआआअह्हह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई. .अई..अई…..अई..मम्मी….” कर रही थी. अपना अंगूठा उसने अपने मुंह में डाल दिया था और आँखे बंद करके चूस रही थी जैसे बचपन में छोटे बच्चे चुसते है. ऐसे में वो मेरे को बड़ी प्यारी लग रही थी. मैंने जल्दी जल्दी उसे चोदने लगा जिससे वो जादा से जादा आवाज निकाले और मेरे को और मजा आये. वो अपने सीधे हाथ का अंगूठा चुस्ती रही और एक अच्छी बच्ची की तरह घोड़ी बनकर चुदवाती रही. उसके सेक्सी नितम्ब को मैंने कई बार हाथ से छुकर आनंद लिया. फिर जल्दी जल्दी किसी जोश में आकर पेलने लगा. सौम्या फिर से “ओहह्ह्ह…ओह्ह्ह्ह…अह्हह्हह…अई..अई. .अई… उ उ उ उ उ…” चिल्लाने लगी. मैं रुका नही और जल्दी जल्दी उसे फक करता रहा. एंड में 15 मिनट वाद मैंने खल्लास हो गया.

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा

घर की बात बहन के साथ चुदाई का मजा


मैं आप लोगों को आज अपने जीवन की एक सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।। मेरा नाम राहुल है और मैं एक बिज़नसमैन हूँ। मेरे घर में हम चार लोग हैं- पिताजी, माँ, मैं, और मेरी छोटी बहन! बात आज से 4 साल पहले की है जब मैं बारहवीं कक्षा में था, मेरी बहन दसवीं में थी। मेरे पिताजी अक्सर घर देर से ही आते थे क्योंकि बिज़नस की वज़ह से उन्हें देर हो जाती थी और माँ ज्यादातर अपने घर के काम में या फिर टीवी देखने में व्यस्त रहती थी। मेरी बहन जिसका नाम रिया है अधिकतर पढ़ाई करती रहती थी।

घर की बात बहन के साथ

मैंने कभी उसे गलत नज़र से नहीं देखा था। मगर एक दिन मैं अपने कंप्यूटर पर ब्लू फिल्म देख रहा था कि एकदम से रिया मेरे कमरे में आ गई मैंने उसको देखते ही कंप्यूटर बंद कर दिया मगर उसने सब देख लिया था लेकिन वो कुछ बोली नहीं। मैं उससे कुछ नहीं कह पाया, वो हिम्मत करके मेरे पास आई और बोली- भईया मुझे यह सवाल नहीं आ रहा, इसको हल करने में मेरी मदद करो। मैंने कहा- ठीक है !

लेकिन मैं उससे नज़रें नहीं मिला पा रहा था। मैंने उसका सवाल हल कर दिया। फिर वो जाने लगी तो मैंने उससे बोला- जो भी तुमने देखा है, वो किसी को मत बताना !

तो वो बोली- भईया, मैं किसी को नहीं बताउंगी पर यह सब अच्छी चीज़ नहीं हैं, आप मत देखा करो !

मैंने उससे कहा- ठीक है !

फिर वो चली गई लेकिन उस दिन मुझे उसे देख कर कुछ अजीब सा महसूस हुआ, मेरे दिल में उसके लिए गलत ख्याल आने लगे। मैं आपको बता दूँ कि रिया देखने में बहुत ही सेक्सी है। उसका फिगर 34-26-34 है, रंग हल्का साँवला है। जो भी उसको एक बार देख ले, उसका लंड अपने आप ही खड़ा हो जाए।

दो दिन बाद दोपहर के वक़्त माँ घर का काम निपटा कर सो रही थी और मैं अपने कमरे में पढ़ रहा था। इतने में रिया आई और बोली- भईया उठो, मुझे एक सवाल समझ नहीं आ रहा, मुझे समझा दो।

तो मैं उठ कर उसे सवाल समझने लगा। लेकिन आज उसके मेरे पास बैठने से मुझे कुछ-कुछ हो रहा था, उसकी खुशबू मेरी साँसों में भर रही थी। मैं सवाल पर ध्यान नहीं लगा पा रहा था कि इतने में वो बोली- भईया, क्या बात है ?

तो मैं बोला- मुझे बहुत नींद आ रही है इसलिए मैं यह सवाल नहीं कर पा रहा हूँ !

तो वो बोली- भईया, नींद तो मुझे भी आ रही है ! ऐसा करते है ख़ी कुछ देर के लिए सो जाते हैँ, बाद में सवाल कर लेंगे।

इतना कह कर वो आपने कमरे की तरफ जाने लगी तो मैंने उससे कहा- रिया, कहां जा रही है? यहीँ पर सो जा ! थोड़ी देर में तो उठ कर सवाल करना ही है।

तो वो बोली- ठीक है !

फिर वो मेरे बगल में आकर सो गई। मैं भी सोने का नाटक करने लगा। लेकिन नींद तो आ ही नहीं रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने आपना एक हाथ हिम्मत करके उसके चूचों पर रख दिया और कोई हरकत नहीं की ताकि उसको ऐसा लगे कि गलती से नींद में रखा गया हो।

थोड़ी ही देर में उसकी साँसें तेज चलने लगी। फिर मैंने हिम्मत करके उसकी टांग के बीच अपनी टांग फंसा दी। अब वो मेरी पकड़ में थी, उसकी साँसे बहुत तेज चल रही थी पर उसने अभी तक कोई विरोध नहीं किया तो मेरी हिम्मत बढ़ गई।

मैंने अपने हाथ से उसके चूचे मसलना चालू कर दिया, कुछ देर बाद वो बोली- भईया, यह क्या कर रहे हो?

तो मैंने उससे साफ़ साफ़ कह दिया- मैं तुझे प्यार करता हूँ और जब भी तू मेरे सामने आती है तो मैं अपने होश खो बैठता हूँ।

वो बोली- भईया, यह सब सही नहीं है ! अगर किसी को पता चल गया तो? और वैसे भी हम भाई-बहन हैं।

मैंने उससे कहा- किसी को पता नही चलेगा ! और भाई-बहन हैं लेकिन हैं तो लड़का-लड़की ! इतना तो सब में ही चलता है ! आखिर एक दिन तो तुम्हें किसी न किसी से चुदना ही है तो अपने भाई से ही क्यों नहीं !

इतना कह कर मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ लेने लगी और साथ में हल्का सा विरोध भी कर रही थी। तो मैंने उससे कहा- तुम मेरा साथ दो तो तुम्हें बहुत मज़ा आएगा और घर की बात घर में ही रहेगी।

तो उसने करवट ली और मेरे चेहरे के सामने अपना चेहरा ला दिया और बोली- ठीक है, लेकिन किसी को पता नहीं चलना चाहिए !

मैंने उससे कहा- तू फिक्र मत कर !

फिर उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और दस मिनट तक हम एक दूसरे के होंठ चूसते रहे। फिर उसके बाद मैंने उसका कुरता उतार दिया और फिर ब्रा भी उतार दी।

क्या क़यामत लग रहे थे उसके चूचे !

मैंने एक चूचे को मुँह में ले लिया और दूसरे को हाथ से मसल रहा था और उसकी सिसकारियाँ बढ़ती ही जा रही थी। फिर उसने मेरी पैंट खोल कर मेरा लंड पकड़ लिया और उसे अपने हाथ से दबाने लगी। मुझे लगा जैसे कि मैं जन्नत में पहुँच गया।

इतनी में मैंने उसकी जींस और पेंटी नीचे सरका दी। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के बगल में लेटे थे। मैंने देर न करते हुए उसे अपनी बाहों में समेट लिया और कहा- मैं तुम्हारे बदन की गर्मी लेना चाहता हूँ, इसका अहसास लेना चाहता हूँ !

रिया बोली- केवल आप ही नहीं मैं भी यही चाहती हूँ !

उसका इतना कहना था कि मैं तो खुशी से पागल हो गया। फिर मैंने अपनी जीभ से उसका पूरा बदन चाटा, फिर मैं उसकी टांगों के बीच गया और उसकी गुलाबी पंखुड़ी वाली चूत मेरी आँखों के सामने थी। उसकी चूत में हल्के-हल्के बाल थे। मैंने जैसे ही अपनी जीभ उसकी चूत पर रखी, वो तो जैसे पागल ही हो उठी और उसके पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया।

वो बोली- भईया, मैं मर जाउंगी !

और मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ घुसा दी तो वो बोली- भईया, मुझे भी आपका लंड चूसना है !

तो हम 69 की मुद्रा में आ गए। अब हम दोनों 10 मिनट तक एक-दूसरे को ऐसे ही चूसते रहे और फिर हम दोनों एक एक करके झड़ गए। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के ऊपर लेट गए। थोड़ी ही देर में हम फिर से गर्म हो गए और मैं उसकी चूत में ऊँगली करने लगा तो वो बोली- भईया, अब नहीं रहा जाता ! अपना लंड अन्दर डाल दो !

मैं उसकी टांगो के बीच आ गया, उसकी चूत अभी कुँवारी थी और मैं उसे दर्द नहीं पहुँचना नहीं चाहता था, इसलिए मैंने पहले अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया, फिर उसकी चूत पर भी थूक से मालिश कर दी। मेरा लुंड सात इंच लम्बा और तीन इंच मोटा है।

उसके बाद मैंने अपना लंड रिया की चूत पर लगाया और हल्के-हल्के लंड को अन्दर करने लगा, पर जा नहीं रहा था इसलिए मैंने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो रिया जैसे तड़प सी गई और उसके मुँह से आह की आवाज़ निकल गई। मेरे लंड का सुपारा अन्दर जा चुका था। फिर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया और उसके चूचे मुँह में लेकर चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैंने हल्के-हल्के लंड अन्दर डालना चालू किया और बीच बीच में हल्का सा धक्का भी मार देता था जिससे कि उसकी चीख निकल जाती थी। लेकिन मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख रखे थे जिससे उसकी चीख बाहर न जाये। अब तक मेरा पूरा लंड उसकी चूत में जा चुका था। उसकी चूत बहुत ही कसी थी और मैं हल्के-हल्के अपने लंड को अन्दर-बाहर करने लगा। शुरु में तो उससे थोड़ा दर्द हुआ पर फिर उसे भी मज़े आने लगे और वो अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी।

अब हम दोनों चुदाई का पूरा आनंद ले रहे थे। वो कह रही थी- भईया और जोर से !

मैं भी रिया से कह रहा था- देख ! बहन को अपने भाई से चुदने में कितना मज़ा आता है !

वो बोली- हाँ भईया, सही में बहुत मज़ा आ रहा है ! यह तो सबको करना चाहिए ! लेकिन दुनिया के ये झूठे रिवाज़ हमें रोके रखते हैं। भईया, मैं तो ये सोचती हूँ कि कोई भी किसी के साथ भी चुदाई कर सकता है। इससे क्या फर्क पड़ता है कि वो रिश्ते में क्या लगते हैं, आखिर वो हैं तो मर्द और औरत ही !

और हम ऐसे ही बातें करते करते चुदाई का आनंद लेते रहे। शायद रिया एक बार झड़ चुकी थी, अब मैं भी चरम सीमा तक पहुँच चुका था और फिर उसके बाद हम दोनों एक साथ एक दूसरे में समां गए और अपना अपना पानी एक दूसरे में मिला दिया और एक दूसरे को पूरी ताकत से पकड़ लिया।

फिर हम दस मिनट तक ऐसे ही पड़े रहे और उसके बाद बाथरूम में जा कर एक दूसरे को साफ़ किया। हम लोग उस वक़्त भी बिलकुल नंगे थे, मुझे रिया के चूतड़ दिखाई दिए बिल्कुल गोल-गोल और मुलायम ! बिल्कुल गोरे-गोरे और चिकने !

