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पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

adult stories मेरा नाम कंचन यादव है और यह कोई स्टोरी नहीं एक सच है, जो मेरे साथ हुआ है. में एक हाउसवाईफ हूँ और एक मिड्ल क्लास फेमिली से बिलॉंग करती हूँ, में 32 साल की हूँ और मेरे पति का नाम दिव्यांश है, वो 35 साल के है और वो एक इंजिनियर है. में एक बहुत ही नॉर्मल औरत हूँ और हमेशा अपनी फेमिली का ख्याल रखती हूँ, मेरे दो बच्चे है. पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया.

मेरी शादी को 12 साल हो चुके है और हम दोनों पति-पत्नी एक दूसरे से बेहद प्यार करते है, लेकिन पता नहीं क्यों मेरे पति मुझसे सेक्स में संतुष्ट नहीं रहते है? में उन्हें काफ़ी कोशिश के बाद भी खुश नहीं रख पाती हूँ. वो पिछले 3 साल से मेरे साथ नहीं है, उनका ट्रान्सफर बंगलोरे हो गया है, वो आजकल मुझसे ठीक से बात भी नहीं करते है. में कई बार उनसे मिलने भी गयी, लेकिन वो आजकल एकदम घुटे-घुटे से रहते है.

अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि में क्या करूँ? फिर मेरी एक सहेली से मैंने इस बारे में बात की. फिर उसने कहा कि तू उन्हें वॉच कर शायद उनका किसी और के साथ चक्कर हो. अब में अब उन पर वॉच करने लगी और उन्हें बहलाकर सब कुछ जानने की कोशिश करने लगी थी. फिर मैंने देखा कि वो हमेशा उदास रहते है और खाली टाईम में ब्लू फिल्म देखते रहते है और कहानियाँ पढ़ते रहते है. फिर काफ़ी दिनों के बाद भी मुझे ऐसा नहीं लगा कि उनका किसी और से चक्कर है.

अब मुझे ऐसा लगने लगा था कि शायद में ही कहीं ना कहीं ग़लत हूँ. अब मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ? फिर काफ़ी सोचने के बाद एक दिन मैंने उनके मोबाईल से सारा डाटा अपने मोबाईल में कॉपी कर लिया और उनके मोबाईल में लोड की हुई सारी ब्लू फिल्मों को बड़े ध्यान से देखना शुरू किया.


अब मुझे सारी मूवी देखने और स्टोरी पढ़ने में 1 हफ्ता लग गया था, क्योंकि मैंने बहुत ज़्यादा ध्यान देकर और समझकर सारी स्टोरी पढ़ी और ब्लू फिल्म देखी थी. अब में यह सब देखकर और पढ़कर एकदम हैरान हो गयी थी, अब मेरे दिमाग़ और हाथ पैरों ने काम करना बंद कर दिया था. अब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि में क्या करूँ?

क्योंकि जो कुछ मैंने पढ़ा और देखा था, वो करना मेरे लिए नामुमकिन था. अब में 2-3 दिन तक इसी सोच में पड़ी रही, क्योंकि इस तरह का ब्रूटल सेक्स मेरे लिए करना तो दूर सोचना भी मुश्किल था. फिर में वापस अपने घर आ गयी, लेकिन अब यह सब कुछ मेरे दिमाग़ से निकल ही नहीं रहा था. अब में हर पल परेशान रहने लगी और अकेले में रोती रहती थी, अब घर में सभी मुझसे इसका कारण पूछते, तो अब में उन्हें क्या बताती?

फिर मैंने मेरी सहेली को सब कुछ बताया, तो उसने मुझे समझाया और कहा कि देख तू चाहे तो सब कुछ कर सकती है, एक बार कोशिश तो करके देख हर मर्द एक जैसे नहीं होते है और सभी की जरूरतें अलग-अलग होती है, तू वापस अपने पति के पास जा और वही कर जो वो चाहते है, इसी से तू और तेरा पूरा परिवार खुश हो सकता है.

फिर मैंने उससे इसका कारण पूछा, तो वो मुझे एक बड़ी डॉक्टर के पास ले गयी. तब उस डॉक्टर ने मुझे बताया कि ब्रूटल सेक्स की चाहत किसी भी व्यक्ति को 3 कारण से होती है.

अगर कोई व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा परेशानी और टॉर्चर से रहा हो और उसके बाद भी अपनी चाहत पूरी ना कर पा रहा हो, मतलब अपनी ज़िंदगी से बिल्कुल निराश हो गया हो तो ऐसा व्यक्ति इस टाईप का सेक्स चाहता है, क्योंकि वो अपने आपको बेहद दर्द और तक़लीफ़ देना चाहता है, क्योंकि अगर फिज़िकल दर्द बहुत ज़्यादा होगा तो शायद वो मेंटली दर्द भूल जाएगा.

ऐसे व्यक्ति जिन्हें बहुत कोशिश करने के बाद भी अपनी मर्ज़ी के मुताबिक सेक्सुल सन्तुष्टी अपने पार्ट्नर से ना मिले तो ऐसे लोग ब्रूटल सेक्स अपने उसी पार्ट्नर से चाहते है, क्योंकि ये लोग यह सोच लेते है कि चलो अब दर्द से करके ही जी लेंगे

ऐसे लोग जो बिल्कुल ज़िंदगी से हार जाते है और जो अपनी ज़िंदगी में अपनी कोई भी इच्छा पूरी नहीं कर पाते है, ऐसे लोग भी ऐसा सेक्स चाहते है, वैसे ब्रूटल सेक्स की बहुत ज़्यादा ब्लू फिल्म देखना भी एक कारण है.

फिर उसने कहा कि अब तू खुद सोच कि तेरे पति के साथ कौन-कौन सा कारण है? जितने ज़्यादा कारण होंगे, वो उतना ही ज़्यादा ब्रूटल डिमांड करेगा. फिर मैंने उससे पूछा कि यह प्रोब्लम ठीक कैसे होगी? तो उसने कहा कि कुछ ही दिनों में यह ठीक हो जाएगी, अगर में बहुत ज़्यादा ब्रूटली सेक्स करती रहूँ और उसे संतुष्ट कर दूँ. “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर काफ़ी सोचने के बाद मैंने फ़ैसला किया कि अब में वही करूँगी, जो मेरा पति चाहता है. अब में उन्हें हर वो चीज़ दूँगी, जो वो चाहते है और इतनी ज़्यादा ब्रूटल बनाउंगी, जितना किसी भी ब्लू फिल्म में भी आज तक ना दिखाया गया हो और फिर में उनके पास पहुँच गयी. फिर पहले दिन मैंने उन्हें काफ़ी प्यार दिया और एक बहुत ही रोमांटिक सेक्स करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेरा ज़रा सा भी साथ नहीं दिया, क्योंकि उन्हें तो सिर्फ़ ब्रूटल सेक्स ही चाहिए था, वैसे भी अकेलेपन ने उन्हें काफ़ी बदल दिया था और वो बहुत चिड़चिड़े हो गये थे. अब में मायूस हो गयी थी.

फिर मेरी आत्मा ने मुझसे कहा कि तू यहाँ जो करने आई है वो कर, रोमांटिक सेक्स और प्यार तो में काफ़ी दे चुकी हूँ, लेकिन उन्हें अब यह पसंद नहीं है.


अब पता नहीं क्यों में चाहकर भी उस टाईप का सेक्स नहीं कर पा रही थी? अब मुझे एक अंजाना सा डर लग रहा था, या यूँ समझ लीजिए कि में ब्लू फिल्म की तरह नहीं बन पा रही थी. खैर फिर मैंने अपने आपसे वादा किया कि अब में ब्लू फिल्म में दिखाई जाने वाली औरत की तरह ही ब्रूटल और वहसी बनकर ही रहूंगी, चाहे जो भी हो.

फिर में 3 दिनों तक दुबारा से ब्लू फिल्म देखती रही और स्टोरी पढ़ती रही और उसमें दिखाई जाने वाली हर एक स्टेप और बातों को अपने दिमाग़ में सेट करती रही, ताकि कुछ भी छूट ना जाए. फिर एक दिन मैंने हर तरह से सारी तैयारी कर ली. फिर जब मेरे पति शाम को घर आए तो मैंने बहुत बढ़िया से सज-सवरकर एक बहुत ही मॉडर्न ड्रेस पहनकर उनका स्वागत किया.

फिर उनके फ्रेश होने के बाद मैंने उन्हें अपने हाथों से खाना खिलाया और उन्हें बहुत प्यार किया और कहा कि जान आज में तुम्हें हर तरह से खुश करूँगी, चाहे इसके लिए मुझे कुछ भी क्यों ना करना पड़े? तो उन्होंने मुझे अपने से दूर कर दिया और बड़ी बेरूख़ी से कहा कि तुम इस लायक नहीं हो.

अब मुझे बहुत दुख हुआ, मगर मैंने उनसे कहा कि आज बस तुम देखते जाओ. फिर में विस्की की बोतल लेकर बालकनी में आ गयी और अकेले बैठकर पीने लगी और फिर उन्हें भी पीने को कहा. अब वो तो जैसे हैरान हो गये और मेरे चेहरे पर एक कातिलाना स्माईल आ गयी, क्योंकि आज में पहली बार पी रही थी, इसलिए मैंने बहुत थोड़ी सी ही पी और उन्हें भी थोड़ी सी ही पिलाई, ताकि मेरा सारा प्लान बर्बाद ना हो. अब वो बहुत खुश लग रहे थे. उसके बाद में उन्हें रूम में ले गयी और उन्हें कपड़े खोलने को कहा. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो यह नहीं जानते थे कि में आज क्या करने वाली हूँ? इसलिए उन्होंने मना कर दिया और कहा कि मेरा मूड नहीं है. अब मुझे यह प्रूफ करना था कि में आज रियली में उन्हें खुश करना चाहती हूँ. फिर मैंने एक बार अपने मन में दुबारा से ब्लू फिल्म में देखे गये सीन को याद किया और अपने आपको आने वाले पल के लिए अंदर से तैयार किया और दुबारा से उन्हें थोड़े गुस्से में अपने कपड़े खोलने को कहा, मगर उन्होंने फिर से मना कर दिया.

तभी मैंने उन्हें खींचकर एक थप्पड़ उनके गाल पर मारा और कहा कि खोल मादरचोद नहीं तो फाड़ दूँगी. अब वो एकदम से हैरान हो गये और अपने गाल सहलाने लगे, इससे पहले कि में दूसरा थप्पड़ मारती, उन्होंने तुरंत अपने कपड़े खोल दिए और नंगे हो गये. फिर मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी और कसकर उनके बालों को पकड़कर मेरे बूब्स उनके मुँह में दबा दिए और बोली कि चूस कुत्ते जी भरकर चूस. अब मैंने उनके बाल इतने ज़ोर से पकड़े थे कि उनकी आँखों से आँसू निकल गये थे.

फिर मैंने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी. अब मेरे मुँह से निकलती सिसकारियों को सुनकर वो खुश हो गये और ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स चूसने लगे, अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.

अब में बीच-बीच में उनके गालों पर धीरे-धीरे थप्पड़ मारती जा रही थी और अपने बूब्स चुसवाए जा रही थी और उन्हें गालियाँ भी देती जा रही थी. अब उनके चेहरे पर वर्षो की दबी हुई चाहत पूरी होने की खुशी और दर्द का मिला जुला असर था.

अब मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था. फिर मैंने अपनी स्कर्ट खोल दी और जैसे ही मैंने अपनी स्कर्ट खोली तो उनका दिमाग़ घूम गया, क्योंकि मैंने स्कर्ट के नीचे उनसे छुपाकर बहुत पहले से ही एक बहुत ही मोटा और लंबा रबड़ का लंड पहना हुआ था, जिसे देखकर उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी थी और मेरे चेहरे पर एक कातिलाना स्माईल आ गयी थी.


फिर मैंने उनके बालों को पकड़ा और उनके मुँह में रबड़ का लंड डाल दिया. अब में ज़ोर-ज़ोर से अपना लंड उनके मुँह में अंदर बाहर करती रही, जिससे उन्हें बहुत तकलीफ़ हो रही थी, लेकिन मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब में रबड़ के लंड को ज़बरदस्ती उनके मुहं के अंदर घुसाने लगी थी, जिससे उन्हें उल्टी आनी शुरू हो गयी थी, लेकिन मैंने इसकी कोई परवाह नहीं की और ज़ोर-ज़ोर से उनका मुँह चोदती रही, अब उन्हें काफ़ी उल्टी हुई थी. फिर में काफ़ी देर तक अलग-अलग पोजिशन और स्टाईल से उनका मुँह चोदती रही. अब में उनके चेहरे पर और उनके मुँह के अंदर थूकती जा रही थी और उनके गालों पर कभी थप्पड़ और कभी रबड़ के लंड से मारती जा रही थी.

अब उनका पूरा चेहरा मेरे और उनके थूक से भर गया था और थप्पड़ की चोट से पूरा लाल हो गया था. अब यह देखकर में सोचने लगी थी कि में यह क्या कर रही हूँ? अपने पति के मुँह पर थूक रही हूँ और मार भी रही हूँ, लेकिन आख़िर मैंने अपने मन में आते ख्यालों को बाहर निकाला, क्योंकि आज मेरा असली टारगेट उन्हें पूरी तरह से खुश करके हमारे बीच के प्यार को दुबारा जिंदा करना था, वैसे भी आज मुझे हर काम हद से ज़्यादा ही करना था.

फिर मैंने बार-बार स्टाईल और तरीका चेंज कर-करके और अपने रबड़ के लंड पर बीच-बीच में हनी डाल डालकर उनसे रबड़ का लंड चुसवाया. फिर मैंने उन्हें बेड पर पटक दिया और उन्हें पेट के बल सुलाकर उनकी गांड की क्रीम से मसाज करने लगी. अब काफ़ी देर तक मसाज करने के बाद मैंने उनकी गांड में बहुत सारा नारियल तेल भर दिया और बहुत सारी क्रीम भी भर दी, जिससे उनकी गांड एकदम सॉफ्ट हो गयी.

फिर मैंने अपने रबड़ के लंड पर कंडोम लगाया और फिर में उनके ऊपर चढ़ गयी और अपना रबड़ का लंड उनकी गांड में घुसाना शुरू किया, क्योंकि रबड़ का लंड बहुत ज़्यादा मोटा था, इसलिए वो उनकी गांड में घुस नहीं रहा था और बार-बार फिसल रहा था. फिर मैंने उनसे अपने दोनों हाथों से चूतड़ को पूरा फैलाने को कहा, लेकिन वो नहीं माने.

फिर मैंने पास में पड़ी हुई उनकी बेल्ट से कसकर उनके चूतड़ पर एक बेल्ट मारी तो वो ज़ोर-जोर से चिल्लाने लगे और उन्होंने तुरंत अपने चूतड़ फैला दिए. फिर मैंने थोड़ी और क्रीम अपने रबड़ के लंड पर लगाई और फिर अपने रबड़ के लंड को उनकी गांड के छेद पर सेट किया और एक जोरदार झटका मारा. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब मेरा आधा रबड़ का लंड उनकी गांड को फाड़ते हुए अंदर घुस गया था. अब वो इतनी ज़ोर से चिल्लाए जैसे मैंने उनकी गांड में कोई चाकू घुसेड़ दिया हो और मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटाने लगे.

 फिर मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और 3-4 बेल्ट खींचकर उनके चूतड़ और पीठ पर मारे, तो वो ज़ोर- ज़ोर से चिल्लाने और रोने लगे. फिर मैंने अपनी पेंटी उनके मुँह में घुसेड़ दी और बोली कि चुप हो ज़ा मादरचोद तुझे ब्रूटल सेक्स की बहुत चाहत थी ना, तुम दिनभर मोबाईल में यही देखते हो ना, इसी सेक्स के लिए तुमने हमारे बीच के रिश्तों को खराब किया हुआ था, आज में तेरी हर चाहत पूरी करूँगी, चुप हो जा और शांति से मुझे तेरी गांड फाड़ने दे, नहीं तो बेल्ट से मार-मारकर तेरा पूरा बदन छील दूँगी.

अब मेरा इतना रुद्र और वहसी रूप देखकर दिव्यांश चुप हो गया था. अब उनकी गांड में मेरा रबड़ का लंड आधा घुस चुका था. फिर मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से एक जोरदार शॉट मारा तो मेरा लंड आधा अंदर घुस गया.


अब उसकी जोरदार चीख मेरी पेंटी पर अपना मुँह होने के कारण अंदर ही घुट कर रह गयी थी. अब वो मुझे धक्का देने लगा और ज़ोर-ज़ोर से अपने हाथ-पैर पटकने लगा था. फिर मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और कस-कसकर उसकी पीठ और चूतड़ों पर मारने लगी. फिर में पूरी उसकी पीठ पर सो गयी और ज़ोर से उसके कंधे पर अपने दाँत से काटा.

