Articles by "बाप बेटी की chudai की सेक्सी कहानी"

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छोटी बहन को पापा से चुदवाया



2 दिनों तक शिखा (मेरी छोटी बहन) और मैं चुदाई के चक्कर में शिखा की चूत की कली खिलने से जो खून निकला उस चादर को हम बदलना भूल गये और माँ पापा शादी से लौट आये।

चादर देख माँ बोली- चादर पर ये क्या लगा है?

तो शिखा तो सहम गयी.

पर मैंने कह दिया- माँ, वो कल रात लाल रंग गिर गया ड्राइंग करते समय।

तो माँ तो मान गयी.

पर पापा हमें शक की निगाहों से देख रहे थे।

खैर पापा और माँ थकान की वजह से वहां से चले गये।

जाते ही शिखा बोल पड़ी- पापा को शक हो रहा है भैया!

मैंने कहा- हाँ, मुझे भी पता है।

शिखा- तो अब क्या करें भैया?

फिर मैंने उसे समझाया कि शिखा अगर यूं ही पापा को शक रहा तो हम चुदाई नहीं कर पाएंगे, इसका सिर्फ एक ही हल है।

शिखा- क्या?

“अगर तू पापा को भी अपने इस जवान जिस्म का मजा चखा दे और अपनी चूत का उन्हें दीवाना बना दे तो काम बन जायेगा” मैंने कहा।

शिखा- भैया आप पागल हो, क्या कोई बेटी अपने बाप से चुदवाती है?

फिर मैंने उसे अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी साईट पर पर स्टोरी पढ़ने को कहा और कुछ बाप-बेटी पोर्न दिखाई।

तो वो बोली- रुको सोचने दो।

मैंने कहा- ठीक है, तू शाम तक बता.

तब तक मैं छोटा कैमरा ले आया और माँ पापा के कमरे में लगा दिया।

शाम को खाने के बाद माँ पापा सफर की थकन के कारण जल्दी ही सो गए.

और फिर मैं शिखा के पीछे रसोई में चला गया. वहां वो सिंक के पास खड़े होकर बर्तन साफ कर रही थी. उसने टॉप और लैगी पहना था और लैगी पीछे से अंदर तक उसकी गांड में घुस गयी थी जिससे मेरी बहन की गांड उभर के आ रही थी.

यह देखकर मेरा मन उसे चोदने को हुआ और मैंने उसे पीछे से जाकर कस के जकड़ लिया. वो भिंच गयी और कहा- मुझे काम करने दो!

पर मैंने अपना लण्ड उसकी गांड की गहराई तक घुसा दिया और पीछे से ही उसके दूध निचोड़ने लगा और पूछा- तो बहन तूने क्या सोचा है जो तुझे सुबह कहा था?

शिखा ने कहा- भैया आप सही थे, मुझे भी अब पापा का लण्ड चाहिए. उसे मैं चूस कर उसका रस पीना चाहती हूँ जैसे और बाकी लड़कियों को भी उनके पापा का लण्ड मिला है।

मैं समझ गया कि बाक़ी लड़कियां मतलब सुबह जो कहानी और पोर्न दी थी उसकी बात कर रही है।

मैंने कहा- हाँ मेरी छोटी बहन, मैं भाई होने के नाते तेरी सारी इच्छा पूरी करूँगा।

और मैंने उसकी लैगी और पैंटी घुटनों तक सरका दी और पीछे से ही उसकी चूत में लण्ड सेट किया और चुदाई करने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगा तो शिखा से बताया.

तो वो बोली- नीचे मत गिराना!