मेरा लंड फिर से जोर मारने लगा। मैं उसके पास गया और उसे अपनी बाहों में उठा लिया और ले जाकर उसे फिर से बिस्तर पर डाल दिया।

वो बोली- भईया, अब क्या?

मैंने उससे कहा- बहन, मुझे तेरी गांड मारनी है !

तो वो बोली- नहीं भईया ! मुझे बहुत डर लगता है, गांड मरवाने में तो बहुत दर्द होगा !

तो मैंने उससे कहा- मैं दर्द नहीं करूँगा, आराम आराम से करूँगा !

वो बोली- भईया, मार लेना मेरी गांड, लेकिन अभी नहीं, अभी बहुत देर हो गई है और माँ भी उठने वाली होगी हम गांड का प्रोग्राम किसी और दिन करेंगे।

मैं मान गया और उसके होठों का एक लम्बा चुम्मा लिया और उसके चूचे भी दबाये। फिर हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और फिर रिया चाय बनाने चली गई।

मैंने और रिया ने मिलकर चाय पी। फिर वो अपने कमरे में चली गई।

मैंने रिया की गांड कैसे मारी, यह मैं अगली कहानी में बताऊंगा।

मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा

मेरे भाईजान और अब्बू ने मुझे चोदा


सबसे पहले मैं आपको अपने और अपनी फैमिली के बारे में बता देती हूँ. मेरी उम्र 20 साल है, मेरी अम्मी सईदा की उम्र 42 साल है. मेरी अम्मी घरेलू औरत हैं. अब्बू का नाम हमजा है, उनकी उम्र 45 साल है. वो एक बढ़िया बिजनेसमैन हैं. अब्बू का बिजनेस भी काफी बढ़िया चल रहा है.

मुझे घर में पैसे की जरा सी भी कमी महूसस नहीं होती है. अम्मी अब्बू मेरी हर जरूरत का ख्याल रखते हैं.


मेरा बड़ा भाई कासिब है, उसकी उम्र 23 साल है. मेरी छोटी बहन अस्मा की उम्र 18 साल है. खूबसूरती में मैं किसी से कम नहीं हूँ. मेरी अम्मी देखने में हमारी मां कम, बड़ी बहन ज्यादा लगती हैं और वे अपनी उम्र से 8-10 साल कम की लगती हैं. मोहल्ले के बहुत लड़के मुझे चोदने की फिराक में रहते हैं.


ये माँ बाप सेक्स कहानी अगस्त की है. उस समय मैंने कालेज में दाखिला लिया ही था और मेरी छोटी बहन अस्मा 12वीं में थी. कासिब कालेज के आखिरी साल में था.


एक दिन रात को जब मैं पेशाब करके अपने कमरे में आ रही थी, तब अम्मी अब्बू के कमरे की लाइट चल रही थी.

मैंने सोचा कि रात को सोते समय अम्मी लाइट बंद करना भूल गई होंगी.


पर तभी मेरे कान में अम्मी की मादक सिसकारियां सुनाई दीं. मैं घबरा गई और सोचने लगी कि अम्मी ऐसे आवाजें क्यों कर रही हैं.


कौतूहलवश ये सब देखने के लिए अम्मी अब्बू के कमरे की तरफ को चली गई और कमरे के अन्दर का नजारा देख कर मेरे होश उड़ गए.


अन्दर कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे थे. अम्मी अब्बू के आगे घोड़ी बनी हुई थीं और अब्बू ने पीछे से अम्मी की चूत में अपना लंड डाल रखा था. वो जोर जोर से अम्मी की चुत में लंड के धक्के लगा रहे थे.


अम्मी भी अपने चूतड़ों को पीछे करके मजे से चुद रही थीं … और ‘अआआह उउउह ओओह ..’ कर रही थीं.


ये सब देख कर मेरे जिस्म में अजीब सी सनसनी फैल गई और मेरी चूत में चीटियां रेंगने लगीं.


मैंने अपना हाथ अपनी कैपरी में डाल लिया. मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई और मैं अपने हाथ से अपनी चूत मसलने लगी.


एक मिनट बाद ही मैंने अपनी कैपरी और कच्छी नीचे सरका दी और पूरी मस्ती में अम्मी अब्बू की चुदाई देखने लगी.


कुछ देर कुतिया बना कर चोदने के बाद अब्बू ने अम्मी की चूत से लंड निकाल लिया.


मैं अब्बू का लम्बा मोटा लंड देख कर डर गई. मैंने सोचा कि क्या लंड इतना बड़ा भी होता है. दूसरी ओर अम्मी की चूत एकदम चिकनी झांट रहित पड़ी थी.


ये सब देख कर मैं बेहद गर्म हो गई थी. मेरे हाथ की उंगलियां लगातार मेरी चूत में चल रही थीं. मेरी चूत पर बहुत घने बाल थे, जिससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था.


अब्बू ने अम्मी की गांड पर हाथ फेर कर कुछ इशारा किया, तो उसके बाद अम्मी चित लेट गईं.


इस पोजीशन में मुझे अम्मी की चूत साफ़ दिख रही थी. उनकी चुत का सुराख खुल बंद हो रहा था. तभी अम्मी के ऊपर चढ़ गए. उन्होंने एक ही झटके में अपना लंड अम्मी की चूत में डाल दिया और जोर जोर से धक्के लगाने लगे.


तभी मेरे चूतड़ों पर कुछ गर्म गर्म सा चुभने लगा … मैं डर गई.


जब मैंने घूम कर देखा, तो मेरे पीछे मेरा भाई कासिब नंगा खड़ा था और उसका गर्म लंड मेरे नंगे चूतड़ों पर चुभ रहा था. मैं कुछ करती, इससे पहले ही कासिब ने मेरे मुँह पर अपना हाथ रखा और मुझे उठाकर मेरे कमरे में ले जाने लगा.


मैंने कहा- भाईजान, यहां तो अस्मा सो रही है.


ये सुनकर कासिब मुझे अपने कमरे में ले गया और मुझे बिस्तर पर पटक दिया.


अगले ही पल उनसे मेरी टांगों में फंसी मेरी कैपरी और कच्छी टांगों से निकाल दी और मेरा टॉप भी उतार कर मुझे बिल्कुल नंगी कर लिया.


इसके बाद अपने कपड़े उतार कर मेरा भाई खुद भी नंगा हो गया. वो मेरे जिस्म पर अपना हाथ फेरते हुए मेरे होंठ चूसने लगा.


मैं मस्ती में उसके नंगे जिस्म को देखने लगी,


तभी कासिब ने अपने एक हाथ से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- उउउ मेरी हॉट दिलकश … मेरी प्यारी बहना, तू कितनी खूबसूरत है. मैं ऐसे ही बाहर लड़कियों के पीछे पड़ा था और घर में इतना बढ़िया माल है.


ये कहते हुए उसने मेरा एक चूचा मुँह में भर लिया और अपना हाथ नीचे मेरी चूत से लगा कर बोला- उउउह दिलकश तेरी चूत पर तो जंगल उगा है … बहुत बड़ी बड़ी झांटें हैं. तूने कभी अपनी रसीली चूत की सफाई नहीं की क्या?


मैं भाई के मुँह से चूत सुन कर शर्मा गई और चुप रही.


तभी कासिब ने मुझे चूम कर कहा- मेरी प्यारी बहन को शर्म आ रही है. दिलकश अगर तू ऐसे शर्माएगी, तो मजा कैसे ले पाएगी.

वो मेरी चूत में अपनी उंगली डालने लगा.


मैंने कासिब का हाथ पकड़ लिया और धीरे से कहा- भाई, मेरे यहां बहुत खुजली हो रही है.

कासिब मेरा हाथ अपने लंड पर रख कर बोला- आह दिलकश … देख तेरी चूत की खुजली मिटाने के लिए तेरे भाई का लंड कैसे उतावला हो रहा है.


मैं भी शर्म छोड़ कर बोली- भाई, तो फिर जल्दी से ठोक दो अपना लंड अपनी प्यारी और खूबसूरत छोटी बहन की चूत में … और मेरी चुत की आग बुझा दो.

ये कह कर मैंने जोर से कासिब का लंड दबा दिया.


फिर कासिब ने कहा- दिलकश, तूने अम्मी की चूत देखी है … अम्मी की चूत एकदम चिकनी थी. तेरी चूत पर इतने ज्यादा बाल हैं.

मैंने कहा- भाई, कल सुबह सबसे पहले मैं अपनी चूत के बाल साफ कर लूंगी.

कासिब बोला- मेरी प्यारी बहना, तो क्या अभी मजा नहीं करना है.


मैं चुप रही.


कासिब मुझे उठाकर बाथरूम में ले गया और मुझे फर्श पर लिटा दिया. फिर उसने बाथरूम में रखी अपनी शेव करने वाले रेजर से मेरी चूत साफ की और मुझे लेकर फिर से बिस्तर पर आ गया.


बिस्तर पर आकर कासिब ने मेरी दोनों टांगें खोल दीं और मेरी चूत पर एक लम्बा चुम्मा लिया. कासिब के होंठों की गर्मी से मेरी चूत पिघल गई … और मेरे मुँह से मादक सिसकारियां निकलने लगीं.


मैं मदहोश होकर कासिब का मुँह अपनी टांगों में भींचने लगी और ‘अआह भाई उउह ओहह भाई ..’ करने लगी.

तभी मेरी चूत से रज निकल गया और मेरी मस्ती कुछ शिथिल हो गयी.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मुझे लंड चूसने को बोला. मैंने कासिब का लंड अपने होंठों से हटा कर लंड चूसने से मना कर दिया.


कासिब ने जोर से मेरा चूचा मसल दिया और बोला- साली छिनाल रंडी कुतिया … मेरा लंड चूसने से मना करती है. चल भाग यहां से … और साली रंडी जाकर किसी रंडीखाने में बैठ कर अपनी चूत का भोसड़ा बनवा कर अपनी और अपने परिवार की इज्जत बढ़ा.


मैंने भी गुस्से से कहा- साले बहनचोद … अभी तू अपनी बहन को चोद कर परिवार का बहुत बड़ा नाम कर रहा है. मैं अभी ऐसे नंगी ही अम्मी के पास जाकर तेरी करतूत बताती हूँ.

कासिब मुस्करा कर बोला- जा साली रांड … वहां तेरा बाप तेरी चूत का भोसड़ा बनाने के लिए अपना लंड हिला रहा है.

 

मैं कासिब की बात सुनकर दंग रह गई और बोली- भाई ये तू क्या बोल रहा है … तुझे पता भी है, वो मेरे अब्बू हैं?


कासिब मेरा चूचा मसल कर बोला- दिलकश, जब तू मूतने के लिए बाथरूम गई थी, तब मैं अम्मी की चुदाई कर रहा था और मैं और अब्बू दोनों बहुत दिन से तेरी और अस्मा की चुदाई करने की सोच रहे हैं. पर आज मौका मिला है. और अम्मी अब्बू दोनों अपना इंतजार कर रहे हैं. अम्मी अब्बू के सामने पहले मैं तेरी चूत की सील तोडूंगा, फिर अब्बू तेरी … और मैं अम्मी की चुदाई करूंगा.

मैं अभी कुछ बोल पाती कि कासिब मुझे हाथ पकड़ कर अम्मी अब्बू के कमरे में ले गया.


कमरे में अम्मी अब्बू बिल्कुल नंगे बैठे मेरा इंतजार कर रहे थे. मेरा नंगा जिस्म देख कर अब्बू के मुँह में पानी आ गया और अब्बू मेरे करीब आ गए.


वो मेरा चूचा मसल कर बोले- उन्ह … मेरी प्यारी बिटिया, तुझे चोदने को मेरा लंड बहुत बेचैन है.

