Andhe Jeth Ka Mota Lund dekha Bathroom Me

Andhe Jeth Ka Mota Lund dekha Bathroom Me

बाथरूम में अंधे जेठ जी का मोटा लंड देखा

बाथरूम में अंधे जेठ जी का मोटा लंड देखा,Andhe Jeth Ka Mota Lund dekha Bathroom Me



मेरा नाम नंदनी है और मै बिहार की हु l मै adultstories|co|in की नियमित पाठक हूँ और ये मेरी पहली सच्ची कहानी है जो में आपको बताने जा रही हूँ। में जब 20 साल की थी, तब मेरी शादी हो गई थी। में बिहार के एक छोटे से गाँव में रहती हूँ। हमारे यहाँ गवना यानी शादी के कुछ सालों के बाद विदाई की प्रथा है l

मेरा गवना 3 साल के बाद हुआ था, इससे पहले में भैया भाभी की चुदाई चोरी छुपकर देखकर बिल्कुल परफेक्ट हो गयी थी बस प्रेक्टिकल करना ही बाकी था।अब वो दिन आ ही गया और अब में बिल्कुल जवान हो चुकी थी। मेरी चूत के आस पास घने बाल, बड़ी चूची, मस्त गांड और में एक ही नज़र में लंड खड़ा करने वाली मस्त माल हो गयी थी।

में आपको बता दूँ कि मेरे पति तीन भाई है, मेरी शादी दूसरे नंबर के भाई से हुई थी और पहले नंबर वाले बेचारे जन्म से ही अंधे थे इसलिए उनकी शादी नहीं हुई थी और छोटा अभी पढ़ाई कर रहा था। मेरे कोई ननद नहीं थी और सास ससुर का देहांत एक एक्सिडेंट में हो गया था, तो कुल मिलाकर उस घर में एक अकेली औरत में ही थी।

अब शुरू होती है मेरी चुदाई की दास्तान। अब सुहागरात के दिन उन्होंने मेरा घूँघट उठाने से पहले ही वो अपने कपड़े खोलने लगे और अब मुझे उनकी भूख का अंदाज़ा हो गया था। में भी भूखी थी तो मैंने भी अपने सारे कपड़े खुद उतार लिए और अब में भी पूरी तरह से नंगी थी और वो भी पूरे नंगे थे|

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उनका लंड पहले से ही खड़ा था और अब वो मुझे देख रहे थे और में उन्हें देख रही थी। फिर बिना कुछ बोले वो पलंग पर आए और स्मूच करने लगे, कभी वो मेरे लिप को तो कभी मेरी कुंवारी चूत को चूस रहे थे। अब मुझसे भी रहा नहीं गया और मैंने भी उनका लंड पकड़ लिया।

उनका लंड कितना गर्म था, बिल्कुल गर्म लोहे जैसा लाल और पता ही नहीं चला कि कब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गये और ओरल सेक्स दोनों तरफ से शुरू हो गया। फिर वो पलटे और अपने लंड को झट से मेरी कुंवारी चूत में पेल दिया। अब मुझे बहुत दर्द हुआ और मेरी चूत में से खून भी निकल रहा था।

में बहुत कांप रही थी, लेकिन दर्द उनको भी हो रहा था। अब उनके लंड के ऊपर का हिस्सा पीछे जा चुका था और वो भी तड़प रहे थे l लेकिन चुदाई की आग ने सारा दर्द चूस लिया था और हमारी चुदाई फिर से शुरू हो गयी। अब मज़ा दुगना आ रहा था|

हम दोनों पहली बार सेक्स कर रहे थे इसलिए हम बहुत जल्दी ही झड़ गये, उसका सारा वीर्य मेरी चूत से बाहर टपक रहा था। अब मेरा मन किया कि में उसे चाट लूँ और मैंने मेरी चूत में उंगली डाल दी तो उसमें से बहुत सारा वीर्य निकला और मैंने उसको चाटा, तो उसका क्या स्वाद था?