अब वो भयंकर दर्द से बिलबिलाने लगा और मुझसे हाथ जोड़कर दया की भीख माँगने लगा, लेकिन में आज किसी भी कीमत पर मानने वाली नहीं थी, अब में उसके चूतड़ों पर बैठ गयी और एक और जोरदार शॉट मारा तो अब उसकी गांड से खून निकलने लगा था. अब वो लगभग बेहोश सा हो गया था, अब में भी काफ़ी थक गयी थी. फिर में अपना रबड़ का लंड उनकी गांड में घुसाकर उनके चूतड़ों पर ही बैठ गयी और थोड़ी देर आराम करने लगी. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो लगातार रोए जा रहे थे, अब मुझे भी उन पर दया आने लगी थी, लेकिन मैंने तुरंत ही अपने मन को संभाला, क्योंकि अगर आज मैंने ज़रा सी भी दया दिखाई तो शायद फिर सारी ज़िंदगी अपना खोया प्यार दुबारा नहीं पा सकूँगी. फिर थोड़ी देर तक आराम करने के बाद मैंने फिर से उनकी गांड मारना शुरू किया. अब में धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढ़ाती जा रही थी.

फिर काफ़ी देर तक उनकी गांड मारने के बाद मैंने अपनी पोज़िशन चेंज की और उन्हें कुत्ता बनाकर चोदने लगी और साथ ही उनके चूतड़ों पर ज़ोर-ज़ोर से थप्पड़ भी मारने लगी और अपने नाखूनों से उसकी पीठ नोचने लगी.

अब उन्हें बहुत दर्द हो रहा था और वो रोते जा रहे थे. फिर धीरे-धीरे उनका रोना कम होता गया. फिर मैंने उन्हें पीठ के बल सुला दिया और उनके ऊपर लेट गयी और जोरदार तरीके से चुदाई करने लगी. अब में साथ ही उनके पूरे बदन को अपने हाथों से सहला रही थी और उनके निप्पल को और होंठो को चूसती जा रही थी. अब इस पोज़िशन में और मेरे प्यार से अब उनका दर्द काफ़ी कम हो रहा था.

फिर मैंने उनको पीठ के बल ही थोड़ा नीचे खींचा और में बेड के नीचे खड़ी हो गयी. फिर मैंने दुबारा से खड़े-खड़े ही उनकी गांड में पूरी ताक़त से एक ही बार में अपना पूरा रबड़ का लंड जड़ तक डाल दिया. अब वो इतनी ज़ोर से चिल्लाए कि बताना मुश्क़िल है, लेकिन मैंने उन पर ज़रा सा भी रहम ना करते हुए इस बार अपनी पूरी ताक़त से भयंकर चुदाई शुरू कर दी. यह इतना जबरदस्त था कि पूरा बेड ज़ोर-ज़ोर से हिलने लगा था और साथ ही में उन्हें अपने हाथों से मारती भी जा रही थी और उन्हें गालियाँ भी देती जा रही थी.

फिर में उनका लंड सहलाने लगी, जिससे उन्हें कुछ राहत मिली. अब में भी बहुत ज़्यादा थक चुकी थी, क्योंकि हमने यह सब रात में 8 बजे शुरू किया था और अब 1 बज चुके थे. फिर में उनके ऊपर 69 की पोज़िशन में आ गयी और उनका लंड चूसने लगी और अपनी गांड उनके मुँह में घुसेड़ दी और ज़बरदस्ती उनसे अपनी गांड चटवाने लगी. अब में उनका लंड चूसती रही और उनसे अपनी गांड चटवाती रही. “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर जब उनका वीर्य निकला, तो मैंने वो सारा स्पर्म अपने मुँह में भरकर उनके मुँह में डालकर ज़बरदस्ती उनको पिला दिया. फिर मैंने उनको बेड से नीचे उतार दिया और उनके ऊपर चढ़कर उनके मुँह और सारे बदन पर मूतने लगी.

अब उनका पूरा बदन मेरे पेशाब से भर गया था. फिर मैंने ज़बरदस्ती उन्हें बाथरूम में ले जाकर नहलाया और बेड पर सुला दिया. अब उनकी हालत काफ़ी खराब हो गयी थी, वो अभी भी सिसक रहे थे और रो रहे थे. सच ही है अगर 4 घंटे तक लगातार किसी की गांड मारी जाए तो सोचिए उसका क्या होगा?


अब मुझे भी अपनी चूत चुदवाने की ज़रूरत थी, लेकिन उनकी हालत इतनी खराब थी कि फिलहाल यह संभव नहीं था, वैसे भी रात के 1 बज गये थे. फिर मैंने भी रूम में फैले अपने पेशाब को साफ किया और सुबह 5 बजे का अलार्म सेट करके सो गयी. फिर सुबह 5 बजे मेरी नींद खुल गयी तो मैंने देखा कि मेरे पति नंगे ही सोए हुए है और अब में भी नंगी ही थी.

फिर में उठी और अपनी ज़रूरत का सारा सामान बेड पर ले आई. अब वो एकदम बेहोशी में सोए हुए थे. फिर मैंने नींद में ही उनकी गांड और चूतड़ों की क्रीम और तेल से खूब मसाज की, अब उन्हें होश ही नहीं था. फिर उसके बाद मैंने एक दवा और क्रीम बहुत सारी उनकी गांड में घुसेड़ दी.

इस क्रीम की ख़ासियत यह है कि इसे स्किन में जहाँ भी लगाया जाता है, वहाँ की स्किन 3-4 घंटे के लिए सुन्न हो जाती है, बस इस क्रीम को ठीक से लगाकर 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है. फिर में क्रीम लगाकर टॉयलेट में चली गयी. फिर मैंने वो रबड़ का लंड दुबारा से पहना और उस पर कंडोम लगाया और बहुत सारी क्रीम लगाई और उन्हें ठीक से पेट के बल सुलाया. फिर मैंने उनके चूतड़ पूरे फैलाए और अपना लंड उनकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और फिर उनकी गांड में घुसेड़ दिया. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वो नींद में ही थोड़ा सा झटपटाए, लेकिन क्रीम लगाने के कारण शायद उन्हें ज़्यादा एहसास नहीं हुआ था, अभी मेरा रबड़ का लंड ज़रा सा ही अंदर घुसा था. फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से एक ही झटके में पूरा लंड उनकी गांड में जड़ तक घुसेड़ दिया. अब उनकी गांड से खून की धार बहने लगी थी और अब एक झटके में उनकी आँख खुल गयी और वो चीख उठे थे.

हालांकि मैंने उनकी गांड पर क्रीम लगाई थी. फिर भी इतनी बेरहमी से एक झटके में इतना मोटा लंड घुसने पर कुछ तो दर्द होना ही था. अब वो चीखने लगे और अपनी पूरी ताक़त से मुझे धक्का देकर अपने ऊपर से हटा दिया. अब मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने तुरंत बेल्ट उठाई और उन्हें बेल्ट से मारना शुरू कर दिया. अब उनके चूतड़ एकदम लाल हो गये थे और वो रोने लगे थे.

फिर मैंने उनके गालों पर 3-4 थप्पड़ मारे और उन्हें फिर से बेड पर पटक दिया और उनके ऊपर चढ़कर दुबारा से अपने लंड को पूरा उनकी गांड में घुसेड़ दिया. हालांकि वो मुझसे ताक़त में काफ़ी ज़्यादा थे, लेकिन फिर भी वो अपनी ताक़त प्रयोग नहीं कर रहे थे. इसी से में समझ गयी थी कि अगर ये ताक़त का प्रयोग करते तो में कभी भी यह सब नहीं कर पाती, लेकिन वो भी कई सालों से यही सब करवाना चाहते थे, इसलिए वो अपनी ताक़त का प्रयोग नहीं कर रहे थे.

वैसे भी इस बार उन्हें दर्द नहीं होना था, क्योंकि मैंने क्रीम जो लगाई थी. फिर मैंने अपनी पूरी ताक़त से और फुल स्पीड में उनकी चुदाई करनी स्टार्ट कर दी. बस इतना समझ लीजिए कि इस बार की चुदाई इतनी ख़तरनाक और जबरदस्त थी कि अगर मैंने क्रीम ना लगाई होती तो शायद उन्हें इतना भयंकर दर्द होता कि वो किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं कर पाते. फिर थोड़ी ही देर में उनकी गांड पूरी सुन्न हो गयी, इसलिए उन्हें इसका एहसास नहीं हुआ और वो बोले कि क्या हुआ लंड क्यों निकाल लिया?

अब में समझ गयी थी कि अब चाहे इनकी गांड में चाकू ही घुसेड़ दो, लेकिन इन्हें कुछ पता नहीं चलेगा और में अपनी पूरी ताक़त और फुल स्पीड में उनकी गांड मारती रही. अब लगभग 1 घंटे में ही में बुरी तरह से थक गयी थी. फिर लास्ट में मैंने एक बार फिर उन्हें कुत्ता बनाकर बहुत बुरी तरह से चोदा और उसके बाद अपना रबड़ का लंड बाहर निकल लिया.


फिर मैंने देखा कि अब मेरे रबड़ के लंड पर बहुत सारा खून लगा हुआ है और उनकी गांड से भी खून बह रहा है. फिर मैंने सब कुछ ठीक से साफ करके थोड़ी सी क्रीम एक रुई में लेकर उनकी गांड में भर दी, लेकिन मैंने उन्हें यह सब नहीं बताया था. अब में जानती थी कि 3-4 घंटे के बाद जब क्रीम का असर ख़त्म होगा, तब इनकी हालत बहुत खराब होने वाली है. “पति को हार्डकोर सेक्स”

अब वक़्त था मेरी चूत की आग शांत करने का, जो रातभर से चुदाई के लिए तड़प रही थी. फिर मैंने उनको सीधा किया और उनका लंड चूसने लगी, अब जल्दी ही उनका लंड खड़ा हो गया था. फिर में उनके ऊपर चढ़ गयी और अपनी चूत को उनके लंड पर सेट किया और एक ही झटके में उनका लंड जड़ तक अपनी चूत में डाल लिया. अब मुझे एक जबरदस्त शांति मिली थी, आख़िर में भी पिछले 3-4 महीनों से चुदाई के लिए तड़प रही थी और फिर में उनके लंड पर कूदने लगी.

में आज इतनी खुश थी कि में बता नहीं सकती. अब में जल्दी ही थक गयी और उनसे एक मस्त चुदाई की रिक्वेस्ट की. फिर वो मेरे ऊपर आ गये और उन्होंने मेरी इतनी मस्त और जबरदस्त चुदाई की, जो में आपको शब्दों में बता नहीं सकती हूँ. फिर जब उनका स्पर्म मेरी चूत में निकला, तो मुझे इतनी शांति और सुकून मिला, जो शायद इस दुनिया की और किसी चीज़ में नहीं है.

अब मैंने कसकर उनको अपनी बाहों में जकड़ लिया था और पागलों की तरह उन्हें किस करने लगी और उनके चेहरे को चाटने लगी थी, अब उन्होंने भी मेरा पूरा साथ दिया था. फिर काफ़ी देर तक हम ऐसे ही एक दूसरे को जकड़कर प्यार करते रहे, शायद यह पल मेरी ज़िंदगी के सबसे हसीन पल थे, जिन्हें में खोना नहीं चाहती थी, क्योंकि आज की इस रात को मैंने वो सब कुछ किया था, जिसके बारे में कभी सोच भी नहीं सकती थी.

फिर में उठी और उनको एक पैन किलर टैबलेट दी, जिससे उन्हें ज़्यादा दर्द ना हो. फिर वो टैबलेट खाकर फिर से सो गये. अब उनके सोने के बाद मैंने उनके पूरे बदन पर जहाँ- जहाँ बेल्ट से मारा था, नाखूनों से नोचा था और दाँत से काटा था, सभी जगह दवा लगाने लगी.

अब उनके ज़ख़्मों को देखकर मेरी आँखों से आँसू बहने लगे थे और में फूट-फूटकर रोने लगी थी कि आख़िर मैंने यह क्या कर दिया? अब मुझे अपनी इस हरकत पर अपने आपसे इतनी तकलीफ़ हो रही थी कि में शब्दों में बता नहीं सकती. फिर मुझे भी रोते-रोते नींद आ गयी, जबकि दोपहर के 1 बज चुके थे. फिर भी में सो गयी.

फिर शाम को 4 बजे मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि दिव्यांश भयंकर दर्द से बुरी तरह तड़प रहे है और फिर मैंने गर्म पानी से उनकी गांड की 3 दिनों तक खूब सिकाई की और दवा लगाई, तब जाकर उन्हें कुछ आराम हुआ और वो ठीक हो पाए. आज ज़िंदगी में पहली बार वो मुझसे इतना खुश थे कि बताना मुश्क़िल है.

फिर वो बोले कि आज तुमने मेरी सबसे बड़ी तमन्ना पूरी की है. अब उनका स्वभाव मेरे साथ पूरी तरह से बदल चुका था, अब वो मुझे इतना प्यार कर रहे थे, जितना शायद कोई पति अपनी पत्नी से नहीं करता होगा. अब में हमेशा सोचती हूँ कि क्या ये सब मैंने ठीक किया? क्या मुझे ऐसा करना चाहिए था? क्या इस दुनिया में ऐसे अजीब शौक रखने वाले मर्द भी है? जिनकी जरूरतें इतनी ख़तरनाक है. अब उन्हें हर महीने में 1-2 बार ऐसा ही ब्रूटल सेक्स चाहिए था, आख़िर क्यों दिव्यांश को यह सब चाहिए था? “पति को हार्डकोर सेक्स”

फिर मैंने बहुत सोचा, लेकिन आज तक मुझे इसका जवाब नहीं मिला. खैर अब तो मैंने भी अपने आपको उनके अनुसार बदल लिया है. अब में महीने में 2 बार ऐसा उनके साथ ज़रूर करती हूँ और कोशिश करती हूँ कि इस दौरान ज़्यादा से ज़्यादा ब्रूटल बनूँ और हर बार कुछ नया और अलग करूँ. अब ऐसा करने से मुझे अंदर से बहुत तकलीफ़ होती है, क्योंकि में उनसे बहुत प्यार करती हूँ, लेकिन क्या करूँ मजबूर हूँ? बगैर ऐसा किए हमारी ज़िंदगी में खुशी नहीं आ सकती है.


वैसे भी अब में अक्सर उन्हें सताती रहती हूँ और कई बार उन्हें परेशान करने के लिए में खूब उनका लंड चूसती हूँ और जैसे ही उनका स्पर्म निकलने वाला होता है तो में चूसना बंद कर देती हूँ, तब वो मुझसे एक बार चोदने की कुत्ते की तरह भीख माँगते है. सच में मुझे उन्हें ऐसे चुदाई की आग में जलाने और तड़पाने में बहुत मज़ा आता है. फिर थोड़ी देर तक उन्हें तड़पाने के बाद उनसे चुदवाने में बहुत मज़ा आता है.

अब हमारी ज़िंदगी ऐसे ही बहुत मज़े में कट रही है. अब अक्सर वो भी मेरी गांड मारते है, वो कभी-कभी तो खुद रबड़ का लंड पहनकर एक साथ दो लंड मेरी गांड और चूत में घुसा देते है. मुझे दर्द भी बहुत होता है, लेकिन क्या करूँ? उनके बेपनाह प्यार के कारण में सारा दर्द भी सह लेती हूँ. अब वैसे भी मुझे धीरे-धीरे इन सबकी आदत भी पड़ती जा रही है, क्योंकि अगर अपने पति को खुश रखना है और उनका प्यार पाना है तो इतना तो सहना और करना ही पड़ेगा.


अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

 

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई



मेरे घर में मेरे सिवा मेरी एक बेटी है जो 25 साल की है। पहले मेरा भरा पूरा परिवार था। मैं मेरी पत्नी, एक बेटी और एक बेटा। एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था, बच्चे पढ़ रहे थे, तनख्वाह भी अच्छी थी, सब बहुत बहुत बढ़िया चल रहा था। फिर ना जाने किसकी नज़र लग गई।

अपंग बाप की वासना मजबूरी में चुदाई

एक एक्सीडेंट मे, मेरी पत्नी और मेरा बेटा मुझे छोड़ कर चले गए, मेरी दोनों टाँगें नकारा हो गई। जो चार पैसे बचा कर रखे थे, वो सब मेरे इलाज में और बाकी कामो में खर्च हो गए।


शुरू शुरू में तो कुछ दोस्तों रिशतेदारों ने दरियादिली दिखाई, मगर सारी उम्र कौन किसका खर्चा उठा सकता है।प्राइवेट जॉब थी तो जॉब गई तो घर में खाने के लाले पड़ गए।


कहाँ मैं सोच रहा था कि अपनी बेटी की शादी करूंगा, मगर अब हालात ये थे कि कोई रिश्ता भी नहीं आ रहा था। उस एक्सीडेंट के 4-6 महीने में ही सारी दुनिया ने जैसे मुझसे मुँह मोड़ लिया।

ना मुझे समझ में आ रहा था कि मैं क्या काम करूँ … क्योंकि चल तो मैं बिलक्कुल नहीं सकता था, सारा दिन व्हील चेयर पर बैठा रहता था।


तो एक दिन अपने एक मित्र से कह कर मैंने अपनी बेटी की नौकरी का इंतजाम कर दिया। अब जॉब तो उसकी भी प्राइवेट थी सुबह साढ़े आठ वो घर के सारे काम निपटा कर चली जाती और शाम को 7 बजे के करीब घर आती। घर आकर वो मुझे खाना बना कर देती।


मैं भी व्हील चेयर पर बैठे बैठे जितना काम हो सकता था, करता रहता। घर की सफाई कर देता, चाय बना लेता था।


इस एक्सीडेंट से उबरने में और ठीक होने में मुझे करीब एक साल लग गया।


बेटी का काम भी ठीक से जम गया था।


मगर अब मैं नोटिस कर रहा था कि उसमें भी बदलाव आने लगे हैं।


पहले वो सिर्फ सलवार कमीज़ पहनती थी, मगर वो जीन्स टीशर्ट, कैप्री, लेगिंग सब पहनने लगी।

घर में तो वो टीशर्ट और निकर में ही रहती थी।


अब इतनी बुज़ुर्गी तो मुझ पर भी नहीं आई थी, बेशक टाँगें नकारा हो चुकी थी मगर औज़ार एकदम सही था। रोज़ सुबह जब सोकर उठता हूँ तो पूरा कड़क होता है।

अब जब पेट में जाए अन्न तो खड़ा होए लन्न।


मगर इस खड़े का मैं क्या करूँ … कहाँ जाऊँ।

पैसे सारे बेटी के हाथ में होते थे तो उससे तो मांग नहीं सकता था कि बेटी थोड़े पैसे दो, मुझे किसी रंडी के पास जाना है।


तो इसका एक जवाब ये ढूंढा कि घर में काम करने वाली नौकरानी रख लो।

जो काम वाली रखी तो करीब 50 साल की रही होगी।


अब ये लोग अपना ख्याल तो रखती नहीं, तो इसलिये वो 50 में भी काफी बूढ़ी सी लगती थी।

मगर कुछ दिन बाद वो बूढ़ी भी मुझे परी लगने लगी।


अब दिक्कत यह थी कि इससे सेक्स की बात कैसे की जाए, आगे कैसे बढ़ा जाए।

और दूसरी बात अगर वो अपना घागरा उठाएगी, तो पैसे भी तो मांगेगी तो पैसे कहाँ से लाऊँगा।


फिर मैंने और स्कीम सोची कि पहले इसे पटा कर देखते हैं, पैसे का भी कोई न कोई इंतजाम हो ही जाएगा।


वो करीब 11 बजे आती थी, तो मैंने उसके आने का बड़ी बेसबरी से इंतज़ार करना, जब वो आती तो उसे चाय बना कर देनी, उससे बातें करनी, उसके दुख सुख में उसको सलाह देनी!


मतलब थोड़े दिनों में उससे मैंने दोस्ती सी तो कर ली।

अब वो भी चाय पीते वक्त मुझसे बहुत सी बातें कर लेती थी।


एक दिन मैंने उसे बातों बातों में बता दिया कि मुझे और कोई दिक्कत नहीं बस रात को नींद नहीं आती।

बीवी के जाने के बाद रात गुज़ारनी बहुत मुश्किल हो गई है। समझ में नहीं आता कि मैं क्या करूँ।

अब इशारा तो वो मेरा समझ गई … मगर बोली कुछ नहीं!

लगे हाथ मैंने साथ में ये भी कह दिया कि अब मेरे पास कोई पैसे भी नहीं होते, सारी कमाई बेटी के पास होती है, तो इस काम के लिए उससे पैसे मांग भी नहीं सकता।

अपनी बात कहते हुये मैंने अपने चेहरे पर बड़ी मायूसी और बेचारगी के भाव बनाए रखे।


उस दिन तो कुछ नहीं हुआ मगर हर थोड़े दिन बाद मैं घूमा फिरा कर फिर वही बात कहता।

मुझे यकीन था कि अगर ये मेरी बात बार बार सुन रही है तो एक दिन मान भी जाएगी।


अगर इसने ये काम नहीं करना होता तो मेरी बात ही नहीं सुनती; मुझे पहले ही टोक देती।


मेरी मेहनत रंग लाई।

एक दिन फिर चाय पीते पीते मैंने बात छेड़ी।


मैंने यूं ही झूठ ही कह दिया- जानती हो, आज के ही दिन मेरी शादी की सालगिरह है। पिछले साल हम दोनों ने कितना मज़ा किया था, दोनों सारा दिन घूमे, खाया पिया और रात को को कितना एंजॉय किया. और आज मैं अकेला यहाँ सड़ रहा हूँ। कोई भी ऐसा नहीं जो आज मेरा हाथ पकड़ सके, मुझे आज के दिन सांत्वना दे सके।


मैंने जानबूझ कर कुछ रोने की एक्टिंग सी करी।

वो उठी और मेरे पास आकार बोली- साहब मैं कई दिन से आपकी ये दर्द भरी कहानी सुन रही हूँ, आपने हमेशा मेरे सुख दुख में मुझे अच्छी सलाह दी, मैं आपके लिए क्या कर सकती हूँ। आप बताओ?


मैं अंदर से खिल उठा, बोला- तुम क्या करोगी, तुम भी शादीशुदा हो बाल बच्चे वाली हो। तुम्हें मैं कैसे ये सब कह सकता हूँ?

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मैं सब समझती हूँ। आप बहुत अच्छे हैं, रोज़ मुझे चाय पिलाते हैं, मेरे हर दुख दर्द को समझते हैं, बहुत सी कोठी वाली तो औरत होकर भी मेरी बात नहीं सुनती, मगर आप एक मर्द होकर भी मेरी सब बात सुन लेते हो। आपने मुझे इतना मान दिया, अब आपके लिए मुझे भी कुछ करना चाहिए।


मैंने सोचा कि यार क्या कहूँ, इसे कैसे कहूँ।

फिर कुछ सोच कर बोला- अगर तुमसे कुछ मांगूं तो दे सकती हो?

वो बोली- आप कहिए तो सही!


मैंने कहा- मुझे अपनी पत्नी का प्यार चाहिए, उसके तन का, मन का सब सुख चाहिए।

वो खड़ी मुझे देखती रही।


मुझे लगा जैसे ये चाह रही हो कि भोंसड़ी के हाथ आगे बढ़ा कर पकड़ ले अब क्या खुद ही तेरा लौड़ा पकड़ कर अपनी चूत में डालूँ।

तो मैंने अपने दुखी भाव के साथ उसका हाथ पकड़ कर कहा- तुम्हारा साथ ही मेरी ज़िंदगी को संवार सकता है.

कहते हुए मैंने उसका हाथ चूम लिया।


बाद में मुझे ख्याल आया कि यार ये तो झाड़ू लगा रही थी, और अपने हाथ भी धोकर नहीं आई।

मगर कोई बात नहीं … मैंने उसका हाथ सिर्फ ये देखने के लिए चूमा था कि कहीं वो इस बात का विरोध तो नहीं करती।


मगर वो कुछ नहीं बोली, तो मैंने उसके हाथ को फिर से चूमा और उसकी बाजू को सहलाया।

और सहलाते हुये उसे अपनी ओर खींचा।


वो आगे आई तो मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया।

स्त्री का आलिंगन करते ही मन बाग बाग हो गया, खिल उठा।


उसके ढीले मम्मे मेरे सीने से लगे और मैंने उसके गाल पर चूमा।

उसने भी मुझे हल्के से अपनी बांहों में भरा!


बस अब और क्या चाहिए था … तीन महीने की मेहनत रंग लाई, और आज मेरी काम वाली मेरी आगोश में थी।

मैंने बिना कोई और देर किये सीधे उसका मम्मा पकड़ा, थोड़ा ढीला सा नर्म सा था, ब्रा भी नहीं पहना था.

मगर फिर भी पराई औरत के जिस्म अलग ही कशिश होती है।


एक दो बार मम्मे दबा कर मैंने उसका ब्लाउज़ ऊपर उठा कर उसके मम्मे बाहर निकाले और चूस लिए।

मुँह में मम्मे के साथ उसके गंदे पसीने का स्वाद भी आया।


मैंने उससे कहा- एक बात कहूँ, क्या तुम मेरे लिये नहा सकती हो?

वो बोली- हाँ क्यों नहीं!


वह आगे आगे और मैं व्हील चेयर पर पीछे पीछे … वो बाथरूम में घुसी, मैंने भी अपने कपड़े उतारे.

बिलकुल नंगा होकर मैं भी अपने बदन को घसीटते हुये बाथरूम में घुस गया।


उसने अपने कपड़े उतारे तो मैंने अपने मोबाइल पर उसकी वीडियो बनानी शुरू कर दी।

मैं उठ कर खड़ा नहीं हो सकता था तो वो नीचे बैठ गई।


मैंने उसके बदन को अपने हाथों से साबुन लगा कर धोया। गंदमी रंग का भरा हुआ बदन।

करीब 36 साइज़ के मम्मे, बड़ा हुआ पेट, मोटी गाँड, भरी हुई जांघें। अंदर से तो वो बहुत पर्फेक्ट थी।


उसने भी मुझे नहलाया।

उसके हाथ लगाने से मेरा लंड अकड़ गया।

तो मैंने कहा- चूस ले इसे मेरी जान!


उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मुँह में लेकर चूसा।

महीनों बाद ऐसा आनंद मिला।


मगर मैंने उसे ज़्यादा देर लंड चूसने नहीं दिया; मुझे डर था कि जैसे वो मज़े ले लेकर चूस रही थी, कहीं मेरा पानी ही न निकल जाए।


उसके बाद मैं उसे अपने बेडरूम में ले आया।

पहले अपने तौलिये से अपना बदन पौंछा, फिर उसका बदन पौंछा।


उसके बाद व्हील चेयर से उतर कर बेड पर बैठ गया, वैसे ही बिलकुल नंगा और लंड मेरा पूरा ताव में!


मैंने उसे कहा- वो अलमारी खोलो.

उसने अलमारी खोली।

मैंने कहा- उसमे ऊपर वाले दराज़ में मेरी बीवी के कपड़े हैं। तुम उनमे से एक ब्रा और पेंटी निकाल कर पहन लो।


उसने एक सफ़ेद ब्रा और एक मेरून कलर की पेंटी निकाल कर पहन ली।

फिर उसने मेरे कहने पर मेरी बीवी की लिपस्टिक लगाई, आँखों में काजल डाला। आने हिसाब से वो थोड़ा साज संवर कर मेरे पास आई।


मैंने कहा- बड़ी सुंदर लग रही हो!

जबकि वो लग नहीं रही थी.

मैंने उसकी झूठी तारीफ करी।


वो खुश हो गई, मुस्कुरा पड़ी.

मैंने उसे अपने पास बुलाया और अपनी कमर पर बैठने को कहा।


वो मेरी कमर पर एक टांग इधर और दूसरी टांग उधर कर करके बैठ गई।

मैंने उसके दोनों कूल्हों को पकड़ कर दबाया और उसको अपनी और खींच कर उसके होंठों को चूस लिया।


लिपस्टिक के स्वाद में उसके बासी मुँह का ज़ायका दब गया.


अब तो मुझे उसके जिस्म में कोई हूर नज़र आ रही थी।

मैंने उसके दोनों मम्मे पकड़े और खूब दबाये और जी भर के उसके होंठ चूसे, गाल चूसे।

वो भी अपनी कमर हिला कर अपनी चूत को मेरे लंड पर घिसा रही थी।


मैंने कहा- ब्रा खोल!

तो उसने अपने ब्रा की हुक खोलकर अपने दोनों मम्मे मेरे सामने आज़ाद कर दिये।


मैंने उसके मम्मे को पकड़ कर उसका निपल चूसा और जोश में आकर काट लिया तो वो सिसक उठी- अरे साहब, निपल पर मत काटो, दर्द होता है, कहीं और काट लो.

तो मैंने उसके मम्मो पर कई जगह काट काट कर निशान बना दिये।


मैंने कहा- जानेमन, बहुत दूध पी लिया, अब ज़रा अपनी मस्त चूत का नमकीन पानी का भी मज़ा दिला दो.

मेरे कहने पर वो उठकर खड़ी हुई और चड्डी उतार दी।


उसकी बालों से भरी चूत के भीगे होंठ मुझे साफ दिखे।


मैं सीधा होकर लेट गया तो वो मेरे ऊपर उल्टी हो कर लेट गई।

अपनी भरी हुई गाँड उसने मेरे मुँह पर रख दी।


मैंने उसके चूत के दोनों फांक खोल कर हल्के से अपनी जीभ से छुआ।

दरअसल मैं उसकी चूत के पानी का स्वाद देखना चाहता था.


अगर मुझे स्वाद अच्छा न लगता तो मैं शायद मैं उसकी चूत ना चाटता. मगर उसकी चूत का स्वाद ठीक था तो मैं अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर और सुराख के अंदर यहाँ वहाँ हर जगह

से चाट गया।


वो भी मेरे लंड को पूरा मज़ा लेकर चूस रही थी।

मेरे लंड टोपा बाहर निकाल कर पूरा गुलाबी टोपा उसने चाटा, चूसा; मेरे आँड ताक चाट गई।


फिर मैंने कहा- बस अब ऊपर आ जाओ, मैं तो तुम्हें चोद नहीं सकता, ये काम तुम्हें ही करना पड़ेगा।

वो बोली- कोई बात नहीं साहब, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।


कह कर वो घूमी और मेरे ऊपर आ बैठी। उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत में लेने लगी, दो चार बार ऊपर नीचे होकर उसने मेरा सारा लंड निगल लिया।

अब वो अपने पाँव के बल बैठ कर चुदवाने लगी।


मुझे तो स्वर्ग के नज़ारे आ गए।

क्या मस्त चूत थी उसकी … गीली, चिकनी और टाईट।


मैंने पूछा- तेरा पति नहीं करता तेरे साथ?

वो बोली- करता है … पर बहुत कम! कभी कभी ही उसका मन करता है, नहीं रोज़ तो वो दारू में ही धुत्त रहता है।


मैंने पूछ लिया- तो फिर तुम किसी और के पास जाती होगी?

वो हंस कर बोली- हाँ है एक !


मैंने पूछा- कौन है?

वो बोली- जाने दो साहब, बस है कोई!

मुझे भी उससे क्या था।


वो धीरे धीरे मुझे चोदती रही; मैं उसके मम्मों से खेलता रहा।


उसका हुआ या नहीं मुझे पता नहीं … मगर करीब 7-8 मिनट के चुदाई के बाद मेरा ज्वालामुखी उसकी चूत के अंदर ही फट गया।

बहुत माल गिरा। भर भर के उसकी चूत से गाढ़ा सफ़ेद माल बाहर को चू रहा था।


मगर वो नहीं रुकी, तब तक जब तक उसका काम भी नहीं हो गया।

उसके बाद वो मेरे ऊपर ही निढाल होकर गिर गई।


कुछ देर वैसे ही लेटने के बाद वो उठी।

बाथरूम में जाकर अपना मुँह धोकर आई, लिपस्टिक काजल साफ किया, फिर मेरे बदन को साफ किया।


उसके बाद मुझे कपड़े निकाल कर दिये।


मैं कपड़े पहन कर फिर से अपनी व्हील चेयर पर बैठ गया।

वो चली गई।


उसके बाद हमारा तो काम चल निकला।

जब भी दिल करता वो मेरे घर आती; सुबह 9 से 6 बजे के बीच कभी भी।

मेरी सेक्स लाइफ बिलकुल रेगुलर हो गई।

अब तो मैं हर वक्त खुश रहता।


एक दिन रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, बड़ा मन कर रहा था कि काश इस वक्त होती तो साली को पेलता।


नींद नहीं आ रही थी तो मैं बेड से उठ कर अपनी व्हील चेयर पर आ गया।

रात के करीब 11 बजे होंगे।


मुझे अपनी बेटी के कमरे से आवाज़ आई हंसी की।

मुझे लगा किसी से फोन पर बात कर रही होगी।


तो मैं धीरे धीरे से अपनी व्हील चेयर खींचता हुआ, बाहर को आ गया।


जब अपनी बेटी के कमरे के पास गया तो उसके कमरे की बत्ती जल रही थी।


खिड़की से अंदर झाँका तो मेरे पैरों के तले से ज़मीन निकल गई।

मैंने देखा कि बिस्तर पर मेरी बेटी घोड़ी बनी हुई है और एक लड़का उसे पीछे से पेल रहा है. जबकि दूसरे ने उसके मुँह में अपना लंड दे रखा है।


मैं तो जैसे शर्म से ज़मीन में ही गड़ गया … काँप उठा.