और जल्दी से घूम कर नीचे झुक कर मेरी बहन ने लण्ड को मुंह में ले लिया. उसने नाजुक से कोमल होंठों से जैसे ही लण्ड पर सहलाया, मेरी तेज़ी से धार निकल पड़ी और उसने सारा पानी पी गयी।

मैंने शिखा से कहा- अब तू पापा को अपनी मटकती गांड दिखा और थोड़े ढीले ज्यादा गले के टॉप पहन के घूम घर में! पापा भी एक मर्द हैं, देखना उनके मन में भी बेटी के लिए वासना जरूर जागेगी।

कुछ दिन बाद, मैंने कैमरा निकाला. शिखा और मैंने हर रात की फुटेज देखी और जिसमे पापा ने एक बार भी माँ को नहीं चोदा, कई बार पापा ने कोशिश की पर माँ ने हाथ झटक दिया।

शिखा और मैं खुश हुए कि अब पापा को अब उनकी बेटी की चूत मिलेगी। फिर शिखा वहाँ से चली गयी और मैं दिन के समय की भी रिकॉर्ड हुई फुटेज देखने लगा.

तभी मेरी नज़र वीडियो में माँ पर पड़ी जो सिर्फ एक तौलिया लपेटकर बाथरूम से आ रही थी. दोस्तों ऐसा भरा पूरा बदन देखकर मेरा मन हिल गया.

chhoti bahan ko papa se chudawaya

मेरी माँ का फिगर 34 32 34 होगा मुझे पता नहीं, पर उनका रंग गोरा है बिल्कुल मेरी बहन के तरह या ये कहूँ कि मेरी माँ की चूत भी शिखा की तरह ही बिल्कुल गोरी होगी जिसमें चूतड़ों के बीच से गुलाबी रंग निखर रहा होगा।

मेरे मन में माँ के लिए वासना जाग उठी और सोचा घर में ही एक चूत और है और मैं फालतू में ही शिखा के लिए तरसता हूँ। मैं माँ को नँगी देखना चाहता था इसलिए मैंने इस बार बाथरूम में कैमरा लगा दिया।

फिर 2 दिन बाद मैंने कैमरे से फुटेज देखी. पर कैमरे में तो कुछ और ही रिकॉर्ड हुआ था मैंने तुरन्त शिखा को रिकॉर्डिंग दिखायी।

उसमें हम भाई बहन ने देखा कि पापा अपनी बेटी शिखा की उतारी हुई ब्रा और पैंटी को सूंघ रहे हैं और उससे अपना लण्ड रगड़ रहे हैं. फिर उन्होंने उसमें अपना सारा माल निकाल कर वहीं छोड़ दिया।

“अच्छा तो ये मलाई पापा की थी.” शिखा फुसफुसायी।

मैंने पूछा- मतलब?

शिखा- अरे भैया, मतलब मैंने देखा तो था अपनी पैंटी पर ये वीर्य! पर मुझे लगा कि ये आपने किया होगा इसलिए मैंने आपको नहीं बताया। पर भैया पापा का लण्ड देखो न … तुमसे बड़ा है मुझे उसे चूसना है।

मुझे थोड़ी जलन हुई और मैंने कहा दिया- चल जा यहां से अपना काम कर! बड़ी आयी पापा का लण्ड लेनी वाली।

शिखा मुस्कुरायी और चली गयी।

और मैंने जो असली काम के लिए कैमरा लगाया था वो फुटेज देखने लगा।

मैंने देखा माँ नंगी होकर ही नहाती है पर माँ की चूत में थोड़े बाल थे जिसे वो साफ़ कर रही थी. मुझे उन्हें वीडियो में नंगी देखकर बस ऐसा मन किया कि अभी रसोई में जाऊ और उनकी साड़ी उठाकर घोड़ी बनाकर चुदाई कर दूँ.

पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था इसलिए बाथरूम में गया और मैंने उनका वीडियो देखकर उनकी अभी वाली धोने के लिए उतारी पैंटी को सूंघने और चाटने लगा.

मुझे वो खुशबू बहुत मादक लग रही थी और पैंटी से थोड़ा थोड़ा उनकी चूत का पानी का भी स्वाद आ रहा था.

दोस्तो, अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो बस एक बार करके देखो.

