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चूत छोटी और कुनबे के लंड बड़े बड़े

Chut chhoti aur kunbe ke land bade bade

Chut chhoti aur kunbe ke land bade bade


चूत छोटी और कुनबे के लंड बड़े बड़े - Chut chhoti aur kunbe ke land bade bade, घर में चुदाई का सिलसिला , रिश्तों में होती है चुदाई , परिवार के लोग ही तोड़ते है कुवारी लड़की की सील , बड़े ही सिखाते है चोदना और चुदना.


उस दिन मैं बड़े रोमांटिक मूड में थी।  अचानक मेरी दोस्त का फोन आ गया।  मैंने कहा हां बोल भोसड़ी की रेशमा तुझे इतने दिनों के बाद मेरी याद आयी ? ,,,,,,,,,,,,,अभी तक क्या माँ चुदा रही थी तू अपनी,,,,,,,,,,,,,, ? वह बोली - नहीं  यार, ऐसा कुछ नहीं है।  मैं शहर के बाहर चली गयी थी और ऐसे लोगों से घिरी थी की तुझसे बात करने का मौक़ा ही नहीं मिल रहा था।  तू बुर चोदी गालियों से बात करती है और मैं भी तो ऐसे में कोई एकांत जगह चाहिए न ?
अच्छा हां बता ,,,,,,,,,,,,,,,,? अच्छा ये बात है उसकी माँ का भोसड़ा ,,,,,,,,,,,,,,,,,? उसकी बात मत करो यार ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मैं छोटे लोगों से और छोटे लण्ड वालो से बात नहीं करती ,,,,,,,,,,,,,,? तुझे मालूम है की मुझे छोटे लण्ड बिलकुल पसंद नहीं है,,,,,,,,,,,,,,,? एक तो मेहनत करके कोई लड़का पटाओ और जब खोल कर देखो तो  लण्ड साला छोटा मिलता है, बहन चोद ,,,,,,? ऐसे में मेरी माँ चुद जाती है ,,,,,,,,,,,,,,झांटें सुलग कर राख हो जातीं हैं मेरी,  बहन चोद,,,,,,,? मेहनत पर पानी फिर जाता है यार ,,,,,,,,? अब तो मैं पहले ही पूंछ लेती हूँ की तेरे लण्ड का साइज क्या है ? ,,,,,,,,,,,, अगर पसंद आया तो दोस्ती करती हूँ वरना गांड पर लात मार कर भगा देती हूँ, ,,,,,,,,,,,,,,,,,,तू क्या करेगी ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,देखने में हैंडसम है तो क्या लण्ड तो छोटा है।,,,,,
,,,,,,,,,,,तेरी तो गांड पहले ही फट जाती है ,,,,,,,,,,,,,,माँ चुद जाती है तेरी लण्ड देख कर ,,,,,,,,,,,,? मुझे देखो, मादर चोद ,,,,,,,,,,,, लण्ड जब तक 8" का न हो तब तक मैं हाथ नहीं लगाती ? ,,,,,,,,,,,,,हां ये बात तो है ,,,,,,,,,,, ऐसे लण्ड ढूंढने के लिए बड़ी मसक्कत करनी पड़ती है, रेशमा ,,,,,,,,,,,,,,माँ चुद जाती है मन माफिक लण्ड ढूंढते ढूंढते ,,,,,,,,,, हां बिलकुल करूंगी मसक्कत क्योंकि चूत तो बुर चोदी  बिना लण्ड के रह नहीं सकती न ?
मैंने अपनी बात ख़तम की और फोन बंद करके पीछे मुड़ी तो देखा की मेरी अम्मी जान सामने खड़ी हैं।  मैं थोड़ा सहम गई की मेरी गन्दी गन्दी बातें और गालियां अम्मी जान ने सुन लीं हैं।  अब तो डांट पड़ेगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

    अम्मी बोली - हाय मेरी हुमा बेटी,  मुझे नहीं पता था की इतना कुछ जानती हो ? इतनी अच्छी अच्छी बातें कर लेती हो और खुल कर लेती हो ?