अपनी व्हील चेयर चलाते हुये मैं वापिस अपने कमरे में आ गया।


आज पहली बार मैंने अपनी जवान बच्ची को बिलकुल नंगी देखा और वो भी दो मुश्टंडों से एक साथ चुदवाते हुये।

मुझे तो जैसे मरने को जगह नहीं मिल रही थी।


फिर मैंने सोचा कि वो भी जवान है, उसकी भी शादी की उम्र है, उसे भी तो अपने लिए एक साथ चाहिए।

ठीक है अगर उसका एक बॉय फ्रेंड होता तो कोई बात नहीं थी.

मगर ये तो दो थे और दोनों को देख कर लग रहा था के दोनों में से मेरी बेटी को तो कोई भी प्यार नहीं करता होगा।


मैंने सोचा कि इसके बारे में मुझे अपनी बेटी से बात करनी होगी।

एक दो दिन बाद मैंने उससे कहा- बेटा देखो अब तुम्हारी शादी की उम्र हो गई है, अगर मैं किसी काबिल होता तो तुम्हारे लिए कोई अच्छा सा वर खोजता। मगर तुम भी जानती हो, मैं मजबूर हूँ। अगर तुम्हारी कोई पसंद है, तो वो बता दो। मुझे वो भी मंजूर होगा।


बेटी ने पहले हैरानी से मुझे देखा और फिर बोली- ये आज अचानक मेरी शादी की बात कैसे छेड़ दी आपने?

मैंने कहा- बस मैंने सोचा, अब तुम्हें भी शादी कर लेनी चाहिए. चलो जो गलती हो गई सो हो गई, पर आगे से सब ठीक हो जाए तो अच्छा है।


वो मेरे पास आई और बोली- कौन सी गलती कर ली मैंने?

मैंने कहा- अरे जाने दो, छोड़ो उसे! तुम ये बताओ कि तुम्हें कोई लड़का पसंद है?


वो बोली- नहीं … पहले आप ये बताओ कि आपने मेरी कौनसी गलती पकड़ी है?

फिर मुझे मजबूर हो कर उसे कहना पड़ा- परसों रात को मैं वैसे ही बाहर आया था, तो मैं देखा था वो दो लड़के और तुम …

कहते कहते मैं रुक गया।


वो मेरे पास आकर बैठ गई और बोली- पापा, वो दोनों लड़के मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे।

मैंने पूछा- तो फिर तुम उनके साथ ऐसे?


वो सुबकने लगी और खुल कर बताने लगी:


ये सब आपके उस दोस्त ने ही शुरू किया जो आपके सामने मुझे अपनी बेटी कहता था।

मगर जब उसे पता चला कि मुझे आपके इलाज के लिए और पैसे चाहिए, उसी दिन वो अपनी औकात पर आ गया.

उसने मेरे सामने उसने शर्त रख दी कि अगर मुझे पैसे चाहिए तो मुझे उसकी बात माननी पड़ेगी।


मैंने बहुत सोचा, आपसे भी बात करनी चाहिए मगर आप भी मेरी क्या मदद करते।


फिर मजबूर होकर मैंने उसकी बात मान ली।


उसके बाद तो जैसे उसने मुझे अपने लिए ही रख लिया।

जब वो मुझे पैसे देता तो अपने ढंग के कपड़े भी पहनने को कहता, उसके कहने पर ही मैंने जीन्स टी शर्ट वगैराह पहनने शुरू किए।

फिर उसका बेटा विदेश से पढ़ कर वापिस आ गया।


जब उसने फेक्टरी जॉइन की एक उसने मुझे अपने बाप के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया।

उसने अपने बाप को तो कुछ नहीं कहा मगर उसके बाद मेरी रेल बन गई। जब दिल करता बाप पकड़ लेता, जब दिल करता बेटा पकड़ लेता।

मुझे तो उन लोगों ने अपनी रखैल ही बना कर रख लिया।


धीरे धीरे मुझे समझ आने लगा कि ये खेल सिर्फ इसी चीज़ का है।


उसके बाद मैंने अपने दम पर अपने लिए लोग तलाश करने शुरू किए।

इसमें मुझे कोई खास दिक्कत नहीं आई।

और फिर तो मेरे बहुत से दोस्त बन गए।

उस रात जो आपने देखा वो मेरे बॉय फ्रेंड नहीं थे, मेरे क्लाइंट थे।


मैंने कहा- तो क्या तुम धन्धा करने लगी हो?

वो बोली- आप ये भी कह सकते हो. मगर यह मत भूलना कि ये जो आज आप अच्छा खा पीकर बढ़िया कपड़े पहन कर बैठे हो, ये सिर्फ उस फेक्टरी की कमाई है। इसमें मेरा खून पसीना सब लगा है।


इतना कहकर मेरी बेटी रोने लगी।


मैं पत्थर के बुत की तरह वहाँ बैठा रहा, अपनी रोती हुई बेटी को चुप भी न करवा सका।


रोने के बाद वो खुद हही चुप हो गई और मैं अपनी व्हील चेयर खींचता वापिस अपने कमरे में आ गया।


उस रात मुझे नींद नहीं आई, मैंने खुद को बहुत ही मजबूर पाया।


उसके बाद मैंने अपने मन में सोचा कि अगर मैंने समय से उसकी शादी कर दी होती आज मुझे ये दिन न देखना पड़ता!

मकान मालिक की विधवा बहु की चुदाई

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पीयूष है और मेरी उम्र 25 साल और में गुडगाँव अपने पूरे परिवार के साथ रहता हूँ। वैसे में एक छोटे से सामान्य परिवार का लड़का हूँ। दोस्तों जो बात में आज आप सभी को बताने वाला हूँ वो मेरे साथ दो साल पहले घटित हुई एक सच्ची घटना है, जिसमें मैंने अपने मकान मालिक की विधवा बहु की मजबूरी को समझकर उसकी चुदाई करके उसके साथ साथ अपनी भी सेक्स की भूख को शांत किया और अपने उस काम को पूरा किया जिसको करने के विचार में पिछले कुछ दिनों से बना रहा था, क्योंकि वो अपने गोरे चेहरे, कामुक भरे हुए बदन से इतनी उम्र की नहीं लगती थी जितनी वो है और वैसे भी बहुत सालों पहले उसके पति की म्रत्यु हो जाने के बाद वो अपनी बिना चुदी चूत को अपने साथ लेकर घूम रही थी और मैंने उसको चोदकर उसकी उस इच्छा को पूरा किया।


दोस्तों करीब दो साल पहले हम सभी घर वाले एक किराए के मकान में रहा करते थे। उस मकान की पहली मंजिल पर हम लोग और नीचे के हिस्से में हमारी मकान मालकिन अपनी विधवा बहू के साथ रहती थी और उनकी बहू का नाम निशा था। उसकी उम्र 32 साल थी और हम लोग उसको हमेशा निशा भाभी कहते थे। दोस्तों निशा भाभी व्यहवार की एक बहुत अच्छी औरत थी और वो चुप चुप रहने वाली औरत थी। उनका एक 8 साल का लड़का था जो उस समय किसी हॉस्टल में रहता था और वहीं अपनी पढ़ाई किया करता था और वो खुद एक छोटे से स्कूल में टीचर थी और घर में अकेले बैठकर उनका मन नहीं लगता था। इसलिए वो पिछले कुछ सालों से पास ही के एक प्राइवेट स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगी थी और मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी और उनका बात करने का तरीका और उनका व्यहवार हंसमुख स्वभाव का था, इसलिए में उनकी तरह शुरू से बहुत आकर्षित था और जब भी वो घर के पीछे बने बाथरूम में कपड़े धोती तो में उन्हे ऊपर से खिड़की के पीछे छुपकर घूरकर देखता रहता वो नीचे बैठकर मेरी तरफ अपनी गोरी छाती को करके कपड़े धोने में लगी रहती और में उनके झूलते लटकते हुए बाहर निकलते हुए बूब्स को देखकर मन ही मन खुश होता रहता और फिर कुछ देर के बाद में वो मस्त नजारा देखकर जोश में आकर खिड़की पर लगे उस पर्दे के पीछे छुपकर उनको देखते हुए उनके नाम की मुठ भी मारता था।


अब में चाहता था कि वो मेरी इस सेक्स की भूख को हमेशा के लिए शांत करे और अब मेरा अपनी हॉट सेक्सी भाभी को देखकर इतना बुरा हाल हो गया था कि मेरा वीर्य अब रात को भी निकलने लगा था और में नींद में भी उनकी ही चुदाई के सपने देखने लगा था। फिर एक दिन दोस्तों ऊपर के बाथरूम में किसी वजह से पानी ना होने की वजह से में नीचे घर के पीछे बने उस बाथरूम में नहाने चला गया और जब मैंने बाथरूम का दरवाजा बंद किया तो वो बंद नहीं हुआ तो मैंने बहुत बार उसको लगाने की कोशिश की, लेकिन वो फिर भी ना लगा, क्योंकि वो दरवाजा पानी लगने की वजह से फूल गया था और इसलिए उसको लगाना बड़ा मुश्किल था। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि कौन आएगा? क्योंकि वैसे भी निशा तो इस समय स्कूल गई होगी और उसकी सास जो है वो अब भी सो रही होगी। फिर दोस्तों मैंने यह बात सोचकर दरवाजे को बस थोड़ा सा बंद करके नहाने लगा और एकदम मेरा ध्यान उस दरवाजे के पीछे लटकी पेंटी और ब्रा पर चला गया।


दोस्तों हो सकता है कि सुबह जल्दी स्कूल जाने की वजह से निशा अपने कपड़े स्कूल से आने के बाद हमेशा धोया करती थी, इसलिए वो उस समय दरवाजे पर लटकी हुई थी और मैंने तुरंत उस पेंटी को नीचे उतारी और में उसको सूंघने लगा। तब मैंने सूंघकर महसूस किया कि उस पेंटी से बहुत तेज मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी और पेंटी का अगला हिस्सा जो कि हमेशा चूत के सामने चिपका रहता है वो उस जगह से बहुत टाईट था और जैसे उस पेंटी में नशा भरा था जिसको में सूंघने गया और उस ब्रा में से पाउडर की भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। फिर मैंने वहीं से निशा का तेल उठाया और अपने एक हाथ में लेकर लंड पर लगा लिया और लंड की मालिश करने लगा, जिसकी वजह से लंड एकदम चिकना होकर चमक उठा।

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अब में जोश में आकर बिल्कुल पागलों की तरह सब कुछ सूंघ रहा था और मुझे हर जगह से निशा के जिस्म की वो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी और में उसको सूंघते हुए अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था। फिर में बाथरूम की दीवार पर पानी डालकर अपने लंड को में पागलों की तरह दीवार पर मसल रहा था। जैसे वो दीवार ना होकर निशा की गांड हो और फिर अचानक से में झड़ गया और उस दिन मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा सफेद पानी छोड़ दिया। दोस्तों सच कहूँ तो उस दिन मुझे बहुत अच्छा लगा और अब में हर दिन ही नीचे वाले बाथरूम में नहाने जाने लगा और में हर दिन वैसे ही ब्रा, पेंटी को सूंघकर अपने लंड को हिलाकर अपना वीर्य पेंटी में निकाल देता, लेकिन एक दिन मुझे वहां पर निशा के कपड़े नहीं मिले और तब मुझे शक हुआ कि उसको मेरे लंड की खुशबू आ गई है या उसने मेरे वीर्य को अपनी ब्रा पेंटी पर लगा हुआ देखा लिया है, इसलिए वो आज अपने कपड़े उठाकर बाथरूम से ले गई। फिर अगले दिन दोपहर को करीब दो बजे जब में नहाने के लिए उसी बाथरूम में गया तो मैंने देखा कि वहां पर एक बहुत सुंदर पेंटी और ब्रा लटकी हुई थी।


में उसको देखकर बड़ा खुश हो गया और में उन्हे सूंघने और चाटने लगा। दोस्तों में सेक्स के लिए इतना पागल हो जाता हूँ कि में किसी की चूत क्या उसकी गांड का छेद भी में चाट लूँ। अब उस समय तो में भाभी के बारे में सोचकर पागलों की तरह अपना तोता पकड़कर हिला रहा था और उसकी पेंटी को सूंघ भी रहा था। मेरा लंड अब जो पूरी तरह से तनकर खड़ा था वो भी अब उस मुलायम पेंटी का मज़ा ले रहा था। तभी अचानक से किसी ने आकर दरवाजा खोल दिया, लेकिन में तो मज़े से अपनी दोनों आंखे बंद करके मुठ मार रहा था तो मेरा लंड एकदम खड़ा और लाल था। तभी अचानक मैंने अपनी आँख खोली और देखा तो मेरे सामने अब निशा खड़ी हुई थी। में बिल्कुल भूल गया था कि आज शनिवार का दिन है और निशा उस दिन स्कूल से जल्दी आ जाएगी, लेकिन आज मेरे साथ ऐसा हो चुका था। वो अपने स्कूल से जल्दी आ चुकी और उसको अपने सामने देखकर मेरी गांड फट गई। उसने मुझे उस हालत में देखकर मुझे बहुत गुस्से से देखा और फिर उसने अपनी पेंटी को तुरंत एक झटका देकर मेरे हाथ से छीन लिया और वो मुझे उसी तरह गुस्से से देखती हुई चली गई।


अब उसका वो गुस्सा देखकर मेरा सारा बदन सूख गया और में बहुत ज्यादा डर गया था। में उसी समय जल्दी से बाथरूम के बाहर आ गया और तुरंत ऊपर चला गया। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि वो कहीं सीधी मेरी माँ के पास ना चली गई हो और जाकर मेरी माँ से उस हरकत के बारे में उनको भी बता दिया हो, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और फिर भी में पूरा दिन डरा डरा घर की छत पर इधर उधर ही घूमता रहा और में सोचने लगा कि अगर वो आई तो में उससे सही मौका देखकर अपने उस गलत काम के लिए माफी माँग लूँगा और शाम को 5:30 बजे मुझे नीचे से एक बच्चा बुलाने आया। वो निशा से ट्यूशन पढ़ता था। वो मुझसे बोला कि मेडम आप को बुला रही है। फिर नीचे आया और सोच रहा था कि निशा के पैर पड़कड़ कर माफी माँग लूँगा। फिर कुछ देर बाद मैंने नीचे जाकर देखा तो नीचे उस समय कोई भी नहीं था, क्योंकि निशा की सास सत्संग सुनने घर से कहीं बाहर गई थी और अपने पास ट्यूशन आने वाले बच्चों की उसने तब तक छुट्टी कर दी थी और जब में हिम्मत करके निशा के कमरे में गया तो मैंने देखा कि उसने उस समय एक हल्के गुलाबी रंग का नाइट गाउन पहना हुआ था, जिसको देखकर लगता था कि वो उसकी शादी के समय का था। फिर वो एक टेबल पर बैठकर कुछ लिख रही थी और में उस समय उसके पीछे खड़ा हुआ था और अब उसने मुझे बिना देखे मुझसे कहा कि इधर मेरे पास आओ। अब में बहुत चकित होकर चुपचाप उसके पास चला गया। फिर वो मुझसे बोली कि तुम अब यहाँ पर बैठ जाओ और में उसके कहने पर चुपचाप उसके पास में बैठ गया और मैंने देखा कि वो अब भी कुछ लिख रही थी और फिर उसने मुझे बिना देखे कहा।


निशा : तुम इतने दिनों से लगातार मेरे कपड़ो के साथ वो सब क्या कर रहे थे?


में : निशा जी प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो और वो सब मुझसे ग़लती से हो गया था। ऐसा दोबारा कभी भी नहीं होगा और मेरी तरफ से आपको शिकायत का कोई भी मौका नहीं मिलेगा, प्लीज आप मुझे बस एक बार माफ़ जरुर कर दो।


निशा : में तुमसे यह सब नहीं पूछ रही हूँ। तुम सबसे पहले मुझे यह बताओ कि तुम मेरी पेंटी के साथ क्या कर रहे थे?


दोस्तों उनके मुहं से पेंटी जैसा शब्द सुनकर मुझे बहुत अजीब सा लगा और में इसलिए थोड़ा सा फ्री भी हो गया। में अपने मन में उसकी चुदाई के सपने को सच होता हुआ देखकर मन ही मन बहुत खुश था, जिसकी वजह से मुझे अब आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती जा रही थी।


निशा : क्या में तुम्हारी मम्मी को यह सब बता दूँ कि तुम आज कल कैसे कैसे काम करने लगे हो?