मैं मुठ मारकर बाथरूम से बाहर आया और दोपहर का खाना खाते हुए माँ के बोबे और गांड ही देख रहा था।

यह बात मैंने शिखा को नहीं बतायी कि माँ को मैं चोदना चाहता हूँ. न जाने वो क्या सोचे।

फिर खाना खाते हुए पापा ने कहा- कल मेरी छट्टी है, चलो घूमने चलते हैं।

पर माँ बोली- नहीं, कल मैं कविता(माँ की सहेली) के साथ बाहर जा रही हूँ, शाम तक ही लौटूंगी।

मुझे मौका अच्छा लगा और मैंने भी कह दिया- कल मेरी भी एक्स्ट्रा क्लास है तो घूमना नहीं हो पायेगा।

तभी शिखा समझ गयी और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरायी। शायद शिखा समझ गयी की कल ही उसे पापा का लण्ड मिलेगा

फिर मैंने रात में शिखा को समझा दिया की कल माँ तो रहेगी नहीं, तुझे ब्रा और पैंटी नहीं पहनना है बस ऊपर एक पतली सी समीज पहन ले और नीचे नेट वाली ओढ़नी लपेट ले।

“ठीक है भैया!” शिखा ने शर्माकर कहा।

दूसरे दिन 12 बजे”

पापा हॉल में टीवी के सामने सोफे पर बैठे थे, उनका न्यूज़ देखने का समय यही था.

तभी मैंने शिखा को आवाज़ दी- शिखा, मैं जा रहा हूँ क्लास में! बाय!

और मैं चुपके से हाल वाली खिड़की पर चला गया।

तभी शिखा मुझे बाय बोलने हॉल में आयी और पापा ने उसकी तरफ देखा और देखते ही रह गये.

पापा ने अपनी नज़रें हटाई और टीवी ऑन किया.

पर मैंने टीवी पर बाप बेटी चुदाई हिंदी साउंड पर पोर्न लगा रखी थी जो फुल साउंड पर चलने लगी. उसमें आवाज आ रही थी- पापा मुझे चोदो और जोर जोर से चोदो, फाड़ डालो इस आपकी ही दी हुई अमानत को!

ऐसी आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी.

तभी पापा और शिखा दोनों टीवी बन्द करने झपटे. पर शिखा पापा के ऊपर गिर गयी जिससे उसकी ओढ़नी खुल गयी और पंखे की वजह से दूर उड़ गई।

शिखा पापा के ऊपर ऐसे ही नंगी पड़ी रही.

और अब तक पापा का 7 इंच लण्ड भी टनटना चुका था जो पैंट के अंदर से ही शिखा की चूत पर गड़ रहा था और इधर पोर्न टीवी पर आवाज़ के साथ चालू ही थी।

पापा ने शिखा से कहा- उठो।

पर शिखा ने पापा का लण्ड पकड़ते हुए बोला- ये गड़ रहा है।

शिखा के मुलायम हाथ पापा के लण्ड के ऊपर … पापा को एकदम भारी उत्तेजना हुई.

पापा ने उसे उठाया और अपनी पैंट खोल कर कच्छा नीचे करते हुए कहा- तुम्हें बेटी … ये चुभ रहा है. और इसे लण्ड कहते हैं।

शिखा ने आँखें बंद कर ली.

तभी पापा ने शिखा की समीज उतारकर उसे पूरी नंगी कर दिया और उसे हाथ पकड़कर सोफे बैठा दिया.

फिर पापा ने अपनी बेटी से कहा- देखो टीवी पर … जो हो रहा है, इसे सेक्स कहते हैं।

शिखा ने कहा- मुझे सब पता है पापा।

तो पापा खुश हो गए और बोले- चलो तो फिर!

और शिखा की दोनों टांगें उठाकर फैलायी और अपना लण्ड चूत पर सेट किया और शिखा को चोदने लगे।

बड़े लण्ड की वजह से शिखा चिल्ला रही थी. तब भी पापा नहीं रुके और चोदते रहे. फिर थोड़ी देर बाद मेरी रांड बहन उछल उछल कर चुदवाने लगी और कहने लगी- पापा, मुझे आपका लण्ड चूसना है प्लीज।

पापा ने अपना लण्ड बेटी की चूत से निकाला और उसके मुंह में दे दिया।

शिखा बहुत मज़े से चूस रही थी, पूरा लण्ड मुंह में ले रही थी।

कुछ देर बाद पापा बोले- हट, मुझे झड़ना है.