ये कहते हुए अब्बू ने नीचे हाथ ले जाकर मेरी चूत को मसल दिया.


मैं ‘आआहहह …’ करके रह गई.

कासिब अम्मी से बोला- साली रंडी, तेरी बेटी अपने भाई का लंड चूसने से मना कर रही है … बोल इससे कि पहले ये मेरा और अब्बू का लंड चूसे, वरना हम दोनों बाप बेटा एक साथ इसकी चूत में लंड डाल कर साली रंडी की चूत का भोसड़ा बना देंगे.

 

अम्मी ये सुनकर भाई और अब्बू के बीच में बैठ गईं और कासिब और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगीं.


भाई और अब्बू दोनों मेरे चूचे मसलने और चूसने लगे. मैं ये सब देख कर मस्त हो गई थी और मदहोशी में ‘अअअआआ अब्बू … उन्ह भाई … आहहह ..’ करने लगी.


अम्मी कासिब और अब्बू का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश मेरी प्यारी बिटिया, अब तू भी अपने भाई और अब्बू का लंड चूस, वरना ये दोनों तेरी चूत को ऐसे फाड़ेंगे कि फिर तू कभी चुदने की बात भी नहीं सोचेगी.


उसी समय भाई ने झट से अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया और मैंने जब कासिब का लंड अपने मुँह में लिया, तो कासिब के लंड की मादक महक मुझे गर्म कर गई.


जब भाई के लंड की खुशबू मेरी सांसों में मिली, तो मैं मदहोश होकर अपने भाई कासिब के लंड को चूसने लगी. तभी अब्बू ने भी अपना लंड मेरे होंठों से लगा दिया. मैं अपने भाई और अब्बू का लंड एक साथ चूसने लगी.


कासिब का लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा था. कासिब का लंड चूसने में मुझे मजा भी ज्यादा आ रहा था.


कुछ देर बाद अब्बू मेरे मुँह में झड़ गए और मैं अब्बू का वीर्य पी गई.


फिर कासिब और अब्बू का लंड छोड़ कर मैं बोली- भाई, आपका लंड अब्बू के लंड से ज्यादा लंबा और मोटा है.


अम्मी ने कहा- दिलकश, तेरे अब्बू अब ज्यादा उम्र के हो गए हैं. अब तो तेरे अब्बू मेरी चुदाई भी ढंग से नहीं कर पाते हैं. तू तो अभी जवान है … इसलिए तेरी चूत की खुजली तो सिर्फ कासिब का लंड ही शांत कर सकता है.


मैंने कहा- अम्मी, भाई का लंड तो बहुत बड़ा है … और मुझे इससे चुदवाने में बहुत डर भी लग रहा है.


अम्मी ने मुझे ढांढस बंधाते हुए कहा- दिलकश तू डर मत, जब कासिब का लंड तेरी चूत में घुसेगा, तब तुझे थोड़ी देर ही दर्द होगा. फिर तो तेरे भाई का लंड, तेरी चूत में खुद ही अपना रास्ता बना लेगा और तुझे बहुत मस्त मजा आएगा.


ये बोल कर अम्मी ने कासिब को कहा- साले मादरचोद … अब जल्दी से अपनी बहन को चोद कर मादरचोद के साथ साथ बहनचोद भी बन जा.


अम्मी ने मेरी दोनों टांगें खोल कर कासिब का लंड मेरी चूत के सुराख पर रख दिया.


अब्बू ने कहा- कासिब … अब जल्दी से तू दिलकश की चुदाई कर … तेरे बाद मैं भी अब अपनी बेटी को अपनी बेगम बनाने को उत्सुक हूँ. फिर हम सब घर में शौहर बीवी की तरह रहेंगे और तेरी मां और दोनों बहनें तेरी और मेरी बीवी होंगी. तू अपनी मां और बहन का शौहर बन जाएगा.


ये सुनकर कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रख कर अभी धक्का लगाने ही वाला था कि तभी अस्मा कमरे में आ गई और बोली- अब्बू, आपने और भाई ने दीदी और अम्मी को तो अपनी जोरू बना लिया … पर मेरा क्या होगा?


अस्मा को देख कर हम सब चौंक गए. अस्मा कासिब का लंड पकड़ कर बोली- भाई, मुझे भी आपकी और अब्बू दोनों की बीवी बनना है.


वो अपने कपड़े उतार कर नंगी हो गई. अस्मा का मस्त चिकना जिस्म देख कर कासिब और अब्बू, अस्मा पर टूट पड़े.


अम्मी ने कहा- सालों, ये रंडी कहीं भागी नहीं जा रही. जरा सब्र से काम लो, इसकी चूत का भोसड़ा भी तुम दोनों के लंड ही बनाएंगे.


ये बोल कर अम्मी, फिर से अब्बू और कासिब का लंड चूसने लगीं. अब्बू और कासिब मेरे और अस्मा के चूचे मसलने लगे.


कमरे में मादक आवाजों का संगीत गूंजने लगा … अअअआआ उन्ह ओओओहह की सिसकारियां गूंजने लगीं.


अम्मी, अब्बू और कासिब का लंड चूसना छोड़ कर बोलीं- दिलकश, चल अब तू अपनी टांगें खोल कर लेट … और अस्मा तू घोड़ी बन जा.


जब मैं टांगें खोल कर लेट गई और अस्मा घोड़ी बन गई.


तभी कासिब ने अपना लंड मेरी चूत के सुराख पर रखा और दूसरी तरफ अब्बू ने अपना लंड अस्मा की गांड से लगा दिया.


कासिब ने एक धक्का लगाया और उसके लंड का सुपारा मेरी चूत में फंस गया और मैं ‘आआहहह मर गई ..’ चिल्ला उठी.


तभी कासिब ने फिर से एक धक्का लगा दिया और उसका लंड मेरी चूत में घुसता चला गया.

मैं दर्द से तड़पने लगी.


कासिब ने मेरे दोनों चूचे अपने हाथ में ले लिए और जोरों से मसलने लगा. चूचे मसलने के साथ ही वो धीरे धीरे लंड के धक्के भी लगाने लगा.

कुछ ही धक्कों में कासिब का पूरा लंड मेरी चूत में समा गया और मुझे भी दर्द के साथ साथ मजा आने लगा.


मैं ‘अआआ उन्ह …’ करके अपने चूतड़ों उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत में लेने लगी.


दूसरी तरफ अब्बू ने अस्मा की गांड में अपना लंड डाल दिया और अस्मा भी दर्द से चिल्लाने लगी.


मगर मुझे मजा लेते देख कर वो बोली- आपा, तुझे तो बहुत मजा आ रहा है … और यहां मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा है. मुझे जरा सा भी मजा नहीं आ रहा.


अम्मी ने कहा- अस्मा, गांड मारने और मरवाने में मजा नहीं आता. असली मजा तो चूत चुदवाने में आता है.


उन्होंने आगे कहा- अभी कासिब के लंड से दिलकश की चूत की सील टूटी है. कुछ देर में दिलकश की चूत अपना रज छोड़ देगी तो कासिब का लंड दिलकश की चूत में अपना रास्ता अपने आप बना लेगा. उसके बाद जब कासिब तेरी चूत की सील तोड़ कर तेरी चुदाई करेगा, तब तुझे भी दिलकश जैसे मजा आएगा.


अस्मा ‘उन्ह आंह ..’ करते हुए अपनी गांड में अब्बू के लंड को झेलने लगी.


अम्मी ने अब कासिब से कहा- साले मादरचोद … पहले मेरा बेटा बना, फिर शौहर बना और अब साले मेरी सौतन बनी बेटी को चोद कर मेरा जमाई भी बन गया. साले अच्छे से चोद अपनी बहन को वरना तेरी गांड पर लात मारूंगी.


ये सुनकर कासिब जोर जोर से मुझे चोदने लगा.


यही कहानी सेक्सी लड़की की आवाज में सुन कर लुत्फ़ उठायें.


मैं अपने चूतड़ों को उठा कर कासिब का लंड अपनी चूत की जड़ तक लेते हुए मजा लेने लगी- अअअआ … उन्ह … ओओओहह भाई … आह और जोर से …


“चोद दे अपनी बहन को … आंह साले भैन के लौड़े और जोर से चोद … तेरा लंड तेरी बहन की चूत में आखिरी छोर तक जा रहा है. आह मुझे बहुत मजा आ रहा है साले जोर से चोद मुझे … अअअआआ साले बहनचोद च..चोओओद.” यही सब कहते हुए मैं एकदम से अकड़ उठी और मेरी चूत से रज निकल गया.


मैं कासिब को लंड निकालने को बोलने लगी.

मगर कासिब पर तो जैसे मुझे चोदने का भूत सवार था. वो मुझे दनादन चोदने लगा और मेरे दोनों चूचे मसलने लगा.

ऑफिस में मेरी बीवी एक साथ 8 लोगों से चुदवा रही थी 

ऑफिस में मेरी बीवी एक साथ 8 लोगों से चुदवा रही थी


मेरी बीवी दीपिका एक बहुत सेक्सी औरत है, उसकी उम्र 26 साल है, हम दोनों मुंबई में जॉब करते है, मेरी बीवी का फिगर 40″38″44 है, दीपिका मोटी है लेकिन बहुत खूबसूरत है।

हमेशा जीन्स टॉप और छोटे कपडे पहनती है, ऐसी बीवी को हर पति दिन रात चोदना चाहेगा। मैं भी यही करता हूँ, हमारी शादी को 2 साल हो गए है मैं पूरी तरह से उसे चोद कर खुस रखने की कोशिस करता हूँ, हर रात चुदाई होती है लेकिन मेरा लंड सिर्फ 4 इंच का छोटा और पतला है जिसकी वजह से उसकी प्यास अधूरी रह जाती है दीपिका ने कभी मुझे बोला नहीं फिर भी मैं उसे देख कर समझ जाता हूँ।


1 महीने पहले मेरी नौकरी छूट गयी मैं घर पर ही रहता और नयी जॉब की तलाश में था लेकिन कही बात बन नहीं रही थी। दीपिका को डेली उसके ऑफिस बाइक से लेने और छोड़ने जाता था। एक दिन दीपिका खुश हो कर घर आयी और बोली मेरा प्रमोशन हुआ है, मैं सुन कर बहुत खुस हुआ और दीपिका से बोला चलो पार्टी हो जाये, लेकिन वो मना करने लगी, काम बहोत था थक गयी हूँ किसी और दिन पार्टी करेंगे। खाना खा कर हम दोनों सोने चले आये, मैं खुसी के मौके पर अपनी बीवी को चोदना चाहता था मैं उसको पकड़ कर चूमने लगा दीपिका मुझे गुस्से से धक्का दे कर बोली अरे यार थक गयी हूँ और तुम सुरु हो गए। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम


मैं रुक गया और सोचा काम से थक गयी है आराम करने देता हूँ, एक सप्ताह ऐसे ही निकल गए दीपिका उसके बाद ऑफिस से लेने आने को मना करने लगी। बोली आप शाम को मत आना मुझे काम से देर हो सकता है मैं कैब से घर आ जाउंगी। मैं मान गया मेरी पत्नी की खुसी में मेरी खुसी थी।

दूसरे दिन मैं बाहर सामान लेने निकला और दीपिका को साथ लेकर जाऊंगा सोच कर उसके ऑफिस चला गया 7 बज गए थे ऑफिस बंद होने का टाइम था। मैं अंदर गया वह कोई नहीं थी सभी जा चुके थे। अंदर हॉल की लाइट जल रही थी और कुछ लोगो की आवाज आ रही थी। मैं जैसे आगे बढ़ा मुझे सामने की गेट पर चपरासी आते हुए दिखा, सायद उसने मुझे नहीं देखा था। मैं चपरासी से बात किये बिना आगे बढ़ गया हॉल के विंडो पर जाली वाला पर्दा लगा हुआ था मैं अपनी पत्नी को ढूंढता हुआ वो पर्दा हलके से उठा कर अंदर देखा।