में : प्लीज़ आप मेरे घरवालों को कुछ भी मत बताना, प्लीज़ आप अपना मुहं बंद रखना, वर्ना मेरे साथ बहुत बुरा हो सकता है।


अब निशा मेरी उस बात को सुनकर हल्का सा मुस्कुराई और वो मुझसे कहने लगी।


निशा : तुम अगर मेरा मुहं बंद करना चाहते हो तो करो ना तुम्हे किसने रोका है। फिर उसमे मेरे साथ साथ तुम्हारा भी फायदा है?


में : जी में आपकी इस बात का कुछ भी मतलब नहीं समझा और आप यह क्या कह रही है?


निशा : हाँ तुम मेरा मुहं बंद करना चाहते हो तो करो ना, कर दो मेरा मुहं बंद हाँ में भी तैयार हूँ।


में : हाँ ठीक है आप कहती है तो में कर दूंगा, लेकिन वो काम में कैसे करूं?


निशा : पागल तेरा 6 इंच का लंड है एक लड़की का मुहं कैसे बंद करते है यह बात भी क्या में तुझे बताऊँ? चल अब अपने होंठो को मेरे होंठो पर रखकर मेरा मुहं तू आज हमेशा के लिए बंद दे।


दोस्तों अब में निशा की वो बातें सुनकर बिल्कुल पागल हो गया और फिर में थोड़ा सा डर डरकर उसकी तरफ जाने लगा, लेकिन वो एकदम से उछलकर मुझसे चिपक गई और उसका पूरा बदन उस समय मुझसे सांप की तरह लिपटा हुआ था और वो मेरे होंठो को चूसने लगी। फिर करीब दस मिनट तक उसने मेरे दोनों होंठ चूसे और फिर वो एक एक करके उनको चूसने भी लगी थी। वो कभी ऊपर वाला होंठ तो कभी नीचे वाला और उसके बाद वो मेरे गले लग गई। अब वो मुझसे कहने लगी कि पीयूष में बहुत सालों से बिल्कुल अकेली हूँ और मैंने पिछले सात साल से सेक्स नहीं किया है और मैंने इन दिनों में आज तक कोई भी लंड नहीं देखा और आज में तेरे जैसा दमदार लंड को देखकर एकदम पागल हो गई हूँ।


आज तू मेरी इस बरसों की प्यास को बुझा दे और में सारी जिंदगी बस तेरी बनकर ही रहूंगी और तू मेरी इस प्यासी जिंदगी में अपने लंड को चूसने का वो मौका मज़ा दे जिसके लिए में कब से सोच रही हूँ और इतना कहकर वो अब मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी। फिर मैंने उससे कहा कि निशा में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ आज में तेरी सेक्सी चूत का मज़ा लूटना चाहता हूँ। में कब से तेरी चुदाई करने के सपने देख रहा हूँ।


निशा : हाँ आजा मेरी जान, लूट ले आज तू मेरी चुदाई के मज़े और मुझे भी वो सुख देकर पूरा कर दे।


फिर मैंने उससे कहा कि इस तरह से नहीं क्योंकि जितनी आग तेरे बदन में लगी है वो इतनी जल्दी नहीं बुझेगी में आज रात को आ जाऊंगा। तुम पिछले दरवाजे को खोल देना और अपनी चूत के बाल भी जरुर साफ कर लेना, साली तूने बहुत दिनों से उसको चटवाई नहीं है और इसकी सफाई भी बहुत जरूरी है। यह बात कहकर मैंने उसकी चूत पर अपना एक हाथ रख दिया और तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसके सारे कपड़े गीले थे और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया, क्योंकि वो बहुत दिनों से प्यासी थी। दोस्तों उसके बाद मैंने उसे खूब चोदा और उसने भी बड़े मजे से चुदवाकर मजा लिया।

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा

बाप ने अपनी बेटी को जबरदस्ती चोदा, baap ne beti ko zabardusi choda

वो बोली : "यार, तेरे पापा को तो सारी तरकीबे आती है, इनसे चुद कर सच में बड़ा मजा आएगा ''.. दोनों सहेलियां फिर से अंदर देखने लगी, अपने-२ जहन में खुद को रश्मि कि जगह रखकर चुदते हुए. शायद चौथी बार था उनका , पर फिर भी समीर को देखकर लग नहीं रहा था कि वो थके हुए हैं , सटासट धक्के मारकर वो चुदाई कर रहे थे.


अचानक समीर ने अपना लंड बाहर खींच लिया, और उठकर रश्मि के चेहरे के पास आ गया, शायद इस बार वो उसके चेहरे पर अपना माल गिराकर संतुष्ट होना चाहता था.


एक दो झटके अपने हाथों से मारकर जैसे ही अंदर का माल बाहर आया, काव्या और रश्मि को लगा जैसे दुनिया रुक सी गयी है, स्लो मोशन में उन्हें समीर के लंड का सफ़ेद और मसालेदार दही रश्मि के चेहरे पर गिरता हुआ साफ़ नजर आया..


रश्मि के चेहरे को अपने पानी से धोने के बाद,बाकी के बचे हुए रस को समीर ने उसके मुम्मों पर गिरा दिया, और वहीँ बगल में लेटकर पस्त हो गया.


शायद ये उनका आखिरी राउंड था.


काव्या ने श्वेता को चलने के लिए कहा, पर जैसे ही श्वेता उठने लगी, उसके सर से खिड़की का शीशा टकरा गया और एक जोरदार आवाज के साथ वो शीशा टूट गया, दोनों सहेलियों कि फट कर हाथ में आ गयी.


दोनों जल्दी से उछलती हुई वापिस अपने कमरे कि तरफ भागी और दरवाजा बंद करके चुपचाप लेट गयी.


समीर ने जैसे ही वो आवाज सुनी वो नंगा ही भागता हुआ वह पहुंचा, जाते हुए उसने अपने ड्रावर में से पिस्टल निकाल ली थी.

baap ne beti ko zabardusti choda



वो चिल्लाया : "कौन है, कौन है वहाँ ……''


नंगी पड़ी हुई रश्मि ने अपने शरीर पर चादर लपेटी और वो भी डरती हुई सी बाहर कि तरफ आयी, जहाँ समीर खिड़की के टूटे हुए शीशे को देख रहा था.


रश्मि : "क्या हुआ, क्या टूटा है यहाँ ''...


समीर : "खिड़की का शीशा, जरूर कोई यहाँ छुपकर हमें देख रहा था ''


रश्मि के पूरे शरीर में करंट सा लगा, ये सोचते हुए कि उसकी रात भर कि चुदाई को कोई देख रहा था


रश्मि : "कौन, ऐसे कौन आएगा यहाँ ??"..


समीर ने काव्या के रूम कि तरफ देखा तो रश्मि बोली : "तुम क्या कहना चाहते हो, काव्या थी यहाँ, नहीं, ऐसा नहीं हो सकता, वो भला ऐसा क्यों करेगी, उसमे इतनी अक्ल तो है कि वो ऐसा नहीं करेगी ''..


समीर ने कुछ नहीं कहा, वो समझ चूका था कि काव्या के सिवा और कोई इतनी उचाई पर आ ही नहीं सकता था, नीचे से ऊपर आने के लिए कोई भी साधन नहीं था, सिर्फ बालकनी से टापकर ही वहाँ पहुंचा जा सकता था , पर वो ये सब बाते अभी करके रश्मि को नाराज नहीं करना चाहता था..


इसलिए वो अंदर आ गया और उसके बाद दोनों सो गए.


दूसरे कमरे में काव्या और श्वेता भी थोड़ी देर में निश्चिन्त होकर सो गए.


अगले दिन श्वेता जल्दी ही निकल गयी, शायद वो समीर कि शक़ वाली नजरों से बचना चाहती थी.


रश्मि सुबह चार बजे सोयी थी, इसलिए वो अभी तक सो रही थी, पर समीर को जल्दी उठने कि आदत थी, इसलिए वो अपने समय पर उठ गया था.


श्वेता को नौ बजे के आस पास जाता हुआ देखकर उसने मन ही मन कुछ निश्चय किया और काव्या के रूम कि तरफ चल दिया.


काव्या अपने बिस्तर पर लेटी ही थी कि समीर ने दरवाजा खड़काया , काव्या ने जम्हाई लेते हुए दरवाजा खोला, और सामने समीर को खड़ा देखकर उसकी आँखे एकदम से खुल गयी, उसके दिमाग में रात कि चुदाई कि पूरी तस्वीर चलने लगी फिर से और उसकी नजर अपने आप समीर के लंड कि तरफ चली गयी.


काव्या : "अरे अंकल .... मेरा मतलब पापा , आप .... इतनी सुबह ??".


समीर कुछ नहीं बोला और अंदर आ गया , उसके चेहरे पर गुस्सा साफ़ झलक रहा था, वो चलते हुए बालकनी में पहुँच गया


काव्या कि तो हालत ही खराब हो गयी, वो वहाँ से अपने कमरे कि बालकनी कि तरफ देखने लगा, और फिर अंदर आकर काव्या के सामने खड़ा हो गया, वो समीर से नजरे नहीं मिला पा रही थी..


समीर : "तुम ही थी न रात को मेरी बालकनी में, तुम्ही देख रही थी न वो सब ....''


काव्या : "क …क़ …क़्यआ …… मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है ''.


वो इतना ही बोली थी कि समीर का एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके बांये गाल पर पड़ा और वो बिस्तर पर जा गिरी.


समीर चिल्लाया : "एक तो गलती करती हो और ऊपर से झूट बोलती हो …''


इतना कहते हुए वो आगे आया और बड़ी ही बेदर्दी से उसने काव्या के बाल पकडे और उसे खड़ा किया


काव्या दर्द से चिल्ला पड़ी , पर समीर पर उसका कोई असर नहीं हुआ , समीर का एक और थप्पड़ उसके कान के पास लगा और उसे कुछ देर के लिए सुनायी देना भी बंद हो गया.


आज तक उसे रश्मि ने भी नहीं मारा था, और ना ही कभी उसके खुद के बाप ने, और आज ये समीर उसे पहले ही दिन ऐसे पीट रहा था जैसे उसकी बरसों कि दुश्मनी हो.


वैसे समीर था ही ऐसा, उसका बीबी से तलाक सिर्फ इसी वजह से हुआ था कि दोनों में झगडे और बाद में मार पीट काफी ज्यादा बढ़ चुकी थी, समीर ने तो अपनी बीबी को एक-दो बार अपनी पिस्टल से डराया भी था, और यही कारण था उनके तलाक का, घरेलु हिंसा .


पर समीर का ये चेहरा सिर्फ घर तक ही था, बाहर किसी को भी उसके ऐसे बर्ताव कि उम्मीद तक नहीं थी, सोसाईटी में और ऑफिस में तो उसे शांत स्वभाव का सुलझा हुआ इंसान समझा जाता था, पर गुस्सा कब उसके दिमाग पर हावी हो जाए, ये वो खुद नहीं जानता था ..


और आज भी कुछ ऐसा ही हुआ था.


उसके खुद के घर में , काव्या उसके बेडरूम के बाहर छुप कर उसकी चुदाई के नज़ारे देख रही थी, ऐसा सिर्फ उसे शक था, पर फिर भी उसने अपने गर्म दिमाग कि सुनते हुए जवान लड़की पर हाथ उठा दिया, ये भी नहीं सोचा कि उसकी एक दिन कि शादी पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, रश्मि क्या कहेगी जब उसे पता चलेगा कि उसकी फूल सी नाजुक लड़की को ऐसे पीटा गया है..


और काव्या को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उसके साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है, जिस समीर पापा कि चुदाई देखकर उसकी चूत में भी पानी भर गया था कल रात और वो उनसे चुदने के सपने देखने लगी थी ,वो उसके साथ ऐसा बर्ताव कर रहे हैं, वो सब रात भर का प्यार नफरत में बदलता जा रहा था अब..


समीर ने एक और झापड़ उसे रसीद किया और फिर बोला : "सच बोल, तू ही थी न रात को वहाँ ''.


काव्या ने आग उगलती हुई आँखों से समीर को देखा और ना में सर हिला दिया..


समीर ने उसे धक्का दिया और उसका सर दिवार से जा लगा, और उसके माथे पर एक गोला सा बन गया , वो दर्द से बिलबिला उठी.


समीर उसके करीब आया और फिर से उसके बालों को पकड़ा और उसके चेहरे के करीब आकर गुर्राया : "मेरी बात कान खोलकर सुन ले साहबजादी, ये मेरा घर है, और मेरी मर्जी के बिना यहाँ का पत्ता भी नहीं हिल सकता, फिर से ऐसी कोई भी हरकत न करना कि मैं तुझे और तेरी माँ को धक्के मारकर इस घर से निकाल दू , समझी , अगर यहाँ रहना है तो सीधी तरह से रह ''.


और फिर बाहर निकलते हुए वो पीछे मुड़ा और बोला : "ये बात हम दोनों के बीच रहे तो सही है, वरना अंजाम कि तुम खुद जिम्मेदार होगी ''.


ये सारा किस्सा रश्मि को न पता चले, इसकी धमकी देकर समीर बाहर निकल आया ...... अपने बिस्तर पर दर्द से बिलखती हुई काव्या को छोड़कर .


उसने उसी वक़्त श्वेता को फ़ोन करके रोते-२ सारी बात बतायी , उसे भी विश्वास नहीं हुआ कि समीर ऐसा कुछ कर सकता है उसके साथ , श्वेता ने काव्या को अपने घर पर आने के लिए कहा.


वो नहा धोकर तैयार हो गयी, तब तक रश्मि भी उठ चुकी थी, और सबके लिए नाश्ता बनाकर टेबल पर इन्तजार कर रही थी, समीर और काव्या जब टेबल पर आकर बैठे तो दोनों ने एक दूसरे कि तरफ देखा तक नहीं.


रश्मि ने अपनी बेटी को उदास सा देखा तो उसके पास आयी और तभी उसके माथे पर उगे गुमड़ को देखकर चिंता भरी आवाज में बोली : "अरे मेरी बच्ची, ये क्या हुआ, ये चोट कैसे लगी ''.


काव्या ने नफरत भरी नजरों से समीर कि तरफ देखा, जो बड़े मजे से नाश्ता पाड़ने में लगा हुआ था, और फिर धीरे से बोली : "कुछ नहीं माँ, रात को बिस्तर से गिर गयी थी, ऐसे बेड पर सोने कि आदत नहीं है न, इसलिए ''.


समीर उसकी बात सुनकर कुटिल मुस्कान के साथ हंस दिया..


अपना नाश्ता करने के बाद काव्या अपनी माँ को बोलकर श्वेता के घर पहुँच गयी.


उसके कमरे में पहुंचकर उसने विस्तार से वो सब बातें बतायी जो आज सुबहउसके साथ हुई थी , जिसे सुनकर श्वेता का खून भी खोलने लगा


श्वेता : "साला, कमीना कहीं का , देख तो कितने वहशी तरीके से पीटा है तुझे, ''


उसने काव्या के माथे को छूकर देखा, वहाँ अभी तक दर्द हो रहा था


श्वेता : "यार, जिस तरह से तू समीर के बारे में बता रही है, मुझे तो लगता है कि ये कोई साईको है, अगर जल्द ही इसका कुछ नहीं किया गया तो शायद किसी दिन ये आंटी के साथ भी ऐसा कुछ ना कर दे ''

ये बात सुनते ही काव्या सिहर उठी, उसे अपनी माँ से सबसे ज्यादा प्यार था और उसे वो ऐसे पिटते हुए नहीं देख सकती थी


काव्या : "नहीं, मैं ऐसा नहीं होने दूंगी ....''


श्वेता : "वो ऐसी हरकत ना करे, ना ही तेरे साथ और ना ही आंटी के साथ, इसके लिए हमें कुछ करना होगा ''


दोनों ने एक दूसरे को देखते हुए सहमति से सर हिलाया, दोनों ने मन ही मन दृढ़ निश्चय कर लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए , वो कभी समीर को ऐसा कुछ नहीं करने देंगी


उनके अंदाज को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था कि वो अपनी बात पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं

दोनों समीर से निपटने कि रणनीति तैयार करने लगी


श्वेता : "देख, अभी कुछ दिन के लिए तो तू बिलकुल चुपचाप रह , तेरा ये सौतेला बाप क्या करता है, कौन-२ उसके दोस्त है, किन बातों से खुश होता है, किनसे नाराज होता है, ये सब नोट करती रह, उसके बाद हम उसके हिसाब से आगे का प्लान बनाएंगे ''.


काव्या : ''पर इससे क्या होगा …??''.


श्वेता : "हमें बस ये सुनिश्चित करना है कि जो आज तेरे साथ हुआ है वो दोबारा न हो, और न ही कभी तेरी माँ के ऊपर ऐसी नौबत आये ''.


