Articles by "mote lund se chudai ki kahani"

adult stories in hindi Antarvasna Story baap beti ki chudai ki kahani bahan ki chudayi balatkar ki kahani behen ki chudayi bhabhi ki chudai bhai bahan ki chudai bhai bahan sex story in hindi bollywood actress ki chudai ki kahani bollywoos sex stories in hindi chacha bhatiji ki chudai ki kahani chachi ki chudai ki kahani chhoti bahan ki chudai chhoti ladkai ki chudai chudai ki kahaniya dehati chudai ki kahani devar bhabhi ki chudai ki kahani Didi ki Chudai Free Sex Kahani gand chudai gand chudai ki kahani gangbang ki kahani Ghode ke sath desi aurat ki sex story girlfriend ki chudai gujarati bhabhi habshi lund se chudai hindi sex stories Hindi Sex Stories Nonveg hindi urdu sex story jija saali sex jija sali ki chudai ki kahani Kahani kunwari choot chudai ki kahani Losing virginity sex story mama bhanji ki chudai ki kahani mama ki ladaki ki chudai marathi sex story mote lund se chudai ki kahani muslim ladaki ki chudai muslim ladki ki chuadi nana ne choda naukarani ki chudai New Hindi Sex Story | Free Sex Kahani Nonveg Kahani Nonveg Sex Story Padosi Ki Beti pahali chudai pakistani ladaki ki chudai Pakistani Sex Stories panjaban ladki ki chudai sali ki chudai samuhik chudai sasur bahu ki chudai sasur bahu ki sex story sasural sex story school girl ki chudai ki kahani seal tod chudai sex story in marathi suhagraat ki chudai urdu chudai ki kahani in urdu Virgin Chut wife ki chudai zabardasti chudai ki kahaniya एडल्ट स्टोरी कुंवारी चूत की chudai गर्लफ्रेंड की चुदाई गांड चुदाई की कहानियाँ जीजा साली सेक्स पहलवान से चुदाई बलात्कार की कहानी बाप बेटी की chudai की सेक्सी कहानी मामा भांजी चुदाई की कहानी ससुर बहु चुदाई सेक्स स्टोरी
Showing posts with label mote lund se chudai ki kahani. Show all posts

मकान मालिक की विधवा बहु की चुदाई

makan malik ki vidhwa bahu-ki chudai,मकान मालिक की विधवा बहु की चुदाई


हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम पीयूष है और मेरी उम्र 25 साल और में गुडगाँव अपने पूरे परिवार के साथ रहता हूँ। वैसे में एक छोटे से सामान्य परिवार का लड़का हूँ। दोस्तों जो बात में आज आप सभी को बताने वाला हूँ वो मेरे साथ दो साल पहले घटित हुई एक सच्ची घटना है, जिसमें मैंने अपने मकान मालिक की विधवा बहु की मजबूरी को समझकर उसकी चुदाई करके उसके साथ साथ अपनी भी सेक्स की भूख को शांत किया और अपने उस काम को पूरा किया जिसको करने के विचार में पिछले कुछ दिनों से बना रहा था, क्योंकि वो अपने गोरे चेहरे, कामुक भरे हुए बदन से इतनी उम्र की नहीं लगती थी जितनी वो है और वैसे भी बहुत सालों पहले उसके पति की म्रत्यु हो जाने के बाद वो अपनी बिना चुदी चूत को अपने साथ लेकर घूम रही थी और मैंने उसको चोदकर उसकी उस इच्छा को पूरा किया।


दोस्तों करीब दो साल पहले हम सभी घर वाले एक किराए के मकान में रहा करते थे। उस मकान की पहली मंजिल पर हम लोग और नीचे के हिस्से में हमारी मकान मालकिन अपनी विधवा बहू के साथ रहती थी और उनकी बहू का नाम निशा था। उसकी उम्र 32 साल थी और हम लोग उसको हमेशा निशा भाभी कहते थे। दोस्तों निशा भाभी व्यहवार की एक बहुत अच्छी औरत थी और वो चुप चुप रहने वाली औरत थी। उनका एक 8 साल का लड़का था जो उस समय किसी हॉस्टल में रहता था और वहीं अपनी पढ़ाई किया करता था और वो खुद एक छोटे से स्कूल में टीचर थी और घर में अकेले बैठकर उनका मन नहीं लगता था। इसलिए वो पिछले कुछ सालों से पास ही के एक प्राइवेट स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम करने लगी थी और मुझे वो बहुत अच्छी लगती थी और उनका बात करने का तरीका और उनका व्यहवार हंसमुख स्वभाव का था, इसलिए में उनकी तरह शुरू से बहुत आकर्षित था और जब भी वो घर के पीछे बने बाथरूम में कपड़े धोती तो में उन्हे ऊपर से खिड़की के पीछे छुपकर घूरकर देखता रहता वो नीचे बैठकर मेरी तरफ अपनी गोरी छाती को करके कपड़े धोने में लगी रहती और में उनके झूलते लटकते हुए बाहर निकलते हुए बूब्स को देखकर मन ही मन खुश होता रहता और फिर कुछ देर के बाद में वो मस्त नजारा देखकर जोश में आकर खिड़की पर लगे उस पर्दे के पीछे छुपकर उनको देखते हुए उनके नाम की मुठ भी मारता था।


अब में चाहता था कि वो मेरी इस सेक्स की भूख को हमेशा के लिए शांत करे और अब मेरा अपनी हॉट सेक्सी भाभी को देखकर इतना बुरा हाल हो गया था कि मेरा वीर्य अब रात को भी निकलने लगा था और में नींद में भी उनकी ही चुदाई के सपने देखने लगा था। फिर एक दिन दोस्तों ऊपर के बाथरूम में किसी वजह से पानी ना होने की वजह से में नीचे घर के पीछे बने उस बाथरूम में नहाने चला गया और जब मैंने बाथरूम का दरवाजा बंद किया तो वो बंद नहीं हुआ तो मैंने बहुत बार उसको लगाने की कोशिश की, लेकिन वो फिर भी ना लगा, क्योंकि वो दरवाजा पानी लगने की वजह से फूल गया था और इसलिए उसको लगाना बड़ा मुश्किल था। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि कौन आएगा? क्योंकि वैसे भी निशा तो इस समय स्कूल गई होगी और उसकी सास जो है वो अब भी सो रही होगी। फिर दोस्तों मैंने यह बात सोचकर दरवाजे को बस थोड़ा सा बंद करके नहाने लगा और एकदम मेरा ध्यान उस दरवाजे के पीछे लटकी पेंटी और ब्रा पर चला गया।


दोस्तों हो सकता है कि सुबह जल्दी स्कूल जाने की वजह से निशा अपने कपड़े स्कूल से आने के बाद हमेशा धोया करती थी, इसलिए वो उस समय दरवाजे पर लटकी हुई थी और मैंने तुरंत उस पेंटी को नीचे उतारी और में उसको सूंघने लगा। तब मैंने सूंघकर महसूस किया कि उस पेंटी से बहुत तेज मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी और पेंटी का अगला हिस्सा जो कि हमेशा चूत के सामने चिपका रहता है वो उस जगह से बहुत टाईट था और जैसे उस पेंटी में नशा भरा था जिसको में सूंघने गया और उस ब्रा में से पाउडर की भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। फिर मैंने वहीं से निशा का तेल उठाया और अपने एक हाथ में लेकर लंड पर लगा लिया और लंड की मालिश करने लगा, जिसकी वजह से लंड एकदम चिकना होकर चमक उठा।

makan malik ki vidhwa bahu-ki chudai


अब में जोश में आकर बिल्कुल पागलों की तरह सब कुछ सूंघ रहा था और मुझे हर जगह से निशा के जिस्म की वो मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी और में उसको सूंघते हुए अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था। फिर में बाथरूम की दीवार पर पानी डालकर अपने लंड को में पागलों की तरह दीवार पर मसल रहा था। जैसे वो दीवार ना होकर निशा की गांड हो और फिर अचानक से में झड़ गया और उस दिन मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा सफेद पानी छोड़ दिया। दोस्तों सच कहूँ तो उस दिन मुझे बहुत अच्छा लगा और अब में हर दिन ही नीचे वाले बाथरूम में नहाने जाने लगा और में हर दिन वैसे ही ब्रा, पेंटी को सूंघकर अपने लंड को हिलाकर अपना वीर्य पेंटी में निकाल देता, लेकिन एक दिन मुझे वहां पर निशा के कपड़े नहीं मिले और तब मुझे शक हुआ कि उसको मेरे लंड की खुशबू आ गई है या उसने मेरे वीर्य को अपनी ब्रा पेंटी पर लगा हुआ देखा लिया है, इसलिए वो आज अपने कपड़े उठाकर बाथरूम से ले गई। फिर अगले दिन दोपहर को करीब दो बजे जब में नहाने के लिए उसी बाथरूम में गया तो मैंने देखा कि वहां पर एक बहुत सुंदर पेंटी और ब्रा लटकी हुई थी।


में उसको देखकर बड़ा खुश हो गया और में उन्हे सूंघने और चाटने लगा। दोस्तों में सेक्स के लिए इतना पागल हो जाता हूँ कि में किसी की चूत क्या उसकी गांड का छेद भी में चाट लूँ। अब उस समय तो में भाभी के बारे में सोचकर पागलों की तरह अपना तोता पकड़कर हिला रहा था और उसकी पेंटी को सूंघ भी रहा था। मेरा लंड अब जो पूरी तरह से तनकर खड़ा था वो भी अब उस मुलायम पेंटी का मज़ा ले रहा था। तभी अचानक से किसी ने आकर दरवाजा खोल दिया, लेकिन में तो मज़े से अपनी दोनों आंखे बंद करके मुठ मार रहा था तो मेरा लंड एकदम खड़ा और लाल था। तभी अचानक मैंने अपनी आँख खोली और देखा तो मेरे सामने अब निशा खड़ी हुई थी। में बिल्कुल भूल गया था कि आज शनिवार का दिन है और निशा उस दिन स्कूल से जल्दी आ जाएगी, लेकिन आज मेरे साथ ऐसा हो चुका था। वो अपने स्कूल से जल्दी आ चुकी और उसको अपने सामने देखकर मेरी गांड फट गई। उसने मुझे उस हालत में देखकर मुझे बहुत गुस्से से देखा और फिर उसने अपनी पेंटी को तुरंत एक झटका देकर मेरे हाथ से छीन लिया और वो मुझे उसी तरह गुस्से से देखती हुई चली गई।


अब उसका वो गुस्सा देखकर मेरा सारा बदन सूख गया और में बहुत ज्यादा डर गया था। में उसी समय जल्दी से बाथरूम के बाहर आ गया और तुरंत ऊपर चला गया। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि वो कहीं सीधी मेरी माँ के पास ना चली गई हो और जाकर मेरी माँ से उस हरकत के बारे में उनको भी बता दिया हो, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और फिर भी में पूरा दिन डरा डरा घर की छत पर इधर उधर ही घूमता रहा और में सोचने लगा कि अगर वो आई तो में उससे सही मौका देखकर अपने उस गलत काम के लिए माफी माँग लूँगा और शाम को 5:30 बजे मुझे नीचे से एक बच्चा बुलाने आया। वो निशा से ट्यूशन पढ़ता था। वो मुझसे बोला कि मेडम आप को बुला रही है। फिर नीचे आया और सोच रहा था कि निशा के पैर पड़कड़ कर माफी माँग लूँगा। फिर कुछ देर बाद मैंने नीचे जाकर देखा तो नीचे उस समय कोई भी नहीं था, क्योंकि निशा की सास सत्संग सुनने घर से कहीं बाहर गई थी और अपने पास ट्यूशन आने वाले बच्चों की उसने तब तक छुट्टी कर दी थी और जब में हिम्मत करके निशा के कमरे में गया तो मैंने देखा कि उसने उस समय एक हल्के गुलाबी रंग का नाइट गाउन पहना हुआ था, जिसको देखकर लगता था कि वो उसकी शादी के समय का था। फिर वो एक टेबल पर बैठकर कुछ लिख रही थी और में उस समय उसके पीछे खड़ा हुआ था और अब उसने मुझे बिना देखे मुझसे कहा कि इधर मेरे पास आओ। अब में बहुत चकित होकर चुपचाप उसके पास चला गया। फिर वो मुझसे बोली कि तुम अब यहाँ पर बैठ जाओ और में उसके कहने पर चुपचाप उसके पास में बैठ गया और मैंने देखा कि वो अब भी कुछ लिख रही थी और फिर उसने मुझे बिना देखे कहा।


निशा : तुम इतने दिनों से लगातार मेरे कपड़ो के साथ वो सब क्या कर रहे थे?


में : निशा जी प्लीज आप मुझे माफ़ कर दो और वो सब मुझसे ग़लती से हो गया था। ऐसा दोबारा कभी भी नहीं होगा और मेरी तरफ से आपको शिकायत का कोई भी मौका नहीं मिलेगा, प्लीज आप मुझे बस एक बार माफ़ जरुर कर दो।


निशा : में तुमसे यह सब नहीं पूछ रही हूँ। तुम सबसे पहले मुझे यह बताओ कि तुम मेरी पेंटी के साथ क्या कर रहे थे?


दोस्तों उनके मुहं से पेंटी जैसा शब्द सुनकर मुझे बहुत अजीब सा लगा और में इसलिए थोड़ा सा फ्री भी हो गया। में अपने मन में उसकी चुदाई के सपने को सच होता हुआ देखकर मन ही मन बहुत खुश था, जिसकी वजह से मुझे अब आगे बढ़ने की हिम्मत मिलती जा रही थी।


निशा : क्या में तुम्हारी मम्मी को यह सब बता दूँ कि तुम आज कल कैसे कैसे काम करने लगे हो?


में : प्लीज़ आप मेरे घरवालों को कुछ भी मत बताना, प्लीज़ आप अपना मुहं बंद रखना, वर्ना मेरे साथ बहुत बुरा हो सकता है।


अब निशा मेरी उस बात को सुनकर हल्का सा मुस्कुराई और वो मुझसे कहने लगी।


निशा : तुम अगर मेरा मुहं बंद करना चाहते हो तो करो ना तुम्हे किसने रोका है। फिर उसमे मेरे साथ साथ तुम्हारा भी फायदा है?


में : जी में आपकी इस बात का कुछ भी मतलब नहीं समझा और आप यह क्या कह रही है?


निशा : हाँ तुम मेरा मुहं बंद करना चाहते हो तो करो ना, कर दो मेरा मुहं बंद हाँ में भी तैयार हूँ।


में : हाँ ठीक है आप कहती है तो में कर दूंगा, लेकिन वो काम में कैसे करूं?


निशा : पागल तेरा 6 इंच का लंड है एक लड़की का मुहं कैसे बंद करते है यह बात भी क्या में तुझे बताऊँ? चल अब अपने होंठो को मेरे होंठो पर रखकर मेरा मुहं तू आज हमेशा के लिए बंद दे।


दोस्तों अब में निशा की वो बातें सुनकर बिल्कुल पागल हो गया और फिर में थोड़ा सा डर डरकर उसकी तरफ जाने लगा, लेकिन वो एकदम से उछलकर मुझसे चिपक गई और उसका पूरा बदन उस समय मुझसे सांप की तरह लिपटा हुआ था और वो मेरे होंठो को चूसने लगी। फिर करीब दस मिनट तक उसने मेरे दोनों होंठ चूसे और फिर वो एक एक करके उनको चूसने भी लगी थी। वो कभी ऊपर वाला होंठ तो कभी नीचे वाला और उसके बाद वो मेरे गले लग गई। अब वो मुझसे कहने लगी कि पीयूष में बहुत सालों से बिल्कुल अकेली हूँ और मैंने पिछले सात साल से सेक्स नहीं किया है और मैंने इन दिनों में आज तक कोई भी लंड नहीं देखा और आज में तेरे जैसा दमदार लंड को देखकर एकदम पागल हो गई हूँ।


आज तू मेरी इस बरसों की प्यास को बुझा दे और में सारी जिंदगी बस तेरी बनकर ही रहूंगी और तू मेरी इस प्यासी जिंदगी में अपने लंड को चूसने का वो मौका मज़ा दे जिसके लिए में कब से सोच रही हूँ और इतना कहकर वो अब मेरी पेंट के ऊपर से मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलने लगी। फिर मैंने उससे कहा कि निशा में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ आज में तेरी सेक्सी चूत का मज़ा लूटना चाहता हूँ। में कब से तेरी चुदाई करने के सपने देख रहा हूँ।


निशा : हाँ आजा मेरी जान, लूट ले आज तू मेरी चुदाई के मज़े और मुझे भी वो सुख देकर पूरा कर दे।


फिर मैंने उससे कहा कि इस तरह से नहीं क्योंकि जितनी आग तेरे बदन में लगी है वो इतनी जल्दी नहीं बुझेगी में आज रात को आ जाऊंगा। तुम पिछले दरवाजे को खोल देना और अपनी चूत के बाल भी जरुर साफ कर लेना, साली तूने बहुत दिनों से उसको चटवाई नहीं है और इसकी सफाई भी बहुत जरूरी है। यह बात कहकर मैंने उसकी चूत पर अपना एक हाथ रख दिया और तब मैंने छूकर महसूस किया कि उसके सारे कपड़े गीले थे और उसकी चूत ने अपना रस छोड़ना शुरू कर दिया, क्योंकि वो बहुत दिनों से प्यासी थी। दोस्तों उसके बाद मैंने उसे खूब चोदा और उसने भी बड़े मजे से चुदवाकर मजा लिया।

भैंस चराने गई लड़की को पेला

भैंस चराने गई लड़की को चोदा


यारों मैं फिर एक बार अपनी कहानी लेकर हाजिर हूँ. इस बार मैं आपको अपने बचपन की एक कहानी सुना रहा हूं मेरा परिवार शुरू में गांव में रहता था. गांव का माहौल शहर के माहौल से बिल्कुल अलग होता है मेरे घर का माहौल भी एक गांव के माहौल की तरह ही था. घर में मैं मेरे पिताजी और माताजी थे सबसे छोटा होने के कारण मैं अपने मां-बाप का बहुत लाड़ला बेटा था इस कारण थोड़ा जिद्दी भी हो गया था. Desi Village XXX Story

मैं करीब 14- 15 साल की उम्र अपने मम्मी पापा के साथ ही सोता है इसीलिए कई बार मुझे मां की लाइफ चुदाई देखने का मौका मिला! गांव में पति पत्नी एक साथ नहीं सोते हैं एक ही कमरे में भी अलग अलग खटिया पर सोते हैं. मेरे पापा अलग खटिया पर और मैं और मेरी मां उसी कमरे में अलग खटिया पर सोते थे. मैं तीन-चार साल तक तो अपनी मां का दूध पीता ऱहा था, इसीलिए मैं उनके साथ ही सोता था.