तो मेरी रंडी बहन ने कहा- मुझे पिलाओगे नहीं क्या पापा?

पापा मुस्कुरा दिये और कहा- ठीक है.

और अपनी बेटी शिखा के मुंह में सारा माल दे दिया और शिखा पूरा चाट चाट कर पी गयी

शायद शिखा को मुठ पीने में मज़ा आने लगा है।

तभी उनके बीच दूसरा राउंड शुरू हुआ.

पापा अपनी बेटी शिखा को चोद ही रहे थे कि मैं वहां हाल में चला गया जहां बाप बेटी की चोदन क्रिया चल रही थी।

पापा मुझे देखकर चौंक गये और शिखा को भी अंदाज़ा नहीं था। पापा ने कहा- बेटा, तुम जल्दी आ गये?

यही सही मौका था मैंने पूछ ही लिया- आप अपनी बेटी को चोद रहे हैं? माँ को चोदने को नहीं मिलता क्या?

पापा ने कहा- बेटा, मैं तेरी माँ को बिना कंडोम के चोदना चाहता हूँ पर तेरी माँ कहती है कंडोम लगाओ. इसी अनबन के बीच में तेरी माँ को चोद नहीं पा रहा।

फिर पापा मुझे सॉरी सॉरी कहने लगे।

तभी शिखा आगे आयी और बनकर कहा- भैया अगर आप भी मुझे चोदना चाहते हो तो चोद लो. पर माँ को मत बताना।

फिर क्या था, मैंने पैंट उतारी और अपनी बहन की चुदाई ज़ोर ज़ोर से करने लगा. आखिर इतने देर से देखने के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

मेरे और शिखा के झड़ने के बाद हमने रेस्ट लिया।

पर पापा कहाँ मानने वाले थे, वो शिखा के बदन का हर हिस्सा चूम रहे थे बोबे, चूत, गर्दन गांड कलाई पेट सब कुछ।

फिर मैंने पापा से कहा- हम साथ में चोदें?

शिखा डर गयी- नहीं बाबा!

वो नहीं नहीं करने लगी

पर पापा ने समझाया कि बेटी बस थोड़ा सा दर्द होगा, फिर मज़े ही मज़े।

तो मैं लेट गया. मेरे ऊपर शिखा आ गयी. मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया.

अब बारी पापा की थी, पापा ने तेल डाला पहले बेटी की गांड में … फिर अपने लण्ड में लगाया।

मैंने शिखा के होंठों को अपने मुंह में भर लिया ताकि वो चिल्लाये न!

फिर पापा ने अपनी बेटी की गांड में धीरे धीरे लंड डालना शुरू किया।

शिखा छटपटाने लगी.

पर पापा ने अपना आधा लण्ड अंदर डाल दिया और हम थोड़ी देर रुक गए।

शिखा की आँखों में आँसू थे.

फिर जब हम नॉर्मल हुए तो पापा ने एक झटके और दिया और पूरा लण्ड अंदर कर दिया.

इस बार शिखा चीख पड़ी- मार डाला रे दोनों बाप बेटे ने मिल कर।

फिर कुछ देर बाद मेरी बहन नार्मल हुई और हमने खूब चुदाई की. शिखा बहुत थक गयी और वो कमरे में चली गयी और सो गई।

माँ आयी शाम को 6 बजे।

“शिखा कहाँ है?” माँ ने पूछा।

“उसकी तबीयत खराब है, खाना उसको कमरे में दे दूंगा आज मैं!” पापा ने कहा।

रात को खाना खाने के बाद माँ सोने चली गयी।

मैं और पापा बाहर टहल रहे थे. तभी अचानक पापा बोल पड़े- मैं शिखा के रूम में जा रहा हूँ, तू तेरी माँ पर नज़र रख।

मैं बोला- मैं उन्हीं के साथ सो जाता हूं. अगर माँ उठी तो मैं तुरंत आपको काल कर दूंगा।

पापा बोले- ठीक है. और चले गए.