काव्या : "और जो उसने मेरे साथ किया है आज,उसका क्या ''


श्वेता : "उसका भी बदला लिया जाएगा , तू चिंता मत कर , तभी तो मैं कह रही हु, उसपर नजर रखने के लिए, हमें उनकी कमजोरी पकड़नी है, ताकि उसका फायदा उठाकर हम अपनी मर्जी से उन्हें अपने इशारों पर नचा सके ''


काव्या कि समझ में उसकी बात आ गयी ..


थोड़ी देर तक बैठने के बाद काव्या वहाँ से वापिस घर आ गयी.


उसने अब श्वेता कि बात मानते हुए समीर के ऊपर नजर रखनी शुरू कर दी ..


वो कोई भी बात कर रहा होता, उसे सुनने कि कोशिश करती, किन लोगो से मिलता है, कहा-२ जाता है, उन सब बातों का हिसाब रखना शुरू कर दिया उसने..


चुदाई के मामले में एक नंबर का हरामी था वो..


दिन में 2-3 बार सेक्स करता था, एक सुबह ऑफिस जाते हुए और फिर रात को सोने से पहले..


उसकी माँ कि मस्ती भरी चीखे पुरे घर में गूंजती थी, जिन्हे सुनकर वो भी गीली हो जाती थी.


समीर का कोई फ्रेंड सर्किल नहीं था, ऑफिस और घर के बीच चक्कर काटना , बस यही काम था उसका..


बस एक ही फ्रेंड था, उसका वकील दोस्त, लोकेश दत्त.


जिसकी सलाह मानकर समीर ने रश्मि को प्रोपोस किया था..


दोनों दोस्त अक्सर शाम को बैठकर दारु पीया करते थे और अपने दिल कि बाते एक दूसरे से शेयर करते थे..लोकेश अपनी फेमिली के साथ पास ही रहता था उनके घर के ...


ये सब वो उसी बालकनी में बैठकर करते थे जहाँ छुपकर काव्या ने अपनी माँ को चुदते हुए देखा था.


पर पीने के बाद समीर ये भूल जाता कि शायद काव्या अपने कमरे के अंदर बैठकर वो सब बाते सुन रही है जो वो दोनों कर रहे होते हैं और वो दोनों अक्सर चुदाई कि बाते भी करते थे या फिर ऑफिस में आयी किसी नयी लड़की के बारे में या कोर्ट में आये केस में फंसी बेबस लड़कियो और उनकी कारस्तानियों के बारे में..


कुल मिलाकार उनकी हर चर्चा का केंद्र सेक्स ही होता था..


शादी के एक हफ्ते बाद दोनों दोस्त बालकनी में बैठकर बारिश और दारु का मजा ले रहे थे..


लोकेश : "यार आजकल कोर्ट में एक तलाक का केस आया हुआ है , मिया बीबी अपनी शादी के बीस साल बाद तलाक ले रहे हैं, मैं औरत कि तरफ से केस लड़ रहा हु, वो रोज आती है मेरे केबिन में, अपनी 19 साल कि लड़की के साथ,उसका नाम है रोज़ी..यार, क्या बताऊ, इतनी गर्म और लबाबदार जवानी मैंने कही नहीं देखि , उसमे बोबे देखकर मन करता है अपना मुंह उनके बीच डालकर अपनी सारी फीस वहीँ से वसूल लू … हा हा हा ''


समीर भी उसकी बात सुनकर बोला : "ये उम्र होती ही ऐसी है, कच्चे-२ अमरुद लगने जब शुरू होते हैं न जवान शरीर पर, उन्हें दबाने और मसलने का मजा ही कुछ और है ……''

वो आगे बोला : "वैसे मुझे उसके बारे में भी बात करनी थी, उनकी माली हालत ज्यादा ही खराब है, इसलिए रोज़ी कोई जॉब करना चाहती है, अगर तेरे ऑफिस में कोई स्टाफ कि जरुरत है तो देख ले। ।''


समीर (कुछ देर सोचकर) : "हाँ , चाहिए तो सही मुझे, अपनी पर्सनल असिस्टेंट , रश्मि से शादी करने के बाद वो जगह अब खाली हो गयी है, तू उसे मेरे ऑफिस भेज देना, मैं देख लूंगा ''


लोकेश : "देखा, सिर्फ उसके बारे में सुनकर ही तू उसे जॉब देने के लिए तैयार हो गया, है तो तू पूरा ठरकी , हा हा "

और फिर अपना गिलास एक ही बार में खाली करते हुए समीर बोला : "एक तेरे क्लाईंट कि बेटी है, जिसके मस्त शरीर कि बाते सुनकर ही मेरा लंड खड़ा हो गया है, और एक मेरी बीबी कि बेटी है, साली ऐसी मनहूस है कि उसे देखकर खड़ा हुआ लंड भी बैठ जाए ''


काव्या छुपकर वो सब बातें सुन रही थी, ये पहली बार था जब समीर और लोकेश उसके बारे में बाते कर रहे थे


लोकेश : "यार, ऐसा भी कुछ नहीं है, मुझे तो उसका मासूम सा चेहरा बड़ा ही सेक्सी लगता है ''


उसने अपने लंड के ऊपर अपना हाथ फेरते हुए कहा


दोनों पर शराब पूरी तरह से चढ़ चुकी थी


स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली

स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


Old And Young Hindi Chudai Ki Kahani स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली  हैल्लो दोस्तों मेरा नाम देविका है और में 18 साल की जवान और बहुत ही गरम स्कूल गर्ल हूँ. मेरा बदन बहुत सुंदर है और इसकी वजह से में कुछ लोगों के लिए अच्छी हूँ. मेरी लम्बाई भी कुछ ज़्यादा नहीं है में 5.2 लम्बाई की हूँ, किन्तु मेरा शरीर भरा हुआ है और मेरी छाती भी अच्छी है. मेरी टट्टी से भरी चूतड़ के छेद को ढके हुए मेरे कूल्हे भी बहुत मोटे मोटे है मेरे कुल्हे थोड़े बाहर निकले हुए है जिसकी वजह से हर कोई लड़का मेरी तरफ आकर्षित हो जाता है पर मुझसे खुलकर बात करने से डरता है.

दोस्तों वैसे तो आम तौर पर सुहागन महिलाये और लड़कियाँ अपनी चुदाई की चुदाई की कहानिया कहानी हिंदी में बताते हुए शरमाती है किन्तु अपनी आपबीती सुनाने में उझे कोई शरम वाली बात नहीं लगती है ? दोस्तों आज जो चुदाई की कहानियां वेबसाइट हिंदी में में आप सभी को सुनाने जा रही हूँ वो घटना आज से करीब चार पांच महीने पहले की है जब में विद्यालय में पढ़ा करती थी और में जवानी की आग में बहक गई थी और हमारे विद्यालय के एक वृद्ध चपरासी से अपनी अनचुदी फुद्दी चुदवा बैठी थी. उस 60 साल के वृद्ध चपरासी का लौड़ा बहुत लम्बा और मोटा था और मेरी अनचुदी फुद्दी का छेद बहुत छोटा था उसने मेरी अनचुदी फुद्दी चोदते चोदते फाड़ डाली थी और मेरी फटी हुई फुद्दी से बहुत सारा ब्लड भी निकला था.

Old And Young Hindi Chudai Ki Kahani स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


मेरी बहुत सारी विद्यालय फ्रेंड थी और करीब करीब उस सभी के यार थे एक बस मेरा ही कोई यार नहीं था और मेरी बो सभी फ्रेंड्स आये दिन कभी रूम पर तो कभी होटल पर उनसे अपनी फुद्दी चुदवाने जाया करती थी. मेरी फ्रेंड्स को देख देख कर मेरी भी फुद्दी में खुजली मचती थी और मेरा भी बहुत दिल करता था की काश मेरा भी कोई यार हो. मेरी फुद्दी में खुजली होने के चलते में भी लड़को को अपनी तरफ आकर्षित करने का प्रयास किया करती थी पर में यार बनाने में कामयाब नहीं हो पा रही थी में दिखने में भी गदराई थी और मेरा फिगर भी कमाल का था पर में एक भी लड़का सेट नहीं कर पा रही थी.

मैंने यार बनाने की चाहत में सभी प्रयास कर लिये थे और अब में भी इस बात से परेशान आ गई थी की भला इतनी हॉट और गदराई होते हुए भी कोई लड़का मुझसे खुलकर सेक्स के बारे में बात नहीं करता, क्योंकि आख़िर में भी तो एक लड़की ही थी और मेरे सर पर तो बस किसी लड़के को अपना यार बनाकर उसके लौड़े से पानी फुद्दी ठुकवाने का भूत सवार. हमारे विद्यालय के एक चपरासी की हवस से भरी गन्दी नजर मुझ पर थी, क्योंकि उसे तो बस सेक्स करने के लिए एक खिलोना चाहिए था. उसकी उम्र करीब 42 साल थी और वो बिहार का रहने वाला था, किन्तु उसका शरीर बहुत गठीला था और वो थोड़ा मोटा भी था.

दोस्तों मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि वो मेरी इन सब हरकतो पर गौर किया करता है और उसे पता था कि मेरे भीतर जवानी उफान मार रही है और अब मुझसे बिना चुदे रहा नहीं जा रहा और इसी बात का उस 60 साल के डोकरे चपरासी ने फायदा उठाया. एक दिन जब में विद्यालय से छुट्टी के वक़्त निकली तो उस चपरासी ने मुझसे कहा कि उसे मुझसे कुछ बात करनी है और में उसकी वो बात सुनने के लिए रुक गई, उस वक्त वहाँ पर कोई भी नहीं था और उसने मुझसे कहा कि उसे पता है कि में सच्चे प्यार की तलाश कर रही हूँ. उस 60 वर्ष के वृद्ध चपरासी के मुहं से यह बात सुनकर में एकदम से हैरान हो गई, किन्तु में उससे इसके आगे क्या कहती.

फिर वो आगे कहा कि एक लड़का मुझे बहुत पसंद करता है बेटी और वो मुझसे मिलना चाहता है. दोस्तों मेरी तो जैसे प्रसनी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा और मुझे लगा कि मुझे अब सब कुछ मिल गया, किन्तु मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि यह चपरासी मुझे चोदना चाहता है और मेरी प्रसनी देखकर वो समझ गया कि में उसके शिकंजे में फंस गई हूँ.  स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली फिर उसने मुझसे कहा कि वो लड़का मुझसे मिलना चाहता है, मैंने पूछा कि कब? तो उसने कहा कि जब तुम्हे ठीक लगे. इसके बाद मैंने कहा कि में शाम को कोचिंग के लिए घर से बाहर जाती हूँ और आज में तुम्हारे पास आ जाउंगी, तब तुम मुझे उससे मिलवा देना.

उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि ठीक है और फिर में वहाँ से चली गई और उसी शाम को अपने घर से कोचिंग के लिए निकल गई और अब विद्यालय में चपरासी के घर पर उसके पास चली गई. फिर उसने मुझे अपने कमरे में बुला लिया उस वक्त वहां पर कोई भी नहीं था और वैसे वो मैरिड था, किन्तु उसकी वाइफ और बच्चे बिहार में ही रहते थे और इस कारण से उसका कमरा बिल्कुल खाली था, बस वहां पर एक खटिया और कुछ कपड़े और चड्डी बनियान पड़े थे. तभी उसने मुझे बैठने को कहा और में ठीक उसके सामने अपनी लेट्रिंग से भरी चूतड़ टेक कर बैठ गई.


उस 60 साल के वृद्ध चपरासी की हवस से भरी गन्दी नजरे मेरे गदराई और हॉट बदन को खा जाने वाली थी और वो किसी भूखे कुत्ते के तरह मुझे लगातार घूर रहा था. इसके बाद मैंने उससे पूछा कि वो लड़का कहा ँ है? तो उसने कहा कि वो मुझे आज एक सच बताना चाहता है और फिर उसने कहा कि कोई लड़का नहीं है, किन्तु वो खुद ही मुझे बहुत पसंद किया करता है. दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी साँसे एकदम से रुक गई मुझे और थोड़ा सा भी समझ में नहीं आ रहा था कि में अब क्या करूं और में बिल्कुल चुप रही. वो मेरे पास आया और मुझसे कहने लगा कि तुम थोड़ा सा भी टेंशन मत करो और किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा और तुम भी मेरे साथ बहुत प्रसन रहोगी. तभी मैंने उससे गुस्से में आकर साफ मना कर दिया और फिर में उठकर वहां से जाने लगी.

फिर उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि अगर तुम्हे किसी ने यहाँ से इस तरह जाते हुए देख लिया तो तुम बहुत बदनाम हो जाओगी, तभी उसकी बात को सोचकर में वहीं पर रुक गई और बहुत डर गई और मैंने उससे कहा कि अब में क्या करूं? उसने कहा कि अगर तुम मेरा साथ दो तो में तुम्हे चुपके से यहाँ से निकाल दूँगा और इसके बाद मैंने उससे कहा कि ठीक है, किन्तु इसके लिए मुझे क्या करना होगा? तो वो कहा कि में तुम्हारे साथ शादी करना चाहता हूँ और अपनी जोरू बनाना चाहता हूँ और तुम्हारे साथ वो सब करना चाहता हूँ जो सभी लोग अपनी जोरू के साथ करते है. दोस्तों मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि सभी लोगों का कुछ करने का क्या मतलब है? तो मैंने उससे बिना सोचे समझे कहा कि ठीक है, किन्तु प्लीज मुझे यहाँ से बाहर निकालो.

फिर वो वृद्ध चपरासी लड़खड़ाते हुए मेरे पास आया और उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया में कुछ बोलती उससे पहले ही उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया और अब मेरा मुँह बंद हो गया और वो मेरे मोटे मोटे ब्रेस्ट को मसलने लगा. मैंने उससे छूटने की बहुत नाकाम प्रयास की, किन्तु वो बहुत मजबूत था. फिर उसने मुझे छोड़ा और कहने लगा कि तुम्हे भी बहुत आनंद आएगा एक दफे मेरे लण्ड से अपनी फुद्दी चुदाई करवा कर तो देखो. फिर उसकी बातें सुनकर अब मेरा भी दिल उसके साथ सेक्स करने का कर रहा था और मैंने भी उसे एक किस किया और मुझे ऐसा करना बहुत ही ज्यादा अच्छा लगा.

फिर उस डोकरे चपरासी ने मुझसे कहा कि अभी और भी बहुत सारे काम करने बाकी है, तुम अब जल्दी से अपने कपड़े उतार दो और उसने भी अब अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और जब मैंने पहली बार उसका लण्ड देखा तो में डर गई और उसे आहिस्ता आहिस्ता खड़ा और अपना आकार बदलते हुए देखकर में बहुत हैरान रह गई, किन्तु वो अभी भी पूरी तरह खड़ा भी नहीं हुआ था, किन्तु फिर भी 6 इंच का था और मैंने उससे कहा कि क्यों तुम्हारा लण्ड इतना बड़ा है? और यह तो अभी पूरी तरह से खड़ा भी नहीं हुआ है. तभी उस डोकरे चपरासी ने मुझसे कहा कि बेटी ये पूरा खड़ा होकर 9 इंच लम्बा और करीब पांच इंच मोटा हो जायगा फिर वो मुझसे कहा की बेटी अब इस पप्पू को खड़ा तो तुम्हे ही करना पड़ेगा, मैंने पूछा कि बाबा वो कैसे? तो उसने कहा कि इसे अपने मुँह में लेकर चुसो. तभी मैंने कहा कि में कभी भी ऐसा नहीं करूँगी.

उस वृद्ध चपरासी ने कहा कि बेटी अब कोई फायदा नहीं है जो तेरी मर्ज़ी पड़े कर ले, किन्तु तेरी बदनामी हो जाएगी. अब में बहुत डर गई थी और मुझे अब अच्छा भी लग रहा था और फिर उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरा कामुक बदन देखकर वो तो पागल हो गया और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया. फिर उसने मुझसे कहा कि अगर में उसका पूरा पूरा साथ दूँगी तो सब कुछ एकदम ठीक रहेगा. फिर उसने अपना काला मोटा लौड़ा मेरे मुँह में डाल दिया, किन्तु अब मेरे पास और कोई चारा भी नहीं था और मुझे भी आहिस्ता आहिस्ता ऐसा करने में आनंद आ रहा था और में उसके पेनिस को धीरे से मुहं में लेकर चूसने लगी और अपनी जबान से लोलीपोप की तरह चाटने लगी.