कभी-कभी मैं चड्डी पहन के तो कभी एकदम नंगा सो जाता हूं गांव में बच्चे अक्सर ऐसे ही सोते हैं. चड्डी पहन कर बनियान पहनकर गांव में भी घूमते रहते हैं अक्सर मेरे पापा रात में मम्मी की चुदाई करते थे बिल्कुल नंगा करके. एक रात जब मेरी नींद टूटी तो देखा पापा मेरे पास मम्मी के पास लेते हैं. और मम्मी की पीठ के पास चिपकर कुछ कर रहे हो मुझे यह सब समझ में नहीं आता था.


फिर भी मैंने देख पापा मम्मी बिल्कुल नंगे हो मैं उठ कर बैठ गया और मम्मी मम्मी करने लगा. मम्मी ने मुझे अपने पास लेटा लिया पापा भी मम्मी के पास ही लेटे रहे मैंने देखा पापा मम्मी की चुदाई कर रहे. पापा का लंड मम्मी की चूत में डाला था दोनों बिल्कुल नंगी थे. थोड़ी देर बाद मुझे सोया जानकर पापा मम्मी को अपने पास खटिया पर ले गए. उन्होंने मम्मी की चूत चाटना शुरू कर दी है.

मैं फिर उठकर मम्मी पापा के पास पहुंच गया मुझे देखकर पापा कहने लगे तेरे को नींद नहीं आ रही है. मैंने आप मिलते हुए कहा मुझे आपके पास लेटना है पापा ने मुझे अपने पास लिटा लिया और फिर मम्मी की चुदाई करने लगे. पापा ने इस बार मम्मी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उनके बूब्स दबाने लगे. मैं जाग रहा था और सब कुछ देख रहा था लेकिन मेरे पापा मम्मी को मेरे जागने से कोई फर्क नहीं पड़ रहा वे तो अपने काम में मस्त थे.

थोड़ी देर बाद में जब उठ गया तो पापा ने मुझे अपनी जांघो के पास बैठा लिया. और अपना लंड मुझे पकड़ा दिया और कहा तू इसके साथ खेल. मैं पापा का लंड पकड़ कर खेलने लगा कभी पापा का लंड पकडकर हिलाता तो कभी चूसता, मुझे और मजा आ रहा था. थोड़ी देर बाद में मम्मी के जनों के बीच बैठ गया और मैंने मम्मी की चूत में उंगली डालना शुरू कर दिया. कि बीच बीच मे कभी जीभ से चुम्मी लेकर चूत चाट लेता था.

मैं काफी छोटी उम्र से पापा से लंड से खेलता था मुझे लंड से खेलना और चूत में उंगली डालना बहुत अच्छा लगता था. जब मैं छोटा था तो रात में उठ जाता था तो पापा मुझे इसी तरह अपनी जांघों के बीच बिठाकर लंड से खेलने को कह देते थे. और पापा मम्मी कै कभी होठों का रस पीते तो कभी दुघ चूसते थे. पापा जब मम्मी की चूत चाटने लगे तो मैं मम्मी के दूध चूसने लगता था.


मेरी मम्मी मेरे सामने छोटे से ही नंगी हो जाते थे मेरे सामने नहा भी लेते अपने कपड़े बदल लेते हैं. इसी तरह मेरे पापा मेरे सामने नंगे होकर नहा लेते थे और कपड़े भी बदल लेते थे. 1 दिन जोरदार बारिश हो रही थी मैं बाहर से जब घर पर आया तो मुझे घर पर मम्मी कहीं नहीं देखी. मैंने पूरा घर छान मारा लेकिन मुझे मम्मी कहीं नहीं देखी फिर मैं बेडरूम में गया यहां मेरे मम्मी पापा सोते थे.

मैंने गेट खोल कर देखा तो पापा मम्मी की चुदाई कर रहे थे पापा मम्मी दोनों एकदम नंगे थे. पापा ने मम्मी को घोड़ी बना रखा था और उनकी चूत में अपना लंड डाल रखा है मैं गेट खोल कर सीधे कमरे में घुस गया. अचानक मुझे देखकर मेरे मम्मी पापा हड़बड़ाबे और अलग हो गए. मम्मी बोली बेटा तू कब आया मैंने बोला मैं अभी आया आप नहीं दिखे तो मैं घर आ गया.

उस समय मेरा सिर्फ खड़ा होता था लंड को पकड़ कर मसलने में मजा आता था लेकिन पिचकारी नहीं छूटती थी मैं कमरे में खटिया पर बैठ गया. मैं यह देखकर हैरान रह गया कि मेरे मम्मी पापा मेरे पास ऐसे नंगे ही बैठ गए. पापा खटिया पर लेट गए मैं हर बार की तरह पापा लण्ड सहलाने लगा. पापा मम्मी की चूत चाटने लगी थोड़ी देर बाद पापा ने मुझे अलग कर दिया और मम्मी को आगे की ओर झुका दिया और अपना लंड एक ही झटके में मम्मी की चूत में डाल दिया.

मैंने पहली बार मम्मी की लाइफ चुदाई अपनी आंखों से देखें. पापा मम्मी ने मुझे कमरे से बाहर जाने को भी नहीं कहा मम्मी ने पापा के कान में कहा कि इसको बाहर भेज दो. पापा बोले अभी तो बहुत छोटा है उसे कोई ज्ञान नहीं है बैठा रहने दो. मैंने पापा से मासूमीयत इसलिए पूछा पापा आप यह क्या कर रहे है तो पापा कहने लगी मैं संभोग कर रहा हूं. मैंने कहा यह क्या होता है पापा बोले जब तुम बड़ा हो जाएगा तो तू भी अपनी पत्नी के साथ यह सब करेगा.

पापा कहने लगे तू भी तो इसी चू से निकला है मैंने कहा पापा यह चूत क्या होती है. तो पापा कहने लगे औरत की नंगू को चूत कहते हैं और पापा के सुसु को लंड कहते हैं. मैंने कहा तो क्या मेरी सुसु भी लंड कहेगी पापा कहने लगी हां तेरा भी अब खड़ा होने लगा है तेरी सुसु अब लंड बन गया है. पापा और मैं बातें कर रहा था और पापा मेरे सामने ही मम्मी की चूत मार रहे थे.


20 मिनट की चुदाई के बाद पापा ने मम्मी की चूत में ही अपना माल पानी छोड़ दिया. पापा मम्मी को नंगा देखकर मैं भी उत्तेजित हो गया था मैंने भी अपनी चड्डी उतार और अपनी सुसु को सहलाता रहा और हम तीनों मजा करते रहे. घर में रोज मम्मी पापा की चुदाई देखकर मैं भी उत्तेजित हो जाता था और मुझे भी किसी की चूत मारने की इच्छा होने लगी थी.

गांव में अक्सर लड़का लड़की अपने पालतू जानवरों को चराने के लिए जंगल जाते हैं. मेरे पड़ोस में भी एक लड़की मेरी ही हम उम्र थी वह भी अपनी गाय भैंस चलाने के लिए जंगल जाती थी. मैं भी एक दिन उसी के साथ जंगल चला गया जंगल में हम दोनों एक सिला पर बैठ गए और आसपास ही हमारे जानवर चलने लगे. हम लोगों की बातें करते रहे मैंने चड्डी बनियान पहन रखी थी तो उस लड़की ने भी देखा ब्लाउज और घाघरा पहन रखा था.

कुछ देर बाद छोकरी को लैट्रिन लगी छोकरी मुझसे बोली मेरे जानवर देखना मैं लैट्रिन होकर आती हूं. छोकरी एक बोतल में पानी लेकर झाड़ियों के पीछे बैठ गई और पॉटी करने लगी. थोड़ी देर में मैं भी उसी लड़की के सामने जा पहुंचा लड़की मुझे देख कर कहने लगी तुम यहां क्यों आ गए. मैंने कहा मुझे भी लेट्रिन आ रही है और मैं अपनी चड्डी खिसका कर उसी के सामने पॉटी करने बैठेगा.

लड़की कहने कोई आ जाएगा मैंने कहा इस जंगल में अभी कोई नहीं आएगा. मुझे वैसे पॉटी नहीं आ रही थी लेकिन मैं तो लड़की की चूत देखने के लिए बैठ गया था. थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा तेरी सुसु तो बहुत अच्छी है मैं उसे छूकर देखना चाहता हूं. छोकरी बोली कोई आ जाएगा मैंने कहा कोई नहीं आएगा. और मैंने उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और एक उंगली उसकी चूत के अंदर डाल दी और उसकी चूत में उंगली करने लगा

मेरे उंगली करने से लड़की को मजा आने लगा मैंने लड़की से कहा मेरी सुसु भी पकड़ कर देख. डरते डरते लड़की ने मेरा लंड पकड़ लिया और जोर से दबाने लगी. उसके लंड दबाने से और उसकी चूत में उंगली करने से मेरा लंड पहले ही खड़ा हो गया था. लड़की से मैंने कहा इसकी खाल पीछे करो तो उसने मेरे लंड की खाल पीछे की तो मेरा लाल सुपडा देखकर वह खुश हो गई.


कहने लगी तेरी सुसु तो बहुत अच्छी और बड़ी है मेरे पापा की सुसु भी ऐसी ही है. मैंने उससे कहा जब लड़का बड़ा हो जाता है तो उसको सुसु नहीं लड कहते हैं और तू भी अब बड़ी हो गई है तो तेरी चू चू चू तो बन गई है. लड़की मेरे लंड को शहला टी रही मैं उसकी चूत में उंगली करता रहा. थोड़ी देर बाद हम लोग फिर टीले पर आकर बैठ गए मैंने लड़की से कहा चलो पापा मम्मी वाला खेल खेलते हैं.

लड़की कहने लगी मुझे यह खेल नहीं आता है मैंने कहा मुझे यह खेल आता है. मैंने पापा मम्मी को कई बार खेलते हुए देखा है मैं लड़की को झाड़ी के पीछे ले गया. और मैंने लड़की को पीठ के बल सीधा लिटा दिया लड़की का घाघरा और उसकी चड्डी उतार दी. और मैं उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया मैंने उसकी सुसु अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दी.

तो लड़की मस्त हो गई कहने लगी बहुत मजा आ रहा है फिर मैं सिक्सटी नाइन की स्थिति में उसके ऊपर लेट गया. और मैंने अपना लंड उसके मुंह में दे दिया और कहा यह तू भी चूस तेरे को भी बहुत मजा आएगा. लड़की ने मेरा पूरा लंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. हम दोनों एक दूसरे के लंड और चूत चूस रहे थे तभी किसी की आने की आहट सुनाई दी. “Desi Village XXX Story”

तो हम लोग अलग हो गए और अपने कपड़े पहन कर टीले के पास आ गए. उस दिन मैं उस लड़की की चुदाई नहीं कर सका, लड़की चुदाई के लिए तैयार थी लेकिन किसी के आज आने की आहट के कारण में चुदाई नहीं कर सका. मेरा लंड प्यासा ही रह गया मैंने लड़की के सामने ही अपनी मुठ मारी लड़की कहने लगी यह क्या कर रहे हो. मैंने कहा यह मैं मुठ मार रहा हूं कल पापा मम्मी वाला बाकी खेल भी खेलेंगे.

दूसरे दिन जब हम लोग गए तो पहले की तरह झाड़ियों के पीछे पहुंच गए. मैंने लड़की की चूत में उंगली करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स चूसने लगा. थोड़ी देर में लड़की की चूत पानी छोड़ने लगी तो मैंने उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया और अपना लंड उस लड़की के मुंह में दे दिया. हम दोनों ने 10 मिनट तक एक दूसरे की चूत और लंड चाहते लड़की की चूत नमकीन पानी छोड़ने लगी.

तो मैंने उसकी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया और अपना लंड थूक लगा धीरे-धीरे लड़की की चूत में डालना शुरू किया. लड़की कहने लगी दर्द हो रहा है दर्द हो रहा है, मैंने उससे कहा तेरी चूत अभी फ्री नहीं है इसलिए थोड़ा सा दर्द होगा थोड़ा सा बर्दाश्त करो. मैं रोका नहीं धीरे-धीरे मैंने लड़की की चूत में लण्ड डालकर चुपचाप लेट गया. थोड़ी देर बाद जब लड़की का दर्द कम हो गया तो मैंने फिर मैंने चूत में लंड घिसना शुरू कर दिया.
कामुकता हिंदी सेक्स स्टोरी : पति को हार्डकोर सेक्स से खुश करके उनका प्यार फिर से पा लिया

धीरे-धीरे लड़की को भी मजा आने लगा और वह भी मेरी चुदाई में सहयोग करने लगी. 15 मिनट की चुदाई के बाद में अपना माल पानी उसी की चूत में छोड़ गए. हम दोनों एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही देते रहे फिर अलग होगए. कई दिनों तक हम लोग इसी तरह चुदाई का मजा लेते रहे. मेरे पापा मम्मी जिस तरह से अलग-अलग आसन में चुदाई का मजा लेते थे मैं भी उसी को देखकर लड़की के साथ चुदाई का मजा लेता था.

एक बार मैंने लड़की को घोड़ी बनाकर पहले उसकी चूत चाटी फिर उसकी चूत घोड़ी बनाकर मारी. हम दोनों को बहुत मजा आया लड़की को भी मरवाने में बहुत मजा आता था. इसलिए वह भी जल्दी तैयार हो जाती थी हम लोग झाड़ी के पीछे जाकर रोज संभोग करते थे. लड़की उस समय एमसी से ठीक से नहीं होती थी इसलिए प्रेग्नेंट होने का ज्यादा डर नहीं था.

पहली बार जब मैंने लड़की की चुदाई की तो उसकी चूत से ढेर सारा खून निकला मेरा लंड भी खून से रंगे आता लड़की डर गई. लेकिन मैंने उससे कहा कि मैंने बीएफ में देखा है लड़की चूत से खून निकलता है तो लड़की समझ गई. हम दोनों ने उस दिन चुदाई के बाद अपने पास के ही एक तालाब में धोया और लड़की की चूत भी धोकर साफ कर दी. ताकि उसके घर वालों को पता ना पड़े की लड़की चुदाई करवा कर आई है आगे की कहानी अगले भाग में मैं लिखूंगा!

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

मैं भागलपुर शहर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं शहर से थोड़ी दूर एक छोटे शहर या कस्बे का रहने वाला हूँ. यह बात दीवाली की है, जब मैं घर गया था. मैं अपने गांव गया, जहाँ चाची ने मुझे बहुत स्नेह दिया और रात को पिछली बार की तरह बदले में उन्हें प्यार दिया. “Adult Stories”

फिर अगली सुबह हमारे पड़ोस में रहने वाली एक दीदी चाची के पास आईं. चूंकि बचपन में वहीं रहा, उनके साथ खेला कूदा, बड़ा हुआ, तो मैं उनके बारे में सब जानता था. मैं उन्हें नमस्ते कहकर वहाँ से चला गया.

