June 2022

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 जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी

jiju ke papa ne meri choot ki seal tod di,जीजू के पापा ने मेरी चुत की सील तोड़ दी



देसी अंकल सेक्स स्टोरी मेरी चुदाई की है. मेरी दीदी के ससुर ने मुझे चोद कर मेरी कुंवारी बुर फाड़ दी. ये सब कैसे हुआ? इस एडल्टस्टोरीज कहानी में पढ़ें.


हाय ऑल! मैं अंजलि प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ. मैं अभी 21 साल की हूँ. मैं अभी पिछले 2 महीने से ही एडल्टस्टोरीज की देसी सेक्स कहानी की दुनिया से जुड़ी हूँ.

एडल्ट स्टोरीज की सेक्स कहानियों को पढ़ कर मुझे मानो एक ऐसा पटल मिल गया था, जिधर मैं अपनी सारी बात खुल कर जाहिर कर सकती थी.

मुझे इसमें प्रकाशित हर सेक्स कहानी को पढ़ कर बहुत मज़ा आता है.
चुदाई की बातें पढ़ कर मेरा मन चुदाई के लिए मचलने लगा था जबकि पहले मुझे चुदाई के नाम से ही बहुत डर लगता था.

अब मैं अपनी सहेलियों के बीच सेक्स की बातों को सुनकर काफ़ी मज़े लेती हूँ.

जब मैं कल एक सेक्स कहानी पढ़ रही थी, तो अपनी चुत रगड़ रही थी. उसी समय मैंने भी सोची कि मैं भी अपनी सेक्स स्टोरी आप सभी को लिख कर बताऊं कि मेरे साथ क्या हुआ था.

ये देसी अंकल सेक्स स्टोरी 2 साल पहले की है, जब मेरी उम्र 19 साल की थी. उस समय मैं अपने जीजू के घर गई थी क्योंकि उनके घर पर उस टाइम कोई नहीं रहने वाला था.
चूंकि मेरे जीजू के छोटे भाई की वाइफ को गांव वाले घर में बच्चा हुआ था, तो जीजू दीदी और बच्चे गांव जाने वाले थे.

जीजू के पापा जो लखनऊ में सरकारी नौकरी में थे, वो एक पुलिस स्टेशन में दारोगा थे, तो उन्हें छुट्टी नहीं मिली थी, इस वजह से वो लखनऊ में ही रह गए थे.

मेरे पापा ने मुझसे कहा- तुम उनके घर लखनऊ चली जाओ, वहां उनके लिए खाना पीना और देखभाल कर लेना.
जीजू और उनकी फैमिली भी यही चाहती थी.

फिर मैं अगले दिन ट्रेन से निकल गई. चूंकि मैं भी अपनी बी.ए के पहले वर्ष के एग्जाम दे चुकी थी, तो बिल्कुल फ्री थी.

जब मैं वहां शाम को पहुंची, तो मेरी तबीयत खराब हो गई थी. ये जून का महीना था और ट्रेन में काफ़ी गर्मी थी, जिस वजह से मुझे कुछ असहज लगने लगा था.

लखनऊ पहुंचते पहुंचते मेरी तबीयत कुछ ज्यादा खराब हो गई थी. तो मेरे जीजू के पापा मुझे अपनी बाइक से डॉक्टर के पास ले गए.
उस दिन जीजू काफी व्यस्त थे और उनको दूसरे दिन सुबह दीदी को लेकर गांव निकलना था.

दोस्तो, अब इधर मैं अपने जीजू के पापा के बारे में कुछ बता देती हूँ. वो बहुत ही हैंडसम हैं. उनकी उम्र लगभग 55 साल की रही होगी. चूंकि वो एक दारोगा थे, तो उनकी बॉडी काफ़ी मजबूत थी और उनकी हाईट भी 6 फिट से कुछ ज्यादा ही थी.

मैं उनके साथ बाइक पर जा रही थी, तभी उन्होंने मुझे अपनी कमर पकड़ने को बोला.
मैंने सहज भाव से अंकल की कमर पकड़ ली.

उनकी कमर पकड़ते ही मुझे कुछ अजीब सा लगा और उनकी बॉडी की मर्दाना सुगंध से मैं मदहोश सी हो गई.

फिर डॉक्टर से चैकअप कराने के बाद मैं वापस घर आ गई.

रात में हम सब खाना खाकर सो गए. अगले दिन मेरे जीजू और दीदी की ट्रेन थी, तो वो लोग भी गांव निकल गए.

अब घर में मैं और मेरे जीजू के पापा ही अकेले रह गए थे. चूंकि मेरी दीदी की शादी के एक साल पहले ही मेरे जीजू की मम्मी की मृत्यु हो चुकी थी और जीजू के भाई और उसकी वाइफ पहले से ही गांव में थे.

दूसरे दिन मैं सुबह 9 बजे सोकर उठी और चाय आदि बनाई.

मैंने जीजू के पापा को चाय दी तो वो बोले- मैं आज शाम को खाना बाहर से ही ले आऊंगा, तो तुम घर पर खाना मत बनाना.
मैंने कहा- ठीक है अंकल.

मैं उनको अंकल जी बुलाती थी. मुझे उनसे बहुत शर्म आती थी, मैं उनके सामने ज्यादा कुछ नहीं बोलती थी.

अगले 7 दिन तक सब कुछ नॉर्मल चला. फिर एक दिन रात में नींद खुली, तो मैंने कुछ आवाज़ सुनी.

जब अपने रूम से बाहर आई, तो देखा कि ये आवाज़ तो अंकल जी के रूम से आ रही है.
तो मैं वहां गई.

उनके कमरे का दरवाजा खुला हुआ था, जब मैंने अन्दर झांक कर देखा, तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं.

अंकल जी ने अपने सारे कपड़े उतार दिए थे और एकदम नंगे होकर अपने लंड को हिला रहे थे. उनके एक हाथ में उनकी वाइफ की फोटो थी और फोटो देख कर वो लंड हिला रहे थे.

ये सीन देखकर मैं उधर से भाग कर अपने रूम में आ गई.
उस रात में अंकल जी के बारे में ही सोच रही थी. मेरी सांसें तेज तेज चल रही थीं क्योंकि मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड देखा था.

उस दिन से मैं अंकल जी के बारे में ना चाहते हुए भी सोचने लगी.
मैं अपने मन में मानती थी कि ये रिश्ता सही नहीं होगा. लेकिन मेरा मन उनका मोटा लंड देख कर मचल उठा था और मान ही नहीं रहा था.

मुझे उनके बारे में सोच कर बहुत मज़ा आ रहा था. चूंकि मैं अभी तक कुंवारी कमसिन कली थी, तो मुझे काफ़ी उत्तेजना हो रही थी.

इस तरह दस दिन बीत गए. अब मैंने फैसला कर लिया था कि मैं अंकल जी को पटाकर उनसे अपनी प्यास बुझाऊंगी … आख़िर उन्हें भी एक चुत की ज़रूरत थी.
उनकी वाइफ की डेथ हुए लगभग 6 साल हो चुके थे.

फिर मैं हर दिन कोशिश करने लगी कि अंकल जी के सामने कामुक बन कर रहूँ.
जब वो घर आते तो मैं उनको देख कर स्माइल करती और उनके साथ बाहर घूमने को कहती.

वो भी मुझे अपने साथ बाइक पर बिठा कर ले जाते और मैं भी उनकी कमर पकड कर उनके मर्दाना जिस्म को स्पर्श करके अपने अन्दर की आग को भड़काती रहती.
उधर अंकल जी भी मेरे मम्मों को अपनी पीठ पर रगड़ते हुए महसूस करके मुझे प्यार से देखने लगे थे.

एक रात जब वो घर आए, तो बोले- मैं बहुत थक गया हूँ. जल्दी से नहा लेता हूँ, फिर कुछ देर आराम करूंगा.
मैं हां करके चुप हो गई.

अंकल जी नहाने के बाद अपने रूम में चले गए.

मैं तेल की बोतल लेकर जानबूझ कर उनके शरीर कि मालिश करने चली गई.

वो मुझसे बोले- क्या हुआ?
मैंने कहा- आप थक गए हो, मैं आपकी मालिश कर देती हूँ. आपको आराम मिल जाएगा.

वो मना कर रहे थे.
लेकिन मैंने ज़िद की तो वो मान गए.

वो पेट के बल लेट गए और मैं उनकी पीठ पर तेल टपका कर अपने नर्म मुलायम हाथों से मालिश करने लगी.

उनकी बॉडी एकदम पहलवानों के जैसी थी. मैं उनके जिस्म की तपिश से बहुत उत्तेजित हो चुकी थी.

मैंने अंकल के पूरे शरीर पर अपने हाथों से मालिश की.

अब मैं उनकी टांगों पर पहुंच गई थी. मैंने महसूस किया कि वो अंडरवियर नहीं पहने हुए थे चूंकि अभी नहा कर आए थे.
और उनके मुँह से शराब की महक आ रही थी. अंकल जी ने शराब पी रखी थी.

मैं मुस्कुरा उठी.

मैंने जानबूझ कर अपना एक हाथ उनकी तौलिया के अन्दर कर दिया और उनकी गांड पर मालिश करने लगी. अंकल जी ने भी अपने पैर फैला दिए.

कुछ देर के बाद मेरी चुत बिल्कुल गीली हो गई और ना जाने मुझे क्या हुआ, मैं वहां से जाने लगी.

तभी अंकल जी उठे और उन्होंने मेरे एक हाथ को पकड़ लिया. जब मैं उनकी तरफ मुड़ी, तो वो मुझे अपनी गोद में खींच कर किस करने लगे.
मुझे अजीब सा लगा और मैं उन्हें मना करने लगी, लेकिन वो नहीं माने.

हालांकि मैं खुद भी यही चाहती थी. मैंने अपना विरोध बंद कर दिया और आंख बंद करके उनकी गतिविधियों को महसूस करने लगी.

अंकल जी ने मुझे अपनी बांहों में भरकर अपने बेड पर लिटा दिया और मुझे किस करने लगे. उनके मुँह से शराब की तेज स्मेल आ रही थी, वो नशे में थे.
आज मुझे ये महक काफी मस्त लग रही थी.

फिर वो अपने एक हाथ से मेरी चुत को दबाने लगे, मुझे बहुत शर्म आ रही थी … लेकिन चुदने का मन भी कर रहा था इसलिए मैंने उन्हें मना नहीं किया.

फिर उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और ब्रा को अलग कर दिया. अंकल जी मेरे मम्मे चूसने लगे.
वो जोर जोर से मेरे दूध चूस रहे थे, इससे मुझे मीठा मीठा दर्द होने लगा. मुझे बेहद मज़ा भी आ रहा था.

इसके कुछ देर बाद अंकल जी ने मेरी पैंटी भी उतार दी और मेरी कमसिन चुत देख कर बोले- तुम अभी वर्जिन हो?
मैं बोली- जी.

तो वो बोले- आज मैं तुम्हारी वर्जिनिटी तोड़ दूंगा.
मैं शर्मा गई और अपना मुँह उनके सीने में छिपा कर उनसे चिपक गई.

फिर अंकल जी ने अपनी तौलिया हटा दिया और पूरे नंगे हो गए.
मैं उनका लम्बा और मोटा खड़ा लंड देख कर सहम गई लेकिन चूत में चुनचुनी हो रही थी कि बस किसी तरह से इस लम्बे लौड़े से चुद लूं.

अंकल जी मेरी चुत चाटने लगे.
अपनी कुंवारी चुत पर एक मर्द की जीभ का अहसास पाते ही मेरे पूरे जिस्म में जैसे करंट दौड़ गया था.

मेरे शरीर में सिहरन होने लगी तो अंकल जी को मजा आने लगा और वो पूरे मनोयोग से मेरी कमसिन चुत का नमकीन पानी चाटते हुए चुत के अन्दर तक जीभ देने लगे.

मैंने अंकल जी से पूछा- मुझे सनसनी सी क्यों हो रही है?
तो वो बोले कि ये तुम्हारा पहली बार है … इसीलिए तुम मस्त हो रही हो.

कोई पांच मिनट तक की चुत चटाई में मैं पूरी तरह से पागल हो गई थी.

अंकल जी अब समझ गए थे कि लौंडिया गर्मा गई है.
उन्होंने मेरी टांगों को फैला दिया और मेरे ऊपर चढ़ गए.

अंकल जी ने अपने लंड को मेरी चुत कि फांकों में रखा और रगड़ने लगे.
मुझे मर्द के लंड का अहसास अपनी चुत पर हुआ तो मैं अपनी गांड उठाने लगी.

अंकल जी ने लंड को चुत पर दबाया तो लंड चुत के अन्दर नहीं गया. क्योंकि मेरी चुत का छेद बिल्कुल छोटा सा था और अंकल जी लंड गधे जैसा हब्शी लंड था.

फिर उन्होंने अपने लंड पर एक क्रीम लगाई और चुत में डालने लगे.

मैं बोली- अंकल कुछ प्राब्लम तो नहीं हो जाएगी?
अंकल जी बोले- कुछ नहीं होगा. बस शुरू में थोड़ा सा दर्द होगा. फिर मज़ा ही मज़ा आएगा.

ये कह कर उन्होंने अपना लंड मेरी चुत में पेल दिया.
अंकल जी का लंड अभी थोड़ा सा ही चुत के अन्दर गया था कि मेरी आंखों से आंसू निकल आए और मैं रोने लगी.

वो रुक गए और मुझे किस करने लगे.
जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो फिर अंकल जी ने एक बार अपनी गांड हिलाई और झटका दे दिया.

इस बार अंकल जी का आधा लंड मेरी चुत में घुसता चला गया था. उनके पूरे शरीर का वजन मेरे ऊपर आ गया था.

मैं उनकी बॉडी से दब चुकी थी उनकी जांघें भी काफ़ी मजबूत थीं. वो एक पहलवान मर्द थे.

थोड़ी देर तक अंकल जी मेरे ऊपर चढ़े रहे.
फिर उन्होंने मुझसे पूछा- अब दर्द कुछ कम हुआ?
मैं मरी हुई कुतिया की आवाज में बोली- जी.

उन्होंने फिर से अपनी गांड हिलाई और ताकत से पूरा लंड अन्दर पेल दिया.
मुझे वो धीरे धीरे चोदने लगे.

कुछ धक्कों के बाद मुझे भी चुदने में मज़ा आने लगा.
अंकल जी समझ गए थे कि अब मुझे मज़ा आ रहा है तो वो अपनी गांड जोर जोर से हिलाने लगे और मुझे ताबड़तोड़ चोदने लगे.

सच में मुझे मज़ा तो बहुत आ रहा था लेकिन शर्म भी आ रही थी. क्योंकि मैं एक 55 साल के मर्द से चुद रही थी, वो भी मेरे जीजू के पापा से.

करीब दस मिनट तक मुझे चोदने के बाद अंकल जी ने अपना लंड मेरी चुत से निकाल लिया.

मैं भी उठी और देखी कि मेरी चुत से खून निकल रहा था. मैं खून देख कर रोने लगी.

तो उन्होंने मुझे समझाया कि ये सामान्य सी बात है कुंवारी लड़कियों की चुत की सील टूटने के कारण ऐसा होता है. अब तुम एक पूर्ण औरत बन चुकी हो.
मैं शांत हो गई.

फिर उन्होंने मेरी चुत को साफ़ किया. उसके बाद मुझे पेशाब लगी, तो मैं उठ कर जाने लगी.

वो बोले- रूको मैं भी चलता हूँ.

अंकल जी मुझे अपनी गोद में ले गए और उन्होंने भी मेरे सामने पेशाब की. मैंने भी उनके लंड से मूत की धार देखी और खुद भी मूत कर खुद को साफ़ किया.

उन्होंने चाय बनाई और हम दोनों ने चाय पी.

मुझे चलने में बहुत प्राब्लम हो रही थी तो चाय पीने के बाद वो मेरे बगल में लेटकर मुझे किस करने लगे.

कुछ देर बाद हम दोनों गर्म हो गए तो अंकल जी मुझे फिर से चोदा.

उस रात हम दोनों ने तीन बार चुदाई का मजा लिया. हर बार अलग अलग स्टाइल में चुदाई हुई. कभी अंकल जी मेरे ऊपर चढ़ कर मुझे चोदते तो कभी कभी गोद में लेकर, कभी डॉगी स्टाइल में चोदने लगते.

पूरी रात मैं उनके कमरे में ही नंगी चुदती रही. अंकल जी भी मुझे अपनी बांहों में लेकर सो गए.

अगले दिन वो ड्यूटी भी नहीं गए. हमने पूरे दिन सेक्स किया.

मैं लखनऊ में 24 दिन तक रही और हमने इस दौरान कई बार सेक्स किया. अंकल जी ने मुझे शराब पिला कर भी खूब चोदा. मेरी गांड भी मारी.

इसके बाद जब भी मैं वहां जाती हूँ … तो हम दोनों मौका मिलते ही चुदाई कर लेते थे.

सच में दोस्तो, मुझे अंकल जी से चुदने में बहुत मज़ा आने लगा था, इसलिए मैंने आज तक किसी लड़के को अपना बॉयफ्रेंड नहीं बनाया.
मैं उनसे सच में बहुत प्यार करती हूँ, अभी मैं उनसे रोज फोन पर बात करती हूँ.

आज तक मेरी फैमिली और उनकी फैमिली में किसी को पता नहीं है क्योंकि हमारा ऐसा रिश्ता है कि किसी को शक भी नहीं होता है. लव यू अंकल जी.

बूढ़े ससुर का 11 इंच का लंड देख कर मेरी गांड फट गयी

बूढ़े ससुर का 11 इंच का लंड देख कर मेरी गांड फट गयी,sasur ka 11 inch ka lund liya



मेरी शादी हो चुकी हे. मेरे पति एक मार्केटिंग कम्पनी में जॉब करते हे. इसलिए वो अक्सर घर से बहार ही रहते हे. अभी मेरी शादी को सिर्फ 3 साल हुए हे और ये कहानी दोस्तों आज से करीब 2 साल पहले की हे. मेरे घर में मेरे सास, ससुर और मेरी एक 18 साल की ननंद रहती हे. मेरी शादी को 3 साल चुके हे लेकिन मैंने अभी तक अपने पति के साथ 30-40 बार ही सेक्स किया हे. क्यूंकि मेरे हसबंड पर इतना टाइम ही नहीं होता. इसलिए मैं और मेरी चूत चुदाई के लिए लिए तड़पती रहती हे. एक दिन की बार हे मैं अपने रूम में बैठ कर टीवी देख रही थी. तभी मुझे प्यास लगी और मैं किचन में से पानी लेने के लिए जाने लगी. जब मैं किचन में जा रही रही तभी मुझे अपनी ननंद की रूम से कुछ आवाजे आई. मैंने उसके रूम की विंडो में से चुपके से देखा तो मैं पूरी तरह से हैरान हो गई.