    मैंने कहा - नहीं अम्मी जान बस यूं ही अपनी दोस्त से बातें कर रही थी।  अब दोस्ती में कुछ इधर उधर की बातें हो ही जातीं हैं,  अम्मी जान ?
    हां आज मुझे मालूम हुआ की दोस्तों से कैसे ही बातें की जातीं हैं।  पर बेटी तुम कुछ 'लण्ड' वगैरह की बातें भी कर रहीं थीं ?
    अरे अम्मी जान, बस ऐसे ही बातों बातों में हो जाता है। अब कॉलेज की लड़कियां सब इसी तरह की  बातें करतीं हैं तो मैं भी बोल लेती हूँ।
    अरे बेटी हुमा मैं तो खुद तुमसे ये सब बातें करने वाली थी।  पर मैं तुम्हे जवान होने का इंतज़ार कर रही थी।  मैंने सोंच लिया है जब तू 18 + की हो जाएगी तो मैं तुझे अपनी दोस्त बना लूंगी और तब हम दोनों भी इसी तरह की बातें करेंगी जैसी तू अभी कर रही थी।  तुझसे गालियों से ही बात किया करूंगी।  
    अरे अम्मी जान मैं 18 + की पिछले साल ही हो गयी थी।  अब तो मैं  19 + की हो गयी हूँ।  पूरी जवान हो गई हूँ मैं ? बालिग हो गई हूँ मैं। सब कुछ जानती समझती हूँ.   
    हाय अल्लाह, मैंने बेकार में ही एक साल बर्बाद कर दिया।  हुमा बेटी, तेरी माँ की चूत, बहन चोद। तूने पहले क्यों नहीं बताया ?  तूने बताया होता तो मैं अब तक जाने कितने लण्ड तेरी माँ की बिटिया की बुर में पेल चुकी होती ? चोद डालती तेरी माँ की  बिटिया की बुर ? मैं तो भरी बैठी हुई थी ।  
    अब मुझे क्या मालूम था अम्मी जान ? नहीं तो मैं पर साल ही बता देती तुम्हे और अब तक मैं भी जाने कितने लण्ड तेरी बेटी की माँ के भोसड़ा में घुसा चुकी होती ? चोद डालती तेरी बेटी की माँ का भोसड़ा, अम्मी जान।  मैं भी भरी बैठी हुई थी माँ चोदने के लिए।   
    अम्मी जान, ने मेरे गाल थपथपाये और कहा अब आज से तू मेरी दोस्त है हुमा और हम उसी तरह बातें  करेंगीं जैसे दोस्त आपस में करतीं हैं। लेकिन हां तू वो 'लण्ड' की आतें कर रही थी।  उसके बारे में बता न  मुझे ? पहले तो यह बता की तूने अब तक कितने लण्ड पकड़ें हैं और कहाँ कहाँ के लण्ड पकड़ें हैं ? सब सही सही बताना मुझे ?
    मैंने तो अभी तक 10/12 लण्ड पकड़े होंगें ? दो तो मेरी सहेलियों के भाई जान के लण्ड हैं और बाकी कॉलेज के लड़कों के लण्ड ?
    लेकिन तू कुछ मोटे  लण्ड की बात कर रही थी ?
    हां अम्मी जान मैंने जब से नेट पर पोर्न फ़िल्में देखीं है तबसे जाने क्यों मुझे मोटे लण्ड ज्यादा अच्छे लगने लगे हैं।  और मैं मोटे लण्ड की दीवानी हो गई हूँ।  लेकिन हकीकत में मोटे लण्ड बड़ी मुश्किल में मिलते हैं।  4 लण्ड पकड़ती हूँ जब कहीं एक लण्ड मेरे मन का मिलता है।  मैं तो हॉस्टल रहती हूँ तो मुझे लण्ड के लिए बाहर जाकर ही ढूंढना पड़ता है।  मैं बस मोटे के तलाश में  रहती हूँ।
    हाय अल्लाह एक कहावत है बेटी "कनिया लड़का गाँव गुहार" ? इसका मतलब यह हैं की लड़का तो अपनी गोद में हैं और माँ उसे गाँव भर में ढूँढती फिर रही है।  
    क्या मतलब मैं समझी  नहीं अम्मी जान ?