फिर हम दोनों सो गये और फिर सुबह में जल्दी जाग गयी और उन्हें भी जगाया। फिर उन्होंने सबसे पहले मुझसे रात की चुदाई के बारे में पूछा, तो में शर्माकर नहाने चली गयी। फिर थोड़ी देर के बाद मेरा देवर कॉलेज चला गया और घर पर में, मेरे पति और सूरदास यानी उनके बड़े भाई रह गये।

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अब चुदाई का ये सिलसिला चलता रहा और जैसे जैसे समय बीतता चला गया में और गर्म और वो और ठंडे होते चले गये। फिर भी हमारी सेक्स लाईफ अच्छी चल रही थी। तभी मुझे एक खुश खबरी ये मिली की उनकी नौकरी पटना सचिवालय में हो गयी|

अब सभी बहुत खुश थे और में भी बहुत खुश थी कि हमें पटना में रहने को मिलेगा और वहाँ बहुत मौज मस्ती करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी प्रोब्लम ये थी कि अभी उन्हें सरकारी रूम नहीं मिला था और सूरदास का भी ध्यान रखना था।

अब हफ़्तों तक मेरी चुदाई नहीं हो पाती थी, तभी एक दिन मैंने सूरदास का काला लंड देखा, क्योंकि जब वो बाथरूम में गये थे और अंधे होने के कारण वो ठीक से कुण्डी नहीं लगा पाए थे। में पहले से ही वहाँ पेशाब करने चली गयी थी तो पहले तो में उन्हें देखकर डर गयी, लेकिन बाद में मुझे याद आया कि वो तो अंधे है और में वहीं उनके सामने पेशाब करने लगी।

मैंने उन्हें पेशाब करते समय उनका काला लटका हुआ लंड देखा जो कि बिना तनाव के ही इतना लंबा था कि में उसे देखती ही रह गई। अब रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी, मुझे चुदाई की आग लगी थी और मुझे बार-बार सूरदास का लंड याद आ रहा था|

तभी मैंने फ़ैसला किया कि आज मुझे अपनी चुदाई की आग सूरदास से ही पूरी करनी है। फिर में उनके कमरे में गयी, वो लूँगी पहने हुए थे और ढीला वाला अंडरवेयर, तो में उनका लंड बाहर निकालकर उसे हिलाने लगी तो सूरदास जाग गये और पूछा कि कौन है? तो मैंने अपना परिचय दिया।

फिर उन्होंने पूछा कि यहाँ क्या कर रही हो? तो मैंने बताया कि आपकी मालिश कर रही हूँ, उन्हें स्त्री पुरुष के सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था, शायद अंधे होने के कारण वो ये सब नहीं जानते थे। अब में समझ गयी थी और सोचा कि अब तो और मज़ा आयेगा और में उनका लंड ज़ोर-ज़ोर से रगड़ने लगी|

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लेकिन उनका लंड तो खड़ा होने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर लगभग एक घंटे तक चूसने और रगड़ने के बाद उनका लंड खड़ा हो गया, उनका लंड बहुत ही लंबा था। फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उनके लंड पर बैठ गयी और खुद चुदवाने लगी। उनका लंड इतना मोटा और तगड़ा था कि में तुरंत ही झड़ गई, लेकिन मेरी भूख अब भी शांत नहीं हुई थी और हमारी चुदाई कुल एक घंटे तक चली और उनका वीर्य निकल गया। फिर उन्होंने पूछा कि ये कैसी मालिश है?

तो मैंने कहा कि इस मालिश को चुदाई कहते है, तो उन्होंने कहा कि बहुत मज़ा आया और तुम इसी तरह मेरी रोज़ मालिश करना, फिर मैंने कहा कि में बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे आपकी सेवा का मौका मिला। अब में ज़्यादा सूरदास से ही चुदती हूँ और अब मुझे एक लड़की भी है, लेकिन मुझे ये पता नहीं है कि ये किसकी है सूरदास की या मेरे पति की? और अब तो में अपने देवर से भी चुदती हूँ और अब में कलयुग की द्रौपदी बन गयी हूँ।

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