मैंने देखा की मेरी ननंद नंगी हो के लेटी हुई थी. मुझसे ये सब देखा ना गया इसलिए मैं वहां से हट गई. मैंने उसे साफ़ साफ़ बता दिया की मैंने उसे ये सब करते हुए देख लिया हे. वो मेरे सामने रोने लगी. मैंने उसे कहा देखो मैं किसी को कुछ नहीं कहूँगी लेकिन तुम ऐसे सेक्स करो वो गलत हे. इस से अच्छा तो तुम किसी लड़के के साथ अफेयर कर लो.

मेरी ननंद बोली: भाभी मैं बॉयफ्रेंड तो रख लूँ लेकिन आदमी का तो बड़ा होता हे इसलिए मुझे डर लगता हे.

मैं: अरे नहीं इतना बड़ा नहीं होता हे जितना तुम समझ रही हो.

ननंद: नहीं भाभी मैंने देखा हे इसलिए मैं कह रही हूँ.

मैं: अच्छा किस का देख लिया हे तूने, कही किसी घोड़े का लंड तो नहीं देख लिया.

ननंद: नहीं भाभी मैंने डेडी जी का देखा हे. उनका लंड तो घोड़े से भी बड़ा हे. कसम से इतना लम्बा और मोटा लंड तो मैंने आजतक नहीं देखा हे.

ननंद के मुहं से ऐसी बातें सुनकर मेरी चूत में खुजली होने लगी. मुझे तो पता नहीं था की मेरे घर में ही जबरदस्त चुदाई का सामान हे. अब मैं भी मन ही मन में जैसे गाँठ बाँध के बैठी थी की मौका मिले तो ससुर जी का लंड देखना जरुर हे! और मुझे जल्दी ही एक मौका मिल भी गया. उस दिन मेरे सारे घरवाले किसी शादी में 2 दिन के लिए चले गए. घर में मैं और मेरे ससुर ही थे. जब रात हुई तो मैंने ससुर जी का दूध देने के लिए गई. मैंने दूध के अन्दर निंद की गोली डाल दी थी. दूध पिने के कुछ मिनिट में ही उनको नींद आनी शरु हो गई. पर फिर भी मैं कुछ आधे घंटे तक वेट करती रही. और उसके बाद ही मैं उन्के रूम में गई.

मैंने अन्दर जाते ही ससुर जी को बहुत हिलाया. पर जब वो नहीं उठे तो मैं समझ गई की अब रास्ता साफ़ हे. मैंने जल्दी से उनकी धोती को साइड में कर दी और कच्छा खोल कर उनका लंड बहार निकाल लिया. उनका लंड देख कर मेरी आँखों में अलग ही चमक आ गई. मेरी ननंद ने जो कहा था वो एकदम सच था. मेरे ससुर का लंड सच में काफी बड़ा और मोटा था. और सब से कमाल की बात ये थी की वो लंड अभी सोया हुआ था तो भी बहुत मोटा और लम्बा था. जब वो लंड कडक होगा तो कैसे होगा!!! मैंने अपने दोनों हाथो से लंड को पकड़ कर ऊपर करना चालू किया. और पता नहीं मेरा अपने ऊपर से कंट्रोल ही जैसे चला गया था. मैंने लंड को थोडा हिलाया और फिर निचे झुक के अपने होंठो से उसे चूमने भी लगी. अब मैं इस मोटे लंड को मुहं में ले के चूमने लग गई. और निचे से ऊपर तक पुरे लोडे को अपनी जबान से चाटने लगी. तभी अचानक इस बड़े लोडे के अन्दर जैसे करंट आ गया. और लंड खड़ा होना चालु हो गया. कुछ देर पहले जो लंड 5 इंच का था अब वो लम्बा हो के 11 इंच का हो गया.

मेरी आँखे खुली की खुली रह गई और मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना ना रहा. सच में लंड काफी शानदार लग रहा था. अब तो मेरी जुबान लंड को चाटने में लगी हुई थी. लंड को देख कर अब मेरी चूत में खुजली होनी शरु हो गई थी. मैं उठी और अपनी साडी और पेटीकोट उतार के सीधा लंड के ऊपर आ गई और लंड को अपने हाथ में पकड़ के अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लग गई. मुझे बहोत मजा आ रहा था. मैंने इतने बड़े लंड को चूत में कैसे लेना हे वो भी सोचा नहीं था. और लंड को चूत पर लगाकर नाप रही थी. मैंने देखा की अलंद अगर ये लंड मेरी चूत में पूरा जाता हे तो मेरे पेट तक अ जाएगा!

मुझे अब डर सा लगने लगा था. इसलिए अब मैंने जाने का फैसला कर लिया. मैं लंड के ऊपर से उठ ही रही थी की ससुर जी ने अपने मजबूत हाथो से मुझे कमर में से पकड़ लिया. मैं एकदम बहोत ही डर गई. मैंने देखा की ससुर जी जाग चुके थे और वो मुझे पकड़ के वापस लंड पर बिठाने लगे थे.ससुर जी: बहु अब लंड को नाप तो लिया तो तुम अब इसको अपनी चूत में भी ले लो ना, कसम से जिसने भी लिया हे उसकी चूत तडपती हे इसे बार बार लेने के लिए!

मैंने उनसे खुद को छुडवाने की कोशिश की लेकिन पर उन्होंने एकदम मुझे बेड पर दे मारा और मेरे ऊपर आकर बहोत बुरी तरह से मेरे बूब्स को मसलने लगे. मेरी आँखे बंद होनी लगी थी. मैं मदहोश भी होने लगी थी. तभी ससुर जी ने मेरा ब्लाउज पकड़ा और उसे खिंच कर पूरा फाड़ दिया. और वो मेरे नंगे बूब्स को एक एक कर के अपने मुहं में ले के चूसने लगे. मुझे बहोत ही मजा आने लगा था, मैं पागल सी होने लगी थी क्यूंकि आजतक मेरे बूब्स मेरे पति ने भी नहीं चुसे थे ऐसे तो.ससुर जी ने अब मेरी चूत में उंगलिया करनी चालू कर दी. मेरी चूत गीली होने लगी थी. मुझे सच में बहोत ही मजा आ रहा था. तभी ससुर जी निचे गए और मेरी चूत को अपनी जुबान से चाटने लगे. जैसी ही उनकी जीभ मेरी चूत पर लगी वैसे ही मेरे पुरे जिस्म में करंट दौड़ गया. अब मेरे एक हाथ में उनका लंड था जिसे मैं जोर जोर से ऊपर निचे कर के हिला रही थी.

अचानक ससुर जी ने मेरे हाथ से लंड ले लिया और खुद ही अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगे. मेरी चूत के दाने के ऊपर लंड पूरी स्पीड में ऊपर निचे हो रहा था. मैं पूरी तरह से पागल हो चुकी थी क्यूंकि आजतक ऐसा मजा पहले कभी नहीं आया था. 2 मिनिट बाद ही मेरी चूत ने काफी सारा पानी बहार निकाल दिया.

ससुर जी: बहु ये क्या अभी तो मेरा लंड तेरी चूत के अन्दर गया भी नहीं और तेरी चूत ने पहले ही जवाब दे के पानी छोड़ दिया.

उन्के मुहं से ऐसी बातें सुन के मैं शर्मा गई और मैं धीरे से बोली: ससुर जी अब प्लीज़ आप मेरी चूत को अच्छे से चोदो ये मुझे बहुत परेशान करती हे.ये सुनते ही ससुर जी ने मेरे होंठों को चूसा और निचे जाकर मेरी चूत को फिर से चाटने लगे. अब की वो अपनी जुबान को मेरी चूत के दाने पर घुमा रहे थे जिस से मेरे मुहं में से अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ऊह्ह्ह अह्ह्ह की मस्ती भरी आवाजें निकल रही थी. ससुर जी अब अपनी दो उंगलिया मेरी चूत में उतार के उसे जोर जोर से ऊपर निचे करने लगे थे. और साथ में ही ऊपर से मेरी चूत के दाने को भी चाट रहे थे. एक साथ दो हमले मेरी चूत सह न कर पाई और करीब एक मिनिट में ही मेरी चूत ने फिर से अपना सारा पानी निकाल दिया.

मैं: ससुर जी अब क्यूँ मुझे तडपा रहे हो प्लीज़ जल्दी से अब आप अपना लंड मेरी चूत में डालो और मेरी प्यास को बुझा दो प्लीज़!

मैंने उन्के बड़े लंड को हाथ में पकड़ा तो मैंने देखा की ये तो इतना मोटा हे की ये मेरे हाथ में नहीं आ रहा हे. ते तो मेरी चूत के चीथड़े चीथड़े कर देगा, ये सोच के एक डर की लहर दौड़ उठी मेरे अन्दर. मेरे चहरे पर इस परेशानी के भाव देख कर ससुर जी बोले: मेरी बहु तू फ़िक्र ना कर आज इस लंड को अपनी चूत में ले ले. फिर आज के बाद तू किसी दुसरे के लंड को देखेंगी भी नहीं!

मैं: पर ससुर जी आप मेरी को अच्छी तरह से चोदना मुझे बहुत तंग किया हुआ हे उसने!

ये सुनते ही ससुर जी ने मेरी तरफ देख कर हलकी सी स्माइल करने लगी और अपना लंड मेरे मुह के पास कर दिया. मैं समझ गई की अब ये क्या चाहते हैं. मैंने झट से अपना मुहं खोल दिया और अच्छे से उन्के लंड को चूसने लगी.ससुर जी तभी मेरा सर पकड़ के अपने लंड को जोर जोर से मेरे मुहं में मारने लगे और मुहं की मस्त चुदाई करने लगे. अब उनका लंड मेरे गले के अन्दर जा रहा था जिस से मुझे सांस लेने में बहोत ही दिक्कत हो रही थी. पर वो रुके नहीं और करीब 5 मिनिट तक मेरे मुहं को ऐसे ही बेरहमी से चोदते रहे.

अब उन्होंने अपने लंड मेरे मुहं से निकाला और मेरी चूत पर रख कर और थोडा सा जोर लगा कर अपने लंड का आगे का हिस्सा पहले मेरी चूत में डाला और बाद में फिर एक जोर से धक्का लगा कर करीब 4-5 इंच जितना लंड मेरी चूत में उतार दिया.लंड अंदर जाते ही मेरी जान निकल सी गई. मैं उन्के निचे एक मछली की तरह तडप रही थी. अब ससुर जी बहोत पुराने खिलाडी थे और धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर कर रहे थे. उन्होंने अभी तक आधे से भी कम लंड ही अन्दर डाला था और ऐसे मुझे चोद रहे थे. ससुर जी ने अब मेरी गांड के निचे एक तकिया लगा दिया जिस से मेरी चूत ऊपर उठ गई और अब तो ससुर जी ने अपना लंड मेरी चूत के एकदम साला और ऊपर निचे करने लगे. अब ससुर जी मेरे ऊपर आ गए और जोर जोर से मेरी चूत को चोदने लगे.

ससुर जी ने अब अपना बहार निकाला और फिर एक धक्के से अपना पूरा 11 इंच का लंड एक ही बार में मेरी चूत में उतार दिया. अब मैंने अपनी दोनों टांगो को ऊपर उठा ली और अपनी गांड उठा उठा कर अपने ससुर जी का लंड अपनी चूत में लेने लग गई. ससुर जी ने मेरी दोनों टांगो को अपने कंधे के ऊपर रख दिया और जोर जोर से मुझे चोदने लगे. मुझे बहुत हो ही मजा आ रहा था. मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर के ससुर जी के हर धक्के का मजा लिया.करीब 20 मिनिट की इस घमशान चुदाई के बाद अचानक मेरा पूरा जिस्म अकड गया था. मेरी चूत ने ससुर जी के लंड पर अपने पानी की बारिश कर दी और 2 मिनिट बाद ही ससुर जी ने भी अपना सारा पानी मेरी चूत में ही निकाल दिया. मुझे बहोत जोर से पेशाब आ रही थी पर मेरे से उठा भी नहीं जा रहा था. इसलिए ससुर जी ने मुझे अपनी गोदी में उठा के बाथरूम में ले जा के मुताया. ससुर जी मेरी चूत में से निकलते हुए पेशाब को देख रहे थे. मेरी चूत से निकलते गरम गरम पीले पीले पेशाब को देख कर ससुर जी फिर से गरम हो गए और अपने लंड को मेरे मुहं में डाल कर फिर से मेरे मुहं को चोदने लग गए. फिर ससुर जी ने मुझे टॉयलेट की सिट पर बिठाया और मेरी दोनों टांगो को ऊपर कर के मेरी चूत और गांड दोनों मारी. आज मेरी चूत और गांड दोनों अछे से फट चुकी थी. और मेरी बहुत ज्यादा हालत ख़राब हो चुकी थी.उस दिन से मैं रोज रात को अपने ससुर जी से चुदवाती हूँ. एक दिन मेरी ननद ने मुझे और अपने डेडी से सेक्स करते देख लिया. फिर मैंने अपने साथ उसे भी ले लिया. अब हम तीनो इस सेक्स लाइफ का पूरा मजा लेते हे!

Sasur Ji Ka Mota Lund Meri Chut Mein Ghusa

 

sasur-ji-ka-mota-lund-meri-chut-mein-ghusa,ससुर जी का मोटा लंड मेरी चूत में घुसा

मैं शादी सुदा हूँ ये स्टोरी आज से २ साल पहले की है जब मै नई नई सुसराल आयी थी. मेरे सुसराल में केवल ४ लोग है मेरी सास ४० वर्ष की ससुर ४५ वर्ष के ननद १८ साल की और मेरे पति का मार्किटिंग का काम था इसलिए वो जयादातर शहर से बाहर ही रहते थे मेरी शादी को केवल ४ महीने ही हुए थे और मेने केवल ८-१० बार ही सेक्स किया था एक दिन की बात है, घर में मै और मेरी ननद ही थी मै अपने रूम में टी.वी देख रही थी मुझे पेशाब लगी और मैं अपने रूम से निकल कर टोलिट जाने लगी तभी मुझे ऐसा लगा की मेरी नंनद पूजा रो रही है मुझे ये आवाज उसके रूम से आ रही थी मेने सोचा आवाज लगाउ फिर कुछ सोच कर रूम के की होल से देखने लगी.

अंदर का नज़ारा देख कर में तो सन्न रह गयी अंदर पूजा फर्श पर नंगी पडी थी और हमारा कुत्ता उसकी चुत चाट रहा था ये देख कर मेरे तो होश हे उड़ गए फिर मेने देखा पूजा ने कुत्ते का लंड पकड़ कर अपनी चुत में डाल लिया और टौमी किसी पक्के चुद्दकद आदमी की तरह धकके लगाने लगा और पूजा भी अपनी गांड उछाल उछाल कर उसका साथ दे रही थी मुझसे ये सब देखा नहीं गया और में वहा से हट गयी !
थोड़ी देर बाद टौमी वहा से बाहर निकल आया फिर ….…पूजा भी बाहर आ गयी. मुझे उस पे बहुत गुस्सा आ रहा था मुझे देख कर वो डर गयी मेने उसे बताया मेने सब देख लिया है अंदर क्या चल रहा था

तो वो रोने लगी और कहने लगे मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता तो मै चुप हो गयी मैने उस को समझाया कोई बॉय फ्रेंड बना लो और उसके साथ सेक्स का मज़ा लो फिर वो कहने लगी बॉय फ्रेंड तो है लेकिन डर लगता है क्योकी आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है मैने कहा किसने कहा आदमी का लंड तो बहुत बड़ा होता है तो वो बोली की मैने देखा है मैने कहा किसका देखा है वो बोली पापा का देखा है और उसने बताया पापा का लंड गधे जितना लंबा और मोटा है ,.
मुझे विश्वास नहीं हुआ मैने किसी तरह उसको समझा कर कसम दिलाई आगे से कुते से मत चुदना लेकिन मेरे दिमाग में तो ससुर जी का लंड घूमने लगा था मैने सोचा एक बार ससुर जी का लंड देखा जावे फिर एक दिन मोका मिल ही गया घर के सब लोग बाहर गए हुए थे और दो दिन बाद आने वाले थे केवल में और ससुर जी घर पे थे मैने सोचा अच्छा मोका है,

मैने रात को उनके दूध में नीद की गोलिया मिला दी वो रात को दूध पी कर सो गए एक घंटे बाद ससुर जी के रूम में गयी उनको हिलाया मगर वो नहीं हिले में समझ गयी अब वो जागने वाले नहीं है

मैने उनकी लूंगी हटा कर कचछे का नाडा खोला और ……उनका लंड देखा और हैरानी से सन रह गयी उनका लंड सोया हुआ भी करीब 5 ईच लंबा होगा फिर मेरी चुत में भे चीटिया दोडने लगी मेरे मन में आया इसे खडा कर के देखती हूँ मैने लंड को मुह में ले कर थोडा गीला किया और दोनों हाथो से मुठ मारने लगी लंड में जैसे बिजली का करंट दोड गया वो खडा हो कर लगभग १२ ईच लंबा हो गया फिर सोचा देखती हू अगर लंड मेरी चुत में घुसा तो कहा तक जवेगा मैने अपनी साडी और पेटीकोट निकल कर अलग रख दिया और ऊपर से नापने लगी,.

वो मेरी चुत से पेट के बीच तक आया ये सब देख कर मेरी तो हवा खराब हो गयी जेसे मेंने हटना चाहा तो ससुर जी का हाथ अपनी जाँगो पर पाया उन्होंने मेरी जाँगो को मजबूती से पकड़ लिया था उनकी आँख खुली हुई थे और मेरी और देख कर मुस्करा रहे थे..

वो कहने लगे अब नाप तो लिया है चुत में तो लेकर देखो बड़ा मज़ा आयेगा में डर गयी और वहा से हटना चाहा लेकिन ससुर जी ने मुझे बेड पर पटक दिया और मेरी चूची दबाने लगे में तो उस समय मदहोस सी हो गयी थी चुत भी गीली हो गयी थी मैने उनको रोकने की कोशिश की लेकीन ससुर जी ने मेरी एक नहीं सूनी और मेरा ब्लाउज और ब्रा निकल कर फैक दी और मेरी एक चूची मुह में ले कर चूसने लगे में तो जैसे पागल सी हो गयी !