    मतलब यह है मेरी  माँ की लौड़ी हुमा की बड़े बड़े और मोटे मोटे लण्ड तो तेरे कुनबे में ही हैं।  और तू भोसड़ी की उन्हें बाहर ढूंढने में लगी है।  मुझसे बताया होता तो मैं अपने कुनबे के ही मोटे मोटे लण्ड की लाइन लगा देती ?
    मैंने आँखें फाड़ कर कहा  वाओ, सच अम्मी जान ? इतने मोटे मोटे लण्ड अपने कुनबे में ही हैं ?
    तो फिर दखाओ न मुझे अम्मी जान।  मैं तो उन्हें पकड़ कर देखने के लिए बेताब हो रही हूँ।
    अब तू जवान हो गई है।  अभी तक तू बच्चों के कमरे में लेटती थी।  अब बड़े लोगों के साथ रात में मेरे पास लेटना। वहीं पर मैं तुम्हे मोटे मोटे लण्ड से रूबरू करा दूँगी।  

मेरी उत्सुकता बढ़ गई। मैं बड़ी बेकरारी से रात होने का इंतज़ार करने लगी। मोटे मोटे लण्ड पकड़ कर देखने की मेरी तमन्ना आसमान छू रही थी। एक एक पल मेरे भारी था।  किसी तरह ७ बजा तो मैं इधर उधर झांकने लगी और यह पता लगाने लगी की आज हमारे साथ कौन कौन मर्द लेटेगा ? इतने में अम्मी जान आ गई।
वह बोली -  देखो हुमा - तुम जवान भी हो और बोल्ड भी हो।  मैं तुमसे खुल कर बता रही हूँ।   रात को यहाँ औरत और मर्द सब साथ साथ लेटते हैं।  फिर रात में चुदाई शुरू हो जाती है। मर्द औरतों पर चढ़ाई कर देतें हैं और औरतें भी मर्द पर चढ़ जातीं हैं। कौन किसको चोदेगा और कौन किससे चुदवायेगी यह पता नहीं चलता ?  सब उसी वखत जो मन में आता वो सब लोग करतें हैं।  पर हां कोई औरत कभी किसी को इंकार नहीं करती और कोई मर्द भी कभी किसी को इंकार नहीं करता।  सब लोग मिलजुल कर चुदाई करतें हैं और मज़ा लेते हैं।  एक बात और है औरतों को गालियां देने का हक़ है पर मर्दों को नहीं।  मर्द तो औरतों के मुंह से गालियां सुन सुन कर मज़ा लेते हैं।
करीब 9 बजे सब लोग खाना वगैरह खा कर सोने के लिए आने लगे। मैं तो पहले से ही थी।  फिर मेरी भाभी जान हिना आ गई , मेरी खाला जान शाबिरा आ गई, उसकी बेटी रिया भी आ गई और अम्मी जान भी।  फिर मर्दों का आना शुरू हुआ।  सबसे पहले मेरा  करीम भाई जान आया, फिर यासिर मामू जान, फिर खालू मंसूर , फिर मेरे चचा जान हासिम, और रिया का मियां मुनीर भी आ गया. सब एक ही लाइन लेट गए।
खालू जान ने कहा - ज़ोया भाभी (मेरी अम्मी का नाम) आज तो आपकी की बेटी हुमा भी नज़र आ रही है।
अम्मी ने कहा - हां बिलकुल, अब तो वह एकदम जवान हो गई है 19  + की है वो। अब वह बच्ची नहीं रही। इसलिए मैंने उसे भी शामिल कर लिया जैसे पिछली बार मैंने तेरी बेटी सायरा को शामिल किया था।