nanhee – nanhee kachchi umr ki bachchiyan

kachchi umr ki bachchiyan


यह वाकया काफी पुराना है, वर्षों पहले का। अखबार पढ़्ते हुए किसानों की समस्या, टिड्डी दल द्वारा अनाज खाने व सहारा के रेगिस्तान जैसे अकाल का ध्यान आया तो पुराना वाकया याद आ गया। इसका संबंध रोहिंग्या शरणार्थियों से है। बरमा, अब म्यांमार देश ने मुसलमान रोहिंग्यो को निकाल फेंका। उन्हें ज़्यादातर बांग्लादेश ने शरण दी। पर कुछ रोहिंग्या कोलकाता [कलकत्ता] तक आ गए। वहाँ से घिसटते फिसटते हुए वे उस जगह के पास पहुँच गए जहां मेरा रहना और सेक्सी मस्ती करना होता है। यह कोलकाता का बहुत पोश इलाका है। मुझे मेरे कारिंदों से खबर मिली कि उनकी हालत बहुत बुरी है। भारत सरकार उन्हें वापस खदेड़ना चाहती है। उन्हें रोटी व कपड़ों के लाले पड़े हुए हैं।

इसी प्रसंग में एक दिन एक बूढ़ी औरत मेरे पास आई। उसके साथ तीन मासूम बच्चियाँ थीं। कच्ची उम्र थी उनकी— यही कोई 5 साल, 7 साल, और 9 साल। बूढ़ी औरत बोली मुझसे, ” मैं इन्हें बेचना चाहती हूँ। मेरी बहूरानी बरमा देश मिलिटरी झगड़े में मर गई और हम शरणार्थी बन इधर आ गए। ये उसकी अभागी तीन बेटियाँ हैं, आपके संग रहेगी तो इनका दानापानी हो जाएगा, और इन्हें बेचने से जो पैसे मिलेंगे उससे मैं अपना बुढ़ापा निकाल लूँगी। आप धर्मात्मा हो; मुझ गरीब पर रहम करो ” । मैंने बच्चियों का एकटक मुआयना किया। वो मैलेकुचैले कपड़ों में थी व भूखों मर रही थी। मेरा ध्यान उस समय न तो उनके सेक्स पर गया और न ही बच्चियों के शरीर की गठान पर। सबसे पहले मैंने उन्हें फलों का रस पीने को दिया। फिर स्नान करवाया; फिर बूढ़ी सास को खाना खिलाया व बच्चियों को भी। फिर मैंने बुढ़िया को अच्छे पैसे दिए, उन्हें खरीद लिया। तीनों बच्चियाँ एकदम मरियल थीं। मैं उन्हे बाज़ार ले गया व उनके नाप के अच्छे कपड़े खरीद कर उन्हें पहना दिया। बच्चियाँ हारी थकीं थीं इसलिए उनके सोने का और आराम का इंतजाम किया।

मैंने अपनी नौकरानी को बुलाया। उसने इन बच्चियों के अंग टटोले और बोली: ” सर, ये आपके काम की नहीं। ” मुझे गुस्सा आ गया। मैंने कहा — तुम्हें इससे कोई मतलब नहीं। बच्चियाँ हैं, मासूम हैं। एकदम मरियल है। इनको माँ की याद आती होगी। यह बात सोच मैंने तत्काल एक 27 वर्ष की औरत को ढूंढा। वह बच्चेवाली थी अर्थात उसे बच्चा हुए छह महीने ही हुए थे पर मैंने उसे इन तीन बच्चियों की सेहत सुधारने व इन्हें अपनी माँ की याद न आए इसलिए इस 27 साल की औरत को रख लिया कि वो माँ की तरह इन बच्चियों की परवरिश करे। पैसा हाथ का मैल है।

