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दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

दिवाली में गाँव में चूत का जुगाड़ हो गया

मैं भागलपुर शहर में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और मैं शहर से थोड़ी दूर एक छोटे शहर या कस्बे का रहने वाला हूँ. यह बात दीवाली की है, जब मैं घर गया था. मैं अपने गांव गया, जहाँ चाची ने मुझे बहुत स्नेह दिया और रात को पिछली बार की तरह बदले में उन्हें प्यार दिया. “Adult Stories”

फिर अगली सुबह हमारे पड़ोस में रहने वाली एक दीदी चाची के पास आईं. चूंकि बचपन में वहीं रहा, उनके साथ खेला कूदा, बड़ा हुआ, तो मैं उनके बारे में सब जानता था. मैं उन्हें नमस्ते कहकर वहाँ से चला गया.

अपने कुछ दोस्तों के साथ बगल वाले गांव से निकलती नदी पर नहाने चला गया, जहाँ हमने ठंडे ठंडे पानी में बहुत देर तक उछल कूद की. जिससे मुझे ज़ुकाम हो गया. शाम के समय तक थोड़ा बहुत बुखार भी आ गया था. बस मैं खटिया पर लेटा था.

चाची बहुत देर से कहीं बाहर गई थीं, तभी वो पड़ोसन, जिसे मैं दीदी कहता था … घर आईं. चूंकि मैं अकेला था, तो वे मेरी खटिया पर बैठकर मुझसे बात करने लगीं. खटिया के पास एक रुमाल पड़ा था, जिससे मैं कई बार अपनी नाक पौंछ चुका था. उन्होंने उसे उठाया और मुझे डांटते हुए अंदाज में बोला- क्यों बे सोनू … तू ये सब काम कब से करने लगा?

तो मैं बोला- कैसे काम? मैंने क्या गलती कर दी?

वो मुझे रूमाल दिखाकर बोलीं- ये क्या है?


मैं बोला- रुमाल ही तो है, इसमें क्या गड़बड़ है?

वो- क्या पौंछा है इससे तूने?

मैं- क्या आपको क्या दिखता है … मेरी नाक है. कहीं आपने इसे और कुछ तो नहीं समझ लिया?

वो- अरे बेबकूफ ऐसे पौंछेगा तो कोई भी गलत समझेगा ही.

मैं- ये तो समझने वाले के ऊपर है. वैसे अगर ये सचमुच में वही होता तो!

वो- तो तेरी शामत आ जाती अभी.


मैं- वैसे मुझे वो सब अपने आप करने की कोई जरूरत पड़ती ही नहीं, तो कैसी दिक्कत.

वो- मतलब? किससे करवाता है.

मैं- इससे आपको क्या? सबके अपने अपने राज होते हैं.

वो- कैसे राज? कहीं कोई गलत काम तो करके नहीं आया न.

मैं- अरे थोड़ा शांत बैठो, ऐसा कुछ नहीं है. मैं बस मजाक कर रहा था, केवल मजे ले रहा था और कुछ नहीं.

वो- मजाक ठीक है, लेकिन अगर ये सच हुआ, तो तेरी ऐसी की तैसी हो जाएगी जरा संभल के चलो, अभी बता रही हूँ.

मैं- इसमें गलत क्या है. अगर कोई आपसे काम के लिए कहता है या मजबूरी में आपको करना पड़ता है, तो बात अलग होती है.

वो जरा बिंदास बोलती थीं तो खुल कर कहने लगीं- ऐसा कौन होगा, जो किसी से भी चुदवा ले.

मैं- कुछ लोगों की होती है … मजबूरी या कोई ऐसा, जो आपको पसंद करता हो या फिर चुदाई के शौक़ीन.

वो- तू पहले भी किसी को चोद चुका है.

मैं- अब ये मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि थोड़ा प्राइवेट मामला है.

वो- कुछ भी हो लेकिन अपने पेरेंट्स की इज्जत का ख्याल रखना.

इतना कह कर वो चली गईं, इनके बारे में थोड़ा बहुत बताता हूं. उनका नाम डिम्पल सेक्सी बदन, उम्र-29 वर्ष, पति ने धोखा देकर इन्हें 10 साल पहले छोड़ दिया था, अब ये अपने पेरेंट्स के साथ रहती हैं.

अगले दिन चाची के भाई की तबियत खराब हो गई, जिससे वो अपने मायके घर को मेरे हवाले छोड़कर चली गईं. मैं भी अकेले होने के चक्कर में अपने लंड को हिला रहा था, तभी दीदी ने मुझे आवाज दी और कमरे में आ गईं. मैंने झट से अपने कपड़े ठीक किए.

वो बोलीं- अकेले अकेले क्या कर रहा था? जो तूने मेरी आवाज नहीं सुनी.

मैं- कुछ नहीं, वो अन्दर था तो आवाज नहीं आई.

वो- लेकिन तेरी पैन्ट को देखकर तो नहीं लगता. रुक अब तेरी मम्मी को बताना ही पड़ेगा.

मैं- अरे सॉरी न … कोई कितना कंट्रोल कर सकता है.

वो- तू रुक … अभी बताती हूँ कण्ट्रोल कैसे होता है … तेरी मम्मी को जब पता लगेगा तो अपने आप ही सीख जाएगा.

मैं- बोला न सॉरी … गलती हो गई, चाहो तो कोई सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ … बहुत मार पड़ेगी.

वो- जब मार से डरते हो तो ऐसे काम करते ही क्यों हो.

मैं- माफ़ी मांग रहा हूँ न … और क्या करूँ. आप चाहें तो कोई भी सजा दे दो, लेकिन उन्हें मत बताओ प्लीज.

वो- चल ठीक है … बता किसको याद करके हिला रहा था.

मैं- आप भी न मौके का फायदा उठा रही हो.

वो- लगाऊं फोन?

मैं- हैं भागलपुर में एक दो, जिनके साथ, उन्हीं के उनके कहने पर करता हूँ. बदले में वो भी मुझे खुश रखती हैं.

वो- अभी तो मैं जा रही हूँ, लेकिन अभी तेरी सजा बाकी है, बाद में बताती हूँ.

फिर वो चली गईं. उनकी धमकियों से एक टाइम तो मेरी गांड फट गई थी, लेकिन फाइनली वो मान गईं. अब मैं सोचने लगा कि ये मुझसे क्या करवाएंगी. तभी चाची का फोन आया, उन्होंने बोला- तू डिम्पल के यहाँ खाना खा लेना, मैं सुबह आऊँगी. कुछ देर बाद मैं खाना खाने पहुंचा और उनसे बोला- दीदी भूख लगी है कुछ मिलेगा.

वो बोलीं- हाँ मिलेगा न … रसोई में बैठ, मैं अभी आई.

रसोई में बिठा कर उन्होंने मुझे खाना परोसा और मेरे सामने बैठ गईं. फिर बोलीं- आज तू मेरा एक काम करेगा.

मैं- वैसे भी आपने जो धमकी दी है, उसको ध्यान करके तो करना ही पड़ेगा.

वो- जैसे कि तूने कहा कि सबकी अपनी जरूरत होती है. मेरी भी है … क्या तू उसे ख़त्म करेगा.

मैं- मतलब?

वो- मतलब तू मुझे चोदेगा.

मैं- क्यों आपको कैसे?

वो- अबे पूछ नहीं … बता रही हूँ तैयार रहना.


मैं- ठीक है … और कर भी क्या सकता हूँ.

मैं घर आ गया और उनके बारे में सोच सोचकर उनके प्रति फीलिंग्स लाने की कोशिश करने लगा, लेकिन बात बन नहीं रही थी. मेरे मन में उनके प्रति कोई गलत विचार नहीं आ रहे थे. फिर मैंने उनकी बॉडी को इमैजिन किया. मेरी जितनी हाइट, एवरेज शरीर, एवरेज बूब्स लेकिन गांड थोड़ी बड़ी थी, जिससे थोड़ी बहुत फीलिंग मेरे अन्दर आई. तभी शाम हो गई और करीब 8-9 बजे वो आ गईं.

वो थोड़ा बहुत एडल्ट बात करके बोलीं- चल शुरू हो जा.

मैं- कैसे शुरू हो जाऊं … क्या करूँ?

वो- जो कर सकता है, वो कर.

मैं- मैं अकेला क्या करूँगा, करने को तो बहुत तरीके हैं, लेकिन अकेला कुछ नहीं कर पाउँगा.

वो- अबे भोसड़ी के सीधे सीधे बोल न … क्या करना है, बातों को घुमा क्यों रहा है?

मैं- एक काम करो, पहले एक वीडियो देख लो, फिर ही आप कुछ समझ पाओगी.

मैंने उन्हें एक पोर्न वीडियो दिखा दी, जिससे वो थोड़ा बहुत गर्म हो गईं और मेरे पास बैठकर मुझे किस करने लगीं. मैं भी बराबर साथ देने लगा और उनके बूब्स प्रेस करने लगा. किस करते करते मैंने उनके कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे कपड़े खींचते हुए उतार दिए.

किस के बाद मैं उनके बूब्स को चूमने लगा. उनके मम्मे मेरे अनुमान से कुछ ज्यादा ही सेक्सी थे. उनका हाथ भी मेरे लौड़े तक पहुँच गया, जिसे वो सहलाने लगीं. फिर मैं उनकी चूत के पास आ गया.

उसके आस पास काफी बाल थे, उन बालों के बीच उनकी कई सालों से अनचुदी चूत रिस रही थी. मैंने उसमें उंगली की और चूत की फांकों के बीच के भाग को, मतलब दाने को अपने होंठों से खींचने लगा. जिससे वो बेड पर गांड उछालते हुए उछलने लगीं.

मैं उनकी चूत को अपनी जीभ से चोद रहा था, जिससे वो थोड़ी ही देर में झड़ गईं. मैंने उन्हें मेरा लंड चूसने को कहा, पहले तो उन्होंने मना किया. फिर मेरी जिद पर उन्होंने तब तक उसे मुँह में लिया, जब तक वो पूरी तरह खड़ा नहीं हो गया. “Adult Stories”

इन सब क्रियाओं के बाद मैं उनकी चुदाई करने जा रहा था. मैंने उनकी चूत के छेद में थूक भरा और धीरे धीरे दो तीन धक्कों में पूरा लंड अन्दर डाल दिया. फिर लंड बाहर निकालकर एक ही झटके में दोबारा घुसा दिया, जिससे वो चिल्ला कर बोलीं- अबे मादरचोद धीरे कर … मार डाला साले … इतना तेज मत कर.

लेकिन मैं और तेज चुदाई करने लगा. वो बेड पर सीधी लेटी हुई थीं, उनकी एक टांग मेरे हाथ में और दूसरी टांग बेड पर रखी हुई थी. मैं अपना लंड उनकी चूत में पूरा बाहर निकालकर झटके से अन्दर डालता और दोबारा बाहर निकालकर फिर झटका दे मारता, जिससे वो गाली पर गाली बके जा रही थीं.

