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कामवाली बाई ने चुदवाया बड़े नखरे करके

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मेरा नाम बबलू गुप्ता है, मैं शादीशुदा हूँ किंतु जॉब के कारण कोलकाता में अकेले रहता हूँ. आज मैं आप सभी को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ. बात तब की है, जब मुझे कोलकाता में आए हुए एक साल हो गया था और मैं अपनी बीवी को मिस कर रहा था. मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि काम वाली बाई भी दे देती है, यदि उसको सही से पटा लिया जाए. मेरे यहाँ भी एक बाई काम करती थी, जिसका नाम ममता था.. वो दिखने में बहुत सुन्दर थी और दो बच्चों की माँ थी, फिर भी अपने आपको बड़ा मेन्टेन करके रखा हुआ था.

अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. आखिर एक जिस्म की प्यास तो जिस्म से ही मिटती है. बाकी सब तो सिर्फ मन बहलाने के उपाय हैं.

अब तक ममता से मेरी ज्यादा बात नहीं होती थी, हम दोनों बस अपने काम से काम ही रखते थे. वो मेरे फ़्लैट पर सुबह और शाम दोनों समय आती थी. आज तक कभी किसी औरत को पटाने के बारे में नहीं सोचा था, वो भी सिर्फ सेक्स के लिए, तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे बात कैसे की जाए और अपना काम निकलवाया जाए. डर भी लग रहा था कि कहीं बुरा मान गई तो क्या होगा.. कहीं लेने के देने न पर जाएं.

पर कहते हैं न कि जब लंड खड़ा हो तो उस समय सिर्फ चूत ही दिखाई देती है और जब तक की वो शांत न हो जाए, कुछ समझ में नहीं आता. मेरी भी हालत कुछ इसी तरह की थी कि जब ममता काम करके चली जाती तब सोचता चलो कल उससे बात करूँगा, पर जब आती तब हिम्मत ही नहीं होती.

इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था और मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी. अब तो मुठ मारने से भी चैन नहीं मिल रहा था. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा. पर चैन मिलने की जगह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर एक दिन सोच ही लिया, जो भी होगा देखा जाएगा, अब तो ममता से बात करके ही रहूँगा.

ममता जो कि दिखने में बिल्कुल सेक्सी माल थी, उसका फिगर भी मस्त था. उसका 32-28-36 का फिगर लंड खड़ा कर देता था. उस पर उसका गोऱा रंग, बड़ी बड़ी आँखें.. आह.. वो अक्सर साड़ी नाभि से नीचे बाँध कर पहना करती थी.

Kaamwali Bai Ki Chudai


जिस दिन मैंने पक्का कर लिया था कि अब उससे बात करना ही है, उसके अगले दिन में व्हिस्की की एक बोतल लेकर घर आया और शाम से ही पीने बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा.

लगभग एक घंटे बाद वो आई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

काम खत्म करके जब वो जाने लगी तब मैंने उसे बुलाया और कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है.

वो मेरे रूम में आई और मुझसे पूछने लगी- क्या बात है?

मैंने उससे कहा कि भाभी आप बुरा मत मानना..

वो बोली कि क्या बात है.. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

तब मैंने उसको बोला- मेरा एक दोस्त है और उसको एक लड़की चाहिए, उस काम के लिए.. क्या आप किसी ऐसी लड़की को जानती हैं.

अब वो गुस्से में आकर मुझसे बोली- आप मुझे क्या समझते हैं. आइन्दा इस तरह की बात मुझसे मत कीजिएगा.

और वो गुस्से में मेरे फ्लैट से बड़बड़ाते हुए चली गई.

मेरी तो गांड फट गई थी, पिटे हुए मुँह जैसी हालत देखने लायक थी. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये किसी से कुछ बोल न दे. मेरा नशा और लंड की गर्मी दोनों ही शांत हो गए.

अब समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ. फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ.

मुझे उस समय यही ठीक लगा, मैंने मुठ मारी और सो गया. सुबह ममता के आने से पहले ही मैं अपने ऑफिस चला गया.

अगले दिन भी मैं उसके आने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गया. शाम को मेरे लौटने के करीब एक घंटे बाद ममता काम करने आई. आज मैं किचन में देखने भी नहीं गया कि वो क्या कर रही है, वो भी कुछ पूछने नहीं आई कि क्या बनाना है.. वो अपना काम खत्म करके चली गई.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. फ़िर शनिवार को शाम में वो अपने समय से जल्दी ही आ गई और अपना काम करने लगी.

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फिर जब वो काम करके वापस जाने लगी तो मेरे पास मेरे कमरे में आई और बोलने लगी कि क्या हुआ है, अब तो आप बात भी नहीं करते?

मैं चुप ही रहा तो वो फिर से बोली- देखिए मैं ऐसी औरत नहीं हूँ.

जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. इस वजह से उसकी चूची के उभार साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.. और इसी वजह से मेरे पेंट के अन्दर मेरे लंड खड़ा हो रहा था, जिसे छिपा पाना भी मुश्किल हो रहा था.

ममता मुझसे बात कर रही थी और मेरी नज़रें उसके चूची के पहाड़ों पर टिकी थीं जिसे उसने भी पकड़ लिया और अपनी साड़ी ठीक करने लगी.

फिर एकाएक मुझसे बोली- मैं आपसे बात कर रही हूँ और आप कहाँ देख रहे हैं?

मैंने उससे बोला कि मैंने तो आपको नहीं बोला था देने के लिए, मैंने तो आपसे पूछा था कि आप किसी को जानती हैं, जो देगी और बदले में पैसे लेगी. पर आप ही बुरा मान गईं. यदि मुझे आपको बोलना होता कि आप दे दो, तो मैं अपने दोस्त के लिए थोड़ी बात करता.. अपने लिए कोशिश नहीं करता?

तब ममता ने चौंक कर मुझे देखा और बोली- क्या बोला आपने..?

मैं बोला- जो आपने सुना!

तब वो बोली- नहीं एक बार और बोलिए.. जो अभी अभी आपने बोला.

तब मैं बोला कि यदि आपको बोलना होता कि आप अपनी दे दो, तो मैं अपने लिए बोलता.. न कि दोस्त के लिए.

वो बोलने लगी- छी छी.. मुझे नहीं मालूम था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हो.

मैंने उससे बोला- इसमें खराबी क्या है? आप सुन्दर हैं, जवान हैं तो क्यों नहीं..!

इस बार मैंने भी नोटिस किया कि वो भी चेहरे पर आश्चर्य का भाव लिए हुए वहीं पर खड़ी रही. मुझे भी लगा कि इसे भी अच्छा लग रहा है.

मैं अपने बिस्तर से उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया.. मुझे अपने सामने एकाएक पाकर वो थोड़ा घबरा गई. वो पीछे को होने लगी और दीवार से सट कर खड़ी हो गई, क्योंकि अब पीछे हटने के लिए जगह नहीं थी.

वो बेचैनी में मेरी तरफ देखकर बोलने लगी- ये आप क्या कर रहे हैं.. आप पीछे हटिए.

लेकिन मैंने आगे बढ़ कर उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला कि भाभी आप मुझे अच्छी लगती हो, क्या आप मुझे दोगी?

ममता ने हकलाते पूछा- क्या?

अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने भी बोल दिया कि आपकी चूत.. भाभी बस एक बार आप मुझसे चुदवा लो प्लीज सिर्फ एक बार..

वो दबे स्वर में बोली- आप पागल हो गए हैं.

वो मुझे धक्का देकर भाग गई. मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी तो मैं लड़खड़ाते हुए अपने बिस्तर पर गिर गया और वो दरवाज़ा खोल कर चलती बनी.

मैं थोड़ा उदास हो गया कि आज चौका मारने का अच्छा मौका था लेकिन हाथ से निकल गई, फिर सोचा कि चलो अब तो ये अपनी चूत दे ही देगी.. और एक बार दे दी तो फिर तो जब चाहो तब उसकी चूत और मेरा लंड खेल सकेंगे.

यही सोचता हुआ कि चलो अब तो एक दो दिन का कष्ट और है.. उसके बाद तो मौज ही मौज होगी.

मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने बेड पर चला गया. सोने के पहले ममता का नाम लेकर मुठ मारी और सो गया. यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

लेकिन अगले दो दिन मैं उसका इंतज़ार करता रहा और अपने लंड को समझाता रहा कि चिंता मत कर, चूत का इंतज़ाम हो गया है और मुठ मारकर सो जाता.

दो दिन से चार दिन, फिर पांच दिन इसी तरह वह पूरे सात दिन के बाद आई.. लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सजधज कर आई थी. उसे देखते ही लंड तन कर खड़ा हो गया और ममता भी तिरछी नज़र से मेरे लंड के तरफ देख रही थी.

जब वो किचन में जाने लगी, तब मैंने उसे अपने कमरे में आने के लिए बोला लेकिन वो बोली- नहीं, जो बोलना है यहीं बोलिए.. मुझे आपके बैडरूम में नहीं जाना है.. आपकी नीयत ठीक नहीं है.

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी तो मैं भी उससे बोला- तुम इतना सजधज कर आओगी भाभी.. तो क्या होगा और मेरी नियत नहीं ख़राब हुई है बल्कि आपको देखकर मेरा लंड बिगड़ गया है.

इस पर उसने इतरा कर बोला कि आपका वो बिगड़ गया है, तो आप उसको सीधा करो.. इसमें मैं क्या करूँ.

इसी तरह की बात करते हुए वो जब रोटी बनाने लगी, तब मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा, मैं कभी इधर कभी उधर.. उसके जिस्म पर अपने हाथ से सहलाने लगा.

वो बोली- मुझे खाना बनाने दीजिये नहीं तो मैं लेट हो जाऊँगी.

मैंने उससे बोला- मुझे इसकी नहीं, किसी और चीज की भूख लगी है.

वो बोली- उसके लिए मैं कुछ नहीं कर कर सकती, आप जाओ यहाँ से.

अब मैं भी गुस्से से किचन से निकल कर अपने बेडरूम में चला आया और लेट गया. आज मैं उसके रहते ही अपने बेडरूम में लंड निकाल कर उसका नाम लेकर धीरे धीरे से हिलाने लगा और उसका इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे पता था कि जाने के पहले वो मेरे कमरे में जरूर आएगी.

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.. वो अपना काम खत्म कर जब जाने को हुई तब उसने मुझे आवाज़ लगाई, लेकिन मैं चुप रहा. तब उसने दो तीन बार और आवाज़ दी. जब मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरे बेडरूम में आई और मेरे हाथ में लंड को देखकर.. उसका मुँह खुला का खुला रह गया.

मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा.

कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.

अब मैंने उसके सामने खड़े होकर एक हाथ उसके कंधे पे रखा और दूसरे से उसका नाम लेते हुए लंड को सहलाता रहा.

वो बोलने लगी- आप बहुत गंदे हो, आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो? मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले.

मैं बोल पड़ा- भाभी जब लंड खड़ा होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. आप मान जाओ.. बस एक बार मेरे लंड को अपने चूत में डालने दो.

वो बोली- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है.

फिर मेरे बार बार कहने पर वो बोली कि पहले आप सच बोलो, उस दिन आप जो लड़की खोज रहे थे वो अपने दोस्त के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोज रहे थे.

मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. लेकिन अब तो मैंने आपको सच बोल दिया, अब तो आप मुझे चोदने दो प्लीज..

वो बोली- नहीं.. मुझे सोचने का कुछ समय चाहिए.

मैं बोल पड़ा कि आप मुझे चोदने दो बदले में मैं आपको पैसे भी दे दूंगा.

वो बोली कि यदि पैसे के लिए मुझे यह काम होता तो मैं आपके यहाँ नौकरानी का काम क्यों करती.. यही काम न करने लगती.

उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया. इसी तरह उसके मन में जो भी आता गया, वो बोलती रही और मैं चुपचाप सुनता रहा.

फिर वो बोली कि मुझे देर हो रही है, अब चलना चाहिए.

तब मैं बोल पड़ा- भाभी पैसे नहीं चाहिए तो मत लो, पर एक बार तो दे दो.

वो बोली कि मैंने बोला न कि मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए कि अपना जिस्म आपको दूँ कि नहीं.

तब मैं भी बोल पड़ा- ठीक है पर आज तो अपने हाथ से ही मेरी मुठ मार दो.. कम से कम आज तो ठंडक कर दो.

वो आनाकानी करने लगी- नहीं.. जब मैं बोल रही हूँ कि मुझे समय चाहिए आप तब भी नहीं मान रहे हैं.

फिर मेरे बहुत मनाने पर बोली- ठीक है लेकिन फिर कभी नहीं और यदि आपने जोर जबरदस्ती की तो मैं काम छोड़कर चली जाऊँगी.

मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैंने भी मौका पाकर ममता की चूचियों पर हाथ रखकर सहलाने लगा, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहा- नहीं ये मत कीजिये.. नहीं तो मैं चली जाउंगी.

फिर मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लंड का मजा लेता रहा. उसने मेरे लंड की मुठ मारकर मेरे माल को गिरा दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक करके चली गई.

उसके अगले दिन से वो आती और अपना काम करके चली जाती. मैंने उससे नहीं पूछा कि उसने क्या सोचा, बस उससे इधर उधर की बातें करता रहता, जब तक वो रहती.

ऐसे ही 20-25 दिन बीत गए. फिर एक दिन मैं व्हिस्की की बोतल लेकर घर गया और टीवी पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए व्हिस्की पीने लगा.

तभी दरवाजे की घन्टी बजी तो मैंने टाइम देखा, अभी सात बज रहे थे. मैंने मन ही मन सोचा कि इस समय कौन आ गया क्योंकि ममता आठ बजे आती है. इसी उधेड़बुन में मैंने दरवाज़ा खोल तो ममता गेट पर खड़ी थी.

वो मुझसे हँसते हुए बोली- हटिये, अन्दर आने दीजिये.

मैं गेट से हटा और उसे अन्दर आने दिया. अन्दर आते समय ममता के होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी. अन्दर आने के बाद मैंने उसके हँसने का कारण पूछा तो कहने लगी कि वो तो ऐसे ही हँस रही थी.

अन्दर आकर जब उसने व्हिस्की की बोतल और गिलास देखा और टीवी को बंद देखा तो बोल पड़ी- लगता है कि आज फिर मूड बनाया जा रहा है.

मैंने कहा- क्या करूँ तुम देने के लिए मानती ही नहीं हो तो टीवी देख कर ही काम चला रहा हूँ. आज एक महीना हो गया लेकिन तुम अभी तक सोच ही रही हो.

इस पर उसने जो कहा, उसे सुनकर मैं तो चौंक ही गया. ममता बोली- आपने ही तो नहीं पूछा कि मैंने क्या सोचा.

मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं.

ममता बोली- आग मुझे नहीं बल्कि आपके वहां पर लगी है, तब मैं क्यों आपको बिना पूछे बोलती कि मैंने क्या सोचा.

अब उसकी इतनी पॉजिटिव रिस्पांस पाकर मैंने टीवी को चालू किया और उसे पकड़ कर अपने गोद में बैठा लिया और बोला कि अब बोल भी दो ममता भाभी.. क्या मेरा लंड तुम्हारी चूत की गहराई में छिपी ज़न्नत का मजा पा पाएगा या नहीं.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

ममता बोली- अपने उसको संभालिये.

मैं बोला- अब बोल भी दो.

वो बोली- देखिये उस दिन जैसे किया था वो करने को राज़ी हूँ और आप ऊपर से सब कुछ कर सकते हैं.. लेकिन मैं आपका अपने अन्दर नहीं लूँगी.

मैं बोला- ये क्या बात हुई.. हाथ से तो मैं भी अपने आप कर सकता हूँ.. फिर क्या फायदा..?

वो बोली- ज्यादा से ज्यादा आप मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल कर चूस सकते हैं या सहला सकते हैं और पेटीकोट भी खोल दीजिये.. लेकिन पैंटी नहीं खोलूंगी और आप मेरे अन्दर अपने उसे नहीं डालेंगे.

एक तो शराब का नशा और दूसरी ब्लू फ़िल्म की खुमार.. और अब उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया. मैंने उससे बोला कि क्या फायदा.. जात भी गवाऊं और भात भी नहीं खाऊं. तुम जाओ बाहर.. मैं किसी और को खोज लूंगा.

वो भी बड़बड़ाते हुए चली गई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

अब मैं भी डीवीडी बंद करके टीवी पर कुछ कॉमेडी सीरियल देखने लगा. शराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

जब कुछ देर बाद दिमाग हल्का हुआ तो मैंने सोचा कि ममता भाभी तो अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार ही है, अब खुल कर नहीं बोल पा रही है या सिर्फ मुझे तरसा रही है. क्योंकि जब वो सब कुछ खोलने के लिए मान ही गई है तो उसे भी पता है कि इतना करने के बाद तो उसे भी चुदना ही है.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने जल्दी से शराब का गिलास नीचे रखा और लपक कर किचन में गया और ममता से बोला- भाभी.

वो गुस्से में बोली- क्या है?

तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा.

ममता बोली- अब क्या हुआ उस समय तो बड़े गुस्से में बोले थे कि दूसरी खोज लेंगे तो अब जाइए, मुझे अब आपके साथ उतना भी नहीं करना.

मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.

वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर, मेरे सीने में ममता की तनी हुई चूचियों के दबे होने का कोमल सा एहसास हो रहा था और वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उसकी आँखों में देख रहा था. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गुलाब की तरह लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब ममता भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी.

अब उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसके गालों.. कंधों और कानों को चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. अब हमारी साँसों की गर्मी एक दूसरे के जिस्म को छूने लगीं. अब जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लग रहे थे. मैंने ममता की साड़ी को उसके जिस्म से अलग किया और उसकी नग्न नाभि को अपनी जीभ से सहलाने लगा. ममता मेरे बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी. मैं उसकी नाभि को चूमते हुए धीरे से अपने हाथ को उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा.

क्या मुलायम और कड़क चूचियां थीं उसकी, दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने अपना सर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा- तो भाभी चूत चुदवाओगी अब?

वो बोली कि नहीं.. मुझे मालूम है मुझे क्या करना है.

फिर मैंने एक एक कर उसके ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ और ब्रा दोनों को एक साथ ही उसके जिस्म से अलग कर दिया. उसकी नंगी चूचियों पर से नज़र ही नहीं हट रही थी, क्या सुन्दर नज़ारा था, गोरी गोरी.. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

अब बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मैं भाभी की चूचियों को मुँह में भर कर चुभलाने लगा और ममता भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी पेंट के अन्दर घुसा दिया. भाभी मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था.. दूसरी चूची को अपने एक हाथ से सहला और दबा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं ममता भाभी की चूची चूसते हुए, एक हाथ से उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया और उसे उसके मखमली जिस्म से उतार फेंका.

इसके साथ ही अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत की फाँकों के बीच से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे ऐसा करते ही ममता जोरों से चिहुंक उठी और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी उंगलियों का दबाव भी मेरे लंड पर बढ़ गया.

अब अपने को रोक पाना मुश्किल था तो मैं जल्दी से उससे अलग हुआ. मैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

मैंने कामवाली ममता भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी मस्त चूचियों के बीच में अपना लंड घुसा कर आगे पीछे करने लगा. मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था, कुछ देर तक इसी तरह उसकी चूचियों को लंड से चोदता रहा. फिर नीचे उतर कर ममता के बगल में लेट गया. इसके बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अपने दोनों हाथों को उसकी पैंटी के अन्दर पीछे से डालकर उसके चूतड़ों को सहलाना चालू कर दिया. ममता भी पूरे जोश में आकर मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैंने ममता को अपने नीचे लिटाया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो ममता ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया. उसके मुँह की गर्मी जब लंड पर पड़ी तो एक अजब तरह का सुकून मिला और करीब 5 मिनट के बाद मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसे चित करके मैं उसकी जांघों के बीच में अपना मुँह ले जाकर उसकी जांघों को चूमने लगा. भाभी की पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत की फाँकों को सहलाते हुए अपने दो उंगलियों को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया. मैं उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा.

फिर अपना सर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आँखें बंद किए हुए चूत की चुदाई का मजा ले रही और हल्की हल्की आहें भर रही थी.

मैं इस मौके का फायदा उठाकर उसकी पैंटी को निकालने लगा, पहले तो उसने भी कमर उठाकर मदद की, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि मैं क्या कर रहा हूँ तो तुरंत ही उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोलने लगी- ये नहीं, ये नहीं.

मैं उसको बोला- ममता भाभी मैं सिर्फ आपकी चूत को देखूंगा और हाथों से ही सहलाऊँगा, लंड अन्दर नहीं डालूँगा.

तब जाकर उसने अपनी पैंटी उतारने दी.

अब अपनी आँखों के सामने ममता की कसी हुई और फूली हुई चूत को देखकर तो मेरे होश ही उड़ गए. क्या मस्त चूत थी, गोरी गोरी.. दोनों फाँकें आपस में चिपकी हुईं. ममता के कामरस से भीगी हुई चूत देखकर तो मेरा लंड और भी कड़ा हो गया.