वह बोला - हां सायरा अब तो हम सबके साथ ही लेटती है।
कुछ देर तक मामला शांत रहा। कहीं से कोई आवाज़ नहीं आयी। फिर मैंने देखा की  मेरी हिना भाभी जान की चूँचियाँ खुली हुई हैं और उन पर चचा जान का हाथ चल रहा है।  यानी मेरा चचा मेरी भाभी के बूब्स दबाने लगा है।  फिर मैंने भाभी का हाथ चचा के पजामा के अंदर देखा।  मुझे यह जानने में देर नहीं लगी की भाभी जान लौड़ा सहला रहीं हैं।  फिर पलक झपकते ही उसने  लण्ड बाहर निकाल लिया।  लण्ड धीरे धीरे बढ़ने लगा।  उधर खाला जान भाई जान से चिपकी हुई थी।  मेरे देखते ही देखते खाला एकदम नंगी हो गईं और भाई जान भी। खाला की मस्त मस्त बड़ी बड़ी चूँचियाँ मुझे बड़ी अच्छी लग रहीं थीं।  सामने भाई जान का लौड़ा एकदम तन कर खड़ा हो गया था।  मैं तो लण्ड देख कर हैरान हो गई।  बहन चोद इतना बड़ा और मोटा लण्ड मेरे ही घर में ही है  ,,,,,,? मैं बुर चोदी ऐसे ही लण्ड के लिए बेकार ही इधर उधर धक्के खा रही थी।  खाला ने भाई जान का लण्ड  मुंह में भर लिया।
मैंने सोंचा की जब मेरी भाभी नंगी हैं, मेरी खाला भी नंगी हैं तो मैं क्यों न नंगी हो जाऊं ? मैंने भी अपने कपड़े उतार कर फेंक दिया और खाला जान के हाथ से लण्ड लेकर खुद चाटने और चूसने लगी। वह पेल्हड़ चाटने लगी।  कुछ देर में मेरी नज़र उठी तो मैंने देखा की मेरा मामू भोसड़ी का खाला की बेटी रिया के ऊपर चढ़ा हुआ है।  मामू भी नंगा और रिया भी नंगी।  मामू रिया की चूत चाट रहा था और रिया मामू का लण्ड चाट रही थी।  मैंने मन में कहा रिया बुर चोदी अपने ही मियां के आगे मामू का लण्ड रंडी की तरह चाटने में जुटी है।  मुझे हैरानी तो तब हुई जब मैंने देखा की मेरा खालू मेरी माँ का भोसड़ा भकाभक चोद रहा है।  अम्मी भी चित लेटी हुई अपनी टांगें फैलाये हुए अपना भोसड़ा बड़े प्यार से चुदवा रही हैं।  इतने में अचानक रिया के शौहर मुनीर ने अपना लण्ड मेरे कंधे पर रख दिया।  मैंने कनखियों से देखा तो मुझे पहाड़ी आलू की तरह लण्ड का सुपाड़ा दिखाई पड़ा।  मैं थोड़ा मुस्कराई तो उसने लण्ड मुंह में घुसेड़ दिया।  लण्ड देख कर मैं दंग रह गई।  मुनीर यहाँ सबसे छोटा मर्द है और लौड़ा इसका साला इतना बड़ा और मोटा है।  मेरे मुंह से निकला मुनीर तेरी माँ का भोसड़ा, तेरी बहन की बुर। तूने इतनी देर में लौड़ा क्यों मेरे मुंह में डाला ?  पहले क्यों नहीं डाला ?  माँ चुद रही थी तेरी ?