नन्ही – नन्ही कच्ची बच्चियाँ


छह महीने बीत गए। बच्चियों ने अच्छा खाया पीय जिससे उनके अंग निखरने लगे। मैंने इस ओर देखा भी नहीं। अब मैंने उनकी पढ़ाई-लिखाई की तजबीज की। अच्छे पब्लिक स्कूल भेजा। एक से एक फेशन के कपड़े सिलवाए उनके लिए। उन्हें डांस सिखाने मास्टरनी रखी। एक दिन मैंने देखा कि वो 27 वर्ष वाली माँ इन्हें छोड़ गई और मुझे भी। अब तो मुझे ही इनका ध्यान रखना था। इसलिए मैं ध्यान रखने लगा। सुबह मैं इन्हें इनके अंग पकड़ कर व्यायाम कराता; दोपहर काल में रेस्तरां में इन्हें खाना खिलाता, शाम को होटल में खाना खिलाता, इन्हें सिनेमा दिखाता। बच्चियाँ खुश थीं। वे मुझे पापा, पापा कहने लग गईं थीं जबकि उम्र अनुसार मैं उनका दादा या नाना था।

रात को इन बच्चियों को मैं अपने संग ही सुलाता। एक बड़ी बच्ची मेरे पीछे चिपट सोती, दो मेरे आगे। अदल -बदल भी होता। दिन में मैं अक्सर इन्हें गोद में बैठाता।

अब यह कहने की बात नहीं कि मैं सेक्सी नेचर का हूँ। पर मैंने इन बच्चियों पर पाप की नजर नहीं डाली, कम से कम अभी तक। मेरी नौकरानी मधु 14 साल की है और उसने अपनी दो फ्रेंड और बुला डाली, एक तेरह वर्ष की व एक ग्यारह वर्ष की। इस उम्र की छोकरिया भी मेरे लिए हराम नहीं थी, सेक्स का मज़ा लेने के लिए और उनके साथ नंगी मस्ती करने वास्ते। इन 13 वर्ष व 11 वर्ष की दो छोरियों के नाम थे उषा और निशा। मैं इन दोनों की गांड का मज़ा चखना चाहता था। मेरा तरीका ये था कि मैं इन दोनों कों नंगी करने के बाद इनसे कहता कि दोनों एक दूसरे की चूत से लिपट-चिपट जाय। फिर मैं पहले उषा की और फिर निशा की गांड मारता, सलीके से। जब निशा की गांड मारता तब साथ-साथ उषा की गांड में अंगुल पेलता और जब उषा की मारता तब निशा की गांड में अंगुल धच धचकती। कुछ समय बाद मैंने दो मोटीताजी 40-42 वर्ष की दो औरतों का प्रबंध भी किया। एक मेरी गांड से सट कर आगे धक्का मारती और दूसरी उषा और निशा की गांड से बारी -बारी सट दोनों को धक्का लगा-लगा उत्तेजित करती। इससे गांड मारने का मज़ा बढ़ जाता।

मैं हर छोकरी के तीनों छेद खँगालता। कई बार कुछ ज्यादा मोटी ताज़ी छोकरी भी मँगवाता। एक बार एक मोटे-मोटे मम्मोंवाली स्कूल गर्ल मँगवाई। आह ,उसके मोटे मम्मों को रौंदने का भरपूर मज़ा मिला।

मेरा ये खेल ये रोहिंग्या शरणार्थी बच्चियाँ देखने लगीं थी भले ही छिप कर। वैसे भी सही बात कब तक छिपती।

जैसा कि मैंने पहले बताया रात को मैं इन तीनों शरणार्थी बच्चियों के साथ हमबिस्तर होता। एक रात बड़ी वाली छोकरी मेरे पीछे लग सोई थी और मँझली व छोटी मेरे आगे लग सटी हुई थी। नींद में मेरा एक हाथ छोटी वाली छोरी की चूतड़ पर सरक गया था। ये रात के लगभग एक बजे की बात है जब मैंने महसूस किया कि मँझली वाली छोरी के हाथ मेरे लंड पर और बड़ी वाली छोरी के हाथ मेरी गांड को टटोल रहे हैं। मैं चिहुँक उठा और जागने के साथ ही चिल्लाया: ” यह क्या बदतमीजी है, हटाओ अपने हाथ ” । तब बड़ी वाली छोकरी बोली, ” प्पपा, हमने आपके नेक काम देख लिए हैं, अब बुरा मत मानो। जो काम आप 11 व 13 बरस की छोरी के साथ कर सकते हो वो हमारे साथ भी तो कर सकते हो; करो, करो ना, प्यारे पापा!! ” यही बात अपनी कोमल मासूम आवाज में दोनों छोटी बच्चियों ने भी मुझे कही। मैं कुछ देर सोचता रहा; फिर बोला, ” तो क्या तुम भी इस लाइन का मज़ा लेना चाहती हो? ” छोटी व मँझली छोरी प्यार से चिल्लाई : ” हाँ, पापा, बिलकुल; क्या हमें ये मज़ा लेने का हक नहीं? बोलो ना, पापा?? ” ।