तभी मैंने उसकी चूत के फाँकों को अलग किया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया. ममता बेचैन होकर मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से सहलाने लगी.

इसके बाद तो उसकी चूत में लंड घुसाए बिना चैन नहीं आने वाला था. अब काफी फोरप्ले हो चुका था. सिर्फ ममता की चूत में लंड डाल कर उसे चोदना बाक़ी रह गया था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.. उसकी चूची को अपने हाथों से दबाता हुआ.. ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

फिर उसकी बाईं चूची की घुंडी को अपने मुँह में लेकर उसकी लाल लाल मख़मली चूची का दूध पीने लगा और अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद उसकी चूची को छोड़ कर ऊपर हुआ और ममता के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुभलाने लगा और अपने लंड को उसकी चूत पर सहलाने लगा.

तभी ममता ने अपने होंठों को मेरे होंठों से अलग करते हुए कहा- लंड अन्दर नहीं डालना है.

मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

ये कह कर मैं फिर से उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूची को भी साथ साथ दबाने लगा और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड को सहलाने भी लगा.

कुछ पलों बाद मैंने देखा कि ममता आँख बंद करके पूरे मज़े में है और उसने अपनी जांघों को भी थोड़ा ढीला छोड़ दिया है. उसके ऐसा करते ही मैंने अपने लंड को एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड ममता की चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया.

मेरे ऐसा करते ही ममता अपनी आँखें खोलकर मुझे धक्का देने लगी, किन्तु मैंने उसे जोर से अपने से चिपका लिया और लंड को भाभी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ देर बाद ममता भी साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर चुदवाने लगी.

अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

इतना मजा आ रहा था कि ममता ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया था. करीब 15 मिनट तक लगातार उसकी चूत को चोदने के बाद अब लंड में भी प्रेशर बनने लगा था. मैंने ममता की चूत को अपने माल से भर दिया. तभी ममता ने भी अपना माल छोड़ दिया और मेरे साथ चिपक गई.. और मैं भी उसके ऊपर लेट गया.

कुछ देर बाद जब अलग हुए तो देखा कि चादर हमारे कामरस से पूरी तरह भीग चुका था और हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था.

यह थी ममता के साथ मेरी चुत चुदाई की शुरुआत. मैं उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को मेरी इंडियन सेक्स स्टोरीज पसंद आई होगी. प्लीज अपने विचार पर जरूर भेजें.

Aai La Jhavla Ticha Student

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आयुष्यातल्या काही सुंदर व बेधुंद क्षणांचे शब्दांकन-marathi romantic sexy story

 
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आजकाल इंटरनेट वर बर्‍याच मराठी प्रणय कथा वाचायला मिळत आहेत. मी बरेचदा त्या वाचतो तेंव्हा असे लक्षात येते कि बर्‍याचशा कथा अवास्तव पुरुषी कल्पना करून रंगवलेल्या आहेत. भारतीय स्त्रियांची मानसिकता विचारात घेतली तर नव्व्यान्नव टक्क्याहून अधिक कथा वास्तवापासून खूप लांब आहेत असे लगेच लक्षात येते. खरतर मी स्वत: असे खूप अनुभव घेतले आहेत पण लिहायचा कंटाळा येत असल्याने कधी नेट वर लिहिले नाही. पण ह्या सार्‍या कथा वाचून वास्तव अनुभव काय असतो हे एकदा लिहावेच असे ठरविले.

Marathi Sex Kahani

असो. तर मी सध्या पुण्यात राहतो. वय ३७ वर्षे. गव्हाळ वर्ण. वजन सर्व साधारण. उंची पाच फुट नऊ इंच. मजबूत शरीर यष्टी. मराठी पोरींना आवडेल असे व्यक्तिमत्व मला सुदैवाने लाभले आहे. ही गोष्ट साधारणपणे सात आठ वर्षापूर्वीची असेल. माझा मित्र रमेश नुकताच अमेरिकेहून पुण्यास परत आला होता. त्याची बायको मैथिली. एका गर्भश्रीमंत व्यापार्‍याची ती मुलगी. दुधा तुपात वाढलेली. जवळपास माझ्याच वयाची. रंगाने उजळ, गोबरे गाल, बाहुलीसारखे बोलके व मोठे डोळे आणि केस काळे लांब सडक. स्निग्ध गोरी त्वचा. एकदम भरलेली जवान पोरगी. रसरशीत स्तन आणि भरगच्च असे नितंब. कुणीही पुरुषाने पाहीले तर त्याला लावायची इच्छा होईल अशीच ती होती. खरतर माझी व रमेशची ती क्लासमेटच. कॉलेजांत असताना आम्ही दोघेपण तिच्यावर लाईन मारायचो. पण शेवटी ह्यालाच ती मिळाली. पण तरीही तिच्या मनात माझ्याविषयी कुठेतरी शारीरिक आकर्षण असावे अशी मला सुरवातीपासूनच दाट शंका होती. त्याला कारणही तसे होते. कारण कोलेजात असताना जेंव्हा रमेश आसपास नसेल तेंव्हा ती माझ्या खूप जवळ जवळ करायची. एकदोन वेळा तर काही निमित्त काढून आपले उन्नत उरोज तिने माझ्या दंडाला टेकविले होते. पण ह्या पोरींचे काही सांगता येत नसते. नकळत पण त्यांच्याकडून अशा गोष्टी होतात. त्यांच्या मनात काही नसायचे आणि उगाच आपणच सगळ्या कल्पना करतो असे मला वाटायचे. त्यामुळे मी ही कधी पुढची पावले स्वत:हून टाकली नाहीत.

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असो. तर रमेश जेंव्हा अमेरिकेहून दोन वर्षांनी पुण्याला आला तेंव्हा त्याला भेटायला म्हणून मी त्याच्या घरी गेलो. खरतर त्याच्यापेक्षा मैथिलीलाच मला भेटायचे होते. घरी जाताच मैथिलीनेच दार उघडून माझे स्वागत केले. मी तिला पाहीले. काळ्या रंगाच्या पारदर्शी उंची साडीत तिचे यौवन खुलून दिसत होते. तिचा ब्लाउज साडीला शोभेल असाच काळ्या रंगाचा होता. त्यात तिचे आधीच गुबगुबीत असलेले उरोज अजून गरगरीत आणि उबदार वाटत होते. दोन वर्षात मैथिली खुपच मुसमुसलेली झाली होती. कमरेखालचा भाग अजून जास्त आव्हानात्मक दिसत होता. रमेशने तिला मनसोक्त आणि हवे तेंव्हा व हवे तसे ठोकले असेल ह्यात शंकाच नव्हती. त्यामुळे तिची कामवासना जास्तीच वाढली असावी. मी व रमेश गप्पा मारत असताना ती अधून मधून येवून आम्हाला चहा पाणी देत होती. ती जेंव्हा पाठमोरी होवून आत जात असे तेंव्हा तिचे दोन भरीव नितंब असे वरखाली होत असत, कि जसे काही पाठीमागून येवून मला घेअसेच आव्हानच ती करत होती. तिचे ते रूप पाहून मी तर पुरता घायाळ झालो होतो. ती चांगलीच माजावर आली आहे आणि एकटा रमेश तिला कमी पडत आहे हे मी लगेच ओळखले. त्याक्षणीच हिला लवकरच अंगाखाली घ्यायचे मी ठरविले. त्या कल्पनेने माझा जाडजूड लंड तरारून उठला व मी जरासा अवघडल्या सारखा झालो. थोड्या वेळाने मैथिली पण आमच्यात येवून बसली व गप्पा मारू लागली. माझे सगळे लक्ष साडीतून अर्धवट दिसणार्‍या तिच्या गोर्‍या गोर्‍या उरोजांकडे जात होते. तिलाही ते जाणवले असणार. रमेशचे लक्ष नाही असे पाहून एकदोन वेळा तिले मला अर्थपूर्ण नजरेने पाहीले व माझ्या पॅंट मधल्या फुगीर भागावर कटाक्ष टाकला तेंव्हाच मी ताडले हिला कचकचून हेपलायचा दिवस जास्त लांब नाही. आणि माझा अंदाज बरोबर ठरला.

 

पुढच्याच महिन्यात रमेशाला एक आठवड्याकरिता पुन्हा अमेरिकेला जायचे होते. अर्थात तो एकटाच जाणार होता. तो गेल्यानंतर दुसर्‍याच दिवशी मैथिलीचा मला फोन आला. रमेशशी तिला चाट करायचे होते पण तिच्या मेसेंजर ला काहीतरी प्रोब्लेम येत होता. तो नीट करण्यासाठी ती मला घरी बोलावत होती. खरतर मी मनातून खूप उत्तेजित झालो होतो पण बोलण्यावरून तसे काही तिला जाणवून दिले नाही. तसेच कुठलीही रिस्क मला घ्यायची नव्हती म्हणून दिवसा जाण्याऐवजी रात्रीच जावे असे मला वाटत होते. त्यामुळे मला खूप काम असल्याने दिवसा येणे शक्य नाही रात्री आले तर चालेल का असे विचारताच ती म्हणाली रमेश रात्रीच ऑनलाइन येतो त्यामुळे रात्रीच यावे लागेल. ते ऐकताच माझा लंड चांगलाच उद्दीपित झाला. पण मी स्वत:ला कसेबसे सावरले. रात्र होईपर्यंत मला धीर निघत नव्हता.