मेरी चुत में एक उंगली डाल कर अंदर ……बाहर करने लगे थोड़ी देर ऐसा करने से मेरी चुत पनिया गयी थी अब ससुर जी मेरी टांगो के बीच में आ गए और मेरी चुत जोरो से चाटने लगे मुझे लगा मेरा पानी निकल जावेगा मैने ना चाह कर भी ससुर जी का लंड हाथ में पकड़ लिया और आगे पीछे जोरो से करने लगी ससुर जी का लंड इस समय एक मोटी लोहे की राड जेसा लग रहा था अचानक ससुर जी ने लंड को अपने हाथ में पकड़ा और मेरी गीली चुत के दाने पर घिसने लगे मेरी तो जान ही निकल गयी और मेरे मुँह से कामुक सिसकियाँ निकलने लगी लग रहा था,

चुत का लावा अभी बाहर आ जवेगा और ५ मिनट बाद ही मेरी चुत से बरसात होने लगी ससुर जी मेरी तरफ मुस्करा कर देखा और बोले बहु अभी तो लंड चुत के अंदर भी नहीं गया तेरी चुत ने तो ढेर सारा पानी भी छोड दिया यह सुन कर मेरे गाल शर्म से लाल हो गए और मैने धीरे से ससुर जी के कान में कहा पापा जी मेरी चुत बहुत दिनों से पयासी है इसकी प्यास बुझा दो प्लीज

ससुर जी प्यार से मेरे होठ चूसने लगे फिर मेरी चुत चाटने लगे और अपनी जीभ मेरी चूत में घुमाने लगे , अचानक उसने अपनी जीभ मेरे चूत के दाने पर लगाई और कस कर चूस दिया। मेरे मुँह से जोर की सीत्कार निकल गई “उईई ….… माँ………. और…….. चूसो….. न….… ।”
ससुर जी ने अब दो उंगली चुत में डाल दी और अंदर बाहर …करते हुए मेरे चूत के दाने को चूसते रहे मेरी चुत में तो अब जेसे आग लगी थी लगता था एक बार फिर चुत का रस बाहर आ जावेगा ! मैने ससुर जी को कहा पापा जी मेरी चुत मुझे बहुत ही तंग करती है, मुझे ! बहुत ही खुजली मचती है इसमें !

बस अब मेरी चूत में अपना लन्ड डाल कर कस कर चोद डालो !” मेरी प्यास बुझा दो ना अब सहा नहीं जा रहा और ससुर जी के हलंबी लंड को हाथ में ले कर मसलने लगी लंड की मोटाई मेरी मुठी में नहीं आ रही थी ये सोच कर की मेरी चुत आज जरूर फट जवेगी में थोडा डर भी गयी ससुर जी ने ये मेरे चेहरे को देख कर भाँप लिया और प्यार से बोले बहु घबरा मत आज तुझ्रे वो मज़ा दूगा फिर कभी दूसरे लंड से नहीं चुदवाओगी!

लेकिन पापा जी आज आप मेरी चूत को ऐसे चोदना कि इस साली को चैन पड़ जाये !” ससुर जी ये सुन कर थोड़े मुस्कराए और कहा बहु चल अब लंड को मुह में ले कर चूस ! लंड तो पहले से ही लोहे की राड जेसा था मै अब लंड को चूसने लगी ससुर जी भी पुरे जोश में आ गए थे और मेरे मुह को लंड से चोदने लगे मेरी तो साँस ही रुकने लगी ! कुछ देर ऐसा करने के बाद अब ससुर जी ने अपना लंड मेरी चुत के मुह पर रखा और थोडा धीरे से अंदर किया पक की आवाज से लंड का टोपा चुत में चला गया और एक जोर का धकका मारा लंड करीब ३-४ इंच अंदर चला गया .…

मेरी तो जान ही निकल गयी ! ससुर जी पुराने खिलाडी थे लंड पूरा अंदर ना कर के धीरे धीरे धकके लगाने लगे ! लन्ड काफ़ी मोटा और तगड़ा था जिससे मेरी चूत कसी हुई थी। जैसे ही वो अपना लन्ड बाहर निकालता मेरी चूत के अन्दर का छल्ला बाहर तक खिंच कर आता और लन्ड के साथ अन्दर चला जाता। कुछ देर तक ऐसे चोदने के बाद उन्होंने एक तकिया मेरी गाँड के नीचे लगा दिया जिससे मेरी चूत ऊपर उठ गई और चूत का छेद थोड़ा सा खुल गया.!

अपना लन्ड मेरे योनि-द्वार पर रखा और कमर को पकड कर एक जोर से झटका दिया,ससुर जी का पूरा लन्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर के आखिरी हिस्से पर जा टकराया। में उत्तेजना में भर गई, और उनके सीने से चिपक गई और मेरे मुँह से निकल पड़ा,”ओह्ह्ह्…… …हाय्… ………अब……मजा मिला है ! बस पापा जी ऐसे ही चोदते रहो बहुत मज़ा आ रहा है !फिर उन्होंने मेरी दोनों टाँगों को ऊपर उठाया और मेरी चूत में लन्ड तेज रफ़्तार से आगे पीछे करने लगे। पुरे कमरे में फचा फच …. ….फचा फच की आवाज आ रही थी मेरी कामोत्तेजना इतनी तीव्र हो गयी थी कि मेरा सारा शरीर तप रहा था, मैने उन्माद में अपनी दोनों आँखें बन्द कर रखी थी, मेरा शरीर मछली की तरह तड़प रहा था और मुझे कुछ होश नहीं था.

जैसे ही ससुर जी का लन्ड मेरी …चूत में जाता,में अपनी कमर उठा कर लन्ड को अन्दर तक समा लेती, लन्ड के हर प्रहार का जबाव में अपने चूतड़ उठा उठा कर दे रही थी। कमरे में मेरे मुँह से उत्तेजना भरी आवाजें गूंज रही थीं,” आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह ! उईईईईई………उम्म्म्म्म्म्म्……… ।आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्……… ओह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्…… चोद ! मुझे ! कस कर ! हाँ ………और तेज ! जोर जोर से चोद मुझे ! अन्दर तक पेल दे अपने लन्ड को ! फ़ाड डाल मेरी चूत को ! बहुत मजा आ रहा है। और चोद , कस कर चोद, सारा लन्ड डाल कर पेल !

मेरी चूत बहुत ही तंग करती है मुझे ! आज इसको शान्त कर दो अपने लन्ड से ! बहुत दिन बाद चूत की खुजली मिट रही है ! हाँ और तेज ! और तेज ! उईईईईईईइ………आआआअहाआअ………उह्ह्ह्ह्ह्ह्… ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म्……………ओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्फ़्……………हाँ…………” अचानक मेरा पूरा जिस्म अकडने लगा और में झड़ गई इतनी जोर से स्खलित हुई की गर्म गर्म रस से मेरी चुत भर गयी। अभी भी ससुर जी लगातार मुझे तेजी से चोदे जा रहे थे और करीब १५ मिनट तक चोदने के बाद मेरी चुत में ही झड गए! मुझ में अब उठ कर बैठने की भी हिम्मत नहीं थी! ससुर जी ने मुझे गोद में उठाया और बाथरूम में ले गए मुझे जोर का पेसाब लगा था.

मैने ससुर जी को कहा आप बाहर जाओ मुझे …पेसाब करना है लेकीन ससुर जी नहीं माने और कहा बहु तेरी चुत से पेसाब निकलता हुआ मुझे देखना है! में शरमा गयी ससुर जी बोले बहु अब क्यों शरमा रही हो और में सर नीचे कर के कमोड पर बैठ कर उनके सामने मूतने लगी और मैने देखा मेरी चुत से पेसाब के साथ खून भी आ रहा था मैने ससुर जी पर नाराजगी दिखाते हुए कहा आपने मेरी चुत फाड दी है देखो खून भी आ रहा है .

ससुर जी ने नीचे झुक कर मेरी चुत के दाने पर उंगली रगड़ दी अब मेरी चुत में जोर से खुजली हुई और मैने ससुर जी को देखा उनका हलंबी लंड पुरे जोरो से खडा था एक बार तो में लंड को देखते ही डर गयी लेकीन क्या करती मेरी चुत में भी तो जोरो की खुजली लगी थी अब में बेशरम बन गयी थी ससुर जी के लन्ड को मुह मे ले कर चुसने लगी और देखते ही देखते लन्ड महाराज मेरी पकड़ से बहार होने लगे.!

ससुर जी बोले बहु एक बार और चुदाई कर लेने दो मेने चुपचाप लन्ड को चुत के दाने से रगडना शुरु कर दिया मेरी चुत मे तो जेसे आग लगी थी अब ससुर जी ने एक ही झटके पुरा का पुरा लन्ड चुत मे डाल दिया मेरी तो जान ही निकल गई और मेने कहा पापा जी मज़ा आ गया चोदो अपनी बहु को जोर से चोदो! कमोड पर बैठे हुए ससुर जी ने मेरी दोनो टागे अपने कधे पर रखी हुई थी

इस तरह से मेरी गान्ड का भुरा .……छेद साफ़ दिखाई दे रहा था ससुर जी ने चुत से लन्ड निकाला और मेरी गान्ड मे पुरे जोर से अनदर कर दिया मेरी जोरो से चीख निकल गई हाय माँ मर गई! ससुर जी का लन्ड मेरी गान्ड मे पिसटन की तरह चल रहा था! मुझ से बरदाश्त नहीं हुआ और मेरी चुत ने लबालब रस छोड दिया!

आधे घंटे की घमसान गान्ड चुदाई के बाद ससुर जी ने मेरी गान्ड लन्ड रस से भर दी! अब तो ससुर जी का हलंबी लंड मेरी मुनिया चुत को भा गया था और रोज़ ही रात को चुदाई का खेल होने लगा ! एक रात को मेरी नंनद पूजा ने मेरी चुदाई का खेल देख लिया और मेने पूजा को ससुर जी यानी पूजा के पापा से केसे चुदवाया वो फिर कभी और नंनद भाभी एक साथ चुदाई का मजा लेने लगे ……….धन्यवाद

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में


ससुरजी का बुड्ढा लंड जवानों के लंड से भी बेहतरीन था वो कहते हैं ना "पुराने देसी घी और पिशौरी बादाम खाए हुए थे शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी एक ऐसी लौंडिया से करवाई, जो कमाल की हसीना थी। लौंडिया का नाम बता देना सही रहेगा, उस हसीना जिसकी गरमागरम जवानी कमाल की थी, उसका नाम था बबिता।

नई बहू ने ससुर का गधे जैसा मोटा लंड लिया अपनी कुंवारी चूत में

जब बबिता अपने दूल्हे-राजा के घर आई तो उसके सपने काफ़ी रंगीन थे, वो अपने साथ बालीवुड के हीरो और हिरोइनों की तस्वीरें लेकर आई, लौंडिया को चुदाई और सेक्स के रंगीन ख्वाबों ने घेर रखा था।

हो भी क्यों न ! आखिर उसका हुस्न लाखों में एक था ! वह थी भी एक माल जैसा पीस।

मैं आपको जरा उसकी जवानी का नक्शा बता दूँ- कुछ लहलहाते हुए धान के खेतों के रंग का सुनहरा सा रूप, सावन-भादों के काले बादलों जैसे घने बाल और उनके नीचे सुराहीदार गरदन। चूचियों का विवरण देने के लिये शब्द नहीं हैं, लेकिन इतना तय है कि इन कुवाँरी चूचियों को देखकर बड़े से लेकर बुड्डे तक सबका दिमाग, इन्हें पीने को बेताब हो जाता था। ये मयखाने थे, जो अब तक किसी ने चखे नहीं थे।

शमशेर सिंह ने अपने भतीजे रणधीर सिंह की शादी करके उसके लिये एक खूबसूरत कामुक गरमा-गर्म बहू के रूप में अपने मतलब का माल ले आये थे।

शमशेर सिंह रिटायर्ड टीचर हैं और उनका लंड बड़ा ही घातक और प्रचंड है। उस पर तुर्रा यह कि उनकी बीवी की चूत एकदम सड़े हुए पपीते की तरह नाकाम हो चली है।

अब काम कैसे चलेगा, तो शमशेर सिंह ने अपने भतीजे की शादी एक गरीब बाप की खबसूरत बेटी से तय कर दी थी।

दुल्हन अपने पिया के घर आई, चुदाई के रंगीन सपने लिये। सुहागरात का नजारा, चलने से पहले बता दें कि रणधीर सिंह जी बड़े ही दुबले-पतले लंड वाले और हिले हुए पुर्जे टाइप के इंसान थे, जिनके बस का किसी गांड को मारना या, चूत की सील तोड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था।

सुहागरात की रात शमशेर सिंह ने यह नजारा देखने के लिये एक बड़ा ही चौकस जुगाड़ किया और जैसा कि पहले से ही सब तय था कि खुद का कमरा और सुहागरात वाला कमरा आजू-बाजू ही थे और एक ही दीवार दोनों को अलग करती थी। एक खिड़की थी जो सुहागरात वाले कमरे में झांकने का रास्ता थी। उसे उसने पहले से ही थोड़ा हिला-हिला के झिर्रीदार बना दिया था।

जैसे ही चूत की कहानी शुरु होती, शमशेर सिंह ने अपनी आँखें खिड़की से लगा दीं। रणधीर सिंह हिलते हुए अपनी दुल्हन के सामने खड़ा था, वो नीचे देख रही थी और वो ऊपर देख रहा था। कौन किसको चोदने वाला है, यही समझ नहीं आ रहा था लेकिन दुल्हन ने पहल की।

वो समझ गई थी कि ये लौंडा एकदम बकचोदू है और चिकलांडू है क्योंकि सामने चूत का मौका देख कर कोई बकलँड ही इस तरह कांप सकता है।

शमशेर सिंह को खिड़की से यह दृश्य दिखाई दे रहा था और उनका लंड धोती के अंदर डिस्को भांगड़ा करने लगा था। उन्होंने आंखें गड़ा दीं।

बहू ने रणधीर सिंह की शेरवानी खोल दी और पजामे का नाड़ा जल्दी में खींच के तोड़ डाला। कहानी उल्टी चल रही थी और शमशेर सिंह इतनी गर्म बहू देख कर एकदम बाग-बाग थे क्योंकि वो जान गये थे कि इतनी गर्म और कामुक बहू इस नादान और नामर्द लौंडे से संभलने वाली नहीं है, इसीलिए तो उन्होंने इसकी जल्दी ही शादी करवा दी थी।

बहू ने रणधीर सिंह को पूरा नंगा कर दिया। आज वो अपना हक अपने मर्द से छीन लेने वाली थी कि अपने पति का ‘टिंगू-लंड’ देख कर उसका दिल बैठ गया। एकदम दो इंच का लंड था और खड़ा होकर साढे तीन इंच का हो गया था। इसे तो चूसा भी नही जा सकता, हद है भई !

रणधीर सिंह जी हांफ़ रहे थे, दुल्हन के इस गर्मागर्म रूप को देख कर। उसने रणधीर सिंह को पटक कर उनके मुँह पर अपनी चूत रख दी और रणधीर सिंह की सांसें फ़ूलने लगीं

;साले लंड में नहीं था गूदा तो लंका में काहे कूदा !' गाली देते हुए बोली- काहे तेरे मास्टर चाचा ने मेरी शादी तेरे से की ! मादरचोद ले, अब चूस मेरी चूत और सुबह उस धोती वाले की धोती में आग लगा न दी तो मेरा नाम बबिता नहीं।

लगभग आधा घंटा अपनी चूत और गांड उसके मुँह पर रगड़ने के बाद उसने लाईट आफ़ कर दी और अपनी चूत पसार कर सोने चली गई।

शमशेर सिंह का दिल बागम-बाग हो गया, लंड को तेल लगा कर उन्होंने मोटा और नुकीला किया और अपनी धोती खोल कर सहलाते हुए सो गये। बहुत जल्दी सीन में उन्हें एंट्री मारते हुए अपनी बहू को कब्जा लेना था। सुहागरात में अपने भतीजे रणधीर सिंह का नाकाम फ़्लाप शो देख कर खुश हुआ कि अब तो मेरे लंड को चौका मारने का मौका मिलना तय ही है।

सुबह उसने अपने भतीजे रणधीर सिंह को किसी काम से 6-7 दिनों के लिये बाहर भेज दिया। अब घर में अकेले बहू बबिता और खूसट ठरकी बुढ़ऊ शमशेरसिंह ही बचे थे। खाना परोसते समय बहू का आँचल सरक गया, उसके ब्लाउज का मुँह बड़ा चौड़ा था, तो उजली चूचियों शमशेर सिंह के नजरों में चमक गईं। शायद यह बबिता की सोची समझी चाल थी। शाम को शौच के लिये उसे बाहर जाना था, खुले में।

बहू को डर लगा तो शमशेर सिंह के पास आई और पूछा- चाचाजी, मुझे बाहर जाना है, दो नम्बर के लिये ! लेकिन पहली बार इस गांव में निकलते हुए डर लग रहा है।

बुढ़ऊ का दिल बाग-बाग हो गया और उसने कहा- चिन्ता ना कर बहू, घर की चारदीवारी में ही खुले में इसी काम के लिए गड्डा बना रखा है, चली जा। मैं छत पर ही रहूँगा, कोई डरने की बात नहीं है।

बबिता चली गई और बुड्डा छत पर से उसे टट्टी करते देखता रहा। अचानक दोनों की नजरें मिल गईं। बबिता ने अपनी चूत पर टार्च जला कर बुड्डे को अपनी झांट वाली ‘बम्बाट’ बुर दिखा ही दी।

वहीं छत पर खड़े-खड़े बुड्डे की धोती में आग लग गई, लंड खड़ा होने लगा और बुड्डे शमशेर ने अपना सुपारा हाथ में लेकर रगड़ना शुरु कर दिया। अब वह चूत का मैदान मारने की तैयारी कर चुका था। जैसे ही बबिता अंदर आई, दरवाजे पर ही उसने उसे दबोच लिया।

वो बोली- अरे पापा जी रुकिये, गांड तो धो लेने दीजिए अभी टट्टी लगी है उसमें, इतने बेसबरे मत होइये।

शमशेर तुरंत हैंड्पंप के पास जाकर पानी चलाने लगा और बबिता ने लोटे से पानी लेकर अपनी गांड उस बुड्डे के सामने ही छप्पाक-छ्प्पाक धो डाली।

कहानी बुड्डे के अनुसार ही चल रही थी। बूढ़े को अपनी बहू की बड़ी गांड का छोटा छेद बड़ा प्यारा और नाजनीन लगा। वह समझ गया कि यही है मेरे लंड का अंतिम डेस्टिनेशन !