दीदी ‘धीरे कर … धीरे कर साले …’ चिल्ला रही थीं. थोड़ी देर बाद मैं थोड़ा आराम से करने लगा, जिससे उन्हें भी पूरा मजा आने लगा. खैर मुझे तो मजा आ ही रहा था. मैं दीदी को चोदने के साथ साथ उनके मम्मों को भी मसल रहा था. “Adult Stories”

थोड़ी देर बाद जब मैं थक गया तो मैं लेट गया और वो मेरे ऊपर आ गईं. अब दीदी अपनी चूत में लंड लेकर चुदवाने लगीं. इस स्थिति में उन्हें किस भी कर सकता था. थोड़ी देर बाद उन्होंने पानी छोड़ दिया, लेकिन मैं उन्हें कुतिया बनाकर तब तक पेलता रहा, जब तक कि मैं नहीं छूटा.

जब सब ख़त्म हुआ तो वो बोलीं- मजा आ गया. शायद ही कोई इस तरह करता होगा … एक बार और हो जाए. मैं उनके दूध दबा कर बोला- जी हुजूर. बस कुछ ही देर में एक बार और पूरे जोरों शोरों के साथ ठुकाई हुई. उन्हें बहुत मजा आया, उन्होंने मुझे बकी गालियों के लिए माफी मांगी और चुदाई के लिए शुक्रिया अदा किया. 

 


सगे भाई बहन ग्रुप सेक्स के खेल में

Bhai ne sagi bahan ko choda

भाई बहन की चुदाई, बहन की चुदाई, ग्रुप चुदाई बहन के साथ, बहन की चूत, दीदी की चूत, दीदी की ग्रुप में चुदाई, दीदी की बुर, भाई बहन की बुर चुदाई की कहानी.

मैं राज गर्ग दिल्ली रहता हूँ और अपने बिज़नस के अलावा मेरा एक छोटा सा स्विंगर्स क्लब यानि वाइफ़ स्वैपिंग क्लब भी है। हम अपने क्लब में जब मीटिंग करते हैं तो, सभी क्लब मेम्बर्स आपस में अपने अपने पति और पत्नी बदल कर सेक्स करते हैं।
मेरे अलावा 4-5 कपल्स और हैं, हम सब एक साथ बैठते हैं, बातें करते हैं, खाते पीते हैं, फिर बाद में जिसको जो भी अच्छा लगे या अच्छी लगे, उसके साथ सबके सामने, सबके साथ सेक्स करते हैं।
मेरी बीवी मेरे सामने क्लब के हर एक मेम्बर से सेक्स कर चुकी है और मैं अपनी बीवी के सामने अपने क्लब की हर एक औरत को चोद चुका हूँ। आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

हमारे एक बड़े सम्माननीय क्लब मेम्बर हैं, अग्रवाल साहब… वो मेरी बीवी के बड़े दीवाने हैं, जब भी मौका मिलता है, वो शशि से अगर सेक्स नहीं करते तो अश्लील छेड़छाड़ ज़रूर करते हैं।
और क्लब में इस बात का कोई ऐतराज भी नहीं करता कि बात करते करते अगर आप किसी और की बीवी के कूल्हों पे या चुची पर हाथ फेर रहे हैं, या फिर फिर आपकी बीवी को कोई और मर्द बाहों में लेकर खड़ा है।

औरतें खुल कर अपनी सेक्स फ़ंतासियाँ सबसे डिस्कस कर रही हैं। एक दूसरे से गंदी बातें, गंदे इशारे क्लब में सब जायज़ है।

ऐसे ही एक दिन मुझे एक ईमेल आई, उसमें एक मियां बीवी हमारा क्लब जॉइन करना चाहते थे।
मैंने क्लब का प्रेसिडेंट होने के नाते उनको क्लब के सारे नियम कायदे समझाये, क्लब की फीस बताई, करने और न करने वाली सब बातें समझाई।

अगले दिन दोनों मियां बीवी मुझे मेरे घर पर मिलने आए, हम दोनों पति पत्नी ने उनका स्वागत किया।

थोड़ी औपचारिक बातचीत के बाद मैंने मुद्दे पर आना ठीक समझा और उन दोनों से पूछा- तो जैसा आप जानते हैं कि हमारे क्लब में अपनी अपनी बीवियाँ बदल कर या यूं कहें कि अपने अपने पति बदल कर एक दूसरे के साथ सेक्स किया जाता है, इसमें कोई शर्म लिहाज नहीं किया जाता। आपसे भी कोई आकर पूछ सकता है, क्या मैं आपकी पत्नी या पति से सेक्स कर सकता हूँ/ सकती हूँ। इसमें आप बुरा नहीं मान सकते।
मगर किसी भी क्लब मेम्बर को आप जलील नहीं कर सकते, चाहे उसकी परफॉर्मेंस कैसी भी हो, आप किसी के साथ गाली गलौच या मार पीट भी नहीं कर सकते। सभी मामले सभी ग्रुप मेम्बर्स आपस में बैठ कर सुलझाते हैं।
आपको इस क्लब को जॉइन करने के लिए अपने पूरे होशो हवास में बिना किसी भी दबाव के अपनी रजामंदी देनी होगी, आप क्लब को कभी भी छोड़ सकते हैं, बस एक बार जमा करवाई गई फीस वापिस नहीं मिलेगी।
क्लब छोड़ कर बाहर आप किसी से भी कभी भी इस क्लब के बारे में कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं कह सकते, मतलब क्लब का किसी भी बात में ज़िक्र तक नहीं करेंगे।
तो क्या मैडम आप इस के लिए राज़ी हैं?


Bhai ne sagi bahan ko choda



वो बोली- जी, मैं पूरी तरह से राज़ी हूँ।
मैंने फिर पूछा- तो क्या सर आप इसके लिए राज़ी हैं?
मिस्टर गोयल भी बोले- 100 प्रतिशत राज़ी, बस आप यह बताओ कि आप हमें क्लब में कब लेकर जा रहे हो?
मैंने कहा- ले जाएंगे, ले जाएंगे, पहले एक टेस्ट और कर लें!
वो बोले- कर लो!

मैंने पूछा- आप दोनों में से ज़्यादा जेलस कौन है, कौन अपने पार्टनर को किसी दूसरे के साथ देख कर ज़्यादा जलता है?

मिस्टर गोयल- देखिये, मैं तो नहीं जलता मगर मैं किसी और सुंदर सी औरत से बात करूँ तो ये अक्सर इसका बुरा मनाती है।
मैंने कहा- तो मिसेज गोयल यह टेस्ट आपका है।
मेरे इतना कहते ही शशि उठ खड़ी हुई और गोयल साहब के पास जाकर बैठ गई।
उसने गोयल साहब के चेहरे से एक उंगली फिरानी शुरू की और गर्दन से होते, कंधे से नीचे, सीने पे, और फिर पेट से होते उनकी जांघ तक आ गई। आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

गोयल साहब अपनी आँख बंद करके इसका मजा ले रहे थे- ओह शशि, मजा आ गया, जान, और कर!
वो बोले तो शशि उनके बिल्कुल साथ चिपक कर बैठ गई।
मैं बड़ी बारीकी से मिसेज गोयल के रिएक्शन देख रहा था। अंदर ही अंदर वो जैसे जल रही थी।

फिर शशि ने गोयल साहब का हाथ पकड़ कर अपने चेहरे पे रखा और उनसे वैसे ही करने को कहा।
गोयल साहब ने पहले शशि के चेहरे पे हाथ फेरा, फिर गर्दन और कंधे से होते हुये उसके सीने पर आए, पहले गोयल साहब ने शशि की आँखों में देखा फिर मेरी तरफ और फिर अपनी बीवी की तरफ और फिर हल्के से शशि के स्तन के ऊपर से छूते हुये वो नीचे उसके गोरे पेट पर आ गए।

तब मेरी बीवी ने अपनी साड़ी का पल्लू हटा दिया, अब गहरे गले के उसके ब्लाउज़ से उसका क्लीवेज और ब्लाउज़ के पतले रूबिया कपड़े से उसके ब्रा का सारा डिजाइन भी दिख रहा था।
गोयल साहब ने शशि को देखा, तो उसने इशारे से उन्हें अपने स्तन छूने को कहा।

गोयल साहब ने शशि के एक स्तन पे थोड़ा हिचकिचाते हुए हाथ रखा तो शशि ने उनका हाथ अपने हाथ में पकड़ कर पूरे ज़ोर से अपना स्तन दबवाया, तो मिसेज गोयल ने अपना मुँह फिरा लिया।

मैं उठ कर मिसेज गोयल के पास गया और उनके बिल्कुल पास बैठ कर बोला- देखिये मिसेज गोयल, यह तो अब रूटीन का मैटर होने वाला है, आप सिर्फ देखिये, आपको भी यही सब करना और देखना होगा।

मिसेज गोयल मुझसे बोली- क्या ये सब मैं आपके साथ भी करूंगी?
मैंने कहा- जी, मेरे साथ भी और क्लब के बाकी मेम्बर्स के साथ भी। हम टोटल 10 लोग हैं, आपको मिला कर 12 हो गए। अब जिस दिन आप कपड़े उतारेंगी तो 11 लोग आस पास खड़े आपको देख रहे होंगे, 6 मर्द और 5 औरतें, इसके लिए भी आपको अपना मन पक्का करना पड़ेगा।

कह कर मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
वो चौंक कर बोली- यह क्या कर रहे हैं आप?
मगर मैं अपने कपड़े उतारता गया और बिल्कुल नंगा हो गया, अपना लंड हवा में हिलाता हुआ बोला- तो मिसेज गोयल, क्या आप मेरा लंड अपनी चूत में लेना पसंद करेंगी?

वो तो एकदम से खड़ी हो गई- यह क्या बकवास है?
वो गुस्से से बोली।
मैंने कहा- आप शांत हो जाइए, इसी बात के लिए तो हम आपको तैयार कर रहे हैं, वहाँ आपसे कोई भी ये सब पूछ सकता है और ये भी हो सकता है कि कोई पूछे भी नहीं और जब आप बिल्कुल नंगी हो तो कोई आए और अपना लंड आपके मुँह या चूत में घुसा दे।

मेरी बात सुनते ही वो बैठ गई- तो क्या मुझे रंडी बनना होगा?
वो थोड़ा तल्खी से बोली।
मैंने कहा- जी नहीं, रंडी नहीं बनना, बस अगर आपके मन में सेक्स के प्रति कोई भी बात है, कोई भी अधूरी इच्छा है, उसे बाहर निकालना है, रंडी नहीं, बस बेशर्म बनना है।
मैंने उसे समझाया।

कुछ देर वो बैठी सोचती रही, दूसरी तरफ शशि और गोयल साहब आपस में बिज़ी थे, गोयल साहब शशि की साड़ी उठा कर अपना हाथ उसकी साड़ी में डाल कर शायद उसकी चूत सहला रहे थे और शशि उनका तना हुआ लंड हाथ में पकड़ कर उम्म्ह… अहह… हय… याह… उनकी मुट्ठ मार रही थी।
कुछ देर मिसेज गोयल ये सब देखती रही, फिर बोली- ओ के, मैं तैयार हूँ, मिस्टर राज, अब आपके किसी भी सवाल, किसी भी बात का मैं जवाब दूँगी।
मैंने कहा- तो नंगी होकर मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसो।
मेरे इतना कहते ही उस औरत ने गजब की फुर्ती दिखाई, 10 सेकंड में अपनी साड़ी, पेटीकोट, ब्लाउज़, ब्रा पेंटी सब उतार फेंके और बिल्कुल नंगी हो कर मेरे पांव के पास बैठ गई, मेरा लंड अपने हाथ में पकड़ा और लगी चूसने।