 

रात्री नऊ वाजता मी तिच्या घरी गेलो. ती घरी एकटीच होती. फिकट गुलाबी रंगाचा नाईट गाऊन तिने घातला होता. अमेरिकेहून आणलेल्या मंद सेंटचा हलका फवारा त्यावर तिने मारला असावा. मैथिली खुपच ताजीतवानी दिसत होती. बहुदा नुकतीच तिने अंघोळ केली होती. कारण ओले केस तसेच अजून वरती टॉवेल मध्ये बांधलेले होते. प्रसन्न हसून तिने माझे स्वागत केले. थोड्याफार इकडच्या तिकडच्या गप्पा झाल्या. परवापेक्षा जास्त खुलेपणाने आज ती माझ्याशी बोलत होती. गप्पांच्या ओघात मला अंदाज आला. रमेश नपुसंक नव्हता पण काही वैद्यकीय कारणांमुळे तो तिला मुल देऊ शकत नव्हता. मला इतकी माहिती पुरेशी होती त्यामुळे मी तो विषय जास्त वाढवू न देता ज्या कामासाठी आलो त्याविषयी विचारले. त्यावर बेडरूम मध्ये कॉम्पुटरपाशी ती मला घेऊन गेली. मी कॉम्पुटर सुरु केला . मैथिली डाव्या बाजूला माझ्या शेजारी जवळजवळ मला चिकटूनच बसली. बेडरूम मध्ये रूम फ्रेशनरचा उल्हसित करणारा सुगंध भरून राहिला होता. अकराव्या मजल्यावर असल्यामुळे उघड्या खिडकीतून आकाशातील चांदण्यांचा मस्त नजारा मन लुभावत होता. वळीवाचे दिवस होते तरीही आकाश अजूनही निरभ्र होते. मेसेंजर ला काय समस्या आहे हे मी पाहत होतो. तितक्यात मैथिली थोडे पुढे होवून हाताचे कोपर टेबल वर टेकून बसली. त्यामुळे तिच्या नाईट गाऊन मधून तिचे उन्नत उरोज अगदी स्पष्टपणे मला दिसू लागले. त्या अर्धवट दिसणार्‍या उरोजांमुळे खरं तर मी जास्तच पेटलो होतो. थोडा वेळ असाच गेला. आणि स्क्रीन वर काहीतरी दाखवायचे निमित्त करून मैथिलीने एक हात माझ्या डाव्या खांद्यावर ठेवला. मी पण हळूच स्वत:ला थोडेसे मागे झुकवले. आता माझे तोंड तिच्या गालाच्या अगदी जवळ आले होते. माझ्या हृदयाचे ठोके झपाट्याने वाढत होते. तिच्या मादक श्वासाचा गंध मला येत होता. माझी कानशिले तापली होती. तिच्याही मनात वादळ सुरु झाले असावे. पण तरीही आम्ही दोघे मेसेंजरच्या समस्येवरच बोलत होतो. बोलता बोलता मी हलकेच नजर टाकली. गाऊन मधल्या घळीतून तिचे डौलदार स्तन आता अगदी स्पष्ट दिसत होते. झिरझिरीत काळ्या रंगाच्या ब्रा मधून छाती भरून राहिलेले ते दुधाचे गोरे गोरे घट जणू बाहेर येऊ पाहत होते. त्याखालचा अगदी नाभि पर्यंतचा भाग स्पष्ट दिसत होता. तिच्या अंगभूत गंधाने माझ्यातला कामाग्नी प्रज्वलित झाला होता. मी तिच्याकडे नजर रोखून पाहू लागलो तशी तिने आपली नजर बाजूला वळवली व सावध झाल्यासारखे करून मला म्हणाली, “अरे तू आला आहेस पण मी तुला साधे पाणी देखील विचारले नाही मघापासून. थांब मी तुझ्यासाठी काहीतरी बनवून आणते”. मी तिला नको म्हणणार इतक्यात ती किचनमध्ये निघून सुध्धा गेली. आता मात्र मी खूप बेचैन झालो. एक दोन मिनिटांनी तिच्या मागोमाग मी पण किचनमध्ये गेलो. किचन कट्ट्याशी पाठमोरी उभी राहून ती काहीतरी बनवत होती. अग मला खरच काही नको आहे. इतक्या वर्षांनी तुला भेटायला मिळाले हेच खूप झालेमी काहीतरी शब्द जुळवायचा प्रयत्न करत होतो. पण पाठीमागून दिसणार्‍या तिच्या कमरेच्या व नितंबाच्या आकाराने पुरता घायाळ झालो होतो. हो का?” असे म्हणून तिने फक्त मागे वळून स्मितहास्य केले. मग मी थोडेसे धाडस करायचे ठरविले. हळूच तिच्या अगदी जवळ मागून थोडे एका बाजूला जाऊन उभा राहिलो. काय करती आहेस?” मी विचारले. तुझ्यासाठी काहीतरी ..ती पुटपुटली पण खाली बघतच उभी राहिली. तिच्या व माझ्याशिवाय अर्थातच तिथे कुणीही नव्हते. चुकून जरी तिने आरडा ओरडा केलाच तर आजूबाजूच्या फ्लॅट मध्ये सुध्धा कोणी नव्हते. काही क्षण असेच गेले. मी सगळ्या शक्यतांचा विचार करत होतो. पण मला जास्त वेळही घालवायचा नव्हता. चल, हो पुढे, हो पुढे. जास्त विचार करू नकोस. हीच योग्य वेळ आहे.मनात विचारांचे प्रचंड वादळ सुरु होते. घशात थोडी कोरड पडली. हृदय धडधडू लागले आणि एका निसटत्या क्षणी मी पट्टकन पुढे होऊन तिच्या पाठीवरून हात टाकून पलीकडच्या हाताच्या दंडाला धरून हलकेच तिला जवळ ओढले.

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तिला हे अगदी अनपेक्षित होते. अरेऽऽऽ??!! काय झाले? काय पाहिजे तुला?” डोळे विस्फारून विस्मयचकित होऊन ती बोलली. एकदम सावध पवित्रा घेत स्वत:चे हात तिने छातीभोवती घट्ट घरले. घाबरून माझ्याकडे बघत स्वत:ला सोडवून घेतले. आणि पट्कन माझ्यापासून लांब जाऊन उभी राहिली. मला अपराध्यासारखे वाटू लागले. आपण हे काय केले असा विचार मनात आला. मैथिली… I am sorry.. पण मला तू खूप आवडतेसमी अडखळत पण योग्य तेच बोललो व नकळत तिच्या जवळ जाऊ लागलो. “Please.. अज्जिबात जवळ येऊ नकोस. प्लीज.”, हात लांब करून ती जवळजवळ ओरडलीच. अग असे काय करतेस”, मी केविलवाणा होऊन काहीतरी बोलायचं प्रयत्न करणार तोच मला तोडत ती पुन्हा ओरडली आधी बाहेर हो. इथे कशाला आला आहेस? चल आत्ताच्या आत्ता बाहेर जा आधीतिच्या डोळ्यात अंगार फुलला होता. ओठ रागाने थरथरत होते. तो अवतार पाहून माझे सारे अवसान गळले. मी खाली मान घालून बाहेरच्या खोलीत आलो. डोके सुन्न झाले होते. कशाला नको त्या फंदात पडलो असे वाटू लागले व खाली मन घालून मी सोफ्यावर बसलो. काही मिनिटे अशीच भयाण शांततेत गेली. आतून कसलाच आवाज येत नव्हता. ही रमेश ला तर फोन करत नसेल?”, मन चिंती ते वैरी न चिंती. पण काय असेल ते असेल आता आल्या प्रसंगाला तोंड दिलेच पाहिजे असा विचार करत मी बसून राहिलो. युगासमान वाटणारे काही क्षण असेच तणावाखाली गेले.

 

थोड्या वेळाने मैथिली बाहेर आली. आता गाऊन वर तिने शाल पांघरली होती. पण हात अजूनही छातीला घट्ट बांधलेले होते. ती थोडी सावरली होती. मी तिच्याकडे खजील होवून पाहीले. बाहेर येताच माझ्यापासून दूर विरुद्ध भिंतीला टेकून सावध पवित्रा घेऊन ती उभी राहिली. काय झाले तुला अचानक?”, तिच्या आवाजातला रोष काही कमी नव्हता. माहित नाही.. बस्स”, मी आवंढा गिळला. म्हणजे माझ्याकडून वागण्या बोलण्यात काही चूक झाली का असा मी विचार करती आहे. कारण तुझ्याकडून अजिबात अशी अपेक्षा नव्हती. अरे, एक विश्वासू मित्र म्हणून मी तुझ्याकडे पाहत होतेती बोलत होती आणि लोखंडाचा रस ओतल्यासारखे ते शब्द माझ्या कानात उतरत होते. मैथिली खरच मी असा नाहीये ग पण मला का कुणास ठावूक आता तुझ्याविषयी थोडे फिलिंग आले बस्स. सॉरी ग”, माझ्या डोळ्यातून अश्रू येताहेत कि काय असे वाटले. स्टोप इट नाउ. झाले हे खूप झाले. आत्ताच्या आत्ता निघून जा तू इथून. नाऊ लिव्ह मी अलोन प्लीज”, मानेनेच इशारा करून ती पुन्हा कडाडली. आता इथे अजून थांबण्यात अर्थातच काही राम नव्हता हे ओळखून मी उठलो व अपराध्यासारखा चेहरा करून खाली मान घालून बाहेर पडलो. जाताना उगीचच पुन्हा एकदा सॉरी, आय थिंक आय लॉस्ट यूम्हणालो. पण बहुदा तिने त्याकडे पूर्ण दुर्लक्ष केले असावे. मी तडक खाली पार्किंगमध्ये येऊन कार मध्ये स्वत:ला ढकलले आणि डोक्याला हात लाऊन बसलो.

 