मेरी गालियों ने माहौल को और गरमा दिया।
उस बिस्तर पर अब कोई ऐसा नहीं था जो नंगा न हो या नंगी न हो। मुझे इतने सारे लोग नंगे नंगे देखने में बड़ा मज़ा आ रहा था।  मैंने अभी तक इतने नंगे लण्ड देखे नहीं थे। मुझे अब अपने जवान होने पर फक्र महसूस होने लगा। मेरा मन हुआ की मैं सबके लण्ड नाप कर देखूं लेकिन सोंचा चलो छोड़ो यार क्या जरुरत है।  लेकिन मन नहीं माना तो मैंने अपनी पर्श से इंची टेप निकाला और सबके लण्ड नापने लगी। सबसे पहले चचा का लण्ड नापा तो वह 8" x 5" का निकला। फिर भाई जान का लौड़ा नापा तो वह 8.2" x 5" का निकला।  फिर खालू का लौड़ा 8.3" x 5.2" का था, मामू का लण्ड 8" x 5.5" का था और मुनीर का लौड़ा बहन चोद 8.5" x 5.5" का था।  मैं कहा - अम्मी जान तुम सच कह रहीं थीं की मोटे मोटे लण्ड तो कुनबे में ही हैं।  इन सब भोसड़ी वालों के लण्ड गज़ब के मोटे हैं।
मैं उधर सबके लण्ड का साइज ले रही थी और इधर खालू लण्ड पेल कर मेरी माँ का भोसड़ा चोदने लगा. चाचा ने अपना पूरा लण्ड भाभी की बुर में घुसा रखा था।  वह भी धकाधक् चोदने लगा, भाई जान ने अपना लौड़ा खाला की चूत में पेला और उसे अपनी बीवी समझ कर चोदने लगा। मामू खाला की बेटी रिया की बुर चोदने में पागलों की तरह जुट गया। इधर रिया का मियां मुनीर ने लण्ड गप्प से मेरी चूत में घुसा दिया। वह बड़ी बेशर्मी और बेरहमी से मेरी बुर चोदने लगा।  इस तरह हम सब की बुर का बाजा बजने लगा।  चुदाई की आवाज़ से सारा घर गूंजने लगा।  मुझे तो अपनी बुर चुदवाने से ज्यादा मज़ा सबकी चुदती हुई बुर देखने में आ रहा था।  कौन कैसे चुदवाती है और कौन कैसे चोदता है इसका भी पता चल रहा था। मुझे आज मालूम हुआ की मेरा कुनबा बहन चोद चोदा चोदी के मामले में बहुत आगे है।
तब तक भाभी जान ने कहा - अरी मेरी नन्द रानी तू तो बहुत अच्छी चुदवा लेती है ? लगता है तू पहले भी चुदवा चुकी है ?  अगर ऐसा है तो तूने मुझे बताया क्यों नहीं।  तेरी माँ की चूत ? अब मुझसे कुछ छुपाना नहीं ?