मेरी विद्यालय के उस डोकरे चपरासी का लौड़ा वाकई बहुत तगड़ा था वो मेरे मुँह में पूरी तरह से आ ही नहीं रहा था और मुझे अपना पूरा मुहं जबरदस्ती खोलना पड़ रहा था. अब वो कुछ देर बाद और भी बड़ा हो गया, किन्तु उस चपरासी ने ज़बरदस्ती मेरे मुँह में अपना पूरा का पूरा लण्ड घुसा दिया, किन्तु तभी उसने देखा कि मेरे मुँह में उसका लण्ड नहीं आ रहा है, जिसकी वजह से मेरी सांसे रुकने लगी थी और मेरी आंख से आंसू बाहर आने लगे थे. फिर उसने कुछ ही देर बाद मुझसे कहा कि चलो तुम अब रहने दे. फिर उसने मुझे बिस्तर पर जाने को कहा और में वहाँ पर चली गई.

फिर वो डोकर चपरासी लडखडाता हुआ गया और जाकर सरसों का तेल ले आया और उसने थोड़ा सा तेल मेरी अनचुदी फुद्दी पर लगाया और बहुत अच्छी तरह से मेरी फुद्दी की मालिश करने लगा और फिर उसने अपनी एक उंगली को फुद्दी में भीतर डाल दिया जिसकी वजह से तेल मेरी फुद्दी के भीतर चला गया और मुझे ऐसा लगा कि कोई गरम गरम चीज़ मेरी फुद्दी के भीतर चली गई हो, मुझे थोड़ा सा दर्द भी हुआ, किन्तु अब कुछ समय बाद मुझे उसके ऐसा करने से बहुत आनंद आने लगा. फिर उसने अपनी दूसरी उंगली और फिर उसने अपनी तीसरी उंगली को भी मेरी अनचुदी फुद्दी के छेद के भीतर घुसा दिया.


मुझे उसकी वजह से दर्द तो बहुत हुआ, किन्तु कुछ देर बाद में वो दर्द आनंद बन गया था और उसने अभी तक मेरी सील नहीं तोड़ी थी, शायद वो उसे अपने लण्ड के साथ ही तोड़ना चाहता था. फिर उसने मेरा सारा बदन अपनी जबान से चाट चाटकर साफ कर दिया और अब उसने मेरे दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया और अपने लण्ड का टोपा मेरी फुद्दी पर लगा दिया. मैंने उससे कहा कि यह भीतर नहीं जाएगा तो वो कहा कि चला जाएगा.

इसके बाद मैंने उससे कहा कि अगर मुझे कुछ हो गया तो? वो कहा कि तुम टेंशन मत करो तुम्हे कुछ नहीं होगा, आज तुम्हार पहला सेक्स है इस लिये थोडा दर्द ज्यादा होगा बेटी तुम बस थोड़ा धीरज रखो और अब में बिल्कुल चुप हो गई. फिर उसने अपना काला मोटा लौड़ा भीतर डालना प्रारम्भ करा. अभी उस साले चोदू के तंदरुस्त और फौलादी लण्ड का केवल टोपा ही थोड़ा भीतर गया था कि मुझे बहुत तेज दर्द होने लगा में ज़ोर ज़ोर से चीखने, चिल्लाने लगी सीईईईई अह्ह्ह्हह आईईईईइ प्लीज बाहर निकालो इसे उह्ह्ह्हह्ह मुझे बहुत तेज दर्द हो रहा है.

फिर उसने मेरा मुँह अपने लिप्स को उन पर रखकर बिल्कुल बंद कर दिया और कुछ समय बाद मुझे थोड़ा सा आराम मिला, मैंने सोच कि शायद अब लण्ड भीतर चला गया है और अब आनंद आएगा? किन्तु जब मैंने अपना सर उठाकर नीचे की तरफ देखा तो में चौंक गई, क्योंकि अभी तक तो उसका पूरा लण्ड बाहर ही था तो मैंने उससे बहुत चकित होते हुए पूछा कि यह कब भीतर जाएगा? तो उसने एक और धक्का मारा और दो इंच लण्ड भीतर चला गया और अब मैंने महसूस किया कि मेरी फुद्दी की सील फट गई है और में दर्द के मारे बेहोश हो गई थी.

में उस दर्द से छटपटाने लगी थी और जब मुझे होश आया तो मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा कि उसका लण्ड अब तक पूरा भीतर चला गया था और वो बहुत मस्ती से मेरे निप्पल को चूस रहा था. मैंने उससे दर्द से करहाते हुए कहा कि प्लीज अब इसे मेरी फुद्दी से बाहर निकाल लो वरना में इसके दर्द से मर ही जाउंगी. फिर वो कहने लगा कि मेरी रानी आज अगर मैंने इसे अधूरे में बाहर निकाल लिया तो फिर कभी ऐसा मज़ा नहीं ले पाएगी और अगर आज ले लिया तो पूरी जिन्दगी बहुत मज़े करेगी, बस थोड़ा सा दर्द और होगा. इसके बाद मैंने अपनी दोनों आँखें बंद कर ली और उसने फिर से अपने लण्ड का मेरी फुद्दी पर ज़ोर से दबाव बनाना शुरू कर दिया और अब आहिस्ता आहिस्ता उसका लण्ड सरकता हुआ भीतर जा रहा था.

इसके बाद मैंने महसूस किया कि कुछ ही सेकिंड में उसका लण्ड फिसलता हुआ करीब दो इंच और भीतर चला गया और अब उसका आधा लण्ड मेरी फुद्दी के भीतर था और में तो दर्द के मारे तड़प रही थी. इसके बाद मैंने उससे कहा कि में तो आपकी बेटी जैसी हूँ अह्ह्ह्हह्ह प्लीज अब इसे बाहर उह्ह्ह्ह निकाल लो छोड़ दो मुझे. फिर उसने कहा कि अब तो तू मेरी वाइफ जैसी है और मेरे होने वाले बच्चे की माँ भी बनेगी और यह बात कहकर वो मुझे किस करने लगा और आहिस्ता आहिस्ता अपनी कमर हिलाने लगा. वो मेरे दर्द की वजह से बहुत आहिस्ता आहिस्ता झटके मार रहा था.


इसके बाद मैंने उससे कहा कि प्लीज मुझे अब छोड़ दो वरना में मर जाउंगी. उसने कहा कि तुम्हे कुछ नहीं होगा तुम बस थोड़ा इंतजार रखो और फिर उसने मुझे बिस्तर से उठाया, किन्तु मेरी फुद्दी से पेनिस को बाहर नहीं निकाला और वो खुद बिस्तर पर लेट गया. अब में उसके ऊपर आ गई थी और उसने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया और अपनी कमर को हिलाने लगा. दोस्तों मुझे अब दर्द के साथ साथ आनंद भी आ रहा था वो ऐसा लगातार करता रहा और कुछ देर बाद मैंने अपना पानी छोड़ दिया, किन्तु वो अभी तक मेरी फुद्दी में अपना काला मोटा लौड़ा हिला रहा था. फिर उसने मुझे अपनी बाहों में ज़ोर से जकड़ा और एक ज़ोर काशॉट मारा तो मुझे लगा कि जैसे उसका लण्ड अब मेरे गले तक पहुंच गया और में फिर से बैहोश हो गई.

फिर कुछ समय बाद बाद जब मुझे होश आया तो मैंने मेरी कंचो जैसी मोटी मोटी आँखों से देखा कि वो मुझे चूम रहा था और मेरे ब्रेस्ट को दबा रहा था, किन्तु अब भी मुझे फुद्दी में बहुत तेज दर्द हो रहा था और मेरी फुद्दी से ब्लड भी बहुत निकल रहा था, किन्तु में अब प्रसन भी थी कि मैंने अपनी दोस्तों में सबसे बड़ा लण्ड लिया है फिर चाहे वो किसी भी मर्द का था और जो उम्र में मेरे बाप के बराबर ही क्यों ना हो और अब मुझे भी उससे प्यार हो गया था और मुझे लगा कि सच में ही यह मेरा पति है. फिर उसने आहिस्ता आहिस्ता अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया वो थोड़ा सा लण्ड बाहर निकालता और फिर धीरे से भीतर डाल देता अब मुझे ज़्यादा तकलीफ़ नहीं हो रही थी और आनंद भी बहुत आ रहा था.

स्कूल गर्ल की अनचुदी फुद्दी वृद्ध चपरासी ने फाड़ डाली


फिर जब उस रांड बाज वृद्ध चपरासी को लगा कि में उसके लम्बे मोटे पेनिस को सहन कर रही हूँ तो वो अपने पुरे लौड़े को बाहर निकालता और पूरे ज़ोर से भीतर डाल देता. उसके ऐसा करने से में तो बहुत आनंद ले रही थी और आहिस्ता आहिस्ता उसने अपना पूरा 9 इंच लम्बा और 5 इंच मोटा लौड़ा बाहर निकालना शुरू कर दिया. अब मुझे बहुत आनंद आ रहा था और अब तो में भी उसे किस कर रही थी और में इस बीच करीब दो बार और झड़ चुकी थी, किन्तु वो नहीं.


फिर उस वृद्ध चपरासी ने मुझे खटिया पर लिटा दिया और अपना काला मोटा लौड़ा मेरी फुद्दी में डालने लगा अब वो 60 साल का वृद्ध चपरासी मेरे बोबे के निप्पल चूस रहा था जिसकी वजह से मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वो अपने मन की सारी हसरत पूरी करना चाहता हो, किन्तु मुझे थोड़ा सा भी पता नहीं था कि उसके बाद मेरी फुद्दी का क्या हाल हुआ होगा? मुझे तो बस चुदवाने का जोश आ रहा था कि में इतनी ज्यादा उम्र के आदमी से इतनी छोटी उम्र में चुद रहीं हूँ और हम दोनों पसीने से एकदम भीग गये थे, किन्तु में पूरे जोश में थी.


तभी उस वृद्ध चपरासी ने मुझसे कहा कि वो मुझे अब कुतिया बनाकर पीछे से चोदना चाहता है. यारों मैंने पहले से ही बहुत सारी गदराई ब्लू फिल्मो में सेक्स करने की करीब करीब सारी पोजीशन देख रखी थी और में तभी अपने दोनों घुटनो को टेक कर अपने दोनों हांथो को आगे जमीं पर टेक कर कुतिया बन गई. फिर उस 60 साल के वृद्ध चपरासी ने पीछे से पेनिस को मेरी फुद्दी के भीतर डाल दिया और मुझे भी कुतिया बनकर उस वृद्ध चपरासी से चुदवाने के बाद ऐसा लगा कि जैसे आज मेरी अंतिम तमन्ना पूरी हो गई है.

अब वो डोकर चपरासी बहुत ज़ोर ज़ोर से मेरी नासमझ फुद्दी में शोर्ट मार रहा था और फिर उसने कहा कि वो अब झड़ने वाला है और उसने कहा कि वो मेरी फुद्दी में ही अपना गरमा गरम वीर्य झाड़ना चाहता है ताकि उसका बच्चा मेरे पेट से जन्म ले और फ्मे उस वृद्ध चपरासी के बच्चे की माँ बन जाऊं. इसके बाद मैंने उस वृद्ध चपरासी सेकहा कि नहीं अपना माल मेरी फुद्दी के भीतर मत निकालना तुम 60 साल के वृद्ध हो और अभी मेरी उम्र मात्र 18 साल है अभी में माँ बन्ने के लिये तैयार नहीं हूँ इससे मेरी बदनामी हो जाएगी और अभी ठीक सही वक्त नहीं है और फिर उसने यह बात सुनकर अपना काला मोटा लौड़ा बाहर निकालकर मेरे मुँह में डाल दिया और अपना सारा स्पर्म मेरे मुँह में डाल दिया और में एक आज्ञाकारी वाइफ की तरह उसका सारा गरमा गरम स्पर्म शर्बत समझ कर पी गई.

जब मैंने अपनी फुद्दी को देखा तो में एकदम से चौंक गई क्योंकि मेरी अनचुदी फुद्दी बिल्कुल फट गई थी और उसमे से ब्लड बह रहा था वृद्ध चपरासी ने मेरी अनचुदी फुद्दी को अपने मोटे तगड़े लौड़े से चोदकर फाड़ डाली थी. में मेरी फटी हुई फुद्दी देखकर जोर जोर से रोने लगी फिर मेरे विद्यालय के उस वृद्ध चपरासी ने मुझे समझाया की बेटी तू टेंशन मत आज तेरी अनचुदी फुद्दी की पहली बार चुदाई हुई है आज मैंने तेरी अनचुदी फुद्दी की सील फाड़ी है इस लिये तेरी फटी हुई फुद्दी से ब्लड निकल रहा है यह अपने आप ठीक हो जाएगी और फिर उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरी फुद्दी से अभी भी थोड़ा थोड़ा ब्लड आ रहा था.

फिर उसने मुझे एक दवाई दी और मुझसे अपनी फटी हुई खुनम खान फुद्दी पर लगाने को कहा तो उससे मेरी फुद्दी का दर्द बिल्कुल कम हो गया और उसने कहा कि इससे सब ठीक हो जाएगा और इसके बाद मैंने उससे कहा कि अब मुझे घर पर जाना है और दोबारा मिलने का वादा लेकर उसने मुझे अपने कमरे से चोरी से बाहर निकाल दिया और उसकी दी हुई दवाई की वजह से मेरा दर्द अब ठीक था किन्तु फिर भी मुझे थोड़ी सी तकलीफ़ थी और में अपने घर पर आकर चुपचाप सो गई और मोर्निंग उठकर जब विद्यालय गई तो वो वृद्ध चपरासी जिसने कल मेरी अनचुदी फुद्दी चोद चादकर फाड़ डाली थी वो विद्यालय के दरवाजे पर ही खड़ा हुआ था, उसने मुझसे मेरी फटी हुई फुद्दी का हाल चल पूछा तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब मेरी फुद्दी एकदम ठीक है और एक दो दिन में फिर से तुम्हार लौड़ा झेलने के लिये तैयार हो जायगी.

मेरी बात सुन वो वृद्ध चपरासी बहुत प्रसन हो गया और उसने मुझे आशीर्वाद दिया जीती रहो बेटी. में उस वृद्ध चपरासी से बाते कर ही रही थी की तभी विद्यालय की घंटी बज उठी और फिर में मुस्कुराहट के साथ अपनी क्लास में चली गई. अब में और मेरे विद्यालय का वृद्ध चपरासी चोरी छुपे अवैध सेक्स संबंध बनाते है. दोस्तों वह चपरासी भले एक 60 वर्ष का वृद्ध मर्द हो पर उस साले चोदू के तंदरुस्त और फौलादी लण्ड में आज भी किसी जवान मर्द के लौड़े जैसा दम है.

Khet Me Pahla Lund Liya Maine

Khet Me Pahla Lund Liya Maine

Adult Stories Main Vaani Greater Noida se aaj apni pehli jabardast dard se bhari chudai ki ek majedar kahani le kar aayi hoon. Wese main Greater Noida me ek call center me kaam karti hoon. Meri umar aaj 23 saal hoon, aur apni umar ke hisab se main 23 ladko se ab tak chud chuki hoon. Village Girl Virgin Pussy

Main apni call center ke office me ek manger ki post par hoon. Whan tak pouchne ke liye, main apne raste me aane wale. Un sab mardo ke bistar garam kiye hai. Jo jo mere raste me aaye hai, aur aaj bhi main time to time unko khush karti rehti hoon.

Dosto main apni life ke ye 23 chudai ke kisse baten ke liye aayi hoon. Par aaj main aapko apni life ki pehli chudai ke bare me batana chahati hoon. Jo meri life ka sabse majedar aur dard bhara rha hai. Mujhe puri umeed hai, ki aapko meri ye pehli kahani pasnad aayegi.

Toh chaliye main aaj ki kahani aap sab ko batati hoon. Ye kahani aaj se 5 saal pehle ki hai. Jab main gaon me apne ghar walo ke sath rehti thi. Mujhe sex ke bare me itna nhi pata tha. Bas jitna school me meri friends ne mujhe btaya tha, sirf hi utna hi pata tha.
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Par us umar me hi sex naam sunte hi choot aur meri pure jism me ek ajeeb si halchal honi shuru ho jati hai. Mere ghar me mere sath mere mummy papa rehte hai. Main ek gaon me rehti thi, mere papa ke pass apne 11 khet hai. Jis vajah se unhone apni help ke liye.

Ek nokar rkha hua tha, wo bahot time se humare pass rehta tha. Isliye main bachapan se hi use chacha kehti thi. Ab wo humari family ka member jesa hi tha. Dheere dheere main badi aur jawan hone lag gyi. Chacha ek dam kale rang ke patle se the, wo dikhne me bahot ajeeb se lagte the.

Par wo mere sath majak karte the, isliye hum dono ki achi baat chit thi. Par fir bhi main usne kafi kam bolte thi. Papa ne use apne ghar ke pass wale ek aur apna hi ek chhota sa room rehne ke liye diya hua tha. Isliye wo subah hi humhare ghar aa jate the, aur wo breakfast karke papa ke sath khet me chale jate the.