कोई चारा ना देख मैं उठ खड़ा हुआ और रोशनी ऑन कर दी। तीनों ने ही मेरे लौड़े को सहलाने के लिए अपने-अपने हाथ मेरी पेंट की ज़िप से सटा दिये। मैंने तुरंत ही सबसे छोटीवाली को मादरजात नंगा किया, और बोला, ” आजा, गुड्डी, देख अपने पापा का मस्त कलंदर लौडा!! ” । अब मँझली व बड़ी ने एक दूसरे को नंगी किया, और हम चारों एकदम धुर नंगे थे। सबसे छोटीवाली ने मेरे अंडकोश चाटने शुरू किए और बाकी दो मेरे लौड़े के अगल-बगल लग गईं। रात के डेढ़ बज गए थे इस वक्त। मैंने भी मौका देख तीनों की गांड टटोली। मैं मस्ती में नंगा हो, उलट-पुलट हो रहा था और तीनों बच्चियाँ मेरे पेट पर कूद रही थीं और फिर थोड़ी देर बाद तीनों ने मिलकर मेरे नितंबों पर झपेटा गाड़ा। सबसे छोटी वाली ने मेरी गांड की दरार से निकल कर, मेरे सामने आ, मेरे लंड को कड़क से पकड़ लिया। ” आह, क्या कोमल रसीले हाथ थे उसके। आह, क्या उसकी मुट्ठी की गरमी थी। आहा, आहा। ”

मेरे से रहा नहीं गया और मैंने छोटी वाली को सिर के बल उलटा कर उसकी टांगें चौड़ी की व अपना भयंकर लौड़ा उसकी नन्ही चूत की दरार में टिका दिया, और घप्प से उसकी नन्ही फुद्दी में घुसेड़ दिया। वह दर्द से चिल्लाई, मगर मैं अपनी गांड व पेट उछाल-उछाल धर्म-धक्के मारने लगा। छोरी का दर्द असह्य था पर मेरा लौड़ा भी मजबूत था। फिर तो एक के बाद एक मैंने तीनों का कचूमर निकाल दिया।

Beti Ki Rasili Choot Dekh Man Bahaka

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सभी adultstories.co.in प्रेमियों को राना का नमस्कार! मैं कई सालों से adultstories.co.in पर कहानी पढ़कर अपने लंड की प्यास बुझाता हूँ.
अन्तर्वासना पर यह मेरी पहला लेख है. दोस्तो, यह कोई कहानी नहीं बल्कि हकीकत है.
कई लोग अन्तर्वासना पर कहानियां पढ़कर इस सोच में रहते हैं कि क्या असल में ये कहानियाँ सत्य होती होंगी. बाकी का तो पता नहीं … पर मेरी ये कहानी बिलकुल सत्य है.
इस कहानी में मैं अकेला ही एक किरदार हूँ. मगर आप लोगों की मदद से अगली बार इस कहानी में दूसरा किरदार भी हो सकता है. मेरे लिए सिर्फ ये एक कहानी नहीं बल्कि एक सुझाव भी होगा. और आगे का रास्ता भी.

मेरी बीवी बहुत सुंदर है. मेरी एक ही औलाद है मेरी बेटी … वो अठारह साल की हो चुकी है, उसका नाम है आरज़ू. वो भी अपनी माँ पर गयी है, बहुत खूबसूरत है. छोटी छोटी चूचियां और मुलायम सी चूत है मेरी बिटिया की. उस मुलायम चूत पर हल्के से बाल उगने शुरू हो गये हैं.
बात कुछ दिन पहले की है. उस दिन मेरी पत्नी घर पर नहीं थी. रात को हम दोनों बाप बेटी ने खाना खाया और बिटिया सो गयी.