बबिता के खड़े होते ही शमशेर ससुर ने उसे दबोच लिया और उसकी साड़ी वहीं आंगन में ही खोलने लगा। घर में कोई नहीं था, चांदनी रात में भतीज-बहू का चीर-हरण, और दूधिया जवानी, दोनों का मेल गजब का था।

सारे कपड़े खोल बुड्डे ने बबिता के बड़ी चूचियों पर सबसे पहले मुँह मारा।

जैसे ही उसने मुँह मारा, बबिता गाली देने लगी- पी ले अपनी माँ के चूचे... बहनचोद बुड्डे ! कर दी शादी तूने मेरी नामर्द गांडू से?

शमशेर ने कहा- तो कोई बात नहीं बेटी, ये ले बदले में मेरा हल्लबी लौड़ा.. किसी भी जवान से ज्यादा सख्त और बुलंद है।

अपना लंड पकड़ कर वो खड़ा रहा और बबिता नीचे बैठ गई। लंड के सुपारे से चमड़े की टोपी हटा उसने लंड को सूंघा तो उसे उस गंध से समझ में आ गया कि यह पुराना चावल काफ़ी मजेदार है।

अपने मुँह में ढेर सारा थूक लेकर उसने लंड के ऊपर थूक दिया। मुँह में पेलने को बुड्डा बेताब हो रहा था लेकिन बबिता को अपनी ‘हायजीन’ का पूरा ख्याल था। उसने लंड को थूक से धोने के बाद उस थूक से लंड की मसाज चालू कर दी। बुढ़ऊ शमशेर गाली बक रहा था- हाय मादरचोद, मार डालेगी क्या ! साली जल्दी से मुँह में डाल ! इतना रगड़ती क्यों है... तेरी माँ का लौड़ा !! उफ़्फ़ चूस ना, चूस ना !

बबिता ने अधीरता नहीं दिखाई और आराम से लंड को थूक कर चाटती रही। जब पूरा लंड साफ़ चकाचक हो गया, अपने मुँह का रास्ता उस लंड को दिखा दिया। अब बुड्डे के लंड ने मुँह को चूत समझ लिया और उसमें अपना लंड किसी एक्सप्रेस की तरह घुसम-घुसाई करने लगा।

"आह… आह… ले… ले… ये ले… मादरचोद… तुम्हारा ससुर अभी जवान है... ये ले चूस तेरी माँ का लौड़ा।"

बबिता एकदम अवाक थी अपने बुड्डे ससुर की ‘परफ़ार्मेंस’ से। उसने अपना गला फ़ड़वाने की बजाय रात की प्यासी चूत की चुदास बुझाना बेहतर समझा।

अब बुड्डे का सपना सच हो गया था। बहू चोद ससुर शमशेर सिंह ने अपनी बहू बबिता को चोदने की सेटिंग कर ली। अब आप देखेंगे उन दोनों की चुदाई का भयंकर नजारा।

बबिता ने तुरंत उसका लंड ऐंठ कर शमशेर सिंह को नीचे गिरा दिया। बुड्डा अपनी बहू के इस कदम से भौंचक्का रह गया, लेकिन यह काम बबिता ने उसके अंदर गुस्सा जगाने के लिये किया था जिससे कि वह बदले की भावना से जबरदस्त पेल सके।

बुड्डे ने अपनी धोती खोल फ़ेंकी, उसके अंडकोष किसी पपीते की तरह आधा-आधा किलो के थे। बबिता को पटक कर उसने अपना अंडकोष उसके मुँह में दे डाले, कहा- ले चूस बहू, बहुत कलाकार है तू बे मादरचोद साली, लाया था बहू, निकली रंडी। अब तो मेरा काम सैट कर देगी तू !

बबिता ने उस अन्डकोष को शरीफ़ा की तरह अपनी जीभ से कुरेदना जारी रखा। बुड्डा अपने मोटे लंबे लंड से चूत उसके बड़े चूचों की पिटाई कर रहा था और अपनी ऊँगलियाँ उसकी झांटों पर फ़िरा रहा था।

जब पूरे अंडकोष पर उसने अपनी जीभ फ़िरा चुकी तो बुड्डे ने अपनी गांड का छेद अपनी बहू के मुँह पर रख दिया।

"ले कर रिम-जॉब !"

बुड्डा वाकई चोदूमल था, उसे रिम-जाब मतलब कि गांड को चटवाने की कला भी आती थी और वो इसका रस खूब लेता रहा था। वाकयी में जब भी वो सोना-गाछी जाता रंडियाँ उसे नया-नया तरीका सिखातीं और अब तो वह अपने घर में ही परमानेंट रंडी ले आया था।

बबिता ने उसकी गांड को चाट कर उसमें एक उंगली करनी शुरु कर दी। बुढ्ढा पगला गया, उसने तपाक बहू की झांटें पकड़ी और ‘चर्र’ से एक मुठ्ठी उखाड़ लीं।

"हाय !! मादरचोद बुड्डे !! तुझको अभी देखती हूँ !"

बबिता ने बदले में पूरी उंगली उसकी गांड में घुसेड़ कर कहा- मादरचोद पेलेगा नहीं सिर्फ खेलेगा ही क्या बे?

कहानी मजेदार होती जा रही थी। अब बुढ़ऊ की मर्दानगी जग चुकी थी, भयंकर रूप लिये बरसों से चूत के प्यासे मोटे लंबे लंड को, उसने अपनी प्यारी बहू की मुलायम चिकनी चूत में डाल देने का फ़ैसला कर लिया था।

उसने बबिता की टाँगें खोल दीं और अपनी उंगलियों से चूत का दरवाजा खोला।

बबिता मारे उत्तेजना के गालियाँ बक रही थी। वो खेली-खाई माल थी। बुड्ढे ने अपने लंड के सुपारे को चूत के मुहाने पर छोटे से छेद की बाहरी दीवार वाली लाल-लाल पंखुड़ी पर घिसना चालू किया।

बबिता की सिसकारियाँ गहरी होती चली जा रही थीं। ससुर शमशेर ने उसकी बाहर की ‘मेजोरा- लीबिया’ मतलब कि चूत की बाहरी दीवाल को ऐसे खींच रखा था, जैसे टीचर किसी छोटे बच्चे का कान खींच के सजा दे रहा हो। माहौल एकदम गर्म हो चुका था।दोनों तरफ़ की दीवालों को रगड़ने के बाद बुड्ढे ने अपना लंड का मुँह बबिता के थूक से दोबारा गीला करने के लिये बबिता के मुँह में हाथ डाल ढेर सारा थूक बटोरा और फ़िर अपने लंड के मुहाने पर लगा और अपना थूक उसकी चूत में चारों तरफ़ घिस कर अपना लंड धंसाना शुरु कर दिया।

बबिता की आँखें नाचने लगीं थी। उसकी कहानी ससुर के लंड से लिखी जा रही थी और वाकयी ससुर शमशेर का बुड्ढा लंड जवानों के लंड से भी बेहतरीन था वो कहते हैं ना "पुराने देसी घी और पिशौरी बादाम खाए हुए थे !"

वो रुका नहीं और चूत के पेंदे पर जाकर सीधा टक्कर मारी, बबिता चिल्लाई- अई माँ ! मर गई प्लीज पापा रुकिये ना !

लेकिन नहीं... शमशेर सिंह को चुदास चढ़ चुकी थी और सालों बाद कोई करारा माल और उसकी चूत की कहानी लिखने का मौका मिला था। लंड नुकीला करके उन्होंने उस चूत का सत्यानाश करना शुरु कर दिया था और फ़िर उसके सुनामी छाप धक्कों से चूत की दीवालें तहस-नहस हो रही थीं।

बबिता अध-बेहोश हो चली थी और शमशेर ने उसे पलट कर पेट के बल लिटा दिया। अब उसकी गांड फ़टने वाली थी, दो उंगलियों से पकड़कर उसकी गांड खोल दी शमशेर ने और अपनी जीभ अंदर डाल दी। ताजा-ताजा धुली गांड खूश्बूदार थी। गांड को गीला कर के ढेर सारा थूक अंदर कर दिया, गांड तैयार थी।

उसने अपना मोटा लंड एक ही बार में अंदर कर दिया और बबिता चिल्लाई- बचाओ !!

लेकिन कोई फ़ायदा नहीं। उसकी गांड खुल चुकी थी और लंड उसे छेदते हुए अंदर था। आधे घंटे तक यह गांड मारने के बाद शमशेर सिंह ने अपना वीर्य उसके पिछवाड़े पर निकाल कर लंड को चूचों में पोंछ दिया।

रात में यह कार्यक्रम तीन-चार बार उस खुली चांदनी में फ़िर चला। ससुर और बहू की यह कहानी अनवरत चुदाई के साथ चलती रही।

सुहागरात में कुंवारी बीवी को बनाया सुहागन

सुहागरात में कुंवारी बीवी को बनाया सुहागन,Honeymoon Sex Story In Hindi


मेरी शादी को एक साल हो गया है। मेरी शादी दिसम्बर में हुई थी, उस समय बहुत ठण्ड थी लेकिन मैं तो बस अपनी पहली रात के बारे में सोच-सोच कर मन ही मन खुश हो रहा था। शादी की सारी थकन तो मानो सुहागरात के कारण महसूस हो ही नहीं रही थी।

अधिकतर मेहमान जा चुके थे पर तब भी कुछ मेहमान थे और वो बाहर के कमरे में सो रहे थे। हमारे लिए अंदर का कमरा तैयार किया गया था। उस रात मैं पहली बार चुदाई करने वाला था, इससे पहले बस पिक्चर्स में देखा था।

मेरा लंड 6 इंच लम्बा है और उस रात पूरे शबाब पर था। वो रात मेरे और मेरी बीवी दोनों के लिए यादगार था क्योंकि हम दोनों पहली बार सेक्स करने वाले थे।

जब सब सोने चले गए तो हम दोनों भी कमरे में आ गए। बात करते-करते मैंने उसे बाँहों में ले लिया और फिर एक किस लिया। हम शादी से पहले मिलते जरूर थे तब हमने एक दूसरे को गले लगाया था और किस भी किया था तो किस का अनुभव तो हो गया था। फिर हम बहुत देर तक एक दूसरे को चूमते चाटते रहे और मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भींच लिया। फिर धीरे-धीरे मैंने उसका लहंगा और जेवर उतारे, उसकी पीठ पर हाथ फेरता रहा और वो भी मुझे सहलाती रही। फिर मैंने उसका ब्लाऊज भी उतार फेंका और उसने भी मुझे सिर्फ अंडरवियर में कर दिया।

अब वो सिर्फ ब्रा पेंटी में थी और मैं अंडरवियर में। हम दोनों ऐसे ही रजाई के अंदर एक दूसरे से लिपट कर लेट गए और शरीर गर्म करने लगे। जब गर्माहट शरीर में फैल गई तो मैंने अपनी अंडरवियर और उसकी ब्रा पेंटी उतार फेंकी। फिर हम दोनों 69 पोजिशन में एक दूसरे के अंगों को चूसने लगे। मुझे उसकी चिकनी चूत चाटने में मजा आ रहा था और यही मजा लेने क लिए ही मैंने उसे शादी से एक दिन पहले ही चूत की शेविंग करने को कहा था और खुद के लंड की भी सफाई की थी।

Honeymoon Sex Story In Hindi


जब वो लंड चूस रही थी तो मुझे शरारत सूझी और मैंने जोर से अपने लंड को उसके मुँह में घुसेड़ दिया जो सीधा उसके तालू में जा टकराया और वो बेड पर ही उछल गई।

जब हमारे चुसाई कार्यक्रम को बहुत देर हो गई तो फिर चुदाई की तैयारी करने लगे।

मैंने अपने दोस्तों द्वारा गिफ्ट किया हुआ डोटेड कॉन्डम निकाला और अपने तने हुए लंड पर चढ़ा लिया। मैंने अपनी बीवी को पलंग पर सीधा लिटाया और उसके ऊपर आ गया। फिर मैं धीरे-धीरे अपने लंड से उसकी चूत सहलाने लगा ताकि उसकी चूत गीली हो जाये और चुदाई में दर्द ना हो।

उसी समय मैं उसके मम्मों को दबाने लगा…….. और वो धीरे-धीरे सिसकियाँ लेने लगी। उसके मम्मे भी काफी कड़क थे जो अब तो दब-दब कर, चुस-चुस कर बड़े और भारी हो गए हैं। मम्मों को दबाते दबाते मैं उन्हें चूसने लगा और उसके गले पर भी चूमता रहा और वो सिसकियाँ लेती रही………..

फिर धीरे से मैंने अपने तना हुआ लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और अंदर डालने लगा। पर जैसे ही डालने को हुआ, वो दर्द से तड़पने लगी और उसके मुँह से आः ह्ह्ह …….. निकलने लगी।

तुरंत मैंने अपने लंड चूत पर से हटाया और उसका मुँह अपने हाथ से बंद किया ताकि उसकी आवाज बाहर मेहमानों के कान में ना चली जाये।

अब तो मैं यह सोच रहा था कि कैसे इसकी चुदाई करूँ…..

मैंने उसकी चूत पर अपना थूक लगा कर उसे गीला किया और फिर से उसके पैर उठा कर लंड अंदर डालने लगा। पर वो फिर से आ आह्ह ह्ह्ह …. करने लगी और कहने लगी मत करो- जान ……… बहुत दर्द हो रहा है !

तब मैंने उसका मनोबल बढ़ाया और धीरे-धीरे लंड अंदर करने लगा और वो आ आह्ह्ह् ह्ह्ह्ह ……. उम्म्मह्ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह्ह…… करने लगी।

फिर मैंने हिम्मत करके थोड़ा ज्यादा दम लगा कर लंड उसकी चूत के अंदर सरकाया। कुछ ही देर में मेरे लंड को उसकी चूत को भेदने में सफलता मिल गई और वो एक दम से ऊह्ह्ह्ह मम्मी ईईई………………कर के निढाल हो गई और मैं भी लंड उसकी चूत में रखे ही उसके ऊपर लेट गया और उसे होश में लाने लगा। मैं उसे हिलाने डुलाने लगा पर वो होश में नहीं आई। तब मैंने उसके गले और वक्ष पर चूमना शुरू किया। मैं उठ कर पानी नहीं ला पा रहा था क्योंकि ऐसा करने के लिए लंड बाहर निकालना पड़ता। फिर मैं उसे हल्के से काटने लगा, तब उसे होश आया और होश में आते ही फिर से आःह्ह्ह…… बहुत दर्द हो रहा है ! कहने लगी।

फिर मैंने लंड को चूत में अंदर-बाहर करना शुरु किया जैस मैं पिक्चर में देखता था और उसे चूमता भी रहा ताकि उसकी आवाज बाहर ना जाये और वो हल्की आवाज में ऊऊऊम्म्म्म्म…… आ आअह्ह्ह्ह्ह करने लगी….. और मैं उसकी खूब चुदाई करता रहा…..

फिर लंड को अंदर ही डाले मैंने करवट बदल ली और वो मेरे ऊपर आ गई। फिर मैंने अपनी गांड उठा कर उसकी चुदाई चालू कर दी और अब वो मजे लेने लगी थी। वो भी कहने लगी थी- करते रहो जानू…..

और मैं उसे चोदता रहा !

आप सब यकीन नहीं मानेंगे- उस रात को मैंने उसे पूरे 50 मिनट तक चोदा जो कि मेरे लिए भी आश्चर्यजनक था कि इतनी देर चुदाई करने पर भी मैं झड़ा नहीं। जब बहुत देर हो गई तो फिर से मैंने उसे अपने नीचे लिटा लिया और जोर से चोदने लगा और वो तो बस आःह्ह्ह …… ऊऊउह्ह्ह्ह्ह…… .मम्मीईईई ….. आ आआह्ह्ह्ह ……… मजा आ गया ! कहती रही।

और फिर मैंने अपनी स्पीड तेज कर दी और उसकी आवाज भी तेज होने लगी…….

उस समय मैं भी जोश में आ गया था, तो मैंने भी आवाज की और मेहमानों की परवाह नहीं की, सोचा कि यही तो सोचेंगे कि चलो सुहागरात मजे से मन रही है ! यही सोच कर मैं निश्चिन्त हो कर अपनी बीवी को चोदने लगा और जैसे ही मैं झड़ने के करीब आया तो अपने लंड की चोदने की रफ़्तार बहुत तेज कर दी। मेरी बीवी मेरी पीठ को खरोंचने लगी और कुछ ही देर में मैंने अपने लंड का वीर्य छोड़ दिया और वो सीधा कॉन्डम में इकट्ठा हो गया।

फिर कुछ देर हम दोनों ऐसे ही लेटे रहे। जैसे ही मैंने लंड निकाला तो कॉन्डम पूरा लाल था जो मेरी कुंवारी बीवी की सील टूटने की वजह से निकले खून से लाल हुआ था। हम इस बारे में पहले ही फोन पर बात कर चुके थे इसलिए खून देख कर मेरी बीवी भी डरी नहीं और उसके मन में भी संतोष था कि वो अपनी जिंदगी में पहली बार अपने पति से ही चुदी।

फिर हम दोनों बाथरूम मैं अपने लंड और चूत साफ़ करने चले गए और फिर ऐसे ही नंगे एक दूसरे से लिपट कर सो गए। फिर एक घंटे बाद दुबारा से चुदाई की। उस रात पूरी तीन बार हमारा चुदाई कार्यक्रम चला।

इस तरह मैंने अपनी कुंवारी बीवी की सील तोड़ के उसे सुहागन बना दिया।

पूरी रात बिस्तर में बहू की चुदाई

Sasur bahu ki chudai,पूरी रात बिस्तर में बहू की चुदाई


ससुर जी- चल आज तेरा सारी स्ट्रिपिंग शूट लेता हूँ..!

मैं घबरा गई, मैंने कहा- मैं कुछ समझी नहीं… बाबूजी?

ससुर जी- कुछ नहीं इसमे तू पहले साड़ी में होगी और फिर धीरे-धीरे स्ट्रिपिंग करनी होगी, मैं तेरा शूट लेता रहूँगा और आखिरी में लिंगरी में शूट करूँगा!

मैंने एकदम सुन्न रह गई- मैं ये सब कुछ नहीं करूँगी बाबूजी, मैं आपकी बहू हूँ… आपके सामने ये सब कैसे कर सकती हूँ?