अंदर बहोत से आदमी बैठ कर शराब पी रहे थे तभी मेरी नजर मेरी बीवी पर गयी वो अपने बॉस की गोद में बैठी थी, ये सब देख कर मेरा गुस्सा बढ़ गया मैं जाकर अपनी बीवी को दो थप्पड़ मारना चाहता था लेकिन खुद को काबू किया और सोचने लगा देखता हूँ ये किस हद तक गिर सकती है आज पता चल ही जाये। वहाँ पर टोटल 8 आदमी थे सभी हट्टे कट्टे मोटे थे, मेरी बीवी अपने बोस की गोद में बैठी थी और उसका बॉस दीपिका के कमर में हाथ रख कर सहला रहा था। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

तभी दीपिका बोली राजीव सर मुझे देर हो रही है आज जल्दी कर लेते है वैसे भी 8 लोग है टाइम लग जायेगा। मेरी समझ में कुछ नहीं आया ये 8 लोग से क्या करना चाहती है। मेरी बीवी दीपिका का बॉस अपने पेन्ट की ज़िप खोल कर अपना लंड बाहर निकाल लिया, दीपिका उसका मोटा लम्बा लंड हाथ में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी।

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वहाँ बैठे बाकी के 7 लोग अपने पेन्ट उतार कर चड्डी निकाल फेके और मेरी बीवी के पास आकर खड़े हो गए, दीपिका राजीव का लंड छोड़ कर उन सब के लंड को बारी – बारी चूसने लगी। राजीव उठा और अपनी पुरे कपडे उतार कर नंगा हो गया। दीपिका को खड़ा किया और उसके टॉप जीन्स निकाल कर सब दीपिका पर टूट पड़े ब्रा पेन्टी के ऊपर से 8 लोग उसको चूसने लगे। दीपिका पुरे मजे में सिसकारियां ले कर उनको खुस करने की पूरी कोसिस कर रही थी।

तभी एक ने दीपिका के पेंटी नीचे उतार कर उसकी चुत चाटने लगा एक बन्दा पीछे से उसकी गांड चाट रहा था। ऊपर से दो लोग उसकी ब्रा उतारकर दोनों निप्पल चूसने में लगे थे। बाकी के ४ लोग दीपिका के सरीर पर अपना लौड़ा रगड़ रहे थे। दीपिका का बॉस बोला ये ले तेरी चुत की खुजली मिटाने के लिए आज 8 लोग हो गए है बता अब तो खुजली मिट जाएगी तेरी। दीपिका बोली अरे ये तो कुछ भी नहीं मैं कॉलेज के दिनों में एक साथ 10 लड़को के साथ ग्रुप सेक्स करती थी।

मेरी चुदाई की प्यास बुझाना आसान नहीं है। दीपिका का बॉस बोला – तेरे गांडू पति से तो ज्यादा मजा देंगे हम लोग तेरे को। दीपिका चुप थी और वो लोग उसको मसल रहे थे। अपनी बुराई सुन कर मेरा दिमाग ख़राब हो गया था लेकिन मैं बर्दास्त कर गया। 5 मिनट बाद दीपिका का बॉस टेबल पर लेट गया और दीपिका को अपने लंड पर बैठा लिया पीछे से उसका एक काला दोस्त अपना 7-8 इंच का लंड लिए दीपिका की गांड में डाल कर दोनों एक साथ चोदने लगे। दीपिका उम्म्म्म अह्ह्ह्हह चोदा सालों मेरी प्यास बुझा दो ,, और चोदो साले चोदो चोदो अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह कर रही थी। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

बाकी लोग अपना लंड हाथ में लिए मुठ मार रहे थे, 2 लोग दीपिका की तरफ बढे और एक ने दीपिका क्वे मुँह में लंड डाल दिया। अब दीपिका के तीनो छेद में लंड था। तीसरा बन्दा दीपिका के बूब्स चूसने लगा दीपिका उसका लंड अपने एक हाथ से हिलाने लगी। बाकी के ४ लोग खड़े थे दीपिका को चोदने का इन्तजार कर रह थे। 10 मिनट बाद शिफ्ट चेंज हुई और ये चार गए और बाकी के 4 दीपिका की वैसे ही चुदाई करने लगे। दीपिका के मुँह से गुन गु गु गु गु गु सिर्फ इतने आवाज निकल रही थी। कमरे से शराब की बदबू चुदाई की थपेड़ो की आवाज तप तप थप थप गन्दी गालिया और हंसने की आवाज आ रही थी 15 -20 मिनट ऐसे वो लोग चोद रहे थे सब अपना लंड हाथ में लेकर मुठ मारने लगे दीपिका टेबल पर लेटी हुई चारो तरफ से वो लोग उसके ऊपर अपना वीर्य गिरा रहे थे।

दीपिका ब्लू फिल्म के तरह उन लोगो से चुदवा कर उनका वीर्य चाटचाट कर पी गई।

अपनी बीवी के प्यास मैं बुझा नहीं सकता इसका दुःख था, लेकिन इस तरह वो दुसरो से चुदा कर मेरा मजाक बना रही थी इसका गुस्सा मुझे था। सब लोग कपडे पहनने लगे दीपिका नंगी थी तभी चपरासी हॉल में आया और बोला शाहब आप लोग का हो गया हो तो मैडम की मैं भी ले लूँ ? इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

राजीव बोला – हां जरूर तू हमारा वफादार है तेरा तो पूरा हक़ है। वैसे भी सब से बड़ा औजार तो तेरा है दीपिका तेरी दीवानी हो जाएगी।

दीपिका बोली आ चंदू आज तेरा लंड भी देखूँ कितना लम्बा – मोटा है। दीपिका चपरासी के कपडे निकाल कर फेकने लगी बाकी के 8 लोग बैठ कर किसी फिल्म की तरह इनकी चुदाई का खेल देखने को तैयार थे। चंदू का कपडा उतारते ही मेरी नजर उसके लंड पर गयी। उसका लंड ब्लू फिल्म में काले लोगो के जैसी 10 इंच से भी ज्यादा लम्बी और मोटी थी। दीपिका बोली ये क्या है कहा से इतना लम्बा मोटा ले आया तू ? बता न कैसे इतना बड़ा हुआ ?

ये सब देख कर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया, मुझे मेरा 4 इंच का लंड याद आया जिसकी लम्बाई चंदू के लंड की आधी भी नहीं थी।

चंदू बिना समय बर्बाद किये दीपिका को गोद में उठा कर अपने लंड पर बैठा लिया और एक झटके से लंड चुत के अंदर डाल दिया। दीपिका बोली – हयी माँ मर गयी मैं साले बहनचोद धीरे से डालना था न भोसड़ीके। इंडियन सेक्स कहानी डॉट कॉम

चंदू खड़े खड़े मेरी बीवी को उछाल कर चोदने लगा सब चुदाई देखने का आनंद ले रहे थे। चंदू कभी दीपिका कि गांड कभी चुत दोनों छेद बदल कर चोद रहा था। दीपिका उम्म्म्म अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह चोद माधरचोद और तेज और तेज बोल कर मजे ली रही थी। पैट पैट पैट पैट पैट की आवाज से पूरा ऑफिस गूंज गया।

मेरा दिमाग सुननन पड़ गया था मैं वहाँ से बाहर निकला और घर आ गया। रात को 9 बजे मेरी बीवी आयी और नहाने चली गयी, हमने साथ खाना खाया। जब सोने गए दीपिका बोली मुझे नींद आ रही है आज बहुत काम था थक गयी हूँ पूरा सरीर दर्द हो रहा है। मैं उसको गुड नाईट बोल कर लेट गया।

मेरी आँखों में नींद नहीं था पूरा नजारा घूम रहा था। मैंने फैसला किया जैसे भी है ठीक है, मेरा लंड छोटा है अगर इसकी चुत की आग ज्यादा है तो इसकी मर्जी किसी से चुदाई, अगर मैं कुछ बोला तो मेरा ही इनसल्ट होगा। उस दिन से आज 3 साल हो गए है मेरी दीपिका से सेक्स नहीं हुई है। दीपिका अपनी कंपनी में टॉप लेवल पर पहुँच गयी है,