अपने कुछ दोस्तों के साथ बगल वाले गांव से निकलती नदी पर नहाने चला गया, जहाँ हमने ठंडे ठंडे पानी में बहुत देर तक उछल कूद की. जिससे मुझे ज़ुकाम हो गया. शाम के समय तक थोड़ा बहुत बुखार भी आ गया था. बस मैं खटिया पर लेटा था.

चाची बहुत देर से कहीं बाहर गई थीं, तभी वो पड़ोसन, जिसे मैं दीदी कहता था … घर आईं. चूंकि मैं अकेला था, तो वे मेरी खटिया पर बैठकर मुझसे बात करने लगीं. खटिया के पास एक रुमाल पड़ा था, जिससे मैं कई बार अपनी नाक पौंछ चुका था. उन्होंने उसे उठाया और मुझे डांटते हुए अंदाज में बोला- क्यों बे सोनू … तू ये सब काम कब से करने लगा?

तो मैं बोला- कैसे काम? मैंने क्या गलती कर दी?

वो मुझे रूमाल दिखाकर बोलीं- ये क्या है?


मैं बोला- रुमाल ही तो है, इसमें क्या गड़बड़ है?

वो- क्या पौंछा है इससे तूने?

मैं- क्या आपको क्या दिखता है … मेरी नाक है. कहीं आपने इसे और कुछ तो नहीं समझ लिया?

वो- अरे बेबकूफ ऐसे पौंछेगा तो कोई भी गलत समझेगा ही.

मैं- ये तो समझने वाले के ऊपर है. वैसे अगर ये सचमुच में वही होता तो!

वो- तो तेरी शामत आ जाती अभी.


मैं- वैसे मुझे वो सब अपने आप करने की कोई जरूरत पड़ती ही नहीं, तो कैसी दिक्कत.

वो- मतलब? किससे करवाता है.

मैं- इससे आपको क्या? सबके अपने अपने राज होते हैं.

वो- कैसे राज? कहीं कोई गलत काम तो करके नहीं आया न.

मैं- अरे थोड़ा शांत बैठो, ऐसा कुछ नहीं है. मैं बस मजाक कर रहा था, केवल मजे ले रहा था और कुछ नहीं.

वो- मजाक ठीक है, लेकिन अगर ये सच हुआ, तो तेरी ऐसी की तैसी हो जाएगी जरा संभल के चलो, अभी बता रही हूँ.

मैं- इसमें गलत क्या है. अगर कोई आपसे काम के लिए कहता है या मजबूरी में आपको करना पड़ता है, तो बात अलग होती है.

वो जरा बिंदास बोलती थीं तो खुल कर कहने लगीं- ऐसा कौन होगा, जो किसी से भी चुदवा ले.

मैं- कुछ लोगों की होती है … मजबूरी या कोई ऐसा, जो आपको पसंद करता हो या फिर चुदाई के शौक़ीन.

वो- तू पहले भी किसी को चोद चुका है.

मैं- अब ये मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि थोड़ा प्राइवेट मामला है.

वो- कुछ भी हो लेकिन अपने पेरेंट्स की इज्जत का ख्याल रखना.

इतना कह कर वो चली गईं, इनके बारे में थोड़ा बहुत बताता हूं. उनका नाम डिम्पल सेक्सी बदन, उम्र-29 वर्ष, पति ने धोखा देकर इन्हें 10 साल पहले छोड़ दिया था, अब ये अपने पेरेंट्स के साथ रहती हैं.

अगले दिन चाची के भाई की तबियत खराब हो गई, जिससे वो अपने मायके घर को मेरे हवाले छोड़कर चली गईं. मैं भी अकेले होने के चक्कर में अपने लंड को हिला रहा था, तभी दीदी ने मुझे आवाज दी और कमरे में आ गईं. मैंने झट से अपने कपड़े ठीक किए.

वो बोलीं- अकेले अकेले क्या कर रहा था? जो तूने मेरी आवाज नहीं सुनी.

मैं- कुछ नहीं, वो अन्दर था तो आवाज नहीं आई.

वो- लेकिन तेरी पैन्ट को देखकर तो नहीं लगता. रुक अब तेरी मम्मी को बताना ही पड़ेगा.

मैं- अरे सॉरी न … कोई कितना कंट्रोल कर सकता है.

वो- तू रुक … अभी बताती हूँ कण्ट्रोल कैसे होता है … तेरी मम्मी को जब पता लगेगा तो अपने आप ही सीख जाएगा.

मैं- बोला न सॉरी … गलती हो गई, चाहो तो कोई सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ … बहुत मार पड़ेगी.

वो- जब मार से डरते हो तो ऐसे काम करते ही क्यों हो.

मैं- माफ़ी मांग रहा हूँ न … और क्या करूँ. आप चाहें तो कोई भी सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ प्लीज.

वो- चल ठीक है … बता किसको याद करके हिला रहा था.

मैं- आप भी न मौके का फायदा उठा रही हो.

वो- लगाऊं फोन?

मैं- हैं भागलपुर में एक दो, जिनके साथ, उन्हीं के उनके कहने पर करता हूँ. बदले में वो भी मुझे खुश रखती हैं.

वो- अभी तो मैं जा रही हूँ, लेकिन अभी तेरी सजा बाकी है, बाद में बताती हूँ.

फिर वो चली गईं. उनकी धमकियों से एक टाइम तो मेरी गांड फट गई थी, लेकिन फाइनली वो मान गईं. अब मैं सोचने लगा कि ये मुझसे क्या करवाएंगी. तभी चाची का फोन आया, उन्होंने बोला- तू डिम्पल के यहाँ खाना खा लेना, मैं सुबह आऊँगी. कुछ देर बाद मैं खाना खाने पहुंचा और उनसे बोला- दीदी भूख लगी है कुछ मिलेगा.

वो बोलीं- हाँ मिलेगा न … रसोई में बैठ, मैं अभी आई.

रसोई में बिठा कर उन्होंने मुझे खाना परोसा और मेरे सामने बैठ गईं. फिर बोलीं- आज तू मेरा एक काम करेगा.

मैं- वैसे भी आपने जो धमकी दी है, उसको ध्यान करके तो करना ही पड़ेगा.

वो- जैसे कि तूने कहा कि सबकी अपनी जरूरत होती है. मेरी भी है … क्या तू उसे ख़त्म करेगा.

मैं- मतलब?

वो- मतलब तू मुझे चोदेगा.

मैं- क्यों आपको कैसे?

वो- अबे पूछ नहीं … बता रही हूँ तैयार रहना.


मैं- ठीक है … और कर भी क्या सकता हूँ.

मैं घर आ गया और उनके बारे में सोच सोचकर उनके प्रति फीलिंग्स लाने की कोशिश करने लगा, लेकिन बात बन नहीं रही थी. मेरे मन में उनके प्रति कोई गलत विचार नहीं आ रहे थे. फिर मैंने उनकी बॉडी को इमैजिन किया. मेरी जितनी हाइट, एवरेज शरीर, एवरेज बूब्स लेकिन गांड थोड़ी बड़ी थी, जिससे थोड़ी बहुत फीलिंग मेरे अन्दर आई. तभी शाम हो गई और करीब 8-9 बजे वो आ गईं.

वो थोड़ा बहुत एडल्ट बात करके बोलीं- चल शुरू हो जा.

मैं- कैसे शुरू हो जाऊं … क्या करूँ?

वो- जो कर सकता है, वो कर.

मैं- मैं अकेला क्या करूँगा, करने को तो बहुत तरीके हैं, लेकिन अकेला कुछ नहीं कर पाउँगा.

वो- अबे भोसड़ी के सीधे सीधे बोल न … क्या करना है, बातों को घुमा क्यों रहा है?

मैं- एक काम करो, पहले एक वीडियो देख लो, फिर ही आप कुछ समझ पाओगी.

मैंने उन्हें एक पोर्न वीडियो दिखा दी, जिससे वो थोड़ा बहुत गर्म हो गईं और मेरे पास बैठकर मुझे किस करने लगीं. मैं भी बराबर साथ देने लगा और उनके बूब्स प्रेस करने लगा. किस करते करते मैंने उनके कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे कपड़े खींचते हुए उतार दिए.

किस के बाद मैं उनके बूब्स को चूमने लगा. उनके मम्मे मेरे अनुमान से कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे. उनका हाथ भी मेरे लौड़े तक पहुँच गया, जिसे वो सहलाने लगीं. फिर मैं उनकी चूत के पास आ गया.

उसके आस पास काफी बाल थे, उन बालों के बीच उनकी कई सालों से अनचुदी चूत रिस रही थी. मैंने उसमें उंगली की और चूत की फांकों के बीच के भाग को, मतलब दाने को अपने होंठों से खींचने लगा. जिससे वो बेड पर गांड उछालते हुए उछलने लगीं.

मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था, जिससे वो थोड़ी ही देर में झड़ गईं. मैंने उन्हें मेरा लंड चूसने को कहा, पहले तो उन्होंने मना किया. फिर मेरी जिद पर उन्होंने तब तक उसे मुँह में लिया, जब तक वो पूरी तरह खड़ा नहीं हो गया. “Adult Stories”

इन सब क्रियाओं के बाद मैं उनकी चुदाई करने जा रहा था. मैंने उनकी चूत के छेद में थूक भरा और धीरे धीरे दो तीन धक्कों में पूरा लंड अन्दर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकालकर एक ही झटके में दोबारा घुसा दिया, जिससे वो चिल्ला कर बोलीं- अबे मादरचोद धीरे कर … मार डाला साले … इतना तेज मत कर.

लेकिन मैं और तेज चुदाई करने लगा. वो बेड पर सीधी लेटी हुई थीं, उनकी एक टांग मेरे हाथ में और दूसरी टांग बेड पर रखी हुई थी. मैं अपना लंड उनकी चूत में पूरा बाहर निकालकर झटके से अन्दर डालता और दोबारा बाहर निकालकर फिर झटका दे मारता, जिससे वो गाली पर गाली बके जा रही थीं.

दीदी ‘धीरे कर … धीरे कर साले …’ चिल्ला रही थीं. थोड़ी देर बाद मैं थोड़ा आराम से करने लगा, जिससे उन्हें भी पूरा मजा आने लगा. खैर मुझे तो मजा आ ही रहा था. मैं दीदी को चोदने के साथ साथ उनके मम्मों को भी मसल रहा था. “Adult Stories”

थोड़ी देर बाद जब मैं थक गया तो मैं लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गईं. अब दीदी अपनी चूत में लंड लेकर चुदवाने लगीं. इस स्थिति में उन्हें किस भी कर सकता था. थोड़ी देर बाद उन्होंने पानी छोड़ दिया, लेकिन मैं उन्हें कुतिया बनाकर तब तक पेलता रहा, जब तक कि मैं नहीं छूटा.

जब सब ख़त्म हुआ तो वो बोलीं- मजा आ गया. शायद ही कोई इस तरह करता होगा … एक बार और हो जाए. मैं उनके दूध दबा कर बोला- जी हुजूर. बस कुछ ही देर में एक बार और पूरे जोरों शोरों के साथ ठुकाई हुई. उन्हें बहुत मजा आया, उन्होंने मुझे बकी गालियों के लिए माफी मांगी और चुदाई के लिए शुक्रिया अदा किया. 

 


देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat

 


देवर के साथ भाभी की सुहागरात - Devar ke sath bhabhi ki suhagraat, देवर भाभी की चुदाई , देवर ने चोदा , प्यार से चोद दिया , मैं देवर से चुदवाई

देवर भाभी की चुदाई , देवर ने चोदा , प्यार से चोद दिया , मैं देवर से चुदवाई , बार - बार चुदने लगी , देवर का लंड चूसा , चूत भी चटवाई.


मेरा निकाह हो चुका था।  अभी दो दिन पहले ही मैंने अपनी सुहागरात मनाई थी।  आज तीसरे दिन मेरा देवर मेरे सामने आया।  उस समय कमरे में कोई नहीं था।  मैं थी और मेरा देवर तारिक़।  वह लगभग २२ साल का पूरा मर्द हो चुका था। गोरा चिट्टा हैंडसम और लंबा चौड़ा था।  उसे देख कर मेरे नियत ख़राब हो गई।

   

  • वह मुझे देख कर मुस्कराया और बोला - भाभी जान आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो।  बिलकुल मेरे दोस्त की भाभी की तरह।  वह भी इसी तरह बेहद हसीन है।  मैं कुछ नहीं बोली और तिरछीं निगाह से देख कर मुस्कराने लगी। इतने में वह अपनी लुंगी खोल कर मेरे सामने एकदम नंगा खड़ा हो गया.  उस भोसड़ी वाले का लण्ड खड़ा था . लण्ड देख कर मेरी चूत में आग लग गई बहन चोद। वह बोला - लो मेरा लण्ड पियो,  भाभी जान ।
        
  • लण्ड देख कर तो मैं ललचा ही गई थी.  मेरे मुंह से लार टपकने लगी थी और मेरी जबान लण्ड चाटने के लिए लपलपाने लगी।  पर मैं थोड़ा नखरा करने लगी।  
        
  • मैंने कहा - तुम भोसड़ी के बड़े बेशरम हो ? एक पराई बीवी के सामने इस तरह नंगे होकर खड़े होने में तुम्हे कोई शर्म नहीं आती ? अपना खड़ा लण्ड दिखाने में तुम्हे लाज नहीं आती ?
        
  • वह बोला - अरे भाभी जान अब नखरे न करो।  और भी लोग तेरे सामने नंगे खड़े होतें हैं।  तुम भी अपने कुनबे के ग़ैर मर्दों के आगे नंगी होती हो ? मैं तो कुनबे का ही लड़का हूँ।  मेरे आगे नंगी होने में तुम्हे तो कोई शर्म नहीं आना चाहिए।  अभी तो मैं ही नंगा हूँ।  मैं अभी तुझे भी नंगी कर दूंगा।
        
  • मैंने कहा - अरे यार तुम तो मेरे ऊपर खामखां ही चढ़े ही जा रहे हो ? मैं कोई ऐसी वैसी भाभी नहीं हूँ।
        
  • वह बोला - तुम जैसी  भाभी हो मुझे मालूम है । तुम बहुत खूबसूरत हो, बड़ी बड़ी आँखों वाली हो, बड़ी बड़ी चूँचियों वाली हो, मस्त गांड और बड़े बड़े चूतड़ वाली हो, बड़ी बड़ी जाँघों वाली हो और उसके बीच एक मस्तानी चूत वाली हो ? मैं जानता हूँ की तुम लण्ड बहुत अच्छी तरह पीती हो।  मेरी बड़ी भाभी भी मेरा लण्ड पीती हैं पर तुमसे अच्छा नहीं पीती। ये मुझे किसी ने बताया है।  प्लीज पकड़ कर पी लो न मेरा लण्ड।  देखो न कैसे अपना सर हिला हिला कर तुम्हे मना रहा है मेरा लण्ड।


उसकी प्यारी प्यारी बातों ने मुझे मजबूर कर दिया और मैंने हाथ बढ़ाकर पकड़ ही लिया उसका लण्ड। लंडमेरे हाथ में आते ही छलांगें मारने लगा।  साला और बढ़ भी गया और मोटा भी हो गया एकदम से।  वह बोला देखा भाभी जान तेरे हाथ में कितना जादू है।  मेरा लण्ड इतना बड़ा और मोटा कभी नहीं हुआ जितना तेरे हाथ में जाकर हो गया।  मैं उसके लण्ड का सुपाड़ा चाटने लगी और वह मुझे नंगी करने लगा। मेरी चूँचियाँ दबाने लगा और मेरी चूत सहलाने लगा।  फिर मैंने उसे चित लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। 

अपनी चूत उसके मुंह पर रख दिया और कहा लो देवर जी पहले मेरी चूत चाटो। अपनी जबान पूरी घुसेड़ दो मेरी चूत में और मैं झुक कर उसका लंडचाट्ने लगी।  हम दोनों 69 बन गए।  सच में मुझे ऐसे में बड़ा मज़ा आने लगा।  वह बोला भाभी जजान तेरी चूत बहुत स्वादिस्ट है।  ऐसी चूत अपने कुनबे में किसी की नहीं है।  मैंने पूंछा क्या तुम कुनबे की सबकी चूत चाट चुके हो।  वह बोला हां भाभी जान मैं सबकी चूत चाट चूका हूँ और आज भी चाटता हूँ।  सब मेरा लण्ड चाटती हैं। पीतीं हैं मेरा लण्ड।