झालं, संपलं सगळं. सं.. प.. लं.. इथून पुढे मैथिलीच काय रमेशशी सुध्धा संबंध राहण्याची सुतराम शक्यता नव्हती. मनातून खूप खजील झालो होतो. कार मध्ये हताशपणे बसलो. एव्हाना रात्रीचे अकरा वाजून गेले होते. हळू हळू आकाशात बरेच ढग जमले होते. विजांचा प्रचंड गडगडाट ऐकू येत होता आणि प्रचंड वारा सुटला होता. सोसायटीच्या गेट वर वाचमन वगैरे कुणीही दिसत नव्हते. मी गाडी काढली आणि सुसाट घरचा रस्ता धरला. अर्धा एक तास झाला असेल. मी बायपास हायवे वरून भरधाव निघालो होतो. बघता बघता जोराचा पाऊस सुरु झाला. आणि अचानक माझा सेलफोन वाजला. कुणाचातरी SMS होता. मी पाहीले तो मैथिलीचाच मेसेज होता “Don’t worry. You have not lost me. But our friendship has changed the mode. That’s why I was shocked. But now I am feeling I got a close friend in you.” तो मेसेज वाचल्यावर मला आश्चर्याचा सुखद धक्का बसला. पट्कन गाडी बाजूला घेऊन मी तिला रिप्लाय केला “Thanks! I want to talk with you now. Shall I come?” आणि थोडा वेळ वाट पाहत राहिलो. बाहेर पाऊस अक्षरशः ओतत होता. आणि मी आतून बराच excite झालो होतो. इतक्यात तिचा एकाच शब्दात रिप्लाय आला “Okk”. झाले. मी पटकन यू टर्न घेतला आणि भन्नाट ड्रायव्हींग करत बघता बघता पुन्हा मैथिलीच्या घरी आलो. एव्हाना पावसाचा जोर चांगलाच वाढला होता. मी लिफ्ट ने अकरावा मजला गाठला. धडधडत्या अंत:करणाने दरवाजाची बेल वाजवली. खरतर माझा लंड चांगलाच उठला होता पण मी स्वत:वर प्रचंड ताबा ठेवला. थोड्या वेळात मैथिलीने दार उघडले. आणि मी तिच्याकडे पाहातच राहिलो. मघाचा नाईट गाऊन बदलून तिने दुसरा पातळ असा स्लिव्हलेस नाईट गाऊन घातला होता. त्यातून तिचे उन्नत उभार उठून दिसत होते. आणि मघाशी वर बांधलेले केस आता तिने पाठीवर मोकळे सोडले होते. त्यामुळे ती जास्तच मादक दिसत होती. हलके व अर्थपूर्ण स्मितहास्य करून तिने मला आत यायला सांगितले. आत सर्वत्र अंधार होता. बाहेर सुरु असलेल्या वादळी पावसामुळे लाईट गेले असावेत. तिने US हून आणलेल्या Perfumed Candles चा सुगंध मंद प्रकाशाबरोबर सर्वत्र भरून राहिला होता. मी आत येताच दार बंद करून ती Candle लावलेल्या टेबल पाशी गेली व त्याला टेकून उभारत खाली नजर वळवून लाजत म्हणाली, “काय बोलायचे आहे तुला माझ्याशी?”. “काही नाही. बस्स…” असे म्हणून मी तिच्या जवळ गेलो. नुकतीच न्हाऊन आल्याने तिचे सौंदर्य अजून खुलले होते. गोरे गुलाबी गाल, सरळ नाक, रसरशीत ओठ. तारुण्याने मुसमुसलेली मैथिली मेणबत्तीच्या उजेडात एखाद्या सौदर्य देवातेप्रमाणे दिसत होती. आता माझा श्वास गरम झाला होता. दोघांच्याही हृदयाची धडधड वाढली होती. हातांचा चाळा करत माझ्याकडे एक कटाक्ष टाकून पुन्हा खाली बघत मैथीली दाताखाली ओठ धरून नि:शब्द उभी होती. आता खरतर शब्दांची गरजच उरली नव्हती. कारण मी इतक्या जवळ जाऊन सुध्दा ह्यावेळी तिने कसलाच विरोध केला नाही. मी ओळखायचे ते ओळखले आणि हलकेच एक पाऊल पुढे टाकून तिला कस्स करून जवळ ओढले. तोंड एका बाजूला करत तिने हाताने मला विरोध करायचा थोडा प्रयत्न केला पण त्याला न जुमानता क्षणाचाही विलंब न लावता आवेगाने तिला मिठीत घेऊन मी तिच्या गोबर्‍या गालावर दीर्घ चुंबन घेतले. तिच्या तोंडून अस्फुट उद्गार बाहेर पडला आणि तिने डोळे मिटून घेतले. तिच्या मादक श्वासाने व अंगभूत गंधाने मी वेडा पुरता झालो होतो. ती माजावर आली होती. बेभान होऊन मी तिच्या गोबर्‍या गालावर व मानेवर चुंबनांचा वर्षाव करत होतो. तिला जवळ ओढून घट्ट मिठीत घेतली होती. तिच्या उबदार अंगाचा स्पर्श मला जास्तच उत्तेजित करत होता. बघता बघता माझे हात तिच्या पाठीवरून आवेगाने फिरू लागले. तिच्या कमनीय देहाचा एक न एक भाग मी स्पर्शून पाहत होतो. आता तीही मला हळू हळू प्रतिसाद देऊ लागली. तिचे नाजूक हात हळुवारपणे माझ्या पाठीवर फिरू लागले. उजवा हात तिच्या पाठीवरून फिरविता फिरविता तिला अजून घट्ट ओढून मी माझा डावा हात हलकेच तिच्या नितम्बांवरून वरून फिरवायला लागलो. गाऊन मधून ते टणक घनगोल हातानी दाबता दाबता मी हलकेच तिच्या दोन मांड्यांच्या मधल्या भागात बोटे घालून दाबली. ती उसासे सोडत होती. मी पुरता वेडा होऊन तिच्या गालाचे मानेचे चुंबन घेत चेत हलके चावे घेत होतो व माझ्या पाठीवरून डोक्यावरून ती आवेगाने हात फिरवीत होती.

 

बाहेर पावसाला उधाण आले होते. वार्‍याच्या झडी बरोबर होणार्‍या तुफानी पावसाच्या आवाजाने चांगलीच वातावरण निर्मिती झाली होती. माझा उजवा हात पाठीवरून फिरविता फिरविता मी नकळत मैथिलीच्या उजव्या स्तनाभोवती आणला आणि क्षणभर मिठी सैल करून तिच्याकडे पाहीले. ती पण डोळे उघडून झिंगल्या नजरेन माझ्याकडे पाहत राहिली. मग मी पुन्हा तिला जवळ खेचले आणि सरळ माझे ओठ तिच्या रसिल्या ओठांवर टेकविले आणि जीभ तिच्या तोंडात घालून तिचे मुखचुन्बन करू लागलो. इकडे माझा उजवा हात अगदी बिनधास्तपणे तिच्या स्तनांवरून फिरत होता. ते मोठे उबदार गरगरीत उरोज माझ्या पंज्यात मावत नव्हते. मी तिला चोखता चोखता तिचे जोरजोरात स्तनमर्दन करू लागलो. डाव्या हाताची बोटे पाठीमागून गाऊन वरूनच तिच्या पॅंटीच्या आत घालायचा प्रयत्न करत होतो. तिने पण आपल्या मांड्या थोड्या अलग करून सरळ माझ्या बोटांना वाट करून दिली. मग मी हळूच खालून दोन बोटे तिच्या चड्डीत घालून अंदाजाने तिच्या योनिभागावर रगडत राहिलो. वर बॉल चोळल्याने तिचे निप्पल्स ताठ झाले होते आणि खाली तिची योनी ओलसर झाल्याचे मला जाणवले. ती एकदम थरारली व मिठी सोडून बाजूला झाली. मी तिच्याकडे पाहत राहिलो. बाहेर रात्र चांगलीच दाटून आली होती त्यात आणि मुसळधार पाउस. आजची रात्र फक्त आमचीच होती. बाकी कोणीही येणार नव्हते. मैथिली आजची रात्र माझी लाडकी सखी होवून आज माझ्या शेजेवर येणार होती. तिचा आरस्पानी पोसावालेला गुबगुबीत देह माझ्या अंगाखाली मी रगडणार होतो. त्या कल्पनेने माझ्या अंगावर शहारे आले.

 

मी अजून जास्तच पेटून उठलो. आता तिला माझ्या कडक झालेल्या पौरुषाचा अंदाज असे मला वाटले. म्हणून तिची पाठ मी माझ्याकडे केली व पाठीमागून कमरे भोवती हाताचा विळखा घालून तिला अगदी करकचून जवळ ओढून घेतले आणि तिच्या मानेवर जोराने किस करत तिच्या दोन नितंबामध्ये माझ्या प्यांट मध्ये तयार झालेला कडक तंबू जोरात दाबला. मला तिला झवायची किती इच्छा झाली आहे हे मला तिला दाखवायचे होते. तो जाडजूड आकार अनुभवताच आ.. आं..असे करून ती कण्हू लागली. तिच्या शरीराचा मादक वास मला वेडावून टाकत होता. मी पुरता भान हरलो होतो व तिला पाठीमागून धक्के देत होतो. माझे गरम श्वास तिच्या मानेवर तिला जाणवत होते. तिने पण डोळे मिटून मन स्वैरपणे माझ्या खांद्यांवर मागे टेकवली. आता माझे दोन्ही हात अगदी बिनधास्त तिच्या दोन्ही स्तनांवर नेवून मी ती गोजिरी गुबगुबीत कबुतरे प्रेमाने कुरवाळू लागलो. मला जास्त चेव चढला. तसेच तिचे तोंड भितीकडे करून मी पाठीमागून तिला जोरजोराने रगडायला सुरु केले. केस बाजूला करून तिच्या तिचे गाल आणि मान चावता चावता तिचे उन्नत स्तनही जोरजोराने दाबायला लागलो. ती भिंतीला धरून उभी असताना पाठीमागून तिच्यावर मी जवळ जवळ चढलोच होतो. माझी फोरप्लची ही सर्वात आवडती पोजिशन आहे. कारण असे केल्याने मादी लगेच तयारहोते.

 