सगी सालियों की चूतो का उद्घाटन किया मोटे लंड से

सगी सालियों की चूतो का उद्घाटन किया मोटे लंड से

बात उस समय की है जब मेरी शादी को 2 साल हो गए थे और मेरी बीबी को पहला बच्चा हुआ था.. वो उस समय अपने मायके में ही थी.... जब काफी दिन हो गए तो मै अपने आफिस से छुट्टी ले कर अपने ससुराल गया ताकि बीबी और बच्चे से मिल आऊं.. अभी मेरी बीबी का आने का कोई प्रोग्राम नहीं था.. क्यों कि इस समय दिसंबर का महीना चल रहा था और जाड़ा काफी अधिक पड़ रही थी..
जब मै अपने ससुराल गया तो मेरी खूब खातिरदारी हुई.. मेरे ससुराल में मेरे ससुर, सास, 1 साला और 2 सालियाँ थी.. मेरे साले की हाल ही में नौकरी हुई थी.. और वो दिल्ली में पोस्टेड था.. ससुरजी भी अच्छे सरकारी नौकरी में थे.. 2 साल में रिटायर होने वाले थे.. लेकिन अधिकतर बीमार ही रहा करते थे.. मेरी सालियाँ बड़ी मस्त थीं.. दोनों ही मेरी पत्नी से छोटी थीं..
मेरी पत्नी से ठीक छोटी वाली का नाम सीमा था.. वो 23 साल की थी.. उस से छोटी मधु की उम्र 21 साल की थी.. दोनों ही स्नातक कर चुकी थी.. यूँ तो दोनों दिन भर मेरे से चुहलबाजी करती रहती थी लेकिन कभी बात आगे नही बढी थी.. मैंने भी सीमा की एक - दो बार चूची दबा दी थी.. लेकिन वो हंस कर भाग जाती थी.. खैर मेरी बीबी नेहा खुद भी काफी सुन्दर थी.. इसलिए कभी कोई ऐसी वैसी बात होने कि नौबत नही आई..
इस बार मै ज्यों ही अपने ससुराल पहुंचा तो वहां एक अजब समस्या आन पड़ी थी.. दोनों ही सालियों ने बी..एड करने का फॉर्म भरा था और दोनों की ही परीक्षा होनी थी.. परीक्षा पुरे एक सप्ताह की थी.. समस्या ये थी कि इन दोनों के साथ जाने वाला कोई था ही नहीं.. क्यों कि मेरे साले कि अभी अभी नौकरी लगी थी और वो दिल्ली में था.. मेरे ससुर जी को जोड़ों के दर्द ने इस तरह से जकड रखा था कि वो ज्यादा चल फिर नहीं पा रहे थे.. सास का तो उनको छोड़ कर कहीं जाने का सवाल ही पैदा नही होता था.. मेरी दोनों सालियाँ तो अकेले ही जाने के लिए तैयार थी, लेकिन जमाने को देखते हुए मेरे ससुरजी इसके लिए तैयार नहीं हो रहे थे.. इस कारण मेरी दोनों सालियाँ काफी उदास हो गयी थी.. मुझे लगा कि यूँ तो मै 15 दिनों की छुट्टी ले कर आया हूँ और यहाँ 3 दिन में ही बोर हो गया हूँ क्यूँ ना मै ही चला जाऊं, लेकिन ससुरजी क्या सोचेंगे ये सोच कर मै खामोश था..
अचानक मेरी सास ने ही मेरे ससुर को कहा कि क्यों नहीं दामाद जी को ही इन दोनों लड़कियों के साथ भेज दिया जाये.. ससुरजी को भी इसमें कोई आपत्ति नजर नहीं आई.. उन्होंने मुझसे पूछा तो मैंने थोड़ी टालमटोल करने के बाद जाने के लियी हाँ कर दी.. और उसी दिन शाम को ही ट्रेन पकड़ कर रवाना हो गए.. अगले दिन सुबह पहुँच कर एक होटल में हमलोग रुके .. होटल में मैंने दो रूम बुक किये.. एक डबल रूम , दोनों सालियों के लिए तथा एक सिंगल रूम अपने लिए.. हम लोगों ने नाश्ता - पानी किया और मैंने उन दोनों को उनके परीक्षा सेंटर पर पहुंचा दिया..
हर तीसरे दिन एक परीक्षा होनी थी .. 12 बजे से 2 बजे तक .. उसके बाद दो दिन आराम .. दोनों ने परीक्षा दे कर वापस होटल आने के क्रम में ही भोजन किया .. मैंने दोनों से परीक्षा के बारे में पूछा तो दोनों ने बताया कि परीक्षा काफी अच्छी गयी है.. खाना खाने के बाद हम लोग होटल चले आये .. वो दोनों अपने कमरे में गयी तथा मै अपने कमरे में जा कर आराम करने लगा ..
करीब 5 बजे मुझे लगा कि उनलोगों को कहीं घुमने जाना है क्या? ये सोच कर मै उनके रूम में गया.. रूम का दरवाज़ा सीमा ने खोला .. रूम में मधु नजर नही आयी ..
मैंने सीमा से पूछा- मधु कहाँ है?
वो बोली- बाथरूम गयी है..
मैंने कहा - ओह..
मैंने देखा कि सीमा सिर्फ एक झीनी सी नाइटी पहने हुए है.. उसके चूची साफ़ साफ़ आभास दे रही है.. उसके चूची के निपल तक का पता चल रहा था..
मै बिछावन पर बैठ गया और मैंने सीधे बिना किसी शर्म के ही धीरे से कहा- क्या बात है ? ब्रा नही पहनी हो
उसने कहा - यहाँ कौन है जिस से अपनी चूची को छिपाना है?
सुन कर मै दंग रह गया, और कहा - क्यों , मै नहीं हूँ?
वो बोली- आप से क्या शर्माना? आप तो अपने आदमी हैं..
मै कहा- कभी ठीक से छूने भी नहीं देती हो और कहती हो कि आप अपने आदमी हैं ..
उसने मेरे गोद में बैठते हुए कहा - इसमें कुछ ख़ास थोड़े ही है जो आपको छूने नहीं दूंगी.. आप छू कर देखिये.. मै मना नहीं करूंगी..
मैंने धीरे से उसे पीछे से पकड़ा और अपने हाथ सीमा के एक चूची पर रख दिया.. उसने सचमुच कुछ नहीं कहा और ना ही किसी प्रकार का प्रतिरोध किया.. मै उसकी चूची को जोर जोर से दबाने लगा.. उसे भी मज़ा आने लगा.. जब मैंने देखा कि उसको भी मज़ा आ रहा है तो मेरा मन थोडा और बढ़ गया.. और मैंने अपना हाथ उसके नाइटी के अन्दर डाला और उसके चूची को पकड़ लिया.. उफ़ क्या मखमली चूची थी सीमा की .. मैंने तो कभी कल्पना भी नही की थी कि मेरी साली इतनी सेक्सी हो सकती है.. मै कस कर के उसकी चूची दबा रहा था.. वो आँख बंद कर के अपने चूची के मर्दन का आनंद ले रही थी.. मेरा लंड तनतना गया..
मैंने धीरे से कहा- ए, जरा नाईटी खोल के दिखा ना..
सीमा ने कहा- खुद ही खोल कर देख लीजिये ना..
मैंने उसकी नाईटी को अचानक नीचे सरका दिया और उसकी चुचियों के नीचे लेते आया.. ऊऊफ़्फ़्फ़्फ़ क्या मस्त चूची थी.. मैंने दोनों हाथों से से उसकी दोनों चुचियों को को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया.. वो सिर्फ आँखे बंद कर के मज़े ले रही थी..
उसने धीरे से कहा - जीजाजी, इसे चूसिये ना..
मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसकी चूची को चूसने लगा.. ऐसा लग रहा था मानो शहद की चासनी चूस रहा हूँ.. मेरा लंड एकदम उफान पर था.. .. मेरा लंड पैंट के अन्दर ही अन्दर गीला हो गया था.. मैंने एक झटके में उसके बदन से पूरी नाइटी उतार दी.. और अपना शर्ट एवं पैंट भी.. अब वो सिर्फ पेंटी में थी और मै अंडरवियर में .. मैंने उसके बदन को चूमना चालु किया.. चुमते चुमते अपना दाहिना हाथ उसके पेंटी के अन्दर डाल दिया.. घने घने बाल साफ़ आभास दे रहे थे.. थोडा और नीचे गया तो कोमल सा चूत साफ़ आभास होने लगा.. पूरी गीली हो गयी थी.. उसने भी मेरे लंड पर हाथ लगा दिया और कहा - इसे भी खोलो ना जीजू.. मैंने बिना देर किये अपना अंडरवियर भी खोल दिया .. वो मेरा लंड को अपने हाथ में ले कर सहलाने लगी ..
मैंने उसके होठों को कस कर दबाया हुआ था.. मै उसके चूत में अपनी उंगली डालने की कोशिश करने लगा तो वो बुरी तरह से छटपटाने लगी.. तभी मैंने उसकी पेंटी भी खोल दी और उसके चूत को घसने लगा.. वो मछली की तरह तड़प रही थी.. मैंने किसी तरह से अपनी ऊँगली उसके चूत में डाल ही दी.. तभी बाथरूम के अन्दर से फ्लश की आवाज़ आयी.. मै हडबडा गया क्यों कि मधु निकलने वाली थी और सीमा नंगी पड़ी हुई थी.. मै झट उठ कर बैठ गया और अंडरवियर पहन लिया .. .. सीमा ने तुरंत ही अपनी पतली सी चादर अपने अपने नंगे बदन पर ओढ़ लिया.. मै सोच रहा था कि यहाँ से चला जाऊं.. लेकिन तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और मधु बाहर आ गयी.. ये क्या ! उसने भी तो सिर्फ पेंटी ही पहन रखी थी.. ऊपर वो पूरी तरह से नंगी थी .. एक तो वो मुझे अचानक देख कर शरमा गयी और वो मुझे अंडरवियर में देख कर चौंक गयी.. मेरा लंड अभी भी 9 इंच के तनाव पर था..
फिर वो मुझे देख कर अपने हाथो से अपनी गोरी गोरी चूची को छिपाने का असफल प्रयास करते हुए हुए मुस्कुराई और बोली- आप कब आये?
मैंने कहा -अभी थोड़ी देर पहले..
मुझे पता नहीं था कि दुबली पतली सी दिखने वाली इस लड़की के चूची इतने बड़े होंगे.. मै सोचने लगा - यार इसके भी तो चूची अब हाथ लगाने लायक हो ही गए हैं..
अभी मै इसी विषय पर सोच ही रहा था कि मधु ने कहा- क्यों जीजू , क्या देख रहे हो?
मैंने कहा - देख रहा हूँ कि छोटी बच्ची अब जवान हो गयी है..
मधु ने कहा - आप को अभी तक पता ही नही चला था क्या?
मैंने अपने लंड को अंडरवियर के ऊपर से कस के दबाते हुए कहा- मुझे तो अंदाजा ही नही था कि आपका नीम्बू अब खरबूज बन गया होगा.. तेरी चूची तो तो तेरी बहन सीमा से भी बड़ा है.. तू तो उसकी बड़ी बहन लगती है..
ये सुन कर मधु बोली- धत, मेरी चूची तो अभी सीमा दीदी से छोटा ही है..
मैंने कहा - नहीं, तेरा बड़ा है..
वो बोली- नहीं, मेरा छोटा है दीदी से..
मैंने कहा- लगी शर्त? तेरा बड़ा है.. अगर तेरा छोटा हुआ तो 500 रुपये तेरे.. अगर बड़ा हुआ तो तू मुझे 500 रूपये देगी.. बोल मंजूर है?
वो बोली- हाँ , मंजूर है.. दीदी जरा खोल के दिखा तो अपनी चूची..
सीमा तो नंगी थी ही.. उसने अपना चादर हटाया.. मधु ने देखा तो कहा - अरे तू तो पहले से ही नंगी है?
सीमा ने कहा - जीजू , मेरे चूची का साइज़ और चूत की गहराई नाप रहे थे.. अच्छा , अब तू भी खोल के दिखा..
मधु ने बिना समय दिखाए अपने हाथ नीचे कर के अपनी चूची मेरे सामने ला कर खड़ी हो गयी.. यूँ तो वास्ताव में मधु की चूची सीमा के चूची से छोटी थी.. लेकिन मै तो सिर्फ उसकी चूची को देखने के लिए इतना ड्रामा कर रहा था.. उसकी चूची भी मस्त थी..
मैंने कहा - ऐसे तो पता नहीं चल रहा है.. हाथ से नाप कर ही पता चलेगा..
मधु मेरे पास आ गयी और बोली- तो ठीक है.. हाथ से नाप कर ही देख लीजिये और बताइए किसकी चूची बड़ी है और किसकी छोटी ?
मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसकी चूची को मसलने लगा.. मेरे लंड का हाल बुरा हो रहा था.. थोड़ी देर उसकी चूची मसलता रहा.. मधु की आँख बंद हो गई थी- उसे भी काफी आनंद आ रहा था..
उसने धीरे से कहा- जीजू अब बताइए न किसकी चूची बड़ी है और किसकी छोटी?
मै भी कम धूर्त ना था.. मैंने कहा - अंदाज़ ही नही मिल रहा है.. दोनों बहनों की चुचियों को एक साथ छूना होगा.. सीमा इधर आ, तू भी मेरे गोद में बैठ जा..
सीमा भी सिर्फ पेंटी पहन कर मेरी गोद में बैठ गयी.. अब मै दोनों की चूचियां को मसलने रहा था.. दोनों ही हलकी हलकी सिसकारी भर रही थी..
फिर मैंने कहा - ऐसे पता नही चलेगा.. मुह में चूस कर साइज़ पता चलेगा..
मैंने दोनों को बिस्तर पर सटा कर लिटा दिया.. और बारी बारी से दोनों की चुचीयां को चूसने लगा.. दोनों को अपनी चूचियां चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था..
मैंने कहा - दोनों की चूची तो 19 - 20 है.. अच्छा ये बता तुम दोनों में से किसके चूत पर बाल अधिक हैं?
सीमा ने कहा - जीजू, खुद ही मेरी पेंटी खोल के देख लो न..
मैंने उस की पेंटी में हाथ डाला और उस की पेंटी खींच कर उतार डाली.. दोनों अब मेरे सामने नंगी थी.. दोनों के चूत पर घने बाल थे.. मै दोनों के चूत को सहलाने लगा.. दोनों की आँखे बंद थी.. दोनों की चूत गीली हो रही थी..
मैंने कहा - दोनों की चूत पर घने बाल हैं.. शेव नहीं करती हो क्या?
सीमा ने कहा - नहीं
मैंने पूछा - तुम दोनों में से मुठ अधिक कौन मरती हो?