Fir main ya mummy dopher ko khet me lunch dene ke liye jati thi. Main aur mummy papa ke jane ke baad, ek dam akeli reh jati thi. Jis vajah se hum dono kafi boor ho jate the. Par ek din main ghar par thi, school ke aane ke baad mujhe nind nhi aa rhi thi.

Isliye main aise hi apne ghar ke charo taraf ghum rhi thi. Jahan par bhanise rkhte the, main us side gyi. Tabhi mujhe pani ki awaj aayi, main aise us awaj ki taraf gyi. Main tabhi ek diwar ke pass gyi toh maine dekha ki chacha apna lamba bada kala lund bahar nikal kar diwar par peshab kar rhe the.
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Jese hi maine unka lund dekha, meri ankhen us pad jam gyi. Chacha ne jab mujhe dekha ki main unka lund dekh rhi hoon. Toh wo mujhe dekh kar meri aur smile karte hue. Apna lund apne hath se hilane lag gye, unka lamba lund hawa hilate dekh mujhe kuch kuch hone lag gya.

Thodi der baad jab mujhe ehsas hua, ki chacha mujhe dekh kar apna lund hila rhe hai. Toh main sharam se pani pani ho gyi, aur bhag kar apne ghar me ja kar ghus gyi. Us time meri dil ki dhadkan bahot tez ho chuki thi.

Meri choot me ek ajeeb si san sani si fail gyi thi. Meri ankho ke samne se chacha ka lamba kala lund hatne ke naam tak nhi le rha tha. Mujhe us raat nind nhi aayi, kyoki main sari raat chacha ke lund ke bare me jo soch rhi thi.

Mujhe us time apni firends ki baat yaad aayi, ki wo kehti hai ki lund dekhne me hi bahot mast hota hai. Use dekhte hi apne pure jism me kuch kuch hona shuru ho jata hai. Mujhe aaj unki ek ek baat kehi sach lag rhi thi. Kyoki aaj wo sab mere sath real me ho rha tha.

Jo pehle mujhe sab kuch nakali aur bakwas lagta tha. Aaj wo hi sab mujhe pagal kar rha tha. Meri choot me ajeeb sa chikna pani nikal rha tha. Maine mehsus kiya, ki main puri tarah garam ho rhi hoon. Maine jese raat wo raat nikali, agle din sunday tha. Isliye main ghar par hi thi, par aaj subah se hi papa ko bukhar ho rha tha.

Chacha ji subah hi aa gye, unhe dekhte hi main sexy si smile kar di. Aur wo bhi mujhe hawas se bhari najaro se dekhne lag gye. Aaj mujhe unki najar kuch thik nhi lag rhi thi. Kyoki aaj wo mere jism ko uper se le kar niche tak ache se ghur ghur kar dekh rhe the. Mujhe unki najaren kuch kuch kar rhi thi. Mummy mere chacha ke pass aayi aur boli.

Mummy – Bhai aaj Vaani ke papa ki tabyit thik nhi hai. Aaj aap akele hi chale jayo khet me.

Chacha – Thik hai bhabhi ji koi baat nhi, aaj bhayia koi rest karne do. Main chalta hoon, kaam bahot hai.

Mummy – Thik hai par khana toh kha lete.

Chacha – Are aap pack karke le aana.

Mummy – Mujhe time lag skata hai, chal thik hai main Vaani ko bhej dungi.

Jab mummy ne mera naam liya toh mere chehre par ek ajeeb si khushi aa gyi. Main chacha ko dekha toh chaha mujhe hawas se bhari smile kar rhe the. Fir wo whan se jane lage aur piche mud kar mujhe fir se smile karte hue, ishare me mujhe kuch keh gye.

Unke jate hi main bathroom me gyi aur nahane lag gyi. Aaj main na jane kyo apni choot ko shave kar liya, aur apni choot ache se saaf kar liya. Us din na jane kyo mujhe ander se lag rha tha, ki aaj jarur main apni choot marwaungi.
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Fir main subah hi kafi ache se tyar ho gyi. Maine apne gulabi hontho par halki halki gulabi lipstick laga li. Aur halka halka makeup karke main chacha ka khana le kar khet ki taraf chal padi. Jese hi main chacha ke pass pounchi toh maine dekha ki wo mujhe dekhte hi ek dam khade ho gye.

Unhe dekh kar aisa laga ki mano wo kab se mera hi wait kar rhe the. Wo mujhe dekh kar smile kar rhe the, aur sath hi mujhe sath wale chhote se room me jane ka ishara kar rhe the. Maine charo taraf dekha, whan door door tak koi nhi tha. Isliye main sidha room me ghus gyi.

Mere dil ki dhadkan bahot tez chal rhi thi, na jane ab mere sath kya hone wala tha. Main ander darwaje ki taraf kamar karke manje par baith gyi. Tabhi kuch der baad darwaja khulne ki mujhe awaj aayi. Chacha ne ander se darwaja band kar liya, maine piche mud kar halka sa dekha toh meri gand fat gyi.

Kyoki maine dekha ki chacha pure nange the. Unka lund lamba kala bahot hi khatarnak lag rha tha. Maine jhat se apna muh aage kar liya, fir wo mere pass aa gye aur mere piche khade ho gye. Maine jese hi piche dekha toh unka lund mere hontho ke pass aa gya. Itna lamba aur kala mota lund ek dam mere ankho ke samne tha.

Maine ye dekh kar kafi hairan ho gyi. Fir chacha mere samne aa gye aur apne lund ko mere hontho par ragad kar mere muh me dalne lag gye. Par maine unhe mana kar diya, par unhone fir mere sath thodi jabardasti kari. Aur fir maine na chahate bhi unka lund apne muh me bhar liya.

Unka lund sach me bahot hi acha tha, main unke lund ko chusne lag gyi. Lund ki khushboo ne pehle hi mujhe apna diwana bana diya tha. Shayad chacha ko ab mujhe lund chusawane me maja aane lag gya tha. Isliye ab wo dheere dheere apne lund se mera muh chodne lag gye.
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Mujhe bhi ab unka lund chusne me bahot maja aa rha tha, tabhi chacha ne pehle se jyada jor se mera muh chodna shuru kar diya. Aur fir achanak unke muh se aahh nikali aur mere muh ke ander lasi bhar gyi. Unke lund se ek tarah ki malai nikal rhi thi. “Village Girl Virgin Pussy”

Jiska sawad mujhe lasi jesa laga, maine unka sara pani pee liya. Uske baad fir unhone mere sare kapade nikal diye. Chacha ne mujhe manje par leta diya, aur mere uper leat kar wo mere dono boobs ko pagalo ki tarah chusne lag gye.

Mujhe us time aisa lag rha tha, mano chacha ne ek hafate se kahana nhi khaya. Aur ab wo mere dono boobs ko kha rhe hai. Fir wo meri choot par gye aur meri gelli choot ko wo apni jeeb se chatne lag gye. Unhone meri choot ko puri tarah se chat chat kar saaf kar diya.

Itne me unka lund fir se khada ho gya, jab main bhi puri tarah garam ho gyi. Unhone apna lund meri choot par ragadna shuru kar diya. Isse main lund lene ke liye machalne lag gyi, aur mast ho kar boli.

Main – Chachu ab dal do apna lund meri choot me.

Meri ye mast awaj sun kar chacha ne ek jordar dhaka mara aur apna mota lund meri choot me adha dal diya. Unke chaku jese lund ne meri choot ko faad kar rkh diya. Jisse mujhe bahot jyada dard hua, main dard ke vajah se bahot jor se chila uthi.

Meri awaj sun ker chacha dar gye, unhone tabhi pass padi meri panty ko utha kar mere muh me thus diya. Aur mere dono hath pakad kar apna lund ek aur dhake se meri choot me dal diya. Mujhe itna dard hua ki main aapko bta nhi skati.

Par chacha ek berheam insan ki tarah meri choot ko chod rhe the. Meri choot me se khoon nikal rha tha, kyoki mera khoon unke pet par lag rha tha. Par 10 minute ki dard bhari chudai ke baad mujhe maja aane lag gya. “Village Girl Virgin Pussy”
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Fir kuch der baad meri choot ne apna pani nikal diya aur thodi der baad chacha ke lund ne bhi meri choot me apna pani bhar diya. Fir uske baad wo thak kar mere uper gir gye. Karib 10 minute wo mere uper uthe aur main apne kapade dalne lag gyi.

Par tabhi chacha aur unka lund fir se uth gya, main jese hi jane lagi. Tabhi chacha ne mujhe fir se pakad liya. Aur meri panty fir se utar kar jabardasti meri choot me apna lund fir se dal diya. Unhone fir meri choot ko 20 minute tak aur choda, mujhe bhi unse chud kar bahot maja aaya.

Uske baad fir hum dono ka pani nikal gya, toh unhone mujhe choda. Aur fir maine apne kapade aur apne ghar aa gyi. Ghar aakar kisi ko mere uper shak nhi hua, ki aaj apni choot apne hi chacha se fadwa kar ghar aayi hoon.


पापा ने चूत में अपना 12 इंच पूरा लौड़ा घुसा दिया

पापा ने मेरे चूत में अपना 12 Inch पूरा लौड़ा घुसा दिया


मेरा नाम मधु गुप्ता है. मेरी उम्र लगभग 21 वर्ष की हो चुकी है. मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सूना रही हूँ. तब मैं अपने मामा के यहाँ रह कर पढ़ाई करती थी. मेरी उम्र १९ वर्ष की थी. मेरा घर गाँव में था. मेरे कॉलेज में छुट्टी हो गयी थी. मैंने अपने पापा को फ़ोन किया और कहा कि वो आ कर घर ले जाएँ. मेरे पापा मुझे लेने आ गए. हम दोनों ने रात नौ बजे ट्रेन पर चढ़ गए. ट्रेन पैसेंजर थी. रात भर सफ़र कर के सुबह के ६ बजे हम लोग अपने गाँव के निकट उतरते थे. उस ट्रेन में काफी कम पैसेंजर थे.

उस पूरी बोगी में सिर्फ २०-२२ यात्री रहे होंगे. उस पैसेंजर ट्रेन में लाईट भी नहीं थी. जब ट्रेन खुली तो स्टेशन की लाईट से पर्याप्त रौशनी हो रही थी. लेकिन ट्रेन के प्लेटफोर्म को छोड़ते ही पुरे ट्रेन में घना अँधेरा छा गया. हम दोनों अकेले ही थे. करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन एक सुनसान जगह खड़ी हो गयी. यहाँ पर कुछ दिन पूर्व ट्रेन में डकैती हुयी थी. पूरी ट्रेन में घुप्प अँधेरा था और आसपास भी अँधेरा था. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

हम दोनों को डर सा लग रहा था. पापा ने मुझसे कहा – बेटी एक काम कर. ऊपर वाले सीट पर सो जा. मैंने कम्बल निकाला और ऊपर वाले सीट पर लेट गयी. लेकिन ट्रेन लगभग १५ मिनट से उस सुनसान जगह पर खड़ी थी. तभी कुछ हो हंगामा की आवाज आई. मैंने पापा से कहा – पापा मुझे डर लग रहा है. पापा ने कहा – कोई बात नहीं है बेटी, मैं हूँ ना.

मैंने कहा – लेकिन आप तो अकेले हैं पापा, यदि कोई बदमाश आ गया और मुझे देख ले तो वो कुछ भी कर सकता है. आप प्लीज ऊपर आ जाईये ना. पापा – ठीक है बेटी. पापा भी ऊपर आ गए और कम्बल ओढ़ कर मेरे साथ सो गए. अब मैं उनके और दीवार के बीच में आराम से छिप कर थी. अब किसी को पता भी नहीं चल पायेगा कि इस कम्बल में कोई लड़की भी है. थोड़ी ही देर में ट्रेन चल पड़ी. हम दोनों ने राहत की सांस ली. मैंने पापा को कस कर पकड़ लिया. ट्रेन की सीट कितनी कम चौड़ी होती है आपको पता ही होता है. इसी में हम दोनों एक दुसरे से सट कर लेटे हुए थे. पापा ने भी मुझे अपने से साट लिया और कम्बल को चारो तरफ से अच्छी तरह से लपेट लिया. पापा मेरी पीठ सहला रहे थे. और मुझसे कहा – अब तो डर नहीं लग रहा ना बेटी? मैंने पापा से और अधिक चिपकते हुए कहा – नहीं पापा.

अब आप मेरे साथ हैं तो डर किस बात की? पापा – ठीक है बेटी. अब भर रास्ते हम दोनों इसी तरह सटे रहेंगे. ताकि किसी को ये पता नहीं चल सके कि कोई लड़की भी इस बर्थ पर है. ट्रेन अब धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ चुकी थी. पापा ने थोड़ी देर के बाद कहा – बेटी तू कष्ट में है. एक काम कर अपना एक पैर मेरे ऊपर से ले ले. ताकि कुछ आराम से सो सके. मैंने ऐसा ही किया. इस से मुझे आराम मिला. लेकिन मेरा बुर पापा के लंड से सटने लगा. ट्रेन के हिलने से पापा का लंड बार बार मेरे बुर से सट जा रहा था. अचानक पापा ने मेरे चूची को दबाना चालू कर दिए. मैंने शर्म के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी. हम दोनों के मुंह बिलकुल सटे हुए थे. पापा ने मुझे चूमना भी चालू कर दिया. मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल रही थी. पापा ने मेरी सलवार का नाडा पकड़ा और उसे खोल दिया और कहा – बेटा तू सलवार खोल ले.

मैंने सलवार खोल दिया. पापा ने भी अपना पायजामा खोल दिया. अब पापा ने मेरी पेंटी में हाथ डाला और मेरी चूत के बाल को खींचने लगे. मैंने भी पापा के अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और पापा के तने हुए 6 इंच के लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी. आह कितना मोटा लौड़ा था… मुठ्ठी में ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी. पापा ने मेरी पेंटी को खोल कर मुझे नग्न कर दिया. फिर अपना अंडरवियर खोल कर मेरे ऊपर चढ़ गए. मेरे चूत में ऊँगली डाल कर मेरे चूत का मुंह खोला और अपना लंड उसमे धीरे धीरे घुसाने लगे. मैं शर्म से मरी जा रही थी. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है  

लेकिन मज़ा भी आ रहा था. पापा ने मेरे चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया. मेरी चूत की झिल्ली फट गयी. दर्द भी हुआ और मैं कराह उठी. लेकिन ट्रेन की छुक छुक में मेरी कराह छिप गयी. पापा मुझे चोदने लगे. थोड़े देर में ही मेरा दर्द ठीक हो गया और मैं भी चुपचाप चुदवाती रही. करीब 10 मिनट की चुदाई में मेरा 2 बार झड गया. 10 मिनट के बाद पापा के लौड़े ने भी माल उगल दिया. पापा निढाल हो कर मेरे बगल में लेट गए. लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था. मैंने पापा के लंड को सहलाना चालू किया.

पापा समझ गए कि उनकी बेटी अभी और चुदाई चाहती है. पापा – बेटी, तू क्या एक बार और चुदाई चाहती है. मैंने – हाँ पापा.. एक बार और कीजिये न..बड़ा मजा आया.. पापा – अरे बेटी, तू एक बार क्या कहे मैं तो तुझे रात भर चोद सकता हूँ. मैंने – ठीक है पापा, आप की जब तक मन ना भरे मुझे चोदिये. मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा है. पापा ने मुझे उस रात 4 बार चोदा. सारा बर्थ पर माल और रस और खून गिरा हुआ था. सुबह से साढ़े तीन बज चुके थे. पांचवी बार चुदाई के बाद हम दोनों नीचे उतर आये. मैंने और पापा ने अपने पहने हुए सारे कपडे को बदल लिया और गंदे हो चुके कपडे और कम्बल को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

मैंने बोतल से पानी निकाला और मुंह हाथ साफ़ कर के बालों में कंघी कर के एकदम फ्रेश हो गयी. पापा ने मुझे लड़की से स्त्री बना दिया था. मुझे इस बात की ख़ुशी हो रही थी कि यदि मेरे कौमार्य को कोई पराया मर्द विवाह पूर्व भाग करता और पापा को पता चल जाता तो पापा को कितनी तकलीफ होती. लेकिन जब पापा ने ही मेरे कौमार्य को भंग कर मुझे संतुष्टि प्रदान की है तो मैं पापा की नजर में दोषी होने से भी बच गयी और मज़ा भी ले लिया. यही सब विचार करते करते ठीक पांच बजे हमारा स्टेशन आ गया और हम ट्रेन से उतर कर घर की तरफ प्रस्थान कर गए. घर पहुँचने पर मौका मिलते ही पापा मुझे चोद कर मुझे और खुद को मज़े देते थे

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