इतने में किसी ने कहा भाभी जान लो मेरा भी लण्ड पियो ? मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो वह अनजान लड़का था एकदम नंगा खड़ा था उसका बिना झांट का लण्ड भी खड़ा था।  लण्ड का सुपाड़ा एकदम तोप का गोला लग रहा था।  वह लण्ड तारिक़ के लण्ड से बेहतर लगा मुझे।  मैं कुछ बोलती उसके पहले ही तारिक़ बोला भाभी जान ये मेरा दोस्त फहीम है। हम दोनों मिलकर चुदाई करतें हैं।  चाहे किसी की लड़की हो, चाहे किसी की माँ हो, चाहे किसी की बेटी या बहू हो, चाहे किसी की सास या नन्द हो देवरानी या जेठानी हो हम दोनों मिलकर चोदेतें हैं। मैंने ही इसे बुलाया है भाभी जान। इसकी भाभी जान मेरा लण्ड पीती है इसलिए मैं चाहता हूँ की तुम भी इसका भी लण्ड पियो।


मैंने पूंछा अच्छा ये बताओ की तेरी बीवी कौन चोदता है ? वह बोला मेरी बीवी फहीम चोदता है, इसके दोस्त भी चोदते हैं मेरी बीवी।  मैं इसकी बीवी चोदता हूँ और मेरे दोस्त भी इसकी बीवी चोदतें हैं।  इसीलिए हमारी इसकी पक्की दोस्ती है।  मैंने दूसरे हाथ से फहीम का लण्ड पकड़ लिया।  मैंने दोनों लंड अपने मुंह के पास ले आयी और बारी बारी से दोनों के सुपाड़े चाटने लगी।  मुझे इतनी जल्दी दो दो लण्ड का मज़ा मिलेगा यह मैंने कभी सोंचा नहीं था। हम तीनो पूरी तरह नंगे थे।  मैंने तारिक़ को जमीन पर लिटा दिया और फहीम को भी लिटा दिया। दोनों आमने सामने लेटे। यानी दोनों के लण्ड आमने सामने हो गये।  मैंने उनको और नजदीक आने को कहा।  फिर दोनों ने टांगों पर टांगें  रख लीं और उनके लण्ड एकदम चिपक कर आमने सामने हो गये।  लण्ड से लण्ड टकरा गया और पेल्हड़ से पेल्हड़।


मैंने दोनों लण्ड एक साथ अपनी दोनों हाथ की मुठ्ठी में लिया और मस्ती से हिलाने लगी।  उनके सुपाड़े चाटने लगी और फिर दोनों लण्ड एक दूसरे से लड़ाने लगी. अब दोनों लाँड़ बिलकुल साँड़ की तरह लड़ने लगे।  मुझे यह देख कर मज़ा आने लगा। मैं तारिक़ के लण्ड से फहीम के लण्ड को मारती और कभी फहीम के लण्ड से तारिक़ के लण्ड को मारती। कभी सुपाड़े को सुपाड़े पर रगड़ती।  वो दोनों भी खूब एन्जॉय करने लगे।   फिर मैंने पर्श से दो कंडोम निकाले और दोनों लण्ड पर चढ़ा दिया।  इस तरह दोनों लण्ड मिलकर एक महा लण्ड बन गया। मैं इस महा लण्ड पर बैठ गयी तो दोनों लण्ड एक साथ मेरी चूत में घुस गए।  मैं उनके ऊपर धीरे धीरे कूदने लगी।  लण्ड बार बार बुर के अंदर लेती और फिर बाहर निकाल देती ।  इससे उन्हें  भी मज़ा आने लगा और मुझे भी। फहीम बोला भाभी जान इस तरह तो आजतक मुझसे  किसी से नहीं चुदवाया।  ये तो बड़ा मजे दार तरीका है।  तारिक़ भी बोला हां भाभी जान तुम तो चुदाने में बड़ी एक्सपर्ट हो।  चुदाई के नए नए तरीकेआतें हैं तुम्हें। खूब मज़ा लेती हो तुम चुदवाने के ?


मैंने कहा ये सब मैंने ब्लू फिल्म से सीखा है।  मुझे ब्लू फिल्म देखने का और उसी तरह चुदवाने का बड़ा शौक है। वैसे मेरे मुसलमानी समाज में कोई कंडोम इस्तेमाल नहीं करता लेकिन मैं कंडोम अपने पर्श में रखती जरूर हूँ क्योंकि मुझे कई बार नॉन मुस्लिम लण्ड से भी चुदवाने का मौक़ा मिलता है। फिर मैं फहीम का लण्ड चूसते हुए तारिक़ से चुदवाने लगी और फिर तारिक़ का लण्ड चूसते हुए फहीम से चुदवाने लगी। दोनों ने मुझे बारी बारी से  खूब चोदा। मैं इन दोनों से पीछे से भी चुदवाया और लण्ड पर बैठ कर भी चुदवाया।  मैंने मन में कहा मुझे तो लगता ही की आज ही मेरी असली सुहागरात हुई है।  जब दोनों लण्ड एक एक करके झड़ने लगे तो में झड़ते हुए लण्ड पिये।  उनका सारा वीर्य पी गयी मैं और फिर सुपाड़ा चाट चाट कर मज़ा लिया।  मुझे लण्ड का वीर्य पीना अच्छा लगता है इससे मेरी ख़बसूरती बढती रहती है। मुझे किसी का भी लण्ड पीना बड़ा अच्छा लगता है और मैं हमेशा किसी न किसी का लण्ड पीने के फ़िराक में रहती हूँ।


मैं चुदवा के उठी थी पर नंगी थी।  वो दोनों भी अभी नंगे ही थे। उनके लण्ड ठंढे हो चुके थे।  फिर हम सबने खाना खाया और कुछ देर तक हम लोग बात चीत करते रहे और फिर मैंने लण्ड सहलाना शुरू किया तो लण्ड धीरे धीरे खड़े होने लगे। रात का समय था और रात में औरतें जाने क्यों सब की सब रंडी हो जातीं हैं।  इतने में मेरी सास कमरे में आ गयी। उसने मुझे दोनों लण्ड हिलाते हुए देख लिया। उसकी नज़र सबसे पहले लण्ड पर पड़ी तो वह बोली हाय दईया इतने बड़े बड़े लण्ड बहू रानी ?  तेरी माँ का भोसड़ा बहू रानी।  तेरी  बुर चोदी नन्द की माँ की चूत  ? सास ने एक ही बार में सबको गरिया डाला।  फिर वह अपने बेटे तारिक़ का लण्ड पकड़ कर बोली हाय अल्ला कितना बड़ा और कितना प्यारा लौड़ा हो गया है मेरे बेटे का ?  ये तो बिलकुल मरद बन गया है मुझे इसका पता ही नहीं चला।  देखो न बहू रानी इसका लण्ड भोसड़ा चोदने वाला हो गया है।  और ये इसके दोस्त का लण्ड बाप रे बाप कितना मोटा और कितना सख्त है बहन चोद।बेटा फहीम तुम अपने दोस्त की माँ का भोसड़ा चोदो न।  तेरा लण्ड देख कर मैं चुदासी हो गयी हूँ।


सास ने तो उसका लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  तब तक उसके पीछे एक लड़की नंगी नंगी आई और उसने तारिक़ का लण्ड अपने मुंह में भर लिया।  बाद में मालूम हुआ की वह मेरी जेठानी की बहन है और अपने जीजू का लण्ड पी कर आई है। तब तक मेरी नन्द आ गई।  वह मुझे नंगी नंगी ही मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर ले गई और बोली भाभी चलो मैं तुम्हें एक चीज दिखाती हूँ। जब मैं उसके साथ बाहर एक बदफे कमरे में गई तो देखा की याहं तो बड़ी घनघोर चुदाई हो रही है।  कई लोग चोद रहे हैं।  कई लोगों की बुर चुद रही है।  तब नन्द ने बताया की भाभी जान देखो न मेरा अब्बू अपनी  बड़ी बहू की बुर चोद रहा है। मैं ये देख कर दंग रह गयी।  मेरी जेठानी बड़ी शिद्दत से अपने ससुर से चुदवा रही थी। नन्द ने फिर कहा और ये देखो मेरा खालू मेरी फूफी की बेटी चोद रहा है। फूफा खाला की बेटी चोद रहा है। तेरी देवरानी अपने भाई जान से चुदवा रही है. मेरे चचा जान की बेटी अपने ससुर से चुदवा रही है।


इन सबकी बुर एक साथ चुद रही है तो बड़ा मज़ा आ रहा है। मैं समझ गयी की मेरी ससुराल में खूब धड़ल्ले से चुदाई होती है।  तब तक नन्द ने अपने मियां का लौड़ा मुझे पकड़ा दिया और बोली लो भाभी अब तुम मेरे मियां से चुदवाओ।  यही सके सामने पियो मेरे मियां का लण्ड और फिर पेलो इसका लौड़ा अपनी चूत में।  मैंने कहा तो फिर  तू क्या करेगी मेरी बुर चोदी नन्द रानी।  वह बोली मैं अपने चचा जान से चुदवाऊंगी। मैंने दो साल से अपने चचा जान का लण्ड अपनी चूत में नहीं पेला जबकि इसका लण्ड मुझे बहुत पसंद है।  आज मैं इससे झमाझम चुदवाऊंगी और तेरी बुर मेरे मियां से चुदती हुई देखूँगी। फिर क्या मेरे नंदोई ने मुझे लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ बैठा।  उधर नन्द भी मेरे सामने अपने चचा जान का लण्ड मुंह में भर कर चूसने लगी।


मैं अपने आपको बड़ी नसीब वाली समझने लगी।  जहाँ एक दुल्हन अपने मियां के अलावा किसी और मरद का लण्ड देखने के लिए महीनो बर्षों तड़पती रहती है वहां मैं अपनी शादी के ३/४ दिन में ही अपने ससुराल के इतने सारे लण्ड एक साथ देख रही हूँ। मुझे तो नये नये लण्ड देखने का, लण्ड पकड़ने का और लण्ड पीने का बड़ा शौक है।  मुझे तो लगा की जैसे की मेरे लिये लण्ड की लाटरी खुल गयी है।  अब तो मैं किसी का भी लण्ड कभी भी हाथ बढ़ाकर पकड़ सकती हूँ।  ये सब भोसड़ी वाले मेरे आगे नंगे नंगे घूम रहें हैं तो फिर मुझे इनसे शर्म किस बात की ?  और फिर मैं भी तो इन सबके आगे नंगी हूँ। अभी एक एक करके सबके लण्ड पेलूँगी अपनी चूत में तो मैं भी एक मंजी हुई रंडी बन जाऊंगी।  फिर मुझे अपनी बुर चोदी नन्द की बुर और सास का भोसड़ा चोदने में ज़न्नत का  मज़ा आएगा।


मैं अपने नंदोई का लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी और मेरी नन्द अपने चचा जान का लौड़ा चाटने लगी।  मैं भी
हाथ बढ़ाकर उसके पेल्हड़ सहलाने लगी।  उसे मालूम हो गया की मैं भी उससे चुदवाने के लिए तैयार हूँ।  वह मेरी चूत सहलाने लगा और नंदोई मेरी चूँचियाँ मसलने लगा। दोनों ही लण्ड बिना झांट के थे और लम्बे चौड़े थे।  मुझे दोनों ही लंड एक नज़र में भा गये।  इतने में नंदोई ने लण्ड पेल दिया मेरी बुर में।  मैं चिल्ला उठी उई माँ फाड़ डाला मेरी बुर। बड़ा मोटा है तेरा लण्ड ? चुद गयी मेरी यार।  धीरे धीरे चोदो न।  मैं कभी भागी नहीं जा रही हूँ।  अच्छी तरह चुदवाकर ही जाऊंगी।  तब तक मेरी नन्द बोली हाय चचा जान तेरा लौड़ा मेरी चूत का बाजा बजा रहा है।  तेरा लौड़ा तो साला बड़ा सख्त है।  तू भोसड़ी का मेरी अम्मी की बुर चोदता है और आज उसकी बेटी की बुर भी चोद रहा है।  तेरा जैसे हरामी आदमी दूसरा कोई नहीं होगा। 

मैंने सुना है की तू अपनी बेटी की बुर भी लेता है ? वह बोला हां लेता हूँ।  वह देती है तो मैं लेता हूँ।  मेरी बेटी भी तेरी ही तरह बहुत बेशरम और चुदक्कड़ लड़की है।  वह तो मेरे दोस्तों के भी लण्ड अपनी चूत में पेलती है तो फिर मैं क्यों न पेलूं ? मेरी नज़र अपने चचिया ससुर के लण्ड पर टिकी थी।  मैं चुदवा तो रही थी नंदोई से पर देख रही थी अपने चचिया ससुर का लण्ड।  उसका काला लण्ड मेरी जान ले रहा था।  मैं बहुत गोरी हूँ और गोरी औरत को काला लण्ड बड़ा अच्छा लगता है।  तब तक मेरी नन्द का खालू आ गया।  वह भी मादर चोद नंगा था। उसका भी लण्ड टन टना रहा था।  उसने लण्ड नन्द के कंधे पर रख दिया।  नन्द उसका भी लण्ड चाटने लगी. तब तक उसकी फूफी की बेटी आ गयी।  उसने मेरे  हाथ से नंदोई का लण्ड ले लिया और बोली भाभी जान अब मुझे अपने भाई जान से चुदवाने दो। मैंने उसे नंदोई का लण्ड दे दिया और मैं चचिया ससुर का लण्ड अपनी नन्द से ले लिया और उसे चूसने लगी।


मेरे मन की इच्छा पूरी हो रही थी। मुझे काले लण्ड का मज़ा मिलने लगा। मैं पहली बार किसी काले लण्ड से खेल रही थी।  लण्ड पूरे नंगे बदन पर फिरा रही थी खास तौर से अपनी चूँचियों पर।  बीच बीच में मैं लण्ड का  सुपाड़ा चाट रही थी।  लण्ड साला बिलकुल पोर्न स्टार के लण्ड की तरह लग रहा था और मैं अपने आपको ब्लू फिल्म की हीरोइन समझने लगी।  फिर मैंने लण्ड अपनी चूत में पेला और धकाधक चुदवाने लगी।  वह बोला बहू आज मुझे किसी नई ताज़ी बहू की नई ताज़ी बुर चोदने को मिली है। आज मैं खूब जी भर के तेरी बुर चोदूंगा।  वह चोदने की स्पीड बढ़ाता गया और मैं अपनी गांड उठा कर हर धक्के का जबाब धक्के से देती गयी।


कुछ देर में मुझे एहसास हुआ की ससुर का लण्ड झड़ने वाला है और इधर मैं भी करीब  आ चुकी थी। तब तक उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठा लिया।  लण्ड पूरा मेरी बुर में घुसा हुआ था।  वह नीचे से धक्के मारने लगा और मैंभी ऊपर से कूदने लगी।  इतने में लण्ड ने उगल दिया वीर्य।  थोड़ा मेरी चूत में लगा थोड़ा मेरी गाड़ में।  मैं फिर घूम गयी और झाड़ता हुआ लण्ड चाटने लगी।  मुझे लण्ड का वीर्य चाटने का बड़ा अच्छा लगता है।  हर लण्ड का  स्वाद अलग अलग होता है।  खलास मैं भी हो गयी थी।  मैं बाथ रूम गयी और वहां से फ्रेश होकर आ गई।  मैं मस्ती से सबकी चुदाई देख रही थी।  पूरे घर में चुदाई ही चुदाई हो रही थीं।  सब भोसड़ी वाली लण्ड अदल बदल कर चुदवा रहीं थीं।


तभी अचानक मेरी फुफिया सास का बेटा नंगा नंगा अपना लण्ड मुझे दिखाते हुए बोला लो भाभी जान मेरा भी लण्ड पियो।


मैंने कहा हां देवर जी जरूर पियूँगी।  तेरा भी लण्ड पियूँगी और तेरे बाप का भी लण्ड पियूँगी।

पापा ने चूत में अपना 12 इंच पूरा लौड़ा घुसा दिया

पापा ने मेरे चूत में अपना 12 Inch पूरा लौड़ा घुसा दिया


मेरा नाम मधु गुप्ता है. मेरी उम्र लगभग 21 वर्ष की हो चुकी है. मैं आपको अपनी पहली चुदाई की कहानी सूना रही हूँ. तब मैं अपने मामा के यहाँ रह कर पढ़ाई करती थी. मेरी उम्र १९ वर्ष की थी. मेरा घर गाँव में था. मेरे कॉलेज में छुट्टी हो गयी थी. मैंने अपने पापा को फ़ोन किया और कहा कि वो आ कर घर ले जाएँ. मेरे पापा मुझे लेने आ गए. हम दोनों ने रात नौ बजे ट्रेन पर चढ़ गए. ट्रेन पैसेंजर थी. रात भर सफ़र कर के सुबह के ६ बजे हम लोग अपने गाँव के निकट उतरते थे. उस ट्रेन में काफी कम पैसेंजर थे.