मैंने कहा- मिसेज गोयल, आप तो बड़ी तेज़ निकली?
वो बोली- मेरा नाम पूजा है, और जब मैं एक बार ठान लेती हूँ, तो फिर पीछे नहीं हटती।

उसके बाद हम चारों ने आपस में अपने अपने पार्टनर बदल कर सेक्स किया जिसे गोयल दंपति ने बहुत एंजॉय किया।

अगली मीटिंग में हमने उन्हें आने की दावत दी। मीटिंग हुई शुक्रवार रात की थी। शनिवार को दो कप्ल्ज़ ने कहीं बाहर जाना था, इसलिए शनिवार की जगह शुक्रवार रात की मीटिंग रखी गई।

करीब 7 बजे सब मेम्बर्स इकट्ठे हो गए, बस गोयल साहब और उनकी पत्नी ही नहीं आए थे। वो रास्ते में कहीं जाम में फंस गए थे। हमने अपनी पार्टी शुरू कर दी।

ड्रिंक्स थी, वेज नॉन वेज भी था, हर कोई अपनी पसंद के पार्टनर के साथ बातचीत में मशगूल था। अभी सिर्फ एक दो पेग हुये थे, इस लिए सुरूर कोई ज़्यादा नहीं था मगर मस्ती माहौल में छा चुकी थी।

हमारे अग्रवाल साहब तो सिर्फ चड्डी पहने घूम रहे थे, मुझसे कई बार पूछ चुके थे- अरे नई चिड़िया आई या नहीं?
मैं उन्हें आश्वासन दे देता- आ रही है।

कोई एक घंटे बाद मिस्टर और मिसेज गोयल पहुंचे। जब वो रूम में दाखिल हुये तो सबने उनका स्वागत किया मगर अग्रवाल साहब तो सन्न रह गए, मुझे एक तरफ ले जा कर बोले- अरे यार, ये तुमने किसको मेम्बर बना दिया?
मैंने पूछा- क्यों क्या हुआ, वो खुद आए थे मेरे पास, मैंने तो सब कुछ चेक करके ही उनको मेम्बर बनाया है।

वो बोले- अरे यार ये दोनों तो मेरे बहन और बहनोई हैं, मैं इनके साथ कैसे?
उधर गोयल साहब ने भी उनको चड्डी में लंड अकड़ाये घूमते देख लिया था, पूजा गोयल तो मुँह छुपाती फिर रही थी।
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मैंने स्थिति को संभालने के लिए ज़ोर से सब मेम्बर्स को आवाज़ लगाई- मेरे प्यारे ग्रुप मेम्बर्स, आज एक बड़ी विकत स्थिति आ गई है, हमारे नए बने मेम्बर्स मिसेज एंड मिस्टर गोयल हमारे अग्रवाल साहब के रिश्ते में बहन और बहनोई हैं। अब हालात ये हैं कि इन दोनों को आपस में एक दूसरे के सामने आने में दिक्कत हो रही है। अब आप सबसे निवेदन है कि मिल कर फैसला करें कि इस बात का क्या हल निकाला जाए।

सब मेम्बर्स आपस में बातचीत करने लगे। कुछ मेम्बर्स ने सुझाव दिये- या तो मिस्टर अग्रवाल या मिस्टर गोयल ये क्लब छोड़ दें।
मैंने कहा- पर अब तो इनको पता चल गया कि ये लोग इस क्लब के मेम्बर हैं।

दूसरा सुझाव- यहाँ किसी का किसी से कोई रिश्ता नहीं है, सिर्फ मर्द और औरत का रिश्ता है, इसलिए सब एंजॉय करो।
इसका प्रति उत्तर आया- तो जिस दिन राखी आएगी, उस दिन अग्रवाल साहब अपनी बहन से राखी कैसे बंधवायेंगे? आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

फिर एक तीसरा हल पेश किया गया- अग्रवाल साहब और मिसेज गोयल आपस में सेक्स न करें, अपने भाई और बहन के रिश्ते को कायम रखें, मगर चूंकि इस क्लब में आने मात्र से ही ये दोनों भाई बहन एक दूसरे के सामने नंगे हो चुके हैं, इसलिए इन्हें क्लब की हर क्रिया में भाग लेने की इजाज़त है, बस आपस में ये न करें, और किसी के साथ, कुछ भी करें!

सबने अग्रवाल साहब और पूजा गोयल की तरफ देखा, दोनों के चेहरे भावशून्य थे, वो दोनों यह फैसला नहीं कर पा रहे थे, अगर आपके पास इस बात का कोई हल है तो प्लीज़ बताएं।

भाई की कुंवारी साली की बुर और गांड मारी

कुंवारी साली की बुर और गांड मारी,भाई की कुंवारी साली की बुर और गांड मारी


मैंने गाँव की लड़की को चोदा. वो मेरे भाई की साली थी. भाई शादी में उसने खुद से आगे बढ़कर मुझसे दोस्ती की. एक बार वो घर में अकेली थी तो …

मेरा नाम राम है, मैं अपनी ग्रेजुएशन के फर्स्ट ईयर में हूं और मैं कोटा के पास एक गांव से हूं. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है.

मुझे लड़कियों को चोदने में बहुत मजा आता है. मैंने अब तक अठारह चुत चोद ली हैं. इनमें से सिर्फ दो ही सीलपैक चुत चोदने को मिली थीं. जिसमें पहली कुंवारी चुत की चुदाई की कहानी आज आपको सुना रहा हूँ, जिसमें मैंने गाँव की लड़की को चोदा; मजा लीजियेगा.

यह गाँव की लड़की की चुदाई एक साल पहले उस समय की है, जब मैं अपने रिश्ते के भाई की शादी में गया था. वह मेरे मामा का लड़का है. जब मैं उसकी बारात में गया, तो वहां पर मुझे भाई की साली बहुत पसंद आई.

शादी के दौरान मैंने उससे जान पहचान की और उससे बात करने लगा. धीरे-धीरे हम दोनों में थोड़ी बेतकल्लुफी बढ़ गई और वो मुझसे कुछ ज्यादा ही मजाक करने लगी.

शादी के बाद उसने खुद से मुझे अपना नम्बर दिया और मुझसे मेरा नम्बर मांगने लगी.

मैंने उससे मजाक करते हुए पूछा- मेरे नम्बर का क्या अचार डालोगी? वो आंख दबा कर बोली- नम्बर तो दो … फिर देखना, कौन क्या डालता है.

मैंने समझ गया कि लौंडिया मुझ पर फ़िदा हो गई है. मैंने उसे अपना नम्बर दे दिया.

शादी से वापस आने के बाद उसके मेरे पास फोन पर मैसेज आने लगे और हम दोनों मजाक करते हुए कुछ सीमा लांघने लगे. एडल्ट जोक्स साझा होने लगे. वो भी मेरे साथ ओपन होने लगी थी.

धीरे-धीरे वो मुझे कॉल करने लगी. हमारी बातें होने लगीं. बातों ही बातों में हम दोनों एक दूसरे से प्यार मुहब्बत की बातें करने लगे.

एक दिन मैं उसे गर्म करने जैसी बातें करने लगा, तो वो मुझसे लड़ने लगी कि तुमने मुझे न जाने क्या कर दिया, अब मैं क्या करूंगी. मैंने कह दिया कि उंगली का इस्तेमाल कर लो.

वो बोली- वो कैसे करते हैं? मैंने पूछा- क्या कैसे करते हैं?

वो बोली- उंगली का इस्तेमाल? मैंने कहा- अपनी किसी सहेली से पूछ ले.

वो बोली- तुम भी तो मेरे फ्रेंड हो, तुम ही बता दो न? मैंने कहा- मैं तो उंगली की जगह कुछ और का इस्तेमाल करना जानता हूँ.

वो बोली- तुम किस चीज का इस्तेमाल करना जानते हो … उसी से मेरा काम कर दो. मैंने कहा- अभी तक किसी से काम करवाया है?

वो बोली- नहीं, मैं अपना काम खुद करती हूँ. 


कुंवारी साली की बुर और गांड मारी


मैंने कहा- तो ठीक है … इस बार भी तुम अपना काम खुद ही उठा लो.

वो हंस पड़ी और बोली- तुम सच में बहुत बदमाश हो. मैंने कहा- नहीं जी … मैं बिल्कुल शरीफ हूँ.

वो बोली- साबित कर सकते हो कि शरीफ हो या बदमाश हो … ये बात कैसे चैक हो सकती है? मैंने भी हंस कर कह दिया- किसी दिन बुला कर चैक कर लो कि मैं शरीफ हूँ या बदमाश हूँ.

अब वह मुझसे मिलने के लिए बुलाने लगी. पर मैंने मना कर दिया और फोन काट दिया.

वो मुझे बार बार फोन करके कहने लगी- आ जाओ तुमसे मिलने का बड़ा मन है. मैंने कहा- मूड नहीं है … जब मूड होगा तो आ जाऊंगा.

वो बोली- ठीक है मैं भी जब मौका होगा तो फोन करूंगी. तुम मूड बना लेना. मैंने हंस कर हामी भर दी.

मैं समझ गया कि ये साली मुझसे चुदने को बेताब है.

उसका गांव मेरे गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर है.

एक दिन उसके घर पर कोई नहीं था. उसका फोन आया- आज तुम मेरे घर आ जाओ. घर में कोई नहीं है. मेरा अकेले मन नहीं लग रहा है. मैं समझ गया कि आज इसको चोदने का सही मौका है. मैंने आने की कह दी. वो मेरे आने का इन्तजार करने लगी.

फिर मैंने बाइक उठाई और उसके घर के लिए निकल गया. जब मैं उसके घर पहुंचा, तो वह घर पर अकेली थी.

उसके गांव में कई घरों में रिश्ते होने के कारण मैं बहुत जगह चाय पीने गया, जिससे किसी को ये न लगे कि मैं उसे अकेला पाकर उसके घर चला गया.

फिर मैं उसी के घर पर आ गया. तब तक शाम हो चुकी थी, तो उसने खाना बनाया. मैं अन्दर कमरे में आकर लेट गया. तो उसने घर का मेनगेट लॉक कर दिया.

उसने मुझे आवाज दी और खाना खाने के लिए बुलाया. हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया. खाना खाने के बाद उसने टीवी चला दी. हम दोनों टीवी देखने लगे.

टीवी देखते देखते उसे नींद आने लगी … तो वो आंखें मूंद कर लेट गई. मैं उसका फिगर देखने लगा. वो बड़ी मस्त माल दिख रही थी.

मैंने उसके पास जाकर उसे एक लिपकिस कर दिया. वह नींद में होने का नाटक कर रही थी.

मैंने धीरे-धीरे उसके मम्मों को दबाना शुरू कर दिया. वो कुछ नहीं कह रही थी. मैं समझ रहा था कि बंदी जाग रही है और मजा ले रही है.

मैंने उसके होंठों पर होंठ लगा दिए और बहुत देर तक उसे चूमता रहा.