मैंने एकदम गुस्से में कहा और उनके कमरे से जाने लगी।

तो उन्होंने मेरा साड़ी का पल्लू पकड़ लिया और खींच कर अपने बिस्तर पर गिरा दिया। उन्होंने जल्दी से कमरा अन्दर से बन्द कर दिया।

ससुर जी ने कहा- बहू.. तू भी तो प्यासी रहती है और मैं भी… क्यों ना हम दोनों एक-दूसरे की मदद करें..!

और यह कह कर उन्होंने मेरी साड़ी खींचनी शुरु कर दी, फ़िर मेरे पेटिकोट का नाड़ा खींच दिया।

मैं भी प्यासी थी तो मैंने भी अपने ससुर का कोई खास विरोध नही किया बस थोड़ा बहुत दिखावा किया।

तभी मेरे ससुर ने मेरे ब्लाऊज के हुक खोल कर उसे उतार दिया।

और फ़िर ब्रा और पैन्टी को भी मुझसे अलग कर दिया।

मैं अब अपने ससुर के सामने एकदम नंगी थी। मैंने तो घबराहट के मारे आँखें बंद कर लीं और रोने का ड्रामा करने लगी।

मेरे ससुर ने मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। वो कभी मेरी बाईं चूची को तो कभी दाईं चूची को बड़ी बुरी तरह मसल रहे थे। वो एक ताकतवर मर्द थे

और तभी मेरे नीचे कुछ चुभने लगा, तो मुझे एहसास हुआ कि उनका लंड बहुत बड़ा है और वो उनके पजामे में एकदम तम्बू की तरह तन गया है।

ससुर जी बोले- वाह बहू… तू तो चूत एकदम साफ़ रखती है!

उन्होंने एक ऊँगली मेरी चूत में डाल दी, मैं दर्द से चीख पड़ी क्योंकि मैंने तो अभी तक अताउल्ला के साथ भी अच्छे से चुदाई नहीं की थी, तो मेरी योनि एकदम तंग थी। फिर उन्होंने अपनी ऊँगली को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैं दर्द के मारे तड़पने लगी।

उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे। मैंने अभी भी आँखें बंद कर रखी थीं और अपने होंठ भी एकदम बंद कर रखे थे।

ससुर जी ने मेरी चूचियों को और जोर से मसलना शुरू कर दिया और मैं चिल्लाने लगी।

ससुर जी का कमरा एकदम अन्दर है इसलिए बाहर तक मेरी आवाज़ शायद नहीं जा रही थी। वो अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करते रहे और मैं कहती रही- बाबूजी प्लीज़ ऐसा मत करो… मैं आपकी बहू हूँ..!’

ससुर जी- कौसर बेटा.. तू तो बहुत ही कामुक है… तेरी ये जवानी छोड़ कर अताउल्ला बेकार में बाहर रहता है… बेटा प्लीज़ मेरे साथ सहयोग कर ले… मैं तुझे पूरा मज़ा दूँगा…!

उनकी ये सब बातें सुनना मुझे अच्छा लग रहा था, मेरे शरीर में एक सनसनी होने लगी और अब दर्द भी कम हो गया था। मेरी चिल्लाना अब सिसकारियों में बदल गया और मुझे अब उनकी ऊँगली अन्दर-बाहर करना अच्छा लग रहा था।

तभी उन्होंने अपना पजामा उतार दिया और मुझे अपनी चूत पर कुछ गरम-गरम सा लगा!

या अल्लाह.. ये ससुर जी क्या कर रहे थे…! वो मेरी चूत में अपना लंड डालने वाले थे।

मैं छटपटाने लगी और तभी उन्होंने एक हल्का धक्का दिया और उनका करीब 2½ इंच लंड मेरी चूत में घुस चुका था, मेरी जान निकलने लगी।

Sasur bahu ki chudai


उनका लौड़ा अताउल्ला से भी मोटा था। करीब 2½ इंच मोटा और तभी उन्होंने एक और धक्का दिया और मुझे लगा कि किसी ने गरम लोहे की छड़ मेरी चूत में पेल दी हो।

करीब 7 इंच लंबा और 2½ इंच मोटा लंड मेरी चूत में था और अब मुझसे दर्द सहन नहीं हो रहा था।

उन्होंने अपना एक हाथ मेरे होंठों पर रख कर मुझे चीखने से रोका हुआ था।

वो अब हल्के धक्के दे रहे थे और मेरी चूचियों को मसल रहे थे और उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए थे। मैं एकदम बेसुध सी थी। अब तो मुझसे चीख भी नहीं निकल रही थी।

उन्होंने हल्के-हल्के झटके मारना शुरू किए। मैंने उनके हर झटके के साथ मचल उठती थी। अब मेरे दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया था, अब मुझे उनका धक्के देना अच्छा लगने लगा और उनके हर धक्के का अब मैं भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल कर साथ दे रही थी।

अब ससुर जी ने अपने धक्के तेज़ कर दिए और मेरी जान से निकलने लगी, जैसे ही वो पूरा लंड मेरे अन्दर करते मुझे लगता कि उनका लंड मेरा पेट फाड़ कर बाहर आ जाएगा, पर मुझे भी अब बहुत मज़ा आ रहा था।

शादी के अभी कुछ महीने ही बीते थे और मैंने ऐसा सम्भोग अताउल्ला के साथ भी नहीं किया था।

अताउल्ला ने हमेशा हल्के-हल्के ही सब कुछ किया था।

पर आज तो ससुर जी ने मुझे बुरी तरह मसल दिया था। मेरी चूत ने भी अब पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, मैं झड़ने वाली थी।

मैंने आँखें अब भी नहीं खोली थीं, पर मैंने अपने ससुर जी को अपने से एकदम चिपका लिया और मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं- उह्ह ओह्ह… बाबूजी प्लीज़… नहीं..!

मैं अब भी उन्हें मना कर रही थी, पर उन्हें अपने ऊपर भी खींच रही थी और एकदम से मेरी चूत से पानी की धार निकल पड़ी और मैं एकदम से निढाल हो गई।

ससुर जी- बहुत अच्छा कौसर बेटा, मैं भी अब आने वाला हूँ।

उन्होंने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और एकदम से मेरे ऊपर गिर पड़े। उनका गरम-गरम पानी मेरी चूत में मुझे महसूस हो रहा था।

मुझे नहीं पता फिर क्या हुआ, उसके बाद जब मेरी आँख खुली तो मेरे ऊपर एक चादर पड़ी थी और मैं अभी भी ससुर जी के बिस्तर पर ही थी।

घड़ी में देखा तो करीब 2 बज रहे थे।

मैं उठी तो मेरा पूरा जिस्म दर्द कर रहा था। मैंने जल्दी से अपने कपड़े ढूँढने शुरू किए तो पाया कि सिर्फ़ साड़ी को छोड़ कर सब कपड़े फटे हुए थे।

ससुर जी ने उन्हें बुरी तरह फाड़ दिया था। मैंने सब कपड़े समेटे और फ़ौरन अपने कमरे में आ गई। मुझे नहीं पता कि ससुर जी उस समय कहाँ थे। मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।

अब मैं सोचने लगी कि आज मेरे साथ क्या हो गया। अब मुझे खुद पर ग्लानि आ रही थी कि मैंने अपनी अन्तर्वासना के वशीभूत होकर अपने ससुर को यह क्या करने दिया। फ़िर मैंने सोचा कि मैं नासमझ हूँ तो मेरे ससुर तो समझदार हैं, उन्होंने यह हरकत क्यों की, अगर वो पहल ना करते तो मैं इस पचड़े में ना पड़ती। मुझे लगा कि इसके गुनाहगार मेरे ससुर ही हैं, मैं नहीं, उन्हें सजा मिलनी ही चहिये।

मैंने अपना दरवाजा बंद कर लिया और फिर मैं रोने लगी। काफ़ी देर तक रोती रही और मैंने मन बना लिया कि आज इस आदमी को सबक सिखाऊँगी और अताउल्ला को सारी बात बता कर पुलिस को फोन करूँगी। मैंने अपना फोन देखा तो वो मेरे कमरे में नहीं था।

मैंने जल्दी से एक सलवार-सूट अलमारी से निकाल कर पहना और सोचा की शायद ड्राइंग-रूम में फोन होगा। मैं एकदम गुस्से में थी और ड्राइंग-रूम में फोन देखने लगी तो देखा ससुर जी अपने कंप्यूटर पर बैठे है और मेरी नग्न-चित्र कंप्यूटर पर चला रहे हैं। मैं एकदम सुन्न रह गई।

मेरे ससुर जी ने मेरी नग्न चित्र जब मैं बेहोशी की हालत में थी, तब ले लिए थे। मैं भाग कर फिर अपने कमरे में आ गई और अंदर से बन्द कर लिया।

मुझे नहीं पता था मेरे साथ ये सब क्यों हो रहा है। मैं अपनी किस्मत पर रो रही थी कि मैं कहाँ फंस गई। मेरा फोन भी मेरे पास नहीं था, मैं अताउल्ला को तुरंत कॉल करके सब बताना चाहती थी, पर मेरे पास फोन नहीं था।

मैं फिर अपनी किस्मत पर रोने लगी, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बेटा.. आज क्या भूखा रखेगी, दोपहर का खाना तो लगा दे..!’

वो मेरे कमरे के एकदम पास थे, मैंने कहा- चले जाओ यहाँ से, मैं अताउल्ला को अभी कॉल करती हूँ..!

ससुर जी- बहू सोच कर कॉल करियो, जो तू अताउल्ला से कहेगी तो मैं भी कह सकता हूँ कि मैंने तुझे पराए मर्द के साथ पकड़ लिया, इसलिए तू मुझ पर इल्ज़ाम लगा रही है और मेरे पास तो तेरी फोटो भी हैं। वो मैं अगर इंटरनेट पर डाल दूँ। तो तेरी दोनों बहनों की शादी तो होने से रही बेटा…!

‘आप यहाँ से चले जाओ… मुझे आपसे बात नहीं करनी..!’ मैं चिल्लाई और फिर फूट-फूट कर रोने लगी।

मैं अपने कमरे में फर्श पर ही बैठ गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी और ससुर जी ने जो अभी कहा उसे सोचने लगी।

क्या अताउल्ला मेरी बात मानेंगे..या अपने पिता की…! मुझे तो अभी वो सही से जानते भी नहीं..! क्या वो मुझ पर यक़ीन करेंगे कि उनके बाप ने मेरे साथ ऐसा किया?

मेरा सर, दर्द के मारे फटने लगा।

और अगर क्या मैं पुलिस मैं जाऊँ तो क्या ससुर जी सच में मेरे नग्न चित्र इंटरनेट पर डाल देंगे?

मैं अपनी बहनों को बहुत प्यार करती थी, क्या इससे मेरी बहनों पर फर्क पड़ेगा, मेरी आँखों के आगे अँधेरा सा छाने लगा, मैं अभी भी फर्श पर बैठी थी और मुझे बहुत तेज़ प्यास लग रही थी, मेरा गला सूख रहा था।

मैं उठी और अपने कमरे से रसोई में चली गई। वहाँ जाकर पानी पिया, तभी ससुर जी की आवाज़ आई- बहू, बहुत भूख लगी है, तुझे जो करना है कर लियो.. पर प्लीज़ खाना तो खिला दे… देख तीन बजने वाले हैं और मैंने तुझसे जो कहा है पहले उस पर भी सोच-विचार कर लेना बेटा…!

मेरी आँखों से फिर आँसू आ गए और मैं वापिस रसोई में आ गई।

फ्रिज खोला उसमें सब्ज़ी बनी पड़ी थी, मैंने वो गर्म की, 4 रोटी बनाई और ड्राइंग कमरे में ससुर जी को देने आ गई।

मैंने देखा वो सोफे पर सो रहे थे, मैंने ज़ोर से टेबल पर थाली रख दी और वहाँ से जाने लगी।

ससुर जी की आँख मेरी थाली रखने से खुल गई, वो बोले- बेटा, तू नहा कर ठीक से कपड़े पहन ले, देख ऐसे अच्छा नहीं लगता और कुछ खा भी लेना..!

और उन्होंने खाना शुरू कर दिया।

मैंने अपने आप को देखा तो मैंने जो सलवार-सूट जल्दी में पहना था, उसके ऊपर मैंने चुन्नी भी नहीं ली थी और मेरे सारे बाल बिखरे पड़े थे।

मैं जल्दी से गुसलखाने में चली गई और फिर नहाने लगी।

मैंने अपने जिस्म को देखा तो जगह-जगह से लाल हो रहा था। ससुर जी ने मेरी चूचियाँ इतनी बुरी तरह मसली थी कि उनमें अभी तक दर्द हो रहा था और मुझे अपनी चूत में भी दर्द महसूस हो रहा था।

मैं एकदम गोरी थी, इसलिए ससुर जी ने जहाँ-जहाँ मसला था, वहाँ लाल निशान पड़ गए थे। जिस्म पर पानी पड़ना अच्छा लग रहा था। मैं 20 मिनट तक नहाती रही और फिर देखा तो मैं अपने कपड़े और तौलिया भी लाना भूल गई थी।

मैं जल्दी से नंगी ही भाग कर अपने कमरे में आ गई और अन्दर से बन्द कर लिया और फिर जल्दी से एक दूसरी साड़ी निकाली, नई ब्रा और पैन्टी निकाली, जो मैंने शादी के लिए ही खरीदी थी क्योंकि एक सैट तो बाबूजी ने फाड़ दिया था। दूसरी साड़ी पहनी और फिर अपने कमरे में ही लेट गई।

मुझे घर की याद आने लगी और फिर रोना आ गया। मुझे पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गई और जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे।

मुझे रोज अताउल्ला सात बजे शाम को फोन करते हैं, मैं यही सोच कर कि जब फोन आएगा तो उन्हें सब बता दूँगी, इंतज़ार करने लगी, पर तभी मुझे याद आया कि मेरा फोन तो ड्राइंग कमरे में है, मैं उनका फोन कैसे उठा पाऊँगी।

मैंने अपना दरवाजा खोला और ड्राइंग कमरे में आ गई। उधर देखा तो ससुर जी बैठे थे, अपने कंप्यूटर पर कुछ कर रहे थे।

ससुर जी- बहू चाय तो बना दे!

वो तो ऐसे बात कर रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही नहीं और फिर बोले- ले बेटा, तेरा फोन यहीं पड़ा था,

अताउल्ला का फोन आने वाला होगा… इसे रख ले अपने पास!

उन्होंने मुझे मेरा फोन दे दिया। मैंने जल्दी से अपना फोन ले लिया और रसोई में आ गई।

मेरा मन कर रहा था कि तुरंत अताउल्ला को फोन करके उनके बाप की करतूत बता दूँ, पर सोचने लगी क्या वो मेरी बात पर यकीन करेंगे और फिर ससुर जी की धमकी भी याद आने लगी।

ये सोचते-सोचते मैंने उनके लिए चाय बना दी और चाय लेकर ड्राइंग कमरे में आ गई और टेबल पर रख कर जाने लगी।

तो ससुर जी बोले- बेटा दो मिनट बैठ जा, मुझे कुछ बात करनी है।

मैंने कहा- मुझे आपसे कुछ बात नहीं करनी…

और अपना मुँह फेर लिया।

ससुर जी- तू प्यार की ज़ुबान नहीं समझेगी, तो फिर मुझे दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा..!

उनकी आवाज़ में काफ़ी गुस्सा था।

मैं सिहर गई और मैं वहीं सोफे पर बैठ गई, बोली- क्या बात करनी है.. जल्दी करिए..

मैंने आँखें अभी भी नीचे की हुई थीं।

ससुर जी- बेटा.. मुझे माफ़ कर दे, मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ.. जिस दिन से तुझे अपने बेटे के लिए पसंद किया है, उस दिन से उसके नसीब की दाद देता हूँ कि उसे तेरी जैसी सुंदर बीवी मिली है। पर तू ज़रा सोच उसे तेरी कितनी कदर है?

ससुर जी- हर समय काम-काम करता रहता है, तुझे क्या लगता है, उसकी कम्पनी में लड़कियों की कमी है? वो रोज अपनी सेटिंग को चोदता होगा लाहौर में.. मैं उसे बचपन से जानता हूँ!

मेरी तो शर्म के मारे आँख बंद हो गई कि ससुर जी मेरे सामने कैसे लफ्ज़ बोल रहे हैं.. वो ऐसे तो कभी नहीं बोलते थे।

में चिल्ला कर बोली- तो फिर जब आपको पता था, तो फिर उनकी शादी क्यों की मेरे साथ? उनके साथ ही कर देते जो उनकी सेटिंग हैं।

ससुर जी- तू मेरी पसंद है बहू, अताउल्ला की नहीं.. और तू उसे सब कुछ बता भी दे तो भी वो तेरी बात नहीं मानेगा और वो लाहौर में खुश है, यहाँ कभी-कभी आएगा तेरे साथ एक-दो रात बिताएगा और फिर लाहौर चला जाएगा.. उसे मॉडर्न लड़कियों का चस्का है, मैंने उसे फोन पर बात करते सुना था। अब तक अपनी कंपनी की करीब 8-10 लड़कियाँ पटा कर चोद चुका है वो..

मैंने कहा- बस करिए.. आप ये सब मुझे क्यों बता रहे हैं… और मेरे सामने ऐसी गंदी बातें ना करिए प्लीज़..! मुझ को आप से बात नहीं करनी…

और मैं रोने लगी।

ससुर जी- बहू.. रो मत, मैं बस यह कहना चाहता हूँ कि मैं तुझे बहुत प्यार करता हूँ और तुझे कोई पेरशानी नहीं होगी यहाँ पर… तू यहाँ खुश रह और अगर तूने मेरी बात नहीं मानी तो तुझे जो मैंने कहा है, मैं वो सब कर दूँगा और अताउल्ला से मैं खुद बात करूँगा और वो तुझे तलाक दे देगा, ना तू कहीं की रहेगी और ना तेरी दोनों कुंवारी बहनें..! बस इन सब चीजों का अंजाम दिमाग़ से सोच ले और मुझे कुछ नहीं कहना…

तभी मेरा फोन बज उठा, अताउल्ला का कॉल था। मैं अपने कमरे में भाग आई, काफ़ी घंटियाँ बज गईं, तब मैंने फोन उठाया।

अताउल्ला- कहाँ हो आप, कब से कॉल कर रहा हूँ!

मैंने कहा- कुछ नहीं… वो मैं रसोई में थी..!

और अपने आँसू पोंछने लगी।

‘आप यहाँ कब आओगे, आपकी बहुत याद आ रही है!’ मैंने सिसकते हुए कहा।

अताउल्ला- यार… यहाँ का काम ही ऐसा है, शायद दो महीने में कुछ छुट्टी मिल जाए और सब ठीक है वहाँ पर? और अब्बू कैसे हैं?