उस पूरी बोगी में सिर्फ २०-२२ यात्री रहे होंगे. उस पैसेंजर ट्रेन में लाईट भी नहीं थी. जब ट्रेन खुली तो स्टेशन की लाईट से पर्याप्त रौशनी हो रही थी. लेकिन ट्रेन के प्लेटफोर्म को छोड़ते ही पुरे ट्रेन में घना अँधेरा छा गया. हम दोनों अकेले ही थे. करीब आधे घंटे के बाद ट्रेन एक सुनसान जगह खड़ी हो गयी. यहाँ पर कुछ दिन पूर्व ट्रेन में डकैती हुयी थी. पूरी ट्रेन में घुप्प अँधेरा था और आसपास भी अँधेरा था. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

हम दोनों को डर सा लग रहा था. पापा ने मुझसे कहा – बेटी एक काम कर. ऊपर वाले सीट पर सो जा. मैंने कम्बल निकाला और ऊपर वाले सीट पर लेट गयी. लेकिन ट्रेन लगभग १५ मिनट से उस सुनसान जगह पर खड़ी थी. तभी कुछ हो हंगामा की आवाज आई. मैंने पापा से कहा – पापा मुझे डर लग रहा है. पापा ने कहा – कोई बात नहीं है बेटी, मैं हूँ ना.

मैंने कहा – लेकिन आप तो अकेले हैं पापा, यदि कोई बदमाश आ गया और मुझे देख ले तो वो कुछ भी कर सकता है. आप प्लीज ऊपर आ जाईये ना. पापा – ठीक है बेटी. पापा भी ऊपर आ गए और कम्बल ओढ़ कर मेरे साथ सो गए. अब मैं उनके और दीवार के बीच में आराम से छिप कर थी. अब किसी को पता भी नहीं चल पायेगा कि इस कम्बल में कोई लड़की भी है. थोड़ी ही देर में ट्रेन चल पड़ी. हम दोनों ने राहत की सांस ली. मैंने पापा को कस कर पकड़ लिया. ट्रेन की सीट कितनी कम चौड़ी होती है आपको पता ही होता है. इसी में हम दोनों एक दुसरे से सट कर लेटे हुए थे. पापा ने भी मुझे अपने से साट लिया और कम्बल को चारो तरफ से अच्छी तरह से लपेट लिया. पापा मेरी पीठ सहला रहे थे. और मुझसे कहा – अब तो डर नहीं लग रहा ना बेटी? मैंने पापा से और अधिक चिपकते हुए कहा – नहीं पापा.

अब आप मेरे साथ हैं तो डर किस बात की? पापा – ठीक है बेटी. अब भर रास्ते हम दोनों इसी तरह सटे रहेंगे. ताकि किसी को ये पता नहीं चल सके कि कोई लड़की भी इस बर्थ पर है. ट्रेन अब धीरे धीरे रफ़्तार पकड़ चुकी थी. पापा ने थोड़ी देर के बाद कहा – बेटी तू कष्ट में है. एक काम कर अपना एक पैर मेरे ऊपर से ले ले. ताकि कुछ आराम से सो सके. मैंने ऐसा ही किया. इस से मुझे आराम मिला. लेकिन मेरा बुर पापा के लंड से सटने लगा. ट्रेन के हिलने से पापा का लंड बार बार मेरे बुर से सट जा रहा था. अचानक पापा ने मेरे चूची को दबाना चालू कर दिए. मैंने शर्म के मारे कुछ नहीं बोल पा रही थी. हम दोनों के मुंह बिलकुल सटे हुए थे. पापा ने मुझे चूमना भी चालू कर दिया. मैं शर्म के मारे कुछ नहीं बोल रही थी. पापा ने मेरी सलवार का नाडा पकड़ा और उसे खोल दिया और कहा – बेटा तू सलवार खोल ले.

मैंने सलवार खोल दिया. पापा ने भी अपना पायजामा खोल दिया. अब पापा ने मेरी पेंटी में हाथ डाला और मेरी चूत के बाल को खींचने लगे. मैंने भी पापा के अंडरवियर के अन्दर हाथ डाला और पापा के तने हुए 6 इंच के लौड़े को पकड़ कर सहलाने लगी. आह कितना मोटा लौड़ा था… मुठ्ठी में ठीक से पकड़ भी नहीं पा रही थी. पापा ने मेरी पेंटी को खोल कर मुझे नग्न कर दिया. फिर अपना अंडरवियर खोल कर मेरे ऊपर चढ़ गए. मेरे चूत में ऊँगली डाल कर मेरे चूत का मुंह खोला और अपना लंड उसमे धीरे धीरे घुसाने लगे. मैं शर्म से मरी जा रही थी. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है  

लेकिन मज़ा भी आ रहा था. पापा ने मेरे चूत में अपना पूरा लौड़ा घुसा दिया. मेरी चूत की झिल्ली फट गयी. दर्द भी हुआ और मैं कराह उठी. लेकिन ट्रेन की छुक छुक में मेरी कराह छिप गयी. पापा मुझे चोदने लगे. थोड़े देर में ही मेरा दर्द ठीक हो गया और मैं भी चुपचाप चुदवाती रही. करीब 10 मिनट की चुदाई में मेरा 2 बार झड गया. 10 मिनट के बाद पापा के लौड़े ने भी माल उगल दिया. पापा निढाल हो कर मेरे बगल में लेट गए. लेकिन मेरा मन अभी भरा नहीं था. मैंने पापा के लंड को सहलाना चालू किया.

पापा समझ गए कि उनकी बेटी अभी और चुदाई चाहती है. पापा – बेटी, तू क्या एक बार और चुदाई चाहती है. मैंने – हाँ पापा.. एक बार और कीजिये न..बड़ा मजा आया.. पापा – अरे बेटी, तू एक बार क्या कहे मैं तो तुझे रात भर चोद सकता हूँ. मैंने – ठीक है पापा, आप की जब तक मन ना भरे मुझे चोदिये. मुझे बड़ा ही मज़ा आ रहा है. पापा ने मुझे उस रात 4 बार चोदा. सारा बर्थ पर माल और रस और खून गिरा हुआ था. सुबह से साढ़े तीन बज चुके थे. पांचवी बार चुदाई के बाद हम दोनों नीचे उतर आये. मैंने और पापा ने अपने पहने हुए सारे कपडे को बदल लिया और गंदे हो चुके कपडे और कम्बल को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया. आप लोग यह कहानी adultstories.co.in पर पढ़ रहे है

मैंने बोतल से पानी निकाला और मुंह हाथ साफ़ कर के बालों में कंघी कर के एकदम फ्रेश हो गयी. पापा ने मुझे लड़की से स्त्री बना दिया था. मुझे इस बात की ख़ुशी हो रही थी कि यदि मेरे कौमार्य को कोई पराया मर्द विवाह पूर्व भाग करता और पापा को पता चल जाता तो पापा को कितनी तकलीफ होती. लेकिन जब पापा ने ही मेरे कौमार्य को भंग कर मुझे संतुष्टि प्रदान की है तो मैं पापा की नजर में दोषी होने से भी बच गयी और मज़ा भी ले लिया. यही सब विचार करते करते ठीक पांच बजे हमारा स्टेशन आ गया और हम ट्रेन से उतर कर घर की तरफ प्रस्थान कर गए. घर पहुँचने पर मौका मिलते ही पापा मुझे चोद कर मुझे और खुद को मज़े देते थे

जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

मुझे इस बात का कभी अंदाजा नहीं था कि मैं कभी अपने जेठ जी के साथ सेक्स करुँगी. वो तो मेरे पति से भी अच्छा चोदते हैं. चलिए आपको अपनी कहानी बताती हूँ. ये मेरी जिंदगी के बहुत यादगार कहानी है. मैं आशा करती हूँ कि आपको मेरी ये कहानी पसंद आएगी.
जेठ जी ने मुझे तेल लगाकर चोद दिया

मैं शहर में रहती हूँ इसलिए मैं बहुत बार अपने पड़ोस की औरतों के साथ बाजार करने और ब्यूटीपार्लर जाती रहती हूँ. जब भी मैं उनके साथ जाती थी तो वो औरतें मेरे जेठ जी के बारे में बहुत बातें करती थी. जेठ जी नाम अमन है लेकिन मैं उनका नाम नहीं ले सकती हूँ क्योंकि मैं उनको जेठ जी बुलाती हूँ.

उनका पर्सनालिटी थोड़ा अच्छा है इसलिए वो हमारे घर के एक प्रकार से मालिक की तरह रहते हैं. यहाँ तक कि मेरे पति भी उनसे पूछ कर ही कोई काम करते हैं और मैं भी उनसे पूछ कर ही घर से बाहर जाती हूँ.

जेठ जी के बारे में पड़ोस की औरतों से सुनकर मुझे ये लगता था कि उनका चक्कर मेरे जेठ जी के साथ चलता है. लेकिन उनमें से कोई भी खुलकर कुछ नहीं बताती थी.म मुझे भी अपने जेठ जी में रूचि आने लगी थी.

मेरी जेठानी कुछ दिन के लिए अपने माइके गयी हुई थी. उनकी माता जी की तबियत ठीक नहीं थी.

बाद में पता चला कि जेठानी जी कुछ दिन और अपने मायके रुकेंगी. मेरे पति तो सुबह ही ऑफिस के लिए निकल जाते थे.

मैं जेठ जी को खाना खिलाती थी. जेठ जी के कपड़े कभी कभी मुझे साफ़ करने पड़ते थे.

जेठ जी देर से खाना खाते थे तो मैं उनके रूम में खाना लेकर जाती थी.

उनकी बॉडी अच्छी है. कभी कभी जेठ जी को देख कर मेरे अन्दर कुछ कुछ होने लगता था..

और वो भी कभी कभी मुझे देखकर मुस्कुरा देते थे.

इसका अंदाजा मुझे था कि जेठजी के लंड का साइज़ मेरे पति से बड़ा होगा क्योंकि वो शरीर से ताकतवर हैं

जेठ जी की आँखें भी कुछ कहना चाहती थी क्योंकि जब भी मैं उनको देखती थी और वो मुझे देखते थे तो लगता था कि वो मेरे से कुछ कहना चाहते हैं लेकिन मुझसे खुलकर कह नहीं पाते थे.

मैं रात को साड़ी निकाल कर नाइटी में सोती हूँ और इस ड्रेस में जेठ जी के सामने नहीं जाती हूँ.

एक दिन जेठ जी थोड़ा ज्यादा काम करके आ गए थे और उनके सर में दर्द हो रहा था.

वो मुझे अपने कमरे में बुलाने लगे और मेरे से दवाई मांगने लगे.

मैं एक टेबलेट लेकर उनके रूम में गयी और उन्होंने मुझे नाइटी में देख लिया. उनको मेरी चूची का साइज़ पता चल गया होगा.

मुझे बाद में याद आया कि मैं नाइटी में हूँ तो जल्दी से अपने रूम में आ गयी.

उस दिन के बाद से जेठ से मुझे अलग निगाहों से देखने लगे.

जेठ जी और मैं एक दिन घर में अकेले थे और मेरे पति ऑफिस गए थे.

मैं कपड़े धो रही थी और पीछे से जेठ जी मुझे देख रहे थे; ये बात मुझे पता नहीं थी.

आज वो मजाकिया अंदाज में मेरे से बात करने लगे.

मैं कपड़े धोने में व्यस्त थी तो उनकी तरफ देख नहीं रही थी लेकिन उनकी बातें सुनकर हंस रही थी.

हम लोगों की बातें चलती रही.

और जेठ जी बोलने लगे- तुमको तो कपड़े धोते धोते थकान हो जाती होगी. तुम कहो तो मैं तुम्हारी मालिश कर दूँ?

ये बात सुनकर मुझे ये बात मालूम हो गया कि जेठ जी मुझे पसंद करते हैं.

मैं कपड़े धो रही थी तो जेठ जी पीछे से मेरी गांड देख रहे थे.

पति जी भी ऑफिस के काम में बहुत बिजी थे तो हम लोग सेक्स कम ही कर पाते थे.

मैं कपड़े धोने के बाद सुखाने के लिए छत में लेकर जाने लगी तो जेठ जी ने मेरे हाथ से बाल्टी ले ली और वो छत पर कपड़े सुखाने के लिए चले गए.

उनका हाथ और मेरा हाथ पहली बार एक दूसरे से मिला था. जब वो मेरे हाथ से बाल्टी जबरदस्ती ले रहे थे तो हम दोनों लोग का हाथ एक दूसरे से मिल रहे थे.

मैं रसोई में काम करने चली गयी और जेठ जी कपड़े सुखाने के बाद रसोई में आ गए और पीछे से मेरी पीठ को सहलाने लगे.

इससे पहले कि मैं कुछ उनसे कहती कि वो मेरे पीठ को और कंधों की मालिश करने लगे और कहने लगे- तुमने इतने सारे कपड़े धोये हैं, थक गई होगी.

मैं भी थक गई थी और उनके मालिश से मुझे बहुत आराम मिला.

तो मैं उनके बाँहों में आ गई थी और वो पीछे से मेरी मालिश कर रहे थे.

हम दोनों गर्म होने लगे थे. घर में कोई नहीं था इसलिए हम दोनों को किसी बात का डर नहीं था.

जेठ से मालिश करते हुए मुझे अपने कमरे में ले गए और मेरी चूची को दबाने लगे.

मैं भी मूड में आ गयी और सिसकारियाँ लेने लगी.

वो मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरी चूची को दबा रहे थे.

मैं भी उनके बालों को खींच रही थी.

उन्होंने मेरी साड़ी को निकालना शुरू किया.

मेरे मुंह से कामुक आवाजें निकल रही थी.

मेरी इन मादक आवाजों से जेठ जी भी मूड में आ रहे थे. वो मेरी साड़ी को निकाल रहे थे और साथ ही मेरी गांड को दबा रहे थे.

मुझे ये बात पता भी नहीं चली कि मैं जेठ जी के साथ ये सब कर रही हूँ. हम दोनों लोग का रिश्ता ही बदल गया था.

उन्होंने मेरी साड़ी को निकल दिया और उसके बाद उन्होंने मेरी ब्लाउज को निकाल दिया.

मैं उनके सामने ब्रा में आ गयी थी और उसके बाद जेठजी ने मेरा पेटीकोट भी निकाल दिया.

अब मैं जेठ जी के सामने ब्रा और पेंटी में थी.

मुझे नंगी देख कर उनका लंड उनकी पैन्ट में खड़ा होने लगा. मैं ब्रा और पेंटी में बहुत सेक्सी लग रही थी.

जेठ जी के लंड को देखकर मेरी चूत में पानी आने लगा.

तभी उन्होंने मेरी ब्रा निकाल दिया और मेरी चूची को अपने हाथों में लेकर मसलने लगे.

मेरे अन्दर इतना सेक्स आ गया था कि मैं जोर जोर से सिसकारियाँ लेने लगी.

वो मेरी चूची को दबाते हुए उसको अपने मुंह में लेकर चूसने लगे.

हम दोनों की वासना बढ़ती जा रही थी.

जेठ जी चूची को बहुत देर तक चूसने के बाद वो मुझे चुम्बन देने लगे.

हम दोनों एक दूसरे की बाँहों में थे.

जेठ जी ने मुझे बताया कि उनकी पत्नी मायके गई हुई है इसलिए वो अपने लंड को हिलाकर शांत करते हैं.

इधर मेरे पति को अपने काम से फुर्सत ही नहीं मिलती है मुझे चोदने के लिए … इसलिए मैं आज उनके बड़े भाई के सामने थी.

मुझे अपने जेठ जी का लंड बड़ा लग रहा था.

जेठ जी ने बातों बातों में मुझे बताया कि वो मुझे कई दिनों से चोदना चाहते थे.

हम दोनों लोग बात करते करते हंसने लगे और एक दूसरे को चुम्बन देने लगे.

जेठ जी ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी पीठ को चूमने लगे.

मैं सिसकारियाँ लेने लगी. मेरी कामुक आहें निकलने लगी.

फिर जेठ जी ने मेरी पेंटी भी निकाल दी और मैं उनके सामने एकदम नंगी हो गयी थी.

उन्होंने मेरी पीठ को चूमने के बाद मुझे सीधा लिटाया और मेरी बड़ी बड़ी चूची को अपने मुंह में लेकर चूसने लगे.

मेरी चूत गीली हो गयी. मेरी चूत से पानी निकल रहा था और मोटे लम्बे लंड का इंतजार कर रही थी.

उनके चूची मसलने और चूसने के अंदाज मैं बहुत गर्म हो गयी थी और सिसकारियाँ लेने लगी थी- आह उह्ह … आह उह्ह जेठ जी … आराम से करिए

जेठ जी भी कामुक हो गए थे और वो अपने कपड़े निकलने लगे.

उनका मोटा लम्बा लंड देख कर मैं डर गई लेकिन मुझे सेक्स करने की आदत थी इसलिए बाद में मुझे अच्छा लगने लगा.

जेठ जी के लंड को मैं हिलाने लगी और वो अपने मजे में सिसकारियाँ लेने लगे.

उनका लंड मैं जोर जोर से हिलाने लगी और उनके लंड से पानी निकलने लगा.