कुछ देर बाद वह उठ गई और बोली- ये क्या कर रहे हो तुम? मैंने बोला- तुमसे प्यार कर रहा हूं.

वो उठने को हुई, तो मैंने उसे पकड़ लिया. वो थोड़ी देर मुझसे छूटने की कोशिश करने लगी. फिर वह धीरे-धीरे मेरा साथ देने लगी.

मैंने उसके मम्मों को मसला, तो वो आह आह करने लगी.

तभी मैंने उसके पजामे में एक हाथ डाल दिया, तो देखा कि उसकी पैंटी गीली हो चुकी थी. मैंने उसका पजामा और पैंटी दोनों को खींच कर निकाल दिया. वो मेरे सामने आधी नंगी हो चुकी थी.

मैंने उसकी बुर में उंगली डाली, तो बुर का पानी मुझे मजा देने लगा. मैंने उसकी बुर से उंगली निकाल कर उंगली चूसी तो उसकी बुर का नमकीन माल मुझे बड़ा स्वादिष्ट लगा.

मैंने हाथ के इशारे से उससे कहा- मस्त स्वाद है. तो वो शर्मा गई.

फिर मैंने उसे लिप किस करना शुरू कर दिया और उसके मम्मों को मसलने लगा. वो मादक आवाजें करने लगी.

मैंने उसे पूरी नंगी कर दिया. अब उसने भी मेरी पैंट खोल कर मेरी अंडरवियर के अन्दर हाथ डाल दिया. उसके हाथ लगने से मेरा लौड़ा फनफनाने लगा.

वो मेरा खड़ा लंड सहलाने लगी और उसे आगे पीछे करके हिलाने लगी. मुझे उसके हाथ से लंड हिलवाने में बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उससे नीचे बैठने को कहा और उससे लंड चूसने को कहा. वो लंड चूसने से मना करने लगी लेकिन मैंने जबरदस्ती उसके मुँह में लंड डाल दिया.

वो मुँह से लंड बाहर निकालने की कोशिश करने लगी. लेकिन फिर धीरे-धीरे वो लंड चूसने लगी.

उसे लंड चूसने में मजा आने लगा. उसने करीब पांच मिनट तक मस्ती से मेरा लंड चूसा.

मैंने अपने चरम पर आकर लंड का सारा पानी उसके मुँह में निकाल दिया. वो लंड की मलाई पी गई.

उसके बाद हम दोनों लिपट कर लेट गए और चूमाचाटी करने लगे.

थोड़ी ही देर बाद हम दोनों अब चुदाई के लिए मचलने लगे थे. मैंने उसे पलंग पर चित लिटा दिया और अपने लंड पर थोड़ा तेल लगाकर उसकी बुर पर रगड़ने लगा.

वह चुदने के बहुत ही व्याकुल हो गई थी और जोर जोर से सीत्कार करने लगी थी- आह प्लीज … मुझे जल्दी से चोद दो … आह और मत तड़पाओ.

मैंने एक ही झटके में अपना आधा लंड उसकी बुर में घुसा दिया.

वो अपनी कुंवारी बुर में मोटा लंड लेते ही चिल्ला पड़ी और कहने लगी- आह मर गई … प्लीज़ निकालो इसे.

लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी और एक और झटका दे दिया. इस बार मैंने पूरा लंड बुर के अन्दर घुसा दिया.

उसकी आंखों से आंसू आ गए.

मैंने थोड़ी देर लंड को ऐसे ही घुसा रहने दिया और उसके दूध मसलते हुए चूसने लगा और उसे किस करने लगा.

जब उसे थोड़ा मजा आने लगा तो वो अपनी गांड हिलाने लगी. मैं समझ गया कि इसको लंड का मजा आने लगा है. मैं उसे धीरे धीरे से झटके देने लगा.

उसे भी मजा आने लगा. वो अपनी गांड उठाते हुए कहने लगी- आह मजा आ रहा है … तेज तेज चोदो … आह थोड़ी और तेज आ … आ.. मजा आ रहा है. वो मस्त आवाजें निकालने लगीं.

करीब 15 मिनट की चूत चुदाई के बाद मैंने लंड चुत से खींचा और उसके पेट के ऊपर झड़ गया. वह वीर्य में लथपथ हो गई. उसके पेट से लेकर मम्मों तक मेरा वीर्य लग गया था.

मैं नंगा ही उसके ऊपर गिर गया और उसे किस करने लगा. मेरा वीर्य हम दोनों की मालिश सा करने लगा.

कुछ देर बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया, तो मैंने उसके मुँह में लंड डाल दिया. वो मस्ती से लंड जोर जोर से चूसने लगी.

मैंने फिर से लौड़ा उसकी चूत पर सैट किया और एक जोरदार धक्का दे मारा. इस बार एक ही झटके में पूरा लंड चुत की गहराई में घुस गया.

उसके मुँह से आह निकल गई. वह बोली- आह धीरे करो … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूं.

मैंने कुछ देर ऐसे ही चोदने के बाद उसे घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चूत चोदने लगा.

करीब 10 मिनट मैंने उस गाँव की लड़की को चोदा. उसकी चूत चोदने के बाद मुझे उसकी गोरी गांड ललचाने लगी.

मुझे उसकी गांड मारने का मन हुआ … तो मैंने पास रखा तेल लेकर उसकी गांड के छेद में तेल लगा दिया. वो समझ गई और गांड मारने से मना करने लगी. मैंने कहा- ठीक है. बस उंगली कर लेने दे.

वो मान गई. मैं तेल से भिगो भिगो कर उंगली उसकी गांड में पेलता रहा. चुत में लंड चल रहा था और गांड में उंगली अन्दर बाहर हो रही थी.

वो मस्त होने लगी और उसने इसी मस्ती में अपनी गांड ढीली करके मजा लेना शुरू कर दिया था.

मैं चूत में लंड पेलते हुए उसे मजा दिए जा रहा था. फिर अचानक से उसकी चूत से लंड निकाल कर उसकी ढीली गांड पर रखकर एक जोरदार झटका दे मारा.

मेरा आधा लंड गांड में घुस गया था. वह दर्द से चिल्ला उठी और उसकी गांड से खून आने लगा.

मैंने उसकी एक न सुनी और लगा रहा. आधा लंड तो गांड में घुस ही चुका था. मैंने एक और झटका मारा, तो पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया.

उसकी गांड से खून निकलता ही जा रहा था.

मैं उसके मम्मों को दबाने लगा और रुक गया. जब उसका दर्द थोड़ा कम हुआ, तब वो अपनी गांड हिलाने लगी. मैं भी धीरे-धीरे झटके मारने लगा.

कुछ ही देर में गांड लंड का मजा लेने लगी थी. मैंने उसकी रेशमी गांड को जबरदस्त चोदी.

करीब 20 मिनट तक मैंने उसकी गांड मारी. उसकी गांड बिल्कुल कसी हुई थी. मुझे उसकी गांड मारने में बहुत मजा आया.

मैंने उससे पूछा- मजा आ रहा है? वो मुझसे बोली- हां बहुत मजा आ रहा है. गांड में भी इतना मजा आता होगा, इसका मुझे अंदाजा ही नहीं था.

दस मिनट तक उसकी गांड में लंड ताबड़तोड़ चला और गांड में ही वीर्य छोड़ दिया.

हम दोनों नंगी हालत ने ही लेट कर अपनी सांसें नियंत्रित करने लगे.

उस पूरी रात में मैंने 3 बार उसकी चूत मारी और एक बार उसकी गांड मारी.

सोने से पहले मैंने उसको एक दर्द निवारक गोली दे दी इसमें बुखार न आने की भी दवा मिली रहती है.

हम दोनों नंगे ही चिपक कर लेट गए.

एक घंटे बाद मैंने उसे हिलाया और कहा- अब मुझे घर निकल जाना चाहिए. वो मुझसे चिपक गई और रुक जाने के लिए कहने लगी.

मैंने कहा- गांव में बदनामी का डर है … मुझे जाने दो.

वो समझ गई और मेरे लिए एक गिलास दूध गर्म करके ले आई. मैंने उसे भी गिलास से दूध पिलाया. वो बहुत खुश थी.

फिर मैं अपने घर के लिए निकल आया.

इसके बाद मैंने कई बार गाँव की लड़की को चोदा है और अब भी चोद रहा हूँ.

ट्रेन में लिया जीजा का मोटा लंड



हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम रोशनी है और में हरयाणा की रहने वाली हूँ. दोस्तों में सेक्सी की बहुत भूखी हूँ, लेकिन एक रंडी नहीं और मेरी यह आज की कहानी मेरी पराए मर्द से पहली चुदाई की एक घटना है. दोस्तों में अब 42 साल की हूँ और कमल जीजाजी 58 साल के है और मेरे फिगर का साईज 44-40-48 है. मेरी लम्बाई 5 फीट 7 इंच है और कमल 6 फीट 1 इंच लंबे चौड़ी छाती और थोड़ी मोटे है, लेकिन बहुत अच्छे स्वभाव के है.

दोस्तों अब में आप सभी को मेरा पहला सेक्स अनुभव बताती हूँ. यह मेरा सेक्स कमल से कैसे शुरू हुआ? दोस्तों बात 1996 की है तब में 25 साल की थी. उन दिनों मेरे पति भी आर्मी में थे तभी उनको कुछ बीमारी लग गई और वो बहुत ज्यादा बीमार हो गये और तब ज्यादा मोबाइल नहीं होते थे. तभी मुझे टेलिग्राम से यह मैसेज मिला और में बहुत घबरा गई और मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था. में बस रो रही थी और सोच रही थी कि कैसे अपने पति के पास उनसे मिलने जाऊँ? क्योंकि सफ़र बहुत लंबा था और अंजान था. उसी टाईम मेरे घर पर अपनी पत्नी के साथ कमल मतलब मेरे जीजाजी आ गये मुझसे मिलने ( यानी मेरी मुहं बोली बहन के साथ ) तो मुझे रोते देखकर उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या बात है तुम रो क्यों रही हो? तो मैंने उनको सब बता दिया.

उस समय कमल भी आर्मी में थे और वो मुझसे बोले कि इसमें रोने की क्या बात है अगर तुम्हे उससे मिलना है तो चल में तुम्हे वहां पर लेकर चलता हूँ. फिर दीदी ने ही मुझे कुछ सात्वना दी और उन्होंने मेरे घर पर बात करके मेरे भाई को बुला लिया और मेरे भाई ने मेरे साथ जाने के बजाए कमल को मेरे साथ ले जाने के लिए बोला और मेरे दोनों बच्चों को वो अपने साथ गावं ले गया.

फिर उसी रात को कमल मेरे पास रहे और सुबह हम लोग एक प्राइवेट बस से दिल्ली आ गये और फिर वहाँ हमने ट्रेन में फर्स्ट क्लास में सीट बुक करवा ली और रात को दस बजे हमारी ट्रेन चली और टिकिट चेक होने के बाद कमल ने दरवाजा बंद करके मुझे ऊपर सुला दिया और खुद नीचे सो गये और बस यही सफर मेरे लिए पहली पराए मर्द से सेक्स की वजह बन गया. रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी और कमल सो गये थे. शायद वो सोने का नाटक कर रहे थे.