मैंने कहा - तेरी सास का भोसड़ा भाभी जान तेरी नन्द की चूत ? मैं भी एक हॉट लड़की हूँ।  मेरे पास भी एक चूत है मुझे भी लण्ड चाहिए। चुदवाऊंगी नहीं तो क्या झांटें उखाडूँगी ?  एक तरफ चुदाई हो रही थी और दूसरी तरफ हमारी हंसी मजाक चल रही थी।  अचानक खालू ने लण्ड अम्मी की चूत से निकाल कर भाभी की चूत में पेल दिया।  चचा जान ने भाभी की चूत से लण्ड निकाल कर खाला के भोसड़ा में घुसा दिया, भाई जान तो खाला को छोड़ कर खाला की बेटी की बुर चोदने लगा।  यानी अभी तक माँ का भोसड़ा चोद रहा था अब उसकी बिटिया की बुर चोदने लगा।  मामू ने लण्ड मेरी चूत में पेला तो मुनीर मेरी बुर से लण्ड निकाल कर मेरी अम्मी के भोसड़ा में घुसेड़ दिया। वह मादर चोद अभी तक बेटी की बुर चोदने में लगा था और अब बेटी की माँ का भोसड़ा चोदने चला गया।  इस तरह चूत और लण्ड अदल बदल कर चुदाई मैं पहली बार देख रही थी।
इतना रंगीन, सेक्सी और मजेदार नज़ारा था की हमारी उत्तेजना हर पल बढती जा रही थी।  मुझे इस बात का फक्र हो रहा था की हमारे ही घर में, हमारे ही कुनबे में ही इतने बड़े बड़े लण्ड हैं, इतने मोटे मोटे लण्ड हैं की अब हमें कहीं और देखने की जरुरत ही नहीं। उत्तेजना से चूत बहन चोद बोल गई।  ढीली हो गई मेरी बुर चोदी बुर।  मेरी ही नहीं मैंने देखा की सबकी बुर ढीली हो रही है और अब लण्ड भी खलास होने लगें हैं।  कोई चूत में झड़
गया कोई चूँचियों पर कोई मुंह में झड़ा तो कोई चूतड़ों पर।  फिर हम एक एक करके बाथ रूम गए और फ्रेश होकर अपने अपने  बिस्तर पर आ गए। मेरी नज़र अभी चचा जान के लण्ड पर, खालू के लण्ड पर और भाई जान के लण्ड पर थी। मैं जब तक इन लौंड़ों को पकड़ कर चूस नहीं लेती इन्हें अपनी चूत मे घुसा नहीं लेती तब तक मुझे न नींद आएगी और न चैन ? रिया ने कहा अरे हुमा तुम बहुत बड़ी चुदक्कड़ लड़की।  बड़ी मस्ती से चुदवाती है तू ? कहाँ से सीखा तूने इस तरह  चुदवाना।  मैंने कहा तेरी माँ का भोसड़ा चोद चोद कर सीखा है मैंने चुदवाना।  वह भी मुस्कराकर बोली अच्छा ये  मैं भी अब तेरी माँ की गांड मार मार सीखूंगी तेरी गांड मारना ? तब तक अम्मी जान ने कहा अरी निशा तू भी तो अपनी माँ चुदाने में बड़ी होशियार है। किसका लण्ड ठोकती है तू अपनी माँ की चूत में ? निशा ने कहा अरे खाला जान मेरी अम्मी तो मेरे ही मियां का लौड़ा ठोंक लेती है अपनी चूत में ? तो उधर से खाला बोली तू भी तो अपने ससुर का लण्ड पेल लेती है अपनी बुर में, बुर चोदी,  रिया।  मैंने कहा वॉवो तुम दोनों एक दूसरे की पोल खोल रही हो।  मेरी अम्मी ने कहा अरे हुमा इन दोनों में कोई पोल है ही नहीं। दोनों एक दूसरे की बुर में लण्ड  पेलती हैं।  तब तक चचा मेरी तरफ बढ़ा और बोला  बेटी हुमा मैंने अभी तक तेरी बुर नहीं चोदी।  मैंने कहा तो फिर चोदो ने मेरी बुर चचा जान।  मेरी बुर है ही चुदने के लिए पेलो न  लण्ड गचागच।  उधर से खालू बोला हुमा मैं भी पेलूँगा लण्ड तेरी चूत में।  मैंने कहा हां हां तुम पेलो न।  तुम दोनों मिलकर चोदो मुझे और सबके सामने चोदो। मुझे भी सुनहरा मौक़ा मिया और मैं दोनों चुदवाने लगी।  एक लण्ड मुंह में तो दूसरा लण्ड बुर में।  एक लण्ड चूँची में तो दूसरा लण्ड हाथ में।  मैं बड़ी बेशर्मी से लण्ड का मज़ा लेने लगी।
मुझे देख कर मेरी भाभी जान को भी जोश आ गया। उसने अपना हाथ बढाकर मामू जान का लण्ड  पकड़  लिया और दूसरे हाथ से मुनीर का लण्ड।  उसका भी मन दो दो लण्ड से चुदवाने का हो गया।  वह मेरी भाभी और मैं उसकी नन्द।  हम दोनों में अपने आप कम्पटीशन होने लगा की कौन कितने अच्छे तरह से चुदवाती है ? बाकी सब हम दोनों की चुदाई देखने लगी।
अम्मी ने कहा - बहू,  तेरी बुर चोदी नन्द की चूत खूब चुद रही है।
तो खाला ने जबाब दिया -  हुमा, तेरी माँ की बहू की बुर भी खूब चुद रही है भोसड़ी वाली ?