जेठ जी ने मुझे अपना लंड चूसने के लिए कहा और मैं उनका लंड मुंह में लेकर चूसने लगी.

मेरे लंड चूसने के स्टाइल से उनको बहुत मजा आ रहा था.

अब जेठ जी मेरी चूत को चाटना चालू किये और मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

मैं सिसकारियाँ लेने लगी.

जेठ जी मेरी चूत को चाटने लगे और साथ में रुक रुक कर मेरी चूत को अपने दाँतों से हल्का हल्का काट रहे थे.

इससे मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था.

वे मेरी चूत में उंगली करने लगे जिससे मेरी चूत से पानी निकलने लगा.

उनके लंड से लार टपक रहा था और मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

जेठ जी दुबारा से मुझे अपना लंड चूसने के कहे और मैं उनका लंड चूसने लगी और इस तरह से उनके लंड से पानी निकल गया.

उसके बाद मैं उनके लंड को हिलाने लगी और उनका लंड दोबारा पूरा खड़ा हो गया था.

जेठ जी को सेक्स का बहुत अनुभव था. वो अपने लंड को मेरी चूत पर रखकर रगड़ने लगे जिससे मुझे सिहरन होने लगी.

वो मेरी चूत पर अपना लंड रगड़ने के बाद मेरे होंठों को चूसने लगे.

जेठजी अपना लंड मेरी चूत में डालने लगे और मेरी चूत में उनका लंड चला गया. जिससे मैं कामुक हो गयी और आहें भरने लगी.

वो मेरी चूत को अपने लंड से चोद रहे थे, मैं उनसे चुदवा रही थी और वो मेरी चूत में धक्का दे रहे थे.

जेठ जी कुछ देर के बाद अपना पूरा लंड मेरी चूत में डालकर चोदने लगे.

इस बार मुझे और भी मजा आ रहा था. उनका पूरा लंड मेरी चूत में जा रहा था जिससे मैं चिल्लाने लगी.

उनका लंड बहुत बड़ा था. मुझे चुदवाने में मजा भी आ रहा था और दर्द भी हो रहा था.

मैं चिल्लाने लगी और वो चोदने लगे.

वो मेरे होंठ को चूसने लगे जिससे मैं शांत हो गयी और वो मेरी चूत को चोदने लगे.

उनकी चुदाई से मुझे बहुत अच्छा लगा.

हम दोनों का जिस्म पसीने से भीग गया था. वो बहुत ताकत से मुझे चोद रहे थे. उनका पूरा लंड मेरी चूत के अन्दर जा रहा था. मेरी चूत से पानी निकल रहा था.

उनका लंड मेरी चूत के अन्दर बाहर हो रहा था और कभी कभी वो मेरी चूत में लंड डालकर मुझे चुम्बन दे रहे थे.

सेक्स में जेठजी का अनुभव बहुत अच्छा है.

इतनी अच्छी चुदाई से मैं आज बहुत खुश हो गयी.

घर में कोई नहीं था इसलिए खुलकर मैं और मेरे जेठ जी चुदाई कर रहे थे. हम दोनों लोग चुदाई करते हुए झड गए.

कुछ देर के बाद जेठ जी ने चुदाई का तरीका बदल दिया, वे मुझे पीछे से चोदने लगे.

वो मेरी कमर पकड़ कर अपना लंड मेरी चूत में डालकर चोदने लगे.

कभी कभी वो अपने जीभ से मेरी चूत चाट ले रहे थे.

उनको कई तरीके से चुदाई करने आता था.

हम दोनों एक बार झड़ने के बाद बहुत देर तक आपस में चूमाचाटी करते रहे.

इस बार मैंने उनके ऊपर आकर भी मजे किये.

साथ में हम दोनों लोग बीच बीच में एक दूसरे के गुप्तांग भी सहला रहे थे.

इसके बाद जेठ जी का लंड खडा हो गया और उन्होंने मुझे दोबारा छोड़ना शुरू किया.

इतनी अच्छी चुदाई के बाद मैं दुबारा झड़ गयी.

हम दोनों सेक्स करने के बाद एक दूसरे की बांहों में ही सो गए.

थोड़ी देर बाद जेठ जी को सोता छोड़ मैंने अपने कपड़े पहन लिए और रसोई में काम करने चली गयी.

तब से मेरे पति के ऑफिस जाने के बाद दोपहर में हम दोनों जेठ बहू सेक्स करने लगे थे.

अब जेठानी जी आ गयी हैं तो हमारी चुदाई रुक गयी.

अब तो जब जेठ जी मुझे छोड़ेंगे तो आपको बताऊंगी.


 

मकान मालिक की कुंवारी बेटी की चुदाई,मकान मालिक की अविवाहित बेटी की चुदाई

मेरे मकान मालिक वहीँ रहते थे। उनका दो मंजिल का घर था और उन्होंने मुझे ऊपर वाला कमरा किराये पर दे दिया। मेरा मकान मालिक बहुत ही अच्छा था। उसके घर में वो पति – पत्नी और उनकी एक 19 साल की बेटी और 10 साल का बेटा रहते थे। मकान मालिक कोई सरकारी जॉब करते थे तो वो हमेशा दिन के समय घर से बाहर रहते थे।मैंने अपना सारा सामान सेट करके अपनी पहली दिन के क्लास के लिए निकल गया। जब मै वहन पहुंचा तो पहले से ही क्लास चल रही थी। मै बाहर ही बैठ गया। कुछ देर बाद बच्चे धीरे धीरे आने लगे। कुछ देर बाद अक लड़का आया, वो मेरे ही बगल में बैठ गया। कुछ देर बाद मेरी उससे दोस्ती हो गई।

मकान मालिक की अविवाहित बेटी की चुदाई


उसने अपना नाम सुनील बताया। उसके बोलने और ओके बात करने के स्टायल से लग रहा था कि वो पढने में तेज है। हम लोग वहां इंतजार ही कर रहे थे कि कुछ देर बाद एक लड़की आई और सुनील से बात करने लगी। वो दिखने में बहुत ही मस्त थी। बिल्कुल पटाका लग रही थी। उसको देखने के बाद मेरे मुह में तो पानी आ गया था। जब वो चली गयी तो मैंने सुनील से पूछा ये कौन थी??  तो उसने कहा – “यार ये मेरी क्लासमेट थी”। बस उसके साथ में दोस्ती है। मैंने सुनील से कहा – दोस्त या उससे बढकर ?? तो उसने कहा – “ऐसी कुछ बात नही है बस दोस्ती ही है”।

कुछ देर बाद हमारा क्लास शुरु ही गया। हमारे उस बैच में बहुत सी लड़कियां थी। अगर थोडा भी ध्यान भटक जाये तो तुम पढ़ नही सकते थे। उसमे में तो बहुत से लड़के केवल सिटीयाबाज़ी  करने आये थे। मै अपने दोस्त सुनील के साथ में ध्यान से पढ़ रहा था। हम दोनों का ध्यान केवल पढाई पर ही था। कोचिंग का पहला दिन काफी अच्छा था। जब क्लास छूटी तो मै और सुनील दोनो साथ में ही बात करते निकल रहे थे। जब बाहर निकले तो सुनील की दोस्त फिर से मिल गई। उसके उससे पूछा ये कौन है?? तो उसने कहा – “ये हिमांशु है मेरा नया दोस्त आज ही मिले है”।

उसकी दोस्त ने मुझसे हाथ मिलाया और अपना नाम ज्योति बताया। कुछ देर बाद वो चली गई। मै भी घर चला आया। वहां से आने के बाद मैंने थोडा सा खाना अपने बनाया और खाया। खाना खाने के बाद मै पढने के लिए बैठ गया। 3 घंटे पढने के बाद जब मै थोडा थक गया तो मैंने सोचा कुछ देर बाहर घूम लेता हूँ उसके बाद फिर पढता हूँ। मै घूमने के लिए छत पर चला गया। कुछ देर बाद जब मै वापस आया तो मैंने देखा ज्योति मकान मालिक से घर में चली गई। मै जान गया कि ये यहीं रहती है।   लेकिन उसे नही पता था। धीरे धीरे हमारी दोस्ती और भी ज्यादा हो गई। मेरे ग्रुप में मै सुनील और ज्योति 3 लोग रहते थे।

 

मकान मालिक की कुंवारी बेटी की चुदाई


एक दिन मैंने सोचा इसको बता दूँ की मै वहीँ तुम्हारे घर में ही रहता हूँ लेकिन मैंने सोचा सामने आकर बताऊंगा। कोचिंग के बाद मै घर चला आया। ज्योति भी घर आ गयी, मैंने नमक मांगने के बहाने से उसके घर गया और दरवाज़ा खटखटाया तो मकान मालकिन ने कहा – बेटी ज्योति देखना तो कौन आया है?? उसने जब दरवाज़ा खोला तो कहा – तुम यहाँ क्या कर रहे हो। मैंने उससे कहा – “मै तो नमक मांगने आया था”।

ये तुम्हारा घर है क्या ?? मुझे तो पता ही नही था मै इतने दिनों से यहीं पर रह रहा हूँ। कुछ देर में उसकी मम्मी आ गई। मैंने उनसे नमस्ते कहा और कहा – आंटी जी थोडा सा नमक मिल जायेगा। तो उन्होंने कहा – “क्यों नही बेटा अभी देती हूँ”। उन्होंने कहा – ज्योति तुम यहाँ क्या कर रही हो?? तो उसने कहा मम्मी ये मेरे दोस्त है मेरे साथ में पढता है। कुछ देर बात करने के बाद मै नमक लेकर वहां से चल आया। उसके बाद मेरी ज्योति से और भी तगड़ी दोस्ती हो गई। अब तो वो दिन में मेरे साथ में ही पढने के लिया आ जाया करती थी। ये चुदाई कहानी आप adultstories.co.in पर पड़ रहे है।

मुझे अभी भी वो दिन याद है, रविवार का दिन था मै केवल कटिग वाली चड्डी पहने हुए पढ़ रहा था और ज्योति के बार में कुछ गन्दी बातें सोच रहा था, कि इतने में वो आ गई। मेरा लंड खड़ा था और वो सामने आ गई  मुझे तो शर्म आ गई मैंने जल्दी से एक कपडे से अपने लंड को ढक लिया। मैंने उससे कहा जरा थोड़ी देर के लिए अपना मुह उधर करो मै पेंट पहन लूँ। उसने मुह उधर कर लिया लेकिन वो हंस रही थी। मैंने जल्दी से पेंट पहन ली।  मैंने कहा – अब देख सकती हो।  वो हस रही थी मैंने उससे कहा यार इसमें हंसने वाली कौन सी बात है। मै बैठ गया और वो भी मेरे ही बगल में बैठ गई। मेरा लंड उसके बारे में सोच कर खड़ा था, वो बहुत हॉट लग रही थी।

मेरा मन उसको चोदने को कर रहा था। मुझे थोडा डर लग रहा था कैसे कहूँ। कुछ देर बाद बातो ही बातो मैंने अपना उसके जांघ पर रख दिया। मेरा तो पूरा मूड था उसको चोदने का लेकिन अगर ज्योति तैयार हो जाती तो मज़ा आ जाता, मैंने सोचा। कुछ देर बाद मैंने अपने हाथो को उसकी पैरो पर से हटाने लगा , तो ज्योति ने बड़े जोश में मुझसे कहा – अपना हाथ मत हटाओ मुझे अच्छा लग रहा है।  मै समझ गया कि ज्योतो भी आज मूड में है। मैंने अपने हाथ को ज्योति के जन्घो पर सहलने लगा। और मै उसको किस करने के लिए धीरे धीरे उसके होठो की तरफ बढ़ने लगा। वो भी मेरे होठो की तरफ बढ़ने लगी। और हम दोनों एक दुसरे के होठो के पास पहुँच गए और मैंने उसके होठो को चूमना शुरु कर दिया।

 

उसने भी मेरे होठो को अपने होठो से चूमती हुई मेरे होठो को अपने मुह में भर लिया और मेरे होठो को पीने लगी मैंने भी उसको अपने बांहों में भर लिया और कास के उसके होठो को पीने लगा। हम दोनों एक दुसरे से लिपटे हुए थे, और बड़े जोश से एक दूसरे के होठो को पी रहे थे। कुछ देर बाद मैंने उसको किस करना बंद कर दिया और मैंने उससे कहा – यार जो पहले कहना चाहिए था वो बाद में कहने जा रहा हूँ। “I LOVE YOU SO…. MUCH BABY” उसने भी मुझे I LOVE YOU 2 बोल दिया।

ज्योति का मन था की मै उसकी चुदाई भी करूँ लेकिन मैंने ऐसा कुछ नही कहा उससे। तो उसने खुद ही मुझे अपने बाँहों में भर कर मेरे लंड को सहलाते हुए मुझसे कहा – “तुम और कुछ नही करना चाहोगे”। मै समझ गया उसका इशारा। मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और अपने कमरे के दरवाज़े को बंद कर लिया। मैंने पहले तो ज्योति के बदन को कपड़ो के ऊपर से चूमते हुए उसके मम्मो को दबाया और फिर मैंने उसके सरे कपड़ो को एक एक करके निकल दिए। और मैने भी अपने कपड़ो को निकल दिया। अब ज्योति ब्रा और पैंटी में और मै अपनी कटिंग वाली चड्डी में।

मैंने ज्योति के मम्मो को मसलते हुए उसके ब्रा को निकल दिया और उसके गोर गोर और काफी मुलायम चूचियो को अपने दोनों हाथो से पकड कर मसलने लगा और साथ में ही उसकी दूध को भी पीने लगा। मै नुकीली बेहद कमसिन चूचियों को मुँह में भरके पीने लगा। ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मुझे मज़ा आ रहा था मै उसके  नुकीली छातियों को दांत से काट रहा था और पी भी रहा  था, जिससे उसे दर्द भी हो रहा था, उतेज्जना भी हो रही थी और मजा भी  आ  रहा था।  जब मै उसके छातियो को मसलते हुए पी रहा था तो ज्योति आह आह्ह अहह उफ़ उफ़ उफ् आराम से मेरी नारियल जैसे चूचियो को चुसो आराम से   ओह ओह  करके सिसक रही थी। हम दोनों को मज़ा आ रहा था।

बहुत देर तक उसके चूचियो को पीने के बाद मैने धीरे धीरे मै उसकी चूत की तरफ आकर्षित होते हुए मै उसके कमर चूमते हुए उसके नाभि को पीने लगा और कुछ ही देर मै और ज्योति दोनों बहुत ही जोश में आ गए और वो अपने चूचियो को जल्दी जल्दी मसलने लगी और मै उसके कमर को पीते हुए अपने हाथो को उसकी चूत के ऊपर फेरने लगा। कुछ ही देर में मै जोश से पागल होने लगा। मेरे अंदर एक अजीब सी बैचैनी होने लगी। मैने जल्दी से ज्योति के पैंटी को धीरे से निकाल दिया, और मै अपने हाथो की उंगलियो से उसकी चूत को सहलाते हुए मैंने उसके टांगो को फैला दिया और अपने मुह को उसकी चूत में लगा कर उसकी चूत को पीने लगा। मैं अपने जीभ से उसकी चूत के दाने को बार बार चाट रहा था और ज्योति जोश से सिसक रही थी।

 

बहुत देर तक उसके चूत को पीने के बाद मैंने अपने लंड को बाहर निकाल, मेरे लंड को देख कर ज्योति का मन मेरे लंड को चूसने का था लेकिन मै इतने जोश में आया गया था की मै अपने आप को उसकी चुदाई करने से रोक नही पाया। मैंने अपने लंड को उसकी बुर पर जोर जोर से पटकते हुए धीरे से अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया। जब मेरा लंड उसकी चूत में गया तो ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरे लंड पर कोई गर्म चीज रख दी है। उसकी चूत बहुत गर्म थी। मै अपने लंड को उसकी चूत में धीरे धीरे डालने लगा। उसकी चूत की गर्मी मेरे लंड के अंदर जा रही थी। और धीरे धीरे मेरे चोदने की रफ़्तार बढ़ने लगी। मै तेजी से उसकी चूत को चोदने लगा।

मेरा लौडा ज्योति चूत के अंदर तक जा रहा था., ऐसा लग रहा था कि मेरा लंड किसी गड्डे में जा रहा है। लेकिन उसकी चूत के किनारे पर मेरे लंड की रगड़ से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और ज्योति तो जैसे जैसे मै तेजी से चोदता तो वो तेजी से ..आह उम् उम उम उम्म्म्म ओह ओह ओह ऊह्ह्ह्हह्ह्ह उह्ह्ह्ह हा हा हां  सी सी सी सीईईईईईईइ. उफ़ उफ़ उफ़ फफफफफ मम्मी मामी आह अहह ह्ह्होह उनहू उनहू उनहू उनहू  आराम से अह्ह्ह अहह ..अह हहह हहह .. प्लीसससससस प्लीसससससस,  उ उ उ उ ऊऊऊ  ऊँ..ऊँ   माँ माँ ओह माँ करके चीख रही थी।

लगातार 50 तक चोदने के बाद जब उसकी चूत रमा हो गई तो उसको भी मज़ा आने लगा। और छोड़ो और तेजी तेजी से मज़ा आ रहा है और भी तेज अहह अहह हा  करके मुझे और तेज चोदने के लिए मजबूर कर रही थी। ये चुदाई कहानी आप हॉट सेक्स कहानी डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैंने और भी तेजी से उसकी चोदने शुरु कर दिया। जिससे उसकी चूत तो फटने लगी थी और वो जोर जोर से चीखने लगी। कुछ ही देर में मेरा माल निकलने वाला था। ,मैंने जल्दी से उसकी चूत से अपने लंड को बहर निकाल लिया और उसके दोनों पैरो के पंजो के बीच में अपने लंड को रख कर उसके पैरो के बीच  में पेलने लगा। कुछ ही देर में मेरे लंड से सफ़ेद वार्य निकलने लगा। उसके कुछ ही देर बाद मेरा लंड ढीला हो गया।

ज्योति को चोदने के बाद भी मैंने उसकी चूचियो को दबा कर खूब पिया और साथ में उसके चूत उंगली कर कर के उसकी चूत का पानी भी निकाल लिया।  उसकी चुदाई करने में मुझे बहुत मज़ा आया क्योकि बहुत दिनों बाद चूत के दर्शन हुए थे। उस दिन के बाद मै और ज्योति दोनों ने साथ में बहुत बार सेक्स किया। मै तो उसको इतनी बार चोद चूका था की मेरा तो अब उसको चोदने का मन भी नही करता था लेकिन उसके कहने पर उसको चोदना ही पड़ता था। कैसी लगी अविवाहित जवान लड़की की चुदाई , अच्छा लगी तो जरूर रेट करें और शेयर भी करे ,अगर कोई मेरी मकान मालिक के की बेटी चुदाई करना चाहते हैं.