मधु ने कहा - दीदी अधिक मारती है.. दिन में दो बार वो भी बैगन से..
मैंने कहा - तू मुठ नहीं मारती..
मधु ने कहा - कभी कभी.... वो भी दीदी को मुठ मारते देख कर..
सीमा मेरे लंड को पकड़ कर बोली - हाँ लेकिन ये इतनी डरपोक है कि पतले मोमबत्ती को चूत में डाल कर मुठ मारती है.. मैंने कितनी बार इसे बैगन से मुठ मारने को कहा है लेकिन ये मानती ही नहीं....
मैंने कहा - कभी तुम दोनों ने अपनी चूत चुसवाया है?
मधु ने कहा - हाँ
मैंने कहा - किस से?
सीमा ने कहा - हम दोनों अक्सर ही एक दुसरे की चूत चूसते हैं..
मैंने कहा - अरे वाह, दोनों तो बिलकूल एक्सपर्ट हो.. कहाँ से सीखा?
मधु ने कहा - बड़ी दीदी ने सिखाया.. दरअसल हम तीनो बहन एक दुसरे की चूत चूसते हैं..
मैंने कहा - वाव.... ये बात तो मुझे आज तक पता ही नहीं थी..
मधु ने कहा - जीजा जी, सिर्फ हमारी ही देखोगे क्या? अपनी भी दिखाओ ना..
मैंने बिना कुछ कहे अपने अंडरवियर को को भी खोल दिया.. मेरा लंड जो एक चूत और दो चूची को देख कर जितना बड़ा होता है आज दो दो चूत और चार चूची को देख कर डबल बड़ा हो रहा था..
अनु ने मेरे लंड को देखते ही पकड़ लिया और कहा - हाय राम, जीजू आपका जूजू कितना बड़ा है.. इतना बड़ा लुल्ली तुम दीदी के चूत में पूरा डाल देते हो? दीदी की चूत तो दर्द से बिलबिला जाती होगी..
ये सुन कर सीमा हँसी और कहा- धत पगली, ये लुल्ली थोड़े ही है, ये तो लंड है.. चूत में इसे डालने से दर्द थोड़े ही होता है? बल्कि मज़ा आता है.. इस को पीयेगी? सुना है बहुत मज़ा आता है..
अनु ने कहा - किसने कहा
सीमा - दीदी ने..
मैंने कहा - दीदी तुम्हे ये सब बातें बताती है?
सीमा ने मेरे लंड को मुह में लिया और थोडा चूसते हुए कहा- और नहीं तो क्या? वो मुझे अपनी चुदाई कि सब बातें बताती है..
मैंने कहा - सिर्फ थ्योरी से ही काम नहीं चलेगा, कुछ प्रेक्टिकल भी करना होगा..
दोनों ने कहा - हाँ जीजू, कुछ प्रेक्टिकल कीजिये ना..
मैंने कहा - पहले किस से साथ करूँ..
सीमा ने कहा - मेरे साथ, क्यों कि यहाँ मै बड़ी हूँ..
मधु ने कहा - हाँ ये ठीक है, तब तक मै देखती हूँ और जानूंगी कि कैसे क्या होता है..
मैंने कहा - ठीक है..
और मै सीमा के बदन पर लेट गया और मधु बगल में ही लेट कर चुचाप देख रही थी.. मै सीमा के नंगे मखमली बदन पर लेट कर उसके हर अंग को चाटने लगा.. वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.. मैंने उसके बुर को चाटना चालु किया तो वो सिसकारी भरने लगी.. लेकिन मै उसके बुर के रस को छोड़ भी नहीं पा रहा था.. इतना नरम और रसीला बुर था मानो लग रहा था कि लीची को उसका छिलका उतार कर सिर्फ उसे चाट रहा हूँ.. उसके बुर ने पानी छोड़ दिया.. मै उसके बुर को छोड़ फिर उसके चूची को अपने सीने से दबाया और मैंने पूछा- अपनी चूत चुदवाओगी?
सीमा ने कहा- हाँ ..
मैंने कहाँ - ठीक है.. तो तैयार हो जा प्रैक्टिकल के लिए
मैंने उसके दोनों टांगो को अलग किया और चूत के छेद का मुआयना किया.. उसमे उंगली डाल कर उसे फैलाया फिर अपना लंड को उसकी चूत के छेद पर रखा और और धीरे धीरे लंड को उसके चूत में घुसाना चालु कर दिया..
ज्यों ही मैंने लंड डाला वो चीख पड़ी- आ .......... यी........आह...... मर गयी
मैंने कहा - क्यों री.. चूत में बैगन डाल के मुठ मारती हो और लंड लेने में तुझे परेशानी हो रही है..
सीमा ने कहा - हाय राम, आपका लंड किसी बैगन से कम मोटा नहीं है.. और ये काफी सख्त भी तो है.. बैगन तो नरम होता है..
मैंने कहा - हाँ वो तो है.. लेकिन सख्त लंड से ही तुझे मज़ा आएगा.. तेरी झिल्ली फटी है कि नहीं अभी तक?
सीमा ने कहा -- नहीं....
मैंने कहा - फाड़ दूँ तेरी झिल्ली?
सीमा ने कहा - अब देर ना करो जीजू.. जो भी करना है जल्दी करो.. चूत में बहुत खुजली हो रही है......आह …..मेरे चूत में अपना इतना मोटा लंड डाल कर इतने सवाल कर कर के मुझे यूँ ना सताओ..
उसका चूत एकदम नया था.. मैंने धीरे धीरे अपने लंड को उसके चूत में धक्के मारना शुरू किया.. मेरा लंड उसके चूत के गहराई में गया तो उसकी झिल्ली फट गयी तो वो पूरी तरह चीख पड़ी- आ ..........ह......जी..............जू हाय राम......
मैंने कहा - क्या हुआ सीमा ?
सीमा ने दर्द भरे स्वर में कहा - कुछ नहीं जीजा जी .. तेरे लंड ने मेरी झिल्ली फाड़ डाली.. आह......कितना मज़ा है इस दर्द में.. ..
मैंने सीमा को उसके दर्द कि परवाह किये बगैर जोर जोर से चोदना चालू किया.. थोड़ी देर में ही उसे आनंद आने लगा.. अब वो आराम से बिना किसी शर्म के जोर जोर से बोलने लगी- आह जीजा जी.. हाय जीजाजी.. जरा धीरे धीरे चोदिये ना.. आय हाय कितना मज़ा आ रहा है.. आआअ ........ह्ह्ह्ह........ वो साली ही क्या जिसने अपने जीजा के मज़े ना लूटे हों..
सुन के मुझे उसके हिम्मत पर ख़ुशी हुई और आराम से उसके अंग अंग को देखते हुए चोदने लगा.. वो भी जोर जोर से चिल्लाने लगी- हाय......आआअह्ह्ह्ह.......... ओह्ह माँ , ओह जीजू, हाय रे आःह्ह्ह ................
मै उसकी नंगे बदन पर लेट कर उसकी चुदाई कर रहा था.. मैंने चुदाई करते समय मधु कि तरफ देखा तो वो भी काफी खुश लग रही थी..
मै उसे चोदता रहा.. थोड़ी देर में सीमा के चूत से पानी निकलने लगा.. मेरे लंड ने भी पानी छोड़ देने का सिग्नल दे दिया..
मैंने सीमा से कहा - बोल कहाँ गिरा दूँ माल?
वो बोली- मेरे मुह में..
मैंने अपने लंड को उसके चूत से निकाला और अभी उसके मुह में भी नही डाला था कि मेरे लंड ने माल छोड़ना चालु कर दिया.. इस वजह से मेरे लंड का आधा माल उसके मुह में और आधा माल उसके गाल और चूची पर गिर गया.. फिर भी वो प्यासी कुतिया की तरह मेरा लंड चूसती रही..
उसने मधु को अपनी चूची दिखाई और कहा - मधु ले माल को चाट.. मज़ा आएगा..
मधु ने बिना देर किये सीमा के चूची को चाटना शुरू कर दिया और उस पर गिरे मेरे माल को चाट चाट कर खा गयी..
मुझे काफी मज़ा आ रहा था.. लेकिन मैंने गौर किया कि मधु भी काफी अंगडाई ले रही थी.. इसका मतलब कि अब उसके चूत में भी खुजली हो रही थी..
मैंने सीमा को कहा - अब तेरी छोटी बहन की बारी है.. देख तो कैसा अकड़ रही है?
सीमा अपनी चूत को साफ़ करती हुई बोली- इसकी तड़प को रोकने का एक ही उपाय ये है कि इसे भी अभी चोद दीजिये.. ..क्यों री मधु ? चुदवायेगी ना? बहुत मज़ा आएगा..
मधु बोली- लेकिन दीदी , तू तो अभी करह रही थी लग रहा था कि तुझे काफी दर्द हो रहा था ..
सीमा - अरी पगली , वो दर्द नहीं ....मज़ा था री .. तू भी चुदवा के देख ना
मधु ने कहा - लेकिन दीदी तुने ही तो एक दिन कहा था कि चूत पर पहला हक पति का होता है ?
सीमा - धत पगली .... साली के चूत पर पहला हक तो जीजा का ही होता है न.. चल अब ये सब छोड़ .. और लेट जा .... देख जीजू अभी तुझे जन्नत की सैर करायेंगे ..
अब मैंने मधु को अपने नीचे लिटाया और उसकी चूची को छूने लगा.. मुझे पता था कि ये लड़की अभी गरम है.. इसे काबू में करना कोई मुश्किल काम नहीं है.. मै उसकी मस्त चूची को दबाने लगा.. वो कुछ नहीं बोल रही थी सिर्फ मुस्कुरा रही थी.. .. मैंने एक हाथ उसकी चूत पर हाथ ले गया.. ओह उसकी चूत तो पानी बहा रही थी , बिलकूल गीली थी.. मैंने अब कोई तकल्लुफ नहीं किया अब वो पूरी तरह से मेरी गिरफ्त में थी.. मै उसके होठों को बेतहाशा चूमने लगा.. अब वो भी मुझे जोरदार तरीके से मेरे होठों को चूमने लगी.. अब वो मेरा साथ देने लगी थी.. वो भी दीदी कि चुदाई देख कर मस्त हो चुकी थी.. उसकी चूची तो सीमा कि चूची से भी नरम थी.. आखिर उसकी चूत का भी मैंने उद्धार किया और और उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया.. लेकिन जैसे ही मैंने डाला वो चीखने लगी .. उसकी चूत का छेद अभी छोटा था ..
सीमा ने कहा - एक मिनट जीजू .... ये क्रीम इसकी चूत में डाल दीजिये ना .. तब चोदिये .. तब इसे दर्द नहीं होगा ..
मैंने मधु के चूत से अपना लंड निकाल लिया .. सीमा ने वेसलिन क्रीम को मधु की चूत पर अच्छी तरह से माला.. मधु चुप चाप अपने चूत पर वेसलिन लगवा रही थी ..
मैंने मधु की चूची को दबाते हुए कहा - सीमा , तुने तो अपनी चूत पर वेसलिन नहीं लगाया ..
सीमा ने कहा - मुझे तो मोटे बैगन अपने चूत में डालने की आदत है ना .. ये मधु की बच्ची तो सिर्फ मोमबत्ती ही डालती है अपनी प्यारी सी चूत में.. इसलिए आपका मोटा लंड इसे चुभ रहा है .. लेकिन अब नहीं चुभेगा .. मैंने वेसलिन डाल दिया है इसके चूत में अब आप इसके चूत में अपना लंड बेहिचक डालिए.. ..
मैंने फिर से मधु के चूत में अपना लंड धीरे धीरे डालना शुरू किया .. इस बार भी वो थोड़ी चीखी लेकिन जल्दी ही अपने आप पर काबू पा ली.. 4-5 शोट में ही उसकी भी झिल्ली फट गयी और उसके चूत से बलबला के खून निकलने लगा .. लेकिन मैंने लंड के धक्के से उसकी चुदाई जारी रखी.. थोड़ी देर में ही उसकी चूत भी खुल गयी.. वो भी अपनी दीदी कि तरह जोश में आ गयी थी.... उसने अपने दोनों हाथो से मेरी गर्दन को लपेट कर मेरे होठो को चूमने लगी.. उसकी जम कर चुदाई के बाद मेरे लंड से भरपूर माल निकला जो कि उसके चूत में ही समा गया..
मै अपना लंड उसके चूत से निकाल कर उसके बगल में लेट गया..
तब सीमा ने मधु की चूची को दबा कर बोली- क्यों बहना, मज़ा आया ना?
मधु ने कहा- हाँ दीदी.. एक बार फिर करो ना जीजू..
सीमा ने कहा- नहीं पहले मेरी चूत में भी रस डालिए तब मधु की बारी..
सीमा मेरे बगल में लेट कर अपने दोनों टांगो को आजु बाजू फैला कर अपनी चूत मेरे सामने पेश कर मुझे छोड़ने का न्योता देने लगी.. मेरा लंड अभी थका नही था.. मै तीसरी बार चूत छोड़ने के लिए तैयार था.. मै झट से उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखा और एक ही झटके में अपना लंड उसके चूत में प्रवेश करा दिया..
सीमा - हाय राम.... जीजू कितना हरामी है रे तू.. धीरे धीरे डाल न....
मैंने कहा - देख कुतिया.... अभी मै तेरी कैसी चुदाई करूंगा कि इस जनम में दोबारा चुदाई का नाम ना लेगी तू..
मेरी बात सुन के सीमा ने हँसते हुए कहा - जा रे हिजड़े.... तेरे जैसे दस लंड को मै अपननी चूत में एक साथ डाल लूं तो भी मेरी चूत को कुछ नही होने वाला..
मैंने भी हँसते हुए कहा - तो ये ले...... सभाल इसे कह कर मैंने काफी जोर जोर से उसके चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगा.. पहले तो वो सिर्फ अपने होठो को दांत में दाब कर दर्द बर्दाश्त करती रही.. लेकिन थोड़ी देर में ही उसकी चीखे निकलने लगी.... वो हलके हलके स्वर में चिल्लाते हुए कहने लगी - हाय रे.... मादरचोद.... फाड़ डाला रे.... साले जीजू.... कुत्ता है तू...... एक नम्बर का रंडीबाज है.. आदमी का लंड है कि गधे का लंड.. साले कुछ तो रहम कर मेरी नाजुक चूत पर..
मुझे उसकी गालियाँ काफी प्यारी लग रही थी.. उसकी गालियाँ मेरा जोश बढ़ा रही थी.. मै जानता था कि उसे काफी मज़ा आ रहा है क्यों कि इतने दर्द होने के बावजूद वो अपनी चूत से मेरा लंड निकालने का प्रयास नही कर रही थी..