मन तो किया कि अभी ससुरजी का काला चिठ्ठा बयान कर दूँ, पर ससुरजी की धमकी से सिहर गई।

मैंने कहा- हाँ.. सब ठीक है, मेरी तबियत कुछ ठीक नहीं है, मैं आपसे बाद में बात करती हूँ!

मुझसे बात नहीं हो पा रही थी, इसलिए ऐसा कह दिया।

अताउल्ला- ठीक है.. अपना और अब्बू दोनों का ख़याल रखना… अल्ला हाफ़िज़..!

यह कह कर उन्होंने फोन काट दिया और मैं फिर अकेली रह गई। घड़ी में समय देखा तो शाम के 7-30 बज रहे थे। मैं जल्दी से फोन रख कर रसोई में आ गई।

मैं वो सब भूल जाना चाहती थी और रसोई में काम करने लगी। खाना बनाते-बनाते एक घंटा गुजर गया, ससुर जी का खाना ड्राइंग कमरे में लगाया और अपने कमरे में जाने लगी।

तभी ससुर जी बोले- बहू, तूने कुछ खाया?

मैंने गुस्से में कहा- मुझे भूख नहीं है, आप को कुछ चाहिए हो तो मुझे आवाज़ दे देना, मैं अपने कमरे में जा रही हूँ!

यह कह कर मैं अपने कमरे में आ गई और दरवाजा बन्द करके लेट गई, उसके बाद पता ही नहीं चला कब आँख लग गई।

जब सुबह का अलार्म बजा तब आँख खुली, सुबह के 5 बजे थे।

मुझे पता था ससुर जी को स्कूल जाना होगा, उनका लंच लगाना था। तो मैं नहा-धो कर जल्दी से रसोई में गई और उनका ब्रेकफास्ट और लंच जल्दी से तैयार किया।

मुझे उनकी तिलावत करने की आवाज़ आ रही थी, मैंने मन में कहा कि कैसा ढोंगी इंसान है, यह तो उस ऊपर वाले से भी नहीं डर रहा।

फिर थोड़ी देर में मैंने उनका नाश्ता ड्राइंग रूम में लगा दिया। आज मैंने रोज की तरह साड़ी ही पहनी थी।

वैसे तो मैं रोज ससुर जी को सलाम करती थी, पर आज चुपचाप खड़ी रही।

ससुर जी- बहू… मुझे पता है तूने कल से कुछ नहीं खाया है.. चल बैठ मेरे साथ और कुछ खा ले!

मैंने कहा- मुझे अभी भूख नहीं है।

ससुर जी बोले- तू मेरे साथ खाती है या मैं फिर आज छुट्टी करूँ स्कूल की.. बोल?

कल छुट्टी करने पर मेरा क्या हाल हुआ था, वो सोच कर मैं फिर काँप गई और चुपचाप सोफे पर बैठ गई।

मैं नज़रें झुका कर बैठी थी और धीरे-धीरे मैंने ससुर जी के साथ नाश्ता कर लिया।

उन्होंने अपना दूध का कप भी मेरे आगे कर दिया और कहा- चलो पियो इसे!

वो मुझे ऐसे नाश्ता करा रहे थे, जैसे कोई बच्चे को कराता है।

ससुर जी बोले- बहू.. इस घर में हम दोनों अकले हैं, इसलिए हमें एक-दूसरे का ख़याल रखना चाहिए… खुश रह बेटा और तू साड़ी में सिर पर पल्लू डाल कर बड़ी सुंदर लगती है… चल अब मैं स्कूल जा रहा हूँ.. तू दरवाज़ा बंद कर ले..!

वो ऐसा कह कर चले गए। मैंने फिर दरवाज़ा बंद कर लिया और सोचने लगी कि ससुर जी आज इतने अच्छे से बात कर के गए हैं और कल उन्होंने मेरी इज़्ज़त तार-तार कर दी थी, वो ऐसा क्यों कर रहे हैं।

फिर मैं अपने घर के काम में लग गई। दोपहर के 2-00 बज चुके थे, आम तौर पर ससुर जी अब तक स्कूल से आ जाते थे, पर वो आज नहीं आए थे। मुझे लगा पता नहीं क्या हुआ, वो आज कहाँ चले गए।

करीब तीन बजे दरवाजे की घंटी बजी, तो मैंने दरवाज़ा खोला।

ससुर जी अन्दर आ गए थे, मैंने कहा- बाबूजी आप फ्रेश हो लो, मैं आपका खाना लगा देती हूँ।

तो ससुर जी बोले- बेटा ये ले!

मैंने देखा तो उनके हाथ में एक पोली बैग था, उसमें कुछ कपड़े थे।

मैंने कहा- यह क्या है?

ससुर जी- बहू.. कल तेरे कपड़े फट गए थे ना मुझसे… मुझे मुआफ़ करना… मैं नए लाया हूँ। आज शाम को तू इन्हीं को पहन लेना..!

और वो फ्रेश होने चले गए।

मैंने वो पोली बैग अपने कमरे में रख दिया और उनका खाना लगाया, खुद भी खाया और फिर अपने कमरे में थोड़ा आराम करने आ गई।

अब मेरा ध्यान उस पोली बैग पर गया, जो ससुर जी ने मुझे दिया था।

मैंने सोचा देखूँ इसमें वो क्या लाए हैं। बैग खोला तो मैं एकदम दंग रह गई, उसमें एक मशहूर ब्रांड की बहुत ही महंगी सुनहरे रंग की ब्रा थी और साथ में एक सुनहरे रंग की थोंग (पैन्टी) थी। पैन्टी तो बिल्कुल किसी डोरी की तरह थी। उसमें पीछे की तरफ की डोरी पर कुछ चमकदार नग लगे हुए थे।

और साथ में एक नाईटी भी थी, जो काले रंग की एकदम पारदर्शी थी। उसमें बहुत ही कम कपड़ा था, वो एकदम लेस वाली नाईटी थी। उसे कोई पहन ले तो शायद ही उसमें लड़की का कोई अंग छुप सके।

आज तक अताउल्ला ने भी मुझे ऐसी कोई ड्रेस नहीं दी थी। ऐसी ड्रेस तो मैंने सिर्फ़ फिल्मों में ही देखी थी। तो ससुर जी को आज आने में इसलिए देरी हुई थी।

मुझे यकीन नहीं हुआ कि वो मेरे लिए ऐसी ड्रेस भी खरीद सकते हैं।

मैंने फ़ौरन उस पोली बैग को बंद कर के बेड पर एक तरफ रख दिया और फिर मैं लेट गई और मेरी आँख लग गई।

जब आँख खुली तो शाम के छः बजे थे। मैंने जल्दी से उठ कर चाय बनाई और ससुर जी को देने के लिए ड्राइंग रूम में आ गई।

वो ड्राइंग रूम में अख़बार पढ़ रहे थे।

मैंने चाय मेज पर रख दी और जाने लगी।

ससुर जी- बहू… तुझे कहा था मैंने कि शाम को वो कपड़े पहन लेना, जो मैं आज लाया था और तूने अभी तक साड़ी पहन रखी है। मुझे तेरा फोटोशूट लेना है, चलो जल्दी से वो ड्रेस पहन कर आ जा..

मैं हाथ जोड़ते हुए बोली- बाबूजी… प्लीज़ मुझे छोड़ दो, मैं वो कपड़े पहन कर आप के सामने कैसे आ सकती हूँ.. प्लीज़ बाबूजी!

मैंने अपनी आँखें नीचे की हुई थीं।

ससुर जी- बहू, तू एक बार मेरी बात मान ले, आज के बाद तुझे कुछ पहनने को नहीं बोलूँगा.. प्लीज़, मान जा!

मैं उनसे अर्ज कर रही थी और वो मुझसे..!

ससुर जी- जा अब.. और मुझे तू रात तक उसी ड्रेस में दिखनी चाहिए, बस!

मुझे लगा वो गुस्सा होने वाले हैं, इसलिए मैं तुरंत अपने कमरे में आ गई।

मरती क्या ना करती.. मैंने वो पोली बैग उठाया और उसमें से वो ब्रा, पैन्टी और वो नाईटी निकाल ली। मैंने ड्रेसिंग टेबल के सामने जाकर अपनी साड़ी उतारी और फिर वो नई ब्रा और पैन्टी पहन ली।

मैंने पहली बार इतनी महंगी ब्रा और पैन्टी पहनी थी। मैंने शीशे में खुद को देखा, मैं उस समय बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मैं एकदम गोरी हूँ और वो सुनहरे रंग की ब्रा और थोंग (पैन्टी) मेरे जिस्म पर एकदम ग्लो कर रही थी। थोंग तो ऐसी थी कि बड़ी मुश्किल से मेरी चूत उसमें छुप पा रही थी और उसके पतले डोरे मेरी टांगों के बीच में डाल लिए थे।

मैंने ऊपर से वो पारदर्शी नाईटी डाल ली, मैंने ड्रेसिंग टेबल में देखा तो मैं एकदम मॉडल सी लग रही थी।

उस समय मैं सब कुछ भूल गई और अपने बालों को अच्छे से बनाए, अपना मेकअप किया और फिर खुद को शीशे में निहारने लगी।

मुझे नहीं लगता कि उस नाईटी में कुछ भी छुप रहा था। मेरी चूचियां और तनी हुई लग रही थी उस ब्रा में और थोंग तो सिर्फ़ 3 इंच का कपड़ा डोरियों के साथ था, उसमें यक़ीनन मैं बहुत ही मादक और कामुक लग रही थी।

मेरी टाँगें एकदम नंगी थीं। मुझे इतना भी ध्यान नहीं रहा कि मैंने अपने रूम का दरवाज़ा बंद नहीं किया है। पीछे मुड़ी तो देखा कि ससुर जी मुझे टकटकी लगाए देख रहे हैं.. मैं एकदम शरमा गई।

मैंने कहा- बाबूजी.. आप यहाँ क्या कर रहे हैं?

और अपने हाथों से अपने तन को ढकने लगी।

ससुर जी- बहू अब शरमा मत… देख मैं कैमरा भी लाया हूँ.. अब मैं जैसा कहूँगा तू वैसा करेगी, नहीं तो तू सोच ले!

मैंने नजरें झुका लीं और चुपचाप खड़ी रही।

ससुर जी- चल अब सीधी खड़ी हो जा… मैं तेरे इस मादक रूप की फोटो तो खींच लूँ!

मैंने हाथ हटा लिए, ससुर जी ने कई फोटो लिए।

ससुर जी- चल.. अब नाईटी भी उतार दे..

यह कहानी देसिबीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे रहे ।

मैंने उनकी वो बात भी मान ली। अब मैं अपने ससुर के सामने केवल एक ब्रा और एक पतली डोरी वाली की थोंग में थी। अपने को छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी, पर इन कपड़ों में कुछ छुपता कहाँ है।

ससुर जी ने मुझे अलग-अलग हालत में खड़ा कर के कई फोटो लिए।

फिर बोले- चल अब पूरी नंगी हो जा बहू और नंगी तू इस कैमरा के सामने होगी..!

मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़, मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ… प्लीज़ मुझे नंगा मत करिए, आपने जो कहा, वो मैंने किया!

ससुर जी- बेटा… तू अभी कौन से कपड़ों में है?

यह कहते हुए उन्होंने मेरे शरीर से ब्रा और पैन्टी भी उतार दी। मैं अब एकदम नंगी थी, मैं एकदम सीधी खड़ी हो गई।

उन्होंने मेरी कई नंगी फोटो खींची।

फिर मेरी चूचियाँ देख कर बोले- बेटा.. ये तो अब तक लाल है, कल मैंने ज़्यादा तेज़ मसल दी थी क्या!

और मेरे चूचुक छूने लगे।

मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी, ऐसे मत करिए!

ससुर जी- चल अब दोनों हाथ दीवार पर रख और पीछे मुँह कर के खड़ी हो जा!

जैसा उन्होंने कहा, मैं वैसे ही खड़ी हो गई। मेरे हाथ दीवार पर थे, मेरे बाल खुले हुए थे और वो मेरे चूतड़ों तक आ रहे थे।

उन्होंने उस स्थिति के कई कोणों से फोटो लिए।

थोड़ी देर बाद मैंने पीछे मुड़ कर देखा वो एकदम नंगे हो चुके थे और उनका लंड एकदम तना हुआ था। उनका लवड़ा आज तो और भी लंबा लग रहा था। मैंने फिर से दीवार की तरफ मुँह कर लिया और अपनी आँखें बंद कर लीं।

मुझे अब अपने जिस्म पर उनके हाथ महसूस हो रहे थे, उनका एक हाथ मेरी बाईं चूची को मसल रहा था और दूसरा दाईं चूची को भभोंड़ रहा था।

मेरे मुँह से ‘उफआह.. बाबूजी प्लीज़… उफ्फ….नहीं…आह.. बस करो.. आ..’ जैसे अल्फ़ाज़ निकल रहे थे।

तभी उन्होंने दायें हाथ की एक उंगली मेरी चूत में डाल दी, मैं एकदम से उछल सी गई, तो उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए।

ससुर जी- बहू.. बस थोड़ी देर ऐसे ही खड़ी रह..!

और फिर मुझे अपनी चूत पर उनका मोटा लण्ड महसूस होने लगा। उन्होंने मेरे बाल पकड़े हुए थे और दाईं वाली चूची मसल रहे थे। उन्होंने एक झटका मारा और पूरा लंड मेरे अन्दर समा गया।

बिल्कुल जैसे हीटर की रॉड मेरे अन्दर समा गई हो।

आज वो मेरे साथ खड़े-खड़े ही चुदाई कर रहे थे।

मैंने अपनी आँखें बंद की हुई थीं।

फिर पता नहीं क्या हुआ मुझे अपनी चूत में सनसनी होने लकी और लगा मेरी चूचियाँ खड़ी हो रही हैं…!

या अल्लाह…. मेरा जिस्म मेरा साथ छोड़ रहा था, अब मैं भी मजे में डूबती जा रही थी, अब उनका लंड मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

मेरे मुँह से निकल रहा था- उफ़फ्फ़… बाबूजी…प्लीज़ नहीं…आहाहहा..!

और में उनके हर झटके का जवाब अपने चूतड़ हिला-हिला कर दे रही थी।

ससुर जी- ऊ…आहह.. बहू… तू बहुत ही प्यारी है बस दस मिनट और खड़ी रह…!

और इस तरह वो मुझे 20 मिनट तक दीवार पर खड़ा करके चोदते रहे, वो भी मेरे अपने कमरे में।

उसके बाद एक करेंट सा लगा और मेरी चूत से पानी की धार बह गई!

मुझे लगा वो भी झड़ गए हैं, वो एकदम मुझसे चिपक गए और मुझे सीधा करके मेरे होंठों को चूसने की कोशिश करने लगे।

फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया और मुझे गोदी में उठा कर मेरे बेड पर लिटा दिया और खुद भी लेट गए।

हम दोनों 15 मिनट ऐसे ही लेट रहे।

मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मैं अपने ससुर के साथ अपने बिस्तर पर नंगी पड़ी हूँ।

और इतने में मेरा फोन बजने लगा।

समय देखा तो सात बज रहे थे और अताउल्ला का फोन था।

ससुर जी- बेटा, अताउल्ला का फोन है… उठा ले!

और मेरी चूत को सहलाने लगे, मैंने उनका हाथ हटाया और अताउल्ला का फोन उठा लिया।

अताउल्ला- हैलो कौसर, कैसी हो आप?

मैंने कहा- ठीक हूँ, आप बताइए..!

अताउल्ला- क्या कर रही थी?

अब मैं उन्हें कैसे बताती कि मैं एकदम नंगी उनके बाप के साथ अपने बेड पर हूँ और ससुर जी मेरी चूत में उंगली डाल रहे थे। मैंने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका हुआ था।

मैंने कहा- मैं रसोई में काम कर रही थी..!

तभी ससुरजी ने मेरी एक चूची बड़ी ज़ोर से दबा दी, मेरे मुँह से फोन पर ही चीख निकल गई- ओफ़फ्फ़…

अताउल्ला घबरा गए, पूछने लगे- क्या हुआ?

मैंने ससुर जी से हाथ जोड़ कर इशारा किया कि प्लीज़ मुझे बात करने दो, तब जाकर उन्होंने मेरी चूची छोड़ी।

मैं नंगी ही बेड से उठ कर बोली- कुछ नहीं सब्ज़ी काट रही थी, थोड़ा सा लग गया..!

अताउल्ला- अपना ध्यान रखा करो और अब्बू कहाँ हैं?

उन्हें क्या पता था कि अभी थोड़ी देर पहले ही मेरी चूत के अन्दर अपना लण्ड डाले पड़े थे।

मैंने कहा- वो शायद बेडरूम में हैं, टीवी देख रहे हैं।

अताउल्ला- ठीक है अपना ख्याल रखना!

और उन्होंने फोन रख दिया।

मैंने ससुर जी को देखा तो वो बेड पर लेट मुझे ही देख रहे थे, पर उन्होंने अपने कपड़े पहन लिए थे।

मैं उनसे नज़रें नहीं मिला रही थी इसलिए फ़ौरन दूसरी तरफ देखने लगी।

मैंने भी सोचा कि मैं भी अपने कपड़े पहन लूँ और अलमारी खोल कर अपना एक सूट निकाल लिया।

ससुर जी- क्या कर रही है बेटा?

मैंने बिना उनकी तरफ देखे कहा- खाना बनाना है, देर हो जाएगी इसलिए रसोई में जा रही हूँ।

उन्होंने तभी बेड से उठ कर मेरा सूट छीन लिया, बोले- तो इसमें सूट का क्या काम? आज से तू खाना नंगी हो कर ही बनाएगी।

मैंने कहा- बाबूजी प्लीज़… मेरा सूट छोड़िए साढ़े सात बज गए हैं, बहुत काम है।

मुझे लगा शायद वो ऐसे ही कह रहे हैं।

ससुरजी- तुझे समझ नहीं आता क्या… अब शाम को तू ऐसे ही रहा करेगी, चल जा अब खाना बना…

और मेरा सूट बेड के दूसरी तरफ फेंक दिया।

मैंने कहा- प्लीज़ बाबूजी… मुझे कुछ तो पहनने दो!

और मैं नजरें झुकाए खड़ी रही।

ससुरजी- अच्छा चल तू इतना कह रही है तो तू कुछ चीज़ पहन सकती है..!

फिर बोले- तू अपनी कोई भी ज्वैलरी, अपनी चुन्नी और कोई भी हील वाली सैंडिल पहन सकती है.. ठीक है अब?