इन सब बातों से हमारी चुदाई का हौसला बढ़ने लगा और तब न मैंने चुदाई में कोई कसर छोड़ी और न भाभी जान ने ?
सवेरे मैंने अम्मी जान का शुक्रिया अदा किया और कहा की आपकी की वजह से मुझे इतने बड़े बड़े और मोटे मोटे लण्ड का दीदार हुआ। अम्मी बोली बेटी हुमा आज तू इनसे भी बड़े बड़े और मोटे मोटे लण्ड देखेगी।  मैं फिर रात  होने का बड़ी बेक़रारी से इंतज़ार करने लगी। रात को जब मैं लेटी तो देखा की मेरे बड़े अब्बू आ गए हैं।  . वह मेरे अब्बू से दो साल बड़े हैं। उसके पीछे मेरा फूफा जान भी था।  वह मेरे अब्बू के बराबर उम्र का था।  मैं दोनों से मिली बड़ा मज़ा। आया  फिर खाला जान का बेटा वाहिद भी  गया।  वाहिद मेरी उम्र का था।  मैंने सोंचने लगी की क्या इसका भी लौड़ा बड़ा मोटा है ? उधर मेरी चची जान भी गई।  वह भी मेरे साथ लेट गयीं।  पहले तो कुछ बातें हुई और फिर हम सब अपनी अपनी औकात में आ गयीं।  अम्मी ने सबसे पहले बड़े अब्बू का लौड़ा खोल कर बाहर निकाल लिया और उसे  प्यार से हिलाने लगीं।  चची जान ने फूफा का लौड़ा निकाला और उसे चुम कर  सहलाने लगी।  मैं भी बेशर्मी से वाहिद को नंगा किया और उसका लण्ड हिलाने लगी।  साथ साथ मैं मादर चोद अपने कपड़े खोल कर नंगी भी हो गयी।
लण्ड जब सबके तन कर खड़े हो गए तो अम्मी ने कहा हुमा ले अब तू इनके साइज नाप ले ? मैंने बड़े अब्बू का लण्ड नापा तो वह 9" x 5.5 " का निकला।  फूफा का लौड़ा 8.5" x 5" का था और वाहिद का लौड़ा 8.5" x 5.5" का था।  मैंने कहा हाय अल्लाह ये तो कल वाले लौंडों से भी बड़े हैं अम्मी जान। हमारा कुनबा वाकई बड़े बड़े और मोटे मोटे लण्ड वाला है। अम्मी बड़े अब्बू का लण्ड चाटने लगी, चची फूफा का लौड़ा और मैं वाहिद का लौड़ा।  तीनो मर्द भी बिलकुल नंगे थे और हम तीनो औरतें भी।
इतने में बड़े अब्बू बोले - बेटी हुमा, मैंने तेरी माँ कई बार चोदी है और खूब चोदी है।  आज मैं सबसे पहले तेरी बुर चोदूंगा।
मैंने कहा - ठीक है अब्बू जान चोद लो।  मैं तैयार हूँ।
तब तक फूफा ने लण्ड मेरी चची जान की बुर में पेल दिया और वाहिद बहन चोद मेरी माँ का भोसड़ा चोदने लगा। इस तरह हम तीनो की चूत का बाजा एक साथ बजने लगा।

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