इस बार मैंने सीमा के चूत को घमासान तरीके से 20 मिनट तक चोदा.. 20 मिनट कि घमासान चुदाई के बाद मेरे लंड से लावा फुट पड़ा.. और सारा लावा उसके चूत में ही गिराया.. सीमा की हालत देखने लायक थी.. वो इतनी पस्त हो चुकी थी कि बिना कोई करवट लिए जैसे की तैसी लेटी लेटी ही सो गयी..


बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

Beti Ke Sath Samuhik Chudai,बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

मेरा नाम है माहिरा। मैं २५ साल की हूँ। मेरी शादी अभी पिछले साल ही हुई है। मेरी अम्मी आबिदा खातून हैं वह ४५ साल की हैं और बड़ी मस्त जवान हैं। अपनी बॉडी मैन्टन कर रखी है और वह ३०/३२ साल की ही लगतीं हैं। हां मन से वह २० साल से ज्यादा उम्र की नहीं लगती हैं।

बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

खूब हंसी मजाक करतीं हैं गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं और हमारे साथ बैठ कर पोर्न फिल्म देखतीं हैं। फिल्म देखते हुए भी बोलती रहतीं है इसका लण्ड मोटा है उसका पतला है इसकी चूत टाइट है उसकी ढीली हो चुकी है।

ये बुर चोदी चुदवाकर ही जाएगी वगैरह वगैरह ? हमारे साथ मेरी भाभी भी हैं समीना। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी पर मेरा भाई विदेश में काम करता है . भाभी यहाँ हमारे साथ ही रहतीं हैं। मैं भी खूबसूरत हूँ और मेरी भाभी भी। हम दोनों के बूब्स बड़े बड़े हैं। चूतड़ उभरे हुए हैं और जांघें मोटी मोटी हैं। इत्तिफाक से हम तीनो ही लण्ड की जबरदस्त शौक़ीन हैं।

मैं १९ साल की उम्र में ही अम्मी से खुल गयी थी।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

एक दिन मैं अपनी सहेली से फोन पर बात कर रही थी। मैं बोली – हाय बोल साइमा, माँ की चूत, क्या हो रहा है ? ,,,,,,,,,,,, क्या बात करती है तू ,माँ की चूत, ऐसा भी कहीं होता है। उसने तेरी गांड मार दी और तू खड़ी खड़ी देखती रही, माँ की चूत।

मैं होती तो उसकी माँ चोद देती, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,? अरे यार मेरी सुन, उसकी गांड में मैं पेल दूँगी लण्ड, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,मेरी माँ की न पूंछो वो तो, लौड़े से, चुदवाती रहती है।,,,,,,,,,,,,? तेरी भी माँ भी यही करती है बाप रे बाप, माँ की चूत ,,,,,,,,,,,,,,,,? कोई बात नहीं मैं सब ठीक कर दूँगी माँ की चूत। अम्मी ने मुझे सुन लिया उसे पक्का यकीन हो गया की मेरा तकिया कलाम है माँ की चूत।

एक दिन मैं अपने दोस्त को चुपके से घर ले आयी। मैं समझी की अम्मी घर पर नहीं हैं। मैं उसे नंगा करके उसका लण्ड हिलाने लगी। फिर मैं भी नंगी हो गयी। वह मेरी चूँचियाँ और चूत सहलाने लगा। मुझे मस्ती चढ़ गयी तो मैं जबान निकाल कर लण्ड चाटने लगी। इतने में अम्मी आ गयी। उसे देख कर मेरी तो गांड फट गयी। उसका लण्ड सिकुड़ गया।

पर अम्मी मुस्कराते हुए बोली हाय दईया तू इतनी बड़ी हो गयी है भोसड़ी की अभी तक ठीक से लण्ड चाटना भी नहीं जानती ? मैं बताती हूँ, लौड़े से, की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? इतनी बड़ी बड़ी चूँचियाँ और गांड लिए घूम रही है तू, लौड़े से, और इतने दिनों के बाद आज एक लौड़ा तुझे मिला है, लौड़े से ?

अभी तक क्या तू अपनी माँ चुदा रही थी ? मुझे देख मैं लण्ड चाट कर बताती हूँ तुझे की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? अम्मी लण्ड चाटने लगीं। फिर अम्मी ने उससे पूंछा बेटा मेरी बिटिया की बुर लेते हो ? वह कुछ बोला नहीं। तब अम्मी ने कहा कोई बात नहीं बेटा, आज पहले मेरी बिटिया की बुर ले लो फिर उसकी माँ का भोसड़ा चोद लेना ?बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

Beti Ke Sath Samuhik Chudai


तेरी बेटी की माँ चोदूँगी सासू जी

तेरी माँ की चूत, बहन का लण्ड

ऐसा बोल कर अम्मी ने लण्ड मेरे मुंह में घुसा दिया। मैं लण्ड चूसने लगी। अम्मी मुझसे इतना ज्यादा खुल जायेगीं यह मुझे नहीं मालूम था। अम्मी ने फिर आहिस्ते से लण्ड मेरी चूत में पेल ही दिया। मैं पहले चिल्लाई तो लेकिन फिर मजे से चुदवाने लगी। थोड़ी देर बाद अम्मी ने भी लण्ड पेल लिया अपनी चूत बोली देख माहिरा ऐसे चुदवाई जाती है बुर ? अब उसे क्या मालूम की मैं कई बार कई लड़कों से चुदवा चुकी हूँ। आज से तू अपनी बुर क्या अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदाना सीख ले ? मैंने मन में कहा अब आएगा जवानी का असली मज़ा ?

अम्मी कुछ ज्यादा ही मस्ती में थीं। वह बोली माहिरा तेरी माँ की चूत बहन चोद आ गया न तुझे माँ चुदाना ? मैंने कहा हां आबिदा खातून भोसड़ी की तुझे भी आ गया बिटिया की बुर चुदाना। वह मेरे मुंह से गालियां सुनकर बहुत खुश हुई और मेरे गाल थपथपाकर बोली हां बेटी इसी तरह लिया जाता है चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ?

एक दिन मैं जेसिका आंटी के घर चली गयी, माँ की चूत ? मैंने कहा अम्मी अरे वह तो बड़ी मजेदार हैं और बड़ी गहरी मजाक करतीं है, माँ की चूत ? अम्मी ने कहा – तुझे मालूम नहीं है लौड़े से की जेसिका बुर चोदी सेक्स की बहुत बड़ी खिलाड़ी है। उसकी बेटी भी उसका साथ देती है। जेसिका लण्ड अपनी बेटी की चूत में दानादन्न घुसेड़ती है और उसकी बेटी भी अपनी माँ के भोसड़ा में एक के एक बाद ठोंकती जाती है। दोनों खूब खुलकर गली गलौज करती है और खूब एन्जॉय करतीं हैं। मैंने मन में कहा एक मैं ही नहीं हूँ माँ चुदाने वाली बेटी और भी हैं बेटियां हैं जो अपनी माँ चुदवाती हैं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

मेरी समीना भाभी बड़ी मजेदार भी हैं और खूबसूरत भी। एक दिन हम तीनो बैठी हुई बातें कर रहीं थी। मेरे मुंहसे निकला अरे समीना भाभी तुम तो बहुत शर्माती हो ? शरमाओगी तो फिर लण्ड का मज़ा कैसे ले पाओगी ? वह बोली हाय दईया नन्द रानी मैं लण्ड किसी ने नहीं शर्माती।

मैं तो सबके लण्ड से बड़ी मोहब्बत करती हूँ। मैं जब कॉलेज में थी तो खूब लण्ड पकड़ा करती थी। घर में लोगों के लण्ड पकड़ती थी। सबसे पहले मैंने मामू लण्ड पकड़ा फिर उसके दोस्त का लण्ड पकड़ा और एक दिन मैंने खालू का लण्ड पकड़ लिया।

इसी तरह एक दिन जीजू का लण्ड भी मेरे हाथ लग गया। मैं तो दिन रात लण्ड के सपने देखती थी और आज भी देखती हूँ। इसीलिए मुझे ‘लण्ड’ कहने की आदत पड़ गयी। मैंने मजाक में कहा समीना भाभी कभी अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड पेला तुमने ? वह बोली हां बिलकुल पेला।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

भाभी ने बताया की एक दिन की बात है। मैं जब कमरे में घुसी तो देखा की अम्मी पड़ोस के शब्बीर अंकल के पैजामे में हाथ डाल कर उसका लण्ड हिला रहीं हैं।

मैं वहां से घूम कर जाने लगी तो अम्मी ने कहा अरी भोसड़ी की समीना इधर आ तेरी माँ की चूत ? इतना शरमायेगी तो जवानी का मज़ा कैसे ले पायेगी ? इधर आ मरे पास। मैं जब पास में गयी तो अम्मी ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे लण्ड दिखाते हुए बोली लो बेटी समीना अंकल का लण्ड चाटो ?