तभी में बाथरूम जाने के लिए नीचे उतरी तो मैंने देख कि कमल का लंड एकदम तना हुआ है और खंबे की तरह खड़ा है. में उनका लंड देखकर एकदम हैरान हो गई और मन ही मन सोचने लगी कि इतना बड़ा लंड आदमी का कैसे हो सकता है? मैंने बहुत बार चाहा लेकिन मेरी नज़र कमल के लंड पर से हट ही नहीं रही थी. उनके लंड को बेड शीट के नीचे से देखकर ही मेरी चूत गीली हो रही थी, लेकिन अब तक में किसी पराए मर्द से चुदी नहीं थी तो इसलिए में आगे नहीं बड़ पा रही थी और फिर जैसे तैसे करके में बाथरूम में चली गई और जब में वहां से वापस आई तो मैंने देखा कि उनका लंड अब भी वैसे ही तना हुआ है और अब में बहुत डरते डरते हुए उनकी सीट पर बैठ गई और बहुत हिम्मत करके उनकी आँखों में आंखे डालकर देखने लगी कि तभी वो मुझसे बोले..

कमल : क्यों रोशनी नींद नहीं आ रही क्या? वो मेरे उनके पास बैठते ही बोले.

में : जी हाँ, मुझे नींद नहीं आ रही, थोड़ा डर लग रहा है, लेकिन दोस्तों पता नहीं उनकी क्या हालत होगी?

फिर कमल मेरा हाथ पकड़ते हुए बोले कि डर लग रहा है तो एक काम करो थोड़ा पानी पी लो, मैंने थोड़ा पानी पिया और उसी बीच मैंने महसूस किया कि वो मुझसे थोड़ा और सटकर बैठ गए और फिर हम कुछ इधर उधर की बातें करने लगे. दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि कमल ने अपना लंड मेरी गांड से बिल्कुल सटा रखा था और मुझे अच्छा भी लग रहा था, लेकिन में उनसे कुछ कह नहीं पा रही थी. तभी इतने में एक स्टेशन आ गया. वहाँ पर कमल ने दो कप चाय ली और फिर हमने चाय पी और उस समय रात के करीब दो बज रहे थे. फिर चाय पीने के बाद कमल ने मुझसे कसम देकर पूछा कि रोशनी क्या तू मुझे एक बात सच सच बताएगी?

में : हाँ अगर मुझे पता है तो में आपको जरुर बताउंगी.

कमल : तू अभी कुछ देर पहले क्या देख रही थी? क्यों तुझे अच्छा लगा क्या? सच बोलना प्लीज़ अगर तुझे अच्छा लगा तो में तुझे और भी मज़ा दूँगा और अगर नहीं लगा तो में कुछ नहीं कहूँगा?

दोस्तों यह बात कहकर कमल ने मेरा एक हाथ अपने हाथों में लेकर ज़ोर से दबा दिया और थोड़ा मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखने लगे. फिर जैसे तैसे करके मैंने कहा कि हाँ मुझे अच्छा लगा तो बस फिर क्या था कमल मेरे ऊपर लट्टू हो गये? और अब उन्होंने मुझे अपनी गोदी में कैच कर लिया. फिर में एकदम से उनके ऐसा करने से बहुत आश्चर्यचकित हो गई क्योंकि वो मुझे अपनी छाती पर ज़ोर से दबाने लगे और जिसकी वजह से मेरी छाती उनकी छाती से दब रही थी और मुझमें एक अजीब सा अहसास ला रही थी और मेरे बदन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी और अब कमल मेरे बूब्स को दबाने लगे और मेरी चूत को मसलने लगे और मेरे कपड़े उतारने लगे और फिर वो खुद भी नंगे हो गये और अब उनका लंबा, मोटा, तना हुआ लंड मेरी आँखों के सामने उछल रहा था.

फिर उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लेकर अब सीट पर लेटा दिया और फिर मेरी चूत को चाटने लगे. दोस्तों वैसे तो मेरे पति ने भी मेरी चूत बहुत बार चाटी थी, लेकिन आज मुझे चूत चटवाने का असली मज़ा कमल से आया. मैंने उनके कुछ देर चाटने के बाद पानी छोड़ दिया और तब कमल ने मुझसे अपना लंड चुसवाया और में उनके लंड का टोपा अंदर बाहर करके उनका लंड चूस रही थी. मुझे उनका लंड पूरा मुहं में लेने में दिक्कत हो रही थी क्योंकि उनका लंड बहुत मोटा था. वो बहुत मुश्किल से मेरे मुहं के अंदर जा रहा था, लेकिन उतनी ही आसानी से मेरे हलक में पहुंच रहा था और ज्यादा लंबा होने की वजह से मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और मेरी आँखों से आंसू बाहर आने लगे थे.

फिर करीब कोई दो पांच मिनट लंड को चूसने के बाद कमल ने मुझको खिड़की के सहारे घोड़ी बना दिया और अब एक बार मेरी चूत चाटकर एक ही ज़ोर के धक्के में अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया और अब में दर्द होने की वजह से बहुत ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी थी और अपनी चूत को आगे की तरफ करके लंड को बाहर निकालने की नाकाम कोशिश करने लगी, लेकिन कमल की मजबूत पकड़ और मेरी चूत में फंसे हुए लंड से में थोड़ा भी आगे नहीं बढ़ सकी और अब वो मोटा और सख्त लंड मेरी चूत में लगातार आगे पीछे होने लगा था, लेकिन अब जल्दी ही मुझे भी बहुत मज़ा आने लगा और में सिसकियाँ लेने लगी उफफफफ्फ़ अहाह्ह्ह्हह्ह हाँ और ज़ोर से चोदो जीजू उुईईईईईईइ माँ मेरी चूत को और ज़ोर से मारो अहह्ह्हह्ह्ह्ह कमल में गई.

कुछ देर की चुदाई के बाद कमल ने मेरी चूत में अपना वीर्य डाल दिया और फिर वो कुछ देर वैसे ही मेरी चूत में अपना लंड रखकर रुक गया और उसके कुछ देर बाद कमल ने मेरी चूत से अपना लंड बाहर निकाला और मेरी चूत को साफ किया और अपना लंड भी साफ किया. फिर हम दोनों एक ही सीट पर पूरे नंगे बैठकर एक दूसरे की बाहों में आकर प्यार करने लगे और चूमने चाटने लगे. फिर उस पूरी रात को दूसरी सुबह तक हमने करीब तीन बार जमकर सेक्स किया. मुझे उसकी चुदाई में बहुत मज़ा आया और फिर में अपने कपड़े पहनकर बहुत थककर गहरी नींद में सो गई, लेकिन कमल नहीं सोए और दोपहर को जब में नींद से उठी तो मैंने देखा कि ट्रेन एक स्टेशन पर खड़ी हुई थी और कमल ने खाना मँगवाया और ख़ाना खाकर हम दोनों फिर से सो गये.

उस रात को फिर से एक बार मेरी उस ट्रेन में बहुत जमकर चुदाई हुई और इस तरह से में कमल से चुदते हुए अपने पति के पास पहुँच गई और वहां से वापसी में भी हमने दो बार बहुत मस्त चुदाई की और उसके बाद जब तक मेरे पति जॉब पर रहे में कभी उनके साथ नहीं गई, में बस छुट्टियों में ही उनसे चुदवाती और बच्चों की पढ़ाई का बहान करके में उनकी गैरमोजूदगी में कमल से बहुत मस्त चुदवाती रही और बहुत बार कमल ने मुझे अपने फार्म हाउस में भी अपने साथ ले जाकर वहां पर चोदा है और मैंने उसकी चुदाई के बहुत मज़े लिए और हर कभी कोई अच्छा मौका देखकर उससे चुदवाती रही और एक बार बरसात में भीगते हुए भी कमल से मेरी चुदाई हुई. उसने मेरी चूत को अब चोद चोदकर पूरी तरह से भोसड़ा बना दिया. दोस्तों ये थी मेरी चुदाई की सच्ची घटना.


Aai La Jhavla Ticha Student

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Chhoti bahan ki seal todi

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हेल्लो दोस्तों कैसे हो आप सभी लोग ? मैं उम्मीद करता हूँ की आप सभी लोग ठीक ही होगे और अपनी लाइफ को अच्छे से जी ही रहे होगे | आप लोगो चुदाई करना तो पसंद ही करते होगे अगर आप लोग चुदाई करना पसंद करते हो तो चुदाई का मज़ा तो ले ही रहे होगे | दोस्तों मैं आप सभी की तरह सेक्सी कहानी पढता काफी समय से आ रहा हूँ और मुझे सेक्सी कहानी पढना बहुत पसंद है | मैं जब कहानी पढता हूँ तो मेरे मन को बहुत ख़ुशी मिलती हैं | मैं आज जो कहानी आप लोगो के सामने पेश करने जा रहा हूँ ये मेरी पहली कहानी है | मैं चुदाई तो बहुत लड़कियों की है पर मुझे जो मज़ा इस चुदाई में आया था वो किसी चोदाई में नही |

मैं कहानी को शुरू करने से पहले अपने बारे में बता देता हूँ | मेरा नाम प्रताप है और मैं अभी 12 वीं में पढता हूँ | मेरी उम्र 20 साल है और मैं दिखने में बहुत गोरा हूँ | मेरी हाईट भी ठीक ठाक था जिससे मैं स्मार्ट भी लगता हूँ | मैं जो अब कहानी प्रस्तुत करने जा रहा हूँ मैं आप लोगो से आशा करता हूँ की आप लोगो को मेरी कहानी पसंद आएगी और इस कहानी को पढने में मज़ा तो खूब आएगा |

छोटी बहन की सील तोड़ी


जिस दिन मेरी दीदी की शादी थी | उस दिन जीजा जी के घर के सब लोग आये थे और उनकी छोटी बहन आकांशा भी आई थी | उस दिन जब मैंने आकांशा को देखा तो देखता ही रह गया | वो उस दिन ब्लैक कॉलर की ती शर्ट और जींस पहन रखी थी | वो मुझे उस दिन इतनी अच्छी लग रही थी की मेरी नज़ारे उस पर से हट ही नही रहीं थी | वो दिखने में बहुत सेक्सी लग रही थी | मुझे उससे पहली नज़र वाला प्यार हो गया था | मैं जब जीजा जी के पास जाता तो मैं उसे ही देखता पर वो मेरी तरफ देखती ही नही थी | मैं उस रात उसके आगे पीछे चक्कर लगता रहा जिससे वो कुछ घंटो बाद मेरी तरफ देखकर स्माइल दी | जब उसने मुझे देखकर स्माइल दी तो मुझे बहुत अच्छा लगा | मैं उस रात उसको प्रपोज करने का पक्का इरादा कर लिया | फिर जब सब कार्यक्रम ख़त्म हो गए तो मैंने उसे बात करने के लिए कहा तो वो बोली बोलो तो मैंने उससे कहा यहाँ नही अकेले में कुछ बात करनी है |