फूफाजी ने मेरी कुंवारी चूत को चोदकर सील तोड़ी

फूफाजी ने मेरी कुंवारी चूत को चोदकर सील तोड़ी


मैं एक गांव की रहने वाली लड़की हूं मैं अभी 19 साल की हूँ। मेरे घर में मेरे मां-पापा, एक भाई और मेरी दो बहने हैं। पापा फलों की दुकान चलाते हैं और मम्मी घर का काम करती है। मां फ्री टाइम में पापा की दुकान पर मदद करती हैं।
ये बात आज से साल भर पहले की है। उस वक्त तक मैंने किसी के साथ सेक्स संबंध नहीं बनाए थे। मैंने अपनी एक सहेली से ये तो सुना था कि मर्द और औरत का मिलन किस तरह होता है, लड़की की जवानी की चुदाई होती है.
मगर मैंने अभी तक न तो किसी लड़के का लण्ड देखा था और न ही मुझे असल में पता था कि जब लण्ड चूत में जाता है तो कैसा अनुभव होता है। लेकिन मेरा मन बहुत करता था कि मेरा भी एक बॉयफ्रेंड हो।
मैं भी चाहती थी कि किसी के साथ बाहर घूमने जाऊं, मस्ती करूं, सेक्स करूं, अपने बॉयफ्रेंड को प्यार करूं, जवानी की चुदाई का मजा लूं.
इधर मेरी किस्मत ने कुछ और ही खेल खेल दिया मेरे साथ। एक दिन की बात है कि मेरे फूफा जी हमारे घर आ गये। हम लोग लम्बे अरसे के बाद मिल रहे थे। जब फूफाजी ने मुझे गले से लगाया तो मेरे संतरे उनकी छाती से दब गए।
उन्होंने मुझे कस कर बांहों में भर लिया और मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए मुझे कस कर भींच लिया। फिर मुझे छोड़ते हुए बोले- हमारी महिमा हो तो बहुत बड़ी हो गई है। कितनी जल्दी जवान हो गई है।
मेरे घर वाले उनकी इस बात पर मुस्करा दिए। मैं तो शर्मा गई थी।
फिर मैं उनके लिए पानी लाने के लिए चली गयी जब उन्होंने मुझे अपने गले लगाया था तो मेरे बदन में एक बिजली सी दौड़ गई थी। मुझे पहली बार किसी मर्द के शरीर का अहसास मिला था।
उस दिन मुझे पहली बार ये अहसास हुआ कि मर्द के शरीर से चिपक कर कितना मजा आता है।
मेरे फूफा का नाम रंजीत ठाकुर है। वो 45 साल के हैं और बहुत ही ठरकी किस्म के आदमी हैं। मगर देखने में जवान ही लगते हैं।
मैंने फूफा को पानी दिया और बातें करने लगी।
फिर मेरे घरवालों से बात करने के बाद वो मेरे कमरा में आ गये।
हम दोनों में बातें होने लगीं।
मैं बोली- फूफाजी ..... बुआ नहीं आई?
फूफा- अरे महिमा बेटी ..... क्या बताऊँ ..... वो तो आजकल बीमार ही रहती है। कोई काम भी नहीं होता उससे। मेरा तो दिल करता है कि तेरे जैसी किसी जवान लड़की से शादी कर लूं। तुम्हारी बुआ तो अब बजुर्गों में शामिल हो गई है।
मैंने मुस्कराकर कहा- फूफाजी, आप भी तो बुजुर्ग हो गए हैं।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोले- महिमा ..... मैं तो आज भी कुश्ती लड़ सकता हूँ।
फिर वो मेरे करीब आ गये और मेरे कान में बोले- मैं केवल उम्र से बड़ा लगता हूं, मेरे शरीर में ताकत अभी भी 25 साल के लौंडे जितनी है। अगर तुझे यकीन न हो तो कभी आजमाकर देख लेना।
मैं बोली- जाने दो फूफाजी ..... मुझे चाये बनानी है।
फूफाजी बोले- जा बना ले चाय!
फिर मैं चाय बनाने लगी तो फूफाजी मुझे ही देख रहे थे और मन ही मन में मुस्करा रहे थे।
चाये बनाते बनाते मम्मी भी आ गई।
मैं फूफाजी और मम्मी को चाय देकर रसोई में आई।
फिर फूफाजी मम्मी से बाते करने लगे और मैं शाम के खाने की तैयारी करने लगी।
मगर मैं जिधर भी जा रही थी उनकी नजर मेरा पीछा कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरे जवान कसमिन बदन का नाप ले रहे हों।
नजरों ही नजरों में मेरे कपड़ों के भीतर झांकने की कोशिश कर रहे हों।
फिर ऐसे ही शाम हो गई। सब लोग खाना खाने लगे।
इतने में फिर पापा भी आ गये।
फूफा बोले- मैं महिमा को लेने आया था। आपकी बहन की तबियत ठीक नहीं है कई दिनों से। हमने सोचा कि महिमा कुछ दिन रहेगी तो तब तक वो ठीक हो जाएगी।
पापा बोले- अरे रंजीत जी, इसमें पूछने की क्या बात है? आपकी भी बेटी है, आप ले जाइये इसे अपने साथ!
फिर पापा ने कहा- महिमा, कल तुझे अपने फूफा के साथ जाना है ..... तो अभी से अपना सामान पैक कर लेना।
मैंने कहा- ठीक है पापा!
अब रात को सामान पैक करते हुए मेरे मन में अजीब सी गुदगुदी हो रही थी।
मुझे पता था कि फूफा की नजर मेरे बदन पर है। वो मुझे वहां ले जाकर कुछ न कुछ तो जरूर करेंगे।
ये सोचकर मैं मन ही मन रोमांचित भी हो रही थी और थोड़ा डर भी लग रहा था।
सुबह जब मैं उठी तो फूफाजी तैयार थे।
मैं भी तैयार हो गई।
खाना खाकर मैं और फूफाजी बस स्टैंड पर गए।
उन्होंने मेरा बैग उठा लिया था, जैसे पति पत्नी जाते हैं।
रास्ते में वो बोले- महिमा, कुछ चाहिए खाने के लिए बता दे, फिर बस चलने का समय हो जाएगा।
मैंने कहा- नहीं फूफाजी, मुझे अभी तो कुछ नहीं चाहिए।
उसके बाद हम बस में चढ़ गए। बस पूरी भर गई थी।
फूफाजी बैग ऊपर रखकर मेरे पीछे खड़े हो गए।
मैंने सलवार सूट पहना हुआ था और फूफाजी ने लुंगी कुर्ता पहना था। जब बस चलने लगी तो वो मेरे साथ चिपक कर खड़े हो गए।
मैं भी जैसे अनजान बनकर खड़ी रही। कुछ ही देर में मुझे कुछ महसूस होने लगा अपनी गांड पर।
मैं समझ गई कि फूफाजी का लण्ड खड़ा हो गया है। मुझे लण्ड का अहसास बहुत उत्तेजित कर रहा था।
इससे पहले मुझे किसी मर्द के लण्ड की छुअन का अहसास नहीं मिला था।
वो बार बार आगे की ओर हल्का धक्का देते हुए लण्ड को मेरी गांड की ओर धकेल रहे थे जैसे कि मेरी गांड में अपने लण्ड को घुसाना चाहते हों।
मगर लण्ड मेरी गांड की दरार में सेट नहीं हो पा रहा था।
मैंने टांगें हल्की सी खोल लीं और पंजों के बल हल्की ऊपर उठकर उनके लण्ड अपनी गांड की दरार में जगह दे दी। अब फूफाजी का लण्ड मेरी गांड की दरार में सेट हो चुका था।
ऐसा लग रहा था कि यदि मैंने सलवार नहीं पहनी होती तो उनका लण्ड मेरी गांड में ही घुस जाना था।
उनका लण्ड काफी मोटा और लंबा था, मुझे अपनी गांड पर अलग से महसूस हो रहा था।
अचानक बस के ब्रेक लगे तो मैं आगे की ओर गिरने लगी।
फौरन फूफाजी ने मेरे बूब्स पकड़ लिए और मुझे संभालने के बहाने से उनको पकड़ कर भींच दिया।
मेरी आह्ह निकल गई।
वो बोले- थोड़ी संभल कर महिमा, अभी गिर जाती तो?
मैंने बस की छत से लगे पाइप का सहारा ले लिया।
दो मिनट बाद उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रख दिया।
वो अब पूरी तरह मेरे शरीर से चिपके हुए थे। उनकी गर्म सांसें मुझे अपनी गर्दन पर महसूस हो रही थीं।
मैं भी इस वजह से गर्म होती जा रही थी। अबकी बार जब बस में दोबारा ब्रेक लगे तो उन्होंने बहाने से मेरी गर्दन पर चूम लिया।
वो अब लगातार अपने लण्ड को मेरी गांड पर घिस रहे थे और हिलते हुए आगे पीछे हो रहे थे।
ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चुदाई कर रहे हों।
फिर धीरे से मेरे कान में बोले- आज का सफर तो हमेशा याद रहेगा मुझे!
ये सुनकर मैं शर्मा गई।
सफर में 50 मिनट लगे मगर ये 50 मिनट बहुत जल्दी बीत गए।
उसके बाद हम उतर कर उनके घर की ओर जाने लगे।
घर बस स्टैंड से ज्यादा दूर नहीं था।
हम लोग घर पहुंचे तो बुआ हमें देखकर खुश हो गई।
उन्होंने मुझे बैठाया और चाय-पानी के लिए पूछा।
फिर मैं बोली- बुआ, मेरा कमरा कौन सा है।
बुआ ने मेरा कमरा मुझे दिखा दिया।
मैं अपना सामान लेकर जाने लगी तो बुआ ने फूफाजी से कहा- ये इतना भारी सामान कैसे लेकर जाएगी सीढ़ियों से? इसका सामान कमरा में रखवा दीजिए।
वो मेरा सामान लेकर मेरे कमरा में साथ ही आ गये।
सामान रखकर उन्होंने पूछा- तो कैसा लगा महिमा?
मैंने कहा- कमरा तो बहुत अच्छा है।
वो बोले- मैं कमरा की बात नहीं कर रहा।
इससे पहले मैं कुछ और कहती तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रखवा दिया और बोले- ये कैसा लगा?
लण्ड पर हाथ लगते ही मैंने अपने चेहरे को दूसरे हाथ से ढक लिया।
उन्होंने मुझे दोनों हाथों सो गोदी में उठाया और बेड पर ले जाकर गिरा दिया। वो मेरे ऊपर आ गये। मैंने दोनों हाथों से चेहरा छुपा लिया था।
मगर उन्होंने मेरे हाथ हटाकर मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
वो बोले- बता ना ..... कैसा लगा?
वो मेरे होंठों को चूमते रहे
मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैंने उनका साथ देना शुरू कर दिया।
अब उनका लण्ड मेरी चूत में घुसने की कोशिश कर रहा था।
वो बहुत उतावले हो गए और मेरी सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत को अपने हाथ से रगड़ने लग
इतने में ही नीचे से बुआ की आवाज आई तो फूफा एकदम से उठ गए।
फिर बुआ को गाली देते हुए मरे मन से नीचे चले गए।
मैं बहुत खुश हुई।
फूफा मेरे लिए पागल थे और मुझे आज बहुत मजा आया।
ये मेरा पहला अहसास था।
मगर मुझे नहीं पता था कि मेरी चूत आज ही चुदने वाली है।
दोपहर का खाना होने के बाद मैं अपने कमरा में आ गयी थी।
मौका पाकर फूफाजी भी आ पहुंचे।
आते ही उन्होंने कमरा को अंदर से बंद कर लिया और मुझे बांहों में लेकर चूमने लगे।
मैंने कहा- बुआ देख लेगी।
वो बोले- वो पड़ोसन के यहां गई है। एक घंटे से पहले नहीं आने वाली।
इतना बोलकर उन्होंने मुझे बेड पर पटक लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।
मैं भी उनका साथ देने लगी।
एकदम से उन्होंने मेरी सलवार में हाथ डाल दिया।
नहाने के बाद मैंने पैंटी नहीं पहनी थी इसलिए हाथ सीधा मेरी नंगी चूत पर जा लगा।
वो मेरी चूत को रगड़ने लगे।
मैं चुदासी होने लगी।
पहली बार किसी मर्द का हाथ मेरी चूत को रगड़ रहा था।
देखते ही देखते फूफाजी ने मुझे नंगी कर दिया और खुद भी नंगे हो गये।
मुझे उनके सामने नंगी होकर शर्म आ रही थी। मैंने अपने चेहरे को ढक लिया और टांगों को भींचकर चूत को छिपाने लगी।
वो मेरी जांघों को खोलकर मेरी कमसिन चूत को देखने लगे, फिर उसको जीभ से चाटने लगे।
मैं तो एकदम से सिहर गई ..... ऐसा अहसास कभी नहीं मिला था।
फूफाजी अब मेरी चूत को चाटने लगे।
मैं भी मजा लेने लगी, बहुत उत्तेजना हो रही थी।
फिर काफी देर चाटने के बाद मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- बस करो फूफा जी ..... अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा। बहुत तड़प गई हूं। अब कैसे शांत होगी ये प्यास?
वो बोले- अभी कर देता हूं मेरी रानी ..... बस तू घबराना मत! दर्द होगा तुझे लेकिन मेरा साथ देना।
मैंने हां में गर्दन हिला दी और फूफा ने मेरी चूत पर लण्ड टिका दिया।
फिर धीरे धीरे उसको चूत पर रगड़ने लगे।
मैं और ज्यादा तड़पने लगी।
फिर उन्होंने एक धक्का मारा तो जैसे मेरी जान निकल गयी।
उनका लण्ड मेरी चूत में घुस गया।
मुझे ऐसा दर्द हुआ जैसे टांगों के बीच में से किसी ने चीर दिया हो।
मैं छटपटाने लगी तो उन्होंने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया कि कहीं मेरी चीख न निकल जाए।
उन्होंने एक और धक्का मारा तो मेरी फिर से रूह कांप गई। इतना दर्द हो गया कि मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मेरी आँखों में आंसू आ गये। वो मेरे ऊपर लेटे रहे और मुझे चूमते रहे।
कुछ देर तक वो बस लेटे रहे।
फिर जब मेरा दर्द हल्का हुआ तो उन्होंने धीरे धीरे लण्ड को चूत में चलाना शुरू किया।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोई चाकू से मेरी चूत को चीरने के बाद उसके जख्म को कुरेद रहा है।
मगर बाद में फिर जब लण्ड की रगड़ चूत की दीवारों पर लगने का मीठा अहसास हुआ तो मेरा दर्द गायब होता चला गया।
अब मैं चुदने में फूफाजी का साथ देने लगी।
वो तेजी से अब मेरी चूत मारने लगे और मैं उनके नशे में खो सी गई।
दस मिनट की चुदाई के बाद एकदम से उन्होंने मेरी चूत से लण्ड निकाला और मेरे पेट पर अपना गाढ़ा सफेद माल गिरा दिया।
मैंने अपनी चूत को देखा तो वो फट गयी थी, सूजकर लाल हो गयी थी, खून के धब्बे लग गए थे उस पर।
फिर उन्होंने मेरी चूत को साफ किया और फिर नीचे से दर्द की गोली लाकर दी।
कुछ देर के बाद मुझे आराम मिला और फिर मैं सो गई।
वो भी नीचे चले गये।
उस दिन पहली बार मेरे फूफा ने मेरी चूत चोदकर मेरी सील तोड़ी। इस तरह से मेरी चुदाई की शुरूआत हुई। जब तक मैं बुआ के यहां रही तो उन्होंने मुझे खूब चोदा। मुझे भी अब लण्ड का चस्का लग गया था इसलिए मजे मजे में चुदती रही।

 जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी

jiju ke papa ne meri choot ki seal tod di,जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी



देसी अंकल सेक्स स्टोरी मेरी चुदाई की है. मेरी दीदी के ससुर ने मुझे चोद कर मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी. ये सब कैसे हुआ? इस एडल्टस्टोरीज कहानी में पढ़ें.