अंकल का लंबा चौड़ा लण्ड देख कर मैं भी ललचा गयी। मेरा हाथ अपने आप बढ़ गया और मैं लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लण्ड बहन चोद और सख्त हो गया। अम्मी ने पूंछा कैसा लगा लण्ड तुम्हे समीना ? मैंने कहा अम्मी ये तो बिलकुल खालू के लण्ड की तरह है। अम्मी ने कहा हाय दईया तो तू बुर चोदी खालू का लण्ड चूसती है। तेरे खालू का लण्ड खड़ा होने पर थोड़ा टेढ़ा हो जाता है न समीना।

मैंने कहा हां अम्मी तुम ठीक कह रही हो। वह बोली जानती हो समीना तेरा खालू तेरी माँ का भोसड़ा चोदता है। मैंने भी जोश में आकर कह दिया अम्मी मेरा खालू तेरी बिटिया की भी बुर लेता है। अम्मी ने मेरा गाल चूम लिया और बोली कोई बात नहीं बेटी ये चूत बुर चोदी चुदवाने के लिए ही होती है।

एक दिन समीना भाभी जाने किस मूड में थीं।

वह आई और बोली :- माहिरा, तेरी माँ की चूत, तेरी भाभी की बुर ?

मैं भी मूड में आ गयी तो मैने भी जबाब दे दिया।

मैंने कहा :- भाभी, तेरी नन्द की बुर, तेरी सास का भोसड़ा ? तब तक मेरी अम्मी भी आ गयी।

वह बोली :- बहू, तेरी नन्द की माँ का भोसड़ा, तेरी तेरी माँ की बिटिया की बुर ?

फिर हम सब बड़ी जोर से हंसने लगीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

उसी दिन शाम को मेरा ससुर आ गया और भाभी का जीजा भी। मैंने कहा हाय दईया लो दो लण्ड का

इन्तज़ाम हो गया है। आज मैं अपनी भाभी की बुर तो चोद लूंगी और चोद लूंगी उसकी सास का भोसड़ा ? तब तक भाभी बोली नहीं मैं चोदूँगी अपनी सास का भोसड़ा और अपनी नन्द की बुर ?

अम्मी ने कहा हाय दईया तुम सब लोग ऐसा क्यों कह रही हूँ। फिर तो मैं भी चोदूँगी बिटिया की बुर और बहू की चूत ? लेकिन तुम लोग परेशान न हो मैंने फ़ोन कर दिया है और आज ही मेरा देवर दुबई से आ रहा है। वो चोदेगा तुम दोनों की चूत ? तब आएगा चुदाई का घनघोर मज़ा ?

कुछ देर बाद सब लोग इकठ्ठा हो गये। मेरा ससुर तस्कीम आ गया उधर भाभी का जीजू सकीब मियां भी आ गया। मैं दोनों को जानती थी लेकिन लण्ड इनमे से किसी का नहीं जानती थी। मेरी इच्छा बढ़ने लगी की जल्दी से जल्दी इनके लण्ड पकड़ कर देखूं। तभी किसी ने घंटी बजा दी। अम्मी ने दरवाजा खोला और बोली हाय उस्मान आ जा जल्दी से हम लोग तेरा ही इंतज़ार कर रहीं हैं।

अम्मी ने उसे हम सबसे मिलवाया। मैं तो समझती थी की कोई ४५/५० साल का आदमी होगा पर वह तो मस्त जवान लड़का निकला उम्र शायद २५/२६ के लगभग होगी। मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगीं। यही हाल भाभी जान भी था। अम्मी ने फटाफट ड्रिंक्स का इंतज़ाम कर दिया और हम लोग मस्ती से दारू का मज़ा लेने लगे।

चुदाई के खेल के पहले अगर थोड़ा नशा वगैरह कर लिया जाये तो चुदाई एक मज़ा दुगुना हो जाता है।अब जब हमें अय्यासी करनी है तो फिर अच्छी तरह क्यों न की जाए ? दारू चालू हो गयी और नशा भी चढाने लगा। मस्तियाँ भी छाने लगीं और दिमाग में खुराफात भी चलने लगी। मेरी नज़र ससुर के लण्ड पर जैम गयी।

मैं सोंचने लगी की इसका लण्ड कैसा होगा, कितना बड़ा होगा, कितना मोटा होगा, कैसे चोदता होगा। मैंने कभी उसका लण्ड न देखा और मन पकड़ा ? मैंने फिर सोंचा की आज तो मौक़ा है। आज तो मुझे चूकना नहीं चाहिए। बस मैं ससुर के पैजामे का नाड़ा बड़े प्यार से खोलने लगी। उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। किसी ने कुछ कहा नहीं। बस मैंने हाथ अंदर घुसेड़ दिया। तब भाभी ने भी अपने जीजू के पैजामे के अंदर हाथ घुसेड़ दिया।

मैं तो बड़ी बेशर्मी से ससुर का लण्ड अंदर ही अंदर सहलाने लगी। लण्ड बहन चोद खड़ा होने लगा। तब मुझे अहसास हुआ की लण्ड बड़ा जबरदस्त है।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

सबसे पहले मैंने ही ससुर का लण्ड बाहर निकाल लिया, उसका सुपाड़ा चूमा और अम्मी को लण्ड दिखाते हुए बोली लो अम्मी मेरे ससुर का लण्ड पियो। अम्मी ने मुस्कराकर लण्ड मेरे हाथ से ले लिया। तब तक भाभी बोली अरे मेरी बुर चोदी नन्द रानी लो तुम मेरे जीजू का लण्ड पियो ? उधर अम्मी ने बहू को अपने पास इशारे से बुलाया और कहा बहू ले तू पी ले मेरे देवर का लण्ड ? ये भोसड़ा का तेरा ससुर ही है। फिर एक एक करके हम तीनो ने अपने अपने कपड़े खोल डाले और एकदम नंगी हो गयीं तो महफ़िल में आग लग गयी।

उधर मरद भी मादर चोद तीन के तीनो एकदम नंगे हो गए और उनके लण्ड टन टनाने लगे। अम्मी को मेरे ससुर का लण्ड पसंद आ गया। पसंद तो मुझे भी आ गया पर मैं चाहती हूँ की पहले वह मेरी माँ चोद ले फिर मुझे चोदे। मैं तो भाभी के जीजू के लण्ड में खो गयी। सकीब के लण्ड से मुझे भी मोहब्बत होने लगी। मैं जबान निकाल कर लण्ड का टोपा चाटने लगी। भी मस्ती से उस्मान का लौड़ा हिला हिला आकर पहले तो बड़ी देर तक देखतीं रहीं और फिर उसे मुंह में घुसेड़ कर चूसने लगीं।

एक ज़माना था की जब की मरद का लण्ड खड़ा होते ही चूत में घुस जाता था और वह थोड़ी देर तक चोद चाद कर झड़ जाता था। पर अब ज़माना बदल गया है। अब तो लण्ड खड़ा होते ही लड़कियों के मुंह खुल जातें हैं। लण्ड सीधे मुंह में घुस जाता है या यूँ कहें की लड़कियां सबसे पहले लण्ड मुँह में लेतीं हैं फिर कर कहीं। आजकल तो लण्ड चाटने, लण्ड चूसने का और लण्ड पीने का समय है।

झड़ता हुआ लण्ड पीना और मुठ्ठ मार कर लण्ड पीना आजकल का फैसन हैं।

थोड़ी देर में अम्मी ने लण्ड अपने भोसड़ा में घुसा लिया और यह भकाभक चुदवाने लगीं। अम्मी तो वास्तव में चुदवाने में बड़ी बेशर्म है। हम दोनों भी बेशर्म हो गयीं। मैंने भी सकीब का लण्ड घुसेड़ा अपनी चूत में और गचागच चुदवाने लगी। अब तक तो मुझे चुदवाने का अच्छा ख़ासा तज़ुर्बा हो चुका था। मेरी समीना तो ऐसे चुदवाने लगीं जैसे की वह एक मंजी हुई रंडी हों।

अम्मी को मस्ती सूझी तो वह बोली ;- हाय बुर चोदी समीना तू बहन चोद अपनी नन्द की माँ चुदवा रही है।

समीना भाभी बोली :- हां सासू जी मुझे अपनी नन्द की माँ चुदाने में मज़ा आ रहा है पर तू भी तो अपनी बिटिया की भाभी की बुर चुदवा रही है, हरामजादी।

मैंने कहा :- अरे भाभी तेरी सास भोसड़ी की अपनी बिटिया की बुर देखो न कितनी शिद्दत से चुदवा रही है और तेरी नन्द की बुर में लौड़ा घुसेड़ने के लिए कितनी बेताब हो रही है ? इसकी तो बहन की बुर ?

अम्मी ने फिर कहा – बहू, तेरी नन्द की बुर चोदी बुर बहुत टाइट है इसमें कोई मोटा लण्ड पेलना ?

इसी तरह की मस्ती करती हूँ हम तीनो धकापेल ऊपर से नीचे तक आगे से पीछे तक चुदवाने में लगीं थीं। अचानक लण्ड की अदला बदली होने लगी। मेरे ससुर ने अम्मी की बुर से लण्ड निकाल कर भाभी की बूर में घुसा दिया। उस्मान ने भाभी की बुर से लण्ड निकाल कर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। सकीब ने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल कर अम्मी के भोसड़ा में ठोंक दिया। लण्ड बदलते ही चुदाई का मज़ा दूना हो गया।

एक दिन मेरी खाला जान आ गयी। उसकी शादी शुदा बेटी भी उसके साथ थी। रात को खूब झमाझम बातें हुईं। मैंने भी खूब खुल कर बातें की और अपनी कहानी सुनाई। अम्मी ने भी कुछ छुपाया नहीं और मेरी भाभी जान भी खुल कर बोलीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

तभी उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा, यह सब तो मेरे घर मे भी होता है। एक दिन मेरा अब्बू मेरी ससुराल आया और मेरी नन्द की बुर में रात भर लण्ड पेला। सवेरे जब वह जाने लगा तो नन्द बोली अरे अंकल कहाँ जा रहे हो ? आज तो मेरी माँ चोदो। मुझे चोदा है तो मेरी माँ चोद कर जाओ न प्लीज। उधर मेरा ससुर भोसड़ी का बड़ा हरामी है।

एक दिन लण्ड खोल कर मेरे सामने खड़ा हो गया बोला बहू एक बार इसे भी पकड़ कर देख लो न ? अच्छा लगे तो आगे भी पकड़ती रहना ? उसका साला ८” लण्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। लण्ड का सुपाड़ा साला तोप का गोला लग रहा था। फिर क्या मैंने पकड़ ही लिया। उस दिन मैंने जब उससे चुदवाया तो पता चला की बड़ी लोगों से चुदवाने में कितना मज़ा आता है।

इस तरह एक बार हमने खाला और उसकी बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया। खाला भी बहुत बड़ी चुड़क्कड़ औरत हैं।

कहा :- खाला जान तेरी बहन का भोसड़ा ? तू तो बिलकुल हम लोगों जैसी ही है।

वह बोली :- माहिरा, तेरी माँ की बिटिया की बुर ? तेरी खाला की बेटी भी बहन चोद लण्ड की बड़ी शौक़ीन है। जाने कहाँ कहाँ के लण्ड अपनी माँ की चूत में घुसेड़ा करती है ?

तब तक उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा तेरी खाला भी भोसड़ी वाली एक से एक बेहतर लण्ड अपनी बेटी की चूत में पेलती है ? बड़ी हरामजादी है तेरी खाला और तेरी खाला का भोसड़ा ?

इस मस्ती का रिजल्ट यह है की पिछले कई सालों से हमारे घर में कोई परेशानी नहीं है। कभी कोई बीमार नहीं हुआ और कभी किसी डॉक्टर की जरुरत नहीं पड़ी।


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