उस रात जब वो मुझसे मिलने आई तो मैंने उससे डरते डरते बता दिया की मैं तुम्हे बहुत प्यार करता हूँ | वो मेरे मुंह से ये बात सुनकर कुछ देर बाद बोली मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ और तब से करती हूँ जब तुम पहली बार मेरे घर गए थे | मैं उसके मुंह से ये बात सुनकर उसे अपनी बाँहों में भर लिया और वो मुझसे लिपट गयी | जब मैंने उसे अपनी बाँहों में भर लिया तो उसके बड़े बूब्स बीच में दब गए | जब उसके बड़े बूब्स मेरे से टच हुए तो मेरे अन्दर करंट लग गया | उसके बूब्स कपडे के ऊपर से इतने चिकने लग रहे थे तो अन्दर कितने सॉफ्ट होंगे |

भाई ने की सिस्टर की चुदाई


मैं उस रात उसके साथ ऐसे ही कुछ देर तक बात करने के बाद मैं घर चला गया और वो अपने भाई के पास जाकर बैठ गयी | फिर सुबह हुई और जो शादी की रस्मे थी पूरी की गयी और फिर दीदी को बिदा करने लगे | जब सब लोग जाने लगे तो आकांशा ने मुझसे बाय किया और चली गयी | अब मैं काफी काफी जब दीदी से बात करता तो आकांशा से बात कराने के लिए कहता | तब वो मेरी बाते आकांशा से करा देती थी | अब मैं और आकांशा एक दुसरे से बहुत प्यार करने लगे थे और मैं जब दीदी के घर जाता तो उसे किस भी करता और उसके बड़े चिकने बूब्स को भी दबा देता | मैं जब उसके बूब्स को दबाता था तो उसकी सांसे तेज हो जाती पर मैं कभी उसके घर रुक नही पता था जो उसकी चुदाई करता |

फिर एक दिन की बात है जब मैं उसके घर घुमने गया था तो उस दिन आकांशा मुझे अपने यहाँ घुमाने भी ले गयी | मैं उस दिन उसकी स्कूटी पर पीछे बैठ कर उसकी कमर में हाथ डाल कर बैठा था और वो स्कूटी चला रही थी | हम दोनों उस दिन घूम कर आये और तब तक दीदी ने खाना तैयार कर दिया | फिर सब लोग खाना खाने के बाद लेट गए और मेरा बिस्तर आकांशा के पास वाले रूम में दीदी ने लगाया था | मैं उस रात लेट गया और जब सब लोग सोने लगे तो मैं चुपके से आकांशा के कमरे में चला गया |

मैं और आकांशा एक दुसरे के लिपट गए और मैं उसको चूमने लगा | मैं आकांशा को चूम रहा था और चुमते हुए उसकी होठो पर अपनी होठो को रख दिया | जब मैंने अपनी होठो को रख दिया तो वो मेरे होठो को अपने मुंह में रख कर चूसने लगी | वो मेरी होठो को मुंह में रख कर चूसने लगी और मैं उसकी पतली रसीली होठो को अपनी होठो से दबा दबा कर चूस रहा था | मैं उसकी होठो को चूसने के साथ उसके बड़े और चिकने बूब्स को पकडे के ऊपर से मसलने लगा |

मैं जब उसके बूब्स को मसलने लगा तो उसके मुंह से जोरदार सिसकियाँ निकल गयी | मैं उसके मस्त चिकने बूब्स को दबा ही रहा था और उसकी जींस के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत को सहलाने लगा | वो मस्त तेज तेज सांसे लेने लगी और मैं उसकी वो सांसो को सुनकर और जोश में आ गया | वो अब गर्म हो गयी थी और मैं अब चोदाई करने के पुरे मूड में था की मुझे तभी लगा की कोई आ रहा है तो मैं चुपके से अपने कमरे में आ गया | तब मैंने देखा की मेरा जीजा बाहर घूम रहे हैं तो मैं भी पानी पीने के बहाने से बाहर आया | मैंने पूछा क्या जीजा अब इस टाइम घूम रहे हो वो बोले बस ऐसे ही और मुझसे पूछने लगे की तुम्हरे पसीना बहुत चला रहा है |

मैंने कहा कुछ नही जीजा लेटा था तो सपना अजीब देख लिया | वो बोले इस उम्र में सपने आते ही ज्यादा हैं और फिर वो चले गए | मैं उनको देखता रहा और जब वो अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिया तो मैं फिर से आकांशा के कमरे में चला गया | तब आकांशा ने मुझसे पूछा की तुम भैया से क्या बात कर रहे थे तो मैंने कहा कुछ नही मेरी जान | फिर मैं उसको बाँहों में लेकर बेड पर लेट गया | मैं उसको अपनी बाँहों में लेकर बेड पर लेटा था और उसके मस्त बड़े बूब्स को दबाते हुए उसके दूध को मुंह में रख लिया | मैं जब उसके दूध को मुंह में रख लिया तो उसके मुंह से अह अह अह अह…. हाँ हाँ उई हाँ उई हाँ उई हाँ उई….. सी सी उई सी सी उई सी हाँ हाँ उई…. की सिसकियाँ लेने लगी | वो मस्त आवाजे कर रही थी |

मैं उसके बूब्स को मुंह में रख कर जोर जोर से चूस रहा था | वो मेरे सर को अपने बूब्स पर दबा रही थी | मैं उसके मस्त बड़े और चिकने बूब्स को एक एक करके चूस रहा था और साथ में उसकी पैन्ट को नीचे खिसका दिया और उसके चूत में अपनी ऊँगली घुसा दी | जब मैंने उसकी चूत में ऊँगली घुसा दी तो उसके मुंह से जोरदार सिसकियाँ निकल गयी |

मैं उसकी चूत में अपनी ऊँगली को घुसा कर जोर जोर से अन्दर बाहर कर रहा था | वो हं हं हं हाँ हाँ…. सी सी उई सी उई सी हाँ…. अह अह उई हा उई उई…. की आवाजे करती हुई मुझे कस के पकडे हुए थी | अब वो सेक्स के नशे में डूब गयी थी और चुदने के लिए तरस रही थी | तब मैं बिना टाइम को बर्बाद करते हुए अपने कपडे निकाल दिए और उसकी चूत के दाने को लंड से फैला दिया | मैं उसकी चूत के दाने को फैला कर उसकी चूत में लंड को घुसाने लगा | दोस्तों उसकी वो पहली चुदाई थी जिसकी वजह से उसकी चूत में लंड नही घुस रहा था | उसकी चूत बहुत टाईट थी |

मैं दूसरी बार उसकी चूत में थूक लगा कर घुसाने लगा और थोडा सा लंड घुसा कर जोरदार धक्का मारा जिससे मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ते हुए अन्दर तक घुस गया | आकांशा की चूत से खून निकलने लगा और उसकी आँखों में पानी आ गया | दोस्तों दर्द की वजह से आकांशा का मुंह खुला का खुला ही रह गया | मैं उसकी होठो पर अपनी होठो को रख कर धीरे धीरे अन्दर बहर करने लगा | वो बिस्तर को पकड कर जोर जोर से इधर उधर हो रही थी |

फिर वो कुछ देर बाद हाँ हाँ उई हाँ उई हाँ उई हाँ उई….. सी सी उई सी सी उई सी हाँ हाँ उई…. की आवाजे करती हुई चुदने लगी | मैं उसकी पतली कमर को हाथ में पकड लिया और जोर जोर से अन्दर बाहर करते हुए उसको चोदने लगा और वो मस्त होकर चुदने लगी | मैं उसकी चूत में जितने जोर से धक्का मारता वो उतने ही जोर से उछल जाती | दोस्तों जब मेरा लंड उसकी बच्चे दानी में जाकर रगड़ता तो उसके जिस्म में आग लग जाती जिससे वो उछल जाती | मैं उसकी चूत में ऐसे ही 15 मिनट तक धक्के मारता रहा जिससे उसकी चूत का पानी निकल गयी और वो झड़ गयी | उसके 2 मिनट बाद मैं भी झड़ गया | फिर मैंने उसकी होठो पर प्यारी से किस की और कपडे पहन कर अपने रूम में आ गया जहाँ मेरा बिस्तर दीदी ने लगाया था | उस चुदाई के बाद मैं उसको 3 बात और चोद चूका हूँ |


जीजा जी का मोटा लंड और मैं कच्ची कली

जीजा जी का मोटा लंड और मैं कच्ची कली

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मेरा नाम पायल है, मैं एडल्ट स्टोरीज पर आज पहली बार कहानी लिख रही हूँ। मेरे पास कोई कहानी थी भी नहीं जो लिखती पर आज मुझे मौक़ा मिल गया है। आज मैं आपको अपनी सेक्स कहानी बताने जा रही हूँ। ये कहानी मेरे और मेरे जीजा जी के बिच की है। आज मैं आपको खुलकर बताउंगी की कैसे मैं अपने जीजा जी का मोटा लंड अपनी चुत में ले पाई। क्यों की मैं इस लायक थी नहीं की मोटा लंड अपनी चूत में ले सकूँ। पर वासना चीज ही ऐसी है जो की चुदने को मजबूर कर देती है।

 

आइए सीधे कहानी पर आते हैं क्या कैसे और क्यों हुआ था। मेरी दीदी की शादी पिछले साल ही हुई है। मेरे जीजा जी और दीदी दोनों भोपाल में रहते हैं। मैं लखनऊ में अपनी मम्मी के साथ रहती हूँ। मैं दो बहन ही हूँ। तो घर में अब अकेली अपने पापा मम्मी के साथ रहती हूँ। मेरे पापा मम्मी दोनों बैंक में जॉब करते हैं।

 

तो जीजा जी अपने कंपनी के काम से लखनऊ हेड ऑफिस आये थे। इसलिए दीदी भोपाल में ही रह गयी और जीजा जी यहाँ आ गए। तो मुझे मौक़ा मिल गया जीजा जी के साथ टाइम स्पेंड करने के लिए। मम्मी पापा सुबह नौ बजे ही घर से चले जाते थे और वो वापस छह बजे आते थे। तब तक मैं और जीजा जी दोनों घर में ही रहते थे। ऑफिस का काम वो दो बजे तक कर लेते थे। और एक दिन छोड़ कर एक दिन उनको जाना होता है। ुका ट्रेनिंग थे इसलिए।

 

तो एक दिन की बात है हम दोनों ही लेट कर बात कर रहे थे। तो जीजा जी ने मुझे पूछा की आपको कोई बॉयफ्रेंड है। तो मैंने कहा दिया नहीं है। उन्होंने कहा फिर तो आपको आजतक कोई छुआ नहीं होगा। मैंने कहा नहीं आजकल किसी ने भी मेरे किस भी अंग को नहीं छुआ। कभी ट्रैन पर या बाजार में या बस पर कुछ आवारा लोग छू दिए होंगे तो अलग बात पर मैंने कभी भी किसी को छूने नहीं दिया।

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जीजा जी बड़े ही हॉट और स्मार्ट हैं तो उनके तरफ बार बार मैं आकर्षित भी हो रही थी। क्यों की इसके पहले मैंने कभी भी किसी लड़के के साथ अकेली और एक घर में एक कमरे में और एक बेड पर नहीं लेटी थी। तो मुझे भी हल्का हल्का शुरुर हो रहा था। तो मैंने भी पूछा की क्या आपने दीदी के अलावा किसी और लड़की या औरत के साथ सेक्स किया। तो उन्होंने कह दिया की हां उन्होंने अपनी भाभी और अपनी बहन के साथ भी सेक्स सम्बन्ध बनायें है। पर उन्होंने ये भी कहा की तुम दीदी को मत बताना।