थोडा वेळ असे केल्यावर मला लक्षात आले. मैथिली आता चांगलीच तापली होती. मला सुध्धा आता धीर धरवत नव्हता. कधी एकदा तिला नागडी करून बघेन असे झाले होते. मग मी तिला प्रेमभराने चुंबन केले आणि तिच्या कानात हळूच कुजबुजलो बेडरूम मध्ये जायचे का?” तिने लाजून खाली मान घातली व मानेनेच होकार दिला. आता कशाला वेळ लावायचा? तिला हाताने धरून नेत असतानाच तिने मला पाठीमागे ओढले व खट्याळपणे माझ्याकडे पाहत मला हळूच म्हणाली, “मला उचलून ने”. मी चांगलाच चेकाळलो होतो. तिला गप्पकन मिठीत घेऊन उचलले. तिचे मोठे गरगरीत स्तन माझ्या तोंद्वाजवळ आले होते. त्यांना किस करत मी तिला तिच्या बेडरूम मध्ये घेऊन गेलो. तिथल्या उबदार वातावरणामुळ आम्ही अजून जास्त पेटलो. तिला बेड पाशी उभे करून मी स्वत: बेड वर बसलो. माझा शर्ट काढून टाकला. ती खूप लाजत होती. मी तिला कुरवाळत तिच्या गाऊनची बटणे काढली. तो सैलसर गाउन तिच्या पायातून खाली पडताच मी तिच्या कडे पाहीले. गोर्‍या गोर्‍या अंगाची संगमरवरात मढवलेली माझी प्रणयदेवताच जणू माझ्या पुढे उभी होती. तिची स्निग्ध गोरी त्वचा, आरोग्याने संपन्न अशी तिची भरलेली देहयष्टी, रसिले ओठ, मादक डोळे.. अशी मुसमुसलेली व पूर्ण वाढ झालेली ती कामातूर स्त्री पाहून मी वेडा झालो होतो. माझ्यातल्या पौरुषाला जणू ती आव्हानच करत होती. तिचे धष्ठपूष्ठ स्तन काळ्या ब्रा मध्ये जास्तच खुलून दिसत होते आणि जीव ओवाळून टाकावा असा तो त्रिकोण खाली तिच्या काळ्या प्यांटी मध्ये लपला होता. निसर्गाने तिला सर्व काही पुरेपूर देऊन झवण्यासाठी अगदी योग्य करून ठेवले होते. पुरुषांनी तिला पटवून नागडी करून तिला अगदी मनसोक्त झवावे असेच जणू निसर्ग आवाहन करत होता. मी तिच्या समोर उभे राहून तिला हळू हळू वरून किस करत करायला सुरु केले. ती प्रेमदग्ध होऊन विव्हळत होती. जोरजोरात गरम उसासे टाकत होती. गाल मान असे करत करत मी छातीचा वरचा भाग चुंबू लागलो. आणि तसेच खाली येऊन तिची गोरी गुबगुबीत कबुतरे चुमाबायला सुरु केले. ब्रा च्या वरचा भागातल्या घळीमध्ये तोंड घालून मी धसमुसळेपणाने तिचे ते उबदार clevage चुंबू लागलो. ती माझ्या डोक्यावरून जोराने दाबून हात फिरवत होती. मग मी बेड वर बसून तिला जवळ ओढले व तिच्या ब्रा ची एक बाजून हाताने हळूच खाली खेचली. वॉऽऽव!! तिचे निप्पल इतके सुरेख असतील असे मला स्वप्नात पण वाटले नव्हते. तांबूस तपकिरी रंगाचे ते गोजिरवाणे गोल थोडेसे स्तनाच्या बाहेर झुकले होते. जणू चोखायला सोपे पडावे म्हणूनच निसर्गाने तशी योजना केली होती. आकाराने ते थोडे मोठेच होते व त्यावर ते टपोरी बोंड तरारून उभे होते. मी तिच्या ब्रा मधून तेवढाच भाग उघडा करून प्रेमभराने पाहू लागलो. मग त्यावर हलकेच हात फिरवून त्याला अलगद कुरवाळले. आणि मग हळूच ते तोंडात घेऊन चोखू लागलो. तिचे स्तनपान करावे तसे आवाज माझ्या तोंडून येत होता. अधूनमधून तिला पाठीवर जोर देऊन अजून जवळ ओढत होतो. आता दोघांचेही भान हरले होते. चोख माझ्या राजा.. हवे तेवढे घे. तोड मला”, ती बेभान झाली होती. बघता बघता मी पाठीमागून तिच्या ब्रा चे हूक्स काढून टाकले. आणि ते डौलदार व भरलेले गोरे उरोज माझ्यापुढे हिंदकळून खुले झाले. इतकी वर्षे मैथीलीच्या ज्या उरोजाना केवळ कपड्याच्या आत मी पाहत होतो ते आज रसरशीतपणे माझ्यापुढे खुले झाले होते. ते डौलदार उरोज हातात धरून मी त्यांचे मर्दन करू लागलो. बघता बघता तिचे दोन्ही निप्पल्स चांगलेच ताठ झाले. मग एक एक करून मी त्यांना चोखू लागलो. त्यांना खाली हाताने आधार देऊन ते puffy निप्पल्स घसघशितपणे चोखायला और मजा येत होती. ती तोंडाने स्स.. स्स्स.. असा आवाज करून माझे डोके तिच्या स्तनांवर जोरात दाबत होती.

 

मैथिली चांगलीच पोसावली होती. ऐन भरात आलेल्या मादी सारखी ती माजावर आली होती. तिचे स्तन बेभान होवून चोखत असताना खाली हात नेऊन तिच गोल गरगरीत नितंब मी दाबू लागलो. बघता बघता माझी बोटे तिच्या प्यांटी च्या आत जाऊ लागली. पाठीमागून तिच्या दोन मांड्या मधून तिने मला वाट करून देताच मी हात आणखीन पुढे सरकवला. माझ्या बोटांना तिच्या मऊ मऊ योनीच्या भोवतालचा ओलसर उबदार पणा जाणवू लागला. माय गॉड! मी चक्क मैथिलीच्या पुच्चीला हात लावत होतो. तिथे थोडे दाबल्यानंतर मैथिलीने माझा हात काढून घेतला व सरळ पुढून आपल्या प्यांटीवर ठेवला. तिचे स्तन चोखता चोखता मी तो उबदार त्रिकोण चाचपू लागलो. मग बोटांनी चड्डी एका बाजूला करून हळूच हात आत घातला. पुच्चीवरच्या केसाळ जागेतून मी काहीवेळ बोटे फिरवली आणि तशीच खाली नेली. तिने एक मांडी जराशी तिरकी केली. आता माझी बोटे व्यवस्थितपणे तिच्या पुच्चीपर्यंत पोहोचत होती. तिच्या पुच्चीला स्पर्श करताच माझ्या अंगात हजारो वोल्टचा करंट वाहू लागला. तिच्या पुच्चीला मी अलगद कुरवाळले व अंदाजाने थोडीशी फाकवून मधले बोट आत घातले. तिची गुबगुबीत पुच्ची चांगलीच ओली होऊन पाझरत होती. बोट थोडे आत बाहेर करताच ती विव्हळू लागली. तिची गोरी कमर नकळत पुढे मागे होऊ लागली. तिचे स्तन व योनी मर्दन मी करत होतो. आता मला लक्षात आले ती योग्य त्या प्रकारे तयार झाली आहे. आता जास्त वेळ न दवडता मी तिच्या चड्डीतून हात बाहेर घेतला व पटकन चड्डी खाली ओढली आणि उभे राहून किस करत करत तिला बेड वर आडवे केले. हाताने तिचे स्तन दाबत दाबत तीच्य ओठांवर चुंबन घेत तिच्या पूर्णपणे नग्न झालेल्या देहावर मी आडवा झालो.

 

माझे लिंग तरारून फुलले होते. मी उभे राहून पट्कन माझी निकर काढून टाकली. त्याबरोबर तो तापलेला काळाशार तगडा लंड वरच्या दिशेने ताठ होऊन थरथरत झुलू लागला. आपल्या लाडक्या प्रेयसीला घुसळायला जणू तो आतुर झाला होता. मैथिलीने त्याला पाहताच लाजेने डोळे मिटून घेतले. मी क्षणाचाही विलंब न करता तिच्या अंगावर स्वत:ला झोकून दिले. आमची नग्न शरीरे एकमेकांना भिडली. तिच्याशी धसमुसळेपणा करता करता मी तिच्या दोन मांड्या अलग केल्या. आता मात्र मैथिली थोडी सावध झाली. आपला एक हात तिने पुच्चीवर झाकून धरला. तिचा तो त्रिकोण पाहायला मी खरा तर खूप आसुसलो होतो. तिचा हात दूर करण्याचा प्रयत्न करताच ती म्हणाली नको.. आपण मर्यादा ओलांडत आहोतमी काही न बोलता तिच्या ओठांवर चुंबन घेतले आणि कानाशी कुजबुजलो Lets cross the limit tonight. Don’t worry nothing will happen.” तिचे रसरशीत स्तन दाबत मी तिला चुंबू लागलो. नको ना.. मला भीती वाटतेती म्हणाली. मी आहे ना ..” , असे म्हणत मी तिला पटविले व तिचा हात तिच्या योनिवरून बाजूला केला. तिनेही फार विरोध केला नाही. आणि मग दोन मांड्यांच्या मधला तो मधाळ भाग मी भान हरपून पाहत राहिलो. बारीक लव आणि त्याखाली तपकिरी रंगाचे जाड ओलसर योनिद्वार दडले होते. दोन तांबूस पाकळ्यांमध्ये रसाने भरलेली फट दिसत होती. त्या पाकळ्या मी दोन्ही बोटांनी फाकवाल्या आणि आतली लाल गुलाबी पुच्ची पाहू लागलो. मैथिलीची पुच्ची जस्ट परफेक्टहोती. कामरसाने पाझरून ओतप्रोत भरली होती. बोटांनी तिची थोडी उघडझाप करून मग मी तिच्या दोन्ही बाजूला थोडे रगडत राहिलो. त्या मर्दनाने ती अजून पाझरू लागली. माझा लंड पण आता मदमस्त होऊन गळू लागला होता. आता मी मैथिलीच्या पायाशी जाऊन तिच्या मांड्या वर केल्या व दोन मांडया मध्ये गुडघे टेकून उभे राहून तिचे पाय माझ्या खांद्यावर घेतले. ती कसलाच विरोध करत नव्हती. तिच्या लोण्यासारख्या गोर्‍यापान मांड्या व त्यांच्या मध्ये असलेली ती लुसलुशीत पुच्ची आता तिने पूर्णपणे माझ्या अधीन केली होती. तिला भोगायला मी तयार झालो होतो. तिच्या मांड्या अजून जरा मला हव्या तेवढ्या फाकवून मी थोडे खाली झुकलो आणि माझ्या गरमागरम कडक लंडाचे लालबुंद टोक तिच्या पुच्चीवर अलगद टेकविले. योनीच्या पाकळ्या थोड्या अलग झाल्या. तिने जोराचा हुंकार भरला व डोळे मिटून घेतले. मी तिच्या दोन्ही बाजूला हात टेकवून हलकेच दाब दिला. त्यासरशी तटतटून थरारणारा माझा लंड मैथिलीच्या पुच्चीत अगदी अलगदपणे सळसळत गेला. ती शहारली. मान व छाती वर करून तिने मादक उद्गार काढले. तिच्या उन्नत उरोजांकडे बघत बघत मी लंड थोडा बाहेर काढून पुन्हा दमदारपणे आत दाबला. असे थोडे आत बाहेर केल्यावर मग तिच्या दोन्ही बाजूला हाताचे कोपर टेकून तिला हवे तशी ओढून घेतले व मी तिला हळू हळू झवू लागलो. तासाभरापूर्वी आत्ताच्या आत्ता निघून जाअसे रागाने ओरडून मला घराबाहेर काढणार्‍या मैथिलीच्या गोर्‍या मऊ उबदार पुच्चीत आता माझा काळा जाडजूड लंड आत बाहेर करत होता व माझ्याकडून ती झवून घेत होती. मला अजून चेव चढला. मी स्पीड वाढवत उजव्या हाताने तिचा गरगरीत स्तन कुस्करू लागलो व डाव्या हाताने तिचे केस ओढायला सुरु केले. माझे दणदणीत धक्के बसेल तशी ती धुंद होऊन मला प्रतिसाद देऊ लागली. कमर उचलून ती पण वरखाली करू लागली. माझा लंड जास्तीत जास्त आत घेण्याचा प्रयत्न करू लागली. माझ्याकडून ठोकून घेऊ लागली. आमचा प्रणय अगदी बहरात आला होता. आता तिचे फुगलेले निप्पल मी तोंडात घेतले व उजवा हात तिच्या मांडीखाली धरून मी जोरजोराने तिला हे्पलू लागलो. माझा लंड पूर्णपणे तिच्या पुच्चीत जाऊन बाहेर येत होता. तिची पुच्ची आता चांगलीच फुलली होती. चांगली रसाळ होऊन ती गळू लागली होती. त्या रसाचे तिच्या नितम्बांवरून खाली ओघळ येत होते. माझ्या जोरकस धक्यांनी तिच्या नाजूक पुच्चीतून चुबुक चुबुक असा आवाज येत होता. ती गदा गदा हलत होती. तिचे माठासारखे गरगरीत स्तन एका एका जोरकस धक्क्यानिशी हिंदकळत होते. तिला मी आता अगदी Royally झवत होतो. आता मी दोन्ही हात मैथिलीच्या खांद्याजवळ ठेऊन तिच्याकडे पाहत तिला झवू लागलो. तिचा मदनमणी माझ्या जाडजूड लवड्याने चांगला रगडून निघत होता. त्यामुळे चीत्कारून तोंडाने मादक उष्ण उद्गार काढत ती माझ्या उघड्या छातीचे ती प्रेमातीशायाने चुंबन घेऊ लागली.