मैंने सोचा इसमें तो एक भी कपड़ा नहीं है, पहनूँ क्या और चुन्नी का क्या करूँगी जब नीचे से पूरी नंगी हूँ।

ससुर जी- और थोड़ा फ्रेश हो ले पहले, बाल भी बना ले, देख एकदम बिखरे पड़े हैं!

इतना कह कर वो अपने कमरे में चले गए।

छोटी बहन को पापा से चुदवाया



2 दिनों तक शिखा (मेरी छोटी बहन) और मैं चुदाई के चक्कर में शिखा की चूत की कली खिलने से जो खून निकला उस चादर को हम बदलना भूल गये और माँ पापा शादी से लौट आये।

चादर देख माँ बोली- चादर पर ये क्या लगा है?

तो शिखा तो सहम गयी.

पर मैंने कह दिया- माँ, वो कल रात लाल रंग गिर गया ड्राइंग करते समय।

तो माँ तो मान गयी.

पर पापा हमें शक की निगाहों से देख रहे थे।

खैर पापा और माँ थकान की वजह से वहां से चले गये।

जाते ही शिखा बोल पड़ी- पापा को शक हो रहा है भैया!

मैंने कहा- हाँ, मुझे भी पता है।

शिखा- तो अब क्या करें भैया?

फिर मैंने उसे समझाया कि शिखा अगर यूं ही पापा को शक रहा तो हम चुदाई नहीं कर पाएंगे, इसका सिर्फ एक ही हल है।

शिखा- क्या?

“अगर तू पापा को भी अपने इस जवान जिस्म का मजा चखा दे और अपनी चूत का उन्हें दीवाना बना दे तो काम बन जायेगा” मैंने कहा।

शिखा- भैया आप पागल हो, क्या कोई बेटी अपने बाप से चुदवाती है?

फिर मैंने उसे अन्तर्वासना और फ्री सेक्स कहानी साईट पर पर स्टोरी पढ़ने को कहा और कुछ बाप-बेटी पोर्न दिखाई।

तो वो बोली- रुको सोचने दो।

मैंने कहा- ठीक है, तू शाम तक बता.

तब तक मैं छोटा कैमरा ले आया और माँ पापा के कमरे में लगा दिया।

शाम को खाने के बाद माँ पापा सफर की थकन के कारण जल्दी ही सो गए.

और फिर मैं शिखा के पीछे रसोई में चला गया. वहां वो सिंक के पास खड़े होकर बर्तन साफ कर रही थी. उसने टॉप और लैगी पहना था और लैगी पीछे से अंदर तक उसकी गांड में घुस गयी थी जिससे मेरी बहन की गांड उभर के आ रही थी.

यह देखकर मेरा मन उसे चोदने को हुआ और मैंने उसे पीछे से जाकर कस के जकड़ लिया. वो भिंच गयी और कहा- मुझे काम करने दो!

पर मैंने अपना लण्ड उसकी गांड की गहराई तक घुसा दिया और पीछे से ही उसके दूध निचोड़ने लगा और पूछा- तो बहन तूने क्या सोचा है जो तुझे सुबह कहा था?

शिखा ने कहा- भैया आप सही थे, मुझे भी अब पापा का लण्ड चाहिए. उसे मैं चूस कर उसका रस पीना चाहती हूँ जैसे और बाकी लड़कियों को भी उनके पापा का लण्ड मिला है।

मैं समझ गया कि बाक़ी लड़कियां मतलब सुबह जो कहानी और पोर्न दी थी उसकी बात कर रही है।

मैंने कहा- हाँ मेरी छोटी बहन, मैं भाई होने के नाते तेरी सारी इच्छा पूरी करूँगा।

और मैंने उसकी लैगी और पैंटी घुटनों तक सरका दी और पीछे से ही उसकी चूत में लण्ड सेट किया और चुदाई करने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद मैं झड़ने लगा तो शिखा से बताया.

तो वो बोली- नीचे मत गिराना!

और जल्दी से घूम कर नीचे झुक कर मेरी बहन ने लण्ड को मुंह में ले लिया. उसने नाजुक से कोमल होंठों से जैसे ही लण्ड पर सहलाया, मेरी तेज़ी से धार निकल पड़ी और उसने सारा पानी पी गयी।

मैंने शिखा से कहा- अब तू पापा को अपनी मटकती गांड दिखा और थोड़े ढीले ज्यादा गले के टॉप पहन के घूम घर में! पापा भी एक मर्द हैं, देखना उनके मन में भी बेटी के लिए वासना जरूर जागेगी।

कुछ दिन बाद, मैंने कैमरा निकाला. शिखा और मैंने हर रात की फुटेज देखी और जिसमे पापा ने एक बार भी माँ को नहीं चोदा, कई बार पापा ने कोशिश की पर माँ ने हाथ झटक दिया।

शिखा और मैं खुश हुए कि अब पापा को अब उनकी बेटी की चूत मिलेगी। फिर शिखा वहाँ से चली गयी और मैं दिन के समय की भी रिकॉर्ड हुई फुटेज देखने लगा.

तभी मेरी नज़र वीडियो में माँ पर पड़ी जो सिर्फ एक तौलिया लपेटकर बाथरूम से आ रही थी. दोस्तों ऐसा भरा पूरा बदन देखकर मेरा मन हिल गया.

chhoti bahan ko papa se chudawaya

मेरी माँ का फिगर 34 32 34 होगा मुझे पता नहीं, पर उनका रंग गोरा है बिल्कुल मेरी बहन के तरह या ये कहूँ कि मेरी माँ की चूत भी शिखा की तरह ही बिल्कुल गोरी होगी जिसमें चूतड़ों के बीच से गुलाबी रंग निखर रहा होगा।

मेरे मन में माँ के लिए वासना जाग उठी और सोचा घर में ही एक चूत और है और मैं फालतू में ही शिखा के लिए तरसता हूँ। मैं माँ को नँगी देखना चाहता था इसलिए मैंने इस बार बाथरूम में कैमरा लगा दिया।

फिर 2 दिन बाद मैंने कैमरे से फुटेज देखी. पर कैमरे में तो कुछ और ही रिकॉर्ड हुआ था मैंने तुरन्त शिखा को रिकॉर्डिंग दिखायी।

उसमें हम भाई बहन ने देखा कि पापा अपनी बेटी शिखा की उतारी हुई ब्रा और पैंटी को सूंघ रहे हैं और उससे अपना लण्ड रगड़ रहे हैं. फिर उन्होंने उसमें अपना सारा माल निकाल कर वहीं छोड़ दिया।

“अच्छा तो ये मलाई पापा की थी.” शिखा फुसफुसायी।

मैंने पूछा- मतलब?

शिखा- अरे भैया, मतलब मैंने देखा तो था अपनी पैंटी पर ये वीर्य! पर मुझे लगा कि ये आपने किया होगा इसलिए मैंने आपको नहीं बताया। पर भैया पापा का लण्ड देखो न … तुमसे बड़ा है मुझे उसे चूसना है।

मुझे थोड़ी जलन हुई और मैंने कहा दिया- चल जा यहां से अपना काम कर! बड़ी आयी पापा का लण्ड लेनी वाली।

शिखा मुस्कुरायी और चली गयी।

और मैंने जो असली काम के लिए कैमरा लगाया था वो फुटेज देखने लगा।

मैंने देखा माँ नंगी होकर ही नहाती है पर माँ की चूत में थोड़े बाल थे जिसे वो साफ़ कर रही थी. मुझे उन्हें वीडियो में नंगी देखकर बस ऐसा मन किया कि अभी रसोई में जाऊ और उनकी साड़ी उठाकर घोड़ी बनाकर चुदाई कर दूँ.

पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था इसलिए बाथरूम में गया और मैंने उनका वीडियो देखकर उनकी अभी वाली धोने के लिए उतारी पैंटी को सूंघने और चाटने लगा.

मुझे वो खुशबू बहुत मादक लग रही थी और पैंटी से थोड़ा थोड़ा उनकी चूत का पानी का भी स्वाद आ रहा था.

दोस्तो, अगर आपने ऐसा नहीं किया है तो बस एक बार करके देखो.

मैं मुठ मारकर बाथरूम से बाहर आया और दोपहर का खाना खाते हुए माँ के बोबे और गांड ही देख रहा था।

यह बात मैंने शिखा को नहीं बतायी कि माँ को मैं चोदना चाहता हूँ. न जाने वो क्या सोचे।

फिर खाना खाते हुए पापा ने कहा- कल मेरी छट्टी है, चलो घूमने चलते हैं।

पर माँ बोली- नहीं, कल मैं कविता(माँ की सहेली) के साथ बाहर जा रही हूँ, शाम तक ही लौटूंगी।

मुझे मौका अच्छा लगा और मैंने भी कह दिया- कल मेरी भी एक्स्ट्रा क्लास है तो घूमना नहीं हो पायेगा।

तभी शिखा समझ गयी और मेरी तरफ देखकर मुस्कुरायी। शायद शिखा समझ गयी की कल ही उसे पापा का लण्ड मिलेगा

फिर मैंने रात में शिखा को समझा दिया की कल माँ तो रहेगी नहीं, तुझे ब्रा और पैंटी नहीं पहनना है बस ऊपर एक पतली सी समीज पहन ले और नीचे नेट वाली ओढ़नी लपेट ले।

“ठीक है भैया!” शिखा ने शर्माकर कहा।

दूसरे दिन 12 बजे”

पापा हॉल में टीवी के सामने सोफे पर बैठे थे, उनका न्यूज़ देखने का समय यही था.

तभी मैंने शिखा को आवाज़ दी- शिखा, मैं जा रहा हूँ क्लास में! बाय!

और मैं चुपके से हाल वाली खिड़की पर चला गया।

तभी शिखा मुझे बाय बोलने हॉल में आयी और पापा ने उसकी तरफ देखा और देखते ही रह गये.

पापा ने अपनी नज़रें हटाई और टीवी ऑन किया.

पर मैंने टीवी पर बाप बेटी चुदाई हिंदी साउंड पर पोर्न लगा रखी थी जो फुल साउंड पर चलने लगी. उसमें आवाज आ रही थी- पापा मुझे चोदो और जोर जोर से चोदो, फाड़ डालो इस आपकी ही दी हुई अमानत को!

ऐसी आवाज़ पूरे कमरे में गूंजने लगी.

तभी पापा और शिखा दोनों टीवी बन्द करने झपटे. पर शिखा पापा के ऊपर गिर गयी जिससे उसकी ओढ़नी खुल गयी और पंखे की वजह से दूर उड़ गई।

शिखा पापा के ऊपर ऐसे ही नंगी पड़ी रही.

और अब तक पापा का 7 इंच लण्ड भी टनटना चुका था जो पैंट के अंदर से ही शिखा की चूत पर गड़ रहा था और इधर पोर्न टीवी पर आवाज़ के साथ चालू ही थी।

पापा ने शिखा से कहा- उठो।

पर शिखा ने पापा का लण्ड पकड़ते हुए बोला- ये गड़ रहा है।

शिखा के मुलायम हाथ पापा के लण्ड के ऊपर … पापा को एकदम भारी उत्तेजना हुई.

पापा ने उसे उठाया और अपनी पैंट खोल कर कच्छा नीचे करते हुए कहा- तुम्हें बेटी … ये चुभ रहा है. और इसे लण्ड कहते हैं।

शिखा ने आँखें बंद कर ली.

तभी पापा ने शिखा की समीज उतारकर उसे पूरी नंगी कर दिया और उसे हाथ पकड़कर सोफे बैठा दिया.

फिर पापा ने अपनी बेटी से कहा- देखो टीवी पर … जो हो रहा है, इसे सेक्स कहते हैं।

शिखा ने कहा- मुझे सब पता है पापा।

तो पापा खुश हो गए और बोले- चलो तो फिर!

और शिखा की दोनों टांगें उठाकर फैलायी और अपना लण्ड चूत पर सेट किया और शिखा को चोदने लगे।

बड़े लण्ड की वजह से शिखा चिल्ला रही थी. तब भी पापा नहीं रुके और चोदते रहे. फिर थोड़ी देर बाद मेरी रांड बहन उछल उछल कर चुदवाने लगी और कहने लगी- पापा, मुझे आपका लण्ड चूसना है प्लीज।

पापा ने अपना लण्ड बेटी की चूत से निकाला और उसके मुंह में दे दिया।

शिखा बहुत मज़े से चूस रही थी, पूरा लण्ड मुंह में ले रही थी।

कुछ देर बाद पापा बोले- हट, मुझे झड़ना है.

तो मेरी रंडी बहन ने कहा- मुझे पिलाओगे नहीं क्या पापा?

पापा मुस्कुरा दिये और कहा- ठीक है.

और अपनी बेटी शिखा के मुंह में सारा माल दे दिया और शिखा पूरा चाट चाट कर पी गयी

शायद शिखा को मुठ पीने में मज़ा आने लगा है।

तभी उनके बीच दूसरा राउंड शुरू हुआ.

पापा अपनी बेटी शिखा को चोद ही रहे थे कि मैं वहां हाल में चला गया जहां बाप बेटी की चोदन क्रिया चल रही थी।

पापा मुझे देखकर चौंक गये और शिखा को भी अंदाज़ा नहीं था। पापा ने कहा- बेटा, तुम जल्दी आ गये?

यही सही मौका था मैंने पूछ ही लिया- आप अपनी बेटी को चोद रहे हैं? माँ को चोदने को नहीं मिलता क्या?

पापा ने कहा- बेटा, मैं तेरी माँ को बिना कंडोम के चोदना चाहता हूँ पर तेरी माँ कहती है कंडोम लगाओ. इसी अनबन के बीच में तेरी माँ को चोद नहीं पा रहा।

फिर पापा मुझे सॉरी सॉरी कहने लगे।

तभी शिखा आगे आयी और बनकर कहा- भैया अगर आप भी मुझे चोदना चाहते हो तो चोद लो. पर माँ को मत बताना।

फिर क्या था, मैंने पैंट उतारी और अपनी बहन की चुदाई ज़ोर ज़ोर से करने लगा. आखिर इतने देर से देखने के बाद मुझसे रहा नहीं जा रहा था।

मेरे और शिखा के झड़ने के बाद हमने रेस्ट लिया।

पर पापा कहाँ मानने वाले थे, वो शिखा के बदन का हर हिस्सा चूम रहे थे बोबे, चूत, गर्दन गांड कलाई पेट सब कुछ।

फिर मैंने पापा से कहा- हम साथ में चोदें?

शिखा डर गयी- नहीं बाबा!

वो नहीं नहीं करने लगी

पर पापा ने समझाया कि बेटी बस थोड़ा सा दर्द होगा, फिर मज़े ही मज़े।

तो मैं लेट गया. मेरे ऊपर शिखा आ गयी. मैंने उसकी चूत में अपना लण्ड घुसेड़ दिया.

अब बारी पापा की थी, पापा ने तेल डाला पहले बेटी की गांड में … फिर अपने लण्ड में लगाया।

मैंने शिखा के होंठों को अपने मुंह में भर लिया ताकि वो चिल्लाये न!

फिर पापा ने अपनी बेटी की गांड में धीरे धीरे लंड डालना शुरू किया।

शिखा छटपटाने लगी.

पर पापा ने अपना आधा लण्ड अंदर डाल दिया और हम थोड़ी देर रुक गए।

शिखा की आँखों में आँसू थे.

फिर जब हम नॉर्मल हुए तो पापा ने एक झटके और दिया और पूरा लण्ड अंदर कर दिया.

इस बार शिखा चीख पड़ी- मार डाला रे दोनों बाप बेटे ने मिल कर।

फिर कुछ देर बाद मेरी बहन नार्मल हुई और हमने खूब चुदाई की. शिखा बहुत थक गयी और वो कमरे में चली गयी और सो गई।

माँ आयी शाम को 6 बजे।

“शिखा कहाँ है?” माँ ने पूछा।

“उसकी तबीयत खराब है, खाना उसको कमरे में दे दूंगा आज मैं!” पापा ने कहा।

रात को खाना खाने के बाद माँ सोने चली गयी।

मैं और पापा बाहर टहल रहे थे. तभी अचानक पापा बोल पड़े- मैं शिखा के रूम में जा रहा हूँ, तू तेरी माँ पर नज़र रख।

मैं बोला- मैं उन्हीं के साथ सो जाता हूं. अगर माँ उठी तो मैं तुरंत आपको काल कर दूंगा।

पापा बोले- ठीक है. और चले गए.

बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

Beti Ke Sath Samuhik Chudai,बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

मेरा नाम है माहिरा। मैं २५ साल की हूँ। मेरी शादी अभी पिछले साल ही हुई है। मेरी अम्मी आबिदा खातून हैं वह ४५ साल की हैं और बड़ी मस्त जवान हैं। अपनी बॉडी मैन्टन कर रखी है और वह ३०/३२ साल की ही लगतीं हैं। हां मन से वह २० साल से ज्यादा उम्र की नहीं लगती हैं।

बेटी के साथ सामूहिक चुदाई

खूब हंसी मजाक करतीं हैं गन्दी गन्दी बातें करतीं हैं और हमारे साथ बैठ कर पोर्न फिल्म देखतीं हैं। फिल्म देखते हुए भी बोलती रहतीं है इसका लण्ड मोटा है उसका पतला है इसकी चूत टाइट है उसकी ढीली हो चुकी है।

ये बुर चोदी चुदवाकर ही जाएगी वगैरह वगैरह ? हमारे साथ मेरी भाभी भी हैं समीना। उसकी शादी दो साल पहले हुई थी पर मेरा भाई विदेश में काम करता है . भाभी यहाँ हमारे साथ ही रहतीं हैं। मैं भी खूबसूरत हूँ और मेरी भाभी भी। हम दोनों के बूब्स बड़े बड़े हैं। चूतड़ उभरे हुए हैं और जांघें मोटी मोटी हैं। इत्तिफाक से हम तीनो ही लण्ड की जबरदस्त शौक़ीन हैं।

मैं १९ साल की उम्र में ही अम्मी से खुल गयी थी।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

एक दिन मैं अपनी सहेली से फोन पर बात कर रही थी। मैं बोली – हाय बोल साइमा, माँ की चूत, क्या हो रहा है ? ,,,,,,,,,,,, क्या बात करती है तू ,माँ की चूत, ऐसा भी कहीं होता है। उसने तेरी गांड मार दी और तू खड़ी खड़ी देखती रही, माँ की चूत।

मैं होती तो उसकी माँ चोद देती, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,? अरे यार मेरी सुन, उसकी गांड में मैं पेल दूँगी लण्ड, माँ की चूत ? ,,,,,,,,,,मेरी माँ की न पूंछो वो तो, लौड़े से, चुदवाती रहती है।,,,,,,,,,,,,? तेरी भी माँ भी यही करती है बाप रे बाप, माँ की चूत ,,,,,,,,,,,,,,,,? कोई बात नहीं मैं सब ठीक कर दूँगी माँ की चूत। अम्मी ने मुझे सुन लिया उसे पक्का यकीन हो गया की मेरा तकिया कलाम है माँ की चूत।

एक दिन मैं अपने दोस्त को चुपके से घर ले आयी। मैं समझी की अम्मी घर पर नहीं हैं। मैं उसे नंगा करके उसका लण्ड हिलाने लगी। फिर मैं भी नंगी हो गयी। वह मेरी चूँचियाँ और चूत सहलाने लगा। मुझे मस्ती चढ़ गयी तो मैं जबान निकाल कर लण्ड चाटने लगी। इतने में अम्मी आ गयी। उसे देख कर मेरी तो गांड फट गयी। उसका लण्ड सिकुड़ गया।

पर अम्मी मुस्कराते हुए बोली हाय दईया तू इतनी बड़ी हो गयी है भोसड़ी की अभी तक ठीक से लण्ड चाटना भी नहीं जानती ? मैं बताती हूँ, लौड़े से, की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? इतनी बड़ी बड़ी चूँचियाँ और गांड लिए घूम रही है तू, लौड़े से, और इतने दिनों के बाद आज एक लौड़ा तुझे मिला है, लौड़े से ?