 

मैंने कहा कैसा लगता है अलग अलग के साथ सेक्स करना। तो उन्होंने कहा मजा इसी में ही है की आप अलग अलग सेक्स करो। आप खुद ही सोचो एक ही खाना रोज खाने को दिया जाये तो क्या आप खाओगी या बदल बदल कर खाओगी। मैंने कहा पर खाना और सेक्स अलग अलग होती है। तो उन्होंने कहा जब भी मौक़ा मिले कर लेने चाहिए।

 

तो मैंने कहा तो आज आपको लग रहा होगा की मैं अकेली हूँ मुझे भी आपके साथ सेक्स सम्बन्घ बना लेने चाहिए।मैंने मजाक में बोली और हसने लगी। तो उन्होंने कहा अगर आप मुझे अपना विर्जिनिटी दे डौगी तो मैं आपको वो दूंगा जो आप कहोगी। तो मैंने कहा क्या आप मेरे मम्मी पापा को मना लोगे। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती हूँ वो लोग इसके लिए तैयार नहीं है।

 

तो उन्होंने कहा बस इस छोटी सी बात के लिए मैं आपकी कसम खाता हूँ। सोच लो की आपका काम हो गया। सच तो या है की मैं खुद ही चुदना चाह रही थी। क्यों की मेरी दो दो सहेली पिछले महीने ही अपनी सील तुड़वाई है और वो भी अपने जीजा से ही। तो ऐसा मौक़ा मुझे भी शायद नहीं मिलता। माँ बाप घर पर नहीं और मैं अकेली और मेरे साथ जीजा जी।

 

मैं उनके तरफ देखने लगी और उन्होंने अपना ऊँगली मेरे होठ पर रख दिया। मैंने अपनी आँखे बंद कर ली वो मेरे होठ को छूने लगे। धीरे धीरे मेरी साँसे तेज होने लगी। अब उन्होने मुझे खींच कर अपने करीब ले आया और एक रंग मेरे पर रख दिया मैं सीधी थी और वो मेरे तरफ टांग चढ़ा लिए। उन्होंने अपना हाथ मेरी चूचियों पर रख दिया। मैं कुछ ना बोल पाई। पर मेरी साँसे और धड़कन तेज तेज चलने लगी।

 

उन्होंने मेरे गाल पर हौले से किस किया। फिर दूसरे गाल पर फिर होठ पर। जैसे ही उनका होठ मेरे होठ पर आया मैं पागल सी हो गयी। मेरे तन बदन में आग लग गयी। मेरा गला सूखने लगा। उन्होंने धीरे धीरे मेरे होठ को चूसने लगे। पर अभी तक मैं काठ की भांति कुछ भी नहीं कर रही थी। जो कर रहे थे वही कर रहे थे।

 

पर जैसे ही उन्होंने मेरे सलवार की डोरी को खोलने की कोशिश की मैंने उनका हाथ पकड़ लिया। मैंने उनको किस करना चाह रही थी। उन्होंने जैसे ही फिर से मेरे होठ पर अपना होठ रखा। मैंने उनके होठ को चूसने लगी। फिर क्या था मैं उनके बालों को सहलाते हुए उनके चौड़ी छाती पर हाथ फेरने लगी।

 

उन्होंने अपना शर्ट उतार दिया। अब मैं उनके ऊपर चढ़ गयी और छाती को सहलाती हुई उनके होठ को चूसने लगी। हम दोनों के लिप लॉक कर लिए। अब उन्होंने मुझे निचे किया और मेरे सारे कपडे उतार दिए। मेरी चूचियां संतरे के साइज की है बहुत ही टाइट उसपर से पिंक निप्पल बहुत छोटी छोटी। मेरी चूत गोरी है बाल नहीं नहीं।

 

उन्होंने मेरे जिस्म के साथ खेलना शुरू कर दिया। मैं पागल होने लगी सिसकारिया मेरे मुँह से निकलने लगी। उन्होंने मेरे एक एक अंग को छुआ और चूमा। अब बारी आई चूत चाटने की तो वो निचे आ गए। और दोनों पैरों को अलग अलग कर के पहले मेरी चूत को सहलाया फिर चाटने लगे। मैं बार बार गीली हो रही थी। पानी निकल रहा था चूत से।

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वो चाट रहे थे। जब वो फिर से ऊपर आये तो मैं हैरान हो गयी क्यों की उनका लौड़ा बहुत ही बड़ा और मोटा था। मैं डर गई की मेरी चूत की साइज बहुत छोटी है। इतना मोटा लंड कैसे जाएगा पर वासना से भरी ही थी मुझे अपनी चुत फटने का डर नहीं था। मैं छोड़ना चाह रही थी।

 

उन्होंने अपने लंड में थूक लगया मेरे दोनों पैरों को अलग अलग कर दिया। मेरी गांड के निचे तकिया लगाया। और फिर मेरी चूत में लंड से रगड़ने लगे। फिर पोजीशन लेकर घुसाने की कोशिश करते पर मेरी चूत में दर्द बहुत ज्यादा होने लगता इसलिए मैं पीछे हो जाती। ऐसा ही होता रहा करीब पांच मिनट तक।

 

फिर वो एकदम से मेरी चूचियों को सहलाते हुए लंड को चुत पर सेट किया और पहले शांत रहे उसके बाद जोर से झटका दिया मेरी चूत फट गयी। खून भी निकलने लगा। मैं रो गयी पर उन्होंने फिर से सहलाया और कहा की ऐसा होता है पहली बार। अब तुमने अपनी विर्जिनिटी खो दी है तुम्हारा सील टूट गया है। अब्ब दर्द नहीं होगा।

 

फिर धीरे धीरे वो अंदर बाहर करने लगे लंड को। मैं भी मजे लेने लगी। वो अब मेरे जिस्म को सहलाते हुए चोदने लगे। मैं भी गांड उठ उठा कर चुदवाने लगी। अब मजे लेने लगी। दर्द के साथ साथ मजा भी आने लगा। वो मेरी चूचियों को मसलते हुए चुदाई करने लगे। करीब एक घंटे तक मुझे चोदा फिर सारा वीर्य मेरे मुँह में गिरा दिया।

 

मुझे नमकीन नमकीन वीर्य स्वादिष्ट लगने लगा। इसलिए मैंने उनके लंड में जितना भी वीर्य लगा था मैं साफ़ कर दी अपने जीभ से चाट कर। फिर हम दोनों एक दूसरे को पकड़ पर सो गए। उसके बाद तो हम दोनों रोजाना चुदाई करने लगे।

 

जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी

देसी अंकल सेक्स स्टोरी मेरी चुदाई की है. मेरी दीदी के ससुर ने मुझे चोद कर मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी. ये सब कैसे हुआ? इस फॅमिली सेक्स कहानी में पढ़ें.

हाय ऑल! मैं अंजलि प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं अभी 21 साल की हूँ. मैं अभी पिछले 2 महीने से ही अन्तर्वासना की देसी सेक्स कहानी की दुनिया से जुड़ी हूँ.

adultstories को पढ़ कर मुझे मानो एक ऐसा पटल मिल गया था, जिधर मैं अपनी सारी बात खुल कर जाहिर कर सकती थी.

चुदाई की बातें पढ़ कर मेरा मन चुदाई के लिए मचलने लगा था जबकि पहले मुझे चुदाई के नाम से ही बहुत डर लगता था.

अब मैं अपनी सहेलियों के बीच सेक्स की बातों को सुनकर काफ़ी मज़े लेती हूँ.

जब मैं कल एक सेक्स कहानी पढ़ रही थी, तो अपनी चुत रगड़ रही थी. उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था.

ये देसी अंकल सेक्स स्टोरी 2 साल पहले की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी. उस समय मैं अपने जीजू के घर गई थी क्योंकि उनके घर पर उस टाइम कोई नहीं रहने वाला था.

चूंकि मेरे जीजू के छोटे भाई की वाइफ को गांव वाले घर में बच्चा हुआ था, तो जीजू दीदी और बच्चे गांव जाने वाले थे.

जीजू के पापा जो लखनऊ में सरकारी नौकरी में थे, वो एक पुलिस स्टेशन में दारोगा थे, तो उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी, इस वजह से वो लखनऊ में ही रह गए थे.

मेरे पापा ने मुझसे कहा- तुम उनके घर लखनऊ चली जाओ, वहां उनके लिए खाना पीना और देखभाल कर लेना.

जीजू और उनकी फैमिली भी यही चाहती थी.

फिर मैं अगले दिन ट्रेन से निकल गई. चूंकि मैं भी अपनी बी.ए के पहले वर्ष के एग्जाम दे चुकी थी, तो बिल्कुल फ्री थी.

जब मैं वहां शाम को पहुंची, तो मेरी तबीयत खराब हो गई थी. ये जून का महीना था और ट्रेन में काफ़ी गर्मी थी, जिस वजह से मुझे कुछ असहज लगने लगा था.

लखनऊ पहुंचते पहुंचते मेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब हो गई थी. तो मेरे जीजू के पापा मुझे अपनी बाइक से डॉक्टर के पास ले गए.

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उस दिन जीजू काफी व्यस्त थे और उनको दूसरे दिन सुबह दीदी को लेकर गांव निकलना था.

दोस्तो, अब इधर मैं अपने जीजू के पापा के बारे में कुछ बता देती हूँ. वो बहुत ही हैंडसम हैं. उनकी उम्र लगभग 55 साल की रही होगी. चूंकि वो एक दारोगा थे, तो उनकी बॉडी काफ़ी मजबूत थी और उनकी हाईट भी 6 फिट से कुछ ज्यादा ही थी.

मैं उनके साथ बाइक पर जा रही थी, तभी उन्होंने मुझे अपनी कमर पकड़ने को बोला.

मैंने सहज भाव से अंकल की कमर पकड़ ली.

उनकी कमर पकड़ते ही मुझे कुछ अजीब सा लगा और उनकी बॉडी की मर्दाना सुगंध से मैं मदहोश सी हो गई.

फिर डॉक्टर से चैकअप कराने के बाद मैं वापस घर आ गई.

रात में हम सब खाना खाकर सो गए. अगले दिन मेरे जीजू और दीदी की ट्रेन थी, तो वो लोग भी गांव निकल गए.

अब घर में मैं और मेरे जीजू के पापा ही अकेले रह गए थे. चूंकि मेरी दीदी की शादी के एक साल पहले ही मेरे जीजू की मम्मी की मृत्यु हो चुकी थी और जीजू के भाई और उसकी वाइफ पहले से ही गांव में थे.

दूसरे दिन मैं सुबह 9 बजे सोकर उठी और चाय आदि बनाई.

मैंने जीजू के पापा को चाय दी तो वो बोले- मैं आज शाम को खाना बाहर से ही ले आऊंगा, तो तुम घर पर खाना मत बनाना.

मैंने कहा- ठीक है अंकल.

मैं उनको अंकल जी बुलाती थी. मुझे उनसे बहुत शर्म आती थी, मैं उनके सामने ज्यादा कुछ नहीं बोलती थी.

अगले 7 दिन तक सब कुछ नॉर्मल चला. फिर एक दिन रात में नींद खुली, तो मैंने कुछ आवाज़ सुनी.