 

बघता बघता मी वेग प्रचंड वाढवला व हमसून हमसून तिला झवू लागलो. दोघांच्या हुंकाराने व झवण्याच्या आवाजाने ती खोली भरून गेली होती. काळोख्या मध्यरात्री बाहेर झंझावातात पाउस कोसळत होता. आणि आत मी माजावर येवून माझ्या लाडकीला तिच्या उबदार बेडरूम मध्ये अगदी यथेच्छ झवत होतो. काही मिनिटातच मी तिला चांगली मजबूत झवून काढली. आणि सुखाच्या परमोच्च क्षणी मी तिच्या पुच्चीत अगदी खोलवर एक जोराचा धक्का देवून झडू लागलो. तिच्या पुच्चीत खोलवर माझ्या गरम गरम वीर्याचे फवारे उडू लागले. बघता बघता तिची योनी माझ्या गरम गरम चिकट वीर्याने भरून गेली. अजून एक दोन धक्के हलकेच मारत मी पूर्ण झडलो. आता बाहेर काढणार तोच ती म्हणाली, “राहू दे ना. इतक्यात नको काढूस. असेच आत रहा अजून जरा वेळ.मग मी लंड तसाच आत ठेवून तिच्या अंगावर पडून राहिलो. तिचे चुंबन घेत घेत तिच्या स्तनांशी थोडा वेळ खेळत राहिलो. आम्ही एकमेकांकडे हसून बघत होतो. तिच्या काखेतला गंधाने मला पुन्हा मूड आला. आणि माझा लंड तिच्या पुच्चीत असतानाच पुन्हा एकदा ताठला. काय हे.. पुन्हा एकदा?” असे म्हणत ती आश्चर्य व अभिमानाने माझ्याकडे पाहू लागली. त्या नजरेने मला पुन्हा हुरूप आला व मी पुन्हा हळू हळू धक्के देऊ लागलो. माझा अर्धवट ताठलेला लवडा तिच्या बुळबुळीत झालेल्या उबदार पुच्चीत मागे पुढे होता होता पुन्हा एकदा पूर्ण ताठला. मी जोरकसपणे पुन्हा धक्के देणे सुरु केल्यावर ती खट्याळपणे माझ्याकडे पाहून हसत म्हणाली चल.. फार चावट आहेस. दांडगोबा कुठला. वाटले नव्हते इतका ठोकणारा असशीलमी तिला डोळा मारला व म्हणालो तुला पण खरतर असा माझ्यासारखाच ठोक्या हवा होता ना?”. त्यावर हम्मअसे म्हणून लाजून तिने लाजून माझ्या छातीचे चुंबन घ्यायला सुरु केले आणि पुन्हा एकदा आमच्या प्रणयाला बहार आला. तिच्या उबदार बुळबुळीत पुच्चीचा स्पर्श माझ्या काळ्या कडक लंडाला चांगलेच सुख देत होता. इतक्या मजबुतीने लागलेल्या आपल्या मर्दाकडे ती कौतुकाने पाहत होती. मग मी पण अगदी हक्काने तिला अगदी जवळ ओढून किस करत दहा-पंधरा मिनिटे कचकचून झवून काढले व पुन्हा एकदा तिच्यात झड झड झडलो.

 

आता मात्र आम्ही दोघेपण जाम थकलो होतो. माझा लंड मी हळुवार तिच्या पुच्चीतून बाहेर काढला. तिची तृप्त पुच्ची आता माझ्या वीर्याने माखली होती. माझा लंड सुध्दा तिचा योनिरसाने न्हाऊन चमकत होता. आम्ही एकमेकाकडे पाहून हसून गच्च आलिंगन दिले. मी तिच्या तोंडात एक जोराचा फ्रेंच किस केला. मग आम्ही बेड मधून उठलो. बाथरूम मध्ये जाऊन स्वच्छ होऊन आलो. मैथिली पुन्हा गाऊन घालत होती पण मी तिला घालू दिला नाही. आता ती माझीच झाली होती. मला मूड आला तर रात्री मला पुन्हा तुझ्यावर चढायचे आहेअसे स्पष्टपणे मी तिला सांगितले. त्यावर बापरे! किती वेळा करशील रे. तुझ्या मित्रासाठी ठेव ना मला जरा.असे म्हणून खट्याळ पणे हसत फक्त ब्रा आणि चड्डी तिने घातली. मी सुध्धा फक्त बनियान व निकर घातली व तिला बाहुपाशात घेऊन अंगावर गरम दुलई पांघरूण आम्ही झोपी गेलो. एव्हाना रात्रीचे दिड-दोन वाजले असतील. बाहेर पावसाची झड आता बरीच कमी झाली होती आणि पाण्याच्या प्रवाहाचे खळाळ ऐकू येत होते. उन्हाने तापल्या धरतीला मेघराजाने थंड आणि तृप्त केले होते. आणि इकडे आम्ही पण शांत झालो होतो. रात्री मी झोपेत अधून मधून तिच्या गिर्रेबाज कबुतरांना हातात घेऊन मनसोक्त कुरवाळत होतो. मधूनच कधीतरी तिच्या पुच्चीवरून बोटे फिरवत होतो. पुच्चीवर बोटे जाताच तीही अर्धवट झोपेत मांड्या थोड्या विलग करून मला प्रतिसाद देत असे. पहाटे पाच वाजता मला पुन्हा जाग आली. लंड पुन्हा अर्धवट ताठला होता. पण आता जास्त वेळ घालवायचे कारण नव्हते. तिला एका बाजुवरून उताणे झोपवले. नको न आता प्लीजअसे म्हणून ती मला विनवणी करू लागली व चड्डी काढायला विरोध करू लागली. पण तिचे काही न ऐकता मी अगदी हक्काने तिची चड्डी पुच्चीवरून जरा बाजूला केली आणि एका बाजूनच लंड त्या लुसलुशीत भोकात सरकवला. तिची पुच्ची बरीच लूज झाली होती. त्यामुळे अर्धवट ताठ्लेल्या अवस्थेत सुध्धा माझा लंड आरामात आत गेला. ती पण आता चांगली जागी झाली व लंड आत गेल्याने मूड मध्ये पण आली आणि मला प्रतिसाद देऊ लागली. बायकांचे असेच असते बहुतेक. पुरुषाचा लंड पुच्चीत जाईपर्यंत उगीच नाटके करतात. मग मात्र तिने पाझरून आपल्या उबदार भोकाला ओले केले व माझ्या लंडाला चांगलाच कडक केला. मग काय, पुन्हा एकदा तिचे गोल गोल स्तन चोखत चोखत तिला मनसोक्त हेपलून काढले व तिच्यात झडून गेलो.

 

ती रात्र आम्हा दोघांसाठीही अविस्मरणीय अशीच होती. तीन चार वेळा अगदी जोरकस झवाझवी झाल्याने सकाळी उठायला आम्हाला खूप उशीर झाला. मला ऑफिसला जायचे होते. मी गडबडीने उठून आवरले आणि अर्ध्या पाऊन तासात ऑफिसला निघण्यासाठी तयार झालो. मैथिली पण फ्रेश झाली. तिच्या चेहेर्‍यावर समाधानाची एक वेगळीच चमक दिसून येत होती. अगदी नवर्‍याला द्यावे तसे तिने मला चहा व ब्रेकफास्ट करून दिला. पण लाजून माझ्याकडे बघायचे मात्र टाळत होती. आम्ही एकमेकाशी बोलत नव्हतो. रात्रीच्या धुंद आठवणी मधून आम्ही दोघेही अजून बाहेर पडलो नव्हतो. इतकी वर्षे आम्ही एकमेकाला ओळखत होतो पण त्या रात्रीने आम्हाला एकमेकांची नवीन ओळख करून दिली. मी आता ऑफिसला निघणार तोच ती जवळ आली आणि मला मिठीत घेऊन आवेगाने चुंबन घेऊ लागली. रात्री इकडेच येअसे म्हणून आपले टंच उरोज तिने माझ्या छातीला टेकविले व माझ्याकडे पाहू लागली. मी तिला जवळ ओढली व ते गिर्रेबाज घनगोल हाताने दाबत तिच्यावर चुंबनाचा वर्षाव केला. मी पुन्हा मूड मध्ये आलो होतो पण माझ्या डोक्यात आता एक वेगळीच कल्पना आली होती. पण तिला काही न सांगता तसेच तिला पकडून टेरेस मध्ये घेऊन गेलो. सकाळी अगदी ताजी हवा पसरली होती. रात्री मुसळधार पाउस पडून गेल्याने हवेत गारवा होता व कोवळ्या उन्हात तो खूप सुखद वाटत होता. अकराव्या मजल्यावर असल्याने व फ्लॅटच्या ठराविक रचनेमुळे टेरेस वर आम्हाला कोणीही पाहू शकत नव्हत. मी मैथिलीला टेरेस च्या रेलिंग ला धरून उभे राहायला सांगितले. मी काय करणार आहे हे न कळल्याने ती प्रश्नार्थक चेहेर्‍याने पाहत होती पण काही न विचारता आज्ञाधारक पणे मी सांगेल तसे करत होती. रेलिंगला धरून थोडे वाकून उभे राहिल्यावर मी पाठीमागून तिचा गाऊन वर केला व तिचा पार्श्वभाग उघडा केला. कोवळ्या उन्हात तिच्या मांड्या व नितंब खूप तेजस्वी दिसत होते. मी ही तिचे इतके गोरे अंग पहिल्यांदाच खुलेपणाने पाहत होतो. रात्रीच्या अंधारात तिचे खरे सौंदर्य आपल्याला दिसलेच नाही ह्याची मला जाणीव झाली. काय करतो आहेस हे?” ती थोड्या नाराजीनेच उद्गारली. पण विरोध केला नाही. तू गप्प ग जरा”, असे म्हणन वेळ न दवडता तिची चड्डी मी काढून टाकली. गोर्‍यापान मांड्या आणि गरगरीत नितंब असलेली तिची गोरी गोरी गांड उन्हात फार मोहक दिसत होती. मी पट्कन माझी झिप ओढली तसा माझा तिच्या गांडीकडे बघून तरारून फुललेला जाडजूड लंड बाहेर येऊन थरथरू लागला. ओह्ह प्लीईईज.. नको नांमैथिली हळू हळू माजावर येत होती. माझ्या खिशात डोक्याला लावायच्या तेलाचे एक पाउच होते. ते मी बाहेर काढले व हातावर थोडे तेल घेतले. मैथिली आपली मोठी गांड उगीचच मागेपुढे करत होती. मी तेलात बोटे बुडविली. पुढे होवून तिचे दोन नितंब फाकवले. तिचे तपकीरी रंगाचे गांडीचे भोक स्पष्ट दिसताच मी त्यावर तेल चोळायला सुरु केले.