हाय ऑल! मैं अंजलि प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं अभी 21 साल की हूँ. मैं अभी पिछले 2 महीने से ही एडल्टस्टोरीज की देसी सेक्स कहानी की दुनिया से जुड़ी हूँ.

एडल्ट स्टोरीज की सेक्स कहानियों को पढ़ कर मुझे मानो एक ऐसा पटल मिल गया था, जिधर मैं अपनी सारी बात खुल कर जाहिर कर सकती थी.

मुझे इसमें प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ कर बहुत मज़ा आता है.
चुदाई की बातें पढ़ कर मेरा मन चुदाई के लिए मचलने लगा था जबकि पहले मुझे चुदाई के नाम से ही बहुत डर लगता था.

अब मैं अपनी सहेलियों के बीच सेक्स की बातों को सुनकर काफ़ी मज़े लेती हूँ.

जब मैं कल एक सेक्स कहानी पढ़ रही थी, तो अपनी चुत रगड़ रही थी. उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था.

ये देसी अंकल सेक्स स्टोरी 2 साल पहले की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी. उस समय मैं अपने जीजू के घर गई थी क्योंकि उनके घर पर उस टाइम कोई नहीं रहने वाला था.
चूंकि मेरे जीजू के छोटे भाई की वाइफ को गांव वाले घर में बच्चा हुआ था, तो जीजू दीदी और बच्चे गांव जाने वाले थे.

जीजू के पापा जो लखनऊ में सरकारी नौकरी में थे, वो एक पुलिस स्टेशन में दारोगा थे, तो उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी, इस वजह से वो लखनऊ में ही रह गए थे.

मेरे पापा ने मुझसे कहा- तुम उनके घर लखनऊ चली जाओ, वहां उनके लिए खाना पीना और देखभाल कर लेना.
जीजू और उनकी फैमिली भी यही चाहती थी.

फिर मैं अगले दिन ट्रेन से निकल गई. चूंकि मैं भी अपनी बी.ए के पहले वर्ष के एग्जाम दे चुकी थी, तो बिल्कुल फ्री थी.

जब मैं वहां शाम को पहुंची, तो मेरी तबीयत खराब हो गई थी. ये जून का महीना था और ट्रेन में काफ़ी गर्मी थी, जिस वजह से मुझे कुछ असहज लगने लगा था.

लखनऊ पहुंचते पहुंचते मेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब हो गई थी. तो मेरे जीजू के पापा मुझे अपनी बाइक से डॉक्टर के पास ले गए.
उस दिन जीजू काफी व्यस्त थे और उनको दूसरे दिन सुबह दीदी को लेकर गांव निकलना था.

दोस्तो, अब इधर मैं अपने जीजू के पापा के बारे में कुछ बता देती हूँ. वो बहुत ही हैंडसम हैं. उनकी उम्र लगभग 55 साल की रही होगी. चूंकि वो एक दारोगा थे, तो उनकी बॉडी काफ़ी मजबूत थी और उनकी हाईट भी 6 फिट से कुछ ज्यादा ही थी.

मैं उनके साथ बाइक पर जा रही थी, तभी उन्होंने मुझे अपनी कमर पकड़ने को बोला.
मैंने सहज भाव से अंकल की कमर पकड़ ली.

उनकी कमर पकड़ते ही मुझे कुछ अजीब सा लगा और उनकी बॉडी की मर्दाना सुगंध से मैं मदहोश सी हो गई.

फिर डॉक्टर से चैकअप कराने के बाद मैं वापस घर आ गई.

रात में हम सब खाना खाकर सो गए. अगले दिन मेरे जीजू और दीदी की ट्रेन थी, तो वो लोग भी गांव निकल गए.

अब घर में मैं और मेरे जीजू के पापा ही अकेले रह गए थे. चूंकि मेरी दीदी की शादी के एक साल पहले ही मेरे जीजू की मम्मी की मृत्यु हो चुकी थी और जीजू के भाई और उसकी वाइफ पहले से ही गांव में थे.

दूसरे दिन मैं सुबह 9 बजे सोकर उठी और चाय आदि बनाई.

मैंने जीजू के पापा को चाय दी तो वो बोले- मैं आज शाम को खाना बाहर से ही ले आऊंगा, तो तुम घर पर खाना मत बनाना.
मैंने कहा- ठीक है अंकल.

मैं उनको अंकल जी बुलाती थी. मुझे उनसे बहुत शर्म आती थी, मैं उनके सामने ज्यादा कुछ नहीं बोलती थी.

अगले 7 दिन तक सब कुछ नॉर्मल चला. फिर एक दिन रात में नींद खुली, तो मैंने कुछ आवाज़ सुनी.

जब अपने रूम से बाहर आई, तो देखा कि ये आवाज़ तो अंकल जी के रूम से आ रही है.
तो मैं वहां गई.

उनके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, जब मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.

अंकल जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और एकदम नंगे होकर अपने लंड को हिला रहे थे. उनके एक हाथ में उनकी वाइफ की फोटो थी और फोटो देख कर वो लंड हिला रहे थे.

ये सीन देखकर मैं उधर से भाग कर अपने रूम में आ गई.
उस रात में अंकल जी के बारे में ही सोच रही थी. मेरी सांसें तेज तेज चल रही थीं क्योंकि मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था.

उस दिन से मैं अंकल जी के बारे में ना चाहते हुए भी सोचने लगी.
मैं अपने मन में मानती थी कि ये रिश्ता सही नहीं होगा. लेकिन मेरा मन उनका मोटा लंड देख कर मचल उठा था और मान ही नहीं रहा था.

मुझे उनके बारे में सोच कर बहुत मज़ा आ रहा था. चूंकि मैं अभी तक कुंवारी कमसिन कली थी, तो मुझे काफ़ी उत्तेजना हो रही थी.

इस तरह दस दिन बीत गए. अब मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अंकल जी को पटाकर उनसे अपनी प्यास बुझाऊंगी … आख़िर उन्हें भी एक चुत की ज़रूरत थी.
उनकी वाइफ की डेथ हुए लगभग 6 साल हो चुके थे.

फिर मैं हर दिन कोशिश करने लगी कि अंकल जी के सामने कामुक बन कर रहूँ.
जब वो घर आते तो मैं उनको देख कर स्माइल करती और उनके साथ बाहर घूमने को कहती.

वो भी मुझे अपने साथ बाइक पर बिठा कर ले जाते और मैं भी उनकी कमर पकड कर उनके मर्दाना जिस्म को स्पर्श करके अपने अन्दर की आग को भड़काती रहती.
उधर अंकल जी भी मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़ते हुए महसूस करके मुझे प्यार से देखने लगे थे.

एक रात जब वो घर आए, तो बोले- मैं बहुत थक गया हूँ. जल्दी से नहा लेता हूँ, फिर कुछ देर आराम करूंगा.
मैं हां करके चुप हो गई.

अंकल जी नहाने के बाद अपने रूम में चले गए.

मैं तेल की बोतल लेकर जानबूझ कर उनके शरीर कि मालिश करने चली गई.

वो मुझसे बोले- क्या हुआ?
मैंने कहा- आप थक गए हो, मैं आपकी मालिश कर देती हूँ. आपको आराम मिल जाएगा.

वो मना कर रहे थे.
लेकिन मैंने ज़िद की तो वो मान गए.

वो पेट के बल लेट गए और मैं उनकी पीठ पर तेल टपका कर अपने नर्म मुलायम हाथों से मालिश करने लगी.

उनकी बॉडी एकदम पहलवानों के जैसी थी. मैं उनके जिस्म की तपिश से बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

मैंने अंकल के पूरे शरीर पर अपने हाथों से मालिश की.

अब मैं उनकी टांगों पर पहुंच गई थी. मैंने महसूस किया कि वो अंडरवियर नहीं पहने हुए थे चूंकि अभी नहा कर आए थे.
और उनके मुँह से शराब की महक आ रही थी. अंकल जी ने शराब पी रखी थी.

मैं मुस्कुरा उठी.

मैंने जानबूझ कर अपना एक हाथ उनकी तौलिया के अन्दर कर दिया और उनकी गांड पर मालिश करने लगी. अंकल जी ने भी अपने पैर फैला दिए.

कुछ देर के बाद मेरी चुत बिल्कुल गीली हो गई और ना जाने मुझे क्या हुआ, मैं वहां से जाने लगी.

तभी अंकल जी उठे और उन्होंने मेरे एक हाथ को पकड़ लिया. जब मैं उनकी तरफ मुड़ी, तो वो मुझे अपनी गोद में खींच कर किस करने लगे.
मुझे अजीब सा लगा और मैं उन्हें मना करने लगी, लेकिन वो नहीं माने.

हालांकि मैं खुद भी यही चाहती थी. मैंने अपना विरोध बंद कर दिया और आंख बंद करके उनकी गतिविधियों को महसूस करने लगी.

अंकल जी ने मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने बेड पर लिटा दिया और मुझे किस करने लगे. उनके मुँह से शराब की तेज स्मेल आ रही थी, वो नशे में थे.
आज मुझे ये महक काफी मस्त लग रही थी.

फिर वो अपने एक हाथ से मेरी चुत को दबाने लगे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी … लेकिन चुदने का मन भी कर रहा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया.

फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और ब्रा को अलग कर दिया. अंकल जी मेरे मम्मे चूसने लगे.
वो जोर जोर से मेरे दूध चूस रहे थे, इससे मुझे मीठा मीठा दर्द होने लगा. मुझे बेहद मज़ा भी आ रहा था.

इसके कुछ देर बाद अंकल जी ने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी कमसिन चुत देख कर बोले- तुम अभी वर्जिन हो?
मैं बोली- जी.

तो वो बोले- आज मैं तुम्हारी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा.
मैं शर्मा गई और अपना मुँह उनके सीने में छिपा कर उनसे चिपक गई.

फिर अंकल जी ने अपनी तौलिया हटा दिया और पूरे नंगे हो गए.
मैं उनका लम्बा और मोटा खड़ा लंड देख कर सहम गई लेकिन चूत में चुनचुनी हो रही थी कि बस किसी तरह से इस लम्बे लौड़े से चुद लूं.

अंकल जी मेरी चुत चाटने लगे.
अपनी कुंवारी चुत पर एक मर्द की जीभ का अहसास पाते ही मेरे पूरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया था.

मेरे शरीर में सिहरन होने लगी तो अंकल जी को मजा आने लगा और वो पूरे मनोयोग से मेरी कमसिन चुत का नमकीन पानी चाटते हुए चुत के अन्दर तक जीभ देने लगे.

मैंने अंकल जी से पूछा- मुझे सनसनी सी क्यों हो रही है?
तो वो बोले कि ये तुम्हारा पहली बार है … इसीलिए तुम मस्त हो रही हो.

कोई पांच मिनट तक की चुत चटाई में मैं पूरी तरह से पागल हो गई थी.

अंकल जी अब समझ गए थे कि लौंडिया गर्मा गई है.
उन्होंने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.

अंकल जी ने अपने लंड को मेरी चुत कि फांकों में रखा और रगड़ने लगे.
मुझे मर्द के लंड का अहसास अपनी चुत पर हुआ तो मैं अपनी गांड उठाने लगी.

अंकल जी ने लंड को चुत पर दबाया तो लंड चुत के अन्दर नहीं गया. क्योंकि मेरी चुत का छेद बिल्कुल छोटा सा था और अंकल जी लंड गधे जैसा हब्शी लंड था.

फिर उन्होंने अपने लंड पर एक क्रीम लगाई और चुत में डालने लगे.

मैं बोली- अंकल कुछ प्राब्लम तो नहीं हो जाएगी?
अंकल जी बोले- कुछ नहीं होगा. बस शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. फिर मज़ा ही मज़ा आएगा.

ये कह कर उन्होंने अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया.
अंकल जी का लंड अभी थोड़ा सा ही चुत के अन्दर गया था कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं रोने लगी.

वो रुक गए और मुझे किस करने लगे.
जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो फिर अंकल जी ने एक बार अपनी गांड हिलाई और झटका दे दिया.

इस बार अंकल जी का आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया था. उनके पूरे शरीर का वजन मेरे ऊपर आ गया था.

मैं उनकी बॉडी से दब चुकी थी उनकी जांघें भी काफ़ी मजबूत थीं. वो एक पहलवान मर्द थे.

थोड़ी देर तक अंकल जी मेरे ऊपर चढ़े रहे.
फिर उन्होंने मुझसे पूछा- अब दर्द कुछ कम हुआ?
मैं मरी हुई कुतिया की आवाज में बोली- जी.

उन्होंने फिर से अपनी गांड हिलाई और ताकत से पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
मुझे वो धीरे धीरे चोदने लगे.

कुछ धक्कों के बाद मुझे भी चुदने में मज़ा आने लगा.
अंकल जी समझ गए थे कि अब मुझे मज़ा आ रहा है तो वो अपनी गांड जोर जोर से हिलाने लगे और मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

सच में मुझे मज़ा तो बहुत आ रहा था लेकिन शर्म भी आ रही थी. क्योंकि मैं एक 55 साल के मर्द से चुद रही थी, वो भी मेरे जीजू के पापा से.

करीब दस मिनट तक मुझे चोदने के बाद अंकल जी ने अपना लंड मेरी चुत से निकाल लिया.

मैं भी उठी और देखी कि मेरी चुत से खून निकल रहा था. मैं खून देख कर रोने लगी.

तो उन्होंने मुझे समझाया कि ये सामान्य सी बात है कुंवारी लड़कियों की चुत की सील टूटने के कारण ऐसा होता है. अब तुम एक पूर्ण औरत बन चुकी हो.
मैं शांत हो गई.

फिर उन्होंने मेरी चुत को साफ़ किया. उसके बाद मुझे पेशाब लगी, तो मैं उठ कर जाने लगी.

वो बोले- रूको मैं भी चलता हूँ.

अंकल जी मुझे अपनी गोद में ले गए और उन्होंने भी मेरे सामने पेशाब की. मैंने भी उनके लंड से मूत की धार देखी और खुद भी मूत कर खुद को साफ़ किया.

उन्होंने चाय बनाई और हम दोनों ने चाय पी.

मुझे चलने में बहुत प्राब्लम हो रही थी तो चाय पीने के बाद वो मेरे बगल में लेटकर मुझे किस करने लगे.

कुछ देर बाद हम दोनों गर्म हो गए तो अंकल जी मुझे फिर से चोदा.

उस रात हम दोनों ने तीन बार चुदाई का मजा लिया. हर बार अलग अलग स्टाइल में चुदाई हुई. कभी अंकल जी मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदते तो कभी कभी गोद में लेकर, कभी डॉगी स्टाइल में चोदने लगते.

पूरी रात मैं उनके कमरे में ही नंगी चुदती रही. अंकल जी भी मुझे अपनी बांहों में लेकर सो गए.

अगले दिन वो ड्यूटी भी नहीं गए. हमने पूरे दिन सेक्स किया.

मैं लखनऊ में 24 दिन तक रही और हमने इस दौरान कई बार सेक्स किया. अंकल जी ने मुझे शराब पिला कर भी खूब चोदा. मेरी गांड भी मारी.

इसके बाद जब भी मैं वहां जाती हूँ … तो हम दोनों मौका मिलते ही चुदाई कर लेते थे.

सच में दोस्तो, मुझे अंकल जी से चुदने में बहुत मज़ा आने लगा था, इसलिए मैंने आज तक किसी लड़के को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया.
मैं उनसे सच में बहुत प्यार करती हूँ, अभी मैं उनसे रोज फोन पर बात करती हूँ.

आज तक मेरी फैमिली और उनकी फैमिली में किसी को पता नहीं है क्योंकि हमारा ऐसा रिश्ता है कि किसी को शक भी नहीं होता है. लव यू अंकल जी.

Author Name

Adult Stories

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.