जब अपने रूम से बाहर आई, तो देखा कि ये आवाज़ तो अंकल जी के रूम से आ रही है.

तो मैं वहां गई.

उनके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, जब मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.

अंकल जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और एकदम नंगे होकर अपने लंड को हिला रहे थे. उनके एक हाथ में उनकी वाइफ की फोटो थी और फोटो देख कर वो लंड हिला रहे थे.

ये सीन देखकर मैं उधर से भाग कर अपने रूम में आ गई.

उस रात में अंकल जी के बारे में ही सोच रही थी. मेरी सांसें तेज तेज चल रही थीं क्योंकि मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था.

उस दिन से मैं अंकल जी के बारे में ना चाहते हुए भी सोचने लगी.

मैं अपने मन में मानती थी कि ये रिश्ता सही नहीं होगा. लेकिन मेरा मन उनका मोटा लंड देख कर मचल उठा था और मान ही नहीं रहा था.

मुझे उनके बारे में सोच कर बहुत मज़ा आ रहा था. चूंकि मैं अभी तक कुंवारी कमसिन कली थी, तो मुझे काफ़ी उत्तेजना हो रही थी.

इस तरह दस दिन बीत गए. अब मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अंकल जी को पटाकर उनसे अपनी प्यास बुझाऊंगी आख़िर उन्हें भी एक चुत की ज़रूरत थी.

उनकी वाइफ की डेथ हुए लगभग 6 साल हो चुके थे.

फिर मैं हर दिन कोशिश करने लगी कि अंकल जी के सामने कामुक बन कर रहूँ.

जब वो घर आते तो मैं उनको देख कर स्माइल करती और उनके साथ बाहर घूमने को कहती.

वो भी मुझे अपने साथ बाइक पर बिठा कर ले जाते और मैं भी उनकी कमर पकड कर उनके मर्दाना जिस्म को स्पर्श करके अपने अन्दर की आग को भड़काती रहती.

उधर अंकल जी भी मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़ते हुए महसूस करके मुझे प्यार से देखने लगे थे.

एक रात जब वो घर आए, तो बोले- मैं बहुत थक गया हूँ. जल्दी से नहा लेता हूँ, फिर कुछ देर आराम करूंगा.

मैं हां करके चुप हो गई.

अंकल जी नहाने के बाद अपने रूम में चले गए.

बहिन के ससुर ने सील तोड़ी

मैं तेल की बोतल लेकर जानबूझ कर उनके शरीर कि मालिश करने चली गई.

वो मुझसे बोले- क्या हुआ?

मैंने कहा- आप थक गए हो, मैं आपकी मालिश कर देती हूँ. आपको आराम मिल जाएगा.

वो मना कर रहे थे.

लेकिन मैंने ज़िद की तो वो मान गए.

वो पेट के बल लेट गए और मैं उनकी पीठ पर तेल टपका कर अपने नर्म मुलायम हाथों से मालिश करने लगी.

उनकी बॉडी एकदम पहलवानों के जैसी थी. मैं उनके जिस्म की तपिश से बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

मैंने अंकल के पूरे शरीर पर अपने हाथों से मालिश की.

अब मैं उनकी टांगों पर पहुंच गई थी. मैंने महसूस किया कि वो अंडरवियर नहीं पहने हुए थे चूंकि अभी नहा कर आए थे.

और उनके मुँह से शराब की महक आ रही थी. अंकल जी ने शराब पी रखी थी.

मैं मुस्कुरा उठी.

मैंने जानबूझ कर अपना एक हाथ उनकी तौलिया के अन्दर कर दिया और उनकी गांड पर मालिश करने लगी. अंकल जी ने भी अपने पैर फैला दिए.

कुछ देर के बाद मेरी चुत बिल्कुल गीली हो गई और ना जाने मुझे क्या हुआ, मैं वहां से जाने लगी.

तभी अंकल जी उठे और उन्होंने मेरे एक हाथ को पकड़ लिया. जब मैं उनकी तरफ मुड़ी, तो वो मुझे अपनी गोद में खींच कर किस करने लगे.

मुझे अजीब सा लगा और मैं उन्हें मना करने लगी, लेकिन वो नहीं माने.

हालांकि मैं खुद भी यही चाहती थी. मैंने अपना विरोध बंद कर दिया और आंख बंद करके उनकी गतिविधियों को महसूस करने लगी.

अंकल जी ने मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने बेड पर लिटा दिया और मुझे किस करने लगे. उनके मुँह से शराब की तेज स्मेल आ रही थी, वो नशे में थे.

आज मुझे ये महक काफी मस्त लग रही थी.

फिर वो अपने एक हाथ से मेरी चुत को दबाने लगे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी लेकिन चुदने का मन भी कर रहा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया.

फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और ब्रा को अलग कर दिया. अंकल जी मेरे मम्मे चूसने लगे.

वो जोर जोर से मेरे दूध चूस रहे थे, इससे मुझे मीठा मीठा दर्द होने लगा. मुझे बेहद मज़ा भी आ रहा था.

इसके कुछ देर बाद अंकल जी ने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी कमसिन चुत देख कर बोले- तुम अभी वर्जिन हो?

मैं बोली- जी.

तो वो बोले- आज मैं तुम्हारी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा.

मैं शर्मा गई और अपना मुँह उनके सीने में छिपा कर उनसे चिपक गई.

फिर अंकल जी ने अपनी तौलिया हटा दिया और पूरे नंगे हो गए.

मैं उनका लम्बा और मोटा खड़ा लंड देख कर सहम गई लेकिन चूत में चुनचुनी हो रही थी कि बस किसी तरह से इस लम्बे लौड़े से चुद लूं.

अंकल जी मेरी चुत चाटने लगे.

अपनी कुंवारी चुत पर एक मर्द की जीभ का अहसास पाते ही मेरे पूरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया था.

मेरे शरीर में सिहरन होने लगी तो अंकल जी को मजा आने लगा और वो पूरे मनोयोग से मेरी कमसिन चुत का नमकीन पानी चाटते हुए चुत के अन्दर तक जीभ देने लगे.

मैंने अंकल जी से पूछा- मुझे सनसनी सी क्यों हो रही है?

तो वो बोले कि ये तुम्हारा पहली बार है इसीलिए तुम मस्त हो रही हो.

कोई पांच मिनट तक की चुत चटाई में मैं पूरी तरह से पागल हो गई थी.

अंकल जी अब समझ गए थे कि लौंडिया गर्मा गई है.

उन्होंने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.

अंकल जी ने अपने लंड को मेरी चुत कि फांकों में रखा और रगड़ने लगे.

मुझे मर्द के लंड का अहसास अपनी चुत पर हुआ तो मैं अपनी गांड उठाने लगी.

अंकल जी ने लंड को चुत पर दबाया तो लंड चुत के अन्दर नहीं गया. क्योंकि मेरी चुत का छेद बिल्कुल छोटा सा था और अंकल जी लंड गधे जैसा हब्शी लंड था.

फिर उन्होंने अपने लंड पर एक क्रीम लगाई और चुत में डालने लगे.

मैं बोली- अंकल कुछ प्राब्लम तो नहीं हो जाएगी?

अंकल जी बोले- कुछ नहीं होगा. बस शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. फिर मज़ा ही मज़ा आएगा.

ये कह कर उन्होंने अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया.

अंकल जी का लंड अभी थोड़ा सा ही चुत के अन्दर गया था कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं रोने लगी.

वो रुक गए और मुझे किस करने लगे.

जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो फिर अंकल जी ने एक बार अपनी गांड हिलाई और झटका दे दिया.

इस बार अंकल जी का आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया था. उनके पूरे शरीर का वजन मेरे ऊपर आ गया था.

मैं उनकी बॉडी से दब चुकी थी उनकी जांघें भी काफ़ी मजबूत थीं. वो एक पहलवान मर्द थे.

थोड़ी देर तक अंकल जी मेरे ऊपर चढ़े रहे.

फिर उन्होंने मुझसे पूछा- अब दर्द कुछ कम हुआ?

मैं मरी हुई कुतिया की आवाज में बोली- जी.

उन्होंने फिर से अपनी गांड हिलाई और ताकत से पूरा लंड अन्दर पेल दिया.

मुझे वो धीरे धीरे चोदने लगे.

कुछ धक्कों के बाद मुझे भी चुदने में मज़ा आने लगा.

अंकल जी समझ गए थे कि अब मुझे मज़ा आ रहा है तो वो अपनी गांड जोर जोर से हिलाने लगे और मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

सच में मुझे मज़ा तो बहुत आ रहा था लेकिन शर्म भी आ रही थी. क्योंकि मैं एक 55 साल के मर्द से चुद रही थी, वो भी मेरे जीजू के पापा से.

करीब दस मिनट तक मुझे चोदने के बाद अंकल जी ने अपना लंड मेरी चुत से निकाल लिया.

मैं भी उठी और देखी कि मेरी चुत से खून निकल रहा था. मैं खून देख कर रोने लगी.

तो उन्होंने मुझे समझाया कि ये सामान्य सी बात है कुंवारी लड़कियों की चुत की सील टूटने के कारण ऐसा होता है. अब तुम एक पूर्ण औरत बन चुकी हो.

मैं शांत हो गई.

फिर उन्होंने मेरी चुत को साफ़ किया. उसके बाद मुझे पेशाब लगी, तो मैं उठ कर जाने लगी.

वो बोले- रूको मैं भी चलता हूँ.

अंकल जी मुझे अपनी गोद में ले गए और उन्होंने भी मेरे सामने पेशाब की. मैंने भी उनके लंड से मूत की धार देखी और खुद भी मूत कर खुद को साफ़ किया.

उन्होंने चाय बनाई और हम दोनों ने चाय पी.

मुझे चलने में बहुत प्राब्लम हो रही थी तो चाय पीने के बाद वो मेरे बगल में लेटकर मुझे किस करने लगे.

कुछ देर बाद हम दोनों गर्म हो गए तो अंकल जी मुझे फिर से चोदा.

उस रात हम दोनों ने तीन बार चुदाई का मजा लिया. हर बार अलग अलग स्टाइल में चुदाई हुई. कभी अंकल जी मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदते तो कभी कभी गोद में लेकर, कभी डॉगी स्टाइल में चोदने लगते.

पूरी रात मैं उनके कमरे में ही नंगी चुदती रही. अंकल जी भी मुझे अपनी बांहों में लेकर सो गए.

अगले दिन वो ड्यूटी भी नहीं गए. हमने पूरे दिन सेक्स किया.

मैं लखनऊ में 24 दिन तक रही और हमने इस दौरान कई बार सेक्स किया. अंकल जी ने मुझे शराब पिला कर भी खूब चोदा. मेरी गांड भी मारी.

इसके बाद जब भी मैं वहां जाती हूँ तो हम दोनों मौका मिलते ही चुदाई कर लेते थे.

सच में दोस्तो, मुझे अंकल जी से चुदने में बहुत मज़ा आने लगा था, इसलिए मैंने आज तक किसी लड़के को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया.

मैं उनसे सच में बहुत प्यार करती हूँ, अभी मैं उनसे रोज फोन पर बात करती हूँ.

 

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