अभी तक क्या तू अपनी माँ चुदा रही थी ? मुझे देख मैं लण्ड चाट कर बताती हूँ तुझे की कैसे चाटा जाता है लण्ड ? अम्मी लण्ड चाटने लगीं। फिर अम्मी ने उससे पूंछा बेटा मेरी बिटिया की बुर लेते हो ? वह कुछ बोला नहीं। तब अम्मी ने कहा कोई बात नहीं बेटा, आज पहले मेरी बिटिया की बुर ले लो फिर उसकी माँ का भोसड़ा चोद लेना ?बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

Beti Ke Sath Samuhik Chudai


तेरी बेटी की माँ चोदूँगी सासू जी

तेरी माँ की चूत, बहन का लण्ड

ऐसा बोल कर अम्मी ने लण्ड मेरे मुंह में घुसा दिया। मैं लण्ड चूसने लगी। अम्मी मुझसे इतना ज्यादा खुल जायेगीं यह मुझे नहीं मालूम था। अम्मी ने फिर आहिस्ते से लण्ड मेरी चूत में पेल ही दिया। मैं पहले चिल्लाई तो लेकिन फिर मजे से चुदवाने लगी। थोड़ी देर बाद अम्मी ने भी लण्ड पेल लिया अपनी चूत बोली देख माहिरा ऐसे चुदवाई जाती है बुर ? अब उसे क्या मालूम की मैं कई बार कई लड़कों से चुदवा चुकी हूँ। आज से तू अपनी बुर क्या अपनी माँ का भोसड़ा भी चुदाना सीख ले ? मैंने मन में कहा अब आएगा जवानी का असली मज़ा ?

अम्मी कुछ ज्यादा ही मस्ती में थीं। वह बोली माहिरा तेरी माँ की चूत बहन चोद आ गया न तुझे माँ चुदाना ? मैंने कहा हां आबिदा खातून भोसड़ी की तुझे भी आ गया बिटिया की बुर चुदाना। वह मेरे मुंह से गालियां सुनकर बहुत खुश हुई और मेरे गाल थपथपाकर बोली हां बेटी इसी तरह लिया जाता है चुदाई का पूरा पूरा मज़ा ?

एक दिन मैं जेसिका आंटी के घर चली गयी, माँ की चूत ? मैंने कहा अम्मी अरे वह तो बड़ी मजेदार हैं और बड़ी गहरी मजाक करतीं है, माँ की चूत ? अम्मी ने कहा – तुझे मालूम नहीं है लौड़े से की जेसिका बुर चोदी सेक्स की बहुत बड़ी खिलाड़ी है। उसकी बेटी भी उसका साथ देती है। जेसिका लण्ड अपनी बेटी की चूत में दानादन्न घुसेड़ती है और उसकी बेटी भी अपनी माँ के भोसड़ा में एक के एक बाद ठोंकती जाती है। दोनों खूब खुलकर गली गलौज करती है और खूब एन्जॉय करतीं हैं। मैंने मन में कहा एक मैं ही नहीं हूँ माँ चुदाने वाली बेटी और भी हैं बेटियां हैं जो अपनी माँ चुदवाती हैं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

मेरी समीना भाभी बड़ी मजेदार भी हैं और खूबसूरत भी। एक दिन हम तीनो बैठी हुई बातें कर रहीं थी। मेरे मुंहसे निकला अरे समीना भाभी तुम तो बहुत शर्माती हो ? शरमाओगी तो फिर लण्ड का मज़ा कैसे ले पाओगी ? वह बोली हाय दईया नन्द रानी मैं लण्ड किसी ने नहीं शर्माती।

मैं तो सबके लण्ड से बड़ी मोहब्बत करती हूँ। मैं जब कॉलेज में थी तो खूब लण्ड पकड़ा करती थी। घर में लोगों के लण्ड पकड़ती थी। सबसे पहले मैंने मामू लण्ड पकड़ा फिर उसके दोस्त का लण्ड पकड़ा और एक दिन मैंने खालू का लण्ड पकड़ लिया।

इसी तरह एक दिन जीजू का लण्ड भी मेरे हाथ लग गया। मैं तो दिन रात लण्ड के सपने देखती थी और आज भी देखती हूँ। इसीलिए मुझे ‘लण्ड’ कहने की आदत पड़ गयी। मैंने मजाक में कहा समीना भाभी कभी अपनी माँ के भोसड़ा में लण्ड पेला तुमने ? वह बोली हां बिलकुल पेला।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

भाभी ने बताया की एक दिन की बात है। मैं जब कमरे में घुसी तो देखा की अम्मी पड़ोस के शब्बीर अंकल के पैजामे में हाथ डाल कर उसका लण्ड हिला रहीं हैं।

मैं वहां से घूम कर जाने लगी तो अम्मी ने कहा अरी भोसड़ी की समीना इधर आ तेरी माँ की चूत ? इतना शरमायेगी तो जवानी का मज़ा कैसे ले पायेगी ? इधर आ मरे पास। मैं जब पास में गयी तो अम्मी ने लण्ड बाहर निकाल लिया और मुझे लण्ड दिखाते हुए बोली लो बेटी समीना अंकल का लण्ड चाटो ?

अंकल का लंबा चौड़ा लण्ड देख कर मैं भी ललचा गयी। मेरा हाथ अपने आप बढ़ गया और मैं लण्ड पकड़ कर हिलाने लगी। लण्ड बहन चोद और सख्त हो गया। अम्मी ने पूंछा कैसा लगा लण्ड तुम्हे समीना ? मैंने कहा अम्मी ये तो बिलकुल खालू के लण्ड की तरह है। अम्मी ने कहा हाय दईया तो तू बुर चोदी खालू का लण्ड चूसती है। तेरे खालू का लण्ड खड़ा होने पर थोड़ा टेढ़ा हो जाता है न समीना।

मैंने कहा हां अम्मी तुम ठीक कह रही हो। वह बोली जानती हो समीना तेरा खालू तेरी माँ का भोसड़ा चोदता है। मैंने भी जोश में आकर कह दिया अम्मी मेरा खालू तेरी बिटिया की भी बुर लेता है। अम्मी ने मेरा गाल चूम लिया और बोली कोई बात नहीं बेटी ये चूत बुर चोदी चुदवाने के लिए ही होती है।

एक दिन समीना भाभी जाने किस मूड में थीं।

वह आई और बोली :- माहिरा, तेरी माँ की चूत, तेरी भाभी की बुर ?

मैं भी मूड में आ गयी तो मैने भी जबाब दे दिया।

मैंने कहा :- भाभी, तेरी नन्द की बुर, तेरी सास का भोसड़ा ? तब तक मेरी अम्मी भी आ गयी।

वह बोली :- बहू, तेरी नन्द की माँ का भोसड़ा, तेरी तेरी माँ की बिटिया की बुर ?

फिर हम सब बड़ी जोर से हंसने लगीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

उसी दिन शाम को मेरा ससुर आ गया और भाभी का जीजा भी। मैंने कहा हाय दईया लो दो लण्ड का

इन्तज़ाम हो गया है। आज मैं अपनी भाभी की बुर तो चोद लूंगी और चोद लूंगी उसकी सास का भोसड़ा ? तब तक भाभी बोली नहीं मैं चोदूँगी अपनी सास का भोसड़ा और अपनी नन्द की बुर ?

अम्मी ने कहा हाय दईया तुम सब लोग ऐसा क्यों कह रही हूँ। फिर तो मैं भी चोदूँगी बिटिया की बुर और बहू की चूत ? लेकिन तुम लोग परेशान न हो मैंने फ़ोन कर दिया है और आज ही मेरा देवर दुबई से आ रहा है। वो चोदेगा तुम दोनों की चूत ? तब आएगा चुदाई का घनघोर मज़ा ?

कुछ देर बाद सब लोग इकठ्ठा हो गये। मेरा ससुर तस्कीम आ गया उधर भाभी का जीजू सकीब मियां भी आ गया। मैं दोनों को जानती थी लेकिन लण्ड इनमे से किसी का नहीं जानती थी। मेरी इच्छा बढ़ने लगी की जल्दी से जल्दी इनके लण्ड पकड़ कर देखूं। तभी किसी ने घंटी बजा दी। अम्मी ने दरवाजा खोला और बोली हाय उस्मान आ जा जल्दी से हम लोग तेरा ही इंतज़ार कर रहीं हैं।

अम्मी ने उसे हम सबसे मिलवाया। मैं तो समझती थी की कोई ४५/५० साल का आदमी होगा पर वह तो मस्त जवान लड़का निकला उम्र शायद २५/२६ के लगभग होगी। मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगीं। यही हाल भाभी जान भी था। अम्मी ने फटाफट ड्रिंक्स का इंतज़ाम कर दिया और हम लोग मस्ती से दारू का मज़ा लेने लगे।

चुदाई के खेल के पहले अगर थोड़ा नशा वगैरह कर लिया जाये तो चुदाई एक मज़ा दुगुना हो जाता है।अब जब हमें अय्यासी करनी है तो फिर अच्छी तरह क्यों न की जाए ? दारू चालू हो गयी और नशा भी चढाने लगा। मस्तियाँ भी छाने लगीं और दिमाग में खुराफात भी चलने लगी। मेरी नज़र ससुर के लण्ड पर जैम गयी।

मैं सोंचने लगी की इसका लण्ड कैसा होगा, कितना बड़ा होगा, कितना मोटा होगा, कैसे चोदता होगा। मैंने कभी उसका लण्ड न देखा और मन पकड़ा ? मैंने फिर सोंचा की आज तो मौक़ा है। आज तो मुझे चूकना नहीं चाहिए। बस मैं ससुर के पैजामे का नाड़ा बड़े प्यार से खोलने लगी। उसने कोई ऐतराज़ नहीं किया। किसी ने कुछ कहा नहीं। बस मैंने हाथ अंदर घुसेड़ दिया। तब भाभी ने भी अपने जीजू के पैजामे के अंदर हाथ घुसेड़ दिया।

मैं तो बड़ी बेशर्मी से ससुर का लण्ड अंदर ही अंदर सहलाने लगी। लण्ड बहन चोद खड़ा होने लगा। तब मुझे अहसास हुआ की लण्ड बड़ा जबरदस्त है।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

सबसे पहले मैंने ही ससुर का लण्ड बाहर निकाल लिया, उसका सुपाड़ा चूमा और अम्मी को लण्ड दिखाते हुए बोली लो अम्मी मेरे ससुर का लण्ड पियो। अम्मी ने मुस्कराकर लण्ड मेरे हाथ से ले लिया। तब तक भाभी बोली अरे मेरी बुर चोदी नन्द रानी लो तुम मेरे जीजू का लण्ड पियो ? उधर अम्मी ने बहू को अपने पास इशारे से बुलाया और कहा बहू ले तू पी ले मेरे देवर का लण्ड ? ये भोसड़ा का तेरा ससुर ही है। फिर एक एक करके हम तीनो ने अपने अपने कपड़े खोल डाले और एकदम नंगी हो गयीं तो महफ़िल में आग लग गयी।

उधर मरद भी मादर चोद तीन के तीनो एकदम नंगे हो गए और उनके लण्ड टन टनाने लगे। अम्मी को मेरे ससुर का लण्ड पसंद आ गया। पसंद तो मुझे भी आ गया पर मैं चाहती हूँ की पहले वह मेरी माँ चोद ले फिर मुझे चोदे। मैं तो भाभी के जीजू के लण्ड में खो गयी। सकीब के लण्ड से मुझे भी मोहब्बत होने लगी। मैं जबान निकाल कर लण्ड का टोपा चाटने लगी। भी मस्ती से उस्मान का लौड़ा हिला हिला आकर पहले तो बड़ी देर तक देखतीं रहीं और फिर उसे मुंह में घुसेड़ कर चूसने लगीं।

एक ज़माना था की जब की मरद का लण्ड खड़ा होते ही चूत में घुस जाता था और वह थोड़ी देर तक चोद चाद कर झड़ जाता था। पर अब ज़माना बदल गया है। अब तो लण्ड खड़ा होते ही लड़कियों के मुंह खुल जातें हैं। लण्ड सीधे मुंह में घुस जाता है या यूँ कहें की लड़कियां सबसे पहले लण्ड मुँह में लेतीं हैं फिर कर कहीं। आजकल तो लण्ड चाटने, लण्ड चूसने का और लण्ड पीने का समय है।

झड़ता हुआ लण्ड पीना और मुठ्ठ मार कर लण्ड पीना आजकल का फैसन हैं।

थोड़ी देर में अम्मी ने लण्ड अपने भोसड़ा में घुसा लिया और यह भकाभक चुदवाने लगीं। अम्मी तो वास्तव में चुदवाने में बड़ी बेशर्म है। हम दोनों भी बेशर्म हो गयीं। मैंने भी सकीब का लण्ड घुसेड़ा अपनी चूत में और गचागच चुदवाने लगी। अब तक तो मुझे चुदवाने का अच्छा ख़ासा तज़ुर्बा हो चुका था। मेरी समीना तो ऐसे चुदवाने लगीं जैसे की वह एक मंजी हुई रंडी हों।

अम्मी को मस्ती सूझी तो वह बोली ;- हाय बुर चोदी समीना तू बहन चोद अपनी नन्द की माँ चुदवा रही है।

समीना भाभी बोली :- हां सासू जी मुझे अपनी नन्द की माँ चुदाने में मज़ा आ रहा है पर तू भी तो अपनी बिटिया की भाभी की बुर चुदवा रही है, हरामजादी।

मैंने कहा :- अरे भाभी तेरी सास भोसड़ी की अपनी बिटिया की बुर देखो न कितनी शिद्दत से चुदवा रही है और तेरी नन्द की बुर में लौड़ा घुसेड़ने के लिए कितनी बेताब हो रही है ? इसकी तो बहन की बुर ?

अम्मी ने फिर कहा – बहू, तेरी नन्द की बुर चोदी बुर बहुत टाइट है इसमें कोई मोटा लण्ड पेलना ?

इसी तरह की मस्ती करती हूँ हम तीनो धकापेल ऊपर से नीचे तक आगे से पीछे तक चुदवाने में लगीं थीं। अचानक लण्ड की अदला बदली होने लगी। मेरे ससुर ने अम्मी की बुर से लण्ड निकाल कर भाभी की बूर में घुसा दिया। उस्मान ने भाभी की बुर से लण्ड निकाल कर मेरी चूत में घुसेड़ दिया। सकीब ने अपना लण्ड मेरी चूत से निकाल कर अम्मी के भोसड़ा में ठोंक दिया। लण्ड बदलते ही चुदाई का मज़ा दूना हो गया।

एक दिन मेरी खाला जान आ गयी। उसकी शादी शुदा बेटी भी उसके साथ थी। रात को खूब झमाझम बातें हुईं। मैंने भी खूब खुल कर बातें की और अपनी कहानी सुनाई। अम्मी ने भी कुछ छुपाया नहीं और मेरी भाभी जान भी खुल कर बोलीं।बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया

तभी उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा, यह सब तो मेरे घर मे भी होता है। एक दिन मेरा अब्बू मेरी ससुराल आया और मेरी नन्द की बुर में रात भर लण्ड पेला। सवेरे जब वह जाने लगा तो नन्द बोली अरे अंकल कहाँ जा रहे हो ? आज तो मेरी माँ चोदो। मुझे चोदा है तो मेरी माँ चोद कर जाओ न प्लीज। उधर मेरा ससुर भोसड़ी का बड़ा हरामी है।

एक दिन लण्ड खोल कर मेरे सामने खड़ा हो गया बोला बहू एक बार इसे भी पकड़ कर देख लो न ? अच्छा लगे तो आगे भी पकड़ती रहना ? उसका साला ८” लण्ड देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया। लण्ड का सुपाड़ा साला तोप का गोला लग रहा था। फिर क्या मैंने पकड़ ही लिया। उस दिन मैंने जब उससे चुदवाया तो पता चला की बड़ी लोगों से चुदवाने में कितना मज़ा आता है।

इस तरह एक बार हमने खाला और उसकी बेटी के साथ सामूहिक चोदा चोदी में हिस्सा लिया। खाला भी बहुत बड़ी चुड़क्कड़ औरत हैं।

कहा :- खाला जान तेरी बहन का भोसड़ा ? तू तो बिलकुल हम लोगों जैसी ही है।

वह बोली :- माहिरा, तेरी माँ की बिटिया की बुर ? तेरी खाला की बेटी भी बहन चोद लण्ड की बड़ी शौक़ीन है। जाने कहाँ कहाँ के लण्ड अपनी माँ की चूत में घुसेड़ा करती है ?

तब तक उसकी बेटी बोली :- अरे यार माहिरा तेरी खाला भी भोसड़ी वाली एक से एक बेहतर लण्ड अपनी बेटी की चूत में पेलती है ? बड़ी हरामजादी है तेरी खाला और तेरी खाला का भोसड़ा ?

इस मस्ती का रिजल्ट यह है की पिछले कई सालों से हमारे घर में कोई परेशानी नहीं है। कभी कोई बीमार नहीं हुआ और कभी किसी डॉक्टर की जरुरत नहीं पड़ी।


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