 

मी काय करणार आहे हे आता तिच्या लक्षात आले असावे. नको नको प्लीज अजून मी तसे कधी केले नाहीती उगीचच विरोध केल्यासारखे करून मला जास्तच आव्हान करू लागली. मी काही न बोलता तेलाने हळू हळू तिच्या मागच्या भोकात बोटे सरकवायला लागलो. तिचे नितंब चांगले जोरजोरात हवे तसे दाबून व हलवून मी मालीश करू लागलो. ती चित्कारत होती. मी ती बोटे तशीच खालून पुढे तिच्या पुच्चीपर्यंत नेत होतो. हळू हळू तिच्या लुसलुशीत पुच्चीत पूर्ण बोटे घालून तिचा दाणा रगडू लागलो. ती विव्हळू लागली. तिच्या पुच्चीतून रस बाहेर गळायला लागला तसे मी ओळखले हीच योग्य वेळ आहे. आणि पुढे होवून नितंब पूर्णपणे फाकवून तेलाने मालीश केलेल्या तिच्या गांडीच्या भोकात माझा लंड दाबला. ती जोराने ओरडली. पण मी थोडे मागे पुढे केले. त्यामुळे पुढचा सुपारीसारखा भाग आत गेला. मग दोन्ही हातानी तिचे ढुंगण पकडून एक जोराचा धक्का मारला.. मैथिली जोरात कळवळली. मग मी थोडे हळुवार बाहेर काढून पुन्हा एक धक्का दिला. आणि हळू हळू मागे पुढे करत तिची गांड मारू लागलो. आ.. आ.. आ.. पुरे पुरेकरत ती ओरडत होती. पण त्यामुळे मी जास्त चेकाळून अगदी दमदार पणे तिला गांडी कडून झवत होतो. फक्त गाऊन वर करून तिची गोरी गोरी गांड उन्हात उघडी करून झवायला खूप मजा येत होती. पाशिमात्य देशातल्या जादातर पोरींचे नितंब अगदी मऊ व गुळगुळीत असतात. पण तशी गांड असणार्‍या देशी पोरी अगदी विरळाच. मैथिली ही त्यातलीच एक होती. तिची मऊ मुलायम गांड खरच समरसून झवण्यासारखी होती. पण रमेशने बहुदा प्रयत्न केला नसावा. मी मात्र आता तिच्या नितम्बांवर अधून मधून हाताचे हलके फटके परत किंवा ते जोराने कुस्करत अगदी रुबाबात तिची गांड मारत होतो. आणि अधून मधून पुढे ओणवे होवून, माझ्या धक्क्यासरशी हिंदकळणारे तिचे खाली झुलणारे माठ मी कुरवाळत होतो. मध्येच कधीतरी पोटाखाली हात खालून तिच्या पुच्चीवरून बोटे फिरवून घेत होतो. काळ रात्रभर मी झवून काढलेली तिची लालसर पुच्ची आता तिच्या गांडीतल्या एक एक धक्क्याने लप लप करत होती. मैथिली खाली वाकून जोरजोरात कण्हत होती. नको नकोअसे म्हणायचे तिने आता थांबवले होत आणि तिच्या गांडीत मागे पुढे होणारा माझा तगडा लंड ती एन्जॉय करत होती. मला जास्त चेव चढला. मी तिचे केस ओढून धरले आणि रेलिंग ला एका पायाने रेटून अगदी जोरकसपणे तिला धक्के देऊ लागलो. माझ्या मांड्या तिच्या मांड्यांवर मागून आपटत होत्या आणि माझे वृषण तिच्या नितम्बांवर आदळत होते. माझा लंड तिच्या गांडीत आत बाहेर होताना वरून दिसत होता. बघता बघता मी दणादण दणादण धक्के देऊ लागलो. ती सुटका करून घायचा प्रयत्न करत पण मी तिला हक्काने जवळ ओढून अजून जोमाने धक्के मारत होतो. त्याच बरोबर तिच्या पुच्चीत पण बोटे घालून जोरजोराने हलवायला सुरु केले होते. तिचा दाणा चांगला रगडून काढत होतो. तिच्या नवर्‍याचा मित्र दोन्हीकडून तिला भोगत होता. जवळ जवळ पंधरा ते वीस मिनटे मी तिला मागून व पुढून घुसळून काढली. आणि एक जोराचा धक्का देऊन तिच्या गांडीत वीर्याचा फवारा सोडला. मग दोन चार हलके धक्के देत मी बाहेर आलो. ध्यानी मनी नसताना अचानक झालेला हा प्रकार तिला तसा धक्कादायकच होता. ती अगदी गळून गेली होती. मी सोडल्यावर ती पट्कन आत निघून गेली व फ्रेश होवून पुन्हा बाहेर आली, सोफ्यावर अंग झोकून दिले व एका कुशीवर पडून राहिली”. मी ही फ्रेश झालो. बाहेर आलो. प्रेमाने तिच्या गालावर केसांवर हात फिरवत विचारले कसे वाटले?”. ती काहीच बोलली नाही. मला कसेसेच झाले. खूप त्रास झाला माझ्या डार्लिंगला?” मी लाडिक स्वरात विचारले. त्यावर मानेनेच नकार देत ती लाजली व डोळे मिटून घेतले. बहुदा आता तिला झोपेची व आरामाची खूप जरुरत असावी. खरंतर मी ही खूप थकलो होतो. पण काय करणार. ऑफिसला जाण्याशिवाय गत्यंतर नव्हते. मग तिला प्रेमभराने चुंबन देऊन मी बायकेले व निघून गेलो. त्या दिवशी दिवसभर ऑफिसात माझे लक्ष लागत नव्हते. लंच नंतर तिचा sms आला लवकर ये ना”. मग काय. आम्ही घरी लवकर म्हणजे पाच वाजताच हजर. घरी गेल्या गेल्या मैथिलीने आश्चर्याचा धक्काच दिला. डोअर बेल वाजवल्यानंतर मी एकटाच आहे ह्याची खात्री करून करूनच दार किलकिले केले आणि मला आत घेतले. आत जाऊन पाहतो तर ही पूर्ण नग्नावस्थेत. झाले! गेल्या गेल्या बाहेरच्या हॉल मध्येच पुन्हा एक दोन सेशन झाले. एकदा सोफ्यात पडून व नंतर लगेच पुन्हा तिथेच टी. व्ही. समोर खालच्या कार्पेट वर पाडून तिला मी झव झव झवली.

 

आमचे नशीब असे चांगले कि रमेशला अजून आठ दिवस थांबावे लागले. त्यामुळे त्या पंधरा दिवसात आमच्या झवाझवीला नुसते उधाण आले होते. मी रोज संध्याकाळी ऑफिस मधून थेट मैथिलीच्या घरीच जात असे. वेगवेगळ्या पोजमध्ये वेगवेगळ्या ठिकाणी मी तिला झवले. काही वेळा तर रात्री कार मधून दूरवर जाऊन बाहेर जेवण करून मग पुन्हा कार मध्येच झवाझवी करून मग आम्ही रात्री उशिरा घरी परत येत असू. तो अनुभव फारच थ्रील देणारा होता. मैथिली जेवण अतिशय रुचकर बनवायची. मला आवडणारे सारे पदार्थ विशेषकरून नोन-व्हेज ती मला खाऊ घालायची. मग मी खुश होवून व मस्तीला येवून तिच्यावर रात्रभर चढत असे. बहुतेक, आपल्या मर्दाला खाऊ घालून माजावर आणून आपल्यावर चढवून घेण्यात तिला खूप मजा येत असावी. अजून एक म्हणजे ती खूप छान डान्स करत असे. एकदोन वेळा माझा मूड नव्हता तेंव्हा तिने अतिशय कमी कपड्यात डान्स करून माझा लंड ताठविला होता. तेंव्हा डान्स केल्या केल्या त्याच पोशाखात तिला लगेचच तिथे पाडून झवताना खूप मज्जा आली होती. मी एकदा तिला विचारले. तुझी सेक्स मधली फॅन्टसी काय आहे. तेंव्हा तिने मला सांगितले आज रात्री मी तुला दाखवते माझी फॅन्टसी काय आहे. मग त्या रात्री तिच्या पुच्चीत लंड घालून नेहेमीप्रमाणे तिला हेपलत असताना अचानक रमेशचा US हून तिला फोन आला. मी झवायचे थांबविल्यावर तिने मला हातानेच खून करून थांबू नकोम्हणून सांगितले व त्याचा फोन घेतला. आणि ती त्याच्याबरोबर फोन वर बोलत असताना मी इकडे तिचा किस करत दमदारपणे तिच्या पुच्चीत माझा लंड हळू हळू मागे पुढे करत होतो. पण त्यामुळे तिचा आवाज एकून रमेश तिकडे मूड मध्ये आला. आपली बायको एकटी असल्याने हस्तमैथुन करत आपल्याशी बोलते आहे असे वाटल्याने त्याने तिच्याबरोबर फोन सेक्स केला. म्हणजे रमेश तिला फोन वर लागला होता तर मी इथे प्रत्यक्षात! नंतर मला तिने सांगितले कि रमेश ला तिने मुद्दाम त्यावेळी फोन करायला सांगितला होता. त्यात एक थ्रील होते ते तिला अनुभवायचे होते. ती मला म्हणाली कि ह्यात रमेशच्या भावनांचे अवमूल्यन करायचा मुळीच हेतू नव्हता. तर तसा सेक्स करायची तिची बस्स एक फॅन्टसी होती 

 

 

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