मैं लेपटोप पर गन्दी मूवी देखने लग गया. पता नहीं मुझे क्या हो गया और मैं बिटिया के कमरे में गया. वो कम्बल ओढ़ कर सोयी हुई थी. मैं अपनी बेटी का कम्बल हटा कर उसकी चूत देखने की कोशिश करने लग गया. पर दिखी नहीं. फिर मैंने उसकी सलवार ब्लेड से फाड़ दी और हल्के हल्के हाथ से उसका सलवार हटा दी. फिर मैंने अपनी बेटी की अंदर से कच्छी भी ब्लेड से काट दी. उसके बाद मुझे जो दिखा मैं पागल हो गया. 18 साल की लड़की की इतनी सुन्दर चूत … क्या चूत थी. छोटी सी और मुलायम … हल्के हल्के बाल!

मेरा दिमाग जैसा पगला सा गया, मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था. और लंड मानो अभी बिटिया की चूत में घुस कर सील तोड़ दे. मगर खुद पर काबू रखा और हाथ लगा कर उसे धीरे धीरे सहलाने लगा. मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत की दरार में फिरायी तो मेरी बेटी के बदन में जैसे सिरहन सी हुयी. ऐसी चूत नसीब वालों को देखने को मिलती है.

Baap Ne Beti Ko Choda Masti Se


मैं लगातार पर धीमे धीमे हल्के हाथ से अपनी बिटिया की चूत की दरार सहला रहा था. कुछ ही देर में मेरी उंगली गीली हो गयी. इतनी मस्त और रसीली चूत तेरी मेरी बिटिया की … क्या कहूँ! कोई भी ऐसी चूत के लिए तरस जाये.

उस रात मैंने अपनी बिटिया की चूत देख देख कर चार बार मुठ मारी. जब भी वो नहाने के लिए जाती तो मेरा मन करता कि मैं अपनी बेटी को नंगी नहाते हुए देखूं इसलिए मैंने बाथरूम में फोन का कैमरा छुपा कर लगा दिया. फिर 1 बजे के करीब वो नहाने के लिए गयी.

जब मेरी जवान बेटी नहा कर बाहर निकली तो मैंने अपना फोन चेक किया और देखा पहले मेरी बिटिया आरज़ू ने अपनी काली लेगी उतारी. उसकी गोरी और मुलायम टाँगें बहुत सेक्सी थी. मेरी बिटिया की टाँगें बहुत हॉट और सेक्सी थी. आरज़ू ने ब्लेक कलर की पारदर्शी पेंटी पहन रखी थी जिसे उसने अब उतार दिया था. अब वो नीचे से पूरी नंगी थी, उसकी चूत पर छोटे-छोटे बाल थे और उसे देखकर तो जैसे मेरे बदन मे बिजली सी मचल गयी थी.

फिर आरज़ू ने अपना कुर्ता उतारा और अब वो सिर्फ एक सफेद कलर की पारदर्शी बनियान में थी और फिर कुछ देर बाद वो भी नीचे उतर गयी. अब मेरी बिटिया आरज़ू पूरी नंगी थी और मैं विडियो देख कर अपना लंड पकड़कर बैठा सब देख रहा था.

अब आरज़ू की छोटे-छोटे और मासूम सी चूची देखकर तो मैं पागल ही हो गया था. अब आरज़ू को नंगा देखने के बाद मैं पागल हो चुका था. फिर कुछ देर सोचने के बाद मैं वापस बाथरूम में गया. और उसकी उतारी कच्छी और बनियान को चूमने और चाटने लग गया.

उसके बाद उसकी विडियो दुबारा देख मैंने अपनी बिटिया के नाम से मुठ मारी.

दोस्तो, इस कहानी में यहीं तक!

अब आपको लोगों से सवाल पूछना चाहता हूँ कि क्या मुझे अपनी बिटिया को चोदना चाहिए. मैं चाहता हूँ अपनी बिटिया को सेक्स के पूरे मजे दूँ. अगर आप लोगों को लगता है कि चोदना चाहिए तो प्लीज मुझे कमेंट्स करके बताएं.

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